Unique Geography Notes हिंदी में

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PG SEMESTER-4POPULATION GEOGRAPHY (जनसंख्या भूगोल)

1. Population Distribution, Growth, and Determinants: Prehistoric Period, Ancient Period, Modern Period

Population Distribution, Growth, and Determinants: Prehistoric Period, Ancient Period, Modern Period



परिचय

    जनसंख्या वितरण से तात्पर्य पृथ्वी की सतह पर मानव जनसंख्या के स्थानिक फैलाव से है। यह वितरण समान नहीं है, बल्कि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक सघनता और कुछ में विरलता पाई जाती है।

    जनसंख्या वितरण और वृद्धि को समझने के लिए इसे ऐतिहासिक कालों में विभाजित किया जाता है:-

1. प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period)- लगभग 10,000 ईसा पूर्व तक।

2. प्राचीन काल (Ancient Period)- लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 1700 ई. तक।

3. आधुनिक काल (Modern Period)- लगभग 1700 ई. से वर्तमान तक।

1. प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period):-

   प्रागैतिहासिक काल मानव इतिहास का प्रारंभिक चरण है, जो लगभग 10,000 ईसा पूर्व तक माना जाता है। इस काल में मानव ने लेखन, कृषि एवं स्थायी सभ्यता का विकास नहीं किया था और उसका जीवन पूर्णतः प्रकृति पर निर्भर था।

     इस समय जनसंख्या का वितरण अत्यंत असमान एवं विरल था। लोग भोजन की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते थे। जनसंख्या वृद्धि लगभग स्थिर थी क्योंकि उच्च मृत्यु दर, रोगों का अभावपूर्ण उपचार, प्राकृतिक आपदाएँ तथा अल्प जीवन प्रत्याशा प्रमुख बाधक थे। प्राकृतिक वातावरण इस काल का सबसे बड़ा निर्धारक था। 

(i) जनसंख्या वितरण की विशेषताएँ:

          प्रागैतिहासिक काल में जनसंख्या अत्यंत विरल और असमान रूप से वितरित थी। मानव शिकारी एवं संग्रहकर्ता था तथा नदी घाटियों, जंगलों और जल स्रोतों के निकट अस्थायी बसाव करता था। घुमंतू जीवन शैली इस काल की प्रमुख विशेषता थी। अर्थात संक्षेप में

✍️ जनसंख्या अत्यंत विरल थी

✍️ मानव शिकारी एवं संग्रहकर्ता (Hunting–Gathering Stage) था

✍️ नदी घाटियों, वन क्षेत्रों और जल स्रोतों के समीप अस्थायी बसाव

✍️ घुमंतू जीवन शैली

(ii) जनसंख्या वृद्धि की स्थिति:

    इस काल में जनसंख्या वृद्धि दर अत्यंत धीमी थी। उच्च मृत्यु दर, सीमित जन्म दर, रोगों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण जनसंख्या में स्थायित्व बना रहा। जीवन प्रत्याशा बहुत कम होने से जनसंख्या वृद्धि लगभग नगण्य थी। अर्थात संक्षेप में

✍️ जनसंख्या वृद्धि दर अत्यंत धीमी

✍️ उच्च मृत्यु दर

✍️ जन्म दर भी सीमित

(iii) जनसंख्या वृद्धि के निर्धारक (Determinants)

(क) प्राकृतिक कारक:-

       जलवायु की अनिश्चितता, कठोर मौसम तथा प्राकृतिक आपदाएँ जैसे बाढ़, सूखा और भूकंप मानव जीवन को प्रभावित करते थे। इन कारणों से मृत्यु दर अधिक थी और जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित बनी रही।

(ख) जैविक कारक:-

    इस काल में रोगों के उपचार का अभाव था। संक्रामक बीमारियाँ तेजी से फैलती थीं और औसत जीवन प्रत्याशा बहुत कम थी। इन जैविक कारणों ने जनसंख्या वृद्धि को गंभीर रूप से सीमित किया।

