34. The Structuralism (संरचनावाद)

34. The Structuralism

(संरचनावाद)



प्रश्न प्रारूप

Q. 1. संरचनावाद पर प्रकाश डालें।

(Throw light on the Structuralism.)

उत्तर- संरचनावाद मानता है कि समाज के भीतर सामाजिक और सांस्कृतिक संरचनाएँ हैं और वे व्यक्तिगत अभिन्न व सोच की बातें करते हैं। इसलिए संरचनावाद चीजों के व्यक्तिगत अभिनय व सोच की बात के व्यक्तिगत उद्देश्य और व्याख्या पर केन्द्रित नहीं है बल्कि भौतिक और प्रतीकात्मक सरंचनाओं पर केन्द्रित है। जो सामाजिक व्यवहार में एक मॉडल की तरह कार्य करता है। संरचनाएँ सामाजिक दुनिया का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

एटकेन और वेलेंटाइन में (2006) संरचनावाद को निम्न रूप में परिभाषित किया गया हैं-

“मानव भूगोल के लिए एक सैद्धान्तिक दृष्टिकोण जिसे एक धारणा से दर्शाया गया है कि मानव व्यवहार के सतह पैटर्न को समझने के लिए मानव, कार्यों को उत्पन्न करने या आकार देने वाली संरचनाओं को समझना आवश्यक है।”

       संरचना सिद्धान्त के मुख्य समर्थक ब्रिटश समाजशास्त्री एंथनी गिंडेस और फ्रांसीसी समाजशास्त्री पियरे वोर्डियों हैं। गिडेंस के अनुरूप संरचना का निर्माण एक पहल में नहीं होता-संरचना एक सतत प्रवाह है, एक प्रक्रियाओं द्वारा पुनः उत्पन्न होती है। यही कारण है कि वह संरचनावाद के आधार पर संरचना को पसंद करते हैं। संरचनात्मक सिद्धान्त समाज को मानवीय गतिविधि से स्वतंत्र नहीं बल्कि मानव गतिविधि के उत्पाद के रूप में भी नहीं देखता है। यह संरचना की द्वंद्व (gidden) के संरचना सिद्धान्त में एक केन्द्रीय बिन्दु है।

      हम कह सकते हैं कि संरचना प्रथाओं के पुनरुत्पादन के माध्यम और परिणाम दोनों हैं। संरचनात्मक सिद्धान्त में यह महत्वपूर्ण है कि गतिशील प्रक्रिया के माध्यम से संरचनाएँ कैसे हो रही हैं। एक और अंतर यह है कि संरचनात्मक सिद्धान्त के दृष्टिकोण से संरचनाओं में स्वयं शक्ति नहीं होती है। मुख्य संवैधानिक शक्ति मानव व्यक्ति की एजेंसी को सौंपी जाती है।

       बेने वेरलेन (2009) ने उसे निम्नानुसार रखा है- “संरचना और सामाजिक अभ्यास का संबंध दोहरी है जिसका अर्थ है कि सामाजिक प्रथाएँ सामाजिक संरचनाओं का संदर्भ देती है और सामाजिक संरचनाएँ पहले किए गए प्रथाओं और सामाजिक कार्यों का परिणाम है।”

       एक और संरचनावादी विचारक जीन पिरगेट हैं जिसने बच्चों के संज्ञानात्मक मनोवैज्ञानिक विकास के सिद्धान्त के माध्यम से उनके मनोवैज्ञानिक संरचनावाद के बारे में विचारों को समझाया। उन्होंने कहा कि ज्ञान एकत्र करने की प्रक्रिया में विभिन्न चरणों और संरचनाओं के लिए होते हैं, ज्ञान के विकास में प्रत्येक चरण में अपनी विशेषताओं और प्रणालियों की आवश्यकताएँ होती हैं लेकिन ज्ञान में स्वयं भी संरचनाएँ होती हैं।

          संरचनात्मकता के विचार का कई क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है। उन क्षेत्रों में से एक इतिहास है। संरचनावादियों का मानना है कि पूरे इतिहास में उनके कई कार्यक्रम हुए हैं जिन्होंने इतिहास को आकार दिया है जैसा कि आजकल हम जानते हैं। संरचनात्मक घटनाओं का परिणाम कुल इतिहास में होता है, एक इतिहास जो हर किसी के लिए मायने रखता है। वे अलग संदर्भों के बीच भेद नहीं करते हैं। यह भेद आमतौर पर पोस्ट-स्ट्रक्चरल वाद के लिए होता है।

          संरचनावाद भूगोल के भीतर के दृष्टिकोण जो इस तथ्य को इंगित करता है कि मानव व्यवहार के सतह पैटर्न को समझने के लिए विश्वास मानव कार्यों को उत्पन्न करने या आकार देने वाली संरचनाओं के बारे में ज्ञान का होना जरूरी है।

      उदाहरणार्थ नीदरलैण्ड में एक निश्चित क्षेत्र अपने क्षेत्र में नए लोगों को आकर्षित करना चाहता है। फिर उन्हें पहले के विशिष्ट क्षेत्र को स्थानान्तरित करने के लिए लोगों के अन्तर्निहित पैटर्न और उद्देश्यों पर व्यापक शोध होना चाहिए। उसके बाद यह क्षेत्र उन लोगों को अपने क्षेत्र की ओर आकर्षित करने में सशक्त कदम उठा सकता है अन्यथा अपने क्षेत्र में कई नए लोगों को आकर्षित करना लगभग असंभव है। यह उदाहरण दिखाता है कि मानव व्यवहार के उद्देश्यों के बारे में स्पष्ट ज्ञान का होना कितना महत्वपूर्ण है। केवल अगर हमारे पास वह ज्ञान है तो हम मानव व्यवहार को प्रभावित करने में सक्षम होंगे।

       1960 के दशक के आरंभ तक एक आंदोलन के रूप में संरचनावाद अपने आप आ रहा था और कुछ लोगों का मानना था कि यह मानव जीवन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करता है जो सभी विषय को गले लगाएगा। रोलैंड वार्थेस और जैक्स डेरिका ने उस बात पर ध्यान केन्द्रित किया कि साहित्य में संरचनावाद कैसे लागू किया जा सकता है।

        आज संरचना वक्ता उत्तर संरचनावाद और विघटन जैसे दृष्टिकोण से कम लोकप्रिय है। उसके कई कारण हैं- संरचनात्मक्ता की अक्सर अनैतिक होने और व्यक्तिगत लोगों की कार्य करने की क्षमता पर निर्धारक संरचनात्मक ताकतों के पक्ष में आलोचना करने में की गई है।

       1960 और 1970 के राजनीतिक अशांति और विशेष रूप से यही 1968 के (छात्र विद्रोह) ने अकाद‌मिक को प्रभावित करना शुरू किया। सत्ता और राजनीतिक संघर्ष के मुद्दे लोगों के ध्यान के केन्द्र में चले गए।

      1980 के दशक में विद्रोह उसकी क्रिस्टलीय तार्किक संरचना के बजाय भाषा की मौखिक स्पष्टता पर जोर लोकप्रिय हो गया। सदी के अंत तक संरचनावाद को विचार के ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण स्कूल के रूप में देखा गया था लेकिन संरचनात्मकता के बजाय यह आंदोलन प विशेष ध्यान दिया।



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1. Bihar: General Information (बिहार: सामान्य जानकारी)

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(बिहार: सामान्य जानकारी)



परिचय

       बिहार भारत का एक राज्य है जिसकी राजधानी पटना है। बिहार शब्द की उत्पत्ति संस्कृत और पाली भाषा के शब्द “विहार” से हुई जिसका अर्थ है निवास अर्थात प्राचीन काल में यहाँ बौद्ध भिक्षुओं का निवास हुआ करता था इसीलिए इसे विहार (बिहार) कहा गया।

➤ बिहार तीन बार खण्डित हुआ है। 1912 में पहली बार बंगाल से अलग हुआ। 1936 में उड़ीसा से तथा 15 नवम्बर 2000 में झारखण्ड से अलग हुआ।

➤ बिहार का कुल क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किमी० है।

➤ बिहार क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का 13 वां सबसे बड़ा राज्य है।

➤ बिहार की कुल जनसँख्या 104,099,452 है।

➤ बिहार जनसंख्या की दृष्टि से देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है।

➤ चौहदी: उत्त में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्त प्रदेश तथा दक्षिण में झारखण्ड है।

बिहार का भौगोलिक परिचय

बिहार का भौगोलिक परिचय
अक्षांशीय विस्तार 24° 20′ 10″ से 27° 31′ 15″ उत्तरी अक्षांश
देशांतरीय विस्तार 83° 19′ 50″ से 88° 17′ 40″ पूर्वी देशांतर
आकृति आयताकार
क्षेत्रफल 94163 वर्ग किमी० (देश के कुल क्षेत्रफल का 2.86%)
लंबाई (उत्तर से दक्षिण) 345 किमी०
लंबाई (पूर्व से पश्चिम) 483 किमी०
समुद्र तल से औसत ऊंचाई 173 फीट (53 मी०)
सीमाएं उत्तर में नेपाल (7 जिला), दक्षिण में झारखण्ड (9 जिला), पूर्व में पश्चिम बंगाल (3 जिला), पश्चिम में उत्तर प्रदेश (7 जिला)
जलवायु मानसूनी
सर्वाधिक तापमान वाला जिला  गया (41ºC)
सर्वाधिक ठंडा जिला गया
औसत वर्षा 1050 मिमी0
वन क्षेत्र 6.6%
क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला पश्चिमी चंपारण
क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा जिला शिवहर
सर्वाधिक वर्षा वाला जिला किशनगंज
सबसे कम वर्षा वाला जिला औरंगाबाद
सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना गंडक परियोजना

 

बिहार राज्य से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

बिहार राज्य से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
बंगाल से बिहार को अलग किया गया 1 अप्रैल 1912
बिहार से उड़ीसा को अलग किया गया 1 अप्रैल 1936
बिहार से झारखण्ड को अलग किया गया 15 नवम्बर 2000
राजधानी पटना
उच्च न्यायालय पटना
राजकीय भाषा हिंदी
द्वितीय राजकीय भाषा उर्दू
राजकीय पशु बैल
राजकीय पक्षी गोरैया
राजकीय पुष्प गेंदा फूल
राजकीय वृक्ष पीपल
राजकीय चिन्ह बोधि वृक्ष
राजकीय मछली मांगुर
राज्य का महापर्व छठ पूजा

 

राजनितिक परिचय

राजनितिक परिचय
लोक सभा सदस्यों की संख्या 40
लोक सभा में अनुसूचित जाति की आरक्षित सीटें 6 (गोपालगंज, हाजीपुर, समस्तीपुर, जमुई, गया तथा सासाराम)
राज्य सभा में सदस्यों की संख्या 16
विधान सभा में सदस्यों की संख्या 243
विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें 38
विधानसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें 02 (कटोरियां एवं मनिहारी)
विधानपरिषद सदस्यों की संख्या 75
बिहार में प्रमंडलों की संख्या 9 (पटना, मगध, सारण, तिरहुत, कोसी, दरभंगा, पुर्णिया, भागलपुर तथा मुंगेर)
बिहार में जिलों की संख्या 38
अनुमंडलों की संख्या 101
प्रखंडों की संख्या 534
ग्राम पंचायत की संख्या 8053
जिला परिषद् 38
नगर निगम  19

 

बिहार की जनसंख्या

बिहार की जनसंख्या
कुल जनसंख्या 10,40,99,452
पुरुष जनसंख्या 5,42,78,157
महिला जनसंख्या 4,98,21,295
कुल जनसंख्यां में पुरुषों का हिस्सा 52.14%
कुल जनसंख्या में महिलाओं का हिस्सा 47.86%
ग्रामीण जनसंख्या  92341436
शहरी जनसंख्या 11758016
कुल जनसंख्या में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत 88.7%
कुल जनसंख्या में शहरी जनसंख्या का प्रतिशत 11.29%
सर्वाधिक अनुसूचित जाति की आबादी वाला जिला गया
न्यूनतम अनुसूचित जाति की आबादी वाला जिला किशनगंज
सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति की आवादी वाला जिला कटिहार
न्यूनतम अनुसूचित जनजाति की आवादी वाला जिला शिवहर
लिंगानुपात 918/1000
देश की कुल जनसंख्या में बिहार की जनसंख्या का प्रतिशत जनसंख्या की दृष्टि से देश बिहार का स्थान तीसरा
जनसंख्या की दृष्टि से सर्वाधिक बड़ा जिला पटना
जनसंख्या की दृष्टि से सर्वाधिक छोटा जिला शेखपुरा
2001 से 2011 के दशक जनसंख्या वृद्धि दर 25.42%
2001 से 2011 के दशक में सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि दर वाला जिला मधेपुरा
2001 से 2011 के दशक में न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि दर वाला जिला गोपालगंज
जन्म दर 30.9 प्रति हजार
मृत्यु दर 7.9 प्रति हजार
शिशु मृत्यु दर 61 प्रति हजार जीवित जन्म
मातृत्व मृत्यु दर 331 प्रति एक लाख जीवित जन्म पर
जनसंख्या घनत्व 1106
जनसंख्या घनत्व की दृष्टि से बिहार का भारतीय राज्यों में स्थान प्रथम
सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला जिला शिवहर (1880)
न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला जिला कैमूर (488)
लिंगानुपात की दृष्टि से भारत के राज्यों में क्रम 24वां
सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला  गोपालगंज
न्यूनतम लिंगानुपात वाला जिला मुंगेर
बिहार की कुल साक्षरता दर 61.80%
पुरुष साक्षरता दर 71.20%
महिला साक्षरता दर  51.5%
साक्षरता की दृष्टि से भारत के राज्यों में क्रम 28 वाँ
सर्वाधिक साक्षरता दर वाला जिला  रोहतास
न्यूनतम साक्षरता दर वाला जिला पूर्णिया
सर्वाधिक पुरुष साक्षरता दर वाला जिला रोहतास
सर्वाधिक महिला साक्षरता दर वाला जिला रोहतास
न्यूनतम पुरुष साक्षरता दर वाला जिला पूर्णिया
न्यूनतम महिला साक्षरता दर वाला जिला सहरसा

 



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9. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण

10. बिहार का औद्योगिक प्रदेश

11. बिहार का कृषि प्रदेश

12. बिहार में कृषि आधारित उद्योग

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20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर

20. Important Objective Questions and Answers (महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर)

20. Important Objective Questions and Answers

(महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर)



Important Objective

बिहार राज्य से सम्बंधित महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर

1. जनजातियों में बिहार में सर्वाधिक संख्या में कौन हैं?

(A) संथाल

(B) उरांव

(C) मुण्डा

(D) गोंड

[read more] (A) संथाल [/read]

2. संथाल जनजाति के लोग किस में श्रेष्ठता रखते हैं?

(A) चित्रकारी में

(B) बुनाई में

(C) बर्तन बनाने में

(D) शिकार में

[read more] (B) बुनाई में [/read]

3. बिहार भारत के किस भाग में स्थित है?

(A) दक्षिण-पूर्व

(B) उत्तर-पश्चिम

(C) दक्षिण-पश्चिम

(D) उत्तर-पूर्व

[read more] (D) उत्तर-पूर्व [/read]

4. बिहार राज्य की सर्वाधिक महत्व की नदी कौन-सी है?

(A) कोसी नदी

(B) गण्डक नदी

(C) गंगा नदी

(D) दामोदर

[read more] (C) गंगा नदी [/read]

5. बिहार की जलवायु को किस नाम से पुकारते हैं?

(A) भूमध्यरेखीय जलवायु

(B) उष्ण-आर्द्र जलवायु

(C) सवाना जलवायु

(D) मानसूनी जलवायु

[read more] (D) मानसूनी जलवायु [/read]

6. बिहार राज्य में सिंचाई का सर्वाधिक प्रयोग किए जाने वाला साधन कौन-सा है:

(A) नहर

(B) नलकूप

(C) तालाब

(D) अन्य साधन

[read more] (A) नहर [/read]

7. बिहार की उत्तर से दक्षिण तक कितनी लम्बाई है:

(A) 602 किमी.

(B) 605 किमी.

(C) 483 किमी.

(D) 345 किमी.

