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9. Cause of Economic Backwardness of Bihar (बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण)

9. Cause of Economic Backwardness of Bihar

(बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण)



प्रश्न प्रारूप

Q1. बिहार क्यों प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद अविकसित है? व्याख्या कीजिए।

Q2. समृद्ध संसाधनों के बावजूद बिहार में औद्योगिक विकास धीमी क्यों है?

Q3. बिहार को पिछड़ा या गरीब राज्य क्यों माना जाता है?

      विभाजन के बाद बिहार मूलतः एक कृषि प्रधान राज्य हो गया है। यहाँ के 80% भूमि पर कृषि का कार्य किया जाता है और लगभग 87.7 % जनसंख्या गाँवों में निवास करती है। अतः यहाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और संस्कृति अभी भी व्याप्त है।

      ग्रामीण जनसंख्या का उच्च अनुपात, कृषि पर जनता की अधिक निर्भरता और प्रति व्यक्ति निम्न आय, बाढ़ तथा सिंचाई की समस्या ज‌हाँ बिहार के औद्योगिक पिछड़ेपन के सूचक है वहीं विशाल मानव संसाधन, सस्ते श्रम, जलविद्युत की उपलब्धता, सिंचाई कि अपार संभावनाएँ, नेपाल से लगती हुई अन्तरर्राष्ट्रीय सीमा बिहार में आर्थिक विकास की आशाएँ जगाती हैं। इन दोनों विचारों के चलते यह कहा जाता है कि “बिहार एक धनी राज्य है लेकिन यहाँ के लोग निर्धन है।” बिहार की अर्थव्यवस्था पिछड़े होने के निम्नलिखित कारण है-

1. बाढ़ और सूखे की समस्या:-

     गंगा का उत्तरी भाग बाढ़ की समास्या से पीड़ित है जबकि दक्षिणी भाग सूखे की समस्या से ग्रसित है। बिहार को एक अनोखा राज्य माना जाता है क्योंकि बिना बरसात हुए ही यहाँ बाढ़ की समस्या उत्पन्न होती है। इसक मुख्य कारण नेपाल से आने वाली सदावाहिनी नदियाँ है। बिहार के 38 में से 26 जिलें बाढ़ के समस्या से पीड़ित रहते हैं। गण्डक, बूढ़ी गण्डक, बागमती, कोसी, कमला बगान नदी घाटी क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष फसल तो लहललाते हैं लेकित बाढ़ के चलते किसान उन फसलों को घरों तक नहीं ला पाते हैं।

     पुनः गंगा के दक्षिणी भाग में प्रायद्वीपीय भारत से निकलने वाली बर‌साती नदियाँ प्रवाहित होती है। इन नदियों पर जल संग्रहण का उपाय नहीं किये जाने के कारण सभी जल बेकार चले जाते हैं। पुनः सिंचाई की पूर्ण व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान अपनी खड़ी फसलों को बचा नहीं पाते हैं। इसलिए बिहार का एक भाग जब बाढ़ की समस्या से जूझ रहा होता है तो दूसरी भाग सूखे की समस्या से जूझ रहा होता है।

2. सड़क बिजली को अपर्याप्तता:-

     बिहार का अधिकांश भाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। यहाँ प्रति इकाई सड़क बनाने का खर्च बहुत अधिक आता है और जो सड़के बनती भी है, वे साल भर के अन्दर ही टूट-फूट जाती है। इसका एक कारण भौगोलिक है। लेकिन दूसरे कारण भी कम गंभीर नहीं है। जैसे- विमर्माण के क्रम में अनुसंधान का नहीं किया जाना, पैसों की बंदरबांट और घटिया सामग्री का इस्तेमाल इत्यादि।

    बिहार की बिजली कई घण्टों तक गायब रहती है। बिहार के आज भी कई क्षेत्र हैं जो लालटेन युग में जी रहे हैं। दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में बिजली उपलब्ध है वहाँ तार काट लिये जाते हैं और जहाँ तार बच जाती है वहाँ बिजली चोरी किये जाते हैं और जो लोग बिजली का कनेक्शन लिए हुए हैं वे लोग समय पर बिल नहीं चुकाते हैं।

     बिहार में कोयला संसाधन का अभाव है और जो नदियाँ उपलब्ध हैं उस पर जल विद्युत् परियोजनाओं का निर्माण नहीं किला गया। फलतः बिहार राज्य को बिजली के लिए दूसरे राज्य के दया-दृष्टि पर निर्भर रहना पड़ता है।

3. प्रति व्यकि आय का नगण्य होना:-

       बिहार के प्रति व्यक्ति की आय राष्ट्रीय औसत आय से निम्न है। निम्न आय के कारण बचत की क्षमता भी काफी निम्न और धीमी है। अतः निम्न आय वर्ग के लोग प्रतिभाशाली और व्यापार में दक्ष होने के बावजूद अपनी योजनाओं को अंजाम नहीं दे पाते हैं।

4. औद्योगिक निष्क्रियता:-

    बिहार में नवीन औद्योगिक नीति का अभाव, खनिज एवं वन आधारित उच्चे माल का अभाव, पिछड़ी मानसिकता, भ्रष्टाचार एवं लाल-फीताशाही, संस्थागत एवं संरचनात्मक सुविधाओं का अभाव, राजनीतिक निष्क्रियता, जातिवाद, रंगदारी में उलझी हुई समाज इत्यादि कुछ ऐसे कारण हैं जिसके चलते बिहार में औद्योगिक विकास नहीं हो रहा है। इसके आलावे जो यहाँ उद्योग है वे बंद होते जा रही है।

5. रोजगारोन्मुख शिक्षण और प्रशिक्षण का अभाव:-

    जापान एक ऐसा देश है जहाँ प्राकृतिक संसाधनों का जबड़दस्त अभाव है फिर भी यह विश्व का एक विकसित राष्ट्र है। अगर इसी तर्ज पर सोचा जाए तो बिहार को क्यों नहीं एक विकसित राज्य बनाया जा सकता है? बिहार में कृषि आधारित उद्योगों को चलाने के लिए प्रशिक्षण केन्द्रों का जबड़दस्त अभाव है।

     बिहार के विश्वविद्यालयों में 70% विद्यार्थी कला विषय लेकर पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक सोच का विकास कैसे हो सकता है। यहाँ रोजगारों उन्मुख शिक्षा, कम्प्यूटर, टाईपिंग, आउट सोर्सिंग, BPO आधारित शिक्षा का अभाव है। यहाँ पोलिटेक्नीक स्कूल, ट्रेनिंग स्कूल, प्रबंधन संस्थान नगण्य है। 

6. जनसंख्या विस्फोट:-

      बिहार भारत का तीसरा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला राज्य है। लेकिन यहाँ की जनसंख्या गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण और निरश्वरता से त्रस्त है। यहाँ के अधिकांश लोग कुशल एवं भाग्य प्रधान है। फलतः मानवीय संसाधन प्रचुर होने के बावजूद बिहार एक उपभोक्तावादी राज्य बन जाता है।

7. राजनीति अपराधीकरण का गठबंधन:-

    बिहार अपराधी राज्य का एक पर्याय बन चुका है। किडनैपिंग उद्योग का रूप ले चुका है। मेहनतकश इंसान दिनभर अगर श्रम करता है और शाम होते-2 अगर वह घर लौटता है तो इसकी गारंटी सरकार नहीं दे सकती है अर्थात यहाँ कानून और न्यायिक व्यवस्था काफी जर्जर है। राजनीतिक पार्टियाँ जाति के दुष्चक्र में फंसे रहने के कारण विकास की बात नहीं कर पाती है। राजनीतिक पार्टियों में इच्छा शक्ति का जबड़दस्त अभाव देखा जा सकता है।

अन्य कारण :-

     बिहार के पिछड़ेपन के पीछे कई अन्य कारण भी रहे हैं। जैसे-

     बिहार का एक भूमि बद्ध राज्य होना, समुद्री सीमा एवं बंदरगाहों का अभाव, बिहार में प्रत्यक्ष पूँजी निवेश की कमी, देशी विदेशी अप्रवासी भारतीयों की बिहार में कम रुचि, कला-संस्कृति का अभाव। जातिवादी एवं रूढ़ीवादी मानसिकता, ज्ञान-पर्यटन-मानव आधारित उद्योग के विकास पर ध्यान नहीं दिया जाना इत्यादि कुछ ऐसे करण हैं जो बिहार को एक पिछड़ा राज्य बनाते है।

    इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के पीछे कई कारण सक्रिय है। लेकिन बिहार के लोगों को इसे नियति मानकर नहीं चलना चाहिए क्योंकि हमारा इतिहास गवाह है कि जब-2 बिहार के लोग जागे हैं तब-2 भारत “सोने की चिड़ियाँ” कहलाया है।

    अतः वक्त आ चुका है कि बिहा के सभी जाति, धर्म के लोग एकजूट होकर बिहा के छवि को बदलने का प्रयास करें।



Read More:

1. बिहार : सामान्य जानकारी

2. बिहार का प्राकृ‌तिक प्रदेश / भौतिक इकाई

3. बिहार की जलवायु

4. बिहार के भौगोलिक इकाई का आर्थिक विकास पर प्रभाव

5. बिहार की मिट्टियाँ

6. बिहार में सूखा

7. बिहार में बाढ़

8. बिहार का औद्योगिक पिछड़ापन

9. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण

10. बिहार का औद्योगिक प्रदेश

11. बिहार का कृषि प्रदेश

12. बिहार में कृषि आधारित उद्योग

13. बिहार में चीनी उद्योग

14. सिन्दरी उर्वरक उद्योग

15. बिहार की जनजातीय समस्या एवं समाधान

16. बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप

17. पटना नगर नियोजन/पटना का मास्टर प्लान

18. बिहार में नगरीकरण

19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर

8. Industrial Backwardness of Bihar (बिहार का औद्योगिक पिछड़ापन)

8. Industrial Backwardness of Bihar

(बिहार का औद्योगिक पिछड़ापन)



प्रश्न प्रारूप

Q. बिहार के औद्योगिक पिछड़ेपन के कारणों का वर्णन करें।

      एकीकृत बिहार प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध था। बिहार विभाजन के बाद खनिज संसाधन, ऊर्जा संसाधन और वनीय संसाधन झारखण्ड राज्य में चले गये। प्राकृतिक संसाधन के रूप में बिहार में समतल भूमि, संदावाहिनी नदियाँ और प्रचुर मानवीय संसाधन बच गये हैं। बिहार विभाजन के बाद सभी बड़े उद्योग झारखण्ड में चले गये। बड़े उद्योग के रूप में मात्र बरौनी औद्योगिक संकुल बचा रह गया है। यह भी रुग्ण अवस्था के दौर से गुजर रहा है।

     बिहार की अधिकांश चीनी मीले बंद हो गयी हैं। डालमियानगर और बंजारी का सीमेंट कारखाना बंद हो चुका है। फतुहा में स्कूटर, मोकामा में चमड़ा उद्योग, पूर्णिया में कीटनाशक, गया, भागलपुर, डुमराँव (भोजपुर) का लालटेन और बाल्टी उद्योग, समस्तीपुर का अशोक पेपर मिल्स इत्यादि बन्द हो चुके हैं। इसका तात्पर्य यह है कि भारत के औद्योगिक मानचित्र के ऊपर से बिहार का औद्योगिक मानचित्र हट चुका है। स्वतंत्रता के पश्चात् जो भी बड़े उद्योग लगे वे सभी दक्षिण बिहार में थे। बिहार विभाजन के बाद प्राकृतिक संसाधनों के साथ-2 सभी बड़े उधोग भी झारखण्ड में चले गये।

      उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि बिहार उद्योग के मामले में काफी पिछड़ चुका है लेकिन, ऐसा नहीं है कि बिहार में उद्योगों की स्थापना नहीं की जा सकती है। बिहार राज्य में उद्योगों की स्थापना हेतु अनुकूल जलवायु उपलब्ध है। सस्ता श्रम, राष्ट्रीय एवं अन्तरर्राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध है। यहाँ कृषि के विकास की पूरी-2 संभावना है।

     बिहार में कृषि आधारित उद्योग, ज्ञान आधारित उद्योग, पर्यटन उद्योग, तकनीकी उद्योग, फूललुज उद्योग (चूड़ी, श्रृंगार, इलेक्ट्रॉनिक्स) इत्यादि का विकास कर पुनः औद्योगिक मानचित्र पर लाया जा सकता है लेकिन कई ऐसे कारण यहाँ मौजूद हैं जिसके कारण बिहार एक औद्योगिक रूप से पिछड़ा हुआ राज्य है। इन कारणों की चर्चा नीचे के शीर्षकों में की जा रही है:-

औधोगिक पिछड़ेपन के कारण

1. लघु उद्योगों की उपेक्षा:-

     स्वतंत्रता के बाद एकीकृत बिहार में बड़े-2 उद्योग विकसित किये गये जबकि पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में कृषि और उससे संबंधित उद्योगों के विकास पर जोर दिया गया। छोटे एवं लघु उद्योगों से प्रत्यक्षत: राज्य की आम जनता लाभान्वित होती है लेकिन बड़े-बड़े उद्योगों से राज्य की कुछ ही जनता लाभान्वित हो पाती है।

    बिहार में लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास पर जोर व दिये जाने के कारण औद्योगिक स्थिति काफी खराब है।

2. आधारभूत भूसंरचनाओं की कमी:-

     उद्योगों के विकास हेतु सड़क, पानी, बिजली, इत्यादि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होना चाहिए। बिहार में सड़‌के तो है। लेकिन अच्छी सड़‌कों का जबड़दस्त अभाव है। पुनः पटना जैसे महानगर में भी लगातार 24 घण्टे बिजली उपलब्ध नहीं हो पाती है। ऐसे में यहाँ उद्योगों का विकास कैसे हो सकता है। बिहार में पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध है लेकिन ये जल अनियंत्रित एवं बाढ़ के रूप में उपलब्ध है जिसका प्रबंधन आसान नहीं है।

3. कुप्रबंधन:-

    स्वतंत्रता के बाद बिहार में कई उद्योग स्थापित किये गये थे जिसकी चर्चा ऊपर की गई है लेकिन कुप्रबंधन के कारण सभी उद्योग या तो रुग्ण हो गये भा बन्द पड़े हैं।

4. पूंजी एवं बाजार की कमी:-

    बिहार में एक ओर औद्योगिक क्षेत्र में पूंजी निवेश की वातावरण का अभाव है। यहाँ प्रत्यक्ष पूँजी निवेश नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर बिहार में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और गरीबी के कारण औद्योगिक वस्तुओं की माँग बहुत कम है अर्थात् बिहार के लोगों की क्रय क्षमता बहुत ही कम है। उपरोक्त कारणों के चलते बिहार में उद्योगों का विकास नहीं हो पा रहा है।

5. औद्योगिक वातावरण का अभाव:-

      नक्सलवाद, सामन्तवाद, भ्रष्टाचार, अशिक्षा जैसे सामाजिक कारण बिहार में औद्योगिक विकास हेतु वातावरण नहीं बनने देते है।

6. खनिज संसाधनों का अभाव:-

     बिहार में खनिज आधारित उद्योगों के विकास हेतु कच्चे माल का अभाव है। यहाँ पर लौह इस्पात, एल्यूमीनियम उधोग इत्यादि का विकास संभव नहीं है। इसी तरह वनों के अभाव में वनीय कच्चे माल पर आधारित वनीय उद्योगों का विकास संभव नहीं है।

7. पुरानी मशीन एवं तकनीक:-

    बिहार का जूट एवं चीनी उद्योग प्रमुख उद्योग रहा है लेकिन इनके मशीन और तकनीक काफी पुराने हो चुके हैं। सरकार के द्वारा तकनीकी उन्मूलन का कोई सकारात्मक प्रयास धरातल पर उतरता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है जिसके कारण पुराने उद्योग भी बंद हो गये हैं।

8. औद्योगिक नीति के अभाव:-

      बिहार राज्य में प्रारंभ से ही दूरदर्शी और विकासशील औद्योगिक नीति के अभाव रहा है।

निष्कर्ष:

   उपरोक्त बिन्दुओं के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि बिहार में औद्योगिक पिछड़ेपन के कई कारण हैं। अतः सरकारी स्तर पर इस तरह के प्रयास किए जाने चाहिए कि उपरोक्त समस्याओं पर विचार कर ऐसा औद्योगिक वातावण बनाया जाना चाहिए कि उद्योगपति औ पूँजीपति उद्योग लगाने के लिए स्वतः उन्मुख हो।



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4. बिहार के भौगोलिक इकाई का आर्थिक विकास पर प्रभाव

5. बिहार की मिट्टियाँ

6. बिहार में सूखा

7. बिहार में बाढ़

8. बिहार का औद्योगिक पिछड़ापन

9. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण

10. बिहार का औद्योगिक प्रदेश

11. बिहार का कृषि प्रदेश

12. बिहार में कृषि आधारित उद्योग

13. बिहार में चीनी उद्योग

14. सिन्दरी उर्वरक उद्योग

15. बिहार की जनजातीय समस्या एवं समाधान

16. बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप

17. पटना नगर नियोजन/पटना का मास्टर प्लान

18. बिहार में नगरीकरण

19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर

5. Drought in Bihar (बिहार में सूखा)

5. Drought in Bihar

(बिहार में सूखा)



प्रश्न प्रारूप

Q. सूखा से आप क्या समझते है? बिहार में सूखा के कारण, परिणाम तथा समस्या के समाधान में किये गये कार्यो की चर्चा करें।

    भारतीय मौसम आयोग (IMO) ने बताया कि मई माह के मध्य से अक्टूबर माह के मध्य लगातार 4 सप्ताह तक वर्षा की मात्रा 5 cm या उससे कम हो तो सूखा की स्थिति कहलाती है। यह समयावधि मानसून के आगमन का है। इसलिए इसे सूखा का पैमाना बनाया गया है यानी मानसून के कमजोर होने पर सूखा की स्थिति लगभग तय है। भारत का दो-तिहाई क्षेत्र सूखा पीड़ित है। देश के एक तिहाई क्षेत्र में सूखा प्रकोप ज़्यादा गंभीर है, जहाँ 75 cm से कम वर्षा होती है।

