अध्याय-5. प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी / NCERT CLASS -9 Geography Solutions (हिंदी माध्यम)

अध्याय-5. प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी

एनसीईआरटी के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



प्राकृतिक वनस्पति तथा

 

1.  वैकल्पिक प्रश्नोत्तर

 (i) रबड़ का संबंध किस प्रकार की वनस्पति से है?
(क) टुन्ड्रा

(ख) हिमालय

(ग) मैंग्रोव

(घ) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन

उत्तर – (घ) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन

(ii) सिनकोना के वृक्ष कितनी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते है?
(क) 100 से०मी०

(ख) 70 से०मी०

(ग) 50 से०मी०

(घ) 50 से०मी० से कम वर्षा

उत्तर – (क) 100 से०मी०        

(iii) सिमलीपाल जीव मंडल निचय कौन-से राज्य में स्थित है?

 (क) पंजाब           

(ख) दिल्ली         

(ग) ओडिशा        

(घ) पश्चिमी बंगाल

 उत्तर – (ग) उड़ीसा

(iv) भारत के निन्मलिखित में से कौन-से जीव मंडल निचय विश्व के जीव मंडल निचयों में नहीं लिए गए हैं?

(क)  मानस          

(ख) मन्नार की खाड़ी       

(ग) नीलगिरी       

(घ) नंदादेवी 

  उत्तर –(क) मानस  

2. संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्न

(i) पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं?

उत्तर – किसी क्षेत्र में पेड़-पौधे तथा जीव-जंतु आपस में अपने भौतिक पर्यावरण से अन्तर्सम्बन्धित होकर जिस तंत्र का निर्माण करते हैं, उसे पारिस्थितिक तंत्र कहा जाता है। पृथ्वी पर पादपों तथा जीवो का वितरण मुख्यतः जलवायु द्वारा निर्धारित होता है।

        किसी क्षेत्र के पादपों की प्रकृति काफी हद तक उस क्षेत्र के प्राणी जीवन को प्रभावित करती है। जब वनस्पति बदल जाती है तो प्राणी जीवन भी बदल जाता है।

(ii) भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण किन तत्वों द्वारा निर्धारित होता है?

उत्तर – भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण निम्नलिखित तत्वों द्वारा निर्धारित होता है-

◆ धरातल का स्वभाव

◆ मृदा में विभिन्नता

◆ धरातलीय उच्चावच

◆ वर्षा की मात्रा

◆ तापमान

(iii) जीव मंडल निचय से क्या अभिप्राय है ? कोई दो उदाहरण दो।

उत्तर -जीव मंडल निचय से अभिप्राय विभिन्न प्रकार के आवासों से हैं। जिसमें विभिन्न प्रकार की वनस्पति उष्णकटिबंधीय वर्षा वन, उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन, कंटीले वन तथा झाड़ियाँ, पर्वतीय वन, मैंग्रोव, घास के मैदान और दलदल सम्मिलित हैं।

          देश में 14 जीव मंडल निचय(आरक्षित क्षेत्र) स्थापित किये गए है। जिसमें दो का नाम सुंदरवन(पश्चिम बंगाल), नंदादेवी(उत्तराखंड) है।

(iv) कोई दो वन प्राणियों के नाम बताइए जो कि उष्णकटिबंधीय वर्षा और पर्वतीय वनस्पति में मिलते हैं।

उत्तर – महोगनी एवं रोजवुड उष्णकटिबंधीय वर्षा वन में और चिर एवं देवदार पर्वतीय वनस्पति में मिलते हैं।

3. निम्नलिखित में अंतर कीजिए :

(i) वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत 

उत्तर – वनस्पति जगत- हमारा देश भारत विश्व की मुख्य 12 जैव-विविधता वाले देशों में से एक है। लगभग 47000 विभिन्न जातियों के पौधे पाए जाने के कारण यह देश विश्व में दसवें स्थान पर और एशिया के देशों में चौथे स्थान पर है। भारत में लगभग 15000 फूलों के पौधे हैं जो कि विश्व में फूलों के पौधे का 6% है। इस देश में बहुत से बिना फूलों के पौधे हैं जैसे कि फर्न, शैवाल(एलेगी) तथा कवक(फंजाई) भी पाए जाते हैं।

प्राणी जगत- वनस्पति की भाँति ही भारत विभिन्न प्रकार के प्राणी संपत्ति में भी धनी है। यहाँ जीवों की लगभग 90000 प्रजातियाँ मिलती है। देश में लगभग 2000 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती है। यह कुल विश्व का 13% है। यहाँ मछलियों की 2546 प्रजातियाँ है जो विश्व के लगभग 12% है। भारत में विश्व के 5 से 8% तक उभयचरी, सरीसृप तथा स्तनधारी जानवर भी पाए जाते हैं।

(ii) सदाबहार और पर्णपाती वन

उत्तर –  सदाबहार वन – ये वन पश्चिमी घाटों के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूहों, असम के ऊपरी भागों तथा तमिलनाडु के तट तक सीमित है। यह उन क्षेत्रों में भली-भांति विकसित है जहाँ 200 सें०मी० से अधिक वर्षा के साथ एक थोड़े समय के लिए शुष्क ऋतु पाई जाती है।

          इन वनों में वृक्ष 60 मीटर या इससे अधिक ऊँचाई तक पहुँचते हैं। क्योंकि यह क्षेत्र वर्ष भर गर्म तथा आर्द्र रहते हैं। अतः यहाँ हर प्रकार की वनस्पति वृक्ष, झाड़ियाँ, लताएँ उगती हैं और वनों में इनकी विभिन्न ऊँचाइयों से कई स्तर देखने को मिलते हैं। 

      वृक्षों में पतझड़ होने का कोई निश्चित समय नहीं होता। अतः वन सालों भर हरे भरे लगते हैं, इसीलिए इसे सदाबहार वन कहा जाता है। इन वनों में पाए जाने वाले व्यापारिक महत्व के कुछ वृक्ष आबनूस(एबोनी), महोगनी, रोजवुड, रबर और सिनकोना है। इन वनों में सामान्य रूप से पाए जाने वाले जानवर हाथी, बंदर लैमूर और हिरन है। 

          एक सींग वाले गैंडे असम और पश्चिम बंगाल के दलदली क्षेत्र में मिलते हैं। इसके अतिरिक्त इन जगहों में कई प्रकार के पक्षी, चमगादर तथा कई रेंगने वाले जीव भी पाए जाते हैं। 

पर्णपाती वन- ये भारत में सबसे बड़े क्षेत्र में फैले हुए वन है। इन्हें मानसूनी वन भी कहते हैं और यह उन क्षेत्रों में विस्तृत है जहाँ 70 सें०मी० से 200 सें०मी० तक वर्षा होती है। इस प्रकार के वनों में वृक्ष शुष्क ग्रीष्म ऋतु में 6 से 8 सप्ताह के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। जल की उपलब्धि के आधार पर इन वनों को आर्द्र तथा शुष्क पर्णपाती वन में विभाजित किया जाता है।

4. भारत में विभिन्न प्रकार के पाई जाने वाली वनस्पति के नाम बताएँ और अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति का ब्यौरा दीजिए।

उत्तर – हमारे देश में निम्न प्रकार की प्राकृतिक वनस्पतियाँ पाई जाती है –

◆ उष्णकटिबंधीय वर्षा वन

◆ उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन

◆ कंटीले वन तथा झारियाँ

◆ पर्वतीय वन

◆ मैंग्रोव वन

        प्रायः 3600 मीटर से अधिक ऊँचाई पर शीतोष्ण कटिबंधीय वनों तथा घास के मैदानों का स्थान अल्पाइन वनस्पति ले लेती है। सिल्वर-फर, जूनिपर, पाइन व बर्च इन वनों का मुख्य वृक्ष हैं। जैसे-जैसे हिमरेखा के निकट पहुँचते हैं इन वृक्षों के आकार छोटे होते जाते हैं।

        अंततः झाड़ियों के रूप के बाद वे अल्पाइन घास के मैदानों में विलीन हो जाते हैं। इनका उपयोग गुज्जर तथा बक्करवाल(जम्मू कश्मीर) जैसी घुमक्कड़ जातियों द्वारा पशुचारण के लिए किया जाता है। अधिक ऊँचाई वाले भागों में मॉस, लिचन घास, टुंड्रा वनस्पति का एक भाग है।

5. भारत में बहुत संख्या में जीव और पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त है – उदाहरण सहित कारण दीजिए।

उत्तर – मनुष्यों द्वारा अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति हेतु पादपों और जीवो के अत्यधिक उपयोग के कारण पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो गया है। लगभग 1300 पादप प्रजातियाँ संकट में है तथा 20 प्रजातियाँ विनष्ट हो चुकी है। काफी वन्य जीवन प्रजातियाँ भी संकट में है और कुछ विनष्ट हो चुकी है।

        व्यापारियों का अपने व्यवसाय के लिए अत्यधिक शिकार करना है। रासायनिक और औद्योगिक अपशिष्ट तथा तेजाबी जमाव के कारण प्रदूषण, विदेशी प्रजातियों का प्रवेश, कृषि तथा निवास के लिए वनों का अंधाधुंध कटाई पारिस्थितिकी तंत्र के असंतुलन को बढ़ा दिया है। जिसके कारण बहुत से पादप तथा जंतु प्राणियाँ संकटग्रस्त हो गए हैं। जैसे- कुछ संकटग्रस्त प्रजातियों के नाम- काला हिरण, मगरमच्छ, समुद्री गाय, लाल पांडा इत्यादि।

6. भारत वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी क्यों है?

