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1. Major Course / Geomorphology (Theory) Solved Questions Paper 2023

(Major Course or MJC-1)

Geomorphology (Theory)

Solved Questions Paper 2023



(Patliputra University Patna)

Geomorphology

Part-A/भाग-अ
(Objective Type Questions)
(वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

Note: All questions are compulsory.
सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

1. Select the correct answer from the alternatives given below: [2×10=20]

दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

(i) Who propounded the ‘Nebular Hypothesis’ in the year 1796?
(a) Kant
(b) Roche
(c) Laplace
(d) Lockyer
‘निहारिका परिकल्पना’ को वर्ष 1796 में किसने प्रतिपादित किया?
(a) काण्ट
(b) रोशे
(c) लाप्लास
(d) लॉकियर
उत्तर – (c) लाप्लास

(ii) Lithosphere consists of:
(a) Crust and Core
(b) Mantle and Core
(c) Upper and Lower Mantle
(d) Crust and Upper Mantle
स्थलमंडल में सम्मिलित है:
(a) कस्ट और कोर
(b) मैण्टिल और कोर
(c) ऊपरी और निम्न मैण्टिल
(d) क्रस्ट और ऊपरी मैण्टिल
उत्तर – (d) क्रस्ट और ऊपरी मैण्टिल

(iii) The term ‘Isostasy’ was first used by:
(a) Airy
(b) Pratt
(c) Dutton
(d) Holmes
‘समस्थिति’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया गया :
(a) एयरी द्वारा
(b) प्राट द्वारा
(c) डटन द्वारा
(d) होम्स द्वारा
उत्तर – (c) डटन द्वारा

(iv) Which of the following was not a part of Gondwana Land?
(a) Asia
(b) Australia
(c) India
(d) Africa
निम्नलिखित में से कौन गोंडवाना भूमि का भाग नहीं।
(a) एशिया
(b) आस्ट्रेलिया
(c) भारत
(d) अफ्रीका
उत्तर – (a) एशिया

(v) Which of the following is a major tectonic plates of the earth?
(a) Nazca Plate
(b) Philippines Plate
(c) Arabian Plate
(d) Antarctica Plate
निम्नलिखित में से कौन-सी पृथ्वी की एक प्रमुख विवर्तनिक प्लेट है?
(a) नाज्का प्लेट
(b) फिलीपाइन प्लेट
(c) अरेबियन प्लेट
(d) अण्टार्कटिका प्लेट
उत्तर – (d) अण्टार्कटिका प्लेट

(vi) Mountain building on the surface of the earth is a result of:
(a) Endogenic Forces
(b) Exogenic Forces
(c) Gravitational Forces
(d) Magnetic Forces
पृथ्वी की सतह पर पर्वत निर्माण परिणाम है:
(a) अंतर्जात बल का
(b) बहिर्जात बल का
(c) गुरुत्वाकर्षण बल का
(d) चुम्बकीय बल का
उत्तर – (a) अंतर्जात बल का

(vii) What is the scale of earthquake intensity?
(a) Beaufort Scale
(b) Seismic Scale
(c) Secant Scale
(d) None of these
भूकंप की तीव्रता मापने का पैमाना क्या है?
(a) ब्यूफोर्ट पैमाना
(b) सिस्मिक पैमाना
(c) सिकेंट पैमाना
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (b) सिस्मिक पैमाना

(viii) Glacial erosion is responsible for the formation of the following:
(a) Sink holes
(b) Swallow holes
(c) Kames
(d) Cirque
हिमानी अपरदन निम्नलिखित के विन्यास के लिए उत्तरदायी है:
(a) घोल रन्ध्र
(b) विलय रन्ध्र
(c) केम
(d) हिमगहर या सर्क
उत्तर – (d) हिमगहर या सर्क

(ix) Which of the following is not an agent of weathering?
(a) Glacier
(b) Wind
(c) Soil
(d) River
निम्नलिखित में से कौन अपक्षय का प्रतिनिधि नहीं है?
(a) हिमानी
(b) पवन
(c) मृदा
(d) नदी
उत्तर – (c) मृदा

(x) The most abundant metal in the earth crust is:
(a) Sodium
(b) Aluminium
(c) Calcium
(d) Iron
पृथ्वी के क्रस्ट में सबसे प्रचुर मात्रा में धातु है
(a) सोडियम
(b) एल्युमीनियम
(c) कैल्शियम
(d) लोहा
उत्तर – (b) एल्युमीनियम

Part-B / भाग-ब
(Short Answer Type Questions)
(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Attempt any four questions out of six questions. Each question carries equal marks.
[5×4=20]
छः प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न समान अंक का है।

2. Explain the importance of the study of Geomorphology.
भू-आकृति विज्ञान के अध्ययन के महत्त्व को समझाइए।

3. Define Isostasy. Who gave the theory of Isostasy?
समस्थिति को परिभाषित कीजिए। समस्थिति का सिद्धान्त किसने दिया?

4. What is the difference between the focus and epicenter of an earthquake?
भूकम्प के मूल एवं अधिकेन्द्र में क्या अंतर है?

5. What are two types of weathering?
अपक्षय के दो प्रकार क्या हैं?

6. What is a Karst Topography? What are the essential conditions for its formation?
कार्स्ट स्थलाकृति क्या है? इसके निर्माण के लिए आवश्यक दशाएं क्या हैं?

7. Define cycle of erosion according to Davis.
डेविस के अनुसार अपरदन चक्र की परिभाषा बताइए।

Part-C / भाग-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any three questions out of five questions. Each question carries equal marks. [10×3-30]

पाँच प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न समान अंक का हैं

8. Describe the internal structure of the earth in detail.
पृथ्वी की आंतरिक संरचना का विस्तार से वर्णन कीजिए।

9. Explain the views of Airy and Pratt regarding Isostasy.
समस्थिति के सम्बन्ध में एयरी तथा प्राट के मतों की व्याख्या कीजिए।

10. Critically examine the theory of Plate Tectonic.
प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

11. Describe the different stages of mountain building according to Kober.
कोबर के अनुसार पर्वत निर्माण के विभिन्न चरणों का वर्णन कीजिए।



सभी लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का उत्तर सरल एवं आसान शब्दों में देना यहाँ सीखें



Part-B / भाग-ब
(Short Answer Type Questions)
(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Attempt any four questions out of six questions. Each question carries equal marks.
[5×4=20]
छः प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न समान अंक का है।

2. Explain the importance of the study of Geomorphology.
भू-आकृति विज्ञान के अध्ययन के महत्त्व को समझाइए।

उत्तर- स्थलमण्डल के दृश्य भागों अर्थात् स्थलरूपों का वैज्ञानिक अध्ययन भू-आकृति विज्ञान में किया जाता है, इसलिए भू-आकृति विज्ञान को स्थलरूपों का विज्ञान कहते हैं। भू-आकृति विज्ञान के लिए अंग्रेजी में प्रयुक्त किये जाने वाले Geomorphology शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ (Geo-पृथ्वी, morphi-रूप और logos-वर्णन) भी स्थलरूपों के अध्ययन से सम्बन्धित है।

महत्त्व

        विकासवादी भू-आकृति विज्ञान में स्थलरूपों के विकास क्रम का व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है। इसी के अन्तर्गत क्षेत्र के भू-आकृतिकीय विकास की प्रमुख घटनाओं का तिथिकरण किया जाता है।

       डेविस ने स्थलरूपों के विकास क्रम को अपरदन चक्र के द्वारा समझाया है, जिसमें तीव्र ढाल समय के साथ अन्ततः धीमे ढाल वाले पेनीप्लेन में बदल जाता है। अन्य भू-आकृति विज्ञानवेत्ताओं, जिन्हें अनाच्छादन कालक्रम विज्ञानवेत्ता (Denudation Chronologists) कहा जाता है, ने बताया है कि किस तरह प्रादेशिक स्थलरूप समय के साथ हुए अपरदन एवं भूपृष्ठीय सतह के उत्थान की तीव्रता अथवा दर के अनुरूप विकसित हुए हैं। इन्होंने भूतकाल की अपरदनात्मक सतहों पर तिथिकरण द्वारा स्थलरूपों के विकास को समझाने का प्रयास किया।

       कुछ भू-आकृति विज्ञानवेत्ताओं ने परिवर्तित जलवायु के प्रभावों द्वारा स्थलरूपों के विकास को समझाया है। जलवायवीय भू-आकृति विज्ञान में स्थलरूपों और उनके ऊपर क्रियाशील भू-आकृतिक प्रक्रमों को प्रादेशिक जलवायवीय दशाओं से सम्बन्धित कर अध्ययन किया जाता है। जैसे ठण्डे क्षेत्रों में विद्यमान जलवायवीय दशाओं में हिमनद एक प्रभावी भू-आकृतिक प्रक्रम है जो भूदृश्य में परिवर्तन लाता है। इसी प्रकार वनस्पति विहीन रेगिस्तानी क्षेत्रों में पवन प्रमुख भू-आकृतिक प्रक्रम है।

      चट्टानों के प्रकार और भूगर्भिक संरचना (जैसे भ्रंश और वलन) के स्थलरूपों पर प्रभावों का अध्ययन संरचनात्मक भू-आकृति विज्ञान में किया जाता है। अधिकांश भू-आकृतिक प्रक्रमों की क्रियाशीलता चट्टानों की कठोरता और कोमलता से प्रभावित होती है। इसी तरह अधिकांश ढाल रूप चट्टानों की कठोरता और विन्यास (Disposition) के अनुरूप विकसित होते हैं। स्थलरूपों पर क्रियाशील प्रक्रमों (जैसे अपक्षय, अपरदन) की तीव्रता और प्रकृति का अध्ययन प्रक्रम भू-आकृति विज्ञान में किया जाता है। इसी में नदी बेसिनों और पहाड़ी ढालों पर होने वाले शैल पुंज प्रवाह (Mass Wasting) का अध्ययन किया जाता है। इन गतिशील प्रक्रमों की क्रियाविधि पर मानव के क्रियाकलापों से उत्पन्न प्रभावों का अध्ययन जैव-भू-आकृति विज्ञान में किया जाता है।

        मानव ने अपनी गतिविधियों के द्वारा विभिन्न भू-आकृतिक प्रक्रमों की क्रियाविधि में परिवर्तन ला दिया है। भूमि उपयोग में परिवर्तन तथा वन विनाश से मृदा अपरदन बढ़ा है। इसी प्रकार अम्ल वर्षा से शैलों के विघटन की प्रक्रिया तीव्र हुई है। मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए भू-आकृति विज्ञान के व्यावहारिक ज्ञान के उपयोग का अध्ययन व्यावहारिक भू-आकृति विज्ञान में किया जाता है।

        आज सम्पूर्ण विश्व में तटीय भागों में अपरदन, हिमनदों का पिघलना और उनकी गति का तीव्र होना, भूस्खलन, जल संयोजकों का अपरदन, बांधों में अवसादों का जमाव, मरुद्यानों और परिवहनों मार्गों पर बालुका स्तूपों का विस्तार, उत्खात भूमि का विस्तार, आदि जैसे समस्याओं की मॉनीटरिंग, पहचान और प्रबन्धन में व्यावहारिक भू-आकृति विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है।

3. Define Isostasy. Who gave the theory of Isostasy?
समस्थिति को परिभाषित कीजिए। समस्थिति का सिद्धान्त किसने दिया?

उत्तर- समस्थिति अर्थात भूसंतुलन भूगोल की एक ऐसी संकल्पना है जो भूपटल के विभिन्न स्तंभों के मध्य पाये जाने वाले संतुलन को व्याख्या करता है। भूसंतुलन का सामान्य अर्थ  “परिभ्रमण करती हुई पृथ्वी के ऊपर उभरे हुये क्षेत्र (जैसे-पर्वत, पठार, मैदान) एवं नीचे स्थित क्षेत्रों  (सागर, झील) में भौतिक एवं यांत्रिक स्थिरता भूसंतुलन कहलाता है।”

       भूसंतुलन आंग्ल भाषा में ‘Isostasy या Equilibrium’ कहलाता है। Isostasy शब्द ग्रीक भाषा के Isostasius से बना है जिसका तात्पर्य समस्थिति होता है। आइसोस्टैसी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1889 ई० में अमेरिकी भूवैज्ञानिक C.F. डटन ने किया था। इन्होंने कहा था कि समस्थिति के कारण ही पर्वत, पठार, मैदान और समुद्र साथ-साथ स्थित है। बहिर्जात बल पर्वतों से मिट्टी काट-काट कर समुद्र एवं मैदान में निक्षेपित करते रहते हैं। इसीलिए मैदान एवं समुद्र तली का भार अधिक तथा पर्वतों के भार कम होते है। भार में कमी या अधिकता के कारण भूगर्भ के भूपटल पर दबाव समान रूप से नहीं पड़ता है। समस्थिति इसी दबाव के विभिन्नता को संतुलन बनाये रखने में मदद करता है।
     डटन ने बताया कि जिस रेखा के सहारे भूपटलीय संतुलन कायम रहता है उसे ‘समदबाव तल’ (Level of Uniform Pressure) अथवा ‘समतोल तल’ (Isotatic Level) या ‘क्षतिपूर्ति तल’ (Level of Compensation) कहते है।
               
        ऑर्थर होम्स महोदय ने भूसंतुलन की व्याख्या करते हुए कहा है कि “संतुलन की वह दशा जो भूपटल पर विभिन्न ऊँचाई वाले पर्वत, पठार, मैदान अथवा सागरीय नितल के मध्य पायी जाती है, भूसंतुलन कहलाता है।”
भूसंतुलन सिद्धांत का बुनियाद
           भूकम्पीय तरंगो के अध्ययन से यह सिद्ध हो चुका है कि पृथ्वी के विभिन्न भागों के घनत्व भिन्न-भिन्न है। इनकी पुष्टि भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा भी किया गया है। 1859 ई० में गंगा सिंधु मैदान के मध्य में अक्षांश ज्ञात करते समय दो विधियों को प्रयोग में लाया गया:-
(l) साहुल विधि
(ll) त्रिभुजीकरण विधि 
        यह अक्षांशीय मापन का कार्य कल्याण एवं कल्याणपुर नामक स्थान पर किया जा रहा था। इन दोनों स्थानों पर उपरोक्त दोनों विधियों द्वारा आये परिणाम में भारी अंतर था। यह अंतर 5.236 सेकंड बताया गया। इस अंतर का कारण बताते हुए विद्वानों ने बताया कि साहुल को हिमालय पर्वत अपनी ओर आकर्षित कर रही है लेकिन पुनः यह प्रश्न उठाया गया कि अगर हिमालय साहुल को अपनी ओर आकर्षित कर रही है तो हिमालय जितना विशाल है उस दृष्टि से आकर्षण और अधिक होना चाहिए तथा अंतर 15 सेकेंड से भी अधिक होना चाहिए। कालांतर में इसी जटिल तथ्यों की व्याख्या भूसंतुलन से करने का प्रयास किया गया। बताया गया कि हिमालय के नीचे स्थित चट्टानों के घनत्व पृथ्वी के औसत घनत्व से भी कम है। जबकि समुद्र नितल का घनत्व पृथ्वी के औसत घनत्व से अधिक है। यही कारण है कि दोनों के बीच संतुलन की स्थिति कायम है। भूसंतुलन को स्पष्ट करने हेतु अनेक मत प्रतिपादित किये गये है:-
(1) एयरी का मत
(2) प्रौट का मत
(3) हिस्कानेन का मत
(4) जौली का मत

4. What is the difference between the focus and epicenter of an earthquake?
भूकम्प के मूल एवं अधिकेन्द्र में क्या अंतर है?

उत्तर- भूकम्प के मूल- भूपटल के जिस बिंदु से भूकम्प प्रारंभ होती है। उसे भूकम्प केंद्र (Focus) अथवा भूकम्प के मूल कहते है।

अधिकेंद्र- भूपटल के जिस बिंदु पर भूकम्प का झटका सबसे पहले अनुभव होता है उसे अधिकेंद्र कहते है।

5. What are two types of weathering?
अपक्षय के दो प्रकार क्या हैं?

उत्तर- अपक्षयण के प्रकार (Types of Weathering)

1. भौतिक अपक्षयण (Physical or Mechanical Weathering):-

           बिना किसी रासायनिक परिवर्तन के चट्टानों के टूट-फूट कर टुकड़े-टुकड़े होने की प्रक्रिया को भौतिक या यांत्रिक ऋतुक्षरण कहा जाता है।

⇒ भौतिक ऋतुक्षरण, मरुस्थलों में अधिक दैनिक तापांतर के कारण एवं ठंडी जलवायु वाले क्षेत्रों में पाले (Frost) के कारण होता है।

⇒ गर्म मरुस्थलों में स्वच्छ आकाश एवं वायु की शुष्कता के कारण दिन एवं रात के तापमान में काफी अंतर पाया जाता है। दिन के समय तेज धूप के कारण चट्टानों का ऊपरी आवरण तप्त होकर फैल जाता है। किन्तु रात के समय प्रायः तापमान गिरकर हिमांक (Freezing Point) तक पहुंच जाता है एवं चट्टानें सिकुड़ जाती हैं। इन क्रियाओं की पुनरावृति के कारण चट्टानों में दरार पड़ने लगता है एवं चट्टानें बड़े बड़े खंडों में टूट जाती हैं। इस प्रक्रिया को खंड विच्छेदन (Block Disintegration) कहा जाता है।

⇒ उष्ण मरुस्थलीय, अर्द्ध मरुस्थलीय एवं मानसूनी जलवायु प्रदेशों में अधिक तापांतर के कारण कभी-कभी चट्टानों की ऊपरी सतह गर्म होकर अन्दर की अपेक्षाकृत ठंडी सतह से अलग हो जाती है एवं ऊपर का भाग प्याज के छिलके की तरह अलग हो जाता है। इसे अपदलन, अपशल्कन या अपपत्रण (Exfoliation) कहा जाता है। यह क्रिया मुख्यतः ग्रेनाइट जैसी रवेदार चट्टानों में होती है।

⇒ चट्टानें विभिन्न खनिजों का समुच्चय होती हैं एवं विभिन्न खनिजों के फैलाव एवं सिकुड़ने की दर अलग-अलग होती हैं। इसके कारण चट्टानों के विभिन्न खनिज कण टूट-टूटकर अनेक खनिज कणों में विभाजित हो जाते हैं। चट्टानों का इस प्रकार खनिज कणों में टूटना कणिकामय विखंडन (Granular Disintegration) कहलाता है। खंड विखंडन एवं कणिकामय विखंडन के कारण ही गर्म मरुस्थलों में विस्तृत क्षेत्रों में बालू पाये जाते हैं।

⇒ शीत कटिबंधीय क्षेत्रों एवं उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में चट्टानों की छिद्रों एवं दरारों में जल के जमने एवं पिघलने की क्रिया क्रमिक रूप से होती है। इससे चट्टानें कमजोर हो जाती हैं एवं बड़े-बड़े खंडों में टूटने लगती हैं अर्थात् खंड-विखंडन (Block Disintegration) होने लगता है। यह क्रिया तुषार क्रिया (Frost Action) कहलाती है।

           खड़ी पहाड़ी ढालों पर इस प्रकार का विघटन अधिक देखने को मिलता है। विघटित चट्टानें गुरुत्व बल के कारण नीचे की ओर सरककर जमा होने लगती हैं। ये विखंडित चट्टानें खुरदरी एवं नुकीली होती हैं। इस प्रकार के कोणीय चट्टानी खंडों (Angular Rock Fragments) के ढेर को भग्नाश्म राशि (Scree) अथवा टैलस (Talus) कहा जाता है। इस प्रकार स्क्री या टैलस का निर्माण मुख्यतः तुषार क्रिया एवं गुरुत्वाकर्षण का परिणाम है।

2. रासायनिक अपक्षयण (Chemical weathering):-

     जब रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा चट्टानों का विखंडन (Disintegration) होता है तो उसे रासायनिक अपक्षयण कहा जाता है। जब विभिन्न कारणों से चट्टानों के अवयवों में रासायनिक परिवर्तन होता है तो उनका बंधन ढीला हो जाता है तो रासायनिक अपक्षयण की क्रिया होती है।

       तापमान एवं आर्द्रता अधिक रहने पर रासायनिक अपक्षयण की क्रिया तीव्र गति से होती है। यही कारण है कि विश्व के उष्ण एवं आर्द्र प्रदेशों में यह क्रिया अधिक महत्त्वपूर्ण होती है। शुष्क अवस्था में ऑक्सीजन एवं कार्बन डाईऑक्साइड का चट्टानों पर कोई रासायनिक प्रभाव नहीं पड़ता है, परंतु नमी की उपस्थिति में ये सक्रिय रासायनिक कारक (Active chemical Agent) बन जाते हैं।

(i) विलयन (Solution):-

        चट्टानों में उपस्थित विभिन्न खनिजों के जल में घुलने की क्रिया को विलयन कहा जाता है। उदाहरण के लिए सेंधा नमक (Rock Salt) एवं जिप्सम वर्षा के जल में आसानी से घुल जाते हैं।

(ii) ऑक्सीकरण (Oxidation):-

      ऑक्सीकरण की क्रिया विशेष रूप से लौह युक्त चट्टानों पर होती है। आर्द्रता बढ़ने पर लौह खनिज ऑक्सीजन से मिलकर ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं, जिसके कारण चट्टान अथवा खनिज कमजोर हो जाते हैं एवं उनका विखंडन होने लगता है। वर्षा ऋतु में लोहे में जंग लगना ऑक्सीकरण का ही परिणाम है।

(iii) जलयोजन (Hydration):-

       जलयोजन की प्रक्रिया में चट्टानों में उपस्थित खनिज जल को सोख लेता है। इसके कारण उनमें रासायनिक परिवर्तन होने लगता है एवं नये खनिजों का निर्माण होता है। इन नये खनिजों में जल का कुछ अंश रह जाता है। ये नये खनिज पुराने खनिजों की अपेक्षा मुलायम होते हैं। उदाहरण के लिए जलयोजन के फलस्वरूप ग्रेनाइट चट्टानों का फेल्डस्पार खनिज कायोलिन (Kaolin) मिट्टी में परिवर्तित हो जाता है।

(iv) कार्बोनेटीकरण (Carbonation):-

             जल एवं कार्बन डाई ऑक्साइड मिलकर हल्का कार्बोनिक अम्ल बनाते हैं। इस अम्ल का प्रभाव विशेष रूप से उन चट्टानों पर पड़ता है, जिनमें कैल्सियम, मैग्नेशियम, सोडियम, पोटेशियम एवं लोहे जैसे तत्त्व पाये जाते हैं। ये तत्त्व कार्बोनिक अम्ल में घुल जाते हैं, फलस्वरूप इन खनिजों से निर्मित चट्टानें कमजोर हो जाती हैं एवं उनका विखंडन होने लगता है।

              बलुआ पत्थरों (Sand Stone) में सामान्यतः कैल्सियम कार्बोनेट (Lime) ही संयोजक पदार्थ (Cementing Material) का कार्य करता है, जो कार्बोनिक अम्ल में शीघ्रता से घुल जाता है, फलस्वरूप बलुआ पत्थर का विखंडन होने लगता है।

⇒ कभी-कभी जलयोजन के कारण चट्टानों की ऊपरी सतह फूलकर निचली सतह से अलग हो जाती है। इसे गोलाभ अपक्षय (Spheroidal Weathering) कहा जाता है। इस प्रकार रासायनिक अपक्षयण की यह क्रिया अपदलन से काफी मिलती-जुलती है।

6. What is a Karst Topography? What are the essential conditions for its formation?
कार्स्ट स्थलाकृति क्या है? इसके निर्माण के लिए आवश्यक दशाएं क्या हैं?

उत्तर- चुना प्रधान वाले क्षेत्रों को कार्स्ट प्रदेश के नाम से जानते हैं। कार्स्ट प्रदेश शब्द एड्रियाटिक सागर के पूर्वी भाग में स्थित चूना पत्थर युक्त मैदान से लिया गया है। युगोस्लाविया के लोग ही चुना पत्थर मैदान को कार्स्ट नाम से संबोधित करते हैं।          

           कार्स्ट प्रदेश में भूमिगत जल अपरदन का सबसे प्रमुख दूत होता है। कार्स्ट प्रदेश में बनने वाले स्थलाकृतियों का सबसे पहले 1911 ई०  में जे.डब्ल्यू. बीड  एवं 1918 ई० में जे. स्वीजिक  ने अध्ययन किया था। कार्स्ट स्थलाकृति का निर्माण उन्हीं प्रदेश में होता है जहाँ निम्नलिखित तीन परिस्थितियाँ रहती है:-
(i) जहाँ विलियन करने वाली चुना प्रधान चट्टाने पाई जाती है।
(ii) चुना प्रधान चट्टानों में संरोध(Joints) का विकास हुआ हो।
(iii) चुना प्रधान चट्टानों के नीचे अपारगम्य चट्टान पाई जाती हो तथा उसके अंदर पर्याप्त ढाल का विकास हुआ हो।

7. Define cycle of erosion according to Davis.
डेविस के अनुसार अपरदन चक्र की परिभाषा बताइए।

उत्तरडेविस का सामान्य अपरदन चक्र  

        डेविस का सामान्य अपरदन चक्र सिद्धान्त भौगोलिक चक्र का सिद्धान्त के नाम से जाना जाता है। अमेरिकी भूगोलवेत्ता W. M. डेविस ने 1889 ई० में “Geographical Essay”नामक पुस्तक में अपरदन चक्र सिद्धान्त प्रस्तुत किया।
                 
       डेविस ने अपरदन चक्र सिद्धान्त को परिभाषित करते हुए कहा कि “अपरदन चक्र समय की वह अवधि है जिसके अंतर्गत एक उत्थित भूखण्ड अपरदन क्रिया द्वारा प्रभावित होकर एक आकृतिविहीन समतल मैदान का निर्माण करती है।”  

        डेविस ने बताया कि किसी समतल भूखण्ड के उत्थान के बाद उस पर तीन कारकों का प्रभाव पड़ता है-

(i) संरचना

(ii) प्रक्रम और

(iii) समय।

       इसी आधार पर डेविस ने यह परिकल्पना प्रस्तुत किया कि किसी भौगोलिक क्षेत्र का भूदृश्य संरचना, प्रक्रम और समय का फलन होता है। इस परिकल्पना को डेविस का त्रिकट (Trio of Devis) के नाम से जानते है। 

            अपरदन  चक्र आर्द्र प्रदेश में, शुष्क प्रदेश में, चुना पत्थर प्रधान क्षेत्रो में, समुद्र तलीय क्षेत्र में,एवं ध्रुवीय क्षेत्रों में सतत चलता रहता है। डेविस ने अपना सिद्धान्त आर्द्र प्रदेश के संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आर्द्र प्रदेश में बहता हुआ जल/नदी अपरदन का दूत होता है। बहता हुआ जल सम्पूर्ण प्रदेश को अपरदन क्रिया से प्रभावित करता है और प्रदेश में अपरदन चक्र को संचालित करता है। आर्द्र प्रदेश में अपरदन की क्रिया चक्रीय रूप से सक्रिय रहती है।

        डेविस ने अपरदन चक्र की तुलना मानव के जीवन चक्र से किया है। जैसे एक मानव जन्म के बाद युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था से होकर गुजरते हुए अपने जीवन लीला को समाप्त करता है और पुनः जन्म लेता है ठीक उसी प्रकार से सामान्य अपरदन चक्र उपरोक्त तीनों अवस्थाओं से होकर गुजरती है। उन्होंने पुनर्जन्म को पुनरुत्थान से तुलना किया है। 

Part-C / भाग-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any three questions out of five questions. Each question carries equal marks. [10×3-30]

पाँच प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न समान अंक का हैं

8. Describe the internal structure of the earth in detail.
पृथ्वी की आंतरिक संरचना का विस्तार से वर्णन कीजिए।

उत्तर- पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझने हेतु अप्रत्यक्ष साधनों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। यही कारण है कि पृथ्वी की आंतरिक संरचना के सम्बंध में अधिकतर ज्ञान अनुमान पर आधारित है। पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझने में भूकम्पीय विज्ञान (Seismology) या भूकम्पीय तरंग को सबसे सटीक वैज्ञानिक साधन माना जाता है। पृथ्वी के आंतरिक संरचना के अध्ययन से ज्ञात होता है कि पृथ्वी का औसत घनत्व 5.5 है। पृथ्वी के धरातल से केंद्र की ओर जाने पर घनत्व में लगातार बढ़ोतरी होते जाती है क्योंकि ऊपर से नीचे जाने पर चट्टान के दबाव एवम भार में बढ़ोतरी होते जाती है।

⇒ सामान्य नियम के अनुसार दाब बढ़ने से तापमान में बढ़ोतरी होती है। अतः प्रत्येक 32 मी० की गहराई पर 1℃  तापमान में बढ़ोतरी होती है।

      स्वेस महोदय ने पहली बार पृथ्वी की रासायनिक संरचना का अध्ययन किया। उन्होंने बताया कि रासायनिक संरचना के आधार पर पृथ्वी की आंतरिक भागों को तीन परतों में बाँटा जा  सकता है।

Internal Structure of The Earth

(1) सियाल (SIAL) 

            पृथ्वी का सबसे ऊपरी परत सिलिकन & अलुमिनियम से निर्मित है।

(2) सिमा (SIMA)

     स्वेस ने मध्यवर्ती परत को सिमा से संबोधित किया है और उन्होंने बताया कि सिमा सिलिकन & मैग्नेशियम से बना है।

(3) निफे (NIFE)

          पृथ्वी के सबसे आंतरिक भाग को निफे से संबोधित किया है और बताया कि यह निकेल & लोहा से बना है।

         भूकम्पीय साक्ष्यों के आधार पर पृथ्वी की आंतरिक संरचना का सबसे अधिक वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया जाता है। जिसके अनुसार पृथ्वी को तीन परतों में बाँटा गया है –

1. भूपर्पटी (Crust)

2. भूप्रावर (Mantle)

3. क्रोड (Core)

(1) भूपर्पटी (Crust):-

          यह पृथ्वी का सबसे ऊपरी एवं पतली परत है। पृथ्वी के कुल आयतन का 0.5% और कुल द्रव्यमान का 0.2% Crust में शामिल है। इसकी औसत मोटाई 33 किमी० है। महाद्वीपों पर इसकी अधिकतम मोटाई 70 किमी० तक और महासागरीय क्षेत्र में औसत मोटाई 5 किमी० है। इसमें परतदार चट्टानों की प्रधानता होती है। लेकिन महाद्वीपीय भागों में परतदार चट्टानों के नीचे ग्रेनाइट चट्टान की परत मिलती है जबकि महासागरीय भूपटल पर बैसाल्ट चट्टाने मिलती है।

★ भूपर्पटी की रासायनिक संरचना से स्पष्ट होता है कि इसमें सर्वाधिक ऑक्सीजन (46.80%), सिलिकन (27.72%) अल्युमीनियम (8.13%) पायी जाती है। यह पृथ्वी का वह मण्डल है जिसमें प्राथमिक तरंग, द्वितीयक तरंग, सतही तरंग, P*, S*, Pg & Sg जैसे भूकम्पीय तरंग चला करते है।

         भूपर्पटी भी दो भागों में विभक्त है:- 

1. महासागरीय भूपटल

2. महाद्वीपीय भूपटल

       महाद्वीपीय भूपटल का घनत्व कम (2.75) है जबकि महासागरीय भूपटल का घनत्व अधिक (3.75) है। यही कारण है कि महाद्वीपीय भूपटल फुला/खुला हुआ है जबकि महासागरीय भूपटल धँसा हुआ है। महाद्वीपीय भूपटल में भी अलग-अलग घनत्व की चट्टाने पायी जाती है। जैसे:- पर्वतीय चट्टानों के घनत्व सबसे कम होता है। इससे अधिक घनत्व पठारों का और पठारों से ज्यादा घनत्व मैदानी चट्टानों में होता है।

(2) भुप्रावार (Mantle):-

        भूप्रावार की मोटाई मोहो असम्बद्धता से 2900 KM तक है। पृथ्वी के कुल आयतन का 83% और कुल द्रव्यमान का 68% भाग भूप्रावार में शामिल है। यह अधिक तापमान के कारण पिघली हुई अवस्था (द्रव) के समान है। भूप्रावार पृथ्वी का वह मण्डल है जिसमें प्राथमिक तरंग  तो संचरित होती है लेकिन द्वितीयक तरंग विलुप्त हो जाती है। इसका निर्माण सिलिकन & मैग्नेशियम जैसे तत्वों से हुआ है। भूप्रावार का घनत्व 3 से 5.5 तक मानी जाती है । 

★ भूपर्पटी और भूप्रावार के बीच एक संक्रमण पेटी पायी जाती है जिसे मोहोअसम्बद्धता (Moho Discontinuty) कहते है।

★ क्रस्ट और मेंटल के ऊपरी भाग को मिलाकर स्थलमण्डल/लिथोस्फेयर कहा जाता है।

★ स्थलमण्डल के नीचे वाले मण्डल को दुर्बलमण्डल (Aestheno Sphere) कहते है। होम्स ने बताया कि दुर्बलमण्डल में ही संवहन तरंगे चलती है। ये तरंगे इतनी शक्तिशाली होती है जो स्थलमण्डल को तोड़ने एवं मोड़ने की क्षमता रखती है।

Internal Structure of The Earth

चित्र: पृथ्वी की आतंरिक संरचना

(3) क्रोड(Core)/अंतरतम:-   

         यह पृथ्वी का केंद्रीय भाग है। इसका घनत्व -10 से 13.6 g/cm3 है। पृथ्वी के कुल आयतन का 16% एवं द्रव्यमान का 32% भाग क्रोड में शामिल है। क्रोड पृथ्वी का वह मण्डल है जसमें केवल प्राथमिक तरंगे गुजरती है। यह मण्डल निकेल & लोहा से निर्मित है। इसी कारण से पृथ्वी में चुम्बकीय गुण है। क्रोड अत्याधिक दबाव के कारण ठोस भाग के रूप में परिणत हो चुका है। क्रोड की औसत मोटाई 3471 KM है। Mantle और Core के बीच में एक संक्रमण पेटी पायी जाती है जिसे गुटेनबर्ग असम्बद्धता कहते हैं। पृथ्वी की आंतरिक संरचना को नीचे के चित्रों में भी देखा जा सकता है।

निष्कर्ष:-

        इस तरह उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि पृथ्वी की आंतरिक संरचना के संबंध में भूकम्पीय तरंग सबसे अधिक वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं।

9. Explain the views of Airy and Pratt regarding Isostasy.
समस्थिति के सम्बन्ध में एयरी तथा प्राट के मतों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- समस्थिति अर्थात भूसंतुलन भूगोल की एक ऐसी संकल्पना है जो भूपटल के विभिन्न स्तंभों के मध्य पाये जाने वाले संतुलन को व्याख्या करता है। भूसंतुलन का सामान्य अर्थ  “परिभ्रमण करती हुई पृथ्वी के ऊपर उभरे हुये क्षेत्र (जैसे-पर्वत, पठार, मैदान) एवं नीचे स्थित क्षेत्रों  (सागर, झील) में भौतिक एवं यांत्रिक स्थिरता भूसंतुलन कहलाता है।”

         भूसंतुलन आंग्ल भाषा में ‘Isostasy या Equilibrium’ कहलाता है। Isostasy शब्द ग्रीक भाषा के Isostasius से बना है जिसका तात्पर्य समस्थिति होता है। आइसोस्टैसी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1889 ई० में अमेरिकी भूवैज्ञानिक C.F. डटन ने किया था। इन्होंने कहा था कि समस्थिति के कारण ही पर्वत, पठार, मैदान और समुद्र साथ-साथ स्थित है। बहिर्जात बल पर्वतों से मिट्टी काट-काट कर समुद्र एवं मैदान में निक्षेपित करते रहते हैं। इसीलिए मैदान एवं समुद्र तली का भार अधिक तथा पर्वतों के भार कम होते है। भार में कमी या अधिकता के कारण भूगर्भ के भूपटल पर दबाव समान रूप से नहीं पड़ता है। समस्थिति इसी दबाव के विभिन्नता को संतुलन बनाये रखने में मदद करता है।
        डटन ने बताया कि जिस रेखा के सहारे भूपटलीय संतुलन कायम रहता है उसे ‘समदबाव तल’ (Level of Uniform Pressure) अथवा ‘समतोल तल’ (Isotatic Level) या ‘क्षतिपूर्ति तल’ (Level of Compensation) कहते है।
       
