27. Atomic Power (परमाणु शक्ति)
Atomic Power
(परमाणु शक्ति)
परमाणु शक्ति वह शक्ति है जिसे नियंत्रित (गैर-विस्फोटक) नाभिकीय अभिक्रिया से उत्पन्न किया जाता है।
इस शक्ति का उपयोग विनाशकारी एवं निर्माणकारी दोनों ही है। इसका अधिक उपयोग सामरिक महत्व की शक्ति के रूप में किया जा रहा है। केवल इससे निःसृत रेडियोधर्मी समस्थानिकों (Radioactive isotopes) का उपयोग विज्ञान के क्षेत्र में किया जा रहा है। भारत भी इस ऊर्जा का उपयोग निर्माणकारी कार्यों में करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
इसका उपयोग कम कोयला एवं खनिज तेल उत्पादक देशों तथा अन्य ऊर्जा के अभाव वाले देशों में किया जा सकता है।
परमाणु ऊर्जा के स्रोत:-
इस शक्ति के प्रमुख स्त्रोत यूरेनियम तथा थोरियम खनिज हैं। बेरीलियम, लीथियम तथा जिरकोनियम खनिजों का भी उपयोग होता है। अच्छी यूरेनियम, पिचब्लैंड तथा कानोंटाइट अयस्कों से प्राप्त होती है। यूरेनियम की यूरेनिनाइट ऑक्साइड पिचब्लैंड से प्राप्त होती है और यह परमाणु ऊर्जा उत्पादन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। विश्व के ज्ञात यूरेनियम क्षेत्रों का 70% उत्तरी अमेरिका तथा अफ्रीका महाद्वीपों में उपलब्ध है।
अणु शक्ति का विकास:-
अणु शक्ति का ज्ञान वर्ष 1930 के लगभग हो गया। इस शक्ति का विनशकारी उपयोग द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान के हिरोशिमा नगर पर हुआ। इसके विकास में रेडियो सहधर्मी कणों से सुरक्षा, विखण्डित पदार्थों का निस्तारण तथा अधिक लागत प्रमुख समस्याएँ हैं जिनका समाधान आवश्यक है।
विश्व के राष्ट्र अणुशक्ति के विकास की होड़ में संलग्न हैं। यूरेनियम एवं थोरियम की कुल उपलब्ध मात्रा 1700 × 10 लाख अरब ब्रिटिश ताप मापक इकाई मानी जाती है।
अणु शक्ति के उत्पादक देश:-
परमाणु शक्ति का विश्व में वितरण विभिन्न देशों के बीच असमान है। कुछ देशों के पास परमाणु ऊर्जा के उत्पादन और उपयोग के लिए अधिक संसाधन हैं, जबकि अन्य देशों के पास परमाणु शक्ति का उपयोग करने की क्षमता काफी सीमित है
इस शक्ति के मुख्य उत्पादक देश स्वतंत्र देशों के राष्ट्रमंडल, संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन, चीन तथा भारत हैं। कनाडा, इटली, जापान, स्वीडन, चेक गणराज्य, जर्मनी तथा ऑस्ट्रेलिया में भी परमाण्विक शक्ति गृह हैं। इस समय विभिन्न देशों में एक सौ से अधिक अभिक्रियक क्रियाशील हैं।
स्वतंत्र देशों का राष्ट्रमंडल:-
सर्वप्रथम सन् 1954 में पाँच हजार किलोग्राम की क्षमता का परमाणु शक्ति गृह बनाया गया। इस समय कई परमाणु शक्ति गृह कार्यरत हैं। जिनमें कुछ की क्षमता एक लाख किलोवाट तक है।
मुख्य केन्द्र नीवो-वोरेनश, बेलीयार्क्सकोया, लेनिनग्राड, कोला तथा बिलविना हैं। मानग्रीश्लाक प्रायद्वीप पर 3.5 लाख किलोवाट का अभिक्रियक है, जो विश्व में सबसे बड़ा केन्द्र है।
नोट: स्वतंत्र राष्ट्रों का राष्ट्रमंडल (CIS) सोवियत संघ के विघटन के बाद 1991 में स्थापित एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसमें 12 देश शामिल हैं: रूस, बेलारूस, यूक्रेन, आर्मेनिया, अजरबैजान, जॉर्जिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मोल्दोवा, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान।
संयुक्त राज्य अमेरिका-
