Archives December 2022

Indian Geography Capsule 3

भारत का भूगोल

Indian Geography Capsule 3


Indian Geography Capsule 3

एक नजर में इन्हें जरुर देखें

1.  नासिक एवं मुंबई के बीच का संपर्क मार्ग किस दर्रे से होकर गुजरती है-

उत्तर- थाल घाट

2. मुंबई एवं पुणे के बीच का संपर्क मार्ग किस दर्रे से होकर गुजरती है-

उत्तर – भोर घाट

3. कोयंबटूर एवं कोचीन के बीच का संपर्क मार्ग किस दर्रे से होकर गुजरती है-

उत्तर – पाल घाट

4. तिरुअनंतपुरम एवं मदुरै के बीच का संपर्क मार्ग किस दर्रे से होकर गुजरती है-

उत्तर – शेनकोटा

5. दक्कन का पठार किस राज्य में स्थित है-

उत्तर – महाराष्ट्र

6. दक्कन पठार का पूर्वी भाग किस नाम से जाना जाता है-

उत्तर – विदर्भ

7. धारवाड़ का पठार किस राज्य में स्थित है-

उत्तर – कर्नाटक

8. बाबाबुदन की पहाड़ी किस राज्य में स्थित है-

उत्तर – कर्नाटक

9. नीलगिरी का पहाड़ी किस राज्य में स्थित है-

उत्तर – तमिलनाडु

10. दक्षिण भारत की दूसरी सबसे ऊँची छोटी है-

उत्तर – डोडाबेट्टा (2637 मीटर)

11. तमिलनाडु में स्थित उटकमंड किस पहाड़ी पर स्थित है-

उत्तर – नीलगिरी

12. प्रसिद्ध पर्यटक स्थल कोडाईकनाल किस पहाड़ी पर स्थित है-

उत्तर – पालनी की पहाड़ी

13. आंध्रप्रदेश और उड़ीसा के तटीय भागों में स्थित पहाड़ी है-

उत्तर – महेन्द्रगिरि

14. कन्याकुमारी से कृष्णा डेल्टा तक का तट कहलाता है-

उत्तर- कोरोमण्डल तट

15. कृष्णा नदी से गोदावरी डेल्टा तक का तट कहलाता है-

उत्तर- गोलकुण्डा तट

16. गोदावरी डेल्टा से लेकर उत्तरी तटीय भाग कहलाता है-

उत्तर- उतरी सरकार तट

17. पारादीप बंदरगाह किस राज्य में स्थित है-

उत्तर – ओडिशा

18. विशाखापतनम किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- आंध्रप्रदेश

19. तूतीकोरिन और एन्नौर किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- तमिलनाडु

20. विशाखापत्तनम बंदरगाह किस पहाड़ी के पीछे स्थित है-

उत्तर- डॉल्फिन नोज पहाड़ी

21. गुजरात से गोवा तक का पश्चिमी तटीय क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- कोंकण तट

22. गोवा से कर्नाटक के मंगलुरु तक का पश्चिमी तटीय क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- केनरा तट

23. मंगलुरु से कन्याकुमारी तक का पश्चिमी तटीय क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- मालाबार तट

24. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह स्थित है-

उत्तर- बंगाल की खाड़ी में

25. क्षेत्रफल की दृष्टिकोण से सबसे बड़ा केंद्रशासित प्रदेश है-

उत्तर- अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (247 द्वीप)

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अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का दृश्य

26. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का सबसे उत्तरी द्वीप है-

उत्तर- लैंडफॉल द्वीप

27. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह म्यांमार के कोको द्वीप से अलग होती है-

उत्तर- कोको जलमार्ग से

28. न्यू मूर नामक नदी द्वीप स्थित है-

उत्तर- बंगाल की खाड़ी में

29. अंडमान निकोबार द्वीप समूह की सबसे ऊँची पर्वत छोटी है-

उत्तर- सैंडल पीक (730 मीटर)

30. केंद्रशासित प्रदेश का सबसे बड़ा बंदरगाह है-

उत्तर- पोर्ट ब्लेयर (दक्षिणी अंडमान में)

31. नेल्लोर के निकट प्रवाल भित्ति निर्मित द्वीप है-

उत्तर- श्री हरिकोटा

32. लक्षद्वीप द्वीप समूह स्थित है-

उत्तर- अरब सागर में

33. लक्षद्वीप में स्थित कुल द्वीप है-

उत्तर- 36

34. पम्बन द्वीप स्थित है-

उत्तर- मन्नार की खाड़ी में

35. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थित दो प्रसिद्ध ज्वालामुखी द्वीप है-

उत्तर- बैरन तथा नारकोंडा

36. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थित सक्रिय ज्वालामुखी है-

उत्तर- बैरन

37. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थित सुषुप्त ज्वालामुखी है-

उत्तर- नारकोंडम

38. इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप और ग्रेट निकोबार द्वीप को पृथक करती है-

उत्तर- ग्रेट चैनल

39. लक्षद्वीप को मालद्वीप से अलग करता है-

उत्तर- 8° चैनल

40. द्वीपों पर अधिकता होती है-

उत्तर- नारियल की वृक्षों की

41. अंडमान और निकोबार अलग होता है-

उत्तर- 10° चैनल

42. मिनिकॉय द्वीप स्थित है-

उत्तर- लक्षद्वीप के सबसे दक्षिणी भाग में

43.  मिनिकॉय द्वीप को शेष उत्तरी द्वीपों से अलग करती है-

उत्तर- 9° चैनल

44. दक्षिण में इलायची पर्वत और नीलगिरि पर्वत अलग होता है-

उत्तर- पाल घाट दर्रा द्वारा

45. इलायची की पहाड़ी स्थित है-

उत्तर- केरल में

46. लक्षद्वीप का सबसे बड़ा द्वीप है-

उत्तर- मिनिकॉय/आण्ड्रेट

47. माउंट एवरेस्ट को नेपाल में कहा जाता है-

उत्तर- सागमाथा

48. माउंट एवरेस्ट को चीन में कहा जाता है-

उत्तर- क्योमोलांग

49. भारत का एक मात्र सक्रिय ज्वालामुखी है-

उत्तर- बैरन

50. आरावली पर्वत की सबसे ऊँची चोटी है-

उत्तर- गुरु शिखर (1722 मीटर, माउण्ट आबू पर स्थित)