[read more] (D) 345 किमी. [/read]

8. गंगा नदी बिहार में किस जिले से प्रवेश करती है:

(A) गोपालगंज

(B) भोजपुर आरा

(C) रोहतास

(D) सीवान

[read more] (B) भोजपुर (आरा) [/read]

9. बिहार की जलवायु में कितने मौसम प्रचलित हैं:

(A) शीत व ग्रीष्म

(B) शीत, ग्रीष्म, बसन्त व वर्षा

(C) शीत, वर्षा, शिशिर व शीत

(D) ग्रीष्म, वर्षा, शिशिर व शीत

[read more] (B) शीत, ग्रीष्म, बसन्त व वर्षा [/read]

10. शिवालिक श्रेणी का निर्माण हुआ:

(A) पेलियोजोइक में

(B) इयोजोइक में

(C) मेसोजोइक में

(D) केनोजोइक में

[read more] (D) केनोजोइक में [/read]

11. बिहार की जलवायु है:

(A) मानसूनी

(B) मरुस्थलीय

(C) विषुवत् रेखीय

(D) शीत

[read more] (A) मानसूनी [/read]

12. बिहार की जलवायु में महाद्वीपीय लक्षण अधिक पाए जाते हैं, क्योंकि:

(A) कर्क रेखा की स्थिति

(B) हिमालय की स्थिति

(C) स्थल आबद्ध

(D) भूमध्य रेखा से दूरी

[read more] (C) स्थल आबद्ध [/read]

13. बिहार की जलवायु को प्रभावित करने वाला कारक नहीं है:

(A) दक्षिण-पश्चिमी मानसून

(B) कर्क रेखा की स्थिति

(C) हिमालय

(D) गंगा नदी

[read more] (D) गंगा नदी [/read]

14. कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार बिहार का अधिकांश भाग किस विभाग में आता है:

(A) Caw

(B) Cwg तथा Aw

(C) Cwg

(D) Aw

[read more] (B) Cwg तथा Aw [/read]

15. थॉर्नश्वेट के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार बिहार का अधिकांश भाग किस विभाग में आता है:

(A) Caw

(B) Aw

(C) Cwg

(D) Caw तथा Aw

[read more] (A) Caw [/read]

16. ट्रिवार्था के जलवायु वर्गीकरण में बिहार का सर्वाधिक क्षेत्र किस विभाग में आता है:

(A) Caw

(B) Aw

(C) Cwg

(D) Caw तथा Aw

[read more] (D) Caw तथा Aw [/read]

17. बिहार में अधिकांश वर्षा प्राप्त होती है:

(A) नॉरवेस्टर से

(B) चक्रवातों से

(C) अरब सागर के मानसून से

(D) बंगाल की खाड़ी के मानसून से

[read more] (D) बंगाल की खाड़ी के मानसून से [/read]

18. बिहार की कुल सिंचित भूमि का कितना प्रतिशत भाग नहरों द्वारा सींचा जाता है:

(A) 30%

(B) 26%

(C) 28.1%

(D) 28%

[read more] (C) 28.1% [/read]

19. बिहार की पूर्व से पश्चिम तक कितनी लंबाई है:

(A) 483 किमी.

(B) 500 किमी.

(C) 605 किमी.

(D) 342 किमी.

[read more] (A) 483 किमी. [/read]

20. बिहार में गंगा के उत्तरी मैदान में गंगा में मिलने वाली नदियों में आप किसे शामिल नहीं करेंगे:

(A) बागमती

(B) सरयू

(C) सोन

(D) गण्डक

[read more] (C) सोन [/read]

21. ग्रीष्मकाल में बिहार का कौन-सा नगर सर्वाधिक गर्म रहता है:

(A) पटना

(B) गया

(C) वैशाली

(D) जमशेदपुर

[read more] (B) गया [/read]

22. बिहार में कुल सिंचित भूमि का कितना प्रतिशत भाग नलकूपों द्वारा सींचा जाता है:

(A) 27%

(B) 28%

(C) 50%

(D) 37%

[read more] (C) 50% [/read]

23. बिहार का क्षेत्रफल कितना हैः

(A) 97,136 वर्ग किमी

(B) 89,213 वर्ग किमी

(C) 94,163 वर्ग किमी

(D) 95,412 वर्ग किमी

[read more] (C) 94,163 वर्ग किमी [/read]

24. बिहार में ग्रीष्मकाल की अवधि क्या है?

(A) मार्च से जून तक

(B) फरवरी से मध्य मई तक

(C) मार्च से जुलाई तक

(D) मार्च से मध्य जून तक

[read more] (D) मार्च से मध्य जून तक [/read]

25. बिहार की नदियां व उनके अन्य नदियों से मिलने के जोड़े प्रस्तुत हैं। गलत जोड़ा इंगित करें:

नदी        मुख्य नदी (जिसमें यह नदी मिलती है)

(A) सरयू नदी- रंगा नदी

(B) कमला नदी- कोसी नदी

(C) पुनपुन नदी- दामोदर नदी

(D) उत्तरी कोयल नदी- सोन नदी

[read more] (C) पुनपुन नदी- दामोदर नदी [/read]

26. बिहार को कहां के मानसून से वर्षा प्राप्त होती है:

(A) अरब सागर

(B) हिन्द महासागर

(C) बंगाल की खाड़ी

(D) इनमें से कोई नहीं

[read more] (C) बंगाल की खाड़ी [/read]

27. बिहार में नहरों द्वारा सिंचाई निम्नलिखित में से किस भाग में अधिक होती है:

(A) बिहार का तराई क्षेत्र

(B) कृषि

(C) कुटीर उद्योग

(D) बड़े उद्योग

[read more] (B) कृषि [/read]

28. जनगणना 2011 के अनुसार, राज्य के ग्रामीण क्षेत्र में 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या है:

(A) 916

(B) 925

(C) 919

(D) 934

[read more] (C) 919 [/read]

29. 2001-11 में राज्य के किस जिले में सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि हुई है:

(A) नवादा

(B) गया

(C) मधेपुरा

(D) मधुबनी

[read more] (C) मधेपुरा [/read]

30. जनसंख्या की दृष्टि से बिहार के सर्वाधिक बड़े जिले हैं:

(A) पटना, पश्चिम चम्पारण, मुजफ्फरपुर

(B) पटना, पूर्वी चम्पारण, मुजफ्फरपुर

(C) मुजफ्फर, गया, पश्चिम चम्पारण

(D) नवादा, पटना, गया

[read more] (B) पटना, पूर्वी चम्पारण, मुजफ्फरपुर [/read]

31. 2001-11 के बीच बिहार की जनसंख्या वृद्धि दर रही:

(A) 25.07%

(B) 26.34%

(C) 23.54%

(D) 25.34%

[read more] (A) 25.07% [/read]

32. जनसंख्या की दृष्टि से राज्य के सबसे छोटे जिले हैं:

(A) शेखपुरा, शिवहर, अरवल

(B) शिवहर, जमुई, नालन्दा

(C) मधुबनी, सहरसा, पूर्णिया

(D) सीवान, गया, नवादा

[read more] (A) शेखपुरा, शिवहर, अरवल [/read]

33. बिहार में 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या क्या है:

(A) 940

(B) 916

(C) 944

(D) 946

[read more] (B) 916 [/read]

34. बिहार में ग्रामीण साक्षरता का प्रतिशत है।

(A) 61.83%

(B) 48.24%

(C) 52.23%

(D) 59.20%

[read more] (A) 61.83% [/read]

35. बिहार में कुल जनसंख्या का कौन-सा भाग कार्यशील जनसंख्या के अन्तर्गत आता है:

(A) एक-चौथाई

(B) एक-तिहाई

(C) आधा

(D) इनमें से कोई नहीं

[read more] (B) एक-तिहाई [/read]

36. बिहार का सबसे बड़ा नगर कौन-सा है:

(A) पटना

(B) मुंगेर

(C) गया

(D) दरभंगा

[read more] (A) पटना [/read]

37. 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार के किस जिले की जनसंख्या का घनत्व सबसे कम है?

(A) सारण

(B) पूर्णिया

(C) कैमूर

(D) बांका

[read more] (C) कैमूर [/read]

38. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत है:

(A) 80.35%

(B) 84.53%

(C) 88.70%

(D) 86.27%

[read more] (C) 88.70% [/read]

39. बिहार में राजमहल की पहाड़ियों पर निवास करने वाली प्रमुख जाति कौन-सी है:

(A) असुर

(B) भूमिज

(C) सौरिया पहाड़ियां

(D) पहाड़ी खड़िया

[read more] (A) असुर [/read]

40. 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत है:

(A) 10.5%

(B) 11.30%

(C) 11.34%

(D) 16.25%

[read more] (B) 11.30% [/read]

41. 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार के किस जिले की जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक है:

(A) वैशाली

(B) शिवहर

(C) सीवान

(D) पटना

[read more] (B) शिवहर [/read]

42. जनजातियां पूर्णरूपेण बहिर्विवाही होती हैं, बहिर्विवाही का निम्नलिखित में क्या सही अर्थ है:

(A) बाहर की जनजातियों से विवाह करना

(B) बहुत बार विवाह करना

(C) एक ही गोत्र में विवाह सम्बन्ध नहीं करना

(D) अपने गोत्र में ही विवाह करना

[read more] (C) एक ही गोत्र में विवाह सम्बन्ध नहीं करना [/read]

43. 2011 की जनगणना के आधार पर किस जिले की सबसे कम जनसंख्या है:

(A) गया

(B) शेखपुरा

(C) मुंगेर

(D) अरवल

[read more] (B) शेखपुरा [/read]

44. जनसंख्या की दृष्टि से बिहार का देश में कौन-सा स्थान है:

(A) पहला

(B) तीसरा

(C) दूसरा

(D) पांचवां

[read more] (B) तीसरा [/read]

45. बिहार में देश की कुल जनसख्या का कितना प्रतिशत निवास करता है:

(A) 8.58%

(B) 10.23%

(C) 12.10%

(D) 8.52%

[read more] (A) 8.58% [/read]

46. 2011 की जनगणना के आधार पर किस जिले की सर्वाधिक जनसंख्या है: 

(A) पटना

(B) जहानाबाद

(C) गया

(D) पूर्णिया

[read more] (A) पटना [/read]

47. एक उरांव अपने बाप और बाप के सभी भाइयों को क्या कहता है:

(A) अइयु

(B) बा

(C) मामा

(D) इनमें से सभी असत्य हैं

[read more] (B) बा [/read]

48. 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार की जनसंख्या क्या है?

(A) 85 मिलियन

(B) 105 मिलियन

(C) 103 मिलियन

(D) 98 मिलियन

[read more] (C) 103 मिलियन [/read]

49. जनसंख्या घनत्व की दृष्टि से भारत में बिहार का क्रम क्या है?

(A) प्रथम

(C) पंचम

(B) चतुर्थ

(D) ग्यारहवाँ

[read more] (A) प्रथम [/read]

50. बिहार में सबसे कम जनसंख्या वाला जिला है:

(A) पूर्णिया

(C) अररिया

(B) अरवल

(D) शेखपुरा

[read more] (D) शेखपुरा [/read]

51. सबसे कम महिला साक्षरता वाला जिला है:

(A) मधेपुरा

(B) सहरसा

(C) सीवान

(D) सारण

[read more] (B) सहरसा [/read]

52. बिहार की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार क्या है?

(A) कृषि

(B) उद्योग

(C) खनन

(D) परिवहन

[read more] (A) कृषि [/read]

53. बिहार के लोगों की जीविका का मुख्य आधार निम्नलिखित में से कौन-सा है:

(A) खनिज पदार्थ

(B) कृषि

(C) कुटीर उद्योग

(D) बड़े उद्योग

[read more] (B) कृषि [/read]

54. बिहार के कितने क्षेत्र में कृषि की जाती है:

(A) 50%

(B) 60%

(C) 75%

(D) 66%

[read more] (B) 60% [/read]

55. बिहार राज्य में सरकार के अनेक उपक्रम पटना में हैं, बताइए कौन-सा औद्योगिक उपक्रम पटना में नहीं है:

(A) बिहार स्टेट सुपर फॉस्ट फैक्ट्री लिमिटेड

(B) बिहार स्टेट स्माल लेदर डेवलपमेण्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड

(C) बिहार स्टेट टेक्सट बुक पब्लिशिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड

(D) बिहार स्टेट डेरी कॉरपोरेशन लिमिटेड

[read more] (A) बिहार स्टेट सुपर फॉस्ट फैक्ट्री लिमिटेड [/read]

56. राज्य की कितनी जनसंख्या कृषि कार्य में संलग्न है:

(A) 80%

(B) 75%

(C) 72%

(D) 50%

[read more] (C) 72% [/read]

57. बिहार में कौन-सी फसलें उगाई जाती हैं:

(A) रबी

(B) खरीफ

(C) जायद

(D) इनमें से सभी

[read more] (D) इनमें से सभी [/read]

58. बिहार राज्य की प्रथम रेलवे का नाम बताइए:

(A) पूर्वी रेलवे

(B) बिहार स्टेट रेलवे

(C) ईस्ट इण्डिया रेलवे

(D) दक्षिण-पूर्व रेलवे

[read more] (C) ईस्ट इण्डिया रेलवे [/read]

59. बिहार में फरवरी मार्च में काटी जाने वाली कौन-सी फसल रबी की नहीं है: 

(A) गेहूँ

(B) मटर

(C) सरसों

(D) अरहर

[read more] (D) अरहर [/read]

60. बिहार में जायद की फसल उगाने वाले जिलों में कौन-सा शामिल नहीं है:

(A) दरभंगा

(B) मुजफ्फरपुर

(C) सहरसा

(D) बांका

[read more] (D) बांका [/read]

61. चावल के उत्पादन में बिहार का देश में कौन-सा स्थान है:

(A) द्वितीय

(B) तृतीय

(C) चतुर्थ

(D) पंचम

[read more] (D) पंचम [/read]

62. बिहार में चावल उत्पादक प्रमुख जिलों में किसे शामिल नहीं किया जाएगा?

(A) पटना

(B) गया

(C) मुजफ्फरपुर

(D) कैमूर

[read more] (D) कैमूर [/read]

63. बिहार में सर्वाधिक क्षेत्र पर कौन-सी फसल बोयी जाती हैं:

(A) धान

(B) गेहूं

(C) मक्का

(D) रागी

[read more] (A) धान [/read]

64. बिहार में गेहूँ उत्पादक प्रमुख जिलों में किसे शामिल नहीं किया जाएगा?

(A) चम्पारण

(B) मुजफ्फरपुर

(C) बांका

(D) भोजपुर

[read more] (C) बांका [/read]

65. बिहार में कृषि श्रमिक और अन्य श्रमिक किस अन्न को कलेवा के रूप में प्रयोग करते हैं:

(A) मक्का

(B) ज्वार

(C) जौ

(D) रागी (मरुआ)

[read more] (D) रागी (मरुआ) [/read]

66. देश के कुल शहद उत्पादन का बिहार में उत्पादन होता है:

(A) 30%

(B) 50%

(C) 12.6%

(D) 15%

[read more] (C) 12.6% [/read]

67. बिहार राज्य वनों से प्राप्त पदार्थों पर आधारित किस उद्योग में भारत में प्रथम स्थान रखता है:

(A) इमारती लकड़ी उद्योग

(B) बीड़ी उद्योग

(C) कागज उद्योग

(D) लाख उद्योग

[read more] (D) लाख उद्योग [/read]

68. बिहार में गन्ना उत्पादक जिलों में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं किया जा सकता है:

(A) मुजफ्फरपुर

(B) दरभंगा

(C) नवादा

(D) चम्पारण

[read more] (C) नवादा [/read]

69. बिहार में जूट सर्वाधिक किस जिले में पैदा किया जाता है:

(A) सहरसा

(B) पूर्णिया

(C) चम्पारण

(D) मुजफ्फरपुर

[read more] (B) पूर्णिया [/read]

70. बिहार में इन फसलों में से किस फसल का उत्पादन सर्वाधिक होता है?

(A) आलू

(B) प्याज

(C) मिर्च

(D) तम्बाकू

[read more] (A) आलू [/read]

71. जूट की भांति रेशे की फसल जो बिहार में पैदा होती है? निम्नलिखित में से कौन-सी है?

(A) पटसन

(B) मेस्टा

(C) सनई

(D) इनमें से कोई नहीं

[read more] (B) मेस्टा [/read]

72. बिहार के निम्नलिखित नगरों में से किस नगर में काच उद्योग केन्द्रित नहीं है:

(A) मरकुण्डा

(B) हाजीपुर

(C) भवानीनगर

(D) शाहपुर

[read more] (D) शाहपुर [/read]

73. बिहार में सूती वस्त्र उद्योग के केन्द्रों में निम्नलिखित में से किसे शामिल नहीं किया जाएगा?

(A) गया

(B) फुलवारी शरीफ

(C) शाहपुर

(D) मुजफ्फरपुर

[read more] (C) शाहपुर [/read]

74. बिहार का एकमात्र तेल शोधक निम्नलिखित में से किस स्थान पर है:

(A) मुंगेर

(B) बरौनी

(C) सिन्दरी

(D) डालमिया नगर

[read more] (B) बरौनी [/read]

75. बिहार में निम्नलिखित में से किस जिले में चीनी मिल नहीं है:

(A) मुजफ्फरपुर

(B) बांका

(C) सारण

(D) अरवल

[read more] (B) बांका [/read]

76. बिहार के कुछ नगरों व उससे सम्बन्धित उद्योगों के जोड़ प्रस्तुत हैं, गलत जोड़ा बताएं:

(A) हाजीपुर- प्लाईवुड उद्योग

(B) समस्तीपुर- कागज व लुग्दी उद्योग

(C) पूर्णिया- जूट उद्योग

(D) चकुलिया- खाद्य तेल उद्योग

[read more] (D) चकुलिया- खाद्य तेल उद्योग [/read]

77. बिहार राज्य के किस व्यक्तिगत प्रतिष्ठान के सर्वाधिक औद्योगिक संस्थान हैं:

(A) टाटा इन्जीनियरिंग कम्पनी

(B) रोहतास इण्डस्ट्रीज लिमिटेड

(C) हिन्द इन्जीनियरिंग कम्पनी

(D) इनमें से कोई नहीं

[read more] (B) रोहतास इण्डस्ट्रीज लिमिटेड [/read]

78. देश का सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग ग्राण्ड ट्रंक रोड बिहार में किस नाम से गुजरता है?

(A) एनएच-1

(B) एनएच-2

(C) एनएच-18

(D) एनएच-30

[read more] (B) एनएच-2 [/read]

79. बिहार में सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग कौन-सा है?

(A) एनएच-28

(B) एनएच-31

(C) एनएच-32

(D) एनएच-23

[read more] (B) एनएच-31 [/read]

80. विक्रमशिला पुल का निर्माण किस नदी पर हुआ है?

