Unique Geography Notes हिंदी में

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ECONOMIC GEOGRAPHY (आर्थिक भूगोल)

7. Distribution and Production of Iron ore in world (विश्व में लौह अयस्क के वितरण एवं उत्पादन)

7. Distribution and Production of Iron ore in world

(विश्व में लौह अयस्क के वितरण एवं उत्पादन)



Production of Iron     

          विश्व में अति प्राचीन काल से लौह खनिज का उपयोग मनुष्य करता रहा है। भारत में लौह खनिज के उपयोग का इतिहास लोहे की खोज के साथ जुड़ा है। दिल्ली में कुतुबमीनार के प्रांगण में स्थित लौह स्तम्भ विदेशी धातु विज्ञानियों के लिए एक आश्चर्यजनक निर्माण है। जंक रहित लोहा बनाने की कला का यह अनूठा प्रयोग है।

       आज लोहा यांत्रिक युग की धुरी बन गया है क्योंकि अधिकांश यंत्र इसी से बनाये जा रहे हैं। इसकी कठोरता, टिकाऊपन और अन्य धातुओं के साथ मिलकर मजबूत बनने की क्षमता के कारण इसका उपयोग दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। लोहे का सक्षम विकल्प अभी तक सामने नहीं आया है।

 लौह अयस्क के प्रकार-

        लौह अयस्क को लोहे के अंश के आधार पर चार वर्गों में विभाजित किया जाता है:

(i) मैग्नेटाइट (Magnetite) Fe3O4: यह सर्वोत्तम किस्म का लौह अयस्क होता है, जिसमें लोहे की मात्रा लगभग 72% होती है। इसमें वाष्प की मात्रा सबसे कम होती है एवं इसका रंग काला होता है।

(ii) हेमाटाइट (Hematite) Fe2O2: यह लोहे का सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत है, जिसमें लोहे का अंश लगभग 70 प्रतिशत होता है।

(iii) लिमोनाइट (Limonite) 3Fe2O3 3H2O: इसमें धातु का अंश 60 प्रतिशत तक रहता है। इसका रंग पीला होता है।

(iv) सिडेराइट (Siderite) FeCO3: यह सर्वाधिक निम्न कोटि का अयस्क है, जिसमें लोहे का अंश 48 प्रतिशत होता है।

विश्व में लौह अयस्क का संचित भण्डार-

          पृथ्वी के धरातल के निर्माण में लौह तत्त्व की मात्रा लगभग 5 प्रतिशत है। फलतः यह प्रायः सर्वत्र पाया जाने वाला खनिज है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार 50 प्रतिशत से 70 प्रतिशत धात्विक सम्पन्नता का लौह खनिज भण्डार 3700 अरब मीटरी टन है।

         संचित भण्डार का 18.9 प्रतिशत यूक्रेन, 16.5 प्रतिशत ब्राजील 15.1 प्रतिशत रूस, 12.4 प्रतिशत चीन, 10.8 प्रतिशत आस्ट्रेलिया 5.1 प्रतिशत कजाकिस्तान, 4.1 प्रतिशत संयुक्त राज्य अमेरिका, 2.6 प्रतिशत भारत 2.1 प्रतिशत स्वीडेन और 1.6 प्रतिशत वेनेजुएला में आँका गया है। इस प्रकार विश्व के दस देश 89 प्रतिशत से अधिक लौह अयस्क भण्डार संजोए हुए हैं। शेष 11 प्रतिशत बाकी विश्व के देशों में पाया जाता है।

         निम्नस्तरीय धातुओं का भण्डार उच्चस्तरीय धातु के अयस्कों से पाँच से छः गुना अधिक है लेकिन उसकी ओर अभी विश्व का ध्यान नहीं है। उत्पादन के दृष्टिकोण से विकसित राष्ट्र आगे है।

लौह अयस्क का उत्पादन

      लौह अयस्क का उत्पादन उपयोग पर आधारित होता है, फलत: विकसित देशों में इसकी माँग अधिक होने से उत्खन्न भी अधिक होता है। 1960 ई० तक विश्व का लौह अयस्क उत्पादन 2565 लाख मीट्रिक टन और 2006 में 18000 लाख मीट्रिक टन हो गया। इससे स्पष्ट है कि दिनोदिन लौह अयस्क की माँग बढ़ती जा रही है।