उत्तर- हमारा देश भारत विश्व की मुख्य 12 जैव-विविधता वाले देशों में से एक है। लगभग 47000 विभिन्न जातियों के पौधे पाए जाने के कारण यह देश विश्व में दसवें स्थान पर और एशिया के देशों में चौथे स्थान पर है। भारत में लगभग 15000 फूलों के पौधे हैं जो कि विश्व में फूलों के पौधे का 6% है। इस देश में बहुत से बिना फूलों के पौधे हैं जैसे कि फर्न, शैवाल(एलेगी) तथा कवक(फंजाई) भी पाए जाते हैं।   

        वनस्पति की भाँति ही भारत विभिन्न प्रकार के प्राणी संपत्ति में भी धनी है। यहाँ जीवों की लगभग 90000 प्रजातियाँ मिलती है। देश में लगभग 2000 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती है। यह कुल विश्व का 13% है। यहाँ मछलियों की 2546 प्रजातियाँ है जो विश्व के लगभग 12% है। भारत में विश्व के 5 से 8% तक उभयचरी, सरीसृप तथा स्तनधारी जानवर भी पाए जाते हैं।

          इस प्रकार कहा जा सकता है कि हमारा देश वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी है।

मानचित्र कौशल

(i) उष्णकटिबंधीय वर्षा वन

(ii) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन

(iii) दो जीव मंडल निचय भारत के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी औ पश्चिमी भागों में।


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जलवायु / CLIMATE / NCERT CLASS -9 Geography Solutions (हिंदी माध्यम)

  अध्याय-4. जलवायु (CLIMATE)

एनसीईआरटी के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



CLIMATE

1.  दिए गये चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।

(i) नीचे दिए गये स्थानों में किस स्थान पर विश्व में सबसे अधिक वर्षा होती है?

(क) सिलचर

(ख) चेरापूंज

(ग) मासिनराम 

(घ) गुवाहाटी

उत्तर -(ग) मासिनराम (मेघालय)

(ii) ग्रीष्म ऋतु में उत्तरी मैदानों में बहने वाली पवन को निन्मलिखित में से क्या कहा जाता है?

(क) काल वैशाखी

(ख) व्यापारिक पवनें

(ग) लू

(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर – (ग) लू

(iii) निन्मलिखित में से कौन सा कारण भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में शीत ऋतु में होने वाली वर्षा के लिए उत्तरदायी है –

(क) चक्रवातीय अवदाब

(ख) पश्चिमी विक्षोभ

(ग) मानसून की वापसी

(घ) दक्षिण-पश्चिम मानसून

उत्तर -(ख) पश्चिमी विक्षोभ 

(iv)  भारत में मानसून का आगमन निन्मलिखित में से कब होता है-

(क) मई के प्रारंभ में

(ख) जून के प्रारंभ में

(ग) जुलाई के प्रारंभ में

(घ) अगस्त के प्रारंभ में

उत्तर – (ख) जून के प्रारंभ में

(v) निन्मलिखित में से कौन-सी भारत में शीत ऋतु की विशेषता है?

(क) गर्म दिन एवं गर्म रात

(ख) गर्म दिन एवं ठंडी रातें

(ग) ठंडा दिन एवं ठंडा रातें

(घ) ठंडा दिन एवं ठंडा रातें 

उत्तर – (ख) गर्म दिन एवं ठंडी रातें

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।

(i) भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक है?

उत्तर- भारतीय जलवायु को प्रभावित करने वाले छः प्रमुख कारक है – अक्षांश, तुंगता(ऊँचाई), वायुदाब एवं पवन तंत्र, समुद्र से दूरी, महासागरीय धाराएँ तथा उच्चावच लक्षण।

(ii) भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु क्यों है?

उत्तर – भारत की अक्षांशीय स्थिति 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांश के बीच है। चुँकि मानसून का प्रभाव भी उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लगभग 20° उत्तर एवं 20° दक्षिण के बीच ही रहता है। जिसके कारण भारत की जलवायु मानसूनी पवनों से बहुत अधिक प्रभावित है। यही कारण है कि भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु पाई जाती है।

(iii) भारत के किस भाग में दैनिक तापमान अधिक होता है एवं क्यों ?

उत्तर – भारत के पश्चिमी भाग में खासकर राजस्थान में गर्मी का मौसम अत्यंत गर्म हो उठता है। दिन में तापमान में 50°-55° सेल्सियस से ऊपर पहुँच जाता है। राजस्थान में थार मरुस्थल स्थित होने के कारण ही गर्मी का दिन बेहद गर्म होता है तो रात बेहद ठंडी। तापमान गिरते हुए 0℃ तक चला आता है। भारत के किसी और भाग में इतना अधिक दैनिक तापांतर नहीं मिलता है। 

(iv) किन पवनों के कारण मालाबार तट पर वर्षा होती है?

उत्तर – मालाबार तट प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी घाट पर स्थित है। यहाँ अरब सागर से चलने वाली दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी पवनों के कारण वर्षा होती है।

(v) जेट धाराएँ क्या है तथा वे किस प्रकार भारत की जलवायु को प्रभावित करती है?

उत्तर – जेट धाराएँ एक संकरी पट्टी में स्थित एवं क्षोभमंडल में अत्यधिक ऊँचाई (12000 मीटर से अधिक) वाले पश्चिमी हवाएँ होती है। इनकी गति गर्मी में 110 कि०मी० प्रति घंटा एवं सर्दी में 184 कि०मी० प्रति घंटा होती है। बहुत सी अलग-अलग जीत धाराओं को पहचाना गया है। उनमें सबसे स्थिर मध्य अक्षांशीय एवं उपोष्ण कटिबंधीय जेट धाराएँ हैं।

       जेट धाराएँ लगभग 27° से 30° उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित होती है, इसलिए इन्हें उपोष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट धाराएँ कहा जाता है। भारत में ये जेट धाराएँ ग्रीष्म ऋतु को छोड़कर पूरे वर्ष हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती है। इस पश्चिमी प्रवाह के द्वारा देश के उत्तर एवं उत्तर-पश्चिमी भाग में पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ आते हैं।

      गर्मियों में सूर्य की आभासी गति के साथ ही उपोष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट धारा हिमालय के उत्तर में चली जाती है। एक पूर्वी जेट धारा जिसे उपोष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट धारा कहा जाता है, गर्मी के महीनों में प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर लगभग 14° उत्तरी अक्षांश में प्रवाहित होती है।

(vi) मानसून को परिभाषित करें। मानसून में विराम से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द मौसिम से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ मौसम है। मानसून का अर्थ एक वर्ष के दौरान वायु की दिशा में ऋतु के अनुसार परिवर्तन है। अर्थात ऋतु के अनुसार वायु की दिशा में होने वाले परिवर्तन को ही मानसून कहा जाता है।

      मानसूनी वर्षा एक समय में कुछ दिनों तक ही होती है। इनमें वर्षा रहित अंतराल भी होते हैं।मानसून में आने वाले ये विराम मानसूनी गर्त की गति से संबंधित होती है। विभिन्न कारणों से गर्त एवं इसका अक्ष उत्तर या दक्षिण की ओर खिसकता रहता है, जिसके कारण वर्षा का स्थानिक वितरण सुनिश्चित होता है। जब मानसून के गर्त का अक्ष मैदान के ऊपर होता है तब इन भागों में वर्षा अच्छी होती है।

      दूसरी ओर जब अक्ष हिमालय के समीप चला जाता है तब मैदानों में लंबे समय तक शुष्क अवस्था रहती है तथा हिमालय की नदियों में पर्वतीय जलग्रहण क्षेत्रों में विस्तृत वर्षा होती है। इस भारी वर्षा के कारण मैदानी क्षेत्रों में विनाशकारी बाढ़ें आती है एवं जान एवं माल की भारी क्षति होती है।

      उष्णकटिबंधीय निम्न दाब की तीव्रता एवं आवृत्ति भी मानसूनी वर्षा की मात्रा एवं समय को निर्धारित करती है। यह निम्न दाब का क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनता है तथा मुख्य स्थलीय भाग को पार कर जाता है। यह निम्न दाब के मानसून गर्त अक्ष के अनुसार होता है।  मानसून को इसके अनिश्चितता के लिए जाना जाता है। इसीलिए यह कभी-कभी देश के किसानों की कृषि कार्यों को अव्यवस्थित कर देता है। 

(vii) मानसून को एक सूत्र में बाँधने वाला क्यों समझा जाता है?

उत्तर – भारतीय प्रायद्वीप पर मानसून की एकता का प्रभाव स्पष्ट है। पवन के दिशाओं ऋतुओं के अनुसार परिवर्तन तथा उनसे संबंधित ऋतु की दशाएँ ऋतु चक्रों को एक लय प्रदान करती है। वर्षा की अनिश्चितताएँ तथा उसका असमान वितरण मानसून का एक विशेष लक्षण है। संपूर्ण भारतीय भू-दृश्य, इसके जीव तथा वनस्पति, इसका कृषि-चक्र, मानव जीवन तथा उनके त्यौहार-उत्सव सभी इस मानसूनी लय के चारों ओर घूम रहे हैं।

        उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम तक संपूर्ण भारतवासी प्रति वर्ष मानसून के आगमन की प्रतीक्षा करते हैं। यह मानसूनी पवनें हमें जल प्रदान कर कृषि की प्रक्रिया में तेजी लाती है एवं संपूर्ण देश को एक सूत्र में बाँधती है। नदी घाटियाँ जो इन जलों का संवहन करती है, उन्हें भी एक नदी घाटी इकाई का नाम दिया जाता है।

3. भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा क्यों घटती जाती है?

उत्तर – उत्तर-भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा घटती जाती है क्योंकि समुद्र से दूरी बढ़ने पर वर्षा की मात्रा घटती हैं। कोलकाता में 162.5 सेमी०, पटना में 135 सेमी० इलाहाबाद में 100 सेमी० तथा दिल्ली में केवल 67 सेमी० वर्षा होती है।

4. कारण बताएँ

(i) भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसम परिवर्तन क्यों होता है?