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Indian Geography Capsule 15

Indian Geography Capsule 16

नोट :  मैं आशा करता हूँ कि भारत का भूगोल से सम्बंधित सभी Capsule आपके परीक्षा के लिए नींव का पत्थर साबित होंगे। अगर किसी भी प्रश्न के उत्तर को लेकर आपके मन में कोई संदेह हो तो हमसे Contact With us के माध्यम से, Comment या Email से Contact कर सकते है। मैं हमेशा आपके मंगल भविष्य की कामनाता हूँ।

Thank You @ By Dr. Amar Kumar


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भूगोल- सामान्य भूगोल और भारत का भूगोल

इतिहास

राजनीतिशास्त्र

अर्थशास्त्र

जीवविज्ञान

भौतिकशास्त्र

रसायनशास्त्र

Indian Geography Capsule 2

   भारत का भूगोल 

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Indian Geography Capsule 2

एक नजर में इन्हें जरुर देखें

1. किस दर्रे के पास ब्रह्मपुत्र नदी भारत में प्रवेश करती है-

उत्तर- यांग्याप दर्रे

2. जोजिला दर्रा का निर्माण किस नदी द्वारा हुआ है-

उत्तर- सिंधु नदी

3. शिपकिला दर्रा का निर्माण किस नदी द्वारा हुआ है-

उत्तर- सतलज नदी

4. जेलेपला दर्रा का निर्माण किस नदी द्वारा हुआ है-

उत्तर- तीस्ता नदी

5. भारत का सबसे ऊंचा दर्रा कौन सा है-

उत्तर- काराकोरम दर्रा (5624मीटर)

6. श्रीनगर से गिरगिट को जोड़ती है-

उत्तर- बुर्जिल दर्रा

7. शिमला से तिब्बत को जोड़ता है-

उत्तर- शिपकीला दर्रा

8. जवाहर सुरंग किस दर्रे में स्थित है-

उत्तर- बनिहाल दर्रा

9. बृहद हिमालय लघु हिमालय से अलग होती है-

उत्तर- मेन सेंट्रल थ्रस्ट द्वारा

10. लघु हिमालय शिवालिक से अलग होती है-

उत्तर- मेन बाउंड्री फॉल्ट द्वारा

11. हिमालय की सबसे नवीनतम भाग है-

उत्तर- शिवालिक

12. शिवालिक के निचले भाग को कहते है-

उत्तर- तराई

13. अरावली की पहाड़ियाँ किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- राजस्थान

14. अरावली की सबसे ऊँची चोटी है-

उत्तर- गुरुशिखर (1722 मीटर)

15. अरावली की पश्चिम से निकलने वाली नदी है-

उत्तर- माही और लूनी

16. अरावली के पूर्वी ओर से निकलने वाली नदी है-

उत्तर- बनास नदी

17. कच्छ के रण में गायब होने वाली नदी है-

उत्तर- लूनी

18. चम्बल और बेतबा नदी की उत्पत्ति होती है-

उत्तर- मालवा का पठार से

19. मालवा का पठार निर्मित है-

उत्तर- ज्वालामुखीय चट्टानों से

20. उत्तर भारत को दक्षिण भारत से अलग करता है-

उत्तर- विंध्याचल पर्वतमाला

21. विंध्याचल पठार का विस्तार किन-किन राज्यों में है-

उत्तर- झारखंड, छतीसगढ़ तथा उत्तर प्रदेश

22. मैकाल पठार किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- छतीसगढ़

23. मैकाल पहाड़ी का सर्वोच्च शिखर है-

उत्तर- अमरकंटक (1036 मीटर)

24. अमरकंटक की पश्चिमी ओर से कौन सी नदी निकलती है-

उत्तर- नर्मदा नदी
Indian Geography Capsule 2
25. अमरकंटक की उत्तर की ओर से कौन सी नदी निकलती है-

उत्तर- सोन नदी

26. अमरकंटक की दक्षिण की ओर से कौन सी नदी निकलती है-

उत्तर- महानदी

27. भारत का रूर किसे कहा जाता है-

उत्तर- छोटानागपुर के पठार

नोट: रूर का मतलब खनिज भंडार की दृष्टि से सबसे सम्पन्न

28. छोटानागपुर स्थित राँची का पठार है-

उत्तर- समप्राय मैदान

29. सतपुड़ा की पहाड़ियाँ किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- मध्यप्रदेश

30. सतपुड़ा की सबसे ऊंची छोटी है-

उत्तर- धूपगढ़ी (1350 मीटर)

31. सतपुड़ा की पूर्वी हिस्से से कौन सी नदी निकलती है-

उत्तर- ताप्ती नदी

32. पश्चिमी घाट पर्वत को किस नाम से जाना जाता है-

उत्तर- सह्याद्रि

33. पश्चिमी घाट पर्वत का विस्तार है-

उत्तर- ताप्ती नदी के मुहाने से कन्याकुमारी अंतरीप तक

34. पश्चिमी घाट पर्वत की कुल लंबाई है-

उत्तर- लगभग 1600 मीटर

35. पश्चिमी घाट पर्वत की औसत ऊंचाई है-

उत्तर- 1200 मीटर

36. पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट तथा दक्षिणी पहाड़ियों का मिलान स्थल है-

उत्तर- नीलगिरी

37. छोटानागपुर पठार की सबसे ऊँची चोटी है-

उत्तर- पारसनाथ (गिरिडीह जिला में)

38. दक्षिण में इलायची पर्वत और नीलगिरी पर्वत अलग होती है-

उत्तर- पालघाट दर्रा द्वारा

39. इलायची पहाड़ी स्थित है-

उत्तर- केरल में

40. भारत मे अरावली पर्वत और सतपुड़ा पर्वत उदाहरण है-

उत्तर- अवशिष्ट पर्वत का

41. हिमालय, रॉकी, आल्प्स एवं एंडीज पर्वत उदाहरण है-

उत्तर- वलित पर्वत का

42. हिमाचल प्रदेश और तिब्बत को जोड़ता है-

उत्तर- शिपकिला दर्रा

43. जम्मू और हिमाचल प्रदेश को जोड़ता है-

उत्तर- बाड़ालाचा ला दर्रा

44. सिक्किम और तिब्बत को जोड़ता है-

उत्तर- नाथूला और जेलेपला दर्रा

45. सह्याद्रि पर्वत स्थित है-

उत्तर- महाराष्ट्र में

46. अंडमान और निकोबार की सर्वोच्च बिंदु है-

उत्तर- सैडल पीक

47. पाक अधिकृत  कश्मीर और श्रीनगर को जोड़ता है-

उत्तर- बुर्जिल दर्रा

48. श्रीनगर को लेह से जोड़ता है-

उत्तर- जोजिला दर्रा

49. नीलगिरी की सबसे ऊँची चोटी है-

उत्तर- दोदाबेटा (2637 मीटर)