         ऑर्थर होम्स महोदय ने भूसंतुलन की व्याख्या करते हुए कहा है कि “संतुलन की वह दशा जो भूपटल पर विभिन्न ऊँचाई वाले पर्वत, पठार, मैदान अथवा सागरीय नितल के मध्य पायी जाती है, भूसंतुलन कहलाता है।”
भूसंतुलन सिद्धांत का बुनियाद
              भूकम्पीय तरंगो के अध्ययन से यह सिद्ध हो चुका है कि पृथ्वी के विभिन्न भागों के घनत्व भिन्न-भिन्न है। इनकी पुष्टि भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा भी किया गया है। 1859 ई० में गंगा सिंधु मैदान के मध्य में अक्षांश ज्ञात करते समय दो विधियों को प्रयोग में लाया गया:-
 (l) साहुल विधि
 (ll) त्रिभुजीकरण विधि 
           यह अक्षांशीय मापन का कार्य कल्याण एवं कल्याणपुर नामक स्थान पर किया जा रहा था। इन दोनों स्थानों पर उपरोक्त दोनों विधियों द्वारा आये परिणाम में भारी अंतर था। यह अंतर 5.236 सेकंड बताया गया। इस अंतर का कारण बताते हुए विद्वानों ने बताया कि साहुल को हिमालय पर्वत अपनी ओर आकर्षित कर रही है लेकिन पुनः यह प्रश्न उठाया गया कि अगर हिमालय साहुल को अपनी ओर आकर्षित कर रही है तो हिमालय जितना विशाल है उस दृष्टि से आकर्षण और अधिक होना चाहिए तथा अंतर 15 सेकेंड से भी अधिक होना चाहिए। कालांतर में इसी जटिल तथ्यों की व्याख्या भूसंतुलन से करने का प्रयास किया गया। बताया गया कि हिमालय के नीचे स्थित चट्टानों के घनत्व पृथ्वी के औसत घनत्व से भी कम है। जबकि समुद्र नितल का घनत्व पृथ्वी के औसत घनत्व से अधिक है। यही कारण है कि दोनों के बीच संतुलन की स्थिति कायम है। भूसंतुलन को स्पष्ट करने हेतु अनेक मत प्रतिपादित किये गये है:-
(1) एयरी का मत
(2) प्रौट का मत
(3) हिस्कानेन का मत
(4) जौली का मत
(1) एयरी का मत
        1859 ई० में एयरी ने अपना मत प्रस्तुत किया। उनके अनुसार “भूपटल के प्रत्येक स्तम्भ का घनत्व समान है, जो भाग जितना ऊँचा है वह उसी अनुपात में भूगर्भ में घुसा हुआ है। अर्थात जो भाग अधिक ऊंचा है उसका अधिक भाग और जो भाग कम ऊँचा है उसका कम ही भाग भूगर्भ में घुसा हुआ है।”
      एयरी महोदय ने पृथ्वी के विभिन्न भू-स्तंभों की तुलना जल में तैरते हुए हिमशीलाखंडों से किया है। उन्होंने अपने मत का व्याख्या करने हेतु आर्कमिडीज के सिद्धान्तों का सहारा लिया है। अर्कमिडीज के अनुसार “कोई भी तैरती हुई वस्तु अपनी मात्रा के समतुल्य द्रव्य को नीचे से हटा देती है”। हिम के संबंध में कहा कि “हिम जब पानी के ऊपर तैर रहा होता है तो उसका 1/9 भाग जल के ऊपर तथा शेष 8/9 भाग जल में डूबा रहता है।”
         धरातल के प्रत्येक भाग के लिए उसका 8 गुणा भाग धरातल के नीचे धंसा रहता है। इसे  सिद्ध करने के लिए एयरी ने एक प्रयोग के माध्यम से प्रदर्शित किया है। एयरी ने भूपटल के विभिन्न भागों की तुलना लौह धातु के छोटे-बड़े टुकड़ों से किया है। उन्होंने बताया कि जब लोहे के विभिन्न ऊँचाई वाले टुकड़े को द्रव में डुबोया जाता है तो जिस लोहे के टुकड़े की ऊँचाई अधिक होता है उसका उतना अधिक भाग द्रव में डूबा रहता है और जो लोहा का टुकड़ा कम ऊँचा रहता है उसका उतना ही कम भाग द्रव में डूबा रहता है।
Isostasy
आलोचना
          अगर एयरी के मत को सही मान लिया जाय तो इनके अनुसार जो भाग जितना ऊँचा होगा उसका उतना ही भाग धरातल के अंदर घुसा हुआ होगा। जैसे -अगर हिमालय की ऊँचाई को आधार बनाया जाय तो 2 लाख 70 हजार फीट गहरा जड़ होना चाहिए लेकिन दूसरी ओर यह भी ज्ञात है कि धरातल के नीचे जाने पर प्रति 32 मीटर की गहराई पर 1°C तापमान बढ़ जाती है। इस प्रकार हिमालय की इतनी गहरी जड़ धरातल के अंदर अति उच्च तापमान के कारण यथावत नहीं रह सकती। अतः इनका विचार भ्रामक है।
          एयरी के मत का दूसरा आलोचना यह है कि पृथ्वी के सभी भू-स्तंभों का औसत घनत्व एक समान है जबकि भूकम्पीय तरंगो के अध्ययन से यह स्पष्ट हो चुका है कि पृथ्वी के विभिन्न स्तम्भों का घनत्व अलग-अलग है।
निष्कर्ष:
     
          एयरी के द्वारा भूसंतुलन के दिशा में किया गया यह प्रथम प्रयास था। उनके मत को “Uniform Density with Varying Depthness” (एक समान घनत्व के साथ बदलता हुआ गहराई) नामक सिद्धांत से भी जानते है। दूसरी एयरी के मत से यह भी स्पष्ट हुआ कि पहाड़ों के जड़ें होते है। इस तरह एयरी के विचार में कुछ खामियों के बावजूद विशेष महत्व रखता है।
 प्रौट के मत
           प्रौट महोदय ने अपना विचार Royan Geography of Landform (1859 ई०) में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कल्याण एवं कल्याणपुर के बीच साहुल एवं त्रिभुजीकरण विधि से किये गए मापन के परिणाम में आये अंतर के संबंध में विचार प्रकट करते हुए कहा कि पृथ्वी के सभी भू-स्तंभो का घनत्व एक समान नहीं है बल्कि अलग-अलग है। जैसे- पर्वतीय चट्टानों के घनत्व पठारी चट्टानों के घनत्व से कम है। पठारी चट्टानों का घनत्व मैदानी चट्टानों के घनत्व से कम है और मैदानी चट्टानों के घनत्व समुद्री भूपटल के घनत्व से कम है।
          प्रौट महोदय ने बताया कि पृथ्वी का सभी भू-स्तंभ एक क्षतिपूर्ति रेखा के सहारे एक-दूसरे के परिपेक्ष्य में संतुलित है। उन्होंने ऊँचाई और घनत्व के बीच व्युत्क्रमानुपाती सम्बन्ध  बताया अर्थात पृथ्वी के ऊपर स्थित भू-स्तंभ का घनत्व भले ही अलग-अलग हो लेकिन सभी भू-स्तंभ एक समान गहराई के साथ भूपृष्ठ में धँसे हुए है। इसे स्पष्ट करने के लिए उन्होंने निम्नलिखित प्रयोग के माध्यम से पुष्टि करने का प्रयास किया है:

चित्र: प्रौट का भू-संतुलन

         प्रौट अपने मत (Varying Density With Uniform Depth) कोउपरोक्त चित्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि पृथ्वी के विभिन्न भू-स्तंभ के घनत्व अलग-अलग है और चित्रानुसार ही एक क्षतिपूर्ति रेखा के सहारे सभी भू-स्तंभ संतुलित है।                                       

आलोचना
        बहुत से विद्वानों ने प्रौट के विचारों का आलोचना करते हुए कहा कि इनका मत एयरी के मत का ही संशोधित रूप है। कुछ विद्वानों ने यह भी कहा है कि भूपटल के विभिन्न भू-स्तंभ उस तरह से नहीं है जैसा कि विभिन्न धातुओं का उदाहरण देकर प्रौट ने बताया है। फिर भी इन आलोचनाओं के बावजूद क्षतिपूर्ति रेखा और विभिन्न घनत्व के निर्मित भू-स्तंभ भूसंतुलन संकल्पना की सराहनीय कदम है। 

10. Critically examine the theory of Plate Tectonic.
प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

उत्तर- प्लेट विवर्तनिकी एक ऐसा सिद्धान्त है जो भू-भौतिकी से संबंधित अनेक घटनाओं जैसे-पर्वत निर्माण, ज्वालामुखी क्रिया इत्यादि के संबंध में व्यक्त किये गये सभी परम्परागत सिद्धान्तों का परित्याग कर नया विचार प्रस्तुत करता है।

      इस परिकल्पना के अनुसार पृथ्वी का ऊपरी भाग दृढ़ भूखंडों से निर्मित है। ये भूखंड कई भागों में विभक्त है, इसके एक भाग को प्लेट से संबोधित करते है। सर्वप्रथम वर्ष 1955 में कनाडा के भू-वैज्ञानिक जे. टूजो विल्सन (J-Tuzo Wilson) ने ‘प्लेट’ शब्द का प्रयोग किया था। इन प्लेटों के  स्वभाव और प्रवाह से संबंधित अध्ययन को ही प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त  कहते है। यह सिद्धांत किसी एक व्यक्ति द्वारा प्रतिपादित नहीं है बल्कि इसमें कई विद्धानों का योगदान है। लेकिन हैरिहस महोदय ने इन सभी विचारों को संगठित कर एक सिद्धान्त के रूप में प्रस्तुत किया। 
प्लेटों का स्वभाव
       इस परिकल्पना के अनुसार प्लेटों की अधिकतम मोटाई 100 KM और न्यूनतम मोटाई 5 KM तथा औसत मोटाई 70 KM है। अमेरिकी अर्थ साइंस के अनुसार पृथ्वी 7 बड़े और 6 छोटे प्लेट निम्नलिखित है-
प्रमुख प्लेट- 7
1. प्रशांत महासागरीय प्लेट
2. उ० अमेरिकी प्लेट
3. द० अमेरिकी प्लेट
4. अफ्रीकन प्लेट
5. युरेशियन प्लेट
6. इण्डियन प्लेट
7. अंटार्कटिका प्लेट
गौण प्लेट- 6
(a) अरेबियन प्लेट
(b) फिलीपींस /फिलीपाइन प्लेट
(c) कोकस प्लेट
(d) नास्का प्लेट
(e) स्कोशिया प्लेट
(f) कैरेबियन प्लेट
Plate Tectonic Theory
इस सिद्धांत के अनुसार प्लेटों को दो भागों में बांटा जाता है–
1. स्थिर प्लेट
2. गतिशील प्लेट 
         स्थिर प्लेटों के नीचे संवहन तरंगे नहीं चल रही है जबकि गतिशील प्लेटों के नीचे संवहन तरंगे चल रही है। 
           इस सिद्धांत के अनुसार प्लेटों के मिलन स्थल को प्लेट के सीमा या सीमांत कहते है। इसके अनुसार प्लेट में 3 प्रकार की सीमाएं बांटी जाती है। इसे  निम्न चित्रों में देखा जा सकता है-
       संरचना के दृष्टिकोण से प्लेट दो प्रकार के होते है- 
1. महासागरीय प्लेट
2. महाद्वीपीय  प्लेट
            महासागरीय प्लेट बैसाल्ट चट्टानों से निर्मित है तथा इसका घनत्व अधिक है जबकि महाद्वीपीय प्लेट ग्रेनाइट चट्टानों से निर्मित है तथा इसका घनत्व कम है।
 प्लेटों के संचालन शक्तियाँ
              इस सिद्धांत के अनुसार सभी प्लेट पृथ्वी के अक्ष का अनुसरण करते हुए पूरब से पश्चिम दिशा की ओर प्रवाहित हो रही है। प्लेटों में गति हेतु कई कारक उत्तरदायी माना गया है। जैसे- पृथ्वी के घूर्णन गति, प्लवनशीलता बल, गुरुत्वाकर्षण बल और प्लेटों का 45° पर प्रत्यावर्तन, सूर्य एवं चन्द्रमा का ज्वारीय बल, संवहन तरंग आदि।
                  इस सिद्धांत के अनुसार प्लेटों में 3 प्रकार के गतियाँ पायी जाती है। जैसे – निर्माणकारी गति की उत्पत्ति अपसरण सीमा के सहारे होती है, विनाशकारी गति की उत्पति अभिसारी सीमा के सहारे तथा संरक्षी गति संरक्षी सीमा के सहारे उत्पन्न होता है।
प्लेटों का क्रियाविधि
         उठती हुई संवहन तरंगे अपसरण सीमा को जन्म देती है। इसी सीमा के सहारे दरार का निर्माण होता है। इन दरारों से ही दुर्बलमंडल से लावा/मैग्मा निकलती है, जिससे ज्वालामुखी क्रिया होती है। गिरती हुई संवहन तरंगे अभिसारी सीमा का निर्माण करती है। इस सीमा के सहारे अधिक घनत्व वाले प्लेट कम घनत्व वाले प्लेट में घुसने की प्रवृति रखती है। प्लेट अत्यधिक अंदर जाकर पिघलती है और “बेनी ऑफ जोन” निर्माण करती है तथा चट्टानों के वलन के साथ-साथ ज्वालामुखी का उदगार भी होता है। इसे निम्न चित्र से समझा जा सकता है-
इस सिद्धांत के पक्ष में प्रस्तुत किये गए प्रमाण 
           
          प्लेट विवर्तनिकी के समर्थन में निम्नलिखित प्रमाण प्रस्तुत किये गए है-
1. ज्वालामुखी विश्व के ज्वालामुखी वितरण के अध्ययन से स्पष्ट है कि विश्व के अधिकांश ज्वालामुखी क्रियाएं अभिसारी प्लेट सीमा के सहारे होती है।
2. भूकम्प भूकम्पीय वितरण के अध्ययन से स्पष्ट है कि विश्व में सर्वाधिक भूकम्प प्रशांत महासागर के चारों ओर स्थित क्षेत्रों में आती है। ये क्षेत्र संरक्षी प्लेट सीमा के सहारे स्थित है।
3. सागर नितल प्रसार और पुराचुमकत्व– सागर नितल प्रसार सिद्धान्त से स्पष्ट है कि सागर नितल प्रसार अपसारी सीमा के सहारे हो रही है तथा नवीन चट्टानों में पुराचुमकत्व का गुण कम तथा पुराने चाट्टानों में चुमकत्व का गुण अधिक पाया जाता है।
4. भूगर्भिक समस्याओं का समाधान  
           प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त के माध्यम से कई भूगर्भिक समस्याओं का समाधान होता है। जैसे- पर्वतों के उत्त्पति, भूकंप, भूसंचालन, महाद्विपीय विखण्डन, समुद्री नितल प्रसार, पुराचुमकत्व, द्वीपीय चाप के निर्माण आदि।
आलोचना
        उपरोक्त विशेषताओं के वाबजूद इस सिद्धांत की कई खामियां है। जैसे –  प्लेटों की संख्या का स्पष्ट पता नहीं चल पाता है, प्लेटों में संवहन तरंगे क्यों उत्पन्न होती है?, हरसिनियन और कैलिडोनियन युग के पर्वतों की उत्पत्ति की व्याख्या नहीं करता है, बेनी ऑफ जोन से निकलने वाला मैग्मा पदार्थ के परिणाम का वैज्ञानिक व्याख्या नहीं करता।   

         इन सीमाओं के वाबजूद भूगर्भ विज्ञान का एक क्रांतिकारी विचार है क्योंकि भूपटल से संबंधित सभी भूगर्भिक घटनाओं का एक बार में ही व्याख्या प्रस्तुत करता है।

11. Describe the different stages of mountain building according to Kober.
कोबर के अनुसार पर्वत निर्माण के विभिन्न चरणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर- कोबर महोदय ने मोड़दार पर्वतों की उत्पत्ति के सम्बंध में भूसन्नति का सिद्धान्त प्रतिपादित किया था। इस संकल्पना के विकास का प्रथम प्रयास हॉल और डाना महोदय द्वारा किया गया, लेकिन एक सिद्धांत के रूप में इस संकल्पना का प्रतिपादन सर्वप्रथम हॉग महोदय द्वारा किया गया। कोबर ने वलित पर्वतों की उत्पत्ति के संबंध में भू-सन्नति सिद्धांत का प्रतिपादन किया। कोबर के अनुसार भूपटलीय चट्टानें लचीली होती है जब चट्टानों पर दबाव शक्ति कार्य करती है तो भूपटलीय चट्टानें मुड़कर भुसन्नति या मोड़दार पर्वत का निर्माण करती है। 

       भू-सन्नतियां लंबे, संकरे तथा उथले जलीय भाग होती है, जिनमें तलछटिय निक्षेप के साथ-साथ तली में धंसाव होता है। वर्तमान समय में प्राय: सभी विद्वानों की यह मान्यता है कि प्राचीन और नवीन वलित पर्वतों का आविर्भाव भू-सन्नतियाँ से हुआ है। जैसे- रॉकी भूसन्नति से रॉकी पर्वत, यूराल भू-सन्नति से यूराल पर्वत तथा टेथिस भू-सन्नति से महान हिमालय पर्वतों का निर्माण हुआ। भू-सन्नतियों का पर्वत निर्माण से संबंध होने के कारण कोबर ने इन्हें पर्वतों का पालना कहा है।

कोबर का भूसन्नति सिद्धांत

             वास्तव में उनका मुख्य उद्देश्य प्राचीन दृढ़ भूखंडों तथा भू-सन्नतियों में संबंध स्थापित करना था। इनका सिद्धांत संकुचन शक्ति पर आधारित है। पृथ्वी में संकुचन होने से उत्पन्न बल से अग्रदेशों में गति उत्पन्न होती है, जिससे प्रेरित होकर सम्पिडनात्मक बल के कारण भूसन्नति का मलवा वलीत होकर पर्वत का रूप धारण करता है। जहाँ पर आज पर्वत है, वहां पर पहले भू-सन्नतियां थी, जिन्हें कोबर ने पर्वत निर्माण स्थल बताया।  इन भू-सन्नतियों के चारों और प्राचीन दृढ़ भूखण्ड थे, जिन्हें क्रैटोजेन बताया है, कोबर के अनुसार भूसन्नतिया लंबे तथा चौड़े जलपूर्ण गर्त थी।

           प्रत्येक भूसन्नति के किनारे पर दृढ़ भूखंड होते हैं। जिन्हें कोबर ने अग्रदेश (Foreland) बताया।  इन दृढ़ भूखंडों के अपरदण से प्राप्त मलवा का नदियों द्वारा भूसन्नति में धीरे-धीरे जमा होता रहता है अवसादी जमाव के कारण भार में वृद्धि होने से भूसन्नति की तली में निरंतर धंसाव होता जाता है इसे अवतलन की क्रिया कहते हैं इन दोनों क्रियाओं के लंबे समय तक चलते रहने के कारण भूसन्नति की गहराई अत्यंत अधिक हो जाती है तथा अधिक मात्रा में मलबा का निक्षेप हो जाता है। 

      जब भूसन्नति भर जाती है तो पृथ्वी के संकुचन से उत्पन्न क्षैतिज संचलन के कारण भूसन्नति के दोनों अग्रदेश एक-दूसरे की ओर खिसकने लगते हैं। इसे पर्वत निर्माण की अवस्था कहते हैं। भूसन्नति के दोनों किनारों पर दो पर्वत श्रेणियों का निर्माण होता है जिन्हें कोबर ने ‘रेन्डकेटेन’  के नाम दिया है यदि संपीड़न का बल सामान्य होता है तो केवल किनारे वाले भाग ही वलित होते हैं तथा बीच का भाग वलन से अप्रभावित रहता है। इस अप्रभावित भाग कोबर ने स्वाशिनवर्ग की संंज्ञा प्रदान की है जिसे सामान्य रूप में मध्य पिंड (Median Mass) कहा जाता है जब संपीडन का बल सर्वाधिक सक्रिय होता है कभी-कभी वलन की ग्रीवा टूट कर दूसरे वलन पर चढ़ जाती है जिस कारण ग्रीवा खंड (Nappe) का निर्माण होता है।

        कोबर ने अपने विशिष्ट मध्य पिंड के आधार पर विश्व के वलीत पर्वतों की संरचना को स्पष्ट करने का प्रयास किया है टेथीस भूसन्नति के उत्तर में यूरोप का स्थल भाग तथा दक्षिण अफ्रीका का दृढ़ भूखण्ड था।  इन दोनों अग्रदेशों के आमने-सामने सरकने के कारण अल्पाइन पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ। अफ्रीका के उत्तर की ओर सरखने के कारण बेटीक कार्डिलरा, पेरेनिज प्राविन्स श्रेणियां मुख्य आल्प्स, कार्पेथियंस, बाल्कन पर्वत तथा काकेशस का निर्माण हुआ। 

          हिमालय तथा कुनलुन के बीच तिब्बत का पठार।  इस तरह कोबर ने अपने सिद्धांत में मध्य पिंड की कल्पना करके पर्वतीकरण को उचित ढंग से समझाने का प्रयास किया है तथा मध्य पिंड की यह कल्पना कोबर के विशिष्ट पर्वत निर्माण स्थल की अच्छी तरह व्याख्या करती हैं। 

        हिमालय के निर्माण के विषय में कोबर ने बताया है कि पहले टेथिस सागर था जिसके उत्तर में अंगारालैंड तथा दक्षिण में गोंडवाना लैंड अग्रदेश के रूप में थे। इयोसीन युग में दोनों आमने-सामने सरकने लगे, जिस कारण टेथिस के दोनों किनारों पर तलछट के वलन पड़ने से उत्तर में कुनलुन पर्वत तथा दक्षिण में हिमालय की उत्तरी श्रेणी का निर्माण हुआ, दोनों के बीच तिब्बत का पठार मध्य पिंड के रूप में बच रहा। आगे चलकर मध्य हिमालय तथा लघु शिवालिक श्रेणियों का भी निर्माण हो गया।

आलोचना

        यद्दपि कोबर महोदय ने पर्वतों के निर्माण को भली-भांति समझाने का प्रयास किया तथापि उसके भुसन्नत्ति सिद्धान्त में कुछ दोष पाये जाते है, जिनका उल्लेख निम्नलिखित है।-

1. पर्वतों के निर्माण के लिये पृथ्वी के सिकुड़ने से पैदा होने वाले जिस बल का वर्णन कोबर ने किया है वह अपर्याप्त है।

2. कोबर के अनुसार भुसन्नत्ति के दोनों किनारे सरकते है जबकि स्वेस का मतानुसार भुसन्नति का एक ही किनारा सरकता है।

3. कोबर के सिद्धान्त से पूर्व-पश्चिम दिशा में फैले हुए पर्वतों (हिमालय,आल्पस) का स्पष्टीकरण तो हो जाता है, परन्तु उत्त-दक्षिण दिशा में फैले पर्वतों (रॉकी, एंडिज) का स्पष्टीकरण नहीं हो पाता है।


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Questions Bank

2023 में पाटलिपुत्र विश्विधालय द्वारा आयोजित सेमेस्टर-1 की वार्षिक परीक्षाओं का प्रश्न-पत्र यहाँ उपलब्ध है।
     Geomorphology (Theory) First Semester का Solved Exam Paper देखने के लिए नीचे क्लिक करें-

1. Major Course (MJC-1)

2. Minor Course (MIC-1)

3. Multidisciplinary Course (MDC-1) For Humanities

4. Multidisciplinary Course (MDC-1) For Science

5. Multidisciplinary Course (MDC-1) For B.Com

41. Climate Classification of India by Stamp and Kendrew (स्टैम्प तथा केन्ड्रयू द्वारा भारत की जलवायु वर्गीकरण)

41. Climate Classification of India by Stamp and Kendrew

(स्टैम्प तथा केन्ड्रयू द्वारा भारत की जलवायु वर्गीकरण)


        प्रो० एल० डी० स्टैम्प तथा डब्लू. जी. केन्ड्रयू ने भारत को अनेक जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया। यह वर्गीकरण स्वेच्छाचारी तथा अवास्तविक है। स्टैम्प ने जनवरी के महीने के लिए 18C की औसत तापमान की समताप रेखा का उपयोग देश को मोटे तौर पर दो जलवायु क्षेत्रों में विभाजित करने के लिए किया। जैसे-

(A) उपोष्ण जलवायु क्षेत्र उत्तर- उत्तर भारत में

(B) उष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्र- दक्षिण भारत में।

         यह देखा जा सकता है कि 18C की समताप रेखा कर्क रेखा के लगभग समांतर गुजरती है। इन दो जलवायु क्षेत्रों की वर्षा के आधार पर 11 क्षेत्र में विभाजित किया गया है।  जैसे-

(A) उपोष्ण महाद्वीपीय जलवायु

      उपोष्ण महाद्वीपीय जलवायु को पांच जलवायु क्षेत्र में बांटा है। जैसे-

(1) हिमालय क्षेत्र

(2) उत्तर-पश्चिम क्षेत्र

(3) शुष्क निम्न भूमि

(4) सामान्य मध्यम वर्षा का क्षेत्र

(5) परवर्ती क्षेत्र

(B) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र की जलवायु

        उष्णकटिबंधीय क्षेत्र की जलवायु को निम्नलिखित 6 भागों में वर्गीकृत किया है-

(1) अत्यधिक भारी वर्षा का क्षेत्र

(2) भारी वर्षा का क्षेत्र

(3) सामान्य (मध्यम) वर्षा के क्षेत्र

(4) कोंकण तट

(5) मालाबार तट

(6) तमिलनाडु क्षेत्रClimate Classification

(A) उपोष्ण महाद्वीपीय जलवायु

(1) हिमालय क्षेत्र:-

      यह जलवायु जम्मू तथा कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाती है। इस जलवायु में ग्रीष्म ऋतु सुहावना तथा शीत ऋतु अत्यंत ठंड होती है। तापमान क्षेत्रीय वितरण (स्थलाकृति तथा ढाल) पर निर्भर करती है। 2500 मी० की ऊँचाई तक शीत ऋतु में औसत तापमान 4C से 8C के बीच होता है जबकि ग्रीष्म ऋतु में 12C- 18C के बीच होता है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण शीत ऋतु में वर्षा दर्ज किया जाता है। जाड़े के महीने में हिमपात तथा हिमवर्षा महान तथा लघु हिमालय की सामान्य विशेषता है।

(2) उत्तरी पश्चिमी भारत की जलवायु:-

       यह जलवायु समतल नदी के उत्तर-पश्चिम में पाई जाती है जहाँ शीत ऋतु में औसत तापमान लगभग 15C होती है। जनवरी में तापमान कभी-कभी हिमांग के नीचे चला जाता है जबकि गर्मी में 45C को पार कर जाता है और लू चलती है।

(3) उत्तर-पश्चिम भारत का शुष्क मैदान:-

        यह जलवायु राजस्थान, कच्छ तथा हरियाणा के दक्षिण-पश्चिम भाग में पाई जाती है। शीत ऋतु का तापमान 15C से 25C तथा मई तथा जून में तापमान कभी-कभी 47C से भी अधिक हो जाता है औसत वार्षिक वर्षा 25 सेंटीमीटर से कम होती है।

(4) सामान्य (मध्यम) वर्षा का क्षेत्र:-

      यह जलवायु पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश, पश्चिम तथा उत्तर पश्चिम बिहार, उत्तर-पश्चिम झारखंड में पाई जाती है। औसत वार्षिक वर्षा 100 से 150 सेंटीमीटर के बीच होती है। 90% वर्षा वर्षा ऋतु में होती है। वर्षा बंगाल की खाड़ी के धारा से होती है। जनवरी का औसत तापमान 15C तथा जुलाई का औसत अधिकतम तापमान 40C से अधिक होता है।

(5) परवर्ती क्षेत्र:-

      यह संपूर्ण बिहार, उत्तर बंगाल और पश्चिम असम में पाई जाती है। औसत वर्षा 150 सेंटीमीटर से अधिक और तापमान सामान्य बना रहता है।

(B) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र की जलवायु

(1) अत्यधिक भारी वर्षा का क्षेत्र:-

       यह जलवायु असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा तथा मिजोरम में पाई जाती है। यहाँ वार्षिक वर्षा 250 cm से अधिक होती है। विश्व में सर्वाधिक वर्षा चेरापूंजी और मासिनराम में दर्ज किया जाता है। 90% वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून से होता है। तरंगित स्थलाकृतिक विशेषता के कारण मासिक तापमान में भिन्नता दिखाई देती है।

(2) भारी वर्षा का क्षेत्र:-

      यह जलवायु पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड, आंध्रप्रदेश के पूर्वी भाग में पाई जाती है। यहाँ औसत वर्षा 100 से 200 सेंटीमीटर होती है। पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा घटती है। जनवरी का औसत तापमान 15C से अधिक, जून तथा जुलाई का तापमान 30C होता है।

(3) सामान्य (मध्यम वर्षा) के क्षेत्र:-

       यह पश्चिमी घाट के पूर्व गुजरात, दक्षिण-पश्चिम मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के अधिकांश भाग में पाई जाती है। औसत वार्षिक वर्षा 75 सेंटीमीटर, जनवरी की तापमान 18C तथा जुलाई का 32C होता है।

(4) कोकण तट:-

      यह तापी नदी के मुहाने से लेकर गोवा तक तटीय भाग में पाई जाती है। औसत वार्षिक वर्षा 200 सेंटीमीटर से अधिक होती है। इसमें 90% वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है। जनवरी की औसत तापमान 24C तथा जुलाई का 27C होता है। औसत वार्षिक तापांतर 3 से 6C तक होता है।

(5) मालाबार तट:-

      यह गोवा से लेकर कन्याकुमारी तक तटीय भाग में पाई जाती है। इस क्षेत्र में वार्षिक वर्षा 250 सेंटीमीटर से अधिक होती है। औसत वार्षिक तापमान लगभग 27C होती है।

(6) तमिलनाडु क्षेत्र:-

          यह तमिलनाडु और कोरोमंडल के अधिकांश क्षेत्र में पाई जाती है। औसत वार्षिक वर्षा 100 से 150 सेंटीमीटर के बीच होती है। अधिकांश वर्षा लौटती मानसून से होती है। जनवरी की औसत तापमान 24C और जुलाई का 30C होता है।

     इस तरह ऊप के तथ्यों से स्पष्ट है कि स्टैम्प तथा केन्ड्रयू महोदय ने तापमान और वर्षा का आधार मानकर भारत के जलवायु प्रदेशों का निर्धारण किया।


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20. मानसून क्या है?

21. मानसून उत्पत्ति के सिद्धांत

22. मानसून उत्पत्ति का जेट स्ट्रीम सिद्धांत

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26. मानसून के विकास में हिमालय तथा तिब्बत के पठार का योगदान

27. भारत के आर्थिक जीवन पर मानसून का प्रभाव

28. भारत में शीतकालीन वर्षा का आर्थिक जीवन पर प्रभाव

29. पश्चिमी विक्षोभ क्या है? भारतीय कृषि पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?

30. हिमालय के आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालें।

31. भारत में उष्णकटिबंधीय चक्रवात

32. भारत में बाढ़ के कारण, प्रभावित क्षेत्र एवं समाधान

33. भारत में सूखा के कारण, प्रभावित क्षेत्र एवं समाधान

34. भारत की प्राकृतिक वनस्पति

35. भारतीय कृषि की प्रमुख समस्याओं पर प्रकाश

36. भारत में सिंचाई की आवश्यकता क्यों है? 

37. भारत में सिंचाई के विभिन्न साधनों एवं उनके महत्त्व

38. भारत में हरित क्रान्ति का प्रभाव

39. प्रायद्वीपीय भारत और प्रायद्वीपेत्तर भारत की प्रवाह प्रणाली (उत्तर और द० भारत की प्रवाह प्रणाली)

40. उद्योग स्थापना की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक

41. Climate Classification of India by Stamp and Kendrew (स्टैम्प तथा केन्ड्रयू द्वारा भारत की जलवायु वर्गीकरण)

34. The Theory of Morphogenic Evolution Propunded By L. C. King (एल. सी. किंग द्वारा प्रतिपादित भ्वाकृतिक उद्भव के सिद्धान्त)

34. The Theory of Morphogenic Evolution Propunded By L.C. King

(एल.सी. किंग द्वारा प्रतिपादित भ्वाकृतिक उद्भव के सिद्धान्त)

या

भौगोलिक अपरदन चक्र के एल.सी. किंग मॉडल



    एल.सी. किंग का स्थलरूपों के विकास से सम्बन्धित सिद्धान्त उनके द्वारा दक्षिणी अफ्रीका की शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों के  स्थलाकृतियों के अध्ययन से सम्बन्धित तथ्यों के अवलोकन पर आधारित है।

       यद्यपि किंग ने डेविस के भ्वाकृतिक सिद्धान्त (भौगोलिक चक्र) का जोरदार खण्डन किया है, परन्तु इनके सिद्धान्त का भी मुख्य आधार चक्रीय संकल्पना की ही मान्यता है। इस प्रकार किंग का भ्वाकृतिक सिस्टम भी मूलरूप में विकासीय एवं चक्रीय ही है जैसा कि इनके ‘स्थलाकृति चक्र’ (The Landscape Cycle), ‘अपरदन का भूतलज चक्र’ (the epigene cycle of erosion), ‘पेडीप्लनेशन चक्र’ (the pediplantion cycle), एवं ‘पहाड़ी ढाल चक्र’ (Hillslope cycle) से प्रकट होता है।

       यद्यपि किंग ने डेविस से अलग तथा फेंक की कुछ मान्यताओं पर अपने भ्वाकृतिक सिस्टम को विकसित करने का प्रयास किया है, परन्तु इनका मॉडल पेंक की तुलना में डेविस के अधिक करीब है।

      किंग के सिद्धान्त की प्रमुख मान्यता यह है कि स्थलरूपों का विकास विभिन्न पर्यावरण अवस्थाओं में समान होता है, जल अपरदित स्थलरूपों के विकास में जलवायु परिवर्तनों का महत्त्व नगण्य होता है। सभी महाद्वीपों में प्रमुख स्थलाकृतियों का विकास लयात्मक व्यापक विवर्तनिक (rhythemic global tectonies) घटनाओं से नियंत्रित हुआ है।

      ढालों में सतत खिसकाव (migration) होता है तथा इस तरह का निवर्तन (retreat) समानान्तर होता है तथा इस तरह का निवर्तन (retreat) समानान्तर होता है। यह निवर्तन ढाल पर क्रियाशील प्रक्रमों द्वारा नियंत्रित होता है तथा उसी के अनुरूप (निवर्तन की प्रक्रिया) ढालों का रूप बनता है।

      किंग की मान्यता है कि पहाड़ी ढाल में चार तत्त्व होते हैं- शिखर, कगार, मलवा ढाल तथा पेडोमेण्ट। किंग ने अपने सिद्धान्त का प्रतिपादन दक्षिणी अफ्रीका के अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में स्थलाकृतिक विशेषताओं के आधार पर किया है तथा बाद में अपने सिद्धान्त को अन्य प्रदेशों में भी प्रयोज्य (practicable) बताया है। इनकी मान्यता है कि चार तत्वों (उपर्युक्त) से युक्त पहाड़ी ढाल आधारभूत स्थलरूप होता है जो उन सभी प्रदेशों में तथा सभी प्रकार के जलवायु में विकसित होता है जहाँ पर पर्याप्त उच्चावच्च होते हैं तथा जल-प्रवाह अनाच्छादन का प्रमुख प्रक्रम होता है।

      किंग के अनुसार प्रत्येक चक्र त्वरित उत्थान के साथ प्रारम्भ होता है तथा उत्थान के बाद दीर्घकाल तक विवर्तनिक स्थिरता होती है (स्थलखण्ड स्थिर रहते हैं)। किंग की यह मान्यता डेविस की मान्यता के अनुरूप है। इस त्वरित उत्थान के कारण नदियों द्वारा निम्नवर्ती अपरदन तेज हो जाता है तथा नदी के मार्ग में निकप्वाइण्ट बन जाते हैं जो नदी के ऊपरी मार्ग की ओर खिसकते जाते हैं। स्थलाकृतिक चक्र की तरुणावस्था में नदी द्वारा तीव्र निम्नवर्ती अपरदन के कारण गॉर्ज का निर्माण होता है।

        जब निम्नवर्ती अपरदन शिथिल हो जाता है तो घाटी-पार्श्वढाल (valley side slopes) स्थिर कोण वाले हो जाते हैं तथा ढाल का यह रूप उस पर (ढाल पर) क्रियाशील भौतिक कारकों एवं शैलिकी (lithology) द्वारा निर्धारित होता है। प्रौढ़ावस्था के समय निम्नवर्ती अपरदन समाप्त हो जाता है। घाटी-पार्श्व ढाल का नदी से खिसकाव निवर्तन (अर्थात् घाटी चौड़ी होती जाती है एवं घाटी पार्श्वढाल नदी के जलमार्ग channel से दूर हटता जाता है) होता है, परन्तु इस प्रक्रिया के दौरान घाटी पार्श्व ढाल के कोण में कोई महत्त्वपूर्ण अन्तर नहीं होता है।

        इन घाटी पार्श्व ढाल के आधार (base, पदस्थली) पर अपेक्षाकृत समतल एवं सपाट स्थलरूप का निर्माण होता है जिसका ढाल अधिकतम रूप में 10° होता है, परन्तु सामान्य रूप में यह 5° से अधिक नहीं हो पाता है। इस स्थलरूप को किंग ने पेडीमेण्ट नामावली दी है। इनकी परिच्छेदिका अवतल होती है। इस पेडीमेण्ट का धीरे-धीरे विस्तार होता है (घाटी पार्श्व के कगार के समानान्तर निवर्तन द्वारा) तथा अन्त में कई पेडीमेण्ट मिल जाते हैं और विस्तृत पेडोप्लेन का निर्माण होता है। इस तरह निर्मित पेडीप्लेन की सामान्य सतह निम्न उच्चावच्च वाली होती है तथा इसकी रचना कई निम्न प्रतिच्छेदी अवतल सतहों (subdued intersecting concavities) द्वारा होती है।

       इस सतह के ऊपर कुछ छिटपुट तीव्र ढाल वाले अवशिष्ट टीले मौजूद रहते हैं। चक्र की अन्तिम अवस्था में दीर्घकाल तक अपक्षय के कारण जलविभाजकों का विस्तृत उत्तलता में परिवर्तन हो जाता है।

Theory of Morphogenic

           किंग की मान्यता है कि निवर्तमान ढाल (migrating or retreating slope) का रूप उस पर क्रियाशील प्रक्रमों द्वारा निर्धारित होता है। पहाड़ी ढाल का शीर्ष (सबसे ऊपर का भाग) उत्तल होता है जो मृदा-सर्पण (soil creep) द्वारा निर्मित होता है कगार शैल दृश्यांग (rock outcrops) का बना होता है तथा उसमें निवर्तन होता है। यह निवर्तन चट्टान के टूट कर अध: पतन (नीचे की ओर गिरना), भूस्खलन (Inandslide) तथा अबनलिका अपर (gullying) द्वारा होता है। मलवा ढाल का सबसे सक्रिय तत्त्व कगार ही होता है।

      मलवा ढाल (debris slope) का निर्माण ऊपर से आने वाले मलवा के द्वारा होता है तथा इसकी प्रवणता (gradient) मलवा / पदार्थों के ठहराव (repose) के कोण द्वारा नियंत्रित होती है। पेडीमेण्ट पहाड़ी ढाल की परिच्छेदिका की सबसे निचली इकाई होती है तथा इसका निर्माण ठोस चट्टान के तीव्र चादरी बाढ़ (turbulent sheet flood) द्वारा अपरदन के कारण होता है।

      यदि डेविस एवं किंग के प्रतिरूपों की तुलनात्मक व्याख्या की जाए तो स्पष्ट होता है कि दोनों प्रतिरूपों में कुछ हद तक अनुरूपता अवश्य है। दोनों स्थलाकृति के चक्रीय विकास में विश्वास करते हैं जिसके अन्तर्गत अपरदन-चक्र स्थलखण्ड में तीव्र उत्थान के साथ प्रारम्भ होता है तथा उत्थान के बाद दीर्घकालिक विवर्तनिक निष्क्रियता (विवर्तनिक स्थिरता) होती है। इस अवधि के दौरान पेनीप्लेन (डेविस) या पेडीप्लेन (किंग) का निर्माण होता है। दोनों स्थलरूपों में सामान्य अनुरूपता होता है क्योंकि ये प्राचीन होते हैं। उच्चावच्च निम्न होते हैं एवं विस्तृत क्षेत्र को प्रदर्शित करते हैं। दोनों प्रतिरूप अपरदन चक्र के पूर्णकाल की तरुण, प्रौढ़ तथा जीर्ण अवस्थाओं की मान्यता पर आधारित हैं। इन दोनों प्रतिरूपों में अन्तर भी है।

