NCERT CLASS 10 TOTAL OBJECTIVE GEOGRAPHY SOLUTIONS हिंदी माध्यम

 NCERT CLASS 10 TOTAL OBJECTIVE

GEOGRAPHY SOLUTIONS

 (हिंदी माध्यम)



बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1. लौह अयस्क किस प्रकार का संसाधन है?

(क) नवीकरण योग्य

(ख) प्रवाह

(ग) जैव

(घ) अनवीकरण योग्य

उत्तर – (घ) अनवीकरण योग्य

2. ज्वारीय ऊर्जा निन्मलिखित में से किस प्रकार का संसाधन है?

(क) पुन: पूर्ती योग्य

(ख) अजैव

(ग) मानवकृत

(घ) अचक्रीय

उत्तर – (क) पुन: पूर्ती योग्य

3. पंजाब में भूमि निम्नीकरण का निम्नलिखित में से मुख्य कारण क्या है?

(क) गहन सिंचाई

(ख) अधिक सिंचाई

(ग) वनोंमूलन

(घ) अति पशुचारण

उत्तर – (ख) अधिक सिंचाई

4. निम्नलिखित में से किस प्रान्त में सीढ़ीदार (सोपानी) खेती की जाती है?

(क) पंजाब

(ख) उत्तर प्रदेश के मैदान

(ग) हरियाणा

(घ) उत्तराखंड

उत्तर – (घ) उत्तराखंड

5. इनमें से किस राज्य में काली मृदा पाई जाती है?

(क) जम्मू और कश्मीर

(ख) राजस्थान

(ग) गुजरात

(घ) झारखण्ड

उत्तर – (ग) गुजरात

6. इनमें से कौन-सी टिप्पणी प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात के ह्रास का सही कारण नहीं है?

(क) कृषि प्रसार

(ख) वृहत स्तरीय विकास परियोजनाएँ

(ग) पशुचारण और इंधन लकड़ी एकत्रित करना

(घ) तीव्र औदधोगीकरण और शहरीकरण

उत्तर – (ग) पशुचारण और इंधन लकड़ी एकत्रित करना

7. इनमें से कौन-सा संरक्षण तरीका समुदायों की सीधी भागीदारी नहीं करता?

(क) संयुक्त वन प्रवंधन

(ख) चिपको आन्दोलन

(ग) पूर्वांचल

(घ) वन्य जीव पशुविहार (Santuary) का परिसीमन

उत्तर – (घ) वन्य जीव पशुविहार (Santuary) का परिसीमन

8. निन्मलिखित में से कौन-सा उस प्रणाली को दर्शाता है जिसमें एक ही फसल लम्बे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है?

(क) स्थानांतरी कृषि

(ख) रोपण कृषि

(ग) बागवानी

(घ) गहन कृषि

उत्तर –(ख) रोपण कृषि

9. इनमें से कौन-सी रबी फसल है?

(क) चावल

(ख) मोटे अनाज

(ग) चना

(घ) कपास

उत्तर – (ग) चना

10. इनमें से कौन-सी एक फलीदार फसल है?

(क) दालें

(ख) मोटे अनाज

(ग) ज्वार तिल

(घ) तिल

उत्तर – (क) दालें

11. सरकार निम्नलिखित में से कौन-सी घोषणा फसलों को सहायता देने के लिए करती है?

(क) अधिकतम सहायता मूल्य

(ख) न्यूनतम सहायता मूल्य

(ग) मध्यम सहायता मूल्य

(घ) प्रभावी सहायता मूल्य

उत्तर – (ख) न्यूनतम सहायता मूल्य

NCERT CLASS 10

12. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज अपक्षयित पदार्थ के अपशिष्ट भार को त्यागता हुआ चट्टानों के अपघटन से बनता है?

(क) कोयला

(ख) बॉक्साइट

(ग) सोना

(घ) जस्ता

उत्तर – (ख) बॉक्साइट

13.झारखण्ड के कोडरमा निम्नलिखित से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है?

(क) बॉक्साइट

(ख) अभ्रक

(ग) लौह अयस्क

(घ) ताँबा

उत्तर – (ख) अभ्रक

14. निन्मलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और संचयन होता है?

(क) तलहटी चट्टानें

(ख) कायांतरित चट्टानें

(ग) आग्नेय चट्टानें

(घ) इनमें से कोई नही

उत्तर – (क) तलहटी चट्टानें

15. मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज पाया जाता है?

(क) खनिज तेल

(ख) युरेनियम

(ग) थोरियम

(घ) कोयला

उत्तर – (ग) थोरियम

16. निम्न से कौन-सा उद्योग चुना पत्थर को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करता है?

(क) एल्युमिनियम

(ख) चीनी

(ग) सीमेंट

(घ) पटसन

उत्तर – (ग) सीमेंट

17. निन्म से कौन सी एजेंसी सार्वजानिक क्षेत्र में स्टील को बाजार में उपलब्ध कराती है?

(क) हेल (HAIL)

(ख) सेल (SAIL)

(ग) टाटा स्टील

(घ) एम एन सी सी (MNCC)

उत्तर – (ख) सेल (SAIL)

18. निन्म से कौन-सा उद्योग बॉक्साइट को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करता है?

(क) एल्युमिनियम

(ख) सीमेंट

(ग) पटसन

(घ) स्टील

उत्तर – (क) एल्युमिनियम

19. निन्म से कौन-सा उद्योग दूरभाष, कम्प्यूटर आदि संयंत्र निर्मित करते है?

(क) स्टील

(ख) एल्युमिनियम

(ग) इलेक्ट्रॉनिक

(घ) सूचना प्रौद्योगिकी

उत्तर –(ग) इलेक्ट्रॉनिक

20. निन्म में से कौन-से दो दूरस्थ स्थित स्थान पूर्वी-पश्चिमी गलियारे से जुड़े है?

(क) मुम्बई तथा नागपूर

(ख) मुम्बई और कोलकात्ता

(ग) सिलचर तथा मुम्बई

(घ) नागपूर तथा सिलीगुड़ी

उत्तर – (ग) सिलचर तथा मुम्बई

21.निन्मलिखित में से परिवहन का कौन-सा साधन वहनांरण हानियों तथा देरी को घटाता है?

(क) रेल परिवहन

(ख) पाइपलाइन

(ग) सड़क परिवहन

(घ) जल परिवहन

उत्तर –(ख) पाइपलाइन

22. निम्न में से कौन-सा राज्य हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर पाइप लाइन से नहीं जुड़ा है?

(क) मध्य प्रदेश

(ख) गुजरात

(ग) महाराष्ट्र

(घ) उत्तर प्रदेश

उत्तर – (ग) महाराष्ट्र

23. इनमें से कौन-सा पत्तन पूर्वी तट पर स्थित है जो अंत: स्थलीय तथा अधिकतम गहराई का पत्तन है तथा पूर्ण सुरक्षित है?

(क) चेन्नई

(ख) तूतीकोरिन

(ग) पारादीप

(घ) विशाखापत्तनम

उत्तर – (घ) विशाखापत्तनम

24. निन्म में से कौन-सा परिवहन साधन भारत में प्रमुख साधन है?

(क) पइपलाइन

(ख) सड़क परिवहन

(ग) रेल परिवहन

(घ) वायु परिवन

उत्तर –(ग) रेल परिवहन

25. निम्न में से कौन-सा शब्द दो या अधिक देशों के व्यापार को दर्शाता है-

(क) आन्तरिक व्यापार

(ख) बाहरी व्यापार

(ग) अन्तराष्ट्रीय व्यापार

(घ) स्थानिक व्यापार

उत्तर – (ग) अन्तराष्ट्रीय व्यापा



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अध्याय-2. वन एवं वन्य जीव संसाधन / NCERT CLASS 10 Geography Solutions

 NCERT CLASS -10 Geography Solutions

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अध्याय -2. वन एवं वन्य जीव संसाधन



वन एवं वन्य

1. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1.इनमें से कौन-सी टिप्पणी प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात के ह्रास का सही कारण नहीं है?

(क) कृषि प्रसार

(ख) वृहत स्तरीय विकास परियोजनाएँ

(ग) पशुचारण और इंधन लकड़ी एकत्रित करना    

(घ) तीव्र औदधोगीकरण और शहरीकरण            

 उत्तर- (ग) पशुचारण और इंधन लकड़ी एकत्रित करना

2. इनमें से कौन-सा संरक्षण तरीका समुदायों की सीधी भागीदारी नहीं करता?

