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7. Crop Pattern (कृषि प्रतिरूप / फसल प्रतिरूप / शस्यन प्रतिरूप)

7. Crop Pattern

(कृषि प्रतिरूप / फसल प्रतिरूप / शस्यन प्रतिरूप)



प्रश्न प्रारूप

Q.1  फसल प्रतिरूप से आप क्या समझते है?

Q.2 फसल प्रतिरूप को प्रभावित करने वाले कारक;

Q.3 फसल प्रतिरूप का वितरण, महत्व तथा मूल्यांकन एवं सुझाव।

फसल प्रतिरूप क्या है?

       फसल प्रतिरूप का तात्पर्य किसी निश्चित समय में विभिन्न फसलों के अन्तर्गत प्रयोग किये जाने वाले भूमि से है। प्रत्येक वर्ष सरकार इस प्रकार का आंकड़ा प्रस्तुत करती है, जिसमें यह बताया जाता है कि किस फसल के अन्तर्गत कितना भूमि का उपयोग किया गया है।

     कृषि प्रतिरूप एक गत्यात्मक संकल्पना है जो समय तथा स्थान के संदर्भ में परिवर्तन होता रहता है। किसी भी भौगोलिक प्रदेश के फसल प्रतिरूप कई कारकों के द्वारा प्रभावित होता है जिनमें भौगोलिक कारक, सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक कारक महत्वपूर्ण है।

     भौगोलिक कारकों के अन्तर्गत धरातल की विशेषता जैसे- पर्वत, पठार और मैदान, जलवायु से संबंधित कारक मृदा और जल की उपलब्धता को शामिल करते हैं। जहाँ पर भौगोलिक कारक प्रतिकूल होते हैं वहाँ पर विभिन्न फसलों के अन्तर्गत प्रयुक्त किये जाने वाले भूमि का क्षेत्रफल कम होता है। लेकिन, जहाँ पर भौगोलिक परिस्थितियाँ अनुकूल होती है, वहाँ फसल प्रतिरूप का स्तर ऊँचा होता है।

      भौगोलिक विविधता, फसल प्रतिरूप को कैसे प्रभावित करती है, इसे उदाहरण से समझा जा सकता है। जैसे- राजस्थान में कम वर्षा वाला क्षेत्र के किसान अधिकतर भूमि का प्रयोग बाजरा की खेती में करते हैं जबकि असम के ब्रह्मपुत्र घाटी में अधिकतर भूमि का प्रयोग चावल कृषि के अन्तर्गत किया जाता है।

     भौगोलिक कारकों के अलावे कई सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक कारक भी फसल प्रतिरूप को प्रभावित करते है। भूमि स्वामित्व, भूमि काश्तकारी, जोत का आकार, चकबंदी कृषि विकास के लिए चलाये जा रहे कार्यक्रम इत्यादि जैसे कारक प्रमुख मानवीय कारक है। छोटे भूमि रखने वाला किसान खेती के लिए श्रम वाले फसल का चयन करते हैं, वहीं बड़े जोत रखने वाले किसान गहन पूंजी पर आधारित फसलों की प्रधानता देते हैं।

       वर्तमान समय में मानव के द्वारा किया जा रहा तकनीकी विकास भौतिक सीमाओं में सुधार लाकर फसल प्रतिरूप में परिवर्तन ला रहा है जैसे- पंजाब, हरियाणा, उ० राजस्थान में चावल की कृषि संभव नहीं है लेकिन यहाँ के किसानों ने सिंचाई साधनों का विकास कर अधिकाधिक उर्वरकों का प्रयोग कर चावल की कृषि करने लगे हैं। जिसके कारण उस क्षेत्र का कृषि प्रतिरूप लगातार परिवर्तित होता जा रहा है।

      कृषि प्रतिरूप का आकलन आपेक्षिक उपज सूचकांक तथा आपेक्षिक विस्तार के आधार पर ज्ञात किया जाता है। आपेक्षिक उपज सूचकांक और आपेक्षिक उपज विस्तार निम्न सूत्र से ज्ञात करते हैं:-

(1) आपेक्षिक सूचकांक = क्षेत्रीय इकाई क्षेत्रफल में किसी फसल का औसत उपज /  कुल क्षेत्रफल का औसत उपज X 100

(2) आपेक्षिक विस्तार सूचकांक = किसी विशिष्ट फसल के अंतर्गत प्रयुक्त भूमि का क्षेत्रफल (% के रूप में) / कुल फसल के अंतर्गत प्रयुक्त भूमिका क्षेत्रफल X 100

     भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने संपूर्ण भारत को चार फसल प्रतिरूप में विभक्त किया है:-

(1) अधिक उपज अधिक विस्तार वाला क्षेत्र, जैसे- धान एवं गेहूँ का फसल प्रतिरूप।

(2) अधिक उपज निम्न विस्तार का क्षेत्र,जैसे- फल एवं सब्जी कृषि फसल प्रतिरूप।

(3) निम्न उपज अधिक विस्तार का क्षेत्र, जैसे- मोटे अनाज फसल प्रतिरूप।

(4) निम्न उपज निम्न विस्तार का क्षेत्र, जैसे- दहलन तथा तेलहन फसल प्रतिरूप।

      उपरोक्त वर्गीकरण से स्पष्ट है कि भारत में विविध फसल प्रतिरूप का विकास हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि ऊपर बताया गया फसल प्रतिरूप कोई दीर्घकालिक वर्गीकरण नहीं है बल्कि समय तथा स्थान के संदर्भ में परिवर्तित होता रहा है।

फसल प्रतिरूप का महत्व

      फसल प्रतिरूप संकल्पना का अध्ययन कृषि अर्थव्यवस्था के विकास हेतु महत्वपूर्ण है। इसके अध्ययन से किस फसल के अंतर्गत कितना भूमिका उपयोग होता है, इसके संबंध में जानकारी प्राप्त कर कितना संस्थागत तथा संरचनात्मक कारकों का निवेश किया जा सकता है। इसका आकलन किया जा सकता है। इसके अलावे किस भौगोलिक क्षेत्र में किस फसल को प्राथमिकता दी जाय? इसका निर्धारण किया जा सकता है।

      फसल प्रतिरूप के अध्ययन से ही यह ज्ञात हुआ है कि भारत के 72% योग्य भूमि पर खाद्यान्न फसलों की खेती होती है उसमें भी धान तथा गेहूँ की महत्ता अधिक है। भारत में जीवन निर्वाह फसलों की खेती अधिक होती है। यहाँ का किसान आधुनिक तकनीक तथा पूंजी का निवेश कम करता है। इसका मूल्यांकन हम आपेक्षिक विस्तार सूचकांक के माध्यम से ज्ञात करते हैं।

      अत: भारत में अधिक उपज देने वाले फसल-प्रतिरूप को बढ़ावा देने हेतु ज्यादा से ज्यादा संस्थागत एवं संरचनात्मक कारकों के पुनर्निवेशन को बढ़ावा देना होगा। फसल चक्र प आधारित कृषि कार्य को महत्ता प्रदान कनी होगी।

6. Intensity of Cropping (फसल गहनता / शस्य गहनता / फसल तीव्रता)

6. Intensity of Cropping

(फसल गहनता / शस्य गहनता / फसल तीव्रता)



       शस्य गहनता का अर्थ यह है कि एक खेत में एक वर्ष में कितनी बार फसलें ली जाती है। शस्य गहनता भूमि उपयोग की गहनता को व्यक्त करता है। शस्य गहनता का सूचकांक जितना अधिक होगा, भूमि उपयोग की क्षमता भी उतनी अधिक होगी।

भारत का शस्य गहनता सूचकांक 136% (2021 में) है। 

       खाद्यान्नों के उत्पादन को बढ़ाने के दो उपाय है-

(i) कृषि योग्य भूमि का विस्तार कर और

(ⅱ) फसल गहनता में वृद्धि कर।

    भारत के संदर्भ में अब, कृषि योग्य भूमि का विस्तार किसी सीमा तक ही बढ़ाया जा सकता है, उसके बाद नहीं। अतः खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि करने के लिए शस्य गहनता में वृद्धि एक मात्र विकल्प नजर आता है।

    शस्य गहनता कुल बोया गया क्षेत्र तथा कुल कृषि योग्य भूमि का अनुपात होता है। इसे प्रतिशत (%) में व्यक्त किया जाता है। भूगोलवेत्ता डॉ. ब्रजभूषण सिंह ने फसल गहनता निकालने के लिए 1979 ईo में निम्न सूत्र विकसित किया है-

शस्य गहनता = कुल बोया गया क्षेत्र/ कुल कृषि योग्य भूमि X 100

       उदाहरण के लिए माना कि किसी किसान के पास 10 हेक्टेयर कृषि भूमि है। उसने खरीफ के मौसम में पूरे 10 हेक्टेयर क्षेत्र पर फसलें बो दी और खरीफ की फसल काटने के बाद उसने पुनः 6 हेक्टेयर भूमि पर रबी की फसलें बो दीं। इसका अर्थ यह हुआ कि उसने 10+6 = 16 हेक्टेयर भूमि से फसलें ली, हालांकि उसके पास कुल भूमि 10 हेक्टेयर ही है। इस उदाहरण में शस्य गहनता 160% हुई।

शस्य गहनता = 16 /10 ×100

                     = 160%

     इस प्रकार, शस्य गहनता भूमि उपयोग की गहनता/क्षमता/दक्षता को व्यक्त करता है। शस्य गहनता का सूचकांक जितना अधिक होगा, भूमि उपयोग की क्षमता भी उतनी ही अधिक होगी।

शस्य गहनता को प्रभावित करने वाले कारक

(1) सिंचाई

(2) उर्वक

(3) शीघ्र पकने वाली तथा उन्नत बीज (HYV)

(4) कृषि का यंत्रीकरण

(5) कीटनाशक दवाएँ

(6) मृदा की उर्वरता

(7) कृषि पद्धति

(8) जलवायु

(9) संस्थागत एवं संस्चनात्मक सुविधाओं का विकास

शस्य गहनाता का वितरण

      सम्पूर्ण भारत में औसत शस्य गहनता सूचकांक 135% है। यह विभिन्न प्रदेशों में भिन्न-भिन्न है जिससे विभिन्न क्षेत्रों में भूमि की उपयोगिता तथा खाद्यान्नों के उत्पादन का अनुमान लगाया जा सकता है। शस्य गहनता का सूचकांक एक बार से अधिक बोये गये क्षेत्र के विस्तार पर निर्भर करता है। जितना एक बार से अधिक बोया गया क्षेत्र विस्तृत होगा, उतना ही शस्य गहनता का सूचकांक भी अधिक होगा। जिन क्षेत्रों में शस्य गहनता का सूचकांक अधिक होगा, वहाँ पर खाद्यान्नों का उत्पादन भी अधिक होगा।

भारत में शस्य गहनता का वितरण
गहनता का वर्ग गहनता का % क्षेत्र कारण
अति न्यून गहनता 10 % से कम प० राजस्थान, लद्दाख, वृष्टि छाया प्रदेश मरुस्थलीय भाग, पहाड़, कम वर्षा
न्यून गहनता 10-30 % उ०-पू० भारत, सिक्किम, कुमायूं हिमालय पर्वतीय स्थिति
मध्यम गहनता 30-70% मध्यवर्ती भारत, प्रायद्वीपीय भारत के 50-100 cm वर्षा वाला क्षेत्र पठारीय स्थिति
अधिक गहनता 70-130 % हरित क्रांति एवं कमांड एरिया वाले क्षेत्र हरित क्रांति, संरचनात्मक एवं संस्थागत सुविधा का विकास
अत्यधिक गहनता 130 % से अधिक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महानगरों के चारों ओर  हरित क्रांति, महानगरीय सुविधा

स्रोत: कृषि संगणना वर्ष (2005-06)Intensity of Cropping

फसल गहनता बढ़ाने के उपाय

(1) सिंचाई का विकास

(2) HYV

(3) उर्वरक तथा कीटनाशक का प्रयोग

(4) कृषि का यंत्रीकरण

(5) फसल चक्र

(6) वैज्ञानिक कृषि पद्धति

(7) इन्द्रधनुषी क्रांति

(8) पशु और फसलों का संयोजन

        इत्यादि आधारभूत संरचना एवं संस्थागत सुविधाओं का विस्तार कर फसल गहनता बढ़ायी जा सकती है।

निष्कर्ष:

       उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि भारत में फसल गहनता में काफी विषमता देखी जाती है। अतः निम्न फसल गहनता वाले क्षेत्रों में ऊप बताये गये उपायों को लागू क फसल गहनता बढ़ायी जा सकती है।

5. Agro-Climatic Regions of India (भारत का कृषि जलवायु प्रदेश)

5. Agro-Climatic Regions of India

(भारत का कृषि जलवायु प्रदेश)



प्रश्न प्रारूप

Q. भारत में कृषि जलवायु प्रदेश के भौगोलिक आधार की विवेचना कीजिए।

Q. भारत के कृषि जलवायु प्रदेश के निर्धारण के आधार, वर्गीकरण तथा विशेषता बतलाइए।

    कृषि जलवायु प्रदेश के वर्गीकरण का कार्य भारतीय कृषि के नियोजन और विकास की दिशा में किया गया एक महत्वपूर्ण कार्य है। यह वर्ष योजना आयोग के आवश्यकता पर आधारित है। योजना आयोग के अनुशंसा पर 1988 ई० में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कृषि जलवायु प्रदेश का निर्धारण किया था। कृषि जलवायु प्रदेश एक ऐसा भौगोलिक क्षेत्र है जहाँ जलवायु के अनुरूप कृषि कार्य किया जाता है। भारतीय कृषि जलवायु प्रदेश का निर्धारण पाँच कारकों के आधार पर किया गया है। जैसे-

(1) कृषि उत्पादों की माँग एवं आपूर्ति,

(2) कृष्‌कों की वास्तविक आय,

(3) कृषि प्रदेश में भूमिहीन कृषकों का अनुपात,

(4) कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रबंधन का स्तर,

(5) सतत् विकास की अवधारणा।

       भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का यह कार्य भारत के 456 जिलों के अध्ययन पर आधारित था। ऊपर बताये गये कारकों का पुनः सह संबंध जलवायु से स्थापित कर कृषि जलवायु प्रदेश के निर्धारण किया गया। ICAR ने भारत को कुल 15 कृषि जलवायु प्रदेशों में बांटा है। :-

(1) पश्चिम हिमालय क्षेत्र,

(2) पूर्वी हिमालय क्षेत्र,

(3) निचली गंगा का मैदान,

(4) मध्यवर्ती गंगा का मैदान,

(5) ऊपरी गंगा का मैदान,

(6) गंगा का तराई क्षेत्र,

(7) पूर्वी पठार और पहाड़ी क्षेत्र,

(8) मध्य पठार और पहाड़ी क्षेत्र,

(9) पश्चिमी पठार और पहाड़ी क्षेत्र,

(10) द० पठार और पहाड़ी क्षेत्र,

(11) पूर्वी तटीय मैदान और पहाड़ी क्षेत्र,

(12) प० तटीय मैदान और प० घाट,

(13) गुजरात का मैदान और पहाड़ी क्षेत्र,

(14) पश्चिमी शुष्क क्षेत्र,

(15) द्वीपीय क्षेत्र।

      ICAR द्वारा सभी प्रदेशों में उत्पन्न होने वाले सभी फसलों का तालिका बनाया गया। उसके बाद उत्पादन और उत्पादकता का विश्लेषण किया। विश्लेषण के क्रम में ICAR ने अनुभव किया कि किसान जलवायु और भूमि की दक्षता के अनुरूप फसलों का उत्पादन नहीं करते है। जहाँ की पारिस्थैतिकी चावल के लिए उपयुक्त नहीं है वहाँ भी चावल की खेती की जाती है। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कृषि जलवायु प्रादेशीकरण की योजना प्रस्तुत की गई। प्रत्येक कृषि जलवायु प्रदेश की विशेषता निम्न है:- 