       विश्व का तीन-चौथाई लौह अयस्क मात्र दस देशों द्वारा उत्पादित होता है, जिसमें चीन, ब्राजील, आस्ट्रेलिया, भारत, रूस, यूक्रेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका, कनाडा और स्वीडेन अग्रणी हैं। अन्य प्रमुख उत्पादकों में वेनेजुएला, कजाकिस्तान, ईरान, मैक्सिको और मारुतानिया विशेष उल्लेखनीय हैं।

         विश्व में कच्चे लोहे के उत्पादन में 1975-2006 के बीच लगभग तीन गुने से अधिक की वृद्धि हुई है। कनाडा, जापान, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे उद्योग प्रधान देशों में लोहे का उत्पादन घटा है। ये देश कच्चे लोहे का विकासशील देशों से आयात कर रहे हैं तथा अपने संसाधनों को बचा रहे हैं। यही स्थिति दक्षिण-पूर्व एशिया की भी है।

       संसार का 32.7 प्रतिशत चीन, 17.7 प्रतिशत ब्राजील, 15.3 प्रतिशत आस्ट्रेलिया, 8.9 प्रतिशत भारत और 5.7 प्रतिशत रूस लौह अयस्क का उत्पादन कर रहे हैं, जो विश्व उत्पादन का 78 प्रतिशत है। विश्व में कच्चे लोहे का उत्पादन क्रमशः बढ़ रहा है। विश्व के दस देश कुल उत्पादन का लगभग 93 प्रतिशत लौह-अयस्क उत्पादित करते हैं।

1. चीन-

      यहाँ सामान्य स्तर के लौह अयस्क का विशाल भण्डार है जिसमें धातु सम्पन्नता चालीस प्रतिशत के आस-पास है। यहाँ का संचित भण्डार अभी परिवहन मार्गो की कमी के कारण उपयोग में नहीं लाया जा रहा है क्योंकि भण्डार दूर-दराज के इलाकों में स्थित है।

        चीन में लौह उत्खनन का तीव्र विकास 1950 के बाद शुरू हुआ जब घरेलु खपत के साथ निर्यात भी उत्पन्न हो गया। वर्तमान सूचनाओं के अनुसार चीन सर्वाधिक 58.8 करोड़ मीटरी टन से अधिक लौह-अयस्क स्थानान्तरित कर रहा है। हाल के वर्षों में तीव्र उत्पादन के कारण वह विश्व का प्रथम बड़ा लौह उत्पादक देश बन गया है। यहाँ का लगभग आधा संरक्षित भण्डार दक्षिणी मंचूरिया में है, जिसमें आशन-चांगलिंग एवं पेन्की क्षेत्र प्रमुख उत्पादक हैं।

2. ब्राजील-

        लौह अयस्क के उत्पादन में ब्राजील विश्व का दूसरा बड़ा उत्पादक देश बन गया है जो इसके उच्चकोटि के लौह अयस्क, विदेशी माँग और अनुकूल परिस्थिति में निक्षेपण के कारण सम्भव हुआ है। 1960 में यह विश्व का दसवाँ बड़ा उत्पादक था लेकिन इसके बाद उत्पादन तीव्र गति से बढ़ा और उछल कर यह दूसरे स्थान पर चला गया। यहाँ विश्व का 17.7 प्रतिशत लौह अयस्क भण्डार मिनास-गेरास राज्य के पठारी भाग में है। यही क्षेत्र उत्पादन में भी अग्रणी है।

3. आस्ट्रेलिया-

      आस्ट्रेलिया में लौह खनिज का उत्पादन उत्तरोत्तर बढ़ता जा रहा है। 1960 की तुलना में यहाँ का उत्पादन लगभग डेढ़ गुना हो गया है। यह विश्व का लगभग 15.3 प्रतिशत लौह-अयस्क उत्पादित करता है और विश्व का तीसरा बड़ा उत्पादक देश है।

4. भारत-

       यह विश्व का चौथा बड़ा लौह अयस्क उत्पादक देश हो गया है, जो आन्तरिक खपत और विदेशी माँग के कारण अपने उत्पादन को निरन्तर बढ़ाता रहा है। भारत में चीन के बाद एशिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क भण्डार उपलब्ध है। यहाँ का लौह-अयस्क उच्च कोटि का है, जिससे इसकी विदेशी माँग बढ़ती जा रही है। 2006 में भारत का उत्पादन 1600 लाख मीटरी टन से अधिक था, जो विश्व उत्पादन का 8.9 प्रतिशत है।

