Unique Geography Notes हिंदी में

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Human Geography - मानव भूगोल

14.. Explain habitat as a cultural expression/ सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के रूप में निवास स्थान को समझाइए।

14. Explain habitat as a cultural expression.

(सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के रूप में निवास स्थान को समझाइए।)

अथवा

विश्व के विभिन्न भागों में निवास करने वाली प्रतिनिधि प्रजातियाँ


         मानव जीवन विभिन्न परिस्थितियों द्वारा प्रभावित होता है। विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाने वाली परिस्थितियाँ भिन्नता वाली होती हैं। अतः वहाँ का मानव-जीवन अन्य क्षेत्रों से भिन्न होता है। मानव निवास की दृष्टि से निम्नांकित क्षेत्र हैं:-

(i) विषुवतरेखीय क्षेत्र

(ii) उष्ण मरुस्थलीय क्षेत्र

(iii) घास के मैदान

(iv) टुण्ड्रा प्रदेश

       इन प्रदेशों में निवास करने वाली प्रतिनिधि प्रजातियों का विवरण नीचे दिया जा रहा है:

(1) पिग्मी:-

     पिग्मी मध्य अफ्रीका के कांगो बेसिन में जायरे व कांगो गणराज्यों एवं गैबन व कैमरून में पाए जाते हैं। इनकी मुख्य बस्तियाँ छोटे-छोटे समूहों में घने वनों के आसपास पाई जाती हैं। पिग्मी काले, नाटे कद के नीग्रिटो प्रजाति के लोग हैं। इनका कद 1 से 1.5 मीटर तक होता है। इसीलिए इन्हें बौने कहा जाता है। इनकी शारीरिक रचना में छोटा कद, भार कम, रंग काला अथवा चाकलेटी, पैर लम्बे, बाल छोटे और छल्लेदार गुच्छों वाले, होठ लटकते हुए मोटे, नथुने चौड़े, नाक चपटी और ठोढ़ी पतली होती है।

     पिग्मी स्थायी घर बनाकर नहीं रहते हैं। अधिकांश पिग्मी जंगली जीवों से सुरक्षा की दृष्टि से अपनी झोपड़ियाँ वृक्षों पर ही बनाते हैं। ये झोपड़ियाँ पेड़ की टहनियों, पत्तों एवं घास-फूस से बनाई जाती हैं। उन पर चढ़ने के लिए बांस की सीढियाँ काम में लाई जाती हैं।

     उष्ण एवं आर्द्र जलवायु के कारण इन लोगों को वस्त्रों की आवश्यकता बहुत कम पड़ती है। अतः ये बहुत कम वस्त्रों का प्रयोग करते हैं।

    पिग्मी को वनों में फूल, मांस के लिए पशु एवं पक्षी अधिक मात्रा में मिल जाते हैं। अतः शिकार और फल एकत्रित कर इनका भी भोजन पिग्मी जाति के लोग करते हैं। ये लोग कन्द, मूल, फल, केला, कसाबा, रतालू, मक्का आदि खाते हैं। पिग्मी लोगों का मुख्य व्यवसाय पशुओं का शिकार, वन से वस्तुएं एकत्रित करना और मछली मारना है। आखेट करने में ये लोग बड़े चतुर होते हैं। हाथी जैसे भीमकाय पशु का शिकार भी सरलता से कर लेते हैं।

cultural expression

(2) बोरो:-

     पश्चिमी अमेजन बेसिन में निवास करने वाली जाति बोरो है। ब्राजील, पीरू तथा कोलम्बिया के समीपवर्ती क्षेत्र में जहाँ अमेजन की सहायक-जापुरा, पुतुगामा, ईसा के बेसिन हैं, वहाँ बोरो आदिम जाति कृषक के रूप में जीवन-यापन करती है। ये लोग शारीरिक गठन में अमेरिकी इण्डियन जैसे हैं। इनकी त्वचा का रंग भूरा, सीधे काले बाल, तथा मध्यम कद होता है। इनका भोजन कुसावा की रोटियाँ तथा पका मांस मुख्य होता है। जापुरा नदी तट के निवासी प्रातः स्नान कर ठण्डी कसावा की रोटी तथा जंगली फलों का भोजन करते हैं। इनके अतिरिक्त ग्रब, मछली तथा मधु का भी प्रयोग करते हैं।

     नृत्य के समय स्त्रियाँ अपने सम्पूर्ण शरीर में चित्रकारी करती हैं और बीजों का हार बनाकर पहनती हैं। पुरुष नृत्य के समय पक्षियों के पंखों का मुकुट पहनते हैं।