(ग) आर्थिक कारक:-

      भोजन उत्पादन का अभाव प्रागैतिहासिक काल की प्रमुख आर्थिक विशेषता थी। मानव शिकार और कंद-मूल पर निर्भर था, जिससे भोजन की अनिश्चितता बनी रहती थी और जनसंख्या के विस्तार की संभावना कम थी।

(घ) सामाजिक कारक:-

     प्रागैतिहासिक समाज असंगठित था। स्थायी परिवार, सामाजिक संस्थाएँ और राज्य व्यवस्था का अभाव था। सामाजिक अस्थिरता और सुरक्षा की कमी के कारण जनसंख्या वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध नहीं थीं।

निष्कर्ष:

     प्रागैतिहासिक काल में मानव जनसंख्या स्थिरता के बजाय संघर्ष आधारित अस्तित्व पर निर्भर थी।

2. प्राचीन काल (Ancient Period):-

    प्राचीन काल का समय लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 1700 ई. तक माना जाता है। इस अवधि में मानव समाज ने शिकारी अवस्था से निकलकर कृषि आधारित स्थायी जीवन अपनाया, जिससे जनसंख्या वितरण एवं वृद्धि में महत्वपूर्ण परिवर्तन आए।

    प्राचीन काल में कृषि की खोज मानव इतिहास की निर्णायक घटना सिद्ध हुई। स्थायी बस्तियाँ विकसित हुईं और नदी घाटी क्षेत्रों में जनसंख्या सघन होने लगी। इस काल में जन्म दर ऊँची थी, किंतु मृत्यु दर भी अधिक होने के कारण जनसंख्या वृद्धि सीमित रही। कृषि विकास, पशुपालन, सामाजिक संगठन और राज्य व्यवस्था सकारात्मक निर्धारक थे, जबकि युद्ध, अकाल और महामारियाँ नकारात्मक कारक रहीं।

(i) जनसंख्या वितरण की विशेषताएँ:

कृषि की शुरुआत-   

    नवपाषाण क्रांति (Neolithic Revolution) के अंतर्गत कृषि की शुरुआत हुई, जिससे मानव भोजन उत्पादन करने लगा। इससे स्थायी निवास संभव हुआ और जनसंख्या का संकेन्द्रण उपजाऊ क्षेत्रों में बढ़ने लगा।

स्थायी बस्तियों का विकास-

      कृषि पर आधारित जीवन ने घुमंतू जीवन को समाप्त किया और गाँवों व कस्बों का विकास हुआ। स्थायी बस्तियों ने सामाजिक संगठन को मजबूत किया और जनसंख्या को एक स्थान पर टिकने में सहायता की।

नदी घाटियों में जनसंख्या सघनता-

     नदियों के किनारे उपजाऊ मिट्टी, जल उपलब्धता और परिवहन सुविधा के कारण जनसंख्या अधिक सघन हुई। नदी घाटियाँ प्राचीन काल की प्रमुख मानव बसावट क्षेत्र रहीं।

सिंधु, नील, दजला-फरात, ह्वांग-हो-

      इन नदी घाटियों में विकसित सभ्यताओं ने कृषि, व्यापार और नगरीय जीवन को बढ़ावा दिया। परिणामस्वरूप यहाँ जनसंख्या घनत्व अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक पाया गया।

नगरों एवं सभ्यताओं का उदय

    कृषि अधिशेष के कारण नगरों का विकास हुआ। नगर सभ्यताओं ने प्रशासन, व्यापार और संस्कृति को संगठित किया, जिससे जनसंख्या वितरण अधिक केंद्रित एवं संरचित हुआ।

(ii) जनसंख्या वृद्धि की स्थिति:

धीमी लेकिन स्थिर वृद्धि-

     प्रागैतिहासिक काल की तुलना में जनसंख्या वृद्धि अधिक थी, परंतु तकनीकी सीमाओं और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण यह वृद्धि धीमी और नियंत्रित बनी रही।

जन्म दर अधिक, मृत्यु दर भी ऊँची-

    इस काल में सामाजिक कारणों से जन्म दर अधिक थी, किंतु रोग, अकाल और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में मृत्यु दर भी ऊँची बनी रही।