(1) पश्चिम हिमालय क्षेत्र:-

    यहाँ की जलवायु उपोष्ण तथा शीतोष्ण प्रकार की है। यहाँ बगानी फसलों की प्रधानता दी गई है। लेकिन, अन्तर पर्वतीय मैदानी भाग में चावल, गेहूँ, मक्का और दलहन को प्रमुख फसल माना गया है। लद्दाख के पहाड़ पर मक्का तथा सोयाबीन जैसे फसलों की अनुसंशा की गई है।

(2) पूर्वी हिमालय क्षेत्र:-

     यहाँ की जलवायु विषुवतीय एवं मानसूनी प्रकार की है जहाँ सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहाँ पर झूम कृषि की जा सकती है। जिन क्षेत्रों में सिंचित भूमि उपलब्ध है, वहाँ पर चावल, गेहूं और सरसों की खेती अनुशंसा की गई है। पुनः वर्षा आधारित सिंचाई वाले क्षेत्रों में चावल और जूट प्रमुख फसल माना गया है।

(3) निम्न गंगा मैदान:-

      यह मूलतः प० बंगाल और पूर्वी बिहार में फैला हुआ है। यहाँ चावल तथा जूट की खेती की अनुसंशा की गई है। पुनः प० बंगाल के उत्तरी भाग में चाय की खेती और दक्षिण में स्थित मिदनापुर में गन्ना को एक महत्त्वपूर्ण फसल माना गया है।

(4) मध्यवर्ती गंगा के मैदान:-

     इसका विस्तार इलाहाबाद से लेकर राजमहल की पहाड़ी तक हुआ है। यहाँ चावल की खेती सघन निर्वाह कृषि के रूप में किया जाता है। हाल के वर्षों में सिंचाई की मदद से गेहूं की कृषि प्रारंभ की गई है। ICAR ने चावल, गेहूँ, दलहन को जलवायु के अनुकूल माना है।

(5) ऊपरी गंगा के मैदान:-

     इसका विस्तार इलाहाबाद के पश्चिम में हुआ है। यहाँ सिंचित भूमि पर गेहूँ और असिंचित भूमि पर मक्का तथा दिलहन की खेती की जाती है। लेकिन नवीन योजना में निम्नलिखित फसल समूह को विकसित करने पर जोर दिया है-

(i) चावल-गेहूँ-मूंग

(iⅰ) मक्का-दलहन-प्याज

(6) गंगा के तहाई प्रदेश:-

     यहाँ गेहूं तथा गन्ना प्रमुख फसल है। लेकिन, जलवायु प्रदेश योजना में उपरोक्त फसल के अलावे आलू और चावल की अनुसंशा की गई है।

(7) पूर्वी पठार तथा पहाड़ी क्षेत्र:-

    यहाँ का कृषक मुख्यतः मडुवा, दलहन और चावल उत्पन्न करते रहे हैं। यह क्षेत्र छोटानागपुर के पठार पर स्थित है। ICAR ने यहाँ उपरोक्त फसल के अलावे गेहूँ चावल तथा चना की खेती करने की अनुसंशा की है।

(8) मध्यवर्ती पठारी क्षेत्र:-

    यह मध्य भारत में अवस्थित है। यहाँ सिंचाई साधनों का सीमित विकास हुआ है जिसके चलते मृदा में नमी कम पायी जाती है। यहाँ पर मोटे अनाजों की खेती की जाती है।

     यही परिस्थितिक (9) पश्चिमी पठार और पहाड़ी क्षेत्र में पुन: (10) दक्षिण पठारी एवं पहाड़ी क्षेत्र में मिलती है। इसलिए इन दोनों में मृदा की नमी पर आधारित फसलों की अनुसंशा की गई है। मध्यवर्ती पठारी क्षेत्र में चावल, मूंगफली और गेहूँ की खेती के लिए अनुकूल माना गया है। असिंचित क्षेत्रों में सोयाबीन ज्वार, अरहर और बाजरा की खेती को अनुकूल माना गया है। इसी प्रकर की अनुशंसा प‌श्चिमी और दक्षिण के पठारी क्षेत्रों के लिए किया गया।

(11) पश्चिमी तटीय मैदान और पहाड़ी क्षेत्र:-

      इस क्षेत्र को सिंचित एवं असिंचित क्षेत्र में बाँटा जा सकता है। सिंचित क्षेत्र में चावल, अरहर, दलहन, खासकर के मूंग को प्रमुख फसल माना गया है। जबकि असिंचित क्षेत्र में मूंगफली, सोरघम (ज्वार) और अरहर को प्रमुख फसल माना गया है। पुनः केरल के लैटेराइट वाला पठार पर चावल, टोपाइका और नारियल की खेती की अनुसंशा की गई।

(12) पूर्वी तटीय मैदान और पहाड़ी क्षेत्र:-

      इसमें पूर्वी घाट, कोरोमंडल तट और उत्तरी सरकार तट को शामिल करते हैं। यहाँ ज्वार, बाजरा की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। यहाँ सिंचित क्षेत्रों में चावल और गेहूँ जबकि असिंचित क्षेत्रों में ज्वार, बाजरा, दलहन एवं तेलहन की अनुशंसा की गयी है।

(13) गुजरात का मैदानी एवं पहाड़ी क्षेत्र:-

        गुजरात में सूरत जिला को छोड़कर सिंचाई साधनों का अभाव है, लेकिन संभावित सिंचित क्षेत्र अधिक है। वर्तमान समय में असिंचित क्षेत्र में मूँगफली, ज्वार, बाजरा, अरहर और मूंग की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इस क्षेत्रों में अरहर, मूंगफली और गेहूँ अथवा मूँगफली- अरहर- गेहूँ या फिर चावल- सरसों- मूँग फसल समूह की चर्चा की गयी है।

(14) प० का शुष्क क्षेत्र:-

     यह पश्चिमी राजस्थान और उसके निकटवर्ती क्षेत्र में विस्तृत है। ज्वार, बाजरा, दलहन और तेलहन यहाँ की प्रमुख फसल है। यहाँ पर इन्हीं फसलों को मान्यता दिया गया है।

(15) द्वीपीय क्षेत्र:-

      अंडमान-निकोबार पर चावल, नारियल और बगानी कृषि की अनुशंसा की गयी है जबकि लक्षद्वीप पर नारियल और चावल को प्रमुख फसल माना गया है।

Agro-Climatic Regions of India

निष्कर्ष:

     इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि ICAR ने कृषि-जलवायु प्रदेश का निर्धारण कर एक सराहनीय कार्य किया है। इस योजना के आधार पर कृषक फसलों का चुनाव, जलवायु के अनुरूप कर सकता है। इससे भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था जहाँ एक ओ सुदृढ़ होगी वहीं दूसरी ओ किसान प्रतिकूल जलवायु से भी लड़ सकेंगे।

4. Agricultural Region of India (भारत का कृषि प्रदेश)

4. Agricultural Region of India

(भारत का कृषि प्रदेश)



प्रश्न प्रारूप

Q. भारत को कृषि प्रदेशों में वर्गीकृत करें और प्रत्येक प्रदेश की विशेषता लिखें।

Q. कृषि प्रदेश के वर्गीकरण के आधार को स्पष्ट करें तथा कृषि प्रदेशों का वर्गीकरण करते हुए प्रत्येक प्रदेश की विशेषता लिखें।

उत्तर-

         वैश्विक स्तर पर कृषि प्रदेश का अध्ययन कई भूगोलवेताओं के द्वारा किया गया है जिनमें जर्मन भूगोलवेता व्हिटलसी के द्वारा प्रस्तुत कृषि प्रदेश सबसे प्रमुख है। इन्होंने 5 कारकों को आधार मानते हुए विश्व को 13 कृषि प्रदेश में वर्गीकृत किया था। किसी भी भौगोलिक प्रदेश में कृषि के विभिन्न तत्वों के बीच अगर समरूपता पायी जाती है तो वैसे प्रदेश को कृषि प्रदेश कहते हैं। कृषि प्रदेश के निर्धारण में प्रमुख फसल, उत्पादन की प्रक्रिया, पूंजी एवं तकनीक के प्रयोग का स्तर, फसल और पशुओं तथा फसलों के बीच साहचर्य, कृषि उत्पादों का विपणन इत्यादि को ध्यान में रखकर किया जाता है।

          कृषि प्रदेश के निर्धारण हेतु द्वितीय विश्वयुद्ध के पूर्व अनुभावाश्रित विधि को महत्व दिया जाता था लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कृषि प्रदेशों के निर्धारण हेतु सांख्यिकी विधि का प्रयोग किया जाने लगा। सांख्यिकी विधि के आधार पर फसल संयोजन को प्राथमिकता दी गई। वर्तमान समय में सांख्यिकी विधि पर आधारित फसल संयोजन के आधार पर भारतीय कृषि प्रदेश का निर्धारण किया जा रहा है।

     भारतीय भूगोलवेत्ता प्रो० मुहम्मद शफी, पीठावाला, चतुर्भुज ममोरिया जैसे लोगों ने फसल संयोजन, फसलों की विशेषता, फसलों की प्रमुखता के अलावे स्थलाकृतिक विशेषता जलवायु, मृदा तथा जनसंख्या दबाव को आधार मानते हुए कृषि प्रदेश का निर्धारण किया है। वास्तव में यह विधि अनुभावाश्रित सह सांख्यिकी विधि पर आधारित है। इन भूगोलवेत्ताओं ने भारत को छः कृषि प्रदेशों में वर्गीकृत दिया है। जैसे-

(1) फल एवं सब्जी कृषि प्रदेश

(2) चावल, जूट और चाय कृषि प्रदेश

(3) गेहूँ एवं गन्ना कृषि प्रदेश

(4) ज्वार, बाजरा एवं तेलहन कृषि प्रदेश

(5) मक्का एवं मोटे अनाज वाले कृषि प्रदेश

(6) कपास आधारित कृषि प्रदेश

(1) फल एवं सब्जी कृषि प्रदेश:-

      इसके अन्तर्गत हिमालय प्रदेश को शामिल करते हैं। हिमालय प्रदेश के पर्वतीय मिट्टी मुख्यतः शिवालिक के ढाल तथा अन्तरा पर्वतीय घाटियों में मिलती है। ढाल पर फलों की खेती होती है जबकि घाटी में सब्जी की खेती होती है। वस्तुतः इस प्रदेश में होने वाले पर्यटन, नगरीकरण और अन्तरर्राष्ट्रीय बाजार में होने वाली माँग के कारण इस कृषि प्रदेश का विकास हुआ है।

      वस्तुतः फल एवं सब्जी कृषि प्रदेश के अन्तर्गत 10% भूमि शामिल है। लेकिन आर्थिक मूल्य के दृष्टि से सबसे प्रमुख प्रदेश है। परंपरागत रूप से यह कृषि प्रदेश झूम कृषि, सीढ़ीनुमा कृषि तथा यायावर जीवन के लिए प्रसिद्ध रहा है। पुन: इस कृषि प्रदेश में कश्मीर की घाटी में चावल & उत्तरी-पूर्वी भारत के ढालों पर चाय की खेती की जाती है। हिमालय प्रदेश के कृषि प्रदेश को पुनः दो भागों में बांटा जाता है-

(i) प० हिमालय की कृषि प्रदेश

(ii) पूर्वी हिमालय की कृषि प्रदेश

      दोनों प्रदेशों में पहाड़ी के ढालों पर आलू कृषि की प्राथमिकता दी जाती है। प० हिमालय में इसकी सर्वाधिक खेती लाहूल एवं स्फीति घाटी में की जाती है। पूर्वी हिमालय में मुख्यतः उष्णकटिबंधीय फलों की व्यापारिक खेती की जाती है जिसमें अनानस तथा नारंगी प्रमुख है। प० हिमालय सेब की खेती के लिए प्रसिद्ध है। कुल्लू तथा कांगड़ा घाटी उच्च कोटि के सेब उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

      पुनः प० हिमालय कशर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। कश्मीर का डोडा जिला और हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में इसकी कृषि होती है। पश्चिम हिमालय अखरोट और अंगूर जैसे फसलों के लिए प्रसिद्ध है। अंगूर की कृषि, पीर-पंजाल के दक्षिणी ढाल पर, आखरोट की खेती बनिहाल में सबसे अधिक की जाती है।

    स्पष्ट है कि हिमालय क्षेत्र फल एवं सब्जी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ इटली और बुल्गारिया के सहयोग से फल एवं सब्जी का उत्पादन किया जा रहा है। इस क्षेत्र के उत्पाद अपनी गुणवत्ता के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

(2) चावल, जूट और चाय कृषि प्रदेश:-

      इस प्रदेश में भारत के वैसे क्षेत्र को शामिल किया जाता है जहाँ वार्षिक वर्षा 100-200 cm और तापमान 80°F से 90°F होती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, सम्पूर्ण बिहार बंगाल, असम की घाटी, पूर्वी एवं पश्चिमी तटवर्ती मैदान को इसमें शामिल करते हैं। ये क्षेत्र भारत के 3/4 चावल का उत्पादन करते है। बंगाल, आन्ध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश चावल के सबसे बड़े उत्पादक राज्य है।

    जलोढ़ समतल मैदान, अनुकूल वर्षा एवं श्रम के अधिकता के कारण चावल कृषि का विकास अधिक हुआ है। इस प्रदेश का कृषक जूट, चाय व नारियल की खेती वाणिज्यिक फसल के रूप में करता है। जूट की कृषि तराई, प० बंगाल, पूर्वी बिहार ‌और महानदी के डेल्टाई भाग में की जाती है। चाय की खेती असम और प० बंगाल के पर्वतीय ढालों पर की जाती है। तटवर्ती मैदान में नारियल की कृषि होती है। इस प्रदेश में तम्बाकू हाल के वर्षों में प्रवेश किया है।

      ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि यह प्रदेश विविध प्रकार के फसलों के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन चावल एक ऐसा फसल है जो सम्पूर्ण प्रदेश को जोड़ता है।

(3) गेहूँ एवं गन्ना कृषि प्रदेश:-

       यह प्रदेश भारत के उपार्द्र जलवायु प्रदेश में स्थित है। इसके अंतर्गत सतलज के मैदान पंजाब, हरियाणा, उ० राजस्थान और प० UP को शामिल करते हैं। इस प्रदेश की सबसे प्रमुख फसल गेंहूँ है। जोड़े की ऋतु में पछुआ विक्षोभ से हल्की बारिश होती है जो गेहूँ फसल के लिए लाभकारी होता है। इस प्रदेश में गेहूँ एवं गन्ना की खेती किये जाने के अन्य कारण भी मौजूद है। जैसे- पुरानी जलोढ़ मिट्टी के मैदान उपलब्ध है। इस क्षेत्र में जुझारू किसान रहते है। सिंचाई साधनों का विकास बड़े पैमाने पर किया गया है।