(क) संयुक्त वन प्रवंधन   

(ख) चिपको आन्दोलन

(ग) पूर्वांचल                 

(घ) वन्य जीव पशुविहार (Santuaryका परिसीमन 

 उत्तर- वन्य जीव पशुविहार (Santuary) का परिसीमन

2. निम्नलिखित प्राणियों/पौधों का उनके अस्तित्व के  वर्ग से मेल करें।

3. निम्नलिखित का मेल करें।

आरक्षित वन- सरकार, व्यक्तियों के निजी और समुदायों के अधीन अन्य वन और बंजर भूमि।

रक्षित वन- वन और वन्य जीव संसाधन संरक्षण की दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान वन।

अवर्गीकृत वन- वन भूमि जो और अधिक क्षरण से बचाई जाती है।

उत्तर-   अवर्गीकृत वन– सरकार, व्यक्तियों के निजी और समुदायों के अधीन अन्य वन और बंजर भूमि।

आरक्षित वन– वन और वन्य जीव संसाधन संरक्षण की दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान वन।

रक्षित वन- वन भूमि जो और अधिक क्षरण से बचाई जाती है।

4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) जैव विविधता क्या है? यह मानव जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर – जैव विविधता से तात्पर्य, पृथ्वी पर पाये पाई जाने वाली जीवों की विविधता से है। यह शब्द किसी विशेष क्षेत्र में पाये जाने वाले जीवों की विभिन्न रूपों की ओर इंगित करता है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक पृथ्वी पर जीवों की करीब एक करोड़ प्रजातियां पाई जाती हैं।

         ये हमारी धरा पर अमूल्य धरोहर हैं। वन्य जीव सदियों से हमारे सांस्कृतिक एवं आर्थिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इनसे हमें भोजन, वस्त्र के लिए रेशे, खालें, आवास आदि सामग्री एवं अन्य उत्पाद प्राप्त होते हैं। इनकी चहक और महक हमारे जीवन में स्फूर्ति प्रदान करते हैं। पारिस्थितिकी के लिए ये श्रृंगार के समान हैं। भारत में इन्हें सदैव आदरभाव एवं पूज्य समझा गया। मनीषियों के लिए प्रेरणा का स्रोत तो सैलानियों के लिए आकर्षण का विषय रहा है। ये पर्यावरण संतुलन के लिए भी अति आवश्यक हैं तथा हमारी भावी पीढ़ियों के लिए भी ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। 

(ii) विस्तारपूर्वक बताएं कि मानव क्रियाएँ किस प्रकार प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात के ह्रास के कारक है?

उत्तर –मानव के निम्नलिखित क्रियाकलापों वनस्पतियों एवं प्राणीजगत के ह्रास के कारक हैं-

◆आवासीय एवं कृषि योग्य भूमि का विस्तार

◆हानिकारक रसायनों का  प्रयोग

◆आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिये जैव विविधताओं का अति दोहन

◆जनसंख्या में वृद्धि

◆औद्योगिकीकरण एवं शहरीकरण में  वृद्धि

जंगली जीवों का शिकार इत्यादि।   

          मानव जीवमण्डल का सबसे महत्वपूर्ण सदस्य है जो न केवल अन्य जैविक घटकों को ही प्रभावित करता है बल्कि पर्यावरण के अजैविक घटकों में भी अत्यधिक परिवर्तन लाता है। मानव अपनी बुद्धि और विवेक के कारण प्रकृति के दूसरे जीवों और अजैविक घटकों का प्रयोग कर अपने जीवन को सुखमय और आरामदायक बनाता है। किन्तु जब मानव के क्रियाकलाप अनियंत्रित हो जाते हैं तो पर्यावरण के घटकों जैसे-वायु, जल तथा मृदा एवं दूसरे जीवों में अनावश्यक परिवर्तन हो जाता है जिसका वनस्पतियों एवं प्राणियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

       मानव अपने आवास, खेती एवं कारखाने स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों को काटता रहा है । शाकाहारी एवं मांसाहारी जानवरों का अंधाधुंध शिकार कर जीवों में असंतुलन पैदा कर दिया है और बहुत-से जन्तु लुप्त होने के कगार पर हैं। जैसे—सिंह, बाघ, चीता, गैंडा, बारहसिंगा, कस्तुरी मृग आदि     

5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) भारत में विभिन्न समुदायों ने किस प्रकार वनों और वन्य जीव संरक्षण और रक्षण में योगदान किया है?

उत्तर- भारत के कुछ क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर वन्य जीवों के आवास स्थलों के संरक्षण में जुटे हैं क्योंकि यह वन और वनस्पतियों से दीर्घकाल से इनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है। सरिस्का बाघ ब रिजर्व में राजस्थान के गांवों के लोग वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत वहाँ से खनन कार्य बंद करवाने के लिए संघर्षरत हैं। कई क्षेत्रों में तो लोग स्वयं वन्य जीव आवासों की रक्षा कर रहे है।

             आदिवासी लोग अपनी आवश्यकताओं के लिए आस-पास के परिवेश पर निर्भर करते हैं। वह वन्य जीवों का आखेट, मछली पकड़ना, जंगली फल, कन्द का बीज प्राप्त करना एवं सीमित मात्रा में कृषि साधन आदि से ही अपने भोजन की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।

        आदिवासियों का पेड़ पौधों तथा वन्य जीवों से भावनात्मक एवं आत्मीय लगाव होता है। अपने परिवेश में पाए जाने वाले संसाधनों के संरक्षण के प्रति यह अत्यंत सक्रिय तथा सचेत होते हैं। यह जंगली पौधों के बीज आदि के अंकुरण के मौसम में वन क्षेत्रों में नहीं जाते और अपने पालतू पशुओं को भी जंगल में प्रवेश से रोकते हैं। प्रजनन काल में मादा वन पशुओं का शिकार नहीं करते हैं। वन  संसाधनों का उपयोग चक्रीय पद्धति से करते हैं वन के खास क्षेत्रों को सुरक्षित रख उसमें प्रवेश नहीं करते हैं। समय-समय पर आवश्यकतानुसार वृक्षारोपण तथा उनकी रक्षा करते हैं इस प्रकार से जनजातीय क्षेत्रों के वन को स्वभाविक संरक्षण प्राप्त हो जाता है।

        हिमालय में प्रसिद्ध चिपको आंदोलन कई क्षेत्रों में वन कटाई रोकने में ही सफल नहीं रहा बल्कि यह भी दिखाया कि स्थानीय पौधों का प्रयोग करके सामुदायिक वनीकरण अभियान को सफल बनाया जा सकता है । इसी प्रकार टिहरी में किसानों के बीच भूमि बचाओ आंदोलन ने दिखा दिया है कि रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के बिना भी विभिन्न फसल उत्पादन द्वारा आर्थिक रूप से लाभकारी कृषि संभव है। 

(ii) वन और वन्य जीव संरक्षण में सहयोगी रीति-रिवाजों पर एक निबंध लिखिए।

उत्तर- सहयोगी रीति-रिवाजों का वन और वन्य जीवों के संरक्षण में काफी महत्वपूर्ण योगदान है। ग्रामीण लोग कई धार्मिक अनुष्ठानों में 100 से अधिक पादप प्रजातियों का प्रयोग करते हैं और इन पौधों को अपने खेतों में भी उगाते हैं। आदिवासियों को अपने क्षेत्र में पाये जाने वाले पेड़-पौधों तथा वन्य जीवों से भावनात्मक तथा आत्मीय लगाव होता है। वे प्रजनन काल में मादा वन पशुओं का शिकार नहीं करते हैं। वन संसाधनों का उपयोग चक्रीय पद्धति से करते हैं।

     वन के खास क्षेत्रों को सुरक्षित रख उसमें प्रवेश नहीं करते हैं। समय-समय पर आवश्यकतानुसार वृक्षारोपण तथा उनकी रक्षा करते है । इस प्रकार से जनजातीय क्षेत्रों के वन को स्वभाविक संरक्षण प्राप्त हो जाता है।

       भारत में जैन एवं बौद्ध धर्म के अनुयायी अहिंसा प्रेमी होते हैं ये धर्म ‘अहिंसा परमो धर्म’ पर आधारित है, जैन समुदाय के बीच सूक्ष्मजीव की भी हत्या वर्जित है। अतः वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण में इनका काफी योगदान रहता है।

      महात्मा बुद्ध ने 487 ईसा पूर्व में कहा था- “पेड़ एक विशेष असीमित दयालु और उदारपूर्ण जीवधारी है, जो अपने सतत पोषण के लिए कोई मांग नहीं करता और दानशीलतापूर्वक अपने जीवन की क्रियाओं को भेंट करता है । यह सभी की रक्षा करता है और उस समय पर कुल्हाड़ी चलाने वाले प भी छाया प्रदान करता है।”


अध्याय-7. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ / NCERT CLASS 10 Geography Solutions (हिंदी माध्यम)

NCERT CLASS- 10 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम) 

अध्याय- 7. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ



राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था

1. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1. निन्म में से कौन-से दो दूरस्थ स्थित स्थान पूर्वी-पश्चिमी गलियारे से जुड़े है?

