16. Arid Topography / पवन द्वारा निर्मित स्थलाकृति/शुष्क स्थलाकृति
16. Arid Topography
(पवन द्वारा निर्मित स्थलाकृति/शुष्क स्थलाकृति)
पवन द्वारा निर्मित स्थलाकृति/शुष्क स्थलाकृति⇒ वैसे भौगोलिक क्षेत्र जहाँ वार्षिक वर्षा 50 सेमी० से कम होती है, उसे शुष्क प्रदेश या मरुस्थलीय प्रदेश कहते हैं। जैसे- सहारा, कालाहारी, पश्चिम आस्ट्रेलिया, मध्य एशिया, गोबी, थार, सोनोरान, अटाकामा, पेटागोनिया मरुस्थल इत्यादि।
डेविस के अनुसार किसी भी भौगोलिक प्रदेश में दिखाई देने वाले विशिष्ट स्थलाकृतियों के समूह को भूदृश्य / भूआकृति या भ्वाकृतिक कहते हैं। भ्वाकृतियों या स्थलाकृतियों के विकास पर प्रक्रम का प्रभाव पड़ता है। प्रक्रम का तात्पर्य अपरदन के दूतों से है। शुष्क प्रदेश में अपरदन के दो प्रमुख प्रक्रम सक्रिय रहते हैं। जैसे:
(1) शुष्क वायु
(2) बहता हुआ जल (आकस्मिक वर्षा)
ये दोनों प्रक्रम शुष्क प्रदेशों में अपरदन, परिवहन एवं निक्षेपण का कार्य करते रहते हैं।
अपरदन – शुष्क वायु अपरदन की क्रिया तीन प्रकार से करती है-
(i) अपवाहन (Deflation)- अपवाहन क्रिया में वायु चट्टान-चूर्ण उड़ाकर अपरदन का कार्य करती है।
(ii) अपघर्षण(Abrasion)- तीव्र वेग से वायु के साथ उड़ते हुए रेत व धूलकण मार्गवर्ती शैलों को रगड़ते एवं घिसते हैं।
(iii) सन्निघर्षण (Attrition)- वायु के साथ उड़ते हुए धूल व रेत कण परस्पर टकराकर चूर-चूर हो जाते हैं।
शुष्क वायु अपरदन को प्रभावित करने वाले कारक:-
(i) वायु की गति
(ii) वायु में रेत व धूलकणों की मात्रा
(iii) शैलों की संरचना
(iv) जलवायु
परिवहन- जब वायु अपरदन किए हुए चट्टान-चूर्ण को अपने साथ लेकर प्रवाहित होती है तो उसे परिवहन कहते हैं।
निक्षेपण- जब चट्टान-चूर्ण के साथ उड़ते हुए वायु के मार्ग में कोई अवरोधक मिलता है तो उसकी वहन क्षमता कम जाती है और चट्टान-चूर्ण का जमा होने लगता है, जिसे निक्षेपण कहते हैं।
शुष्क वायु द्वारा निर्मित अपरदित स्थलाकृति
1. वात गर्त/अपवाहन बेसिन
2. ज्यूगेन
3. यारडांग
4. गारा
5. छत्रक शिला
6. भूस्तंभ
7. मरुस्थलीय खिड़की
8. मरुस्थलीय पूल या मेहराव
9. ड्राई कान्टर
10. मरुस्थलीय बेसिन/अपवाह बेसिन
11. पेडीप्लेन एवं इंसेलवर्ग
निक्षेपित स्थलाकृति
1. बालुका स्तूप
(i) बरखान
(ii) सीफ
2. उर्मिल मैदान
3. लोएस मैदान
आकस्मिक व भारी वर्षा से निर्मित स्थलाकृति
1. जलोढ़ पंख
2. जलोढ़ शंकु
3. बाजदा
4. बालसन
5. प्लाया
6. सेलीनॉस
7. पेडीमेंट/पेडीप्लेन
8.अंत: प्रवाही नदी
अपरदित स्थलाकृति
1. ज्यूगेन:-
जब शुष्क प्रदेश में कठोर एवं मुलायम चट्टान क्षैतिज एवं वैकल्पिक रूप में पायी जाती है। यदि सतह पर कठोर चट्टान हो तो तापीय प्रभाव से उसमें दरारें पड़ जाती है। उन दरारों के माध्यम से वायु प्रविष्ट कर मुलायम चट्टानों के अपरदन प्रारम्भ कर देती है, जिससे दवातनुमा स्थलाकृति बनती है, उसे ज्यूगेन कहते है।
जैसे – USA के कोलरेडो, दक्षिण कैलिफोर्निया क्षेत्र में।











निष्कर्ष:- उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि मरुस्थलीय अथवा शुष्क प्रदेशों में शुष्क वायु, आकस्मिक भारी वर्षा के द्वारा कई विशिष्ट अपरदित एवं निक्षेपित स्थलाकृतियों का निर्माण होता है।

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