महामारी और युद्ध वृद्धि में बाधक-

   लगातार युद्धों और महामारियों ने बड़े पैमाने पर जनहानि की, जिससे जनसंख्या वृद्धि बार-बार बाधित होती रही।

(iii) जनसंख्या वृद्धि के निर्धारक-

कृषि विकास-

    कृषि विकास ने खाद्य सुरक्षा प्रदान की और स्थायी जीवन को संभव बनाया, जिससे जनसंख्या वृद्धि को आधार मिला।

खाद्य उत्पादन में वृद्धि-

    खाद्य उत्पादन बढ़ने से भुखमरी कम हुई और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि हुई, जिससे जनसंख्या धीरे-धीरे बढ़ी।

सामाजिक संगठन-

     परिवार, विवाह व्यवस्था और सामाजिक नियमों ने जनसंख्या वृद्धि को सामाजिक स्वीकृति प्रदान की और समाज को स्थिरता दी।

परिवार एवं राज्य व्यवस्था-

   संयुक्त परिवार प्रणाली और संगठित राज्य व्यवस्था ने सुरक्षा, कानून और संसाधनों का प्रबंधन किया, जिससे जनसंख्या वृद्धि के अनुकूल वातावरण बना।

तकनीकी कारक-

    कृषि उपकरणों, भंडारण और परिवहन तकनीकों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई, जिससे जीवन स्तर में सुधार और जनसंख्या वृद्धि संभव हुई।

सिंचाई एवं पशुपालन-

    सिंचाई से कृषि को स्थिरता मिली और पशुपालन से पोषण एवं श्रम शक्ति बढ़ी, जिसने जनसंख्या विस्तार में योगदान दिया।

युद्ध-

   लगातार युद्धों ने जनसंख्या को नष्ट किया और आर्थिक संसाधनों को क्षति पहुँचाई, जिससे जनसंख्या वृद्धि बाधित हुई।

अकाल-

  अकाल के समय खाद्य संकट से मृत्यु दर बढ़ी और जनसंख्या में गिरावट देखी गई।

महामारी (Plague, Smallpox)-

   प्लेग और चेचक जैसी महामारियों ने बड़े पैमाने पर जनसंख्या को प्रभावित किया और कई क्षेत्रों में जनसंख्या ह्रास का कारण बनीं।

निष्कर्ष:

   प्राचीन काल में जनसंख्या वितरण नदी आधारित सभ्यताओं तक सीमित रहा और वृद्धि नियंत्रित रही।

3. आधुनिक काल (Modern Period):-

    आधुनिक काल का आरंभ लगभग 1700 ई. से माना जाता है, जो औद्योगिक क्रांति के साथ जुड़ा हुआ है। यह काल वर्तमान समय तक विस्तृत है और इसे जनसंख्या इतिहास का सबसे गतिशील एवं परिवर्तनशील चरण माना जाता है।

     आधुनिक काल में औद्योगिक क्रांति, वैज्ञानिक आविष्कार और चिकित्सा सुविधाओं ने मृत्यु दर को अत्यंत कम कर दिया। परिणामस्वरूप 19वीं एवं 20वीं सदी में तीव्र जनसंख्या वृद्धि हुई।

      शिक्षा, परिवार नियोजन, शहरीकरण और सरकारी नीतियाँ आधुनिक काल के प्रमुख निर्धारक हैं। आज विकसित देशों में निम्न जन्म-मृत्यु दर के कारण जनसंख्या स्थिर है, जबकि विकासशील देशों में वृद्धि अभी भी अधिक है।