           डेविस के पेनीप्लेन का निर्माण अधःक्षय (down wasting) द्वारा होता है जबकि किंग का पेडीप्लेन कई पेडीमेण्ट के समेकन एवं सम्बर्द्धन से निर्मित होता है। इन पेडीमेण्ट में शीर्षवर्ती निवर्तन द्वारा विस्तार होता है। डेविस का पेनीप्लेन जब निर्मित हो जाता है तो उसमें पुनः विकास नहीं होता है तथा जब नवीन उत्थान होने से नया चक्र प्रारम्भ होता है तो उसमें नवोन्मेष हो जाता है। इसके विपरीत किंग का पेडीप्लेन अपने निर्माण के बाद भी शीर्ष की ओर बढ़ता जाता है।

         यद्यपि इस पेडीप्लेन के दूरस्थ छोर पर नए कगार का निर्माण हो जाता है। इस नए कगार के निवर्तन द्वारा दूसरे पेडीमेण्ट (पूर्व निर्मित पेडीप्लेन के दूरस्थ भाग पर) का निर्माण होता है, जिसमें निवर्तन के कारण प्रारम्भिक पेडीप्लेन के विस्तार में ह्रास होता है। स्पष्ट है कि उत्पन्न स्थलाकृति ऐसी होती है कि उस पर कई पेडीप्लेन होते हैं जो शीर्ष की ओर बढ़ते जाते हैं। किंग का इस तरह का पेडीप्लेन फेंक के गिरिपद ट्रेपन (piedmont treppen) के अनुरूप होता है।

आलोचनाएँ

          किंग के भ्वाकृतिक मॉडल की निम्नलिखित मान्यताएँ विवादास्पद हैं।

(i) किंग के भ्वाकृतिक मॉडल की रचना दक्षिणी अफ्रीका के अर्द्ध-शुष्क प्रदेशों की स्थलाकृतिक विशेषताओं के आधार पर की गई है, परन्तु किंग ने अपने विचारों को अन्य क्षेत्रों के स्थलरूपों की व्याख्या के लिए भी प्रयुक्त किया है। यह मान्यता सन्तोषजनक नहीं है।

(ii) किंग की मान्यता है कि स्थलरूपों का विकास विभिन्न पर्यावरण दशाओं समान रूप से होता है, सन्देहास्पद है। ज्ञातव्य है कि किंग के भ्वाकृतिक सिस्टम को उतनी मान्यता एवं समर्थन नहीं मिला जितना मिलना चाहिए था। इसका प्रमुख कारण यह है कि किंग का सिद्धांत उस समय (1953, Canons of landscape evolution) आया जब लोगों की दिलचस्पी भ्वाकृतिक सिद्धान्तों की आवश्यकता, वांछनीयता एवं उपादेयता से उठ चुकी थी।

प्रश्न प्रारूप

1. प्रो. एल. सी. किंग द्वारा प्रतिपादि भ्वाकृतिक उद्भव के सिद्धान्त की विवेचना करें।


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8. The Distribution & Production of Copper in World (विश्व में ताँबा के वितरण एवं उत्पादन)

8. The Distribution & Production of Copper in World

(विश्व में ताँबा के वितरण एवं उत्पादन)



    Production of Copper

       ताँबा एक ऐसी धातु है जिसका प्रयोग अति प्राचीन काल से मानव समाज करता आ रहा है। ईसा से हजारों वर्ष पूर्व मानव समाज को ताँबे का ज्ञान प्राप्त हो गया था जिसके आधार पर उस युग को ताँब युग के नाम से जाना जाता है। आज से 6000 वर्ष पूर्व ताँबे का प्रयोग बर्तन और हथियार बनाने के लिए मिस्र तथा मेसेपोटामिया में होने लगा था।

      आधुनिक युग में ताँबे का विभिन्न कार्यों में प्रयोग होता है। इसका सबसे गुणकारी प्रयोग बिजली के उपकरणों में होता है क्योंकि वह सबसे अच्छा जंग रहित विद्युत उपचालक धातु है। इसके अतिरिक्त मोटरगाड़ी, रेल इन्जन, वायुयान आदि में प्रयोग होता है। इसका प्रयोग अन्य धातुओं के साथ मिश्रण करके भी किया जाता है। औसतन 40 प्रतिशत ताँबा बिजली के सामान, 45 प्रतिशत मशीन और 4.5 प्रतिशत अन्य धातुओं के साथ मिश्रण कर प्रयोग किया जाता है।

         प्रधानतः शुद्ध रूप, ताँबा ऑक्साइड, सल्फाइड कार्बोनेट, क्लोराइड आदि रूपों में पाया जाता है। अब शुद्ध रूप में बहुत कम ताँबा प्राप्त होता है। अतः अनेक खनिजों और चट्टानों के साथ मिश्रित रूप में पाया जाता है। ताँबे के साथ सीसा, जस्ता, टिन, सोना, चाँदी और निकेल भी पाये जाते हैं।

विश्व वितरण एवं उत्पादन

        ताँबे के उत्पादन में बहुत अधिक क्षेत्रीय उतार-चढ़ाव होता रहता है, लेकिन विश्व स्तर पर इसका उत्पादन निरन्तर बढ़ता रहा है। 1957 में विश्व का उत्पादन मात्र 3412 हजार मीट्रिक टन था जो बढ़कर 1964-65 में 5400 और 1978 में 7890 मीट्रिक टन हो गया। 1986-87 में विश्व का उत्पादन बढ़कर 9223 हजार मीट्रिक टन था, जो 1990 में घटकर 8969 हजार मीट्रिक टन रह गया, परन्तु 2006 में पुनः उत्पादन बढ़कर 15100 हजार मीट्रिक टन हो गया।

         ताँबा के संचित भण्डार के दृष्टिकोण से चिली, संयुक्त राज्य अमेरिका, जाम्बिया, जायरे, पेरू, पूर्व सोवियत संघ और कनाडा अग्रणी देश हैं। उत्पादन में चिली, संयुक्त राज्य अमेरिका, इण्डोनेशिया, पेरू, आस्ट्रेलिया, रूस, चीन, कनाडा, पोलैण्ड और जाम्बिया अग्रणी देश हैं, जो विश्व का 83 प्रतिशत से अधिक ताँबा उत्पादित करते हैं।

अमेरिकी देश:

        तांबे के उत्पादन में संयुक्त राज्य अमेरिका हमेशा प्रथम स्थान पर रहा है। 1948 में यहाँ विश्व का 37 प्रतिशत ताँबा उत्पादन हुआ था लेकिन अन्य देशों में उत्पादन वृद्धि के कारण 1977 में उसकी विश्व में सापेक्षिक स्थिति घट कर 17 प्रतिशत पर पहुँच गयी। 2006 में यहाँ विश्व का 8.1 प्रतिशत उत्पादन हुआ था। यहाँ का प्रथम उत्पादन मिशिगन के केवीन अन्तरीप में शुरू हुआ। यद्यपि वहाँ का ताँबा निम्न कोटि का है।

        यहाँ का दूसरा महत्त्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्र मोण्टाना राज्य का बुट्टा क्षेत्र है, जो न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका अपितु विश्व में अग्रणी उत्पादक है। यहाँ ताँबे के साथ सोना, सीसा, मँगनीज और जस्ता भी निकाला जाता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र को सबसे अधिक ताँबा सम्पन्न क्षेत्र कहा जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के अन्य उत्पादक क्षेत्रों में एरिजोना राज्य का मोरेन्सी और सान मैनुअल क्षेत्र, नेवेदा राज्य का एली एवं एरेग्टन क्षेत्र तथा ऊटा का विघन क्षेत्र प्रमुख हैं।

कनाडा:-

     विश्व का लगभग 4.0 प्रतिशत ताँबा उत्पादित करता है। 2006 में यहाँ 607 हजार मीट्रिक टन ताँबा उत्पादित हुआ था। इसका अधिकांश उत्पादन चार क्षेत्रों से प्राप्त होता है, यथा- आन्टोरिया राज्य का साइबरी क्षेत्र जो देश के कुल उत्पादन का पचास प्रतिशत से अधिक ताँबा उत्पादित करता है। यहाँ देश का बीस प्रतिशत ताँबे के भण्डार है। इस क्षेत्र से ताँबे के साथ निकेल भी उत्खनित होता है।

       दूसरा महत्त्वपूर्ण क्षेत्र नोरन्दा रोना क्षेत्र है जो देश का बीस प्रतिशत से अधिक तांबा उत्पादित करता है। यहाँ ताँबा और सोना साथ-साथ प्राप्त किये जाते हैं। तीसरा क्षेत्र मैनीटोवा, सस्कैचवान है। फ्लिन-फ्लोन क्षेत्र तथा बैरोबर के उत्तर में स्थित ब्रिटेनिया में भी अच्छे किस्म का ताँबा उत्पादित होता है। यह विश्व का आठवाँ बड़ा ताँबा उत्पादक देश है।

मैक्सिको:-

      मैक्सिको विश्व का सोलहवाँ बड़ा ताँबा उत्पादक देश है। 2006 में इसका योगदान लगभग 1.0 प्रतिशत था।

चिली:-

      चिली तीव्र उत्पादन के कारण यह विश्व का प्रथम बड़ा ताँबा उत्पादक देश बन गया है। 2006 में यहाँ विश्व का 35.5 प्रतिशत ताँबा उत्पादित हुआ था। यहाँ की ताँबा की खानें चिक्वकामाटा एवं तेनियेन्स, एल सल्वाडोर एवं अफ्रीकाना से देश का नब्बे प्रतिशत से अधिक ताँबा उत्पादित होता है। चिक्वकामाटा की खान विश्व की बृहत्तम खानों में से एक है। यहाँ एक अरब मीट्रिक टन से अधिक ताँबा भण्डार है।

      मध्य चिली में स्थित एलतेनियेन्स की खान विश्व की सबसे गहरी खान है। चिली के अन्य उत्पादक क्षेत्रों में पोमेटिलोज का हनाम क्षेत्र भी विशेष उल्लेखनीय है। यहाँ का अधिकांश ताँबा निर्यात किया जाता है, जिससे देश को प्राप्त होने वाली आधी विदेशी मुद्रा ताँबे से प्राप्त होती है।

पेरु:-

       यह विश्व का तीसरा बड़ा उत्पादक देश है। यहाँ प्रति वर्ष 1050 हजार मीट्रिक टन से अधिक ताँबा उत्पादित होता है, जो विश्व का 7.0 प्रतिशत है। यहाँ का प्रमुख ताँबा उत्पादन क्षेत्र सेहों पास्को रहा है जहाँ का भण्डार अब समाप्त होने लगा है। दूसरा प्रमुख क्षेत्र टोक्वे माला के समीप स्थित है, जो एण्डीज पर्वत पर लगभग 3000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। अनुमानतः यहाँ पैंतालीस करोड़ मीट्रिक टन ताँबा का भण्डार है।

यूरोप के देश:-

      यूरोप के देशों में विश्व का लगभग दस प्रतिशत शुद्ध ताँबा उत्पादित होता है। यहाँ के प्रमुख उत्पादकों में पूर्व सोवियत संघ, पोलैण्ड, जर्मनी और बेल्जिम आणी हैं जो यूरोप का लगभग 60 प्रतिशत और विश्व का 10 प्रतिशत शुद्ध ताँबा उत्पादित करते हैं

पूर्व सोवियत संघ:-

       विश्व के ताँबा उत्पादकों में पूर्व सोवियत संघ का दूसरा स्थान रहा है। यहाँ प्रतिवर्ष विश्व का 15 प्रतिशत से अधिक ताँबा उत्पादित होता रहा है। सोवियत संघ का ताँबा उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ा है क्योंकि 1948 में यहाँ का उत्पादन विश्व का मात्र 5.3 प्रतिशत था। यहाँ विश्व का केवल 2.4 प्रतिशत संचित भण्डार है जिसका तीन चौथाई कजाकिस्तान में बालकश झील के पास स्थित है।

       पूर्व सोवियत संघ का संचित भण्डार धातु सम्पन्नता के दृष्टिकोण से उतना अच्छा नहीं है। यह क्षेत्र देश के उत्पादन का आधा से अधिक ताँबा उत्पादित करता है। यहाँ की दो खाने झेज्कागान एवं केनराड विशेष उल्लेखनीय है। सोवियत रूस के अन्य उत्पादकों में दक्षिणी-पश्चिमी यूराल क्षेत्र, उत्तरी साइबेरिया का नोरिल्स्क क्षेत्र तथा आर्मेनिया में कदझरान है, जहाँ से देश का क्रमश: 15, 25 और 15 प्रतिशत ताँबा प्राप्त किया जाता है।

       सोवियत संघ के विघटन के बाद कजाकिस्तान अब विश्व का 3.0 प्रतिशत ताँबा उत्पादित करने लगा हैं। उज्बेकिस्तान का आल्मोलिक क्षेत्र महत्त्वपूर्ण उत्पादक बनता जा रहा है। रूस में अधिकांश ताँबा खानों के पास ताँबा साफ करने का कारखाने स्थापित किये गये हैं। अभी हाल में पूर्वी साइबेरिया के उडेनाक निक्षेपण का पता चला है। देश के विघटन से इसकी स्थिति बदल गयी है। रूस का ताँबा उत्पादन देश के विघटन के बाद घटकर 640 हजार मीटरी टन रह गया है।

अफ्रीका के प्रमुख उत्पादक देश:-

     ताँबा उत्पादन में अफ्रीका महाद्वीप में जिम्बावे, जायरे और दक्षिणी अफ्रीका संघ का योगदान मात्र 4 प्रतिशत के लगभग है, जबकि इनका संचित भण्डार ग्यारह प्रतिशत से अधिक है।

जाम्बिया:-

      विश्व का 9वाँ बड़ा उत्पादक है। यहाँ प्रतिवर्ष लगभग 503 हजार मीटरी टन ताँबा उत्पादित किया जाता है जो विश्व उत्पादन का लगभग 3.3 प्रतिशत है। यहाँ के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मुफिल आरा अग्रणी है, जहाँ से देश का आधा से अधिक ताँबा प्राप्त किया जाता है। यहाँ ताँबे की धातु सम्पन्नता दो से पाँच प्रतिशत होती है।

        यहाँ के अन्य उत्पादकों में चिबुलुमा एवं रोकाना क्षेत्र विशेष उल्लेखनीय हैं। यहाँ की सबसे बड़ी खान रोना एण्टीलोप में है जहाँ ताँबा गलाने का विशाल कारखाना है। यहाँ का अधिकांश ताँबा जापान, भारत, चीन आदि देशों को निर्यात किया जाता है।

जायरे:-

      अफ्रीका का दूसरा और विश्व का सत्रहवीं उत्पादक देश है जहाँ प्रतिवर्ष 131 हजार मीट्रिक टन ताँबा उत्पादित होता है। यहाँ का विशाल ताँबा भण्डार कटांगा प्रदेश में है, जो विश्व प्रसिद्ध है। बेल्जियन इसी ताँबे के मोह में भौतिक विपत्तियों को झेलते रहते हैं।

        यहाँ 400 किमी० लम्बा और 80 किमी० चौड़ा भू-क्षेत्र है जिसमें ताँबा भण्डार सुरक्षित है, जो कटांग से जाम्बिया तक फैला है। यहाँ उत्खनन कार्य बहुत कठिन है क्योंकि परिवहन से लेकर जलवायविक कठिनाइयों तक ही बड़ी बाधाएँ हैं। यहाँ का अधिकांश उत्पादन निर्यात किया जाता है।

दक्षिणी अफ्रीका संघ:-

      अफ्रीका का तीसरा बड़ा उत्पादक देश है। यहाँ प्रतिवर्ष लगभग 90 हजार मीट्रिक टन से अधिक ताँबा उत्पादित होता है। यहाँ का अधिकांश तथा केपप्रान्त कान कोडिया एवं ओकोप क्षेत्र तथा केपप्रान्त के मेसिना क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है। इस देश का अधिकांश उत्पादन निर्यात किया जा रहा है। बोत्सवाना, मारुतानिया, मोरक्को व जिम्बाबे, अफ्रीका के अन्य प्रमुख तांबा उत्पादक देश है।

एशिया के तांबा उत्पादक देश:-

         एशिया में विश्व का एक-चौथाई ताँबा उत्पाद होता है। यहाँ के प्रमुख तांबा उत्पादकों में चीन (4.3 प्रतिशत), इण्डोनेशिया (5.4 प्रतिशत), ईरान, जापान, दक्षिणी कोरिया और भारत विश्व के प्रमुख देश बने हुए हैं।

      जापान, दक्षिणी कोरिया और चीन अपनी पूरी आवश्यकता घरेलू उत्पादन से पूरा करते हैं, जबकि भारत ताँबे को आयात करना पड़ता है। भारत विश्व उत्पादकता का मुश्किल से 1 प्रतिशत ताँबा उत्पादित करता है। भारत में तांबे का उत्पादन झारखण्ड के सिंहभूमि एवं हजारीबाग क्षेत्रों में होता है। इ

         सके अतिरिक्त राजस्थान में खेतरी कर्नाटक में चित्तलदुर्ग एवं हासन, आंध्र प्रदेश में नेलोर, कुर्नूल, अनन्तपुर एवं गुन्दूर मध्य प्रदेश में जबलपुर, बालाघाट, होशंगाबाद, सागर एवं बस्तर और उत्तराचल में गढ़वाल, देहरादून एवं अल्मोड़ा जनपदों में ताँबा भण्डार मिला है। भारत का उत्पादन अपनी आवश्यकता से बहुत कम है, जिसके कारण विदेशों से आयात करना पड़ता है। फिलीपीन्स भी एक प्रमुख उत्पादक देश है जिसका अधिकांश उत्पादन अमेरिका एवं जापान को निर्यात किया जाता है। 

       ताँबा उत्पादन में आस्ट्रेलिया तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहाँ क्वीन्सलैण्ड, न्यूसाउथवेल्स और पश्चिमी आस्ट्रेलिया में ताँबे का भण्डार मिला है। आस्ट्रेलिया एक महत्त्वपूर्ण निर्यातक बनता जा रहा है। 2006 में इसका उत्पादन 875 मीटरी टन था, जो विश्व उत्पादन का 5.8 प्रतिशत है।

विश्व व्यापार

       ताँबे का विश्व व्यापार बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी देशों को इसकी आवश्यकता है। विकसित देशों में तो इसकी सबसे अधिक खपत है। विश्व के निर्यातकों में चिली, जिम्मबावे, कनाडा, जाम्बिया, जायरे, मैक्सिको विशेष उल्लेखनीय हैं। आयतकों में ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, फ्रान्स, रूस, भात, आदि का नाम अग्रणी है।

प्रश्न प्रारूप

1. विश्व में ताँबा के वितरण एवं उत्पादन प प्रकाश डालें।

7. Distribution and Production of Iron ore in world (विश्व में लौह अयस्क के वितरण एवं उत्पादन)

7. Distribution and Production of Iron ore in world

(विश्व में लौह अयस्क के वितरण एवं उत्पादन)



Production of Iron     

           आज लोहा यांत्रिक युग की धुरी बन गया है क्योंकि अधिकांश यंत्र इसी से बनाये जा रहे हैं। इसकी कठोरता, टिकाऊपन और अन्य धातुओं के साथ मिलकर मजबूत बनने की क्षमता के कारण इसका उपयोग दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। लोहे का सक्षम विकल्प अभी तक सामने नहीं आया है।

       विश्व में अति प्राचीन काल से लौह खनिज का उपयोग मनुष्य करता रहा है। भारत में लौह खनिज के उपयोग का इतिहास लोहे की खोज के साथ जुड़ा है। दिल्ली में कुतुबमीनार के प्रांगण में स्थित लौह स्तम्भ विदेशी धातु विज्ञानियों के लिए एक आश्चर्यजनक निर्माण है। जंक रहित लोहा बनाने की कला का यह अनूठा प्रयोग है।

 लौह अयस्क के प्रकार-

        लौह अयस्क को लोहे के अंश के आधार पर चार वर्गों में विभाजित किया जाता है:

(i) मैग्नेटाइट (Magnetite) Fe3O4: यह सर्वोत्तम किस्म का लौह अयस्क होता है, जिसमें लोहे की मात्रा लगभग 72% होती है। इसमें वाष्प की मात्रा सबसे कम होती है एवं इसका रंग काला होता है।

(ii) हेमाटाइट (Hematite) Fe2O2: यह लोहे का सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत है, जिसमें लोहे का अंश लगभग 70 प्रतिशत होता है। इसका रंग लाल एवं कत्थई होता है।

(iii) लिमोनाइट (Limonite) 3Fe2O3 3H2O: इसमें धातु का अंश 60 प्रतिशत तक रहता है। इसका रंग पीला होता है। इसका रंग पीला या भूरा होता है।

(iv) सिडेराइट (Siderite) FeCO3: यह सर्वाधिक निम्न कोटि का अयस्क है, जिसमें लोहे का अंश 48 प्रतिशत होता है। यह राख के रंग का होता है

विश्व में लौह अयस्क का संचित भण्डार-

          पृथ्वी के धरातल के निर्माण में लौह तत्त्व की मात्रा लगभग 5 प्रतिशत है। फलतः यह प्रायः सर्वत्र पाया जाने वाला खनिज है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार 50 प्रतिशत से 70 प्रतिशत धात्विक सम्पन्नता का लौह खनिज भण्डार 3700 अरब मीटरी टन है। 

विश्व में  लौह अयस्क का संचित भंडार का प्रतिशत

देश  प्रतिशत
यूक्रेन 18.9
ब्राजील 16.5
रूस 15.1
चीन 12.4
आस्ट्रेलिया 10.8
कजाकिस्तान  5.1
संयुक्त राज्य अमेरिका 4.1
भारत 2.6
स्वीडेन 2.1
वेनेजुएला 1.6
अन्य 11.0

          इस प्रकार विश्व के दस देश 89 प्रतिशत से अधिक लौह अयस्क भण्डार संजोए हुए हैं। शेष 11 प्रतिशत बाकी विश्व के देशों में पाया जाता है।

लौह अयस्क का उत्पादन

     विश्व के 45 देशों में लौह अयस्क का उत्पादन होता है। प्रमुख उत्पादक देश रूस, चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत तथा कनाडा हैं। अन्य उत्पादक देश दक्षिण अफ्रीका गणराज्य, लाइबेरिया, नाइजीरिया, फ्रांस, स्वीडन, स्पेन आदि हैं।

      लौह अयस्क का उत्पादन उपयोग पर आधारित होता है, फलत: विकसित देशों में इसकी माँग अधिक होने से उत्खन्न भी अधिक होता है। 1960 ई० तक विश्व का लौह अयस्क उत्पादन 2565 लाख मीट्रिक टन और 2006 में 18000 लाख मीट्रिक टन हो गया। इससे स्पष्ट है कि दिनोदिन लौह अयस्क की माँग बढ़ती जा रही है।

विश्व के प्रमुख देशों में लौह अयस्क उत्पादन (2021)
देश उत्पादन (मिलियन टन)
चीन 340
आस्ट्रेलिया 900
ब्राजील 490
भारत 250
रूस 95
दक्षिणीअफ्रीका 81
संयुक्त राज्य अमेरिका 60
कनाडा 49

1. चीन-

      यहाँ सामान्य स्तर के लौह अयस्क का विशाल भण्डार है जिसमें धातु सम्पन्नता चालीस प्रतिशत के आस-पास है। यहाँ का संचित भण्डार अभी परिवहन मार्गो की कमी के कारण उपयोग में नहीं लाया जा रहा है क्योंकि भण्डार दूर-दराज के इलाकों में स्थित है।

        चीन में लौह उत्खनन का तीव्र विकास 1950 के बाद शुरू हुआ जब घरेलु खपत के साथ निर्यात भी उत्पन्न हो गया। वर्तमान सूचनाओं के अनुसार चीन सर्वाधिक 58.8 करोड़ मीटरी टन से अधिक लौह-अयस्क स्थानान्तरित कर रहा है। हाल के वर्षों में तीव्र उत्पादन के कारण वह विश्व का प्रथम बड़ा लौह उत्पादक देश बन गया है। यहाँ का लगभग आधा संरक्षित भण्डार दक्षिणी मंचूरिया में है, जिसमें आशन-चांगलिंग एवं पेन्की क्षेत्र प्रमुख उत्पादक हैं।

2. ब्राजील-

        लौह अयस्क के उत्पादन में ब्राजील विश्व का दूसरा बड़ा उत्पादक देश बन गया है जो इसके उच्चकोटि के लौह अयस्क, विदेशी माँग और अनुकूल परिस्थिति में निक्षेपण के कारण सम्भव हुआ है। 1960 में यह विश्व का दसवाँ बड़ा उत्पादक था लेकिन इसके बाद उत्पादन तीव्र गति से बढ़ा और उछल कर यह दूसरे स्थान पर चला गया। यहाँ विश्व का 17.7 प्रतिशत लौह अयस्क भण्डार मिनास-गेरास राज्य के पठारी भाग में है। यही क्षेत्र उत्पादन में भी अग्रणी है।

3. आस्ट्रेलिया-

      आस्ट्रेलिया में लौह खनिज का उत्पादन उत्तरोत्तर बढ़ता जा रहा है। 1960 की तुलना में यहाँ का उत्पादन लगभग डेढ़ गुना हो गया है। यह विश्व का लगभग 15.3 प्रतिशत लौह-अयस्क उत्पादित करता है और विश्व का तीसरा बड़ा उत्पादक देश है।

4. भारत-

       यह विश्व का चौथा बड़ा लौह अयस्क उत्पादक देश हो गया है, जो आन्तरिक खपत और विदेशी माँग के कारण अपने उत्पादन को निरन्तर बढ़ाता रहा है। भारत में चीन के बाद एशिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क भण्डार उपलब्ध है। यहाँ का लौह-अयस्क उच्च कोटि का है, जिससे इसकी विदेशी माँग बढ़ती जा रही है। 2006 में भारत का उत्पादन 1600 लाख मीटरी टन से अधिक था, जो विश्व उत्पादन का 8.9 प्रतिशत है।

5. रूस-

        रूस विश्व का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक रहा है, जो 1958 के बाद निरन्तर अपना प्रथम स्थान बनाये हुए था। यह अकेले विश्व का एक चौथाई से अधिक लोहा उत्खनित करता रहा है। रूस के विघटन के बाद यहाँ विश्व का 15.1 प्रतिशत लौह भण्डार सुरक्षित है। यहाँ 30 क्षेत्रों में उत्खनन कार्य किया जा रहा है।

6. यूक्रेन-

       दक्षिणी यूक्रेन में स्थित क्षेत्रों से उच्च कोटि का हेमाटाइट लौह अयस्क निकाला जाता है। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और धात्विक सम्पन्नता के कारण यह पूर्व सोवियत संघ का सर्वश्रेष्ठ खनिज लौह उत्पादक क्षेत्र रहा है, हालांकि कोयले का क्षेत्र (डोनवास) इससे 400 किमी० की दूर है।

         यहाँ का अधिकांश उत्पादन यूक्रेन और मास्को-तुला क्षेत्र में प्रयुक्त होता है। यहाँ का कुछ उत्पादन पूर्वी यूरोप के इस्पात केन्द्रों को भी भेजा जाता रहा है। क्रिबोईराग यूक्रेन का सबसे बड़ा लौह-अयस्क उत्पादन क्षेत्र है। 2006 में यहाँ का उत्पादन विश्व का 4.1 प्रतिशत था।

7. संयुक्त राज्य अमेरिका-

         उच्च कोटि का लौह अयस्क, सुविधाजनक स्थिति, पर्याप्त रक्षित भण्डार, उन्नत प्रावधिकी और पर्याप्त माँग के कारण 1958 तक संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व का अग्रणी लौह अयस्क उत्पादक देश था। राष्ट्रीय संरक्षण नीति के कारण इसका उत्पादन नियंत्रित कर दिया गया है, जिसके फलस्वरूप अब यह विश्व का सातवाँ बड़ा उत्पादक हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में पाँच क्षेत्र रक्षित भण्डार और उत्पादन दोनों के दृष्टिकोण से अग्रणी हैं। 2006 में यहाँ विश्व का केवल 2.9 प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादित हुआ था।

8. दक्षिणी अफ्रीका संघ-

        दक्षिणी अफ्रीका संघ में लौह धातु का उत्खनन अप्रत्याशित गति से बढ़ा है। 1960 में यह विश्व का मात्र एक प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादित करता था लेकिन 2006 में इसका हिस्सा बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो गया है। स्पष्ट है कि लौह अयस्क का उत्पादन व्यापारिक कारणों से अधिक बढ़ा है। यहाँ का अधिकांश लौह अयस्क निर्यात किया जाता है।

         यहाँ की लौह अयस्क की खानें ट्रांसवाल, आरेन्ज फ्री स्टेट और कपेटाउन प्रान्तों में स्थित हैं जो रेल मार्गों से सेवित हैं इन्हीं खानों के निकट मैगनीज और कोयले की खानें भी स्थित हैं।

9. कनाडा-

         कनाडा का लौह खनिज भण्डार उच्च कोटि का है। देश में सीमित माँग के बावजूद संयुक्त राज्य अमेरिका की बढ़ती माँग और जल यातायात की सुविधा के कारण यहाँ का उत्पादन तीव्र गति से बढ़ रहा है। 1948 में यहाँ मात्र चौदह लाख टन लौह खनिज का उत्पादन हुआ था, जो बढ़कर 2006 में 3.4 करोड़ मीटरी टन से अधिक हो गया है। कनाडा की प्रमुख खानें लेब्रोडोर (शेफलतिल) ओन्टोरिया, नेवस्का, क्यूवेक, ब्रिटिश कोलम्बिया तथा न्यूफाउण्डलैण्ड में हैं। यह विश्व का 9वाँ बड़ा उत्पादक है। 2006 में यहाँ विश्व का 1.9 प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादित हुआ था।

10. स्वीडन-

         स्वीडेन तीव्र उत्पादन के कारण यूरोप का प्रमुख लौह उत्पादक देश बन गया है। 2006 में यहाँ का उत्पादन 236 लाख मीटरी टन था, जो विश्व उत्पादन का 1.3 प्रतिशत है। उच्चकोटि के लौह खनिज के कारण स्वीडेन के लौह खनिज की अधिक माँग है।

11. वेनेजुएला-

         यह विश्व का ग्यारहवाँ प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक देश है, जो 1960 के बाद अपना उत्पादन तीव्र गति से बढ़ाने में सफलता प्राप्त कर सका है। यहाँ का लौह अयस्क उच्चकोटि का है, जिसकी माँग संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों में है। इस देश की आय का लगभग तीस प्रतिशत भाग अयस्क नियत से प्राप्त होता है। 2006 में यहाँ विश्व का 1.3 प्रतिशत लौह-अयस्क उत्पादित हुआ था। वेनेजुएला में अधिकांश उत्पादन सेन बोलिवार तथा एलपाओ की खानों से प्राप्त किया जाता है ,यहाँ की संचित राशि बहुत अधिक है।

लैटिन अमेरिका के अन्य देश-

         चिली और पेरू लैटिन अमेरिका के अन्य महत्त्वपूर्ण देश है जहाँ लौह अयस्क का उत्पादन तीव्र गति से बढ़ रहा है। इन देशों में कोयले की कमी के कारण अधिकांश उत्खनन निर्यात के लिए किया जाता है। चिली के तटीय भाग में वृन्तोको तथा रामेन्ल क्षेत्रों से अधिकांश लौह अयस्क प्राप्त किया जाता है। पेरू की खाने मारकोना एवं अकोर में हैं। जहाँ उच्चकोटि का लौह-अयस्क प्राप्त किया जाता है।

यूरोप के लौह-अयस्क उत्पादक देश-

         यूरोप के प्रमुख उत्पादकों में स्वीडेन के अतिरिक्त फ्रान्स, स्पेन, पूर्व यूगोस्लाविया और नार्वे विशेष उल्लेखनीय हैं। 1960 तक फ्रांस विश्व का चौथा बड़ा लौह उत्पादक देश रहा है, लेकिन अब यहाँ का उत्पादन बहुत तेजी से घटा है फलस्वरूप अब यह विश्व का सोलहवाँ उत्पादक बन गया है।

        फ्रांस के लौह-अयस्क में धातु की मात्रा चालीस प्रतिशत से कम है लेकिन रक्षित भण्डार बहुत अधिक है। लाँगवी, लान्द्रे, ओटाज ओर्न और नेन्सी प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। इसके अतिरिक्त नारमण्डी, ब्रिटेन एवं मध्यवर्ती पठार में भी छिटपुट जमाव पाया जाता है। स्पेन में उच्चकोटि का अयस्क प्राप्त किया जाता है जिसमें धातु की मात्रा साठ प्रतिशत से अधिक है। यहाँ सबसे अधिक उत्पादन बिलिवाओं क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है। इसके अतिरिक्त पिरेनीज एवं जिब्राल्टर क्षेत्रों में लौह अयस्क प्राप्त किया जाता है।

कजाकिस्तान-

      सोवियत संघ के विघटन के बाद कजाकिस्तान विश्व का तेरहवाँ प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक देश बन गया है, जो 2006 में विश्व का 1.0 प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादित किया था।

ईरान-

     ईरान विश्व का 1.1 प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादित कर बारहवें स्थान पर आ गया है।

    विश्व के अन्य प्रमुख उत्पादकों में मैक्सिकों, मारुतानिया, जर्मनी, लाइबेरिया, स्पेन, ब्रिटेन, पेरू, चिली, अल्जीरिया, मोरक्को, ट्यूनिएिशया, मारुतानिया, गैबन, स्वाजीलैण्ड, अंगाला, तुर्की, फिलीपीन्स, मलेशिया एवं इण्डोनेशिया के नाम विशेष उल्लेखनीय है।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार-

         वर्ष 1999 में चीन संसार का सबसे बड़ा लौह-आयस्क उत्पादक देश था। इसके बाद ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, भारत तथा रूस का स्थान था। लोहे का विश्व व्यापार काफी बड़ी मात्रा में होता है। ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा एवं भारत लौह अयस्क के प्रमुख निर्यातक देश हैं, जिनका निर्यात व्यापार में हिस्सा 70 प्रतिशत है। अन्य निर्यातक देशों में स्वीडन, लाइबेरिया, अल्जीरिया, वेनेजुएला आदि का नाम आता है।

        जापान विश्व का सबसे बड़ा लौह अयस्क आयातक (45 प्रतिशत) देश है। अन्य आयातक देशों में जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, इटली एवं फ्रांस प्रमुख हैं।

प्रश्न प्रारूप

1. विश्व में लौह अयस्क के वितरण एवं उत्पाद की विवचेना करें।

5. Biology (जीव विज्ञान)

5. Biology (जीव विज्ञान)



1. जीव विज्ञान का पिता तथा जन्तु विज्ञान का जनक कहा जाता है

⇒  अरस्तु को

2. वनस्पति विज्ञान का जनक माना जाता है

⇒ थियोफ्रेस्टस को

3. चिकित्सा विज्ञान का जनक माना जाता है

⇒ हिप्पोक्रेटस को

4. जीव-विज्ञान शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किया था

⇒ लैमार्क (फ्रांस) एवं ट्रेविरेनस (जर्मनी) ने 1801 ई० में

5. कोशिका की खोज किया था

⇒ रार्बटहुक ने (1665 में)

6. कोशिका सिद्धांत का प्रतिपादन किया था

⇒ श्लाइडेन तथा श्वान ने

7. मनुष्य के शरीर में सबसे बड़ी कोशिका है

⇒ तंत्रिका कोशिका

8. शरीर का सबसे बड़ा अंग है

⇒ त्वचा

9. क्रोमोजोम का नामकरण किया था

⇒ वाल्डेयर ने

10. आत्म हत्या की थैली कहा जाता है

⇒ लाइसोसोम को (खोज- डी डुबे ने)

11. R.N.A. का मुख्य कार्य होता है

⇒ प्रोटीन का संश्लेषण

12. कोशिका का ‘पावर हाउस’ कहा जाता है

⇒ माइटोकॉण्डिया को

13. कोशिका का ईंधन कहा जाता है

⇒ कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) को

14. प्रोटीन संश्लेषण की क्रिया होती है

⇒ राइबोसोम पर

15. केन्द्रक (Nucleus) की खोज की थी

⇒ राबर्ट ब्राउन ने

16. DNA का डबल हेलिक्स मॉडल को बनाया था

⇒ वाट्सन एवं क्रिक ने (1953 ई. में)

17. क्रोमोसोम (गुण सूत्र) बना होता है

⇒ DNA एवं प्रोटीन का

18. मनुष्य में क्रोमोसोम पाये जाते है

⇒ 46 (23 जोड़े)

19. मानव त्वचा की ऊपरी परत कहलाती है

⇒ एपिडर्मिस

20. उत्तकों का अध्ययन किया जाता है

⇒ हिस्टोलॉजी के अन्तर्गत

21.- मानव का वैज्ञानिक नाम है

⇒ होमोसेपियन्स

22. शरीर में भोजन का पाचन प्रारंभ होता है

⇒ मुँह से

23. पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है

⇒ छोटी आँत में

24. लार में मुख्य रूप से पाया जाने वाला एन्जाइम है

⇒ टायलिन

25. मनुष्य में प्रतिदिन लार स्रावित होता है

⇒ 1.5 लीटर (प्रकृति क्षारीय)

26. लार का pH मान होता है

⇒ 6.5 (अम्लीय)

27. रक्त को फाड़ने या थक्का बनाने का कार्य करता है

⇒ रेनिन

28 . पित्त (Bile) का निर्माण होता है

⇒ यकृत (Liver) द्वारा

29. मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है

⇒ यकृत (Liver)

30. मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि है

⇒ अग्नाशय (पैंक्रियाज)

31. वसा को पचाने में सहायक होता है

⇒ लाइपेज

32. प्रोटीन का पाचन एवं प्रोटीन को अमीनो अम्ल में बदल देता है

⇒ ट्रिप्सिन

33. शर्करा को ग्लूकोच में बदलता है

⇒ माल्टोज

34. मल में दुर्गंध होता है

⇒ इन्डोल तथा स्कैटोल नामक अमीनो अम्ल के कारण

35. इंसुलिन की खोज की थी

⇒ वैटिंग एवं वेस्ट ने (1921 ई० में)

