अध्याय-13 मौसम सम्बन्धी उपकरण

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-13 मौसम सम्बन्धी उपकरण


अध्याय-13 मौसम सम्बन्धी उपकरण

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. खाली जगहों को भरिए-

1. दैनिक तापमान में सेल्सियस पैमाने मापते हैं ।

2. शरीर का तापमान फारेनहाइट पैमाने में मापते हैं।

3. वायुदिशा दर्शक में तीर की पूँछ वायु चलने की दिशा में हो जाती है।

4. वर्षा की मात्रा रेनगेज से मापते हैं।

ii. मिलान कीजिए:-

                     उत्तर-

1. रेनगेज- वर्षा की मात्रा

2. विंडवेन- पवन की दिशा

3. थर्मामीटर- तापमान

iii. प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

1. दैनिक तापमान से क्या समझते हैं?
उत्तर- दिन-प्रतिदिन के अधिकतम और न्यूनतम तापमान को दैनिक तापमान कहते हैं।

2. सोचकर बताएँ कि किसी जगह पर दिन भर के तापमान में भिन्नता क्यों होती है?
उत्तर- किसी जगह पर दिन भर के तापमान में भिन्नता के कारण हैं सूर्य से मिलने वाला ताप। प्रात:काल में तापमान कम रहता है। जैसे-जैसे दिन चढ़ता जाता है वैसे-वैसे तापमान बढ़ता जाता है। ठीक 2 बजे दिन में तापमान सर्वाधिक होता है। अब जैसे-जैसे सूर्य पश्चिम की ओर ढलते जाता है, वैसे-वैसे तापमान भी कमता जाता है। संध्या में वह सर्वाधिक कम हो जाता है। फिर जैसे-जैसे रात बीतती जाती है वैसे-वैसे तापमान कम होते जाता है। इस प्रकार सुबह चार बजे का तापमान न्यूनतम हो जाता है।

3. अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्या होता है? किसी अखबार में देखकर आज का अधिकतम और न्यूनतम तापमान लिखिए।
उत्तर- किसी दिन के 24 घंटे के तापमान में जो आँकड़ा अधिकतम बताता है और जो आँकड़ा न्यूनतम बताता है वही उस दिन का अधिकतम और न्यूनतम तापमान होता है।

        आज बिहार के विभिन्न शहरों का तापमान निम्नलिखित रहा-

बिहार के विभिन्न शहरों का अधिकतम और न्यूनतम तापमान ºC में (26.12.2022)
पटना 25 13.4
गया 25.4 14
भागलपुर 24 15.2
पूर्णिया 25 14
बाल्मीकिनगर 24.6 12

4. मौसम संबंधी उपकरणों के नाम लिखिए तथा बताइए कि वे किस-किस काम आते हैं?
उत्तर- मौसम संबंधी उपकरणों के नाम निम्नलिखित हैं:-

⇒ थर्मामीटर- इससे अधिकतम और न्यूनतम तापमान मापा जाता है।

⇒ विंडबेन- इससे हवा की दिशा ज्ञात की जाती है। 

⇒ रेनगेज- इससे वर्षा की मात्रा मापी जाती है। 

5. मौसम केन्द्र पर दैनिक तापमान कैसे मापते हैं? लिखिए।
उत्तर- मौसम केन्द्र पर दैनिक तापमान मापने के लिए तापमापी अर्थात् थर्मामीटर नामक एक उपकरण रहता है। इस उपकरण को काँच की नली से बनाया जाता है। इसका आकार अंग्रेजी के ‘U’ अक्षर जैसा होता है। न्यूनतम ताप नली से लगी काँच की एक और धुंडी होती है, जिसमें पारा भरा रहता है। अधिकतम ताप वाली नली में अल्कोहल भरा होता है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे पारा फैलता है और अधिकतम तापवाली नली का अल्कोहल ऊपर चढ़ता है।

         स्केल को देख कर पता करते हैं कि अभी का अधिकतम तापमान क्या है। तब ताप के बाद चुम्बक से पारा को नीचे कर लिया जाता है। फिर पारा ऊपर चढने लगता हैं न्यूनतम तापमान पर रूक जाता है। दिन विशेष का अधिकतम और न्यूनतम तापमान नोट कर लिया जाता है और रेकॉर्ड बुक में चढ़ा लिया जाता है। यह क्रिया प्रतिदिन दी जाती है।

6. हवा की दिशा किस उपकरण से पता की जाती है। चित्र बनाकर नाम लिखिए।
उत्तर- हवा की दिशा ‘विंडवेन’ नामक उपकण से पता की जाती है।

मौसम सम्बन्धी उपकरण

मौसम सम्बन्धी उपकरण

7. वर्षा मापक यंत्र का चित्र बनाइए।
उत्तर- 

रेनगेज

रेनगेज

8. आपके यहाँ मौसम सम्बन्धी आँकड़े कहाँ एकत्र किये जाते हैं? पता कर के लिखिए।
उत्तर- हमारे राज्य बिहार में पटना अवस्थित वेधशाला में मौसम सम्बन्धी आँकड़े एकत्र किये जाते हैं।

क्रियाशीलन

1. पवन दिशा दर्शक बनाइए एवं उन तरीकों की सची बनाकर कक्षा में प्रकाशित कीजिए जिनसे हम हवा की दिशा का अनुमान लगा सकते है।
संकेत: छात्र स्वयं करें।


Read More: 

अध्याय-12 मौसम और जलवायु

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-12 मौसम और जलवायु


अध्याय-12 मौसम और जलवायु

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प चुनें-

1. वर्ष भर एक ही दिशा में बहने वाली पवन है-

(क) स्थानीय पवन

(ख) स्थायी पवन

(ग) सामयिक पवन

(घ) मौसमी पवन

उत्तर- (ख) स्थायी पवन

2. जलवाष्प का जलरूप में बदलने की क्रिया कहलाती है-

(क) वर्षण

(ख) संघनन

(ग) चक्रवात

(घ) मौसम

उत्तर- (क) वर्षण

13. कैटरीना क्या है-

(क) एक चक्रवात

(ख) एक ठंडी पवन

(ग) एक स्थानीय पवन

(घ) एक प्रति चक्रवात

उत्तर- (क) एक चक्रवात

ii. खाली जगहों को भरिए-

1. चक्रवात के केन्द्र में उच्च वायु दाब होता है।

2 लू एक स्थानीय हवा है।

3. ऊँचाई के कारण हवाएँ ठंडी होकर संघनन करती है।

4. विषुवत रेखीय क्षेत्रों में संवहनीय वर्षा होती है।

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें-

(1) मौसम के अन्तर्गत किन-किन तत्वों का अवलोकन किया जाता है?
उत्तर- “किसी निश्चित स्थान पर निश्चित समय में वायुमंडल की तत्कालीन दशा को मौसम कहते हैं।”

मौसम के अन्तर्गत निम्नलिखित तत्वों का अवलोकन किया जाता है:-

⇒ तापमान

⇒ वर्षा

⇒ आर्द्रता

⇒ सूर्य का प्रकाश 

⇒ हवा की दिशा एवं गति

⇒ आकाश के बादल 

(2) जलवायु को परिभाषित करें। इसका निर्धारण कैसे होता है?
उत्तर- किसी क्षेत्र विशेष में लम्बे समय तक मौसम की औसत दशा को जलवायु कहते हैं। मौसम का निर्धारण करने के लिए एक लम्बे समय (सामान्यत: 33 वर्ष) तक वहाँ के तापमान की स्थिति, वर्षा की मात्रा, पवन की दिशा इत्यादि का आँकड़ा एकत्र कर समय से भाग देकर उसका औसत निकाला जाता है।

(3) जलवायु किसे कहते है? जलवायु को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से प्रमुख कारक हैं?
उत्तर- किसी क्षेत्र विशेष में लम्बे समय तक मौसम की औसत दशा को जलवायु कहते हैं।

जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं:-

⇒ अक्षांशीय स्थिति,

⇒ समुद्र तट से दूरी,

⇒ पर्वत की दिशा व अवरोध,

⇒ समुद्री धाराओं की दिशा,

⇒ पवन की दिशा,

⇒ समुद्र तल से ऊँचाई तथा

⇒ तापमान।

(4) पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों का तापमान अलग-अलग क्यों होता है?
उत्तर- किसी भी स्थान का तापमान का आधार वहाँ प्राप्त होने वाली सूर्य की किरणें हैं। जहाँ सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं वहाँ का तापमान अधिक होता है। जहाँ-जहाँ सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं, वहाँ-वहाँ का तापमान कम होते जाता है। अतः स्पष्ट है कि सूर्य की किरणों की सीधी-तिरछी पड़ने के कारण पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों का तापमान अलग-अलग होता है।

(5) “तापमान का प्रभाव मौसम पर पड़ता है।” उचित उदाहरण सहित पुष्टि कीजिए।
उत्तर- ऐसे तो मौसम को प्रभावित करने वाले अनेक कारक हैं लेकिन उन सभी कारकों में प्रमुख कारक तापमान है। तापमान को बढ़ाने या घटाने में प्रमुख भूमिका सौर ऊर्जा की होती है। मुख्य रूप से सौर-ऊर्जा जिन स्थानों पर अधिक मिलती है, वहाँ का वातावरण गर्म हो जाता है। जहाँ पर सौर ऊर्जा कम मिलती है वहाँ का वातावरण ठंडा हो जाता है। गर्म और ठंडा, वातावरण से वहाँ का मौसम प्रभावित होता है।

(6) पृथ्वी पर कितने ताप कटिबंध हैं? इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर-  पृथ्वी पर पाँच ताप कटिबन्ध निम्नलिखित हैं:-

(i) उष्ण कटिबन्ध- कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच का क्षेत्र।

(ii) उत्तरी शीतोष्ण कटिबन्ध- कर्क रेखा और उत्तरी ध्रुवीय वृत्त के बीच का क्षेत्र।

(iii) दक्षिणी शीतोष्ण कटिबन्ध- मकर रेखा और दक्षिणी ध्रुवीय वृत्त के बीच का क्षेत्र।

(iii) उत्तरी शीत कटिबन्ध- उत्तरी ध्रुवीय वृत्त के उत्तर का क्षेत्र जिसके केन्द्र में उत्तरी ध्रुव है।

(iv) दक्षिणी शीत कटिबन्ध- दक्षिणी ध्रुवीय वृत्त के दक्षिण का क्षेत्र जिसके केन्द्र में दक्षिणी ध्रुव है।

मौसम और जलवायु

ताप कटिबन्ध

(7) वायु में गति के क्या कारण हैं?
उत्तर- पृथ्वी पर जहाँ कहीं तापमान अधिक हो जाता है वहाँ की हवा गर्म होकर ऊपर चली जाती है। इससे वहाँ निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है। इस निम्न दाब को भरने के लिए उच्च दाब के क्षेत्र से हवा चल देती है। जिस चाल से हवा चलती है उसे वायु की गति कहते हैं।

(8) पवन के कितने प्रकार हैं? प्रत्येक का नाम सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर- पवन के तीन प्रकार हैं-

(क) स्थायी पवन

(ख) मौसमी पवन तथा

(ग) स्थानीय पवन।

(क) स्थायी पवन- स्थायी पवन हमेशा एक निश्चित दिशा में चलता है। यह पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण उत्पन्न होता है। स्थायी पवन अधिक दाब पेटियों से कम दाब वाली पेटियों की ओर चलता है। पछुआ पवन, ध्रुवीय तथा व्यापारिक पवन स्थायी पवन के उदाहरण हैं।

(ख) मौसमी पवन- जिस पवन की दिशा मौसम के अनुसार बदलती रहती है, उसे मौसमी पवन कहते हैं। यह पवन ऋतु के अनुसार अपनी दिशा बदल लेता है। भारत में मौसमी पवन से ही वर्षा होती है। जैसे- मानसूनी पवनें, चक्रवात, प्रति चक्रवात इत्यादि। 

(ग) स्थानीय पवन- वर्षा के खास समय और खास भू-खंड (स्थान) पर चलने वाली हवाएँ स्थायी पवन कहलाती है। जैसे- उत्तर भारत के मैदानी भाग में मई-जून महीनों में चलने वाली गर्म हवा लू, के नाम से जानी जाती है।

(9) स्थलीय समीर एवं समुदी समीर में क्या अंतर है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- जब हवा स्थल की ओर से समुद्र की ओर चलती है तब इस हवा को स्थलीय समीर कहते हैं। ठीक इसके विपरीत जब हवा समुद्र की ओर से स्थल की ओर चलने लगती है तब इसे समुद्री समीर कहते हैं। स्थलीय समीर सदैव रात में चलता है, वहीं समुद्री समीर सदा दिन में चला करता है।