50. दक्षिण भारत की सर्वोच्च शिखर है-

उत्त – अनाईमुडी (2695 मीटर)

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नोट :  मैं आशा करता हूँ कि भारत का भूगोल से सम्बंधित सभी Capsule आपके परीक्षा के लिए नींव का पत्थर साबित होंगे। अगर किसी भी प्रश्न के उत्तर को लेकर आपके मन में कोई संदेह हो तो हमसे Contact With us के माध्यम से, Comment या Email से Contact कर सकते है। मैं हमेशा आपके मंगल भविष्य की कामनाता हूँ।

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भूगोल- सामान्य भूगोल और भारत का भूगोल

इतिहास

राजनीतिशास्त्र

अर्थशास्त्र

जीवविज्ञान

भौतिकशास्त्र

रसायनशास्त्र

 15. Trend and Problems of Urbanization / नगरीकरण की प्रवृति एवं समस्याएँ

 15. Trend and Problems of Urbanization 

(नगरीकरण की प्रवृति एवं समस्याएँ)



Q. नगरीकरण से आप क्या समझते है? नगरीकरण से संबंधित समस्याओं की चर्चा करें। 

Trend and Problems of Urbanization 

        नगरीकरण एक प्रक्रिया है जिसके तहत कोई भी ग्रामीण बस्ती धीरे-2 नगरीय बस्ती में बदलती हैं। दूसरे शब्दों में वह कोई भी अधिवासीय बस्ती जहाँ की जनसंख्या प्राथमिक कार्यों को छोड़ती है और लगातार द्वितीयक एवं तृतीयक गतिविधियों में संलग्न होने लगती है तो इस प्रक्रिया को भी नगरीकरण से संबोधित करने लगते हैं। कुछ भूगोलवेताओं का यह भी कहना है कि “नगरों के बढ़ रहे आकार या बढ़ रहे नगरीय जनसंख्या को भी नगरीकरण कहा जाता है। वर्तमान समय में यही परिभाषा सर्वाधिक मान्यता रखता है।

         21वीं शताब्दी को नगरीकरण की शताब्दी कहा जाता है क्योंकि आज विश्व की आधी से अधिक जनसंख्या नगरों में निवास कर रही है। इस संदर्भ में विश्व की करीब 57% जनसंख्या नगरों में रहती है।

      वैश्विक स्तर पर नगरीकरण की औसत वार्षिक वृद्धि दर लगभग 1.5-2% मानी जाती है जो नगरीय विस्फोट का प्रतीक है। विकसित देशों में नगरीकरण की प्रक्रिया लगभग शिथिल है। जबकि विकासशील देशों में नगरीकरण की प्रक्रिया दर तीव्र है।

विश्व में नगरीकरण की वर्तमान प्रवृत्ति

1. तीव्र शहरी वृद्धि:-

  • संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट (World Urbanization Prospects, 2022) के अनुसार, वर्तमान में विश्व की लगभग 57% जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में निवास करती है।
  • अनुमान है कि 2050 तक यह संख्या 68% से अधिक हो जाएगी।

2. विकसित देशों में संतृप्ति:-

  • यूरोप, उत्तर अमेरिका और जापान जैसे देशों में नगरीकरण का स्तर पहले से ही 75-85% तक पहुँच चुका है।
  • यहाँ नगरीकरण स्थिर है, लेकिन शहरी जीवन-शैली में तकनीकी व सांस्कृतिक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं।

3. विकासशील देशों में तीव्र नगरीकरण:-

  • एशिया और अफ्रीका में नगरीकरण की गति अत्यधिक तेज है।
  • भारत, चीन, नाइजीरिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में प्रतिवर्ष करोड़ों लोग गाँवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
  • 2050 तक केवल भारत और नाइजीरिया मिलकर विश्व की शहरी जनसंख्या वृद्धि का लगभग 35% योगदान देंगे।

4. मेगासिटीज़ का उभार:-

  • विश्व में 10 मिलियन (एक करोड़) से अधिक जनसंख्या वाले नगरों की संख्या 2022 में लगभग 33 थी, जो 2035 तक 45 से अधिक हो जाएगी।
  • टोक्यो, दिल्ली, शंघाई, साओ पाउलो, मेक्सिको सिटी जैसे नगर इस श्रेणी में आते हैं।

5. प्रवास (Migration) की भूमिका:-

  • ग्रामीण-शहरी पलायन नगरीकरण का मुख्य आधार है।
  • आर्थिक अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य व जीवन-स्तर की बेहतर संभावनाएँ लोगों को शहरों की ओर आकर्षित करती हैं।

      इस प्रकार नगरीकरण की वर्तमान प्रवृति को विकसित और विकासशील देशों के संदर्भ में देखा जा सकता है। विकसित देशों में नगरीकरण की प्रवृति भले ही धीमी हैं लेकिन विकसित देशों की अधिकांश जनसंख्या नगरों में ही निवास करती है। इस प्रवृति से विकसित देशों में कई समस्याएँ उत्पन्न हुआ है। दूसरी ओर विकासशील देशों में तीव्र नरीकरण की प्रकृति के कारण गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही है। विकासशील देशों में नगरीकरण की एक यह भी प्रवृत्ति है कि देश की राजधानी नगर और बड़े-2 महानगरों की जनसंख्या बढ़ रही है। लेकिन छोटे नगरों की जनसंख्या यथावत है।

         विकसित और विकासशील दोनों ही प्रदेशों में इस प्रवृति का विकास हुआ है कि अधिक से अधिक लोग राजधानी या बड़े नगर में निवास करना चाहते हैं क्योंकि इन नगरों में बसने वाले लोगों का यह मानना है कि राजधानी नगर और महानगर में किसी-न-किसी प्रकार का रोजगार मिल ही जाता है। यह अवधारणा आमतौर पर विकासशील देशों में प्रचलित है। दूसरी ओर विकसित देशों में अधिक सुरक्षा, अधिक सार्वजनिक सुविधाएँ और अधिक रोजगार क कारण इन नगरों में निवास करना चाहती है।

        राजधानी एवं महानगरों की बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण मेट्रोपोलिटन नगर के स्थान पर मेगासिटी का विकास होने लगा है। अगर भारत को ही लिया जाय तो पाते हैं कि 1991 में यहाँ मात्र 23 महानगर थे जो 2001 में बढ़‌कर 35 और 2011 में बढ़कर 53  हो चुका है।