          UP गेहूँ और गन्ना उत्पादन में सबसे अग्रणी राज्य है। यह प्रदेश अन्न भण्डार के रूप में जानी जाती है। इस क्षेत्र में संरचनात्मक सुविधाओं के विकास के कारण नवीन फसल जैसे- चावल, कपास, चारा, तेलहन और दलहन फसलों का आगमन हुआ है। भारत में हरित क्रांति और दुग्ध क्रांति सर्वाधिक सफल इसी प्रदेश में हुआ है।

(4) ज्वार, बाजरा एवं तेलहन कृषि प्रदेश:-

     इसके अन्तर्गत प्रायद्वीपीय भारत के 50-125 cm वर्षा वाले क्षेत्र को शामिल करते हैं। इन फसलों का क्षेत्र मुख्यतः लाल एवं लेटेराइट मिट्टी पर आधारित है। वर्षा की कम मात्रा और वर्षा की अनिश्चितता के कारण यहाँ के कृषक मोटे अनाजों की खेती करते हैं। ज्वार तथा बाजरा के उत्पादन में भारत विश्व का अग्रणी देश है। ज्वार उत्पादन में महाराष्ट्र और बाजरा के उत्पादन में राजस्थान सबसे अग्रणी है। इस प्रदेश में परंपरागत रूप से टोपायका मडुवा की खेती की जाती है।

(5) मक्का एवं मोटे अनाज वाले कृषि प्रदेश:-

      यह कृषि प्रदेश के शुष्क जलवायु कृषि प्रदेश में स्थित है। यहाँ वर्षा 50 cm से कम होती है। भारत में इस कृषि प्रदेश का विकास तीन क्षेत्रों में हुआ है:-

(i) प्रायद्वीपीय भारत के वृष्टि छाया प्रदेश- यहाँ की मक्का और ज्वार प्रमुख फसल है।

(ii) प० राजस्थान और गुजरात- यहाँ का प्रमुख फसल मक्का है।

(ii) लद्दाख क्षेत्र- यहाँ का मुख्य फसल मक्का है।

     वस्तुतः ये प्रदेश अत्यन्त ही सूखा ग्रस्त क्षेत्र है। भूमिगत जलस्तर काफी नीचे है। भौगोलिक परिस्थितियाँ प्रतिकूल है। संरचनात्मक सुविधाओं का विकास नहीं हो सका है। जिसके कारण उत्पादकता बहुत कम है।

(6) कपास आधारित कृषि प्रदेश:-

        यह दक्वन लावा पठारीय भाग पर स्थित है। यह प्रदेश महाराष्ट्र, गुजरात, मालवा के पठार, तेलंगाना के पठार, कोयम्बटूर पठार, कर्नाटक का पठार पर स्थित है। यह विश्व का सबसे बड़ा कपास की पेटी है। यहाँ की सबसे प्रमुख फसल कपास है क्योंकि इस प्रदेश में अति उर्वर काली मिट्टी पायी जाती है। मिट्टी में लम्बे समय तक नमी धारण करने की क्षमता होती है। वर्षा 75-100 cm तक हो जाती है।

     कपास आधारित कृषि प्रदेश में ज्वार की खेती की जाती है। हाल के वर्षों में गन्ना का आगमन नकदी फसल के रूप में हुआ है।

निष्कर्ष:-

      इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत के अलग-2 क्षेत्रों में मुख्यतः 6 कृषि प्रदेश का विकास हुआ है। पुनः प्रत्येक कृषि प्रदेश में अभूतपूर्व फसलों में विविधता दिखाई देती है। पुनः यह कृषि प्रदेश गत्यात्मक है क्योंकि प्रत्येक प्रदेश परंपरागत रूप से विशेष फसलों के लिए जाने जाते थे, लेकिन वर्तमान समय में विभिन्न फसलों के लिए जाने जाते है अर्थात जिन प्रदेशों में संस्थागत संरचनात्मक सुविधाओं का ज्योंहि विकास किया जाता है त्यों ही उस प्रदेश में नवीन फसलों का आगमन हो जाता है। इस प्रकार सरंपरागत पह‌चान को त्यागक नवीन पहचान स्थापित क देते हैं।

24. Fisheries of Japan (जापान का मत्स्योत्पादन)

24. Fisheries of Japan

(जापान का मत्स्योत्पादन)



परिचय

    जापान एशिया के पूरब में स्थित प्रशांत महासागर में एक द्वीपीय देश है। जापान में प्राचीनकाल से ही कृषि, वानिकी, मत्स्य उत्पादन और कुटीर उद्योग अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार रहे हैं। हलांकि अपनी सीमित कृष्य भूमि के कारण जापानी किसान गहन कृषि के पक्षधर रहे हैं। फिर भी खाद्यान्नों की कमी को मछली की आपूर्ति से पूरा करते आ रहे हैं। आज भी भोजन के लिए जापान अपनी भूमि से पर्याप्त खाद्यान्न उत्पादित नहीं कर पाता है, फलतः मछली भोजन में अपना प्राधान्य बनाये हुए है।

मत्स्य उत्पादन:-

    जापान में मत्स्य उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं जिसका प्रमुख कारण जापान के चुर्दिक विशाल जलराशि की उपस्थिति है। यही कारण कारण है कि जापान विश्व के तीन बड़े मछली पकड़ने वाले देशों में से एक हैं। 1959 से जापान विश्व का अग्रणी मछली पकड़ने वाला देश बन गया और 1993 के पश्चात् इसका स्थान प्रथम हो गया है। जापान में विश्व की 12.3 प्रतिशत मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। मछलियों में सालमन, हेरिंग, कांड, ट्यूना, सिल्फश और हेल मुख्य हैं। इन विभिन्न प्रकार की मछलियों का उत्पादन 2005 में 115 लाख मीट्रिक टन से अधिक था।

     जापान में मत्स्य उत्पादन के विकास का मुख्य कारण यहाँ पाई जाने वाली अनुकूल परिस्थितियाँ और खाद्यान्न उत्पादन की कमी है। आर्कटिक सागर से आने वाली क्यूराइल की ठण्डी धारा और दक्षिण से ऊष्ण कटिबन्धीय क्यूरोशियो की गर्म धारा जहाँ एक-दूसरे से मिलती हैं वहाँ पर मछलियों के लिए अनुकूल खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं। ये स्थान 45° उत्तरी अक्षांश के निकट पाये जाते हैं। इन स्थानों पर खूब प्लैंकटन घास उगती है जो मछलियों का प्रमुख खाद्य पदार्थ है।

       उत्तर में पाई जाने वाली मछलियों में सालमन, हेरिंग, कांड, केकड़े और हेल (ठण्डे जल की) तथा दक्षिण में टयूना, स्किपजैक, बोनिटो, मैकरे, सारडीन और सेल्फिश (गर्म जल की) प्रमुख मछलियाँ हैं।

मछली पकड़ने के प्रमुख क्षेत्र:-

       जापान में मछली पकड़ने के प्रमुख चार क्षेत्र हैं-

(i) होकैडो

(ii) उत्तरपूर्वी होंशू क्षेत्र

(iii) क्यूशू, शिकोकू तथा दक्षिणी होंशू क्षेत्र

(iv) अन्य क्षेत्र

Fisheries of Japan

     होकैडो मछली पकड़ने में अग्रणी हैं, जहाँ समस्त जापान की 40 प्रतिशत मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। पूर्वी टोहोके के चार बन्दरगाहों पर उत्तरी प्रशान्त महासागर और ओखोटस्क सागर में सालमन, हेरिंग, क्रैग, काड, हेल, मैकरेल इत्यादि मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। तृतीय मछली पकड़ने का क्षेत्र उत्तरी क्यूशू में नागाशाकी और पश्चिमी होंशू में शिमोनोशेकी हैं, जहाँ पर जापान की 25 प्रतिशत मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। टूना, नोनिटो, स्किप जैक, मैकरेल तथा हेल प्रमुख मछलियाँ हैं। मध्य होंशू के प्रशान्त महासागरीय तट पर टोकाई-काण्टो क्षेत्र में मछली पकड़ने के चार प्रमुख क्षेत्र हैं। 2005 में गहरे सागर से 30 प्रतिशत, उथले तटवर्ती सागर से 30 प्रतिशत एवं आन्तरिक सागर से 6 प्रतिशत मछलियाँ पकड़ी गईं।

     जापान में छोटे-छोटे मछुआरे छोटी-छोटी नौकाओं द्वारा तटीय भागों में मछलियाँ पकड़ते हैं, परन्तु बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ सागर के सभी क्षेत्रों में मछलियाँ पकड़ती हैं। जापानियों द्वारा उत्तरी एवं दक्षिणी प्रशान्त महासागर, आस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में भूमध्य रेखीय क्षेत्र, पश्चिमी अफ्रीका और ब्राजील के अटलांटिक भूमध्य रेखीय क्षेत्र, हिन्द महासागर और अण्टार्कटिक क्षेत्रों में मछलियाँ पकड़ी जाती हैं।

     2005 में अण्टार्कटिक में हेल पकड़ने के लिए जापान के सात बड़े-बड़े जहाजी बेडे भेजे गये थे, जिनमें प्रत्येक के पास मछली पकड़ने वाली दस नौकाएं थीं। जापान में नये मछली पकड़ने के क्षेत्र भूमध्य रेखीय जल क्षेत्र हैं, जहाँ टूना और बोनिटो मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। जापान में मत्स्य संस्कृति का विकास तेजी से हो रहा है। कैब, आक्टोपस, प्रान एवं एलोटेल का तेजी से उत्पादन हो रहा है। छोटे-छोटे तालाबों और सिंचित क्षेत्रों में भी मछली पालन का कार्य तीव्र गति से हो रहा है। टोकाई, इबारगी, नारा, एरिता तथा आन्तरिक सागर प्रमुख क्षेत्र है, जहाँ ट्राउट और सालमन पकड़ी जाती हैं।

       विश्व युद्ध के बाद जापान में मछली पकड़ने के प्रारूप में अन्तर आया है। जापान में मछली पकड़ने के लिए प्रयोग में आने वाली छोटी-छोटी नौकाओं की संख्या में कमी हो रही है, जबकि बड़ी-बड़ी नौकाओं की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। यही कारण है कि वर्तमान समय में युद्ध के पूर्व की तुलना में दोगुनी मछलियाँ पकड़ी जा रही हैं। बड़ी-बड़ी नौकोओं में मछलियों का पता लगाने के लिए राडार तक लगे हुए हैं। मछुआरों को सहकारी समितियाँ वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। इसके अतिरिक्त जापान सरकार सस्ते ब्याज दर पर धन उपलब्ध कराकर इस उद्योग को प्रोत्साहित कर रही है। बड़ी नौकाओं की क्षमता इतनी अधिक है कि उनसे विश्व के किसी भी समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ी जा सकती है।

       इन सब प्रोत्साहन एवं सहायता के बावजूद मछुआरों की आय कृषकों की तुलना में बहुत कम है, परन्तु बड़ी-बड़ी नौकाओं के मछुआरों की आय अपेक्षाकृत अधिक है।

इन बड़ी नौकाओं के समक्ष सबसे बड़ी समस्या पड़ोसी देशों द्वारा अधिकृत जलीय क्षेत्र है। युद्ध से पूर्व जापानी नौकाएं ओखोटस्क सागर में मछली पकड़ती थीं परन्तु इस भाग पर रूस का अधिकार होने के कारण जापानी नौकाएं अब ओखोटस्क सागर में मछली नहीं पकड़ सकतीं हैं। इसी तरह कनाडा ने जापान के लिए 175° पूर्व देशान्तर, कोरिया के तट से 50 मील की दूरी तथा आस्ट्रेलिया का सम्पूर्ण महाद्वीपीय निमग्न तट के अन्दर जापानी नौकाओं का प्रवेश वर्जित कर रखा है।

        जापान द्वारा 90 प्रतिशत मछलियाँ प्रशान्त महासागर से 5 प्रतिशत आन्तरिक क्षेत्र से 4 प्रतिशत अटलांटिक सागर से और मात्र एक प्रतिशत हिन्द महासागर से प्राप्त की जाती हैं। स्पष्ट है कि गहरे समुद्र में मछली मारना जापानी मछुआरों के साहस और कौशल का प्रतीक है।

     मछली पकड़ने के प्रमुख बन्दरगाह जापान में यद्यपि मछली पकड़ने के छोटे-बड़े बन्दरगाहों की संख्या दो हजार है परन्तु इनमें चार बन्रगाहों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। शिकोकू में सुडा, ओकायामा के तट पर स्थित टोमो, उत्तरी-पूर्वी टोहोकू में हाचीनोहे और होकैडो का कुशिरो बन्दरगाह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

       सुडा बन्दरगाह में छोटी-छोटी नौकाओं द्वारा मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। प्रातः काल से शाम तक पकड़ी गई मछलियाँ शाम तक समुद्री किनारे पर लाई जाती हैं। सारडीन, प्रान, आक्टोपस और सेल्फिस महत्त्वपूर्ण हैं। ओकायामा का तटीय बन्दरगाह जापान के अन्य छोटे-छोटे बन्दरगाहों की भाँति है। इस बन्दरगाह पर भी छोटी-छोटी नौकाओं का प्रयोग होता है। इन नौकाओं की संख्या लगभग 200 तथा स्वचालित नौकाओं की संख्या 100 से अधिक है।

       समूह में यहाँ के मछुआरे आन्तरिक सागर में मछली मारने जाते हैं और शाम तक वापस लौटते हैं। मकरेल, आक्टोपस, सेल्फिश आदि मुख्य मछलियाँ हैं। यहाँ की महिलाएं निर्यात के लिए मछलियों को डिब्बों, टोकरियों तथा जालों में बन्द करने का कार्य करती हैं। यह कार्य अंशकालिक होता है, क्योंकि कृषि कार्य के अवकाश में ही यह कार्य सम्भव होता है।

       हाचीनोहे, जो उत्तरी-पर्वी टोहोक में स्थित है मछली पकड़ने के लिए विख्यात हैं। यहाँ पर मछलियों का वार्षिक उत्पादन एक लाख टन से अधिक हैं। यहाँ पर मछली पकड़ने वाली नौकाओं की संख्या लगभग 2000 है, जिनका वजन 15 से 60 टन के मध्य है। इन पर 10 मछुआरे कार्य करते हैं। विभिन्न प्रकार के प्रकाश के माध्यम से मैकरेल आदि मछलियाँ पकड़ी जाती हैं जो विभिन्न प्रतिष्ठानों को भेजी जाती हैं, यहाँ से मछलियों का निर्यात चीन और दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों को होता है।

     होकैडो का कुशिरो बन्दरगाह सबसे बड़ा मछली पकड़ने का केन्द्र है। यहाँ मैकरेल, सालमन, काड, हेरिंग आदि पकड़ी जाने वाले मुख्य मछलियाँ हैं। यहाँ पर नौकाओं की संख्या 20,000 है। प्रत्येक बेड़ों के पास मछली पकड़ने की 10 से 30 नौकाएं हैं। ये बेड़े उत्तरी प्रशान्त महासागर में मछली पकड़ने के लिए 3 महीने तक के लिए बाहर निकल जाते हैं और यहाँ पकड़ी गई मछलियाँ सम्बन्धित नौकाओं द्वारा बन्दरगाह को भेज दी जाती हैं।