36. रूधिर (Blood) में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है

⇒ इंसुलिन

37 . मृत R.B. C. को नष्ट किया जाता है

⇒ यकृत के द्वारा

38. शरीर के अन्दर रक्त को जमने से रोकता है

⇒ हिपैरीन

39. शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है

⇒ कार्बोहाइड्रेट

40. प्रोटीन का सबसे पहले प्रयोग किया था

⇒ जे. बर्जेल्यिस ने

41. प्रोटीन बना होता है

⇒ 20 अमीनो अम्ल से मिलकर

42. बच्चों में ‘क्वाशियोकर’ तथा ‘मरासमश’ की बीमारी होता है

⇒ प्रोटीन की कमी के कारण

43. मनुष्य के शरीर को आवश्यकता होती है

⇒ 20 प्रकार की प्रोटीन की

44. एक ग्राम वसा से ऊर्जा उत्पन्न होती है

⇒ 9.3 किलो कैलोरी

45.’विटामिन’ की खोज किया था

⇒ फंक ने (1911 ई. में)

46. विटामिन A तथा B की खोज की थी

⇒ मैकुलन ने

47. विटामिन C तथा D की खोज की थी

⇒ क्रमशः होल्क एवं हॉपकिन्स ने

48. जल में घुलनशील विटामिन है

⇒ B तथा C

49. वसा में घुलनशील विटामिन है

⇒ A, D, E तथा K

50. शरीर में जल का भार होता है

⇒ 65-80%

51. एक स्वस्थ्य मनुष्य को प्रतिदिन पानी पीना चाहिए

⇒ 4-5 लीटर

52. हड्डियों और दाँतो को स्वस्थ्य रखने में सहायक अकार्बनिक पदार्थ है

⇒ फ्लुओरीन

53. अस्थियों एवं दाँतों के निर्माण में सहायक होता है

⇒ कैल्सियम तथा फॉस्फोरस

54. रक्त में हीमोग्लोबीन बनाने में सहायता करता है

⇒ लोहा

55. लोहा की कमी से होने वाला रोग है

⇒ एनीमिया (अरक्तता)

56. आयोडीन की कमी से होने वाला रोग है

⇒ ग्वाइटर (घेंघा रोग)

57. विटामिन A का रासायनिक नाम है

⇒ रेटिनॉल (स्रोत- अण्डा, गाजर, दूध)

58. विटामिन A की कमी से होने वाला रोग है

⇒ रतौंधी

59. बेरी-बेरी नाम रोग होता है

⇒ विटामिन B की कमी से

60. विटामिन B का रासायनिक नाम है

⇒ थायमिन (स्रोत – खमीर, मांस, अंडा)

61. विटामिन C का रासायनिक नाम है

⇒ एस्कार्बिक एसिड (स्रोत- आँवला, नींबू, संतरा)

62. विटामिन C की कमी से होने वाला रोग है

⇒ स्कर्वी

63. विटामिन D का रासायनिक नाम है

⇒ कैल्सीफेरॉल (स्रोत सूर्य का प्रकाश)

64. रिकेट्स (सुखा रोग) नामक बिमारी होती है

⇒ विटामिन D की कमी से

65. जनन क्षमता में कमी तथा मांसपेशिया कमजोर हो जाती है

⇒ विटामिन E के कमी के कारण

66. विटामिन E का रासायनिक नाम है

⇒ टेकोफेरॉल

67. रक्त थक्का नहीं बनता है

विटामिन K के कारण (नेप्थोक्वीनोन)

68. रक्त परिसंचरण तंत्र की खोज किया था

⇒ विलियम हार्वे ने (1928 ई. में)

69. R.B.C. के निर्माण में सहायक तथा ‘कोबाल्ट’ पाया जाता

⇒ विटामिन B12 (साइनोकोबाल्मिन) में

70. मनुष्य के हृदय का सामान्य स्पंदन (धड़कन) गति है

⇒ 72 बार प्रति मिनट

71. स्वस्थ्य मनुष्य का श्वसन दर होता है

⇒ 16 से 18 बार प्रति मिनट

72. मनुष्य एक दिन में श्वसन करता है

⇒ 2200 बार (1600 kg वायु)

73. मानव शरीर में सामान्य रक्त दाब होता है

⇒ 120/80

74. रक्तचाप मापने वाला यंत्र है

⇒ स्फिग्मोमैनोमीटर

75. एक स्वस्थ्य व्यक्ति में रक्त की मात्रा होती है

⇒ 5-6 लीटर

76. रक्त को थक्का बनने या जमने में सहायक होता है

⇒ फाइब्रोनोजीन

77. रक्त का रंग लाल होता है

⇒ हीमोग्लोबीन के कारण

78. लाल रक्त कण (RBC) का जीवन काल होता है

⇒ 120 दिन

79. लाल रक्त कण का निर्माण होता है

⇒ अस्थिमज्जा में

80. श्वेत रक्त कण (WBC) का निर्माण होता है

⇒ अस्थिमज्जा, लिम्फनोड, यकृत एवं प्लीहा में

81. श्वेत रक्त कण (ल्यूकोसाइट) का जीवन काल होता है

⇒ 1 से 4 दिन

82. WBC का मुख्य कार्य है

⇒ शरीर को रोगों के संक्रमण से बचाना

83. RBC का मुख्य कार्य है

⇒ शरीर की हर कोशिका में ऑक्सीजन को पहुंचाना

84. WBC का निर्माण एवं RBC का विनाश होता है

⇒ प्लीहा (Spleen) में

85. लाल रक्त कणिकाओं का कब्रगाह कहा जाता है

⇒ प्लीहा (Spleen) को

86. रक्त समूह की खोज की थी

⇒ लैंडस्टीनर ने (1902 ई. में)

87. रक्त का pH मान होता है

⇒ 7.4 (प्रकृति क्षारीय)

88. सर्वदाता रूधिर वर्ग (Universal Doner) कहा जाता है

⇒ रक्त समूह ‘O’ को

89. सर्वग्राही रूधिर वर्ग (Universal Recipient) कहा जाता है

⇒ रक्त समूह ‘AB’ को

90. रक्त के शुद्धिकरण का कार्य करता है

⇒ फेफड़ा (Lungs)

91. मूत्र का रंग पीला होता है

⇒ यूरोक्रोम के कारण

92. थॉयरायड ग्रंथि (अवटु ग्रंथि) पाया जाता है

⇒ गला में

93. सभी मानसिक क्रियाओं (चेतना, यादाश्त, विवेक, बुद्धि) का नियंत्रण करता

प्रमस्तिष्क या सेरिब्रम (मस्तिष्क के अगले भाग में)

94. शरीर के सामान्य ऐच्छिक क्रियाओं (चलना, घुमना, बोलना) का नियंत्रण करता है

अनुमस्तिष्क या सेरिबेलम

95. मनुष्य के शरीर में हड़ियों की कुल संख्या होती है

⇒ 206

96. मनुष्य की खोपड़ी में हड़ियाँ पाई जाती है

⇒ 8

97. शरीर की सबसे लम्बी अस्थि है

⇒ फीमर या उरू अस्थि

98. शरीर की सबसे छोटी हड्डी है

⇒ स्टेप्स (कान के पास)

99. शरीर में सबसे मजबूत हड्डी होता है

⇒ जबड़ा का

100. मानव शरीर की सबसे छोटी ग्रंथि है

⇒ पिट्यूटरी ग्रंथि (मास्टर ग्रंथि)

101. इन्सुलिन का स्रवण होता है

⇒ लैंगर हैंस की द्वीपिका के B-कोशिका द्वारा

102. टिबिया नामक हड्डी पाई जाती है

⇒ पैर में

103. शरीर के ताप को नियंत्रित करता है

⇒ हाइपोथैलमस ग्रंथि

104. लाल रक्त का निर्माण भ्रूण अवस्था में होता है

⇒ यकृत और प्लीहा में

105. मस्तिष्क का वजन होता है

⇒ 1350 ग्राम

106. ट्रेकोमा, एस्टिगमेटिज्म (अबिंदुकता तथा मोतियाबिन्द से प्रभावित होने वाला अंग है

⇒ आँख

107. पीलिया या हेपैटाइटिस रोग से प्रभावित होने वाला अंग है

⇒ यकृत

108. विषाणु (Virus) के कारण उत्पन्न होने वाला रोग है

⇒ ट्रेकोमा, पोलियो, चेचक, खसरा, इन्फ्लुएंजा

109. पायरिया, मलेरिया, कालाजार तथा पेचिस की बीमारी होती है

⇒ परजीवी (Protozoa) के कारण

110. टिटनेस, हैजा, टाइफाइड, निमोनिया, डिप्थीरिया, तपेदिक या क्षय रोग होता है

⇒ जीवाणु (Bacteria) के कारण

111. मेनिनजाइटिस रोग से प्रभावित होने वाला अंग है

⇒ मस्तिष्क

112. टिटनेस, मिर्गी, कोढ़, रेबीज, पोलियों से प्रभावित होने वाला अंग है

⇒ तंत्रिका तंत्र

113. लीची का खाने योग्य भाग होता है

⇒ एरिल

114. BCG का टीका लगाया जाता है

⇒ टी. बी. रोग से बचाव के लिए

115. DPT का टीका किस रोग से बचाव के लिए लगाया जाता है

⇒ डिप्थीरिया, टिटनेस तथा काली खाँसी

116. मलेरिया रोग से प्रभावित होने वाला अंग है

⇒ RBC तथा तिल्ली

117. टाइफाइड, हैजा तथा पेचिस रोग से प्रभावित होने वला अंग है

⇒ आँत

118. सेब तथा नाशपाती का खाने योग्य भाग है

मांसल पुष्पासन

119. सबसे बड़ा तथा सबसे छोटा फूल है

⇒ क्रमश: रेफ्लेशिया तथा वुल्फिया

120. सबसे बड़ा बीज तथा सबसे छोटा बीज है

⇒ क्रमशः लोडोसिया तथा आर्किड

121. ब्रोंकाइटिस, कुकुर खाँसी तथा दमा के शरीर का प्रभावित होने वाला अंग है

⇒ फेफड़ा

122. ग्वाईटर (गलसुआ) रोग से प्रभावित होने वाला अंग है

⇒ थॉयराइड ग्रंथि

123. शुद्ध जल, समुद्र का जल तथा दूध का pH मान होता है

⇒ क्रमश: 7.0, 8.4 तथा 6.4

124. ‘चेचक का टीका’ की खोज की थी

⇒ एडवर्ड जेनर ने

125. पेनिसिलीन की खोज की थी

⇒ अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने

126. होम्योपैथी के अविष्कारक है

⇒ हैनिमेन

127. बैक्टीरिया की खोज की थी

⇒ ल्यूवेन हॉक ने

128. फूलों तथा फलों का अध्ययन कहलाता है

⇒ क्रमशः एन्थोलॉजी तथा पोमोलॉजी

129. कीट-पतंग तथा पक्षियों की अध्ययन कहलाता है

⇒ एन्टोमोलॉजी तथा ऑरनीथोलॉजी

130. गाय तथा भैंस का गर्भकाल होता है

⇒ क्रमश: 284 दिन तथा 300 दिन

131. तंत्रिका क्षेत्र की इकाई को कहते है

⇒ न्यूरॉन

132. गुर्दे का भार होता है

150 ग्राम (लगभग)

133. मनुष्य के शरीर में मांस पेशियों की संख्या होती है

⇒  लगभग 639 

134. शरीर का सबसे कठोर तत्व होता है

एनामिल (दाँतो के ऊपर)

135. स्वप्नों तथा सौंदर्य के अध्ययन को कहते हैं

⇒ क्रमशः ऑनीरोलॉजी तथा केलोलॉजी

136. मनुष्य में लिंग निर्धारण निर्भर होता है

पुरुष के क्रोमोसोम पर

137. शरीर में रक्त परिभ्रमण में समय लगता है

⇒ 23 सेकेण्ड

138. मरूस्थल में उगने वाला पौधा कहलाता है

⇒ जीरोफाइट्स

139. कोशिका का ‘उर्जा गृह’ कहा जाता है

⇒ माइटोकांड्रिया को

140. टमाटर के लाल रंग का कारण होता है

⇒ लाइकोपीन

141. ‘वृक्क’ की इकाई होती है

⇒ नेफ्रॉन

142. त्वचा रंग का कारण होता है

⇒ मिलैनीन पिंगमेंट

143. आंखों में बाहर से पड़ने वाले प्रकाश को नियंत्रित करता है

⇒ आइरिस

144. प्रदूषित जल पीने से प्रायः होता है

⇒ हैजा, पीलिया तथा टाइफाइड नामक रोग

145. एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिसिएन्सी सिन्ड्रोम) का वायरस होता है

⇒ HIV (ह्यूमन इम्यूनो वायरस)

145. शरीर में कोलेस्ट्रॉल की अधिकता के कारण होता है

⇒ हृदय घात (Heartattack)

147. स्पांडिलाइटिस बिमारी (Spondylitis) बीमारी से शरीर का प्रभावित होने वाला अंग है

⇒ मेरूदंड

148. कीमोथेरापी (Chemotherapy) का उपयोग किया जाता है

⇒ कैंसर के इलाज में

149. डायबिटीज (मधुमेह) का कारण है

⇒ इंसुलिन की कमी

150. ‘एथलीट फुट’ नामक रोग होता है

⇒ Tenia Pedis नामक कवक (फंग्स) के कारण

151. मलेरिया रोग फैलता है

⇒ मादा एनोफलीज मच्छर द्वारा

152. SARS (सिबीयर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) है

⇒ एक वायरस जनित बीमारी

153 हाइड्रोफोबिया बीमारी होती है

⇒ कुत्ता के काटने से

154. हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रोग है जिसका परिणाम है

⇒ रक्त का नहीं जमना

155. सेब तथा नाशपाती का खाने योग्य भाग है

⇒ मांसल पुष्पासन तथा गुद्देदार पुष्पासन

156. ‘नेचुरल सेलेक्शन’ (प्राकृतिक चुनाव) का सिद्धांत बनाया था

⇒ चार्ल्स डार्विन ने

157. आनुवंशिकता का जन्मदाता माना जाता है

⇒ ग्रेगरी मेण्डल को

158. मिट्टी के बिना पोधे को वृद्धि की प्रक्रिया कहलाती है

⇒ हाइड्रोपोनिक्स

159. सत्य फल (True Fruit) तथा असत्य फल (False Fruit) उत्पन्न होता है

⇒ क्रमशः अण्डाशय तथा बीजाण्ड से

160. RH- एक ऐन्टीजन है, जो पाया जाता है

⇒ लाल रूधिर कणिकाओं (RBC) पर

161. ‘नाइट्रोजन स्थिरीकरण’ के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया पाया जाता है

⇒ शिंबी पौधे के जड़ में

162. ‘यकृत में संचित’ तथा ‘मछली के लीवर’ तेल में पाया जाने वाला विटामिन है

⇒ विटामिन A

163. मनुष्य के मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है

⇒ प्रमस्तिष्क (सेरेब्रम)

164. तत्काल ऊर्जा के लिए एक खिलाड़ी को दिया जाता है

⇒ कार्बोहाइड्रेट

165. प्रकाश संश्लेषण क्रिया में ऑक्सीजन गैस बाहर निकलती है

⇒ जल से

166. प्रकाश संश्लेषण के दौरान प्रकाश ऊर्जा रूपान्तरित होती है

⇒ रासायनिक ऊर्जा में

167. एड्स की बीमारी की जाँच के लिए किया जाता है

⇒ एलिसा (ELISA) टेस्ट

168. दान में प्रदाता की आँख से निकाला जाता है

⇒ कार्निया

169. दूध में नहीं पाया जाने वाला विटामिन है

⇒ विटामिन-C

170. पक्का आम में पाया जाता है

⇒ विटामिन A

171. शैवालों का अध्ययन कहलाता है

⇒ फाइकोलॉजी

172. प्रकाश संश्लेषण की दर सबसे अधिक तथा सबसे कम होता है

⇒ क्रमशः लाल प्रकश तथा बैंगनी प्रकाश में

173. राईजोबियम जीवाणु पाये जाते है

⇒ दलहन की जड़ में

174. तारपीन का तेल प्राप्त किया जाता है

⇒ चीड़ के वृक्षों से



विटामिन तथा उनके रासायनिक नाम

1. विटामिन : A

रासायनिक नाम : रेटिनॉल

कमी से रोग : रतौंधी

स्रोत : गाजर, दूध, अण्डा

2. विटामिन : B1

रासायनिक नाम : थायमिन

कमी से रोग : बेरी-बेरी

स्रोत : मुंगफली, आलू, सब्जीयाँ

3. विटामिन : B2

रासायनिक नाम : राइबोफ्लेबिन

कमी से रोग: त्वचा फटना, आँख का रोग

स्रोत: अण्डा, दूध, हरी सब्जियाँ

4. विटामिन : B3

रासायनिक नाम : पैण्टोथेनिक अम्ल

कमी से रोग : पैरों में जलन, बाल सफेद

स्रोत: मांस, दूध, टमाटर,

5. विटामिन : B5

रासायनिक नामः निकोटिनेमाइड (नियासिन)

कमी से रोगः मासिक विकार (पेलाग्रा)

स्रोत: मांस, मूंगफली, आलू

6. विटामिन : B6

रासायनिक नामः पाइरीडॉक्सिन

कमी से रोगः एनीमिया, त्वचा रोग

स्रोत: दूध, मांस, सब्जी

7. विटामिन : H/B7

रासायनिक नामः बायोटिन

कमी से रोगः बालों का गिरना, चर्म रोग

स्रोत : यीस्ट, गेहूँ, अण्डा

8. विटामिन : B12

रासायनिक नामः सायनोकोबालमिन

कमी से रोगः एनीमिया, पाण्डू रोग

स्रोत : मांस, कजेली, दूध

9. विटामिन : C

रासायनिक नामः एस्कार्बिक एसिड

कमी से रोगः स्कर्वी, मसूड़ों का फुलना

स्रोत: नींबू, संतरा, आँवला,

10. विटामिन : D

रासायनिक नामः कैल्सिफेरॉल

कमी से रोगः रिकेट्स

स्रोत: सूर्य का प्रकाश, दूध



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4. Economic (अर्थशास्त्र)

4. Economic (अर्थशास्त्र)



Economic

1. अर्थशास्त्र का जनक कहा जाता है

⇒ एडम स्मिथ को

2. सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व में स्थान हैं

⇒ 5 वीं

3. क्रयशक्ति  के आधार पर भारत की अर्थव्यवस्था का विश्व में वर्तमान स्थान है

⇒ तीसरी

नोट: भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधाार पर विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बन गयी है। जो अमेरिका व चीन के बाद अपना स्थान बनाती है।

4. भारतीय की अर्थव्यवस्था है

⇒ विकासशील

5. विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है

⇒ संयुक्त राज्य अमेरिका की

6. विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है

⇒ चीन की 

7. भारतीय अर्थव्यवस्था का एशिया में स्थान है

⇒ तीसरा (चीन, जापान , भारत)

8. समाजवादी अर्थव्यवस्था को अपनाने वाला पहला देश

⇒ रूस

9. वैज्ञानिक समाजवाद का जनक माना जाता है

⇒ कार्ल मार्क्स को

10 पूँजीवादी अर्थव्यवस्था को अपनाने वाला पहला देश है

⇒ अमेरिका

11. भारत में पायी जाने वाली अर्थव्यवस्था का स्वरूप है

⇒ मिश्रित

12. मिश्रित अर्थव्यवस्था का तात्पर्य है

⇒ निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों का सह-अस्तित्व

13. मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाने वाला पहला देश

⇒ फ्रांस

14. मिश्रित अर्थव्यवस्था का आरंभ हुआ

⇒ 1948 में

15. मिश्रित अर्थव्यवस्था का सिद्धांत किया था

⇒ केन्स ने

16. तृतीय विश्व (थर्ड वर्ल्ड) शब्द प्रयुक्त होता है

⇒ विकासशील देश के संदर्भ में

17. भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है

⇒ कृषि

18. देश में कृषि कार्य में लगे व्यक्तियों का प्रतिशत है

⇒ 58 प्रतिशत

19. भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार देश है

संयुक्त राज्य अमेरिका

20. बंद अर्थव्यवस्था का अर्थ है

⇒ आयात-निर्यात बंद

21 न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) संबंधित है

⇒ कृषि से

22. न्यूनत्तम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने वाली संस्था है

⇒ कृषि एवं लागत मूल्य आयोग (CACP)

23. भारत में सबसे पहले चकबंदी कानून लागू की गई

⇒ 1920 ई० में (बड़ौदा में)

24. चकबंदी के दो प्रकार है

⇒  ऐच्छिक एवं अनिवार्य

25. ऐच्छिक चकबंदी की शुरूआत हुई थी

⇒ 1921 में (पंजाब से)

26. अनिवार्य चकबंदी की शुरूआत हुई थी

⇒ 1928 में (मध्य प्रदेश से)

27. अनिवार्य चकबंदी की शुरूआत हुई थी

⇒ 1928 में मध्यप्रदेश से

28. जोतों का आकार सबसे कम है

⇒ केरल में

29. जोतों का आकार सर्वाधिक है

⇒ राजस्थान में

30. राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना लागू की गई

⇒ 1999-2000 में

31. भारत में सर्वाधिक जोतों का प्रकार है

⇒ सीमान्त जोत

32. भारत में कृषि वर्ष माना जाता है

⇒ 1 अप्रैल से 31 मार्च को

33. रबी फसल बोयी जाती है

⇒ अक्तूबर-नवम्बर में

34. खरीफ फसल बोई जाती है

⇒ जून-जुलाई में

35. रबी फसल है

⇒ गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों

36. खरीफ फसल है

⇒ चावल, बाजरा, मक्का

37. जायद फसल है

⇒ ककड़ी, तरबूजा, खीरा, सब्जी

38. भारत की मुख्य खाद्य फसल है

⇒ चावल

39. हरित क्रांति की शुरूआत हुई थी

⇒ 1966-67 में

40. भारत में हरित क्रांति का जन्मदाता माना जाता है

⇒ एम. एस. स्वामीनाथन को

41. हरित क्रांति के विश्व स्तरीय जनक माने जाते है

⇒ डॉ॰ नॉरमन बोरलॉग को

42. हरित क्रांति से सबसे अधिक प्रभावित फसल थी

⇒ गेहूँ

43. भारत में हरित क्रांति के समय भारत का केन्द्रीय खाद्य एवं कृषि मंत्री थे

⇒ सी० एस० सुब्रमण्यम

44. हरित क्रांति का जनक देश है

⇒ फिलीपीन्स

45. भात में सर्वप्रथम रित क्रांति आयी थी

⇒  पंजाब में

46. पीली तथा पूरी क्रांति संबंधित है

➤ क्रमशः तिलहन तथा उर्वरक से

47. लाल तथा गुलाबी क्रांति संबंधित है

➤ क्रमशः मांस तथा झींगा से

48. श्वेत तथा रजत क्रांति संबंधित है

➤ क्रमश: दूध तथा अंडा से

49. बादामी तथा गोल क्राति संबंधित है

➤ क्रमशः मसाला तथा आलु उत्पादन से

50. नीली तथा कृष्ण क्रांति संबंधित है

➤ क्रमशः मत्स्य पालन तथा पेट्रोलियम से

51. सभी क्रातियों का सम्मिलन है

➤ इन्द्रधनुषी क्रांति

52. भारत में गरीबी का मापन का आधार है

➤ न्यूनतम कैलोरी उपभोग के मौद्रिक मान

53. ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्र में एक व्यक्ति के प्रति दिन के भोजन में होना चाहिए

➤ क्रमश: 2400 कैलोरी तथा 2100 कैलोरी

54. भारत में गरीबी का आकलन किया जाता है

➤ लकड़वाला फार्मूला के आधार पर

55. लकड़वाला फार्मूला को स्वीकृति प्रदान की गई

➤ 11 मार्च, 1997 को योजना आयोग द्वारा

56. सभी राज्यों के लिए गरीबी की अलग-अलग कितनी रेखाओं का निर्धारण किया गया है

➤ 35

57. निर्धनता अनुपात के मामले में अग्रणी राज्य है

➤ ओडिसा

58. निर्धनों की सर्वाधिक संख्या वाला राज्य है

➤ उत्तर प्रदेश

59. विकसित देशों में पायी जाने वाली बेरोजगारी है

➤ अनैच्छिक

60. अदृश्य/प्रच्छन/छीपी हुई बेरोजगारी मुख्य रूप से पायी जाती है

➤ कृषि क्षेत्रों में

61. मौसमी बेरोजगारी पायी जाती है

➤ कृषि क्षेत्रों में

62. भारत में बेरोजगारी का स्वरूप है

➤ संरचनात्मक/ दांचागत बेरोजगारी 

63. संरचनात्मक बेरोजगारी होती है

➤ दीर्घकालीन

64. संरचनात्मक बेरोजगारी मुख्यतः पायी जाती है

➤ औद्योगिक क्षेत्रों में

65. भारत में बेरोजगारी संबंधी आँकड़े तैयार किए जाते है

➤ राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) द्वारा

66. ग्रामीण क्षेत्रों में पायी जाने वाली बेरोजगारी है

➤ मौसमी बेरोजगारी

67. शहरी क्षेत्रों में पायी जाने वाली बेरोजगारी है

➤ प्रत्यक्ष बेरोजगारी

68. व्यापार चक्र की मंदी के समय उत्पन्न बेरोजगारी कहलाता है

➤ चक्रीय बेरोजगारी

69. मानव विकास रिपोर्ट (HDR) जारी करता है

➤ UNDP (1990 से)

70. भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार देश है

संयुक्त राज्य अमेरिका

71. मानव विकास सूचकांक (HDI) का आकलन का आधार है

➤ जीवन प्रत्याशा, शिक्षा का स्तर एवं प्रति व्यक्ति आय

72. सबसे अधिक निर्यात की जाने वाली वस्तु है

रत्न एवं आभूषण

73. UNDP की मानव विकास रिपोर्ट की तर्ज पर भारत की पहली मानव विकास रिपोर्ट जारी हुआ

➤ अप्रैल 2002 में

74. भारत में मानव विकास रिपोर्ट जारी करता है

➤ नीति आयोग (2014 से पहले योजना आयोग )

75. भारत में मानव विकास रिपोर्ट जारी करने वाला पहला राज्य है

➤ मध्य प्रदेश

76. सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरूआत हुई थी

➤ 1952 में

77. सामुदायिक विकास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था

➤  समाज का सर्वांगीण विकास करना

78. बीस सूत्री कार्यक्रम की शुरूआत हुई थी

➤ 1974-75 में

79. बीस सूत्री कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था

➤ गरीबी निवारण एवं रहन-सहन के स्तर को सुधारना

80. ट्राइसेम (ग्रामीण युवाओं हेतु स्वरोजगार प्रशिक्षण) की शुरूआत हुई थी

➤ 15 अगस्त, 1979 को

81. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (NREP) की शुरूआत हुई थी

➤ 1980 में 

82. ग्रामीण क्षेत्रों में महिला एवं बाल विकास कार्य (DWCRA) प्रारंभ हुआ था

1982 में

83. जवाहर रोजगार योजना तथा नेहरू रोजगार योजना का प्रारंभ हुआ था

➤ 1989 में

84. जवाहर ग्राम संवृद्धि योजना का आरंभ हुआ था

➤ 1 अप्रैल, 1999 में

85. अन्त्योदय कार्यक्रम की शुरूआत हुई थी

➤ 1978 में

86. नई आर्थिक सुधार की रूपरेखा सर्वप्रथम तैयार की गई थी

➤ 1985 में राजीव गांधी के काल में

87. सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (SGRY) का शुभारंभ किया गया था

➤ 25 सितम्बर, 2001 को

88. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) की शुरूआत हुई थी

➤ 2 फरवरी, 2006 को

89. ‘नरेगा’ का शुभारंभ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था

➤ आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से

90. NAREGA का मुख्य उद्देश्य था

➤ 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना

91. भारत में 100 दिन की रोजगार गारंटी योजना की शुरूआत करने वाला पहला राज्य है

➤ आंध्र प्रदेश

92. सभी जिलों में ‘100 दिन की रोजगार गारंटी योजना’ लागू करने वाला प्रथम राज्य है

➤ बिहार 

93. सर्वप्रथम सहकारी संगठन की स्थापना हुई थी

➤ 1904 में

94. सरकारी क्षेत्रों में सरकारी हिस्सेदारी कम करना कहलाता है

➤ विनिवेश

95. किसी देश द्वारा आयात पर लगाया गया कर कहलाता है

➤  टैरिफ

96. कोर सेक्टर का उद्योग कहा जाता है

➤ सीमेंट, लोहा, इस्पात पेट्रोलियम, भारी मशीनरी इत्यादि को

97. भारतीय खाद्य निगम (FCI) की स्थापना हुई थी

➤ 1965 में

98. विकलांगों के लिए ‘संगम योजना’ शुरू की गई है

➤ 15 अगस्त, 1996 को

99. राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान की स्थापना की गई थी

➤ 1977 में

100. राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान का मुख्यालय है

➤ हैदराबाद में

101. नगरपालिका समिति के राजस्व का मुख्य स्रोत है

➤ चुंगी कर

102. रोजगार गारंटी योजना की शुरुआत 1972-73 में सर्वप्रथम किया गया

➤ महाराष्ट्र में

103. उपभोक्ता को बचत का सिद्धांत दिया था

➤ अल्फ्रोड मार्शल ने

104. ‘बिग पुश’ सिद्धांत दिया था

➤ रॉडन ने

105. मिर्धा समिति संबंधित है

सहकारिता आन्दोलन से

106. अंत्योदय अन्न योजना का प्रारंभ हुआ था

25 दिसम्बर, 2000 में

107. अंत्योदय अन्न योजना को प्रारंभ किया था

➤ प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने

108. इंदिरा आवास योजना (IAY) आरंभ की गई थी

➤ 1985-86 में

109. स्व जलधार कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी

दिसम्बर 2002 में

110. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम प्रारंभ किए गए

➤ 15 अगस्त, 2008 से

111. प्रधानमंत्री रोजगार योजना प्रारंभ की गई

➤ 2 अक्टूबर, 1993 को

112. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना प्रारंभ की गई

➤ दिसम्बर, 2000 को

113. ‘काम के बदले अनाज’ का राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरूआत हुई थी

14 नवम्बर, 2004 को (आंध्र प्रदेश में)

114. सर्वशिक्षा अभियान की शुरूआत हुई थी

➤ 2000-01 में

115. सभी को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए यूनेस्कों द्वारा निर्धारित सीमा है

➤ 2015 तक

116. हरियाली योजना का शुभारंभ किया गया

➤ 27 जनवरी, 2003 को

117. कृषक बीमा आय योजना प्रारंभ हुआ था

➤ 2003-04 में

118. भारत निर्माण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया

➤ 16 दिसम्बर, 2005 को (नई दिल्ली में)

119. राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की गई थी

1 अक्टूबर, 2007 को

120. महिला संवृद्धि योजना की शुरुआत हुई थी

➤ 2 अक्टूबर, 1993 को

121. भारत निर्माण योजना की शुरुआत हुई थी

16 दिसम्बर, 2005 से

122. प्रधानमंत्री आदर्श गाँव योजना का प्रारंभ हुआ था

➤ 2009-10 से

123. राष्ट्रीय आय का सामान्य अर्थ होता है

साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP)

124. भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रीय आय का आकलन किया था

दादाभाई नौरोजी ने (1867-68) में

125. भारत में राष्ट्रीय आय तथा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का आकलन करता है

➤ केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO)

126. राष्ट्रीय आय को गणना का आधार वर्ष है

2004-05 (पहले 1999-2000)

127. केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन की स्थापना हुई थी

2 मई, 1951 को

128. केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन का मुख्यालय है

नई दिल्ली में

129. केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन ने पहली देशव्यापी आर्थिक गणना करायी थी

➤ 1977 में

130. राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी कहलाता है

श्वेत-पत्र

131. ‘श्वेत पत्र’ जारी करता है

➤ केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO)

132. राष्ट्रीय आय है

➤ एक प्रवाह, स्टॉक नहीं।

133. राष्ट्रीय आय समिति का गठन हुआ था

अगस्त, 1949 में (पीसी महालनोबीस की अध्यक्षता में)

134. राष्ट्रीय आय समिति ने अपनी पहली रिपोर्ट पेश की थी

➤ 1951 में

135. वर्तमान में राष्ट्रीय आय में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र का योगदान है

➤ क्रमश: 21.82%, 24.29% तथा 53.89%

136. राष्ट्रीय आय के अनुमान का सबसे पहला सरकारी अनुमान दिया गया

➤ 1948-49 में (वाणिज्य मंत्रालय द्वारा)

137. वर्तमान में भारत में राष्ट्रीय आय में सर्वाधिक योगदान है

➤ तृतीयक क्षेत्र अर्थात् सेवा क्षेत्र का

138. राष्ट्रीय आय में सबसे कम योगदान है

प्राथमिक क्षेत्र अर्थात् कृषि का

139. प्राथमिक क्षेत्र संबंधित है

➤ कृषि, पशुपालन, वन एवं मत्स्यपालन से

140. द्वितीयक क्षेत्र संबंधित है

➤ उद्योग, निर्माण, खनन, विनिर्माण, विद्युत, तथा जलपूर्ति से

141. तृतीयक क्षेत्र संबंधित है

➤ सेवा, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, व्यापार से

142. भारत के GDP में सर्वाधिक योगदान देने वाला राज्य है

➤ महाराष्ट्र (13.29%)

143. प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे अग्रणी देश है

➤ जपान

144. प्रतिव्यक्ति आय का अनुमान लगाता है

➤ CSO

145. सर्वाधिक प्रति व्यक्ति आय वाला राज्य है

➤ गोवा

146. सर्वाधिक प्रति व्यक्ति आय वाला केन्द्रशाति राज्य है

➤ दिल्ली

147. हिन्दू वृद्धि दर संबंधित है

➤ राष्ट्रीय आय से

148. हिन्दू वृद्धि दर के अवधारणा के प्रतिपादक थे

➤ प्रो० राज कृष्ण

149. किसी भी देश की आर्थिक विकास दर का सर्वश्रेष्ठ सूचक होती है

➤ प्रति व्यक्ति आय

150. भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि है

➤ 1 अप्रैल से 31 मार्च

151. प्रथम वित्त आयोग का गठन हुआ था

➤ 1951 में

152. वित्त आयोग के गठन से संबंधित अनुच्छेद है

➤ अनु. 280 (1)

153. वित्त आयोग में सदस्यों की संख्या होती है

➤ 5 (अध्यक्ष सहित)

154. वित्त आयोग का कार्यकाल होता है

➤ 5 वर्ष

155. वित्त आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे

➤ केसी नियोगी

156. वित्त आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति करता है

➤ राष्ट्रपति

157. 16वें वित्त आयोग का गठन हुआ था

31.12.2023 को 

158. वित्त आयोग के वर्तमान (16 वें) अध्यक्ष है

अरविंद पनगढ़िया

159. वित्त आयोग (15वें) का वर्तमान कार्यकाल है

2020-25

160. वित्त आयोग का मुख्य कार्य है

➤ केन्द्र तथा राज्य के बीच राजस्व का बंटवारा करना

161. भारत में योजना निर्माण हेतु केन्द्रीय निकाय है

➤  नीति आयोग

162. नीति आयोग का गठन हुआ था

1 जनवरी, 2015 को

163. योजना आयोग का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था

➤ जॉन मथाई ने (1950 में)

164. नीति आयोग का पदेन अध्यक्ष होता है

➤ प्रधानमंत्री

165. योजना आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे

➤ पंडित जवाहर लाल नेहरू

166. नीति आयोग संस्था है

➤ परामर्शदात्री एवं गैर-संवैधानिक

167. योजना आयोग का गठन हुई थी

➤ 1946 में गठित नियोगी समिति की सिफारिश पर

168. योजना आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष थे

➤ गुलजारी लाल नंदा

169. नीति आयोग के सदस्य की संख्या एवं कार्यकाल होता है

➤ निश्चित नहीं होता

170. नीति आयोग के उपाध्यक्ष को दर्जा प्राप्त होता है

➤ कैबिनेट मंत्री का

171. नीति आयोग के उपाध्यक्ष की नियुक्ति करता है

➤ प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति

172. नीति आयोग का मुख्य कार्य है

➤ पंचवर्षीय योजना का निर्माण तथा रूपरेखा तैयार करना

173. वर्तमान में नीति आयोग के अध्यक्ष है

श्री नरेन्द्र मोदी

174. वर्तमान में नीति आयोग के उपाध्यक्ष है

श्री सुमन बेरी 

175. वर्तमान में नीति आयोग के सदस्य सचिव है

बी वी आर सुब्रमण्यम

176. नीति आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष थे

अरविंद पनगढ़िया 

177. नीति आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे

श्री नरेन्द्र मोदी

178. राष्ट्रीय विकास परिषद् का गठन हुआ था

➤ 6 अगस्त, 1952 को

179. राष्ट्रीय विकास परिषद् संस्था है

➤ गैर-संवैधानिक

180. सुपर कैबिनेट (अति मंत्रिमंडल) कहा जाता है

➤ राष्ट्रीय विकास परिषद् को

181 राष्ट्रीय विकास परिषद् का अध्यक्ष होता है

➤ प्रधानमंत्री

182. राष्ट्रीय विकास परिषद् के सदस्यों में शामिल होते हैं

➤ केन्द्रीय मंत्रीमंडल के सदस्य, राज्यों के मुख्यमंत्री, केन्द्रशासित राज्यों के प्रशासक तथा नीति आयोग के सदस्य

183. राष्ट्रीय विकास परिषद् का मुख्य कार्य है

➤ पंचवर्षीय योजनाओं का अनुमोदन तथा अंतिम स्वीकृति प्रदान करना

184. भारत में योजना का स्वरूप है

➤ मिश्रित

185. भारत के लिए नियोजित अर्थव्यवस्था (Planned Economy for India) पुस्तक को लिखा है

➤ विश्वश्वरैया ने (1934 में)

186. ‘गांधी योजना’ को तैयार किया था

➤ श्री मन्नारायण ने (1944 में)

187. सर्वोदय योजना को प्रस्तुत किया था

➤ जयप्रकाश नारायण ने (जनवरी 1950 में)