         बड़े आकार के नगरों में जनसँख्या विस्फोट से सार्वजनिक सुविधाओं की कमी होने लगी है। पुराने बस्तियाँ मलीन/गंदी बस्ती के रूप में बदलने लगे हैं। प्रदूषण की वहाँ गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होने लगी है। प्रदूषण का आलम यह है कि नगरों में ऑक्सीजन बार खुलने लगे हैं। 1996 में UNICEF के एक अध्ययन के अनुसार विकासशील देशों में 170 करोड़ जनसंख्या नगरों में रहती है जिनमें से 160 करोड़ के पास आवास की कमी है। इसके अलावे स्वच्छ जल, प्राथमिक स्वास्थ्य की सुविधा नगण्य है।

       विकसित एवं विकासशील दोनों ही प्रदेश के नगरों में परिवहन दुर्घटना तेजी से बढ़ी है। वर्ल्ड डिजास्टर रिपोर्ट 1998 में बताया गया कि सर्वाधिक परिवहन दुर्घटना से मृत्यु इथोपिया में होती है। इसके बाद नेपाल, बंगलादेश, चीन, स्वाजीलैण्ड और भारत का स्थान आता है।

भारत में नगरीकरण की प्रवृत्ति (Trend of Urbanization in India):-

    भारत में नगरीकरण की प्रवृत्ति धीमी रही है। इसका प्रमुख कारण कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था तथा सुखद ग्रामीण अनुभूति रही है। सन् 1901 में भारत में केवल 11% जनसंख्या नगरीय थी जो सन् 1931 में बढ़कर 11.97%, 1941 में 13.9% तथा सन् 1951 में बढ़कर 17.9% हो गयी।

   सन् 1961 के बाद देश में नगरीकरण की प्रवृत्ति में तेजी आयी, जब देश की अर्थव्यवस्था में सामाजिक मान्यता, प्राकृतिक प्रकोप पर नियन्त्रण और शिक्षा तथा परिवहन का नवीन दौर शुरू हुआ। सन् 1991 में देश की नगरीय जनसंख्या 25.72% हो गयी। इसके बाद सन् 2011 की जनगणना के अनुसार नगरीय जनसंख्या 31.2% हो गयी।

भारत में नगरीकरण की वर्तमान प्रवृत्ति
वर्ष नगरीय जनसँख्या (%)
1901 10.84
1911 10.29
1921 11.18
1931 11.97
1941 13.86
1951 17.29
1961 17.97
1971 19.91
1981 23.34
1991 25.72
2001 27.78
2011 31.20

नगरीकरण की समस्याएँ

            उपरोक्त सामान्य समस्याओं के अलावे विकसित एवं विकासशील देशों में अलग-2 विशिष्ट समस्याएँ भी उत्पन्न हो रही है। जैसे:-

(A) विकसित देश की विशिष्ट नगरीय समस्याएँ:-

      विकसित देशों में नगरीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भिक अवस्था में ही सम्पन्न हो चुकी है, इसलिए वहाँ की नगरीय समस्याएँ विकासशील देशों से कुछ भिन्न प्रकार की होती हैं। इन समस्याओं का स्वरूप अधिकतर अत्यधिक औद्योगीकरण, उपभोक्तावाद, जीवन-शैली और तकनीकी प्रगति से जुड़ा होता है। विकसित देशों की प्रमुख नगरीय समस्याएँ निम्नलिखित हैं –

(1) विकसित देशों के अधिकतर महानगरीय प्रशासन वितीय संकट के दौर से गुजर रही है। जैसे- माण्ट्रीयल, ओसलो, स्टॉकहोम में स्थित नगर प्रशासन को कोई ऋण देने के लिए तैयार नहीं है।

(2) खाली अधिवासों की समस्या:-

        विकसित देशों में जनसंख्या नगर से ग्राम की ओर स्थानान्तरित हो रही है क्योंकि विकसित देशों के ग्रामीण क्षेत्र भी नगर के समान बिजली, परिवहन एवं अन्य संरचनात्मक सुविधाएँ उपलब्ध है। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र भीड़-भाड़ और पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त हैं। ऐसे में नगरीय जनसंख्या अधिक-से-अधिक ग्रामीण क्षेत्र में अधिवास करने की प्रवृति रखती है जिसके कारण विकसित देशों के नगरों में लाखों अधिवास खाली पड़े हैं।

(3) नवजनसंख्या का विस्फोट:-

          60 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को नवजनसंख्या के अन्तर्गत रखते हैं। विकसित देशों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा और पर्याप्त पोषण उपलब्ध होने के कारण बूढ़ों की जनसंख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे लोग प्राय: निर्भर जीवन व्यतीत करते हैं। ऐसे लोगों के बच्चे बूढ़े माता-पिता को बुजुर्ग आश्रम में ले जाकर छोड़ देते हैं। इससे पारिवारिक विखण्डन की भी गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। 

(4) प्रदूषण की समस्या:-

       विकसित देशों के नगर वायु, जल और ध्वनि तीनों प्रकार के प्रदूषण ही समस्या से उलझ रहे हैं। शिकागों में 60% लोग बहरे हो चुके हैं। इसी तरह से USA के 70% नगरीय जनसंख्या प्रदूषित वायु लेने के लिए बाध्य है।

(5) जननांकीय समस्या:-

         विकसित देशों में एकल परिवार के विकास तथा अपने स्वास्थ के प्रति अति जागरूकता के करण जहाँ एक ओर परिवारों का विखंडन हो रहा है। वहाँ विवाह एवं नातेदारी जैसी सामाजिक संस्थाओं का पत्तन हुआ है जिसके कारण वहां नाकारात्मक जनसंख्या वृद्धि की समस्या उत्पन्न हुई है।

(B) विकासशील देशों की विशिष्ट नगरीय समस्याएं:- 

(1) विकासशील देशों में तीव्र ग्रामीण-नगरीय स्थानान्तरण के कारण नगरीय जनसंख्या विस्फोट की समस्या उत्पन्न हुई। 

(2) विकासशील देशों के अधिकतर देशों में अधिवासीय मकान की कमी की समस्या है और जो मकान उपलब्ध है उनका स्तर काफी निम्न है।

(3) गंदी बस्तियों का विकास विकासशील देशों के नगरों की एक गंभीर समस्या है। मुंबई का धरावी क्षेत्र विश्व की सबसे बड़ी गंदी बस्ती क्षेत्र का उदा० है। 