जापान में मत्स्य उद्योग के विकास के कारण

        जापान में मत्स्य उद्योग के विकास के निम्न कारण हैं-

1. जापान उत्तर-पश्चिमी प्रशान्त महासागर के महाद्वीपीय निमग्न तट पर स्थित है, अतः यहाँ का उथला जलीय क्षेत्र प्लैक्टन से युक्त होने के कारण मछलियों की पकड़ने के लिए अनुकूल है।

2. जापान की अधिकांश जनसंख्या तटीय भागों में केन्द्रित है। यही कारण है कि तटीय भाग में लोग मछली पकड़ने के लिए प्रेरित होते हैं और भोजन में प्रयोग भी करते हैं।

3. जापान तट रेखा लम्बी एवं कटी-फटी है इसलिए इसे खाड़ियों का देश (Country of Bays) कहते हैं। अच्छे बन्दरगाहों से युक्त होने के कारण मछली पकड़ने के लिए प्राकृतिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

4. जापान की स्थिति खनिजों की कमी तथा कृषि योग्य भूमि की कमी आदि ने जापानियों को समुद्र का सहारा लेने के लिए बाध्य कर दिया है। यही कारण है कि यहाँ मछली उद्योग विकसित है।

5. जापान में पशुपालन के लिये चरागाह की कमी है, क्योंकि जापान का 85 प्रतिशत भाग पर्वतीय एवं पठारी है, जो निवास एवं कृषि के लिए अनुपयुक्त है। जापान के अधिकांश लोग बौद्ध धर्मावलम्बी हैं, जो माँस नहीं खाते हैं। इसलिए प्रोटीन के लिए मछलियाँ ही मुख्य आहार हैं।

6. आधुनिक तकनीक के विकास से गहरे समुद्र से मछली पकड़ने में सुविधा हुई है। इस कार्य को सफल बनाने में जापानी वैज्ञानिकों और तकनीक विशेषज्ञों ने सराहनीय कार्य किया है।

7. सरकारी प्रोत्साहन, बैंक सुविधा और सहकारी समितियों के कारण जापान में मत्स्य उत्पादन लगातार बढ़ता रहा है।

8. बढ़ती जनसंख्या के लिये भोजन जुटाना जापान की राष्ट्रीय समस्या है। इस समस्या के समाधान के लिये समुद्र की ओर मुड़ना स्वाभाविक है। जापान देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाने की चेष्टा में मछली उत्पादन पर बल देता रहा है।



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25. The Distribution and Production of Coal in World (विश्व में कोयला के वितरण पवं उत्पादन)

25. The Distribution and Production of Coal in World

(विश्व में कोयला के वितरण पवं उत्पादन)



प्रश्न प्रारूप

Q. विश्व में कोयला के वितरण पवं उत्पादन पर प्रकाश डालें।

(Throw light on the distribution and production of coal in world.)

उत्तर- विश्व में कोयले का वितरण-

      आधुनिक अनुमानों के अनुसार विश्व में लगभग 10,009 करोड़ मीट्रिक टन कोयला संचित है, फिर भी इसका भण्डार प्रति वर्ष घटता-बढ़ता रहा है, क्योंकि बहुत सारे देशों में अभी सर्वेक्षण अपूर्ण है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया में ज्ञात भण्डार का 90 प्रतिशत कोयला सुरक्षित है, जबकि आस्ट्रेलिया, दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका का अंश मात्र 10 प्रतिशत है। सुरक्षित भण्डार के दृष्टिकोण से संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन, भारत, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, ब्राजील और कनाडा अग्रणी देश हैं।

कोयला का उत्पादन:-

     विश्व में 1860 के बाद वृहद पैमाने पर कोयले का उत्पादन होने लगा। 1860 में विश्व का कुल उत्पादन मात्र बीस करोड़ मीट्रिक टन 1930 में 141 करोड़ मीट्रिक टन, 1960 में 262 करोड़ मीट्रिक टन और 1986 में 430 करोड़ मीट्रिक टन रह गया, लेकिन 2007 में पुनः बढ़कर 639.6 करोड़ मीट्रिक टन पहुँच गया।

     वर्तमान समय में अग्रणी उत्पादकों में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, आस्ट्रेलिया एवं रूस हैं, जो विश्व उत्पादन का 74.5 प्रतिशत से अधिक कोयला उत्पादित करते हैं। सर्वाधिक उच्च कोटि का कोयला भी इन्हीं देशों में उत्पादित होता है। अन्य प्रमुख उत्पादकों में दक्षिणी अफ्रीका, जर्मनी, पोलैण्ड, इण्डोनेशिया और कजाकिस्तान का सामूहिक उत्पादन 15 प्रतिशत है। इस प्रकार केवल 10 देश विश्व का 88.4 प्रतिशत कोयला उत्पादित करते हैं। गौण उत्पादकों में ब्राजील, कोलम्बिया, हंगरी और पूर्व यूगोस्लाविया है जहाँ का उत्पादन पचास लाख मीटरी टन से कम है।

उत्तरी अमेरिका:-

      उत्तरी अमेरिका में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको विश्व का लगभग 18 प्रतिशत से अधिक कोयला उत्पादित करते हैं। यहाँ विश्व का 28 प्रतिशत से अधिक कोयला भण्डार सुरक्षित है।

संयुक्त राज्य अमेरिका:-

     संयुक्त राज्य अमेरिका में विश्व का 27.9 प्रतिशत कोयला भण्डार है। फलतः यह विश्व का अग्रणी देश है। 1970 तक इसका उत्पादन भी विश्व में सर्वाधिक 25.7 प्रतिशत था लेकिन संरक्षण नीति, अन्य ऊर्जा स्रोतों के अधिक उपयोग और चीन में कोयला उत्खनन में तीव्रता के कारण 2007 में इसका योगदान घटकर 16.2 प्रतिशत होने के फलस्वरूप विश्व में इसका स्थान दूसरा हो गया है।

        संयुक्त राज्य अमेरिका में तीन वृहद् कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं जहाँ अधिकांश उच्च कोटि का कोयला उत्पादित होता है-

(1) अप्लेशियन क्षेत्र, जो देश के पूर्वी भाग में उत्तर-पूरब से दक्षिण-पश्चिम की लम्बाई में फैला है।

(2) आन्तरिक क्षेत्र, जो महान झीलों से खाड़ी तक कई टुकड़ों में वितरित है और

(3) वृहद् मैदानी क्षेत्र, जो रॉकी पर्वत के समानान्तर उत्तर से दक्षिण तक फैला है इन क्षेत्रों में अनेक लघु क्षेत्र भी हैं। साथ ही प्रशान्त तटीय क्षेत्र में भी कोयला उत्खनन होने लगा है।

प्रशान्त तटीय क्षेत्र:-

      इस क्षेत्र का विस्तार वाशिंगटन, ओरेगन और कैलीफोर्निया राज्यों में छिट-पुट रूप में है। जल विद्युत और पेट्रोलियम की स्पर्द्धा के कारण यहाँ बहुत कम उत्पादन होता है।

कनाडा:-

     उत्तरी अमेरिका का दूसरा प्रमुख कोयला उत्पादक देश कनाडा है। यहाँ 2007 में विश्व का 1.1 प्रतिशत कोयला उत्पादित हुआ था। यहाँ कोयले का उत्खनन मुख्यतः अलबर्टा, सस्केचवान एवं ब्रिटिश कोलम्बिया राज्यों में होता है। कठोर शीत ऋतु के कारण उत्खनन और परिवहन बाधित होते हैं। फिर भी यह अपनी आवश्यकता पूरा कर लेता है।

रूस:-

    रूस अधिक समय तक विश्व का तीसरा बड़ा कोयला उत्पादक देश था लेकिन 2007 में इसका अंशदान केवल 4.9 प्रतिशत था। उल्लेखनीय है कि सोवियत संघ के

विघटन के बाद इसका दक्षिणी क्षेत्र-यूक्रेन और मध्य एशिया विलग हो गये हैं, जिससे इसका योगदान 1970 में 20.2 प्रतिशत से घटकर 5.1 प्रतिशत हो गया है। वर्तमान समय में यूक्रेन 1.2 प्रतिशत, कजाकिस्तान 1.5 प्रतिशत और उजबेकिस्तान 0.2 प्रतिशत कोयला उत्पादित करते हैं। 1948 में विश्व कोयला उत्पादन में रूस का भाग मात्र बारह प्रतिशत था, जो 1960 में बढ़कर उन्नीस प्रतिशत हो गया। इस समय से इसके उत्पादन में धीरे-धीरे कमी आई है, क्योंकि तेल और गैस का प्रयोग बढ़ गया है। रूस का संचित भण्डार विशाल है।

     अनुमानतः विश्व का लगभग एक चौथाई सुरक्षित भंडार रूस और अलग हए देशों में हैं। अभी उत्पादन कुछ ही देशों में हो रहा है। फिर भी छोटे-बड़े 81 क्षेत्रों में उत्खनन होता है। यहाँ के प्रमुख उत्पादकों में 11 क्षेत्र विशेष उल्लेखनीय हैं।

(1) डोनवास क्षेत्र,

(2) कुजवास क्षेत्र,

(3) करागम बेसिन,

(4) मास्को क्षेत्र,

(5) यूराल क्षेत्र,

(6) काकेशस क्षेत्र,

(7) लीना बेसिन,

(8) येनीसी बेसिन,

(9) बैकाल झील क्षेत्र,

(10) अरटम सूचन क्षेत्र और

(11) सखालीन क्षेत्र

एशिया:-

     एशिया महाद्वीप के देशों में विश्व का लगभग 32 प्रतिशत कोयला भंडार है, जिसमें चीन, भारत, इण्डोनेशिया और जापान अग्रणी देश हैं। उत्पादन की तीव्रगति के कारण चीन विश्व का अग्रणी कोयला उत्पादक देश बन गया है।

चीन:-

     हाल के दशकों में चीन कोयला के उत्पादन में जिस तीव्रगति से आगे बढ़ा है, वह एक उदाहरण बन गया है। 1970 तक यह कोयला उत्पादन में तीसरे स्थान पर था, लेकिन 1990 में यह विश्व का प्रथम देश बन गया। वर्तमान अनुमानों के अनुसार इसका संचित भंडार विश्व का 13 प्रतिशत है। 2007 में यहाँ का उत्पादन 253.7 करोड़ मीटरी टन हो गया, जो विश्व का 39.7 प्रतिशत है। यहाँ का अधिकांश कोयला बिटुमिनस एवं एन्थ्रासाइट किस्म का है।

भारत:-

    यह विश्व का तीसरा बड़ा कोयला उत्पादक देश बन गया है। 2007 में यहाँ का उत्पादन 47.8 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक था जो विश्व उत्पादन का 7.5 प्रतिशत होता है। 1900 में भारत का उत्पादन मात्र 60 लाख मीट्रिक टन था, जो बढ़कर 1957 में 349, 1971 में 743 और 1986 में 1574 लाख मीट्रिक टन हो गया। 2000- 2001 में तो इसका उत्पादन 3096 लाख टन तक पहुँच गया। स्पष्ट है कि भारत में कोयले का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ा है। यहाँ अधिकांश कोयला गोण्डवाना युग का है। तृतीय युग का कोयला भूरा या लिग्नाइट वर्ग का है।

     भारत में कोयला भण्डार का सर्वेक्षण अपूर्ण है फिर भी अनुमानों के अनुसार यहाँ लगभग 21.390 मीट्रिक टन कोयले का संचित भंडार है, जो विश्व के संचित भंडार का 10 प्रतिशत से अधिक है।

एशिया के अन्य कोयला उत्पादक देश-

    चीन और भारत के बाद इण्डोनेशिया, उत्तरी कोरिया, जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और तुर्की एशिया में अन्य प्रमुख कोयला उत्पादक देश हैं। उत्तरी कोरिया प्रतिवर्ष 620 लाख मीट्रिक टन एवं तुर्की 391 लाख मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन करते हैं। जापान अपनी खपत का एक लघु अंश ही उत्पादित करता है। फलस्वरूप इसे कोयले का आयात करना पड़ता है।

यूरोप:-

    प्रारंभ से ही यूरोप कोयला उत्पादन में अग्रणी रहा है। आज यहाँ विश्व भंडार का केवल 16 प्रतिशत कोयला सुरक्षित रह गया है। विश्व उत्पादन का लगभग एक-चौथाई कोयला यूरोपीय देशों में निकाला जा रहा है। यहाँ कुछ न कुछ कोयला सभी देशों में पाया जाता है लेकिन महाद्वीप के कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत केवल जर्मनी, यूनान, पोलैण्ड, ब्रिटेन, पूर्व यूगोस्लाविया, रोमानिया, बुल्गारिया, चेकोस्लोवाकिया, बेल्जियम और फ्रांस में उत्पादित होता है।

जर्मनी:-

     यूरोप के कोयला उत्पादकों में जर्मनी का योगदान महत्त्वपूर्ण हो गया है। 2007 में जर्मनी का उत्तम कोटि का उत्पादन 2019 लाख मीट्रिक टन था, जो विश्व उत्पादन का 3.2 प्रतिशत है, जबकि 1970 में इसका योगदान विश्व उत्पादन में 6.5 प्रतिशत था। स्पष्ट है कि इसका उत्पादन संरक्षण नीति के कारण संतुलित है। यहाँ अब कुल ऊर्जा का 55 प्रतिशत तेल से पूरा किया जा रहा है। संचित भंडार की दृष्टि से यह यूरोप का प्रथम देश है। यहाँ उत्तम कोटि और सामान्य वर्ग दोनों तरह के कोयले का विशाल भंडार है। अधिकांश प्रयोग ताप-विद्युत, कृत्रिम पेट्रोल, कृत्रिम रबर और विविध रसायन उद्योगों में किया जाता है।

पोलैण्ड:-

    कोयले के उत्पादन के पोलैण्ड विश्व का सबसे बड़ा देश है। यहाँ 2007 में 1458 लाख मीटरी टन उच्च कोटि के कोयले का उत्पादन हुआ था, जो विश्व उत्पादन का 23 प्रतिशत है। वर्तमान समय में जर्मनी के बाद पोलैण्ड यूरोप का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश है। कुछ समय पूर्व ब्रिटेन प्रमुख उत्पादक था, लेकिन अब वहाँ भंडार कम जाने के कारण संरक्षण नीति अपनाई गई है। पोलैण्ड का प्रधान कोयला क्षेत्र साइलेसिया है जहाँ उत्तम किस्म का बिटुमिनस कोयला निकाला जाता है। इस क्षेत्र के अतिरिक्त जापान क्षेत्र दूसरा प्रमुख, उत्पादक है। जर्मनी की सीमा के निकट लिग्नाइट की खानें हैं।

ब्रिटेन:-

     कोयले के उत्पादन में पहले ब्रिटेन एक अग्रणी देश था लेकिन अन्य देशों में उत्पादन बढ़ जाने से इसकी सापेक्षिक स्थिति बदलती गई। 1970 में यहाँ 1470 लाख मीट्रिक टन उत्तम कोटि का कोयला उत्पादित हुआ था लेकिन घटता भंडार, बढ़ता उत्पादन व्यय, खनिज तेल का अधिक प्रयोग आदि के कारण 2007 में इसका उत्पादन केवल 257 लाख मीट्रिक टन रह गया। ग्रेट ब्रिटेन में पाँच प्रधान कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं जहाँ से देश का तीन-चौथाई से अधिक कोयला प्राप्त होता है, यथा-यार्कशायर-नाटिंघम-डर्बी क्षेत्र, नार्थम्बरलैण्ड-डरहम क्षेत्र, लंकाशायर क्षेत्र, दक्षिणी वेल्स और क्लाइड घाटी क्षेत्र। इनके अतिरिक्त पन्द्रह छोटे-छोटे क्षेत्र भी कोयले का उत्पादन करते हैं।