(क) मुम्बई तथा नागपूर

(ख) मुम्बई और कोलकात्ता

(ग) सिलचर तथा मुम्बई

(घ) नागपूर तथा सिलीगुड़ी

उत्तर – (ग) सिलचर तथा मुम्बई

2. निन्मलिखित में से परिवहन का कौन-सा साधन वहनांरण हानियों तथा देरी को घटाता है?

(क) रेल परिवहन

(ख) पाइपलाइन

(ग) सड़क परिवहन

(घ) जल परिवहन

उत्तर –(ख) पाइपलाइन

3. निम्न में से कौन-सा राज्य हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर पाइप लाइन से नहीं जुड़ा है?

(क) मध्य प्रदेश

(ख) गुजरात

(ग) महाराष्ट्र

(घ) उत्तर प्रदेश

उत्तर – (ग) महाराष्ट्र

4. इनमें से कौन-सा पत्तन पूर्वी तट पर स्थित है जो अंत: स्थलीय तथा अधिकतम गहराई का पत्तन है तथा पूर्ण सुरक्षित है?

(क) चेन्नई

(ख) तूतीकोरिन

(ग) पारादीप

(घ) विशाखापत्तनम

उत्तर – (घ) विशाखापत्तनम

5. निन्म में से कौन-सा परिवहन साधन भारत में प्रमुख साधन है?

(क) पइपलाइन

(ख) सड़क परिवहन

(ग) रेल परिवहन

(घ) वायु परिवन

उत्तर – (ग) रेल परिवहन

6. निम्न में से कौन-सा शब्द दो या अधिक देशों के व्यापार को दर्शाता है-

(क) आन्तरिक व्यापार

(ख) बाहरी व्यापार

(ग) अन्तराष्ट्रीय व्यापार

(घ) स्थानिक व्यापार

उत्तर – (ग) अन्तराष्ट्रीय व्यापार

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) सड़क परिवहन के तीन गुण बताएँ।

उत्तर-  सड़क परिवहन के तीन गुण निम्नलिखित है-

       ● अपेक्षाकृत कम व्यक्तियों, कम दूरी व कम वस्तुओं के परिवहन में सड़क मितव्ययी है।

       ●  रेलवे लाइन की अपेक्षा सड़कों की निर्माण लागत बहुत कम है।

       ●  सड़क परिवहन परिवहन, अन्य परिवहन साधनों के उपयोग में एक कड़ी के रूप में भी कार्य करता है, जैसे सड़कें, रेलवे स्टेशन, वायु व समुद्री पतनों को जोड़ती है।

(ii) रेल परिवहन कहाँ पर अत्यधिक सुविधाजनक परिवहन साधन है तथा क्यों?

उत्तर-  भारत में रेल परिवहन, वस्तुओं तथा यात्रियों के परिवहन का प्रमुख साधन है। रेल परिवहन अनेक कार्यों में सहायक है जैसे- व्यापार भ्रमण, तीर्थ यात्राएँ व लंबी दूरी तक समान का परिवहन आदी। भारत के उत्तरी मैदानों में रेल परिवहन अत्यधिक सुविधाजनक है क्योंकि उत्तरी मैदान अपनी विस्तृत समतल भूमि, सघन जनसंख्या घनत्व, संपन्न कृषि व प्रचुर संसाधनों के कारण रेल परिवहन के विकास व वृद्धि में सहायक रहा है। कुछ वर्ष पहले भारत के महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र में पश्चिमी तट के साथ कोंकण रेलवे के विकास ने यात्री व वस्तुओं के आवागमन को सुविधाजनक बनाया है।

(iii) सीमांत सड़कों का महत्व बताएँ।

उत्तर – भारत सरकार प्राधिकरण के अधीन सीमा सड़क संगठन है जो देश के सीमांत क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण व उनकी देख-रेख करता है। यह संगठन 1960 में बनाया गया जिसका कार्य उत्तर तथा उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में सामरिक महत्व की सड़कों का विकास करना था। इन सड़कों के विकास से दुर्गम क्षेत्रों में अभिगम्यता बढ़ी है तथा ये इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायक हुई है।

(iv) व्यापार से आप क्या समझते है?  स्थानीय व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर- राज्यों व देशों में व्यक्तियों के बीच वस्तुओं का आदान प्रदान व्यापार कहलाता है। बाजार एक ऐसी जगह है जहाँ इसका विनिमय होता है।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार- दो या अधिक देशों के मध्य होने वाले वस्तुओं के आदान-प्रदान अर्थात व्यापार को ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है। यह समुद्री, हवाई व स्थलीय मार्गो द्वारा हो सकता है।

स्थानीय व्यापार- देश के अंदर दो या अधिक लोगों के मध्य होने वाले वस्तुओं के आदान-प्रदान अर्थात व्यापार को ही स्थानीय व्यापार कहा जाता है। ये शहरों, कस्बों व गाँवों में होता है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) परिवहन तथा संचार के साधन किसी देश की जीवन रेखा तथा अर्थव्यवस्था क्यों कहे जाते हैं?

उत्तर- परिवहन एवं संचार साधन तथा आर्थिक गतिविधियों के विकास के मध्य सकारात्मक संबंध है। परिवहन की महत्ता का वर्णन प्राचीन भारतीय धर्मग्रंथों में भी मिलता है। इनकी महत्ता आज भी विद्यमान है परंतु इसके रूप, गुण एवं गति में अवश्य ही परिवर्तन आया है।

       परिवहन एवं संचार के साधन प्रादेशिक विकास के साथ-साथ आम जनजीवन को भी प्रभावित करते हैं। पंचायत स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक समाज में शांति का माहौल बनाए रखने में पुलिस तथा सैनिकों के आने जाने तथा बातचीत करने के लिए यह साधन जरूरी है। परंतु इनके विकास का स्तर संस्कृति के स्तर से निर्धारित होता है। भारत जैसे विशाल भौगोलिक आकार एवं विविध संस्कृतियों वाले देश में परिवहन एवं संचार के विभिन्न साधन एक-दूसरे को जोड़ने का कार्य करते हैं। यही नहीं, संचार के साधन सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर को ऊँचा उठाने में भी योगदान देते हैं। भारत का पाकिस्तान, नेपाल एवं बांग्लादेश के साथ परिवहन संपर्क दो देशों के बीच की सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का सूचक है।

        परिवहन एवं संचार साधनों के बिना किसी भी प्रकार की आर्थिक क्रिया लगभग असंभव है। ये  साधन हमारे जैविक पक्ष को भी प्रभावित करते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारा जीवन इन्हीं साधनों पर आश्रित होता है। जीवन जीने के लिए अनाज एवं शाक-सब्जी तथा फलों की आपूर्ति में इन्हीं साधनों का सहारा लेना पड़ता है। अतः इस प्रकार कहा जा सकता है कि परिवहन तथा संचार के साधन किसी देश की जीवन रेखा तथा अर्थव्यवस्था कहे जाते हैं।

(ii) पिछले 15 वर्षों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रवृत्ति पर एक लेख लिखें।

उत्तर- सभी देश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर है क्योंकि संसाधनों की उपलब्धता क्षेत्रीय है अर्थात इनका वितरण असमान है आयात तथा निर्यात व्यापार के घटक है। आयात व निर्यात का अंतर ही देश के व्यापार संतुलन को निर्धारित करता है। अगर निर्यात मूल्य आयात  मूल्य से अधिक हो तो उसे अनुकूल व्यापार संतुलन कहते हैं। ठीक इसके विपरीत निर्यात की अपेक्षा अधिक आयात असंतुलित व्यापार कहलाता है।