उत्तर – भारत उत्तरी-पूर्वी व्यापारिक पवनों वाले क्षेत्र में स्थित है। ये पवनें उत्तरी गोलार्ध के उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दाब पट्टियों से उत्पन्न होती है। ये दक्षिण की ओर बहती, कोरिओलिस बल के कारण दाहिनी ओर विक्षेपित होकर विषुवतीय निम्न दाब वाले क्षेत्र की ओर बढ़ती है। 

                     भारत की वायु दाब एवं पवन तंत्र अद्वितीय है। शीत ऋतु में हिमालय के उत्तर में उच्च दाब होता है। इस क्षेत्र की ठंडी शुष्क हवाएँ दक्षिण में निम्न दाब वाले महासागरीय क्षेत्र के ऊपर बहती है। ग्रीष्म ऋतु में आंतरिक एशिया एवं उत्तरी-पूर्वी भारत के ऊपर निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इसके कारण गर्मी के दिनों में वायु की दिशा पूरी तरह से परिवर्तित हो जाती है।

       वायु दक्षिण में स्थित हिंद महासागर की उच्च दाब वाले क्षेत्र से दक्षिण पूर्वी दिशा में बढ़ते हुए विषुवत वृत्त को पार कर दाहिनी ओर मुड़ते हुए भारतीय उप महाद्वीप पर स्थित निम्न दाब की ओर बहने लगती हैं। इन्हें ही दक्षिण-पश्चिम मानसून पवनों के नाम से जाना जाता है। ये पवनें कोष्ण महासागरों के ऊपर से बहती है, नमी ग्रहण करती है तथा तथा भारत की मुख्य भूमि पर वर्षा करती है। इस प्रकार स्पष्ट है कि भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसम परिवर्तन  होता है।

(ii) भारत में अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में होती है।

उत्तर – भारत में अधिकतर वर्षा (80 प्रतिशत) मानसूनी पवनों से हुआ करती है। चुँकि मानसून का समय भारत में जून से सितंबर तक ही होती है। यही कारण है कि भारत मे अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में होती है ।

(iii) तमिलनाडु तट पर शीत ऋतु में वर्षा होती है।

उत्तर – तमिलनाडु तट पर शीत ऋतु में वर्षा लौटते  मानसून के कारण होती है। बंगाल की खाड़ी को पार करते समय लौटते मानसून पवन आर्द्रता ग्रहण कर दक्षिण-पूर्वी तट (कोरोमंडल तट) पर भारी वर्षा करते हैं । तमिलनाडु में वर्ष भर की अधिकतम वर्षा (44% से 60%) शीत ऋतु में होती है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात उसे भी यहाँ वर्षा होती है।

(iv) पूर्वी तट के डेल्टा वाले क्षेत्र में प्रायः चक्रवात आते हैं।

उत्तर – नवंबर के प्रारंभ में, उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर निम्न दाब वाली अवस्था बंगाल की खाड़ी पर हस्तांतरित हो जाती है। यह स्थानांतरण चक्रवाती निम्न दाब से संबंधित होता है, जो कि अंडमान सागर के ऊपर उत्पन्न होता है। यह चक्रवात सामान्यतः भारत के पूर्वी तट को पार करते हैं, जिसके कारण व्यापक एवं भारी वर्षा होती है।

       उष्णकटिबंधीय चक्रवात प्रायः विनाशकारी होते हैं। गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के सघन आबादी वाले डेल्टा प्रदेशों में अक्सर चक्रवात आते हैं, जिसके कारण बड़े पैमाने पर जान-माल की क्षति होती है। कभी-कभी ये चक्रवात उड़ीसा, पश्चिम बंगाल एवं बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में भी पहुँच जाते हैं। कोरोमंडल तट पर अधिकतर वर्षा इन्हीं चक्रवातों तथा अवदाबों से होती है।

(v) राजस्थान, गुजरात के कुछ भाग तथा पश्चिमी घाट का वृष्टि छाया क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र है।

उत्तर – राजस्थान, गुजरात के कुछ भाग तथा पश्चिमी घाट की वृष्टि छाया क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र है क्योंकि राजस्थान, गुजरात के कुछ भागों में मानसूनी पवनें जब पहुँचती है तो इनकी आर्द्रता समाप्त हो चुकी होती है इसके भी दो मुख्य कारण है –

◆ अरावली पर्वत की दिशा पवनों के समानांतर होना, और

◆ पाकिस्तान से आने वाली गर्म एवं शुष्क हवाएँ न केवल अरब सागर की मानसूनी पवनों को ऊपर उठने से रोकती है, बल्कि नमी को भी कम कर देती है। इससे इन हवाओं की वर्षा करने की शक्ति और भी कम हो जाती है।

                   पश्चिमी घाट का वृष्टि छाया क्षेत्र पवनविमुख ढाल पर स्थित है। यहाँ वर्षा बहुत कम होती है। अतः ये सूखा प्रभावित क्षेत्र है।

5. भारत की जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिनताओं को उदाहरण सहित समझाएँ।

उत्तर – भारत के विभिन्न भागों में मानसूनी वर्षा की मात्रा में काफी अंतर पाया जाता है एक ओर जहाँ मासिनराम जैसे स्थान पर 1141 सें०मी० वर्षा होती है तो वहीं दूसरी ओर थार एवं लद्दाख के मरुस्थल में वर्षा की मात्रा मात्र 25 सेंटीमीटर से भी कम होती है। अधिक वर्षा के क्षेत्रों में विभिन्नता कम एवं कम वर्षा के क्षेत्रों में विभिन्नता और अधिक पाई जाती है।

      ऐसा पाया गया है कि 10 वर्षों में केवल दो वर्ष ही मानसून समय पर आकर समय पर समाप्त होता है। मानसूनी वर्षा भी निरंतर नहीं होती बल्कि इसमें अंतराल पाया जाता है। अगस्त के महीने में यह अंतराल काफी लंबा हो जाता है। यूं तो मानसून की अवधि 4 महीने है परंतु इन 4 महीनों में वास्तविक वर्षा के दिन 40 से 45 के बीच होते हैं। भारत का अधिकांश भाग कुल वर्ष का 80% इसी समय प्राप्त करता है। वर्षा इतनी मूसलाधार होती है कि अक्सर कहा जाता है कि मानसूनी वर्षा में बादल जल बरसाते नहीं बल्कि उड़ेलते हैं।                                              

       जिन भागों में मानसून सबसे पहले आता है वहाँ वह सबसे अधिक समय तक रहता है एवं जहाँ देर से पहुँचता है वहाँ से जल्दी लौट जाता है। केरल में मानसून की अवधि 5 जून से 30 नवंबर है, जबकि पंजाब के मैदान में यही अवधि 1 जुलाई से 30 सितंबर है।

         इस प्रकार कहा जा सकता है कि भारत की मानसूनी जलवायु में क्षेत्रीय विभिन्नता अत्यधिक पाई जाती है।

6. मानसून अभिक्रिया की व्याख्या करें।

उत्तर –  भारत की जलवायु मानसूनी पवनों से बहुत अधिक प्रभावित है। ऐतिहासिक काल में भारत आने वाले नाविकों ने सबसे पहले मानसून परिघटना पर ध्यान दिया था। पवन तंत्र की दिशा उलट जाने (उत्क्रमन) के कारण उन्हें लाभ हुआ। चूँकि उनके जहाज पवन के प्रवाह की दिशा पर निर्भर थे। अरबवासी जो व्यापारियों की तरह भारत आए थे उन लोगों ने पवन तंत्र के इस मौसमी उत्क्रमण को मानसून का नाम दिया।

         मानसून का प्रभाव उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लगभग 20° उत्तर एवं 20° दक्षिण के बीच रहता है। मानसून की प्रक्रिया को समझने के लिए निम्नलिखित तथ्य महत्वपूर्ण है-

◆ स्थल तथा ज्ञान के गर्म एवं ठंडे होने की विभ्रेदी प्रक्रिया के कारण भारत के स्थल भाग पर निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है, जबकि इसके आस-पास के समुद्रों के ऊपर उच्च दाब का क्षेत्र बनता है।

◆ ग्रीष्म ऋतु के दिनों में अन्तः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र की स्थिति गंगा के मैदान की ओर खिसक जाती है। (यह विषुवतीय गर्त है, जो प्रायः विषुवत वृत्त से 5° उत्तर में स्थित होता है। इसे मानसून ऋतु में मानसून गर्त के नाम से भी जाना जाता है।)

◆ हिंद महासागर में मेडागास्कर के पूर्व लगभग 20° से अक्षांश के ऊपर उच्च दाब वाला क्षेत्र होता है। इस उच्च दाब वाले क्षेत्र की स्थिति एवं तीव्रता भारतीय मानसून को प्रभावित करती है।

◆ ग्रीष्म ऋतु में, तिब्बत का पठार बहुत अधिक गर्म हो जाता है, जिसके परिणामस्वरुप पठार के ऊपर समुद्र तल से लगभग 9 किलोमीटर की ऊंचाई पर तीव्र ऊर्ध्वाधर वायु धाराओं एव उच्च दाब का निर्माण होता है।

◆ ग्रीष्म ऋतु में हिमालय के उत्तर-पश्चिम जेट धाराओं का तथा भारतीय प्रायद्वीप के ऊपर उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट धाराओं का प्रभाव होता है।                       

7. शीत ऋतु की अवस्था एवं उसकी विशेषताएँ बताएँ।

उत्तर – शीत ऋतु में सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है तथा उत्तरी गोलार्ध ठंडा रहता है। जनवरी में दक्षिण तथा मध्य भारत में औसत तापमान 21° से 27° सेंटीग्रेड के बीच और गंगा के मैदानी भाग में 12° से 18° सेंटीग्रेड के बीच पाया जाता है। इस समय चेन्नई का औसत तापमान 25° सेंटीग्रेड, कोलकाता का 20° सेंटीग्रेड, पटना का 17° सेंटीग्रेड तथा दिल्ली का 14° सेंटीग्रेड रहता है।