यार्कशायर-नाटिंगघम-डर्बी क्षेत्र-

     यह ब्रिटेन का सर्वश्रेष्ठ कोयला उत्पादक क्षेत्र है, जो लगभग पाँच हजार वर्ग कि०मी० क्षेत्र में फैला है। यहाँ का उत्पादन कपड़ा, इस्पात और इंजीनियरिंग उद्योगों में प्रयुक्त होता है।

नार्थम्बर लैण्ड-डरहम क्षेत्र-

  यह ब्रिटेन का दूसरा प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र है। इंगलैण्ड के पूर्वी छोर पर स्थित इस क्षेत्र से उत्तम कोटि का बिटुमिनस कोयला प्राप्त किया जाता है, अधिकांश उत्पादन समीपवर्ती औद्योगिक क्षेत्रों में खप जाता है। यहाँ के कोयले से उत्तम कोटि का कोक बनाया जाता है।

यूनान-

   हाल के वर्षों में यूनान का कोयला उत्पादन तेजी से बढ़ा है। 2007 में यहाँ 625 लाख टन कोयला उत्पादित हुआ था। जो विश्व उत्पादन का 1.0 प्रतिशत है। यहाँ मध्यम किस्म का कोयला उत्पादित होता है।

चेक गणराज्य-

   यह यूरोप का चौथा बड़ा और विश्व का पन्द्रहवाँ बड़ा कोयला उत्पादक देश है। 2007 में यहाँ 626 लाख मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन हुआ था, जो विश्व का एक प्रतिशत से कम है।

रोमानिया-

       यूरोपीय देशों में रोमानिया का कोयला उत्पादन तेजी से बढ़ा है जिसके कारण यह यूरोप का पाँचवां बड़ा कोयला उत्पादक देश बन गया है। 2007 में यहाँ विश्व का 0.5 प्रतिशत कोयला उत्पादित हुआ था। 1970 से ही इसका उत्पादन अपनी आवश्यकता के अनुकूल होता रहा है।

बुल्गेरिया-

     यूरोप का छठवां और विश्व का अठारहवाँ बड़ा कोयला उत्पादक देश है, जहाँ विश्व का मात्र 0.2 प्रतिशत कोयला उत्पादित होता है।

पूर्व युगोस्लाविया-

      यह यूरोप का सातवां और विश्व का उन्नीसवां बड़ा उत्पादक देश है। 2007 में यहाँ 60 लाख मीट्रिक टन उत्तम किस्म का तथा 932 लाख मीट्रिक टन लिग्नाइट का उत्पादन हुआ था, जो विश्व उत्पादन का 0.2 प्रतिशत था। यहाँ के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में पिलजेन और साइलेशिया है जहाँ से देश का अधिकांश उत्पादन प्राप्त किया जाता है।

अन्य यूरोपीय उत्पादक देश-

      यूरोप के अन्य प्रमुख उत्पादकों में फ्रान्स, बेल्जियम, नीदरलैण्ड, हंगरी और स्पेन विशेष उल्लेखनीय है। 2007 में फ्रांस का उत्पादन केवल 70 लाख मीट्रिक टन था। इसका अधिकांश उत्पादन केवल 70 लाख मीट्रिक टन था। इसका अधिकांश उत्पादन फ्रेंको बेल्जियम क्षेत्र, लारेन पठारी क्षेत्र, लीकूसोट तथा अटिपे कोयला क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है।

    बेल्जियम का उत्पादन 2007 में 10 लाख मीट्रिक टन उत्तम कोटि का और 249 लाख मीट्रिक टन लिग्नाइट था। इसका अधिकांश उत्पादन फ्रैंको बेल्जियम एवं कैम्पाइन क्षेत्रों से प्राप्त किया जाता है। नीदरलैण्ड में लिम्बर्ग बेसिन और जील बेसिन प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं।

दक्षिणी अफ्रीका संघ

   यह विश्व का छठवां बड़ा कोयला उत्पादक देश है। 2007 में इसका उत्पादन 2694 लाख मीट्रिक टन था, जो विश्व का 4.2 प्रतिशत होता है। इसका संचित भंडार भी पर्याप्त है। यहाँ के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में ट्रांसवाल और नेटाल राज्य अग्रणी हैं, जहाँ से देश का 85 प्रतिशत कोयला प्राप्त किया जाता है। यहाँ अधिकांशतः

उच्च कोटि का बिटुमिनस कोयला निकाला जाता है, जो निर्यात किया जाता है।

आस्ट्रेलिया-

     यह विश्व का चौथा बड़ा कोयला उत्पादक देश बन गया है। 1970 में 420 लाख मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन हुआ था, जो बढ़कर 2007 में 3939 लाख मीट्रिक टन हो गया। यह प्रतिवर्ष 293 लाख मीट्रिक टन लिग्नाइट का उत्पादन भी करता है। साथ ही यहाँ विश्व का 1.4 प्रतिशत कोयला भंडा संचित है, जिसमें अधिकांश उच्च कोटि का है। यहाँ के उत्पादन का अस्सी प्रतिशत कोयला न्यूसाउथ वेल्स की खानों से प्राप्त होता है। प्रसिद्ध खदानों में न्यूकौंसिल की उत्तरी खदान, लिथस की पश्चिमी खदान तथा कैम्बला बंदरगाह के समीप की पश्चिमी खदान विशेष उल्लेखनीय है।



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18. Cyclone and Anti cyclone (चक्रवात एवं प्रति चक्रवात)

18. Cyclone and Anti cyclone

(चक्रवात एवं प्रति चक्रवात)



1. चक्रवात की उत्पत्ति किस प्रकार होती है?

(a) दो विभिन्न वायुराशियों के मिलने से

(b) दो भिन्न तापमान वाली वायुराशियों के मिलने से

(c) वायुमण्डलीय दशाओं में असाधारण परिवर्तन से

(d) उपर्युक्त सभी

[read more] (d) उपर्युक्त सभी [/read]

2. चक्रवात की दिशा क्या होती है?

(a) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के विपरीत और दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के अनुकूल

(b) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के अनुकूल और दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के विपरीत

(c) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के विपरीत और दक्षिणी गोलार्द्ध में भी घड़ी की सूई के विपरीत

(d) उत्तरी गोलार्द्ध तथा दक्षिणी गोलार्द्ध दोनों में घड़ी की सूई के अनुकूल

[read more] (a) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के विपरीत और दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के अनुकूल [/read]

3. चक्रवात की आकृति इनमें से किस प्रकार की होती है?

(a) अण्डाकार

(b) त्रिभुजाकार

(c) गोलाकार

(d) उपर्युक्त सभी

[read more] (a) अण्डाकार [/read]

4. चक्रवात का शान्त क्षेत्र क्या कहलाता है?

(a) चक्षु

(b) गर्त

(c) परिक्षेत्र

(d) केन्द्र

[read more] (a) चक्षु [/read]

5. चक्रवात की ‘आँख’ एक विशेषता है-

(a) उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की

(b) प्रतिचक्रवात की

(c) उष्णार्द्र चक्रवात की

(d) आक्लूडेड वाताग्र की

[read more] (a) उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की [/read]

6. उत्तरी गोलार्द्ध में चक्रवात की वायु की दिशा होती है-

(a) दक्षिणावर्त

(b) वामावर्त

(c) पश्चिम से पूर्व

(d) पूर्व से पश्चिम

[read more] (b) वामावर्त [/read]

7. दक्षिणी गोलार्द्ध में चक्रवात की वायु की दिशा होती है-

(a) घड़ी की सूई के अनुकूल

(b) घड़ी की सूई के विपरीत

(c) कोई निश्चित दिशा नहीं

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (a) घड़ी की सूई के अनुकूल [/read]

8. टी-मापक (T-Scale) पर निम्न में से किसका मापन किया जाता है?

(a) भूकम्पीय तरंग

(b) पवनों की गति

(c) चक्रवातों की शक्ति

(d) वर्षा की मात्रा

[read more] (c) चक्रवातों की शक्ति [/read]

9. फिलीपीन्स, जापान तथा चीन सागर में जो उष्ण कटिबन्धीय चक्रवातीय तूफान आते हैं उन्हें क्या कहा जाता है?

(a) हरिकेन

(b) टारनेडो

(c) टायफून

(d) विलीविली

[read more] (c) टायफून [/read]

10. हरिकेन चलते हैं-

(a) यूरोप में

(b) चीन सागर में

(c) सहारा मरुस्थल में

(d) मिसीसिपी घाटी में

[read more] (d) मिसीसिपी घाटी में [/read]

11. निम्नलिखित में से कौन-सा देश टायफून से प्रभावित रहता है?

(a) होंडरास एवं ग्वाटेमाला

(b) फिलीपींस एवं जापान

(c) बांग्लादेश

(d) मिसीसिपी घाटी

[read more] (b) फिलीपींस एवं जापान [/read]

12. उष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों को आस्ट्रेलिया में किस नाम से जाना जाता है?

(a) टायफून

(b) हरिकेन

(c) टोरनेडो

(d) विलीविली

[read more] (d) विलीविली [/read]

13. निम्न में से किस हवा में चक्रवातीय गति का अभाव पाया जाता है?

(a) हरिकेन

(b) टारनेडो

(c) पापागयो

(d) टाइफून

[read more] (c) पापागयो [/read]

14. चक्रवातों की उत्पत्ति से सम्बन्धित भंवर सिद्धान्त (Eddy theory) के प्रतिपादक कौन हैं?

(a) बर्कनीज

(b) लैम्फर्ट

(c) नेपियर शॉ

(d) उपर्युक्त में कोई नहीं

[read more] (d) उपर्युक्त में कोई नहीं [/read]

15. टारनेडो का मुख्य सम्बन्ध है-

(a) उत्तरी अमरीका से

(b) उत्तरी यूरोप से

(c) चीन से

(d) दक्षिण अफ्रीका से

[read more] (a) उत्तरी अमरीका से [/read]

16. चक्रवातों की उत्पत्ति से सम्बन्धित ध्रुवीय वाताग्र सिद्धान्त का प्रतिपादन निम्नलिखित में से किसके द्वारा किया गया है?

(a) नेपियर शॉ तथा लैम्फर्ट

(b) जे० बर्कनीज

(c) फिट्जेराय

(d) टॉर बरांरान

[read more] (b) जे० बर्कनीज [/read]

17. निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धान्त चक्रवातों की उत्पत्ति की व्याख्या नहीं करता है?

(a) प्रगामी तरंग सिद्धान्त

(b) ध्रुवीय वाताग्र सिद्धान्त

(c) भंवर सिद्धान्त

(d) गतिक सिद्धान्त

[read more] (a) प्रगामी तरंग सिद्धान्त [/read]

18. टाइफून नामक चक्रवात से कौन-सा क्षेत्र प्रभावित होता है?

(a) आस्ट्रेलिया

(b) चीन सागर

(c) पश्चिमी द्वीप समूह क्षेत्र

(d) उपर्युक्त सभी

[read more] (b) चीन सागर [/read]

19. सुमेलित कीजिए-

सूची-I             सूची-II

A. टायफून    1. चीन

B. विलीविली 2. आस्ट्रेलिया

C. हरिकेन     3. यू० एस० ए०

D. टॉरनेडो     4. कैरीबियन सागर

कूट: A B C D

(a)  1 2 3 4

(b)  1 2 4 3

(c)  3 2 4 1

(d)  1 3 4 2

[read more] (a)  1 2 3 4 [/read]

20. प्रतिचक्रवात की विशेषता है-

(a) तापमान में वृद्धि

(b) स्वच्छ आसमान

(c) तेज पवन

(d) तीव्र दृष्टि

[read more] (b) स्वच्छ आसमान [/read]

21. उच्च दबाब वाली हवाएँ जो केन्द्र से बाहर की ओर चलती है, क्या कहलाती है?

(a) चक्रवात

(b) तूफान

(c) प्रतिचक्रवात

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (b) प्रतिचक्रवात [/read]

22. प्रतिचक्रवात में वायुदाब कहाँ अधिक होता है?

(a) केन्द्र में

(b) मध्य में

(c) बाहर की ओर

(d) कहीं नहीं

[read more] (a) केन्द्र में [/read]

23. प्रतिचक्रवात किस क्षेत्र में कम उत्पन्न होते हैं?

(a) भूमध्य रेखीय क्षेत्र

(b) मरुस्थलीय क्षेत्र

(c) आर्कटिक क्षेत्र

(d) शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र

[read more] (a) भूमध्य रेखीय क्षेत्र [/read]

24. प्रतिचक्रवात किस क्षेत्र में अधिक उत्पन्न होते हैं?

(a) भूमध्य रेखीय क्षेत्र

(b) मरुस्थलीय क्षेत्र

(c) आर्कटिक क्षेत्र

(d) उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दाब क्षेत्र

[read more] (d) उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दाब क्षेत्र [/read]

25. प्रतिचक्रवात चक्रवात की तुलना में होते हैं-

(a) छोटे

(b) बड़े

(c) बराबर

(d) बहुत छोटे

[read more] (b) बड़े [/read]

26. प्रतिचक्रवात की आकृति सामान्यतः होती है-

(a) गोलाकार

(c) त्रिभुजाकार

(b) अंडाकार

(d) उपर्युक्त सभी

[read more] (a) गोलाकार [/read]

27. प्रतिचक्रवात में वायु की दिशा होती है-

(a) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूइयों के अनुकूल तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूईयों के विपरीत

(b) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूईयों के विपरीत तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूईयों के अनुकूल

(c) दोनों गोलाद्धों में घड़ी की सूईयों के अनुकूल

(d) दोनों गोलाद्धों में घड़ी की सूईयों के विपरीत

[read more] (a) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूइयों के अनुकूल तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूईयों के विपरीत [/read]

28. प्रतिचक्रवात के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) प्रतिचक्रवात में केन्द्र में उच्च दाब पाया जाता है।

(b) चक्रवात की तुलना में इसका आकार छोटा होता है।

(c) प्रतिचक्रवात में सामान्यतः वर्षा अधिक होता है।

(d) प्रतिचक्रवात में सामान्यतः वर्षा का अभाव होता है।

[read more] (d) प्रतिचक्रवात में सामान्यतः वर्षा का अभाव होता है। [/read]

29. निम्नलिखित में कौन सर्वाधिक विनाशकारी होता है?

(a) तड़ित झंझा

(b) हरिकेन

(c) टायफून

(d) टॉरनेडो

[read more] (d) टॉरनेडो [/read]

30. टॉरनेडो है

(a) एक अति उच्च दाब केन्द्र

(b) एक अति निम्न दाब केन्द्र

(c) एक अति उच्च समुद्री लहर

(d) एक भूमण्डलीय पवन

[read more] (b) एक अति निम्न दाब केन्द्र [/read]

31. डोलड्रम क्या है?

(a) व्यापारिक हवाएँ

(b) भूमध्य रेखा के आसपास अल्प दाब का क्षेत्र

(c) बहुत अधिक आर्द्रता वाला क्षेत्र

(d) शान्त समुद्रों वाला क्षेत्र

[read more] (b) भूमध्य रेखा के आसपास अल्प दाब का क्षेत्र [/read]

24. Ocean Floor (महासागरीय नितल)

24. Ocean Floor

(महासागरीय नितल)



1. समस्त पृथ्वी के क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत भाग जल से आच्छादित है?