(10) चक्रवात क्या है? इसके प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- तूफानी हवाओं के अति शक्तिशाली भंवर को चक्रवात कहते है। चक्रवात के प्रभाव से भारी आँधी आती है और जन-जीवन को काफी कुप्रभावित करती है। हवा नाचते-नाचते काफी ऊँचाई पर चली जाती है और भारी वर्षा कराती है। चक्रवात यदि जमीन पर आते हैं तो आँधी-वर्षा लाते हैं और यदि समुद्र में आते हैं तो उसकी लहरें काफी ऊँचाई तक उठ जाती है।

(11) वर्षा कैसे होती है? इसके कितने प्रकार हैं?
उत्तर- ऊँचाई पर जलवाष्प के संघनन होने से वर्षा होती है। यह सदैव चलते रहने वाली प्रक्रिया है। वर्षा से पृथ्वी पर पानी पहुँचता है फिर ताप प्राप्त कर पानी वाष्प बनकर ऊपर चला जाता है। संघनन होता और वर्षा होती है। सदैव चलते रहने वाले इसी प्रक्रम को ‘जलचक्र’ कहते हैं। वर्षा तीन प्रकार की होती है:-

(क) संवाहनिक वर्षा

(ख) पर्वतीय वर्षा तथा

(ग) चक्रवातीय वर्षा।

(12) अत्यधिक वर्षा से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?
उत्तर- अत्यधिक वर्षा से सबसे पहले तो बाढ़ आ जाती है। बाढ़ में घर-के-घर ही क्या गाँव-के-गाँव बह जाते हैं। आदमी के साथ जीव-जंतु भी ऊँचे स्थानों की ओर भागते हैं। लगी-लगाई फसल, यहाँ तक कि कभी-कभी तैयार फसल भी बह जाती है। सरकार तथा गैर सरकारी संस्थाओं को आदमियों के रहने तथा खाने-पीने की व्यवस्था में जुट जाना पड़ता है।

(13) अधिक वर्षा एवं कम वर्षा वाले क्षेत्रों के जन-जीवन में क्या-क्या अंतर होंगे?
उत्तर- जहाँ अधिक वर्षा होती है वहाँ के लोग घर के छप्पर की ढाल अधिक रखते हैं, ताकि पानी जल्दी बह जाय। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में घर के छप्पर की ढाल कम रहती है या रहती ही नहीं। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तरह-तरह के वृक्ष पाये जाते हैं और फसलें भी तरह-तरह की होती है और खूब होती हैं।

       कम वर्षा वाले क्षेत्रों में मात्र बाजरा जैसे मोटे अनाज ही उपज पाते हैं। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पानी की कोई किल्लत नहीं होती, जबकि कम वर्षा वाले क्षेत्र के लोगों को पीने के पानी के भी लाले पड़े रहते हैं। इन्हें दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्र के लोग अपेक्षाकृत अधिक आराम से जीवन व्यतीत करते हैं जबकि कम वर्षा वाले क्षेत्र के लोगों का जीवन मशक्कत से भरा रहता है।

(14) यदि वर्षा कम हो तो क्या-क्या परेशानी होती है?
उत्तर- वर्षा कम होने पर फसलें नहीं उपजतीं। अन्न की कमी हो जाती है। गर्मी आते-आते कुएँ तालाब सूख जाते हैं। नदियों में भी पानी नहीं रहता। अतः दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

(15) हमें वर्षा जल का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर- हमें वर्षा जल का संरक्षण इसलिये करना चाहिए ताकि हमें सालों भर पानी मिल सके। इस संरक्षित जल से पीने से लेकर सिंचाई तक के काम हो सकते हैं।

16. पता कीजिए कि ये पवन कहाँ बहते हैं?
(लू, चिनूक, गरजता चालिसा, दहाड़ता पचासा, हरिकेन, टॉरनेडो, टाइफून, विलीविली, कैटरिना, काल वैशाखी)
उत्तर-

पवन क्षेत्र
लू विशाल मैदान 
चिनूक दक्षिणी कनाडा 
गरजता चालीसा 40 दक्षिणी अक्षांशीय क्षेत्र
दहाड़ता पचासा  50 दक्षिणी अक्षांशीय क्षेत्र
हरिकेन अटलांटिक महासागरीय क्षेत्र
टॉरनेडो उत्तरी अमेरिका
टाइफून चीन (पूर्वी प्रशांत महासागरीय क्षेत्र)
विलीविली पूर्वी ऑस्ट्रेलिया
कैटरिना पश्चिम ऑस्ट्रेलिया 
काल वैशाखी बंगाल की खाड़ी 

17. एक माह तक प्रतिदिन मौसम का अवलोकन क अभिलेख तैयार कर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।


Read More: 

अध्याय-11 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : तटीय प्रदेश केरल में जन-जीवन

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-11 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : तटीय प्रदेश केरल में जन-जीवन


अध्याय-11 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : तटीय प्रदेश केरल में जन-जीवन

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प को चुने-

(1) केरल प्रदेश की जलवायु है-
(क) उष्ण
(ख) शीतोष्ण
(ग) समशीतोष्ण
(घ) उष्णार्द्र
उत्तर- (घ) उष्णार्द्र मानसूनी जलवायु

(2) केरल में नहीं उपजाया जाता है-
(क) कहवा
(ख) काजू
(ग) जूट
(घ) इलायची
उत्तर- (ग) जूट

(3) साइलेंट वैली स्थित है-
(क) पूर्वी घाट में
(ख) पश्चिमी घाट में
(ग) कृष्णा घाट में
(घ) कावेरी घाट में
उत्तर- (ख) पश्चिमी घाट में

(4) केरल में सबरीमाला क्या है?
(क) तीर्थ स्थान
(ख) पर्यटन स्थल
(ग) नौका दौड़
(घ) एक प्रकार का नृत्य
उत्तर- (क) तीर्थ स्थान

ii. सही मिलान करें-

                     उत्तर-

1. मलखम्भ- एक खेल

2. पश्चिमी घाट- नीलगिरि की पहाड़ियाँ

3. केरली मसाज- एक प्रकार की चिकित्सा पद्धति

4. उत्पम- एक प्रकार का खाद्य पदार्थ

5. मलयालम- एक प्रकार की भाषा

अध्याय-11 मानव पर्यावरण

केरला राज्य

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. केरल प्रदेश की जलवायु और वनस्पति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- केरल प्रदेश की जलवायु ऊष्ण-आर्द्र मानसूनी प्रकार की है। यहाँ औसत वार्षिक वर्षा 200 सेमी० या इससे अधिक होती है। यहाँ ग्रीष्म ऋतु में औसत तापमान 32°C तथा शीत ऋत में 23°C रहता है। वार्षिक तापान्तर 2°C से 5°C तक रहता है।

        वनस्पति के क्षेत्र में देखा जाए तो राज्य का 1/4 भाग वनों से ढंका है। यहाँ सदाबहार वन पाये जाते हैं। सागवान, चन्दन, सुपारी, नारियल, रबर, बाँस प्रमुख वनस्पतियाँ हैं। यहाँ केले भी खूब होते हैं।

2. पी. वेल्लू सुंदरम् ने केरल की किन-किन विशेषताओं का जिक्र किया?
उत्तर- पी० वेल्लू सुन्दरम् ने केरल की विभिन्न विशेषताओं का जिक्र किया है। सबसे पहले इन्होंने केरल की अवस्थिति का जिक्र किया। उन्होंने प्राकृतिक तथा भौतिक विशेषताएँ बताई। अधिकतम तथा न्यूनतम ताप को बताया है और उसके बाद वर्षा की मात्रा का वर्णन किया है। वन, वनस्पति तथा वन्य जीवों की चर्चा की। लोगों के आर्थिक जीवन के साथ खान-पान तथा पहनावे की बात बताई। जो खनिज मिलते हैं उनके नाम बताएँ। उन्होंने आवागमन के साधनों की विशेषता बताई।

3. केरल मसालों का प्रदेश है। कैसे?
उत्तर- केरल में अनेक तरह के मशाले की खेती की जाती हैं। काली मिर्च, इलायची, गरम मसाले, जावित्री, दालचीनी, कबाब चीनी आदि खूब होते हैं। इसी कारण केरल को मसालों का प्रदेश कहते हैं।

4. लोग पर्यटन के लिये केरल जाना क्यों पसंद करते हैं?
उत्तर- लोग पर्यटन के लिये केरल जाना इसलिए पसन्द करते हैं, क्योंकि यहाँ नौका दौड़ का आयोजन होता है।  कत्थकली यहाँ का विश्व प्रसिद्ध नृत्य नाटिका है। मोहनीअट्टम यहाँ का प्रसिद्ध नृत्य है। मार्शल आर्ट के रूप में कलारीपयट्ट शैली है। मलखम्भ यहाँ का प्रसिद्ध खेल है। सबरीमाला एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। इन्हीं सब आकर्षणों से पर्यटक यहाँ खींचे चले आते हैं।

      यहाँ कश्मीर की तरह हाउस वोट मिलते हैं। विदेशी पर्यटक इन्हीं में रहना पसन्द करते हैं। वे विलासिता युक्त नौकाओं में भ्रमण करना विशेष पसंद करते हैं। यहाँ के लोग सेवा भाव से पूर्ण होते हैं। अत: पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं होती।

अध्याय-11 मानव पर्यावरण

केरल

5. अपने मुहल्ले के दुकानदार से मसालों की आपूर्ति के स्रोत का वर्णन करें।
उत्तर- हमने अपने मुहल्ले के दुकानदार से मसालों की आपूर्ति के स्रोत का पता किया। उन्होंने बताया कि हम तो थोक मंडी से मसाले लाते हैं। लेकिन वे लोग प्रायः दक्षिण भारत के राज्यों, खासकर केरल से ट्रकों द्वारा मसाले मँगवाते हैं।

6. केरल के खान-पान बनाने में किन खाद्य पदार्थों की जरूरत होगी? सूची बनाइए।
उत्तर- केरल के खान-पान बनाने में निम्नलिखित खाद्य पदार्थों की जरूरत होगी-
चावल, मिर्च मसाला, नमक, आलू, नारियल, नारियल का तेल आदि।

7. बिहार और केरल के पहनावा में क्या-क्या अंतर है?
उत्तर- बिहार की महिलाएँ साड़ी, पेटीकोट तथा ब्लाऊज पहनती हैं तो केरल की महिलाएं भी यही पहनती है। बिहार में पुरुष धोती, कुरता, गंजी, गमछा का व्यवहार करते हैं, लेकिन केरल के पुरुष हाफ कमीज और लुंगी पहनते हैं। लुंगी तो बिहार के लोग भी पहनते हैं, लेकिन तब जब वे घर पर रहते हैं या रात में। बिहार में पायजामा कुरता का विशेष चलन हो गया है। फुलपैंट-शर्ट दोनों राज्यों के लोग पहनते हैं।

8. केरल के नौका दौड़ का आयोजन अपने राज्य में करने के लिये आप क्या करेंगे?
उत्तर- बिहार में केरल जैसा नौका दौड़ करने के लिए हमें किसी सीधे बहती नदी का चुनाव करना होगा। नौका चालकों को ट्रेंड करना होगा। तभी हम केरल जैसा नौका दौड़ का आयोजन कर सकते हैं।

9. केरल व बिहार के भोजन में कौन-सा खाद्यान्न समान है?
उत्तर- केल व बिहार के भोजन में चावल समान है।

10. राष्ट्रीय सेवा योजना के बारे में पता कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।


Read More: 

अध्याय-10 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : अपना प्रदेश बिहार

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-10 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : अपना प्रदेश बिहार


अध्याय-10 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : अपना प्रदेश बिहार

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर (✓) का निशान लगाएँ-

(1) बिहार के पूरब में है-
(क) पश्चिम बंगाल
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) सोन नदी
(घ) छत्तीसगढ़
उत्तर- (क) पश्चिम बंगाल

(2) मधुबनी पेंटिंग जुड़ी है-
(क) मगध क्षेत्र में
(ख) अंग क्षेत्र में
(ग) भोजपुरी क्षेत्र में
(घ) मिथिला क्षेत्र में
उत्तर- (घ) मिथिला क्षेत्र में

(3) जमालपुर में है-
(क) सिगरेट कारखाना
(ख) जूट कारखाना
(ग) बारूद कारखाना
(घ) रेलवे कार्यशाला
उत्तर- (घ) रेलवे कार्यशाला

ii. सही मिलान करें-

                        उत्तर-

(1) चूना पत्थर- (ग) कैमूर

(2) रेलवे वैगन प्लांट- (घ) मोकामा

(3) जर्दालु- (क) भागलपुर

(4) तेलशोधन कारखाना- (ख) बरौनी

अध्याय-10 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : अपना प्रदेश बिहार