188. ‘बॉम्बे प्लान’ (15 वर्षीय योजना) लागू हुआ

➤ उद्योगपतियों द्वारा 1944 में

189. जन योजना (People’s Plan) निर्मित की गई

➤ श्री एम० एन० राय द्वारा अप्रैल 1945 में

190. नियोजन से तात्पर्य है

➤ आर्थिक नियोजन

191. आर्थिक नियोजन को सर्वप्रथम अपनाने वाला देश है

➤ रूस

192. आर्थिक नियोजन विषय है

समवर्ती सूची में

193. आर्थिक नियोजन से संबंधित अनुसूची है

➤ 7वीं

194. भारत में नियोजित आर्थिक विकास का शुभारंभ हुआ था

➤ 1951 में

195. भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के क्रियान्वयन का दायित्व होता है

➤ केन्द्र और राज्य सरकार पर

196. राष्ट्रीय योजना समिति की स्थापना हुई थी

➤ 1938 में

197. राष्ट्रीय योजना समिति के अध्यक्ष थे

➤ जवाहर लाल नेहरू

198. राष्ट्रीय योजना समिति की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी

➤ 1949 में

199. भारत में पंचवर्षीय योजनाएँ प्रेरित है

➤ रूस से

200. प्रथम पंचवर्षीय योजना का काल था

➤ 1951-56

201. प्रथम पंचवर्षीय योजना आधारित थी

➤ हेरॉड डोमर मॉडल पर

202 प्रथम पंचवर्षीय योजना में प्राथमिकता (बल) दिया गया था

➤ कृषि को

203. द्वितीय पंचवर्षीय योजना का काल था

➤ 1956-1961

204. द्वितीय पंचवर्षीय योजना आधारित थी

➤ पी० सी० महालनोविस के मॉडल पर

205. द्वितीय पंचवर्षीय योजना में सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई

➤ भारी एवं आधारभूत उद्योगों पर

206. राउरकेला (उड़ीसा), भिलाई (छत्तीसगढ़) व दुर्गापुर (प० बंगाल) इस्पात कारखानों की स्थापना की गई

➤ दूसरी पंचवर्षीय योजना काल में

207. महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) प्रारंभ किया गया

➤ 2 अक्टूबर, 2009 को (‘नरेगा’ की जगह)

208. पंडित जवाहर लाल नेहरू ने ‘अधिक काम, अधिक उत्पादन एवं अधिक वितरण’ का नारा दिया था

➤ दूसरी पंचवर्षीय योजना में

209 भारत में व्यक्तिगत रूप से सहायता राशि प्रदान करने वाले कौन राष्ट्र है

➤ जापान

210. तीसरी पंचवर्षीय योजना का काल था

➤ 1961-66

211. तृतीय पंचवर्षीय योजना आधारित थी

➤ डोमर संवृद्धि मॉडल पर

212. तृतीय पंचवर्षीय योजना में सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई

➤ अर्थव्यवस्था को स्वावलम्बी एवं स्व स्फूर्त बनाने को

213. अबतक की सबसे असफल योजना थी

➤ तृतीय पंचवर्षीय योजना

214. तृतीय पंचवर्षीय योजना का विकास दर लक्ष्य एवं प्राप्ति दर लक्ष्य था

➤ क्रमशः 5.6% तथा 2.8%

215. तृतीय पंचवर्षीय योजना के असफलता का कारण था

➤ भारत-पाक युद्ध (1965), भारत-चीन युद्ध (1962) एवं भयंकर अकाल

216. भारत में तीन वार्षिक योजनाओं का काल था

➤ 1966-69

217. तीन वार्षिक योजनाओं को संज्ञा दी जाती है

➤ योजना अवकाश की

218. हरित क्रांति की शुरूआत हुई थी

➤ योजना अवकाश के समय (1966-67 में)

219. चतुर्थ योजना का काल था

➤ 1969-74

220. चतुर्थ योजना की रूपरेखा तैयार की थी

➤ डी. आर गॉडगिल ने

221. गॉडगिल योजना के नाम से जाना जाता है

➤ चतुर्थ योजना को

222. चतुर्थ योजना का मुख्य उद्देश्य था

➤ स्थिरता के साथ विकास

223. पाँचवी योजना का काल था

➤ 1974-79

224. पाँचवी योजना की रूपरेखा तैयार की थी

➤ डी० पी० धर ने

225. पाँचवी योजना का मुख्य उद्देश्य था

➤ गरीबी का उन्मूलन एवं आत्मनिर्भरता

226. एक वर्ष पूर्व में ही समाप्त योजना थी

➤ पाँचवी पंचवर्षीय योजना

227. ‘इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया था

➤ पाँचवी योजना काल में

228. ‘काम के बदले अनाज’ कार्यक्रम शुरू हुआ था

➤ पाँचवी योजना काल में

229. 1974 में राष्ट्रीय न्यूनत्तम आवश्यकता कार्यक्रम (NMNP) लागू हुआ था

➤ पाँचवी योजना काल में

230. ‘अनवरत योजना’ (रौलिंग प्लान) का काल था

➤ 1978-80

231. ‘अनवरत योजना’ देन है

➤ गुन्नार मिर्डल की

232. ‘अनवरत योजना’ के प्रतिपादक थे

➤ रेगनर फ्रिश

233. ‘अनवरत योजना’ आधारित थी

➤ गांधीवादी मॉडल पर 

234. छठी योजना का काल था

➤ 1980-85

235. नाबार्ड की स्थापना हुई थी

➤ छठी योजना काल में

236. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना प्रारंभ हुई थी

➤ छठी योजना काल में

237. सातवीं योजना का काल था

➤ 1985-90

238. सातवीं योजना की रूपरेखा तैयार की थी

➤ रामकृष्ण हेंगर ने

239. इंदिरा आवास योजना (1985-86) तथा जवाहर रोजगार योजना (28 अप्रैल, 1989) का प्रारंभ हुआ था

➤ सातवीं योजना काल में

240. अद्यौगिक क्रांति सर्वप्रथम हुई थी

➤ इंगलैंड में

241. नेहरू रोजगार योजना (अक्टूबर, 1989) प्रारंभ हुआ था

➤ सातवीं योजना काल में

242. आठवीं योजना का काल था

➤ 1992-97

243. आठवीं योजना की रूपरेखा तैयार की थी

➤ प्रणव मुखर्जी ने

244. आठवीं योजना का मुख्य उद्देश्य था

➤ मानव संसाधन का विकास

245. अबतक को सर्वाधिक सफल योजना थी

➤ आठवीं पंचवर्षीय योजना

246. आठवीं पंचवर्षीय योजना का विकास दर लक्ष्य एवं प्राप्ति दर लक्ष्य था 

➤ क्रमश: 5.6% तथा 6.8%

247. महिला संवृद्धि योजना (MSY) तथा रोजगार बीमा योजना (RIY) का प्रारंभ हुआ

➤ 8वीं योजना काल में

248. प्रधानमंत्री रोजगार योजना (15 अगस्त, 1993) की शुरूआत हुई थी

➤ आठवीं योजना काल में

249. नौवीं पंचवर्षीय योजना का काल था

➤ 1997-2002

250. नौवीं योजना का मुख्य उद्देश्य था

➤ सामाजिक न्याय और समानता के साथ आर्थिक संवृद्धि

251. दसवीं योजना का काल था

➤ 2002-2007

252. सर्वाधिक विकास दर वाला योजना है

➤ दसवीं योजना

253. दसवीं योजना का विकास दर लक्ष्य एवं प्राप्ति लक्ष्य था

➤ क्रमशः 8% तथा 7.6%

254. वर्तमान में कार्यरत योजना है

➤ 11 वीं पंचवर्षीय योजना

255. 11वीं पंचवर्षीय योजना का काल है

➤ 2007-2012

256. 11 वीं पंचवर्षीय योजना का मुख्य लक्ष्य है

➤ आर्थिक संवृद्धि दर को बढ़ाना

257. 11वीं योजना में वार्षिक वृद्धि दर निर्धारित है

➤ 9%

258. 12वीं पंचवर्षीय योजना की अवधि है

➤ 2012-17 (विकास दर लक्ष्य-9%)

259. भारतीय मौद्रिक व्यवस्था की इकाई है

➤ रुपया

260. RBI के मौद्रिक नीति का नाम है

➤ नीतिगत दस्तावेज

261. मौद्रिक नीति की घोषणा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की जाती है

➤ प्रति छह माह के लिए

262. रुपये को पहली बार ढाला गया था

➤ 1542 ई० में (शेरशाह सूरी के शासनकाल में)

263. भारत में सर्वप्रथम पत्र मुद्रा का चलन हुआ

➤ 1542 में

264. भारत में सर्वप्रथम कागजी मुद्रा (करेंसी) का प्रचलन हुआ था

➤ 1862 में

265. भारत में दशमलव मुद्रा प्रणाली प्रारंभ हुई थी

➤ 1 अप्रैल, 1957 से

266. मुद्रा अवमूल्यन का उद्देश्य होता है

➤ निर्यात को बढ़ावा तथा आयात को कम करना

267. अन्य मुद्रा की तुलना में स्वदेशी मुद्रा के मूल्य को घटना क्या कहलाता है

➤ अवमूल्यन

268. भारतीय मुद्रा का अवमूल्यन हुआ है

➤ तीन बार (1949, 1966 तथा 1991 में)

269. भारत में सिक्कों के चार टक्साले है

मुम्बई (1830), कोलकाता (1950), हैदराबाद (1903) तथा नोएडा (1989) में

270. देश में करेंसी (कागजी) नोटों का मुद्रण होता है

➤ करेंसी नोट प्रेस (नासिक, महाराष्ट्र) में

271. 20, 50, 100, 500 मूल्य वर्ग के नोट छापती है 

➤ बैंक नोट प्रेस (देवास, मध्य प्रदेश)

272. बैंक और करेंसी नोट कागज तथा नॉन-ज्यूडिसियल स्टाम्प पेपर की छपाई होती है

➤ सिक्यूरिटी पेपर मिल, होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) में

273. एक रुपये के नोट और उससे कम राशि के करेंसी सिक्के जारी किए जाते है

➤ वित्त मंत्रालय द्वारा

274. एक रुपये से अधिक के नोट और सिक्के जारी करता है

➤ भारतीय रिजर्व बैंक

275. एक रुपये नोट पर हस्ताक्षर होता है

➤ वित्त सचिव का

276. एक रुपये से अधिक के सभी नोटों पर हस्ताक्षर होता है

➤ भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का

277. वर्तमान के नोट निर्गमन हेतु अपनायी जाने वाली प्रणाली है

➤ न्युनत्तम कोष प्रणाली

278. नोट निर्गमन की न्यूनतम कोष प्रणाली अपनाया गया था

➤ अक्टूबर, 1956 में

279. ‘ग्रेशम का नियम’ संबंधित है

➤ मुद्रा प्रचलन से

280. ‘प्लास्टिक मनी’ कहा जाता है

➤ क्रेडिट कार्ड को

281. मुद्रा स्फीति एक स्थिति है

➤ जिसमें वस्तुओं की कीमत बढ़ती और मुद्रा का मूल्य गिरता है

282. मुद्रा स्फीति से हानि होता है

➤ देनदार को

283. मुझ स्फीति से लाभ होता है

➤ ऋणी (लेनदार) को

284. भारत में मुद्रा स्फीति की माप की जाती है

➤ थोक मूल्य सूचकांक (WPI) द्वारा

285. वर्तमान में थोक मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष है

➤ 2004-05

286. नया थोक मूल्य सूचकांक में शामिल वस्तुओं की संख्या है

➤ 1224 (पहले-435 वस्तुएँ)

287. मुद्रा-अवस्फीति वह स्थिति है

➤ जिसमें वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य घटता है तथा मुद्रा का मूल्य बढ़ता है

288. वह मुद्रा जिसमें शीघ्र पलायन कर जाने की प्रवृत्ति होती है कहलाती है

➤ हॉट मनी

289. रूपये को चालू खातों में पूर्ण परिवर्तनीय घोषित किया गया

➤ 19 अगस्त, 1994 को

290. यूरो मुद्रा का प्रारंभ 12 देशों में प्रारंभ हुआ था

➤ 1 जनवरी, 1999 में

291. वर्तमान में यूरो मुद्रा को अपनाने वाले राष्ट्रों की संख्या है

➤ 20

292. भारत में विदेशी मुद्रा का सर्वाधिक व्यय होता है

➤ पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर

293. भारत को सर्वाधिक विदेशी मुद्रा प्राप्त होता है

➤ रत्न एवं आभूषण से

294. विश्व में सबसे अधिक विदेशी मुद्रा कोष है

➤ चीन के पास

295. सबसे महँगी मुद्रा है

➤ पाउंड स्टर्लिंग

296. भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सदस्यता प्राप्त की थी

➤ 1947 में

297. भारतीय रूपये के नया पहचान चिह्न है

298. नये पहचान चिह्न ‘‘ का डिजाईन तैयार किया था

➤ आई आई टी० मुम्बई के डी उदय कुमार ने 

299. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मुद्रा विनिमय दर निश्चित की जाती है

➤ मुद्रा की आपूर्ति और माँग द्वारा 

300. सरकारी क्षेत्रों में सरकारी हिस्सेदारी कम करना कहलाता है

➤ विनिवेश 

301. विदेशी मुद्रा विनिमय का अवैध कारोबार कहलाती है

➤ हवाला

302. मुद्रा का कार्य है

➤ मूल्य का मापन, मूल्य का हस्तान्तरण एवं मूल्य का संचय 

303. ‘मुद्रा स्वयं मुद्रा निर्माण करती है’ यह कथन है

➤ क्रोउमर की

304. ऐसी विदेशी मुद्रा जिसमें शीघ्र पलायन कर जाने की प्रवृत्ति हो, वह कहलाती है

➤ गर्म मुद्रा 

305. वह मुद्रा जिसकी आपूर्ति माँग की अपेक्षा कम हो, कहलाती है

➤ हार्ड करेंसी 

306. वह मुद्रा जिसकी आपूर्ति माँग की अपेक्षा अधिक हो, कहलाती है

➤ सॉफ्ट करेंसी 

307. विकसित देशों की मुद्रा प्रायः होती है

➤ हार्ड करेन्सी 

308. सरकार द्वारा पुरानी मुद्रा को समाप्त कर नई मुद्रा चलाना कहलाता है

➤ विमुद्रीकरण

309. लगातार बढ़‌ती कीमतों की प्रक्रिया होती है

➤ मुद्रा स्फीति

310. मुद्रा आपूर्ति को सर्वाधिक तरल माप क्या है

➤ M1

311. किस संघटक को मुद्रा पूर्ति में विस्तृत मुद्रा कहा जाता है

➤ M3

312. मुद्रा पूर्ति का M, संघटक प्राप्त करने के लिए किस संघटक में बैंकों को समय जमा राशि को जोड़ा जाता है

➤ M1 को

313. फेरा (FERA) का मुख्य उद्देश्य था

➤ विदेशी मुद्राओं का संरक्षण करना

314. मुद्रा पूर्ति का M. संघटक प्राप्त करने के लिए M, में जोड़ी जाती है

➤ डाकघरों की कुल जमा राशि

315. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुद्रा आपूर्ति के संघटकों में M1 से M2 तक जाने पर तरलता की मात्रा

➤ घटती है

316. मुम्बई शेयर बाजार की कम्यूटरीकृत ऑन लाइन ट्रेडिंग प्रणाली कहलाता है

बोल्ट (BOLT)

317. ‘गिल्ट एन्ड बाजार’ सम्बधित है

सोना-चाँदी/सर्राफा से

318. किस बजट में भारतीय मुद्रा को पूर्ण परिवर्तनीय बनाया गया

1993-94 के केन्द्रीय बजट में

319. भारत में करेंसी नोट जारी कौन करता है

भारतीय रिजर्व बैंक

320. भारत में विदेशी संचय का प्रतिरक्षक कौन हैं

भारतीय रिजर्व बैंक

321. भारत में नोट जारी करने की कौन-सी प्रणाली अपनायी जाती है

न्यूनतम कोष प्रणाली

322. प्रत्यक्ष कर है

आयकर, सम्पति कर, निगय कर, मृत्यु कर, भू-राजस्व कर, उपहार कर

323. अप्रत्यक्ष कर है

बिक्री कर, तट कर, उत्पाद कर, सीमा शुल्क

324. केन्द्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला कर है

आयकर, निगम कर, सम्पत्ति कर, धन कर, उपहार सीमा शुल्क, कृषि धन पर कर

325. राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला कर है

भू-राजस्व कर, कृषि आयकर, बिक्री कर, मनोरंजन कर, पथ कर, मोटर वाहन कर

326. कर ढाँचे में सुधार के लिए गठित समिति थी

चेलैया समिति

327. चेलैया समिति का गठन हुआ था

अगस्त, 1991 में

328. केन्द्र सरकार की आय का बड़ा स्रोत है

निगम कर (प्रत्यक्ष कर)

329. राज्य सरकार को सबसे अधिक आय प्राप्त होता है

बैट से (पहले-बिक्री कर)

330. केन्द्र को सर्वाधिक निवल (Net) राजस्व की प्राप्ती होती है

सीमा शूल्क से

331. राष्ट्रीय सूचकांक का आधार वर्ष है

1983-84

332. पहली बार सेवा कर का आरोपण किया गया

1994-95 में (चेलैया समिति की संतुति पर)

333. संवेदी सूचकांक का आधार वर्ष है

1978-79

334. प्रत्यक्ष कर संहिता लोक सभा में प्रस्तुत हुआ

20 अगस्त, 2010 को

335. नया प्रत्यक्ष कर संहिता स्थान ग्रहण करेगा

1961 के आयकर अधिनियम का

336. मुम्बई शेयर बाजार के 100 शेयरों का सूचकांक कहलाता है

राष्ट्रीय सूचकांक

337. सर्विस टैक्स की उगाही करता है

आयकर विभाग

338. ‘रेखा समिति’ गठित की गयी थी

अप्रत्यक्ष कर सुधार के लिए

339. ‘वांचू समिति’ किससे सम्बंधित थी

प्रत्यक्ष कर जाँच से

340. ‘घोष समिति’ किससे सम्बंधित थी

बैंको में धोखाधड़ी रोकने के उपाय

341. शेयरों एवं अन्य प्रतिभूतियों की खरीद बिक्री का केन्द्र कहलाता है

स्टॉक एक्सचेंज या पूँजी बाजार

342. राष्ट्रीय शेयर बाजार (NSE) की संस्तुति की थी

फेरवानी समिति ने (1991 में)

343. राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना हुई थी

1992 में (IDBI द्वारा)

344. राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रमुख प्रवर्तक है

IDBI

345. NSE की प्रारंभिक अधिकृत पूँजी थी

25 करोड़ रु

346. राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज का मुख्यालय है

दक्षिण मुम्बई में वर्ली में

347. एशिया का सबसे बड़ा एवं भारत का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज

348. BSE का अन्य नाम है

दलाल स्ट्रीट

349. बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की स्थापना हुई थी

1875 में

350. BSE को Public Ltd. Company बना दिया गया

19 अगस्त, 2005 को

351. BSE का प्रमुख सूचकांक (Index) है

सेन्सेक्स (SENSEX)

352. सेंसेक्स (SENSEX) सूचकांक की रचना की गई थी

1986 में

353. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का नाम मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज (MSE) किया गया

2005 में

354. मुम्बई शेयर बाजार के 30 शेयरों का सूचकांक कहलाता है

संवेदी सूचकांक (SENSEX)

355. मुम्बई शेयर बाजार के 50 शेयरों का सूचकांक कहलाता है

निफ्टी (NIFTY)

356. मुम्बई शेयर बाजार के 100 शेयरों का सूचकांक कहलाता है

राष्ट्रीय सूचकांक

357. संवेदी सूचकांक का आधार वर्ष है

➤ 1978-79

358. राष्ट्रीय सूचकांक का आधार वर्ष है

1983-84

359. मुम्बई शेयर बाजार की कम्यूटरीकृत ऑन लाइन ट्रेडिंग प्रणाली कहलाता है

बोल्ट (BOLT)

360. सेंसेक्स (SENSEX) तथा डॉलेक्स (DOLEX) शेयर मूल्य सूचकांक है

मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज का

361. बलाल स्ट्रीट स्थित है

मुम्बई में

362. वर्तमान में भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज की संख्या है

23

363. मंदरिया (Bear) व तेजड़िया (Bull) शब्दावली संबंधित है

शेयर बाजार से

364. न्यूयार्क में स्थित स्टॉक एक्सचेंज है

वाल स्ट्रीट

365. भारतीय पूंजी बाजार की नियामक संस्था है

सेबी (SEBI)

366. सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) की स्थापना हुई थी

22 अप्रैल, 1988 को

367. सेबी (SEBI-Securities Exchange Board of India) संस्था है

गैर-संवैधानिक

368. सेबी (SEBI) को वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया

30 जनवरी 1992 को

369. सेबी के अध्यक्ष का कार्यकाल होता है

3 वर्ष का

370. देश के स्टॉक एक्सचेंज को नियमित रखता है

सेबी

371. भारतीय पूंजी बाजार को विनियमित करता है

सेबी

372. सेबी के सदस्य संख्या होती है

6

373. सेबी का मुख्यालय है

मुम्बई में

374. सेबी का क्षेत्रीय कार्यालय स्थित है

कोलकाता, दिल्ली तथा चेन्नई में

375. शेयर घोटालों की जाँच हेतु गठन किया गया समिति था

जानकी रमन समिति (RBI द्वारा अप्रैल 1992 में)

376. किसी शेयर को मान्यता प्रदान करता है

सेबी

377. बाजार के नियम के प्रस्तुतकर्ता थे

जे० बी० से

378. विश्व का सबसे पहला संगठित शेयर बाजार स्थापित हुआ था

1602 ई. में एम्सटर्डम नीदरलैण्ड में

379. शेयर बाजार पर नियंत्रण किया जाता है

सेबी द्वारा

380 ‘फेमा’ (FEMA) का मुख्य उद्देश्य है

विदेशी विनिमय का ‘प्रबंधन’ न कि नियंत्रण

381. ‘फेमा’ लागू किया गया

2000 ई. में फेरा (FERA) की जगह

382. भारत की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड संस्था है

UTI (भारतीय यूनिट ट्रस्ट)

283. UTI (भारतीय यूनिट ट्रस्ट) संबंधित है

म्युचुअल फंड से

384. भारत में म्यूचुअल फंड व्यवस्था आरंभ हुआ

UTI (भारतीय यूनिट ट्रस्ट) द्वारा 1964 में

385. UTI (भारतीय यूनिट ट्रस्ट) की स्थापना हुई थी

1 जनवरी 1964 को

386. UTI (भारतीय यूनिट ट्रस्ट) आधारित है

अमेरिकन पद्धति पर

387. UTI (भारतीय यूनिट ट्रस्ट) का पहला Open ended म्युचुअल फंड था

US-64

388. UTI (भारतीय यूनिट ट्रस्ट) का मुख्यालय है

मुम्बई में

389. ‘वी नो इडिया बेटर’ विज्ञापन पंक्ति है

UTI का

390. RBI के माध्यम से क्रय-विक्रय की जानी वाली प्रतिभूतियाँ का मूल्य स्थिर रहता है

गिल्ट एज बाजार में

391. ‘नास्डैक’ है

अमेरिकी शेयर बाजार

392. सहकारिता को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करनेवाला भारत का राज्य है

आंध्र प्रदेश

393. शेयर घोटालों की जाँच हेतु गठित समिति थी

जानकी रमन समिति

394. शेयर होल्डरों की स्टॉक पर हुई कमाई को कहते है

लाभांश

395. इंडिया ब्रैण्ड इक्विटी फंड की स्थापना हुई थी

1996 में

396. OTCEI क्या है

भारत का एक शेयर बाजार 

397. न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज का शेयर बाजार सूचकांक कहलाता है

डो-जोन्स

398. टोकियो स्टॉक एक्सचेंज का शेयर मूल सूचकांक कहलाता है

निक्की

399. लंदन स्थित स्टॉक एक्सचेंज का नाम है

FTSE 100

400. ‘बजट’ का अर्थ होता है

चमड़े का थैला

401. बजट शब्द लिया गया है

फ्रांस से (1803 में)

402. बजट का प्रारंभ माना जाता है

इंगलैंड में

403. बजट विषय है

समवर्ती सूची में

404. बजट पेश होता है

लोकसभा में

405. आम बजट / केन्द्रीय बजट को पेश करता है

वित्तमंत्री

406. आम बजट की रचना का दायित्व होता है

वित्त मंत्रालय पर

407. आम बजट विभाजित होता है

109 माँगों में (103 लोक व्यय से तथा 6 सुरक्षा व्यय से)

408. भारतीय बजट को कहा जाता है

मॉनसून का जुआ।

409. बजट पूर्व आर्थिक समीक्षा पेश की जाती है

केवल लोकसभा में

410. रेल बजट को पेश करता है

रेल मंत्री

411. रेल बजट को अलग से पेश करने की सिफारिश की थी

ऑकवर्थ समिति ने 1921 में

412. रेल बजट को मान्यता मिली थी

1924-25 में

413. स्वतंत्र भारत का पहला बजट पेश किया था

आरु के षणमुखम् शेट्टी ने (26 नवम्बर, 1947 को)

414. गणतंत्र भारत का पहला बजट पेश करने का गौरव प्राप्त हुआ

जॉन मथाई को (1950 में)

415. भारत में सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने वाले व्यक्ति थे

मोरारजी देसाई (10 बार)

416. आउट कम बजट को पहली बार प्रस्तुत किया था

पी. चिदम्बरम ने (25 अगस्त, 2005 को)

417. शून्य आधारित बजट का अर्थ है

हर बार बिल्कूल नये सिरे से बजट तैयार करना

418. शून्य आधारित बजट की भारत में शुरूआत हुई थी

1989 से

419. शून्य आधारित बजट के प्रतिपादक थे

रॉबर्ट पियरे

420. भारत में सर्वप्रथम किस राज्य में शून्य आधारित बजट तकनीक को अपनाया गया

आंध्र प्रदेश

421. ‘बजट’ शब्द के बदले संविधान में उल्लेख है

वार्षिक वित्तीय विवरण का

422. सविधान का वह अनुच्छेद जो ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ तैयार करने का उल्लेख करता है

अनुच्छेद-112

423. VAT (मूल्य वर्द्धित कर) की संस्तुति की थी

1976 में लक्ष्मी झा की अध्यक्षता में गठित समिति ने

424. VAT के प्रणेता थे

मौरिस लारे (अर्थशास्त्री)

425. VAT है

एक अप्रत्यक्ष कर

426. विश्व में VAT को सर्वप्रथम अपनाने वाला देश है

फ्रांस (1954 में)

427. सबसे अधिक आयात की जाने वाली वस्तु है

➤ पेट्रोलियम पदार्थ

428. भारत में विदेशी निवेश करने वाले प्रथम देश कौन है

मॉरिशस

429. VAT लागू करने वाला भारत का पहला राज्य है

हरियाणा

430. VAT लागू करने वाला भारत का अंतिम राज्य है

उत्तर प्रदेश

431. गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (GST) को लागू करने का प्रस्ताव है

1 अप्रैल 2014 से (115वाँ संविधान संशोधन कर)

432. भारत में मॉडवेट (MODVAT) योजना कब लागू हुई

1 मार्च, 1986 से

433. मॉडवेट का सम्बंध है

सम्पति कर से

434. बजट घाटे से तात्पर्य है

सभी प्राप्तियों व खर्च का अन्तर

435. आजादी के बाद भारत में औद्योगिक नीति संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया

1948 में

436. देश में महारत्न तथा नवरत्न दर्जा प्राप्त कम्पनियों की संख्या है

क्रमश: 13 तथा 14

437. पहला महारत्न घोषित पाँच कम्पनीयाँ है

ONGC, NTPC, SAIL, IOC, CIL

438. आबिद हुसैन समिति का संबंध है

लघु उद्योग सुधार से

439. लघु उद्योग विकास संगठन की स्थापना की गई थी

1954 में

440. भारत का सबसे पुराना उद्योग है

सूती वस्त्र उद्योग

441. भारत का सर्वाधिक पूँजी निवेश वाला उद्योग है

लौह इस्पात उद्योग

442. भारत का सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाला उद्योग है

सूती वस्त्र उद्योग

443. शुद्ध विदेशी मुद्रा उपार्जन में सर्वाधिक योगदान है

कपड़ा उद्योग का

444. विश्व का सबसे बड़ा निर्यात उद्योग है

पर्यटन

445. भारत पर्यटन विकास निगम की स्थापना हुई थी

1 अक्टूबर, 1966

448. भारत में पहला जल-विद्युत शक्ति गृह प्रारंभ हुआ था

1897 में

447. जिला उद्योग केन्द्रों की स्थापना की गई थी

1977 में

448. भारतीय औद्योगिक वित्त निगम (IFCI) की स्थापना हुई थी

1 जुलाई, 1948 को

449. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की स्थापना हुई थी

27 दिसम्बर, 1945 को

450. वर्तमान में IMF की कुल सदस्य संख्या है

190

451. IMF का मुख्य कार्य है

राष्ट्रों के मध्य वित्तीय और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना

452. IBRD अर्थात् पुनर्निर्माण एवं विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बैंक की स्थापना हुई थी

1945 में

453. IBRD अन्य नाम है

विश्व बैंक का

454. वर्तमान में ‘विश्व बैंक’ की सदस्य देशों की संख्या है

189

455. भारत में ‘स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (SAIL) की स्थापना हुई थी

1974 ई. में

456. भारत में लौह इस्पात का सबसे बड़ा उत्पादक प्लाण्ट है

भिलाई इस्पात संयंत्र

457. ‘पूर्व का बोस्टन’ किस नगर को कहा जाता है

अहमदाबाद को

458. ‘सूती वस्त्रों की राजधानी’ किस नगर को कहा जाता है

मुम्बई को

459. ‘भारत का मैनचेस्टर’ कहते है

अहमदाबाद को

460. पंजाब में हौजरी उद्योग के लिए प्रसिद्ध है

लुधियाना

461. GATT (प्रशुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौता) की स्थापना हुआ था

1 जनवरी, 1947 को

462. GATT के मुख्य सिद्धांत थे

समान प्रशुल्क की नीति

463. WTO ने GATT का स्थान लिया

1 जनवरी, 1995 को

464. WTO का मुख्यालय है

जेनेवा में

465. WTO (विश्व व्यापार संगठन) के वर्तमान सदस्य संख्या है

WTO में 164 सदस्य (यूरोपीय संघ सहित) एवं 23 पर्यवेक्षक सरकारें (जैसे ईरान, इराक, भूटान, लीबिया आदि) हैं

466. फेमा (FEMA) को लागू किया गया

2000 ई. में (‘फेरा’ की जगह)

467. विश्व बैंक की आसान ऋण प्रदाता संस्था है

इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (IDA)

468. सत्यम समिति संबंधित है

वस्त्र नीति से

469. स्वर्णाभूषणों की गुणवता को सुनिश्चित करने के लिए ‘हॉलमार्क’ योजना प्रारंभ की गई

12 अप्रैल, 2002 से

470. भारत में पेटेंट अधिनियम सर्वप्रथम पारित किया गया था

1970 में

471. इलेक्ट्रॉनिक समान की गुणवता को प्रदर्शित करता है

ISI मार्क

472. ISI (Indian Standard Issue) का मुख्यालय है

दिल्ली में

473. ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ योजना प्रारंभ की गई

1998-99 में

474. कृषि वस्तुओं की गुणवता को प्रदर्शित करता है

एगमार्क 

475. केन्द्रीय एग्मार्क प्रयोगशाला है

नागपुर में

476. रूगमार्क प्रदान किया जाता है

बालश्श्रम के उन्मूलन के लिए

477. पर्यावरण मित्र उत्पाद जो पर्यावरण को हानि नहीं पहुँचाते को प्रदान किया जाता है

इकोमार्क

478. सर्वप्रथम इकोमार्क निर्धारित किए गए

साबून एवं डिटरजेंट के लिए

479. ट्रेडमार्क अधिनियम प्रभावी है

15 सितम्बर, 2003 से

480. ISI प्रमाणन जारी की गई थी

7 अप्रैल, 2003 को 

481. CRISIL (क्रिसिल) का पूर्ण रूप है

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी

482. जनगणना की तर्ज पर मृत्यु गणना करने वाला देश का पहला राज्य है

कर्नाटक

483. भारतीय मानक ब्यूरो (ISO) अस्तित्व में आया

6 जनवरी, 1947 को

484. ISO का मुख्यालय है

दिल्ली में

485. भारत में गठित पहली सहकारी समिति थी

साख समितियाँ

486. मीरा सेठ समिति का सम्बंध किससे था

हथकरघे के विकास से

487. ज्ञान प्रकाश समिति का सम्बंध था

चीनी घोटाले से

488. सुंदर राजन समिति का सम्बंध किससे है

पेट्रोलियम से

489. भगवती समिति किस कार्यक्षेत्र से जुड़ी थी

बेरोजगारी

490. हजारी समिति किस नीति से सम्बंधित थी

औद्योगिक नीति से

491. ‘सुपर-301’ सम्बंधित है

मुक्त व्यापार में अवरोध से

492. किस वर्ग के देशों के साथ भारत का सर्वाधिक आयात व्यापार है

OPEC

493. भारत के आयात का अधिकतम भाग कहाँ से आता है

ओपेक से

494. भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार देश है

संयुक्त राज्य अमेरिका

495. भारत द्वारा सबसे अधिक आयात होता है

चीन से

496. भारत द्वारा सबसे अधिक निर्यात होता है

अमेरिका को

497. सबसे अधिक निर्यात की जाने वाली वस्तु है

रत्न एवं आभूषण



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सामान्य भूगोल

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इतिहास

राजनीतिशास्त्र

अर्थशास्त्र

जीवविज्ञान

भौतिकशास्त्र

रसायनशास्त्र

7. Chemistry (रसायन विज्ञान)

7. Chemistry (रसायन विज्ञान)



1. रासायन विज्ञान का जनक कहा जाता है

⇒ लेवोजियर को 

2. परमाणु के तीन मौलिक कण है

⇒ इलेक्ट्रोन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन

3. परमाणु के नाभिक में होते है

⇒ प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन

4. एक ही तत्व के दो परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती है, कहलाते है

⇒ समस्थानिक (आइसोटोप)

5. एक ही तत्व के दो परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्याएँ समान होती है, कहलाते है

⇒ सम्भारिक (आइसोबार)

6. 1 मोल बराबर होता है

⇒ 6.023×1023

7. द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG) का प्रमुख संघटक है

⇒ नॉर्मल ब्यूटेन तथा आइसोब्यूटेन

8. शुष्क बर्फ कहलाता है

⇒ ठोस कार्बन डाईऑक्साइड

9. आतिशबाजी में हरा रंग तथा लाल रंग होता है

⇒ क्रमश: बेरियम (Ba) तथा स्ट्रॉन्शियम (Sc) के कारण

10. गोबर गैस तथा बायोगैस का प्रमुख घटक है

⇒ मीथेन (CH4)

11. लॉफिंग गैस कहलाता है

⇒ नाइट्रस ऑक्साइड

12. सोडावाटर बनाने के लिए प्रयोग की जाती है

⇒ CO2 गैस का

13. सभी गैसे शून्य आयतन घेरती है

⇒ -273ºC

14. आदर्श गैस की ऊर्जा आधारित होती है

⇒ तापमान पर

15. एक आवोगाद्रो संख्या का मान बराबर होता है

⇒ 6.023×1023 अणु

16. मार्श गैस कहलाता है

⇒ मिथेन

17. विद्युत बल्ब में प्रयुक्त होने वाली गैस हैं

⇒ आर्गन (Ar)

18. सामान्य ताप दाब (NTP) पर किसी गैस के एक मोल का आयतन होता है

⇒ 22.4 लीटर

19. वेल्डिंग उद्योग में ऑक्सीजन के साथ प्रयुक्त होता है

⇒ ऐसिटिलिन गैस

20. सिगरेट लाइटर से निकलती है

⇒ ब्यूटेन गैस

21. नोबेल (अक्रिय) गैस कहलाता है

⇒ He, Ne, Ar, Kr, Xe, और Rn

22. चूने के पानी को सफेद बनाता है

⇒ CO2

23. ग्रीन हाउस प्रभाव के लिए उत्तरदायी गैस है

⇒ कार्बन डाईऑक्साइड तथा क्लोरोफ्लोरो कार्बन 

24. अश्रु गैस का रासायनिक नाम है

⇒ क्लोरो-एसिटोफिनोन

25. सभी अम्लों में सबसे अधिक समान तत्व है

⇒ हाइड्रोजन

26. जल का शुद्ध रूप है

⇒ वर्षा का जल 

27. जल की अस्थायी कठोरता का कारण है

⇒ कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के बाईकार्बोनेट का घुले रहना

28. जल की स्थायी कठोरता का कारण है

कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के सल्फेट का घुले रहना 

29. जल की स्थायी तथा अस्थायी कठोरता दूर करने के लिए प्रयोग किया जाता है

⇒ सोडियम कार्बोनेट का 

30. भारी जल का आण्विक सूत्र तथा अणुभार होता है

⇒ क्रमशः D2O (ड्यूटीरियम ऑक्साइड) तथा 20

31. साधारण जल का आण्विक सूत्र तथा अणुभार होता है

⇒  क्रमश: H2O तथा 18

32. स्टील या लोहे पर जिंक का आलेप चढ़ाना कहलाता है

⇒ गैल्वेनाइजेशन

33. हैलोजनो में सर्वाधिक प्रभावशाली ऑक्सीकरणकर्त्ता है

⇒ फ्लोरीन

34. दूध उदाहरण है

⇒ इमल्सन (पायस) का 

35. कास्टिक सोटा का रासायनिक सूत्र है

⇒  NaOH (सोडियम हाइड्रॉक्साइड)

36. जल में सबसे कम घुलनशील गैस है

⇒ N2 (नाइट्रोजन)

37. ‘प्लास्टर ऑफ पेरिस’ का रासायनिक सूत्र होता है

⇒ CaSO4.½H2O

38. जिप्सम का रासायनिक नाम है

⇒ कैल्सियम सल्फेट (CaSO4.2H2O)

39. बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम होता है

⇒ सोडियम बाईकार्बोनेट (NaHCO3)

40. ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) का रासायनिक नाम है

⇒ कैल्सियम हाइपोक्लोराइड (CaOCl2)

41. दियासलाई के निर्माण में प्रयुक्त मूल तत्व होता है

⇒ लाल फास्फोरस

42. वाशिंग सोडा का रासायनिक नाम है

⇒ सोडियम कार्बोने (NaCO3.10H2O)

