2. मार्क्स का जनसंख्या सिद्धांत (Marx’s population theory)

2. मार्क्स का जनसंख्या सिद्धांत

(Marx’s population theory)


मार्क्स का जनसंख्या सिद्धांत ⇒मार्क्स का जनसंख्या सिद्

                मार्क्स को साम्यवादी चिन्तन का जन्मदाता माना जाता है। इन्होंने 1867 ई० में जनसंख्या पर अपना विचार प्रकट किया था। मार्क्स के पहले जितने भी विद्वान थे उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को जैविक प्रक्रिया मानते थे। जबकि मार्क्स ने पहली बार जनसंख्या वृद्धि को सामाजिक संकल्पना पर आधारित माना।

             कार्ल मार्क्स अपने साम्यवादी चिन्तन में कहा था कि पूरी दुनिया दो वर्गों में विभाजित है- “एक अमीर वर्ग और दूसरा गरीब वर्ग”। उनके अनुसार अमीरों का वर्ग हमेशा सम्पति एकत्रित में लगा रहता है। अमीर वर्ग कम से कम श्रमिक का उपयोग कर अधिक से अधिक उत्पादन करना चाहता है। तकनीक के प्रयोग पर अधिक से अधिक जोर देता है। वह श्रमिकों को कम-से-कम मजदूरी देकर अधिक औद्योगिक उत्पादन कर अधिक से अधिक लाभ कमाना चाहता है। इस तरह उसके पास समय अभाव के कारण जनसंख्या वृद्धि का मौका नहीं मिल पाता है।

            दूसरी तरफ समाज का वह वर्ग जो गरीबी से गुजर रहा है। उनमें निराशा का वातावरण होता है। जीविका उपार्जन हेतु श्रम के अलावे कोई दूसरा उपाय नहीं दिखता है। अत: गरीब वर्ग ज्यादा से ज्यादा धन एकत्रित करने हेतु श्रम का एकत्रीकरण शुरू कर देता है। फलतः जनसंख्या वृद्धि स्वाभाविक रूप से बढ़ते रहती है।
                मार्क्स ने मजदूरी और जन्म दर एवं मृत्यु दर के बीच प्रतिकूल सह सम्बन्ध पाया है।

मजदूरी ∝ 1 ⁄  जन्म एवं मृत्यु दर
                 उपरोक्त सूत्र के आधार पर उन्होंने बताया कि कम मजदूरी भी जनसंख्या विस्फोट की स्थिति उत्पन्न करती है। जब जनसंख्या का विस्फोट हो जाता है तो उस विस्फोटित जनसंख्या के सामने चार प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है-
(1) बेरोजगारी
(2) कुपोषण
(3) गरीबी और
(4) कष्टकर जीवन

                   उपरोक्त समस्याएँ गरीब एवं श्रमिक वर्ग को बेचैन कर देती है, जिसके कारण वर्ग संघर्ष प्रारंभ हो जाता है। मार्क्स ने बताया कि वर्ग संघर्ष से ही सभी आर्थिक, सामाजिक समस्याओं का समाधान होता है। धन सही रूप से समाज में वितरण हो जाता है। वर्ग संघर्ष में कई लोग मारे जाते हैं जिससे जनसंख्या में कमी आती है।

मार्क्स का जनसंख्या सिद्धांत का आलोचना

                   मार्क्स के द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या वृद्धि सिद्धांत की कई आधारों पर आलोचना की गई है। जैसे:-

(1) मार्क्स ने धर्म, विश्वास एवं जैविक प्रक्रिया को जनसंख्या वृद्धि का प्रमुख कारण नही माना है। जबकि क्लार्क महोदय के अनुसार जनसंख्या वृद्धि का प्रमुख कारण धर्म है, जबकि जननांकी संक्रमण सिद्धांत के अनुसार जनसंख्या वृद्धि का मूल कारण जैविक प्रक्रिया है।

(2) मार्क्स के अनुसार बढ़ती जनसंख्या से मजदूरी में सापेक्षिक कमी आती है। जबकि वास्तव में यह एक गलत अवधारणा है, क्योंकि लोक कल्याणी राज्यों में मजदूरी का निर्धारण लोग स्वयं नहीं करते हैं, यह सरकार के द्वारा किया जाता है।

(3) मार्क्स के अनुसार निजी सम्पत्ति और पूँजीपति समाज का विकास ही अप्रत्यक्ष रूप से जनसंख्या विस्फोट का कारण है लेकिन पश्चिमी यूरोप के संदर्भ में यह अवधारणा गलत साबित होती है।

(4) ड्यू मॉन्ट (फांसीजी)⇒

        द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कल्याणकारी राज्य की अवधारणा में अभिवृद्धि हुई है। इसके साथ ही साक्षरता में भी वृद्धि हुई है। समाज में चाहे अमीर हो या गरीब यह भावना पनपी है कि नियोजित और छोटा जीवन अधिक से अधिक खुशहाली ला सकता है। इससे स्पष्ट होता है कि जनसंख्या वृद्धि अमीरी & गरीबी से जुड़ी हुई नहीं है।

(5) अधिकतर विकासशील देशों में ऐसा देखने से लगता है कि अप्रत्याशित जनसंख्या वृद्धि का संबंध निम्न मजदूरी है। लेकिन यह वास्तव में यह निम्न मजदूरी से जुड़ा हुआ नहीं है बल्कि निम्न स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा हुआ है अर्थात् निम्न स्वास्थ्य का स्तर होने के कारण बच्चों के जीवित रहने की गारंटी नहीं होती है। फलत:, सामान्य व्यक्ति अधिक से अधिक बच्चा चाहता है।

निष्कर्ष :

           उपरोक्त आलोचनाओं के बावजूद इनकी अवधारणा उचित जान पड़ती है क्योंकि कहीं न कहीं गरीबी, बेरोजगारी और जनसंख्या में सह-संबंध है। एडम स्मिथ ने कहा है कि गरीबी जनसंख्या वृद्धि के लिए उपयुक्त वातावरण निर्माण करती है। मार्क्स के द्वारा व्यक्त यह विचार व्यक्त किया गया कि बढ़ती हुई जनसंख्या राष्ट्र की संपत्ति होती है। यह भी सापेक्षिक रूप से सही प्रतीत होता है। जैसे -भात में ही कुछ समय पहले तक जनसंख्या वृद्धि को एक अभिशाप के रूप में माना जाता था। जबकि Out Soursing, BPO, सूचना क्रांति के आगमन ने भातीय जनसंख्या को संसाधन के रूप में बदल दिया है।

 

6. संघवाद

6. संघवाद या संघवाद का भौगोलिक आधार


संघवाद ⇒ 

            संघवाद दो शब्दों के मिलने से बना है प्रथम-संघ और दूसरा- वाद। संघ का तात्पर्य एकजूट होने से है। जबकि वाद का तात्पर्य विचारधारा से है। जब राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में व्यक्ति, समूह या राज्य आपस में एकजूट होकर विचारधारा को जन्म देते हैं, तो उसे संघवाद कहा जाता है।

विशेषता
             संघवाद एक नाजुक समझौता है जो किसी भौगोलिक प्रदेश में निवास करने वाले जनसंख्या की भावनाओं को ध्यान में रखकर राष्ट्र आधारित राज्य की संकल्पना विकसित की जाती है।

संघीय व्यवस्था को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारक:

(1) प्राकृतिक –

(i) उच्चावच

(ii) पर्वत

(iii) जलवायु

(iv) मृदा

(2) मानवीय कारक –

(i) प्रजातीय विविधता

(ii) भाषाई विविधता

(iii) सामाजिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक विविधता

उत्पत्ति

              भौगोलिक विविधताओं के चलते ही कुछ राज्य आपस में समझौता कर संघीय व्यवस्था को जन्म देते हैं। अगर वे ऐसा नहीं कर पाते है तो वे अस्थिर, कमजोर राष्ट्र बन जाते हैं। अगर कोई राज्य का भाग अलग-2 भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित हो तो वहाँ संघीय व्यवस्था को बनाये रखना मुश्किल हो जाता है। जैसे- 1947 ई० में भारतीय उपमहाद्वीप पर भारत एवं पाकिस्तान नामक दो देशों का जन्म हुआ। लेकिन पाकिस्तान दो भागों में विभक्त था। एक पूर्वी पाकिस्तान और दूसरा पश्चिमी पाकिस्तान कहलाता था। भौगोलिक दूरियों के कारण ही पूर्वी पाकिस्तान पश्चिमी पाकिस्तान के साथ एकीकृत नहीं रह सका। फलत: 1971 ई० में ही वह टूट गया।