(4) विकासशील देशों के अधिकतर नगरों में नियोजित आन्तरिक संरचना का अभाव है। अनियोजित विकास के कारण नगरीय भूमि का न तो सही तरीके से प्रयोग हमें पता है और न ही उनका विकास हो पाता है। अनियोजित नगरों में परिवहन साधन धीमी गति से चलती है, वहीं दुर्घटना की भी संभावना अधिक होती है।

(5) विकासशील देशों में तीव्र नगरीकरण के कारण अनियोजित उपान्त क्षेत्रों से विकास बहुत तेजी से हो रहा है। उपान्त क्षेत्र से मुख नगर की ओर आने वाली परिवहन साधनों का घोर अभाव है वहीं दूसरी ओर वैसे सड़‌कों पर सड़क जाम एवं अति भीड़-भाड़ की  समस्या देखा जा सकता है।

(6) विकसित देशों की भाँति ही विकासशील देशों के नगरों भी गंभीर प्रदूषण की समस्या से गुजर रहे है।

निष्कर्ष:- 

      अतः ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि विकसित और विकासशील देशों की कुछ सामान्य समस्याएँ हैं वहीं अलग-2 भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कुछ विशिष्ट समस्याएँ भी हैं। ऊपर बताये गये समस्याओं की विवेचना की जाए तो पाते हैं कि गुणवत्ता और गहनता की दृष्टि से विश्व के सभी नगरों प लागू होता है। नगरीकरण एक वैश्विक वास्तविकता है, जो आर्थिक प्रगति और आधुनिक जीवन शैली का प्रतीक है। किंतु अनियंत्रित और अव्यवस्थित नगरीकरण अनेक गंभीर समस्याओं को जन्म देता है। अतः आवश्यक है कि नगरीकरण को सतत, समावेशी और पर्यावरण-सम्मत बनाया जाए, ताकि यह मानव जीवन के लिए अवसर का स्रोत बने, बोझ नहीं।



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 18. Town Planning / नगर नियोजन

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Q. नगर नियोजन का तात्पर्य क्या है ? भारत में नगर-नियोजन की प्रक्रिया और उसके इतिहास के पहलू का व्याख्या करें।

               भारतीय जनगणना विभाग के अनुसार वह कोई भी गुच्छित बस्ती जिसकी जनसंख्या 5,000 या उससे अधिक है। जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति/वर्ग km है और वहाँ का 2/3 कार्यकारी पुरुष जनसंख्या द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों में संलग्न है। वैसी गुच्छित बस्ती को नगर कहा जाता है जबकि नगर नियोजन का तात्पर्य वैसे नीति एवं कार्यक्रम से है जिसके आधार पर नगरों का विकास किया जाता है।

सामान्यत: नगरों के विकास की प्रक्रिया के आधार पर नगरों को दो भागों में बाँटते हैं:-

(1) अनियोजित नगर

(2) नियोजित नगर

         अनियोजित नगर वैसे नगर को कहते है जिसका विकास जैविक रूप से हुआ हो और नियोजित नगर वैसे नगर को कहते हैं जिसके विकास के पूर्व ही उसके संबंध में सभी नीति एवं कार्यक्रमों का निर्धारण कर लिया जाता है। उसके बाद नगर बसाये जाते हैं। फ्रांसीसी विद्वान गिलियन ने नगर नियोजन के तीन मुख्य उद्देश्य बताते हैं:-

(1) नगरीय स्वाथ्य का विकास करना- इसका तात्पर्य है कि नगर-नियोजन के वक्त इस तरह की नीति अपनाई जानी चाहिए कि नगरों में गंदी बस्ती का विकास न हो सके। नगरों में मनोरंजन के साधन का पूर्ण व्यवस्था हो।(2)नगरीय संपत्ति की सुरक्षा – इसका तात्पर्य है नगर के उत्पादक कार्य और नगर के भू उपयोग  के बीच सतत् संतुलन बना रहे। 

(3) नगरीय सौन्दर्य का विकास- इसका तात्पर्य है नगर में पर्याप्त मात्रा में पार्क, होटल, सॉपिंग कम्प्लेक्स, ट्रेफिक, वृक्षों की पेटी, का पूरा विकास हो।

             नगर नियोजन का कार्य पाँच अवस्थाओं से गुजरकर पूरा होता है। जैसे-

प्रथम चरण- इस चरण में नगर बसाव वाले स्थान का सर्वेक्षण किया जाता है। सर्वेक्षण के दौरान यह जाँच की जाती है कि वह स्थान भूकम्प क्षेत्र में है या नहीं, भूदृश्य कैसा है? मानव बसान के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ कैसी है? भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों के विकास की क्या संभावना है? इत्यादि।

         सर्वेक्षण के द्वारा जो ऑकड़े उपलब्ध होते हैं उसे सांख्यिकी विधि के द्वारा कम्प्यूटर या अन्य तकनीक के माध्यम से सारणीकृत एवं विभिन्न प्रकार के आरेख का निर्माण कर एक रफ मानचित्र का निर्माण करते हैं। उसके बाद यह निर्धारण किया जाता है कि किस स्थान पर किस कार्य के लिए संरचनात्मक सुविधाओं का विकास किया जाए।

दूसरी चरण- नगर के बनाये गये रफ मानचित्र को परिमार्जित कर अंतिम ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है। उसके बाद वास्तविक धरातल पर अलग-2 कार्यों के लिए निर्धारित रेखांकन कर दिया जाता है।

तीसरा चरण- तीसरी अवस्था में सार्वजनिक सुविधाओं, मनोरंजनात्मक स्थल का विकास सबसे पहले किया जाता है उसके बाद लोगों को अधिवासीय वस्तु बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

चौथा अवस्था- चौथा अवस्था में नगर के बाहरी क्षेत्रों के लिए खण्डीय मानचित्र क निर्माण किया जाता है ताकि बढती हुई जनसंख्या को नियोजित किया जा सके।

पाँचवीं अवस्था- पाँचवी अवस्था में नियोजन के कार्यों को वास्तव में कार्य रूप प्रदान किया जाता है। अर्थात् राजनैतिक, प्रशासनिक एवं न्यायिक अड़चनों को दूर किया जाता है और अंतिम बनाये ब्लूप्रिंट मानचित्र में थोड़ा-बहुत परिवर्तन करके उसे कार्यान्वित किया जाता है।