        सबसे अधिक ठंडक उत्तर-पश्चिमी भाग में रहती है। अतः वहाँ एक उच्च वायुदाब क्षेत्र बन जाता है। इस समय हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर बहती है जो शुष्क होती है तथा वर्षा नहीं करती। आकाश स्वच्छ रहता है। बादल रहित आकाश के कारण रात में ताप विकिरण तेजी से होती है। जिससे पारा नीचे गिर जाता है।

         हिमालय क्षेत्र के जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इन दिनों हिमपात होता है। इस ऋतु में भारत के 2 क्षेत्रों में वर्षा होती है। एक उत्तरी पश्चिमी भाग तथा दूसरा दक्षिण पूर्वी तटीय भाग में। उत्तर पश्चिमी भारत में चक्रवातीय वर्षा होती है जो दिसंबर से मार्च तक पूर्वी भूमध्यसागर से इराक, ईरान तथा पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुँचती है। यह वर्षा मात्र 3 से 6 सेंटीमीटर होती होती है। परन्तु रबी फसलों के लिए काफी लाभदायक होती है।

       जनवरी-फरवरी में उत्तरी पूर्वी शुष्क हवाएँ बंगाल की खाड़ी से गुजरती हुई जलवाष्प ग्रहण कर भारत के दक्षिण पूर्वी भाग में (तमिलनाडु) वर्षा करती है। इस वर्षा से वहाँ जड़ें में चावल की कृषि होती है।

8. भारत में होने वाली मानसूनी वर्षा एवं उसकी विशेषताएँ बताएँ।

उत्तर – अरबी शब्द मौसिम (ऋतु) से मॉनसून शब्द की उत्पति हुई है इस शब्द का उपयोग सर्प्रथम अरब के नाविक अरब सागर में चलने वाली उन हवाओं के लिए किया करते थे जो ऋतु के बदलते ही अपनी दिशा भी लेते थे। भारत में बोल-चाल की भाषा में मानसून का अर्थ वर्षा से है।

       अच्छा मानसून का अर्थ अच्छी वर्षा से है। भारत में इन हवाओं की दिशा 6 माह दक्षिण-पश्चिम और 6 माह उत्तर पूरब रहती है। अतः इन्हें क्रमशः दक्षिण पश्चिम मॉनसून तथा उत्तर पूर्व मानसून कहा जाता है। भारतीय मानसून की विशेषताएँ निम्नलिखित है –

◆ दक्षिण पश्चिम मानसून की वर्षा मौसमी है जो जून से सितंबर तक होती है।

◆समुद्र से दूरी बढ़ने पर वर्षा की मात्रा घटती हैं। कोलकाता में 162.5 सेमी०, पटना में 135 सेमी० इलाहाबाद में 100 सेमी० तथा दिल्ली में केवल 67 सेमी० वर्षा होती है।

◆ मानसून वर्षा भू-आकृति द्वारा नियंत्रित होती है।

◆ गर्मी में वर्षा मूसलाधार होती है जिससे पानी का बहाव बढ़ जाता है और मृदा अपरदन की गति तेज हो जाती है। कई क्षेत्र बाढ़ के चपेट में आ जाते हैं।

◆ भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में मानसून का महत्वपूर्ण योगदान है।

◆ मानसूनी वर्षा का भारत में वितरण अससमान है जो औसत 12 सेमी० से 1180 सेमी० के बीच पाया जाता है। 

◆ मानसून कभी पहले और कभी देर से आती है। कभी अतिवृष्टि एवं कभी अनावृष्टि लाती है। फलत: फसलें प्रभावित होती है तथा बाढ़ एवं सूखा जैसी आपदाएँ लाती है।

मानचित्र कौशल

 भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित को दर्शाएँ –

(i) 400 से०मी० से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र

(ii) 20 से०मी० से कम वर्षा वाले क्षेत्र 

(iii) भात में दक्षिण पश्चिम मानसून की दिशा


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अपवाह/DRAINAGE/ NCERT CLASS-9 Geography Solutions

                  अध्याय-3. अपवाह (DRAINAGE)    

एनसीईआरटी के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



DRAINAGE     

1. दिए गये चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए।

(i) निन्मलिखित में से कौन-सा वृक्ष की शाखाओं के समान अपवाह प्रतिरूप प्रणाली को दर्शाता है?

(क) अरीय

(ख) केन्द्राभिमुखी

(ग) द्रुमाकृति 

(घ) जालीनुमा

उत्तर – (ग) द्रुमाकृतिक

(ii) वुलर झील निन्मलिखित में से किस राज्य में स्थित है?

(क) राजस्थान

(ख) पंजाब

(ग) उत्तर प्रदेश

(घ) जम्मू–कश्मीर

उत्तर – (घ) जम्मू-कश्मीर

(iii) नर्मदा नदी का उद्दगम कहाँ से है?

(क) सतपुड़ा

(ख) अमरकंटक

(ग) ब्रम्हागिरी 

(घ) पश्चिमी घात के ढाल

उत्तर – (ख) अमरकंटक (मध्य प्रदेश)

(iv) निन्मलिखित में से कौन-सी लवणीय जलवासी झील है?

(क) सांभर

(ख) वुलर

(ग) डल

(घ) गोविंद सागर

उत्तर – (क) सांभर (राजस्थान)

(v) निन्मलिखित में से कौन-सी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी है?

(क) नर्मदा 

(ख) गोदावरी

(ग) कृष्णा

(घ) महानदी

उत्तर – (ख) गोदावरी (1500 कि०मी०)

(vi) निम्नलिखित नदियों में से कौन-सी नदी भ्रंश घाटी से होकर बहती है-

(क) महानदी 

(ख) कृष्णा

(ग) तुंगभद्रा

(घ) तापी

उत्तर – (घ) तापी

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए

(i) जल विभाजक का क्या कार्य है? एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर – दो दिशाओं में नदियों के प्रवाह को अलग करने वाले उच्च पर्वतीय/पठारी क्षेत्र को जल विभाजक कहा जाता है। अर्थात इसका मुख्य कार्य दो अपवाह बेसिनों को अलग करना है।

               सिंधु एवं गंगा नदी के मध्य अरावली के उच्च भूमि जल विभाजक का एक उदाहरण है। अरावली नगर गंगा एवं सिंधु के जल विभाजक पर बसा हुआ है। अरावली से सुंदरबन तक मैदान की लंबाई 1800 कि.मी. है। इसकी ढाल 1मीटर/प्रति6 कि.मी. की दर से सुंदरवन की तरफ घटता जाता है।

(ii) भारत में सबसे विशाल नदी द्रोणी कौन सी है ?

उत्तर – भारत में सबसे विशाल गंगा नदी द्रोणी  है। इसकी कुल लंबाई 2525 किलोमीटर है।

(iii) सिंधु एवं गंगा नदी कहाँ से निकलती है?

उत्तर – सिंधु नदी तिब्बत के समीप मानसरोवर झील से निकलकर दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती हुई भारत में जम्मू कश्मीर के लद्दाख जिले में प्रवेश करती है। 

        गंगा नदी की मुख्यधारा भागीरथी की उत्पत्ति हिमालय स्थित गंगोत्री हिमानी के गोमुख से हुआ है। अलकनंदा उत्तराखंड स्थित देवप्रयाग में भागीरथी से मिल जाती है तथा गंगा नदी के नाम से प्रवाहित होती है।

(iv) गंगा की दो प्रमुख धाराओं के नाम लिखिए ? यह कहाँ पर एक-दूसरे से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है ?

उत्तर – गंगा नदी की पहली प्रारंभिक धारा भागीरथी तथा दूसरी प्रारम्भिक धारा अलकनंदा है। भागीरथी देवप्रयाग(उत्तराखंड) में अलकनंदा से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है। 

(v) लंबी धारा होने के बावजूद तिब्बत के क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्र में कम गाद (सिल्ट) क्यों है ?

उत्तर – लंबी धारा होने के बावजूद तिब्बत के क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्र में कम गाद(सिल्ट) होती है क्योंकि ब्रह्मपुत्र का उद्गम क्षेत्र तिब्बत एक शीत एवं शुष्क क्षेत्र है जहाँ नदी के जल में सिल्ट की मात्रा नगन्य होती है।

(vi) नदियाँ तथा झीलों के कुछ आर्थिक महत्व को बताएँ।

उत्तर – नदियाँ एवं जिलों के आर्थिक महत्व निम्नलिखित है- 

◆ यह जलीय पारितंत्र के संतुलन को बनाए रखती है।

◆ इससे प्राकृतिक सौंदर्य में वृद्धि के साथ-साथ पर्यटन एवं मनोरंजन का साधन विकसित होती है।

◆ इसका उपयोग जल विद्युत उत्पादन में किया जाता है।

◆ यह अत्यधिक वर्षा के समय पानी के बाढ़ को रोकती है।

◆ यह सूखे की स्थिति में नमी को बनाए रखती है।

3. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

(i) नीचे भारत के कुछ झीलों के नाम दिए गए हैं । इन्हें प्राकृतिक तथा मानव निर्मित वर्गों में बांटिए।

उत्तर – प्राकृतिक झील – (क) वूलर  (ख) डल (ग) नैनीताल  (घ) भीमताल  (च) लोकताक (छ) बारापनी (ज) चिल्का (झ) सांभर (ठ) पुलिकट 

मानव निर्मित झील – (ड़) गोबिंद सागर (य) राणा प्रताप सागर (ट) निजाम सागर (ड) नागार्जुन सागर (ढ) हीराकुंड