अध्ययन

                राजनीतिक भूगोल में संघवाद का अध्ययन कई भूगोलवेताओं ने किया है। इनमें O.H. स्पेट, प्रेसकॉट, ब्लिज, पाण्ड्स, R.D. दीक्षित इत्यादि का नाम उल्लेखनीय है।

संघवाद के विकास की अवस्था

                  संघवाद अचानक विकसित होने वाली राजनैतिक घटना नहीं है। बल्कि संघवाद का विकास कई अवस्थाओं से गुजने के बाद होता है। इसे नीचे के फ्लो चार्ट में देखा जा सकता है।

एलायंस
   ⇓
लीग
   ⇓
कानफेडरेशन
   
फेडरेशन (संघीय व्यवस्था)
   
एकात्मक राज्य

संघवाद के प्रकार

           संघवाद दो प्रकार के होता है-

(1) एकात्मक राज्य 

(2) संघात्मक राज्य

संघवाद के विशेषताएँ

(1) एकात्मक राज्यों का विकास छोटे राज्यों में होता है। जबकि संघात्मक राज्यों का विकास बड़े राज्यों में होता है।

(2) एकात्मक राज्य में प्रशासन का एक केन्द्र बिन्दु होता है। जबकि संघात्मक राज्य में प्रशासन पदानुक्रमित होता है।

(3) एकात्मक राज्य में राज्य की सीमा अत्यंत ही कमजोर होती है। जबकि राज्य में राज्य की सीमाएँ स्पष्ट और मजबूत होती है।

(4) संघीय व्यवस्था में सरकार का गठन दो स्तर पर होता है-

(i) केन्द्र सरकार और

(ii) राज्य सरकार

                   जबकि एकात्मक राज्य में सरकार का गठन एक स्तर पर होता है।

छोटे देशों में मात्र स्वीटजरलैण्ड ऐसा देश है जहाँ पर संघीय व्यवस्था का विकास हुआ है क्योंकि यह देश सात पहाड़ियों के कारण सात भाग में विभक्त है और प्रत्येक भाग की निवासियों की अलग-2 पहचान और अभिव्यक्ति है। दूसरी ओर बड़े-2 देशों में संघीय व्यवस्था का ही विकास हुआ है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में वृहत क्षेत्रफल के कारण, जर्मनी और नाइजीरिया में वृहत जनसंख्या के कारण, भारत और USA में वृहत जनसंख्या एवं वृहत क्षेत्रफल के कारण संघीय व्यवस्था का विकास हुआ।

                       किसी भी देश में संघीय व्यवस्था निम्न तथ्यों पर भी निर्भर करती है:-

(i) केन्द्रीय सरकार कितना दूरदर्शी है।

(ii) प्रादेशिक भावना का स्तर क्या है?

(iii) केन्द्र सरकार कितना कठोर या लचीला है?

(iv) आम जनता के द्वारा उठायी गई माँगों को सरकार कितना तरजीह देते है।

निष्कर्ष

          इस तह उपरोक तथ्यों से स्पष्ट है कि भौगोलिक दृष्टिकोण से विविधता रखने वाले राष्ट्रों में संघवाद का विकास हुआ है।

(नोट – संघ = किसी निश्चित उद्देश्य की पूर्ति हेतु एकजुट होना
वाद = विचारधारा)

संघवाद या संघवाद का भौगोलिक आधार

5. राष्ट्र एवं राज्य की संकल्पना / Concept of nation and state

5. राष्ट्र एवं राज्य की संकल्पना

(Concept of nation and state)


राष्ट्र एवं राज्य की संकल्पना⇒

               राष्ट्र एवं राज्य राजनीतिक भूगोल का दो अलग-2 संकल्पनाएँ हैं। लेकिन कई तथ्यों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि राष्ट्र एवं राज्य एकीकृत संकल्पनाएँ भी है। राष्ट्र और राज्य के बीच में भूगोलवेताओं ने निम्नलिखित अन्तर बताया है:-

(1) राज्य एक ऐसी संकल्पना है जिसके पास एक निश्चित भूभाग होता है, जिसकी सीमाएँ निर्धारित होती हैं। जबकि राष्ट्र एक ऐसी संकल्पना जिसके पास न अपना कोई भी भूभाग होता और न ही सीमा निर्धारित होती है। एक राष्ट्र से संबंधित लोग कई राज्यों में बिखरे होते हैं। जैसे-1948 ई० के पहले यहूदियों का कोई राज्य नहीं था। वे पश्चिमी यूरोपीय देश एवं मध्य एशिया के कई देशों में बिखरे हुए थे। अमेरिका की सहायता से फिलीस्तीन को विभाजित कर जब इजराइल रूपी राज्य का निर्माण किया गया तो यहूदियों को एक राज्य मिला।

              इसी तरह भारत के सिख समाज एक राष्ट्र के रूप में संगठित है। लेकिन उनके पास अभी कोई राज्य नहीं है।
(2) राज्य के चार प्रमुख तत्व माने जाते- (i)भूभाग (ii) जनसंख्या (iii) सरकार और (iv) संप्रभुता। जबकि राष्ट्र के पास न कोई भूभाग होता है और न ही कोई संप्रभु सरकार होती है।
(3) राज्य के पास निश्चित संसाधन होते हैं और उस पर उसका कानूनी अधिकार होता है। जबकि राष्ट्र के पास कोई संसाधन नहीं होता है।
(4) राज्य एक समझौते के तहत विकसित होते हैं, जबकि राष्ट्र स्वतः विकसित होते हैं।
(5) राज्य के विकास के लिए एक निश्चित जनसंख्या आवश्यक है, जबकि राष्ट्र का विकास एक व्यक्ति से भी हो सकता है।
(6) एक राज्य एक पूर्णतः राजनैतिक संकल्पना है जबकि राष्ट्र भावनात्मक एवं सांस्कृतिक संकल्पना है।
(7) एक राष्ट्र के लोग एक-दूसरे पर गर्भ महसूस करते हैं।

         इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट होता है कि राष्ट्र एवं राज्य दोनों अलग-2 संकल्पनाएँ हैं। वर्तमान समय में अगर राष्ट्र आधारित राज्य का विकास किया जाता है तो वह सर्वोत्तम भूराजनैतिक संकल्पना मानी जाती है। राष्ट्र आधारित राज्य बनाने हेतु निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं।

राष्ट्र आधारित राज्य बनाने के उपाय:-
(i) औद्योगिकीकरण और नगरीकण को बढ़ावा दिया जाए।
(2) पर्यटन, संचार माध्यम एवं परिवहन साधनों का विकास बड़े पैमाने पर किया जाय।
(3) सामाजिक संचार का विकास किया जाय।
(4) “हम सब एक हैं।” की भावना का प्रचार-प्रसार किया जाय।
(5) आर्थिक एवं मनोवैज्ञानिक अंतर-निर्भरता को बढ़ायी जाय।
(6) शिक्षा के स्तर को बढ़ाया जाय।
(7) अन्तरजातीय और अन्तरधार्मिक विवाह का प्रचलन बढ़ाया जाय।
(8) साम्प्रदायिक संगठनों को समाप्त कर दिया जाय।
(9) प्राचीन एवं विवाद‌ग्रस्त धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित कर दिया जाय।
(10) एकल सरकार, एकल संविधान, समान नागरिक संहिता, विधि का कानून लागू किया जाय।

राष्ट्र एवं राज्य की संकल

समस्याएँ
             राष्ट्र आधारित राज्य के विकास के दिशा में कई समस्याएँ अवरोधक के रूप में कार्य करती हैं। जैसे-
(i) जातिवाद
(ii) प्रजातिवाद
(iii) सम्प्रदायवाद
(iv) रंगभेद
(v) भाषाई विविधता
(vi) सांस्कृतिक विविधता
(v) विदेशी घुसपैठ
(vi) गरीबी एवं बेरोजगारी
(vii) निरक्षरता एवं चेतना का अभाव
(viii) क्षेत्रवाद
(ix) आतंकवाद

विशेषताएँ
             राष्ट्र आधारित राज्य का निर्माण करना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसकी निम्नलिखित विशेषताएँ होती है:-
(i) यह धीमी गति से चलने वाली प्रक्रिया है।
(ii) इसका विकास राजनीतिक चेतनाओं द्वारा किया जा सकता है। इसमें समाज के नेताओं की भूमिका अधिक होती है।
(iii) इसे सुनियोजित तरीके से विकसित किया जा सकता है।
(iv) इसमें भौगोलिक एवं ऐतिहासिक घटनाओं का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है।
(v) सामाजिक सुरक्षा, विकास की संभावना, पारस्पारिक निर्भरता इत्यादि इस प्रक्रिया को समुचित तरीके से आगे बढ़ाते हैं।