         भारत से निर्यात की जानेे वाली वस्तुओं मेंं इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न और आभूषण, रसायन एवं संबंधित उत्पाद, वस्त्र, कृषि एवं संबद्ध उत्पाद, अयस्क एवं खनिज तथा अन्य सामान शामिल है। जबकि आयात की जाने वाली वस्तुओं में पेट्रोलियम एवं संबंधित उत्पाद, मशीनरी इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोना और चांदी, उर्वरक, रसायन, अलौह धातुएँ एवं अन्य सामान शामिल है।

        अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पिछले 15 वर्षों में भारी बदलाव आया है। वस्तुओं के आदान-प्रदान की अपेक्षा सूचनाओं, ज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ा है। भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सॉफ्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभरा है तथा सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से अत्यधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है।

प्रश्न पहेली

1. उत्तरी-दक्षिणी गलियारे(Corridor) का उत्तरी छोर।

उत्तर – श्रीनगर

2. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 का नाम।

उत्तर – शेरशाह सूरी मार्ग

3.दक्षिण रेलवे खंड का मुख्यालय।

उत्तर – सिकंदराबाद

4. 1.676 मीटर चौड़ाई वाले रेलमार्ग का नाम।

उत्तर – बड़ी लाइन

5. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-7 का दक्षिणतम किनारा।

उत्तर – कन्याकुमारी

6. एक नदीय पत्तन।

उत्तर – कोलकाता

7. उत्तरी भारत का व्यस्ततम रेलवे जंक्शन।

उत्तर- मुगलसराय जंक्शन वर्तमान नाम पंडित दी दयाल उपाध्याय जंक्शन



अध्याय-6. विनिर्माण उद्योग / NCERT CLASS 10 Geography Solutions

NCERT CLASS -10 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम)

अध्याय-6. विनिर्माण उद्योग



 
विनिर्माण उद्योग

 1. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1. निम्न से कौन-सा उद्योग चुना पत्थर को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करता है?

(क) एल्युमिनियम

(ख) चीनी

(ग) सीमेंट

(घ) पटसन

उत्तर – (ग) सीमेंट

2. निन्म से कौन सी एजेंसी सार्वजानिक क्षेत्र में स्टील को बाजार में उपलब्ध कराती है?

(क) हेल (HAIL)

(ख) सेल (SAIL)

(ग) टाटा स्टील

(घ) एम एन सी सी (MNCC)

उत्तर – (ख) सेल (SAIL)

3. निन्म से कौन-सा उद्योग बॉक्साइट को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करता है?

(क) एल्युमिनियम

(ख) सीमेंट

(ग) पटसन

(घ) स्टील

उत्तर – (क) एल्युमिनियम

4. निन्म से कौन-सा उद्योग दूरभाष, कम्प्यूटर आदि संयंत्र निर्मित करते है?

(क) स्टील

(ख) एल्युमिनियम

(ग) इलेक्ट्रॉनिक

(घ) सूचना प्रौद्योगिकी

उत्तर –(ग) इलेक्ट्रॉनिक

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) विनिर्माण क्या है?

उत्तर-  कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहा जाता है।

जैसे- कागज लकड़ी से, चीनी गन्ने से, लोहा-इस्पात लौह अयस्क से तथा एलमुनियम बॉक्साइट से निर्मित होता है।

(ii) उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारक बताएँ।

उत्तर- उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारक निम्नलिखित है-

● कच्चे माल की उपलब्धता।

● शक्ति के साधन व जल की उपलब्धता।

● अनुकूल जलवायु।

(iii) औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन मानवीय कारक बताएँ।

उत्तर- औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन मानवीय कारक निम्नलिखित है-

● श्रमिक, पूंजी तथा बाजार की उपलब्धता।

● परिवहन की सुविधा।

● बैंकिंग सुविधा तथा सरकारी नीतियाँ

(iv) आधारभूत उद्योग क्या है ? उदाहरण देकर बताएँ।

उत्तर – लौह और इस्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है; क्योंकि अन्य सभी भारी, हल्के और मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर करते हैं। इसे अन्य उद्योगों का जनक भी कहा जाता है। विविध प्रकार के इंजीनियरिंग सामान निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफोन, वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न प्रकार के उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण के लिए इस्पात की आवश्यकता होती है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) समन्वित इस्पात उद्योग मिनी इस्पात उद्योगों से कैसे भिन्न है? इस उद्योग की क्या समस्याएँ हैं? किन सुधारों के अंतर्गत इसकी उत्पादन बढ़ी है?

उत्तर-

मिनी इस्पात उद्योग- मिनी इस्पात उद्योग छोटे संयंत्र है जिनमें विद्युत भट्टी, रद्दी इस्पात व स्पंज आयरन का प्रयोग होता है। इनमें री-रोलर्स होते हैं जिनमें इस्पात सिल्लियों का इस्तेमाल किया जाता है। यह हल्के स्टील या निर्धारित अनुपात के मृदु व मिश्रित इस्पात का उत्पादन करते हैं।

समन्वित इस्पात उद्योग- समन्वित इस्पात संयंत्र एक बड़ा संयंत्र होता है। जिसमें कच्चे माल को एक स्थान पर एकत्रित करने से लेकर इस्पात बनाने उसे ढालने और उसे आकार देने तक की की प्रत्येक क्रिया की जाती है।

समस्याएँ- इस उद्योगों की भारत में निम्नलिखित समस्याएँ हैं-

(क) उच्च लागत तथा कोकिंग कोयले की सीमित उपलब्धता

(ख) कम श्रमिक उत्पादकता

(ग) ऊर्जा की अनियमित पूर्ति

(घ) अविकसित अवसंरचना इत्यादि।

सुधार- निजी क्षेत्र में उद्यमियों के प्रयत्न से तथा उदारीकरण व प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ने इस उद्योग को प्रोत्साहन दिया है। इस्पात उद्योग को अधिक स्पर्धावान बनाने के लिए अनुसंधान और विकास के संसाधनों को नियत करने की आवश्यकता है।

(ii) उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते है?

उत्तर- यद्यपि उद्योगों की भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है, तथापि इनके द्वारा बढ़ते भूमि, वायु, जल तथा पर्यावरण प्रदूषण को भी नकारा नहीं जा सकता। उद्योग मुख्यतः चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी है- (क) वायु (ख) जल (ग) भूमि तथा (घ) ध्वनि। प्रदूषण करने वाले उद्योगों में ताप विद्युतगृह भी सम्मिलित है।

(क) वायु प्रदूषण- अधिक अनुपात में अनचाहे गैसों की उपस्थिति जैसे सल्फर डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड वायु प्रदूषण का कारण है।

(ख) जल प्रदूषण- उद्योगों द्वारा कार्बनिक तथा अकार्बनिक अवशिष्ट पदार्थों के नदी में छोड़ने से जल प्रदूषण फैलता है। जल प्रदूषण के प्रमुख कारक – कागज, लुग्दी, रसायन, वस्त्र तथा रंगाई उद्योग, तेल शोधनशालाएँ, चमड़ा उद्योग तथा इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग है।

(ग) भूमि प्रदूषण- मृदा व जल प्रदूषण आपस में संबंधित है। मलबे का ढेर विशेषकर कांच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक बहाव, पैकिंग, लवण तथा कूड़ा-करकट मृदा को अनुपजाऊ बनाता है। वर्षा के जल के साथ ये प्रदूषक जमीन से रिसते हुए  भूमिगत जल तक पहुंचकर उसे भी प्रदूषित कर देते हैं।

(घ) ध्वनि प्रदूषण- औद्योगिक तथा निर्माण कार्य, कारखानों के उपकरण, जेनरेटर, लकड़ी चीरने के कारखाने, गैस यांत्रिकी तथा विद्युत ड्रिल भी अधिक ध्वनि उत्पन्न करते हैं। ध्वनि प्रदूषण से खिन्नता तथा उत्तेजना ही नहीं वरन श्रवण असक्षमता,  हृदय गति, रक्तचाप तथा अन्य कायिक व्यथाएँ भी बढ़ती है । अनचाही ध्वनि, उत्तेजना व मानसिक चिंता का स्रोत है।

(iii) उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के लिए उठाए गए विभिन्न उपायों की चर्चा करें?