(A) गंगा

(B) सोन

(C) गण्डक

(D) कोसी

[read more] (A) गंगा [/read]

81. बिहार में रेल परिवहन की शुरुआत हुई:

(A) वर्ष 1855 में

(B) वर्ष 1860 में

(C) वर्ष 1865 में

(D) वर्ष 1870 में

[read more] (B) वर्ष 1860 में [/read]

82. रेल परिवहन की दृष्टि से बिहार का देश में कौन-सा स्थान है?

(A) दूसरा

(B) तीसरा

(C) चौथा

(B) वर्ष 1860 में

[read more] (B) वर्ष 1860 में [/read]

83. व्यावसायिक जल परिवहन के उद्देश्य से कहां एक जेट्टी बनाया गया है?

(B) वर्ष 1860 में

(C) मोकामा में

(B) भागलपुर में

(D) डिहरी में

[read more] (B) वर्ष 1860 में [/read]

84. जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा कहां स्थित है?

(A) पटना

(B) गया

(C) बिहटा

(D) मुजफ्फरपुर

[read more] (A) पटना [/read]

85. बिहार में पशुधन एवं दुग्ध उत्पादन का ग्रामीण आय में क्या योगदान है?

(A) दो-तिहाई

(B) एक-तिहाई

(C) एक-चौथाई

(D) आधा

[read more] (B) एक-तिहाई [/read]

86. विश्व में भारत का गौवंशीय पशु-सम्पदा में स्थान है:

(A) तीसरा

(B) दूसरा

(C) पहला

(D) छठा

[read more] (C) पहला [/read]

87. बिहार में सर्वाधिक मछली उत्पादक जिला कौन-सा है?

(A) पूर्णिया

(B) गया

(C) दरभंगा

(D) किशनगंज

[read more] (C) दरभंगा [/read]

88. राज्य में गायों-भैंसों की सर्वाधिक संख्या वाला जिला निम्न में कौन-सा नहीं है?

(A) पटना

(B) कटिहार

(C) भोजपुर

(D) गया

[read more] (B) कटिहार [/read]

89. बिहार में बकरियों तथा मुर्गियों-बत्तखों के मामले में प्रचुर संकेन्द्रण वाला जिला निम्न में कौन-सा है?

(A) कटिहार

(B) बेगूसराय

(C) जमुई

(D) वैशाली

[read more] (A) कटिहार [/read]

90. बिहार में जनसंख्या नियन्त्रण हेतु ‘बिहार राज्य जनसंख्या परिषद’ का गठन किसकी अध्यक्षता में किया गया है?

(A) मुख्यमंत्री

(B) उप मुख्यमंत्री

(C) विधानसभा अध्यक्ष

(D) कल्याण मंत्री

[read more] (A) मुख्यमंत्री [/read]

91. ‘मुस्कान-एक अभियान’ नामक कार्यक्रम है:

(A) गर्भवती माताओं के लिए

(B) बालिका शिक्षा के लिए

(C) प्रतिरक्षण के लिए

(D) स्वास्थ्य शिक्षा के लिए

[read more] (C) प्रतिरक्षण के लिए [/read]

92. डॉट्स प्रणाली द्वारा किस रोग का इलाज किया जाता है?

(A) दमा

(B) खसरा

(C) यक्ष्मा

(D) कुष्ठ

[read more] (C) यक्ष्मा [/read]

93. प्रति स्वास्थ्य केन्द्र सेवित जनसंख्या के मामले में अव्वल जिला है:

(A) भोजपुर

(B) बांका

(C) शिवहर

(D) गया

[read more] (C) शिवहर [/read]

94. चिकित्सा के क्षेत्र में अधिकतम प्रति व्यक्ति व्यय वाला जिला है:

(A) शेखपुरा

(B) भागलपुर

(C) गया

(D) पटना

[read more] (D) पटना [/read]

95. सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध तथा बालिका शिक्षा के पक्ष में आवाज उठाने हेतु विद्यालयों में चलाया जा रहा कार्यक्रम है

(A) मीना मच

(B) शिक्षा मंच

(C) उत्थान मंच

(D) सबला

[read more] (A) मीना मच [/read]

96. ‘मुख्यमंत्री अक्षर आंचल योजना’ है:

(A) निरक्षर महिलाओं के लिए

(B) निरक्षर बालिकाओं के लिए

(C) निरक्षर वरिष्ठ पुरुषों के लिए

(D) निरक्षर अल्पसंख्यकों के लिए

[read more] (A) निरक्षर महिलाओं के लिए [/read]

97. ‘लोहिया स्वच्छता योजना’ के अन्तर्गत अनुदान दिया जाता है:

(A) शौचालय निर्माण हेतु

(B) नालियों की सफाई व विकास हेतु

(C) सड़क सफाई हेतु

(D) स्वच्छता को बढ़ावा देने हेतु

[read more] (A) शौचालय निर्माण हेतु [/read]

98. राज्य के किस शहर में पर्यटकों के लिए गंगा नदी पर तैरते जलपान गृह की व्यवस्था की गई है?

(A) पटना

(B) भागलपुर

(C) मोकामा

(D) दीघा

[read more] (A) पटना [/read]

99. बिहार पर्यटन हेतु प्रकाशित निर्देश पुस्तिका का नाम है:

(A) बिहार जर्नी ए मेमोऑर

(B) ए जर्नी थ्रू बिहार

(C) बिहार टूरिज्म ए जर्नी

(D) न्यू लुक इन विहार

[read more] (B) ए जर्नी थ्रू बिहार [/read]

100. पटना स्थित गोलघर का निर्माण कब कराया गया?

(A) वर्ष 1719

(C) वर्ष 1786

(B) वर्ष 1772

(D) वर्ष 1795

[read more] (C) वर्ष 1786 [/read]

101. बोधि वृक्ष निम्न में कहां स्थित है?

(A) गया

(B) मुंगेर

(C) राजगीर

(D) नालन्दा

[read more] (A) गया [/read]

102. द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन कहां हुआ था?

(A) नालन्दा में

(B) राजगीर में

(C) वैशाली में

(D) बिहार शरीफ में

[read more] (C) वैशाली में [/read]

103. श्री हरमिन्दर साहिब स्थित है:

(A) पटना सिटी में

(B) पटना में

(C) मोकामा में

(D) छपरा में

[read more] (A) पटना सिटी में [/read]

104. बिहार में विश्व शान्ति स्तूप कहां स्थित है?

(A) पटना

(B) राजगीर

(C) नालन्दा

(D) गया

[read more] (B) राजगीर [/read]

105. राज्य का प्रसिद्ध अजगैबीनाथ मन्दिर कहां स्थित है?

(A) गया

(B) नालन्दा

(C) छपरा

(D) भागलपुर

[read more] (D) भागलपुर [/read]

106. भगवान महावीर का निर्वाण स्थल पावापुरी किस जिले में है?

(A) नवादा

(B) गया

(C) राजगीर

(D) नालन्दा

[read more] (D) नालन्दा [/read]

107. प्रसिद्ध ‘शेरशाह सूरी का मकबरा’ निम्न में कहां स्थित है?

(A) सासाराम में

(B) वैशाली में

(C) दरभंगा में

(D) नवादा में

[read more] (A) सासाराम में [/read]

108. वर्तमान में बिहार में साक्षरता दर क्या है?

(A) 69.83%

(C) 68.6%

(B) 62.6%

(D) 58.8%

[read more] (A) 69.83% [/read]

109. बिहार में सबसे कम साक्षरता वाला जिला कौन-सा है?

(A) सहरसा

(B) पूर्णिया

(C) सीतामढ़ी

(D) मधेपुरा

[read more] (B) पूर्णिया [/read]

110. नालन्दा मेडिकल कॉलेज की स्थापना कब हुई थी?

(A) वर्ष 1969

(B) वर्ष 1976

(C) वर्ष 1965

(D) वर्ष 1972

[read more] (A) वर्ष 1969 [/read]

111. बिहार में कुल महिला साक्षरता दर कितनी है?

(A) 53.57%

(B) 58.82%

(C) 62.10%

(D) 63.32%

[read more] (A) 53.57% [/read]

112. गाधी संग्रहालय कहां अवस्थित है?

(A) पटना में

(B) भागलपुर में

(C) मुजफ्फरपुर में

(D) गया में

[read more] (A) पटना में [/read]

113. प्राकृत जैन शास्त्र शोध संस्थान स्थित है:

(A) पटना मे

(B) गया में

(C) वैशाली में

(D) नालन्दा में

[read more] (C) वैशाली में [/read]

114. बिहार के महान् उर्दू साहित्यकार कौन थे? जिन्होंने ‘मैखाना-ए-इल्हाम’ नामक गजल संग्रह रचा था?

(A) शाह रुक्नुद्दीन

(B) शेख गुलाम अली

(C) अली मुहम्मद ‘शाद’

(D) सैयद फजल हक

[read more] (C) अली मुहम्मद ‘शाद’ [/read]

115. मैथिली बिहार के किस क्षेत्र में बहुतायत से प्रचलित है?

(A) पाटलिपुत्र क्षेत्र में

(B) तिरहुत क्षेत्र में

(C) रांची क्षेत्र में

(D) नालन्दा क्षेत्र में

[read more] (B) तिरहुत क्षेत्र में [/read]

116. बिहार में हिन्दी को सर्वाधिक महत्व देने वाले और हिन्दी का पथ प्रशस्त करने वाले अग्रिम व्यक्ति कौन थे?

(A) बाबू अयोध्या प्रसाद खत्री

(B) पण्डित चन्द्रशेखर मिश्र

(C) सदल मिश्र

(D) बाबू शिवनन्दन सहाय

[read more] (C) सदल मिश्र [/read]

117. बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् ‘पटना’ की स्थापना कब हुई थी?

(A) 1950 ई.

(B) 1940 ई.

(C) 1930 ई.

(D) 1920 ई.

[read more] (A) 1950 ई. [/read]

118. मंजुषा चित्र शैली किस क्षेत्र में लोकप्रिय थी?

(A) अंग क्षेत्र में

(B) संथाल क्षेत्र में

(C) नालन्दा क्षेत्र में

(D) पाटलिपुत्र क्षेत्र में

[read more] (A) अंग क्षेत्र में [/read]

119. पटना शैली के कलाकारों में सबसे पहला नाम किसका लिया जाता है?

(A) गुरसहाय लाल का

(B) जयरामदास का

(C) सेवकराम का

(D) शिवदयाल लाल का

[read more] (C) सेवकराम का [/read]

120. पाल चित्रकला शैली पर किसका प्रभाव रहा था?

(A) जैन कला का

(B) मुगल कला का

(C) हिन्दू कला का

(D) बौद्ध कला का

[read more] (D) बौद्ध कला का [/read]

121. मधुबनी चित्रकला का प्रमुख चित्रकार था:

(A) गोपाल

(B) सेवकराम

(C) लालचन्द

(D) भारतीदयाल

[read more] (D) भारतीदयाल [/read]

122. ‘मैला आंचल’ के नाम से चर्चित कौन था:

(A) कुंअरसिंह

(B) फणीश्वरनाथ ‘रेणु’

(C) रामवृक्ष बेनीपुरी

(D) रामनारायण सिंह

[read more] (B) फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ [/read]

123. मुजफ्फरपुर का मेला सम्बन्धित है:

(A) साहित्य वार्षिकोत्सव

(B) महादेव की पूजा

(C) सीता जन्म दिन आयोजन

(D) विवाह योग्य पुरुषों की प्रदर्शनी

[read more] (A) साहित्य वार्षिकोत्सव [/read]

124. पारसनाथ प्रसिद्ध है:

(A) शंकर मन्दिर के कारण

(B) जैन मन्दिर के कारण

(C) गर्म जल स्रोत के कारण

(D) भव्य इमारतों के कारण

[read more] (B) जैन मन्दिर के कारण [/read]

125. बिहार राज्य की प्रमुख प्रचलित भाषाओं में किसे शामिल नहीं किया जाता है?

(A) अवधी को

(B) मगधी को

(C) भोजपुरी को

(D) मैथिली को

[read more] (A) अवधी को [/read]

126. बिहार राज्य में आर्य मुण्डा परिवार की भाषाएं प्रचलित हैं। निम्न में से आर्य परिवार में की भाषा नहीं है:

(A) मैथिली

(B) मगधी

(C) अंगिका

(D) भोजपुरी

[read more] (C) अंगिका [/read]

127. मैथिली भाषा किस जिले की प्रमुख भाषा है:

(A) मुजफ्फरपुर

(B) पटना

(C) सारण

(D) दरभगा (पुराना)

[read more] (B) पटना [/read]

128. भोजपुरी भाषा बोलने वाले प्रमुख जिलों में किस जिले को शामिल नहीं किया जाता है:

(A) भोजपुर

(B) सारण

(C) पूर्वी चम्पारण

(D) पटना

[read more] (D) पटना [/read]

129. मगधी भाषा निम्नलिखित में से किन-किन जिलों में बोली जाती है:

(A) शिवहर व पटना

(B) चम्पारण व सारण

(C) शिवहर व सारण

(D) दरभंगा व भागलपुर

[read more] (A) शिवहर व पटना [/read]

130. मैथिली भाषा के प्रमुख कवि कौन थे:

(A) ग्रियर्सन

(B) ईशान

(C) विद्यापति

(D) दिनकर

[read more] (C) विद्यापति [/read]

131. दक्षिणी बिहार में सर्वाधिक प्रयुक्त की जाने वाली भाषा कौन-सी है:

(A) भोजपुरी

(B) अंगिका

(C) मगधी

(D) मैथिली

[read more] (B) अंगिका [/read]

132. बिहार में मोइनुल हक स्टेडियम कहां अवस्थित है?

(A) पटना

(B) गया

(C) मुजफ्फरपुर

(D) हाजीपुर

[read more] (A) पटना [/read]

133. बिहार राज्य खेल प्राधिकरण का गठन कब हुआ?

(A) 31 जुलाई, 1980

(B) 31 जुलाई, 1982

(C) 31 जुलाई, 1986

(D) 31 जुलाई, 1989

[read more] (C) 31 जुलाई, 1986 [/read]

134. राज्य के छपरा जिला स्थित स्टेडियम का नाम है:

(A) राजेन्द्र स्टेडियम

(B) जगजीवनराम स्टेडियम

(C) इन्दिरा गांधी स्टेडियम

(D) वीर कुंवर सिंह स्टेडियम

[read more] (A) राजेन्द्र स्टेडियम [/read]

135. बिहार राज्य क्रिकेट संघ का गठन कब हुआ?

(A) वर्ष 1930

(C) वर्ष 1935

(B) वर्ष 1932

(D) वर्ष 1937

[read more] (D) वर्ष 1937 [/read]

136. गवर्नर्स गोल्ड कप ट्रॉफी सम्बन्धित है:

(A) फुटबॉल से

(B) बेसबॉल से

(C) तीरंदानी से

(D) हॉकी से

[read more] (A) फुटबॉल से [/read]

137. बिहार के प्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी है।

(A) दिव्येन्दु बरुआ

(B) रंजन प्रकाश

(C) दुर्गासिंह

(D) रामेश्वरलाल

[read more] (A) दिव्येन्दु बरुआ [/read]

138. राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी सुखदेव सिंह सम्बन्धित है:

(A) भारोत्तोलन से

(B) हॉकी से

(C) तीरंदानी से

(D) एथलेटिक्स से

[read more] (A) भारोत्तोलन से [/read]

139. राज्य में हॉकी के लिए दिया जाने वाला ट्रॉफी है:

(A) रिपब्लिक शील्ड

(B) कजन्स कप

(C) प्रेसीडेन्ट कप

(D) हेमन्त ट्रॉफी

[read more] (B) कजन्स कप [/read]

140. बिहार में मण्डन मिश्र पुरस्कार दिया जाता है:

(A) धर्म एवं दर्शन क्षेत्र में

(B) राजनीतिशास्त्र क्षेत्र में

(C) अर्थशास्त्र क्षेत्र में

(D) विधि साहित्य क्षेत्र में

[read more] (A) धर्म एवं दर्शन क्षेत्र में [/read]

141. गोपालसिंह नेपाली पुरस्कार का सम्बन्धित क्षेत्र है:

(A) बाल साहित्य

(B) समालोचना

(C) नवगीत

(D) हिन्दी सेवा

[read more] (C) नवगीत [/read]

142. फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ स्मृति पुरस्कार किस विधा के लिए दिया जाता है?

(A) उपन्यास एवं कहानी

(B) आंचलिक कथा

(C) काव्य

(D) नाटक एवं रंगमंच

[read more] (B) आंचलिक कथा [/read]

143. अर्थशास्त्र विधा के क्षेत्र में दिया जाने वाला पुरस्कार कौन-सा है?

(A) आर्य भट्ट पुरस्कार

(B) चाणक्य पुरस्कार

(C) अमरनाथ झा पुरस्कार

(D) गोरखनाथ सिंह पुरस्कार

[read more] (D) गोरखनाथ सिंह पुरस्कार [/read]

144. राज्य में ललित निबन्ध, संस्मरण एवं यात्रा वृतान्त के लिए कौन-सा पुरस्कार दिया जाता है?

(A) शिवपूजन सहाय पुरस्कार

(B) भिखारी ठाकुर स्मृति पुरस्कार

(C) मण्डन मिश्र पुरस्कार

(D) विद्यापति पुरस्कार

[read more] (A) शिवपूजन सहाय पुरस्कार [/read]

145. जन-नायक कर्पूरी ठाकुर पुरस्कार दिया जाता है

(A) नवगीत

(B) समालोचना

(C) हिन्दी सेवा

(D) बाल साहित्य

[read more] (C) हिन्दी सेवा [/read]

146. बिहार में सर्वप्रथम रुपए के सिक्के का प्रचलन आरम्भ किसने किया था?

