8. Systematic Geography vs Regional Geography / क्रमबद्ध भूगोल बनाम प्रादेशिक भूगोल
Systematic Geography vs Regional Geography
(क्रमबद्ध भूगोल बनाम प्रादेशिक भूगोल)
परिचय (Introduction)
वारेनियस ने सत्रहवीं शताब्दी में भूगोल की जिन दो शाखाओं सामान्य भूगोल एवं विशिष्ट भूगोल की चर्चा किया वही आगे चलकर क्रमशः व्यवस्थित अथवा क्रमबद्ध भूगोल एवं प्रादेशिक भूगोल कहा जाने लगा। सामान्य या व्यवस्थित या क्रमबद्ध भूगोल सामान्य नियमों, सिद्धांतों एवं संकल्पनाओं के निर्माण से संबंधित है। इसे भौतिक भूगोल तक सीमित रखा गया है। यह विश्व को एक इकाई के रूप में अध्ययन करता है। इसमें भूगोल के किसी एक तत्व का अध्ययन विश्व के सारे ही भागों के लिए किया जाता है।
इसके विपरीत प्रादेशिक भूगोल में विश्व के किसी एक प्रदेश के तमाम भौगोलिक कारकों का अध्ययन किया जाता है।
चित्र:
हालाँकि ऐसे अध्ययनों को द्वैधता के अन्तर्गत रखना लाजिमी नहीं है क्योंकि ये एक-दूसरे के पूरक हैं विरोधी नहीं।
अर्थात संक्षेप में भूगोल एक ऐसा विषय है जो प्रकृति और मानव के बीच संबंधों का अध्ययन करता है। इसके विकास के दौरान यह प्रश्न उठा कि भूगोल का अध्ययन सामान्य नियमों के आधार पर किया जाए या विशिष्ट क्षेत्रों के आधार पर। इसी बहस से भूगोल की दो प्रमुख धाराएँ विकसित हुईं-
1. सामान्य/क्रमबद्ध भूगोल (General/Systematic Geography)
2. प्रादेशिक भूगोल (Regional Geography)
इस विभाजन को भूगोल में द्वैतवाद (Dichotomy) कहा गया।
बर्नहार्ड वेरेनियस (Bernhard Varenius) का योगदान:
17वीं शताब्दी में वेरेनियस ने सबसे पहले भूगोल को दो भागों में विभाजित किया-
(i) सामान्य / सार्वत्रिक भूगोल
✍️ इसमें सामान्य नियम, सिद्धांत और अवधारणाएँ शामिल हैं
✍️ सम्पूर्ण पृथ्वी को एक इकाई मानकर अध्ययन
✍️ प्राकृतिक नियमों पर आधारित
✍️ वैज्ञानिक और व्यवस्थित दृष्टिकोण
(ii) विशेष / प्रादेशिक भूगोल
✍️ किसी विशिष्ट क्षेत्र का अध्ययन
✍️ उस क्षेत्र की अनोखी (Unique) विशेषताओं पर बल
✍️ मानव और पर्यावरण के आपसी संबंधों का वर्णन
वेरेनियस ने सामान्य भूगोल को अधिक वैज्ञानिक, जबकि प्रादेशिक भूगोल को अधिक वर्णनात्मक माना।
सामान्य भूगोल (General Geography) की मुख्य विशेषताएँ:
✍️ पृथ्वी को एक समग्र इकाई के रूप में देखता है
✍️ सामान्य नियमों की खोज करता है
✍️ विश्लेषणात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
✍️ नियम-स्थापना (Law formulation) पर बल
अध्ययन के क्षेत्र:
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स्थलरूप (Landforms)
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जलवायु (Climate)
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मृदा (Soils)
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वनस्पति (Plants)
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जनसंख्या, आर्थिक, सामाजिक भूगोल आदि
👉 उदाहरण: पूरी दुनिया में मानसून प्रणाली का अध्ययन
प्रादेशिक भूगोल (Regional Geography) की मुख्य विशेषताएँ:
✍️ किसी विशेष क्षेत्र का समग्र अध्ययन
✍️ क्षेत्र की व्यक्तिगत पहचान (Individuality) पर जोर
✍️ प्राकृतिक + मानवीय तत्त्वों का समन्वित अध्ययन
✍️ वर्णनात्मक, तुलनात्मक और समग्र दृष्टिकोण
अध्ययन का केंद्र:
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क्षेत्र की अनोखी विशेषताएँ