निष्कर्ष
            इस तरह उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि राष्ट्र एवं राज्य दो अलग-2 संकल्पा होने के बावजूद एक-दुसरे से अन्तरसंबंधित है। वर्तमान समय में प्रत्येक राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में संलग्न है। राजनीतिक भूगोल में यह संकल्पना व्यक्त की जा रही है कि सभी राष्ट्र आपस में मिलकर विश्वगृह्यता (Cosmopolitant) के रूप में विकसित हो रहे हैं।

Indian Geography Capsule 16

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(भारत का भूगोल)


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एक नजर में इन्हें जरुर देखें     

भारत के प्रमुख बन्दरगाह
क्रम प्रमुख बन्दरगाह राज्य/ केंद्र शा.प्रदेश नदी/खाड़ी/सागर
1. कोलकाता पश्चिम बंगाल  हुगली नदी
2. एन्नौर तमिलनाडु बंगाल की खाड़ी
3. पोर्ट ब्लेयर अंडमान बंगाल की खाड़ी
4. विशाखापट्टनम आंध्र प्रदेश बंगाल की खाड़ी
5. पारादीप उड़ीसा बंगाल की खाड़ी
6. तूतीकोरीन    तमिलनाडु बंगाल की खाड़ी
7. चेन्नई तमिलनाडु बंगाल की खाड़ी
8. कोच्चि  केरल अरब सागर
9. मुम्बई महाराष्ट्र अरब सागर
10. मर्मागोवा गोवा अरब सागर
11. कांडला गुजरात अरब सागर
12. न्यू मंगलुरु कर्नाटक अरब सागर
13. न्हावाशेवा महाराष्ट्र अरब सागर

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भारत के प्रमुख राष्‍ट्रीय उद्यान और अभ्‍यारण्‍य

क्रम प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान/अभ्यारण  राज्य
1. कैमूर वन्य जी अभ्यारण बिहार
2.  गिर राष्ट्रीय उद्यान गुजरात
3.  नल सरोवर अभ्यारण गुजरात
4.  जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड
5.  दुधवा राष्ट्रीय उद्यान उत्तर प्रदेश
6.  चन्द्रप्रभा अभ्यारण उत्तर प्रदेश
7.  बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक
8.   भद्रा अभ्यारण कर्नाटक
9.   सोमेश्वर अभ्यारण कर्नाटक
10.   तुंगभद्रा अभ्यारण कर्नाटक
11.  नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक
12. पाखाल वन्य जीव अभ्यारण तेलंगाना
13. कावला वन्य जीव अभ्यारण  तेलंगाना
14. मानस राष्ट्रीय उद्यान  आसम
15. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान  आसम
16. घाना पक्षी विहार राजस्थान
17. रणथम्भौर अभ्यारण राजस्थान
18.  कुंभलगढ़ अभ्यारण राजस्थान
19. पेंच राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश
20. तंसा अभ्यारण महाराष्ट्र
21. वोरीविली रा० उद्यान महाराष्ट्र
22. पलामू (बेतला) अभ्यारण झारखंड
23. दाल्मा वन्य जीव अभ्यारण  झारखंड
24. हजारीबाग वन्य जीव अभ्यारण झारखंड
25. चिल्का अभ्यारण  ओडीशा
26. सिमलीपाल अभ्यारण  ओडीशा
27. वेदान्तगल अभ्यारण तमिलनाडु
28. इंदिरा गाँधी अभ्यारण तमिलनाडु
29. मुदुमलाई अभ्यारण तमिलनाडु
30. कान्हा किसली रा० उद्यान मध्य प्रदेश
31. पंचमढ़ी अभ्यारण मध्य प्रदेश
32. बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान  मध्य प्रदेश
33. डाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान जम्मू कश्मीर
34. किश्तवाड़ राष्ट्रीय उद्यान जम्मू कश्मीर
35. पेरियार अभ्यारण केरल
36. पराम्बिकुलम अभ्यारण केरल
37. पखुई वन्य जीव अभ्यारण्य अरुणाचल प्रदेश
38. अबोहर अभ्यारण पंजाब
39. सुल्तानपुर झील अभ्यारण्य हरियाणा
40. रोहिला राष्ट्रीय उद्यान हिमाचल प्रदेश
41. सुन्दरवन राष्ट्रीय उद्यान पश्चिम बंगाल
42. भगवान महावीर उद्यान गोवा
43. नोंगरवाइलेम अभ्यारण्य मेघालय
44. डाम्फा अभ्यारण मिजोरम
45.   कीबुल लामजाओ रा० उद्यान मणिपुर
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कैमूर वन्य जीव अभ्यारण


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नोट :  मैं आशा करता हूँ कि भारत का भूगोल से सम्बंधित सभी Capsule आपके परीक्षा के लिए नींव का पत्थर साबित होंगे। अगर किसी भी प्रश्न के उत्तर को लेकर आपके मन में कोई संदेह हो तो हमसे Contact With us के माध्यम से, Comment या Email से Contact क सकते है। मैं हमेशा आपके मंगल भविष्य की कामनाता हूँ।

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(भारत का भूगोल)



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एक नजर में इन्हें जरुर देखें

1. भारत में देश का पहला दियासलाई बनाने का कारखाना 1921 ई० में किस स्थान पर स्थापित किया गया था जो आज भी सुचारू रूप से चल रहा है-

उत्तर – अहमदाबाद

2. पंजाब में कौन सा स्थान होजरी उद्योग के लिए प्रसिद्ध है-

उत्तर – लुधियाना

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3. मध्यप्रदेश में नेपानगर किसके लिए प्रसिद्ध है-

उत्तर – अखबारी कागज

4. फिरोजाबाद किसके लिए प्रसिद्ध है-

उत्तर – कांच की चूड़ियाँ

5. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 5 जोडता है-

उत्तर – चेन्नई को कोलकाता से

6. कोझीकोड बंदरगाह कहां स्थित है-

उत्तर – केरल में

7. कोच्चि बंदरगाह स्थित है-

उत्तर – मालाबार तट पर

8. किस राज्य में राष्ट्रीय महामार्ग का सबसे बड़ा तंत्र विद्यमान है-

उत्तर – मध्य प्रदेश

9. राष्ट्रीय महामार्ग संख्या-1A का समाप्ति स्थल है-

उत्तर – लेह

10. पारादीप बंदरगाह का विकास किन बंदरगाहों का भार कम करने के लिए किया गया था-

उत्तर – कोलकाता – विशाखापट्टनम

11. भारत में सूती वस्त्र एवं मशीनरी का सर्वाधिक निर्यात किस बंदरगाह से होता है-

उत्तर – मुंबई

12. जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह कहां स्थित है-

उतर – मुंबई

13. बैलाडीला से प्राप्त होने वाला लौह अयस्क किस बंदरगाह से निर्यात किया जाता है-

उत्तर – विशाखापट्टनम

14. रेल मार्ग की कुल लंबाई की दृष्टि से सबसे बड़ा रेलवे क्षेत्र है-

उत्तर – उत्तरी क्षेत्र

15. देश में सभी प्रकार के सड़क मार्ग की कुल लंबाई की दृष्टि से प्रथम राज्य है-

उत्तर – महाराष्ट्र

16. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 7 के प्रारंभिक एवं अंतिम स्टेशन है-

उत्तर – वाराणसी से कन्याकुमारी

17. भारतीय रेलवे द्वारा सबसे अधिक माल परिवहन होता है-

उत्तर – कोयले का

18. भारत के किस बंदरगाह पर कोयले के लदान हेतु यंत्रीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है-

उत्तर – पारादीप

19. अंडमान द्वीपों की आदिवासी जनसंख्या किस प्रजाति वर्ग से संबंधित है-

उत्तर – नीग्रिटो

20. भोटिया जनजाति किस प्रकार के प्रवास से संबंधित है

उत्तर – मौसमी प्रवास

21. भारत की जनजातियों के वितरण का क्रम पूरब से पश्चिम की ओर है-

उत्तर – नागा- संथाल- गोंड- भील

22. मध्य तथा दक्षिणी भारत की जनजातियां किस समूह से संबंधित है-

उत्तर – प्रोटो-ऑस्ट्रेलॉयड

23. दजला एवं सिंहपों जनजातियां किस प्रदेश में पाई जाती है-

उत्तर – मध्य प्रदेश

24. पनियान तथा इरुला जनजातियां किस राज्य में निवास करती है-

उत्तर – केरल

25. भारत में अधिकतम जनजातीय आबादी किसकी है-

उत्तर – भील की (2011के अनुसार)