(A) शेरशाह ने

(B) हुमायूं ने

(C) लॉर्ड कार्नवालिस ने

(D) बख्तियार खिलजी ने

[read more] (A) शेरशाह ने [/read]

147. बिहार के प्रथम राज्यपाल निम्न में कौन थे?

(A) माधव श्रीहरि अण्णे

(B) जयरामदास दौलतराम

(C) डॉ. जाकिर हुसैन

(D) नित्यानन्द कानून

[read more] (B) जयरामदास दौलतराम [/read]

148. विश्व में प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन कहां हुआ था?

(A) पावापुरी

(B) पाटलिपुत्र

(C) राजगृह

(D) वैशाली

[read more] (C) राजगृह [/read]

149. बिहार में ऑपरेशन टास्क फोर्स चलाया गया:

(A) नक्सलवादियों के उन्मूलन हेतु

(B) माफिया गिरोहों के सफाया हेतु

(C) खाद्य पदार्थ में मिलावट रोकने हेतु

(D) वन तस्करों से निजात हेतु

[read more] (A) नक्सलवादियों के उन्मूलन हेतु [/read]

150. निम्न में से ‘बाबूजी’ उपनाम किसका था?

(A) नागार्जुन का

(B) डॉ. राजेन्द्रप्रसाद का

(C) डॉ. श्रीकृष्णन सिंह का

(D) जगजीवनराम का

[read more] (D) जगजीवनराम का [/read]

151. बिहार में पहली ऑन लाइन पंचायत का शुभारम्भ किस जिले में हुआ?

(A) पश्चिम चम्पारण

(B) पूर्वी चम्पारण

(C) बेतिया

(D) वैशाली

[read more] (A) पश्चिम चम्पारण [/read]

152. बिहार का प्रथम अंग्रेजी भाषा का दैनिक अखबार था

(A) सर्चलाइट

(B) इण्डियन नेशन

(C) हिन्दुस्तान टाइम्स

(D) टाइम्स ऑफ इण्डिया

[read more] (A) सर्चलाइट [/read]

153. बिहार में हिन्दी दैनिक आर्यावर्त अखबार का प्रकाशन कब आरम्भ हुआ

(A) वर्ष 1880

(B) वर्ष 1938

(C) वर्ष 1941

(D) वर्ष 1947

[read more] (C) वर्ष 1941 [/read]

154. बिहार में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा कौन-सी है?

(A) भोजपुरी

(B) बांग्ला

(C) मैथिली

(D) मगदी

[read more] (C) मैथिली [/read]

155. निम्न में कौन ‘भारत रत्न’ से अलंकृत बिहार विभूति नहीं है?

(A) डॉ. जाकिर हुसैन

(B) जे. आर. डी. टाटा

(C) बिस्मिल्ला खां

(D) डॉ. श्रीकृष्ण सिंह

[read more] (D) डॉ. श्रीकृष्ण सिंह [/read]

156. देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्रप्रसाद का जन्म स्थल कौन-सा है?

(A) जीरादेई

(B) सिताबवियरा

(C) बिसफी

(D) मैगरा

[read more] (A) जीरादेई [/read]

157. राज्य का प्रथम खगोलीय वेधशाला, इन्दिरा गांधी तारामण्डल कहां स्थित है?

(A) गया

(B) मुजफ्फरपुर

(C) आरा

(D) पटना

[read more] (D) पटना [/read]

158. संयुक्त राष्ट्र के सेमिनार में भाग लेने वाली बिहार की पहली महिला कौन हैं?

(A) गिरिजा देवी

(B) शान्ति देवी

(C) सीता देवी

(D) गंगा देवी

[read more] (A) गिरिजा देवी [/read]

159. विश्वविख्यात शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खां की जन्म स्थली है:

(A) उत्तर प्रदेश

(B) बिहार

(C) मध्य प्रदेश

(D) राजस्थान

[read more] (B) बिहार [/read]

160. निम्न में से किसकी याद में 10 सितम्बर को राज्य में ‘बलिदान दिवस’ मनाया जाता है?

(A) बाबू कुंअर सिंह

(B) शीलभद्र याजी

(C) अब्दुल हमीद

(D) चुनचुन पाण्डेय

[read more] (C) अब्दुल हमीद [/read]

161. बौद्ध भिक्षु बुद्ध घोष का जन्म कहां हुआ था?

(A) नालन्दा में

(B) वैशाली में

(C) राजगीर में

(D) बोध गया में

[read more] (D) बोध गया में [/read]

162. समाचार-पत्र ‘The Motherland’ का प्रकाशन शुरू किया था:

(A) मौलान मजहरूल हक

(B) प्रफुल्ल चन्द चाकी

(C) बाबू कुंअर सिंह

(D) हसन इमाम

[read more] (A) मौलान मजहरूल हक [/read]

163. निम्न में से किसके सम्मान में राज्य में 1 जुलाई को ‘चिकित्सा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है?

(A) विधानचन्द्र रॉय

(B) मुहम्मद युनुस

(C) बृज किशोर प्रसाद

(D) शत्रुघ्न डांगी

[read more] (A) विधानचन्द्र रॉय [/read]

164. निम्न में से किसने भारतीय संविधान की मूल प्रति का डिजाइन बनाया?

(A) उपेन्द्र महारथी

(B) नन्दलाल बसु

(C) ईश्वरी प्रसाद वर्मा

(D) मोहनलाल महतो

[read more] (B) नन्दलाल बसु [/read]

165. ‘हर्षचरित’ कृति के रचनाकार हैं:

(A) बाणभट्ट

(B) अश्वघोष

(C) नागार्जुन

(D) विद्यापति

[read more] (A) बाणभट्ट [/read]

166. चन्द्रगुप्त मौर्य के राजगुरु चाणक्य की कृति है:

(A) अर्थशास्त्र

(B) राजतरंगिणी

(C) पदावली

(D) बीजगणित

[read more] (A) अर्थशास्त्र [/read]

167. पाटलिपुत्र नामक नगर की स्थापना किसने की थी?

(A) अजातशत्रु

(B) उदयन

(C) बिम्बिसार

(D) बिन्दुसा

[read more] (B) उदयन [/read]

168. शेरशाह एवं हुमायूं के बीच चौसा का युद्ध हुआ था:

(A) वर्ष 1532

(B) वर्ष 1536

(C) वर्ष 1539

(D) वर्ष 1542

[read more] (C) वर्ष 1539 [/read]

169. खालसा पंथ की स्थापना किसने की थी?

(A) गुरु तेगबहादु

(B) गुरु नानक

(C) गुरु हरराम

(D) गुरु गोविन्द सिंह

[read more] (D) गुरु गोविन्द सिंह [/read]

170. ‘इण्डिया डिवाइडेड’ नामक पुस्तक के लेखक कौन हैं?

(A) महात्मा गांधी

(B) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

(C) प्रो. अब्दुल बारी

(D) डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा

[read more] (B) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद [/read]

171. निम्न में से किसे ‘बिहार केसरी’ कहा जाता है?

(A) डॉ. श्रीकृष्ण सिंह

(C) अनुग्रह नारायण सिंह

(B) डॉ. विधानचन्द्र रॉय

(D) बाबू जगजीवन राम

[read more] (A) डॉ. श्रीकृष्ण सिंह [/read]

172. निम्न में कौन विश्व प्रसिद्ध मधुबनी पेन्टिंग से सम्बन्धित नहीं है?

(A) शान्ति देवी

(B) जगदम्बा देवी

(C) सीता देवी

(D) जोगेश्वरी देवी

[read more] (D) जोगेश्वरी देवी [/read]



Read More:

1. बिहार : सामान्य जानकारी

2. बिहार का प्राकृ‌तिक प्रदेश / भौतिक इकाई

3. बिहार की जलवायु

4. बिहार के भौगोलिक इकाई का आर्थिक विकास पर प्रभाव

5. बिहार की मिट्टियाँ

6. बिहार में सूखा

7. बिहार में बाढ़

8. बिहार का औद्योगिक पिछड़ापन

9. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण

10. बिहार का औद्योगिक प्रदेश

11. बिहार का कृषि प्रदेश

12. बिहार में कृषि आधारित उद्योग

13. बिहार में चीनी उद्योग

14. सिन्दरी उर्वरक उद्योग

15. बिहार की जनजातीय समस्या एवं समाधान

16. बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप

17. पटना नगर नियोजन/पटना का मास्टर प्लान

18. बिहार में नगरीकरण

19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर

16. Rural Settlement Pattern in Bihar (बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप)

16. Rural Settlement Pattern in Bihar

(बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप)



प्रश्न प्रारूप

Q. बिहार में ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूप की व्याख्या कीजिए।

    वह अधिवासीय क्षेत्र जहाँ की 2/3 जनसंख्या प्राथमिक उत्पादन गतिविधि में संलग्न हो, वैसे बस्ती को ग्रामीण बस्ती कहते हैं। ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप के अन्तर्गत ग्रामीण बस्तियों के आकृतियों का अध्ययन किया जाता है।

    प्रतिरूप का निर्धारण मकानों एवं मार्गों की स्थिति और उनका क्रमिक व्यवस्था के आधार पर सुनिश्चित किया जाता है।

ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप के भौगोलिक कारक

        ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप पर दो भौगोलिक कारकों  का प्रभाव पड़ता है।:-

(1) भौतिक कारक और

(ii) सांस्कृतिक कारक।

       भौतिक कारक के अन्तर्गत कुंआ, तालाब, पोखर, (कच्चा मिट्टी) टीले, भूमि का ढाल, सीढ़ीनुमा, ढाल की आकृति, भूमिगत जलस्तर, दलदली भूमि इत्यादि प्रमुख हैं। जबकि सांस्कृतिक कारक के अन्तर्गत ऐतिहासिक घटना क्रम, सड़क एवं गलियों के नियोजित एवं अनियोजित प्रारूप, खेतों का प्रतिरूप, ग्रामीण धार्मिक संस्थाएँ, जातिय संरचना इत्यादि को शामिल करते है। 

        ग्रामीण क्षेत्रों में गाँव से गुजरने वाली सड़के एवं गलियाँ ग्रामीण बस्तियों के आतंरिक विन्यास के ढाँचे को सुनिश्चित करते है। भौतिक एवं सांस्कृतिक कारकों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बिहार में ग्रामीण बस्तियों के निम्नलिखित प्रतिरूप पाये जाते हैं-

(1) रेखीय प्रतिरूप या रीबन प्रतिरुप:-

     किसी सड़‌क या नदी या नहर के किनारे-2 बसे हुए मकानों की बस्तियाँ रेखीय ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप का निर्माण करती है। अगर गाँव से सड़‌क गुजर रहा हो तो ग्रामीण बस्ती के लोग अपने घर का द्वार सड़‌क या गली की ओर बनाते हैं। जबकि कोई नहर या नदी के किनारे रेखीय प्रतिरूप का विकास हुआ तो लोग अपने घर के दरवाजे जलाशय के विपरीत दिशा में बनाते हैं। अरबल जिला के अवगिल्ला गाँव नहर के किनारे विकसित हुआ है जो रेखीय प्रतिरूप का एक अच्छा उदाहरण है।

Rural Settlement Pattern

चित्र: रेखीय प्रतिरूप

⇒ गहमर UP और बिहार के सीमा पर भारत का सबसे बड़ा गाँव है।

(2) अरीय त्रिज्या प्रतिरूप:-

          अरीय त्रिज्या प्रतिरूप के गाँवों में कई ओर से सड़क मार्ग गाँवों में आकर मिलते हैं।

चित्र: अरीय त्रिज्या प्रतिरूप

      मुख्य सड़कें आपस में पतली-2 गलियों से जुड़े रहते है। मकान और घर गलियों एवं सड़‌कों के किनारे बने होते हैं।  बिहार के मैदानी क्षेत्रों में ऐसा ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप के अनेक उदा० मिलते है।

(3) तारा प्रतिरूप:-

     यह अरील त्रिज्या प्रतिरूप का विकसित स्वरूप है। जैसे:- अरीय प्रतिरूप वाले ग्रामीण बस्ती के लोग जब मुख्य सड़‌कों के किनारे घर बना लेते हैं तो तारा प्रतिरूप वाले ग्रामीण बस्ती का विकास होता है।

चित्र: तारा पतिरूप

      तारा प्रतिरूप का उदाहरण कोशी नदी घाटी में अधिक देखने को मिलती है।

(4) वृताकार प्रतिरूप:-

      जब किसी ग्रामीण बस्ती का विकास किसी तालाब या पुरानी हवेली या खण्डहर या धार्मिक स्थल या जमींनदार के घर के चारों ओर घर बन जाते हैं तो वृताकार प्रतिरूप का विकास होता है।

उदा० – लखिसराय के बेला गाँव

चित्र: वृताकार प्रतिरूप

(5) त्रिभुजाकार प्रतिरूप:-

      सड़कों के त्रिमुहानी पर या नदियों के संगम पर त्रिभुजाकार प्रतिरूप वाले ग्रामीण बस्ती विकसित होते हैं। इसका उदाहरण गया, औरंगाबाद, नवादा, बांका जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जा सकता है।

चित्र: त्रिभुजाकार प्रतिरूप

(6) L प्रतिरूप:-

      जब सड़के एक-दूसरे से समकोण पर मिलती है और वहाँ ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपना अधिवासीय घर केवल दो सड़क के किनारे बना लेते हैं तो L-आकार के प्रतिरूप का विकास होता है।

उदा०- बख्तियारपुर

चित्र:- L-प्रतिरूप

(7) अनाकार प्रतिरूप

      ऐसे बस्तियों का निर्माण साधारणत: मार्गों के निर्माण के पूर्व होता है। ऐसे बस्तियों का कोई आकार नहीं होता है। बिहार में ऐसे अधिवासीप प्रतिरूप का उदा० सबसे ज्यादा मिलता है।

     उपरोक्त प्रतिरूप के अलावे बिहार में कई अन्य प्रतिरूप के बस्ती मिलते हैं। जैसे- तीर प्रतिरुप, T-आकार के प्रतिरूप, अर्द्धवृताका प्रतिरूप इत्यादि महत्वपूर्ण है। ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूप के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि ग्रामीण प्रतिरूप के विकास में भौगोलिक काकों का योगदान सबसे अधिक होता है।



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19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर

15. Bihar’s Tribal Problem and Solution (बिहार की जनजातीय समस्या एवं समाधान)

15. Bihar’s Tribal Problem and Solution

(बिहार की जनजातीय समस्या एवं समाधान)



प्रश्न प्रारूप

Q.1 बिहार में जन‌जातियों की मुख्य समस्याओं एवं उसके निवारण की व्याख्या कीजिए।

Q.2 बिहार की आदिवासी जनसंख्या की विभिन्न विशेषताओं एवं उनके पिछड़ेपन के आधारभूत कारकों के बारे में लिखिए।

Q.3  बिहार की जनजातियों की समस्याओं एवं समाधान की व्याख्या कीजिए।

     जनजाति प्राय: आदिवासी, वनवासी, सरल समाज, आदिम समाज, अनुसूचित जनजाति इत्यादि के नाम से जाने जाते हैं। यह एक ऐसा मानवीय समूह है जो दूर दराज के क्षेत्रों में एकांकी जीवन जीता है। वर्तमम बिहार में जनजातियों की कुल जनसंख्या मात्र 1 % है। बिहार के अधिकांश जनजातीय समाज नवगठित झारखण्ड राज्य में चले गये हैं।

     वर्तमान बिहार में संथाल परगणा से आये हुए कुछ संथाली जनजाति के लोग सहरसा, पूर्णिया, किशनगंज, भागलपुर, मंगेर, कटिहार इत्यादि जिलों में निवास करते हैं। बिहार के तराई क्षेत्रों में थारू जनजाति के लोग निवास करते हैं। इसी तरह कैमूर क्षेत्र में खैरवार खैरवार जनजाति के लोग पाये जाते हैं। जनजाति की सामान्य विशेषताएँ निम्नलिखित है:-

जनजातियों की विशेषताएँ

(1) मध्य भारत में मिलने वाले जनजाति प्रोटो ऑस्ट्रेलॉयड प्रजाति के हैं जबकि हिमालय प्रदेश में निवास करने वाले जनजाति मंगोलायड प्रजाति के है।

(2) ये क्रमशः ऑस्ट्रिक भाषा और तिब्बती-चीनी भाषा का प्रयोग करते हैं।

(3) ये एकांकी जीवन जीते है। इनका निवास स्थान प्रायः घने जंगल, पर्वत, पहाड़, पठार और नदी घाटी क्षेत्र में देखने को मिलता है।

(4) इनका समाज टोटम के आधार पर गोत्र में विभक्त होता है।

(5) ये गोत्र बहिर्विवाही होते हैं। इनके समाज में वधू मूल्य की प्रथा पायी जाती है।

(6) धर्म के दृष्टिकोण से ये आत्मावादी, प्रकृतिवादी, जीववादी और बोंगावादी होते हैं। जादू-टोना में अधिक विश्वास करते हैं।

(7) इसमें विनिमय का कार्य वस्तु विनिमय और उत्सवी विनिमय के रूप में होता है।

(8) समाज में नातेदारी व्यवस्था की भूमिका अधिक होती है। 

(9) इनका स्वतंत्र और विशिष्ट जनजातीय पहचान होती है। ये राज्यविहीन के उदाहरण है।

जनजातीय समस्याओं के कारण

     स्वीकृत बिहार के जनजातीय समाज कई समस्याओं से ग्रसित है जिसके लिए कई कारण जिम्मेदार माने जाते हैं:-