     बिहार में दक्षिणी बिहार के कैमूर, रोहतास, गया, औरंगाबाद, नवादा, मुंगेर, जमुई, शेखपुरा, लखीसराय, भागलपुर, पटना, नालंदा और जहानाबाद के कुछ इलाके सूखा पीड़ित हैं। इनमें कई जिले बाढ़ एवं सूखा दोनों से पीड़ित हैं। जैसे टाल क्षेत्र वाले जिले बाढ़ से पीड़ित है और उनके दक्षिणी इलाके मानसून की असमानता में सूखे से भी पीड़ित हो जाते हैं। कुल मिलाकर बिहार का 20% क्षेत्र सूखा से पीड़ित है जिसे नीचे के रेखाचित्रों में देखा जा सकता है-

Drought in Bihar

बिहार में सूखा के कारण एवं समस्या

          बिहार में सूखा के मुख्य कारण निम्नलिखित है:-

(i) मानसून की अनिश्चिता एवं परिवर्तनशीलता

(ii) वर्षा का असमान वितरण

(iii) ढालयुक्त एवं पथरीली भूमि

(iv) वनों की कटाई

(v) बरसाती नदियाँ 

(vi) जल प्रबंधन का अभाव

     बिहार में सूखा ग्रस्त होने का मुख्य कारण मानसून की अनिश्चितता एवं परिवर्तनशीलता है। मानसून के कमजोर पड़ने से इन क्षेत्रों में कृषि करना कठिन हो जाता है। दक्षिण बिहार का मैदान ही सूखाग्रस्त है क्योंकि गर्मी के दिनों में यहाँ बहने वाली नदियाँ सूख जाती हैं जबकि हिमालय से बहने वाली नदियों में सालोंभर पानी रहता है। चूंकि दक्षिण बिहार की नदियाँ पठार के वर्षा प्रतिरूप पर निर्भर करती है। अतः यह जरूरी है कि पठारी भागों में इन नदियों को बांधकर जल संग्रह कर लिया जाता और गर्मी में उसका प्रयोग किया जाता।

     बेहतर जल प्रबंधन और इच्छा शक्ति के अभाव ने भी दक्षिणी बिहार के मैदान को सूखाग्रस्त बना दिया है। दक्षिणी बिहार के मध्य में जैसे पटना, नालंदा, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया, नवादा तथा मुंगेर के कुछ इलाकों में वर्षा 100 cm से कम होती है। यह भी एक कारण है कि जिससे इन इलाकों को सूखाग्रस होने की संभावना बढ़ जाती है।

      गंगा के दक्षिणी मैदान की भूमि ढालयुक्त और पथरीली है। वहाँ की मिट्टी भी छिछली है जिनमें भूमिगत जल नहीं जा पाता और वर्षा का जल ऊपर से शीघ्र बहकर निकल जाता है। भूमिगत जल के कम होने के कारण गर्मी के दिनों में जल संकट गहरा हो जाता है। इस क्षेत्र में वनों के अतिशय कटने से भी मृदा में नमी की कमी हो गयी है जिससे कृषि प्रभावित होती है और सूखा का प्रकोप बढ़ जाता है।वनों के कटने से भी वर्षा की मात्रा कम हो गयी है।

सूखे से निपटने के उपाय

    सूखे से निपटने के लिए भारत एवं बिहार सरकार के द्वारा कई स्तरों पर प्रयास किये गये हैं लेकित सूखे की समस्या आज भी राष्ट्रीय समस्या के रूप में कायम है। पथरी क्षेत्रों में प्रतिवर्ष 120 cm से अधिक वर्षा होती है जहाँ से दक्षिणी बिहार के मैदानी नदियों में जल आता है। मानसून के समय यह जल व्यर्थ ही गंगा में मिल जाता है। अगर इसे संग्रह कर लिया जाये तो बिहार में सूखे की समस्या नहीं रहेगी।

     दक्षिण बिहार के मैदानी भागों में धरातल थोड़ा उबड़-खाबड़ है। इन इलाकों के बेसिन क्रम में तालाब बनाकर पानी को संरक्षित रखा जा सकता है। इससे जहाँ-जहाँ एक ओर भूमिगत जल का भंडार जमा हो सकता है वहीं दूसरी ओर गर्मी में कृषि कार्य के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

    आज अधिक पेनेट्रेटिव गोजनाओं, पर्यावरण हितैषी, टिकाऊ विकास नीति, मानसून का सही आकलन पर विशेष जोर देने की जरूरत है। नदी-जोड़ योजना में तेजी लाने की आवश्यकता है। वनीकरण बहुत आवश्यक है। स्थानीय जल सुविधा व वर्षा जल संक्षण प विशेष ध्यान व जागरुकता लाने की जरूरत है।



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12. बिहार में कृषि आधारित उद्योग

13. बिहार में चीनी उद्योग

14. सिन्दरी उर्वरक उद्योग

15. बिहार की जनजातीय समस्या एवं समाधान

16. बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप

17. पटना नगर नियोजन/पटना का मास्टर प्लान

18. बिहार में नगरीकरण

19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर

4. Soils of Bihar (बिहार की मिट्टियाँ)

4. Soils of Bihar

(बिहार की मिट्टियाँ)



       भूपटल के सबसे ऊपरी भाग में मिलने वाला असंगठित पदार्थ को मिट्टी कहते हैं। यह जैविक एवं अजैविक तत्वों के ऋतुक्षरण से प्राप्त मलवा के द्वारा निर्मित होता है। मृदा वनस्पति का मूल आधार होता है। मृदा का निर्माण उच्चावच, ढाल, जलवायु, चट्टानों की संरचना इत्यादि पर निर्भर करता है। बिहार की 90% क्षेत्र जलोढ़ मृदा के अन्तर्गत आता है। शेष 10% भाग अन्य प्रकार की मिट्टी है। भौतिक, रासायनिक तथा रचनात्मक विशेषताओं के आधार पर बिहार में 8 प्रकार की मिट्टी पायी जाती है।

1. पर्वतपदीय मिट्टी/भाँवर मिट्टी

2. तराई मिट्टी

3. बांगड़ मिट्टी

4. खादर मिट्टी

5. बलसुन्दरी मिट्टी

6. टाल मिट्टी

7. बल्थर या लाल-पीली मिट्टी

8. लाल बलूई मिट्टी

1. पर्वतपदीय मिट्टी या भावर मिट्टी

     पर्वतपदीय मिट्टी प० चम्पारण के उ०-प० भाग में शिवालिक पर्वत के पदीय भाग में मिलती है। यह नदियों के द्वारा लायी गई बोल्डर क्ले, कंकड़-पत्थर से निर्मित भूभाग है। कहीं-2 अधिक वर्षा एवं नमी के कारण दलदली मिट्टी का प्रमाण मिलता है जिस कारण प्रकृति अम्लीय होती है तथा जैविक पदार्थों की मात्रा अधिक होती है।

2. तराई मिट्टी

    तराई मिट्टी का विस्तार पर्वतपदीय मिट्टी के दक्षिणी भाग में हुआ है। इसका विस्तार प० चम्पारण से किशनगंज तक हुआ है। यह इसकी चौड़ाई 5 से 7 किमी० है। इसमें पर्याप्त मात्रा में नमी और हयूमस पायी जाती है। इसका रंग भूरा पीला, प्रकृति अम्लीय होती है। अत्यधिक नमी वाले क्षेत्र में यहाँ भी दलदली मिट्टी का विकास हुआ है। यह मिट्टी गन्ना, धान और जूट कृषि के लिए प्रसिद्ध है।

3. बाँगड़ मिट्टी

    इसे भांगर भा पुरानी जलोढ़ मिट्टी भी कहते हैं। इस मिट्टी का विकास तराई मिट्टी के दक्षिण में एक पट्टी के रूप में हुआ है। इसका सर्वाधिक विस्तार पूर्णिया और सहरसा के कोसी नदी घाटी क्षेत्र में हुआ है और ज्यों-2 पश्चिम की ओर जाते हैं त्यों-2 इसकी चौड़ाई कम होते जाती है।

    इस मिट्टी में चुने की मात्रा अधिक होने के कारण क्षारीय होती है। थोड़ा-बहुत बाँगड़ मिट्टी का विस्तार मुंगेर, भागलपुर, कैमूर और बक्सर जिला में भी देखा जा सकता है। इन जिलों में इस मिट्टी को “केवाल” मिट्टी कहा जाता है। इसका रंग गाढ़ा-भूरा और काला होती है। सिंचाई की सुविधा वाले प्रदेश में धान, गेहूँ की खेती की जाती है और असिंचित प्रदेशों में तेलहन और दलहन की खेती की जाती

4. खादर मिट्टी

     इसे “नवीन जलोढ़ मिट्टी” कहा जाता है। इसका निर्माण बाढ़ द्वारा लायी गयी मिट्टी के कारण होता है। इसका रंग भूरा और उर्वरता अधिक होती है। खादर मिट्टी में रेत बड़े पैमाने पर पायी जाती है। खादर मिट्टी में गेहूँ, धान और गन्ना के लिए उपयुक मानी जाती है। यह मिट्टी गंगा की घाटी, गण्डक, कोसी और महानन्दा नदी के निचली घाटी प्रदेश में पायी जाती है।

5. बलसुन्दरी मिट्टी

    यह बाँगड़ मिट्टी का ही एक विशिष्ट रूप है जिसमें बालू और क्ले की मात्रा अधिक होती है। इसका विस्तार सारण, गोपालगंज, सहरसा दरभंगा, मुजफ्फरपुर जैसे जिलों में देखा जा सकता है। सारण और गोपालगंज में कहीं-2 बलसुन्दरी मिट्टी के ऊपर लवणीय मिट्टी का विकास हुआ है। बलसुन्दरी मिट्टी मक्का, गन्ना, गेहूँ, आम, लीची इत्यादि की खेती के लिए प्रसिद्ध है।

6. टाल मिट्टी

   टाल मिट्टी गंगा के दक्षिणी भाग में तट के सहोर 8-10 किमी० चौड़ी पट्टी में पायी जाती है। इस मिट्टी के निर्माण में गंगा नदी के द्वारा लायी गयी जलोढ़ को तटीय भागों में निक्षेपण करने से हुआ है। यह अत्याधिक उर्वर मिट्टी है। इसकी विशेषताएं खादर और बांगड़ मिट्टी से मिलती-जुलती है। वर्षा ऋतु में बाढ़ के पानी के कारण खरीफ फसल का उत्पादन नहीं हो पाता है लेकिन रबी की फसल बड़े पैमाने पर उगायी जाती है।

7. बल्थर या लाल-पीली मिट्टी

    इस मिट्टी का निर्माण छोटानागपुर से निकलने वाली नदियों के द्वारा लायी गयी मलवा के निक्षेपण से हुआ है। इसका रंग पीला या लाल होता है। यह मिट्टी कैमर पठार, राजमहल की पहाड़ी में पायी जाती है। इसमें जल-संग्रह करने की क्षमता कम होती है। लेकिन लोहे की मात्रा पर्याप्त होती है। यह सामान्यतः मोटे अनाजों के लिए प्रसिद्ध है।

8. लाल बलूई मिट्टी

     लाल बलूई मिट्टी का विस्तार कैमूर और रोहतास के पठारी भागों में देखा जा सकता है। इसमें बालू की मात्रा अधिक होती है। इसकी उर्वरा शक्ति भी कम होती है। यह भी मोटे अनाजों के लिए प्रसिद्ध है।

Soils of Bihar

चित्र: बिहार में मृदा का वितरण

निष्कर्ष

    इस तह ऊप के तथ्यों से स्पष्ट है कि बिहार में स्थानीय विशेषताओं के कारण अलग-2 क्षेत्र में अलग-2 मृदा का विकास हुआ है।


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12. बिहार में कृषि आधारित उद्योग

13. बिहार में चीनी उद्योग

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19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर


32. The functionalsim in Geography (भूगोल में कार्यात्मकवाद)

32. The functionalsim in Geography

(भूगोल में कार्यात्मकवाद)



प्रश्न प्रारूप

2. भूगोल में कार्यात्मकवाद की विवेचना करें ।

(Discuss the functionalsim in Geography.)

उत्तर- भिन्न-भिन्न विज्ञानों और भिन्न-भिन्न काल में कार्यात्मकवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भिन्न स्वरूप लिए हैं। ‘क्रिया अथवा कार्य’ (Function) का तात्पर्य नीचे पाँच रूपों में व्यक्त है:

(i) समारोह अथवा उत्सव हेतु जन-समुदाय क्रियाएँ (विशेष-अवसर)

(ii) कार्य-भार अथवा कर्त्तव्य (राजनीतिक अर्थ)

(iii) एक ‘चर’ का दूसरे ‘चर’ से संबंध का फलन (गणितीय अर्थ)

(iv) जीवधारियों के संवारने हेतु क्रियाएँ (जीव विज्ञान व समाज विज्ञान)

(v) व्यवसाय (भूगोल के सन्दर्भ में आर्थिक क्रियाएँ)

     तात्पर्य है कि “सरल शब्दों में कार्यात्मकवाद व्यवसायों से जुड़ी अवधारणा है। वह समाज के कार्यों अथवा साामजिक व्यक्तियों की क्रियाएँ हैं।” विश्व को देखने का यह दृष्टिकोण एक ऐसा तंत्र है जो भिन्न-भिन्न, परन्तु अन्तः निर्भर बने तंत्रों का संकुल है। इसकी सम्मिलित क्रियाएँ पुनरावृत्तिजनक है, और पूर्वानुमानित हैं। इनका आकार-कार्य संबंधित है और यह सभी को अबाध बनाए रखने का तंत्र है-

     कार्यात्मकवाद के आधारभूत नियम निम्नलिखित हैं-

(i) समाजों का मूल्यांकन उनकी समस्तता (Wholeness) में किया जाना चाहिए।

(ii) घटित हुई सामाजिक क्रियाएँ वातावरण की अन्योन्याश्रित प्रकृति है। अनेक स्थितियों में ये कारण भी अनेक होते हैं।

(iii) सामाजिक तंत्र प्रायः साम्यावस्था की स्थिति (State of Equilibrium) है।

(iv) कार्यात्मकतावादी समाज के इतिहास में कम, परन्तु सामाजिक अन्तःक्रिया में अधिक रुचि रखते हैं।

(v) कार्यात्मकतावादियों के प्रयास सामाजिक ढाँचे के यौगिक घटकों के मध्य अन्तर्सम्बन्धों की खोज में निहित होते हैं।

      जीन ब्रून्स जैसे भूगोलवेत्ता एवं उनके समकालीन विद्वानों के शोध कार्यों में कार्यात्मक अथवा क्रियात्मक अभिगम उनकी रचनाओं में देखे जा सकते हैं। उन्नीसवीं सदी के अन्त में और बीसवीं सदी के प्रारम्भ काल में फ्रांसीसी विद्वानों को अविभाज्य समस्तता (Indivis- ible Wholeness) बताया। ‘प्रेदश’ (Region) को कार्यात्मक इकाई का जैविक क्षेत्र कहा जो उसके विभागों के योग से भी अधिक उच्च-स्तर की इकाई था और जीववत् क्रियाओं में बंधा था।

      आजकल भूगोल में कार्यपरकता की अवधारणा महत्त्वपूर्ण है। लोग मुंबई, टाटानगर और गुलमर्ग की पहचान क्रमशः एक प्रधान बन्दरगाह, लौह-इस्पात निर्माण केन्द्र और सैलानियों के स्थल के रूप में ही करते हैं। लघु नगरों की पहचान भी उनकी केन्द्र स्थानीय क्रियाओं व गुणों द्वारा की जाती है। इसी आधार पर उनका पदीय श्रृंखला-क्रम (Hierarchy) निर्धारित होता है। प्रत्येक स्थान को उसके दो प्रकार के व्यवसायों, एक ‘प्रकट’ (Manifest Function), और दूसरा ‘अप्रकट’ (Latent Function) के रूप में जाँचा जा सकता है। उदाहरणवत् टाटानगर का लोहा-इस्पात निर्माण कार्य-व्यवसाय प्रकट बना है, जबकि वहाँ के अन्य कार्य-शैक्षिक, सामाजिक, आदि ‘अप्रकट’ व्यवसाय हैं।

     कार्यात्मकतावाद की अलोचना संकल्पनात्मक व कार्य-पद्धतियों, दोनों आधारों पर की जाती है। कार्यात्मकतावाद भौगोलिक यथार्थता को एक संतुलित दशा (Equilibrium) में देखने की संकल्पना है। इसके विपरीत प्रयोजनमूलक (Teleology) एक ऐसा तंत्र है जो भौगोलिक यथार्थता को स्थिर (Static) मानकर उद्देश्यपरक घटना समझती है और परिवर्तनशील है।

     समाज को एक तंत्र में संरचित बना कहने से अन्य समकालीन समस्याएँ, जैसे गरीबी, अकाल, रोग, प्रजातीयता आदि की व्याख्या अछूती ही रह जाएगी। यथार्थता अपूर्ण ही प्रकट होगी। एक तंत्र सीमित उद्देश्य की ओर उन्मुख है, और अन्तर्सम्बन्धित अनेक उपतंत्र व प्रक्रियाएँ महत्त्वहीन ही समझी जाती है। कार्यात्मकतावाद की यह मुख्य कमी है।

     सामाजिक नियंत्रण में विश्वास व्यक्त करने के कारण कार्यात्मकवाद की आलोचना होती है, क्योंकि उस आधार पर परिवर्तनशील दृश्य जगत् की यथार्थता की व्याख्या नहीं हो सकती। सामाजिक परिवर्तन को कार्यात्मकवाद स्पष्ट नहीं करता है।

     तार्किक और पद्धति के आधार पर कार्यात्मकवाद की आलोचना सोद्देश्यवादियों ने की है। दृश्य-जगत् द्वारा स्थान की यथार्थता और स्थान का अधिग्रहण कारण परक नहीं है। (Not by Reference of Causes) अर्थात् स्थानिक घटना कारण-मूलक नहीं घटित बनी है। यह प्रयोजन मूलक घटित बनी है, क्योंकि स्थान को किसी प्रयोजन के लिए उपयोग में लिया गया। (A Given Situation by Reference to Ends Which Determine Its Course) दृश्य-जगत् में प्रकृति ने गिद्धों को इस उद्देश्य हेतु स्थान दिया कि वे शव (मृत जीवों) से पृथ्वी की सतह को मुक्त रखें।

     यद्यपि इसी कार्य के लिए वस्तु-जगत् में अन्य विकल्प (Alternatives of Substitutes) भी है। परन्तु, विकल्पों को समान प्रकार के पारिस्थितिक तंत्र (Eco-System) का ही होना चाहिए। ऐस्किमो ने गाड़ी व अग्नि जैसे विकल्पों को प्रयोग में लाकर आर्कटिक जीव जगत् के नाजुक तंत्र को अव्यवस्थित (Up-Set) किया है।

     उपर्युक्त तर्कपूर्ण विवरण से कार्यात्मकतावाद में निम्नलिखित छः अवधारणाओं का उपयोग भूगोलवेत्ताओं द्वारा किया जाता है। ये अवधारणाएँ दृश्य-जगत की यथार्थता में अन्त: संबन्धित हैं-

(i) कार्य-व्यवसाय,

(ii) कार्यपरक विकल्प,

(iii) उद्देश्य,

(iv) प्रारूप-संवार, स्व-नियंत्रण अथवा यथा स्थिति

(v) अनुकूलता, और

(vi) एकीकरण।

   भूगोल में कार्यपक प्रदेश (Functional Region) से अभिप्राय प्रदेश का समस्तता में बंधी संचित इकाई के रूप में कार्य सम्पादन से है। वह अपने समस्त तंत्र में आंतरिक एवं बाह्य-तंत्रों की क्रियाओं द्वारा आवश्यकताओं की पूर्ति कर उद्देश्यमूलक प्रदेश है।

31. The Post-modernism and Feminism in Geography (भूगोल में उत्तर आधुनिकता एवं नारीवाद)

31. The Post-modernism and Feminism in Geography

(भूगोल में उत्तर आधुनिकता एवं नारीवाद)



प्रश्न प्रारूप

Q. भूगोल में उत्तर आधुनिकता एवं नारीवाद की विवेचना करें।

(Discuss the Post-modernism and Feminism in Geography.)