26. भारत के कोल लोग संबंधित है-

उत्तर – नीग्रिटो प्रजाति से

27. किस राज्य में कुकी जनजाति मुख्यतः निवास करती है-

उत्तर – नागालैंड

28. उत्तर भारत के मैदान में किस प्रकार की बस्तियों की बहुलता है-

उत्तर – केन्द्रित

29. अधिकांश भारतीय किस प्रजातीय समूह से संबंधित है-

उत्तर – भूमध्यसागरीय

30. नार्डिक प्रजाति के लोग भारत में अधिकांशत: मिलते हैं-

उत्तर – उत्तर-पश्चिमी भारत में

31. जम्मू-कश्मीर में रहने वाले इण्डो-आर्यन लोगों को किस नाम से जाना जाता है-

उत्तर – डोगरा

32. टोडा जनजातीय लोगों का निवास स्थल है-

उत्तर – नीलगिरी की पहाड़ियाँ

33. देवनागरी लिपि का विकास हुआ है-

उतर – सिद्धमात्रिका से

34. मंगोल प्रजाति की जन्मभूमि है-

उत्तर – चीन

35. दोआब क्षेत्रों में अधिवासों का प्रारूप होगा-

उत्तर – खंडित

36. हिंदुओं का सर्वाधिक अनुपात किस राज्य में है-

उत्तर – उड़ीसा

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37. भारत के किस राज्य में बौद्ध धर्म के अनुयायी सबसे अधिक पाए जाते हैं-

उत्तर – महाराष्ट्र

38. भारत के किस राज्य में इसाई जनसंख्या का प्रतिशत सर्वाधिक है-

उत्तर – मिजोरम

39. भारत में सबसे बड़ी तेल शोधनशाला स्थित है-

उत्तर – जामनगर में

40. देश में रेशम उद्योग का सर्वाधिक स्थानीयकरण किस राज्य में हुआ है-

उत्तर – कर्नाटक में

41. भारत में तेल शोधक कारखाना अधिकांश वृहत् बंदरगाहों के समीप स्थापित है क्योंकि-

उत्तर – आयातित कच्चे माल पर निर्भरता है

42. भारत के किस उद्योग में सर्वाधिक संख्या में महिलाएं कार्यरत है-

उत्तर – चाय

43. देश में चीनी मिलों की सर्वाधिक संख्या किस राज्य में स्थित है-

उत्तर – उत्तर प्रदेश में

44. भारत में सीमेंट उत्पादन में प्रथम स्थान वाला राज्य है-

उत्तर – राजस्थान

45. भारत का कौन सा राज्य “शक्कर का कटोरा” कहलाता है-

उत्तर – उत्तर प्रदेश

46. वर्तमान में भारत का सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है-

उत्तर – बिहार (1106)

47. भारत का सर्वाधिक शिक्षित राज्य कौन है-

उत्तर – केरल

48. संपूर्ण विश्व की जनसंख्या में भारत की भागीदारी लगभग कितनी है-

उत्तर – 17.7%

49. जनसंख्या की दृष्टि से भारतीय संघ का सबसे बड़ा राज्य है-

उत्तर – उत्तरप्रदेश

50. भारत का सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है-

उत्तर – अरुणाचल प्रदेश


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जीवविज्ञान

भौतिकशास्त्र

रसायनशास्त्र


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भारत का भूगोल


एक नजर में इन्हें जरुर देखें

1. कृषि क्षेत्र में हरित क्रांति का जन्मदाता किसे माना जाता है-

उत्तर- नॉर्मन ई. बोरलॉग

2. भारत में स्वर्ण कहां पाया जाता है-

उत्तर- कोलार (कर्नाटक)

3. भारत में लौह अयस्क के उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है-

उत्तर- झारखंड

4. भारत में लौह-अयस्क के भंडारण में किस राज्य का प्रथम स्थान है-

उत्तर- कर्नाटक

5. कौन सा राज्य सबसे अधिक मूल्य के खनिज उत्पन्न करता है-

उत्तर- झारखंड

6. भारत में सर्वाधिक कोयला भंडार पाए जाते हैं-

उत्तर- झारखंड में

7. भारत में स्टील ग्रेड चूना पत्थर का खनन होता है-

उत्तर- सानू (राजस्थान में)

8. अग्नि शैल की शिराओं से प्राप्त होने वाला खनिज है-

उत्तर- हीरा

9. भारत में खनिजों की दृष्टि से निर्धन क्षेत्र है-

उत्तर- थार का मरुस्थल

10. भारत में बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है-

उत्तर- ओडिशा

11. बैलाडीला से उत्तम किस्म के लोहे की प्राप्ति होती है जो स्थित है-

उत्तर- छत्तीसगढ़ में

Indian Geography Capsule 13

बैलाडीला

Indian Geography Capsule 13

12. भारत का अधिकांश लौह अयस्क प्राप्त होता है-

उतर- धारवाड़ क्रम की चट्टानों से

13. सीसा-जस्ता, तांबा एवं टंगस्टन का सर्वप्रमुख उत्पादक राज्य है-

उत्तर- राजस्थान

14. अभ्रक की प्राप्ति होती है-

उत्तर- आग्नेय शैलों से

15. बैलाडीला खान से खनन किए जाने वाले लौह-अयस्क को किस बंदरगाह से निर्यात किया जाता है-

उत्तर- विशाखापट्टनम

16. भारत में जिप्सम का सबसे अधिक उत्पादन वाला राज्य है-

उत्तर- राजस्थान

17. जावर एवं रामपुरा-आगूचा खनन क्षेत्र किस खनिज से संबंधित है-

उत्तर- सीसा-जस्ता

18. कुद्रेमुख लौह खनिज परियोजना किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- कर्नाटक

19. भारत में नमक की प्राप्ति मुख्य रूप से किस के स्रोत से होती है-

उत्तर- सागरीय जल, झील एवं मृदा जल, तथा चट्टानी नमक की परतें से

20. भारत में सर्वाधिक हीरा किस स्थान से निकाला जाता है-

उत्तर- पन्ना (मध्य प्रदेश)

21. गुजरात में बड़ोदरा क्षेत्र की मोतीपुरा खान से कौन सा पत्थर निकाला जाता है-

उत्तर- सफेद संगमरमर

22. देश में कुल उत्पादन का लगभग 86% बाईराइट्स खनिज किस राज्य से निकाला जाता है-

उत्तर- आंध्र प्रदेश

23. भारत में सर्वोत्तम श्रेणी का संगमरमर किस स्थान से प्राप्त होता है-

उत्तर- मकराना से

24. मूल्य की दृष्टि से भारत लौह-अयस्क का निर्यात सबसे अधिक करता है-

उत्तर- ग्रेट ब्रिटेन को

25. आयातित कच्चे माल का उपयोग करने वाली बाजार आधारित तेल शोधनशाला है-

उत्तर- मथुरा

26. स्वदेशी तकनीक से निर्मित परमाणु संयंत्र है-

उत्तर- कलपक्कम

27. सिंगरैनी कोयला क्षेत्र पर आधारित ताप विद्युत घर है-

उत्तर- रामगुंडम

28. भारत में अधिकांश जल विद्युत शक्ति ग्रह किस नदी प्रणाली पर निर्मित है-

उत्तर- गंगा यमुना

29. किस राज्य में ताप विद्युत गृह स्थापित नहीं है-

उत्तर- हिमाचल प्रदेश

30. देश में कुल विद्युत उत्पादन में ताप विद्युत का योगदान है-

उत्तर- 80%

31. भारत के किस क्षेत्र के ताप विद्युत संयंत्रों की भार क्षमता सर्वाधिक है-

उत्तर- दक्षिणी क्षेत्र

32. भारत में ज्वार शक्ति उत्पादन में अग्रणी तटीय क्षेत्र है-

उत्तर- खंभात की खाड़ी

33. भारत में खनिज तेल के भंडार मुख्यतः किस प्रकार की चट्टानों में पाए जाते हैं-

उतर- अवसादी या परतदार

34. कोइलकारी जल विद्युत परियोजना किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- बिहार 

35. चेन्नई के समीप कलपक्कम नामक स्थान पर किस संयत्र की स्थापना की गई है-

उत्तर- नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र

36. भारत में सर्वप्रथम कोयला उत्खनन किस स्थान पर प्रारंभ किया गया-

उत्तर- रानीगंज

37. इन्नौर जल विद्युत परियोजना किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- तमिलनाडु

38. भारत तथा एशिया की एकमात्र अधोभौमिक संजय जल विद्युत परियोजना किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- हिमाचल प्रदेश

39. भारत की पहली लहर ऊर्जा परियोजना (Wave Energy Project) किस स्थान पर स्थापित की गई है-

उत्तर- विझिनजाम (केरल)