(1) औद्योगिकीकरण एवं शहरीकरण

(2) जलवायु परिर्वतन

(3) सामाजिक सांस्कृतिक सम्पर्क

(4) कनीय कानून एवं नीतियाँ

(5) जनजातीय समाज में व्याप्त निरक्षरता

(6) आधुनिक लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था

(7) प्रशासनिक राजनीतिक एवं माफियाओं गठजोड़

(8) परम्परागत जनाजातीय संस्कृति

(9) गैर जनजातीय समाज के प्रति गलत नजरिया

      उपरोक्त कारणों के चलते जनजातियों निम्मलिखित समस्याओं का अभ्युदय हुआ है-

(1) वातावरणीय समस्या

(2) सामाजिक समस्या

(3) सांस्कृतिक समस्या

(4) आर्थिक समस्या

(5) राजनैतिक समस्या

(6) जैविक समस्या

(7) मनोवैज्ञानिक समस्या

(1) वातावरणीय समस्या:-

        जनजातीय समाज प्राय: कठोर एवं प्रतिकूल वातावरण में निवास करती है। ऐसे क्षेत्रों में पहुंच पाना आसान नहीं होता है जिसके कारण जनजातीय क्षेत्रों में परिवहन साधनों का विकास नहीं हो सका है। प्रति इकाई विकास की लागत अधिक आती है। विकास के लिए यहाँ उच्च तकनीक आवश्यकता पड़ती है, इसलिए यहाँ प्रति इकाई लाभ की प्राप्ति सीमित होती है। जनजातिय समाज वनों को काटकर झूम कृषि करते हैं। इसलिए उनके क्षेत्रों में वनीय ह्रास की समस्या उत्पन्न हुई है।

       कृषि के लिए भूमिगत जल दोहन के कारण भूमिगत जल स्तर गिरता जा रहा है। औद्योगिकीकरण एवं शहरीकरण के कारण सतही जल प्रदूषण के शिकार है। वैश्विक तापन के कारण अनेक क्षेत्रों में भूमि तापन की समस्या उत्पन्न हो रही है। उनके क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक सम्पदा पाये जाते हैं जिसका राष्ट्रीय स्तर पर दोहन किये जाने के कारण भूमि अपरदन की समस्या और प्राकृतिक संपदा ह्रास की समस्या उत्पन्न हो रही है। बड़े-बड़े उद्योग एवं बहुद्देशीय नदी घाटी परियोजना के कारण विस्थापन एवं पुनर्वास की गंभीर समस्याएं देखी जा सकती है।

(2) सामाजिक समस्याएँ:-

     जनजातीय समाज आज कई समस्याओं से ग्रसित है। जैसे- इनमें संयुक्त परिवार की परम्परा टूट रही है। परिवार में बूढ़े एवं बुजुर्गो की सम्मान घट रही है। बधूमूल्य के स्थान पर दहेज प्रथा प्रचलन प्रारंभ हो चुका है। मुण्डा, उराँव, हो, संथाल में जनसंख्या वृद्धि की दर काफी तीव्र है जबकि बंजारन समाज की समस्या ह्रास की ओर अग्रसर है। इनके समाज में मध्यपान से समस्या काफी गंभीर है। साक्षरता का स्तर काफी निम्न है। महिला साक्षरता 3% से भी कम है। इनके समाज में अनेक प्रकार की सामाजिक बुराइयाँ भी स्थायी रूप से घर बना चुकी है। जिनमें वेश्यावृति की समस्या, भिश्वावृति की समस्या प्रमुरख है।

(3) सांस्कृतिक समस्याएँ:-

     वेरियर एल्विन महोदय ने कहा था कि जनजातीय संस्कृति धीरे-2 विलुप्त होते जा रही है। इसका तात्पर्य है कि जनजातीय समाज अपने संस्कृति का परित्याग कर दूसरे की संस्कृति को अपनाने लगे हैं। इनके समाज में गैर जनजातीय धार्मिक संस्थान स्थायी रूप से निवास करते हुए धार्मान्तरण का कार्य करते हैं जिससे साम्प्रदायिक महौल का निर्माण हुआ है।

     गैर जनजातीय समाज के कुछ लोग उनके क्षेत्र में जाकर नक्सलवाद की समस्या को जन्म दिया है। उनके समाज में धार्मिक एवं जादूई पम्परा की गहरी जड़े है। इसलिए ये ज्यादा अंधविश्वासी, जादूटोना, मुण्डाखेट जैसे परम्पराओं में विश्वास करते है। गैर जनजातीय भाषा को अपनाये जाने के कारण द्विभाषावाद की समस्या उत्पन्न हुई, जनजातीय नृत्य, संगीत, स्थापत्य कला, वास्तुकला इत्यादि की वास्तविक पहचान न किये जाने के कारण ये पतन की ओर है।

(4) आर्थिक समस्याएँ:-

    भूमि हरण, ऋग्रस्ता, बन्धुआ मजदूरी इत्यादि की इनमें गंभीर समस्याएँ है। गैर-जनजातीय समाज की तरह इनके समाज में भी गरीबी एवं बेरोजगारी की समस्या मौजूद है। जनजातीय क्षेत्रों में चलने वाले औद्योगिक प्रतिष्ठानों में इनकी भागीदारी बहुत कम है। जनजातीय समाज के द्वारा उत्पन्न किये गये उत्पादों का सही तरीके से विपणन का कार्य नहीं होने के कारण उन्हें वास्तविक मूल्य नहीं मिल पाता है। गैर जनजातीय समाज उनके आर्थिक शोषण में लगा हुआ है। इसलिए गैर जनजातीय समाज को वे  ‘दिकू’ से संबोधित करते हैं।

(5) राजनीतिक समस्याएँ:-

       नवीन लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण परम्परागत जनजातीय परिषद, बुजुर्ग परिषद, युवा गृह इत्यादि विलुप्त होते जा रहे हैं और उसके स्थान पर जटिल राजनीतिक व्यवस्था की जड़े गहरी होती जा रही है। जटिल राजनीतिक व्यवस्था उनके समझ से परे हैं। न्यायपालिका उन्हें न्याय देने में सक्षम नहीं हो पाती है। प्रशासनिक तंत्र में लगे हुए लोग उनके रक्षक कम भक्षक ज्यादा है। उनके समाजों में भी क्षेत्रवाद, नये राज्य, आरक्षण जैसे राजनीतिक मुद्दों को लेकर अक्सर आंदोलित होते रहते हैं।

(6) जैविक समस्याएँ:-

     जनजातीय समाज मे कुपोषण एवं प्रोटीन अल्पता की गंभीर समस्याएँ हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के प्रति ज्ञानाभाव के कारण उनमें कई गंभीर संक्रामक बीमारियाँ, सफाई, पेयजल इत्यादि से संबंधित समस्याएँ पायी जाती हैं। वनों से खाद्य- पदार्थों के संग्रहण एवं शिकार पर रोक, झूम कृषि पर रोक, परम्परागत तकनीक इत्यादि के कारण खाद्यान्न संकट की समस्या उत्पन्न हुई है। बाल मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर काफी उच्च है।

(7) मनोवैज्ञानिक समस्याएँ:-

      जनजातीय समाज जहाँ उपरोक्त समस्याओं से पीड़ित है वहीं गैर जनजातीय समाज के द्वारा किये जा रहे विकास को देखकर वह भौंचक है। उनमें गंभीर अवसाद (Depression) की समस्या देखी जा सकती है। इसी अवसाद का परिणाम है कि वे अन्य समाजों को शक की दृष्टि से देखते है।

जनजातीय समस्याओं का निवारण

     जनजातीय समस्यायों के निवारण हेतु प्रथम पंचवर्षीय योजना से ही सतत प्रयास किये जाते रहे हैं। जैसे:- 1954 ई० में जनजातीय विकास प्रखण्ड का गठन किया गया था जिसका उद्देश्य था- जनजातीय प्रदेश के विकास को और तीव्र करन।

     चौथी पंचवर्षीय योजना में जनजातीय उपयोजना चलाया गया जिसका उद्देश्य निम्नलिखित है:-
(1) पारिवारिक लाभ की योजना को प्रारंभ कर लोगों को निर्धनता रेखा के ऊपर उठाना। इस उद्देश्य के आपूर्ति हेतु कुकुट पालन (मुर्गा, बतख), सुअर पालन, पशुपालन, सब्जी एवं फल कृषि, कुटीर उद्योग, उद्योग के लिए ब्याज मुक्त ऋण की व्यवस्या और उसपर भी 80% सब्सीडी दी गयी।

(2) उनके आर्थिक-सामाजिक वातावरणीय परिस्थितियों में सुधार लाना। उनकी भूमि की वापसी, साहुकारों के ऋण जनजाल से बचाना, प्रदूषित देशी शराब के सेवन पर प्रतिबंध और वन संरक्षण ये संबंधित कार्यक्रम चलाये गये।

(3) प्राथमिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, महिला साक्षरता इत्यादि को बढ़ावा देकर जनजातीय क्षेत्रों में मानवीय संसाधनों का विकास करना।

(4) वैसे जनजातीय समाज जो जनसंख्या ह्रास की समस्या से ग्रसित है उन्हें संरक्षण प्रदान करना।

      पांचवी पंचवर्षीय योजना के दौरान जनजातीय समाज को जनजातीय प्रादेशिक योजना के तहत शामिल किया गया। छठी पंचवर्षीय योजना में ‘मारजिनल एरिया डेवलपमेन्ट एजेन्सी’ की स्थापना की गई। साथ समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) का अंग बनाया गया।

     सातवी पंचवर्षीय योजना के दौरान जवाहर रोजगार योजना, इंदिरा आवास योजना के माध्यम से उन्हें लाभ पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया।

      जनजातीय प्रदेशों में कई कल्याणकारी कार्यक्रम भी चलाये जा रहे हैं। साक्षरता विकास के लिए संथाल परगणा में विशेष कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। जनजातीय बाजारों की स्थापना की जा रही है। स्कूल एवं कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृति प्रदान की जाती है। रोजगार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए आरक्षण की सुविधा प्रदान की गई है। जनजातीय समस्याओं पर अनुसंधान करने के लिए राँची में जनजातीय अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गई है।

     गैर सरकारी प्रयास भी किये जा रहे हैं। जैसे ‘टाटा ग्रुप’ और ‘सेल’ जैसे संस्थाओं ने शिक्षा, रोजगार एवं खेलकूद को बढ़ावा दे रहा है। कई NGO एवं धार्मिक मिशनरियों इनके क्षेत्रों में आकर शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है।

निष्कर्ष

     इस तरह ऊप के तथ्यों से स्पष्ट है कि जनजातीय समाज जहाँ कई समस्याओं से पीड़ित है वहीं उन समस्याओं पर कार्यक्रम चलाक चतुर्दिक प्रहार किया जा रहा है ताकि उन्हें समस्याओं से मुक्त किया जा सके।

Tribal Problem and Solution



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5. बिहार की मिट्टियाँ

6. बिहार में सूखा

7. बिहार में बाढ़

8. बिहार का औद्योगिक पिछड़ापन

9. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण

10. बिहार का औद्योगिक प्रदेश

11. बिहार का कृषि प्रदेश

12. बिहार में कृषि आधारित उद्योग

13. बिहार में चीनी उद्योग

14. सिन्दरी उर्वरक उद्योग

15. बिहार की जनजातीय समस्या एवं समाधान

16. बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप

17. पटना नगर नियोजन/पटना का मास्टर प्लान

18. बिहार में नगरीकरण

19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर

17. Master Plan of Patna/Patna City Planning (पटना का मास्टर‌ प्लान/पटना नगर‌ नियोजन)

17. Master Plan of Patna/Patna City Planning

(पटना नगर‌ नियोजन/पटना का मास्टर‌ प्लान)



Master Plan of Patna

प्रश्न प्रारूप

Q.1 पटना नगर विकास से संबंधित नियोजन के लिए विचारणीय भौगोलिक अभिकर्ताओं का विश्लेषण कीजिए। 

Q.2 पटना नगर विकास से संबंधित नियोजन के लिए भौगोलिक कारकों की चर्चा करें।

Q.3 बिहार का किसी नगर जिसका आपने अध्ययन किया है। उसकी आकारिकी की व्याख्या कीजिए और नगर आकारिकी के लिए कौन-सा मॉडल उपयुक्त है।

Q.3 बिहार के एक न‌गर की आकारिकी पर प्रकाश डालिए।

      गैलीयन महोदय ने नगर नियोजन का तात्पर्य बताते हुए कहा था कि नगर में अधिवासित लोगों के स्वास्थ, सम्पति एवं सौदर्य का संतुलित विकास किया जाना नगर नियोजन कहलाता है। इसके अन्तर्गत भूमि उपयोग, सार्वजनिक सुविधा, पर्यावरण, परिवहन तथा मनोरंजन केन्द्रों का संतुलित विकास किया जाता है।

     कोई भी नगर मानवीय जनसंख्या का जमघट होता है। ऐसे स्थानों पर अधिवासीय अव्यवस्था न हो इसलिए नियोजन का कार्य किया जाता है। भारत में नगर नियोजन का इतिहास काफी पुरानी है। भारत में नगर नियोजन की शुरुआत सिन्धु नदी घाटी सभ्यता के नगरों से प्रारंभ मानी जाती है। लेकित आधुनिक नगर नियोजन का इतिहास 1863 ई० से प्रारम्भ माना जाता है, क्योंकि इंगलैण्ड के स्वास्थ्य विभाग के अनुशंसा पर नगर नियोजन का प्रारंभ किया गया था।

पटना नगर नियोजन

     जहाँ तक पटना नगर के नियोजन का प्रश्न है। इसकी शुरुआत मुगल काल से हुई थी। लेकिन उस समय पटना सिटी व पश्चिम दरवाजा से पूर्वी दरवाजा के मध्य मुख्य सड़क के दोनों तरफ नगरीय बस्ती बसे हुए थे। ये रेखीय नगरीय बस्ती था। ब्रिटिश काल में अंग्रेजों ने प० पटना में नियोजन का कार्य प्रारंभ करवाया। इसका नियोजन अर्द्ध वृत्ताकार विन्यास प्रारूप पर आधारित था।

     लेकिन स्वतंत्रता के बाद पटना सहित देश के सभी बड़े नगरों में जनसंख्या वृद्धि की प्रवृति तेज हो गयी। इसका प्रमुख कारण ग्रामीण नगरीय जनसंख्या का स्थानान्तरण था। नगर में लगातार जनसख्या वृद्धि को देखते हुए द्वितीय पंचवर्षीय योजना में नगर नियोजन की दो प्रकार की नीति अपनाई गयी-

(1) एक लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले नगरों के लिए ‘मास्टर प्लान’ का निर्माण किया गया।

(2) लघु या मध्यम आकार वाले नगरों में सार्वजनिक सुविधाओं का विकास करने का निर्णय लिया गया।

    पुनः मास्टर प्लान की नीति में भी दो प्रकार के नीति निर्धारित किये गये। प्रथम पूर्णतः नवीन नगरों की नीति और द्वितीय पूर्व के बसे हुए नगरों के विकास की नीति।

    नवीन नगरों में मुख्यतः प्रशासन हेतु चण्डीगढ़, औद्योगिक विकास हेतु राऊरकेला, खनन कार्य हेतु कुद्रेमुख और अंकलेश्वर जैसे नियोजित नगर बसाये गये और पूर्व के बसे हुए नगरों में पटना नगर को नियोजित करने का निर्णय लिया गया।

     प्रथम चरण में 36 नगरों के लिए मास्टर प्लान का निर्माण किया गया था। उनमें से पहला नगर पटना था। पटना के लिए प्रथम मास्टर प्लान 1965 ई० में, दूसरा 20 वर्ष बाद 1985 ई० में कार्यान्वित किया गया और तीसरा मास्टर प्लान अभी निर्माणाधीन है। प्रथम मास्टर प्लान 1965 में पटना इम्प्रूवमेन्ट ट्रस्ट के द्वारा किया गया था। इसी मास्टर प्लान के तहट राजेन्द्र नगर, कदम कुंआ, गर्दनीबाग और पाटलिपुत्रा कोलोनी का नियोजन किया गया था।

     1965 ई० में PRDA का प्रस्ताव स्वीकृत करते हुए बिहार सरकार ने नियोजन का स्थायी अधिकार PRDA को ही सौप दिया। दूसरे मास्टर प्लान के तहत फुलवारी शरीफ, कंकड़‌बाग, दीघा जैसे मुहल्लों का नियोजन किया गया। लेकिन दूसरा मास्टर प्लान को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। पटना में नगर नियोजन पूरी तरह लागू नहीं किये जाने के पीछे कई कारण उत्तरदायी रहे हैं। जैसे-

(1) विस्फोटक जनसंख्या वृद्धि:-

      1995 ई० के मास्टर प्लान के अनुरूप पटना नगर की जनसंख्या 2001 ई० में 12 लाख होनी चाहिए थी जबकि यह वास्तविक रूप से 17 लाख हो गई। पुनः 1981 ई० में पटना की जनसंख्या 4 लाख 80 हजार थी जो 1991 ई० में बढ़कर 10 लाख 80 हजार हो गयी थी।

      2001 ई० में ही पटना भारत का 14 वाँ सबसे बड़ा नगर बन चुका है। मैनपुर, दीघा, फूलवारी शरीफ में मूल रूप से ग्रामीण क्षेत्र से आयी हुई जनसंख्या अधिवासित होती है। यहाँ ग्रामीण क्षेत्र में व्याप्त गरीबी, बेरोजगारी और भूमिहीनता के कारण जनसंख्या अधिवासित होते रही है।