    बोरो जाति के लोग वनों को जलाकर साफ की हुई भूमि पर बड़े और ऊँचे मकान बनाते हैं। कई परिवारों का संयुक्त मकान होता है। यहाँ के निवासी कृषि करते हैं। ये कृषि के अतिरिक्त आखेट भी करते हैं। ये प्रतिदिन नदियों और जलाशयों में मछली और केकड़ों को जाल में फंसाकर पकड़ते हैं। शिकार के लिए एक विशेष प्रकार का यंत्र प्रयोग करते हैं जिसे ब्लो-पाइप कहते हैं।

     बोरो का परिवार सारा गाँव ही होता है, परन्तु पूरे गाँव में भी छोटे-छोटे कई परिवार होते हैं। दो परिवारों के मध्य लड़के-लड़कियों का विवाह होने से इनके रीति-रिवाज तथा भाषा में समानता पाई जाती है।

(3) सेमांग:-

       सेमांग जनजाति मलेशिया में मलाया प्रायद्वीप के उत्तरी भाग तथा थाईलैण्ड के दक्षिणी भाग के पहाड़ी भागों में फैली हुई है। इनके प्रमुख क्षेत्र उत्तरी पैराक, केदा, केलनतान, पैहांग में पाए जाते हैं। उनकी शारीरिक रचना नीग्रिटो जैसी हैं। इनका रंग चाकलेटी या गहरा भूरा, नाक चपटी व खुली हुई, होठ मोटे, आंखें बड़ी और स्थिर दृष्टि वाली, ठोड़ी अन्दर को घंसी हुई होती है एवं कद नाटा होता है।

     यह जनजाति अपना भरण-पोषण वन-वस्तु संग्रह एवं शिकार द्वारा करती है। विषुवतरेखीय एवं आर्द्र मानसूनी वनों से ये कन्द मूल, फल जड़ें, मोटे तने जैसे कन्द एकत्रित करते हैं। जंगली रतालू एवं ड्यूरिन पेड़ के मोटे फल का यहाँ के भोजन में विशेष महत्व है।

       ये लोग अपना निवास स्थान पहाड़ी ढालों पर सुरक्षित स्थलों के निकट बनाते हैं। इनकी झोपड़ियाँ चट्टानी भाग की छाया में प्रायः खजूर, रटन, ताड़ एवं अन्य लम्बी पत्ती वाली टहनियों से बनाई जाती है। झोपड़ियों का निर्माण स्त्रियाँ करती हैं, किन्तु पुरुष भी सहायता करते हैं।

सेमांग के एक या एक से अधिक घरों के समूह में एक ही कबीले के या बड़े परिवार के लोग रहते हैं। यही इनका समाज भी है। इनका मुख्य उद्यम कन्द मूल, फल, आदि एकत्रित करना तथा आखेट करना है। वन्य पदार्थों को एकत्रित करने का कार्य प्रायः स्त्रियाँ करती हैं।

(4) सकाई:-

     मलेशिया में मुख्य मलाया प्रायद्वीप के मध्यवर्ती पहाड़ी ढालों पर दूर-दूर तक फैली हुई जनजाति है। इनकी शारीरिक रचना अधिक आकर्षक एवं बदन गठीला होता है। इनका रंग हल्का भूरा अथवा साफ होता है। ये लोग पहाड़ी ढालों से नीचे नदी घाटियों एवं संकरी मैदानी पट्टी में रहते हैं। इनका आवास झोपड़ियाँ होती हैं जो टहनियों, छाल व पत्तों से ढकी जाती हैं।

     ये अपना भरण-पोषण मुख्यतः शिकार, वन्य-वस्तु संग्रह एवं मछलियाँ पकड़कर करते हैं। रबर के बगीचों में भी कार्य करके मजदूरी प्राप्त करते हैं। इनकी सामाजिक व्यवस्था एवं रीति-रिवाज सेमांग से मिलती जुलती है।

(5) पापुआन:-

      प्रशान्त महासागर में न्यूगिनी द्वीप के निवासी पापुआन कहलाते हैं। ये कद में मोटे नाटे होते हैं तथा चमड़ी का रंग हल्का होता है। ये लोग वृक्षों की जड़ों, छाल, कन्दमूल, फल, आदि से भोजन प्राप्त करते हैं। शिकार से प्राप्त मांस अन्य जीव भी भोजन के मुख्य पदार्थ हैं। इनके गाँव पहाड़ियों की चोटियों पर होते हैं। प्रत्येक गाँव पुराने ढंग पर किलाबन्दी किए रहता है। इनके घर का आकार गोल होता है।

       ये लोग सांपों तथा शत्रुओं से रक्षा हेतु कभी-कभी ऊँचे पेड़ों पर भी अपना मकान बना लेते हैं। इनकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। कृषि में गन्ना तथा पपीता मुख्य उत्पादन है। ये लोग पशुपालन भी करते हैं। पालतू पशुओं में सुअर का प्रमुख स्थान है।