40. काइकालुर खनिज तेल क्षेत्र किस नदी घाटी क्षेत्र में स्थित है-

उत्तर- कृष्णा-गोदावरी नदी घाटी क्षेत्र में

41. लोकटक शक्ति परियोजना किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- मणिपुर

42. भविष्य का ईंधन किसे कहा जाता है-

उत्तर- हाइड्रोजन को

43. भारत की किस खन से कोयला का सर्वाधिक उत्पादन प्राप्त होता है-

उत्तर- झरिया से

44. भारत के कोयला उत्पादन में छोटा नागपुर का योगदान लगभग कितना है-

उत्तर- 40%

45. नवेली में खनन किया जाने वाला प्रमुख खनिज कौन सा है-

उत्तर- लिग्नाइट कोयला

46. काकरापारा परमाणु शक्ति केंद्र किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- गुजरात

47. भारत में ऊर्जा उत्पादन में सर्वाधिक भागीदारी किस प्रकार की ऊर्जा की है-

उत्तर- ताप विद्युत ऊर्जा

48. भारत में कागज उद्योग का प्रथम सफल कारखाना सन 1870 में किस स्थान पर लगाया गया-

उत्तर- बालीगंज (कोलकाता)

49. वह उद्योग जो स्थानीय कच्चे मालों का उपयोग करते हैं, उसे क्या कहा जाता है-

उत्तर- कुटीर उद्योग

50. भारत का सबसे महत्वपूर्ण लघु उद्योग कौन सा है-

उत्तर- हथकरघा



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नोट :  मैं आशा करता हूँ कि भारत का भूगोल से सम्बंधित सभी Capsule आपके परीक्षा के लिए नींव का पत्थर साबित होंगे। अगर किसी भी प्रश्न के उत्तर को लेकर आपके मन में कोई संदेह हो तो हमसे Contact With us के माध्यम से, Comment या Email से Contact क सकते है। मैं हमेशा आपके मंगल भविष्य की कामनाता हूँ।

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भूगोल- सामान्य भूगोल और भारत का भूगोल

इतिहास

राजनीतिशास्त्र

अर्थशास्त्र

जीवविज्ञान

भौतिकशास्त्र

रसायनशास्त्र

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भारत का भूगोल



एक नजर में इन्हें जरुर देखें

1. विश्व में प्राकृतिक रबड़ के उत्पादन में भारत का स्थान है-
उत्तर- दूसरा

2. भारत में कॉफी के अंतर्गत संपूर्ण क्षेत्र में उगाई जाने वाली कॉपी की किस्में है-
उत्तर- रोबस्टा और अरेबिका

3. भारत में कॉफी के अंतर्गत संपूर्ण क्षेत्र के 60% भाग पर किस किस्म का उत्पादन होता है-
उत्तर- रोबस्टा

4. भारत में सुनहरी क्रांति किससे संबंधित है-
उत्तर- बागबानी क्रांति से

5. किस राज्य में काजू का सर्वाधिक उत्पादन किया जाता है-
उत्तर- केरल में

6. केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान किस राज्य में स्थित है-
उत्तर- हिमाचल प्रदेश (शिमला)

7. किस भारतीय राज्य को “मसालों का बगीचा” के उपनाम से जाना जाता है-
उत्तर- केरल

8. देश के कुल कृषि योग क्षेत्र के सर्वाधिक भाग पर किस फसल की कृषि की जाती है-
उत्तर- धान की

9. असम में शीतकालीन चावल की फसल किस नाम से जानी जाती है-
उत्तर- साली

10. शस्य गहनता की दृष्टि से भारत का सबसे समृद्ध राज्य कौन सा है-
उत्तर- पंजाब

11. रबर किस जलवायु का पौधा है-
उत्तर- भूमध्यरेखीय

12. चमत्कारिक फसल के रूप में जाना जाता है-
उतर- सोयाबीन

13. भारत में वृहत पैमाने पर जूट की खेती किस नदी घाटी क्षेत्र में की जाती है-
उत्तर- हुगली

14. तंबाकू उत्पादन में कौन सा राज्य अग्रणी है-
उत्तर- आंध्र प्रदेश

15. भारत में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है-
उत्तर- केरल

16. भारत के किस भाग में चाय व कॉफी की पैदावार साथ-साथ होती है-
उत्तर- दक्षिणी-पश्चिमी भागों में

17. भारत में सर्वप्रथम काजू उगाने का कार्य पुर्तगालियों ने किया, काजू का सर्वाधिक उत्पादन किस राज्य में होता है-
उत्तर- केरल

18. जूट उत्पादन में भारत का स्थान है-
उत्तर- प्रथम

19. मिश्रित खेती क्या है-
उत्तर- कई फसलों के साथ पशुपालन करना

20. जूट और कपास किस प्रकार की फसलें हैं-
उत्तर- रेशेदार फसल

21. भारत में गेहूं के तीन अधिकतम उत्पादक राज्यों का अवरोही क्रम है-
उत्तर- उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्यप्रदेश

22. भारत के किस राज्य में अति उपजाऊ भूमि का प्रतिशत सर्वाधिक है-
उत्तर- पंजाब

23. एशिया का सबसे बड़ा फल संसाधन संयंत्र हिमाचल प्रदेश के किस स्थान पर स्थित है-
उत्तर- परवानू

24. भारत मे हरित क्रांति के जन्मदाता मने जाते है-
उत्तर- एम एम स्वामीनाथन

25. भारत में हरित क्रांति अभी तक उत्पादकता वृद्धि में सफल हुई है-
उत्तर- गेंहूँ एवं चावल की

26. कहवा, रबड़ तथा तंबाकू तीनों फसलों का उत्पादन किस राज्य में किया जाता है-
उत्तर- केरल

27. भारत का कौन सा क्षेत्र धान का कटोरा कहलाता है-
उत्तर- कृष्णा-गोदावरी डेल्टा

28. भारत का केंद्रीय मत्स्य शोध संस्थान कहां पर स्थित है-
उत्तर- कोच्चि

29. भारत में कृत्रिम मोती के निर्माण का कार्य विकसित हुआ है-
उत्तर- रामेश्वरम तट के पास

30. देश के कुल वन क्षेत्र का सर्वाधिक भाग किस वर्ग में है-
उत्तर- आरक्षित

31. देश में ताजे पानी की मछलियां सर्वाधिक पकड़ी जाती है-
उत्तर- पश्चिम बंगाल में

32. अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में भारत का विश्व में स्थान है-
उत्तर- दूसरा

33. भारत में मृदा अपरदन का सबसे प्रमुख कारण क्या है-
उतर- वनों का बड़ी मात्रा में विदोहन

34. भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग का मुख्यालय कहां है-
उत्तर- देहरादून में

35. भारत में तेंदू पत्ता का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला राज्य कौन सा है-
उत्तर- मध्यप्रदेश

36. राष्ट्रीय पर्यावरण शोध संस्थान किस स्थान पर स्थापित है-
उत्तर- नागपुर

37. भारत में वृक्षारोपण उत्सव जिसे ‘वन महोत्सव’ कहा जाता है, के जन्मदाता कौन हैं-
उत्तर- के. एम. मुंशी

38. नीली क्रांति किससे संबंधित है-
उत्तर- मत्स्य पालन से

39. कौन सा भारतीय राज्य समुद्री उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक है-
उत्तर- केरल

40. व्यापारिक रूप से मत्स्य पालन का व्यवसाय किस नाम से जाना जाता है-
उत्तर- पिसीकल्चर

41. घना पक्षी विहार स्थित है-
उत्तर- राजस्थान में

42. किस भारतीय राज्य में बाघों की आबादी अधिकतम है-
उत्तर  मध्यप्रदेश में

43. भारत में मत्स्य उत्पादन में प्रथम स्थान वाला राज्य है-
उत्तर- पश्चिम बंगाल

44. शांत घाटी स्थित है-
उत्तर- केरल में

Indian Geography Capsule 12

शांत घाटी

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45. भारत मे सर्वाधिक वनाच्छादित राज्य कौन सा है-
उत्तर- मध्यप्रदेश

46. तटीय एवं खुला सागरीय मत्स्यन किस राज्य में अधिक विकसित हुआ है-
उत्तर- पश्चिम बंगाल

47. राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में अवस्थित है-
उत्तर- राजस्थान

48. उदयपुर की जावर खानें किस खनिज के उत्खनन के लिए प्रसिद्ध है-
उत्तर- जिंक या जस्ता

49. खनिज पदार्थों की दृष्टि से कौन सा भारतीय क्षेत्र अधिक समृद्ध है-
उत्तर- छोटानागपुर का पठार