4. हिमालय तथा प्रायद्वीपीय नदियों के मुख्य अंतर को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – हिमालय की नदियाँ –

        हिमालय की अधिकांश नदियाँ बारहमासी अथवा स्थायी है। इन्हें वर्षा के जल के अतिरिक्त पर्वत की चोटियों पर जमें हिम के पिघलने से सालोंभर जलापूर्ति होती रहती है। सिंधु एवं ब्रह्मपुत्र जैसी भारत की प्रमुख नदियाँ हिमालय से निकलती है। इन नदियों ने प्रवाह के क्रम में पर्वतों को काटकर गॉर्ज का निर्माण किया है।

प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ-

       यहाँ के अधिकांश नदियाँ मौसमी है जिसका स्रोत वर्षा जल का है। ग्रीष्म ऋतु एवं शुष्क मौसम में जब वर्षा नहीं होती यहाँ की बड़ी-बड़ी नदियों का जलस्तर घटकर छोटी-छोटी धाराओं या नलिकाओं में परिणत हो जाता है। इनमें से कुछ नदियाँ पठारी भाग तथा पश्चिमी घाट पर्वत से निकलकर पश्चिम की ओर बहती हुई अरब सागर में गिरती है। किंतु, प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश नदियाँ पश्चिमी घाट से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। यह नदियाँ छिछली और कम लंबी है। यह नदियाँ अनेक जगहों पर जलप्रपात का निर्माण करती है। बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों द्वारा डेल्टा और अरब सागर में गिरने वाली नदियों द्वारा ज्वारनदमुख(एश्चुअरी) का निर्माण होता है।

5. प्रायद्वीपीय पठार के पूर्व एवं पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों की तुलना कीजिए।

उत्तर – प्रायद्वीपीयपठार के पूर्व एवं पश्चिम की ओर प्रवाहित होने वाली नदियों की तुलना इस प्रकार है –

(i) प्रायद्वीपीय पठार के पूर्व की ओर बहने वाली नदियों में मुख्यतः महानदी, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी है जबकि पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में मुख्यतः नर्मदा एवं ताप्ती है।

(ii) पूर्व की ओर बहने वाली सभी नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती है जबकि पश्चिम की ओर बहने वाली सभी नदियाँ अरब सागर में गिरती है।

(iii) बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली सभी नदियाँ डेल्टा का निर्माण करती हैं जबकि अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ ज्वारनदमुख/एस्चुयरी का निर्माण करती हैं।

(iv) पूर्व की ओर बहने वाली नदियों के मुहाने के निकट नदियों के गति धीमी रहती है जबकि पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों के मुहाने के निकट नदियों की गति तीव्र होती है।

6. किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए नदियाँ महत्वपूर्ण क्यों है?

उत्तर- नदी अपवाह क्षेत्र मानवीय सभ्यता एवं संस्कृति की जननी है। भारत के आर्थिक विकास में नदियों का स्थान महत्वपूर्ण रहा है। नदियाँ आदिकाल से ही मानव जीवन गतिविधियों का साधन रहा है। नदियाँ विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों की जन्मस्थली के साथ मानव सभ्यता का पालना भी है। नदियों के जलप्रपात जल विद्युत शक्ति उत्पादन केंद्र के साथ-साथ पर्यटन के आकर्षक केंद्र भी है। प्राचीन काल में सड़क एवं वायुमार्ग के साधन के अभाव में यह परिवहन का सर्वाधिक उपयुक्त साधन था। आज यहाँ राष्ट्रीय जलमार्ग का भी विकास हो रहा है। सामरिक दृष्टि से भी नदियाँ आज उपयोगी हो गई है।

           नदियों के प्रभाव की वजह से ही कृषि भूमि आज 40% भूभाग जलोढ़ मिट्टी से ढंका हुआ है। जो नदी घाटी डेल्टा और तटीय प्रदेशों में फैले हुए हैं। गंगा, सिंधु, गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टा एवं मैदानी क्षेत्र में जलोढ़ की प्रचुरता है। उत्तर बिहार में कोसी, बागमती और गंडक आदि नदियाँ प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में जलोढ़ का निक्षेप करती है जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी हुई है।

मानचित्र कौशल 

(i) भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित नदियों को चिन्हित कीजिए तथा उनके नाम लिखिए –

गंगा, सतलुज, दामोदर, कृष्णा, नर्मदा, तापी, महानदी, दिहांग।

(ii) भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित झीलों को चिन्हित कीजिए तथा उनके नाम लिखिए- चिल्का, सांभर, वूल, पुलिकट तथा कोलेरू।


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NCERT CLASS-9 TOTAL OBJECTIVE GEOGRAPHY SOLUTIONS / वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

NCERT CLASS -9 TOTAL OBJECTIVE GEOGRAPHY SOLUTIONS (हिन्दी माध्यम)
TOTAL OBJECTIVE GEOGRAPHYवस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. कर्क रेखा किस राज्य से नहीं गुजरती है?
(क) राजथान
(ग) छतीसगढ़
(घ) त्रिपुरा
उत्तर – (ख) उड़ीसा
2. भारत का सबसे पूर्वी देशांतर कौन सा है?
(क) 97°25, पू०
(ख) 77°6, पू०
(ग) 68°7, पू०
(घ) 82°32, पू०
उत्तर – (क)97°25, पू०
3. उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम की सीमाएं किस देश को छूती है?
(क) चीन
(ख) भूटान
(ग) नेपाल
(घ) म्यांमार
उत्तर – (ग) नेपाल
4. ग्रीष्मावकाश में आप यदि कवरती जाना चाहते हैं तो किस केंद्र शासित क्षेत्र में जायेंगे?
(क) पुडुचेरी
(ख) लक्षद्वीप
(ग) अंडमान और निकोबार
(घ) दीव और दमन
उत्तर –(ख) लक्षद्वीप
5. मेरे मित्र एक ऐसे देश के निवासी हैं जिस देश की सीमा भारत के साथ नहीं लगती है। आप बताईये वह कौन सा देश है?
(क) भूटान
(ख) ताजिकिस्तान
(ग) बांग्लादेश
(घ) नेपाल
उत्तर –(ख) ताजिकिस्तान
6. एक स्थलीय भाग जो तीन ओर से समुद्र से घिरा हो–
(क) तट
(ख) प्रायद्वीप
(ग) द्वीप
(घ) इनमे से कोई नहीं
उत्तर – (ख) प्रायद्वीप
7. भारत के पूर्वी भाग में म्यांमार की सीमा का निर्धारण करने वाले पर्वतों का संयुक्त नाम–
(क) हिमालय
(ख) पूर्वांचल
(ग) उत्तराखंड
(घ) इनमे से कोई नहीं
उत्तर – (ख) पूर्वांचल (पटकई, नागा, मिजो तथा मणिपुर)
8. गोवा के दक्षिण में स्थित पश्चिम तटीय पट्टी–
(क) कोरोमंडल
(ख) कन्नड़
(ग) कोंकण
(घ) उत्तरी सरकार
उत्तर –(ग) कोंकण (मुम्बई तथा गोवा)
9. पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर–
(क) अनाईमुड़ी
(ख) महेंद्रगिरी
(ग) कन्चंनजंघा
(घ) खासी
उत्तर –(ख) महेंद्रगिरी (1500 मी०)
10. निन्मलिखित में से कौन-सा वृक्ष की शाखाओं के समान अपवाह प्रतिरूप प्रणाली को दर्शाता है?
(क) अरीय
(ख) केन्द्राभिमुखी
(ग) द्रुमाकृति
(घ) जालीनुमा
उत्तर – (ग) द्रुमाकृतिक
11. वुलर झील निन्मलिखित में से किस राज्य में स्थित है?
(क) राजस्थान
(ख) पंजाब
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) जम्मू–कश्मीर
उत्तर – (घ) जम्मू-कश्मीर
12. नर्मदा नदी का उद्दगम कहाँ से है?
(क) सतपुड़ा
(ख) अमरकंटक
(ग) ब्रम्हागिरी
(घ) पश्चिमी घात के ढाल
उत्तर – (ख) अमरकंटक (मध्य प्रदेश)
13. निन्मलिखित में से कौन-सी लवणीय जलवासी झील है?
(क) सांभर
(ख) वुलर
(ग) डल
(घ) गोविंद सागर
उत्तर – (क) सांभर (राजस्थान)
14. निन्मलिखित में से कौन-सी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी है?
(क) नर्मदा
(ख) गोदावरी
(ग) कृष्णा
(घ) महानदी
उत्तर – (ख) गोदावरी (1500 कि०मी०)
15. निन्मलिखित नदियों में से कौन-सी नदी भ्रंश घाटी से होकर बहती है?
(क) महानदी
(ख) कृष्णा
(ग) तुंगभद्रा
(घ) तापी
उत्तर – (घ) तापी
16. नीचे दिए गये स्थानों में किस स्थान पर विश्व में सबसे अधिक वर्षा होती है
(क) सिलचर
(ख) चेरापूंज
(ग) मासिनराम
(घ) गुवाहाटी
उत्तर – (ग) मासिनराम (मेघालय)
17. ग्रीष्म ऋतू में उत्तरी मैदानों में बहने वाली पवन को निन्मलिखित में से क्या कहा जाता है?
(क) काल वैशाखी
(ख) व्यापारिक पवनें
(ग) लू
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (ग) लू
18. निन्मलिखित में से कौन सा कारण भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में शीत ऋतू में होने वाली वर्षा के लिए उत्तरदायी है-
(क) चक्रवातीय अवदाब
(ख) पश्चिमी विक्षोभ
(ग) मानसून की वापसी
(घ) दक्षिण-पश्चिम मानसून
उत्तर – (ख) पश्चिमी विक्षोभ
19. भारत में मानसून का आगमन निन्मलिखित में से कब होता है-
(क) मई के प्रारंभ में
(ख) जून के प्रारंभ में
(ग) जुलाई के प्रारंभ में
(घ) अगस्त के प्रारंभ में
उत्तर – (ख) जून के प्रारंभ में
20. निन्मलिखित में से कौन-सी भारत में शीत ऋतु की विशेषता है?
(क) गर्म दिन एवं गर्म रातें
(ख) गर्म दिन एवं ठंडी रातें
(ग) ठंडा दिन एवं ठंडा रातें
(घ) ठंडा दिन एवं ठंडा रातें
उत्तर – (ख) गर्म दिन एवं ठंडी रातें
21. रबड़ का संबंध किस प्रकार की वनस्पति से है?
(क) टुन्ड्रा
(ख) हिमालय
(ग) मैंग्रोव
(घ) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन
उत्तर – (घ) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन
22. सिनकोना के वृक्ष कितनी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते है?
(क) 100 से०मी०
(ख) 70 से०मी०
(ग) 50 से०मी०
(घ) 50 से०मी० से कम वर्षा
उत्तर – (क) 100 से०मी०
23. सिमलीपाल जीव मंडल निचय कौन-से राज्य में स्थित है-
(क) पंजाब
(ख) दिल्ली
(ग) ओडिशा
(घ) पश्चिमी बंगाल
उत्तर – (ग) उड़ीसा
24. भारत के निन्मलिखित में से कौन-से जीव मंडल निचय विश्व के जीव मंडल निचयों में नहीं लिए गए हैं?
(क) मानस
(ख) मन्नार की खाड़ी
(ग) नीलगिरी
(घ) नंदादेवी
उत्तर –(क) मानस
25. निन्मलिखित में से किस क्षेत्र में प्रवास, आबादी की संख्या, वितरण एवं संरचना में परिवर्तन लाता है-
(क) प्रस्थान करने वाले क्षेत्र में
(ख) आगमन बाले क्षेत्र में
(ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्र में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्रों में
26. जनसंख्या में बच्चों का एक बहुत बड़ा अनुपात निम्नलिखित में से किसका परिणाम है-
(क) उच्च जन्म दर
(ख) उच्च मृत्यु दर
(ग) उच्च जीवन दर
(घ) अधिक विवाहित जोड़े
उत्तर – (क) उच्च जन्म दर
27. निन्मलिखित में से कौन-सा एक जनसंख्या वृद्धि का परिणाम दर्शाता है-
(क) एक क्षेत्र की कुल जनसंख्या
(ख) प्रत्येक वर्ष लोगों की संख्या में होने वाला वृद्धि
(ग) जनसंख्या वृद्धि की दर
(घ) प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या
उत्तर – (ख) प्रत्येक वर्ष लोगों की संख्या में होने वाली वृद्धि
28. 2001 की जनगणना के अनुसार एक साक्षर व्यक्ति वह है-
(क) जो अपने नाम को पढ़ एवं लिख सकता है।
(ख) जो किसी भी भाषा में पढ़ एवं लिख सकता है।
(ग) जिसकी उम्र 7 वर्ष है तथा वह किसी भी भाषा को समझ के साथ पढ़ एवं लिख सकता है।
(घ) जो पढ़ना-लिखना एवं अंकगणित तीनों जानता है।
उत्त – (ग) जिसकी उम्र 7 वर्ष है तथा वह किसी भी भाषा को समझ के साथ पढ़ एवं लिख सकता है।