(2) भूमि उपयोग के नियमों का पालन नहीं होना:-

          भूमि उपयोग के दृष्टि से पटना महानगर को चार भागों में बाँटा जा जा सकता है।-

(ⅰ) अनियोजित पटना का सघन बसा हुआ क्षेत्र

(ⅱ) ब्रिटिशकालीन पश्चिम पटना

(iii) स्वतंत्रता के बाद नियोजित ढंग से विकसित क्षेत्र। जैसे – राजवंशी नगर, शास्त्रीनगर, पाटलिपुत्रा कोलनी और मुंशीनगर

(iv) गैर कानूनी ढंग से निर्मित क्षेत्र- यही क्षेत्र पटना नगर नियोजन की दिशा में सबसे बड़ी बाधा है।

       बुद्धा कोलनी फेज-2, राजीव नगर, कंकड़‌बाग, न्यू वाइपास के दक्षिण का क्षेत्र तथा नगर के पश्चिमी क्षेत्र ये सभी क्षेत्र PRDA के अन्तर्गत आते हैं। इन क्षेत्रों में PRDA के अनुमति से ही निर्माण कार्य किया जा सकता है। लेकिन PRDA के अनुमति के निर्माण कार्य किये जाने से गंदी बस्ती की विकास हुआ है।

(3) परिवहन ही समस्या:-

      पटना की अधिकतर सड़‌कें संकरी है। महात्मा गाँधी सेतु बनने के बाद परिवहन दबाव में भारी वृद्धि हुई है। पटना में ट्रैफिक जाम सामान्य बात हो चुकी है। नगर बस सेवा लगभग असफल से चुकी है। सड़‌कों पर वाहनो के चलने की रफ्तार लगातार कम होती जा रही है जो नगर नियोजन के विरुद्ध है।

(4) पटना में मलीन बस्तियों का विकास:-

      PRDA के अनुसार पटना की आधी जनसंख्या मलीन बस्तियों में निवास करती है क्योंकि पटना में सार्वजनिक सुविधाओं का काफी अभाव है। यहाँ जल विकासी की समस्या यथावत बनी हुई है। पुनः स्वच्छ जलापूर्ति और गंदी नालियों का जबड़दस्त संगम हुआ है। विद्युत आपूर्ति और सार्वजनिक स्थलों का अभाव है। जगह-2 पर पटना में कचड़ों का अम्बार आसानी से देखा जा सकता है।

(5) पटना में मनोरंजन केन्द्रों का जबड़दस्त अभाव:-

     यह नगर को अनियोजित और अस्वस्थकर बनाता है। सार्वजनिक स्थल जैसे- Park, Play ground, सामुदायिक भवन, क्लब, थीयेटर हॉल की यहाँ जबड़दस्त कमी है।

(6) पटना में पर्यावरणीय समस्याएँ भी काफी गंभीर है। पर्यावरणीय समस्याओं के रूप में यहाँ प्रदूषित जल की समस्या, वायु प्रदूषण की समस्या और ध्वनि प्रदूषण से समस्या गंभीर है।

     उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखकर पटना का ‘मास्टर प्लान’ तैयार किया गया है। वास्तव में पटना का मास्टर प्लान मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़ी हुई है। यहाँ के ‘मास्टर प्लान’ में उल्लेखित कुछ विशेषताएं निम्नलिखित है। जैसे-

मास्टर प्लान की विशेषताएँ

(1) पटना का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है। इसलिए सरकार ने बहुमंजली इमारतों में बदलने का निर्णय लिया है।

(2) मौर्या कम्प्लेक्स के बाजार का विकास बाजार संकुल के रूप में किया गया है।

(3) पुराने जेल परिसर में नया बाजार विकसित करने का निर्णय किया गया है। लेकिन High Court के निर्देशानुसार जेल परिसर में पार्किंग बनाने का निर्देश मिल जाने के बाद यह कार्य अभी रूका हुआ है।

(4) पटना मुख्य स्टेशन के भार को कम करने के लिए राजेन्द्र नगर टर्मिनल का विकास किया जा रहा है।

(5) बोरिंग रोड चौराहा क्षेत्र को सुपरमार्केट के रूप में बदलने का निर्णय लिया गया है।

(6) मध्यवर्ती पटना के लिए बाजार समीति कैम्पस में सुपर मार्केट विकास करने निर्णय लिया गया है।

(7) अधिवासीय क्षेत्रों के विकास हेतु पटना को चार प्रमुख निकटतम पड़ोसी क्षेत्र में विभाजित किया गया है। जैसे- पश्चिमी पटना में बिहटा, पूर्वी पटना में फतुहा, दक्षिणी पटना में परसा बाजार और गौरीचक एवं उतरी पटना में हाजीपुर को विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इन सभी क्षेत्रों में सार्वजनिक सुविधाएँ, बाजार, पार्क, खेल का मैदान, जलापूर्ति की सुविधा विकसित करने के निर्णय बिला गया है।

(8) मास्टर प्लान के तहत फूलवारी शरीफ एयरपोर्ट को बिहटा में, पटना विश्वविद्यालय और PMCH को बाइपास के दक्षिण में, प्राइवेट बस स्टेण्ड को ट्रान्स पोर्ट नगर में और खागौल में विकसित करने का निर्णय लिया गया है लेकिन पूँजी एवं तकनीक की कमी, आम लोग की सहभागिता का अभाव, प्रशासनिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण क्रियान्वित नहीं किया जा सका है।

(9) पटना नगर के परिवहन के समस्या के समाधान हेतु कई महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव है। जैसे- एक रेलवे लाइन दक्षिणी पटना में पुनपुन नदी के किनारे बिहटा से फतुहा तक विकसित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही दीघा में गंगा नदी पर “जयप्रकाश नारायण रेल पुल” का निर्माण किया जा रहा है।

     पुनः गंगा नदी के किनारे मुम्बई के मेरीन ड्राइव के तर्ज पर River drive Road दानापुर से पटना सिटी तक विकसित करने का निर्णय लिया गया है। नगर के अन्दर सभी सड़‌कें को चौड़ा किया जा रहा है। कंकड़बाग जल निकासी योजना के तहत सम्पूर्ण दक्षिणी पटना में चौड़ी-2 नालियों और बड़े-2 ‘सम्प हाउस’ का निर्माण किया जा रहा है तथा नगर से निकलने वाले प्रदूषित जल को साफ करने हेतु ‘मैला टंकी’ के विकास का निर्णय लिया गया है।

(10) स्टेशन एरिया और नगर के अन्य क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम वाले क्षेत्र को पहचान कर फ्लाईओवर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। जैसे- चिरैयाँ टाल पुल, मीठापुर पुल, चारपुर पुल, बहादुरपुर पुल इत्यादि का कार्य प्रगति पर है।

      गंगा नदी के किनारे सड़क निर्माण का कार्य 1942 से ही प्रस्तावित है। लेकिन विभिन्न कारणों से यह प्रस्ताव अभी तक कार्य रूप में नहीं आ पाया है क्योंकि गंगा नदी के किनारे निजी अधिवासीय क्षेत्र और कई सरकारी कार्यालय अवस्थित है जिसे हटाना अभी संभव है।

(11) सार्वजनिक सुविधाओं के विकास हेतु मास्टर प्लान में कई प्रस्ताव शामिल किये गये है। जैसे- खाली पड़े जमीन पर पार्कों का विकास किया जा रहा है। शहर के अंदर जगह-2 सुलभ शौचालय का निर्माण किया जा रहा है। पाटलिपुत्रा कोलनी में और बाजार समीति कैम्पस में मल्टी पलेक्स विकसित करने का निर्णय लिया गया है। कंकड़बाग में ‘इंडोर स्टेडियम’ का निर्माण किया जा रहा है।

(12) पर्यावरणीय नियोजन:-

     मास्टर प्लान के अन्तर्गत प्रत्येक मलीन बस्ती को विकसित करने के लिए दो प्रकार के निर्णय लिये गये हैं। मलीन बस्तियों में गरीबी, निवारण कार्यक्रम चलाया जा रहा है तथा मलीन बस्तियों में सस्ते लागत वाले मकान बनाकर गरीबों को उपलब्ध करवाया जा रहा है।

        बिहार सरकार गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है तथा गंदी बस्तियों में सुलभ इंटरनेशनल के माध्यम से शौचालय निर्माण किया जा रहा है। पर्यावरणीय विकास के अंतर्गत खुले नालों को ढका जा रहा है। निजी शौचालय को नालियों से जोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कचड़ा उठाव के लिए नगर निगम को रात्रि में उठाने को कहा गया है। पटना के चारों ओर एक हरित पेटी (चौ० ½ km) के विकास का निर्णय लिया गया है।

      उपयुक्त कार्यक्रमों के द्वारा पटना नगर के नगरीय पर्यावरण में सुधार की पूरी संभावना है। चूंकि पटना एक पुराना नगर है इसलिए इसका पूर्ण नियोजन संभव नही है। इसलिए आंशिक नियोजन और कुछ सुधारों से ही नगरीय लोगों की समस्साओं से निजात दिलायी जा सकती है।

      लेकिन पूँजी, और तकनीक, आम लोगों की सहभागिता, प्रशासनिक एवं राजनीतिक इच्छाशक्ति, कानून में संशोधन, विस्थापित लोगों को उचित मुआवजा इत्यादि प ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। पुन: इसका भी व्यवस्था किया जाना चाहिए कि गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, आरा, बक्स जैसे नगरों के इस रूप में विकास किया जाय कि ग्रामीण क्षेत्रों से स्थानान्तरित होने वाली जनसंख्या वहीं अधिवासित हो सके।


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17. पटना नगर नियोजन/पटना का मास्टर प्लान

18. बिहार में नगरीकरण

19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर


18. Urbanization in Bihar (बिहार में नगरीकरण)

    18. Urbanization in Bihar

(बिहार में नगरीकरण)



    Urbanization in Bihar

     नगरीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कार्यिक प्रतिरूप, नगर के आकार और नगर की जनसँख्या में लगातार वृद्धि होती है। आजादी के समय बिहार में कुल आबादी का 10 प्रतिशत जनसंख्या नगरों में निवास करती थी और आज 70 साल के बाद भी 11.3 प्रतिशत आबादी ही नगरों में निवास करती है। बिहारी अर्थव्यवस्था की निस्तेजता और स्थिरता की यह सबसे बड़ा उदाहरण है। बिहार में नगरीकरण के नगण्य होने के पीछे कई कारण है:-

1. कृषि उत्पादन की स्थिरता,

2. औद्योगिकीकरण की दर नगण्य होना,

3. सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव,

4. बाढ़ और सुखाड़ की स्थायी समस्या,

5. सिंचाई की अपर्याप्त व्यवस्था।

          बिहार के 130 शहरों में से 111 स्वतंत्र शहर है और 19 ऐसे शहर है जिन्हें नव-नगर समूहों में बाँटा गया है। ‘नगर समूह’ ऐसे नगरीय बस्ती को कहते है जब दो या दो से अधिक नगरों की सीमा आपस में मिल जाते है। जैसे- पटना, गया, मोतिहारी, समस्तीपुर, भागलपुर, पूर्णिया, बेगुसराय, कटिहार, सीतामढ़ी इत्यादि नगर समूह के उदाहरण है।

       भारत में नगरीकरण का औसत प्रतिशत 2.78 प्रतिशत है। भारत के सभी राज्य और केन्द्र प्रशासित राज्यों में बिहार में सबसे कम नगरीय जनसंख्या अधिवासित होती है। कुल जनसंख्या के दृष्टिकोण से बिहार भारत का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है जबकि यहाँ भारत की मात्र 3.04 प्रतिशत जनसंख्या ही बिहार के नगरों में निवास करती है।

       जनगणना 2011 के अनुसार बिहार में 11758016 लोग नगरों में निवास करते है। जिसमें से 6204307 पुरूषों तथा 5553709 महिलाओं की संख्या हैं। पिछले 10 सालों में बिहार में नगरीय जनसंख्या में 11.29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

        2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में 26 ऐसे नगर है जिनकी जनसख्या 01 लाख से अधिक है। इस नीचे की तालिका में देखा जा सकता है।

नगर जनसंख्या (लाख में)
पटना 16.84
गया 4.8
भागलपुर 4.0
मुजफ्फरपुर 3.54
बिहारशरीफ 2.97
दरभंगा 2.96
पूर्णिया 2.82
आरा 2.6
बेगूसराय  2.52
कटिहार 2.26
मुंगेर 2.1
छपड़ा 2.02
दानापुर 1.82
सहरसा 1.56
हाजीपुर 1.47
सहरसा 1.56
डेहरी 1.37
सीवान 1.35
बेतिया 1.32
मोतिहारी 1.26
बगहा 1.26
किशनगंज 1.05
जमालपुर 1.05
जहानाबाद 1.03
बक्सर 1.02
औरंगाबाद 1.02

     बिहार में छोटे-बड़े नगरों की संख्या 130 है। उल्लेखनीय है कि 1991 में अविभाजित बिहार की नगरीय जनसंख्या 11353012 थी। वर्तमान बिहार का जो क्षेत्र है उसकी नगरीय जनसंख्या 67.1 लाख थी। 1991-2001 की अवधि में 19.67 लाख तथा 2001-2011 की अवधि में 30 लाख जनसंख्या वर्तमान बिहार में नगरीय जनसंख्या के रूप में बढ़ी।

     वर्तमान बिहार में कुल नगरीय जनसंख्या जनगणना 2011 के अनुसार 117 लाख है। बेगुसराय, मधेपुरा, समस्तीपुर और सुपौल ऐसे जिले थे जहाँ नगरीकरण की दर ऋणात्मक रही क्योंकि 2001 की जनगणना 2011 के अनुसार वैसे शहरों में नगरीय जनसंख्या में वृद्धि हुई है। अगर बिहार के नगरों के प्रतिरूप का अध्ययन किया जाये तो स्पष्ट होता है कि बिहार के जिला को 06 समूहों में विभक्त किया जा सकता है।-

क्रम नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत वृद्धि जिला
1. 50 प्रतिशत से अधिक नगरीय जनसंख्या वृद्धि वाले जिला कैमूर, जहानाबाद, शिवहर, सहरसा
2. 40-50 प्रतिशत के बीच नगरीय जनसंख्या वृद्धि वाले जिला पूर्णिया, मोतिहारी, बक्सर, औरंगाबाद, नवादा, पटना
3. 30-40 प्रतिशत के बीच नगरीय जनसंख्या वृद्धि वाले जिला पश्चिम चम्पारण, भोजपुर, गया, लखीसराय, जमुई, भागलपुर, वैशाली
4. 20-30 प्रतिशत के बीच कटिहार जनसंख्या वृद्धि वाले जिला सिवान, सारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया, कटिहार, रोहतास, बांका
5. 0-20 प्रतिशत के बीच नगरीय जनसंख्या वृद्धि वाले जिला बिहारशरीफ, मुंगेर
6. 0-6 प्रतिशत के बीच नगरीय जनसंख्या वृद्धि वाले जिला सुपौल, मधेपुरा, समस्तीपुर, बेगुसराय

       इस तरह उपर्युक्त दिए गये आंकड़ों और तथ्यों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि बिहार नगरीकरण के मामले में भारत का सबसे पिछड़ा राज्यों में से एक है। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय बिहार में नगरीय जनसंख्या जहाँ मात्र 6.5 प्रतिशत थी वही आज भी आजादी के 70 वर्षों के बाद भी मात्र 4.8 प्रतिशत बढ़कर 11.3 प्रतिशत जनसंख्या नगरों में निवास कर रही है जो कि भारत के अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। अतः बिहार में कृषि सुधार, औद्योगिकरण इत्यादि को बढ़ावा देकर नग विकास की प्रक्रिया को तीव्र कने की आवश्यकता है।


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19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर


19. Rural Market Center in Bihar (बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र)

19. Rural Market Center in Bihar

(बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र)



प्रश्न प्रारूप

Q. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्रों की भूमिका की विवेचना कीजिए।

       बिहार के ग्रामीण-नगरीय क्षेत्रों के विकास के क्रम में कई ग्रामीण बाजार केन्द्रों का विकास हुआ है। ग्रामीण बाजार में प्राय: हाट मेला कस्बाई बाजार, सप्ताहिक बाजार या पाक्षिक बाजार इत्यादि के नाम से जानते है। ग्रामीण बाजार केन्द्र बड़े नगर और ग्रामीण क्षेत्र के बीच योजक कड़ी का कार्य  करते हैं।

ग्रामीण बाजार केन्द्रों का विकास:-

       बिहार में ऐसे ग्रामीण बाजार केन्द्रों का विकास लगभग पुरे बिहार में हुई है। ऐसे बाजार जैसे क्षेत्रों पर विकसित होते हैं जहाँ पर सड़कों का चौराहा हो या कोई सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ केन्द्र हो या कोई जलाशय उपलब्ध हो सोनपुर, बाढ़, बख्तियारपुर, बिहटा, तारेगना, अकबरपुर, रजौली, गिरियक इत्यादि ऐसे बाजार केंद्र हैं जो पटना महानगर के इर्द-गिर्द स्थित हैं।

ग्रामीण बाजार केन्द्रों की भूमिका:-

       बिहार के ग्रामीण बाजार केन्द्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निम्नलिखित भूमिकाएँ रेखांकित की जा सकती हैं-