50. राजस्थान की खेतड़ी रियोजना किसके उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है-
उत्तर- तांबा


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भूगोल- सामान्य भूगोल और भारत का भूगोल

इतिहास

राजनीतिशास्त्र

अर्थशास्त्र

जीवविज्ञान

भौतिकशास्त्र

रसायनशास्त्र

4. बफर राज्य / Buffer State

4. बफर राज्य
(Buffer State)


बफर राज्यबफर राज्य

                बफर राज्य वह सार्वभौमिक, भौगोलिक इकाई है जो सामान्यतः दो बड़े और शक्तिशाली राज्यों के बीच अवस्थित है। दूसरे शब्दों में बफर क्षेत्र/ राज्य दो शक्तिशाली राष्ट्रों के सीमाओं को अलग कर तनाव कम करते हैं। नेपाल इसका का एक अच्छा उदा० है। यह भारत और चीन नामक दो शक्तिशाली सीमाओं को अलग करता है।

विशेषता :-
(1) बफर राज्य का आकार काफी छोटा होता है।

(2) इसकी संरचना प्रायः रेखीय होती है।

(3) इसमें भौगोलिक प्रतिकूलताएँ मौजूद होते हैं।

(4) दो शक्तिशाली राष्ट्रों के सीमाओं को अलग कर प्रत्यक्ष संघर्ष की स्थिति को समाप्त करते हैं।

(5) विशिष्ट परिस्थितियों में दो राष्ट्रों के बीच मध्यस्थता का कार्य करते हैं।

(6) ऐसे राज्य दोनों शक्तिशाली राष्ट्रों से आर्थिक सहायता प्राप्त करता है।

(7) प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते इनकी अर्थव्यवस्था अस्थिर होती है।

(8) इसके पास अपना कोई रक्षा बजट नहीं होता है।

(9) यह अपने स्वभाव से ही कभी भी शक्तिशाली बनने का प्रयास नहीं करते हैं।

उत्पत्ति
             इसका विकास वैसे ही परिस्थितियों में होती है जहाँ पर निम्नलिखित भौगोलिक कारण सक्रिय रहते हैं:-

(1) अगर कोई राज्य सीमान्त क्षेत्र में विकसित हुआ हो। जैसे- 1947 ई० के पूर्व ब्रिटिश साम्राज्य और रूसी साम्राज्य के बीच अफगानिस्तान बफर राज्य का कार्य करता था।

(2) अगर दो बड़े राष्ट्रों और शक्तिशाली देशों के बीच में विशिष्ट प्रजाति, संस्कृति, भाषा के लोग अधिवासित होते हैं तो वहाँ भी बफर राज्य का विकास होता है।

(3 ) अगर दो राष्ट्रों के बीच सदियों से संगठित प्रजातीय समूह निवास कर रहा हो और धीरे-2 राष्ट्रीयता की भावना का विकास कर लिया हो तो वैसी परिस्थितियों में बफर राज्य का विकास होता है।

परिवर्तन

           द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इसके महत्व में कमी आयी है क्योंकि-

(1) युद्ध के तौर तरीकों में जबरदस्त बदलाव आया है।

(2) संचार साधनों के विकसित होने के कारण तनाव की स्थिति में दोनों शक्तिशाली राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्ष हॉटलाइनों के माध्यम से बातचीत कर लेते हैं। फलत: बफर राज्य की सहायता नहीं ली जाती है।

(3) अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के गठित हो जाने के बाद विवादों को सुलझाने में इनकी मदद नहीं ली जाती है।

         बफर राज्य के महत्व घटने के कारण कई नाकारात्मक परिणाम उभर कर सामने आये हैं। जैसे – रूस के द्वारा अफगानिस्तान पर आक्रमण किया गया, चीन ने तिब्बत को हड़प लिया, नेपाल और भारत के बीच में समय-समय पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई।

पर्तमान में प्रासंगिकता

               बफर राज्य की संकल्पना भले ही धुमिल पड़ रही हो लेकिन मौलिक महत्ता आज भी यथावत है। जैसे-

(1) आज भी ये दो शक्तिशाली राष्ट्रों के सीमाओं को अलग करते हैं

(2) असामयिक गोली-बारी एवं तनाव की स्थिति उत्पन्न होते नहीं देते हैं।

(3) दोनों राष्ट्रों के सेनाओं को पृथक रखते हैं।

निष्कर्ष : इस तह उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि बफर राज्य की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।

3. अंतर्राष्ट्रीय सीमा का वर्गीकरण

3. अंतर्राष्ट्रीय सीमा का वर्गीकरण

(Classification of International Border)


अंतर्राष्ट्रीय सीमा का वर्गीकरण⇒अंतर्राष्ट्रीय सीमापरिचय 

         सीमा दो राज्य या दो राष्ट्र या दो प्रशासनिक एवं राजनीतिक क्षेत्र को विभाजित करने वाली भू-राजनैतिक संकल्पना है। इसे रेखीय संकल्पना भी कहते हैं। सीमा प्रतिकूल एवं अनुकूल दोनों क्षेत्रों से गुजरती है। सीमा रेखा पर अभिसारी शक्तियाँ कार्य करती है। यहाँ जनसंख्या एवं संसाधन का अभाव होता है। सीमा दो राज्यों के बीच विभाजक का कार्य करती है।

          सीमा शांत और अशान्त दोनों प्रकार के हो सकती है। जैसे- भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा अशान्त सीमा का उदा० है। जबकि USA और कनाडा की सीमा शान्त सीमा का उदा० है।

अंतर्राष्ट्रीय सीमा का वर्गीकरण

             सीमा का वर्गीकरण दो आधार पर किया जाता है:-

(1) उत्पत्ति के आधार पर या जनन विभाजन

(2) आकारिकी विभाजन                        

(1) उत्पत्ति के आधार या जनन विभाजन के आधार पर सीमा का कारिकी वर्गीकरण:–                 

             उत्पत्ति के आधार पर सीमा चार प्रकार के होते हैं- जैसे-

(i) पूर्ववर्ती सीमा ⇒ इसकी तुलना पूर्ववर्ती नदी से की जाती है। वैसी नदी को पूर्ववर्ती नदी कहते हैं जो स्थलाकृतिक उत्थान के पूर्व से ही मौजूद हो। इसी तरह से जिन राष्ट्रों के बीच सीमा पुरानी हो और सीमा के दोनों ओर अलग-2 संस्कृति का विकास हुआ हो। वैसी सीमा को पूर्ववर्ती सीमा कहते हैं। जैसे- USA और कनाडा के बीच स्थित सीमा रेखा।

(ii) परवर्ती सीमा ⇒ ऐसी सीमा की तुलना परवर्ती नदी से करते हैं अर्थात् भौगोलिक क्षेत्र के उत्थान के बाद ढाल के अनुरूप विकसित नदी को परवर्ती नदी कहते हैं। परवर्ती सीमा में इसी तरह से संस्कृति का विकास पहले होता और सीमा का विकास बाद में होता है। जैसे- भारत और पाकिस्तान के बीच स्थित सीमा रेखा।

(iii) अवशिष्ट सीमा ⇒ इसकी तुलना अवशिष्ट पर्वत से की जा सकती है। वैसे पर्वत जो कभी विश्व के सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला थी जो बाद में अपरदन के कारण अवशिष्ट पर्वत के रूप में बदल चुकी है। इसी तरह अशिष्ट सीमा वह है जो कभी दो राष्ट्रों के बीच में सीमा का कार्य विभाजन का कार्य करती थी लेकिन अब अपनी पहचान खो चुकी है। जैसे- चीन और तिब्बत के बीच स्थित सीमा।

(iv) अध्यारोपित सीमा ⇒ वैसी सीमा रेखा जिसे सामरिक एवं राजनैतिक कारणों से एक ही सांस्कृतिक प्रदेश को विभाजित करने के लिए सीमा का निर्माण कर दिया जाय तो उसे अध्यारोपित सीमा कहते हैं। जैसे -पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी के बीच स्थित सीमा।

(2) आकारिकी (Morphology) के आधार पर सीमा का कारिकी वर्गीकरण:-                

          राजनीतिक विज्ञान में आकारिकी के आधार पर सीमा का विभाजन तिन आधार पर के किया गया है:-

(I) भू-आकृति के आधार/ भौगोलिक आधार पर

(II) ज्यामितीय आकार के आधार‌ पर

(III) मानवीय सिद्धांतों के आधार पर

(I) भू आकृति के आधार पर

NOTE :-

(a) 1° – महाद्वीप तथा महासागर

(b) 2° – पहाड़, पठार, मैदान

(c) 3° – अपरदन एवं निक्षेपण से निर्मित स्थलाकृति, जैसे – डेल्टा, गारा, ड्रमलिन

               भू-आकृति के आधार पर पृथ्वी के धरातल पर कई ऐसे भूआकृतियों का विकास हुआ है जो दो देशों के सीमा को विभाजित करती है। जैसे:-