उत्तर- उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के लिए उठाए गए विभिन्न उपाय निम्नलिखित है-

● जहां भूमिगत जल का स्तर कम है वहां उद्योगों द्वारा इसके अधिक निष्कासन पर कानूनी प्रतिबंध होना चाहिए।

● वायु में निलंबित प्रदूषण को कम करने के लिए कारखानों में ऊँची चिमनियाँ, चिमनियों में इलेक्ट्रोस्टेटिक अवक्षेपण, स्क्रबर उपकरण तथा गैसीय प्रदूषक पदार्थों को जड़त्वीय रूप से पृथक करने के लिए उपकरण होना चाहिए।

● कारखानों में कोयले की अपेक्षा तेल व गैस के प्रयोग से धुएँ के निष्कासन में कमी लाई जा सकती है।

●  जेनरेटर में साइलेंसर लगाया जा सकता है।

● ऐसी मशीनरी का उपयोग किया जाए जो ऊर्जा सक्षम हो तथा कम ध्वनि प्रदूषण करे।

● नदियों व तालाबों में गर्म जल तथा अवशिष्ट पदार्थों को प्रवाहित करने से पहले उनका शोधन करना चाहिए।

●  जल की आवश्यकता पूर्ति हेतु वर्षा जल संग्रहण करना चाहिए।

● ध्वनि अवशोषित करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल के साथ कानों पर शोर नियंत्रण उपकण भी पहनने चाहिए  इत्यादि।


अध्याय-5. खनिज तथा ऊर्जा संसाधन / NCERT CLASS 10 Geography Solutions

 
NCERT CLASS -10 Geography Solutions
(हिंदी माध्यम)

अध्याय -5. खनिज तथा ऊर्जा संसाधन



 
खनिज तथा ऊर्जा

1. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज अपक्षयित पदार्थ के अपशिष्ट भार को त्यागता हुआ चट्टानों के अपघटन से बनता है?

(क) कोयला

(ख) बॉक्साइट

(ग) सोना

(घ) जस्ता

उत्तर – (ख) बॉक्साइट

2. झारखण्ड के कोडरमा निम्नलिखित से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है?

(क) बॉक्साइट

(ख) अभ्रक

(ग) लौह अयस्क

(घ) ताँबा

उत्तर – (ख) अभ्रक

3. निन्मलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और संचयन होता है?

(क) तलहटी चट्टानें

(ख) कायांतरित चट्टानें

(ग) आग्नेय चट्टानें

(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर – (क) तलहटी चट्टानें

4. मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज पाया जाता है?

(क) खनिज तेल

(ख) युरेनियम

(ग) थोरियम

(घ) कोयला

उत्तर – (ग) थोरियम

2.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) निम्नलिखित में अंतर 30 शब्दों से अधिक न दें।

(क) लौह एवं अलौह खनिज

उत्तर-

लौह खनिज- वैसे खनिज जिसमें लोहे का अंश अधिक पाया जाता है वे लौह युक्त खनिज कहलाते हैं। जैसे – लौह अयस्क, मैंगनीज, निकिल, टंगस्तान इत्यादि।

अलौह खनिज- वैसे  खनिज जिसमें लोहे का अंश न्यूनतम या नहीं के बराबर होता है वे अलौह युक्त खनिज कहलाते हैं। जैसे – सोना, चांदी, शीशा, बॉक्साइट , टीन इत्यादि।

(ख) परम्परागत तथा गैर परम्परागत ऊर्जा साधन

उत्तर-

परम्परागत ऊर्जा साधन- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस जैसे खनिज ईंधन जो जीवाश्म ईंधन के नाम से भी जाने जाते हैं ये पारंपरिक ऊर्जा संसाधन है तथा ये समाप्य संसाधन है।

गैर परम्परागत ऊर्जा साधन- बायोगैस, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय एवं तरंग ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा एवं जैव ऊर्जा जो नवीकरणीय ऊर्जा के नाम से भी जाने जाते हैं ये गैर पारंपरिक ऊर्जा संसाधन है तथा ये समाप्य संसाधन नहीं है।

(ii) खनिज क्या है?

उत्तर – खनिज निश्चित अनुपात रासायनिक एवं भौतिक विशिष्टताओं  के साथ निर्मित एक प्राकृतिक पदार्थ है। दूसरे शब्दों में, खनिज निश्चित रासायनिक संयोजन एवं विशिष्ट आंतरिक परमाणविक रचना वाले ठोस प्राकृतिक पदार्थ को कहा जाता है।  संक्षेप में खान से निकाले गए पदार्थ को खनिज कहते है । जैसे – कोयला, पेट्रोलियम, सोना, लौह अयस्क इत्यादि।

(iii) आग्नेय तथा कायान्तरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर – आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में मिलते हैं । छोटे जमाव शिराओं के रूप में और वृहद जमाव परत के रूप में पाए जाते हैं इनका निर्माण भी अधिकतर उस समय होता है जब ये तरल अथवा किसी गैसीय अवस्था में दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर धकेल जाते हैं । ऊपर आते हुए ये ठंडे होकर जम जाते हैं मुख्य धात्विक खनिज जैसे – जस्ता, तांबा, जिंक और शीशा आदी इसी तरह शिराओं व जमाव के रूप में प्राप्त होते हैं।

         अनेक खनिज अवसादी चट्टानों के अनेक अनेक संस्तरों या परतों में पाए जाते हैं । इनका निर्माण क्षैतिज परतों में निक्षेपण, संचयन व जमाव का परिणाम है । कोयला तथा कुछ अन्य प्रकार के लौह अयस्कों का निर्माण लंबी अवधि तक अत्यधिक ऊष्मा व दबाव का परिणाम है । अवसादी चट्टानों में दूसरी श्रेणी के खनिजों में जिप्सम, पोटाश, नमक और सोडियम सम्मिलित है । इनका निर्माण विशेषकर शुष्क प्रदेशों में वाष्पीकरण के फलस्वरुप होता है।

(iv) हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता हैं?

उत्तर – खनिज क्षयशील एवं अनवीकरणीय संसाधन है। इनकी मात्रा सीमित है। इनका पुनर्निर्माण असंभव है। खनिज उद्योगों का आधार है किन्तु औद्योगिक विकास के लिए खनिजों का अतिशय दोहन एवं उपयोग उनके अस्तित्व के लिए संकट है। अतः खनिजों का संरक्षण एवं प्रबंधन आवश्यक है। खनिज संसाधन के विवेकपूर्ण उपयोग तीन बातों पर निर्भर है –

★ खनिजों के निरंतर दोहन पर नियंत्रण,

★उनका बचतपूर्वक उपयोग तथा

★कच्चे माल के रूप में सस्ते विकल्पों की खोज।

          खनिजों पर नियंत्रण के अलावे उनके विकल्पों को खोजना, खनिजों के अपशिष्ट पदार्थों को बुद्धिमतापूर्वक उपयोग, पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले कुप्रभाव पर नियंत्रण, खनिज निर्माण के लिए चक्रीय पद्धति को अपनाना प्रबंधन कहलाता है। यदि खनिजों के संरक्षण के साथ-साथ प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए तो खनिज संकट से निबटा जा सकता है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) भारत में कोयले का वितरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर- भूगर्भिक दृष्टि से भारत के समस्त कोयला भंडार को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है।

(क) गोंडवाना समूह- गोंडवाना समूह में भारत के 96 प्रतिशत कोयले का भण्डार है इससे कुल उत्पादन का 99 प्रतिशत भाग प्राप्त होता है। यहाँ के कोयले का निर्माण 20 करोड़ वर्ष पूर्व में हुआ था। गंडवाना कोयला क्षेत्र मुख्यतः चार नदी घाटियों में पाये जाते हैं-

(क) दामोदर घाटी क्षेत्र

(ख) सोन नदी घाटी क्षेत्र

(ग) महानदी घाटी क्षेत्र तथा

(घ) वार्धा-गोदावरी घाटी क्षेत्र।

          गोंडवाना समूह का कोयला क्षेत्र भारत के निम्नलिखित राज्यों में पाया जाता है:-

झारखण्ड – कोयले के भण्डार एवं उत्पादन की दृष्टि से इसका स्थान  देश में प्रथम है। यहाँ के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र- झरिया, बोकारो, गिरिडीह, कर्णपुरा, रामगढ़ इत्यादि हैं।

छत्तीसगढ़- सुरक्षित भण्डार की दृष्टि से इस राज्य का स्थान तीसरा किंतु उत्पादन में यह भारत का दूसरा बड़ा राज्य है। यहाँ देश का 15 प्रतिशत सुरक्षित भण्डार है लेकिन उत्पादन 16 प्रतिशत होता है। यहाँ का उत्पादक क्षेत्र है चिरिमिरी, कुरसिया, विश्रामपुर, झिलमिली, सोनहाट, लखनपुर, हासदो-अरंड, कोरबा एवं मांड-रायगढ़ इत्यादि।