43. समुद्री जल में सर्वाधिक पाया जाने वाला तत्व है

⇒ सोडियम क्लोराइड (NaCl)

44. सीसा संचायक बैटरी में प्रयुक्त किया जाता है

⇒ सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4)

45. नींबू स तथा दूध का pH मान होता है

⇒ क्रमश: 2.2 तथा 6.4

46. माचिस उद्योग में प्रयोग किए जाने वाला रासायन है

⇒ पोटैशियम क्लोराइड (KClO3)

47. ‘मिल्क ऑफ मैग्नीशिया’ कहते हैं

⇒ मैग्नीशियम हाइड्राक्साइड Mg(OH)2 को

48. बॉक्साइड, कोरंडम तथा क्रायोलाइट महत्त्वपूर्ण अयस्क है

⇒ ऐल्युमीनियम

48. जंग लगने पर लोहे का भार

⇒ बढ़ता है

50. ‘पीतल’ मिश्रधातु है

⇒ तांबा और जस्ता

51. सिनेबार (HgS) प्रमुख अयस्क होता है

⇒ पारा का

52. फ्यूज का तार तथा टाँका (सोल्डर) बना होता है

⇒ सीसा और टिन का

53. सर्वाधिक आघातवर्ध्य धातु होता है

⇒ सोना

54. काँसा (Bronze) मिश्रधातु है

⇒ कॉपर और टीन का

55. बेसेमर प्रक्रम से बनाया जाता है

⇒ इस्पात को

56. लोहे का शुद्धत्तम रूप है

⇒ पिटवाँ लोहा

57. कांच मिश्रण है

⇒ बालू और सिलिकेट का

58. मानव द्वारा निर्मित प्रथम संश्लिष्ट रेशा (Synthetic Fibres) था

⇒ नायलॉन

59. सबसे कठोरत्तम पदार्थ तथा धातु है

⇒ क्रमश: हीरा तथा प्लेटिनम

60. किसी घोल का pH मान 7 से कम, 7 के बराबर तथा 7 से अधिक हो तो वह घोल होगा

⇒ क्रमश: अम्लीय, उदासीन एवं क्षारीय

61. सोडियम को संचित कर रखा जाता है

⇒ मिट्टी के तेल में

62. ‘भविष्य का इंधन’ कहा जाता है

⇒ हाइड्रोजन को

63. पेंसिल का ‘सिक्का’ बना होता है

⇒ ग्रेफाइट का

64. टंगस्टन तथा हीरा का गलनांक बिंदु है

⇒ क्रमश: 3000 ºC तथा 3500 ºC

65. वायुयानों के टायरों तथा गुब्बारा में भरने के लिए प्रयुक्त गैस है

⇒ हीलियम

66. पोर्टलैण्ड सीमेंट का प्रमुख संघटक है

⇒ लाइम, सिलिका तथा ऐलुमिना

67. सूर्य की असीमित ऊर्जा का स्रोत है

⇒ नाभिकीय संलयन

68. प्राकृतिक रबर बहुलक है

⇒ आइसोप्रीन

69. पदार्थ की चौथी अवस्था होती है

⇒ प्लाजमा

70. फोटोग्राफी में फिक्सर के रूप में प्रयोग होता है

⇒ सोडियम थायोसल्फेट

71. हाइड्रोकार्बन के प्राकृतिक स्रोत है

⇒ कच्चा तेल

72 ओजोन परत के ह्रास के लिए उत्तरदायी गैस है

⇒ क्लोरो-फ्लुओरोकार्बन

73. पेट्रोलियम जटिल मिश्रण होता है

⇒ प्रोपेन और ब्यूटेन

74. एसिड (अम्ल) बदलता है

⇒ नीले लिटमस को लाल रंग में

75. क्षार बदलता है

⇒ लाल लिटमस को नीला रंग में

76. स्वर्ण घुल जाता है

⇒ एक्वा रेजिया में

77. सल्फर अणु का सही सूत्र होता है

⇒ S8

78. कार्बन का शुद्धत्तम रूप है

⇒ हीरा

79. सीसा, सोना तथा चाँदी तत्व का रासायनिक प्रतीक होता है

⇒ क्रमश: Pb, Au, तथा Ag

80. रासायनिक यौगिक का सबसे छोटा संभावी यूनिट है

⇒ अणु

81. किसी तत्व के परमाण्विक भार को व्यक्त किया जाता है

⇒ ए० एम० यू० (amu) में

82. तत्वों का सबसे पहले वर्गीकरण किया था

⇒ न्यूलैंड ने

83. वह सबसे छोटा कण जिसमें उस तत्व का सभी गुण विद्यमान होता है, कहलाता है

⇒ अणु

84. साधारण नमक का रासयनिक नाम होता है

⇒ सोडियम क्लोराइड

85. सम्पूर्ण परमाणु तथा परमाणु की नाभिकीय त्रिज्या होती है

⇒ क्रमश: 10-8 मी० तथा 10-12 मी०

86. क्वार्ट्ज का रासायनिक नाम है

⇒ सोडियम सिलीकेट (Na2SiO3)

87. अब तक कितने तत्व ज्ञात किए जा चुके है

⇒ 118

88. स्टेनलेस स्टील मिश्रण है

⇒ लोहा, निकिल तथा क्रोमियम का

89. सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है

⇒ फ्लोरिन

90. ‘सफेद स्वर्ण’ तथा ‘द्रव स्वर्ण’ कहा जाता है

⇒ क्रमश: प्लैटिनम तथा पेट्रोल को

91. डायनामाइट बनाने में प्रयोग किया जाता है

⇒ नाइट्रोग्लीसीरीन का

92. सर्वाधिक भारी धातु तथा सबसे हल्का धात्विक तत्व है

⇒ क्रमश: ओसमियम तथा लिथियम

93. शुद्ध सेलुलोज बनता है

⇒ कागज से

94. आग बुझाने के लिए प्रयोग किया जाता है

⇒ कार्बन डाईऑक्साइड का

95. ‘रोल्ड गोल्ड’ मिश्रण होता है

⇒ कॉपर (90%) तथा एल्युमीनियम (10%)

96. DDT का पूरा नाम है

⇒ डाईक्लोरो डाईफेनाइल ट्राईक्लोरोइथेन

97. भोपाल गैस कांड (3 दिसम्बर, 1984) में रिसाव हुआ था

⇒ मिथाइल आयिसोसाइनेट (मिक) गैस का

98. द्रव अवस्था में पाया जाने वाला धातु है

⇒ पारा

99. गन पाउडर मिश्रण होता है

⇒ सल्फर, चारकोल एवं शोरा का

100. रेफ्रीजरेटर में किसी वस्तु को ठंडा करने के लिए प्रयोग किया जाता है

⇒ अमोनिया गैस का

101. एल. पी. जी. (LPG) गैस में गंध के लिए मिलाया जाता है

⇒ मिथाइल मरकॉप्टेन (सल्फर के यौगिक)

102. सबसे उत्तम कोयला होता है

⇒ एंथ्रासाइट (96% कार्बन)

103. फोटोग्राफी में उपयोग होता है

⇒ सिल्वर ब्रोमाइड का

104. रासायनिक यौगिक का सबसे छोटा कण है

⇒ परमाणु

105. कच्चे फलों को कृत्रिम ढंग से पकाने के लिए प्रयुक्त गैस है

⇒ ऐसिटिलिन

106. हड्डियों और दाँतो में मुख्य रूप से पाया जाता है

⇒ कैल्सियम एवं फॉस्फेट

107. नाइक्रोम बना होता है

⇒ क्रोमियम, निकेल तथा लोहा का

108. तम्बाकू में विषैला पदार्थ होता है

⇒ निकोटिन

109. लोहा को इस्पात में बदलने के लिए उसमें मिलाया जाता है

⇒ निकेल

110. फलों के रसों को सुरक्षित रखने के प्रयोग किया जाता है

⇒ फार्मिक अम्ल का

111. फूलों का रंग उड़ा देती है

⇒ फ्लोरिन गैस

112. खाद्य पदार्थों के संरक्षण के लिए प्रयोग किया जाता है

⇒ बेंजोइक अम्ल का

113. इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन के आविष्कारक है

⇒ क्रमश: जे० जे० थॉमसन, गोल्ड स्टीन तथा जेम्स चैडवीक

114. पोजिट्रॉन तथा नाभिक की खोज की थी

⇒ क्रमश: एंडरसन तथा रदरफोर्ड

115. हाइड्रोजन, ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन के आविष्कारक थे

⇒ क्रमश: क्वेंडिश, प्रीसटले तथा रदरफोर्ड

116. हीलियम, आर्गन तथा थोरियम के आविष्कारक थे

⇒ क्रमश: लोकियर, रैम्जे तथा बर्जीलियस

117. एल्केन तथा एल्काईन का सामान्य सूत्र होता है

⇒ क्रमश: CnH2n+2 तथा CnH2n-2

118. जल का क्वथनांक होता है

⇒ 100 ºC या 212 ºF या 373 K

119. लोहा का निष्कर्षण किया जाता है

⇒ हेमेटाइट अयस्क से

120. लाल चिट्टियों तथा बिच्छू के डंक में होता है

⇒ फार्मिक अम्ल

121. खट्टे फलों तथा दूध में पाया जाने वाला अम्ल है

⇒ क्रमश: साइट्रिक अम्ल तथा लैटिक अम्ल

122. एसीटिक अम्ल तथा टारटेरिक अम्ल का प्राकृतिक स्रोत है

⇒ क्रमश: फलों के रस तथा इमली

123. घास तथा पत्ते में पाया जाता है

⇒ ऑक्जेलिक अम्ल

124. म्हो मापनी (Mho-Scale) का प्रयोग किया जाता है

⇒ धातुओं की कठोरता मापने के लिए

125. चाँदी की चमक को काला कर देता है

⇒ ओजोन गैस

126. सोने के आभूषण बनाते समय उसमें मिलाया जाता है

⇒ तांबा

127. यूरेनियम धातु का निष्कर्षण किया जाता है

⇒ पिच ब्लेंड से

128. प्रोड्यूसर गैस या वायु अंगार गैस मिश्रण होता है

⇒ नाइट्रोजन एवं कार्बन मोनोऑक्साइड

129. भाप अंगार गैस या जल गैस मिश्रण होता है

⇒ हाइड्रोजन एवं कार्बन मोनोऑक्साइड

130. इलेक्ट्रॉन त्याग तथा ग्रहण करने की प्रक्रिया कहलाती है

⇒ क्रमश: ऑक्सीकरण एवं अवकरण

131. नन स्टीक (Non-Stic) बर्तन के ऊपरी परत बना होता है

⇒ टेफलॉन का

132. लैम्पों तथा ट्यूबों  में भरी जाती है

⇒ नियॉन गैस

133. विद्युत का सबसे अच्छा चालक है

⇒ चाँदी

134. कृत्रिम वर्षा के लिए प्रयोग में लाया जाता है

⇒ सिल्वर आयोडाइड का

135. शुद्ध सोना होता है

⇒ 24 कैरेट का

136. अम्ल वर्षा के लिए उत्तरदायी गैस है

⇒ SO2 और NO2

137. प्राकृतिक रबर को कठोर बनाने के लिए उसमें मिलाया जाता है

⇒ कार्बन या सल्फर

138. लोहे के जंग लगने में उत्तरदायी होती है

⇒ ऑक्सीजन एवं नमी

139. फॉस्फोरस हवा में जल उठता है, इसी कारण इसे रखा जाता है

जल में डुबाकर

140. कृत्रिम सुगंधित पदार्थ (इत्र) बनाने में प्रयोग किया जाता है

⇒ एथिल एसीटेट का

141. बर्तनों में कलई करने में प्रयोग किया जाता है

⇒ अमोनियम क्लोराइड का

142. परम शून्य ताप का मान होता है

⇒ -273°C

143. प्रयोगशाला में बनाया गया पहला कार्बनिक पदार्थ है

⇒ यूरिया

144. गोबर गैस संयंत्र का निर्माण किया था

⇒ सी० बी० देसाई ने

145. आदर्श गैस समीकरण होता है

⇒ PV= nRT

146. एक पदार्थ का सीधे ठोस से वाष्प अवस्था में परिवर्तन कहलाता है

⇒ उर्ध्वपात

147. कपूर को शुद्ध किया जाता है

⇒ उर्ध्वपातन विधि द्वारा

148. द्रव्यमान का ऊर्जा में परिवर्तन होता है

आईस्टीन के समीकरण E = mc2 के अनुसार

149. यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा होती है

⇒ 47%

150. पृथ्वी पर पाए जाने वाले यूरेनियम में सर्वाधिक मात्रा में रहता है

⇒ U-238

151. ताँबा का निष्कर्षण किया जाता है

⇒ कॉपर पाइराइट्स अयस्क से

152. चश्में का लेंस बना होता है

⇒ कुक्स काँच का

153. सबसे हल्का तत्व है

⇒ हाइड्रोजन

154. लाल फास्फोरस तथा श्वेत फास्फोरस का अणु सूत्र होता है

⇒ क्रमश: P2 तथा P4

155. टेप रिकार्डर की टेप लेपित रहती है

⇒ पैरामैग्नेटिक चूर्ण से

156. सल्फ्यूरिक अम्ल का प्राकृतिक स्रोत है

⇒ हरा कसीस

157. ब्रेड को मुलायम तथा लचीला बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है

⇒ ‘यीस्ट’ का

158. ‘फ्रीऑन’ का रासायनिक नाम है

⇒ क्लोरो फ्लोरो कार्बन

159. हवा का वाष्प घनत्व होता है

⇒ 14.4

160. आर. डी. एक्स. का पूर्ण रूप है

⇒ रिसर्च डवलप्ड एक्सप्लोसिव

161. पृथ्वी की आयु का आकलन किया जाता है

⇒ यूरेनियम डेंटिंग से

162. नाइट्रिक अम्ल पाया जाता है

⇒ फिटकिरी एवं शोरा में

163. कार्बोनिक अम्ल पाया जाता है

⇒ सोडावाटर एवं अनय पेय में

164. यूरिया का रासायनिक नाम है

⇒ कार्बामाइड (CO(NH2)2)

165. लाल सिंदूर का रासायनिक नाम है

⇒ लेड परऑक्साइड (Pb3O4)

166. रेफ्रीजरेटर के आविष्कारक है

⇒ जेम्स हैरीसन

167. क्वाण्टम सिद्धांत की खोज की थी

⇒ मैक्स प्लांक ने

168. इस्पात की कठोरता निर्भर करती है

⇒ उसमें उपस्थित कार्बन की मात्रा पर

169. सड़ी मछली जैसी गंध होती है

⇒ ओजोन से

170. पनीर (Cheese) बनाने में प्रयोग होने वाला किण्वक है

⇒ रेनिन

171. प्रकृति में सर्वदा मुक्त अवस्था में पाई जाने वाली धातु है

⇒ सोना

172. पॉलीथीन प्राप्त होता है

⇒ एथिलीन के बहुलीकरण से

173. गोताखोरे सांस लेते है

⇒ ऑक्सीजन तथा हीलियम गैसों के मिश्रण से


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6. Physics (भौतिक विज्ञान)

6. Physics (भौतिक विज्ञान)



1. प्रकाश वर्ष मात्रक है

⇒ दूरी का

2. एक प्रकाश वर्ष बराबर होता है

⇒ 9.46×1015 मी० या 9.46×1012किमी०

3. दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई है

⇒ पारसेक

4. 1 पारसेक बराबर होता है

⇒ 3.26 प्रकाश वर्ष या 3×1016मी०

5. 1 पीको सेकेण्ड बराबर होता है

⇒ 10-12 सेकेण्ड

6. ठोस कोण की इकाई होता है

⇒ स्टेरेडियन

7. एक माइक्रोन बराबर होता है

⇒ ०.001 मिमी०

8. एक अश्वशक्ति बराबर होता है

⇒ 746 वाट

9. ताप का SI तथा CGS मात्रक होता है

⇒ क्रमशः केल्विन तथा सेल्सियस

10. दाब की विमा होती है

⇒ [ML-1T-2]

11. बल का SI मात्रक तथा CGS मात्रक होता है

⇒ क्रमश: न्यूटन (N) तथा डाईन

12. एक बार बराबर होता है

⇒ 105 पास्कल

13. 1 न्यूटन बराबर होता है

⇒ 105 डाईन

14. बल, विस्थापन, त्वरण, वेग, संवेग, भार तथा बल आघूर्ण राशियाँ है

⇒ सदिश राशियाँ

15. क्षेत्रफल, आयतन, लम्बाई, मात्रा दूरी, कार्य, ऊर्जा तथा दबाव राशियाँ है

⇒ अदिश राशियाँ

16. एंगस्ट्रम इकाई है

⇒ लम्बाई का

17. कोणीय वेग की इकाई है

⇒ रेडियन/सेकेण्ड

18. 1 ऐंग्स्ट्रम (1A°) बराबर होता है

⇒ 10-10मी०

19. पृष्ठ तनाव, पृष्ठीय ऊर्जा तथा बल प्रवणता की विमा होती है

⇒ [M1L0T-2]

20. ऊपर फेंकी जाने वाली वस्तु का त्वरण होता है

⇒ ऋणात्मक

21. वेग तथा त्वरण का SI मात्रक होता है

⇒ क्रमश: मी०/से० तथा मी०/से०2

22. 1 kg राशि का वजन होता है

⇒ 9.8 N

23. एक वस्तु का भार अधिकत्तम होता है

⇒ वायु में

24. किसी पिंड के द्रव्यमान और वेग का गुणनफल होता है

⇒ संवेग

25. जड़त्व के नियम का प्रतिपादन किया था

⇒ गैलेलियो ने

26. गति का नियम दिया था

⇒ न्यूटन ने

27. रॉकेट का पलायन आधारित होता है

⇒ न्यूटन के तृतीय गति नियम पर

28. प्रक्षेप्य पथ होता है

⇒ परवलयाकार

29. गुरूत्वीय त्वरण (g) का मान बराबर होता है

⇒ 9.8 मी०/से०2 के

30. g का मान अधिकत्तम तथा न्यूनतम होता है

⇒ क्रमश: ध्रुवों तथा भूमध्य रेखा पर

31. ‘g’ का मान शून्य (0) होता है

⇒ पृथ्वी के केंद्र पर

32. भू-स्थिर उपग्रह का परिक्रमण काल होता है

⇒ 24 घंटा

33. भू-स्थिर उपग्रह स्थित होते है

⇒ 36000किमी०

34. पृथ्वी की अपेक्षा चन्द्रमा का द्रव्यमान लगभग होता है

⇒ 1/81

35. गुरुत्त्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का प्रतिपादन किया था

⇒  न्यूटन

36. पृथ्वी तल से ऊपर या नीचे आने पर गुरुत्वीय त्वरण का मान

⇒ घटता जाता है

37. पृथ्वी तथा सौरमंडल के लिए पलायन वेग का मान होता है

⇒ क्रमशः 11.2 किमी०/से० तथा 42 किमी०/से०

38. चन्द्रमा के लिए पलायन वेग का मान होता है

⇒ 2.37 किमी०/सेकंड

39. चन्द्रमा पर किसी पिण्ड का भार पृथ्वी पर उसके भार का होता है

⇒ 1/6 गुणा

40. यदि किसी मनुष्य का भार पृथ्वी पर 600 N हो, तो उसका चन्द्रमा पर भार होगा

⇒ 100N

41. कार्य तथा ऊर्जा का मात्रक होता है

⇒ जूल (J) या न्यूटन 

42. 1 जूल बराबर होता है

⇒ 107 अर्ग

43. खींचे हुए रब, खींचे हुए धनुष तथा खींची हुई कमानी में भंडारित होता है

⇒ स्थितज उर्जा

44. यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कता है

⇒ डायनेमो

45. विधुत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है

⇒ विद्युत मोटर

46. किसी वस्तु की चाल आधी कर दी जाये, तो उसकी गतिज ऊर्जा हो जायेगी

⇒ एक चौथाई

47. यदि किसी वस्तु की चाल दुगुनी कर दी जाये, तो उसकी गतिज ऊर्जा हो जायेगी

⇒ चार गुनी

48. वायुमंडलीय दाब का SI मात्रक होता है

⇒ बार (bar)

49. वायुमंडलीय दाब को मापा जाता है

⇒ बैरोमीटर से

50. आपेक्षिक घनत्व को मापा जाता है

⇒ हाइड्रोमीटर से

51. दाब बढ़ने पर बर्फ का गलनांक

⇒ घटता है

52. जल का घनत्व अधिकत्तम तथा आयतन न्यूनत्तम होता है

⇒ 4°C पर

53. बैरोमीटर का पाठ्यांक एकाएक नीचे गिरता प्रदर्शित करता है

⇒ आंधी-तूफान आने का

54. बैरोमीटर का पाठ्यांक धीरे-धीरे गिरना प्रदर्शित करता

⇒ वर्षा होने का

55, बैरामीटर का पाठ्यांक का धीरे-धीरे ऊपर चढ़ना प्रदर्शित करता है

⇒ दिन साफ रहने का

56. सेल्सियस एवं फारेनहाइट स्केल समान मान प्रदर्शित करता है

⇒ -40° ताप पर

57. वर्षा की छोटी-छोटी बूंदे गोल होती है

⇒ पृष्ठ तनाव के कारण

58. द्रव-बूँद को संकुचित होकर न्यूनतम क्षेत्र घेरने की प्रवृत्ति का कारण है-

⇒ पृष्ठ तनाव

59. सेकेंडी लोलक का आवर्तकाल होता है-

⇒ 2 सेकेण्ड

60. आवृत्ति और आवर्तकाल के गुणनफल का मान होता है

⇒ एक

61. ध्वनि की चाल अधिकत्तम तथा न्यूनत्तम होती है

⇒ क्रमशः ठोसों तथा गैसों में

62. ध्वनि तथा प्रकाश तरंगे होती है

⇒ क्रमश: अनुदैर्ध्य तथा अनुप्रस्थ तरंगे

63. ध्वनि का मात्रक होता है

⇒ डेसिबल

64. ध्वनि की चाल होती है

⇒ 760 मील/घंटा या 332 मी./से.०

65. किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक उष्मा की मात्रा को कहते है

⇒ विशिष्ट ऊष्मा

66. मानव शरीर का सामान्य ताप होता है

⇒ 37°C या 98.6°F या 310K

67. दो समान्तर दर्पण के बीच रखे वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता है

⇒ अनंत पर

68. कैण्डिला मात्रक है

⇒ ज्योति तीव्रता का

69. प्रकाश का रंग निश्चित किया जाता है

⇒ तरंगदैर्ध्य द्वारा

70. तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक तथा सबसे न्यूनत्तम मान होता है

⇒ क्रमशः लाल रंग तथा बैंगनी रंग का

71. निर्वात में रेडियो तरंग या प्रकाश तरंग की गति होती है

⇒ 3×108 मी./से.

72. प्रकाश की चाल को सबसे पहले ज्ञात की थी

⇒ रोमर ने

73. लेंस की क्षमता तथा प्रतिरोध का मात्रक होता है

⇒ क्रमश: डाईऑप्टर तथा ओम

74. आँख के रेटिना पर बना प्रतिबिम्ब होता है

⇒ वास्तविक और उल्टा

75. निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) को दूर करने में प्रयुक्त होता है

⇒ अवतल लेंस का

76. दीर्घ दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) को दूर करने के लिए प्रयुक्त होता है

⇒ उत्तल लेंस का

77. सामान्य आँख के लिए सुस्पष्ट दृष्टि की न्यूनत्तम दूरी होती है

⇒ 25 सेमी.

78. प्राथमिक रंग कहा जाता है

⇒ लाल, हरा तथा नीला रंग को

79. ‘इलेक्ट्रॉन-वोल्ट’ मात्रक होता है

⇒ ऊर्जा का

80. ट्रांसफार्मर का क्रोड बना होता है

⇒ नर्म लोहा का

81. अपवर्तनांक सबसे अधिक तथा सबसे कम होता है

⇒ क्रमशः बैंगनी तथा लाल रंग का

82. अंतरिक्ष यात्री को आकाश दिखाई देता है

⇒ काला

83. समुद्र की गहराई तथा समुद्र दूरी मापने का मात्रक है

⇒ क्रमश: फैदम तथा नॉटिकल मील

84. ‘हाइड्रोलिक ब्रेक’ आधारित होता है

⇒ पास्कल के नियम पर

85. विद्युत बल्ब का फिलामेन्ट बना होता है

⇒ टंगस्टन का

86. हीटर का तार बना होता है

⇒ नाइक्रोम का

87. फ्यूज तार का होता है

⇒ प्रतिरोध उच्च तथा ग्लनांक निम्न

88. कमरे में रखे रफ्रिजरेटर का दरवाजा खोल दिया जाए तो कमरे का ताप

⇒ बढ़ जायेगा

89 दूध से क्रीम को अलग करने पर दूध का घनत्व

⇒ बढ़ जाता है

90. प्रतिध्वनि सुनने के लिए श्रोता एवं परावर्तक सतह के बीच की दूरी होनी चाहिए

⇒ 17 मी०

91. कान पर ध्वनि का प्रभाव रहता है

⇒ 1/10 सेकेण्ड तक

92. पृथ्वी के भौगोलिक तथा चुम्बकीय अक्ष के बीच का कोण होता है

⇒ 18

93. अस्थायी तथा स्थायी चुम्बक बनाये जाते है

⇒ क्रमशः नर्म लोहा तथा इस्पात का

94 कपड़ा सुखाने की मशीन तथा दूध से मक्खन निकालने की मशीन कार्य करता है

⇒ अपकेन्द्रीय बल के सिद्धांत पर

95. लालटेन की बत्ती के तेल का ऊपर चढ़ना तथा ब्लॉटिंग पेपर का स्याही सोखने का कारण है

⇒ केशिकत्व क्रिया

96. हीरा का चमकना तथा मृग मरीचिका का बनने का कारण है

⇒ पूर्ण आंतरिक परावर्त्तन

97. पानी के अंदर हवा का बुलबुला कार्य करता है

⇒ अवतल लेंस के भांति

98. कार्बन, सिलिकॉन तथा जर्मेनियम उदाहरण है

⇒ अर्द्धचालक का

99. तड़ित चालक बनाया जाता है

⇒ ताँबा का (आविष्कारक- बेंजामिन फ्रैंकलिन)

100. चुम्बक को स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर वह सदैव रूकती है

⇒ उत्तर-दक्षिण दिशा में

101. चुम्बकत्व समाप्त हो जाता है

⇒ हथौड़े से पीटने तथा गर्म कर लाल करने से

102. परमाणु बम तथा हाइड्रोजन बम आधारित हैं

⇒ क्रमशः नाभिकीय विखंडन तथा नाभिकीय संलयन सिद्धांत पर

103. जीवों के अवशेषों के आयु का पता लगाया जाता है

⇒ कार्बन डेटिंग विधि द्वारा

104. पुरानी चट्टानों तथा निर्जीव पदार्थों आदि की आयु ज्ञात की जाती है

⇒ यूरेनियम डेंटिंग विधि द्वारा

105. नाभिकीय रिएक्टर में होने वाले अभिक्रिया के नियंत्रण के लिए प्रयोग किया जाता

⇒ कैडमियम (Cd) या बोरॉन (B) की छड़ का

106. पहाड़ों पर खाना देर से पकता है

⇒ क्योंकि वायुमंडलीय दाब कम होने से जल का क्वथनांक घट जाता है

107. X किरणों की खोज की गयी थी

⇒ रॉन्टजन द्वारा (1895 में)

108. कैंसर के इलाज में प्रयोग किया जाता है

⇒ कोबाल्ट-60

109. साबून का बुलबुला रंगीन दिखाई पड़ता है

⇒ व्यतिकरण के कारण

110. बादल वायुमंडल में तैरते है

⇒ कम घनत्व के कारण

111. बादलों की दिशा या गति मापने वाला यंत्र कहलाता है

⇒ नेफोस्कोप

112 यदि लोलक की लम्बाई चार गुनी कर दी जाए, तो लोलक झूलने की समय (अवधि) होगी

⇒ दोगुनी

113. किसी सरल लोलक की लम्बाई 4% बढ़ा दी जाए, तो उसका आवर्तकाल

⇒ 2% बढ़ जाएगा

114. स्प्रिंग को अपनी सामान्य लम्बाई पर आपस लौटने के लिए लगने वाले बल को कहते है

⇒ प्रत्यानयन बल

115. जब एक गैस के पात्र में दाव बढ़ाया जाता है, तो उसका द्रव्यमान

⇒ अपरिवर्तित रहता है

116. क्रायोजेनिक इंजनों का प्रयोग होता है

⇒ रॉकेट प्रौद्योगिकी में

117. पानी से भरे गिलास में बर्फ का एक टुकड़ा तैर रहा है, यदि बर्फ का टुकड़ा पूरा पिघल जाए तो पानी के स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा

⇒ अपरिवर्तित रहेगा

118. ‘लॉ ऑफ फ्लोटिंग’ सिद्धांत की खोज की थी

⇒ आर्किमिडीज ने

119. बर्फ के दो टुकड़ों को आपस में दबाने पर टुकड़े आपस में चिपक जाते है क्योंकि

⇒ दाब अधिक होने से बर्फ का ग्लनांक घट जाता है

120. सबसे शुद्ध जल होता है

⇒ वर्षा का जल

121. पारा का हिमांक तथा स्वथनांक होता है

⇒ क्रमशः -39°C तथा 357°C

122. सूर्य के प्रकाश में प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है

⇒ बैंगनी रंग का

123. गाड़ी के साइड मिरर में प्रयुक्त दर्पण तथा दंत चिकित्सक का दर्पण होता है

⇒ क्रमशः उत्तल तथा अवतल

124 प्रतिध्वनि का कारण होता है

⇒ ध्वनि तरंगों का परावर्तन

125 ‘ल्यूमेन’ तथा ‘वाट’ मात्रक है

⇒ क्रमशः ज्योति फ्लक्स तथा शक्ति का

126. नाभिक का आकार होता है

⇒ 10-15 मी०

127. रेडियोधर्मिता का आविष्कार किया था

⇒ हेनेरी बेकुरल ने


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3. Political Science (भारतीय राज्यव्यवस्था)

Political Science

(भारतीय राज्यव्यवस्था)



1. भारत में संविधान सभा का गठन किया गया था

⇒ कैबिनेट मिशन (1946) की सिफारिस पर

2. संविधान सभा का गठन हुआ था

⇒ जुलाई, 1946 में

3. सविधान सभा का पुनर्गठन (3 जून, 1947 को विभाजन के बाद) हुआ था

⇒ 31 अक्टूबर 1947 को

4. संविधान सभा में कुल सदस्यों की संख्या निर्धारित की गई थी

⇒ 389

5. संविधान के मूल मसौदे पर हस्ताक्षर थे

⇒ 284 सदस्यों के

6. संविधान सभा में ब्रिटीश प्रान्तों, देशी रियासतों तथा कमीशनरी से प्रतिनिधि थे

⇒ क्रमश: 292, 93 तथा 4

7. देश के विभाजन होने पर प्रान्तों तथा देशी रियासतों की सदस्य संख्या रह गई

⇒ क्रमश: 235, तथा 89 ( कुल-324)

8. संविधान सभा की प्रथम बैठक हुई थी

9 दिसंबर 1946 को प्रात: 11 बजे

9. संविधान सभा की प्रथम बैठक की अध्यक्षता (अस्थायी) की थी

⇒ डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने

10 सविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष 11 दिसम्बर, 1946 को चुना गया

⇒ डॉ. राजेंद्र प्रसाद को

11. संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे

⇒ श्री बी. एन. राव (श्री बेनेगल नरसिंह राव)

12. 29 अगस्त 1947 को गठित 7 सदस्यीय प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे

⇒ डॉ० भीम राव अम्बेदकर

13. संविधान के प्रारूप पर बहस हुई थी

⇒ 114 दिन

14. भारतीय संविधान को पारित एवं अंगीकार किया गया

⇒ 26 नवम्बर, 1949 को

15. सम्पूर्ण संविधान लागू या प्रवृत हुआ

⇒ 26 जनवरी, 1950 को

16. संविधान निर्माण में लगा समय है

⇒ 2 वर्ष 11 महीना तथा 18 दिन

17. विश्व में सबसे लम्बा लिखित संविधान है

⇒ भारत का

18. मूल संविधान में अनुच्छेद, अनुसूचियों तथा भागों की संख्या थी

⇒ 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियाँ तथा 22 भाग

19. वर्तमान में अनुच्छेद एंव अनुसूचियों की संख्या है

⇒ 470 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियाँ

20. अनुच्छेद-1 में भारत को कहा गया है

⇒ राज्यों का संघ

21. ‘संघ’ अर्थात् यूनियन शब्द लिया गया है

⇒ कनाडा के संविधान से

22. ‘भारतीय संविधान का जनक’ कहा जाता है

⇒ डॉ भीम राव अम्बेडकर

23. पाकिस्तान के लिए अलग संविधान सभा का गठन किया गया

⇒ 3 जून, 1947 को

24. वर्तमान में भारतीय संघ में है

⇒ 28 राज्य तथा 8 संघ शासित प्रदेश

25. ‘संविधान की कुंजी’ कहा जाता है

⇒ प्रस्तावना को

26. पंथ निरपेक्ष, समाजवादी और अखण्डता शब्द प्रस्तावना में जोड़ा गया

⇒ 42वें संविधान संशोधन (1976) के द्वारा

27. लघु संविधान (Mini Constitution) कहा जाता है

42वें संविधान संशोधन को

28. भीमराव अम्बेदकर ने ‘संविधान की मूल आत्मा’ कहा है

⇒ संवैधानिक उपचार को

29. संविधान की संप्रभुता निहीत होती है

⇒ भारत के लोगों में

30. भारतीय ‘संसदीय शासन प्रणाली’ प्रभावित है

⇒ ब्रिटेन के संविधान से

31. ‘संविधान संशोधन की प्रक्रिया’ लिया गया है

⇒ दक्षिण अफ्रीका के संविधान से

32. संविधान संशोधन की प्रक्रिया वर्णित है

⇒ अनुच्छेद-368 तथा भाग-20 में

33. प्रथम संविधान संशोधन हुआ था

⇒ 1951 में

34. ‘राज्य के नीति-निर्देशक तत्व’ प्रभावित है

⇒ आयरलैंड के संविधान से

35. ‘राज्य के नीति-निर्देशक तत्व’ वर्णित है

⇒ भाग-IV (अनुच्छेद-36 से 51 में)

36. संविधान सभा के ‘झंडा समिति’ तथा ‘संचालन समिति’ के अध्यक्ष थे

⇒ क्रमश: जे० बी० कृपलानी तथा डॉ० राजेंद्र प्रसाद

37. भारतीय विधान में ‘न्यायिक पुनरावलोकन तथा मौलिक अधिकार’ प्रभावित है

⇒ संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से

38. भारतीय संविधन में ‘मौलिक कर्तव्य’ लिया गया है

⇒ सोवियत रूस के संविधान से

39. मौलिक कर्त्तव्य (संख्या-11) वर्णित है

⇒ भाग-4 (क) तथा अनु०-51 (क)

40. संविधान में मौलिक कर्तव्य (42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा) जोड़ा गया

⇒ सरदार स्वर्ण सिंह समिति का अनुशंसा पर

41. मौलिक अधिकार वर्णित है

⇒ भाग-3 (अनु०-12 से 35) में

42. भारत के 22 भाषाओं का उल्लेख है

⇒ 8वीं अनुसूची में (भाग-17)

43. दल-बदल निरोधक उपबंध वर्णित है

⇒ 10 वीं अनुसूची में

44 . संघ-सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची का संबंध है

⇒ 7वीं अनुसूची से (अनुच्छेद-246)

45. संघ-सूची समवर्ती सूची एवं राज्य सूची में उल्लेखित विषयों की संख्या है

⇒ क्रमश: 98, 52 एवं 62

46. क्षा, विदेश, नागरिकता, रेलवे, डाक-ता प्रमुख विषय है

⇒ संघ सूची का

47. पुलिस, जेल, कृषि, लोक-व्यवस्था, स्थानीय शासन प्रमुख विषय है

⇒ राज्य सूची का

48. शिक्षा, वन, परिवार नियोजन, समाजिक सुरक्षा, दण्डसंहिता प्रमुख विषय है

⇒ समवर्ती सूची का

49. भारतीय संविधान में ‘आपात उपबंध’ लिया गया है

⇒ जर्मनी के संविधान से

50. भारतीय संविधान में ‘नागरिकता’ संबंधी व्यवस्था की गई है

⇒ भाग-2 (अनु. 5 से 11 ) में

51. कोई व्यक्ति भारत का नागरिक माना जायेगा, यदि उसका जन्म हुआ हो

26 जनवरी 1950 के उपरान्त भारत में हुआ हो

52. भारत से लगातार कितने वर्ष बाहर रहने पर नागरिकता समाप्त हो जाती है

⇒ 7 (वर्ष)

53. भारत में लगातार कितने वर्ष रहने पर नागरिकता प्राप्त हो जाती है

⇒ 10 (वर्ष)

54. मूल संविधान में मौलिक अधिकारों की संख्या थी

⇒ 7 (वर्तमान में 6)

55. वर्तमान में संपत्ति का अधिकार है

⇒ विधिक अधिकार (अनु.- 300 क)

56. संपति के अधिकार को मूल अधिकार से हटा दिया गया

⇒ 44वाँ संशोधन (1978) द्वारा

57. मौलिक अधिकारों को संशोधित करने का अधिकार है

⇒ संसद को

58. ‘अस्पृश्यता का अंत’ किया गया है

⇒ अनुच्छेद-17 द्वारा

59. भारतीय संविधान को अर्द्धसंघीय संविधान कहा है

⇒ व्हीयर ने

60. स्वतंत्रता के समय भारत में देशी रियासते थी

⇒ 542

61. ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ वर्णित है

⇒ अनु०-19 (अ) में

62. ‘प्राण व दैहिक स्वतंत्रता’ दी गई है

⇒ अनु-21 में

63. देश का प्रथम नागरिक तथा कार्यपालिका का संवैधानिक प्रधान होता है

⇒ राष्ट्रपति

64. राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति पद के लिए न्यूनत्तम आयु सीमा है

⇒ 35 वर्ष

65. राष्ट्रपति अपना त्याग पत्र देता है

⇒ उपराष्ट्रपति को

66. राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है

⇒ महाभियोग द्वारा (अनु-61, कोई भी सदन)