(i) पर्वतीय सीमा⇒ दो राष्ट्रों के बीच में जब पर्वत अवस्थित होता है तो वैसी स्थिति में पर्वतीय चोटियाँ सीमा रेखा का कार्य करती हैं।

उदा० – द. अमेरिका में  चिली-अर्जेण्टीना के सीमा बीच एण्डीज पर्वत

भारत-चीन के बीच हिमालय पर्वत

(ii) नदी सीमा⇒ जब दो राष्ट्रों के बीच में नदी प्रवाहित होती है तो वैसी सीमा को नदी सीमा कहते हैं। नदी या जलशयों में सीमा निर्धारित करने का एक अन्तर्राष्ट्रीय समझौता है जिसके अनुसार जब दो देशों के बीच कोई नदी या जलीय स्थलाकृति हो तो उस नदी या जलाशय के मध्यवर्ती भाग से सीमा रेखा गुजरेगी।

(ii) दलदली सीमा⇒ कई राष्ट्रों के सीमावर्ती क्षेत्रों में दलदली क्षेत्र का विकास हुआ है। ये दलदली क्षेत्र ही दो राष्ट्रों के बीच में सीमा का कार्य करती हैं। जैसे- बेल्जियम-नीदरलैण्ड के बीच में , युक्रेन-वेलारूस के बीच में दलदली सीमा का विकास हुआ है।

(iii) वनीय सीमा⇒ कई देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन वन का विकास हुआ है। इन वनीय क्षेत्रों के मध्यवर्ती भाग से सीमा रेखा गुजरती है। जैसे- फिनलैंड और रूस के बीच सीमा वनीय सीमा से लगती है।

(iv) मरुस्थलीय सीमा⇒ कई राष्ट्रों के सीमावर्ती क्षेत्रों में मरुस्थलीय स्लाथाकृति के विकास हुआ है। ऐसी स्थिति में मरुस्थलीय क्षेत्र के मध्यवर्ती भाग से सीमा का निर्धारण किया जाता है। जैसे मिश्र-लीबिया के बीच स्थित मरुस्थल से सीमा रेखा गुजरती है। भारत और पाकिस्तान के बीच थार मरुस्थल क्षेत्र से सीमा रेखा गुजती है।

II. ज्यामितीय आकार पर आधारित सीमा

            सीमा के निर्धारण में अक्षांश, देशान्तर और संदर्भ बिन्दु को मानते हुए ज्यामितीय सीमा का निर्धारण किया जाता है।

(i) अक्षांशीय सीमा⇒ कनाडा और USA के बीच में 49° उत्तरी अक्षांश रेखा, उत्तरी कोरिया और दक्षिणी कोरिया के बीच में 38° उत्तरी अक्षांश रेखा सीमा का कार्य करती है। USA में राज्यों की सीमा अक्षांशों के आधार पर की गई है। ऐसी सीमा रेखाएँ प्राय: शान्त सीमाएँ होती है।

(ii) संदर्भ बिन्दु पर आधारित सीमा⇒  जब दो राष्ट्रों के सीमा पर इतनी प्रतिकूल परिस्थितियाँ होती हैं कि वहाँ पर सीमा का निर्धारण करना अत्यंत दुष्कर हो जाती है ऐसी स्थिति में ऊँची-2 पर्वत की चोटियों को संदर्भ बिन्दु मानते हुए सीमा का निर्धारण किया जाता है। जैसे- गैबेन और कैमरून बीच आधारित सीमा इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। 

(III) मानवीय सिद्धांतों पर आधारित सीमा

           धर्म, भाषा, संस्कृति, प्रजातीय गुण को ध्यान में रखते हुए भी सीमाओं का निर्धारण कई देशों में किया गया है।

(i) धर्म आधारित सीमा⇒ 1947 ई० में भारत और पाकिस्तान के बीच में द्विराष्ट्र के सिद्धांत पर सीमा का निर्धारण किया गया। जैसे:- मुस्लिम बहुल क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिए गए और शेष भाग भारत में रह गए।

(ii) भाषा के आधार पर सीमा⇒ भाषाई विविधाएँ सीमा निर्धारक के प्रमुख कारण है। जैसे- यूरोपीय प्रायद्वीप में स्थित देशों के बीच भाषा के आधार पर सीमा का निर्धारण किया गया है।

(iii) संस्कृति के आधार पर सीमा⇒ जब दो राष्ट्र की संस्कृतियाँ अलग -2 होती हैं, तो वैसी स्थिति में भी उन दोनों के बीच में संस्कृति पर आधारित सीमा विकसित होती है। जैसे- भारत और चीन के बीच स्थित सीमा सांस्कृतिक सीमा का उदा० है।

(iv) प्रजाति पर आधारित सीमा⇒ जब दो देशों के बीच अलग-2 प्रजाति के लोग अधिवासित होते है तो वैसी परिस्थिति में विकसित होने वाली सीमा प्रजातीय सीमा कहलाती है। जैसे- (इराक और ईरान) के बीच स्थित सीमा।

निष्कर्ष

             इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि सीमा का निर्धारण हेतु कई आधा का प्रयोग किया जाता है।

2. सीमान्त एवं सीमाएँ में अंतर / Difference Between Frontiers and Boundaries

2. सीमान्त एवं सीमाएँ में अंतर

(Difference Between Frontiers and Boundaries)


सीमान्त एवं सीमाएँ में अंतरसीमान्त एवं सीमाएँ

             सीमान्त और सीमाएँ दो राज्य या दो राष्ट्र या दो प्रशासनिक एवं राजनीतिक क्षेत्र को विभाजित करने वाली भू-राजनैतिक संकल्पना है। वे दोनों ही संकल्पनाओं में निम्नलिखित अन्तर स्थापित किया जा सकता है।

(1) सीमान्त एक ऐतिहासिक घटना है जबकि सीमा वर्तमान समय की राजनैतिक सच्चाई है। इन दोनों के बीच द्वितीय विश्वयुद्ध विभाजक रेखा का कार्य करता है।

(2) सीमान्त एक प्रादेशिक संकल्पना है जबकि सीमा एक रेखीय संकल्पना है। इसका तात्पर्य है कि सीमान्त क्षेत्र में विस्तृत भूमि पायी जाती थी। जबकि आज सीमाएँ एक रेखा में तब्दील हो चुकी है। अर्थात क्षेत्रफल या विस्तृत भूमि का अभाव होता है।

(3) सीमान्त प्राय: प्रतिकूल भौगोलिक क्षेत्र से गुजरता था। जैसे- भारत और चीन के बीच में हिमालय ऐसा ही सीमान्त क्षेत्र था। जबकि सीमा प्रतिकूल एवं अनुकूल दोनों क्षेत्रों से गुजरती है। जैसे- जब भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन हुआ तो भारत और पाकिस्तान के बीच में जिस सीमा का निर्धारण किया गया, वह गुजरात, राजस्थान इत्यादि में प्रतिकूल क्षेत्र लवणीय एवं मरुस्थलीय क्षेत्र से गुजरती है। जबकि पंजाब में निर्धारित की गयी सीमा अनुकूल क्षेत्र से गुजरती है।

(4) सीमान्त क्षेत्र में अपसारी शक्तियाँ कार्य करती है जबकि सीमा रेखा पर अभिसारी शक्तियाँ कार्य करती है। इसका तात्पर्य है कि सीमान्त क्षेत्र में कोई भी प्रशासनिक, राजनैतिक गतिविधियाँ संचालित नहीं की जाती थी। सेना का जमाव कीलों के ऊपर होता था न कि सीमान्त क्षेत्रों में होता था अर्थात् सीमान्त क्षेत्र राजनैतिक एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से शून्य क्षेत्र था।

         अभिसारी सीमा का तात्पर्य दो अलग-2 राजनीतिक, प्रशासनिक, सैनिक अभिव्यक्ति का टकराव। आज कीलों (दुर्ग) की सुरक्षा महत्वपूर्ण नहीं रह गई है बल्कि सीमा की सुरक्षा महत्वपूर्ण रह गई है।

(5) सीमान्त क्षेत्र में पर्याप्त जनसंख्या और संसाधन होते हैं। लेकिन सीमा पर इसका अभाव होता है।

(6) सीमान्त की प्रकृति स्थायी होती थी। जबकि सीमा की प्रकृति अस्थाई होती है अर्थात् सीमा क्षेत्र में दो राष्ट्रों के द्वारा दावा एवं प्रतिदावा किये जाने के कारण कभी स्थिर नहीं रह पाती है।