उड़ीसा- यहाँ देश का एक चौथाई कोयले का भण्डार है। यहाँ का मुख्य उत्पादक क्षेत्र है तालचर।

महाराष्ट्र- यहाँ भारत का मात्र 3 प्रतिशत कोयला सुरक्षित है। यहाँ के मुख्य उत्पादक क्षेत्र-चाँदा-वर्धा, कांपटी तथा बंदेर हैं।

मध्यप्रदेश- यहाँ देश का मात्र 7 प्रतिशत कोयला का भण्डार है। सिंगरौली, सोहागपुर, जोहिल्ला, उमरिया, सतपुड़ा क्षेत्र इत्यादि मुख्य उत्पादक क्षेत्र हैं।

पश्चिम बंगाल- यह राज्य देश के सुरक्षित भण्डार की दृष्टि से चौथा एवं उत्पादन में 7वां है। रानीगंज यहाँ का मुख्य उत्पादक क्षेत्र है।

(ख) टर्शियरी समूह- गोंडवाना समूह के बाद टर्शियरी समूह के कोयले का निर्माण हुआ। यह 5.5 करोड़ वर्ष पुराना है। टर्शियरी कोयला मुखयतः असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नगालैंड में पाया जाता  है।

(ii) भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल है। क्यों?

उत्तर- भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है क्योंकि भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है। यहाँ सौर ऊर्जा के दोहन की असीम संभावनाएँ हैं। फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जाता है। भारत के ग्रामीण तथा सुदूर क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

       भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र भुज के निकट माधोपुर में स्थित है, जहाँ सौर ऊर्जा से दूध के बड़े बर्तनों को कीटाणु मुक्त किया जाता है। ऐसी अपेक्षा है कि सौर ऊर्जा के प्रयोग से ग्रामीण घरों में उपलों तथा लकड़ी पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सकेगा। फलस्वरुप यह कम लागत वाला पर्यावरण के अनुकूल तथा निर्माण में आसान होने के कारण ऊर्जा के स्रोतों की अपेक्षा ज्यादा लाभदायक है और  इससे कृषि में भी खाद्य की पर्याप्त आपूर्ति होगी । इस प्रका कहा जा सकता है कि भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य काफी उज्जवल है।



अध्याय-4 कृषि / NCERT CLASS 10 Geography Solutions

NCERT CLASS -10 Geography Solutions
(हिंदी माध्यम)

अध्याय-4 कृषि



कृषि

1. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1. निन्मलिखित में से कौन-सा उस प्रणाली को दर्शाता है जिसमें एक ही फसल लम्बे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है?

(क) स्थानांतरी कृषि

(ख) रोपण कृषि

(ग) बागवानी

(घ) गहन कृषि

उत्तर –(ख) रोपण कृषि

2. इनमें से कौन-सी रबी फसल है?

(क) चावल

(ख) मोटे अनाज

(ग) चना

(घ) कपास

उत्तर – (ग) चना

3. इनमें से कौन-सी एक फलीदार फसल है?

(क) दालें

(ख) मोटे अनाज

(ग) ज्वार तिल

(घ) तिल

उत्तर – (क) दालें

4. सरकार निम्नलिखित में से कौन-सी घोषणा फसलों को सहायता देने के लिए करती है?

(क) अधिकतम सहायता मूल्य

(ख) न्यूनतम सहायता मूल्य

(ग) मध्यम सहायता मूल्य

(घ) प्रभावी सहायता मूल्य

उत्तर – (ख) न्यूनतम सहायता मूल्य

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें।

उत्तर- चाय एक महत्वपूर्ण पेय पदार्थ की फसल है।

     इसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों निम्नलिखित है-

● उष्ण तथा उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु।

● ह्यूमस और जीवाश्म युक्त गहरी मिट्टी।

● सुगम जल निकास वाले ढलवाँ भूमि।

● वर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहित जलवायु।

● वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें इसकी कोमल पतियों के विकास में सहायक होती है।

● पर्याप्त सस्ते और कुशल श्रमिकों की उपलब्धता इत्यादि।

चाय की खेती

(ii) भारत की एक खाद्य फसल का नाम बताएँ और जहाँ यह पैदा की जाती है उन क्षेत्रों का विवरण दें।

उत्तर – भारत मैं अधिकांश लोगों का खाद्यान चावल है । हमारा देश चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है । यह खरीफ की फसल है जिसे उगाने के लिए उच्च तापमान (25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर) और अधिक आर्द्रता (100 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा) की आवश्यकता होती है।

      चावल उत्तर और उत्तरी पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टाई प्रदेशों में उगाया जाता है । नहरों के जाल और  नलकूपों की सघनता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल की फसल उगाना संभव हो पाया है।

(iii) सरकार द्वारा किसानों के हित में किये गए संस्थात सुधार कार्यक्रमों की सूची बताएँ।

उत्तर – सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रमों की सूची निम्नलिखित है-

● जोतों की चकबंदी।

● सहकारिता एवं जमींनदारी इत्यादि की समाप्ति  करने को प्राथमिकता।

● भूमि विकास कार्यक्रम की शुरुआत किया गया।

● बाढ़, सुखाड़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए फसल बीमा का प्रावधान किया गया।

● किसानों को कम दर पर ऋण उपलब्ध कराने हेतु ग्रामीण बैंक, सहकारी समितियाँ और बैंकों की स्थापना किया गया।

● किसान क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना  भी शुरू की गई।

● आकाशवाणी और दूरदर्शन पर किसानों के लिए मौसम की जानकारी के बुलेटिन और कृषि कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है।

● किसानों को बिचौलियों और दलालों के शोषण से बचाने के लिए न्यूनतम सहायता मूल्य और कुछ महत्वपूर्ण फसलों के लाभदायक खरीद मूल्यों की सरकार घोषणा करती है।

(iv) दिन-प्रतिदिन कृषि के अंतर्गत भूमि कम हो रही है। क्या आप इसके  परिणामों की कल्पना कर सकते है?

उत्तर – तीन प्रतिदिन कृषि के अंतर्गत भूमि कम हो रही है क्योंकि भारत की बढ़ती जनसंख्या के साथ घटता खाद्य उत्पादन देश की भविष्य खाद्य सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। भूमि के आवासन इत्यादि जैसे गैर-कृषि भूमि उपयोग और कृषि के बीच बढ़ती भूमि की प्रतिस्पर्धा के कारण बोए गए निवल क्षेत्र में कमी आई है।

        भूमि की उत्पादकता ने घटती प्रवृत्ति दर्शानी प्रारंभ कर दी है। उर्वरक, पीड़कनाशी और कीटनाशी, जिन्होंने कभी नाटकीय परिणाम प्रस्तुत किए थे, को अब मिट्टी के निम्नीकरण का दोषी माना जा रहा है।  जल की कालिक कमी के कारण सिंचित क्षेत्र में कमी आई है। असक्षम जल प्रबंधन से जलाक्रांतता और लवणता की समस्याएं खड़ी हो गई है।

3.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किये गए उपाय सुझाइए।

उत्तर – भारत एक कृषि प्रधान देश होने के कारण भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में नींव के पत्थर की भाँति महत्त्व रखती है। 2001 में देश की लगभग 63% जनसंख्या कृषि से रोजगार प्राप्त की। किंतु स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से आज तक सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान लगातार घट रहा है जो एक चिंता का विषय है। कृषि में गिरावट समाज के अन्य क्षेत्रों में गिरावट लाएगा तथा यह क्षेत्रीय विषमता को बढ़ावा देगा। यह सर्वथा कृषि पर आश्रित लोगों के हित में नहीं है।

        इसीलिए कृषि के महत्व को समझते हुए भारत सरकार ने इसके विकास एवं वृद्धि के लिए इसके आधुनिकीकरण कर प्रयास किया है। इसके अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना, पशु चिकित्सा सेवाएँ तथा पशु प्रजनन केंद्र की स्थापना, बागवानी-विकास, मौसम विज्ञान और मौसम के पूर्वानुमान के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास आदि को प्राथमिकता दी गई है।

(ii) भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर – वैश्वीकरण का भारतीय कृषि पर बहुत प्रभाव पड़ रहा है। वैश्वीकरण का अर्थ है देश की की अर्थव्यवस्था का विश्व की अर्थव्यवस्था के  साथ जोड़ना। इसने भारतीय बाजार को विश्व के बाजार के लिए खोल दिया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सरकारी तंत्र की पकड़ ढीली हो गई है। अब विदेशी उत्पाद जिसमें कृषिजन्य उत्पाद भी शामिल है, आसानी से भारत में बेचे जा सकते हैं। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से भारतीय किसान को एक बहुत बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय कृषि कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रही है। इसकी सबसे बड़ी समस्या फसलों का प्रति एकड़ कम उत्पादन है।

