Unique Geography Notes हिंदी में

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PG SEMESTER-3SETTLEMENT GEOGRAPHY (बस्ती भूगोल)

 15. Trend and Problems of Urbanization / नगरीकरण की प्रवृति एवं समस्याएँ

 15. Trend and Problems of Urbanization 

(नगरीकरण की प्रवृति एवं समस्याएँ)



Q. नगरीकरण से आप क्या समझते है? नगरीकरण से संबंधित समस्याओं की चर्चा करें। 

Trend and Problems of Urbanization 

               नगरीकरण एक प्रक्रिया है जिसके तहत कोई भी ग्रामीण बस्ती धीरे-2 नगरीय बस्ती में बदलती हैं। दूसरे शब्दों में वह कोई भी अधिवासीय बस्ती जहाँ की जनसंख्या प्राथमिक कार्यों को छोड़ती है और लगातार द्वितीयक एवं तृतीयक गतिविधियों में संलग्न होने लगती है तो इस प्रक्रिया को भी नगरीकाण से संबोधित करने लगते हैं। कुछ भूगोलवेताओं का यह भी कहना है कि “नगरों के बढ़ रहे आकार या बढ़ रहे नगरीय जनसंख्या को भी नगरीकरण कहा जाता है। वर्तमान समय में यही परिभाषा सर्वाधिक मान्यता रखता है। इस संदर्भ में विश्व की करीब 44% जनसंख्या नगरों में रहती है।

           विश्व में नगरीकरण की वार्षिक वृद्धि 3.1% है जो नगरीय विस्फोट का प्रतीक है। विकसित देशों में नगरीकरण की प्रक्रिया लगभग शिथिल है। जबकि विकासशील देशों में नगरीकरण की प्रक्रिया दर तीव्र है। 1980-91 के बीच निम्न आयवर्ग के देशों में वार्षिक नगरीय वृद्धि 8.5% था जबकि मध्यम आय वर्ग वाले देशों में नगरीय वृद्धि दर 3.4% और विकसित देशों में 0.9% था। 1991ई० में विकसित देशों की 73% जनसंख्या नगरों में थी जो 2000 में बढ़कर 75% हो गई। दूसरी ओर विकासशील ‘देशों में 1991 में 35% नगरों में निवास करती थी जो 2000 में बढ़कर 45% से भी अधिक हो गयी है।

          वर्तमान समय में विश्व की करीब 55% जनसंख्या, नगरों में निवास करने का अनुमान लगाया गया है। इसी प्रकार 2025 ई० में विकसित देशों में 83% और विकासशील देशों में 61% का अनुमान लगाया गया है। ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट होता है कि विकसित देशों की तुलना में विकासशील देशों का नगरीय वृद्धि की दर तीव्र है। वर्ल्ड डिजास्टर रिपोर्ट 1998 के अनुसार विकासशील देशों में नगरीय जनसंख्या का विस्फोट किस प्रकार से हो रहा है, उसने नीचे के तालिका में देखा जा सकता है-

प्रदेश  1950    1990
1. अफ्रीका  1.8% 7.5%
2. अमेरिका  30.1%  27.8%
3.  एशिया 28.6%  45.6%
4. यूरोप 38.8% 17.9%
5. ओसनिया 1.6%   1.3% 

          उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि केवल एशिया में ही विश्व की आधी जनसंख्या निवास करती है। 

         नगरीकरण की वर्तमान प्रवृति को विकसित और विकासशील देशों के संदर्भ में देखा जा सकता है। विकसित देशों में नगरीकरण की प्रवृति भले ही धीमी हैं लेकिन विकसित देशों की अधिकांश जनसंख्या नगरों में ही निवास करती है। इस प्रवृति से विकसित देशों में कई समस्याएँ उत्पन्न हुआ है। दूसरी ओर विकासशील देशों में तीव्र नरीकरण की प्रकृति के कारण गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही है। विकासशील देशों में नगरीकरण की एक यह भी प्रवृत्ति है कि देश की राजधानी नगर और बड़े-2 महानगरों की जनसंख्या बढ़ रही है। लेकिन छोटे नगरों की जनसंख्या यथावत है।

         विकसित और विकासशील दोनों ही प्रदेशों में इस प्रवृति का विकास हुआ है कि अधिक से अधिक लोग राजधानी या बड़े नगर में निवास करना चाहते हैं क्योंकि इन नगरों में बसने वाले लोगों का यह मानना है कि राजधानी नगर और महानगर में किसी-न-किसी प्रकार का रोजगार मिल ही जाता है। यह अवधारणा आमतौर पर विकासशील देशों में प्रचलित है। दूसरी ओर विकसित देशों में अधिक सुरक्षा, अधिक सार्वजनिक सुविधाएँ और अधिक रोजगार क कारण इन नगरों में निवास करना चाहती है।

           राजधानी एवं महानगरों की बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण मेट्रोपोलिटेन नगर के स्थान पर मेगासिटी का विकास होने लगा है। अगर भारत की ही लिया जाय तो पाते हैं कि 1991 में यहाँ मात्र 27 महानगर थे जो 2001 में बढ़‌कर 35 हो चुका है।

         बड़े आकार के नगरों में जनसँख्या विस्फोट से सार्वजनिक सुविधाओं की कमी होने लगी है। पुराने बस्तियाँ मलीन/गंदी बस्ती के रूप में बदलने लगे हैं। प्रदूषण की वहाँ गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होने लगी है। प्रदूषण का आलम यह है कि नगरों में ऑक्सीजन बार खुलने लगे हैं। 1996 में UNICEF के एक अध्ययन के अनुसार विकासशील देशों में 170 करोड़ जनसंख्या नगरों में रहती है जिनमें से 160 करोड़ के पास आवास की कमी है। इसके अलावे स्वच्छ जल, प्राथमिक स्वास्थ्य की सुविधा नगण्य है।