उत्तर- मानवीय ज्ञान, दर्शन और समाजिक विज्ञानों व कला में आजकल उत्तर आधुनिकता का आन्दोलन चला है। वह आधुनिक भूगोल में ऐतिहासिकता की प्रतिक्रिया है। ऐतिहासिकतावाद का जोर व्यक्तियों एवं सामूहिक घटनाओं के काल क्रमानुसार वर्णन पर होता है और यह स्थानिकता को नजर अंदाज करता है।

सोजा (Soja, 1989) की राय में ऐतिहासिकतावाद सामाजिक जीवन पर ऐतिहासिक सन्दर्भ की अतिवादी दृष्टि है। वह भौगोलिक अथवा स्थानिक सोच को सामाजिक सैद्धांतिक विश्लेषण के दौरान हाशिए में धकेल देता है। काल की महत्ता में ‘स्थान’ गौण रह जाता है। इससे सामाजिक-जगत् की परिवर्तनशीलता का भौगोलिक निर्वचन अस्पष्ट रह जाता है।

     भूगोल में उत्तर आधुनिकता का जोर सामाजिक और भौगोलिक जाँच-पड़ताल के दौरान खुलेपन पर आधारित है। यह विषमांगता से युक्त पचमेल प्रयोग है। इसमें कलात्मक प्रयोग व राजनीतिक सशक्तता सम्मिलित है। इसका उद्भव स्थापत्य कला व साहित्य के सिद्धान्तों में निहित है। इसके केन्द्र बिन्दु अथवा नाभि (Core) की पहचान कठिन है।

डियर (Dear, 1944) के अनुसार- “Post-modernity is everywhere, from literature, design, art, architecture, philosophy, mass media, clothing, style, music and television. Post modernism raises urgent questions about place, space and landscape in the production of social life.”

अर्थात् उत्तर आधुनिकता सभी ओर है, वह साहित्य में, कला व डिजायन में, सत्यासत्य में, दर्शन और जनसंचार साधनों में, पोशाक के तौर-तरीकों व संगीत, दूरदर्शन सभी में मौजूद है।

     सामाजिक जीवन को गतिवान रखने में उत्तर आधुनिकता स्थान, क्षेत्र और दृश्य-जगत् के बारे में आवश्यक प्रश्नों को खड़ा करता है।

    उत्तर आधुनिकता का समर्थन करने वालों का तर्क है कि सामाजिक व ऐतिहासिक प्रक्रियाओं की रचना भिन्न-भिन्न स्थानों व प्रदेशों में भिन्न-भिन्न स्वरूपों में हुई है, इसलिए ऐतिहासिक धारा सर्वत्र समान रूप से प्रवाहित नहीं बनी है। उदाहरणवत् आजकल के उपन्यासों की संरचना अस्त-व्यस्त है और आजकल की स्थापत्य कला मूल्यों से वचित बन उठी है।

    भूगोलवेत्ता ने समकालीनता की समस्या को बहुत पहले ही पहचाना जैसा कि डारबी (Darby) ने इंगित किया-

   ऐतिहासिक तथ्यों के सिलसिले को प्रस्तुत करने की अपेक्षा भौगोलिक तथ्यों के क्रमों को व्यक्त करना अधिक कठिन है। घटनाएँ एक के पश्चात दूसरी नाटकीय रूप में समयबद्ध घटित होती हैं। उनको समय बद्ध लिपिबद्ध करना सरल है, परन्तु उनको स्थान में सान्निध्य बनाना कठिन है।

  भौगोलिक विवरण अनिवार्यतः कठिन क्रिया है, जबकि ऐतिहासिक वर्णन अपेक्षाकृत सरल है। डियर (1986) ने उत्तर आधुनिकतावाद को तीन घटकों में विभक्त किया है-

(1) उत्तर आधुनिक शैली,

(2) उत्तर आधुनिक विधि और

(3) उत्तर आधुनिक काल।

(1) शैली रूप में:-

     उत्तर आधुनिकता साहित्य व साहित्यिक समालोचन में शैली रूप में व्यक्त है जहाँ से वह फिल्म, डिजायन, कला, फोटोग्राफी और स्थापत्य में फैला। इसकी सामान्य दिशा और संरचना में समरूपता व अनुरूपता का अभाव प्रवेश कर गया। स्थापत्य शैली की आलोचना उसके दिखावे में भिन्नता, रंग, डिजायन व प्रतिमा-विज्ञान के आधार पर की गई है। वह मात्र उथली व ऊपरी सतही बन शेष रही।

(2) विधि रूप में:-

     विधि रूप में उत्तर आधुनिकता सार्वभौमिक सत्य से परहेज करती है और इसके सोच में सभी कुछ समाया हुआ था। इसका किसी भी अर्थ में प्रयोग होने लगा और विधि निराधार बन उठी। अतः, इसका मूल्यांकन ही दुर्लभ बन गया। इससे रचना सिद्धान्त ही भिन्न भिन्न बन उठा और लेखक को संस्कृति, वर्ग, लिंग आदि सभी प्रभावित बनने लगे जिससे लेखक की स्थिति ही डगमगा गयी। विधि स्वयं लड़खड़ा गयी और विकल्प भी ढीले व कमजोर बन गए। लेखन-विधि में अस्थिरता विकसित हो गई।

       मानव भूगोल में ओलसन (Olsson, 1980) जो रचना के बिखराव के प्रारम्भिक समर्थक थे, उनको नवोन्मेष के अभ्यासी के रूप में जाना जाता है। रचना की तोड़-मरोड़ वस्तुतः अस्थिर विधि का ही परिणाम है।

(3) काल-अवधि के रूप में:-

     उत्तर आधुनिकतावाद का युग उसे ही माना जा सकता है जब संस्कृति सहित दार्शनिक सोच में परिवर्तन उत्पन्न हुआ। भूमण्डीलय अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति का विकास बदले स्वरूप में प्रकट बना और विलम्बित पूँजीवादी सांस्कृतिक प्रकट हुई जो भूतकालीन युग की संस्कृति से बिलकुल भिन्न है।

      नए युग की इस संस्कृति के अन्तर के अध्ययन की विशेषताओं में अनिश्चितता, कृत्रिम, घिसे-पिटे पुराने कुरुचिपूर्ण रंग-ढंग भरे पड़े हैं। अव्यवस्था को ही व्यवस्था मान लिया गया और मुख्य जोर दिया गया विषमता एवं अनूठे कृत्यों पर (ग्रिगरी 1989) ‘न्यूयार्क टाइम्स’ से उद्धृत टिप्पणी की सार्थकता उत्तर आधुनिकतावाद के विषय में व्यक्त है- “The great lesson of the 20th century is that all the great truths are false,” अर्थात्, 20वीं सदी की सबसे बड़ी सीख यही है कि सभी महान् ‘सत्य’ असत्य सिद्ध हुए हैं।

     मानव भूगोल के विद्धानों ने स्थानिक विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए आधुनिकतावाद की ‘व्यवस्था’ (System) पर जोर दिया परन्तु, आनुभाविक प्रेक्षणों (Empirical Observations) ने सिद्ध किया कि आधुनिकतावाद में अव्यवस्था (Disorder) के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है। यह ऐसी अव्यवस्था है जिसमें न तो कोई लागू करने हेतु सिद्धांत है और न विश्व व्यापक सत्य। बार्न्स (Barnes, 1996) आधुनिकतावाद के आलोचकों के हाथों में दार्शनिक सोच का ऐसा मंत्र आ गिरा जो-

     “आधुनिकतावाद को ‘अव्यवस्था भरा जगत्’ कहने में संकोच नहीं है। हम जिस प्रकार के आधुनिक जगत् में इस समय रह रहे हैं वह नव सैद्धांतिक अतिसंवेदनशीलता से भर उठा है, जहाँ जो कुछ भी करें, सभी सही मान लिया जाता है। क्षेत्र में व्याप्त विभिन्नताएँ भी ऐसी अव्यवस्थित बन गयी हैं। (Gregory, 1989)”

    वस्तुतः मानव भूगोल में उत्तर आधुनिकतावाद उत्तरकालीन प्रतिमान अथवा प्रकरण हैं जिनमें न तो कोई सुरुचिपूर्ण सोच और न यथार्थ। इसके समर्थकों ने वातावरणीय, नियतिवाद, आदि तंत्रों को नकार दिया। 1950 से 1980 के मध्य विकसित भौगोलिक अभिगमों का उत्तरकालीन आधुनिकवाद में कोई स्थान नहीं रहा। वे यह भी स्वीकार नहीं करते कि सामाजिक जीवन में किसी प्रकार की भूमण्डलीय सुसंगति है और प्रति दिन का जन-जीवन प्रणाली किसी पूर्व-शैली और मूल्यों द्वारा संचालित बनी हैं।

    उत्तर आधुनिकवादी ‘क्षेत्रीय’ विभिन्नताओं के सोच की ओर लौटे अवश्य हैं, परन्तु यह वापसी भिन्न प्रकार की है जिसमें ऐसे विश्व की सोच है जो अतिसंवेदनशीलता से भरी है, जहाँ न कोई नीति, न सिद्धांत और न संरचना ही है। वहाँ विषमता, विशिष्टता (व्यवस्था रहित) और अनूठापन जो कुछ भी करने, सोचने और बरतने में संकोच नहीं रखते। इनके मतानुसार “… we need, to go back in parts on the question of areal differentiation, but armed with a new theoretical sensivity towards the world in which we live and to the ways in which we live and to the ways in which we represent it.” (Gregory)

उत्तर आधुनिकता एवं नारीवाद (Post-modernism and Feminism)

    जाति प्रजाति के अतिरिक्त अनेक महत्वपूर्ण संबंधों में से लिंग का तत्व भी उत्तर-आधुनिक साहित्य से संबंधित है। नारीत्व भूगोल आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप में दैनिक जन-जीवन से अन्तर्सम्बन्धित है। दूसरे रूप से व्यक्त करें तो यह लिंग-कारक है जो आजकल असमानता और प्रताड़ना जैसे सामाजिक अभिशाप का शिकार है।

      जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में नारी के प्रति भेद-भाव किया जाता है और नारी-दमन समाज में व्यापक बन चुका है। नारी विषयक भेद-भाव को उजागर बनाना और उसका विरोध भूगोल पेशेवरों में अध्ययन के अनेक उद्देश्यों में से एक उद्देश्य है।

जॉनसन (1989) के अनुसार नारीवाद भूगोल में महिलाओं के सामान्य अनुभवों की पहचान करना, पुरुषों द्वारा दमन के प्रति उनका प्रतिरोध और उसको अन्त करने की प्रतिबद्धता आदि विषय सम्मिलित है। नारीवाद भूगोल का उद्देश्य ‘नारी अभिव्यक्ति को प्रकट बनाना और अपने को नियंत्रित करना’ है। भूगोल का सोच और भौगोलिक अभ्यास प्रधानरूप से लिंग-दोष से ग्रसित बना है। भूगोल में केन्द्रित पितृ सत्ता और लैंगिकता केन्द्रित रहे हैं। इनसे मुक्ति राजनीतिक उपायों से मिलेगी।

रोज (Rose, 1993) जैसे नारीवादी भूगोलवेत्ताओं ने जोर देते हुए व्यक्त किया है कि-

1. भूगोल का व्यवस्थित विषय ऐतिहासिक रूप से पुरुष प्रधान है।

2 भूगोल- पेशे में महिलाओं को मात्र निरीह माना गया है और इसी रूप में संरिक्षत किया। वस्तुतः महिलाओं को भूगोल ने हाशिए पर लाकर उनकी उपेक्षा की और उनको सताया है।

3. ‘नारीवाद’ भूगोल के प्रोजेक्टों एवं शोध-विषयों से अछूता विषय बना रहा, और

4. पुरुषों द्वारा भूगोल में प्रभुत्व के कारण इसके दूरगामी दुष्परिणाम निकले हैं। स्थानों अथवा क्षेत्रों और भू-दृश्य जगत् के निवर्चन एकांगी हैं जहाँ प्रेक्षणों व आनुभाविक ज्ञान केवल पुरुष-दृष्टि-प्रधान है।

    अतएव, नियमानुरूप भूगोल विज्ञान (The Discipline of Geography) पुरुष-प्रधान (Masculinist) ही है जिसमें महिलाओं से संबंधित सोच की उपेक्षा है। लिंग भेद-भाव, वस्तुतः मानवीय कृत्य है। समाज के प्रभुत्वशाली समूहों ने समाज में अपने ही दृष्टिकोण से दृश्य-जगत् एवं प्रकृति को देखा और निर्वचित किया। यह भी कहें तो अत्युक्ति नहीं है कि पुरुषों ने अपने द्वारा की गई धरातल की व्याख्या को समाज पर थोपा है। उनके भौगोलिक विवरण स्त्री-पुरुष भेद-भाव की ओर इंगित नहीं बने हैं। वे केवल जाति-प्रजाति और वर्गों तथा यौन-उन्मुख भेदों से भरे हैं।

       उत्तर आधुनिक मानव भूगोलवेत्ताओं ने इस दिशा में निम्नांकित रूप-रेखा शोध हेतु प्रस्तुत की। इसके प्रधान विषय हैं-

1. नीति-संगत दार्शनिकता, नैतिक भूगोल और भूगोलवेत्ताओं का सदाचरण (Moral Philosophy, Moral Geographies and the Geographer’s Morality):-

    इसके अन्तर्गत भूगोल में आर्थिक केन्द्र बिन्दु के स्थान पर जीवनोपयोगी नैतिक-संरचना को विकसित बनाना है।

2. सामाजिक भेद-भाव की प्रक्रियाएँ (Social Differentiation):-

     इसमें जाति, प्रजाति, वर्ग, यौनाचरण, आयु व स्वास्थ्य विषयक सराहना की और ध्यानाकर्षण द्वारा स्थानिक विभिन्नताओं एवं परिवर्तनशीलता का निर्वचन करना सम्मिलित है।

3. ताक (टांड) की रचना और सीमांकन (Shelf Construction):-

      भूगोलविदों द्वारा इसमें विभिन्न श्रेणियों के व्यक्ति व्यक्तियों में परस्पर संबंध और मनोविश्लेषणात्मक साहित्य में ऐसे विषयों की चर्चा जिनका पूर्व में उल्लेख नहीं हुआ है।

4. भूमण्डलीय और प्रदेशीयता (Globality and Territoriality):-

      इसमें स्थानों में व्यक्तियों व समूहों की अवस्थिति विषयक चर्चा और उनके सांस्कृतिक अभ्यासों का निर्वचन सम्मिलित है, और

5. समाज, संस्कृति और प्राकृतिक वातावरण (Society, Culture and Natural Environment):-

     इसके अन्तर्गत विषयों में ‘प्रकृति’ एवं ‘वातावरण’ की सामाजिक रचना की व्याख्या और वातावरणीय समस्याओं के निराकरण हेतु अपनाए गए अभिगमों की महत्ता का उल्लेख होना चाहिए।

     उत्तर आधुनिकता और तर्क प्रधान उत्तरकालीन नारीवाद का मन्तव्य है कि भूगोल में एक पृथक श्रेणी के रूप में महिलाओं की स्थिति, समस्या और स्थानिक निर्वचन को अलग-अलग समूहों से जोड़ा जाए तथा भिन्न उनकी आवश्यकताओं औ अनुभवों की व्याख्या की जाए जो अभी तक भूगोल साहित्य में नदाद सामग्री है।

1. India with neighboring countries (पड़ोसी देशों के साथ भारत)

1. India with neighboring countries
(पड़ोसी देशों के साथ भारत)



हमारे देश का नाम- भारत अर्थात इण्डिया है।

भारत का अन्य नाम- हिन्दुस्तान, आर्यावर्त, भारतवर्ष, जम्मूद्वीप, हिन्द,

भारत का नाम भारत एक पौराणिक राजा दुष्यन्त के पुत्र भरत के नाम पर पड़ा है।

➤ भारत का संवैधानिक नाम- ” India that is Bharat.”

