12. Sugar Industry of India and Bihar / भारत एवं बिहार का चीनी उद्योग
Sugar Industry of India and Bihar
भारत एवं बिहार का चीनी उद्योग

परिचय
भारत का चीनी उद्योग एक प्रमुख कृषि आधारित उद्योग है, जो मुख्यतः गन्ने पर निर्भर करता है। भारत विश्व के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है और यह उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन तथा सहायक उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश में चीनी उद्योग के दो प्रमुख क्षेत्र उत्तर भारत और दक्षिण भारत पाए जाते हैं।
बिहार में चीनी उद्योग मुख्यतः गंगा के मैदानी क्षेत्र, विशेषकर उत्तर बिहार में विकसित हुआ है। यहाँ की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, पर्याप्त जल संसाधन और गन्ने की उपलब्धता इसके विकास के प्रमुख कारण हैं। उचित आधुनिकीकरण से यह उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था को और सशक्त बना सकता है।
भारत में चीनी उद्योग
स्थिति
✍️ भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है।
✍️ पहला स्थान: ब्राज़ील
✍️ भारत में चीनी उद्योग मुख्यतः उत्तर भारत और दक्षिण भारत में विकसित है।
कच्चा माल
✍️ गन्ना
✍️ गन्ना भारी एवं शीघ्र नष्ट होने वाला होता है, इसलिए चीनी मिलें गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के पास स्थापित की जाती हैं।
चीनी उद्योग के प्रमुख क्षेत्र
(i) उत्तर भारतीय चीनी क्षेत्र–
उत्तर भारत का चीनी क्षेत्र भारत का प्रमुख गन्ना-उत्पादक एवं चीनी-निर्माण क्षेत्र है। इसमें मुख्यतः उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड शामिल हैं। यहाँ की जलोढ़ मिट्टी, उपजाऊ मैदान, पर्याप्त वर्षा तथा नहरों व नलकूपों से सिंचाई की सुविधा गन्ने की खेती के लिए अनुकूल है। रेल-सड़क परिवहन, सस्ती श्रमशक्ति और बड़े उपभोक्ता बाजार के कारण इस क्षेत्र में चीनी उद्योग का तीव्र विकास हुआ है।
विशेषताएँ:
✍️ पुरानी मिलें
✍️ छोटे आकार की मिलें
✍️ कम तापमान के कारण गन्ने में शर्करा कम
(ii) दक्षिण भारतीय चीनी क्षेत्र–
दक्षिण भारतीय चीनी क्षेत्र भारत का एक प्रमुख चीनी उत्पादन क्षेत्र है। इसमें मुख्यतः महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। यहाँ उष्णकटिबंधीय जलवायु, पर्याप्त तापमान, लंबी फसल अवधि और सिंचाई सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जो गन्ने की खेती के लिए अनुकूल हैं। कृष्णा, गोदावरी और कावेरी नदियों से सिंचाई होती है। आधुनिक तकनीक, सहकारी मिलें और अधिक उत्पादक किस्में इस क्षेत्र को चीनी उद्योग में अग्रणी बनाती हैं।
विशेषताएँ:
✍️ नई और आधुनिक मिलें
✍️ बड़े आकार की मिलें
✍️ अधिक तापमान → गन्ने में शर्करा अधिक
✍️ उत्पादकता अधिक
भारत में चीनी उद्योग के प्रमुख राज्य
1. उत्तर प्रदेश (प्रथम स्थान)
2. महाराष्ट्र
3. कर्नाटक
4. तमिलनाडु
5. बिहार
भारत में चीनी उद्योग की समस्याएँ
✍️ गन्ने की अनियमित आपूर्ति
✍️ पुरानी तकनीक
✍️ उच्च उत्पादन लागत
✍️ किसानों को भुगतान में देरी
✍️ जल संकट (विशेषकर महाराष्ट्र)
भारत में चीनी उद्योग का महत्व:
