Unique Geography Notes हिंदी में

Unique Geography Notes in Hindi (भूगोल नोट्स) वेबसाइट के माध्यम से दुनिया भर के उन छात्रों और अध्ययन प्रेमियों को काफी मदद मिलेगी, जिन्हें भूगोल के बारे में जानकारी और ज्ञान इकट्ठा करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस वेबसाइट पर नियमित रूप से सभी प्रकार के नोट्स लगातार विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रकाशित करने का काम जारी है।

GEOGRAPHICAL THOUGHT(भौगोलिक चिंतन)

26. ब्रिटिश भौगोलिक विचारधाराओं पर प्रकाश 

26. ब्रिटिश भौगोलिक विचारधाराओं पर प्रकाश


ब्रिटिश भौगोलिक विचारधाराओं पर प्रकाश 

            उन्नीसवीं सदी के मध्य तक ब्रिटेन में भूगोल की ओर विशेष ध्यान नहीं दिया गया। काफी समय बाद स्कूलों व कालेजों में भूगोल का अध्ययन प्रारम्भ किया गया। इस अध्यापन में छात्रों को पर्वतों, नदियों, शहरों आदि के नामों की सूची ही रटायी जाती थी। उन्नीसवीं सदी के अन्त में ब्रिटेन में भूगोल का अध्यापन विश्वविद्यालय स्तर पर प्रारम्भ किया गया। तब से अब तक ब्रिटिश भूगोलवेत्ताओं ने भी भूगोल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान किया है। ब्रिटिश भूगोलवेत्ताओं ने भूगोल के जिन क्षेत्रों में विशेष योगदान किया है, उनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:

(i) राजनीतिक भूगोल (Political Geography):-

         हेफोर्ड मेकिण्डर (Halford Mackinder) सर्वप्रमुख ब्रिटिश राजनीतिक भूगोलवेत्ता था। 1904 में उसने ‘रॉयल ज्योग्राफिकल सोसायटी’, लन्दन के समक्ष एक पत्र पढ़ा। यह ‘हृदय स्थल सिद्धान्त’ (Heart Land Theory) था। सिद्धान्त इस प्रकार था:

“जो पूर्वी यूरोप पर शासन करता है, हृदय स्थल को नियन्त्रित करता है, जो हृदय स्थल पर शासन करता है, विश्वद्वीप को नियन्त्रित करता है, जो विश्वद्वीप पर शासन करता है, विश्व को नियन्त्रित करता है।”

          रिचर्ड हार्टशोन के अनुसार मेकिण्ड का यह सिद्धान्त, संसार की शक्ति का विश्लेषण था, जो वर्तमान में मानव की राजनीतिक शक्तियों के मूल्यांकन का सबसे बड़ा योगदान हो गया है।

 

ब्रिटिश भौगोलिक
हेफोर्ड मेकिण्डर

(ii) आर्थिक भूगोल (Economic Geography):-

          दोनों महायुद्धों के मध्य ब्रिटेन में आर्थिक भूगोल पर विशेष ध्यान दिया गया था। इसमें प्राकृतिक तथ्यों के संसाधनों व आर्थिक क्रियाओं पर प्रभाव का अध्ययन किया गया। 1949 में स्मिथ (W. Smith) ने ब्रिटेन का ‘आर्थिक भूगोल’ (Economic Geography) लिखा। चिशोम (Chisholm) ने ‘वाणिज्य भूगोल’ (Hand book of Commercial Geography) नामक पुस्तक लिखी। 1930 में स्टाम्प (L. D. Stamp) ने ब्रिटेन के भूमि उपयोग मानचित्र पर कार्य प्रारम्भ किया।

          हरबर्टसन ने 1905 में विश्व के प्रादेशिक व आर्थिक भूगोल के लिये आधार तैयार किया। उसने विश्व को पन्द्रह प्राकृतिक भागों में बांटा था।

(iii) मानव-प्रकृति अन्तर्क्रिया (Man-Nature Interaction):-

           उन्नीसवीं सदी के अन्त से प्रथम विश्वयुद्ध तक ब्रिटेन में मानव व प्रकृति के सम्बन्धों का अध्ययन मुख्य रूप से किया गया। उस समय ब्रिटेन में भूगोल का अर्थ केवल धरातल व मानव पर उसके प्रभावों के वर्णनों तक ही सीमित था। ब्रिटिश भूगोलवेत्ताओं ने विश्व को प्राकृतिक प्रदेशों में बांटा तथा बताया कि प्रत्येक प्रदेश में मानव किस प्रकार वातावरण से प्रभावित होकर कार्य करता है। फोर्डे (Forde) ने मानव के जीवन व कार्यों पर वातावरण का प्रभाव प्रदर्शित करने के लिये एक पुस्तक Habitat, Economy and Society प्रकाशित की।