(a) 29% 

(b) 71%

(c) 75%

(d) 79%

[read more] (b) 71% [/read]

2. उत्तरी गोलार्द्ध में जलमण्डल का विस्तार का प्रतिशत कितना है?

(a) 60%

(b) 63%

(c) 60.7%

(d) 80.9%

[read more] (c) 60.7% [/read]

3. दक्षिणी गोलार्द्ध में जलमण्डल का विस्तार का प्रतिशत कितना है?

(a) 60%

(b) 63%

(c) 80.9%

(d) 82.8%

[read more] (c) 80.9% [/read]

4. महाद्वीपों से महासागरों की ओर जाने पर महासागरीय नितलों का कौन- सा क्रम सही है?

(a) महाद्वीपीय मग्न तट, गहरे सागरीय मैदान, महाद्वीपीय मग्न ढाल, महासागरीय गर्त

(b) गहरे सागरीय मैदान, महासागरीय गर्त, महाद्वीपीय मग्न तट, महाद्वीपीय मग्न ढाल

(c) महाद्वीपीय मग्न ढाल, महाद्वीपीय मग्न तट, गहरे सागरीय मैदान, महासागरीय गर्त

(d) महाद्वीपीय मग्न तट, महाद्वीपीय मग्न ढाल, गहरे सागरीय मैदान, महासागरीय गर्त

[read more] (d) महाद्वीपीय मग्न तट, महाद्वीपीय मग्न ढाल, गहरे सागरीय मैदान, महासागरीय गर्त [/read]

5. सागर की ओर तीव्र ढाल वाला भाग क्या कहलाता है-

(a) महासागरीय गर्त

(b) गहन सागरीय ढाल

(c) महाद्वीपीय मग्न तट

(d) महाद्वीपीय मग्न ढाल

[read more] (d) महाद्वीपीय मग्न ढाल [/read]

6. महाद्वीपीय मग्न तट तथा गहरे सागरीय मैदान के मध्य स्थित होता है-

(a) महाद्वीपीय मग्न ढाल

(b) महासागरीय गर्त

(c) महाद्वीपीय मग्न तट

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (a) महाद्वीपीय मग्न ढाल [/read]

7. घटते क्षेत्रफल के आधार पर निम्नलिखित का सही अवरोही क्रम क्या होगा?

I. गहन सागरीय मैदान

II. महाद्वीपीय मग्न ढाल

III. महासागरीय गर्त

IV. महाद्वीपीय मग्न तट

कूट :

(a) I, II, III, IV

(b) 1, IV, II, III

(c) I, II, IV, III

(d) I, IV, III, II

[read more] (c) I, II, IV, III [/read]

8. सम्पूर्ण महासागरीय क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत भाग पर महाद्वीपीय मग्न तट का विस्तार है?

(a) 6.5%

(b) 7.5%

(c) 8.5%

(d) 9.5%

[read more] (b) 7.5% [/read]

9. महाद्वीपीय मग्न तट के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) यह संरचना की दृष्टि से महाद्वीप का अंग है।

(b) इसकी औसत गहराई लगभग 200 मीटर है।

(c) इसका सर्वाधिक विस्तार प्रशान्त महासागर में है।

(d) इसकी औसत ढाल लगभग 1° है।

[read more] (c) इसका सर्वाधिक विस्तार प्रशान्त महासागर में है। [/read]

10. महाद्वीपीय मग्न तट का सर्वाधिक विस्तार किस महासागर में पाया जाता है?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) हिन्द महासागर

(c) अटलांटिक महासागर

(d) आर्कटिक महासागर

[read more] (c) अटलांटिक महासागर [/read]

11. अधिकांश मछलियों एवं अन्य समुद्री आहार मुख्यतः प्राप्त किये जाते हैं-

(a) महाद्वीपीय मग्न तट से

(b) महाद्वीपीय उभार से

(c) महाद्वीपीय मग्न ढाल से

(d) गहन सागरीय मैदान से

[read more] (a) महाद्वीपीय मग्न तट से [/read]

12. विश्व का सर्वाधिक चौड़ा महाद्वीपीय मग्न तट किस महासागर में स्थित है?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) अटलांटिक महासागर

(c) आर्कटिक महासागर

(d) हिन्द महासागर

[read more] (c) आर्कटिक महासागर [/read]

13. भूमि का वह डूबा हुआ भाग जो महाद्वीप में जुड़ा होता है और 600 फीट से अधिक गहरा नहीं होता है, उसे कहते हैं

(a) महाद्वीपीय मग्न तट

(b) महाद्वीपीय द्वीप

(c) महाद्वीपीय मग्न ढाल

(d) मूंगा द्वीप

[read more] (a) महाद्वीपीय मग्न तट [/read]

14. तट के किनारे जिन क्षेत्रों में पर्वत पाये जाते हैं, वहाँ महाद्वीपीय मग्न तट है-

(a) काफी चौड़ा

(b) संकरा

(c) कटा-छटा

(d) उथला

[read more] (b) संकरा [/read]

15. विश्व के कुल खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस के उत्पादन का कितना प्रतिशत भाग महाद्वीपीय मग्न तट से प्राप्त होता है?

(a) 10%

(b) 20%

(c) 25%

(d) 40%

[read more] (b) 20% [/read]

16. महाद्वीपीय मग्न ढाल के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) यह महाद्वीपीय मग्न तट तथा महासागरीय गम्भीर मैदान के बीच स्थित होता है।

(b) इसकी गहराई 200 मीटर से 2000 मीटर तथा औसत ढाल 2° से 5° होती है।

(c) इसे महाद्वीपों की अन्तिम सीमा कहा जाता है।

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (d) इनमें से कोई नहीं [/read]

17. सम्पूर्ण महासागरीय क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत भाग पर महाद्वीपीय मग्न ढाल का विस्तार पाया जाता है?

(a) 5.5%

(b) 6.5%

(c) 7.5%

(d) 8.5%

[read more] (b) 6.5% [/read]

18. सम्पूर्ण महासागरीय क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत भाग पर गम्भीर सागरीय मैदान का विस्तार पाया जाता है?

(a) 71%

(b) 76%

(c) 80%

(d) 82%

[read more] (b) 76% [/read]

19. गम्भीर सागरीय मैदान का सर्वाधिक विस्तार किस महासागर में पाया जाता है ?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) हिन्द महासागर

(c) अटलांटिक महासागर

(d) आर्कटिक महासागर

[read more] (a) प्रशान्त महासागर [/read]

20. गम्भीर सागरीय मैदान के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(a) इसके अन्तर्गत सम्पूर्ण महासागरीय क्षेत्रफल का लगभग तीन चौथाई भाग आता है।

(b) इसकी गहराई 3000 से 6000 मीटर होती है।

(c) इसका सर्वाधिक विस्तार 20° उत्तरी अक्षांश से 60° दक्षिणी अक्षांश के बीच पाया जाता है।

(d) उपर्युक्त सभी

[read more] (d) उपर्युक्त सभी [/read]

21. महासागरीय गर्तों की सर्वाधिक संख्या किस महासागर में है?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) हिन्द महासागर

(c) अटलांटिक महासागर

(d) आर्कटिक महासागर

[read more] (a) प्रशान्त महासागर [/read]

22. संसार के समस्त महासागरों में अब तक कितने महासागरीय गर्तों का पता चला है?

(a) 19

(b) 32

(c) 51

(d) 57

[read more] (d) 57 [/read]

23. महासागरीय गर्तों की सामान्यतः गहराई कितने मीटर होती है?

(a) 5,000 मीटर

(b) 7,000 मीटर

(c) 5,500 मीटर

(d) 10,000 मीटर

[read more] (c) 5,500 मीटर [/read]

24. विश्व का सबसे गहरा महासागरीय गर्त है-

(a) प्यूर्टोरिको

(b) सुण्डा

(c) मेरियाना

(d) मिंडनाओ

[read more] (c) मेरियाना [/read]

25. महासागर में सबसे अधिक गहराई प्रशान्त महासागर के मेरियाना गर्त की है जो है-

(a) समुद्रतल से 9,200 मी० नीचे

(b) समुद्रतल से 10,500 मी० नीचे

(c) समुद्रतल से 11,033 मी० नीचे

(d) समुद्रतल से 11,500 मी० नीचे

[read more] (c) समुद्रतल से 11,033 मी० नीचे [/read]

26. निम्नलिखित में से कौन-सा महासागरीय गर्त प्रशान्त महासागर में स्थित नहीं है?

(a) मेरियाना

(b) मिण्डनाओ

(c) टोंगा

(d) प्यूर्टोरिको

[read more] (d) प्यूर्टोरिको [/read]

27. विश्व का सबसे गहरा गर्त चैलेन्जर गर्त स्थित है-

(a) फिजी के निकट

(b) गुआम द्वीपमाला के निकट

(c) जापान के पूर्वी तट पर

(d) फिलीपींस के पूर्वी तट पर

[read more] (b) गुआम द्वीपमाला के निकट [/read]

28. सपाट शीर्ष वाले समुद्री पर्वतों को किस नाम से जाना जाता है?

(a) मोनेडनॉक

(b) गुयॉट

(c) इन्सेलबर्ग

(d) ज्यूगेन

[read more] (b) गुयॉट [/read]

29. अटलांटिक महासागर में स्थित मध्य अटलांटिक कटक की लम्बाई लगभग है-

(a) 11,000 किमी०

(b) 14,000 किमी०

(c) 18,000 किमी०

(d) 20,000 किमी ०

[read more] (b) 14,000 किमी० [/read]

30. समुद्री पहाड़ियों की नितल से न्यूनतम ऊँचाई कितनी होती है?

(a) 500 मी०

(b) 1,000 मी०

(c) 1,500 मी०

(d) 2,000 मी०

[read more] (b) 1,000 मी० [/read]

31. सबसे अधिक नितल पहाड़ियाँ (Abyssal Hills) किस महासागर में है?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) हिन्द महासागर

(c) अटलांटिक महासागर

(d) आर्कटिक महासागर

[read more] (a) प्रशान्त महासागर [/read]

32. प्रशान्त महासागर में नितल पहाड़ियों की संख्या लगभग कितनी है?

(a) 5,000

(b) 7,000

(c) 10,000

(d) 15,000

[read more] (c) 10,000 [/read]

33. विश्व में जलमग्न केनियन की संख्या कितनी है?

(a) 57

(b) 75

(c) 102

(d) 120

[read more] (c) 102 [/read]

34. जलमग्न केनियन सर्वाधिक संख्या में किस महासागर में हैं?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) हिन्द महासागर

(c) अटलांटिक महासागर

(d) आर्कटिक महासागर

[read more] (a) प्रशान्त महासागर [/read]

35. विश्व के सबसे लम्बे जलमग्न केनियन पाये जाते हैं-

(a) भूमध्य सागर में

(b) बेरिंग सागर में

(c) दक्षिण चीन सागर में

(d) जापान सागर में

[read more] (b) बेरिंग सागर में [/read]

36. डॉल्फिन चैलेन्जर कटक स्थित है-

(a) अटलांटिक महासागर में

(b) प्रशान्त महासागर में

(c) हिन्द महासागर में

(d) आर्कटिक महासागर में

[read more] (a) अटलांटिक महासागर में [/read]

37. सुण्डा गर्त स्थित है-

(a) सुमात्रा के दक्षिण

(b) सुमात्रा के उत्तर

(c) चागोस द्वीप के उत्तर

(d) चागोस द्वीप के दक्षिण

[read more] (a) सुमात्रा के दक्षिण [/read]

25. Major deltas of the world (विश्व के प्रमुख डेल्टा)

25. Major deltas of the world

(विश्व के प्रमुख डेल्टा)



Major deltas of the world

1. नदी की विभिन्न शाखाओं के बीच स्थित त्रिभुजाकार निक्षेपात्मक आकृति को क्या कहा जाता है?

(a) जलोढ़ पंख

(b) प्राकृतिक तटबंध

(c) नदी विसर्प

(d) डेल्टा

[read more] (d) डेल्टा [/read]

2. डेल्टा का नामकरणकर्ता किसे माना जाता है?

(a) पोलीडोनियस

(b) हिकेटियस

(c) इरेटॉस्थनीज

(d) हेरोडोटस

[read more] (d) हेरोडोटस [/read]

3. सामान्यतया डेल्टा की आकृति किस प्रकार की होती है?

(a) आयताकार

(b) अनिश्चित आकृति

(c) वर्गाकार

(d) त्रिभुजाकार

[read more] (d) त्रिभुजाकार [/read]

4. निम्नलिखित में कौन-सी परिस्थितियाँ डेल्टा के निर्माण के लिए आवश्यक है?

(a) नदी में बोझ की अधिक मात्रा

(b) मुहाने का ज्वार-भाटे से मुक्त होना

(c) मुहाने के निकट नदी का वेग कम होना

(d) उपर्युक्त सभी

[read more] (d) उपर्युक्त सभी [/read]

5. क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा नदी डेल्टा कौन-सा है?

(a) नील नदी का डेल्टा

(b) सुन्दर वन डेल्टा

(c) अमेजन नदी का डेल्टा

(d) मिसीसिपी नदी का डेल्टा

[read more] (b) सुन्दर वन डेल्टा [/read]

6. गंगा तथा मिसीसिपी नदियों का डेल्टा किस प्रकार का डेल्टा माना जाता है?

(a) ज्वारनदमुखी डेल्टा

(b) प्रगतिशील डेल्टा

(c) चापाकार डेल्टा

(d) पक्षीपाद डेल्टा

[read more] (b) प्रगतिशील डेल्टा [/read]

7. परित्यक्त (Abandoned) डेल्टा का उदाहरण निम्न में से किस नदी द्वारा प्रस्तुत किया जाता है?

(a) ह्वांगहो

(b) नील

(c) गंगा

(d) अमेजन

[read more] (a) ह्वांगहो [/read]

8. नर्मदा और तापी किस प्रकार के डेल्टा का निर्माण करती है?

(a) चापाकार डेल्टा

(b) ज्वारनदमुखी डेल्टा

(c) पक्षीपाद डेल्टा

(d) परित्यक्त डेल्टा

[read more] (b) ज्वारनदमुखी डेल्टा [/read]

9. कौन-सी नदी पंजाकार डेल्टा का सुन्दर उदाहरण प्रस्तुत करता है?

(a) नील

(b) गंगा

(c) मिसीसिपी

(d) हांगहो

[read more] (c) मिसीसिपी [/read]

10. निम्नलिखित में से किस नदी का डेल्टा चिड़िया के पैर (पंजे) जैसा है?

(a) नील

(b) ब्रह्मपुत्र

(c) अमेजन

(d) मिसीसिपी

[read more] (d) मिसीसिपी [/read]

11. गंगा नदी का डेल्टा किस प्रकार का है?

(a) चापाकार

(b) पंजाकार

(c) क्षीणाकार

(d) नौकाकार

[read more] (a) चापाकार [/read]

12. गंगा नदी अपने मुहाने पर डेल्टा का निर्माण करती है। यह डेल्टा कहाँ से प्रारम्भ होता है?

(a) कोलकाता से

(b) गौर से

(c) बजबज से

(d) सुन्दर वन से

[read more] (b) गौर से [/read]

13. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी ज्वारनदमुख का निर्माण करती है?

(a) मेनाम

(b) नील

(c) यांग्टिसीक्यांग

(d) नर्मदा

[read more] (d) नर्मदा [/read]

14. नदी द्वारा वृद्धावस्था में किस महत्वपूर्ण स्थलाकृति की रचना होती है?