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

1. बिहार की भौगोलिक दशाओं की जानकारी दीजिए।
उत्तर- बिहार गंगा के मध्य मैदान में अवस्थित है। इसके पूरब में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर-प्रदेश तथा दक्षिण में झारखंड राज्य है। यहाँ की जलवायु उष्ण कटिबंधीय है। यहाँ मानसून के समय वर्षा होती है। यहाँ औसत वार्षिक वर्षा  100 से 150 सेंटीमीटर के बीच होती है। गर्मी के मौसम में तापमान 40° सेल्सियस तक चला जाता है। जाड़े के मौसम में यहाँ का अधिकतम तापमान 29° से 30° सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 8° सेल्सियस के लगभग रहता है।

2. बिहार में लोगों का मुख्य पेशा क्या है?
उत्तर- बिहार कृषि प्रधान राज्य है और यहाँ के लोगों का मुख्य पेशा कृषि है।

3. बिहार को किन प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है? इसका जन-जीवन पर कैसा प्रभाव पड़ता है?
उत्तर- बिहार को बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। प्रायः उत्तरी बिहार खासकर कोसी क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित होते ही रहता है। जन-जीवन पर इसका बड़ा बुरा प्रभाव पड़ता है। जमी-जमाई गृहस्थी अस्त-व्यस्त हो जाती है। घर और घर का अधिकांश सामान योंहीं छोड़ इन्हें अन्यत्र शरण लेना पड़ता हैं। जो लोग दूसरों को खिलाते रहते हैं वे अब दूसरों की कृपा पर निर्भर हो जाते हैं।

           सरकारी और गैर-सरकारी सहायता का उन्हें बेसब्री से इन्तजार करना पड़ता है। प्राय: दक्षिणी बिहार को सूखे जैसे भी आपदा को भी झेलना पड़ता है।

4. बिहार की सांस्कृतिक विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर- बिहार की सांस्कृतिक विशेषताओं में यहाँ के पर्व-त्योहारों की प्रमुखता है। दशहरा का त्योहार सार्वजनिक रूप में मनाया जाता है। वहीं दीपावली घर-घर व्यक्तिगत रूप में मनाते हैं। वैसे ही होली मिल-जुलकर मनाया जाने वाला पर्व है। बिहार की मधुबनी पेंटिंग विश्व प्रसिद्ध है। मिथिला क्षेत्र की यह खास है जिसमें प्राकृतिक रंगो और प्रतीकों का उपयोग किया जाता है। बहुतों को यह रोजगार मुहैया कराता है।

5. बिहार की मुख्य फसलें क्या-क्या हैं?
उत्तर- बिहार की मुख्य फसल धान है। अन्य फसलों में गेहूँ, मकई, मडुआ, चना, अरहर, मसूर, मटर आदि दलहन; सरसों, तीसी, सूर्यमुखी जैसे तेलहन; हल्दी, जीरा, धनिया, मिरचाई, प्याज, लहसुन आदि मसालों की भी खेती होती है। कुछ जिलों में पान, मखाना, लीची, तंबाकू की भी खेती होती है। आम भी यहाँ खूब होता है। दीघा का दुधिया तथा भागलपुर का जर्दालू, माल्दह प्रसिद्ध है। केला के लिये हाजीपुर तथा शाही लीची के लिए मुजफ्फरपुर प्रसिद्ध है।

6. बिहार किन-किन खाद्य पदार्थों के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर- बिहार का मुख्य भोजन चावल, दाल और सब्जी है। रोटी-सब्जी भी चाव से खाई जाती है। छपरा जिला में सत्तू, लिटटी-चोखा मशहूर है। मैथिली क्षेत्र में दही-चूड़ा-चाव से खाया जाता है।

7. मिथिला पेंटिंग की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर- मिथिला पेंटिंग की मुख्य विशेषताएँ हैं कि चित्र के लिए स्थानीय परिवेश तथा प्रतीकों को अपनाया जाता है। चित्रकार रंग स्वयं बनाते हैं। रंग बनाने के लिए प्राकृतिक साधनों खासकर रंगीन फूलों का उपयोग किया जाता है। इस कला को पारंपरिक धरोहर के रूप में माना जाता है।

अध्याय-10 मानव पर्यावरणअध्याय-10 मानव पर्यावरणअध्याय-10 मानव पर्यावरण

8. बिहार के मानचित्र में नदियों को दर्शाए।
उत्तर- छात्र स्वंय करें।

9. मैंगो शावर से आपके घर-मोहल्ले में क्या परिवर्तन दिखता है? बताइए।
उत्तर- अप्रैल-मई की पहली वर्षा को मैंगो-शावर कहते हैं। मैंगो-शावर से आम को बढ़ने की गति तो मिलती ही है तथा में हमारे घर-मोहल्ले के लोग जेठ की लू वाली गर्मी से निजात महसूस कते हैं। इस वर्षा से सर्वत्र खुशियाँ छा जाती हैं। बच्चे वर्षा में उछल-कूद मचाने और नहाने का मजा लेते हैं।

10. नीचे ग्यारह किस्म के आमों के नाम दिए गए हैं उन्हें ढूँढें-


उत्तर- 

1. बीजु

2. चौसा

3. डंका

4. बम्बइया

5. जर्दालु

6. शुकुल

7. मिदुआ

8. दशहरी

9. गुलाबखास

10. तोतापुरी

11. मालदह


Read More: 

अध्याय-9 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : थार प्रदेश में जन-जीवन

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-9 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : थार प्रदेश में जन-जीवन


अध्याय-9 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : थार प्रदेश में जन-जीवन

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर सही (✓) का चिह्न लगाएँ।

1. थार का रेगिस्तान फैला है-
(क) गुजरात-महाराष्ट्र
(ख) गुजरात-राजस्थान
(ग) पंजाब-राजस्थान
(घ) राजस्थान-मध्यप्रदेश
उत्तर- (ख) गुजरात-राजस्थान

2. साफा कहते हैं-
(क) सफाई वाले कपड़े को
(ख) पूरी आस्तीन वाली कमीज को
(ग) सिर पर बाँधने वाली पगड़ी को
(घ) कमर में बांधने वाला कपड़ा
उत्तर- (ग) सिर पर बाँधने वाली पगड़ी को

3. थार प्रदेश में पाये जाने वाले खनिज हैं-
(क) संगमरमर-अभ्रक
(ख) बॉक्साइट-संगमरमर
(ग) संगमरमर-जिप्सम
(घ) संगमरमर-कोयला
उत्तर- (ग) संगमरमर-जिप्सम

4. नखलिस्तान का अर्थ है-
(क) एक बहुत छोटा प्रदेश
(ख) ठंड वायु का क्षेत्र
(ग) रेगिस्तान में हरियाली व जल वाला क्षेत्र
(घ) राजस्थान-मध्यप्रदेश
उत्तर- (ग) रेगिस्तान में हरियाली व जल वाला क्षेत्र (मरूद्यान)

ii. खाली जगहों को भरिए-

(1) भारत के पश्चिमी भाग में थार का रेगिस्तान है।

(2) रेगिस्तान का जहाज ऊँट कहलाता है।

(3) राजस्थान नहर सतजल नदी पर बनाया गया बांध है।

नोट : राजस्थान नहर को इन्दिरा गाँधी नहर भी कहा जाता है। 

(4) बीकानेर,जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर थार रेगिस्तान का मुख्य शहर है।

iii. निम्न प्रश्नों के उत्तर दें-

(1) थार प्रदेश में जनसंख्या कम क्यों है?
उत्तर- थार प्रदेश में जनसंख्या इसलिए कम है क्योंकि वहाँ का जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण है। जीवन-यापन के साधनों का अभाव है। सड़कों की कमी से यात्रा करना कठिन है। दिन में काफी गर्म तथा रात में भारी ठंड झेलना पड़ता है।

(2) आपके प्रदेश के जनजीवन और थार प्रदेश के जनजीवन में अंतरों की सूची बनाइए।
उत्तर- हमारे प्रदेश के जनजीवन और थार प्रदेश के जनजीवन में अंतरों की सूची निम्नलिखित है-

हमारे प्रदेश का जन-जीवन-

⇒ केवल गर्मी के मौसम में ही गर्मी पड़ती है।

⇒ केवल जाड़े में रात में जाड़ा पड़ता है।

⇒ वर्षा ऋतु में सामान्य वर्षा होती है।

⇒ हर प्रकार का वाहन मिलता है।

⇒ पानी की कोई किल्लत नहीं है।

⇒ हर तरह के अन्न की प्रमुखता है।

थार प्रदेश का जन-जीवन-

⇒ सालों भर गर्मी पड़ती है।

⇒ सालों भर रात में जाड़ा पड़ता है।

⇒ वर्षा नहीं के बराबर होती है।

⇒ केवल ऊँट ही वाहन है।

⇒ पानी की भारी किल्लत है।

⇒ केवल बाजरे की प्रमुखता है।

(3) थार प्रदेश में जल की उपलब्धता कैसे बढ़ाई जा सकती है?
उत्तर- पक्का टैंक बनाकर वर्षा के जल को एकत्र किया जा सकता है। वर्षा ऋतु में जो भी वर्षा हो, पूरे गाँव के वर्षा जल को इसमें एकत्र किया जाय। यह जल पीने से लेकर सिंचाई के काम में भी आ सकता है।

(4) थार प्रदेश में बहने वाली नदियों में पानी कैसे बढ़ सकता है?
उत्तरे- नदियाँ प्राकृतिक होती हैं। वह भी राजस्थान की नदियाँ शुष्क है। अतः नदियों में पानी बढ़ाना कठिन है हाँ, उसके स्थान पर इन्दिरा नहर से उप-नहरों की संख्या बढ़ाकर नदियों की कमी दूर की जा सकती है।

(5) यातायात, सुरक्षा, खानपान के लिए ऊँट जीवन रेखा है कैसे? अपने प्रदेश के ऐसे किसी उपयोगी जानवर के बारे में बताएँ।
उत्तर- थार प्रदेश के ऊँट ही मुख्य सवारी है। यातायात के लिये यही एकमात्र साधन है। बालू पर दूसरी सवारी चल भी नहीं सकती। यह क्षेत्र पाकिस्तान सीमा पर अवस्थित है, अतः सुरक्षा की अति आवश्यकता है, कम-से-कम बार्डर सिक्युरिटी फोर्स के लिए भी ऊँट का ही उपयोग करते हैं। ऊँटनी का दूध ही यहाँ मिलता है। उसी के दूध से चाय बनती है। खोवा, पनीर सब ऊँटनी के दूध से ही बनते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि यातायात, सुरक्षा, खानपान के लिए ऊँट ही जीवन रेखा है।

       हमारे प्रदेश बिहार में ऐसी बात नहीं है। यातायात के लिए घोड़ा समेत अनेक साधन मौजूद है। सुरक्षा के लिए उत्तर नेपाल की सीमा पर घोड़ा और जीप का उपयोग होता है। दूध के लिए बकरी, गाय और भैंस बहुतायत में उपलब्ध हैं।

iv. क्रियाकलाप-

(1) नखलिस्तान का मॉड या चित्र बनाइए।

उत्तर-

(2)  रवि को रेगिस्तानी देश ‘थार’ में जाने के लिए किन आवश्यक चीजों को ले जाना होगा ? सूची बनाइये और कारण भी लिखिये।
उत्तर- ‘थार’ में जाने के लिये निम्नलिखित वस्तुएँ साथ ले जाना चाहिए-

⇒ रात में ओढ़ने के लिये कंबल।

⇒ पहनने के लिये काफी कपड़े।

⇒ खाने के तैया समान, जैसे- बिस्कुट, पावरोटी, मक्खन।

⇒ एक बड़ा थर्मस तथा एक गिलास।

⇒ थार क्षेत्र का नक्शा।


Read More: 

अध्याय-8 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : लद्दाख प्रदेश में जन-जीवन

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-8 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : लद्दाख प्रदेश में जन-जीवन


अध्याय-8 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : लद्दाख प्रदेश में जन-जीवन

मानव पर्यावरण अंतःक्रिया

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर सही (✓) का चिह्न लगाएँ:

(i) लद्दाख की जलवायु शुष्क है, क्योंकि लद्दाख का-
(क) ऊँचाई पर होना
(ख) वनस्पतियों का न होना
(ग) हिमालय की वृष्टि-छाया में होना
(घ) नीचाई पर होना
उत्तर- (क) ऊँचाई पर होना

(ii) लद्दाख में पाया जाने वाला महत्त्वपूर्ण जानवर है-
(क) पांडा
(ख) जंगली भैंसा
(ग) याक
(घ) शेर
उत्तर- (ग) याक

(iii) कश्मीर से लद्दाख होते हुए तिब्बत को जोड़ता है-
(क) रोहतांग दर्रा
(ख) काराकोरम दर्रा
(ग) जोजीला दर्रा
(घ) नापूला दर्रा
उत्तर- (ख) काराकोरम दर्रा

(iv) लद्दाख में बहने वाली नदियाँ हैं:
(क) सिंधु-नर्मदा
(ख) सिंधु-श्योक
(ग) सिंधु-गंगा
(घ) सिन्धु-चिनाव
उत्तर- (ख) सिंधु-श्योक