67. लोकसभा भंग (अनु-85) तथा मृत्यु दण्ड क्षमा (अनु-72) कर सकता है

⇒ राष्ट्रपति

68. राष्ट्रपति लोकसभा तथा राज्यसभा में मनोनीत करता है

⇒ क्रमशः 2 एवं 12 सदस्यों को

69. निर्विरोध निर्वाचित होने वाले एकमात्र राष्ट्रपति थे

⇒ नीलम संजीव रेड्डी

70. राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने की सूचना दी जाती है

⇒ 14 दिन पूर्व

71. राष्ट्रपति शासन सबसे पहले लागू किया गया था

पंजाब में (1951 ई. में अनु- 356 के तहत)

72. सर्वाधिक समय तक राष्ट्रपति शासन प्रयोग में रहा

⇒ पंजाब में (1987-1992)

73. राष्ट्रपति शासन की न्यूनत्तम तथा अधिकतम अवधि है

⇒ क्रमशः 6 मास तथा 3 वर्ष

74. दोनों सदनों (राज्यसभा एवं लोकसभा) के संयुक्त बैठक को बुलाता तथा उसकी अध्यक्षता करता है

⇒ क्रमशः राष्ट्रपति तथा लोकसभाध्यक्ष

75. उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, महान्यायवादी तथा उच्च एवं उच्चत्तम न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्ति करता है

⇒ राष्ट्रपति

76. राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते है

⇒ संसद व राज्यों के विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य

77. संसद का निम्न तथा उच्च सदन कहलाता है

⇒ क्रमशः लोकसभा एवं राज्यसभा

78. राज्य सभा एक स्थायी सदन है

⇒ क्योंकि इसे भंग नहीं किया जा सकता

79. राज्यसभा का अध्यक्ष या पदेन सभापति होता है

⇒ उपराष्ट्रपति

80. राज्यसभा तथा लोकसभा के सदस्यों की अधिकत्तम संख्या है

⇒ क्रमशः 250 तथा 552

81. राज्यसभा या लोकसभा के दो सत्रों के बीच अधिकत्तम अंतर होता है

⇒ 6 माह का

82. कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं इसका निर्णय करता है

⇒ लोकसभा अध्यक्ष

83. राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य अवकाश ग्रहण करते है

⇒ प्रत्येक 2 साल पर

84. धन विधेयक प्रस्तुत किया जाता है

⇒ केवल लोकसभा में

85. धन विधेयक को राज्यसभा विचारार्थ अपने पास रखती है

⇒ केवल 14 दिनों तक (अनु-110 में वर्णित)

86. लोकसभा की कोरम या गणपूर्ति के लिए आवश्यक है

⇒ कुल का 1/10 सदस्य का होना

87. लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल होता है

क्रमशः 5 वर्ष तथा 6 वर्ष

88. पहली लोकसभा की पहली बैठक हुई थी

⇒ 6 मई, 1952 को

89. राज्यसभा का गठन सर्वप्रथम हुआ था

⇒ 3 अगस्त, 1952 को

90. लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्यों की न्यूनत्तम आयु-सीमा होती है

⇒ क्रमश: 25 वर्ष तथा 30 वर्ष

91. प्रधानमंत्री के लिए न्यूनत्तम आयु सीमा तथा कार्यकाल है

⇒ क्रमशः 25 वर्ष तथा 5 वर्ष

92. मंत्रीपरिषद् सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है

⇒ लोकसभा के प्रति (अनु-73 (3))

93. भारत सरकार का सबसे बड़ा कानूनी अधिकारी होता है

⇒ महान्यायवादी (अनु-73)

94. भारत के संसद के तीन अंग है

⇒ राष्ट्रपति, लोकसभा एवं राज्यसभा

95. ‘संविधान का रक्षक’ बनाया गया है

⇒ उच्चत्तम न्यायालय को

96. राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया था

⇒ 1953 में

97. राज्य पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष थे

⇒ फजल अली

98. राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति को वेतन मिलता है

क्रमशः 1,50,000 तथा 1,25,000

99. प्रथम उपप्रधानमंत्री थे

⇒ सरदार वल्लभ भाई पटेल

100. प्रत्येक बैठक के आरंभ में एक घंटे का समय कहलाता है

⇒ प्रश्नकाल

101. प्रश्नकाल के तुरंत बाद का समय (12 से 1 बजे तक) कहलाता है

⇒ शून्यकाल

102. एक भी दिन संसद का सामना नहीं करने वाले प्रधानमंत्री थे

⇒ चौधरी चरण सिंह

103. उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते है

⇒ संसद के दोनों सदनों के सदस्य

104. धन विधेयक को लोकसभा के प्रस्तुत करने से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है

⇒ राष्ट्रपति का

105. किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा करता है

⇒ राष्ट्रपति (अनुच्छेद 356)

106. मंत्रिपरिषद् का निर्माणकर्त्ता तथा संहारकर्त्ता होता है

⇒ प्रधानमंत्री

107. वैसे राष्ट्रपति जिनकी मृत्यु उनके कार्यकाल के दौरान हुई थी

⇒ फखरूद्दीन अली अहमद और जाकिर हुसैन

108. राज्य कार्यपालिका का प्रधान होता है

⇒ राज्यपाल

109. राज्यविधानमंडल का उच्च सदन (स्थायी सदन) तथा निम्न सदन है

⇒ क्रमशः विधानपरिषद् तथा विधानसभा

110. विधानसभा में राज्यपाल आंग्ल भारतीय सदस्य को मनोनीत कर सकता है

⇒ केवल एक

111. राज्यमंत्रिमंडल सामूहिक रूप से उत्तरदायी होता है

⇒ विधानसभा के प्रति

112. संविधान सभा के कुल अधिवेशन एवं बैठकें हुई थी

⇒ क्रमश: 11 अधिवेशन एवं 105 बैठकें

113. राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति को वेतन प्रदान किया जाता है

⇒ संचित निधि द्वारा

114. प्रथम लोकसभा अध्यक्ष थे

⇒ गणेश वासुदेव मावलंकर

115. व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण रिट याचिका है

⇒ हैबियस कॉपर्स (बंदी प्रत्यक्षीकरण)

116. संसद भवन का उद्घाटन हुआ था

⇒ 18 जनवरी 1927 को (लार्ड इरविन द्वारा)

117. राज्यसभा की गणपूर्ति संख्या है

⇒ समस्त संख्या का 10वीं भाग

118. पहली बार लोकसभा समय से पूर्व भंग की गयी थी

⇒ 27 दिसम्बर 1970 को (14 मास पहले)

119. साधारण विधेयक को राज्यसभा रोक सकती हैं

⇒ 6 माह तक

120. प्राक्कलन या अनुमान समिति में (केवल लोकसभा के) सदस्य होते है

⇒ 30

121. सार्वजनिक उपक्रम समिति में सदस्य होते है

⇒ 15 (10 लोकसभा तथा 5 राज्य सभा से)

122. लोक लेखा समिति का प्रारंभ हुआ

⇒ 1967 ई. से

123. लोक लेखा समिति (प्राक्कलन समिति को जुड़वा बहन) में सदस्य होते हैं

⇒ 22 (15 लोकसभा तथा 7 राज्य सभा के)

124. मूल संविधान में न्यायाधिशों की संख्या थी

⇒ 8 (1 मुख्य तथा 7 अन्य न्यायाधीश)

125. वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या है

⇒ 31 (1 मुख्य तथा 30 अन्य न्यायाधिश)

126. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का कार्यकाल (अवकाश ग्रहण) होता है

⇒ 65 वर्ष

127. संविधान का व्याख्या करने वाला तथा संरक्षक माना जाता है

⇒ सर्वोच्च न्यायालय को

128. राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के चुनाव संबंधी विवादों का निपटारा करता है

⇒ सर्वोच्च न्यायालय (अनु. 71 के तहत)

129. राज्य की कार्यपालिका का प्रधान होता है

⇒ राज्यपाल

130. प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गई है

⇒ संविधान की धारा-214 के अन्तर्गत

131. उच्च न्यायालय के न्यायाधिशों को अवकाश ग्रहण की आयु सीमा है

⇒ 65 वर्ष

132. सबसे अधिक तथा सबसे कम न्यायाधीशों की संख्या है

⇒ क्रमश: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (58) तथा गुवाहाटी उच्च न्यायालय (3)

133. 14 वर्ष से कम आयु वाले किसी बच्चे को कारखानों, खानों या अन्य किसी जोखिम भरे काम पर नहीं लगाया जा सकता है

⇒ अनुच्छेद 24 के तहत

134. शिक्षा को संविधान की धारा-21 के अंतर्गत शामिल कर मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है

⇒ 86वाँ संविधान संशोधन, 2002 द्वारा

135. राज्य का विधान मंडल बनता है

⇒ राज्यपाल, विधान सभा तथा राज्य विधान परिषद् से

136. नवीनत्तम राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय संसद द्वारा स्वीकृत की गई

⇒ 1968 ई. में

137. 1952 में भारत का पहला आम बजट प्रस्तुत किया था

पी० के० शनमुखम चेट्टी (वित्तमंत्री) ने

138. ‘भारत का मैग्नाकार्टा’ कहा जाता है

⇒ संविधान के भाग- III को

139. राज्यसभा की पहली बैठक हुई थी

⇒ 13 मई 1952

140. राज्यसभा के पहले समूह की सेवा निवृत्ति हुई थी

⇒ 2 अप्रैल 1954 को

141. राज्यसभा की पहली महिला महासचिव थी

⇒ वी. एस. रमादेवी

142. ‘भारतीय संविधान की आत्मा’ कहा गया है

⇒ अनु-32 को

143. केन्द्रीय बजट वित्तमंत्री द्वारा पेश किया जाता है

⇒ फरवरी के अंतिम सप्ताह में

144. संसद की दोनों सदनों का सत्रावसान करता है

⇒ राष्ट्रपति

145. राज्य में सर्वप्रथम गैर कांग्रेसी सरकार गठित हुई

⇒ केरल (1957) में

146. एक मात्र राज्य जिसका अपना अलग सविधान था

⇒ जम्मू-काश्मीर 

147. जम्मू-कश्मीर के संविधान को अंगीकृत और लागू किया गया था

⇒ 1957 में

148. जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था

⇒ अनु- 370 के तहत

149. निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति करता है

⇒ राष्ट्रपति

150. प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे

⇒ सुकुमार सेन

151. राज्यमंत्री परिषद् का प्रधान होता है

⇒ मुख्यमंत्री

152. संसद की दोनों संदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान किया गया है

⇒ अनु-108 में

153. पहली बार विपक्ष दल के नेता को मान्यता दी गई

⇒ 1969 में

154. जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन हुआ था

⇒ 30 अक्टूबर, 1991 को

155. जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन सर्वप्रथम लागू हुआ था

⇒ 27 मार्च, 1977 को

156. 73वाँ संविधान संशोधन (1992 ई०) संबंधित है

⇒ पंचायती राज से

157. पंचायती राज (उद्घाटनकर्ता पं. जवाहर लाल नेहरू) सर्वप्रथम लागू हुआ था

⇒ 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिला में

158. पंचायती राज से संबंधित भाग, अनुच्छेद तथा अनुसूची है

भाग-9, अनुच्छेद 243 (क से ण) तथा अनुसूची-11

159. पंचायती राज का सबसे छोटा अंग है

⇒ ग्राम पंचायत

160. भारत में पंचायती राज शुरू किया गया

⇒ बलवन्तराय मेहता समिति की अनुशंसा पर (1957 ई.)

161. पाकिस्तान तथा बांग्लादेश भारत के अंश थे

⇒ 3 जून, 1947 तक

162. धर्मनिरपेक्ष का अर्थ है

⇒ सभी धर्मों के महत्व को स्वीकार करना

163. स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री थे

⇒ डॉ. भीमराव अम्बेदकर

164. ग्राम पंचायत का निर्वाचन कराना निर्भर करता है

राज्य सरकार पर

165. खण्ड (ब्लॉक) स्तर पर पंचायत समिति है

⇒ एक प्रशासनिक प्राधिकरण

166. समान नागरिक संहिता (Common Civil Code) लागू है

⇒ गोवा, उतराखंड राज्य में

नोट: आजादी के बाद समान नागरिक संहिता कानून लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बन गया है।

167. नागरिको के लिए एक समान सिविल संहिता से संबंधित अनुच्छेद है

⇒ अनुच्छेद-44

168. राष्ट्र-ध्वज राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री की मृत्यु पर झुका रहता है

⇒ 12 दिनों तक

169. मौलिक अधिकार को प्रवृत कराने के लिए जारी की जाने वाली रिट है

⇒ बन्दी प्रत्यक्षीकरण

170. नागरिकों के मौलिक अधिकारों के रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय (अनु०-32) तथा उच्च न्यायालय (अनु-226) रिट जारी करता है

⇒ 5 प्रकार के (बन्दी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण तथा अधिकार पृच्छा)

171. यदि राष्ट्रपति का पद खाली है तो इसे भरना आवश्यक होता है

⇒ 6 महीने के अंदर

172. राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति दोनों का पद खाली होने पर राष्ट्रपति के कार्यों को सम्पादित करता है

⇒ भारत का मुख्य न्यायाधीश

173. सर्वोच्च न्यायालय से राष्ट्रपति परामर्श मांग सकता है

⇒ अनुच्छेद 143 के तहत

174. राष्ट्रपति राज्यों में राष्ट्रपति शासन आरोपित करता है

⇒ अनुच्छेद 356 (1) के तहत

175. राष्ट्रपति को पद की शपथ दिलाता है

⇒ भारत के मुख्य न्यायाधीरा

176. लोकसभा का कोई सदस्य अयोग्य ठहराया जाएगा, यदि बिना सदन के अनुमति के अनुपस्थित रहता है

⇒ 60 दिनों तक

177. मंत्रीमंडल की बैठक की अध्यक्षता करता है

⇒ प्रधानमंत्री

178. सामूहिक रूप से मंत्रिपरिषद् अपने आचरण एवं कार्यों के लिए उत्तरदायी होती है

⇒ लोकसभा के प्रति

179. उच्चत्तम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि करने की शक्ति है

⇒ संसद को (अनु-124 (1) के अन्तर्गत)

180. भारतीय संविधान के संघीय न्यायपालिका का उल्लेख है

⇒ भाग-5 में

181. केरल राज्य का उच्च न्यायालय स्थित है

⇒ एर्नाकुलम में (स्थापना 1958 में)

182. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को शपथ दिलाता है

⇒ राष्ट्रपति

183. न्यायिक पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है

सर्वोच्च न्यायालय को (अनु-139 के अन्तर्गत)

184. भारतीय दंड संहिता 302 संबंधित है

⇒ हत्या से

185. एक राज्य जहाँ किसी सरकार का राज्य नहीं होता, कहलाता है

⇒ एनार्की

186. तीन नये राज्य छतीसगढ़, उत्तरांचल तथा झारखंड का गठन हुआ था

⇒ 84वाँ संविधान संशोधन 2000 द्वारा

187. भारत का वह राज्य जिसने उर्दू को राजकाज की भाषा के रूप में स्वीकार किया है

⇒ जम्मू-कश्मीर

188. गवर्नर द्वारा जारी किया गया अध्यादेश मंजूर किया जाता है

⇒ राज्य विधानमण्डल द्वारा

189. राज्य के राज्यपाल की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा है

⇒ आयु सीमा नहीं है

190. गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया

⇒ 56वाँ संविधान संशोधन 1987 द्वारा

191. सिक्किम को पूर्ण राज्य (22वीं) का दर्जा दिया गया

⇒ 36वाँ संविधान संशोधन 1975 द्वारा

192. किसी राज्य में विधानसभा में सदस्यों की अधिकत्तम तथा न्यूनत्तम संख्या निर्धारित की गई है

⇒ अधिकत्तम 500 तथा न्यूनतम 60

193. पंचायत स्तर पर राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करता है

⇒ ग्राम सेवक

194. भारत की पहली निर्वाचित लोकसभा अस्तित्व में आई थी

⇒ अप्रैल 1952 को

195, मताधिकार की न्यूनत्तम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष निर्धारित की गई

⇒ 61वाँ संविधान संशोधन (1989 ई.) द्वारा

196. भारत में पहली बार राष्ट्रीय आपातकाल (अनु-352 के तहत) घोषित किया गया था

⇒ 26 अक्टूबर 1962 (चीनी आक्रमण के समय)

197. राष्ट्रीय आपातकाल (अनु- 352 ) के समय लोकसभा की अवधि को प्रथम बार राष्ट्रपति द्वारा बढ़ाया जा सकता है

⇒ 6 माह तक

198. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान स्थगित नहीं होता

⇒ अनुच्छेद-21

199. नागालैंड (1 दिसम्बर, 1963 को विधिवत राज्य) को एक राज्य का दर्जा दिया गया

⇒ 13वाँ संविधान संशोधन 1962 के अन्तर्गत

200. ‘चौथा स्तंभ’ (फोर्थ इस्टेट) इंगित करता है

⇒ प्रेस तथा समाचार पत्र को

201. ‘सामाजिक सुरक्षा तथा सामाजिक बीमा’ शामिल है

⇒ समवर्ती सूची में

202. संविधान में संघ की राजभाषा के रूप में हिन्दी को मान्यता मिली

⇒ 14 सितम्बर 1947 को

203. अब तक अनुच्छेद-352 के तहत राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय आपात की घोषणा की है

⇒ तीन बार (1962, 1971 तथा 1975)

204. 1964 ई० में गठित प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग के चेयरमैन थे

मोरारजी देसाई

205. लोक लेखा समिति अपनी वार्षिक रिपोर्ट पेश करती है

⇒ लोकसभा को

206. नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक के कार्यों की निगरानी की जाती है

⇒ लोक लेखा समिति द्वारा

207. भाषा के आधार पर गठित प्रथम राज्य है

⇒ आंध्र प्रदेश (1953)

208. राज्य भाषा आयोग (गठन 1955 में) के प्रथम अध्यक्ष थे

⇒ बी. जी. खेर

209. ‘संविधान की आत्मा’ कहा जाता है

⇒ अनुच्छेद-32 को

210. वित्तीय आपात का संबंध है

⇒ अनुच्छेद-360 से

211. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व का मुख्य उद्देश्य है

⇒ लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना

212. दल-बदल विरोधी अधीनियम पारित हुआ था

⇒ 52वाँ संविधान संशोधन 1985 द्वारा

213. लोकसेवा आयोग की स्थापना की गई थी

⇒ 1926 में (अनुच्छेद-315)

214. लोक सेवाओं हेतु ‘ली कमीशन’ गठित हुआ था

⇒ 1912 ई. में

215. संघ राज्य क्षेत्रों में केवल अपना उच्च न्यायालय है

⇒ दिल्ली का

216. भारत में वर्तमान में कुल उच्च न्यायालय है

⇒ 24

217. प्रत्येक राज्य में एक उच्च न्यायालय होगा

⇒ अनुच्छेद 214 के तहत

218. देश के सार्वजनिक धन का संरक्षक होता है

⇒ नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (नियुक्ति राष्ट्रपति)

219. बिना संसद का सदस्य होते हुए सदन की बैठक में भाग लेने या बोलने का अधिकार है

⇒ भारत के महान्यायवादी को

220. राज्यपाल के पद का सृजन किया गया है

⇒ अनुच्छेद-153 द्वारा

221. सबसे पुरानी वित्तीय समिति है

⇒ लोक लेखा समिति

222. पहली बार विपक्ष दल के नेता को मान्यता दी गई

⇒ 1969 ई. में

223. संविधान के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान किया गया है

⇒ अनुच्छेद 108 में

224. राष्ट्रपति के अभिभाषण को तैयार करता है

⇒ मंत्रिमंडल

225. बम्बई उच्च न्यायालय के अधीन है

दमन, दीव तथा नगर हवेली

226. मद्रास तथा केरल उच्च न्यायालय के अधीन है

⇒ पाण्डीचेरी तथा लक्षद्वीप

227. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के अधीन है

⇒ चंडीगढ़

228. कोलकाता उच्च न्यायालय के अधीन है

⇒ अण्डमान निकोबार द्वीप समूह

229. उतराखंड में समान नागरिक संहिता कब से लागू हुआ

⇒ 11 मार्च, 2024 से 

नोट: राष्ट्रपति ने उत्तराखंड विधान सभा द्वारा पारित ‘समान नागरिक संहिता’, उत्तराखंड 2024 विधायक पर दिनांक 11 मार्च, 2024 को स्वीकृति प्रदान की।

230. राज्य मंत्री परिषद् का प्रधान होता है

⇒ मुख्यमंत्री

231. राज्यसभा में प्रथम विपक्षी दल के नेता थे

⇒ कमला पति त्रिपाठी

232. धन विधेयक तथा वित्त विधेयक की परिभाषा दी गई है

⇒ क्रमशः अनु-110 तथा अनु-117 में

233. द्वैध शासन प्रणाली शुरू होकर चली थी

⇒ 1921 से 1937 तक

234. संविधान के 15 वें तथा 18 वें भाग का विषय है

⇒ क्रमशः निर्वाचन तथा आपात उपबंध

235. अशोक मेहता समिति का गठन किया गया था

⇒ 1977 में (सदस्य 13)

236. जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन सर्वप्रथम लागू हुआ था

⇒ 27 मार्च 1977 को

237. मंडल आयोग गठित हुआ था

⇒ 1979 में

238. अनुच्छेद 343 संबंधित है

⇒ संघ की राजभाषा से

239. वारेन हेस्टिंग्स बंगाल का गवर्नर जनरल बना था

⇒ 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट द्वारा

240. कम्पनी के व्यापारिक अधिकार समाप्त कर दिया गया

चार्टर अधिनियम 1813 द्वारा

241. बंगाल का गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा

⇒ चार्टर अधिनियम 1833 द्वारा

242. विलियम बेंटिक भारत का प्रथम गवर्नर जनरल बना

चार्टर अधिनियम 1833 द्वारा

243. गवर्नर जनरल का नाम बदलकर वायसराय कर दिया गया

⇒ भारत सरकार अधिनियम 1858 द्वारा

244. प्रांतीय स्वायत्तता लागू हुआ था

⇒ 1 अप्रैल, 1938 को

245. केन्द्र में द्वैध शासन लागू तथा प्रांतों में समाप्त कर दी गई

⇒ भारत सरकार अधिनियम 1935 द्वारा

246. सविधान की आठवीं अनुसूची में बोडो, मैथली, डोगरी और संथाली भाषा जोड़ा गया

⇒ 92वाँ संशोधन (2003 ई.) द्वारा

247. मार्ले मिण्टो सुधार अधिनियम लागू हुआ

⇒ 1909 ई. में

248. माण्टेग्यू- चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम लागू हुआ

⇒  1919 ई. में

249. नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ

⇒ 28 मई 2023 को (प्रधानमंत्री मोदी द्वारा)


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1. Ancient History (प्राचीन इतिहास)

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(प्राचीन इतिहास)



1. आग का आविष्कार हुआ था

⇒ पुरापाषाण काल में

2. कृषि तथा पहिये का आविष्कार हुआ था

⇒ नवपाषाण काल में

3. नवपाषाण शब्द का सबसे पहले प्रयोग किया था

⇒ जॉन लुवाक ने

4 चाक का आविष्कार हुआ था

⇒ नवपाषाण काल में

5. सिंधु घाटी सभ्यता का काल माना जाता है

⇒ 2350 ई० पू० से 1750 ई० पू० तक

6. सिंधु घाटी सभ्यता थी

⇒ आद्य ऐतिहासिक या कास्ययुगीन

7. सिंधु सभ्यता की मुख्य विशेषता थी

⇒ नगर नियोजन

8. सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों का मुख्य व्यवसाय था

⇒ व्यापार-वाणिज्य

9. सिंधु सभ्यता का प्रमुख फसल था

⇒ गेहूँ और जौ

10. सिंधु सभ्यता की लिपि थी

⇒ भाव चित्रात्मक

11 आदि मानव ने सर्वप्रथम सीखा था

⇒ आग जलाना

12 सर्वप्रथम पालतु बनाया गया जानवर था

⇒ कुत्ता

13. ‘इतिहास का पिता’ कहा जाता है।

⇒ हेरोडोटस को

14 हड़प्या किस नदी के तट पर स्थित है

⇒ रावी नदी

15. हड़प्पा की खुदाई किया गया था

⇒ 1921 में दयाराम सहनी द्वारा

16. हड़प्पा सभ्यता को ‘सिंधु सभ्यता’ का नाम दिया था

⇒ जॉन मार्शलने

17. हड़प्पा का दो बार सर्वेक्षण किया था

⇒ जनरल कनिंघम ने

18. हड़प्पा की सर्वप्रथम खोज की थी

⇒ चार्ल्स मैसन ने 1826में

19. सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्थल था

⇒ सुतका गेंडोर (बलूचिस्तान)

20. सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक पूर्वी पुरास्थल था

⇒ आलमगीर

21. सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक उत्तरी पुरास्थल था

⇒ मांदा (अखनूर, जम्मू-कश्मीर)

22. सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक दक्षिणी पुरास्थल था

⇒ दाइमाबाद (अहमद नगर, महाराष्ट्र)

23. सिंधु सभ्यता का कुल क्षेत्रफल है

⇒ 129960० किमी०

24. सिंधु सभ्यता के समूचे क्षेत्रफल का आकार है

⇒ त्रिभुजाकार

25. हड़प्पा को ‘मेसोपोटामिया का उपनिवेश’ कहा था

⇒ ह्वीलर

26. सिंधु सभ्यता का प्रमुख बन्दरगाह था

⇒ लोथल (गुजरात में भोगवा नदी के तट पर)

27 मोहनजोदड़ो किस नदी के तट पर स्थित है

⇒ सिन्धु नदी (पाकिस्तान के लरकाना जिले में)

28. मोहनजोदड़ो की खोज की थी

⇒ राखलदास बनर्जी ने (1922 में) 

29 मोहनजोदड़ो (आधुनिक पाकिस्तान) का अर्थ है

⇒ मृतकों का टीला

30. मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रमुख स्मारक है

⇒ वृहद् स्न्नानागार

31. मोहनजोदड़ो से प्राप्त बड़ी इमारत है

⇒ अन्नागार

32. हडप्पा के लोग अनभिज्ञ थे

⇒ लोहा धातु

33. प्रेसोपोटामिया (आधुनिक नाम इराक) का अर्थ है

⇒ दो नदियों के बीच की भूमि

34. सिंधु सभ्यता का स्थल कालीबंग (राजस्थान) का शाब्दिक अर्थ है

⇒ काली रंग की चूड़ी

35. सिंधु घाटी के लोगों ने पूजा की थी

⇒ मातृदेवी की

36. सिंधु घाटी के लोगों का सबसे महत्त्वपूर्ण वृक्ष था

⇒ पीपल

37. भारत का सबसे बड़ा हड़प्पाई नगर है

⇒ धौलावीर (अर्थ- सफेद कुआँ)

38. चावल का साक्ष्य मिले है

रंगपुर एवं लोथल से (गुजरात)

39. लिपिस्टिक, काजल, चार पहियों वाला गाड़ी के साक्ष्य मिले है

⇒ चन्हुदड़ो से

40. कांसे की नर्तकी, पुजारी का भव के साक्ष्य मिला है

⇒ मोहनजोदरों से

41. हड़प्पा के लोगों का सबसे प्रिय पशु था

⇒ कुब वाला साढ़

42. मिट्टी के हल, खिलौना के साक्ष्य मिले है

➤ बनवाली से

43. हड़प्पा वासियों का प्रमुख खेल था

➤ पाशा

44. हड़प्पावासी तौल में व्यवहार करते थे

➤ 16 या उसके आवर्तों का

45. वेदों की कुल संख्या है

➤ 4 (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद)

46. सबसे प्राचीन वेद है

➤ ऋग्वेद

47. ऋग्वेद में मंडलों, सुक्तों एवं मंत्रों की संख्या है

➤ 10 मंडल, 1028 सूक्त एवं 10580 मंत्र

48. ऋग्वेद का नौवा मंडल समर्पित है

➤ सोम देवता को

49. गायत्री मंत्र (रचयिता विश्वामित्र) लिया गया है

➤ ऋग्वेद के तीसरा मंडल से

50. ऋग्वैदिक सभ्यता का काल माना जाता है

➤ 1500-1000 ई० पू०

51. ऋग्वेद में सबसे बाद का मंडल है

➤ दसवाँ (पुरुष सुक्त)

52. ऋऋग्वेद में सर्वाधिक पवित्र नदी माना गया है

➤ सरस्वती को

53. ऋग्वेद में सर्वाधिक उल्लेखित नदी है

➤ सिंधु

54. ऋग्वेद में वर्णित सबसे महत्त्वपूर्ण देवता है

➤ इन्द्र

55. ऋग्वेद में बाद में जोड़ा गया मंडल है

➤ पहला एवं दसवाँ

56. सबसे पुरानी भारतीय दवा आयुर्वेद का उद्गम है

➤ अथर्ववेद

57. ऋग्वेद में गंगा तथा यमुना का उल्लेख हुआ है

➤ क्रमशः एक बार तथा तीन बार

58. भारतीय संगीत का जनक है

➤ सामवेद

59. सामवेद का प्रथम लेखक माना जाता है

➤ जैमनी को

60. गद्य एवं पद्य वाला वेद है

➤ यजुर्वेद

61. तंत्र-मंत्र वाला वेद है

➤ अथर्ववेद (सबसे बड़ा वेद)

62. वेदांगों, स्मृतियों तथा पुराणों की संख्या है

➤ क्रमश: 6, 6 तथा 18

63. पुराणों के रचयिता व संग्रहकर्ता माना जाता है

➤ लोमहर्ष तथा उनका पुत्र उग्रश्रवा को

64. सर्वाधिक प्राचीन एवं प्रमाणिक पुराण है

➤ मत्स्य पुराण

65. मत्स्य पुराण से जानकारी मिलती है

➤ सातवाहन वंश की

66. सामवेद तथा यर्जुवेद में मंत्रों की सख्या है

➤ क्रमश: 1549 तथा 1990

67. उपनिषदों की कुल संख्या है

➤ 108 (प्रमाणिक-13)

68. भारत का प्रसिद्ध राष्ट्रीय वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ लिया गया है

➤ मुण्डाकोपनिषद् से

69. अथर्ववेद में मंडलों, सुक्तों एवं मंत्रों की संख्या है

➤ 20 मंडल, 731 सुक्त, 5839 मंत्र

70. सबसे प्राचीन एवं प्रमाणिक स्मृति है

➤ मनुस्मृति (शुंग वंश के समय रचित)

71. उत्तर वैदिक काल माना गया है

➤ 1000-600 ई० पू० को

72. उत्तर वैदिक काल के प्रमुख देवता है

➤ प्रजापति

73. महाभारत के रचयिता है

➤ वेद व्यास (वास्तविक नाम-द्वैपायन)

74. महाभारत के अन्य नाम है

➤ जयसंहिता

75. सबसे प्राचीन बौद्ध ग्रंथ है

➤ त्रिपिटक

76. बुद्ध की पूर्व जन्म की कहानी वर्णित है

➤ जातक में

77. जैन साहित्य को कहा जाता है

➤ आगम

78. 16 महाजनपदों का वर्णन है

➤ अंगुत्तर निकाय में

79. जैन धर्म के प्रवर्तक, संस्थापक एवं प्रथम तीर्थकर थे

➤ ऋषभदेव

80. जैन धर्म के 24 वें या अंतिम तीर्थंकर थे

➤ महावीर स्वामी (23वें तीर्थंकर-पार्श्वनाथ)

81. महावीर का जन्म हुआ था

➤ 540 ई पू० वैशाली के कुण्डग्राम में

82. जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक माना जाता है

➤ महावीर को

83. महावीर के पिता, माता तथा पत्नी का नाम था

➤ क्रमशः सिद्धार्थ, त्रिशला और यशोदा

84. महावीर के बचपन का नाम था

➤ वर्द्धमान

85. महावीर थे

➤ क्षत्रिय वर्ण के (ज्ञातृक कुल)

86. मझवीर गृह त्याग कर संयासी हुए थे

➤ 30 वर्ष की अवस्था में

87. महावीर को 42 वर्ष की अवस्था में कैवल्य (ज्ञान) की प्राप्ति हुई थी

➤ ऋजुपालिका नदी के किनारे साल वृक्ष के नीचे

88. जैनधर्म का प्रारंभिक इतिहास ज्ञात होता है

➤ कल्पसूत्र से (भद्रबाहु द्वारा रचित)

89. महावीर के जीवन कृत्यों का विवरण मिलता है

➤ भगवती सूत्र में

90. ऋषभदेव का प्रतीक चिन्ह है

➤ साढ़

91. पार्श्वनाथ के चार महाव्रतों में पाँचवां महाव्रत ‘ब्रह्मचर्य’ को जोड़ा था

➤ महावीर ने

92. महावीर की पुत्री तथा दामाद का नाम था

➤ प्रियदर्शनी तथा जमाली

93. महावीर का प्रथम अनुयायी था

➤ जमाली (दामाद)

94. मुहावीर के प्रथम भिक्षुणी (शिष्या) थी

➤ पद्मावती (चम्पा नरेश दधिवाहन की पुत्री)

95. महावीर ने सर्वप्रथम उपदेश दिया था

➤ पावापुरी में (प्राकृत भाषा में)

96. जैन धर्म के प्रचार के लिए अपनाया गया था

➤ प्राकृत भाषा

97. कल्पसूत्र लिखा गया है

➤ संस्कृत में

98. महावीर के ग्यारह शिष्य थे, जो कहलाते थे

➤ गणधर

99. जैन धर्म के दो सम्प्रदाय थे

➤ श्वेताम्बर (स्थूलभद्र) और दिगम्बर (भद्रबाहु)

100. जैन धर्म के त्रिरत्न है

➤ सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् आचरण

101. जैन धर्म का प्रतीक चिह्न था

➤ साढ़

102. महावीर का प्रतीक चिह्न था

➤ सिंह

103. महावीर की मृत्यु 72 वर्ष की अवस्था में 468 ई० पू० हुई थी

➤ पावापुरी में (राजगृह के समीप)

104. प्रथम जैन सभा (322 से 298 ई० पू०) हुई थी

➤ पाटलिपुत्र में (स्थूलभद्र की अध्यक्षता में)

105. द्वितीय जैन सभा (512 ई० में) हुई थी

➤ वल्लभी में (देवर्धिक्षमा श्रमण की अध्यक्षता में)

106. खजुराहो में जैन मंदिरों का निर्माण कराया था

➤ चंदेल शासकों ने

107. जैन धर्म में जीवन का अंतिम लक्ष्य है

➤ निर्वाण

108. सबसे पुराना जैन कहा जाता है

➤ चौदह पूर्व को

109. महावीर स्वामी को निर्माण प्राप्त हुआ था

➤ मल्लराजा सस्तिपाल के राजप्रासाद में

110. महावीर के मृत्यु के बाद जैन संघ का अध्यक्ष बना

➤ सुधर्मन

111. बौद्ध धर्म के संस्थापक थे

➤ गौतम बुद्ध

112. गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था

➤ 563 ई०पू० (लुम्बनी नामक ग्राम, कपिलवस्तु में)

113. गौतम बुद्ध के पिता, माता, पत्नी तथा पुत्र का नाम था

➤ शुद्धोधन, महामाया, यशोधरा तथा राहुल

114. बुद्ध का लालन पालन किया था

➤ प्रजापति गौतमी (मौसी) ने

115. बुद्ध के बचपन का नाम था

➤ सिद्धार्थ

116. बुद्ध का वंश, वर्ण तथा गोत्र था

➤ शाक्य, क्षत्रिय तथा गौतम

117. 29 वर्ष की अवस्था में बुद्ध द्वारा गृहत्याग की घटना कहलाता है

➤ महाभिनिष्क्रमण (प्रतीक-घोड़ा)

118. 35 वर्ष की अवस्था में 49 वें दिन बुद्ध को बोधगया में ज्ञान प्राप्त हुआ

➤ निरंजना नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे

119. बुद्ध द्वारा ज्ञान प्राप्ति की घटना कहलाता है

➤ सम्बोधि (Great Enlightment) या निर्वाण

120. बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया था

➤ सारनाथ में (पाली भाषा में)

121. बुद्ध द्वारा दिया गया प्रथम उपदेश कहलाया

➤ धर्मचक्रप्रवर्त्तन

122. बुद्ध के जन्म, ज्ञान तथा मृत्यु का प्रतीक है

➤ कमल, पीपल तथा स्तुप

123. बुद्ध के घोड़ा तथा सारथी का नाम था

➤ छंदव तथा चाण

124. बुद्ध के प्रथम गुरू थे

➤ आलारकलाम

125. बुद्ध ने सर्वाधिक उपदेश दिए थे

➤ श्रावस्ती (कौशल प्रदेश की राजधानी) में

126. बौद्ध धर्म के त्रिरत्न है

➤ बुद्ध, धम्य और संघ

127. 80 वर्ष की अवस्था में बुद्ध की मृत्यु हुई थी

➤ कुशीनगर (उत्तर प्रदेश, 483 ई०पू०) में

128. बुद्ध की मृत्यु की घटना कहलाया

➤ महापरिनिर्वाण

129. बौद्ध संघ में प्रवेश पाने को कहा जाता था

➤ उपसम्पदा

130. बुद्ध के अनुयायी शासक थे

➤ बिम्बिसार, प्रसेनजित, अशोक एवं उदयन 

131. पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) नगर की स्थापना की थी

➤ उदयिन ने (गंगा एवं सोन नदी के संगम पर)

132. बौद्ध धर्म का परम लक्ष्य है

➤ निर्वाण (अर्थ- दीपक का बुझ जाना)

133. बौद्ध संघ में प्रवेश करने वाली पहली महिला थी

➤ सौतेली माँ प्रजापति गौतमी

134. ‘आजीवक सम्प्रदाय’ के प्रवर्तक थे

➤ मक्खलीपुत्र गोसाल

135. महावीर एवं बुद्ध दोनों ने उपदेश दिए थे

➤ बिम्बिसार के शासनकाल में

136. आष्टागिक मार्ग का संबंध है

➤ बौद्ध धर्म से

137. प्रथम बौद्ध संगीति महाकश्यप की अध्यक्षता में हुआ था

➤ 483 ई० पू० (राजगृह में, अजातशत्रु के काल में)

138. द्वितीय बौद्ध संगीति सबाकामी की अध्यक्षता में हुआ था

➤ 383 ई० पू० (वैशाली में, कालाशोक के समय

139. तृतीय बौद्ध संगीति मोग्गालिपुत्ततिस्स की अध्यक्षता में हुआ था

➤ 251 ई० पू० (पाटलिपुत्र में, अशोक के समय)