(1) ग्रामीण बाजार केन्द्र ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत आवश्यकताओं की आपूर्ति करते हैं तथा उनका जीवन स्तर सुधारने में मदद करते हैं।
(2) ग्रामीण बाजार आर्थिक गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु होता है। यहाँ द्वितीयक तथा तृतीयक प्रकार के आर्थिक गतिविधि सम्पन्न किये जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपने कृषि उत्पादों को ग्रामीण बाजार केन्द्र में आकर बेचते हैं अपनी आवश्यकता की चीजें खरीदकर ले जाते हैं।

(3) ग्रामीण बाजार केन्द्र नवो उत्पाद विसाण का केन्द्र होता है। इसका तात्पर्य है कि किसानों के कृषि कार्य से संबंधित नवीन उपकरण, बीज, उर्वरक इत्यादि सबसे पहले ग्रामीण बाजार केन्द्र तक पहुंचते है और वहाँ से उनका धीरे-2 ग्रामीण क्षेत्रों में विसरण होता है।

(4) ग्रामीण बाजार केन्द्र बफर स्टॉक का कार्य करते हैं। जैसे- ग्रामीण बाजार केन्द्रों में ‘Cold Storage’ स्थापित होते है जहाँ किसान अपने उत्पादों को सुर‌क्षित एवं संरक्षित रखते हैं।

(5) ग्रामीण कृषि और कुटीर उद्योग से संबंधित उत्पादों का विपनण का कार्य किया करते है

(6) ग्रामीण बाजार केन्द्र सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केन्द्र बिन्दु होता है। जैसे- एक ओर ग्रामीण केन्द्रों में आर्थिक गतिविधियाँ चल रही होती है वहीं दूसरी ओर मनोरंजन से जुड़े हुए गतिविधि भी चल रहे होते हैं।

(7) ग्रामीण बाजार केन्द्र सूचना के प्रमुख केन्द्र होते हैं। यहाँ विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित NGO, नुक्कड़ नाटक इत्यादि के माध्यम से सरकारी कार्यक्रम, परिवार नियोजन, साक्षरता, स्वास्थ संबंधित जानकारी इत्यादि आसानी से सम्प्रेषित करते हैं।

(8) ग्रामीण बाजार केन्द्र विभिन्न जातियों और सम्प्रदायों को मिलने-जुलने का अवसर प्रदान करता है जिससे सामाजिक एकता बनी रहती है।

(9) ग्रामीण बाजार में साहुकार, छोटे-छोटे बैंक, बीमा एजेन्ट, व्यापारी इत्यादि का जमघट होता है। ये किसानों को जरूरत के उननुसार धन उपलब्ध करवाते हैं और किसानों के उत्पादों को खरीदकर राष्ट्रीय एवं अन्तरर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुं‌चाते हैं।

(1) ग्रामीण बाजार केन्द्र प्रादेशिक असमानता को दूर करने में सहायक है।

    इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि ग्रामीण बाजार केन्द्र ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल आर्थिक गतिविधियों को संचालित कता है बल्कि समस्त सामाजिक, सांस्कृतिक औ आर्थिक गतिविधियों का भी केन्द्र बिन्दु होता है।

Rural Market Center in Bihar



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16. बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप

17. पटना नगर नियोजन/पटना का मास्टर प्लान

18. बिहार में नगरीकरण

19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर

7. Flood in Bihar (बिहार में बाढ़)

7. Flood in Bihar

(बिहार में बाढ़)



प्रश्न प्रारूप

Q. Describe the flood problems in Bihar.

(बिहार में बाढ़ से सम्बन्धित समस्याओं का वर्णन करें।)

उत्तर- बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ की 80 या 85 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। बिहार से झारखण्ड राज्य के अलग होने के कारण यहाँ केवल कृषि का ही क्षेत्र रह गया है। अब बिहार की आर्थिक उन्नति केवल कृषि पर निर्भर है। बिहार में कई समस्याओं के कारण कृषि सम्पदा से परिपूर्ण बिहार आज भी अपनी निर्धनता के लिए देश में विख्यात है। अतः इन समस्याओं के निदान के बगैर इसकी आर्थिक उन्नति असंभव है।

बाढ़ की समस्या:-

     बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है। बाढ़ नदियों में अत्यधिक जल के कारण आती है। यहाँ की नदियाँ सदियों से विनाशकारी बाढ़ के लिए प्रसिद्ध रही है। एक सर्वेक्षण के अनुसार बिहार के कुल बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का लगभग 64 लाख हेक्टेयर है। इसका अधिकतर क्षेत्र उत्तरी बिहार में पड़ता है। उत्तर बिहार में अधिकतर नदियाँ हिमालय से निकलती है। इन नदियों में कोसी, कमला, बागमती, गण्डक, बूढ़ी गण्डक आदि सम्मिलित हैं।

     ये सभी नदियाँ हिमालय के अतिवृष्टि के क्षेत्र से निकलने के कारण काफी जलराशि लाती है, इनका जलग्रहण क्षेत्र भी काफी विस्तृत है। इन नदियों में बाढ़ का मुख्य कारण हिमालय के तराई क्षेत्र में अत्यधिक वृष्टि है। इस भाग की कोसी तथा गण्डक नदियों का जलक्षेत्र ऊँचे हिमालय के शिखर पर है।

      इस भाग में अधिक वर्षा से यहाँ बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसी कारण कोसी नदी में जल का प्रवाह काफी तीव्र है। इसका क्षेत्र बाढ़ प्रभावित रहता है। यह नदी मार्ग परिवर्तन के लिए भी विख्यात है। विगत 200 वर्षों से 150 किलोमीटर पश्चिम की ओर खिसक गई है और बार-बार खिसकने से पुरानी धारा जल प्लावन को बढ़ावा देती है। वर्षाऋतु में पूर्णिया से दरभंगा तक का क्षेत्र बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित रहता है। अतः इस नदी को ‘बिहार का शोक’ (‘Sorrow of Bihar’) कहा जाता है। परन्तु कोसी परियोजना के कार्यान्वयन से अब कुछ राहत मिली है।

     हिमालय से जब नदियाँ बिहार के मैदान में प्रवेश करती है तो इनके द्वारा लायी गयी जलोढ़ मिट्टी यहाँ के समतल मैदान पर बिछाकर उथला बना देती है और कहीं-कहीं पर अवरोध भी उत्पन्न कर देती हैं। इसके फलस्वरूप नदी अपने दोनों किनारे पर जल फैला देती है। मन्द ढाल के कारण छाड़न झीलें, दलदली भूमि तथा चौर आदि का निर्माण करती हैं।

      इसी प्रकार बूढ़ी गण्डक, कमला, बागमती तथा महानन्दा अपने किनारे पर जल फैलाकर बाढ़ उत्पन्न करती हैं। जल की निकासी ठीक से नहीं होती है। इस प्रकार महीनों पानी भरा रहता है और फसलों को क्षति होती है। उत्तरी बिहार के अररिया, सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया, सहरसा, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगुसराय, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, छपरा आदि जिलों में भयंकर बाढ़ आती है।

      दक्षिण बिहार की नदियाँ पठारी भाग से निकलकर गंगा में गिरती हैं। इस प्रदेश की प्रमुख नदियाँ, सोन, पुनपुन, फल्गु, मोरहर, पैमार, पंचाने, सकरी, मोहाने, कर्मनाशा आदि है। इस भाग में वर्षा के कारण कुछ महीनों के लिए बाढ़ की समस्या बनी रहती है।

    जब गंगा नदी स्वयं जलमग्न रहती है तो सोन, पुनपुन, सकरी, फल्गू आदि नदियों के पानी के निकास को अवरूद्ध कर देती है। इसके फलस्वरूप नदियों के प्रवाह क्षेत्र में भयंकर बाढ़ आ जाती है। इन नदियों से भी दलदली भूमि, दियारा भूमि, तालभूमि, चऊर भूमि, तथा जल प्रदेश बन जाते है। वर्षाऋतु में पटना से मोकामा तक का क्षेत्र जलप्लावित रहता है। दक्षिण बिहार के मैदान में पटना, उत्तरी नालन्दा, उत्तरी मुंगेर, लक्खीसराय तथा उत्तरी भागलपुर के जिले बाढ़ से प्रभावित होते हैं।

Flood in Bihar

बाढ़ की समस्याओं का निदान-

     बिहार में बाढ़ से निपटने के लिए अनेक प्रयास किये गये हैं। इसमें केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा भी कई प्रयास किये गये हैं। इधर बिहार की नदियों पर बाँध बनाकर बाढ़ को नियंत्रित किया गया है। इससे जल की निकासी हो जाती है और बाढ़ की विभीषिका से बचाव भी हो जाता है। सोन नदी पर भी बाँध बनाया गया है। इसके अलावे गंगा तट पर कोइलवर बक्सर बाँध, भूतहीबलान बाँध मधुबनी, वैशाली जिले में हाजीपुर-बाजीपुर बाँध, कोसी के किनारे बदलाघाट-नगरपाला बाँध, त्रिमुहानी कुरसेला बाँध, पुनपुन नदी बाँध, बेतवा नहर बाँध, फल्गु नदी पर उदेरास्थान बाँध आदि है।

        बाँध निर्माण के अलावा बाढ़ नियंत्रण के लिए और भी कई उपाय किये गये हैं। पेड़-पौधे लगाक बाढ़ से बचाव किया गया है। इसका प्रयास भी हो हा है।


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1. बिहार : सामान्य जानकारी

2. बिहार का प्राकृ‌तिक प्रदेश / भौतिक इकाई

3. बिहार की जलवायु

4. बिहार के भौगोलिक इकाई का आर्थिक विकास पर प्रभाव

5. बिहार की मिट्टियाँ

6. बिहार में सूखा

7. बिहार में बाढ़

8. बिहार का औद्योगिक पिछड़ापन

9. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण

10. बिहार का औद्योगिक प्रदेश

11. बिहार का कृषि प्रदेश

12. बिहार में कृषि आधारित उद्योग

13. बिहार में चीनी उद्योग

14. सिन्दरी उर्वरक उद्योग

15. बिहार की जनजातीय समस्या एवं समाधान

16. बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप

17. पटना नगर नियोजन/पटना का मास्टर प्लान

18. बिहार में नगरीकरण

19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर


11. The Agricultural Region of Bihar (बिहार का कृषि प्रदेश)

11. The Agricultural Region of Bihar

(बिहार का कृषि प्रदेश)



प्रश्न प्रारूप

Q. Divide Bihar into agricultural regions and discuss their salient characteristics.

(बिहार को कृषि प्रदेशों में विभाजित करें तथा प्रत्येक की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें।)

उत्तर- बिहार की कृषि विभिन्न प्राकृतिक तत्वों पर निर्भर करती है। ये तत्व तापमान, वर्षा, स्थलाकृति, मिट्टी, सिंचाई के साधन आदि हैं। इन्हीं भौगोलिक दशाओं पर कृषि तथा फसलों के प्रकार निर्भर करते हैं। इन्हीं भौगोलिक दशाओं को आधार मानकर बिहार की कृषि को बाँटा गया है। इन्हीं तत्वों पर फसलों का उत्पादन निर्भर करता है। इन्हीं तत्वों से फसलें प्रभावित होती हैं। जिन भागों में जिस प्रकार की दशाएँ हैं, वहाँ की फसल उगाई जाती है।

      उदाहरणार्थ, उत्तरी बिहार में उपजाऊ मिट्टी, 40 सेमी० से अधिक वर्षा, समतल भूमि तथा अधिक जनसंख्या मिलती है। अतः वहाँ इन्हीं भौगोलिक दशाओं के अनुरूप धान की फसल लगाई जाती है। इस क्षेत्र के लिए यही फसल सबसे अधिक उपयुक्त है। भौगोलिक दशाओं की अनुकूलता के कारण प्रति एकड़ उत्पादन भी अधिक होता है। इसी कारण बिहार के उत्तरी सीमान्त क्षेत्र में धान की खेती की अधिकता है, यह पट्टी का निर्माण करता है। इस प्रकार बिहार के कृषि क्षेत्र को निम्नलिखित कृषि पट्टियों में बाँट सकते हैं-

1. उत्तर का आर्द्र निम्न धनहर क्षेत्र

2. भीठ एवं दियारा क्षेत्र

3. दक्षिणी गंगा के सिंचित प्रदेश

4. छोटानागपुर के पठारी प्रदेश

1. उत्तर का आर्द्र निम्न धनहर क्षेत्र:-

        बिहार का यह कृषि प्रदेश बूढ़ी गंडक नदी के उत्तर-पूर्व में स्थित है। यह मुख्य रूप से बिना सिंचाई के धान का क्षेत्र है। यह प्रदेश उत्तर पश्चिम में संकीर्ण तथा पूर्व में चौड़ा होता गया है। यह भूमि निम्न है और यहाँ मकई और रबी की भी खेती की जाती है। यह पूरा क्षेत्र समतल है। इस भाग में अनेक नदियों में प्रतिवर्ष बाढ़ आ जाती है।

     यहाँ की मिट्टी जलोढ़ है। जिसमें नमी रखने की क्षमता अधिक है। इस भाग में वर्षा अधिक होती है। जिसके कारण आर्द्रता अधिक रहती है। कोशी नदी के क्षेत्र में बाढ़ अधिक आती है। जिसके फलस्वरूप धान की फसल को हानि होती है। सामान्य रूप से सम्पूर्ण क्षेत्र में धान की ही खेती की जाती है। इस प्रदेश में मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया आदि जिले सम्मिलित हैं। इस भाग में चावल कूटने की मिलें स्थित हैं।

2. भीठ एवं दियारा क्षेत्र:-

     यह प्रदेश उत्तर गंगा में धनहर क्षेत्र के दक्षिण में स्थित है तथा गंगा के दक्षिण का छोटा-सा भाग इसमें सम्मिलित है। इसमें दो तरह की भूमि आती है। पहली भूमि ऊँची है। जिस पर बाढ़ का प्रभाव नहीं पड़ता है। इसे दियारा भी कहते हैं।

       दूसरी भूमि निम्म् भूमि है जो वर्षा के दिनों में जल से भरी रहती है। दोनों ही भूमि पर भदई फसल मकई एवं रबी की फसल होती है। रबी फसलों में गेहूँ, चना, जौ, दलहन एवं तेहलन होता है। कहीं-कहीं पर धान भी होता है। इसकी भूमि भी उपजाऊ है और वर्षा भी अच्छी हो जाती है। गंगा के दक्षिण में मोकामा-बड़हिया के क्षेत्र में गेहूँ और चना काफी होता है।

3. दक्षिणी गंगा का सिंचित प्रदेश:-

     यह दक्षिणी गंगा के मैदानी भाग का पूर्व प्रदेश है। यह पश्चिम में पुराना शाहाबाद जिला (आरा, रोहतास, बक्सर, कैमूर) से लेकर पूरब में भागलपुर तक फैला है। इस भाग में कृषि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ की कृषि सिंचाई पर आश्रित है। इसी भाग में सोन एवं सकरी नदियों पर नहरें बनाई गई हैं और इस भाग में आहर तथा पईन के द्वारा भी सिंचाई की सुविधा प्रदान की गई है। इन्हीं सुविधाओं के कारण यहाँ सघन कृषि की जाती है।

      इस भाग की सबसे महत्त्वपूर्ण कृषि की फसल धान ही है। आरा एवं रोहतास जिलों में सोन नहर से सिंचाई के कारण धान की अच्छी खेती की जाती है। गया, जहानाबाद, पटना तथा नालन्दा जिलों में भी इसकी खेती की जाती है। धान के अलावे इस भाग में गेहूँ, आलू, चना, दलहन, तेलहन तथा अन्य फसलें होती हैं।

4. छोटानागपुर पठारी क्षेत्र:-

       छोटानागपुर की स्थलाकृति तथा मिट्टी की दशाएँ उत्तर बिहार से बिल्कुल भिन्न है। अतः इस भाग की कृषि “प्रणाली” भी भिन्न हैं। इस भाग में पठारी भूमि एवं अनुपजाऊ मिट्टी के कारण कृषि कम होती है। कृषि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नदी घाटियों में धान की खेती की जाती है तथा ऊपरी पठारी भागों पर मकई, मडुआ, दलहन आदि की खेती की जाती है।

      मिट्टी की कमी के कारण खेती करने में अधिक कठिनाई है। नदी घाटी के आर्द्र भागों में खेती अधिक की जाती है। वहाँ सिंचाई की भी थोड़ी सुविधा उपलब्ध होती है। इसके अलावे इस भाग में कृषि सिंचाई एवं मिट्टी की कमी के काण सीमित है। 


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7. बिहार में बाढ़

8. बिहार का औद्योगिक पिछड़ापन

9. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण

10. बिहार का औद्योगिक प्रदेश

11. बिहार का कृषि प्रदेश

12. बिहार में कृषि आधारित उद्योग

13. बिहार में चीनी उद्योग

14. सिन्दरी उर्वरक उद्योग

15. बिहार की जनजातीय समस्या एवं समाधान

16. बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप

17. पटना नगर नियोजन/पटना का मास्टर प्लान

18. बिहार में नगरीकरण

19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर


10. Industrial Region of Bihar (बिहार का औद्योगिक प्रदेश)

10. Industrial Region of Bihar

(बिहार का औद्योगिक प्रदेश)



प्रश्न प्रारूप

Q. बिहार को औद्योगिक प्रदेशों में विभाजित कीजिए तथा उन पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए।

      बिहार के विभिन्न भागों में विभिन्न प्रकार के औद्योगिक कच्चे माल पाये जाते हैं। इन संसाधनों पर आधारित एक ही प्रकार के उद्योगों का एक विशेष क्षेत्र में समूहीकरण हुआ है और औद्योगिक सघनता विकसित हो गई है।