5. रूस-

        रूस विश्व का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक रहा है, जो 1958 के बाद निरन्तर अपना प्रथम स्थान बनाये हुए था। यह अकेले विश्व का एक चौथाई से अधिक लोहा उत्खनित करता रहा है। रूस के विघटन के बाद यहाँ विश्व का 15.1 प्रतिशत लौह भण्डार सुरक्षित है। यहाँ 30 क्षेत्रों में उत्खनन कार्य किया जा रहा है।

6. यूक्रेन-

       दक्षिणी यूक्रेन में स्थित क्षेत्रों से उच्च कोटि का हेमाटाइट लौह अयस्क निकाला जाता है। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और धात्विक सम्पन्नता के कारण यह पूर्व सोवियत संघ का सर्वश्रेष्ठ खनिज लौह उत्पादक क्षेत्र रहा है, हालांकि कोयले का क्षेत्र (डोनवास) इससे 400 किमी० की दूर है।

         यहाँ का अधिकांश उत्पादन यूक्रेन और मास्को-तुला क्षेत्र में प्रयुक्त होता है। यहाँ का कुछ उत्पादन पूर्वी यूरोप के इस्पात केन्द्रों को भी भेजा जाता रहा है। क्रिबोईराग यूक्रेन का सबसे बड़ा लौह-अयस्क उत्पादन क्षेत्र है। 2006 में यहाँ का उत्पादन विश्व का 4.1 प्रतिशत था।

7. संयुक्त राज्य अमेरिका-

         उच्च कोटि का लौह अयस्क, सुविधाजनक स्थिति, पर्याप्त रक्षित भण्डार, उन्नत प्रावधिकी और पर्याप्त माँग के कारण 1958 तक संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व का अग्रणी लौह अयस्क उत्पादक देश था। राष्ट्रीय संरक्षण नीति के कारण इसका उत्पादन नियंत्रित कर दिया गया है, जिसके फलस्वरूप अब यह विश्व का सातवाँ बड़ा उत्पादक हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में पाँच क्षेत्र रक्षित भण्डार और उत्पादन दोनों के दृष्टिकोण से अग्रणी हैं। 2006 में यहाँ विश्व का केवल 2.9 प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादित हुआ था।

8. दक्षिणी अफ्रीका संघ-

        दक्षिणी अफ्रीका संघ में लौह धातु का उत्खनन अप्रत्याशित गति से बढ़ा है। 1960 में यह विश्व का मात्र एक प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादित करता था लेकिन 2006 में इसका हिस्सा बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो गया है। स्पष्ट है कि लौह अयस्क का उत्पादन व्यापारिक कारणों से अधिक बढ़ा है। यहाँ का अधिकांश लौह अयस्क निर्यात किया जाता है।

         यहाँ की लौह अयस्क की खानें ट्रांसवाल, आरेन्ज फ्री स्टेट और कपेटाउन प्रान्तों में स्थित हैं जो रेल मार्गों से सेवित हैं इन्हीं खानों के निकट मैगनीज और कोयले की खानें भी स्थित हैं।

9. कनाडा-

         कनाडा का लौह खनिज भण्डार उच्च कोटि का है। देश में सीमित माँग के बावजूद संयुक्त राज्य अमेरिका की बढ़ती माँग और जल यातायात की सुविधा के कारण यहाँ का उत्पादन तीव्र गति से बढ़ रहा है। 1948 में यहाँ मात्र चौदह लाख टन लौह खनिज का उत्पादन हुआ था, जो बढ़कर 2006 में 3.4 करोड़ मीटरी टन से अधिक हो गया है। कनाडा की प्रमुख खानें लेब्रोडोर (शेफलतिल) ओन्टोरिया, नेवस्का, क्यूवेक, ब्रिटिश कोलम्बिया तथा न्यूफाउण्डलैण्ड में हैं। यह विश्व का 9वाँ बड़ा उत्पादक है। 2006 में यहाँ विश्व का 1.9 प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादित हुआ था।

10. स्वीडन-

         स्वीडेन तीव्र उत्पादन के कारण यूरोप का प्रमुख लौह उत्पादक देश बन गया है। 2006 में यहाँ का उत्पादन 236 लाख मीटरी टन था, जो विश्व उत्पादन का 1.3 प्रतिशत है। उच्चकोटि के लौह खनिज के कारण स्वीडेन के लौह खनिज की अधिक माँग है।