       विकसित एवं विकासशील दोनों ही प्रदेश के नगरों में परिवहन दुर्घटना तेजी से बढ़ी है। वर्ल्ड डिजास्टर रिपोर्ट 1998 में बताया गया कि सर्वाधिक परिवहन दुर्घटना से मृत्यु इथोपिया में होती है। इसके बाद नेपाल, बंगलादेश,  चीन, स्वाजीलैण्ड और भारत का स्थान आता है।

नगरीकरण की समस्याएँ

            उपरोक्त सामान्य समस्याओं के अलावे विकसित एवं विकासशील देशों में अलग-2 विशिष्ट समस्याएँ भी उत्पन्न हो रही है। जैसे:-

(A) विकसित देश की विशिष्ट नगरीय समस्याएँ:-

(1) विकसित देशों के अधिकतर महानगरीय प्रशासन वितीय संकट के दौर से गुजर रही है। जैसे- माण्ट्रीयल, ओसलो, स्टॉकहोम में स्थित नगर प्रशासन को कोई ऋण देने के लिए तैयार नहीं है।

(2) खाली अधिवासों की समस्या-

        विकसित देशों में जनसंख्या नगर से ग्राम की ओर स्थानान्तरित हो रही है क्योंकि विकसित देशों के ग्रामीण क्षेत्र भी नगर के समान बिजली, परिवहन एवं अन्य संरचनात्मक सुविधाएँ उपलब्ध है। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र भीड़-भाड़ और पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त हैं। ऐसे में नगरीय जनसंख्या अधिक-से-अधिक ग्रामीण क्षेत्र में अधिवास करने की प्रवृति रखती है जिसके कारण विकसित देशों के नगरों में लाखों अधिवास खाली पड़े हैं।

(3) नवजनसंख्या का विस्फोट-

          60 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को नवजनसंख्या के अन्तर्गत रखते हैं। विकसित देशों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा और पर्याप्त पोषण उपलब्ध होने के कारण बूढ़ों की जनसंख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे लोग प्राय: निर्भर जीवन व्यतीत करते हैं। ऐसे लोगों के बच्चे बूढ़े माता-पिता को बुजुर्ग आश्रम में ले जाकर छोड़ देते हैं। इससे पारिवारिक विखण्डन की भी गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। 

(4) प्रदूषण की समस्या-

       विकसित देशों के नगर वायु, जल और ध्वनि तीनों प्रकार के प्रदूषण ही समस्या से उलझ रहे हैं। शिकागों में 60% लोग बहरे हो चुके हैं। इसी तरह से USA के 70% नगरीय जनसंख्या प्रदूषित वायु लेने के लिए बाध्य है।

(5) जननांकीय समस्या-

         विकसित देशों में एकल परिवार के विकास तथा अपने स्वास्थ के प्रति अति जागरूकता के करण जहाँ एक ओर परिवारों का विखंडन हो रहा है। वहाँ विवाह एवं नातेदारी जैसी सामाजिक संस्थाओं का पत्तन हुआ है जिसके कारण वहां नाकारात्मक जनसंख्या वृद्धि की समस्या उत्पन्न हुई है।

(B) विकासशील देशों की विशिष्ट नगरीय समस्याएं:- 

(1) विकासशील देशों में तीव्र ग्रामीण-नगरीय स्थानान्तरण के कारण नगरीय जनसंख्या विस्फोट की समस्या उत्पन्न हुई। 

(2) विकासशील देशों के अधिकतर देशों में अधिवासीय मकान की कमी की समस्या है और जो मकान उपलब्ध है उनका स्तर काफी निम्न है।

(3) गंदी बस्तियों का विकास विकासशील देशों के नगरों की एक गंभीर समस्या है। मुंबई का धरावी क्षेत्र विश्व की सबसे बड़ी गंदी बस्ती क्षेत्र का उदा० है। 

(4) विकासशील देशों के अधिकतर नगरों में नियोजित आन्तरिक संरचना का अभाव है। अनियोजित विकास के कारण नगरीय भूमि का न तो सही तरीके से प्रयोग हमें पता है और न ही उनका विकास हो पाता है। अनियोजित नगरों में परिवहन साधन धीमी गति से चलती है, वहीं दुर्घटना की भी संभावना अधिक होती है।

(5) विकासशील देशों में तीव्र नगरीकरण के कारण अनियोजित उपान्त क्षेत्रों से विकास बहुत तेजी से हो रहा है। उपान्त क्षेत्र से मुख नगर की ओर आने वाली परिवहन साधनों का घोर अभाव है वहीं दूसरी ओर वैसे सड़‌कों पर सड़क जाम एवं अति भीड़-भाड़ की  समस्या देखा जा सकता है।

(6) विकसित देशों की भाँति ही विकासशील देशों के नगरों में गंभीर प्रदूषण की समस्या से गुजर रहे है।

निष्कर्ष:- 

      अतः ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि विकसित और विकासशील देशों की कुछ सामान्य समस्याएँ हैं वहीं अलग-2 भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कुछ विशिष्ट समस्याएँ भी हैं। ऊपर बताये गये समस्याओं की विवेचना की जाए तो पाते हैं कि गुणवत्ता और गहनता की दृष्टि से विश्व के सभी नगरों प लागू होता है।


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I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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