वर्ष 1958 में पिट्सबर्ग, नेपिंगनेटा, शिपिंगपोर्ट में आण्विक शक्ति गृह स्थापित हुआ। इसके बाद अणुशक्ति प्रायद्वीप द्वारा कई केन्द्र स्थापित किये गये, जिनमें प्रमुख ओहियो, टेनेसी तथा कोलम्बियो नदी घाटियों में हैं। बर्कले तथा लिवरमोर (कैलिफोर्निया), हैसफोड (वाशिंगटन), लासवेगास (नेवादा), सेनेक्टैडी बुकहेवे (न्यूयार्क), आर्को (इडाहो), लास आलामास (न्यूमेक्सिको) तथा सवाना (जार्जिया) प्रमुख केन्द्र हैं। वर्तमान में यहाँ 7,167.7 अरब यूनिट परमाणु ऊर्जा उत्पादित होती हैं।
ग्रेट ब्रिटेन-
वर्ष 1957 में कैल्डरहाल विश्व का द्वीतीय आण्विक संयन्त्र स्थापित किया गया, जिसकी उत्पादन क्षमता 65 हजार किलोवाट है। अल्प केन्द्र हटर्सटन, ट्राब्सफिनिड, केले, विण्डस्केल, चैकेलकास, विनफ्रिथ, ओल्डबरी, हिंकले, प्वाइण्ट, साइजवेल तथा डाउनेर हैं। अगले वर्ष तक आवश्यक विद्युत शक्ति का 40% परमाणु शक्ति के उत्पादन का लक्ष्य है।
फ्रांस-
पश्चिम यूरोप के छः देशों जर्मनी, फ्रांस, इटली, बेल्जियम, नीदरलैण्डस तथा लक्सेम्बर्ग ने यूरेटम (Euratom-European Atomic Energy Community) का गठन किया है जो अणु शक्ति के विकास में प्रयत्नशील है। फ्रांस में मारकूले के निकट 40 मेगावाट क्षमता की अणु भट्टी स्थापित की गयी है।
अन्य शक्ति केन्द्र तैयार हो रहे हैं। इस देश में सम्पूर्ण विद्युत शक्ति परमाणु शक्ति करने का लक्ष्य है। इस देश के समक्ष शक्ति की गम्भीर समस्या है, क्योंकि 40% शक्ति की आपूर्ति आयातित कोयला एवं खनिज तेल से करनी पड़ रही है।
यूरोप महाद्वीप के देश इटली में भी वर्ष 1965 से परमाणु शक्ति का उत्पादन हो रहा है। इस समय पाँच कम्पनियाँ अणु गृहों पर कार्य कर रहीं हैं। स्वीडन में अणु शक्ति का विकास जारी है।
चीन-
इस देश में अणु तथा हाइड्रोजन बमों के कई सफल विस्फोट किये गये है। यहाँ अणु शक्ति का प्रयोग सैनिक कार्यों में किया जा रहा है। अनुमान है कि विश्व परमाणु शक्ति का पाँचवा शक्तिशाली देश चीन है।
भारत-
विश्व के ऊपर वर्णित पाँच देशों के पश्चात इसका स्थान विश्व में छठवाँ है। अणु शक्ति के उत्पादन का श्रीगणेश वर्ष 1969 में हुआ। प्रथम परमाणु भट्टी तारापुर (महाराष्ट्र) में स्थापित हुई जिसकी क्षमता 420 मेगावाट है। दूसरी इकाई राणा प्रताप सागर (राजस्थान) के रावतभाटा स्थान पर है, जहाँ 220 मेगावाट की दो इकाइयाँ कार्यरत हैं। इनकी कुल क्षमता 440 मेगावाट है। तीसरा केन्द्र कलपक्कम (तमिलनाडु) में है। इसकी क्षमता 470 मेगावट होगी। इसमें केवल भारतीय इंजीनियर तथा वैज्ञानिक कार्यरत हैं। उन तीनों भट्टियों में स्वस्थानिकों का उत्पादन हो रहा है जिनका निर्यात ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, चेक गणराज्य, हांगकांग तथा फिलिपीन्स को हो रहा है।
नरोरा (उ.प्र). में भी एक अणु शक्ति गृह चालू है। इसकी क्षमता 440 मेगावाट है। इस समय सभी चौदह केन्द्रों की क्षमता 2,720 मेगावट है। 2016 तक भारत में आठ परमाणु ऊर्जा केन्द्रों पर 22 रियक्टर कार्यरत है। जिसकी क्षमता 6780 मेगावाट है। 6 अन्य परमाणु रियक्टर के बन जाने से 4300 मेगावाट क्षमता और बढ़ गयी है।
जापान-
इस देश में वर्ष 1957 में अभिक्रिया की स्थापना हुई। इबाराकी प्रीफ्रेक्चर में टोकियो से 112 किमीo दूर टोकाई स्थान पर अणु भट्टी की स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से हुई। सुरूगा में भी एक अणु भट्टी है। इस समय परमाणु शक्ति का उत्पादन 5 लाख किलोवाट है। चार संयंत्र लग रहे हैं। इनका उत्पादन लक्ष्य 780 लाख किलोवाट है। देश की आधी आवश्यकता परमाणु शक्ति से पूरी होने लगी है।