(a) जलप्रपात

(b) छाड़न झील

(c) जलोढ़ शंकु

(d) डेल्टा

[read more] (d) डेल्टा [/read]

15. शुष्क डेल्टा का निर्माण किन क्षेत्रों में कैसे होता है?

(a) समुद्रतटीय क्षेत्रों में नदियों द्वारा पुराने डेल्टा को छोड़ देने से

(b) पर्वतपाद प्रदेश में जहाँ नदियाँ पर्वतीय भाग को छोड़कर मैदानी भाग में प्रवेश करती है।

(c) नदियों के संगम क्षेत्र में उनके सम्मिलन से

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

[read more] (b) पर्वतपाद प्रदेश में जहाँ नदियाँ पर्वतीय भाग को छोड़कर मैदानी भाग में प्रवेश करती है। [/read]

16. रेड रिवर (लाल नदी) के डेल्टा क्षेत्र में कौन-सा नगर स्थित है?

(a) वियन्तियान

(b) सिओल

(c) हनोई

(d) हैंकाऊ

[read more] (c) हनोई [/read]

24. Major Cities Located on The River Banks (नदियों के किनारे स्थित प्रमुख नगर)

24. Major Cities Located on The River Banks

(नदियों के किनारे स्थित प्रमुख नगर)



1. निम्नलिखित में कौन-सा शहर नीली नील नदी एवं सफेद नील नदी के संगम पर स्थित है?

(a) काहिरा

(b) बगदाद

(c) खारतूम

(d) अंकारा

[read more] (c) खारतूम [/read]

2. कौन-सा शहर मिसीसिपी तथा मिसौरी के संगम पर स्थित है?

(a) शिकागो

(b) ब्रेडफोर्ड

(c) सेंट लुईस

(d) वाशिंगटन डी० सी०

[read more] (c) सेंट लुईस [/read]

3. कौन-सा शहर दजला एवं फरात नदियों के संगम पर स्थित है?

(a) काहिरा

(b) खारतूम

(c) बगदाद

(d) बसरा

[read more] (d) बसरा [/read]

4. कौन-सा शहर डिलोवेयर तथा स्चुतकिल नदियों के संगम पर स्थित है?

(a) ब्रेडफोर्ड

(b) शिकागो

(c) न्यूयॉर्क

(d) फिलाडेल्फिया

[read more] (d) फिलाडेल्फिया [/read]

5. जमशेदपुर शहर किन नदियों के संगम पर बसा है?

(a) दामोदर एवं स्वर्णरखा

(b) दामोदर एवं बराकर

(c) स्वर्णरेखा एवं खरकई

(d) दामोदर एवं खरकई

[read more] (c) स्वर्णरेखा एवं खरकई [/read]

6. पेरिस शहर किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) डेन्यूब

(b) टाइबर

(c) सीन

(d) सतलज

[read more] (c) सीन, Major Cities Located on The River [/read]

7. वियना शहर किस नदी के किनारे बसा है?

(a) डेन्यूब

(b) टाइबर

(c) टेम्स

(d) हडसन

[read more] (a) डेन्यूब [/read]

8. बुडापेस्ट शहर किस नदी के किनारे स्थित है?

(a) टिग्रिस

(b) हडसन

(c) नील

(d) डेन्यूब

[read more] (d) डेन्यूब [/read]

9. रोम (इटली) नगर किस नदी के किनारे बसा है?

(a) विस्टुला

(b) एवान

(c) राइन

(d) टाइबर

[read more] (d) टाइबर [/read]

10. निम्नलिखित में कौन-सा शहर डेन्यूब नदी के किनारे नहीं अवस्थित है?

(a) बेलग्रेड

(b) बुडापेस्ट

(c) रोम

(d) वियना

[read more] (c) रोम [/read]

11. फ्रांस का बोर्डो बन्दरगाह किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) सीन

(b) लायर

(c) ओडर

(d) गेरून

[read more] (d) गेरून [/read]

12. सीन नदी किस नगर से होकर बहती है?

(a) लंदन

(b) पेरिस

(c) फ्रैंकफर्ट

(d) रोम

[read more] (b) पेरिस [/read]

13. निम्नलिखित में कौन-सा नगर किसी नदी के तट पर स्थित नहीं है?

(a) इस्ताम्बुल

(b) मास्को

(c) बगदाद

(d) पेरिस

[read more] (a) इस्ताम्बुल [/read]

14. निम्ननांकित में किसका सुमेल नहीं है?

(a) वॉन- राइन

(b) काहिरा- नील

(c) न्यूयॉर्क- हडसन

(d) वियना- वोल्गा

[read more] (d) वियना- वोल्गा [/read]

15. निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा सही सुमेलित है?

(a) बगदाद- टिग्रिस

(b) रोम- सीन

(c) वॉन- डेन्यूब

(d) पेरिस- टाइबर

[read more] (a) बगदाद- टिग्रिस [/read]

16. हैम्बर्ग किस नदी के मुहाने पर स्थित है?

(a) एल्ब

(b) राइन

(c) सीन

(d) रोन

[read more] (a) एल्ब [/read]

17. निम्न में से कौन-सा शहर नील नदी के किनारे बसा हुआ है?

(a) किन्शासा

(b) नैरोबी

(c) खारतूम

(d) अदीस अबाबा

[read more] (c) खारतूम [/read]

18. निम्नलिखित में से कौन-सा सुमेलित नहीं है?

(a) बर्लिन- स्प्री नदी

(b) रंगून- इरावदी नदी

(c) लन्दन- टेम्स नदी

(d) रोम- टिग्रिस नदी

[read more] (d) रोम- टिग्रिस नदी [/read]

19. सुमेलित कीजिए

सूची-I (नगर)  सूची-II (नदी)

A. रोम       1. हडसन

B. मास्को  2. टेम्स

C. लंदन     3. मस्कोवा

D. न्यूयॉर्क   4. टाइबर

कूट: A B C D

(a)  3 4 2 1

(b)  3 4 1 2

(c)  4 3 1 2

(d)  4 3 2 1

[read more] (d)  4 3 2 1 [/read]

20. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिये गये कूटों में से सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (नगर)   सूची-II (नदी)

A. बर्लिन  1. टाइबर

B. लाहौर  2. हडसन

C. न्यूयॉर्क 3. रावी

D. रोम      4. स्प्री

कूट: A B C D

(a)  1 2 3 4

(b)  4 3 2 1

(c)   3 4 1 2

(d)  1 4 2 3

[read more] (b)  4 3 2 1 [/read]

21. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर का चुनाव कीजिए-

सूची I (नदियाँ)   सूची-II (नगर)

A. डेन्यूब       1. वियना

B. मैजेनसेस  2. मैड्रिड

C. सेंट लारेंस 3. ओटावा

D. डार्लिंग      4. सिडनी

कूट: A B C D

(a)  1 2 3 4

(b)  2 1 3 4

(c)  1 2 4 3

(d)  2 1 4 3

[read more] (a)  1 2 3 4 [/read]

11. Major Geographical Features (प्रमुख भौगोलिक स्थलाकृतियाँ)

11. Major Geographical Features

(प्रमुख भौगोलिक स्थलाकृतियाँ)



1. जलोढ़ पंख कहाँ निर्मित होते हैं?

(a) नदी के तट पर

(b) नदी के किनारों पर

(c) पहाड़ी के तलीय क्षेत्र पर

(d) झील के किनारों पर

[read more] (c) पहाड़ी के तलीय क्षेत्र पर [/read]

2. एक संकरी, गहरी तथा तीव्र ढ़ाल युक्त किनारों वाली नदी घाटी को किस नाम से जाना जाता है?

(a) ब्लफ

(b) कैनियन

(c) रिफ्ट घाटी

(d) उपर्युक्त सभी

[read more] (b) कैनियन [/read]

3. अपरदन के सामान्य चक्र में पुनर्योवन को दर्शाने वाली स्थलाकृति कौन- सी है?

(a) अधःकर्तित विसर्प

(b) गॉर्ज अथवा कैनियन

(c) बाढ़ का मैदान

(d) उपर्युक्त सभी

[read more] (a) अधःकर्तित विसर्प [/read]

4. समप्राय मैदानों का निर्माण नदी की किस अवस्था में होता है?

(a) युवावस्था

(b) जीर्णावस्था

(c) प्रौढ़ावस्था

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (b) जीर्णावस्था [/read]

5. निम्नलिखित में से कौन नदी का निक्षेपात्मक स्थलरूप नहीं है?

(a) प्राकृतिक तटबंध (लेवीज)

(b) बाढ़ का मैदान

(c) नदी विसर्प या मियाण्डर

(d) जलोढ़ पंख एवं शंकु

[read more] (c) नदी विसर्प या मियाण्डर [/read]

6. चाप झील (Ox-bow Lake) तथा विसर्प (Meander) नदी घाटी के किस भाग के लक्षण हैं?

(a) ऊपरी मार्ग

(b) निचला मार्ग

(c) मध्य मार्ग

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (c) मध्य मार्ग [/read]

7. नदियों द्वारा अपने किनारों पर प्राकृतिक रूप से बनाये गये बांधों को किस नाम से जाना जाता है?

(a) अवरोध

(b) लेवीज या तटबंध

(c) बैराज

(d) वेदिका

[read more] (b) लेवीज या तटबंध [/read]

8. नदी के उस मुहाने पर जहाँ से नदी समुद्र में गिरती है, त्रिकोण रूप में जलोढ़ मिट्टी का भण्डार कहलाता है-

(a) डेल्टा

(b) केप

(c) महाद्वीपीय छज्जा

(d) लेवीज

[read more] (a) डेल्टा [/read]

9. V-आकार की घाटी कौन बनाती है?

(a) हिमनद या हिमानी

(b) समुद्री लहर

(c) पवन

(d) नदी

[read more] (d) नदी [/read]

10. छाड़न झील (Ox-bow Lake) है-

(a) समुद्रतट पर स्थित झील

(b) नदी डेल्टा की झील

(c) परित्यक्त नदी मोड़

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (c) परित्यक्त नदी मोड़ [/read]

11. नदी के निक्षेपण से बनी स्थलाकृति है-

(a) जलप्रपात

(b) नदी विसर्प (मियाण्डर)

(c) प्राकृतिक तटबंध

(d) सम्प्राय मैदान

[read more] (c) प्राकृतिक तटबंध [/read]

12. नदी के अपरदन से बनी स्थलाकृति है-

(a) डेल्टा

(b) गॉर्ज

(c) प्राकृतिक तटबंध

(d) बाढ़ का मैदान

[read more] (b) गॉर्ज [/read]

13. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थलाकृति का निर्माण नदी की युवावस्था में होता है?

(a) डेल्टा

(b) गॉर्ज

(c) गोखुर

(d) मियाण्डर

[read more] (b) गॉर्ज [/read]

14. अर्द्धचन्द्राकार मरूस्थलीय आकृति किस नाम से जानी जाती है?

(a) सीफ

(b) बरखान

(c) एरेट

(d) गारा

[read more] (b) बरखान [/read]

15. बहते हुए नदी जल द्वारा निर्मित आकृति विहीन मैदानों को निम्नलिखित में से किस नाम से जाना जाता है?

(a) पेडीप्लेन

(b) पेनीप्लेन

(c) एवंप्लेन

(d) पैनप्लेन

[read more] (b) पेनीप्लेन [/read]

16. पवन के अपरदनात्मक कार्यों के परिणामस्वरूप तीन फलक या पार्श्वों वाले कठोर शैलों के टुकड़ों को किस नाम से जाना जाता है?

(a) ज्यूजेन

(b) यारडांग

(c) ड्राइकाण्टर

(d) इन्सेलबर्ग

[read more] (b) यारडांग [/read]

17. रेगिस्तानी भागों में बरखानों की दो समानान्तर श्रेणियों के मध्य रेत मुक्त गलियारा, जिससे होकर कारवां मार्ग आगे बढ़ते हैं, निम्न में से क्या कहलाता है?

(a) हमादा

(b) बजादा

(c) रेग

(d) गासी

[read more] (d) गासी [/read]

18. लोयस जमाव के अति वृहत क्षेत्र मिलते हैं

(a) पश्चिमी आस्ट्रेलिया में

(b) पैटागोनिया में

(c) उत्तरी चीन में

(d) उत्तरी अफ्रीका में

[read more] (c) उत्तरी चीन में [/read]

19. मरूस्थलीय क्षेत्रों से पवन द्वारा उड़ायी गयी रेत की बड़ी मात्रा के निक्षेपण से निर्मित स्थल रूप को क्या कहा जाता है जिसका नामकरण फ्रास के अलसस प्रान्त में स्थित एक ग्राम के नाम पर किया गया है?

(a) प्लाया

(b) सेलिनास

(c) बजाडा

(d) लोयस

[read more] (d) लोयस [/read]

20. मरूस्थलीय भागों में असामयिक वर्षा से बनी अल्पकालिक झीलों के सूख जाने पर सिल्ट एवं नामक के निक्षेपण से बनी समतल स्थलाकृति को क्या कहा जाता है?

(a) बालसन

(b) उत्खात स्थलाकृति

(c) पेडीमेण्ट

(d) प्लाया

[read more] (d) प्लाया [/read]

21 . लोयस का निर्माण होता है-

(a) नदियों से

(b) हिमनद से

(c) पवन से

(d) भूमिगत जल से

[read more] (c) पवन से [/read]

22. चन्द्राकार बालू के टीलों को कहते हैं-

(a) बरखान

(b) ज्यूजेन

(c) यारडांग

(d) तटबंध

[read more] (a) बरखान [/read]

23. अपरदन के किस कारक द्वारा बरखान का निर्माण होता है?

(a) नदी

(b) हिमनद

(c) पवन

(d) भूमिगत जल

[read more] (c) पवन [/read]

24. अपरदन के किस कारक द्वारा ज्यूगेन का निर्माण होता है?

(a) नदी

(b) पवन

(c) हिमनद

(d) भूमिगत जल

[read more] (b) पवन [/read]

25. गारा (Gara) स्थलाकृति कहाँ मिलती है?

(a) मरुस्थलों में

(b) डेल्टाई भाग में

(c) हिमाच्छादित प्रदेश में

(d) यूरोप में

[read more] (a) मरुस्थलों में [/read]

26. गारा या छत्रक शिला का निर्माण किस दूत (कारक) द्वारा होता है?

(a) नदी

(b) पवन

(c) हिमनद

(d) भूमिगत जल

[read more] (b) पवन [/read]

27. सीफ का निर्माण किससे होता है?

(a) पवन से

(b) हिमनद से

(c) नदी से

(d) समुद्री लहर से

[read more] (a) पवन से [/read]

28. रेगिस्तानी क्षेत्रों में पर्वतों से घिरी बेसिन जिसमें चारों ओर से छोटी-छोटी नदियाँ गिरती है, निम्न में से किस नाम से जानी जाती है?

(a) प्लाया

(b) बजाडा

(c) बालसन

(d) हम्मादा

[read more] (c) बालसन [/read]

29. अफ्रीका के सहारा क्षेत्र में ‘धूल-दानव’ (Dust devil) के नाम से निम्न में से कौन जाना जाता है?

(a) बालूका स्तूप का खिसकाव

(b) धूलयुक्त तीव्र हवा

(c) आसमान से होने वाली धूल भरी वर्षा

(d) सायं काल चलने वाली तीव्र आंधियाँ

[read more] (a) बालूका स्तूप का खिसकाव [/read]

30. ड्रमलिन क्या है?