         भारत में भूमि की प्रति इकाई में फसलों का उत्पादन जापान की 1/3 और संयुक्त राज्य अमेरिका का 1/4 है । वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए भारत को अपनी कृषि संबंधित क्षमताओं को सुनियोजित ढंग से उपयोग करना होगा। जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग के अलावा राष्ट्रीय बाजार का एकीकरण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इसके लिए सड़क, बिजली, सिंचाई, ऋण की सुविधा आदि उपलब्ध करना परम आवश्यक है।  इसके बिना कृषि को वैश्वीकरण के अनुचित प्रभाव से बचा पाना संभव नहीं है।

(iii) चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।

उत्तर – चावल एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है जिस पर अधिकांश जनसंख्या निर्भर करती है। विश्व का 22% चावल क्षेत्र भारत में है तथा यह कुल कृषि का 23% है। चावल की कृषि के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाएं निम्नलिखित है-

(क) तापमान- यह उष्णकटिबंधीय फसल है। अतः इसकी उपज के लिए अधिक तापमान की आवश्यकता है। इसके लिए कम से कम 24 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की आवश्यकता है। बोते समय इसे 21 डिग्री सेल्सियस, बढ़ते समय 24 डिग्री सेल्सियस तथा पकते समय 27 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।

(ख) वर्षा- इसकी फसल के लिए 125 सेंटीमीटर से 200 सेंटीमीटर वर्षा की आवश्यकता होती है । इससे कम वर्षा वाले क्षेत्र में सिंचाई की सहायता से फसल उगाई जाती है।

(ग) मिट्टी- इसके लिए अत्यंत उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसकी मिट्टी चिकायुक्त दोमट होनी चाहिए ताकि पौधों की जड़ें अच्छी तरह विकसित हो सके।

(घ) सस्ते कुशल श्रमिक- इसकी कृषि में मानव श्रम की अधिक आवश्यकता होती है। खेती की तैयारी से लेकर रोपनी-कटनी तक का कार्य मानव श्रम द्वारा ही संपादित होता है। भारत के सस्ते श्रमिक इसकी कृषि के लिए उपयुक्त मानवीय वातावण बनाते हैं।



अध्याय-3 जल संसाधन / NCERT CLASS-10 Geography Solutions

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(हिंदी माध्यम) 

अध्याय -3 जल संसाधन



3 जल संसाधन

1. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1. नीचे दी गई सूचना के आधार पर स्थितियों को ‘जल की कमी से प्रभावित’ या ‘जल की कमी से अप्रभावित’ में वर्गीकृत कीजिए।

(क) अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र

(ख) अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र

(ग) अधिक वर्षा वाले परन्तु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र

(घ) कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र

उत्तर- जल की कमी से प्रभावित क्षेत्र – (ख), (ग), (घ)

जल की कमी से अप्रभावित क्षेत्र – (क)

2. निम्नलिखित में से कौन-सा वक्तव्य बहुद्देश्यीय नदी परियोजनाओं के पक्ष में दिया गया तर्क नहीं है?

(क) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ उन क्षेत्रों में लाती है जहाँ जल की कमी होती है।

(ख) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जल बहाव को नियंत्रित करके काबू पाती है।

(ग) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ से वृहत स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है।

(घ) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ हमारे उद्योग और घरों के लिए विधुत पैदा करती है।

उत्तर- (ग) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ से वृहत स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है।

3. यहाँ कुछ गलत वक्तव्य दिए गए है। इसमें गलती पहचाने और दोबारा लिखें।

(क) शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में मदद की है।

(ख) नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित नहीं होता।

(ग) गुजरात मेें साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर भी किसान नहीं भड़के।

(घ) आज राजस्थान में इंंदिरा गांधी नहर से उप्लब्ध पेेेयजल के बावजूद छत वर्षा जल संग्रहणक लोकप्रिय हो रहा है।

उत्तर- (क) शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली से जल संसाधनों का अतिदोहन से इसकी कमी होते जा रही है।

(ख) नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित होता।

(ग) गुजरात मेें साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर किसान भड़के गए।

(घ) आज राजस्थान में इंंदिरा गांधी नहर से उप्लब्ध पेेेयजल के कारण छत वर्षा जल संग्रहणक की लोकप्रियता में कमी हो रही है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) व्याख्या करें कि जल किस प्रकार नवीकरण योग्य संसाधन है?

उत्तर- जल नवीकरण योग्य संसाधन है क्योंकि तीन चौथाई धरातल जल से ढका हुआ है, परंतु इसमें प्रयोग में लाने योग्य अलवणीय जल का अनुपात बहुत कम है । यह लवणीय जल हमें सतही अपवाह और भौमजल स्रोत से प्राप्त होता है जिनका लगातार नवीकरण और पुनर्भरण जलीय चक्र द्वारा होता रहता है सारा जल जलीय चक्र में गतिशील रहता है जिससे जल नवीकरण सुनिश्चित होता है।

(ii) जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण क्या है?

उत्तर- जल दुर्लभता के भाव उत्पन्न होते ही मानव मस्तिष्क पर सुख ग्रस्त या अनावृष्टि क्षेत्र(जहाँ वर्ष का अभाव हो) का चित्र उपस्थित होना स्वाभाविक है अर्थात जल की अनुपलब्धता ही जल संकट  या जल दुर्लभता कहलाता है।

       पृथ्वी पर विशाल जल सागर होने एवं नवीकरणीय संसाधन होने के बावजूद जल संकट का होना एक जटिल समस्या है। जल संकट का मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या, उनकी व्यापक मांग, जल का अति उपयोग तथा जल के असमान वितरण का होना है।

(iii) बहुद्देश्यीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ और हानियों की तुलना करें।

उत्तर- वैसी नदी घाटी परियोजना जिसका निर्माण दो या दो से अधिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया जाता है उसे बहुउद्देश्यीय परियोजना कहा जाता है। इन परियोजना के विकास के मुख्य लाभ निम्नलिखित है-

  •  बाढ़ नियंत्रण
  • मृदा अपरदन पर रोक
  • पेयजल एवं सिंचाई हेतु जलापूर्ति
  • विद्युत उत्पादन
  • उद्योगों के जलापूर्ति
  • परिवहन
  • मनोरंजन
  • वन्य जीव संरक्षण ,मत्स्य पालन ,जल कृषि, पर्यटन इत्यादि।

बहुउद्देशीय परियोजना से हानियाँ-

     बहुउद्देशीय परियोजना हेतु नदियों में बांध लगानेे से नदियोंं का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध होता है; जिससे तल पर अवसादीकरण तेज हो जाता है। इसी तलछट जमाव से जलीय जीवों के साथ भोजन एवं प्रजनन तथा स्वच्छंद विचरण की समस्याा तो आती ही है; सााथ ही बाढ़ जैसी विभीषिका भी उत्पन्न हो जाती है। इतना ही नहीं, बाढ़ग्रस्त मैदान की वनस्पतियाँ एवंं मृदाएँ प्लावित होकर अपघटित भी हो जाती है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) राजस्थान के अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है ? व्याख्या कीजिए।

उत्तर – राजस्थान के शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल को एकत्रित करने के लिए गड्ढों का निर्माण किया जाता था, जिससे मृदा सिंचित कर खेती की जा सके। उसे राजस्थान के जैसलमेर में ‘खादीन’ तथा अन्य क्षेत्रों में ‘जोहड़’ के नाम से पुकारा जाता है।

        राजस्थान के बीरानो फलोदी और बाड़मेर जैसे शुष्क क्षेत्रों में पेयजल का संचय भूमिगत टैंक में किया जाता है। जिसे ‘टाँका’ कहा जाता है। यह प्रायः आंगन में हुआ करता है जिसमें छत पर संग्रहित जल को पाइप के द्वारा जोड़ दिया जाता है। इस कार्य में राजस्थान की N.G.O. ‘तरुण भारत संघ’ पिछले कई वर्षों से कार्य कर रही है।

 (ii) परम्परागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में अपना कर जल संरक्षण एवं भंडारण किस प्रकार किया जा रहा है।