भारत में चीनी उद्योग का विशेष महत्व है। यह कृषि-आधारित उद्योग गन्ना किसानों को नियमित आय और रोजगार प्रदान करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देकर यह आर्थिक विकास में सहायक है। इस उद्योग से चीनी के साथ-साथ गुड़, शीरा, एथेनॉल और विद्युत उत्पादन भी होता है। यह खाद्य सुरक्षा, निर्यात आय तथा परिवहन, व्यापार और सहायक उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बिहार में चीनी उद्योग
परिचय
बिहार में चीनी उद्योग कृषि-आधारित उद्योगों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, पर्याप्त वर्षा और गंगा व उसकी सहायक नदियों के मैदान गन्ने की खेती के लिए अनुकूल हैं। प्रमुख चीनी मिलें पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण और मुजफ्फरपुर जिलों में स्थित हैं। स्वतंत्रता के बाद कई सरकारी और सहकारी चीनी मिलों की स्थापना हुई, जिससे ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिला। हालाँकि, कच्चे माल की कमी, पुरानी तकनीक, प्रबंधन की समस्याएँ और वित्तीय संकट के कारण कई मिलें बंद हो गईं। वर्तमान में आधुनिकीकरण और निजी निवेश से उद्योग को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थिति
✍️ बिहार उत्तर भारत का प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य है।
✍️ गंगा के मैदानी क्षेत्र में गन्ने की अच्छी खेती होती है।
✍️ स्वतंत्रता के बाद बिहार में चीनी उद्योग का अच्छा विकास हुआ।
✍️ गन्ना उत्पादक क्षेत्र: पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, गोपालगंज, सारण, मुज़फ्फरपुर
बिहार की प्रमुख चीनी मिलें
✍️ बगहा (प. चंपारण) चीनी मिल
✍️ सासामुसा (गोपालगंज) चीनी मिल 2018 से बंद
✍️ लौरिया (प. चंपारण) चीनी मिल
✍️ मझौलिया (प. चंपारण) चीनी मिल
✍️ हसनपुर (समस्तीपुर) चीनी मिल
बिहार में चीनी उद्योग के विकास के कारण:
✍️ उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी
✍️ पर्याप्त जल संसाधन
✍️ सस्ती श्रम शक्ति
✍️ गन्ने की स्थानीय उपलब्धता
✍️ बाजार की नजदीकी
बिहार में चीनी उद्योग की समस्याएँ
✍️ कई मिलों का बंद होना
✍️ पूँजी की कमी
✍️ पुरानी मशीनें
✍️ प्रबंधन की कमजोरी
✍️ किसानों को समय पर भुगतान नहीं
बिहार में चीनी उद्योग का महत्व:
✍️ ग्रामीण रोजगार का साधन
✍️ किसानों की आय में वृद्धि
✍️ सहायक उद्योगों का विकास
✍️ राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान
भारत एवं बिहार के चीनी उद्योग की तुलना:
| बिंदु | भारत | बिहार |
| स्तर | राष्ट्रीय | राज्यीय |
| प्रमुख राज्य | यूपी, महाराष्ट्र | पश्चिम चंपारण आदि |
| तकनीक | मिश्रित (नई+पुरानी) | अधिकांशतः पुरानी |
| उत्पादन | बहुत अधिक | मध्यम |
| समस्याएँ | लागत, जल | बंद मिलें, पूँजी |
निष्कर्ष:
भारत का चीनी उद्योग देश का एक प्रमुख कृषि-आधारित उद्योग है, जो गन्ना उत्पादन पर आधारित होने के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है। यह उद्योग रोजगार सृजन, किसानों की आय वृद्धि तथा सह-उत्पादों जैसे शीरा, बगास और इथेनॉल के माध्यम से औद्योगिक विकास में योगदान देता है। बिहार में अनुकूल जलवायु, उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और गंगा के मैदानी क्षेत्र के कारण चीनी उद्योग के विकास की पर्याप्त संभावनाएँ हैं। हालाँकि, पूँजी की कमी, पुरानी तकनीक और बंद पड़ी मिलें प्रमुख बाधाएँ हैं। यदि आधुनिकीकरण, बेहतर प्रबंधन और सरकारी सहयोग मिले, तो बिहार का चीनी उद्योग पुनः विकास की नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है।