अध्याय-8 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : लद्दाख प्रदेश में जन-जीवन

ii. खाली जगहों को भरिए-

(1) खा-पा-चान का अर्थ है हिम भूमि

(2) लद्दाख क्षेत्र की सामान्य ऊँचाई है 3600 मीटर

(3) अच्छे किस्म का जीरा द्रास घाटी में होता है।

(4) काराकोरम दर्रा कश्मीर को तिब्बत से जोड़ता है।

(5) बड़े मठों को गोप्पा कहते हैं।

iii. निम्न प्रश्नों के उत्तर दें:

1. हम प्रकृति के साथ अनुकूलित हैं। कैसे?
उत्तर- हम जिस पारितंत्र में रहते हैं वहीं के वातावरण के अनुकूल अपने को अनुकूलित कर लेते हैं। साथ ही वहाँ के पशु-पक्षी, फसलें, वनस्पतियाँ जलवायु के अनुकूल ढालने में हमारा साथ देती हैं, हालांकि उन्हें भी अनुकूलित होने में समय लगा होगा।

2. जम्मू कश्मीर के नक्शे में सिंधु नदी का बहाव, कराकोरम दर्रा और जोजिला दर्रा को चिह्नित करें।
उत्तर- छात्र स्वंय करें।

3. लद्दाख क्षेत्र की जलवायु कैसी है?
उत्तर- लद्दाख क्षेत्र की जलवायु शुष्क और ठंडा है। यह दुनिया की छत कहे जाने वाला तिब्बत के पठार का पश्चिमी भाग है। इसे हम उच्च भूमि भी कह सकते हैं। यहाँ की सामान्य ऊँचाई 6700 मीटर है। अधिक ऊँचाई के कारण ही जलवायु ठंडी है। हिमालय पहाड़ की वृष्टिछाया में पड़ जाने से यहाँ वर्षा नहीं होती। इसी कारण यह क्षेत्र शुष्क हो गया है। यहाँ जाड़ा कभी बहुत अधिक और कभी थोड़ा कम लेकिन सालों भर पड़ता है।

4. लद्दाख में विरल वनस्पति और विरल जनसंख्या क्यों है?
उत्तर- उच्च शुष्कता के कारण यह उजाड़ है और वनस्पतियाँ कम है। हरियाली कहीं नहीं दिखती। कृषि योग्य भूमि की भारी कमी है। जीवन-यापन की असुविधा के कारण जनसंख्या भी विरल ही है।

5. याक की उपयोगिता हमारे यहाँ के किस पशु से मिलती है?
उत्तर- याक की उपयोगिता हमारे यहाँ के भैंस से है। मादा याक बच्चे पैदा करती है। इनसे दूध मिलता है, जिससे खोवा, पनीर और मक्खन बनता है। नर याक बोझ ढोने, गाड़ी और हल खींचने के काम आते हैं।

6. लद्दाख जैसे ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में पर्यटन की क्या संभावनाएँ हैं?
उत्तर- जाड़े की अधिकता तथा कोई प्राचीन स्मारक के नहीं रहने के कारण यहाँ पर्यटन की कोई संभावना नहीं है। यातायात की भी कोई खास सस्ती व्यवस्था नहीं है।

7. ठंडे रेगिस्तानी प्रदेशों में आपको जाना है। साथ ले जाने वाले सामानों की सूची बनाइए।
उत्तर- ठंडे रेगिस्तानी प्रदेश में जाने के लिए हमें मोटे-मोटे कम्बल, गर्म कपड़े जिसमें ओभर कोट अवश्य हो, ऊनी मोजा, कांटेदार जूता, रात बिताने के लिए रावटी भी साथ में होना चाहिए। तैयार खाने का सामान भी साथ ले जाना पड़ेगा।

नोट: रावटी- कपड़े का बना हुआ एक प्रकार का छोटा घर या डेरा जिसके बीच में एक बँडेर होती है और जिसके दोनों ओर दो ढालुएँ परदे होते हैं, छौलदारी, टेंट, तंबू।

8. आप अपने और द्दाख के निवासियों के जीवन शैली की तुलना करके पता करें कि कहाँ का जीवन अधिक कठिन है और क्यों?
उत्तर- हम धान, गेहूँ और विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ उगाते हैं। ये सुविधा लद्दाख के लोगों के पास बहुत कम है। हमारा वातावरण सुखमय है जबकि लद्दाख वासियों को मशक्कत का जीवन-जीना पडता है। हम तीनों मौसमों जाड़ा, गर्मी औ बरसात का मजा लेते हैं। लद्दाख में तो केवल जाड़ा पड़ता है और वह भी भीषण।


Read More: 

अध्याय-5 बिन पानी सब सून

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-5 बिन पानी सब सून


अध्याय-5 बिन पानी सब सून

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर सही (✓) का निशान लगाएँ-

1. पृथ्वी पर जलमंडल का हिस्सा है:
(क) 51
(ख) 41
(ग) 71
(घ) 29
उत्तर- (ग) 71

2. मुम्बई किस सागर के किनारे स्थित है:
(क) हिन्द महासागर
(ख) अरब सागर
(ग) आकर्टिक महासागर
(घ) फतेह सागर
उत्तर- (ख) अरब सागर

3. चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण से जल ऊँचाई की ओर बढ़ता है। यह स्थिति कहलाती है:
(क) भाटा
(ख) ज्वार
(ग) ग्रहण
(घ) तरंगे
उत्तर- (ख) ज्वार

4. इनमें से कौन झील है:
(क) काला सागर
(ख) लाल सागर
(ग) फतेह सागर
(घ) अरब सागर
उत्तर- (ग) फतेह सागर

ii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1. पानी के कौन-कौन से स्रोत हैं? सबसे बड़ा स्रोत कौन-सा है? उसका उपयोग क्या है?
उत्तर- पानी के निम्नलिखित स्रोत हैं:-

⇒ भूमि के अन्दर का जल जिसे हम कुआँ या हैण्ड पम्प द्वारा प्राप्त करते हैं

⇒ वर्षा से प्राप्त जल

⇒ नदियाँ

⇒ पहाड़ों पर के बर्फ, जो गल कर पानी बनते हैं और नदियों में पहुँच जाते हैं।

⇒ तालाब

⇒ झरना

⇒ समुद्र।

         पानी का सबसे बड़ा स्रोत समुद्र है। इसका उपयोग है कि उसमें बड़े-बड़े जहाज चलाकर उससे देश-विदेश से व्यापारिक सामान मंगाया और भेजा जाता है। समुद्र के जल से नमक बनाते हैं। समुद्र जल में मछलियाँ मिलती हैं, जो मछुआरों को रोजगार और मांसाहारियों को भोजन देती हैं। समुद्र में शंख, सीपी, कौड़ी आदि-आदि अनेक सामान मिलते हैं। सीपी से मोती मिलता है। मूंगा भी समुद्र से ही मिलता है।

2. जमीन के नीचे का जल स्तर दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है। इसे बनाये रखने के लिये आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर- जमीन के नीचे जलस्तर को बनाये रखने के लिए हम गाँव के आस-पास तालाब और गड्ढा बनाएँगे। उसमें एकत्र जल में मछली पालन करेंगे और जरूरत के अनुसार सिंचाई भी करेंगे। इसी का पानी रिस-रिस कर जमीन में जाता रहेगा और नीचे का जल-स्तर बना रहेगा।

      वर्षा जल को एकत्र कर पाइपों के सहारे जमीन के अन्दर तक भेजा जा सकता है। इससे जलस्तर बना रहेगा। लेकिन यह काम सबको करना होगा।

3. आप अपने दैनिक जीवन में जल का कहाँ-कहाँ एवं कितना उपयोग करते हैं? सूची बनाइए। इनमें कहाँ-कहाँ मितव्ययिता बरतकर इस उपयोग को कम कर सकते हैं?
उत्तर- अपने दैनिक जीवन में जल के उपयोग का सूची-

⇒ सबेरे शौच में- 7 लीटर

⇒ स्नान में- 15 लीटर

⇒ कपड़ा साफ करने में- 30 लीटर

⇒ पीने में- 6 लीटर

⇒ संध्या शौच में- 7 लीटर

         इनमें से हम नहाने, कपड़ा साफ करने में कुछ बचत कर सकते हैं। इस सभी पानी को बेकार नहीं जाने देंगे। इसको किसी बर्तन में एकत्र कर उससे फुलवारी की सिंचाई करेंगे, या घर की धुलाई करेंगे।

4. पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 40 पर दिये गये चित्रों में से कौन-कौन सी आदत सही और कौन-कौन सही आदत गलत है और क्यों?
उत्तर- चित्र में लड़का बाल्टी में पानी निकाल कर नहा रहा है। यह अच्छी आदत है क्योंकि इससे पानी की बर्बादी नहीं होती।

        दूसरे चित्र में नल को खोल कर छोड़ दिया गया है। बाल्टी में पारी भर कर बेकार बह रहा है। यह आदत गलत है, क्योंकि पानी की बर्बादी हो रही है।

        तीसरे चित्र में लड़का नल को खोल कर ब्रश कर रहा है और पानी बेकार गिरा रहा है। यह आदत गलत है, क्योंकि पानी बर्बाद हो रहा है।

         नीचे चौथे चित्र और पाँचवें चित्र में भी लड़का बाल्टी में पानी लेकर नहा रहा है और एक लड़का लोटा में पानी लेकर दातून कर रहा है। ये दोनों आदतें अच्छी हैं, क्योंकि इन दोनों प्रक्रमों में पानी की बचत हो रही है।

5. यदि आपके घर में दो दिनों तक पानी न रहे तो सोचिये और सूची बनाइए कि आपको क्या-क्या परेशानियाँ होंगी?
उत्तर- सबसे पहले तो मुझे शौच की परेशानी होगी। उन दोनों दिन हम नहा भी नहीं पाएंगे। भोजन बनाने के लिए कहीं दूर कुएँ या हैंडपंप से पानी लाना पड़ेगा। उसी पानी से बरतन भी साफ किया जायेगा। कुल मिला-जुलाकर काफी कठिनाई होगी।

6. जल के वितरण को स्पष्ट कीजिए। जल का संरक्षण आवश्यक है, कैसे और क्यों?
उत्तर- पृथ्वी पर जल विचित्र रूप में वितरीत है। लगभग 71% जल तो समुद्र अपने गर्भ में रखे हुए है। यह जल न तो कृषि के काम आता है और न ही पीने के। पीने योग्य जल केवल छत्रक, पहाड़ों पर के बर्फ, भूमिगत जल, झील, नदियाँ, वायुमंडल के जल से कृषि कार्य तो होता ही है, पीने के काम भी आता है।

         ये ही जल मानवोपयोगी हैं। लेकिन इनका दोहन आसान नहीं। भूमिगत जल को कुआं खोद कर या हैंड पंप धंसा कर पानी निकालते हैं। वायुमंडल के जल के लिये बादल बनने, फिर वर्षा होने तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। छत्रक और पहाड़ों पर के बर्फ गर्मी आने पर ही गलते हैं और नदियों के माध्यम से हम तक पहुँचते हैं।

          नदियाँ भी हर गाँव में नहीं होती और उनसे भी जल निकालकर हर गाँव तक पहुँचाना एक कठिन कार्य है। सबसे आसानी से प्राप्त होनेवाला जल भूमि के अन्दर का जल है। तालाब का जल भी उपयोग करना आसान होता है। अतः हमें इन्हीं जलों को संरक्षित करना चाहिए। भूमि के अन्दर जल की कमी न होने पाये या फिर बढ़ता जाय इसके लिए वर्षा जल को किसी तरकीब से भूमि के अन्दर तक पहुंचा दिया जाय।

      छत पर के वर्षा जल को पाइपों के सहारे भूमि के जल स्तर तक पहुँचा सकते हैं या तालाब और गड्ढों में जल एकत्र करेंगे जो धीरे-धीरे रीस-रीस कर भूमि के अन्दर जाते हैं। यदि जल एक बार समाप्त हो जाय तो बहुत-बहुत दिनों तक प्रतीक्षा के बाद जल प्राप्त होता है। इसी कारण जल का संरक्षण आवश्यक है।

7. प्रमुख महासागरों के नाम विश्व के नक्शे पर दर्शाइए।
उत्तर- विश्व में मुख्यतः चार महासागर हैं:

(क) हिन्द महासागर

(ख) प्रशान्त महासागर

(ग) अटलांटिक महासागर तथा

(घ) आर्कटिक महासागर

बिन पानी सब सून

विश्व के प्रमुख महासागरों के नाम

8. भारत में मीठे पानी की झीलें कहाँ-कहाँ हैं? पता कीजिए कि ये किस राज्य में अवस्थित हैं?
उत्तर- भारत में मीठे पानी की झीलें निम्नलिखित हैं:

(क) डल झील– श्रीनगर (जम्मू कश्मीर)

(ख) नैनी झील– नैनीताल (उत्तराखंड)

(ग) काँवर झील– बेगूसराय (बिहार)

(घ) बरैला झील– वैशाली (बिहार)

        इसके अलावा बुलर झील, पिछोला झील, लूनर झील, कोलरू झील, फतेह सागर झील आदि मीठे पानी की झीलें हैं।

9. ज्वार-भाटा क्या है? ये किस प्रकार उत्पन्न होते हैं?
उत्तर- समुद्र का पानी जब ऊपर उठे और तटवर्ती भूमि को डूबो दे तो इसे ज्वार कहते हैं। फिर यह समुद्र जल कम होकर पीछे लौट जाय तब इसे भाटा कहते हैं। यह प्रतिदिन होता है। पहले ज्वार उठता है और बाद में भाटा होता है।

            सूर्य और चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण महीना में दो बार ज्वार-भाटा आता जाता है। अर्द्ध मासिक ज्वार ऊँचा होता है, जिसके बल पर बड़े-बड़े जहाज आंतरिक पत्तनों तक पहुँच जाते हैं। फिर वह भाटा के समय लौटकर समुद्र में चले जाते हैं।

10. जल-चक्र किसे कहते हैं?
उत्तर- जल-चक्र क्रिया हमारे वायुमंडल एवं पृथ्वी तंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता है। पृथ्वी पर अवस्थित जल का वाष्प बनना, वाष्प से बादल बनना और पुन: वर्षा के रूप में बरसकर पृथ्वी पर पहुँचकर जल बनना आदि क्रिया को जल-चक्र कहते हैं। जल-चक्र का प्रक्रम सदैव चलते रहता है।

बिन पानी सब सून

जल-चक्र

11. समुद्र के जल में तैरना मुश्किल है। क्यों?
उत्तर- समुद्र के जल में हमेशा तरंगे उठती और गिरती रहती हैं। ऐसी स्थिति में तैराक अपने को सम्भाल नहीं पाता। अपने को संभालने की कोशिश में वह थक जाता है और कभी-कभी इसमें डूब भी जाता है। इसीलिये कहा गया है कि समुद्र के जल में तैरना मुश्किल है।

12. समुद्र का जल खारा होता है। क्यों?
उत्तर- समुद्र का जल इसलिए खारा होता है, क्योंकि इसके एक लीटर पानी में 35 ग्राम नमक होता है। इसी कारण यह पानी पीने के काम नहीं आता। इसमें नमक की मात्रा बढ़ने का कारण है कि नदियाँ इसमें विभिन्न पदार्थों को पहुँचाते रहती हैं, जिनमें कि नमक भी होता है। इधर समुद्र में वाष्पीकरण बराबर होते रहता है। इस कारण पानी तो उड़ जाता है और नमक एकत्र होते रहता है। यह प्रक्रम लाखों-लाख वर्ष से हो रहा है। फलतः समुद्र में पर्याप्त नमक एकत्र हो गया है।

13. भूगर्भीय जलस्तर में कमी आ रही है। क्यों?
उत्तर- विभिन्न कल-कारखानों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इन कारखानों में जल की खपत बढ़ती जा रही है। नगरों में पाइपों द्वारा जल का वितरण होता है। लापरवाही से नल को खुला छोड़ देते हैं। जहाँ एक लीटर जल का उपयोग करते हैं, वहीं 10 लीटर बेकार बहा देते हैं। पहले जहाँ एक लोटा जल से शौच कर्म पूरा हो जाता था, वहीं अब फ्लश के कारण 5 से 10 लीटर तक जल खर्च करना पड़ता है। इधर भूगर्भीय जल का उपयोग तो बढ़ा लेकिन भू-गर्भीय जल के स्तर को बचाये रखने या ऊपर करने का प्रयत्न नहीं हुआ। यही कारण हैं कि भूगर्भीय जल में कमी आ रही है।

14. वाटर हार्वेस्टिंग कैसे करेंगे?
उत्तर- वर्षा के पानी को एकत्र कर किसी प्रक्रम द्वारा जमीन के अन्दर पहुँचाकर हम ‘वाटर हार्वेस्टिंग’ कर सकते हैं। वर्षा जल को छतों पर एकत्र कर पाइपों के सहारे जमीन में जलस्तर तक पहुँचाया जा सकता है। गाँवों में गड्ढा, तालाब आदि खोद कर उसमें वर्षा जल एकत्र करेंगे। इससे धीरे-धीरे रिसकर पानी जलस्तर तक पहुँचता रहेगा।

15. आप फुटबॉल के खिलाड़ी हैं, क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर कहते हैं कि पानी बचाइए। क्या आप उनकी बात मानेंगे और क्यों?
उत्तर- हाँ, हम मानेंगे, क्योंकि यह सबके हित की बात है।

16. ज्वार-भाटा से क्या-क्या लाभ और नुकसान हैं। सूची बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर-
ज्वार-भाटा से लाभ-

⇒ मछलियाँ तट के निकट आ जाता है।

⇒ शंख सोपी, कौड़ियां तट के निकट आ जाता है।

⇒ आंतरिक पत्तनों तक जहाज आ जाता है।

ज्वार-भाटा से नुकसान-

⇒ लोगों के सामान बहा ले जाती हैं।

⇒ आर्थिक नुकसान की आशंका मिलती हैं।

⇒ कभी-कभी अनजान लोग बह जाते हैं आ जाते हैं।

17. पानी के उपयोग से संबंधित अच्छी आदतों संबंधी अखबार को इकट्ठा कीजिए और स्क्रैप बक बनाक कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।


Read More: 

अध्याय-7  जीवन का आधार पर्यावरण

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण


अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर सही (✓) का निशान लगाएँ।

1. जल प्रदूषण हो रहा है:
(क) पौधो के कटाव से
(ख) वाहन चलाने से
(ग) पानी पीने से
(घ) पानी में दूषित पदार्थ मिलने से
उत्तर- (घ) पानी में दूषित पदार्थ मिलने से

2. पानी की शुद्धता हो सकती है:
(क) मच्छर पालने से
(ख) तोता पालने से
(ग) बत्तख पालने से
(घ) मछली पालने से
उत्तर- (घ) मछली पालने से

3. बढ़ती जनसंख्या के कारण हो रहा है
(क) वृक्षों का तेजी से कटाव
(ख) भवनों का निर्माण
(ग) आधारभूत संरचना का निर्माण
(घ) इनमें सभी
उत्तर- (घ) इनमें सभी

4. पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाना चाहिए:
(क) खूब पौधे लगाना
(ख) गंदे जल की उचित निकासी का प्रबंध
(ग) गाड़ियों का कम उपयोग
(घ) इनमें सभी
उत्तर- (घ) इनमें सभी

अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण

ii. खाली जगहों को भरिए।

(1) कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बन डाइआक्साइड गैसें वायु प्रदूषण पैदा करता है।

(2) ध्वनि की तीव्रता को डेसिबल में मापा जाता है।

(3) सोंस/ डॉल्फिन को संरक्षित राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है।

जीवन का आधार पर्यावरण

सोंस/ डॉल्फिन 

अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. वृक्षों की संख्या-वृद्धि के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर- वृक्षों की संख्या-वृद्धि के लिए हमें संकल्पबद्ध होना पड़ेगा। हमें संकल्प लेना होगा कि प्रत्येक वर्ष हम कुछ-न-कुछ वृक्ष अवश्य लगायेंगेऔर उसकी देखभाल करेंगे, बहुत नहीं तो कम-से-कम वर्ष में 5 वृक्ष। फलदार वृक्ष हो तो बहुत अच्छा, पत्तेदार वृक्ष तो पर्यावरण के लिए प्राण माने जाते हैं। हम न तो वृक्ष काटेंगे और न किसी को काटने देंगे। पशुओं से रक्षा के लिए हम वृक्षों की घेराबन्दी कर देंगे।

2. नदियों के जल को स्वच्छ बनाने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर- नदियों के जल को स्वच्छ रखने के लिए हम गाँव-नगर के नाले-नलियों को नदियों तक पहुँचने के पहले ही रोक कर गन्दे जल की सफाई करके नदियों में छोड़ेंगे। नदी तट पर अवस्थित कारखानों पर दबाव डालेंगे कि कारखानों के कचरा की सफाई कर ही उसके जल को नदी में छोड़ें। मृत पशुओं के शव को नदी में नहीं बहाने देंगे। इस काम के लिए एक संगठन खड़ा करना होगा और नदी तट के सभी गांवों में उसकी शाखाएँ संगठित करनी होंगी।

3. उन क्रियाकलापों की सूची बनाइए जिनसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है?
उत्तर- वे क्रियाकलाप निम्नांकित हैं जिनसे पर्यावरण को नकसान पहँचता है:-

⇒ खनिज ईंधनों से चलने वाली सवारियों के साधनों से निकलने वाले धुएँ से।

⇒  खनिज कोयला जलाने वाले कल-कारखानों से निकले धुएँ से।

⇒ आवाज करनेवाले कारखानों तथा मोटर-वाहनों के कर्कश हॉर्न की आवाज से।

⇒ पेड़-पौधों की अंधा-धुंध कटाई से।

⇒ नदी, तालाब, कुआँ आदि के जल को गंदा करने से।

⇒ पॉलीथीन के उपयोग से।

⇒ मरे हुए जानवरों को खुले वातावरण में फेंकने से।

4. पॉलीथीन के विकल्प क्या-क्या हो सकते हैं?
उत्तर- रद्दी कागज के ठोंगा के साथ जूट के थैला, कपड़े का थैला या इसी प्रकार किसी प्रकार के थैला पॉलीथीन के विकल्प हो सकते हैं।

5. पता कीजिए कि कितने घरों का बेकार पानी बाहर गली या सड़क पर गिरता है। कितने घरों का पानी सोख्ता गड्ढे में गिरता है?
उत्तर- मेरे गाँव के किसी भी घर का पानी गली या सड़क पर नहीं गिरता। सभी ने कोई-न-कोई व्यवस्था कर रखी है। गली में जो घर हैं उनका पानी नाली में गिरता है। नाली का पानी मुख्य सड़क के बड़े नाले में गिरता है, जो गाँव के बाहर दक्षिण में अवस्थित एक गड्ढे में एकत्र होता है जो कुछ घर नाली से सम्बद्ध नहीं हैं, उन्होंने सोख्ता गड्ढा बना रखा है और घर का पानी उसी में गिराते हैं।

6. शहरी एवं ग्रामीण पर्यावरण में क्या-क्या अंतर दिखाई पड़ते हैं?
उत्तर- शहरी पर्यावरण दमघोंटू रहता है, जबकि गाँव का पर्यावरण खुला-खुला होता है। शहरों में पेड़-पौधों की कमी होती है जबकि गाँवों में अपेक्षाकृत अधिकता है। शहरों में छोटे-बड़े वाहनों की अधिकता है तो वहीं गाँवों में खनिज तेल (पेट्रोल, डीजल) चालित वाहन एक-दो ही दिखाई पड़ते हैं। गाँवों में सायकिल, बैलगाड़ा, टमटम ही अधिक दिखते हैं।

7. प्रदूषण के क्या कारण हैं? इनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर- प्रदूषण के कारण- अधिक भीड़-भाड़ में पेट्रोल-डीजल चालित वाहन चलाने से उनके द्वारा निकले धुएँ से वायु प्रदूषण होता है। मशीनों, वाहनों, हॉर्न, लाउडस्पीकरों द्वारा निकले कर्कश आवाज से ध्वनि प्रदूषण होता है। नदियों में गन्दगी मिलाने, तालाबों में कपड़ा साफ करने और पशुओं को नहलाने, कुआँ के निकट कचड़ा एकत्र करने से जल प्रदूषण होता है।

प्रदूषण का हमारे जीवन पर प्रभाव- वायु प्रदुषण से श्वास रोग होता है, जबकि ध्वनि प्रदूषण से कान की बीमारी होती है और कभी-कभी बहरेपन का शिकार भी होना पड़ता है। जल प्रदूषण से पेट की बीमारियाँ होती हैं। खासकर डायरिया का प्रकोप बढ़ता है।

8. हम ग्लोबल वार्मिग को कैसे कम कर सकते हैं?
उत्तर- ग्लोबल वार्मिंग अर्थात भूमंडलीय तापन को कम करने के लिए हमें अपनी सुविधाओं में कटौती करनी होगी। जेनरेटर, फ्रीज, ए.सी., खनिज तेल (पेट्रोल, डीजल) चालित वाहनों का उपयोग कम कना होगा। हमें वे सब उपाय अपनाने पड़ेंगे, जिनसे ओजन परत की क्षति न हो और सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाएँ।


Read More: 

अध्याय-6 हमारा पर्यावरण

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-6 हमारा पर्यावरण


अध्याय-6 हमारा पर्यावरण

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प चुने-

(1) इनमें कौन सी प्राकृतिक पर्यावरण की वस्तु है।

(क) पुल

(ख) मकान

(ग) जल

(घ) सड़क

उत्तर- (ग) जल

(2) पर्यावरण कितने प्रकार का होता है?