भारत में नगर नियोजन का इतिहास 

                     भारत में नगर नियोजन की इतिहास सिन्धु घाटी सभ्यता से प्रारंभ होती है क्योंकि सिन्धु घाटी सभ्यता के जिन स्थलों की खुदाई की गई है उन सभी स्थानों पर नियोजित नगर का प्रमाण मिला है। जैसे सड़के समकोण पर काटती थी। जल निकासी की उत्तम व्यवस्था थी। सड़कों के किनारे प्रकाश का उचित प्रबंध था।       

                            भारत में आधुनिक नगर नियोजन 20वीं शताब्दी से मानी जाती है। 20वीं सदी में हुए नगर नियोजन को भी दो भागों में बाँटा जा सकता है:-

(1) स्वतंत्रता के पूर्व हुए नगर नियोजन का कार्य 

(2) स्वतंत्रता के बाद हुए नगर नियोजन का कार्य

               स्वतंत्रता के पूर्व प्रत्येक बड़े अनियोजित नगर के पास  नियोजित नगर का निर्माण किया गया। इस नियोजित नगर में सिविल लाइन्स, सैनिक छावनी और प्रशासनिक केन्द्र हुआ करते थे। जैसे- दिल्ली के पास दिल्ली कैण्ट, वाराणसी में वाराणसी कैंट, बंगलोर में बंगलौर कैण्ट, पटना में दानापुर सैनिक छावनी क्षेत्र या कैंट इत्यादि।

            स्वतंत्रता के बाद और स्वतंत्रता के पूर्व किये गये नगर नियोजन के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि भारत में नियोजन कार्य की प्रवृति तीन प्रकार की रही है। जैसे:-

(1) वृतीय या अर्द्धवृतीय प्रतिरूप के आधार पर- ऐसे नियोजित नगर के केन्द्र में प्रशासनिक केन्द्र होता है और उसके चारों और अर्द्धवृताकार क्षेत्र में अधिवासीय बस्तियों का विकास किया जाता है।

Town Planning(2) अरीय प्रतिरूप या मकड़ी जाली प्रतिरूप- इस प्रकार के प्रतिरूप में नगर के कई केन्द्र विकसित किये जाते हैं और प्रत्येक नगर को मुख्य नगर से जोड़ दिया जाता है। प्रत्येक उपनगर को जोड़ने के क्रम में सड़के वृत्त के समान दिखाई देने लगती हैं। नई दिल्ली मकड़ी जाल प्रतिरूप पर आधारित नगर है जिसके केन्द्र में कनॉड पैलेस अवस्थित है। इसी तरह से मुम्बई में हुतात्मा चौक को केन्द्र मानते हुए अरीय प्रतिरूप पर आधारित नगर का विकास किया गया है। 

(3) आय‌ताकार प्रतिरूप- आयताकार प्रतिरूप प्रणाली में सड़‌कें, एक-दूसरे के समकोण पर काटती है। ब्रिटिश सरकार के द्वारा आजादी के बाद इसी प्रणाली पर आधारित नगर नियोजन का कार्य दिया जा रहा है। जैसे- जमशेदपुर, ईटानगर, दिसपुर, चण्डीगढ़, भुवनेश्वर इत्यादि सभी आयताकार प्रतिरूप पर आधारित है।

            इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत में नगर-नियोजन का इतिहास काफी लम्बा रहा है। वर्तमान समय में भारत के लगभग सभी नगरों में नियोजित नगर विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें सरकार एवं निजी क्षेत्र दोनों एक समान भूमिका निर्वहन क रहे हैं।


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17. Problems of Mumbai Metropolis / मुम्बई महानगर की  समस्याएँ

17. Problems of Mumbai Metropolis

(मुम्बई महानगर की  समस्याएँ)



Q. मुम्बई महानगर की क्या समस्याएँ है और उनका समाधान करने के लिए क्या-क्या उपाय विचाराधीन है? (39वीं BPSC)

         नगरीय जनसंख्या विस्फोट के कारण सामान्य रूप से भारतीय नगरों में कई समस्याओं का अभ्युदय हुआ है। लेकिन महानगरों की स्थिति कुछ विशिष्ट है। मुम्बई भारत का सबसे बड़ा महानगर है जो महाराष्ट्र के पश्चिम में अरब सागर के तट पर माहिम नदी के किनारे अवस्थित है। यह नगर सात टापू और सात पर्वत के ऊपर अवस्थित है। इस नगर के पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में पश्चिमी घाट पर्वत अवस्थित है। इसका विस्तार उत्तर से दक्षिण दिशा में एक संकरी पट्टी के रूप में हुआ है जिसे नीचे के मानचित्र में देखा जा सकता है।

Problems of Mumbai Metropolis

            मुम्बई महानगरीय नियोजन संस्था के अनुसार मुम्बई महानगर की निम्नलिखित समस्याएँ हैं:-

(1) अधिवासीय मकानों की जबड़‌दस्त  कमी

(2) मकानों में भारी जनसंख्या दबाव 

(3) नगरीय जीवन में भारी गिरावट

(4) काम करने के स्थानों का कुछ सड़क मार्गों के किनारे ही एक लम्बी दूरी तक फैला होना

(5) कुछ क्षेत्रों में भारी उद्योगों का जमाव एवं कुछ क्षेत्रों में अभाव

(6) अभिगमनकर्ताओं का भारी संख्या में आना। 

(7) प्रदूषण की समस्या।  जैसे- वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण की समस्या

(8) हवाई अड्डा, बंदरगाह, रेलवे स्टेशन, बसस्टैण्ड पर भारी भीड़-भाड़

 (9) विद्युत् तथा पानी की कमी तथा नगर निगम का बढ़ता टैक्स 

(10) खुले स्थानों और मनोरंजन साधनों का अभाव 

(11) भूमि की जबड़‌दस्त कमी और उनका बढ़ता हुआ कीमत

(12) मुम्बई नगर निगम के सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमि पर अतिक्रमण की समस्या 

(13) लोगों में परस्पर सामंजस्य का अभाव एवं एकाकी जीवन 

(14) सामाजिक ढाँचे में भारी विषमता।

          उपरोक्त सभी समस्याएँ मुम्बई महानगर द्वारा पिछले 60-70 वर्षों में की गई कारगुजारियों का परिणाम है। इस समस्या से निपटने के लिए मुम्बई का प्रादेशिक मास्टर प्लान के तहत विकसित करने का योजना बनायी गयी है जिसका प्रमुख उद्देश्य है- मुम्बई तथा उसके प्रदेश में बढ़ती असमानताओं का दूर करना। मुम्बई महानगर के प्रत्येक क्षेत्रों में समुचित सुविधाओं का विकास करना, लोगों के जीवन-स्तर में सुधार लाना और मुम्बई महानगर के अनियंत्रित विकास को रोकना है। इन उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु “मुम्बई मास्टर प्लान” का निर्माण 21वीं शताब्दी के अन्त में संभावित जनसंख्या को आधार मानते हुए तैयार किया गया।