(iv) ऐतिहासिक भूगोल (Historical Geography):-

         प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन में ऐतिहासिक भूगोल पर अच्छा कार्य हुआ है। मेकिण्डर ने ब्रिटेन में ऐतिहासिक भूगोल के लिये आधार तैयार किया। उसका मत था कि भूगोलवेत्ताओं को वर्तमान के साथ-साथ अतीत की भौगोलिक विशेषताओं का भी अध्ययन करना चाहिये, अन्यथा भूगोल समकालीन घटनाओं का वर्णन मात्र रह जायेगा। ऐतिहासिक भूगोल में जिन ब्रिटिश भूगोलवेत्ताओं ने विशेष योगदान किया, वे हैं—न्यूबेगिन (M. I. Newbegin), टेलर (E. G. R. Taylor), गिलबर्ट (E. W. Gilbert) व डार्बी (H. C. Darby)।

(v) कृषि भूगोल (Agricultural Geography):-

           बीसवीं सदी के आगमन के साथ ही ब्रिटिश भूगोलवेत्ताओं ने कृषि भूगोल में रुचि लेनी प्रारम्भ कर दी थी । शोध कार्य प्रारम्भ कर दिये थे। परन्तु भूमि उपयोग सर्वेक्षण का कार्य 1920-30 के बाद प्रारम्भ किया गया। 1920 में स्टाम्प (L. D. Stamp) ने ब्रिटेन के भूमि उपयोग मानचित्र तैयार किये। स्टाम्प ने एक पुस्तक ‘ब्रिटेन की भूमि, इसका उपयोग व दुरुपयोग’ (The land of Britain, Its Use and Misuse) भी लिखी।

(vi) मात्रात्मक क्रान्ति (Quantitative Revolution):-

        पिछले 40-50 वर्षों में ब्रिटेन में मात्रात्मक क्षेत्र में, भूगोल को स्थापित किया गया है। हैगेट (Peter Haggett) तथा चोर्ले (Richard Chorley) ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। हैगेट ने सांख्यिकी विधियों का उपयोग, मानव व सामाजिक भूगोल (Human and Social Geography) के क्षेत्र में, मॉडल (Models) बनाने में किया। मात्रात्मक क्रान्ति यद्यपि अमेरिका से प्रारम्भ हुई, परन्तु ब्रिटेन में फैलते भी इसे देर न लगी। ब्रिटिश भूगोलवेत्ताओं ने अपना ध्यान इस ओर केन्द्रित किया और मॉडलों व सांख्यिकी की सहायता से अध्ययन प्रारम्भ किया। ‘मानव भूगोल में मॉडल’ (Models is Human Geography), मानव भूगोल में ‘स्थानीकरण विश्लेषण’ (Locational Analysis in Human Geography) व ‘भौगोलिक शिक्षण की सीमाएं’ (Frontiers in Geographical Teachings) ऐसी ही कृतियां हैं।

       आज ब्रिटेन में ‘यथार्थवाद’ (Positivism or Realism) पर भी कार्य किया जा रहा है। इसमें उन पर जोर दिया जाता है जिनके सम्बन्ध में सही-सही निर्णय नहीं लिया जा सकता जैसे- मानव की व्यावहारिक समस्याओं (Practical ) पर ध्यान दिया जाता है। हंटिंगटन ने मानव भूगोल के तथ्यों को 5 तथा मानवीय आवश्यकताओं को 4 कोटियों में रखा है:

मानव भूगोल के तथ्य-

(i) पृथ्वी एक ग्लोब के रूप में,

(ii) भौम्याकार,

(iii) जलाशय,

(iv) मिट्टियां तथा खजिन पदार्थ,

(v) जलवायु।

मानवीय आवश्यकतायें-

(i) भौतिक आवश्यकताएं,

(ii) मुख्य व्यवसाय,

(iii) चातुर्थ और

(iv) उच्च आवश्यकताएं।

हटिंगटन के अनुसार-

(i) आबादी के घनत्व,

(ii) धन-धान्य तथा स्थिति,

(iii) एकाकीपन की मात्रा,

(iv) मानव झुकाव, साधन तथा उद्योग सम्बन्धी भिन्नता एवं

(v) स्फूर्ति की मात्रा पर भौगोलिक प्रभावों को स्पष्ट किया है।

          हटिंगटन ने आर्थिक तथा सामाजिक भूगोल पर भी कार्य किया है। वास्तव में भूगोल के क्षेत्र में इनका महान योगदान है। इनके भौगोलिक विचारधारा उसके सहयोगियों तथा मानव भूगोलवेत्ताओं के लिए प्रेरणा-स्रोत सिद्ध हुई है।


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I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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