(क) दो

(ख) तीन

(ग) चार

(घ) अनगिनत

उत्तर- (क) दो (प्राकृतिक और मानव निर्मित पर्यावरण)

(3) पृथ्वी के चारों ओर क्या है?

(क) वायु

(ख) जल

(ग) पर्यावरण

(घ) सड़क

उत्तर- (ग) पर्यावरण

ii. खाली जगहों को भरिए-

(1) पेड़-पौधे एवं जीव मिलकर  जैव पर्यावरण बनाते हैं।

(2) पेड़-पौधे जीव-जन्तु जैव मंडल  के अंग हैं।

(3) मनुष्य ने अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए चीजों को बनाया है।

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. पर्यावरण किसे कहते हैं?
उत्तर- हमारे चारों ओर पाए जाने वाले प्राकृतिक एवं मानवीय दशाओं के आवरण को पर्यावरण कहते है। अर्थात हमारे आस-पास जो भी दृश्य और अदृश्य वस्तुएँ हैं, इन सभी को मिलाकर बनने वाले अन्तर्जाल को पर्यावरण कहते हैं। नदी, पहाड़, जंगल, जीव-जंतु, घर, सड़क, पुल, कल-कारखाने आदि दृश्य वस्तुएँ हैं। वायु, मानवीय रीति-रिवाज, परम्पराएँ, आदतें आदि अदृश्य वस्तुएँ हैं। इन सभी को मिलाकर पर्यावरण का निर्माण होता है।

2. पर्यावरण कितने प्रकार के होते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर- पर्यावरण मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं-

(क)  प्राकृतिक पर्यावरण तथा

(ख) मानव निर्मित पर्यावरण।

(क) प्राकृतिक पर्यावरण- प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत नदी, पहाड़, जंगल, जैव मंडल आदि आते हैं। जैव मंडल में सभी जीव-जन्तुओं को रखा गया है।

(ख) मानव निर्मित पर्यावरण- छोटे-बड़े घर और भवन, कल-कारखाने, कृषि से संबंधित उपकरण, कुआँ, तालाब, सड़क, पुल, पुलिया, गली-कुची आदि मानव निर्मित पर्यावरण है।

3. स्थलमंडल, जलमंडल एवं वायुमंडल किसे कहते हैं?
उत्तर- स्थलमंडल- भूमि का वह भाग, जिस पर जीव-जंतु रहते हैं। जैसे- मकान, पेड़-पौधे, पहाड़, पठार, मैदान और खेत-खलिहान आदि को स्थलमंडल कहते हैं। 

जलमंडल- सागर, महासागर, झील, नदी, कुआँ, तालाब, बादल, वर्षा आदि सभी मिलकर जलमंडल का निर्माण करते हैं।

वायुमंडल- जिस गैसीय आवरण से पृथ्वी घिरी हुई है उसे वायुमंडल कहते हैं। इनमें मुख्य गैसे हैं- नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड। ऑक्सीजन को मनुष्य सॉस में लेता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड से पौधे अपना भोजन बनाते हैं।

4. सांस्कृतिक पर्यावरण के तहत कौन-कौन सी बातें आती हैं?
उत्तर- समाज में तरह-तरह के रीति-रिवाज, परम्पराएं, उत्सव आदि देखने को मिलते हैं। शादी-ब्याह के अवसर पर खुशियों में शरीक होना, छोटों को प्यार एवं बड़े-बुजुर्गों का सम्मान ये सभी हमारी सांस्कृतिक पर्यावरण के अंग हैं। मुलाकात होने पर अभिवादन के तरीके, खुशियों को व्यक्त करने के तरीके, शोक प्रकट करने के भाव, पर्व-त्योहारों पर गाए जाने वाले मंगलगीत, पहनावा, विशेष प्रकार के पकवान ये सब संस्कृति की पहचान है। यही सब मिलकर सांस्कृतिक पर्यावरण का निर्माण करते है।

       वृक्ष-पूजा, कुआँ पूजा, गंगा पूजन, सूर्य को जल अर्पण आदि सांस्कृतिक पर्यावरण में ही आते हैं। जिन प्राकृतिक साधनों से हमें लाभ पहुँचता है उन सभी को आदर देने के लिये हमारे पूर्वजों ने किसी-न-किसी रूप में उन्हें पूजना आरम्भ कर दिया।

5. मानव निर्मित पर्यावरण के कारण प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है। कैसे?
उत्तर- मानव अपने लाभ और आराम के लिए अनेक प्रकार के कार्य करता है। वह मकान बनाता है, सड़क बनाता है, कारखाने बनाता है, आवागमन के साधन बनाता है। इन सबको संचालित करने के लिए खनिज इंधनों की आवश्यकता होती है। खनिज निकालने में प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है।

          भवन और कारखाने तथा सड़क बनाने के लिए पत्थर की गिट्टी की आवश्यकता पड़ती है। सीमेंट बनाने के लिए चूना-पत्थर और विभिन्न खनिजों की आवश्यकता पड़ती है। पत्थर गिट्टी के लिए पहाड़ तोड़े जाते हैं। इस प्रकार इन सभी कार्यों से पर्यावरण को नुकसान पाएँचता है।

6. किन घटनाओं से सांस्कृतिक पर्यावरण को क्षति होती है?
उत्तर- आज यह प्रथा-सी चल गई है कि पढ़-लिखकर अपना गृह गाँव छोड़कर लोग अन्यत्र नौकरी पर चले जाते हैं। वहाँ विभिन्न स्थानों और परंपरा रिवाजों वाले लोग रहते हैं। उनके रहन-सहन और खाने-पीने में भी समानता नहीं रहती। अत: पड़ोसी होकर भी व्यक्ति एक-दूसरे के पर्व-त्योहार में हिस्सा नहीं ले पाता और इधर अपने गाँव-नगर के त्योहार तो छूट ही जाते हैं। इन्हीं कारणों से सांस्कृतिक पर्यावरण को क्षति होती हे।

7. आपके पास कौन-सा पारितंत्र है? चित्र बनाकर किसी एक का वर्णन करें।
उत्तर- हमारे पास स्थलीय पारितंत्र है। इस पारितंत्र में नदी, पहाड़, पेड़-पौधे, सड़क, घर, विद्यालय, आवागमन के साधन, कुआँ, चापाकल आदि हैं। इसमें खेत-खलिहान भी शामिल हैं जहाँ से हमें अनाज और सब्जियाँ मिलती है। स्थलीय पारितंत्र का चित्र निम्नांकित है:-

हमारा पर्यावरण

स्थलीय पारितंत्र

8. हम किन उपायों को अपनाकर पानी के खर्च को कम कर सकते हैं?
उत्तर- पानी का सही उपयोग करके ही हम पानी के खर्च को कम कर सकते हैं। हमें इसका अपव्यय नहीं होने देना चाहिए।

9. पर्यावरण को नुकसान पहुँचाकर हम अपना ही जीवन संकट में डाल रहे हैं। कैसे?
उत्तर- हम कभी-कभी अनजाने में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं और कभी-कभी हम जान-बूझ कर भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचा देते हैं। हम कभी गन्दी बाल्टी को कुएँ में डाल देते हैं। गाँव या शहर की नालियों को नदी में मिला देते हैं। इससे नदी जल गंदा हो जाता है। गन्दे कएँ और गन्दी नदी का पानी पी कर हम स्वयं बीमार हो जाते हैं। विभिन्न कारगुजारियों से हम वायु को दूषित कर देते हैं और हम ही उस वायु में सांस लेते हैं और बीमार पड़ जाते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचा कर हम अपना ही जीवन संकट में डाल लेते हैं।

iv. प्रातःकालीन बाल सभा में चर्चा कीजिए-

1. पर्यावरण संरक्षण- हमें हर हाल में पर्यावरण को संरक्षित रखना चाहिए। शुद्ध और साफ पर्यावरण में ही हम या हमारा समाज स्वस्थ रह सकता है। अतः सबको स्वस्थ रखने के लिए हमें पर्यावरण संरक्षण करना ही होगा।

2. वृक्षारोपण- आजकल बड़ी तेजी से पेड़ों की कटाई हो रही है। घर बनवाने और फर्निचर तथा जलावन के लिए लकड़ियों की आवश्यकता बढ़ चली हे। इस कारण वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगी है। इस पर रोक लगाने के लिए हमें वृक्षारोपण पर जोर देना चाहिए।

3. कटता जंगल-घटता जीवन- जैसे-जैसे जंगल कटते जा रहे हैं वैसे-वैसे कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन का संतुलन बिगड़ने लगा है। इससे हमें एक तो ऑक्सीजन की कमी हो रही है और दूसरी ओर वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगी है। इन दोनों बातों का कुप्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने लगा है। इससे औसत आयु वर्ष घटने लगा है। अतः अपने जीवन को बचाने के लिए हमें जंगलों को बचाना होगा।

4. जैविक कचरा समाप्त करने में जानवरों की भूमिका- जैविक कचरा से तात्पर्य है मृत पशु। इनको समाप्त कने के लिए गिद्ध, चील, कुत्ते सियार आदि बड़े काम के सिद्ध होते हैं। बल्कि इन्हें तो प्राकृतिक सफाई कर्मचारी तक भी कहा जाता है।


Read More: 

अध्याय-4 वायुमंडल एवं इसका संघटन

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-4 वायुमंडल एवं इसका संघटन


वायुमंडल एवं इसका संघटन

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प को चुनें।

(1) पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर जाने पर साँस लेना कठिन होता है क्योंकि-

(क) वातावरण में कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है।

(ख) वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है।

(ग) वातावरण में नाइट्रोजन की मात्रा कम जाती हैं।

(घ) वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम जाती है।

उत्तर- (घ) वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम जाती है।

(2) पहले कौन-सा भाग गर्म होता है?

(क) जल की सतह

(ग) पर्वतीय भाग

(ख) स्थल की सतह

(घ) वायुमंडल

उत्तर- (ग) पर्वतीय भाग

(3) वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा है-

(क) 25.42

(ख) 78.03

(ग) 20.99

(घ) 2

उत्तर- (ग) 20.99

(4) वायुमंडल की सबसे पहली परत है-

(क) समताप मंडल

(ख) क्षोभमंडल

(ग) वाह्यमंडल

(घ) मध्यमंडल

उत्तर- (ख) क्षोभमंडल

(5) रेडियो तरंगे किस परत से परावर्तित होकर पृथ्वी पर वापस लौटती हैं-

(क) क्षोभ मंडल

(ख) आयनमंडल

(ग) ओजोनमंडल

(घ) बर्हिमंडल

उत्तर- (ख) आयनमंडल

ii. रिक्त स्थानों को भरिए

1. समताप मंडल का आरंभ क्षोभ मंडल के बाद होता है।

2. बाह्यमंडल का फैलाव 80 से 400 किलोमीटर तक है।

3. हल्की गैसें बर्हिमंडल से अंतरिक्ष में तैरती रहती हैं।

4. वायुमंडल का विस्तार पृथ्वी की सतह से 1000 किलोमीटर की ऊँचाई तक है।

5. वायुमंडल में सबसे अधिक नाइट्रोजन गैस पाई जाती है।

6. तापमान बढ़ने से समुद्र के जल स्तर में वृद्धि हो रही है।

7. कार्बन डाइऑक्साइड गैस को ग्रीन हाउस गैस भी कहते हैं।

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

1. वायुमंडल किसे कहते हैं? वायुमंडल के गैसों के घटक को वृत्त में दिखाइए।
उत्तर- धरातल से लेकर ऊपर कई सौ मीटर तक वायु पाई जाती है। अर्थात हमारी पृथ्वी के चरों ओर घिरी हुई वायु के आवरण को ही ‘वायुमंडल’ कहते हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि पृथ्वी हमेशा सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती रहती है तो इसके साथ ही वायुमंडल भी चक्कर लगाते रहता है। एक खास ऊँचाई तक ही जहाँ हमारी नाक रहेगी वहाँ वायु भी रहेगी। वायुमंडल के गैसों के घटकों का वृत्त निम्नलिखित है-

वायुमंडल एवं इसका संघटन

पृथ्वी के वातावरण के इकाई आयतन में गैसों की मात्रा

2. ग्रीन हाउस को समझाइए।
उत्तर- ऐसा प्रक्रम जिससे ताप को ह्रासित होने से बचाया जा सके, उसे ग्रीन हाउस कहते हैं। बहुत ठण्डे देशों में प्लास्टिक या कांच के मकान बनाकर उसी में बगवानी की जाती है। ऐसे घर में ताप प्रवेश तो कर जाता है, लेकिन उससे निकल नहीं पाता। इसी तरह के मकान को ‘ग्रीन हाउस’ कहते हैं। ग्रीन हाउस के पौधों पर बाहरी आवो-हवा का असर नहीं पड़ता, जिससे वे सदा हरे-भरे रहते हैं। इसी से उसका नाम ‘ग्रीन हाउस’ रखा गया है।