भारत को इण्डिका से सबसे पहले यूनानियों ने सम्बोधित किया।

जबकि अरबवासियों ने भारत को सबसे पहले हिन्दुस्तान से सम्बोधित किया। (अमीर खुसरो)

भारत को आंग्ल भाषा में इंडिया कहते है।

‘इण्डिया ‘ शब्द की उत्पति “Indus” (सिन्धु) नदी से हु‌आ है।

फारसवासी ‘स’ अक्षर का उच्चारण ‘ह’ के रूप में करते हैं। फलतः ‘सिन्धु शब्द से हिन्दू शब्द की उत्पति हुई और हिन्दू से हिन्दुस्तान शब्द की उत्पति हुई।

भारत के उतरी भाग को आर्यावर्त और दक्षिणी भाग को ‘दक्षिणावर्त’ कहते हैं।

भारत की चौहद्दी

उतर- हिमालय, (तिब्बत) चीन, अफगानिस्तान, नेपाल

पश्चिम- पाकिस्तान, अरब सागर

पूरब- म्यानमार, बंगाल की खाड़ी, बाँग्लादेश, इण्डोनेशिया

दक्षिण- हिन्द महासागर, श्रीलंका, मालदीप।

India with neighboring

भारत के पड़ोसी देशों के साथ लगने वाले सीमा की लम्बाई-

(1) बांगलादेश के साथ- 4096 Km (सबसे ज्यादा)

(2) चीन- 3917 km

(3) पाकिस्तान- 3310 km

(4) नेपाल- 1761 km

(5) म्यानमार- 1458 km

(6) भूटान- 587 Km

(7) अफगानिस्तान- 80 km (सबसे कम)

भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश के पास जो सीमा लगती है उसे मैकमोहन रेखा कहते हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच स्थित सीमा को रेड क्लीफ लाइन और L.O.C. (Line of Control) के नाम से जानते हैं।

पाक अधिकृत कश्मीर और भारत अधिकृत कश्मीर के बीच की सीमा रेखा L.O.C. (Line of Control) के नाम से जानते हैं।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच स्थित सीमा को डूरण्ड लाइन ( लम्बाई 2430 km) के नाम से जानते हैं। 

भारत का कुल क्षेत्र- 32,87,263 km²

➤ भारत की स्थल सीमा की कुल लम्बाई 15,200 km है।

भारत की समुद्री सीमा की कुल लम्बाई मुख्य भूमि के साथ 6100 km और द्वीपीय सीमा के साथ 7516.6 km है।

भारत की स्थलीय सीमा सर्वाधिक बांग्लादेश के साथ लगती है।

भारत का सबसे लम्बा समुद्री तट वाला राज्य गुजरात है।

➤ समुद्री सीमा की लम्बाई के अनुसार राज्यों का क्रम-

1. गुजरात

2. आन्ध्र प्रदेश 

3. तमिलनाडु

4. महाराष्ट्र

प्रादेशिक समुद्री सीमा 12 समुद्री मील निर्धारित किया गया है।

समुद्र में प्रादेशिक समुद्री सीमा (12 नॉटिकल मील) तक भारत का सम्पूर्ण अधिकार है।

➤ प्रादेशिक समुद्री सीमा के बाद जो समुद्र आती है उसे संलग्न क्षेत्र कहते हैं। संलग्न क्षेत्र प्रादेशिक सीमा से 24 समुद्री मील तक होता है। यह वह क्षेत्र है जिससे कोई देश सीमा शुल्क वसूलने, साफ-सफाई और वित्तीय अधिकार (कारोबार करने का अधिकार) का अधिकार रखते हैं।

संलग्न क्षेत्र के आगे 200 समुद्री मील तक की समुद्री सीमा को एकांकी आर्थिक क्षेत्र (EEZ- Exclusive Economic Zone ) कहते हैं।

➤ एकांकी (अनन्य) आर्थिक क्षेत्र में भारत देश को 3 तरह के अधिकार प्राप्त है-

(i) 200 समुद्री मील तक भारत नये द्वीपों का निर्माण कर सकता है।

(ii) वैज्ञानिक परीक्षण करने का अधिकार।

(iii) प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का संपूर्ण अधिकार

नोट: 1 मानक मील = 1.6 km (1.584 km) 

1 समुद्री मील या नॉटिकल मील = 1.8 Km (1.824 km)

प्रादेशिक समुद्री सीमा वह सीमा है जिस पर राज्यों का अधिकार होता है।

एकांकी आर्थिक क्षेत्र संलग्न क्षेत्र के आगे 200 नॉटिकल मील तक निर्धारित किया गया है। इस पर केन्द्र सरकार का अधिकार होता है।
भारत पूर्णतः उत्तरी गोलार्द्ध का देश है।

भारत का देशान्तरीय विस्तार- 68º7′ पूर्वी देशांतर से 97º25′ पूर्वी देशांतर

भारत के मुख्य भूमि का अक्षांशीय विस्तार- 8º4′ उत्तरी अक्षांश से 37º6’उत्तरी अक्षांश

अगर द्वीपों के साथ भारत का अक्षांशीय विस्तार देखा जाय तो पाते हैं कि इसका विस्तार 6º4′ उत्तरी अक्षांश से 37º6′ उत्तरी अक्षांश तक है।

भारत एशिया महाद्वीप का एक प्रमुख देश है।

यह एशिया के दक्षिण भाग में स्थित है।

भौगोलिक संरचना के दृष्टि से भारत गोण्डवाना भूखण्ड पर स्थित है।

भारत के मध्य से (प्रयागराज के पास मिर्जापुर से) 82º½ पूर्वी देशान्तर रेखा गुजरती है।

कर्क रेखा (23º½ उत्तरी अक्षांश रेखा) भारत के 8 राज्यों से होकर गुजरती है।

(1) गुजरात

(2) राजस्थान

(3) मध्य प्रदेश (M.P)

(4) छतीसगढ़

(5) झारखण्ड

(6) पश्चिम बंगाल (W.B.)

(7) त्रिपुरा

(8) मिजोरम

मुख्य भूमि का सबसे दक्षिणी बिंदु कन्याकुमारी विषुवत रेखा से 876 किमी० दूरी पर स्थित है।

भारत की आकृति- चतुष्कोणीय

क्षेत्रफल के दृष्टि से भारत विश्व का 7वाँ सबसे बड़ा देश है। विश्व के कुल क्षेत्रफल का 2.4% भूमि भारत के पास है।

भारत से बड़े देशों का क्रम- रूस> कनाडा> संयुक्त राज्य अमेरिका> चीन> ब्राजील> ऑस्ट्रेलिया> भारत

भारत का उत्तर से दक्षिण की लम्बाई- 3214 किमी०

पूरब से पश्चिम की लम्बाई- 2933 किमी०

भारत के तीन ओर समुद्र स्थित है, इसलिए दक्षिण भारत को प्रायद्वीपीय भारत कहते हैं।

प्रायद्वीपीय भारत 1600 किमी० दुरी तक समुद्र में घुसा हुआ है।

भारत का सबसे दक्षिणी बिन्दु- इंदिरा प्वाइंट / पिग्मेलियन प्वाइंट/पारसान प्वाइंट (ग्रेट निकोबार में)

यह 2004 में सूनामी लहरों के कारण समुद्र में जलमग्न हो गया।

➤ भारत के मुख्य भूमि पर कन्याकुमारी (केप कोमोरिन) सबसे दक्षिण में स्थित है।

सबसे उत्तरी भाग- इंदिरा कॉल (जम्मू और कश्मीर)

सबसे पश्चिमी भाग- राजहर क्रिक (झील) / गौरमाता (मूल द्वारिका)

सबसे पूरबी भाग- वालांगू/कीवुतु (अरुणाचल  प्रदेश)

भारतीय उपमहाद्वीप = भारत, पाकिस्तान, नेपाल भूटान, बांग्लादेश

भारत के उत्तर-पश्चिम, उत्तर तथा उत्तर-पूर्वी सीमा पर नवीनतम वलित पर्वत है।

इसके दक्षिण का भूभाग उत्तर में चौड़ा है और 22º उत्तरी अक्षांश से हिन्द महासागर की ओर संकरा होता गया है।

1869 में स्वेज नहर के खुलने से भारत-यूरोप के बीच की दूरी 7000 किमी० कम हो गई है।

➤ बांग्लादेश की सीमा पर स्थिति राज्य-

(1) पश्चिम बंगाल (W.B)

(2) असम

(3) मेघालय

(4) त्रिपुरा

(5) मिजोरम

➤ म्यानमार की सीमा पर स्थित राज्य-

(1) अरुणाचल प्रदेश

(2) नागालैण्ड

(3) मणिपुर

(4) मिजोरम

➤ भूटान की सीमा पर स्थित भारतीय राज्य-

(1) सिक्कीम

(2) पश्चिम बंगाल (W.B)

(3) असम

(4) अरुणाचल प्रदेश

➤ नेपाल की सीमा पर स्थित भारतीय राज्य-

(1) उत्तराखण्ड

(2) उत्तर प्रदेश (UP)

(3) बिहार

(4) पश्चिम बंगाल (W.B)

(5) सिक्किम

➤ चीन की सीमा पर स्थित भारतीय राज्य-

(1) लद्दाख

(2) हिमाचल प्रदेश

(3) उतराखण्ड

(4) सिक्किम

(5) अरुणाचल प्रदेश

➤ पाकिस्तान की सीमा पर स्थित भारतीय राज्य-

(1) जम्मू और कश्मीर

(2) पंजाब

(3) राजस्थान

(4) गुजरात

श्रीलंका भारत से पाक जलसन्धि और मन्नार की खाड़ी से अलग होता है।

निकोबार और सुमात्रा ग्रेट चैनल से विभक्त होता है।

भारत के अक्षांश और देशान्तर का विस्तार लगभग 30º है।

अक्षांश का प्रभाव दक्षिण से उत्तर की ओर दिन और रात की अवधि पर पड़‌ता है।

ध्रुवों की ओर जाते समय दो देशान्तर रेखाओं के बीच की दूरी घटती जाती है, जबकि दो अक्षांशों के बीच की दूरी हर जगह एक-सी रहती है।

अक्षांश रेखाओं के मानों से ज्ञात होता है कि भारत का दक्षिणी हिस्सा उष्णकटिबंध में और उत्तरी हिस्सा उपोष्ण कटिबंध/ कोष्ण शीतोष्ण कटिबंध में स्थित है।

यही स्थिति देश में भू-आकृति, जलवायु, मिट्टी के प्रकारों और वनस्पति में पाई जाने वाली भारी भिन्नता के लिए उत्तरदायी है।

भारत के अक्षांक्ष रेखाओं के मानों का अंतर- 30º (लगभग)

भारत के देशांतर रेखाओं के मानों का अंतर- 30º (लगभग)

➤ अरुणाचल प्रदेश में सूर्योदय के होने के 2 घंटे बाद द्वारका में सूर्योदय होता है।

विश्व के देशों में आपसी समझ के तहत मानक याम्योत्तर को 7½º या 7°30′ देशांतर के गुणक पर चुना जाता है। यही कारण है कि 82º30′ याम्योत्तर को भारत की मानक याम्योत्तर चुना गया है।

भारतीय मानक समय ग्रीनवीच माध्य समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

कुछ देश ऐसे हैं जिनमें अधिक पूर्व-पश्चिम विस्तार के कारण एक से अधिक मानक देशान्तर रेखाएँ हैं। जैसे-USA में 6, रूस में 7 समय कटिबंध है। 

➤ भारत के राज्य एवं संघीय क्षेत्र

राज्य

क्रमांक राज्य  राजधानी
1. अरुणाचल प्रदेश ईटानगर
2. असम दिसपुर
3. बिहार पटना
4. छतीसगढ़ रायपुर
5. गोवा पणजी
6. गुजरात गांधीनगर
7. हरियाणा चंडीगढ़
8. हिमाचल प्रदेश शिमला
9. झारखण्ड राँची
10 कर्नाटक बंगलोर
11. केरल तिरुवनन्तपुरम
12. मध्य प्रदेश भोपाल
13. महाराष्ट्र मुम्बई
14. मणिपुर इम्फाल
15. मेघालय शिलांग
16. मिजोरम आइजोल
17. नागालैंड कोहिमा
18. ओड़िसा भुवनेश्वर
19. पंजाब चंडीगढ़
20. राजस्थान जयपुर
21. सिक्किम गंगटोक
22. तमिलनाडु चेन्नई
23. तेलंगाना हैदराबाद
24. त्रिपुरा अगरतला
25. उतराखंड देहरादून
26. उत्तर प्रदेश लखनऊ
27. पश्चिम बंगाल कोलकात्ता
28. आंध्र प्रदेश हैदराबाद, अमरावती

केंद्र शासित प्रदेश

क्रमांक केंद्र शासित प्रदेश राजधानी
1. अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह पोर्ट ब्लेयर
2. चंडीगढ़ चंडीगढ़
3. दादरा तथा नगर हवेली और दमन एवं दीव दमन
4. जम्‍मू एवं कश्‍मीर  ग्रीष्मकालीन राजधानी- श्रीनगर और शीतकालीन राजधानी- जम्मू-तवी
5. लद्दाख लेह
6. लक्षद्वीप कावारती
7. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली दिल्ली
8. पुडुचेरी (पांडिचेरी) पुडुचेरी

➤ भारत की राजधानी- नई दिल्ली

➤ क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत के 5 बड़े राज्यों का क्रम- राजस्थान (सर्वाधिक बड़ा), मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात

➤ क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत के सबसे छोटा राज्य- गोवा (3702 km2)

➤ क्षेत्रफल की दृष्टि से बिहार का स्थान- 13वाँ

➤ क्षेत्रफल की दृष्टि से भात के सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेश- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

➤ क्षेत्रफल की दृष्टि से भात के सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश- लक्षद्वीप

➤ उत्तरी पूर्वी भारत के 7 राज्यों को “Seven Sister State” कहते है।



पड़ोसी देशों के साथ भारत से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर



1. प्राचीन भारतीय भौगोलिक मान्यता के अनुसार भारतवर्ष किस द्वीप का अंग था?

(a) पुष्कर द्वीप

(b) जम्बू द्वीप

(c) कांच द्वीप

(d) कुश द्वीप

[read more] (b) जम्बू द्वीप [/read]

2. सर्वप्रथम इण्डिया शब्द का प्रयोग भारत के लिए किस भाषा में किया गया?

(a) उर्दू

(b) ग्रीक

(c) फारसी

(d) अरबी

[read more] (b) ग्रीक [/read]

3. भारत की मुख्य भूमि की दक्षिणी सीमा है-

(a) 6°4′ उत्तरी अक्षांश

(b) 7°4′ उत्तरी अक्षांश

(c) 8°4′ उत्तरी अक्षांश

(d) 6°8′ उत्तरी अक्षांश

[read more] (c) 8°4′ उत्तरी अक्षांश [/read]

4. भारतीय मानक समय आधारित है-

(a) 80° पूर्व देशान्तर पर

(b) 80° पश्चिम देशान्तर पर

(c) 82°30′ पूर्व देशान्तर पर

(d) 82°30′ पश्चिम देशान्तर पर

[read more] (c) 82°30′ पूर्व देशान्तर पर [/read]

5. भारत का प्रमाणिक समय उस स्थान का स्थानीय समय है, जो स्थित है-

(a) दिल्ली के समीप

(b) कोलकाता के समीप 

(c) प्रयागराज के समीप

(d) भोपाल के समीप

[read more] (c) प्रयागराज के समीप [/read]

6. भारतीय मानक समय व ग्रीनविच समय में अन्तर है-

(a) 5½ घंटे

(b) 2½ घंटे

(c) 6½ घंटे

(d) 5 घंटे

[read more] (a) 5½ घंटे [/read]

7. भारत का धुर दक्षिणी भाग की भूमध्य रेखा से दूरी कितनी है?

(a) 776 किमी०

(b) 867 किमी०

(c) 876 किमी०

(d) 916 किमी०

[read more] (c) 876 किमी० [/read]

8. भारत की स्थलीय सीमा की लम्बाई कितनी है?

(a) 6100 किमी०

(b) 7516.5 किमी०

(c) 1200 किमी०

(d) 15200 किमी०

[read more] (d) 15200 किमी० [/read]

9. द्वीपों सहित भारत के तट रेखा की लम्बाई कितनी है?

(a) 6100 किमी०

(b) 6200 किमी०

(c) 7516.5 किमी०

(d) 8000 किमी०

[read more] (c) 7516.5 किमी० [/read]

10. भारत की उत्तर से दक्षिण तक की लम्बाई है-

(a) 2933 किमी०

(b) 3033 किमी०

(c) 3133 किमी०

(d) 3214 किमी०

[read more] (d) 3214 किमी० [/read]

11. भारत की पूर्व से पश्चिम तक की लम्बाई है-

(a) 2933 किमी०

(b) 3033 किमी०

(c) 3133 किमी०

(d) 3214 किमी०

[read more] (a) 2933 किमी० [/read]

12. भारत की तट रेखा की लम्बाई है-

(a) 6100 किमी०

(b) 6200 किमी०

(c) 6175 किमी०

(d) 6500 किमी०

[read more] (a) 6100 किमी० [/read]

13. भारत का क्षेत्रफल विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का कितना है?

(a) 2.2%

(b) 2.4%

(c) 2.8%

(d) 3.2%

[read more] (b) 2.4% [/read]

14. भारत के कुछ क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत भाग पर्वतीय क्षेत्र (माध्य समुद्र तल से 2135 मीटर या अधिक ऊँचाई) के अन्तर्गत आता है?