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अध्याय-6. जनसंख्या / POPULATION / NCERT CLASS 9

अध्याय – 6. जनसंख्या (Population)

एनसीईआरटी के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



POPULATION

1. दिए गये चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।

(i) निन्मलिखित में से किस क्षेत्र में प्रवास, आबादी की संख्या, वितरण एवं संरचना में परिवर्तन लाता है-

(क) प्रस्थान करने वाले क्षेत्र में

(ख) आगमन बाले क्षेत्र में

(ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्र में

(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर – (ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्रों में

(ii) जनसंख्या में बच्चों का एक बहुत बड़ा अनुपात निम्नलिखित में से किसका परिणाम है –

(क) उच्च जन्म दर

(ख) उच्च मृत्यु दर

(ग) उच्च जीवन दर

(घ) अधिक विवाहित जोड़े

उत्तर – (क) उच्च जन्म दर

(iii) निन्मलिखित में से कौन-सा एक जनसंख्या वृद्धि का परिणाम दर्शाता है

(क) एक क्षेत्र की कुल जनसंख्या

(ख) प्रत्येक वर्ष लोगों की संख्या में होने वाली वृद्धि

(ग) जनसंख्या वृद्धि की दर

(घ) प्रति हजार परुषों पर महिलाओं की संख्या

उत्तर – (ग) प्रत्येक वर्ष लोगों की संख्या में होने वाली वृद्धि

(iv) 2001 की जनगणना के अनुसार एक ‘साक्षर’ व्यक्ति वह है –

(क) जो अपने नाम को पढ़ लिख सकता है।

(ख) जो किसी भी भाषा में पढ़ एवं लिख सकता है।

(ग) जिसकी उम्र 7 वर्ष है तथा वह किसी भी भाषा को समझ के साथ पढ़ एवं लिख सकता है।

(घ) जो पढ़ना-लिखना एवं अंकगणित, तीनों जनता है।

उत्तर – (ग) जिसकी उम्र 7 वर्ष है तथा वह किसी भी भाषा को समझ के साथ पढ़ एवं लिख सकता है।

2. निम्नलिखित के उत्तर संक्षेप में दें।

(i) जनसंख्या वृद्धि के महत्वपूर्ण घटकों की व्याख्या करें।

उत्तर – जनसंख्या वृद्धि के निम्नलिखित महत्वपूर्ण घटक है- 

जन्म दर – एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में जितने जीवित बच्चों का जन्म होता है, उसे ‘जन्म दर’ कहते हैं। यह जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख घटक है क्योंकि भारत में हमेशा जन्म दर मृत्यु दर से अधिक रहा है।

मृत्यु दर –  एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में मरने वालों की संख्या को ‘मृत्यु दर’ कहा जाता है। मृत्यु दर में तेज गिरावट भारत की जनसंख्या में वृद्धि की दर का मुख्य कारण है।

प्रवास – प्रभास भी एक कारण है जिससे जनसंख्या के आकार में परिवर्तन होता है। लोगों को एक देश में अथवा दो या अधिक देशों के बीच एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने को ही प्रवास कहा जाता हैं।

(ii) 1981 से भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर क्यों घट रहे हैं?

उत्तर – 1981 से भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर घटने के निम्नलिखित कारण है-

◆ जन्म दर में तेजी से कमी आना।

◆ बाल विवाह पर रोक कानूनी रोक लगाना।

◆ भारत की साक्षरता के अस्तर में धीरे-धीरे तेजी से सुधार होना

◆ सामाजिक जागरूकता का बढ़ाया जाना।

◆ विवाह है और देर से संतानोत्पत्ति को प्रोत्साहित करना।

(iii) आयु संरचना, जन्म दर एवं मृत्यु दर को परिभाषित करें।

उत्तर – आयु संरचना – किसी देश में जनसंख्या की आयु संरचना से तात्पर्य वहाँ के विभिन्न आयु समूहों के लोगों की संख्या से है। यह जनसंख्या की मूल विशेषताओं में से एक है।

जन्म दर – एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में जितने जीवित बच्चों का जन्म होता है, उसे ‘जन्म दर’ कहते हैं। यह जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख घटक है क्योंकि भारत में हमेशा जन्म दर मृत्यु दर से अधिक रहा है।

मृत्यु दर –  एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में मरने वालों की संख्या को ‘मृत्यु दर’ कहा जाता है। मृत्यु दर में तेज गिरावट भारत की जनसंख्या में वृद्धि की दर का मुख्य कारण है।

(iv) प्रवास जनसंख्या परिवर्तन का एक कारक है।

उत्तर – जन्म दर, मृत्यु दर के बाद जनसंख्या वृद्धि का तीसरा घटक प्रवास ही है।  लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। प्रवास आंतरिक(देश के भीतर) या अन्तर्राष्ट्रीय(दो या अधिक देशों के बीच) देशों के बीच हो सकता है। आंतरिक प्रवास जनसंख्या के आकार में कोई परिवर्तन नहीं लाता है। लेकिन यह एक देश के भीतर जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है।

           जनसंख्या वितरण एवं उसके घटकों को परिवर्तित करने में प्रवास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस प्रकार प्रवास जनसंख्या परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण घटक है। ये केवल जनसंख्या के आकार को ही प्रभावित नहीं करता है बल्कि उम्र एवं लिंग के दृष्टिकोण से नगरीय एवं ग्रामीण जनसंख्या की संरचना को भी परिवर्तित करता है।

3. जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या परिवर्तन के बीच अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर – जनसंख्या वृद्धि – किसी विशेष समय अंतराल में जैसे 10 वर्षों के भीतर किसी देश या राज्य के निवासियों की संख्या में होने वाले परिवर्तन को जनसंख्या वृद्धि कहा जाता है। इस परिवर्तन को दो प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है। पहला सापेक्ष वृद्धि तथा दूसरा प्रतिवर्ष होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के द्वारा।

जनसंख्या परिवर्तन – जन्म एवं मृत्यु दर तथा प्रवास जनसंख्या परिवर्तन को प्रभावित करने वाले दो कारक है ।

जन्म दर – प्रति 1000 व्यक्तियों पर जीवित जन्मों की संख्या को जन्म दर कहा जाता है। 

मृत्यु दर – प्रति 1000 व्यक्तियों पर मृतकों की संख्या को मृत्यु दर कहा जाता है।

प्रवास – प्रभास भी एक कारण है जिससे जनसंख्या के आकार में परिवर्तन होता है। लोगों को एक देश में अथवा दो या अधिक देशों के बीच एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने को ही प्रवास कहा जाता हैं।

4. व्यावसायिक संरचना एवं विकास के बीच क्या संबंध है?