वायुमंडल एवं इसका संघटन

ग्रीन हाउस

3. कार्बन डाइऑक्साइड भी जीवन के लिये जरूरी है। कैसे?
उत्तर- वैसे तो कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा एक सीमा से अधिक वृद्धि होने पर हारिकाकरक मानी जाती है, लेकिन यह जीवन के लिये जरूरी भी है क्योंकि पेड़-पौध ‘कार्बन डाइऑक्साइड’ से ही अपना भोजन बनाते हैं। सूर्य के प्रकाश में पेड़-पौध अपने हरे पत्तों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से अपना भोजन तैयार करते हैं। ये इस प्रक्रम में कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग तो कर ही लेते हैं, बदले में पर्याप्त ऑक्सीजन निकालते हैं जो जीव-जंतुओं के लिये प्राण वायु का काम करता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि कार्बन डाइऑक्साइड भी जीवन के लिये बहुत ही जरूरी है।

4. वायुमंडल में पाई जाने वाली विभिन्न परतों के नाम लिखिए। मोटे कूट या थर्मोकोल की मदद से इन परतों को क्रमबद्ध दिखाइए।
उत्तर- वायुमंडल में नीचे से ऊपर पाई जानेवाली विभिन्न परतों के नाम निम्नलिखित हैं:

(क) क्षोभमंडल

(ख) समतापमंडल

(ग) मध्यमंडल

(घ) बाह्य मंडल/आयनमंडल 

(ड़) बर्हिमंडल।

         इस प्रकार पृथ्वी से सटे सबसे नीचे क्षोभमंडल है और सबसे ऊपर बर्हिमंडल है।
(नोट : प्रश्न के दूसरे भाग को छात्र स्वयं करें।)

5. किसी एक मंडल के न होने से क्या कठिनाइयाँ होंगी? लिखिए।
उत्तर- सभी मंडलों की अपनी-अपनी उपयोगिता है। एक मंडल के काम को कोई दूसरा मंडल नहीं कर सकता। अतः किसी एक मंडल के भी न रहने से सम्भव है जलवायु में भारी परिवर्तन हो जाय, जिससे मानव जीवन ही खतरे में पड़ जाय या इसका कोई क्रियाकलाप बाधित हो जाय। इस प्रकार यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि किस मंडल के नहीं रहने से क्या कठिनाई होगी। लेकिन यह निश्चित है कि कोई-न-कोई कठिनाइयाँ अवश्य ही होगी।

6. पृथ्वी पर तापमान बढ़ने से जीवन के लिये खतरा बढ़ता है। कैसे?
उत्तर- पृथ्वी पर तापमान बढ़ने से जीवन के लिये खतरा बढ़ता है, क्योंकि पृथ्वी पर तापमान के बढ़ने से पहाड़ों पर जमें बर्फ तो गलते ही हैं साथ में ध्रुवों के पास के बर्फ भी गलने लगते हैं। जिसके परिणामस्वरूप समुद्रों का जलस्तर बढ़ने लगता है जिससे समुद्रों के बीच बसे द्वीप पानी में डूब जाते हैं। वहाँ के लोगों को पलायन करना पड़ता है। गंगा नदी के डेल्टा के कुछ द्वीप पानी में विलीन हो चुके हैं। तटवर्ती निवासियों के जीवन पर खतरे की तलवार लटक रही है, कब उनका आवास समुद्र में समा जाएगा, कोई ठीक नहीं।

7. रेडियो और दूरदर्शन की तरंगें किन माध्यमों से हम तक पहुँचती हैं? पता कीजिए।
उत्तर- पृथ्वी से प्रसारित रेडियो और दूरदर्शन की तरंग बाह्य मंडल से होकर पुन: पृथ्वी पर हमारे रेडियो या दरदर्शन पर दिखाई पड़ता है। ऊँचे फ्रीक्वुऐंसी (Frequency) की तरंगों को यह मंडल आसानी से प्रसारित कर देता है। इसी सुविधा का लाभ उठाकर आज घर-घर में टेलिविजन और गाँव-गाँव तक मोबाइल फोन पहुँच गये हैं।

8. शीत प्रदेशों या ध्रुवों पर सब्जियों का उत्पादन कैसे करते है?
उत्तर- शीत प्रदेशों या ध्रुवों पर अत्यधिक ठंड पड़ती है। इस कारण-वहाँ कोई वनस्पति नहीं उग पाती। लेकिन ‘ग्रीन हाउस’ का उपयोग कर वहाँ भी सब्जियाँ उगा ली जाती है। यदि ग्रीन हाउस (मकान) बड़ा हो तो अनाज भी उपजाया जा सकता है।

9. वायमंडल की विभिन्न परतों को चार्ट पेपर पर अलग-अलग रंगों से दिखलाइए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें

10. ओजोन परत को खतरे से बचाना जरूरी है? क्यों और कैसे?
उत्तर- आजोन परत को खतरे से बचाना इसलिये जरूरी है क्योंकि यह परत पृथ्वी और पृथ्वीवासियों की रक्षा करता है। सूर्य से निकलने वाली किरणों में एक खतरनाक किरण ‘पराबैंगनी किरण’ है। यदि यह किरण पूरी तरह पृथ्वी पर पहुँच जाय तो शायद जीवन ही समाप्त हो जाय। लेकिन गनीमत है कि इन खतरनाक पराबैंगनी किरणों को ओजोन परत सोख लेती है और उन्हें पृथ्वी पर पहुँचने नहीं देती। लेकिन मानव की लापरवाही और स्वार्थ के चलते ओजन परत पर खतरा मंडरा रहा है। इसका कारण है कि हम धड़ल्ले से ऐसे वाहनों और उपकरणों का उपयोग करने लगे हैं, जिनसे निकली गैसें ओजोन परत को नष्ट करने पर उतारू हैं। अत: उसे बचाने के लिए हमें खनिज तेज चालित वाहनों तथा सुविधा देने वाले उपकरणों का उपयोग कम करना चाहिए।

11. पता कीजिए कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कौन-कौन से शहर, द्वीप और देश पर खतरा है?
उत्तर- समुद्र का जल स्तर बढ़ने से वैसे तो विश्व के सभी तटवर्ती गाँव और शहरों पर खतरा है लेकिन अपने देश भारत में पूर्वी डेल्टा के द्वीपों, मुंबई तथा चेन्नई शहरों को विशेष खतरा है। मुंबई में थोडी वर्षा से ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, क्योंकि समुद्र में पानी जा नहीं पाता और जाता भी है तो बहुत धीरे-धीरे। कई देशों जैसे- श्रीलंका, मालद्वीप, मारीशस तथा मेडागस्कर पर भारी खतरा है। हिन्द महासाग, बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में अवस्थित छोटे-छोटे भारतीय द्वीप तो पहले ही डूबेंगे।


Read More: 

अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ


अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प को चुनें।

(1) छोटानागपुर क्या है?

(क) एक पठार

(ख) एक मैदान

(ग) एक झील

(घ) एक पर्वत

उत्तर- (क) एक पठार

(2) भूसतह पर भूकंप के केन्द्र के ऊपर स्थित स्थान क्या कहलाता है?

(घ) भू-पटल

(क) क्रेटर

(ख) अधिकेन्द्र

(ग) लावा

उत्तर- (ख) अधिकेन्द्र

(3) भारत को कितने भूकंप तीव्रता के क्षेत्रों में बाँटा गया है?

(क) 5

(ख) 4

(ग) 3

(घ) 7

उत्तर- (ख) 4

(4) सतपुड़ा पर्वत उदाहरण है-

(क) भ्रंश घाटी का

(ख) वलित पर्वत का

(ग) ब्लॉक पर्वत का

(घ) भ्रशोत्थ पर्वत का

उत्तर- (ग) ब्लॉक पर्वत का

अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ

ii. सही मिलान कर लिखिए-

                            उत्तर

1. हिमालय- (ख) वलित पर्वत

2. फ्यूजियामा- (क) संचयन पर्वत

3. अरावली- (घ) अवशिष्ट पर्वत

4. दक्कन- (ग) लावा निर्मित पठार

अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ

iii. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए:

अधिकेन्द्र, उद्गम केन्द्र, सिस्मोग्राफ तथा रिक्टर स्केल

उत्तर- अधिकेन्द्र- पृथ्वी के ऊपर उद्गम क्षेत्र के ठीक सामने का भाग ‘अधिकेन्द्र’ कहलाता है। भूकम्प का अधिक कुप्रभाव अधिकेन्द्र के पास ही होता है और उसके चारों ओर क्रमशः कम होते जाता है।

उद्गम केन्द्र- पृथ्वी के अन्दर का वह भाग, जहाँ से भूकम्प की उत्पत्ति होती है उस भाग को ‘उद्गम केन्द्र’ कहा जाता हैं। अर्थात उद्गम केन्द्र तथा अधिकेन्द्र ठीक आमने-सामने होते हैं।

सिस्मोग्राफ- भूकम्प की तीव्रता मापने वाले यंत्र को ‘सिस्मोग्राफ’ कहा जाता हैं। सिस्मोग्राफ रिक्टर पैमाने का बना होता है।

रिक्टर पैमाना- जिस पैमाने में भूकम्प की तीव्रता को मापते हैं उस पैमाने को ‘रिक्टर पैमाना’ कहते हैं। सिस्मोग्राफ का पैमाना ‘रिक्टर’ ही होता है।

अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ

iv. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(1) भूकंप के झटके क्यों आते हैं?
उत्तर- पृथ्वी के अन्दर गतिशील प्लेटों के टकराने से भूकंप के झटके आते है।

(2) भूकम्प का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर- भूकम्प का मानव जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। छोटे-बड़े मकान ध्वस्त हो जाते हैं। बहुत से आदमी उसके मलवे में दब जाते हैं। इस प्रकार भारी जानमाल की हानि होती है।

(3) ज्वालामुखी किसे कहते हैं?
उत्तर- कभी-कभी और कहीं-कहीं पृथ्वी के अन्दर से तरल अग्नि की ज्वाला निकलने लगती है, उसी को ज्वालामखी कहते हैं।

(4) ज्वालामुखी ने मानव जीवन को प्रभावित किया है, कैसे?
उत्तर- पहले तो ज्वालामुखी ने अपने लपेटे में मनुष्य को तो लिया ही, उसके खेत-खलिहान और बाग-बगीचों को जला डाला। जहाँ ज्वालामुखी मृत हो गई और निकला लावा ठंडा हो गया वहाँ मनुष्य को उपजाऊ जमीन मिल गई। इस प्रकार मानव जीवन कुप्रभावित हुआ तो लाभान्वित भी हुआ है।

(5) पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के परिणामस्वरूप निर्मित होनेवाली स्थलाकृतियाँ कौन-कौन सी हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर- पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के परिणामस्वरूप निर्मित होने वाली स्थलाकृतियाँ अनेक हैं। ज्वालामुखी पर्वत पृथ्वी की आंतरिक शक्ति का परिणाम है। पृथ्वी की आंतरिक शक्ति से ही पर्वत/पहाड़, पहाड़ियाँ और पठार बनते हैं। पठारों पर भी पहाड़ियाँ दिख जाती हैं।

(6) मोड़दार एवं संचयन पर्वतों में क्या भिन्नता है एवं क्या समानता है?
उत्तर- धरातलीय भाग पर उत्पन्न दबाव के कारण जब मोड़ पड़ता है तो वह भाग ऊपर उठ जाता है और मोड़दार पर्वत का रूप धारण कर लेता है। इसके विपरीत ज्वालामुखी से निकले मैग्मा और लावा जब काफी मात्रा में एकत्र हो जाते हैं तब कालक्रम में ठंडा होकर संचयित पर्वत बन जाते हैं। दोनों पर्वत ऊंचे होते हैं। लेकिन मोडदार पर्वत काफी ऊंचे होते हैं, जिससे उनपर बर्फ जम जाती है, लेकिन संचयन पर्वत उतने ऊँचे नहीं होते जिससे उन पर बर्फ नहीं जमती। समानता यह है कि दोनों को पर्वत ही कहा जाता है।

(7) पर्वत और पठार में क्या अंतर है?
उत्तर- पर्वत और पठार में यह अंतर है कि पर्वत की ऊँचाई धीरे-धीरे बढ़ती है और ऊपर बहुत कम बराबर स्थान होता है जबकि पठार की ऊँचाई अकस्मात बढ़ती है और ऊपर काफी बराबर स्थान रहता है। अधिक ऊँचे पहाड़ों पर बर्फ जमती है, लेकिन पठारों पर खनिज मिलते हैं।