140. चतुर्थ बौद्ध संगीति वसुमित्र व अश्वघोष की अध्यक्षता में हुआ था

➤ प्रथम शताब्दी (कश्मीर में, कनिष्क के समय)

141. हर्यक वंश (544-412 ई० पू०) का प्रथम शक्तिशाली शासक था

➤ बिम्बिसार

142. हर्यक वंश का अंतिम शासक था

➤ नागदशक (उ‌दयन का पुत्र)

143. शिशुनाग वंश का संस्थापक तथा अंतिम शासक था

➤ क्रमशः शिशुनाग तथा नन्दीवर्द्धन

144. नन्द वंश का संस्थापक था

➤ महापद्मनन्द (उग्रसेन)

145. नन्द वंश का अंतिम शासक था

➤ धनानन्द (अग्रमीज)

146. भारत पर प्रथम विदेशी आक्रमण किया था

➤ ईरानीयों ने (दूसरा आक्रमण- सिकन्दर ने)

147. सिकन्दर (यूनानी) ने भारत विजय का अभियान प्रारंभ किया

➤ 326 ई० पू०

148. मगध की प्रारंभिक राजधानी थी

➤ गिरिवज्र (राजगृह)

149. सिकन्दर और पोरस के बीच के युद्ध को कहा जाता है

➤ हाइडेस्पीज (वितस्ता या झेलम) का युद्ध

150. सिकन्दर की मृत्यु हुई थी

➤ बेबीलोन में (323 ई० पू०)

151. ‘कश्मीर के इतिहास’ से संबंधित पुस्तक है

➤ राजतरंगनी (रचयिता-कल्हण)

152. ‘अष्टाध्यायी’ के (संस्कृत भाषा में व्याकरण की प्रथम पुस्तक) लेखक है

➤ पाणिनी

153. इस्लाम धर्म के संस्थापक थे

➤ हजरत मुहम्मद

154. हजरत मुहम्मद का जन्म हुआ था

➤ मक्का में (570 ई० को)

155. हिजरी संवत् की शुरूआत हुई थी

622 ई० में

156. हजरत मुहम्मद की मृत्यु हुई थी

➤ 8 जून 632 ई० को (मदीना में)

157. सिकन्दर (अलेक्जेन्डर) का जन्म-मृत्यु हुआ था

➤ 356-323 ई० पू० (पिता-फिलिप)

158. सिकन्दर (गुरू- अरस्तु) का सेनापति था

➤ सेल्युकस निकेटर

159. विपासा नदी के नाम से जाना जाता है

➤ व्यास नदी को

160. नंद वंश के पतन तथा मौर्य वंश के उत्थान की जानकारी मिलती है

➤ मुद्राराक्षस में (विशाखदत्त रचित)

161. भारतीय पटल पर आर्य उभरे थे

➤ 2500-1500 ई० पू०

162. आर्य लोग भारत आये थे

➤ मध्य एशिया (यूराल पर्वत) से

163. आर्य सर्वप्रथम बसे थे

➤ पंजाब एवं अफगानिस्तान में

164. आर्यों का मुख्य पेय, व्यवसाय तथा धातु था

➤ क्रमशः सोमरस, पशुपालन तथा लोहा

165. आर्यों का सर्वाधिक प्रिय देवता तथा पशु था

➤ क्रमशः इंद्र एवं घोड़ा

166. आर्यों की मूल भाषा थी

➤ संस्कृत

167. मूर्ति पूजा का प्रारंभ हुआ था

➤ उत्तर वैदिक काल (1000-600 ई० पू०) में

168. इस्लाम जगत में ‘खलीफा’ पद को समाप्त करने वाला शासक था

➤ मुस्तफा कमालपाशा (1924 में)

169. मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म हुआ था

➤ 345 ई० पू० (मृत्यु-298 ई० पू०)

170. चन्दाप्त मौर्य ने मौर्य वंश की नींव डाली थी

➤ धनानन्द को पराजित कर (अंतिम नन्द शासक)

171. अर्थशास्त्र (राजनीति पर आधारित पुस्तक) के लेखक है

➤ चाणक्य (कौटिल्य)

172. अर्थशास्त्र (संस्कृत) की तुलना किससे की जाती है

➤ अरस्तु की ‘पॉलिटिक्स’ एवं मैकियावेली की ‘प्रिंस’

173. चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरू और महामंत्री थे

➤ चाणक्य (विष्णुगुप्त)

174. सर्वप्रथम भारत को इंडिया से संबंधित किया

➤ यूनानीयों ने

175. चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैनधर्म की शिक्षा ली थी

➤ भद्रबाहु से

176 बन्द्रगुप्त के दरबार में आने वाला प्रसिद्ध यूनानी था

➤ मेगास्थनीज (सेल्युकस निकेटर का राजदूत)

177. ‘चंद्रगुप्त’ शब्द का पहला उल्लेख मिलता है

➤ रूद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख में

178. चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु हुई थी

➤ 298 ई० पू० श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में

179. बिन्दुसार के अन्य नाम है

➤ अमित्रघात्, अमित्रकोड्स, सिंह सेन

180. ‘इंडिका’ पुस्तक को लिखा था

➤ मेगास्थनीज ने

181. भारत में शिलालेख का प्रचलन शुरू किया था

अशोक ने

182. अशोक का नाम ‘अशोक’ किस अभिलेख में मिलता है

➤ मॉस्की (आंध्र प्रदेश) एवं गुर्जरा (मध्य प्रदेश)

183. साँची का स्तुप (मध्य प्रदेश) बनवाया था

➤ अशोक ने

184. श्रीनगर की स्थापना किया था

➤ अशोक ने (वितस्ता नदी के तट पर)

185. अशोक के गुरू थे

➤ मोगलिपुत्रतिस्स

186. अशोक ने बौद्ध धर्म को दीक्षा ली थी

उपगुप्त से

187. अशोक का सबसे छोटा अभिलेख है

➤ रूम्मनदेई अभिलेख

188. अशोक का सबसे बड़ा स्तंभ लेख है

➤ 7वाँ स्तम्भ लेख

189. अशोक का अन्य नाम था

➤ देवनाम प्रिय और प्रियदर्शी

190. अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार (पाली भाषा में) के लिए श्रीलंका भेजा था

➤ पुत्र महेन्द्र एवं पुत्री संघमित्रा को

191. अशोक के शिलालेख की खोज की थी

➤ टी फैन्थलर ने (1750 ई० में)

192. अशोक के अभिलेख को सर्वप्रथम पढ़ा था

➤ जेम्स प्रिसेंप ने (1837 ई० में)

193. पुसणों में अशोक को कहा गया है

➤ अशोकवर्द्धन

194. अशोक के कुल शिलालेखो की संख्या है

➤ 14

195. अशोक ने ‘धम्म’ स्वीकार किया था

➤ कलिंग युद्ध (261 ई०पू०) के बाद

196. मौर्य वंश का अंतिम शासक था

➤ वृहद्रथ

197. अशोक का राज्याभिषेक हुआ था

269 ई० पू० (पिता-बिन्दुसार, माता-सुभद्रांगी)

198. सर्वप्रथम सोने के सिक्के चलाने का श्रेय जाता है

➤ इण्डो-ग्रीक (यूनानी शासकों को)

199. अशोक के कलिंग युद्ध का वर्णन है

➤ 13वें अभिलेख में

200. शुंग वंश का संस्थापक तथा अंतिम शासक था

➤ क्रमशः पुष्यमित्र शुंग तथा देवभूति

201. दो अवश्वमेघ तथा एक राजसूय यज्ञ किया था

➤ गौतमी पुत्र शातकर्णी ने

202. खरोष्ठी लिपि लिखी जाती है

➤ दाईं ओर से बाई ओर

203. कण्व वंश का संस्थापक तथा अंतिम शासक था

➤ वसुदेव तथा सुशर्मा कण्व

204. सातवाहन वंश (आंध्र प्रदेश) की नींव डाली थी

➤ सिमुक ने

205. सर्वप्रथम सीसे के सिक्के का प्रचलन किया था

➤ सातवाहन शासक ने

206. कुषाण वंश का सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक था

➤ कनिष्क

207. शक संवत् का प्रारंभ किया था

➤ कनिष्क ने (78 ई० में)

208. कनिष्क की प्रथम राजधानी थी

➤ पुरुषपुर या पेशावर (दूसरा-मथुरा)

209. कनिष्क का राजकवि तथा राजवैद्य था

क्रमशः अश्वघोष तथा चरक

210. भारतीयों के लिए महान ‘सिल्क मार्ग’ को आरंभ कराया था

➤ कनिष्क ने

211. ‘भारत का आइन्स्टीन’ कहा जाता है

➤ नागार्जून (शुन्यवाद के प्रवर्त्तक) को

212. गंधार शैली तथा मथुरा शैली का विकास हुआ था

➤ कनिष्क के शासन काल में

213. कुषाण वंश का अंतिम राजा था

➤ वासुदेव

214. गुप्तवंश का संस्थापक था

➤ श्री गुप्त

215. भारतीय इतिहास में ‘स्वर्ण युग’ के नाम से जाना जाता है

➤ गुप्त काल को

216. गुप्त वंश का प्रथम महान सम्राट था

➤ चन्द्रगुप्त प्रथम

217. भारत का नेपोलियन कहा जाता है

➤ समुद्रगुप्त को (चन्द्रगुप्त प्रथम का उतराधिकारी)

218. समुद्रगुप्त का दरबारी कवि था

➤ हरिषेण

219. समुद्रगुप्त का उत्तराधिकारी हुआ

➤ चन्द्रगुप्त-॥ (विक्रमादित्य)

220 चीनी यात्री फाह्यान (399-414 ई०) भारत आया था

➤ चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में

221. चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के दरबार में प्रसिद्ध कवि व नाटककार थे

➤ कालिदास

222. नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की थी

➤ कुमार गुप्त ने (विक्रमादित्य का उत्तराधिकारी)

Ancient History

223. अंतिम गुप्त शासक था

➤ भानुगुप्त

224. सर्वाधिक स्वर्ण मुद्राएँ जारी किए थे

➤ गुप्त राजाओं ने

225. मंदिर निर्माण की कला का जन्म हुआ था

➤ गुप्तकाल में

226. मेहरौली (दिल्ली) में स्थित राजाचन्द्र के लौह स्तंभ को बनवाया था

➤ चन्द्रगुप्त द्वितीय ने

227. गुप्तकाल के खगोलविद् थे

➤ वाराहमिहिर

228. पुष्यभूति वंश का संस्थापक था

➤ नरवर्द्धन (महत्त्वपूर्ण शासक- हर्षवर्द्धन)

229. चीनी यात्री ह्वेंसांग  (630-644 ई०) भारत आया था

➤ हर्षवर्धन के शासनकाल में

230. हर्षवर्धन का दरबारी कवि था

➤ बाणभट्ट (हर्षचरित के लेखक)

231. हर्षवर्धन को दक्षिण भारत के शासक पुलकेशिन द्वितीय ने हराया था

➤ नर्मदा नदी किनारे (630 ई० में)

232. वर्धन वंश (पुष्यभूति) की राजधानी थी

➤ थानेश्वर

233. भूमि देने की सामंती प्रथा प्रारंभ की थी

➤ हर्ष ने

234. पल्लव वंश का संस्थापक तथा प्रथम शासक था

➤ सिंहविष्णु (राजधानी- तमिलनाड में काँचीपुरम्)

235. पल्लव वंश का अंतिम शासक था

➤ अपराजित (879-897 ई०)

236. महाबलीपुरम् के एकाश्मक रथों का निर्माण करवाया गया था

➤ पल्लव राजा नरसिंह वर्मन प्रथम द्वारा

237. काँची के कैलाशनाथ मंदिर (राजसिद्धेश्वर मंदिर) का निर्माण करवाया था

➤ पल्लव राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय ने

238. राष्ट्रकुट राजवंश का संस्थापक था

➤ दंतिदुर्ग (752 ई०)

239. राष्ट्रकुट वंश का अंतिम महान शासक था

➤ कृष्ण तृतीय

240. एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मंदिर का निर्माण करवाया था

➤ कृष्ण प्रथम (राष्ट्रकुट वंश) ने

241. राष्ट्रकुट राजवंश की राजधानी थी

➤ मान्यखेट

242. विक्रमशीला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी

➤ धर्मपाल ने (पाल वंश)

243. कल्याणी के चालुक्य वंश की स्थापना की थी

➤ तैलप-॥ ने (राजधानी- मान्यखेट)

244. वातापी के चालुक्य वंश की स्थापना की थी

➤ जयसिंह  ने (राजधानी- वातापी)

245. वेंगी के चालुक्य वंश का संस्थापक था

➤ विष्णुवर्धन

246. हिन्दु विधि की पुस्तक मीताक्षरा’ की रचना की थी

➤ विज्ञानेश्वर (विक्रमादित्य-VI के दरबारी)

247. चोल वंश का संस्थापक था

➤ विजयालय (राजधानी- तंजौर)

248. चोल वंश का अंतिम राजा था

➤ राजेन्द्र-III

249. गंगो की प्रारंभिक राजधानी थी

➤ कोलर (बाद में- तलकाडु)

250. पाल वंश का संस्थापक था

➤ गोपाल (राजधानी- मुंगेर)

251. सेनवंश का संस्थापक था

➤ सामन्त सेन (राजधानी- लखनौती)

252. सेनवंश का अंतिम प्रसिद्ध शासक था

➤  लक्ष्मण सेन

253. ‘गीत गोविन्द’ के रचयिता ‘जयदेव’ दरबारी कवि थे

➤ लक्ष्मण सेन के

254. महमूद गजनवी ने 1025 ई० में सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था

➤ भीम प्रथम के शासन काल में (सोलंकी वंश)

255. सोलंकी वंश का संस्थापक तथा अंतिम शासक था

➤ क्रमश: मूलराज प्रथम तथा कुमार पाल

256. गहड़वाल वंश का संस्थापक था

➤ चंद्रदेव

257. दिल्ली नगर की स्थापना की थी

➤  तोमर नरेश अंगपाल ने (11वीं शताब्दी में)

258. चौहान वंश का संस्थापक था

➤ वासुदेव

259. चौहान वंश का अंतिम शासक था

➤ पृथ्वीराज ।।। (पृथ्वीराज चौहान)

260. पृथ्वीराज चौहान एवं मुहम्मद गोरी के बीच तराईन का प्रथम युद्ध हुआ था

➤ 1191 ई० में (विजयी- पृथ्वी राज चौहान)

261. पृथ्वीराज चौहान एवं मुहम्मद गोरी के बीच तराईन का दूसरा युद्ध हुआ था

➤ 1192 ई. में (विजयी- मुहम्मद गौरी)

262. ‘पृथ्वीराज रासो’ के रचयिता थे

➤ चन्दवरदाई (पृथ्वीराज चौहान का राजकवि)

263. महमुद गजनवी ने 1001 से 1027 के बीच भारत पर आक्रमण किया था

➤ 17 बार

264. चंदेल वंश का संस्थापक था

➤ नन्नुक (प्रारंभिक राजधानी- कालिंजर)

265. खजुराहों के मंदिरों (1000 वर्ष पुराना) का निर्माण करवाया था

➤ चंदेल शासकों ने

266. विजय स्तंभ का निर्माण करवाया था

➤ राणा कुम्भा ने (चित्तौड़ में)

267. भारत पर प्रथम मुस्लिम आक्रमण हुआ था

➤ अरबों द्वारा (712 ई० में)

268. होयसल वंश (यादवों की एक शाखा) की राजधानी थी

➤ द्वार समुद्र

269. सोमवार मंदिर का पुननिर्माण कराया था

➤ कुमारपाल ने

270. पुलकेशिन द्वितीय पराजित हुआ था

➤ नरसिंहवर्मन प्रथम (पल्लव शासक) द्वारा

271. पाण्ड्यों का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र था

➤ मदुरै

272. पंजाब के हिन्दू शाही राजवंश को स्थापित किया था

➤ कल्लर ने

273. चोल वंश का अंतिम शासक था

➤ राज राजा द्वितीय

274. मौर्य साम्राज्य में प्रचलित मुद्रा का नाम था

➤ पण

275. बिम्बिसार के समय में मगध की राजधानी थी

➤ राजगृह

276. अरबों ने भारत पर सफल आक्रमण किया था

➤ मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व (712 ई०) में

277. ओदन्तपुरी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी

➤ गोपाल ने (पालवंश के संस्थापक)

278. मंदिर निर्माण कला में विमान शैली का प्रचलन हुआ था

चोल शासन काल में

279. ‘योग दर्शन’ तथा ‘सांख्य दर्शन’ के प्रवर्तक थे

➤ क्रमशः पंतजलि तथा कपिल मुनि

280. ‘न्याय दर्शन’ तथा ‘पूर्व मीमांसा दर्शन’ के प्रवर्तक थे

➤ क्रमशः गौतम तथा जैमिनी

281. ‘लिंगायत दर्शन’ के प्रवर्तक थे

➤ वासवराज

282. शुन्यवाद के प्रतिपादक है

➤ नागार्जून

283. भुवनेश्वर (उड़ीसा) में लिंगराज मंदिर का निर्माण (11वीं शदी में) करवाया था

➤ राजा ययाति केसरी ने

284. पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ के मंदिर को बनवाया था

➤ राजा अवन्तिवर्मन ने (11वीं सदी में)

285. विख्यात तट मंदिर (मामल्लपुरम् में) को बनवाया था

➤ पल्लव शासक नरसिंह वर्मन द्वितीय ने

286. मदुरई स्थित मीनाक्षी मंदिर का निर्माण करवाया था

➤ मदुरा नरेश तिरूमल्लाई नायक ने

287. कोणार्क के सूर्य मंदिर को बनवाया था

➤ नरसिंह देव प्रथम ने (1238-64 ई० में)

288. तंजौर में वृहदेश्वर (राजराजेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया था

➤ राज राज-। ने

289. माउंट आबू पर्वत पर दिलवाड़ा का प्रसिद्ध जैन मंदिर को बनवाया था

➤ भीम प्रथम के सामंत (बड़ा किसान) बिमल ने

290. अष्टछाप की स्थापना की थी

➤ आचार्य विट्ठलनाथ ने

291. भारत में चिश्ती सिलसिले की शुरूआत की थी

➤ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने

292. मोहम्मद साहब के जन्म पर मनाया जाने वाला पर्व है

➤ ईद-ए-मिलाद-उनवी

293. बेलूर और हेलबिड में मंदिर का निर्माण करवाया था

➤ होयसलों ने (12वीं शताब्दी में)

294. बीजापुर के गोलगुम्बज मकबरा है

➤ मोहम्मद आदिल शाह का

295. हैदराबाद स्थित चारमीनार का निर्माण करवाया था

➤ मुहम्मद कुली कुतुबशाह ने

296. पुष्टिमार्ग के दर्शन की स्थापना की थी

➤ बल्लभाचार्य ने

297. विशिष्ट द्वैत सिद्धांत के प्रतिपादक थे

➤ रामानुजम

298. अद्वैतवाद सिद्धांत तथा द्वैता द्वैतवाद सिद्धांत के प्रतिपादक थे

➤ क्रमशः श्री शंकराचार्य तथा निम्बकाचार्य

299. द्वैतवाद तथा शुद्धाद्वैत सिद्धांत के प्रतिपादक थे

➤ क्रमशः माधवाचार्य तथा बल्लभाचार्य


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6. Concept of Resources(संसाधनों की अवधारणा)

6. Concept of Resources

(संसाधनों की अवधारणा)



संसाधन का अर्थ

     प्रकृति के वे सभी पदार्थ या वस्तुएँ जो मानवजीवन की परिसंपत्ति (assets) बन जाएँ, संसाधन ( resources) कहलाती हैं। दूसरे शब्दों में, पर्यावरण के वे सारे पदार्थ जो मानवजीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति तथा सुख-सुविधा प्रदान करने के लिए उपयोगी हों, संसाधन हैं। ये अवयव प्रकृति में विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं।

मानव-एक संसाधन के रूप में

      मानव शरीर स्वयं भी सबसे बड़ा संसाधन है, क्योंकि इससे जीवन के अनेक कार्य किए जाते हैं; जैसे- बोझा ढोना, कार्यालय का काम आदि। मानव स्वयं ही अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपने शरीर और अपनी विभिन्न तकनीकों का उपयोग करता है तथा प्रकृति की अन्य वस्तुओं का भी उपयोग करने के लिए अपनी कार्यात्मकता, अर्थात कार्य करने की योग्यता का विकास करता है।

        मानवीय क्रियाकलाप सर्वाधिक महत्त्व के हैं। मानव न रहे तो सारे पदार्थ या धन यों ही पड़े रह जाएँगे। अपने अनुपम साहस, अपितु दुःसाहस, पराक्रम, शौर्य, संघर्षशीलता, ज्ञान, विलक्षण प्रतिभा, जिज्ञासा और सूझ-बूझ, अन्वेषण करने की तीव्र उत्कंठा इत्यादि गुणों के कारण मनुष्य सभी प्रकार के संसाधनों में सर्वोच्च स्थान रखता है। यह स्वयं संसाधन होते हुए भी संसाधनों का उपभोक्ता भी है।

मानव-सभी प्रकार के संसाधनों के निर्माता के रूप में

        संसाधन के रूप में किसी पदार्थ का अस्तित्व उसकी उपयोगिता या उपयोगी कार्य/संक्रिया (function/operation) पर निर्भर करता है। कोई पदार्थ जब तक जीवन के लिए उपयोगी सिद्ध नहीं होता तब तक वह संसाधन नहीं कहलाता।

       छोटानागपुर पठार के खनिज भंडार का युगों तक कोई महत्त्व न था, अतः वे खनिज पदार्थ संसाधन न बन पाए। किंतु, जब खनिजों का महत्त्व समझा जाने लगा और लोगों ने अपनी कुशलता का प्रदर्शन कर उनका निष्कासन आरंभ किया तथा उपयोग करने लगा तब वे खनिज संसाधन बन गए। इन खनिजों ने छोटानागपुर क्षेत्र को आर्थिक विकास का सुअवसर प्रदान किया।

Concept of Resources

       इसी तरह, पश्चिमी घाट के पश्चिमी भाग में जोग जलप्रपात (Jog Falls) युगों तक जल की धारा बहाता रहा, किंतु जब शक्ति के विकास में उसका उपयोग जलविद्युत उत्पादन के लिए किया जाने लगा तब वह संसाधन के रूप में उभर आया।

        नदियाँ तभी संसाधन बन पाती हैं जब मानव उनका उपयोग सिंचाई में, जलविद्युत उत्पादन में, मत्स्योद्यम में, जल यातायात में और ऐसी ही अनेक आर्थिक क्रियाओं में करने लगता है। भूगोलवेत्ता जिम्मरमैन ने ठीक ही कहा था कि- “संसाधन हुआ नहीं करते, बना करते हैं।”

संसाधनों का महत्त्व

         विश्व में अनेक पदार्थ बिखरे पड़े हैं। मानव पहले उनका पता लगाता है, फिर वह अपनी बुद्धि, प्रतिभा, क्षमता, तकनीकी ज्ञान और कुशलता अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, अपने आर्थिक विकास के लिए, उनके उपयोग की योजना बनाता है और उनका उपयोग करता है।

         उपयोग में लाकर ही वह उन्हें संसाधन बना पाता है। मनुष्य के आर्थिक विकास के लिए संसाधनों की उपलब्धि अत्यावश्यक है। संसाधनों का महत्त्व इसी तथ्य से स्पष्ट होता है कि इनकी खोज और प्राप्ति के लिए ही मनुष्य कठिन से कठिन परिश्रम करता है। दुर्गम मार्गों पर चलकर दुःसाहसिक यात्राएँ करता है। विश्व के प्रायः सभी युद्ध इन्हीं संसाधनों को पाने या छीनने के लिए हुए हैं।

संसाधनों की परिभाषा

        संसाधन को कई रूपों में पारिभाषित किया जा सकता है। मनुष्य अपने जीवन को सुखद-समृद्ध बनाने तथा अपने आर्थिक विकास के लिए जिन वस्तुओं का उपयोग करता है, उनका निर्माण कुछ मूलभूत पदार्थों से होता है। इन मूलभूत पदार्थों को संसाधन कहते हैं।

        हमारे वातावरण में विद्यमान वे सभी पदार्थ जो हमें उपलब्ध हो तथा हमारे जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके, वे केवल उसी स्थिति में संसाधन कहे जा सकते हैं जब हमें उन तक पहुँचने की तकनीक ज्ञात हो साथ ही, उनके परिष्करण और परिवर्द्धन के विभिन्न स्तरों पर होनेवाले खर्चे के लिए हमारे पास पर्याप्त धन हो, श्रमशक्ति हो तथा उनके उपयोग करने पर भी हमारी संस्कृति और परंपरा अक्षुण्ण रह सके।

        वस्तुतः, व्यापक रूप से मनुष्य की इच्छाओं और आवश्यकताओं की पूर्ति करनेवाले सभी पदार्थ संसाधन कहे जा सकते हैं। मनुष्य अपनी व्यापक समझ और सूझ-बूझ से अपने तथा विश्व के वातावरण को बिना प्रभावित किए जिन प्रकृतिप्रदत्त वस्तुओं का उपयोग और उपभोग करता है तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखता है उन्हें ही मूलरूप से संसाधन कहा जाता है।

         कोई गायक, चित्रकार या साहित्यकार अपने क्रियाकलाप से धन कमाता है तो ये कार्य भी संसाधन कहलाते हैं।

संसाधनों का वर्गीकरण

         संसाधनों का वर्गीकरण विभिन्न दृष्टिकोणों से किया जाता है। कुछ वर्गीकरण निम्नलिखित हैं:-

(क) उपलब्धता के आधार पर प्रकृतिप्रदत्त और मानवकृत,

(ख) स्रोत या उत्पत्ति के आधार पर जैविक और अजैविक,

(ग) पुनः प्राप्ति के आधार पर नवीकरणीय और अनवीकरणीय,

(घ) स्वामित्व के आधार पर निजी, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय,

(ङ) विकास के स्तर के आधार पर- संभाव्य, ज्ञात, भंडारित और संचित,

(क) प्रकृतिप्रदत्त और मानवकृत संसाधन:-

       प्रकृति में उपस्थित पदार्थों के साथ ही जलवायु, उच्चावच जैसी भौगोलिक परिस्थितियाँ जो मनुष्य के क्रियाकलापों पर व्यापक प्रभाव डालती है, उन्हें प्रकृतिप्रदत्त या प्राकृतिक संसाधन कहा जाता है। परंतु, केवल उसी स्थिति में जब उन्हें प्राप्त करने और परिष्कृत एवं परिवर्द्धित करने की व्यापक तकनीक उपलब्ध हो तथा उन्हें उपयोगी बनाने हेतु की जानेवाली विभिन्न प्रक्रियाओं के अंतर्गत होनेवाले खर्च को वहन करने के लिए समुचित धन जुटाने की क्षमता हो।

       इसी प्रकार, भवन, सड़कें, रेल लाइनें, विभिन्न प्रकार के निर्मित सामान तथा शिक्षण-प्रशिक्षण, खोज और विकास की विभिन्न संस्थाएँ मानवकृत संसाधन कहलाते हैं।

        व्यावहारिक रूप में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग मानवीय क्रियाकलापों के प्रथम चरण में किया जाता है, जिसके उपरांत द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थ कोटि के क्रियाकलापों में मुख्यतः मानवकृत संसाधनों का उपयोग किया जाता है।

(ख) जैविक और अजैविक संसाधन:-

        जीवमंडल में विद्यमान और उससे प्राप्त होनेवाले विभिन्न प्रकार के जीव जैसे पक्षी, मछलियाँ, पेड़-पौधे और स्वयं मानव भी जैविक संसाधन कहे जाते हैं। जीव जगत के जीवित सदस्यों में संतानोत्पत्ति की क्षमता होती है। अनुकूल प्राकृतिक परिस्थतियों में ये नई संतानों को उत्पन्न करते रहते हैं। अतः, सभी जैविक संसाधन नवीकरणीय संसाधन होते हैं।

      इसी प्रकार, वातावरण में उपस्थित सभी प्रकार के निर्जीव पदार्थ; जैसे- खनिज, चट्टानें, मिट्टी, नदियाँ, पर्वत इत्यादि अजैविक संसाधन कहे जाते हैं।

(ग) नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधन:-

           वातावरण में उपलब्ध सूर्य का प्रकाश, हवा, तालाब, झीलें, नदियाँ और समुद्र, मछलियाँ, पेड़-पौधे, उनपर बसेरा लगाए हुए पक्षी एवं वन्य जीव सभी नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं, क्योंकि या तो वे प्राकृतिक रूप से स्वतः उपलब्ध होते हैं या विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक, भौतिक, रासायनिक या जैविक प्रक्रियाओं द्वारा उत्पन्न होते रहते हैं। इनमें से वन और वन्य जीव-जंतु, तालाबों और समुद्रों में एकत्रित जल हमेशा उपलब्ध होते हैं। अतः, इन्हें सतत उपलब्ध संसाधन कहते हैं।

        सूर्य का प्रकाश वर्ष के कुछ दिनों में प्रचुर मात्रा में मिलता है जबकि वर्षाकाल या अन्य कारणों से कुछ दिनों तक या तो कम उपलब्ध होता है अथवा उसकी तीव्रता कम रहती है। इसी प्रकार, नदियों में बहता जल वर्षाऋतु में बाहर निकलकर बाढ़ के रूप में अभिशाप बन जाता है और संसाधन के रूप में नहीं रह पाता है। हवा भी समान गति से उपलब्ध नहीं रहती और आँधी-तूफान में यह लाभप्रद होने के स्थान पर हानिकारक हो जाती है। इन प्रकार के संसाधनों को प्रवहनीय संसाधन कहते हैं।

         कोयला और पेट्रोलियम लाखों वर्षों की जटिल जैव-रासायनिक तथा अन्य भौतिक-रासायनिक प्रक्रियाओं के फलस्वरूप बने है और पृथ्वी के अंदर उनका भंडार जहाँ-तहाँ जमा हो गया है।

         धात्विक खनिजों के साथ भी यही स्थिति है। इनका संचित भंडार सीमित है तथा इन्हें अल्पकाल में कृत्रिम रूप से पुनः बनाना प्रायः असंभव है, अर्थात एक बार इनके समाप्त हो जाने के बाद पुनः इन्हें प्राप्त करना संभव नहीं। ऐसे संसाधनों को अनवीकरणीय संसाधन कहा जाता है।

          कुछ धातुओं को बार-बार पिघलाकर शोधित करके प्रयोग किया जा सकता है, अर्थात इनका चक्रीकरण हो सकता है जबकि कोयले और तेल को जला देने पर प्राप्त राख से कोयला एवं तेल नहीं बन सकता। इनका उपयोग केवल पुनः एक ही बार हो सकता है। इन्हें अचक्रीय संसाधन कहते हैं।

(घ) निजी, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संसाधन:-

       स्वामित्व के आधार पर संसाधन निजी, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय होते हैं। इनका विवरण निम्नलिखित है-

(i) निजी संसाधन-

        उपयोग की अनेक वस्तुएँ; जैसे- कृषि भूमि, उद्यान, मकान, कार, मोटर साइकिल, मोबाइल फोन इत्यादि निजी संसाधन हैं। इनका स्वामी अपनी इच्छानुसार इनका किसी प्रकार से किसी भी समय उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होता है।

(ii) सामुदायिक संसाधन-

       सामुदायिक संसाधन वे संसाधन हैं जिनका उपयोग समुदाय, गाँव और नगर के सभी लोगों के लिए सुलभ हो। गाँवों में चरागाह, खेल के मैदान, तालाब, श्मशान भूमि, साप्ताहिक बाजारों की भूमि, पंचायत भवन, विद्यालय, पर्यटन स्थल इत्यादि सामुदायिक संसाधन हैं।

(iii) राष्ट्रीय संसाधन-

        वैधानिक रूप से किसी राज्य या देश की सीमा के अंदर सभी प्रकार के संसाधनों पर उस राज्य या देश का स्वामित्व होता है। कृषि भूमि को निजी माना जा सकता है, क्योंकि सरकार के द्वारा इसपर खेती करने अथवा निजी उपयोग के लिए किसानों और उपभोक्ताओं को अधिकृत किया गया है जिसके बदले उनसे लगान अथवा अन्य कर लिए जाते हैं।

         प्राचीनकाल में राजाओं को राज्य की संपत्ति का स्वामी माना जाता था। वर्तमान काल में यह अधिकार सरकार के पास है, इसीलिए आवश्यकता पड़ने पर सरकार द्वारा सड़क या रेल लाइन बिछाने, नहरों और कारखानों के निर्माण इत्यादि कार्य के लिए किसी भी भूमि का अधिग्रहण कर लिया जाता है। इसके बदले सरकार कुछ मुआवजा राशि भी देती है तथा विस्थापितों के पुनर्वास का प्रबंध किया जाता है, क्योंकि नागरिकों को यह सुविधा प्रदान करना सरकार का प्रमुख उत्तरदायित्व भी है। सागरतटों के पास 12 समुद्री मील, अर्थात 19.2 किलोमीटर तक के महासागरीय क्षेत्र में पाए जानेवाले संसाधन भी देश की संपत्ति हैं।

(iv) अंतरराष्ट्रीय संसाधन-

       पृथ्वी के अधिकांश भाग में सागर और महासागर हैं। यथार्थ में मात्र 29 प्रतिशत भूतल ही विभिन्न राष्ट्रों की राष्ट्रीय संपत्ति है और शेष 71 प्रतिशत भाग किसी की अपनी संपत्ति नहीं है। ज्ञातव्य है कि जलीय जीवों के साथ ही विभिन्न संसाधनों का विपुल भंडार इन समुद्रों में विद्यमान है। इनके उपयोग के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, सागरतट से 200 किलोमीटर तक के महासागरीय क्षेत्र को किसी देश का अपवर्जक आर्थिक क्षेत्र माना जाता है जहाँ से मछलियाँ पकड़ने तथा भूतल से धातुएँ एवं अन्य वस्तुएँ प्राप्त करने का उसे अधिकार है, परंतु अन्य देशों के जहाजों के परिवहन अथवा अन्य उपयोगों की भी स्वतंत्रता रहती है।

(ङ) संभाव्य, ज्ञात, भंडारित और संचित संसाधन-

       विकास के स्तर के आधार पर संसाधनों की निम्नलिखित चार श्रेणियाँ होती हैं-

(i) संभाव्य संसाधन-

       ऐसे सभी संसाधन जिनका उपयोग किया जा सके, भले ही उचित तकनीक, अर्थाभाव या अन्य किसी कारण से उनका उपयोग नहीं होता हो, संभाव्य संसाधन कहे जाते हैं। उदाहरणस्वरूप, भारत में पेट्रोलियम मिलने की संभावना पूर्वी और पश्चिमी तटों के साथ ही असम, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान इत्यादि अनेक स्थानों पर है, परंतु केवल असम तथा पश्चिमी घाट के पास से लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम निकाला जा सका है।

        इसी प्रकार, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, सागरीय ज्वार ऊर्जा इत्यादि के लिए भारत में अपार संभावना है, परंतु कुछ ही स्थानों पर इनका उपयोग हो पाता है सस्ती, सुगम तकनीक के विकास से इनके उपयोग की बड़ी संभावना है अन्वेषण या सर्वे (survey) विभाग द्वारा इनकी खोज की जाती है।

(ii) ज्ञात संसाधन-

        जिन संसाधनों को ढूंढकर उनका उपयोग किया जाता हो उन्हें ज्ञात संसाधन कहते हैं, जैसे असम, बॉम्बे हाई. गुजरात के तेल कूपों से पेट्रोलियम निकाला जा रहा है। ज्ञात संसाधन वे संसाधन है जिनकी तकनीक विकसित हो चुकी हो तथा सार्थक उपयोग ज्ञात हो।

(iii) भंडारित संसाधन-

      विकसित देशों ने ऐसी तकनीकों की खोज की है जिनसे पृथ्वी के अंदर उपस्थित खनिजों की पहचान संभव हो सकी है। विकसित देश कई किलोमीटर गहराई तक भूतल को भेदकर खनिज निकालते हैं जबकि भारत जैसे विकासशील देश एक किलोमीटर से अधिक गहराई तक नहीं खोद पाते। अविकसित देशों में तो इतना भी उपयोग नहीं हो पाता।

      अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका की नदियों की विपुल जल राशि व्यर्थ बहकर समुद्र में गिरती है, परंतु अपार संभावनाओं के बाद भी तकनीक और धन के अभाव में जलविद्युत का उत्पादन नहीं हो पाता। यह संसाधन भंडारित नहीं हो पाता है। वस्तुतः इसके विकास से ही अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन संभव है।

(iv) संचित संसाधन-

       कुछ संसाधन जिनके उपयोग करने की तकनीक ज्ञात हो, परंतु और सस्ती तकनीक के अभाव अथवा अन्य कारणों से उनका उपयोग वर्तमान में न होता हो तथा भविष्य में उपयोग करना संभव हो, उन्हें संचित संसाधन कहते हैं। अमेरिका के तटीय प्रदेशों में पेट्रोलियम का प्रचुर भंडार है, परंतु वह खाड़ी या अन्य देशों के पेट्रोलियम का उपयोग करता है। इन भंडारों के समाप्त होने पर ही अपने संचित भंडारों का उपयोग करेगा।

        इसी प्रकार, हाइड्रोजन गैस सर्वोत्तम ईंधन है और इसे पानी से प्राप्त किया जा सकता है। पानी नदी, तालाब और समुद्रों में आसानी से बड़ी मात्रा में उपलब्ध भी है। फिर भी, इसका उपयोग सीमित मात्रा में ही होता है, क्योंकि इसे पानी से अलग करना कुछ कठिन है। परंतु, पेट्रोलियम के सीमित भंडार के समाप्त होने पर एकमात्र हाइड्रोजन ईंधन ही ऊर्जा का प्रमुख साधन होगा। अभी इसे भंडारित संसाधन भी कहा जा सकता है और संचित भी।

         प्रायः, संचित भंडार के कुछ भाग को ज्ञात तकनीक द्वारा उपयोग में लाया जाता है और शेष भाग को भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखा जाता है। सिंचाई के लिए नदियों से नहरें निकाली जाती है, परंतु बरसात के दिनों में इनका उपयोग नहीं होता। खेतो में वर्षा जल प्राप्त होता हता है। इस समय नहरों में जमा जल संचित भंडा है जिसका उपयोग वर्षा के बाद सिंचाई के लिए किया जाता है।

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