(a) 10.7%

(b) 18.6%

(c) 27.7%

(d) 43.0%

[read more] (a) 10.7% [/read]

15. सम्पूर्ण भारत के कितने प्रतिशत भू-भाग पर पर्वत और पहाड़ियों का विस्तार पाया जाता है?

(a) 10.7%

(b) 18.6%

(c) 29.3%

(d) 43.0%

[read more] (c) 29.3% [/read]

16. सम्पूर्ण भारत के कितने प्रतिशत भू-भाग पर पठार का विस्तार पाया जाता है?

(a) 10.7%

(b) 18.6%

(c) 27.7%

(d) 29.3%

[read more] (c) 27.7% [/read]

17. सम्पूर्ण भारत के कितने प्रतिशत भू-भाग पर मैदान का विस्तार पाया जाता है?

(a) 10.7%

(b) 18.6%

(c) 27.7%

(d) 43.0%

[read more] (d) 43.0% [/read]

18. भारत की प्रादेशिक जल सीमा (Territorial water) समुद्र तट से कितने समुद्री मील की दूरी तक है?

(a) 12 मील

(b) 24 मील

(c) 111 मील

(d) 200 मील

[read more] (a) 12 मील [/read]

19. भारत का संलग्न क्षेत्र (Contiguous zone) प्रादेशिक जल सीमा के आगे कितने समुद्री मील की दूरी तक है?

(a) 12 मील

(b) 24 मील

(c) 100 मील

(d) 200 मील

[read more] (b) 24 मील [/read]

20. भारत का एकान्तिक आर्थिक क्षेत्र (Exclusive economic zone) संलग्न क्षेत्र के आगे कितने समुद्री मील की दूरी तक है?

(a) 100 मील

(b) 200 मील

(c) 300 मील

(d) 400 मील

[read more] (b) 200 मील [/read]

21. भारत में समुद्री तट रेखा वाले राज्यों की संख्या कितनी है?

(a) 7

(d) 13

(c) 9

(b) 8

[read more] (c) 9 [/read]

22. सबसे लम्बी तटीय रेखा वाला राज्य है-

(a) महाराष्ट्र

(b) गुजरात

(c) आ० प्र०

(d) तमिलनाडु

[read more] (b) गुजरात [/read]

23. निम्नलिखित में से किस राज्य की तट रेखा सर्वाधिक लम्बी है?

(a) केरल

(b) महाराष्ट्र 

(c) आ० प्र०

(d) तमिलनाडु

[read more] (c) आ० प्र० [/read]

24. कौन-सी अक्षांश रेखा भारत के मध्य से होकर गुजरती है?

(a) कर्क रेखा

(b) मकर रेखा

(c) विषुवत रेखा

(d) आर्कटिक रेखा

[read more] (a) कर्क रेखा [/read]

25. कर्क रेखा भारत के कितने राज्यों से होकर गुजरती है?

(a) 5

(b) 6

(c) 7

(d) 8

[read more] (d) 8 [/read]

26. निम्नलिखित में से किस राज्य से होकर कर्क रेखा नहीं गुजरती है?

(a) उड़ीसा

(b) गुजरात

(c) राजस्थान

(d) प० बंगाल

[read more] (a) उड़ीसा [/read]

27. निम्नलिखित में से किस राज्य से होकर कर्क रेखा गुजरती है?

(a) बिहार

(b) उड़ीसा

(c) उत्तर प्रदेश

(d) गुजरात

[read more] (d) गुजरात [/read]

28. भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणी नोक (Point) है-

(a) केप केमोरिन

(b) कैलीमेयर प्वाइण्ट

(c) इन्दिरा प्वाइण्ट

(d) नॉरीमन प्वाइण्ट

[read more] (a) केप केमोरिन [/read]

29. भारत का सबसे दक्षिणी बिन्दु है-

(a) इन्दिरा कॉल

(b) इन्दिरा प्वाइण्ट

(c) कैलीमेयर प्वाइण्ट

(d) नॉरीमून याहुण्ट

[read more] (b) इन्दिरा प्वाइण्ट [/read]

30. इन्दिरा प्वाइण्ट का अन्य नाम है-

(a) पारसन प्वाइण्ट

(b) ला-हि-चिंग

(c) पिगमेडियन प्वाइण्ट

(d) इनमें से सभी

[read more] (d) इनमें से सभी [/read]

31. निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान भूमध्य रेखा के निकटतम स्थित है?

(a) केप केमोरिन

(b) रामेश्वरम्

(c) इन्दिरा प्वाइण्ट

(d) इन्दिरा कॉल

[read more] (c) इन्दिरा प्वाइण्ट [/read]

32. भारतीय भूमि का सर्वाधिक उत्तरी भाग है

(a) इन्दिरा प्वाइण्ट

(b) पारसन प्वाइण्ट

(c) पिगमेलियन प्वाइण्ट

(d) इन्दिरा कॉल

[read more] (d) इन्दिरा कॉल [/read]

33. भारत का दक्षिणतम स्थान इन्दिरा प्वाइण्ट निम्नलिखित में से कहाँ स्थित है?

(a) तमिलनाडु

(b) केरल

(c) लक्षद्वीप

(d) अंडमान-निकोबार द्वी० स०

[read more] (d) अंडमान-निकोबार द्वी० स० [/read]

34. भारत की मुख्य भूमि को रामेश्वरम् द्वीप से कौन अलग करता है?

(a) पाक जलसंधि

(b) दस डिग्री चैनल

(c) पम्बन चैनल

(d) नौ डिग्री चैनल

[read more] (c) पम्बन चैनल [/read]

35. आदम का पुल (Adam’s bridge) निम्नलिखित में से किन दो देशों के मध्य स्थित है?

(a) भारत एवं पाकिस्तान

(b) भारत एवं बांग्लादेश

(c) भारत एवं श्रीलंका

(d) भारत एवं म्यान्मार

[read more] (c) भारत एवं श्रीलंका [/read]

36. दस डिग्री (10°) चैनल किसके बीच स्थित है?

(a) छोटा अंडमान एवं बड़ा अंडमान

(b) छोटा अंडमान एवं कार निकोबार

(c) छोटा निकोबार एवं कार निकोबार

(d) छोटा निकोबार एवं बड़ा निकोबार

[read more] (b) छोटा अंडमान एवं कार निकोबार [/read]

37. डंकन पास (Duncan Pass) किसके बीच स्थित है?

(a) उत्तरी अंडमान एवं मध्य अंडमान

(b) दक्षिणी अंडमान एवं मध्य अंडमान

(c) दक्षिणी अंडमान एवं छोटा अंडमान

(d) कार निकोबार एवं छोटा निकोबार

[read more] (c) दक्षिणी अंडमान एवं छोटा अंडमान [/read]

38. भारत और श्रीलका को पृथक करने वाला जलडमरूमध्य क्या कहलाता है?

(a) मलक्का जलसन्धि

(b) डोवर जलसन्धि

(c) पाक जलसन्धि

(d) हार्मुज जलसन्धि

[read more] (c) पाक जलसन्धि [/read]

39. श्रीलंका को भारत से पृथक करती है-

(a) बंगाल की खाड़ी

(b) विन्ध्यन पर्वत श्रेणी

(c) पामीर ग्रंथि

(d) मन्नार की खाड़ी

[read more] (d) मन्नार की खाड़ी [/read]

40. भारत और चीन के बीच कौन-सी रेखा सीमा निर्धारण करने का कार्य करती है?

(a) रेडक्लिफ रेखा

(b) डूरण्ड रेखा

(c) मैकमहोन रेखा

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (c) मैकमहोन रेखा [/read]

41. भारत एवं पाकिस्तान को विभाजित करने वाली रेखा कहलाती है-

(a) 38वीं समानान्तर

(b) रेडक्लिफ रेखा

(c) मैकमहोन रेखा

(d) इरण्ड रेखा

[read more] (b) रेडक्लिफ रेखा, व्याख्या: भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा निर्धारण के लिए 1947 में सर सिरिल रेडक्लिफ द्वारा खींची गई रेखा को रेडक्लिफ रेखा (Radcliffe Line) कहा जाता है। [/read]

42. भारत के सुदूर पूर्व में कौन-सा देश भारत के साथ सर्वाधिक लम्बी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा बनाता है?

(a) चीन

(b) म्यान्मार

(c) थाईलैंड

(d) वियतनाम

[read more] (b) म्यान्मार [/read]

43. भारत एवं चीन के बीच सीमा निर्धारित करने वाली मैकमहोन रेखा निम्नलिखित में से किस प्रदेश के उत्तरी सीमा पर खींची गई है?

(a) जम्मू-कश्मीर

(b) उत्तर प्रदेश

(c) हिमाचल प्रदेश

(d) अरुणाचल प्रदेश

[read more] (d) अरुणाचल प्रदेश [/read]

44. निम्नलिखित में से किस देश के साथ भारत की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा नहीं लगती है?

(a) पाकिस्तान

(b) बांग्लादेश

(c) भूटान

(d) श्रीलंका

[read more] (d) श्रीलंका [/read]

45. निम्नलिखित में से कौन-सा देश भारतीय उपमहाद्वीप के अन्तर्गत शामिल नहीं किया जाता है?

(a) पाकिस्तान

(b) नेपाल

(c) श्रीलंका

(d) बांग्लादेश

[read more] (c) श्रीलंका [/read]

46. निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य की समुद्रतटीय सीमा सबसे छोटी है?

(a) गोवा

(b) केरल

(c) उड़ीसा

(d) प० बंगाल

[read more] (a) गोवा [/read]

47. भारत की सबसे लम्बी स्थलीय सीमा किस देश के साथ है?

(a) चीन

(b) पाकिस्तान

(c) बांग्लादेश

(d) म्यान्मार

[read more] (c) बांग्लादेश [/read]

48. सबसे छोटी स्थलीय सीमा भारत की किस देश के साथ है?

(a) पाकिस्तान

(b) नेपाल

(c) म्यान्मार

(d) भूटान

[read more] (d) भूटान [/read]

49. भारत को निम्नलिखित भौतिक प्रदेशों में विभाजित किया जा सकता है

(a) हिमालय, गंगा का मैदान, दक्षिणी पठार एवं राजस्थान का मैदान

(b) पर्वतीय प्रदेश, हिमानी प्रदेश, नदी घाटी प्रदेश एवं हिमालय प्रदेश

(c) दक्षिणी पठारी प्रदेश, सागर तटीय प्रदेश, द्वीपीय प्रदेश एवं हिमालय प्रदेश

(d) उत्तरी पर्वतीय प्रदेश, वृहत् मैदानी प्रदेश, दक्षिणी प्रायद्वीपीय प्रदेश तथा सागर तटीय प्रदेश

[read more] (d) उत्तरी पर्वतीय प्रदेश, वृहत् मैदानी प्रदेश, दक्षिणी प्रायद्वीपीय प्रदेश तथा सागर तटीय प्रदेश [/read]

50. भारत का कौन-सा भू-आकृतिक विभाग प्राचीनतम है?

(a) उत्तरी पर्वतीय प्रदेश

(b) गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान

(c) प्रायद्वीपीय पठार

(d) समुद्रतटीय मैदान

[read more] (c) प्रायद्वीपीय पठार [/read]

51. गारो, खासी एवं जयन्तियाँ पहाड़ियाँ संरचना एवं उत्पत्ति की दृष्टि से निम्नलिखित में से किसका भाग है?

(a) हिमालय पर्वत श्रेणी का

(b) पूर्वांचल की पहाड़ी का

(c) अराकानयोमा पर्वत का

(d) प्रायद्वीपीय पठार का

[read more] (d) प्रायद्वीपीय पठार का [/read]

52. निम्नलिखित में से कौन-सा तट पश्चिमी तट का भाग नहीं है?

(a) काठियावाड़ तट

(b) कोंकण तट

(c) मालाबार तट

(d) कोरोमंडल तट

[read more] (d) कोरोमंडल तट [/read]

53. भारत का पूर्वी समुद्री तट किस नाम से जाना जाता है?

(a) दीघा तट

(b) कोरोमण्डल तट

(c) कोंकण तट

(d) मालाबार तट

[read more] (b) कोरोमण्डल तट [/read]

54. कोंकण तट कहाँ से कहाँ तक विस्तृत है?

(a) गोवा से कोच्चि

(b) गोवा से दीव

(c) गोवा से दमण

(d) गोवा से मुम्बई

[read more] (c) गोवा से दमण [/read]

55. लक्षद्वीप समूह के द्वीपों की उत्पत्ति निम्नलिखित में से किस प्रकार हुई है?

(a) ज्वालामुखी उत्पत्ति से

(b) मृदा निक्षेपण से

(c) प्रवाल उत्पत्ति से

(d) इनमे से कोई नहीं

[read more] (c) प्रवाल उत्पत्ति से [/read]

56. भारतीय क्षेत्र में स्थित दो ज्वालामुखी द्वीप हैं-

(a) कवारत्ती एवं न्यू मूर

(b) पम्बन एवं बैरन

(c) बैरन एवं नारकोण्डम

(d) ग्रेट अंडमान व लिटिल निकोबार

[read more] (c) बैरन एवं नारकोण्डम [/read]

57. न्यू मूर द्वीप कहाँ है?

(a) अरब सागर में

(b) मन्नार की खाड़ी में

(c) बंगाल की खाड़ी में

(d) अण्डमान सागर में

[read more] (c) बंगाल की खाड़ी में [/read]

58. निम्नलिखित में से कौन एक द्वीप है?

(a) दमण

(b) दीव

(c) पांडिचेरी

(d) दादरा एवं नागर हवेली

[read more] (b) दीव [/read]

59. स्वतंत्रता से पूर्व कौन-सा भारतीय क्षेत्र ‘काला पानी’ के नाम से जाना जाता था?

(a) लक्षद्वीप समूह

(b) अंडमान-निकोबार द्वी० स०

(c) दीव

(d) अलियावेट व खदियावेट

[read more] (b) अंडमान-निकोबार द्वी० स० [/read]

60. लक्षद्वीप समूह स्थित है-

(a) कच्छ की खाड़ी में

(b) अरब सागर में

(c) मन्नार की खाड़ी में

(d) बंगाल की खाड़ी में

[read more] (b) अरब सागर में [/read]

61. दीव स्थित है

(a) कच्छ की खाड़ी में

(b) खम्भात की खाड़ी में

(c) मन्नार की खाड़ी में

(d) बगाल की खाड़ी में

[read more] (b) खम्भात की खाड़ी में [/read]

62. निम्नलिखित में से कौन-सा द्वीप भारत और श्रीलंका के मध्य स्थित है?

(a) न्यू मूर

(b) लक्षद्वीप

(c) गंगासागर

(d) रामेश्वरम्

[read more] (d) रामेश्वरम् [/read]

63. लक्षद्वीप समूह में द्वीपों की संख्या है-

(a) 26

(b) 36

(c) 37

(d) 43

[read more] (b) 36 [/read]

64. थार मरुभूमि कहाँ स्थित है?

(a) गुजरात

(b) राजस्थान

(c) पंजाब

(d) हरियाणा

[read more] (b) राजस्थान [/read]

65. दक्षिण गंगोत्री क्या है?

(a) प्रायद्वीपीय भारत की एक नदी

(b) भारतीय नौसेना का युद्धक जलपोत

(c) उत्तरी ध्रुव में स्थापित भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र

(d) अंटार्कटिका में स्थापित भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र

[read more] (d) अंटार्कटिका में स्थापित भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र [/read]

66. वर्तमान में भारत के किस स्थान को ‘सफेद पानी’ के नाम से जाना जाता है?

(a) लेह

(b) लद्दाख

(c) कारगिल

(d) सियाचीन

[read more] (d) सियाचीन [/read]

67. हैदराबाद का जुडवाँ नगर है-

(a) निजामाबाद

(b) सिकन्दराबाद

(c) आसिफाबाद

(d) आदिलाबाद

[read more] (b) सिकन्दराबाद [/read]

68. कोच्चि का जुड़वाँ नगर है-

(a) एर्नाकुलम

(b) अल्वाय

(c) अलेप्पी

(d) कोट्ठायाम

[read more] (a) एर्नाकुलम [/read]

69. जम्मू-कश्मीर राज्य का वह हिस्सा जिस पर चीन का अधिकार है, क्या कहलाता है?

(a) गिलगिट क्षेत्र

(b) छो-मोरारी क्षेत्र

(c) सियाचीन क्षेत्र

(d) अक्साई चीन

[read more] (d) अक्साई चीन [/read]

70. भारत का एकमात्र शीत मरूस्थल है-

(a) लद्दाख

(b) पूर्वी कामेंग

(c) लाचेन

(d) चम्बा

[read more] (a) लद्दाख [/read]

71. भारत का क्षेत्रफल कितना है?

(a) 32,57,405 वर्ग किमी०

(b) 32,68,276 वर्ग किमी०

(c) 32,87,263 वर्ग किमी०

(d) 32,87,679 वर्ग किमी०

[read more] (c) 32,87,263 वर्ग किमी० [/read]

72. भारतीय उपमहाद्वीप मूलतः एक विशाल भूखण्ड का भाग था, जिसे कहा जाता है-

(a) जुरेशिक भूखण्ड

(c) इण्डियाना

(b) आर्यावर्त

(d) गोंडवानालैंड

[read more] (d) गोंडवानालैंड [/read]

73. निम्न नगरों में से कौन-सा कर्क रेखा के निकटतम है?

(a) दिल्ली

(b) कोलकाता

(c) जोधपुर

(d) नागपुर

[read more] (b) कोलकाता [/read]

74. निम्नलिखित में से कौन-सा नगर कर्क रेखा से निकटतम दूरी पर अवस्थित है?