             ट्रांस, थाणे क्रीक क्षेत्र में एक नया नगर स्थापित किया जा रहा है। कल्याण, पोलसेट, बालखून, खपोली, मीरा भण्डार, आप्टे तुराडे कम्प्लेक्स को औद्योगिक नगरों को विकसित किया जा रहा है। सड़क और रेलमार्ग के बीच में समन्वय स्थापित कर नगर के अंदर और बाहर के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था को सुधारा जा रहा है।

         मुम्बई नगर में बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करने के लिए नवी मुम्बई का विकास किया जा रहा है। यह माहिम क्रीड के पूर्वी क्षेत्र पर स्थित है। नवी मुम्बई से कोलावा और बेलपुर सड़‌क का विकास किया गया है और कई रिहाइशी बस्ती और कई व्यापारिक क्षेत्रों का विकास किया गया है। चेम्बूर से वार्सी के बीच में रेलपुल सङ्‌क मार्ग का निर्माण किया गया है।

         मुम्बई में ऐसे नवीन सेक्टर का निर्माण किया जा रहा है जो आधुनिक सुख सुविधाओं से युक्त है तथा चार-पाँच सेक्टर के बीच में एक CBD की स्थापना की गई है। नगर के अन्दर तीन बड़े-2 व्यापारिक केन्द्र का निर्माण किया गया है। प्रत्येक सेक्टर में खेल के मैदान एवं पार्कों का विकास किया गया है। प्रत्येक सेक्टर में तथा खाली भूमि पर हरी पेटी का विकास किया गया है ताकि ध्वनि प्रदूषण तथा वायु प्रदूषण पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

           बदरगाहों पर भीड़-भाड़ को कम करने के लिए नवासेवा बंदरगाह और मँझगाँव डाकयार्ड का निर्माण किया गया है। रेलवे स्टेशनों पर और रेलवे भीड़-भाड़ को कम करने के लिए मुम्बई उपनगरीय रेल तो चलाया गया ही है। इसके बावजूद मुम्बई को एक ओर कोंकण रेलवे से जोड़ दिया गया है। तथा दूसरी ओर मुम्बई हथा अहमदाबाद के बीच में बुलेट ट्रेन चलाने की योजना है तथा मुम्बई उपनगरीय क्षेत्र में स्काई बस चलाने की भोजना है।

             हवाई अड्डों पर भीड़ को कम करने के लिए शान्ता क्रुज और सहार में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा का निर्माण किया गया है। मुम्बई महानगर का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है। इसलिए सरकार ने वहाँ पर उदग्र जनसंख्या विस्तार का निर्णय लिया है। 

         इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि मुम्बई महानगर को विभिन्न प्रकार के समस्याओं से निजात दिलाने हेतु कई प्रकार एवं संरचनात्मक उपाय किये गये हैं।


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 16. Urban Problem /नगरीय समस्या

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प्रश्न प्रारूप

1. भारतीय नगरों के आवास की मौलिक समस्या अल्पता नहीं वरन् अत्यन्त निम्न स्तर की गुणवता है।” स्पष्ट कीजिए। (39 BPSC)

2. मुम्बई महानगर के के लिए क्या समस्याएँ है? उनका समाधान के लिए क्या-क्या उपाय विधाराधीन है? (39 BPSC)

3. गंदी बस्ती तथा नगरीय आवास के मुख्य कारकों की व्याख्या कीजिए। (42वीं BPSC)

4. बिहार में गंदी बस्ती एवं नगरीय आवास के मुख्य कारणों की व्याख्या कीजिए। (44वीं BPSC)

5. झोपड़ बस्ती हमारे शहरों का विभाज्य अंग बन गया है। व्याख्या कीजिए (44वीं BPSC)

Urban Problem

        भारत में नगरीय जनसंख्या विस्फोट के कारण कई समस्याओं का अभ्युदय हुआ है। उनमें से दो समस्याएं सबसे प्रमुख है। प्रथम गंदी बस्ती का विकास और द्वितीय आवासों की कमी। इन दोनों समस्याओं में सबसे गंभीर समस्या गंदा बस्ती का विकास है। गंदी बस्ती उस अधिवासीय क्षेत्र को कहा जाता है जहाँ अस्वास्थकर अधिवास पाया जाता है।
       WHO ने गंदी बस्ती को परिभाषित करते हुए कहा है:- “ Slum is an area where is darkness disappearance and Poverty is occurred.” अर्थात जिस अधिवासीय क्षेत्र में गरीबी धुँधले बस्ती तथा घर के अन्दर अन्धेरा का साम्राज्य हो वैसे बस्ती को गंदी बस्ती कहते हैं। भारत में गंदी बस्तियों को अलग-2 नाम से जानते हैं। जैसे- मुम्बई में ‘चाल’, कोलकाता में ‘बस्ती’, कानपुर में अहाता, चेन्नई में चेरी’ और दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी कोलनी (JJ Colong) कहते हैं।

              भारत में सबसे बड़ा गंदी बस्ती का मुम्बाई में हुआ है जो धरावी के नाम से प्रसिद्ध है। यह मुम्बई के उत्तरी भाग में अवस्थित है। यहाँ औद्योगिक श्रमिक बड़े पैमाने पर अधिवासित होते हैं। यहाँ के अधिवासीय मकान ही चाल कहलाते हैं। इन चालों में लोग ऐसे कमरों में रहा करते हैं जहाँ कबूतर एवं मुर्गी भी नहीं पाली जा सकती है। प्रत्येक चाल पर पाँच-छः मंजिले इमारत होते हैं जिसमें प्रकाश और वायु की कोई व्यवस्था नहीं होती हैं। शैौचालय अत्यंत दूषित तथा बदबूदार होता है।

            गंदे पानी निकलने की कोई व्यवस्था नहीं होती है। और कूड़ा-करकट गंदे पानी में बहते हुए नजर आते हैं। इन चालों में ऐसे परिवार होते हैं जो एक रक्त से संबंधित होते हैं। यहाँ समाज विरोधी तत्व सक्रिय रहते हैं और गंदी बस्तियाँ सामाजिक बुराइयों का अड्डा होता है।