(i) जनसंख्या वितरण की विशेषताएँ

   आधुनिक काल में जनसंख्या वितरण में व्यापक स्थानिक परिवर्तन देखने को मिलता है-

औद्योगीकरण एवं शहरीकरण

✍️ उद्योगों के विकास से नगरों का तीव्र विस्तार हुआ

✍️ ग्रामीण से शहरी प्रवास में वृद्धि

✍️ महानगरों में अत्यधिक जनसंख्या संकेंद्रण

जनसंख्या का तीव्र विस्तार

✍️ विश्व जनसंख्या में अभूतपूर्व वृद्धि

✍️ 1800 में लगभग 1 अरब से बढ़कर आज 8 अरब से अधिक

विकसित क्षेत्रों में अधिक घनत्व

✍️ पश्चिमी यूरोप, जापान, पूर्वी एशिया एवं उत्तरी अमेरिका

✍️ उद्योग, परिवहन एवं सेवाओं की सघनता

वैश्विक असमान वितरण

✍️ कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक जनसंख्या दबाव

✍️ मरुस्थल, ध्रुवीय प्रदेश एवं पर्वतीय क्षेत्रों में विरल जनसंख्या

(ii) जनसंख्या वृद्धि की स्थिति

18वीं-20वीं सदी में जनसंख्या विस्फोट

✍️ औद्योगिक एवं चिकित्सा प्रगति के कारण मृत्यु दर में तीव्र कमी

✍️ जन्म दर लंबे समय तक ऊँची बनी रही

मृत्यु दर में तीव्र गिरावट

✍️महामारी नियंत्रण

✍️स्वच्छता, शुद्ध पेयजल और बेहतर आवास

चिकित्सा एवं पोषण में सुधार

✍️टीकाकरण कार्यक्रम

✍️संतुलित आहार एवं खाद्य सुरक्षा

✍️जीवन प्रत्याशा में वृद्धि

(iii) जनसंख्या वृद्धि के निर्धारक (Determinants)

वैज्ञानिक एवं तकनीकी कारक

✍️आधुनिक चिकित्सा विज्ञान

✍️एंटीबायोटिक्स एवं टीकाकरण

✍️शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी

आर्थिक कारक

✍️औद्योगिक रोजगार के अवसर

✍️आय में वृद्धि

✍️जीवन स्तर में सुधार

✍️परिवहन एवं संचार साधनों का विकास

सामाजिक कारक

✍️शिक्षा का प्रसार (विशेषकर महिला शिक्षा)

✍️सामाजिक जागरूकता

✍️परिवार नियोजन कार्यक्रम

✍️विवाह की आयु में वृद्धि

राजनीतिक कारक

✍️राष्ट्रीय जनसंख्या नीतियाँ

✍️स्वास्थ्य एवं कल्याण योजनाएँ

✍️सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम

जनसांख्यिकीय संक्रमण सिद्धांत

✍️आधुनिक काल में अधिकांश देश

✍️उच्च जन्म–मृत्यु दर से

✍️निम्न जन्म–मृत्यु दर की अवस्था की ओर बढ़े

✍️यह परिवर्तन आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन से जुड़ा है

(iv) वर्तमान स्थिति

विकसित देशों में

✍️जन्म दर अत्यंत कम

✍️वृद्ध जनसंख्या का अनुपात अधिक

✍️कुछ देशों में जनसंख्या घट रही है

विकासशील देशों में

✍️जन्म दर अपेक्षाकृत अधिक

✍️युवा जनसंख्या का प्रभुत्व

✍️तीव्र जनसंख्या वृद्धि एवं संसाधनों पर दबाव

निष्कर्ष:

   आधुनिक काल में जनसंख्या वितरण एवं वृद्धि प्राकृतिक नियंत्रण से मुक्त होकर मानव-निर्मित सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक कारकों पर आधारित हो गई है। यह काल मानव इतिहास में जनसंख्या परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण चरण है, जिसने वर्तमान वैश्विक जनसंख्या संरचना को आकार दिया है।

तुलनात्मक सारांश (संक्षेप में)

काल वितरण वृद्धि दर प्रमुख निर्धारक
प्रागैतिहासिक विरल अत्यंत धीमी प्रकृति, रोग
प्राचीन नदी घाटियाँ धीमी कृषि, युद्ध
आधुनिक असमान, शहरी तीव्र (पूर्व में) विज्ञान, नीति

समग्र निष्कर्ष

      जनसंख्या वितरण और वृद्धि मानव सभ्यता के विकास का दर्पण है। जहाँ प्रागैतिहासिक काल में जनसंख्या प्राकृतिक सीमाओं से नियंत्रित थी, वहीं आधुनिक काल में मानव स्वयं जनसंख्या परिवर्तन का प्रमुख निर्धारक बन चुका है।

I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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