11. वेनेजुएला-

         यह विश्व का ग्यारहवाँ प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक देश है, जो 1960 के बाद अपना उत्पादन तीव्र गति से बढ़ाने में सफलता प्राप्त कर सका है। यहाँ का लौह अयस्क उच्चकोटि का है, जिसकी माँग संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों में है। इस देश की आय का लगभग तीस प्रतिशत भाग अयस्क नियत से प्राप्त होता है। 2006 में यहाँ विश्व का 1.3 प्रतिशत लौह-अयस्क उत्पादित हुआ था। वेनेजुएला में अधिकांश उत्पादन सेन बोलिवार तथा एलपाओ की खानों से प्राप्त किया जाता है ,यहाँ की संचित राशि बहुत अधिक है।

लैटिन अमेरिका के अन्य देश-

         चिली और पेरू लैटिन अमेरिका के अन्य महत्त्वपूर्ण देश है जहाँ लौह अयस्क का उत्पादन तीव्र गति से बढ़ रहा है। इन देशों में कोयले की कमी के कारण अधिकांश उत्खनन निर्यात के लिए किया जाता है। चिली के तटीय भाग में वृन्तोको तथा रामेन्ल क्षेत्रों से अधिकांश लौह अयस्क प्राप्त किया जाता है। पेरू की खाने मारकोना एवं अकोर में हैं। जहाँ उच्चकोटि का लौह-अयस्क प्राप्त किया जाता है।

यूरोप के लौह-अयस्क उत्पादक देश-

         यूरोप के प्रमुख उत्पादकों में स्वीडेन के अतिरिक्त फ्रान्स, स्पेन, पूर्व यूगोस्लाविया और नार्वे विशेष उल्लेखनीय हैं। 1960 तक फ्रांस विश्व का चौथा बड़ा लौह उत्पादक देश रहा है, लेकिन अब यहाँ का उत्पादन बहुत तेजी से घटा है फलस्वरूप अब यह विश्व का सोलहवाँ उत्पादक बन गया है।

        फ्रांस के लौह-अयस्क में धातु की मात्रा चालीस प्रतिशत से कम है लेकिन रक्षित भण्डार बहुत अधिक है। लाँगवी, लान्द्रे, ओटाज ओर्न और नेन्सी प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। इसके अतिरिक्त नारमण्डी, ब्रिटेन एवं मध्यवर्ती पठार में भी छिटपुट जमाव पाया जाता है। स्पेन में उच्चकोटि का अयस्क प्राप्त किया जाता है जिसमें धातु की मात्रा साठ प्रतिशत से अधिक है। यहाँ सबसे अधिक उत्पादन बिलिवाओं क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है। इसके अतिरिक्त पिरेनीज एवं जिब्राल्टर क्षेत्रों में लौह अयस्क प्राप्त किया जाता है।

कजाकिस्तान-

      सोवियत संघ के विघटन के बाद कजाकिस्तान विश्व का तेरहवाँ प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक देश बन गया है, जो 2006 में विश्व का 1.0 प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादित किया था।

ईरान-

     ईरान विश्व का 1.1 प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादित कर बारहवें स्थान पर आ गया है।

    विश्व के अन्य प्रमुख उत्पादकों में मैक्सिकों, मारुतानिया, जर्मनी, लाइबेरिया, स्पेन, ब्रिटेन, पेरू, चिली, अल्जीरिया, मोरक्को, ट्यूनिएिशया, मारुतानिया, गैबन, स्वाजीलैण्ड, अंगाला, तुर्की, फिलीपीन्स, मलेशिया एवं इण्डोनेशिया के नाम विशेष उल्लेखनीय है।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार-

         वर्ष 1999 में चीन संसार का सबसे बड़ा लौह-आयस्क उत्पादक देश था। इसके बाद ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, भारत तथा रूस का स्थान था। लोहे का विश्व व्यापार काफी बड़ी मात्रा में होता है। ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा एवं भारत लौह अयस्क के प्रमुख निर्यातक देश हैं, जिनका निर्यात व्यापार में हिस्सा 70 प्रतिशत है। अन्य निर्यातक देशों में स्वीडन, लाइबेरिया, अल्जीरिया, वेनेजुएला आदि का नाम आता है।

        जापान विश्व का सबसे बड़ा लौह अयस्क आयातक (45 प्रतिशत) देश है। अन्य आयातक देशों में जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, इटली एवं फ्रांस प्रमुख हैं।

प्रश्न प्रारूप

1. विश्व में लौह अयस्क के वितरण एवं उत्पाद की विवचेना करें।

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I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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