अध्याय-3 आंतरिक बल(8) पर्वत के प्रकारों का उदाहरण के साथ वर्णन कीजिए।
उत्तर- पर्वत चार प्रकार के होते हैं:-

(क) वलित पर्वत

(ख) भ्रंशोत्थ पर्वत

(ग) संचयन पर्वत और

(घ) अवशिष्ट पर्वत

(क) वलित पर्वत- धरातलीय भाग पर उत्पन्न दाब के कारण चट्टानों में बल पड़ने लगते हैं। इससे वहाँ की धरातल ऊपर उठ जाता है और वलित पर्वत बनता है। उदाहरण में एशिया का हिमालय, यूरोप का रॉकी।

(ख) भ्रंशत्य पर्वत- धरातल पर कभी-कभी समांतर भ्रंश के बाद बीच का भाग ऊपर उठ जाता है और पर्वत-सा दिखने लगता है। ऐसे ही पर्वत को भ्रंशोत्थ पर्वत कहते हैं। जैसे यूरोप का ब्लैक फॉरेस्ट और भारत का विन्ध्याचल।

(ग) संचयन पर्वत- ज्वालामुखी द्वारा निकले लावा ठंडा होकर संचित होते जाते हैं। कालक्रम में इस संचित लावा का ढेर लग जाता है और पर्वत बन जाता है। इसी को संचयन पर्वत कहते हैं। जैसे जापान का फ्यूजियामा तथा अफ्रिका का किलोमंजारो।

(घ) अवशिष्ट पर्वत- हवा, वर्षा, बर्फबारी आदि अपरदन की शक्तियों द्वारा पर्वत की चोटी कटती-छंटती तथा घिसती रहती है। इससे इसकी ऊंचाई बहुत कम हो जाती है। जैसे- अरावली, पूर्वी और पश्चिमी घाट पर्वत।

(9) पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के क्या-क्या प्रभाव नजर आते हैं?
उत्तर- पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के निम्नलिखित प्रभाव नजर आते हैं:-

⇒ भूकम्प,

⇒ ज्वालामुखी तथा

⇒ विभिन्न प्रकार के पर्वतों का बनना।

(10) भूकम्प से सर्वाधिक नुकसान कब एवं कहाँ होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- भूकम्प से सर्वाधिक नुकसान तब होता है जब वहाँ के निवासी लापरवाह रहते हैं। इससे बचने के उपायों से अवगत नहीं रहते। पुनः भूकम्प का अधिक नुकसान वहाँ होता है जहाँ के मकान भूकम्परोधी नहीं बने होते।

(11) भूकम्प से होनेवाली क्षति से हम कैसे बच सकते हैं?
उत्तर- भूकम्प से होनेवाली क्षति से हम तभी बच सकते हैं जब लोगों को इससे बचने के उपायों से अवगत करायें। जो भी भवन बनें उनको वैज्ञानिक ढंग से भूकम्परोधी बनाया जाय। इससे भूकम्प से होनेवाली क्षति को कम किया जा सकता है या क्षति से बचा जा सकता है।

(12) पठार कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर- पठार निम्नलिखित छः प्रकार के होते हैं:-

(क) महाद्वीपीय पठार

(ख) वायूढ़ निक्षेप पठार

(ग) हिमनदीय निक्षेपण पठार

(घ) लावा निर्मित पठार

(ड़) अंतरपर्वतीय पठार और

(च) गिरिपद पठा


Read More: 

अध्याय-2 चट्टान एवं खनिज

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-2 चट्टान एवं खनिज


अध्याय-2 चट्टान एवं खनिज

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प को चुने।

1. इनमें रूपांतरित चट्टान कौन है?

(क) बेसाल्ट

(ख) चूना पत्थर

(ग) संगमरमर

(घ) ग्रेनाइट

उत्तर- (ग) संगमरमर

2. बेसाल्ट किस प्रकार की चट्टान है?

(क) अवसादी

(ख) आग्नेय

(ग) कायांतरित 

(घ) परतदार

उत्तर- (ख) आग्नेय

3. चट्टानों के रूपान्तरण में किसका योगदान होता है?

(क) तापमान

(ख) दबाव

(ग) रासायनिक द्रव्य

(घ) उपर्युक्त सभी 

उत्तर- (घ) उपर्युक्त सभी

ii. खाली जगहों को भरिए:

(क) जो चट्टान ज्वालामुखी से निकले लावा के ठंडा होने से बनती हैं वे आग्नेय चट्टानें कहलाती हैं।

(ख) जिन चट्टानों में परत पायी जाती है उन्हें परतदार चट्टानें कहते है।

(ग) ज्वालामुखी से निकला गर्म पदार्थ लावा कहलाता है।

(घ) अत्यधिक ताप एवं दाब के कारण चट्टानों के लक्षण बदल जाते हैं।

iii. सही मिलान कर लिखिए।

                     उत्तर

1. सेंधा नमक– अवसादी चट्टान

2. ग्रेनाइट– आग्नेय चट्टान

3. संगमरमर– रूपान्तरित चट्टान

iv. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए?

(क) अपने घर में खनिज से बनी हुई चीजों की सूची बनाइए।
उत्तर- तराजू के पलड़े, आभूषण, सायकिल, हल का फाल, खुरपी, हसिया, पहँसुल, लालटेन।

(ख) छत की ढलाई में कौन-सा पत्थर इस्तेमाल होता है?
उत्तर- छत की ढलाई में पहाड़ों से काटकर निकाले गए पत्थरों को टुकड़े बना कर जिसे गिट्टी कहा जाता है, इस्तेमाल होता है। इन पत्थरों का रंग भूरा-स्लेटी होती है। ये आग्नेय चट्टान के उदाहरण कहे जा सकते हैं।

(ग) उन खेलों की सूची बनाइए, जिनमें पत्थरों का इस्तेमाल होता हो।
उत्तर- पत्थरों से खेलने जाने वाले कोई अधिक खेल नहीं है। हाँ, ग्रामीण क्षेत्र के बीच पत्थर के टुकड़ों से एकट-दोकट तथा सरगोटिया खेलते हैं।

(घ) पत्थरों का उपयोग कहाँ-कहाँ होता है? सूची बनाइए।
उत्तर- पत्थरों का उपयोग पहले घर, महल, कोठी और किला बनाने में होता था। वाराणसी के प्राय: सभी प्राचीन भवन पत्थर के ही बने हैं। आज भी झारखंड में पत्थरों का उपयोग घर तथा चहार-दीवारी बनाने में होता है ‘वैसे आम तौर पर सड़क बनाने, मकानों की छत बनाने तथा फर्श को पक्का करने के लिए विभिन्न आकारों के पत्थरों का उपयोग होता है।

(ड़) पता करके लिखिए कि निम्न भवन किन-किन पत्थरों से बना है- 

⇒ रोहतास गढ़ का किला- बलुआ पत्थर

⇒ लाल किला (दिल्ली)- लाल बलुआ पत्थर

⇒ पत्थर की मस्जिद (पटना)- बलुआ पत्थर

⇒ विष्णुपद मन्दिर (गया)- काला बलुआ पत्थर

⇒ आगरा का किला- लाल बलुआ पत्थर

⇒ कुतुबमीनार (दिल्ली)- बलुआ पत्थर

⇒ विशला बुद्ध मूर्ति (गया)- काला बलुआ पत्थर

चट्टान एवं खनिज

काला बलुआ पत्थर

चट्टान एवं खनिज

लाल बलुआ पत्थर

चट्टान एवं खनिज

बलुआ पत्थर से निर्मित मूर्ति

(च) चट्टानों के प्रकार और उनकी बनावट के बारे में लिखिए।
उत्तर- चट्टानें मुख्यत: तीन प्रकार की होती हैं-

1. आग्नेय चट्टान

2. अवसादी चट्टान तथा

3. रूपांतरित चट्टान।

आग्नेय चट्टान- पृथ्वी के अन्दर पिघला पदार्थ धरातल पर आने के क्रम में कभी पहले ही जम जाता है और कभी धरातल के ऊपर पहुँचकर जमता है। ऐसी चट्टानों में परतें नहीं होतीं। इनमें रवा पाये जाते हैं। जो चट्टानें पृथ्वी के अन्दर जमती हैं इनके रवे बड़े होते हैं जबकि पृथ्वी के ऊपर जमने वाली चट्टानों के रवे छोटे या महीन होते हैं। ग्रेनाइट और बेसाल्ट आदि आग्नेय चट्टान के ही उदाहरण हैं।

अवसादी चट्टान- अवसादी चट्टानें अवसादों के एकत्र होने से बनती हैं। ये दो प्रकार की होती हैं। एक पानी के अन्दर तथा दूसरी पानी के बाहर जमीन पर। पानी के अन्दर जमने वाली चट्टानों की परतें अधिक होती हैं क्योंकि ये परत-दर-परत जमी होती हैं। काफी दबाव के कारण ये कड़ी हो जाती हैं और चूना-पत्थर का रूप धारण करती हैं। पानी से बाहर की अवसादी चट्टानें परत-दर-परत ही होती हैं और अपने ही दबाव से दबकर अवसादी चट्टान बन जाती हैं। उदाहरण है बलुआ पत्थर, बलुआ पत्थर कई रंग के होते हैं- लाल, भूरा, काला।

रूपांतरित चट्टान- कभी-कभी आग्नेय या परतदार चट्टानों में ताप और दाब की वृद्धि होती है तो इनके रूप और गुण दोनों में बदलाव आ जाता है। रूप में अंतर के कारण ही इन्हें रूपांतरित चट्टान कहते हैं। चूना-पत्थर अपना रूप बदलकर संगमरमर में बदल जाता है। इसी प्रकार ग्रेनाइट रूपांतरित होकर नाइस बन जाता है।

(छ) चट्टान किसे कहते है? उदहारण के साथ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – पृथ्वी की पर्पटी बनाने वाले खनिज पदार्थ के किसी भी प्राकृतिक पिंड को चट्टान या शैल करते हैं। शैल विभिन्न रंग, आकार एवं गठन की हो सकती है।

जैसे- आग्नेय चट्टान- ग्रेनाइट और बेसाल्ट।

अवसादी चट्टान- चूना-पत्थर, बलुआ पत्थर।

रूपांतरित चट्टान- संगमरमर, नाइस।

(ज) चट्टानों का रूपांतरण कैसे होता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- किसी निश्चित दशाओं में एक प्रकार की शैल चक्रीय तरीके से एक-दूसरे में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार एक शैल से दूसरे शैल में परिवर्तित होने की इस प्रक्रिया को शैल चक्र कहा जाता है।

              द्रवित मैग्मा ठंडा होकर ठोस आग्नेय शैल बन जाता हैं। ये आग्नेय चट्टान/शैल छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होकर अवसादी चट्टान/शैल का निर्माण करते हैं। अत्यधिक ताप एवं दाब के कारण ये आग्नेय एवं अवसादी शैल पुनः कायांतरित चट्टान/शैल में बदल जाते हैं। पुनः अत्यधिक ताप एवं दाब के कारण कायांतरित शैल पिघलकर द्रवित मैग्मा बन जाता है। यह द्रवित मैग्मा पुनः ठंडा होकर आग्नेय चट्टान/शैल में परिवर्तित हो जाता है।

(झ) अवसादी चट्टान तथा आग्नेय चट्टानों में अंतर स्पष्ट कीजिये।

उत्तर- अवसादी चट्टान- अवसादी चट्टानें अवसादों के एकत्र होने से बनती हैं। ये दो प्रकार की होती हैं। एक पानी के अन्दर तथा दूसरी पानी के बाहर जमीन पर। पानी के अन्दर जमने वाली चट्टानों की परतें अधिक होती हैं क्योंकि ये परत-दर-परत जमी होती हैं। काफी दबाव के कारण ये कड़ी हो जाती हैं और चूना-पत्थर का रूप धारण करती हैं। पानी से बाहर की अवसादी चट्टानें परत-दर-परत ही होती हैं और अपने ही दबाव से दबकर अवसादी चट्टान बन जाती हैं। उदाहरण है बलुआ पत्थर, बलुआ पत्थर कई रंग के होते हैं- लाल, भूरा, काला।

आग्नेय चट्टान- पृथ्वी के अन्दर पिघला पदार्थ धरातल पर आने के क्रम में कभी पहले ही जम जाता है और कभी धरातल के ऊपर पहुँचकर जमता है। ऐसी चट्टानों में परतें नहीं होतीं। इनमें रवा पाये जाते हैं। जो चट्टानें पृथ्वी के अन्द जमती हैं इनके रवे बड़े होते हैं जबकि पृथ्वी के ऊपर जमने वाली चट्टानों के रवे छोटे या महीन होते हैं। ग्रेनाइट और बेसाल्ट आदि आग्नेय चट्टान के ही उदाहरण हैं।


Read More: 
error: