Unique Geography Notes हिंदी में

Unique Geography Notes in Hindi (भूगोल नोट्स) वेबसाइट के माध्यम से दुनिया भर के उन छात्रों और अध्ययन प्रेमियों को काफी मदद मिलेगी, जिन्हें भूगोल के बारे में जानकारी और ज्ञान इकट्ठा करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस वेबसाइट पर नियमित रूप से सभी प्रकार के नोट्स लगातार विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रकाशित करने का काम जारी है।

Environmental Geography (पर्यावरण भूगोल)

3. What do you understand by environment? Discuss its components. (पर्यावरण से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख घटक की विवेचना करें।)

3. What do you understand by environment? Discuss its components.

(पर्यावरण से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख घटक की विवेचना करें।)



भूगोल परिभाषा कोश के अनुसार, “चारों ओर उन बाहरी दशाओं का योग, जिसके अन्दर एक जीव अथवा समुदाय रहता है या कोई वस्तु रहती है।”

ए. जी. टेन्सले के अनुसार, “प्रभावकारी दशाओं का सम्पूर्ण योग, जिसमें जीव रहते हैं, पर्यावरण कहलाता है”

विद्वान रॉस के अनुसार, “पर्यावरण वह बाह्य शक्ति है, जो प्रभावित करती हैं।”

भूगोलवेत्ता डडले स्टाम्प के अनुसार, “पर्यावरण प्रभावों का ऐसा योग है, जो जीव के विकास एवं प्रकृति को परिवर्तित तथा निर्धारित करता है ।”

हर्सकोविट्स के अनुसार, “वातावरण उन सब बाहरी दशाओं और प्रभावों का योग है, जो प्राणी के जीवन और विकास पर प्रभाव डालते हैं।”

        संक्षेप में हम कह सकते हैं कि पर्यावरण में वे सभी प्राकृतिक एवं मानव निर्मित कारक सम्मिलित हैं, जो चारों ओर से घेरे हुए हैं और प्रभावित करते हैं।

      दूसरे शब्दों में, पर्यावरण के अन्तर्गत भौतिक, सांस्कृतिक अथवा जैविक-अजैविक प्रभावशील घटकों को सम्मिलित किया जाता है, जो जीव की दशाओं और कार्यों को प्रभावित करता है। इस प्रकार भौतिक कारक के अलावा सांस्कृतिक कारकों के प्रभावों को भी सम्मिलित किया जाता है। इस प्रकार पर्यावरण को पाँच बिन्दुओं में विश्लेषित किया जा सकता है-

(1) पर्यावरण बाह्य शक्ति है।

(2) ये शक्तियाँ परस्पर संबंधित हैं।

(3) इन शक्तियों का संयुक्त प्रभाव पड़ता है।

(4) ये शक्तियाँ गत्यात्मक (परिवर्तनशील) हैं।

(5) इन शक्तियों का जीव पर प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता है।

      पर्यावरण को दो प्रमुख प्रकारों में बाँटा जा सकता है-

1. भौतिक पर्यावरण (Physical Environment):-           

        भौतिक पर्यावरण प्रकृति का अनुपम उपहार है। इसका कोई विकल्प नहीं है। यह अमूल्य संसाधन सहज सभी को उपलब्ध है। भौतिक पर्यावरण से तात्पर्य उन भौतिक अथवा प्राकृतिक कारकों से है, जिन पर प्रकृति का सीधा नियंत्रण है, जिन्हें भगवान ने बनाया अर्थात् मानव का हस्तक्षेप इसके निर्माण में नहीं है।

        यदि मनुष्य को इस पृथ्वी से हटा लिया जाय, तो जिन क्रियाओं-प्रक्रियाओं और प्रतिक्रियाओं पर कोई अन्तर न आये, उन सब कारकों को भौतिक पर्यावरण के अन्तर्गत रखा जाता है। इसका आशय यह है कि जिसका निर्माण और नियंत्रण मनुष्य से परे है, जो प्रकृति प्रदत्त है, वह सब कुछ भौतिक पर्यावरण के अन्तर्गत आता है, जैसे- सूर्य ताप, ऋतु परिवर्तन स्थिति, भू-वैज्ञानिक संरचना, धरातल, भूकंप, ज्वालामुखी, खनिज, मिट्टियाँ, वनस्पति, जलराशियाँ, जीव-जन्तु ऐसे कारक हैं, जो प्रकृति जन्य हैं। इसलिए उक्त सभी कारकों को प्राकृतिक अथवा भौतिक पर्यावरण के अन्तर्गत रखा जाता है।

2. सांस्कृतिक पर्यावरण (Cultural Environment):-               

        सांस्कृतिक पर्यावरण मानव निर्मित होता है तथा मानव का इस पर पूर्ण नियंत्रण होता है। जैसे- संविधान, धर्म, दर्शन, संस्कृति, प्रतिमान, आदर्श मूल्य, सामाजिक परम्पराएँ, रीति-रिवाज, सामाजिक संबंध। इन अमूर्त तथ्यों के अलावा मूर्त कारक भी सांस्कृतिक पर्यावरण के अन्तर्गत आते हैं, जैसे- सड़कें, पुल, भवन, तालाब, आवास, शहर, सुरक्षा, चिकित्सा, शिक्षा केन्द्र, परिवहन स्थान, मनोरंजन स्थल आदि। मनुष्य पहले इनका निर्माण करता है और फिर इनसे प्रभावित होता है। नगरीय एवं औद्योगिक स्थलों पर सांस्कृतिक पर्यावरण विशेष प्रभावी होता है।

       शिक्षा केन्द्र और सुरक्षा केन्द्रों पर भी सांस्कृतिक कारक अत्यधिक प्रभावी होते हैं जबकि पर्यटन स्थलों पर भौगोलिक और सांस्कृतिक दोनों कारक प्रभावी होते हैं। सांस्कृतिक पर्यावरण वस्तुतः मनुष्य के भौतिक कारकों के प्रति अनुकूलन, समायोजन, संघर्ष आदि की प्रतिक्रिया-अनुक्रिया के परिणामस्वरूप जन्मा है; जो कृषि, उद्योग के साथ-साथ संस्कृति में भी देखा जा सकता है।

पर्यावरण के अवयव (घटक)

(Components of Environment)

      पर्यावरण अनेक अवयवों से मिलकर बना है। स्थूल रूप में अध्यात्म में इसे जड़ और चेतन कहा गया है। जिसे आधुनिक वैज्ञानिक अजैविक एवं जैविक कह कर विभाजित करते हैं। इसे भौतिक एवं अभौतिक अवयवों में विभक्त किया जा सकता है। इन घटनों की सर्वप्रथम वैज्ञानिक विवेचना 1948 में वनस्पतिशास्त्री ओस्टिंग ने की और निम्नलिखित प्रमुख घटकों में विभाजित किया-

1. पदार्थ (मिट्टी+पानी),

2. दशाएँ (ताप+प्रकाश)

3. बल (पवन+गुरुत्व)

4. जीव (जन्तु+वनस्पति)

5. काल (ऋतु+समय)।

      पर्यावरणविद् डौरेनमिर (1954) ने पर्यावरण के कारकों को सात वर्गों में विभाजित किया है-

1. मिट्टी,

2. हवा,

3. पानी,

4. आग,

5. ताप,

6. रोशनी,

7. जीव-जन्तु।

      संक्षेप में, पर्यावरण अध्ययन को सरल करते हुए पर्यावरण घटकों को दो वर्गों में विभक्त किया जा सकता है-

1. भौतिक कारक (Physical Factor)

A. पार्थिक कारक (Terrestrial factors):-

(i) भू रचना- (भूवैज्ञानिक संरचना खनिज, चट्टानें एवं मृदा)।

(ii) धरातल- (उच्चावच पर्वत, पठार, मैदान)।

(iii) स्थिति- (अवस्थिति, ज्यामिति परिस्थिति एवं क्षेत्र के संदर्भ में स्थिति)

2. सांस्कृतिक घटक (Cultural Factor):-

(i) आर्थिक घटक- कृषि, उद्योग, तथा व्यापार।

(ii) सामाजिक घटक-  संस्कृति, दर्शन, व्यवहार और आदर्श।

(iii) धार्मिक घटक- संस्कार तथा परम्पराएँ।

(iv) राजनैतिक घटक- नीतियाँ औ चेतना।


Read More:

Tagged:
I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

error:
Home