(a) एक संकरी घाटी

(b) अंडाकार पर्वत

(c) एक पिरामिडीय चोटी

(d) उपर्युक्त में कोई नहीं

[read more] (b) अंडाकार पर्वत [/read]

31. ‘अण्डों की टोकरी’ स्थलाकृति निम्न में से किससे सम्बन्धित है?

(a) केम

(b) एस्कर

(c) ड्रमलिन

(d) सर्क

[read more] (c) ड्रमलिन [/read]

32. भेड़ पीठ शैल या रॉशमुटोने का निर्माण निम्न में से किस प्रक्रम द्वारा किया जाता है?

(a) नदी

(b) हिमनद

(c) भूमिगत जल

(d) पवन

[read more] (b) हिमनद [/read]

33. भेड़ पीठ शैल या रॉशमुटोने का निर्माण हिमानी की किस क्रिया द्वारा होता है?

(a) अपरदन

(b) निक्षेपण

(c) परिवहन

(d) उपर्युक्त में कोई नहीं

[read more] (a) अपरदन [/read]

34. U- आकार की घाटी कहाँ पायी जाती है?

(a) हिमानी क्षेत्र में

(b) चूना पत्थर क्षेत्र में

(c) परिपक्व नदी में

(d) उपर्युक्त में कोई नहीं 

[read more] (a) हिमानी क्षेत्र में [/read]

35. हिमोढ (Moraines) किसके द्वारा निक्षेपित किये जाते हैं?

(a) बहता पानी

(b) पवन

(c) जल तरंग क्रिया

(d) हिमनद द्वारा

[read more] (d) हिमनद द्वारा [/read]

36. हिमखण्ड ग्लेशियर के पिण्ड होते हैं जिनका भाग-

(a) समुद्र तल से ऊपर होता है।

(b) समुद्र तल से नीचे होता है।

(c) समुद्र तल के बराबर होता है।

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (a) समुद्र तल से ऊपर होता है। [/read]

37. लटकती घाटियाँ कहाँ पायी जाती है?

(a) नदी घाटी क्षेत्र में

(b) कार्स्ट क्षेत्र में

(c) मरुस्थलीय क्षेत्र में

(d) हिमानी क्षेत्र में

[read more] (d) हिमानी क्षेत्र में [/read]

38. ड्रमलिन (Drumlin) के बारे में क्या सत्य है?

(a) कार्स्ट प्रदेश में मिलने वाला गर्त

(b) हिमानी क्षेत्रों की उलटी नाव के आकार की स्थलाकृति

(c) पवन द्वारा निर्मित निक्षेपजन्य स्थलाकृति

(d) सागरीय स्थलाकृति

[read more] (b) हिमानी क्षेत्रों की उलटी नाव के आकार की स्थलाकृति [/read]

39. एरीट है-

(a) चूना प्रदेश में पातालीय स्तम्भ

(b) हिमानी प्रदेश में कंघीनुमा तेज किनारे वाली नग्न चट्टानों की दीवार

(c) सोई हुई भेड़ की तरह चट्टान

(d) हिमनद के साथ चलने वाले शिलाखण्ड

[read more] (b) हिमानी प्रदेश में कंघीनुमा तेज किनारे वाली नग्न चट्टानों की दीवार [/read]

40. हिमनद निर्मित घाटी अँग्रेजी के किस अक्षर की तरह होती है?

(a) V

(b) U

(c) O

(d) C

[read more] (b) U [/read]

41. हिमनदों द्वारा जमा किये गए अवसाद जब गोलाकार पहाड़ियों का रूप धारण कर लेते हैं तब उसे कहा जाता है-

(a) ब्यूट

(b) वलित पर्वत

(c) ड्रमलिन

(d) भ्रंशोत्य पर्वत

[read more] (c) ड्रमलिन [/read]

42. टोम्बोलो स्थलाकृति का निर्माण किस प्रक्रम द्वारा होता है?

(a) नदी

(b) हिमानी

(c) पवन

(d) सागरीय तरंगें

[read more] (d) सागरीय तरंगें [/read]

43. स्टैक स्थलाकृति का निर्माण निम्नलिखित में से किस प्रक्रम द्वारा होता है?

(a) बहता हुआ जल (नदी)

(b) सागरीय लहरें

(c) पवन

(d) भूमिगत जल

[read more] (b) सागरीय लहरें [/read]

44. पिंगो स्थलाकृति निम्न में से किस क्षेत्र में पायी जाती है?

(a) मरुस्थलीय

(b) परिहिमानी

(c) समुद्र तटीय

(d) अगाधसागरीय

[read more] (b) परिहिमानी [/read]

45. फियोर्ड किस प्रक्रम से निर्मित होता है?

(a) नदी से

(b) समुद्री तरंग से

(c) हवा से

(d) ग्लेशियरों से

[read more] (d) ग्लेशियरों से [/read]

46. कार्स्ट प्रदेश निम्नलिखित में से कस देश में स्थित है?

(a) सं० रा० अमेरिका

(b) फ्रांस

(c) इटली

(d) यूगोस्लाविया

[read more] (d) यूगोस्लाविया [/read]

47. लैपीज किस क्षेत्र से सम्बन्धित स्थलाकृति है?

(a) रेगिस्तान

(b) पर्वतीय

(c) मैदानी

(d) कार्स्ट 

[read more] (d) कार्स्ट  [/read]

48. चूना प्रदेश (कार्स्ट प्रदेश) में पाये जाने वाले कीप के आकार के गर्त को क्या कहते हैं?

(a) विलय रंध्र

(b) घोल रंध्र

(c) कन्दराएँ

(d) बेसिन

[read more] (b) घोल रंध्र [/read]

49. कार्स्ट क्षेत्र में कन्दरा को विलयन छिद्र से सीधे मिलाने वाली लम्बवत या कुछ झुकी हुई नली को क्या कहा जाता है?

(a) लैपीज

(b) घोल रंध्र

(c) पोल्जे

(d) पोनोर

[read more] (d) पोनोर [/read]

50. कार्स्ट प्रदेशों में डोलाइन की ऊपरी सतह के ध्वस्त हो जाने एवं ऊपरी भाग के खुल जाने से निर्मित छिद्र को क्या कहा जाता है?

(a) युवाला

(b) पोल्जे

(c) पोनोर

(d) कार्स्ट खिड़की

[read more] (d) कार्स्ट खिड़की [/read]

51. कार्स्ट प्रदेशों में कन्दरा की ऊपरी छत से जल के रिसकर नीचे गिरने पर उसके साथ घुले हुए पदार्थों के अधिक ताप एवं वाष्पीकरण तथा CO₂ गैस के मुक्त होने के कारण छत से लटकने वाले स्तम्भ को किस नाम से जाना जाता है?

(a) स्टैक

(b) स्टैलेग्माइट

(c) स्टैलेक्टाइट

(d) कन्दरा स्तम्भ

[read more] (c) स्टैलेक्टाइट [/read]

52. घोल रंध्रों (Sink-Holes) के विस्तृत स्वरूप को किस नाम से जाना जाता है?

(a) डोलाइन

(b) युवाला

(c) कन्दरा स्तम्भ

(d) पोल्जे

[read more] (a) डोलाइन [/read]

53. निम्नलिखित में से कौन कार्स्ट स्थलाकृति के अन्तर्गत नहीं आता है?

(a) अंधी घाटी

(b) युवाला

(c) पोल्जे

(d) कैटल हाल

[read more] (d) कैटल हाल [/read]

54. निम्नलिखित में से कौन कार्स्ट स्थलाकृतियों से संबंधित नहीं है?

(a) लैपीज

(b) स्टैलेक्टाइट

(c) एस्कर

(d) डोलाइन

[read more] (c) एस्कर [/read]

55. निम्नलिखित में से कौन घुली हुई चट्टानों के निक्षेपित होने से बना है?

(a) युवाला

(b) डोलाइन

(c) लैपीज

(d) स्टैलेग्माइट

[read more] (d) स्टैलेग्माइट [/read]

56. युवाला कहाँ मिलते हैं?

(a) शुष्क प्रदेशों में

(b) नदी मार्ग में

(c) चूना पत्थर प्रदेश में

(d) सर्वत्र

[read more] (c) चूना पत्थर प्रदेश में [/read]

57. स्टैलेक्टाइट तथा स्टैलेग्माइट के एक दूसरे से मिल जाने से जो स्थलाकृति बनती है उसे क्या कहते हैं?

(a) कन्दरा स्तम्भ

(b) पोल्जे

(c) पोनोर

(d) डोलाइन

[read more] (a) कन्दरा स्तम्भ [/read]

58. अंधी घाटियाँ (Blind Valleys) कहीं मिलती है?

(a) घोर घने पर्वतीय वन में

(b) चूना प्रदेश में

(c) हिम प्रदेश में

(d) मरुस्थलीय प्रदेश में

[read more] (b) चूना प्रदेश में [/read]

59. किस दूत के द्वारा स्टेलेग्टाइट, स्टैलेग्माइट कंदरा-स्तम्भ आदि स्थलाकृतियों का निर्माण होता है?

(a) हिमनद

(b) नदी

(c) पवन

(d) भूमिगत जल

[read more] (d) भूमिगत जल [/read]

60. चूने के पाषाणीय लटकते स्तम्भ को क्या कहते हैं?

(a) आश्चुताश्म

(b) कन्दरा स्तम्भ

(c) निश्चुताश्म

(d) नूनाटक

[read more] (a) आश्चुताश्म [/read]

61. निम्नलिखित में से किसको ‘आकाशी स्तम्भ’ कहा जाता है?

(a) स्टैलेग्टाइट

(c) कन्दरा स्तम्भ

(b) स्टैलैग्माइट

(d) नूनाटक

[read more] (a) स्टैलेग्टाइट [/read]

62. अँग्रेजी का ‘गीजर’ (Geyser) शब्द आइसलैंड के किस शब्द से निकला है?

(a) गेसिर

(b) गसर

(c) गासूर

(d) गेसोर

[read more] (a) गेसिर [/read]

63. ‘गेसिर’ किस द्वीप का महान गीजर है?

(a) न्यूजीलैंड

(b) मेडागास्कर

(c) आइसलैंड

(d) होकाइडो

[read more] (c) आइसलैंड [/read]

64. ‘येलोस्टोन पार्क’ जहाँ लगभग 100 गीजर और 4000 गर्म जल के झरने हैं, निम्नलिखित में से किस देश में स्थित है?

(a) न्यूजीलैंड

(b) आइसलैंड

(c) आस्ट्रेलिया

(d) सं० रा० अ०

[read more] (d) सं० रा० अ० [/read]

65. ‘ओल्ड फेथफुल’ गीजर जो प्रत्येक 65 मिनट के अन्तराल पर फूटता है, किस देश में स्थित है?

(a) न्यूजीलैंड

(b) आस्ट्रेलिया

(c) आइसलैंड

(d) सं० रा० अ०

[read more] (d) सं० रा० अ० [/read]

66. उस गर्म पानी के झरने को क्या कहते हैं जिससे गर्म पानी भापीय दबाव के कारण धरातल पर वेग से निकलता है?

(a) झरना

(b) पाताल कुआँ

(c) गीजर

(d) जलप्रपात

[read more] (c) गीजर [/read]

67. निम्न में से कौन-सा गीजर भारत के बिहार प्रान्त में स्थित है?

(a) तपनी

(b) मणिकर्ण

(c) यमुनोत्री

(d) सीताकुण्ड

[read more] (d) सीताकुण्ड [/read]

68. उस विशिष्ट कुएँ को क्या कहते हैं जिससे भूमिगत जल अपने दबाब के कारण स्वतः धरातल पर निकलने लगता है?

(a) कुआँ

(b) उत्स्रुत कूप

(c) झरना

(d) गीजर

[read more] (b) उत्स्रुत कूप [/read]

69. आर्टजियन वेल (उत्स्रुत कूप) अर्टवायज प्रदेश के नाम पर आधारित है। यह प्रदेश किस देश में स्थित है?

(a) आइसलैंड

(b) फ्रांस

(c) जर्मनी

(d) आस्ट्रेलिया

[read more] (c) जर्मनी [/read]

70. ग्रेट आर्टजियन बेसिन निम्न में से कहाँ स्थित है?

(a) फ्रांस

(b) आइसलैंड

(c) आस्ट्रेलिया

(d) अर्जेण्टीना

[read more] (c) आस्ट्रेलिया, Major Geographical Features [/read]

71. संसार का सबसे बड़ा पाताली जल का बेसिन है-

(a) उत्तर भारत के मैदान में

(b) यू० एस० ए० के वृहत मैदान में

(c) उत्तरी सहारा में

(d) आस्ट्रेलिया के वृहत बेसिन में

[read more] (d) आस्ट्रेलिया के वृहत बेसिन में [/read]

31. Major River Dams of The World (विश्व के प्रमुख नदी बाँध)

31. Major River Dams of The World

(विश्व के प्रमुख नदी बाँध)



1. आस्वान बाँध निम्नलिखित में से किस नदी पर स्थित है?

(a) जायरे

(b) लिम्पोपो

(c) जेम्बेजी

(d) नील

[read more] (d) नील [/read]

2. अकोसोम्बो बाँध निम्न में से किस नदी पर स्थित है?

(a) लिम्पोपो

(b) वोल्टा

(c) वोल्गा

(d) कोलोरेडो

[read more] (b) वोल्टा [/read]

3. करीबा बाँध निम्नलिखित में से किस नदी पर स्थित है?

(a) जेम्बेजी

(b) नील

(c) जायरे

(d) नाइजर

[read more] (a) जेम्बेजी [/read]

4. कैंजी बाँध निम्नलिखित में से किस नदी पर निर्मित है?

(a) जेम्बेजी

(b) नील

(c) जायरे

(d) नाइजर

[read more] (d) नाइजर, Major River Dams of The World [/read]

5. ग्रैण्ड कुली डैम निम्नलिखित में से किस नदी पर स्थित है?

(a) पराना

(b) कोलम्बिया

(c) नील

(d) जेम्बेजी

[read more] (b) कोलम्बिया [/read]

6. हूवर डैम निम्नलिखित में से किस नदी पर स्थित है?

(a) नील

(b) पराना

(c) कोलोरेडो

(d) जेम्बेजी

[read more] (c) कोलोरेडो [/read]

7. अफ्रीका का सबसे ऊँचा बाँध नील नदी पर बना है। इसका नाम है-

(a) करीबा

(b) कैंजी

(c) आस्वान

(d) अकोसोम्बो

[read more] (c) आस्वान [/read]

8. श्री गार्जेज डैम किस नदी पर निर्मित है?

(a) नील

(b) नाइजर

(c) जेम्बेजी

(d) यांगटीसीक्यांग

[read more] (d) यांगटीसीक्यांग [/read]

9. बॉन-बिले बाँध निम्नलिखित में से किस नदी पर स्थित है?

(a) कोलम्बिया नदी

(b) मिसीसिपी नदी

(c) कोलोरेडो नदीं

(d) सेक्रामेन्टो नदी

[read more] (a) कोलम्बिया नदी [/read]

10. विश्व में सबसे ऊँचा बाँध कौन-सा है?

(a) इनगुरी (रूस)

(b) रोगवन्स्की (ताजिकिस्तान)

(c) भाखड़ा (भारत)

(d) जिनपिंग-आई (चीन)

[read more] (d) जिनपिंगआई (चीन) [/read]

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