उत्तर – जल संकट की समस्या को को कम करने की दिशा में में परम्परागत वर्षा जल संग्रह एक लोकप्रिय एवं राहनीय कदम हो सकता है। वर्षा जल मानव जीवन मे काफी उपयोगी है पश्चिमी भारत खासकर राजस्थान में पेयजल हेतु वर्षा-जल का संग्रहण छत पर करते थे।

      पश्चिम बंगाल के बाढ़ के मैदान में सिंचाई के लिए बाढ़ जल वाहिकाएँ बनाने का चलन था। शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में वर्ष-जल को एकत्रित करने के लिए गड्ढ़ों का निर्माण कर मृदा सिंचित का कार्य किया जाता था। मेघालय के शिलांग में छत पर वर्षा जल संग्रहण आज भी परम्परागत रूप में परिचित है।

       कर्नाटक के मैसूर जिले में स्थित गंगथर गाँव में छत पर जल संग्रहण की व्यवस्था 200 घरों में है जो जल संरक्षण की दिशा में एक मिसाल है। वर्तमान समय में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश बाजस्थान एवं गुजरात सहित कई राज्यों में वर्षा-जल संक्षण एवं पुनः चक्रण किया जा रहा है।

अध्याय-1. संसाधन एवं विकास / NCERT CLASS-10 Geography Solutions

NCERT CLASS -10 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम)

अध्याय-1. संसाधन एवं विकास


 
संसाधन एवं विकास

1. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1. लौह अयस्क किस प्रकार का संसाधन है?
(क) नवीकरण योग्य
(ख) प्रवाह
(ग) जैव
(घ) अनवीकरण योग्य
उत्तर– (घ) अनवीकरण योग्य
2. ज्वारीय ऊर्जा निन्मलिखित में से किस प्रकार का संसाधन है?
(क) पुन: पूर्ती योग्य
(ख) अजैव
(ग) मानवकृत
(घ) अचक्रीय
उत्तर– (क) पुन: पूर्ती योग्य
3. पंजाब में भूमि निम्नीकरण का निम्नलिखित में से मुख्य कारण क्या है?
(क) गहन सिंचाई
(ख) अधिक सिंचाई
(ग) वनोंमूलन
(घ) अति पशुचारण
उत्तर– (ख) अधिक सिंचाई
4. निम्नलिखित में से किस प्रान्त में सीढ़ीदार (सोपानी) खेती की जाती है?
(क) पंजाब
(ख) उत्तर प्रदेश के मैदान
(ग) हरियाणा
(घ) उत्तराखंड
उत्तर– (घ) उत्तराखंड
5. इनमें से किस राज्य में काली मृदा पाई जाती है?
(क) जम्मू और कश्मीर
(ख) राजस्थान
(ग) गुजरात
(घ) झारखण्ड
उत्तर– (ग) गुजरात
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए। 
(i) तीन राज्यों के नाम बताएं जहाँ काली मृदा पायी जाती है। इस पर मुख्य रूप से कौन सी फसल उगाई जाती है।
उत्तर- ये मृदाएँ महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, मालवा, मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ के पठार पर पायी जाती है और दक्षिण पूर्वी दिशा में गोदावरी और कृष्णा नदियों की घाटियों तक फैली है। इस पर मुख्य रूप से कपास की खेती की जाती है इसीलिए इसे काली कपास मृदा के से भी जाना जाता है।
(ii) पूर्वी तट के नदी डेल्टाओं पर किस प्रकार की मृदा पायी जाती है? इस प्रकार की मृदा की तीन मुख्य विशेषताएँ क्या है?
उत्तर-  पूर्वी तट के नदी डेल्टाओं पर विशेषकर महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों के डेल्टाओं पर जलोढ़ मृदा पायी जाती है।
         इस प्रकार की मृदा की निम्नलिखित तीन मुख्य विशेषताएँ हैं- 
  • ये मृदाएँ बहुत उपजाऊ होती है। ये मृदा पोटास, फास्फोरस और चुनायुक्त होती है।
  • यहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक होता है।
  • इसमें गहन कृषि कार्य किया जाता है।
(iii) पहाड़ी  क्षेत्रों में मृदा अपरदन की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाने चाहिए।
उत्तर- पहाड़ी  क्षेत्रों में मृदा अपरदन की रोकथाम के लिए सोपान कृषि की जानी चाहिए। ढाल वाली भूमि पर सोपान बनाए जा सकते है। सोपान कृषि अपरदन को नियंत्रित करता है। 
(iv) जैव और अजैव संसाधन क्या होते है? कुछ उदाहरण दें। 
उत्तर- जैव संसाधन-  इन संसाधनों की प्राप्ति जीवमंडल से होती है और इनमें जीवन व्याप्त है , जैसे- मनुष्य, वनस्पतिजात, प्राणिजात, मत्स्य जीवन, पशुधन, आदि।
अजैव संसाधन- वे सारे संसाधन जो निर्जीव वस्तुओं से बने है, अजैव संसाधन कहलाते है। जैसे- चट्टानें और धातुएँ।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।
 (i) भारत में भूमि उपयोग प्रारुप का वर्णन करें। वर्ष 1960-61 से वन के अंतर्गत क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई, इसका क्या कारण है?
उत्तर-  भूमि उपयोग का तात्पर्य मानव द्वारा धरातल के विविध रूपों (पर्वत, पहाड़, मरुभूमि, दलदल, खादान, यातायात, आवास, कृषि, पशुपालन तथा खनिज) में प्रयोग किये जाने वाले कार्यों से है। 
           
           किसी भी प्रदेश या क्षेत्र की भूमि उपयोग प्रतिरूप को निर्धारित करने वाले मूलतः दो मुख्य कारक होते है, प्रथम भौतिक कारक द्वितीय मानवीय कारक। भूमि उपयोग निम्न वर्ग में रखे जाते है-
(क) वन 
(ख) कृषि अयोग्य बंजर भूमि।
(ग) गैर-कृषि कार्य में संलग्न भूमि- इमारत, सड़क, उद्योग इत्यादि।
(घ) स्थायी  चारागाह एवं गोचर भूमि।
(ड़) बाग-बगीचे एवं उपवन में संलग्न भूमि।
(च) कृषि योग्य बंजर भूमि- भूमि जहाँ पाँच से अधिक वर्षों से खेती न की गई हो।
(छ) वर्तमान परती भूमि- जहाँ एक कृषि वर्ष या उससे कम समय से खेती न की गई हो।
(ज) अन्य परती भूमि- जहाँ 1 से 5 कृषि वर्ष से खेती न की गई हो।
(झ) शुद्ध/निवल बोया गया क्षेत्र- एक कृषि वर्ष में एक बार से अधिक बोए गए क्षेत्र को शुद्ध/निवल बोए गए क्षेत्र में जोड़ दिया जाए तो वह सकल कृषित क्षेत्र कहलाता है। 
             
          1960-61 से वन के अंतर्गत क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई, इसका कारण निम्नलिखित है-
  • जनसंख्या वृद्धि में विस्फोट होना।
  • मानव अधिवास का तेजी से निर्माण होना।
  • उद्योग धंधे की स्थापना में वृद्धि का होना।
  • अति पशुचारण होना।
  • परिवहन (सड़क, रेल) मार्गों का तेजी से वृद्धि होना।
(ii) प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास के कारण संसाधनों का अधिक उपयोग कैसे हुआ है?
उत्तर- उपनिवेशन का इतिहास हमें बताता है कि उपनिवेशों में संसाधन सम्पन्न प्रदेश, विदेशी आक्रमणकारियों के लिए मुख्य आकर्षण रहे हैं। उपनिवेशकारी देशों ने बेहतर प्रौद्योगिकी के सहारे उपनिवेशों के संसाधनों का शोषण किया तथा उन पर अपना आधिपत्य स्थापित किया। अतः संसाधन किसी प्रदेश के विकास में तभी योगदान दे सकते है, जब वहाँ उपयुक्त प्रौद्योगिकी विकास और संस्थागत परिवर्तन किए जाएँ।
           उपनिवेशन के विभिन्न चरणों में भारत ने इन सबका अनुभव किया है। अतः भारत में विकास सामान्यतः तथा संसाधन विकास लोगों के मुखयतः संसाधनों की उपलब्धता पर ही आधारित नहीं था बल्कि इसमें प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन की गुणवत्ता और ऐतिहासिक अनुभव का भी योगदान रहा है। अतः इस प्रका कहा जा सकता है कि प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास के कारण  ही संसाधनों का अधिक उपयोग  हुआ है।

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