    पापुआन की लड़ाई का आधार रोटी है। ये बड़े खूंखार होते है। लड़ना-झगड़ना तथा हत्या करना बड़ी सामान्य बात है। ये लोग अन्धविश्वासी होते हैं।


(6) बद्दू:-

     बद्दुओं का निवास क्षेत्र दक्षिण-पश्चिमी एशिया में पश्चिमवर्ती अरब प्रायद्वीप तथा अफ्रीका में सहारा के उष्ण मरुस्थल हैं। ये अपने को सेमेटिक जाति की एक शाखा के वंशज मानते हैं। केवल स्थायी विकास क्षेत्रों को छोड़कर बद्दू लोगों का कोई स्थायी निवास नहीं होता है। ये अपने कबीलों, ऊंटों, घोड़ों, कुत्तों, भेड़-बकरियों, आदि के साथ चारे-पानी और मरुद्यानों की खोज में भ्रमण करते रहते हैं। इनका मुख्य भोजन खजूर है। इसके अलावा गेहूँ, जौ, मक्का, आदि भी खाते हैं।

        ये लोग अपने शरीर को सूती वस्त्रों से ढंके रहते हैं। इनके कपड़े ढीले-ढाले होते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय भेड़, बकरी, ऊंट और घोड़े पालना है। ये मरुद्यानों के लोगों को खजूर, ऊन, पशु, मांस और दूध बेचकर बदले में गेहूँ, जौ, कपड़े तथा तम्बाकू, आदि ले लेते हैं।


(7) बुशमैन:-

       कालाहारी मरुस्थल में निवास करने वाले बुशमैन हैं। ये लोग ठिगने कद के होते हैं। ये चपटी मुखाकृति, भारी पलकों और तिरछी आंखों वाले होते हैं। इनका रंग भूरा और पीलापन लिए होता है। इनका आवास कच्ची झोपड़ी गुफाओं तथा कन्दराओं में होता है, ये लोग प्रायः अर्द्ध नग्नावस्था में रहते हैं। बुशमैन मांसाहारी होते हैं। शिकार करना और मांस प्राप्त करना इनका मुख्य व्यवसाय है। शिकार के लिए स्थान-स्थान पर घूमना व शिकार के पीछे मीलों दूर तक भगाकर मारना इनके लिए अनिवार्य हो जाता है।

 

(8) खिरगीज:-

      ये लोग मध्य एशिया में किरगिजस्तान में पामीर उच्च भूमि तथा ध्यानशान पर्वतमाला के क्षेत्र में निवास करते हैं। इनका शरीर खूब गठा हुआ सुडौल तथा मजबूत होता है। यह तुर्कों के सम्मिश्रण से उत्पन्न हुई जाति है। खिरगीज घुमक्कड़ जाति के लोग होते हैं। अतः इनका कोई स्थायी घर नहीं होता है। भ्रमणकारी होने के कारण तम्बू ही इनका घर होता है। इन्हें पशुओं की खाल तथा ऊन के नमदों से बनाया जाता है। इनका भोजन पशुओं से ही प्राप्त होता है। पशुओं का मांस, रक्त, दूध, दूध पदार्थ इनके भोजन के अंग हैं। बकरे का मांस इनका प्रिय भोजन है।

     खिरगीज अर्थव्यवस्था में गाय, घोड़ों, भेड़ और बकरियों का विशेष महत्व है। ये जूते, टोपियाँ, टोकरियाँ, मशकें, कोट, पायजामे, आदि बनाते हैं। ये लोग मौसमी पशुचारण करते हैं।

(9) एस्किमो:-

     एस्किमो का निवास ध्रुवीय क्षेत्रों में टुण्ड्रा प्रदेश में स्थित है। एस्किमो मंझोले कद के होते हैं। इनका रंग भूरा व पीलापन लिए होता है, चेहरा गोल और चौड़ा तथा शरीर, बेडौल, आंखें काली और छोटी, नाक चपटी, मांसल शरीर, जबड़े भारी तथा दांत विशेष मजबूत होते हैं। ये लोग मांसाहारी होते हैं। इनका मुख्य भोजन सील, बालरस और ह्वेल, मछलियाँ, कैरीबो, बारहसिंगे, ध्रुवीय भालू, आदि का मांस है।

     इनका मुख्य व्यवसाय आखेट है। ये लोग श्वेत भालू, रेण्डियर, कैरीबो, आर्कटिक लोमड़ी, खरगोश, समूरदार जानवर, ह्वेल, सील, बालरस, आदि का शिकार करते हैं।

        इनका निवास गृह इग्लू (Igloo) कहलाता है। ये तीन या चा मीटर के घेरे में बनाए जाते हैं। इनके वस्त्र जानवरों की खाल से निर्मित होते हैं। स्त्रियाँ एवं पुरुष एक समान वस्त्र पहनते हैं। स्लेज, कयाक, उमियाक तथा हारपून इनके दैनिक उपकरण हैं।



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I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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