    उद्योगों के इस समूहीकरण के आधार पर इस राज्य को निम्नलिखित सात औद्योगिक प्रदेशों में विभाजित किया जा सकता है।-

1. चावल मिल का प्रदेश

2. चीनी उद्योग का प्रदेश

3. जुट उद्योग का प्रदेश

4. पश्चिमी मध्यवर्ती औद्योगिक प्रदेश

5. पूर्वी मध्यवर्ती औद्योगिक प्रदेश

6. सोन घाटी औद्योगिक प्रदेश

7. गया-गुरारु औद्योगिक प्रदेश

Industrial Region of Bihar

चित्र: बिहार उद्योग एवं औद्योगिक प्रदेश

1. चावल मिल का प्रदेश मानचित्र:-

     चावल मील उद्योग के रूप में पूरे राज्य में पाया जाता है फिर भी बिहार के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्र में इस उद्योग का बड़े पैमाने पर विकास हुआ है। धान का उत्पादन क्षेत्र मुख्यतः उत्तरी बिहार के मैदान तथा नेपाल की तराई क्षेत्र है। इसके आधार पर पश्चिम में रामनगर से लेकर पूर्व में किशनगंज तक चावल मिलों का विकास हुआ है।

मुख्य केन्द्र- रामनगर, नरकटियागंज, रक्सौल, अदापुर, बैरगनिया, सीतामढ़ी, जनकपुर रोड, जयनगर, झंझारपुर, जोगबनी और फारबीसगंज है।

    जनसंख्या की सघनता इन क्षेत्रों में होने के कारण उत्पादन का अत्यधिक खपत इन क्षेत्रों में ही हो जाता है।

2. चीनी उद्योग का प्रदेश:-

विस्तार- बिहार के उत्तरी-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र।

      यह बिहार का सर्वप्रमुख गन्ना उत्पादक प्रदेश है जो बागमती नदीं के पश्चिम और गंगा नदी के उतर में अवस्थित है। चीनी उद्योग का कच्चा माल गन्ना जो ह्रासमान पदार्थ है जिसके कारण चीनी उद्योग उत्पादन क्षेत्र में ही स्थित है।

मुख्य केन्द्र- प० और पूर्व चम्पारण, सिवान, गोपालगंज, सारण इत्यादि जिले आते है। वर्तमान में बिहार के 28 उद्योगों में से कार्यरत 11 मील यहाँ ही है। इसके अलावे अन्य मील भी है।

     इनके अलावा बिहार के भागलपुर तथा साहेबगंज क्षेत्र में 11 गुड़ के मिलें है तथा विभिन्न भागों में खाँडसारी का भी उत्पादन होता है।

    राज्य बँटवारे के बाद गन्ना आधारित अद्योग ही सबसे बड़ा उद्योग बन गया है। गन्ना उत्पादन पर ही चीनी उद्योग के साथ-साथ गुड़, खंडसारी, कागज, इथेनॅाल, पशु आहार एवं विद्युत-ऊर्जा, कार्बनिक खाद जैसे कई अन्य उद्योग निर्भर करते है।  चीनी उद्योग एक सामयिक उद्योग है जिनमें साल में करीब 145 दिनों तक काम होता है एवं राज्य में ईख उत्पादकों की संख्या लगभग 5 लाख है।

3. जुट उद्योग का प्रदेश:-

विस्तार- बिहार के उतरी-पूर्वी भाग में स्थित।

मुख्य केन्द्र- पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले आते है। समीपवर्ती सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जिलों में जूट की खेती होती है।

     जूट उद्योग का विकास मुख्य रूप से पूर्णिया एवं कटिहार में हुआ है। जहाँ जूट से टाट, बोरे इत्यादि बनाये जाते है।

4. पश्चिमी मध्यवर्ती औद्योगिक प्रदेश:-

विस्तार- यह गंगा के किनारे स्थित पश्चिमी औद्योगिक प्रदेश है जिसका विस्तार बक्सर से मोकामा-बरौनी तक है। इसके अन्तर्गत मुख्य रूप से गंगा का दक्षिणी तटीय भाग आता है। गंगा नदी के उत्तर स्थित बरौनी और हाजीपुर भी क्रमशः राजेन्द्र पुल और महात्मा गाँधी सेतु के द्वारा इस क्षेत्र से जुड़ पाये है। 

मुख्य केन्द्र- बरौनी सर्वाधिक महत्वपूर्ण औद्योगिक केन्द्र है, जहाँ तेल- शोधक कारखाने, पेट्रो रसायन, ताप विद्युत रासायनिक खाद और दुग्ध उद्योग विकसित है।

      मोकामा में चमड़ा इत्यादि, हाजीपुर, पटना, फतुहा में स्कूटर तथा फुलवारीशरीफ में सूतीवस्त्र उद्योग का विकास हुआ है। इस सबके अलावे इन सब क्षेत्रों में चीनी उद्योग, प्लास्टिक उद्योग इत्यादि का भी विकास हुआ है।

5. पूर्वी मध्यवर्ती औद्योगिक प्रदेश:-

विस्तार- गंगा नदी के किनारे स्थित पूर्वी औद्योगिक प्रदेश है जिसका विस्तार मुंगेर, जमालपुर से लेकर कहलगाँव तक है।

मुख्य केन्द्र- मुंगेर, जमालपुर तथा कहलगाँव है। मुंगेर में बंदूक और सिगरेट, जमालपुर में वर्कशॉप, नाथनगर तथा भागलपुर में रेशम तथा तसर, कहलगाँव में सुपर ताप विद्युत (1994 ई०) स्थित है। इससे औद्योगिक विकास को लाभ मिला है। इस उद्योगों के अतिरिक्त इन प्रदेशों में आटा, चावल और दाल की मिले तथा लकड़ी उद्योगों का विकास हुआ है।

6. सोन नदी-घाटी औद्योगिक प्रदेश:-

विस्तार:- बिहार के दक्षिण-पश्चिमी भाग में सोन नदी के तटीय क्षेत्र में स्थित है। इसका विस्तार, जपला से डालमियानगर तक है।

     यहाँ सीमेंट उद्योग, कागज उद्योग, लकड़ी उद्योग, पेपर बोर्ड उद्योग क्रमशः जपला, रोहतास, डालमियानगर में स्थित है। इसके अलावे इस औद्योगिक क्षेत्र में चीनी, रसायन, वनस्पति, चावल उद्योग इत्यादि का भी विकास हुआ है। यहाँ रेल सड़क और जल परिवहन की विशेष सुविधा है। सस्ते श्रमिक भी उपलब्ध है।

7. गया-गुरारू औद्योगिक प्रदेश:-

विस्तार- यह छोटा औद्योगिक प्रदेश है जिसके अन्तर्गत गया और गुरारू आते है।

मुख्य केन्द्र- गया इसका प्रमुख औद्योगिक केन्द्र है जहाँ जूट और सूती वस्त्रोद्योग हस्तकरघा, कलात्मक मूर्तियाँ बनाने के उद्योगों का विकास हुआ है। गया और बोधगया के धार्मिक स्थल के कारण यहाँ होटल उद्योग भी स्थापित है। इन सब के अलावे इस क्षेत्र में अन्य उद्योगों का विकास भी हुआ है पर वे सीमित एवं औद्योगिक लाभ के दृष्टि से वे गौण है।

निष्कर्ष:

   बिहार का औद्योगिक प्रदेश बिहार के किसी एक ही भाग में न स्थित होकर के वरन पूरे क्षेत्र में विस्तृत है। वैसे तो प्रत्येक का अपना-2 महत्व है पर औद्योगिक लाभ के दृष्टिकोण से कम है जिसका कारण पूँजी का अभाव है अर्थात पूँजी एवं सरका की नीति का सहयोग हे तो बिहार के उद्योगों का अविष्य और भी उज्जवल हो सकता है। वर्तमान मुख्यमंत्री नीतिश की सरकार में यह हमें संभव दिखायी देता है।



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4. बिहार के भौगोलिक इकाई का आर्थिक विकास पर प्रभाव

5. बिहार की मिट्टियाँ

6. बिहार में सूखा

7. बिहार में बाढ़

8. बिहार का औद्योगिक पिछड़ापन

9. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण

10. बिहार का औद्योगिक प्रदेश

11. बिहार का कृषि प्रदेश

12. बिहार में कृषि आधारित उद्योग

13. बिहार में चीनी उद्योग

14. सिन्दरी उर्वरक उद्योग

15. बिहार की जनजातीय समस्या एवं समाधान

16. बिहार में ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप

17. पटना नगर नियोजन/पटना का मास्टर प्लान

18. बिहार में नगरीकरण

19. बिहार में ग्रामीण बाजार केन्द्र

20. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर

9. Cause of Economic Backwardness of Bihar (बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण)

9. Cause of Economic Backwardness of Bihar

(बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण)



प्रश्न प्रारूप

Q1. बिहार क्यों प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद अविकसित है? व्याख्या कीजिए।

Q2. समृद्ध संसाधनों के बावजूद बिहार में औद्योगिक विकास धीमी क्यों है?

Q3. बिहार को पिछड़ा या गरीब राज्य क्यों माना जाता है?

      विभाजन के बाद बिहार मूलतः एक कृषि प्रधान राज्य हो गया है। यहाँ के 80% भूमि पर कृषि का कार्य किया जाता है और लगभग 87.7 % जनसंख्या गाँवों में निवास करती है। अतः यहाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और संस्कृति अभी भी व्याप्त है।

      ग्रामीण जनसंख्या का उच्च अनुपात, कृषि पर जनता की अधिक निर्भरता और प्रति व्यक्ति निम्न आय, बाढ़ तथा सिंचाई की समस्या ज‌हाँ बिहार के औद्योगिक पिछड़ेपन के सूचक है वहीं विशाल मानव संसाधन, सस्ते श्रम, जलविद्युत की उपलब्धता, सिंचाई कि अपार संभावनाएँ, नेपाल से लगती हुई अन्तरर्राष्ट्रीय सीमा बिहार में आर्थिक विकास की आशाएँ जगाती हैं। इन दोनों विचारों के चलते यह कहा जाता है कि “बिहार एक धनी राज्य है लेकिन यहाँ के लोग निर्धन है।” बिहार की अर्थव्यवस्था पिछड़े होने के निम्नलिखित कारण है-

1. बाढ़ और सूखे की समस्या:-

     गंगा का उत्तरी भाग बाढ़ की समास्या से पीड़ित है जबकि दक्षिणी भाग सूखे की समस्या से ग्रसित है। बिहार को एक अनोखा राज्य माना जाता है क्योंकि बिना बरसात हुए ही यहाँ बाढ़ की समस्या उत्पन्न होती है। इसक मुख्य कारण नेपाल से आने वाली सदावाहिनी नदियाँ है। बिहार के 38 में से 26 जिलें बाढ़ के समस्या से पीड़ित रहते हैं। गण्डक, बूढ़ी गण्डक, बागमती, कोसी, कमला बगान नदी घाटी क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष फसल तो लहललाते हैं लेकित बाढ़ के चलते किसान उन फसलों को घरों तक नहीं ला पाते हैं।

     पुनः गंगा के दक्षिणी भाग में प्रायद्वीपीय भारत से निकलने वाली बर‌साती नदियाँ प्रवाहित होती है। इन नदियों पर जल संग्रहण का उपाय नहीं किये जाने के कारण सभी जल बेकार चले जाते हैं। पुनः सिंचाई की पूर्ण व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान अपनी खड़ी फसलों को बचा नहीं पाते हैं। इसलिए बिहार का एक भाग जब बाढ़ की समस्या से जूझ रहा होता है तो दूसरी भाग सूखे की समस्या से जूझ रहा होता है।

2. सड़क बिजली को अपर्याप्तता:-

     बिहार का अधिकांश भाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। यहाँ प्रति इकाई सड़क बनाने का खर्च बहुत अधिक आता है और जो सड़के बनती भी है, वे साल भर के अन्दर ही टूट-फूट जाती है। इसका एक कारण भौगोलिक है। लेकिन दूसरे कारण भी कम गंभीर नहीं है। जैसे- विमर्माण के क्रम में अनुसंधान का नहीं किया जाना, पैसों की बंदरबांट और घटिया सामग्री का इस्तेमाल इत्यादि।

    बिहार की बिजली कई घण्टों तक गायब रहती है। बिहार के आज भी कई क्षेत्र हैं जो लालटेन युग में जी रहे हैं। दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में बिजली उपलब्ध है वहाँ तार काट लिये जाते हैं और जहाँ तार बच जाती है वहाँ बिजली चोरी किये जाते हैं और जो लोग बिजली का कनेक्शन लिए हुए हैं वे लोग समय पर बिल नहीं चुकाते हैं।

     बिहार में कोयला संसाधन का अभाव है और जो नदियाँ उपलब्ध हैं उस पर जल विद्युत् परियोजनाओं का निर्माण नहीं किला गया। फलतः बिहार राज्य को बिजली के लिए दूसरे राज्य के दया-दृष्टि पर निर्भर रहना पड़ता है।

3. प्रति व्यकि आय का नगण्य होना:-

       बिहार के प्रति व्यक्ति की आय राष्ट्रीय औसत आय से निम्न है। निम्न आय के कारण बचत की क्षमता भी काफी निम्न और धीमी है। अतः निम्न आय वर्ग के लोग प्रतिभाशाली और व्यापार में दक्ष होने के बावजूद अपनी योजनाओं को अंजाम नहीं दे पाते हैं।

4. औद्योगिक निष्क्रियता:-

    बिहार में नवीन औद्योगिक नीति का अभाव, खनिज एवं वन आधारित उच्चे माल का अभाव, पिछड़ी मानसिकता, भ्रष्टाचार एवं लाल-फीताशाही, संस्थागत एवं संरचनात्मक सुविधाओं का अभाव, राजनीतिक निष्क्रियता, जातिवाद, रंगदारी में उलझी हुई समाज इत्यादि कुछ ऐसे कारण हैं जिसके चलते बिहार में औद्योगिक विकास नहीं हो रहा है। इसके आलावे जो यहाँ उद्योग है वे बंद होते जा रही है।

5. रोजगारोन्मुख शिक्षण और प्रशिक्षण का अभाव:-

    जापान एक ऐसा देश है जहाँ प्राकृतिक संसाधनों का जबड़दस्त अभाव है फिर भी यह विश्व का एक विकसित राष्ट्र है। अगर इसी तर्ज पर सोचा जाए तो बिहार को क्यों नहीं एक विकसित राज्य बनाया जा सकता है? बिहार में कृषि आधारित उद्योगों को चलाने के लिए प्रशिक्षण केन्द्रों का जबड़दस्त अभाव है।

     बिहार के विश्वविद्यालयों में 70% विद्यार्थी कला विषय लेकर पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक सोच का विकास कैसे हो सकता है। यहाँ रोजगारों उन्मुख शिक्षा, कम्प्यूटर, टाईपिंग, आउट सोर्सिंग, BPO आधारित शिक्षा का अभाव है। यहाँ पोलिटेक्नीक स्कूल, ट्रेनिंग स्कूल, प्रबंधन संस्थान नगण्य है। 

6. जनसंख्या विस्फोट:-

      बिहार भारत का तीसरा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला राज्य है। लेकिन यहाँ की जनसंख्या गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण और निरश्वरता से त्रस्त है। यहाँ के अधिकांश लोग कुशल एवं भाग्य प्रधान है। फलतः मानवीय संसाधन प्रचुर होने के बावजूद बिहार एक उपभोक्तावादी राज्य बन जाता है।

7. राजनीति अपराधीकरण का गठबंधन:-

    बिहार अपराधी राज्य का एक पर्याय बन चुका है। किडनैपिंग उद्योग का रूप ले चुका है। मेहनतकश इंसान दिनभर अगर श्रम करता है और शाम होते-2 अगर वह घर लौटता है तो इसकी गारंटी सरकार नहीं दे सकती है अर्थात यहाँ कानून और न्यायिक व्यवस्था काफी जर्जर है। राजनीतिक पार्टियाँ जाति के दुष्चक्र में फंसे रहने के कारण विकास की बात नहीं कर पाती है। राजनीतिक पार्टियों में इच्छा शक्ति का जबड़दस्त अभाव देखा जा सकता है।

अन्य कारण :-

     बिहार के पिछड़ेपन के पीछे कई अन्य कारण भी रहे हैं। जैसे-

     बिहार का एक भूमि बद्ध राज्य होना, समुद्री सीमा एवं बंदरगाहों का अभाव, बिहार में प्रत्यक्ष पूँजी निवेश की कमी, देशी विदेशी अप्रवासी भारतीयों की बिहार में कम रुचि, कला-संस्कृति का अभाव। जातिवादी एवं रूढ़ीवादी मानसिकता, ज्ञान-पर्यटन-मानव आधारित उद्योग के विकास पर ध्यान नहीं दिया जाना इत्यादि कुछ ऐसे करण हैं जो बिहार को एक पिछड़ा राज्य बनाते है।

    इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के पीछे कई कारण सक्रिय है। लेकिन बिहार के लोगों को इसे नियति मानकर नहीं चलना चाहिए क्योंकि हमारा इतिहास गवाह है कि जब-2 बिहार के लोग जागे हैं तब-2 भारत “सोने की चिड़ियाँ” कहलाया है।

    अतः वक्त आ चुका है कि बिहा के सभी जाति, धर्म के लोग एकजूट होकर बिहा के छवि को बदलने का प्रयास करें।



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