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ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारक
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मानव–पर्यावरण अंतःक्रिया
✍️ उदाहरण: अफ्रीका का प्रादेशिक भूगोल
अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट (Humboldt)
✍️ तुलनात्मक अध्ययन के समर्थक
✍️ आगमनात्मक (Inductive) विधि पर विश्वास
✍️ विविधता में एकता (Unity in diversity) का सिद्धांत
✍️ प्राकृतिक भूगोल को वैज्ञानिक आधार दिया
✍️ उनकी प्रसिद्ध रचना “Kosmos” में सामान्य नियमों पर बल
कार्ल रिटर (Carl Ritter)
✍️प्रयोजनवादी (Teleologist) दृष्टिकोण
✍️ भूगोल को निगमनिक (Deductive) नहीं बल्कि आनुभविक (Empirical) विज्ञान माना
✍️ पृथ्वी को एक जीवित इकाई माना
✍️ “Terrestrial Unity” की अवधारणा
✍️ क्षेत्रीय समग्रता (Totality) पर जोर
✍️ उनका मानना था कि भूगोल का उद्देश्य केवल वर्णन नहीं, बल्कि नियमों की खोज है।
फ्रेडरिक रैटजेल (Friedrich Ratzel)
✍️ मानव–पर्यावरण संबंध पर बल
✍️ निगमनिक (Deductive) विधि पर विश्वास
✍️ डार्विन के विकासवाद से प्रभावित
✍️ मानव समाज को पर्यावरण से संघर्षरत माना
✍️ मानव भूगोल के विकास में योगदान
विडाल डि ला ब्लाश (Vidal de la Blache)
✍️ फ्रांसीसी भूगोलवेत्ता
✍️ Possibilism के प्रवर्तक
✍️ मानव को सक्रिय और रचनात्मक माना
✍️ ‘Pays’ (लघु प्रदेश) की अवधारणा
✍️ प्रादेशिक भूगोल को भूगोल का कोर (Core) माना
✍️ उनके अनुसार क्षेत्र का अध्ययन इतिहास + संस्कृति + प्रकृति के साथ होना चाहिए।
रिचर्ड हार्टशोर्न (Richard Hartshorne):
✍️ क्षेत्रीय विभेदन (Areal Differentiation) की अवधारणा
✍️ भूगोल का उद्देश्य- “क्षेत्रों के बीच भिन्नता को समझना”
✍️ प्रादेशिक अध्ययन को भूगोल का केंद्रीय विषय माना
आलोचना : आधुनिक दृष्टिकोण
आधुनिक भूगोल में सामान्य (Systematic) और प्रादेशिक (Regional) भूगोल के बीच कठोर विभाजन को उचित नहीं माना जाता। यह माना जाता है कि दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। सामान्य भूगोल द्वारा स्थापित नियमों की वास्तविक परीक्षा प्रादेशिक अध्ययन से होती है, जबकि प्रादेशिक भूगोल को वैज्ञानिक आधार सामान्य भूगोल से मिलता है।
आधुनिक विद्वानों के अनुसार भूगोल का उद्देश्य केवल नियम बनाना या क्षेत्रीय वर्णन करना नहीं, बल्कि मानव-पर्यावरण संबंधों की समग्र समझ विकसित करना है। इसलिए क्रमबद्ध भूगोल बनाम प्रादेशिक भूगोल द्वैतवाद का स्थान अब समन्वयात्मक और एकीकृत दृष्टिकोण ने ले लिया है।
✍️ प्रसिद्ध कथन: संपूर्ण, उसके भागों के योग से बड़ा होता है। “Whole is greater than the sum of parts.”
निष्कर्ष:
इस प्रकार सामान्य भूगोल और प्रादेशिक भूगोल का विभाजन भूगोल के विकास की एक ऐतिहासिक अवस्था को दर्शाता है। प्रारम्भ में जहाँ सामान्य भूगोल ने सार्वभौमिक नियमों और सिद्धांतों की खोज पर बल दिया, वहीं प्रादेशिक भूगोल ने विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्टताओं और मानव-पर्यावरण अंतःक्रिया को स्पष्ट किया।
आधुनिक भूगोल में यह द्वैतवाद लगभग समाप्त हो चुका है, क्योंकि दोनों दृष्टिकोण एक-दूसरे के पूरक माने जाते हैं। सामान्य सिद्धांतों के बिना प्रादेशिक अध्ययन अधूरा है और प्रादेशिक अध्ययन के बिना सामान्य नियम अमूर्त रहते हैं। अतः भूगोल एक समन्वित, समग्र एवं बहुआयामी विज्ञान के रूप में विकसित हुआ है।