उत्तर – आर्थिक रूप से क्रियाशील जनसंख्या का प्रतिशत विकास का एक महत्वपूर्ण सूचक होता है। विभिन्न प्रकार के व्यवसाय के अनुसार किये गये जनसंख्या के वितरण को व्यवसायिक संरचना कहा जाता है। किसी भी देश में विभिन्न व्यवसायों को करने वाले भिन्न-भिन्न लोग होते हैं।

          व्यवसायों को सामान्यतः प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। प्राथमिक क्रियाओं में कृषि, पशुपालन, वृक्षारोपण, मछली पालन तथा खनन आदि क्रियाएँ शामिल है। द्वितीयक क्रियाओं में उत्पादन करने वाले उद्योग, भवन एवं निर्माण कार्य आते हैं। तृतीयक क्रियाकलापों में परिवहन, संचार, वाणिज्य, प्रशासन तथा सेवाएँ शामिल है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि व्यवसायिक संरचना एवं विकास के बीच सीधा संबंध होता है।

5. स्वस्थ जनसंख्या कैसे लाभकारी है?

उत्तर – स्वास्थ्य जनसंख्या की संरचना का एक महत्वपूर्ण घटक है जो कि विकास की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। स्वास्थ्य जनसंख्या निम्नलिखित प्रकार से लाभकारी है –

◆ सरकार के स्वास्थ्य बजट में कम खर्चा होती है।

◆ कार्यशील जनसंख्या की क्षमता काफी बढ़ जाती है।

◆ स्वास्थ्य जनसंख्या देश के आर्थिक विकास में सहायक होती है।

◆ स्वास्थ्य जनसंख्या के कारण राष्ट्रीय आय में बढ़ोतरी होती है।

◆ प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग हो पाता है।

6. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की मुख्य विशेषताएँ क्या है?

उत्तर – परिवारों के आकार को सीमित रखकर एक व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं कल्याण को सुधारा जा सकता है, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने 1952 में एक व्यापक परिवार नियोजन कार्यक्रम को प्रारंभ किया। परिवार कल्याण कार्यक्रम जिम्मेदार तथा सुनियोजित पितृत्व को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है। राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2002 कई वर्षों के नियोजित प्रयासों का परिणाम है।

                 राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000, 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने, शिशु मृत्यु दर को प्रति 1000 से 30 कम करने, व्यापक स्तर पर टिकारोधी बीमारियों से बच्चों को छुटकारा दिलाने, लड़कियों की शादी की उम्र को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने तथा परिवार नियोजन को एक जन केंद्रित कार्यक्रम बनाने के लिए नीतिगत ढाँचा प्रदान कती है।


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   अध्याय-2. भारत का भौतिक स्वरूप

एनसीईआरटी के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



भारत का भौतिक स्वरूप

1. निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :

1. एक स्थलीय भाग जो तीन ओर से समुद्र से घिरा हो-

(क) तट 

(ख) प्रायद्वीप

(ग) द्वीप 

 (घ) इनमे से कोई नहीं

उत्तर – (ख) प्रायद्वीप

2. भारत के पूर्वी भाग में म्यांमार की सीमा का निर्धारण करने वाले पर्वतों का संयुक्त नाम-

(क) हिमालय 

(ख) पूर्वांचल

(ग) उत्तराखंड

 (घ) इनमे से कोई नहीं

उत्तर – (ख) पूर्वांचल (पटकई,नागा,मिजो,तथा मणिपुर)

3. गोवा के दक्षिण में स्थित पश्चिम तटीय पट्टी–

(क) कोरोमंडल 

(ख) कन्नड़

(ग) कोंकण

 (घ) उत्तरी सरकार

उत्तर –(ग) कोंकण (मुम्बई तथा गोवा )

4. पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर –

(क) अनाईमुड़ी

(ख) महेंद्रगिरी

(ग) कन्चंनजंघा

 (घ) खासी

उत्तर –(ख) महेंद्रगिरी (1500 मी०)

2. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर दीजिए

(i) भूगर्भीय प्लेटें क्या है?

उत्तर – पृथ्वी का ऊपरी भाग दृढ़ भूखंडों से निर्मित है। ये भूखंड कई भागों में विभक्त है, इसके एक भाग को भूगर्भिक प्लेट कहा जाता है। इन प्लेटों के  स्वभाव और प्रवाह से संबंधित अध्ययन को ही प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त  कहते है।

(ii) आज के कौन से महाद्वीप गोंडवाना लैंड के भाग थे?

उत्तर – सबसे प्राचीन भूभाग अर्थात प्रायद्वीपीय भाग गोंडवाना भूमि का एक हिस्सा था। गोंडवाना भूभाग के विशाल क्षेत्र में भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका तथा अंटार्कटिक के क्षेत्र शामिल थे।

(iii) ‘भाबर’ क्या है?

उत्तर – हिमालय से निकलने वाली नदियाँ पर्वतों से नीचे उतरते समय शिवालिक ढाल पर 8 से 16 किलोमीटर के चौड़ी पट्टी में गुटिका का निक्षेपण करती है। इसे भाबर के नाम से जाना जाता है। सभी सरिताएँ इस भाबर पट्टी में विलुप्त हो जाती है। इस पट्टी के दक्षिण में यह सरिताएँ एवं नदियाँ पुनः निकल आती है एवं नम तथा दलदली क्षेत्र का निर्माण करती है जिसे ‘तराई’ कहा जाता है।

(iv) हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में बताइए?

उत्तर – हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में महान हिमालय या हिमाद्री, निम्न हिमालय या हिमाचल तथा शिवालिक है।

(v) अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों में कौन-सा पठार स्थित है?

उत्तर – अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों में मालवा के पठार स्थित है।

(vi) भारत के उन द्वीपों के नाम बताइए जो प्रवाल भित्ति के है।

उत्तर – भारत के लक्षद्वीप प्रवाल भित्ति से निर्मित द्वीप है।

3. निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए-

(i) अपसारी तथा अभिसारी भूगर्भीय प्लेटें

उत्तर – अपसारी भूगर्भीय प्लेटें – जब दो प्लेट एक-दूसरे से दूर जाती है और  अपसारित परिसीमा का निर्माण करती है तो वैसे प्लेट को अपसारी भूगर्भीय प्लेट कहते हैं।

अभिसारी भूगर्भीय प्लेटें – जब दो प्लेट एक-दूसरे के करीब आती है और  अभिसारित परिसीमा का निर्माण करती है तो वैसे प्लेट को अभिसारी भूगर्भीय प्लेट कहते हैं।

(ii) बांगर तथा खादर

उत्तर – बांगर – पुरानी जलोढ़ मिट्टी को बांगर कहा जाता है। इस भाग में बाढ़ का पानी सामान्यतः नहीं पहुंच पाता है।

खादर – नई जलोढ़ मिट्टी को खादर कहा जाता है। यहाँ नदियों के बाढ़ का पानी लगभग प्रतिवर्ष पहुँचता रहता है एवं नई मिट्टी का निक्षेप होता रहता है।

(iii) पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट

उत्तर – पूर्वी घाट- प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी सिरे पर पूर्वी घाट स्थित है। पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट की अपेक्षा कम ऊँचा है। पूर्वी घाट  की औसत ऊँचाई 600 मीटर है। पूर्वी घाट का विस्तार महानदी घाटी से दक्षिण में नीलगिरी तक है पूर्वी घाट का विस्तार सतत नहीं है। यह अनियमित है एवं बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों ने इनको काट दिया है। पूर्वी घाट के दक्षिण पश्चिम में शेवराय तथा जावेडी की पहाड़ियाँ स्थित है। पूर्वी घाट के सबसे ऊँचा शिखर महेंद्रगिरी 1500 मीटर है।

पश्चिमी घाट- प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी सिरे पर पश्चिमी घाट स्थित है। पश्चिमी घाट पश्चिमी तट के समानांतर स्थित है। यह सतत हैं तथा उन्हें केवल दर्रों के द्वारा ही पार किया जा सकता है। इसमें प्रमुख दर्रे थाल घाट, भोर घाट तथा पालघाट स्थित है। पश्चिमी घाट को विभिन्न स्थानीय नामों से जाना जाता है। पश्चिमी घाट की ऊँचाई उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ती जाती है। इस भाग के शिखर ऊँचे हैं- जैसे अनाईमुडी 2695 मीटर तथा डोडा बेटा 2633 मीटर। पश्चिमी घाट की औसत ऊँचाई 900 से 1600 मीटर है।

4. बताइए हिमालय का निर्माण कैसे हुआ था।

उत्तर – हिमालय के निर्माण के विषय में कोबर ने बताया है कि पहले टेथि सागर था जिसके उत्तर में अंगारालैंड तथा दक्षिण में गोंडवाना लैंड अग्रदेश के रूप में थे । इयोसीन युग में दोनों आमने-सामने सरकने लगे, जिस कारण टेथिस के दोनों किनारों पर तलछट के वलन पड़ने से उत्तर में कुनलुन पर्वत तथा दक्षिण में हिमालय की उत्तरी श्रेणी का निर्माण हुआ, दोनों के बीच तिब्बत का पठार मध्य पिंड के रूप में बच रहा । आगे चलकर मध्य हिमालय तथा लघु शिवालिक श्रेणियों का भी निर्माण हो गया।

5.भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग कौन से है? हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीप पठार के उच्चावच लक्षणों में क्या अंतर है?