(a) अगरतला

(b) गाँधीनगर

(c) जबलपुर

(d) उज्जैन

[read more] (a) अगरतला [/read]

75. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

(a) भारत पूर्णतया उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है।

(b) भारत की आकृति चतुष्कोणीय है।

(c) क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व में सातवें तथा जनसंख्या की दृष्टि से दूसरे स्थान पर है।

(d) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।

[read more] (d) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं। [/read]

76. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) भारत के क्षेत्रफल का 29.3 प्रतिशत भाग पर्वतीय है।

(b) भारत के क्षेत्रफल का 27.7 प्रतिशत भाग पठारी है।

(c) भारत के क्षेत्रफल का 48.0 प्रतिशत भाग मैदानी है।

(d) भारत का अक्षांशीय विस्तार 8°4′ उ० से 37°6′ उ० है।

[read more] (c) भारत के क्षेत्रफल का 48.0 प्रतिशत भाग मैदानी है। [/read]

77. भारत के उत्तर के मैदान से सम्बन्धित निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) उत्तर का विशाल मैदान गंगा, ब्रह्मपुत्र और सतलज नदियों का मैदान है।

(b) यह नवनिर्मित मैदानी प्रदेश है।

(c) इस मैदान की मिट्टी चरनोजम प्रकार की है।

(d) इस मैदान में मिट्टी का निक्षेपण 400 मीटर से 3000 मीटर की गहराई तक है।

[read more] (c) इस मैदान की मिट्टी चरनोजम प्रकार की है।, व्याख्या :  भारत का उत्तर का विशाल मैदान (Northern Plains) मुख्य रूप से गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु-सतलज नदी प्रणालियों द्वारा निर्मित है  इसलिए कथन (a) सही है। यह मैदान अपेक्षाकृत भूवैज्ञानिक रूप से नया (नव निर्मित) है- इसलिए (b) भी सही है।

     इस मैदान में अत्यधिक मोटी जलोढ़ (Alluvial) मिट्टी पाई जाती है और इसकी गहराई लगभग 400 मीटर से 3000 मीटर तक है इसलिए (d) भी सही है। जबकि  चरनोजम (Chernozem) मिट्टी काले रंग की उपजाऊ मिट्टी होती है, जो यूक्रेन, रूस, कनाडा आदि जैसे क्षेत्रों में पाई जाती है। भारत के उत्तर के मैदान में चरनोजम मिट्टी नहीं, बल्कि जलोढ़ (Alluvial Soil) पाई जाती है। [/read]

78. भारत की भौगोलिक स्थिति के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(a) यह विषुवत रेखा के उत्तर में स्थित है।

(b) यह 8°4′ उ० से 37°6′ उ० अक्षांश के बीच स्थित है।

(c) यह 68°7′ पू० से 97°25′ पू० देशान्तर के बीच स्थित है।

(d) उपर्युक्त सभी सही है।

[read more] (d) उपर्युक्त सभी सही है। [/read]

79. किस भारतीय राज्य की सीमा सर्वाधिक राज्यों की सीमा को स्पर्श कहती है?

(a) मध्य प्रदेश

(b) असम

(c) उत्तर प्रदेश

(d) आन्ध्र प्रदेश

[read more] (c) उत्तर प्रदेश [/read]

80. निम्न में से कौन भारत का केन्द्र शासित प्रदेश नहीं है?

(a) लक्षद्वीप

(b) दमण व दीव

(c) पाण्डिचेरी

(d) नागालैंड

[read more] (d) नागालैंड [/read]

81. भारत में कितने राज्य व केन्द्र शासित प्रदेश हैं?

(a) 25 राज्य व 6 केन्द्र शासित प्रदेश

(b) 28 राज्य व 8 केन्द्र शासित प्रदेश

(c) 28 राज्य व 9 केन्द्र शासित प्रदेश

(d) 29 राज्य व 9 केन्द्र शासित प्रदेश

[read more] (b) 28 राज्य व 8 केन्द्र शासित प्रदेश [/read]

82. न्यू मूर द्वीप किन दो देशों के मध्य विवाद का कारण है?

(a) भारत और श्रीलंका

(b) भारत और बांग्लादेश

(c) ब्रिटेन और अर्जेण्टीना

(d) इजराइल और सीरिया

[read more] (b) भारत और बांग्लादेश [/read]

83. विश्व के 2.4 प्रतिशत क्षेत्रफल में भारत विश्व की कितनी प्रतिशत जनसंख्या का पोषण करता है?

(a) 11%

(b) 14%

(c) 17%

(d) 21%

[read more] (c) 17% [/read]

84. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) भारत के स्थल सीमा की लम्बाई 15200 किमी० हैं।

(b) भारत के मुख्य स्थलखण्ड के समुद्री सीमा की लम्बाई 6100 किमी० है।

(c) भारत का देशान्तरीय विस्तार 68°7′ पूर्वी देशान्तर से 97°25′ पूर्वी देशान्तर तक है।

(d) उपर्युक्त सभी सही है।

[read more] (d) उपर्युक्त सभी सही है। [/read]

85. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) भारत का दक्षिणी बिन्दु पिगमेलियन प्वाइण्ट है।

(b) भारत की कुल समुद्री सीमा का लम्बाई 7516.5 किमी० है।

(c) पाक जलसन्धि भारत और पाकिस्तान के बीच स्थित है।

(d) भारत का दक्षिणतम बिन्दु 6°4′ उत्तरी अक्षांश पर स्थित है।

[read more] (c) पाक जलसन्धि भारत और पाकिस्तान के बीच स्थित है। [/read]

86. पटना का स्थानीय समय-

(a) भारतीय मानक समय से आगे है।

(b) भारतीय मानक समय से पीछे है।

(c) वही है जो भारतीय मानक समय है।

(d) भारतीय मानक समय से सम्बन्धित नहीं है।

[read more] (a) भारतीय मानक समय से आगे है। [/read]

87. भारत अवस्थित है-

(a) अक्षांश 8°4′ द० से 37°6′ उ० तथा देशांश 68°7′ प० से 97°25′ पू० के मध्य

(b) अक्षांश 8°4′ उ० से 37°6′ द० तथा देशांश 68°7 पू० से 97°25 प० के मध्य

(c) अक्षांश 8°4′ उ० से 37°6′ उ० तथा देशांश 68°7′ पू० से 97°25′ पू० के मध्य

(d) अक्षांश 8°4′ द० से 37°6′ द० तथा देशांश 68°7′ प० से 97°25 प० के मध्य

[read more] (c) अक्षांश 8°4′ उ० से 37°6′ उ० तथा देशांश 68°7′ पू० से 97°25′ पू० के मध्य [/read]

88. भारत किस गोलार्द्ध में स्थित है?

(a) उत्तरी और पूर्वी

(b) दक्षिणी और पूर्वी

(c) उत्तरी और पश्चिमी

(d) उत्तरी और दक्षिणी

[read more] (a) उत्तरी और पूर्वी [/read]

89. निम्नलिखित में से वह राज्य क्षेत्र कौन-सा है जिसकी सीमा मिजोरम से नहीं लगी हुई है?

(a) नागालैंड

(b) म्यान्मार

(c) असम

(d) त्रिपुरा

[read more] (a) नागालैंड [/read]

90. निम्नलिखित में से वह क्षेत्र कौन-सा है जिसकी सीमा अरुणाचल प्रदेश से नहीं लगती है?

(a) असम

(b) नागालैंड

(c) भूटान

(d) मणिपुर

[read more] (d) मणिपुर [/read]

91. निम्नलिखित में से किस राज्य की सीमा से राजस्थान सटा हुआ नहीं है?

(a) गुजरात

(b) महाराष्ट्र

(c) हरियाणा

(d) उ० प्र०

[read more] (b) महाराष्ट्र [/read]

92. संघ शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव भारत में निम्न में से किन राज्यों के बीच स्थित है?

(a) आन्ध्र प्रदेश व मध्य प्रदेश

(b) गुजरात व मध्य प्रदेश

(c) मध्य प्रदेश व गुजरात

(d) गुजरात व महाराष्ट्र

[read more] (d) गुजरात व महाराष्ट्र [/read]

93. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य पहले नेफा (NEFA) के नाम से जाना जाता था?

(a) नागालैंड

(b) मणिपुर

(c) अरुणाचल प्रदेश

(d) असम

[read more] (c) अरुणाचल प्रदेश [/read]

94. पोर्ट ब्लेयर स्थित है-

(a) उत्तरी अंडमान

(b) दक्षिणी अंडमान

(c) मध्य अंडमान

(d) छोटा अंडमान

[read more] (b) दक्षिणी अंडमान [/read]

95. निम्न में से कौन-सा युग्म सही नहीं है?

(a) मदुरै- तमिलनाडु

(b) झाँसी- मध्य प्रदेश

(c) हरिद्वार- उत्तरांचल

(d) अलवर- राजस्थान

[read more] (b) झाँसी- मध्य प्रदेश [/read]

96. भारत की पूर्व से पश्चिम की दूरी किलोमीटर में कितनी है?

(a) 2700 किमी०

(b) 2800 किमी०

(c) 2900 किमी०

(d) 3000 किमी०

[read more] (c) 2900 किमी० [/read]

97. निम्नलिखित राज्यों को क्षेत्रफल के अनुसार क्रम में रखें और सही विकल्प का चयन करें-

I. मध्य प्रदेश II. आन्ध्र प्रदेश

III. राजस्थान IV. महाराष्ट्र

(a) II, IV, III, I

(b) III, IV, I, II

(c) III, I, IV, II

(d) IV, I, II, IV

[read more] (c) III, I, IV, II [/read]

98. भारत की सबसे बड़ी सुरंग जवाहार सुरंग किस राज्य में अवस्थित है?

(a) हिमाचल प्रदेश

(b) राजस्थान

(c) पश्चिम बंगाल

(d) जम्मू और कश्मीर

[read more] (d) जम्मू और कश्मीर [/read]

99. भारत के अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगे समुद्र तट की लंबाई लगभग कितनी है?

(a) 5700 किमी०

(b) 5900 किमी०

(c) 6100 किमी०

(d) 6300 किमी०

[read more] (c) 6100 किमी० [/read]

100. सियाचिन है

(a) भारत और पाकिस्तान के बीच का हिमनद सीमान्त क्षेत्र

(b) भारत और पाकिस्तान के बीच का मरुस्थलीय सीमान्त क्षेत्र

(c) भारत और चीन के बीच का सीमान्त क्षेत्र

(d) भारत और म्यान्मार के बीच का सीमान्त क्षेत्र

[read more] (a) भारत और पाकिस्तान के बीच का हिमनद सीमान्त क्षेत्र [/read]

101. सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र के ऊपर किनके मध्य झगड़ा है?

(a) भारत और पाकिस्तान

(b) भारत और चीन

(c) भारत और नेपाल

(d) चीन और नेपाल

[read more] (a) भारत और पाकिस्तान [/read]

102. सियाचिन ग्लेशियर भारत के किस राज्य में है?

(a) उत्तर प्रदेश

(b) हिमाचल प्रदेश

(c) जम्मू-कश्मीर

(d) सिक्किम

[read more] (c) जम्मू-कश्मीर [/read]

103. निम्नलिखित में से भारत की सुदूर दक्षिण भौगोलिक इकाई कौन-सी है?

(a) कन्याकुमारी

(b) रामेश्वरम

(c) लक्षद्वीप

(d) निकोबार द्वीप समूह

[read more] (d) निकोबार द्वीप समूह [/read]

104. भारत (मुख्य भूमि) का दक्षिणी नोक है-

(a) केप केमोरिन

(b) कैलीमेयर बिन्दु

(c) इन्दिरा बिन्दु

(d) त्रिवेन्द्रम में कोवलम

[read more] (a) केप केमोरिन [/read]

105. कर्क रेखा कहाँ से होकर नहीं गुजरती है?

(a) गुजरात

(b) उड़ीसा

(c) त्रिपुरा

(d) पश्चिम बंगाल

[read more] (b) उड़ीसा [/read]

106. कौन से देश पाक जलडमरूमध्य से जुड़े हुए हैं?

(a) भारत और श्रीलंका

(b) उत्तर और दक्षिण कोरिया

(c) ब्रिटेन और फ्रांस

(d) भारत और पाकिस्तान

[read more] (a) भारत और श्रीलंका [/read]

107. भारत और चीन के बीच सीमा रेखा कहलाती है-

(a) मैकमहोन रेखा

(b) डूरण्ड रेखा

(c) लाल रेखा

(d) रेडक्लिफ रेखा

[read more] (a) मैकमहोन रेखा [/read]

108. भारत और पाकिसतन के बीच की सीमा का निर्धारण किसने किया?

(a) लॉर्ड माउण्टबेटन

(b) सर कौरिल रेडक्लिफ

(c) सर स्टेफोर्ड रेडक्लिफ

(d) लौरेंस

[read more] (b) सर कौरिल रेडक्लिफ [/read]

109. निम्न में से कौन-सा राज्य भारत के वृहद प्रायद्वीपीय पठार का भाग नहीं है?

(a) महाराष्ट्र

(b) मध्य प्रदेश

(c) आन्ध्र प्रदेश

(d) पंजाब

[read more] (d) पंजाब [/read]

110. ड्ररण्ड लाइन निम्नलिखित दो देशों के बीच की सीमा रेखा है-

(a) भारत और पाकिस्तान

(b) पाकिस्तान और अफगानिस्तान

(c) भारत और चीन

(d) सं० रा० अ० और मैक्सिको

[read more] (b) पाकिस्तान और अफगानिस्तान [/read]

111. पाकिस्तान की सीमाओं से लगे भारतीय राज्य कौन-कौन से हैं?

(a) गुजरात, हि० प्र०, हरियाणा, जम्मू व कश्मीर

(b) गुजरात, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान

(c) जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब

(d) जम्मू-कश्मीर, हि० प्र०, पंजाब, राजस्थान

[read more] (b) गुजरात, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान [/read]

112. अरब सागर में स्थित भारतीय द्वीपों की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशिष्टता क्या है?

(a) वे आकार में काफी छोटे हैं।

(b) वे सभी प्रवाल उद्गम के हैं।

(c) वहाँ अति शुष्क जलवायु है।

(d) वे मुख्य भूमि के विस्तारित क्षेत्र हैं।

[read more] (b) वे सभी प्रवाल उद्गम के हैं। [/read]

113. पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश की सीमाएँ किसके साथ हैं:

(a) कर्नाटक और आंध्र प्रदेश

(b) आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु

(c) तमिलनाडु

(d) कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु

[read more] (c) तमिलनाडु

सही उत्तर है – (c) तमिलनाडु

व्याख्या:

पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश चार अलग-अलग हिस्सों- पुडुचेरी, कराइकल, माहे और यनम में बँटा हुआ है जो Map में देखा जा सकता है

  • पुडुचेरी और कराइकल – दोनों तमिलनाडु से घिरे हैं।
  • माहे – केरल के भीतर स्थित है।

  • यनम – आंध्र प्रदेश के भीतर स्थित है।

     लेकिन सीमा साझा करने की बात की जाए तो केवल मुख्य भाग (पुडुचेरी व कराइकल) की सीमाएँ तमिलनाडु से लगती हैं। अतः परीक्षा के मानक अनुसार सही उत्तर (c) माना जाता है। [/read]

19. Definition and Scope of ​​social geography (सामाजिक भूगोल की परिभाषा तथा विषय क्षेत्र)

19. Definition and Scope of ​​social geography

(सामाजिक भूगोल की परिभाषा तथा विषय क्षेत्र)



प्रश्न प्रारूप

Q. सामाजिक भूगोल को परिभाषित कीजिए तथा इसका विषय क्षेत्र बताइए।

उत्तर- सामाजिक भूगोल मानव भूगोल की महत्वपूर्ण शाखा है। मानव एक सामाजिक प्राणी है, अतः समाज में घटित होने वाली समस्त घटनाओं का अध्ययन मानव भूगोल की इस शाखा में होता है। समाज में रहकर मानव विभिन्न क्रिया-कलाप करता है। इन क्रिया-कलापों के लिए कुछ कारक भी उत्तरदायी होते हैं। समाज में पाए जाने वाले विभिन्न सामाजिक वर्गों एवं सामाजिक विभिन्नताओं में अन्तर पाया जाता है, अतः सामाजिक भूगोल में इस अन्तर के कारणों का भी अध्ययन किया जाता है।

हैरीसन के अनुसार, “सामाजिक भूगोल समाज का इसके पर्यावरण के सम्बन्ध में एक क्रमिक व्यवहार नहीं था, अपितु सामाजिक भिन्नताओं का एक उत्पत्तिजनक विवरण था क्योंकि वे अन्य कारकों से एवं पृथ्वी सतह के क्षेत्रों में भिन्नताओं से सम्बन्धित हैं।”

डेरियल फोर्ड ने इसमें आदिम समाज का वर्णन बताया है जबकि ग्रिफिथ टेलर ने इसमें विकसित समाज के सामाजिक एवं सांस्कृतिक तथ्य सम्मिलित करने पर बल दिया है।

विषय क्षेत्र-

    सामाजिक भूगोलवेत्ताओं का अध्ययन क्षेत्र केवल भाव वाचक मानव नहीं है तथा न ही जैविक मानव है, किन्तु आदमी, औरतें, बच्चे हैं जो सामाजिक समूहों के सदस्य हैं। इस प्रकार मनुष्य जाति (Mankind) को विभिन्न छोटे व्यक्तिगत समूहों में बांटा जा सकता है तथा सामाजिक भूगोल वेत्ताओं का दायित्व है कि वे उनके जीवन का अध्ययन करें।

     सामाजिक भूगोल में मानव समाज के तथ्य- आवास, विविध स्वरूप, सामाजिक तत्व व तंत्र, राजनीतिक भूगोल, पारितंत्र, विकसित व विकासशील परिवेश प्रारूप तथा उसका मानव पर प्रभाव, मानव के आचार-विचार, आदतें व अर्थतंत्र एवं सामंजस्य जैसे तत्व सम्मिलित हैं। इसमें यह अध्ययन किया जाता है कि पृथ्वी पर बसे हुए लोगों के सामाजिक वर्गों एवं सामाजिक विभिन्नताओं में अन्तर क्यों है? अर्थात् मानव समुदायों, सामाजिक संगठन, परिवार प्रणाली, श्रम विभाजन, रीति-रिवाज एवं सामाजिक प्रथाओं, समुदायों का अध्ययन इसमें किया जाता है।

प्रो. वाटसन के अनुसार यदि भूगोल पृथ्वी के नक्षत्र का विज्ञान है, या पारिस्थितिकी का विज्ञान है अथवा वस्तु वितरण का विज्ञान है तो इसके सामाजिक सामंजस्यों का अध्ययन करने के लिए ऐसी सामाजिक शक्तियों का अध्ययन करना आवश्यक होगा जिनके परिणामस्वरूप उस क्षेत्र विशेष के सामाजिक प्रतिमान उत्पन्न होते हैं। ऐसा अध्ययन करने वाला विज्ञान सामाजिक भूगोल है।

      अब व्यक्तिगत प्रोत्साहन (Individual Motivation) पर अधिक आनुभविक कार्य किया जा रहा है। उदाहरणार्थ स्थानान्तरण के सम्बन्ध में अनेक विस्तृत प्रोत्साहन अध्ययन किए जा रहे हैं जिससे यह पता चले कि प्राचीन एवं वर्तमान स्थानान्तरण में क्या सम्बन्ध है तथा परिवर्तन हुआ है। व्यवहार तथा सामाजिक भूगोल के सम्बन्ध में बहुत कम अध्ययन किया गया है। यह दृढ़ विश्वास किया जाता रहा है कि पर्यावरणीय अथवा आर्थिक क्षेत्र में सामान्यीकरण की व्याख्या को छोड़ दिया गया है।

किर्क तथा अन्य ने 1963 में स्पष्ट किया कि मानव तथ्य पर्यावरण (Phenomenal environment) के विरुद्ध व्यावहारिक पर्यावरण में निवास करते हैं तथा कार्य करते हैं। व्यवहार उन प्रत्युत्तरों एवं मूल्यों से प्रत्यक्षतः जुड़ा हुआ है जो सामाजिक रूप से प्राप्त होते हैं।

      मानव को विशिष्ट संस्कृति का सदस्य मानकर अध्ययन किया जाता है। अतः इसका विस्तृत अध्ययन सामाजिक भूगोल का क्षेत्र है। डेरियल फोर्ड ने सामाजिक भूगोल में केवल आदिम समाज का वर्णन बताया है जबकि ग्रिफिथ टेलर का विचा है कि इसमें विकसित समाज के सामाजिक एवं सांस्कृतिक तथ्य सम्मिलित किए जाने चाहिए।

     वर्तमान समय में सामाजिक भूगोल में मानव समाज की बढ़ती समस्याओं के प्रति चेतना बढ़ती जा ही है। इसी सन्दर्भ में मानव समाज के कल्याण की संकल्पना (Concept of social well being) के अन्तर्गत आने वाले समस्त मानवीय प्रयासों का अध्ययन सामाजिक भूगोल के अन्तर्गत किया जाने लगा है।

18. The Industrial regions of the world (विश्व के औद्योगिक प्रदेश)

18. The Industrial regions of the world

(विश्व के औद्योगिक प्रदेश)



प्रश्न प्रारूप

Q. What are the industrial regions of the world? Discuss the characteristics of each region.

(विश्व के औद्योगिक प्रदेश कौन-कौन हैं? प्रत्येक की विशेषताओं का वर्णन करें।)

उतर- औद्योगिक प्रदेश एक महत्त्वपूर्ण प्रदेश होता है। उसका समूचा स्वरूप ही उद्योगों पर निर्भर होता है। इस प्रकार औद्योगिक प्रदेश वह है जहाँ अधिकतर लोगों की जीविका का साधन उद्योग है। उस प्रदेश में मानव का मुख्य क्रियाकलाप उद्योगों से सम्बंधित होता है। ऐसे प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों में सम्बद्धता होती है। वह सम्पूर्ण प्रदेश उद्योगों से परिपूर्ण होता है। इन गुणों के विद्यमान रहने पर हम उसे औद्योगिक प्रदेश कह सकते हैं। इसी संदर्भ में किसी अर्थशास्त्री ने उद्योग के लिए 9 ‘M’ को महत्त्वपूर्ण माना है जो इस प्रकार है-
1. Money (मुद्रा)

2. Material (माल/सामग्री)

3. Man (मानव)

4. Market (बाजार)

5. Machinery (मशीनें)

6. Motive (शक्ति)

7. Management) (प्रबंधन)

8. Means of transport (यातायात के साधन)

9. Momentum of early start (पहले कारखाना खोलने से विकास की गति)।

      विश्व को उनकी औद्योगिक सम्बद्धता के आधार पर निम्नलिखित औद्योगिक प्रदेशों में बाँट सकते हैं-

(1) संयुक्त राज्य अमेरिका का औद्योगिक प्रदेश

(2) कनाडा औद्योगिक प्रदेश

(3) ग्रेट ब्रिटेन का औद्योगिक प्रदेश

(4) जर्मनी औद्योगिक प्रदेश

(5) सोवियत रूस औद्योगिक प्रदेश

(6) जापान का औद्योगिक प्रदेश

(7) चीन का औद्योगिक प्रदेश

(8) भारत का औद्योगिक प्रदेश

(9) आस्ट्रेलिया का औद्योगिक प्रदेश

(10) दक्षिणी अफ्रिकी गणराज्य।

(1) संयुक्त राज्य अमेरिका:-

     U.S.A. विश्व का सबसे विकसित औद्योगिक देश है। यहाँ अनेक वस्तुओं का उत्पादन होता है। अलग-अलग प्रदेशों में विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ बनती हैं। अतः यहाँ कई क्षेत्रों में औद्योगिक विकास हुआ है, जो इस प्रकार हैं-

(i) दक्षिणी न्यू इंग्लैंड प्रदेश

(ii) मध्य-अटलांटिक तटीय प्रदेश

(iii) पिट्सबर्ग-लेक एरी प्रदेश

(iv) डेट्रॉइट औद्योगिक प्रदेश

(v) महान झील औद्योगिक प्रदेश

(vi) दक्षिणी अप्लेशियन प्रदेश

(vii) पूर्वी टेक्सास प्रदेश

(viii) प्रशांत तटीय प्रदेश

(ix) राकी पर्वतीय प्रदेश

(x) मध्य न्यूयार्क क्षेत्र।

    लोहा-इस्पात उद्योग सबसे अधिक यहीं केन्द्रित है। दक्षिण-पूर्वी U.S.A में देश का 85% लोहा-इस्पात के कारखाने स्थित हैं। इसके कारण अन्य उद्योग भी यहाँ स्थापित हैं।

(2) कनाडा औद्योगिक प्रदेश:-

     उत्तरी अमेरिका में U.S.A. के बाद दूसरा सबसे विकसित औद्योगिक देश कनाडा है। यहाँ कच्चे माल की सुविधा तथा यातायात की सुगमता के कारण उद्योगों का विकास हुआ है। यहाँ के औद्योगिक प्रदेश इस प्रकार है-

(i) ओण्टोरियो औद्योगिक प्रदेश

(ii) क्यूवेक,

(iii) समुद्री प्रान्तों का प्रदेश

(iv) ब्रिटिश कोलम्बिया,

(v) प्रेयरी प्रदेश का औद्योगिक प्रदेश।

    कनाडा में भी अलग-अलग प्रदेशों में औद्योगिक पट्टियों का विकास हुआ है। ओण्टोरियो प्रदेश में भारी उद्योगों के संयंत्र स्थापित हैं। समुद्री भाग में मत्स्य उद्योग औद्योगिक प्रदेश है।

(3) ग्रेट ब्रिटेन का औद्योगिक प्रदेश:-

     ग्रेट ब्रिटेन से ही विश्व में औद्योगिक क्रान्ति शुरू हुई। कुछ ही समय में वह एक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक राष्ट्र बन गया। यहाँ के प्रमुख औद्योगिक प्रदेश इस प्रकार हैं-

(i) नार्थम्बरलैंड डरहम क्षेत्र

(ii) यार्क-डर्बी- नार्टिघमशायर प्रदेश

(iii) मिडलैंड औद्योगिक प्रदेश

(iv) साउथ वेल्स

(v) लंकाशायर

(vi) स्काटलैंड मध्यघाटी औद्योगिक प्रदेश।

       इस समय ग्रेट ब्रिटेन विभिन्न प्रकार के उद्योगों में पीछे हो गया है।

(4) जर्मनी के औद्योगिक प्रदेश:-

     जर्मनी विश्व के बड़े औद्योगिक देशों में से एक है। यहाँ भारी उद्योगों की स्थापना हुई है। यहाँ के औद्योगिक प्रदेश इस प्रकार हैं-

(i) बेस्टपफैलिया औद्योगिक प्रदेश

(ii) बवेरिया क्षेत्र

(iii) सार बेसिन क्षेत्र

(iv) सेक्सोनी क्षेत्र।

(5) सोवियत रूस के औद्योगिक प्रदेश:-

      यहाँ के बड़े भाग में उद्योगों का विकास हुआ है। इसके औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं-

(i) यूक्रेन क्षेत्र

(ii) केन्द्रीय प्रदेश

(iii) यूराल प्रदेश

(iv) लेनिनग्राड

(v) मध्य वोल्गा

(vi) कृजवास प्रदेश

(vii) ट्रांस काकेशिया

(viii) एशियाई क्षेत्र

(ix) वैकाल झील क्षेत्र

(x) सुदूर पूर्वी क्षेत्र

(xi) क्रोशिया प्रदेश।

(6) जापान का औद्योगिक प्रदेश:-

        यहाँ के औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं-

(i) टोकियो-योकोहामा क्षेत्र

(ii) नागोया क्षेत्र

(iii) कोवे ओसाका क्षेत्र

(iv) नागासाकी क्षेत्र

(v) कमैसी प्रदेश

(vi) द० होकैडो क्षेत्र।

(7) चीन का औद्योगिक प्रदेश-

      यहाँ के औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं-

(i) उत्तरी-पूर्वी चीन क्षेत्र

(ii) पेकिंग प्रदेश

(iii) शंघाई-वुहान क्षेत्र

(iv) कैण्टन।

(8) भारत के औद्योगिक प्रदेश:-

      भारत के औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं-

(i) हुगलीघाटी औद्योगिक प्रदेश

(ii) दामोदर घाटी एवं स्वर्णरेखा घाटी औद्योगिक प्रदेश

(iii) मुम्बई-अहमदाबाद क्षेत्र

(iv) दक्षिण-भारत के औद्योगिक प्रदेश

(v) गंगा-यमुना की घाटी का औद्योगिक प्रदेश।

(9) आस्ट्रेलिया का औद्योगिक प्रदेश:-

      आस्ट्रेलिया में उद्योग का विकास हो हा है। यहाँ के औद्योगिक प्रदेश ये हैं-

(i) न्यूसाउथ वेल्स का औद्योगिक प्रदेश

(ii) न्यूजीलैंड का औद्योगिक प्रदेश।

(10) दक्षिण अफ्रिका के औद्योगिक प्रदेश:-

        दक्षिण अफ्रिका गणराज्य में कच्चे माल की प्राप्ति के काण उद्योगों का विकास हुआ है।

17. The Commercial Grain Farming in the world (विश्व में व्यापारिक अन्न कृषि)

17. The Commercial Grain Farming in the world

(विश्व में व्यापारिक अन्न कृषि)



प्रश्न प्रारूप

Q. Discuss the Commercial Grain Farming in the world.

(विश्व में व्यापारिक अन्न कृषि का वर्णन करें।)

उत्तर- जिस कृषि की उपजों को स्थानीय उपभोग के लिए नहीं बल्कि बाजारों में व्यापार के लिए प्रयोग किया जाता है, उसे व्यापारिक कृषि कहते हैं। इस प्रकार की कृषि से मुद्रा की प्राप्ति होती है। अतः इसे मुद्रादायिनी फसल भी कहते हैं। बाजारों में बेचकर इससे तुरन्त धन कमाया जाता है, इसी से इसे (Cash crop) या नकदी फसल भी कहा जाता है। इस प्रकार की फसल विश्व के अनेक क्षेत्र में उपजाई जाती है।

      वास्तव में इस प्रकार की कृषि अधिक आबादी के देशों में स्थानीय उपभोग के लिए की जाती है। दक्षिणी पूर्वी एशिया के देशों में व्यापारिक खाद्यान्न कृषि व्यापार के लिए नहीं बल्कि स्थानीय उपभोग के लिए की जाती है। अतः इस क्षेत्र में गेहूँ जीवन निर्वाहण कृषि है। परन्तु U.S.A., कनाडा आदि देशों में गेहूँ का उत्पादन व्यापार के लिए होता है, अतः यहाँ यह व्यापारिक कृषि के अन्तर्गत आता है।

विस्तीर्ण व्यापारिक खाद्यान्न कृषि की विशेषताएँ:

     इस प्रकार कृषि की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:

1. आधुनिक युग की कृषि:-

    व्यापारिक खाद्यान्न कृषि वास्तव में आधुनिक युग की देन है। यह मध्य आक्षांशों के आर्द्र एवं शुष्क प्रदेशों के बीच में की जाती है। ये क्षेत्र अत्यन्त ही विरल जनसंख्या वाले हैं। इनके अधिकांश जनसंख्या यूरोपीय किस्म की है।

2. एक ही फसल के उत्पादन पर बल:-

    प्रत्येक देश में या उसके उप प्रदेश में, केवल एक ही मुख्य फसल के उत्पादन पर बल दिया जाता है। वह फसल बाजार में बिक्री के लिए उत्पन्न की जाती है। जैसे- गेहूँ। इन प्रदेशों की सर्वप्रमुख फसल गेहूँ ही है। संयुक्त राज्य अमेरिका में एक पेटी में मक्का भी बोई जाती है। गेहूँ के अलावा जौ, जई और राई का थोड़ा-थोड़ा उत्पादन देशी या स्थानीय माँग पूर्ति के लिए किया जाता है। लगभग 70% से 80% कृषि भूमि पर गेहूँ का उत्पादन होता है।

3. मानव एवं पशुओं का कम प्रयोग:-

     मानव एवं कृषि पशुओं का प्रयोग कृषि में कम होता है। अधिकतम कार्य मशीनों से होता है।

4. बड़े-बड़े कृषि फार्म:-

     कृषि फार्म बड़े-बड़े होते हैं। U.S.A. एवं अर्जेन्टाइना में 300 एकड़ से 1000 एकड़ तक कृषि फार्म होते हैं। कृषि फार्म पर ही कृषक का निवास तथा मशीनों के रखने आदि की जगह होती है।

5. फसलों में विशेषीकरण:-

     यह केबल एक फसल का विशेषीकरण होता है। इस कृषि की मुख्य फसल गेहूँ है। बड़े पैमाने पर गेहूँ का उत्पादन होता है तथा विश्व के गेहूँ का कुल निर्यात इन्हीं देशों से होता है।

6. कृषि कार्य वैज्ञानिक ढंग से:-

     कृषि का प्रत्येक कार्य वैज्ञानिक ढंग से किया जाता है। उर्वरकों का पूर्ण प्रयोग होता है।

7. मैदानी भागों में कृषि:-

      यह कृषि विशाल समतल मैदानी प्रदेशों में की जाती है।

उत्पादन-

     FAO Production year book, 2011 के अनुसार विश्व में गेहूँ का कुल उत्पादन 5190 लाख मेट्रिक टन हुआ। नीचे के तालिका में कुछ प्रमुख देशों का उत्पादन इस प्रकार रहा-

विश्व में गेहूँ का उत्पादन, 2011

देश कुल उत्पादन लाख मेट्रिक टन में विश्व के कुल उत्पादन का %
चीन 951 18.32
U.S.S.R. 835 16.9
भारत 565 10.88
U.S.A. 605 11.66
फ्रांस 401 7.23
कनाडा 364 7.01
टर्की 275 5.30
पाकिस्तान 205 3.95
ब्रिटेन 195 3.76
जर्मनी 154 2.97
ऑस्ट्रेलिया 115 2.21
अन्य देश 525 10.11
कुल विश्व 5190 100%

विश्व वितरण-

    इस प्रकार की कृषि मध्य अक्षांशों में स्थित समशीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदानों में की जाती है। इसके क्षेत्र निम्नलिखित हैं-

1. सोवियत संघ में स्टेपी घास के मैदान:-

     गेहूँ के उत्पादन में U.S.S.R. का स्थान दूसरा है। यह विश्व का 14.5% गेहूँ उत्पन्न करता है। यहाँ गेहूँ के दो क्षेत्र हैं-

(i) शीतकालीन पट्टी- उत्तरी यूक्रेन प्रदेश में

(ii) बसन्त कालीन गेहूँ पट्टी- कैस्पियन सागर एवं कालासागर के आस-पास। यहाँ उपजाऊ मिट्टी, गर्मी में वर्षा तथा मशीनों का पूर्ण प्रयोग से यहाँ कृषि की जाती है।

2. उत्तरी अमेरिका में तथा कनाडा के प्रेयरी मैदान:-

    यहाँ विश्व का लगभग 10% गेहूँ उत्पादन होता है। यहाँ बड़े पैमाने पर मशीनों द्वारा गेहूँ की व्यापारिक कृषि होती है। यहाँ गेहूँ के 4 प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

(i) बसन्तकालीन गेहूँ क्षेत्र- प्रेयरीज के उत्तरी भाग में डेकोटा, मोण्टाना और मिन्नेसोटा में।

(ii) शीतकालीन गेहूँ क्षेत्र- कन्सास ओकलाहोमा, नेबास्का, टेस्सास।

(iii) कोलम्बिया पठार गेहूँ क्षेत्र

(iv) कैलिफोर्निया गेहूँ क्षेत्र

3. दक्षिणी अमेरिका अर्जेटिना का पम्पा प्रदेश:-

    इस प्रदेश में यूरुग्वे एवं पराग्वे नदी के डेल्टा प्रदेश में पम्पा नामक घास का विस्तृत मैदान है। इसमें गेहूँ की विस्तृत खेती की है। यहाँ से गेहूँ विदेशों को निर्यात होता है।

4. दक्षिणी पूर्वी अफ्रीका में वेल्ड नामक घास के मैदान:-

     यह क्षेत्र दक्षिण अफ्रिका गणराज्य के द० पूर्वी भाग में स्थित है। यहाँ भी गेहूँ के उत्पादन के लिए लगभग सारी भौगोलिक परिस्थितियाँ उपलब्ध है। अतः यहाँ भी बड़े पैमाने प व्यापा के लिए गेहूँ की खेती की जाती है।

5. आस्ट्रेलिया में डार्लिंग डाउन्स का मैदान:-

       आस्ट्रेलिया के डाउन्स क्षेत्र में गेहूँ की काफी उपज होती है। यहाँ गेहूँ के उत्पादन के लिए समतल मैदानी भाग, उत्तम मिट्टी तथा वैज्ञानिक ढंग से कृषि की सुविधा प्राप्त है। यहाँ गेहूँ के दो क्षेत्र हैं:

(i) दक्षिणी पूर्वी भाग जो विक्टोरिया तथा न्यूसाउथ वेल्स में है,

(ii) भूमध्य सागरीय जलवायु के प्रदेश में, जो पश्चिमी आस्ट्रेलिया में स्थित है।

16. The Reserve, Production and Distribution of Petroleum in the world (विश्व में पेट्रोलियम के भंडार, उत्पादन एवं वितरण)

16. The Reserve, Production and Distribution of Petroleum in the world

(विश्व में पेट्रोलियम के भंडार, उत्पादन एवं वितरण)



प्रश्न प्रारूप

Q. Describe the reserve, production and distribution of Petroleum in the world.

(विश्व में पेट्रोलियम के भंडार, उत्पादन एवं वितरण का वर्णन करें।)

उत्तर- पेट्रोलियम एक महत्त्वपूर्ण शक्ति का साधन है। इसका स्थान शक्ति के साधनों में कोयला के बाद है। यह केवल शक्ति का साधन ही नहीं अपितु कई उद्योगों का कच्चा माल भी है। वर्तमान युग में इसका महत्त्व और भी बढ़ गया है। अतः इसकी कीमत हमेशा बढ़ रही है।

   अन्तर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार विश्व में पेट्रोलियम का कुल भण्डार 110 अरब मैट्रिक टन तेल की संचित राशि बताई गई है। इस राशि का तीन-चौथाई अर्थात् 76% भाग केवल एशिया महादेश में संचित है। इसमें दक्षिण-पश्चिम एशिया में विश्व के कुल भंडार का 66% भाग है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 10%, लैटिन अमेरिका में 8%, अफ्रिका में 3%, पूर्वी एशिया में 4% तथा शेष 9% अन्य देशों में पाया जाता है। संसार के कुछ महत्त्वपूर्ण उत्पादक देश इस प्रकार हैं-

क्रम उत्पादक देश उत्पादन प्रतिशत
1. मध्य पूर्व 54.4 %
2. संयुक्त राज्य अमेरिका 15.5 %
3. पूर्वी यूरोपीय देश 14.6 %
4. लैटिन अमेरिका 14.5 %
5. अन्य देश 10.0 %
6. कुल विश्व 100.00 %

      Statistical year book-1991, संयुक्त राष्ट्र संघ, के अनुसार विश्व के प्रमुख देशों के उत्पादन तथा भंडार दिखाए गए हैं। इन देशों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस प्रकार यह तालिका स्पष्ट करता है कि किस देश में तेल का उत्पादन तथा भंडार क्या है-

देश संचित भंडार (करोड़ टन में) विश्व के कुल भंडार का % कुल उत्पान करोड़ टन में) विश्व में कुल उत्पादन का %
सोवियत रूस 3080 2.8 61.5 23.2
संयुक्त राज्य अमेरिका 397 3.6 46.2 16.2
सऊदी अरब 2280 20.4 36.4 12.3
मेक्सिको 690 6.3 15.6 5.4
चीन 275 2.5 13.1 4.7
ईरान 780 7.1 9.8 3.7
वेनेज्वेला 105 1.00 10.6 3.4
इराक 410 3.7 8.3 3.0
कुवैत 880 8.0 7.6 2.6
इंडोनेशिया 675 6.1 7.2 2.5
संयुक्त अरब अमिरात 440 4.0 6.8 2.4
लीबिया 3.8 2.8 5.2 2.0
अन्य देश शेष  शेष  शेष  शेष
कुल विश्व 11000 100% 290.00 100%

     उपरोक्त तालिका से यह स्पष्ट होता है कि सोवियत रूप विश्व में पेट्रोलियम के उत्पादन में सबसे आगे है। केवल उत्पादन में ही नहीं अपितु संचित राशि में भी अग्रगण्य है। ऊपर से महत्त्वपूर्ण पाँच देश विश्व के पेट्रोलियम के उत्पादन के 85% भाग सोवियत रूस, U.S.A. सउदी अरब, मेक्सिको, ईरान, इराक आदि देशों से होता है। इस प्रकार ये देश तेल के उत्पादन में सर्वोपरि हैं।

1. सोवियत संघ-

     सोवियत संघ विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। उत्पादन तथा संचित भंडार दोनों दृष्टिकोणों से इसका स्थान विश्व में प्रथम है। सोवियत रूस के तीन क्षेत्रों में इसका विशेष उत्पादन होता है, जो निम्नलिखित हैं-

(i) वोल्गा-यूराल क्षेत्र- सोवियत रूस के कुल उत्पादन का 75% यहीं से होता है। इसके प्रमुख केन्द्र पर्म, उफा, कुडसेव आदि प्रमुख हैं।

(ii) बाकू क्षेत्र- इस प्रदेश को काकेशश क्षेत्र भी कहते हैं। इसके मुख्य प्रदेश बाकू, माखघकला, प्रोजनी, माइकोप, रशुका, कोसाहागिल आदि है।

(iii) अन्य क्षेत्र- इस प्रदेश में कई छोटे-छोटे तेल क्षेत्र आते हैं। इनमें एम्बा, तुर्कमेनिस्तान, कुंभदाग, चेलेकिन, पेचोरा, फरगन, साईबेरिया, सखालिन आदि सम्मिलित हैं।

2. संयुक्त राज्य अमेरिका-

    यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। यहाँ 4 लाख से अधिक तेल के कुएँ हैं। यह विश्व का सबसे अधिक तेल की खपत करता है। यहाँ के प्रमुख तेल क्षेत्र निम्न हैं-

(i) अप्लेशियन क्षेत्र।

(ii) लीमा-इडियाना क्षेत्र।

(iii) मध्यवर्ती क्षेत्र।

(iv) खाड़ी क्षेत्र।

(v) कैलिफोर्निया क्षेत्र।

3. सऊदी अरब-

    यह देश संचित राशि की दृष्टि से दूसरा तथा उत्पादन की दृष्टि से विश्व का तीसरा बड़ा देश है। यहाँ का तेल भंडार विश्व का 20% तथा उत्पादन 12-3% है। यहाँ तेल का क्षेत्र 3 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहाँ का प्रमुख तेल क्षेत्र धावर, अवकेक, ऐनदार, शेदगम, हरद, दम्मान, सफानियाँ कार्डिक, अबूसफा, फथीली आदि हैं। यहाँ से तेल रास तनुरा तेलशोधक कारखाने में भेजा जाता है। यहाँ से कच्चा तेल साफ होने के लिए भूमध्यसागर के तट पर हैको को भी भेजा जाता है। यह विश्व का बड़ा तेल उत्पादक देश बन सकता है।

4. ईरान-

    ईरान में कुल तेल का भंडार 65 अरब टन है। यह पूरे विश्व के भंडार का 7.8 प्रतिशत है। ईरान का वार्षिक तेल उत्पादन 30 अरब टन है। इसके मुख्य तेल कूप अजागरी, मस्जिदे सुलेमान, हफ्तेकेल, खानक्वीन, नफ्त खनाह, लाली, गुलखरी, बीबी हाकीमेह, करंज आदि हैं।

5. इराक-

    इसका भंडार 4.7 अरब टन तथा उत्पादन 10 करोड़ टन है। किरकुक तथा बसरा दो बड़े तेल क्षेत्र हैं। इसके अन्य तेल कूप नफ्तखनाह, वुटमाह तथा मइला है। यहाँ से तेल तेल पाइप द्वारा त्रिपोली तथा बनियास को भेजा जाता है।

6. कुवैत-

    इस छोटे देश के पास विश्व का 10% तेल का भंडार है। यहाँ का सबसे बड़ा तेल प्रदेश बुरधान का पहाड़ी-प्रदेश है। इसका वार्षिक उत्पादन 9 करोड़ टन है। यहाँ लगभग 105 तेल कूप हैं।

7. मध्यपूर्व के अन्य क्षेत्र-

    यहाँ के अन्य तेल उत्पादक देश संयुक्त अब अमिरात, ओमान, कतार आदि हैं। इन सभी देशों में प्रत्येक का उत्पादन एक करोड़ टन वार्षिक से अधिक है।

8. वेनेज्वेला-

     दक्षिणी अमेरिका में यह देश काफी महत्त्वपूर्ण है। कैरेबियन सागर के दक्षिण में यह क्षेत्र में स्थित है। यहाँ के तीन क्षेत्रों के उत्पादन होता है। यह इस प्रकार हैं-

(i) माराकैवो बेसिन

(ii) ओरिनिको बेसिन

(iii) आपुरो बेसिन।

      इस देश का वार्षिक उत्पादन 10 करोड़ टन है। यहाँ के कुल उत्पादन का 90% भाग निर्यात कर दिया जाता है।

9. भारत- भात का अभी कुल उत्पादन 5 करोड़ टन हो गया है। यहाँ भी तीन क्षेत्रों में उत्पादन होता है-

(i) असम क्षेत्र में डिगबोई।

(ii) गुजरात-अंकलेश्व क्षेत्र।

(iii) मुम्बई उच्च प्रदेश।

10. अन्य क्षेत्र- इनके अलावे एशिया में बर्मा, चीन, दक्षिणी अफ्रिका, अल्जिरिया, इन्डोनेशिया आदि से तेल का उत्पाद होता है।

19. The Chief characteristics and distribution of Plantation agriculture in the world (विश्व में बागानी या रोपण कृषि की मुख्य विशेषताएँ तथा वितरण)

19. The Chief characteristics and distribution of Plantation agriculture in the world

(विश्व में बागानी या रोपण कृषि की मुख्य विशेषताएँ तथा वितरण)



प्रश्न प्ररूप

Q. Discuss the chief characteristics and distribution of Plantation agriculture in the world.

(विश्व में बागानी या रोपण कृषि की मुख्य विशेषताओं तथा वितरण का वर्णन करें।)

उत्तर- बगानी या बगाती या रोपण कृषि, कृषि का एक विशिष्टीकृत रूप है जो मुख्य रूप से उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में ही की जाती है। इस प्रकार की कृषि में कोई एक ही फसल उत्पन्न की जाती है। यह फसल भी मुख्य रूप से बाजारों में बिक्री के लिए की जाती है। इन फसलों में रबड़, चाय, कहवा, गन्ना, केला, नारियल आदि प्रमुख हैं। इस प्रकार की कृषि को एक फसली (One-crop Mono-Culture) की खेती कहते हैं। कुछ विद्वान गन्ने को भी बगानी फसल मानते हैं किन्तु वास्तव में गन्ना बगानी फसल नहीं है।

बगानी कृषि के क्षेत्र-

(i) पश्चिमी द्वीप समूह में क्यूबा, जमाइका, पोर्टिरिको, आदि

(ii) मध्य अमेरिका में होण्डुरस, ग्वाटेमाला त्तथा कोस्टारिका

(iii) पश्चिमी अफ्रिका के गिनीतट, घाना आदि।

(iv) दक्षिण अफ्रिका में नेटाल आदि

(व) दक्षिणी एशिया में द० भारत, श्रीलंका, मलेशिया, इन्डोनेशिया आदि।

(vi) आस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड क्षेत्र।

       इस प्रकार की रोपण (Plantation) कृषि में मुख्य रूप से यूरोपीय लोगों की पूँजी तथा प्रबंध क्षमता लगी हुई है। इस प्रकार की कृषि में मूल निवासी लोग श्रमिकों का काम करते हैं। इस प्रकार की कृषि प्रणाली में फसलों के उत्पादन में बहुत से प्रक्रम (Processes) ऐसे होते हैं जिनके लिए बड़ी सावधानी की आवश्यकता होती है। इस कृषि की विधियाँ बहुत ही दक्षतापूर्ण और वैज्ञानिक होती हैं। इसकी फसलों के लिए वैज्ञानिक प्रणाली तथा सावधानी बरती जाती है। इसके पौधे काफी नाजुक होते हैं।

     रोपण (Plantation) कृषि में उन फसलों का उत्पादन होता है जिसके पदार्थों के माँग पिछले दो शताब्दियों में नगरीय संस्कृति के विकास के साथ-साथ बढ़ती गई है। आज की वर्तमान आधुनिक दुनिया में पेय पदार्थों का महत्व बहुत बढ़ गया है। इनमें चाय, कॉफी, कोको काफी लोकप्रिय हो गए हैं। विश्व के उन्नत देशों में इन पदार्थों की काफी माँग है।

रोपण कृषि की विशेषताएँ-

     रोपण कृषि की कुछ मूलभूत विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

(i) यह एक फसली (Mono culture) कृषि है। इसमें एक ही फसल के उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

(ii) इसमें अधिक पूँजी, उच्च प्रबंध और वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है।

(iii) इसकी फसलें केवल बिक्री द्वारा मुद्रा प्राप्त करने के लिए उत्पन्न की जाती है।

(iv) अधिकतर उत्पादन व्यापार के लिए होता है। स्थानीय क्षेत्रों में इसका उपभोग बहुत ही, कम होता है।

(v) इसके अन्तर्गत खेत (Holdings) बहुत विस्तृत तथा खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।

(vi) इसमें मानव श्रम की अधिक आवश्यकता पड़ती है।

(vii) इस कृषि पर बाजार-माँग की घट-बढ़ का और मूल्य में उतार-चढ़ाव का गहरा प्रभाव पड़ता है।

(viii) इस प्रकार की कृषि के लिए भारी पूँजी की आवश्यकता होती है क्योंकि रख-रखावों,, प्रक्रिया तथा यातायात में काफी खर्च पड़ता है।

(ix) इस कृषि की फसलों में बीमारी लगने का काफी भय रहता है। अतः फसल के खराब होने से बहुत हानि होती है।

(x) इस कृषि का बाजार सम्पूर्ण विश्व के नगरों में फैला हुआ है। अतः ग्रह फसल नगरीय सभ्यता तथा संस्कृति का द्योतक है।

(xi) यह एक महत्त्वपूर्ण मुद्रादायिणी फसल है।

     इस प्रकार की फसलों का उत्पादन प्रायः विकासशील या अविकसित क्षेत्रों में होता है। जैसे दक्षिणी अमेरिका, मध्य अफ्रिका, तथा दक्षिणी एशिया के अधिकतर देश या तो विकासशील हैं या अविकसित हैं, परन्तु इसका बाजार अधिकतर विकसित देशों के महानगरों में से है।

      इसका मुख्य खरीददार U.S.A., कनाडा तथा यूरोपीय महादेश के देश हैं। आस्ट्रेलिया भी इसका अच्छा बाजार है। इस प्रकार इसका उत्पादन उष्ण कटिबंधीय देशों में तथा इनकी बिक्री समशीतोष्ण तथा शीत प्रदेशों में है। उदाहरणस्वरूप विश्व में चाय का सबसे बड़ा निर्यातक भारत, श्रीलंका है। कॉफी का सबसे बड़ा निर्यातक ब्राजील है। परन्तु सबसे बड़ा आयातक U.S.A. तथा यूरोप के देश हैं।

विश्व में बगानी कृषि की फसलें तथा उनके क्षेत्र-

(1) रबड़- मौनसून एशिया में मलेशिया, इन्डोनेशिया, थाइलैंड, श्रीलंका, भारत, हिन्दचीन के देश- सिंगापुर, फिलीपीन, अफ्रिका- गिनी तट के देश घाना, नाइजीरिया, आइवरी कोस्ट आदि तया दक्षिणी अमेरिका में ब्राजील। 

(2) चाय- मौनसून एशिया में चीन, भारत, श्रीलंका, जापान, बंगलादेश, इन्डोनेशिया, मलेशिया आदि पश्चिमी एशिया में ईरान, दक्षिणी रूस आदि, अफ्रिका में केन्या, जायरे, जाम्बिया, तंजानियाँ आदि दक्षिणी अमेरिका में अर्जेन्टिना तथा ब्राजील।

(3) नारियल- दक्षिणी-पूर्वी एशिया के देश- इन देशों के समुद्र तटीय प्रदेश, भूमध्यरेखीय अफ्रिका तथा दक्षिणी अमेरिका के तटीय प्रदेश।

(4) कहवा- दक्षिणी अमेरिका में ब्राजील, कोलम्बिया, इक्वेडोर, वेनेज्वेला तथा पेरू, अफ्रिका में गिनी तट के देश-आइवरी कोस्ट, घाना, अंगोला, उगाण्डा, एथियोपिया, जैसे आदि तथा मौनसून एशिया में भारत, हिन्दचीन आदि।

(5) केला- मौनसून एशिया में भारत, फिलीपिन, हिन्देशिया, मलेशिया, सिंगापुर और अफ्रिका तथा दक्षिणी अमेरिका के भूमध्यरेखीय प्रदेश शामिल है।

(6) मसालें- मौनसून एशिया में भारत, श्रीलंका, मलेशिया तथा तंजानियाँ आदि। तंजानियाँ में जंजीवार द्वीप लौंग के उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

(7) कोको- इसका सबसे बड़ा उत्पादक अफ्रिका महादेश है। इसमें अप वोल्टा, घाना, नाजीरिया आदि हैं। कोको का कुछ उत्पादन दक्षिणी अमेरिका के ब्राजील में भी होता है।

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