           कोलकाता में गंदी अधिवासीय क्षेत्र को ‘बस्ती’ कहते हैं। कोलकाता भारत का दूसरा सबसे बड़ा गंदी बस्ती का क्षेत्र है। कोलकाता में गंदी बस्ती का निर्माण जूट मील मालिक एवं सरदारों ने किया है। इन बस्तियों के निर्माण के पीछे पैसा कमाना मुख्य उद्देश्य है। कोलकाता में इन बस्तियों का विकास बड़े-2 पूजीपतियों एवं मील मालिक के अट्टालिकाओं के इर्द गिर्द हुआ है। इन बस्तियों में बिजली, वायु, शौचालय एवं नाला इत्यादि का घोर अभाव है।

           कानपुर में “श्रमिक जांच समिति” ने कानपुर गंदी बस्ती का विशेषता बताते हुए कहा है कि इन बस्तियों में अपरिचित व्यक्तियों के लिए घुसना खरनाऊ होता है क्योंकि अनजान व्यक्ति उसमें घुसकर अपना हड्‌डी तोड़‌वा सकता है। यद्धपि गंदी बस्ती में रहने वाले व्यक्ति अक्सर कीड़े-मकोड़े, खटमल, जू, मच्छर इत्यादि से शिकार होते रहते हैं। इन बस्तियों के अन्दर नारकीय वातावरण होता है।

            चेन्नई में गंदी बस्ती का विकास हुआ है जो ‘चेरी’ के नाम से प्रसिद्ध है। चेरी में निर्मित मकान मिट्टी के होते हैं। इन मकानों का निर्माण लोगों ने स्वयं किया है। यहाँ मानव पशुओं से भी बदत्तर जीवन जीने के लिए अभ्यस्त है।

        दिल्ली के झुग्गी-झोपड़ी कोलनी (J. J. Colony) यमुना नदी के किनारे सहादरा, यमुना बाजार, किदवई नगर, त्रिलोकपुरी, जहाँगीरपुरी क्षेत्रों में हुआ है। झुग्गी-झोपड़ी में मकान कच्चे मिट्टी से या बाँस और पुराने पॉलिथीन के चादर से बने होते हैं। मकानों के चारों ओर कुड़ा-कड़‌कट के ढेर, यहाँ-वहाँ गंदे जल का जमाव, तंग गलियाँ पायी जाती है। सामान्य दिनों में सौचालय करते हुए लोग दिखाई देते हैं और गर्मी के दिनों में यहाँ आग लगने की घटना बड़े पैमाने पर होती है।

              उपरोक्त नगरों के गंदी बस्ती के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि भारत के गंदी बस्तियों में निम्न गुणवत्ता वाले मकानों की अधिकता होती हैं वहीं बाहर का पर्यावरणीय एवं सामाजिक वातावरण भी काफी दुषित होता है।

गंदी बस्ती के विकास के कारण

                 किसी भी नगर में गंदी बस्तियों के विकसित होने के निम्नलिखित कारण हैं; 

(1) औद्योगिकीकरण⇒ किसी स्थान पर उद्योगों के लगने से अचानक बड़ी संख्या में मजदुर आकर निवास करने लगते हैं। फलत: ये मजदूर कामचलाऊ मकान बनाकर अधिवासित होने लगते हैं। पुनः उद्योग के मालिक मजदूरो के अधिवासित होने के लिए निम्न स्तरीय मकानों का निर्माण कराकर मजदूरों को बसा देते है। जैसे- कोलकाता नगर के इर्द-गिर्द बड़े पैमाने पर जूट, सूती वस्त्र का उद्योग का विकास हुआ है। इन उद्योगों में बिहार, UP. झारखण्ड स्वयं पश्चिम बंगाल, असम, बांगलादेश से आगे मजदूर कार्य करते हैं और काम चलाऊ अधिवासीय बस्ती में अधिवासित होते हैं।

(2) ग्रामीण-नगरीय जनसंख्या स्थानान्तरण- स्वदेश नागया ने दिल्ली के झुग्गी-झोपड़ी का अध्ययन कर बताया कि यहाँ गंदी बस्ती के विकसित होने का प्रमुख कारण ग्रामीण नगरीय जनसंख्या स्थानान्तरण है। 

(3) गरीबी तथा कम किराया- नगरों में काम करने वाले मजदूर पेट भरने और शरीर ढकने से ज्यादा नहीं कमा पाते हैं जिसके कारण वे अच्छे मकानों में नहीं रह पाते हैं। गंदी बस्ती में कम किराया होने के कारण लोग मजबूरन अधिवासित होने के लिए बाध्य होते हैं।

(4) नगरों में मकानों का अभाव- जिस तेजी से नगरीय जनसंख्या हमें वृद्धि हो रही है। उस दर से मकानों का निर्माण नहीं हो रहा है जिसके कारण लोग गंदी बस्तियों में अधिवासित हो रहे हैं।

(5) मकान मालिकों की मानसिकता- मकान मालिक अधिक से अधिक किराया प्राप्त करने के फिराक में मकानों के देख-भाल में ध्यान नहीं देते हैं तथा मकानों में सुविधाओं का विकास नहीं करते है।

(6) अज्ञानता- गंदी बस्ती के प्रसार में अज्ञानता एवं अशिक्षा प्रमुख योगदान है। बाहरी क्षेत्रों से आये हुए लोग अज्ञानतावश एक स्थान पर झुण्डों में निवास करने लगते है। स्वास्थ, सफाई, बीमारी से निपटने हेतु सामूहिक प्रयास नहीं करते हैं। फलतः गंदी बस्तियों का विकास होता है।

(7) नगर नियोजन का अभाव⇒ भारत में कुछ नगरों के विकास के लिए मास्टर प्लान का  निर्माण किया गया है लेकिन कई ऐसे नगर हैं जिनके लिए कोई मास्टर प्लान नहीं है। मास्टर प्लान लागू होने का दर  काफी धीमी है जबकि नगरीय जनसंख्या वृद्धि की दर तीव्र है।

 (8) अन्य कारण- पारिवारिक कलह, धार्मिक रूढ़िवादिता, सामाजिक बहिष्कार एवं सामाजिक असुरक्षा, अधिकांश नगरों का पुराना होना, नगरों में सार्वजनिक सुविधाओं का आभाव होना, समय-2 पर प्राकृतिक आपदाओं का आना इत्यादि कुछ ऐसे कारण है जिसके चलते गंदी बस्तियों विकास होता है।

                 इस तरह ऊपर के लक्ष्यों से स्पष्ट है कि भारत में बस्तियों के विकास के पीछे कोई एकल कारण नहीं है बल्कि कई समेकित कारण जिम्मेदा हैं।


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