उत्तर – भारत को सामान्यत: पाँच भू-आकृतिक विभागों में विभाजित किया जाता है –

◆ उत्तरी मैदान

◆ प्रायद्वीपीय पठार

◆ भारतीय मरुस्थल

◆ तटीय मैदान

◆ द्वीप समूह

                   हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीप पठार के उच्चावच लक्षणों में निम्नलिखित अंतर है –

◆ हिमालय विश्व का नवीनतम मोड़दार पर्वत है जो मुख्य रूप से परतदार चट्टानों से निर्मित है जबकि प्रायद्वीपीय पठार बेसाल्ट निर्मित पठार है।

◆ हिमालय की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट (8850मीटर) है जबकि प्रायद्वीपीय पठार की सबसे ऊँची चोटी अनाईमुडी (2695 मीटर) है।

हिमालय की औसत ऊँचाई 6000 मीटर है जबकि प्रायद्वीपीय पठार की औसत ऊँचाई 700-1000 मीटर के बीच है।

6. भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए।

उत्तर – भारत के उत्तरी मैदान तीन प्रमुख नदी प्रणालियों- सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों से बना है, इसीलिए इसे सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान भी कहा जाता है । यह मैदान जलोढ़ मृदा से बना है। लाखों वर्षों में हिमालय के गिरिपाद में स्थित बहुत बड़ी बेसिन में जलोढ़ों का निक्षेप हुआ, जिससे इस उपजाऊ मैदान का निर्माण हुआ है। इसका विस्तार 700000 वर्ग कि०मी० क्षेत्र पर है। यह मैदान लगभग 24 कि०मी० लंबा एवं 240 से 320 कि०मी० चौड़ा है। यह सघन जनसंख्या वाला भौगोलिक क्षेत्र है। यह समृद्ध आवरण, पर्याप्त पानी की उपलब्धता तथा अनुकूल जलवायु के कारण कृषि की दृष्टि से भारत का अत्यधिक उत्पादक क्षेत्र है।

7. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए-

(i) मध्य हिमालय

उत्तर – हिमाद्रि एवं शिवालिक के बीच स्थित हिमालय की श्रृंखला को मध्य हिमालय/हिमाचल/निम्न हिमालय के नाम से जानी जाती है । इन श्रृंखलाओं का निर्माण मुख्यतः अत्यधिक संपीड़न तथा परिवर्तित शैलों से हुआ है । इनकी ऊँचाई 3700 मीटर से 4500 मीटर के बीच तथा औसत चौड़ाई 50 किलोमीटर है। जबकि पीरपंजाल श्रृंखला सबसे लंबी तथा सबसे महत्वपूर्ण श्रृंखला है । धौलाधार एवं महाभारत श्रृंखलाएँ भी महत्वपूर्ण है। इसी श्रृंखला में कश्मीर की घाटी तथा हिमाचल के कांगड़ा एवं कुल्लू के घाटी स्थित है। इस क्षेत्र को पहाड़ी नगरों के लिए जाना जाता है।

(ii) मध्य उच्च भूमि

उत्तर- नर्मदा नदी के उत्तर में प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग जो कि मालवा के पठार के अधिकतर भागों पर फैला है  उसे मध्यउच्च भूमि के नाम से जाना जाता है।

(iii) भारत के द्वीप समूह

उत्तर- भारत के द्वीप समूह को दो भागों में बाँटा जा सकता है – अरब सागर में स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा बंगाल की खाड़ी में स्थित लक्षद्वीप द्वीप समूह।

          अंडमान और निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में उत्तर से दक्षिण के तरफ फैले है जिसमें कुल छोटे-बड़े 572 द्वीप स्थित हैं। लक्षद्वीप में कुल द्वीपों की संख्या 36 है, जिनमें से मात्र 11 द्वीपों पर ही मानवीय अधिवास पाया जाता है। ये द्वीप अरब सागर में केेरल के मालाबार तट के पास स्थित है जो प्रवाल से बना है।

मानचित्र कार्य

भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित दिखाइए –

(i) पर्वत शिखर – के-2, कंचनजुंगा, नंगापर्वत, अनाईमुडी

(ii) पठार – शिलांग, छोटानागपुर, मालवा तथा बुंदेलखंड

(iii) था मरुस्थल, पश्चिमी घाट, लक्षद्वीप समूह, गंगा-यमुना दोआब तथा कोरोमंडल तट


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एनसीईआरटी के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



1 भारत

1.निम्नलिखित चार उत्तरों में से उपयुक्त उत्तर चुनिए:

(i) कर्क रेखा किस राज्य से नहीं गुजरती है?

(क) राजथान 

(ख) उड़ीसा

(ग) छतीसगढ़ 

(घ) त्रिपुरा

उत्तर – (ख) उड़ीसा

(ii) भारत का सबसे पूर्वी देशांतर कौन सा है?

(क) 97°25, पू० 

(ख) 77°6, पू०

(ग) 68°7, पू० 

(घ) 82°32, पू०

उत्तर – (क)97°25, पू०

(iii) उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम की सीमाएँ किस देश को छूती है?

(क) चीन 

(ख) भूटान

(ग) नेपाल 

(घ) म्यांमार

उत्तर – (ग) नेपाल

(iv) ग्रीष्मावकाश में आप यदि कवरती जाना चाहते हैं तो किस केंद्र शासित क्षेत्र में जायेंगे?

(क) पुडुचेरी

(ख) लक्षद्वीप

(ग) अंडमान और निकोबार

(घ) दीव और दमन

उत्तर –(ख) लक्षद्वीप

(vi)  मेरे मित्र एक ऐसे देश के निवासी हैं जिस देश की सीमा भारत के साथ नहीं लगती है । आप बताईये वह कौन सा देश है?

(क) भूटान

(ख) ताजिकिस्तान

(ग) बांग्लादेश

(घ) नेपाल

उत्तर –(ख) ताजिकिस्तान

2. निम्न प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए:

(i) अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूह के नाम बताइए। दक्षिण में कौन-कौन से द्वीपीय देश हमारे पड़ोसी हैं?

उत्तर – अरब सागर में लक्षदीप द्वीप समूह तथा बंगाल की खाड़ी में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह स्थित है। दक्षिण में समुद्र पार हमारे दो द्वीप समूह देश श्रीलंका और मालदीव है।

(ii) उन देशों के नाम बताइए जो क्षेत्रफल में भारत से बड़े है?

उत्तर – क्षेत्रफल में भारत से बड़े देशों का नाम क्रमशः रूस, कनाडा, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया तथा भारत है।

(iii) हमारे उत्तर-पश्चिमी, उत्तरी तथा उत्तर-पूर्वी पड़ोसी देशों के नाम बताइए।

उत्तर – हमारे देश के उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ, उत्तर में चीन (तिब्बत), नेपाल और भूटान के साथ तथा उत्तर-पूर्व में म्यांमार व बांग्लादेश के साथ है।

(iv) भारत में किन-किन राज्यों से कर्क रेखा गुजरती है, उनके नाम बताइए।

उत्तर – भारत के निम्नलिखित राज्यों से कर्क रेखा होकर गुजरती है – गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा तथा मिजोरम।

3. सूर्योदय अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग में गुजरात के पश्चिमी भाग की अपेक्षा 2 घंटे पहले क्यों होता है, जबकि दोनों राज्यों में घड़ी एक ही समय दर्शाती है ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – भारत के अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग के निवासी गुजरात के पश्चिमी भाग निवासियों की तुलना में सूर्योदय होने से 2 घंटा पहले ही उठ जाते हैं क्योंकि भारत में अरुणाचल प्रदेश और गुजरात के बीच स्थानीय समय में 2 घंटे का अंतर है। जब अरुणाचल प्रदेश में सूर्योदय होता है उस समय गुजरात में अंधेरा रहता है और वहाँ 2 घंटे बाद सूर्योदय होता है। ऐसा दोनों में 30° देशांतरीय विस्तार के कारण होता है।

            चूँकि  पृथ्वी 24 घंटे में 360° देशांतर घूम जाती है। अतः 1° देशांतर पार करने में पृथ्वी को 4 मिनट का समय लगता है । सौराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश के बीच 30° देशांतर का अंतर है। अतः 30°×4 मिनट = 120 मिनट यानी दो घंटा हुआ।

4. हिंद महासागर में भारत की केंद्रीय स्थिति से इसे किस प्रकार लाभ प्राप्त हुआ है?

उत्तर – हिंद महासागर जो कि पश्चिम में यूरोपीय देशों और पूर्वी एशियाई देशों को मिलाता है। भारत को केंद्रीय स्थिति प्रदान करता है। दक्षिण का पठार हिंद महासागर में शीर्षवत फैला हुआ है और पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के देशों के साथ-साथ पूर्वी एशिया के देशों से भी पूर्वी तट के माध्यम से निकटतम संबंध बनाए हुए है। हिंद महासागर में किसी भी देश की तटीय सीमा भारत जैसी नहीं है। भारत की इसी महत्वपूर्ण स्थिति के कारण एक महासागर का नाम किसके नाम पर रखा गया है।

मानचित्र कौशल 

1. निम्नलिखित की मानचित्र की सहायता से पहचान कीजिए।

(i) अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूह।

उत्तर –

(ii) भारतीय उपमहाद्वीप किन देशों से मिलकर बनता है?

उत्तर –

(iii) कर्क रेखा कौन-कौन से राज्यों से गुजरती है?

उत्तर –

(iv) भारतीय मुख्य भूभाग का दक्षिणी शीर्ष बिंदु।

त्तर –

(v) भारत का सबसे उत्तरी अक्षांश

उत्तर –

(vi) अंशों में भारत के मुख्य भूभाग का दक्षिणी अक्षांश

उत्तर –

(vii) भारत का सबसे पूर्वी और पश्चिमी देशांतर

उत्तर –

(viii) सबसे लंबी तटरेखा वाला राज्य

उत्तर –

(ix) भारत और श्रीलंका को अलग करने वाली जलसंधि

उत्तर –

(x) भारत के केंद्र शासित क्षेत्र

उत्त


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