(7) सीमान्त क्षेत्र प्रायः शान्ति का क्षेत्र होता था। लेकिन सीमा शान्त एवं अशान्त दोनों प्रकार के हो सकती है। जैसे- भारत, पाकिस्तान की सीमा, भारत-चीन की सीमा अशान्त सीमा के उदहारण है। जबकि USA और कनाडा की सीमा शान्त सीमा के उदा० है।

(8) सीमान्त क्षेत्र दो अलग-2 राज्यों को जोड़ने का कार्या करता था। जबकि सीमा क्षेत्र दो राज्यों के विभाजन के विभाजक का कार्य करती है।

(9) सीमान्त क्षेत्र की प्रकृति बर्हिमुखी हुआ करती थी जबकि सीमा की प्रकृति अन्तः मुखी हुआ करती है।

(10) सीमान्त क्षेत्र से कोई भावनात्मक संबंध राज्य की नहीं होता था। जबकि सीमा से राज्य का भावनात्मक लगाव होता है।

सीमान्त का सीमा में बदलना

               द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सभी सीमान्त रेखाएँ सीमा रेखा के रूप में बदल गयी क्योंकि –

(1) संचार साधनों एवं परिवहन साधने का विकास बहुत तेजी से हुआ जिसके आधार पर कोई भी राष्ट्र चप्पे-2 भूमि पर पहुँच सकता है और संचार साधनों के द्वारा उस पर नजर रख सकता है।

(2) तकनीकी विकास ने यह संभव बना दिया है कि प्रतिकूल क्षेत्र में सीमा का निर्धारण कर उसकी सुरक्षा की जाय।

(3) आधुनिक राज्यों में संसाधन के प्रति काफी जागरूकता आयी है। इसलिए प्रत्येक राज्य अपने संसाधनों पर पूर्ण नियंत्रण चाहता है।

4) जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है उस दृष्टिकोण से भी कोई भी राष्ट्र अपने सीमा तक पूर्ण नियंत्रण चाहेगा।

(5) राज्य आधारित राष्ट्रीयता का विकास होने के कारण किसी भी राष्ट्र के लोग अपने सीमा क्षेत्र में स्थित सम्पूर्ण भूमि पर नियंत्रण चाहते हैं।

निष्कर्ष

         इस तरह ऊप के तथ्यों से स्पष्ट है कि सीमान्त एवं सीमाएँ दो अलग-2 संकल्पना है। लेकिन दोनों की मौलिक भावनाएँ एक ही है। सीमान्त जहाँ ऐतिहासिक अभिव्यक्ति थीं वहीं सीमा वर्तमान की अभिव्यक्ति है।

1. राजनीतिक भूगोल की प्रकृति, परिभाषा और कार्यक्षेत्र / Nature, Definition and Scope of Political Geography

1. राजनीतिक भूगोल की प्रकृति, परिभाषा और कार्यक्षेत्र  

(Nature, Definition and Scope of Political Geography)


राजनीतिक भूगोल की प्रकृति, परिभाषा और कार्यक्षेत्र⇒राजनीतिक भूगोल की प्रकृति

                    राजनीतिक भूगोल मानव भूगोल के अन्तर्गत एक विशिष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यदि मानव भूगोल पार्थिव पृष्ठभूमि के सन्दर्भ में मानव के बहुमुखी क्रियाकलापों का अध्ययन है, तो राजनीतिक भूगोल उन अनेक मानव क्रिया- कलापों में से राजनीतिक क्रियाकलापों की क्षेत्रीय व्याख्या है।

          राजनीतिक भूगोल के सम्बन्ध में प्राचीन काल से ही विद्वान अपने मत प्रकट करते आए हैं। प्रारम्भिक विचारकों के मत पूर्णरूपेण राजनीतिक भूगोल पर केन्द्रित न होकर सामूहिक विचार अभिव्यक्ति के रूप में थे। काण्ट ने 1756 में व्यक्त किया कि राजनीतिक भूगोल राजनीतिक इकाइयों के सम्बन्ध एवं उनकी प्राकृतिक पृष्ठभूमि का अध्ययन करता है। इसके पश्चात् अनेक विद्वानों ने राजनीतिक भूगोल को परिभाषित किया। यहां नीचे कुछ विद्वानों की परिभाषाएं दी जा रही हैं।

एन. जे. जी. पोण्ड्स के अनुसार- “राजनीतिक भूगोल राजनीतिक दृष्टि से संगठित क्षेत्रों, उनके संसाधनों, विस्तार एवं उन कारणों से सम्बन्धित है जिनसे एक विशिष्ट भौगोलिक स्वरूप का विकास होता है।”

एच. एच. स्प्राउट के अनुसार- “राजनीतिक भूगोल राजनीतिशास्त्र के एक क्षेत्र के रूप में है, क्योंकि राजनीतिशास्त्र की स्थापना प्रादेशिक भूगोल की आधारशिला पर हुई है।”

कार्लसन के अनुसार – “राजनीतिक भूगोल पृथ्वी एवं राज्य के अन्तर्सम्बन्ध का अध्ययन करता है, अतः यह राज्यों में भौगोलिक सम्बन्ध को व्यक्त करता है।”

डी. डिटलसी के अनुसार – “राजनीतिक भूगोल का सार तत्व राजनीतिक क्षेत्र है तथा किसी क्षेत्र का राजनीतिक महत्व उसके जलवायु, भूआकृति एवं प्राकृतिक संसाधनों से सुस्पष्ट रूप से सम्बन्धित है।”

रिचार्ड हार्टशोर्न के अनुसार – “राजनीतिक भूगोल भिन्न- भिन्न स्थानों में विभिन्न राजनीतिक उपक्रमों को पृथ्वी तल पर व्याप्त विविध लक्षणों से सम्बन्धित कर अध्ययन करता है।”

गोलबेट के अनुसार – “राजनीतिक भूगोल मानव भूगोल का वह भाग है जिसमें उन राजनीतिक घटनाओं का अध्ययन किया जाता है, जिसका क्षेत्रीय सन्दर्भ हो, वैसे ही जैसे जीव विज्ञान जीवों का अध्ययन है।”

कोहेन के अनुसार – “राजनीतिक भूगोल वह विषय है। जो राजनीतिक घटनाओं का भौगोलिक विवेचन प्रस्तुत करता है। अन्य शब्दों में राजनीतिक भूगोल का उद्देश्य राजनीतिक घटनाओं की स्थानानुसार भिन्नताओं को स्पष्ट करना है।”

अलेक्जेण्डर के अनुसार – “राजनीतिक भूगोल धरातलीय लक्षणों के रूप में राजनीतिक प्रदेशों का अध्ययन है। इसके अन्तर्गत राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु मानव द्वारा विभिन्न प्रकार से क्षेत्र के संगठन का अध्ययन किया जाता है।

फाल्कनबर्ग तथा स्टोट्ज के अनुसार – “जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि राजनीतिक भूगोल राजनीतिक इकाइयों का भूगोल है तथा साथ ही यह राष्ट्रों के मध्य अन्तर्सम्बन्धों की भौगोलिक व्याख्या प्रस्तुत करता है।”

रिचार्ड मूर के अनुसार – “राजनीतिक भूगोल, राजनीतिक एवं भौगोलिक उपक्रमों के मध्य स्थानगत अथवा क्षेत्रीय अन्तर्सम्बन्ध को स्पष्ट करता है।”

ए. ई. मूडी के अनुसार – “राजनीतिक भूगोल का अध्ययन मुख्यतः वर्तमान दशाओं से सम्बन्धित होता है, किन्तु भूतकालीन घटनाओं को आज अवस्थित स्वरूप के परिवर्तन के रूप में ध्यान में रखा जाता है।”

जे. आर. बी. प्रेसकॉट के अनुसार- “राजनीतिक भूगोल राजनीतिक निर्णयों एवं क्रियाओं से उत्पन्न भौगोलिक परिणामो से सम्बन्धित है तथा उन सभी भौगोलिक तत्वों को इसमें यथोचित मान्यता प्रदान की जाती है जो राजनीतिक क्रियाओं को प्रभावित करते हैं।”

             उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि राजनीतिक भूगोल की प्रकृति से सम्बन्धित स्पष्ट रूप से तीन दृष्टिकोणों का उल्लेख किया जा सकता है। ये सम्बन्ध के अध्ययन के रूप पारिस्थितिकी दृष्टिकोण, क्षेत्रीय एवं स्थानिक दृष्टिकोण तथा संगठनात्मक अथवा आचरणात्मक दृष्टिकोण हैं।

राजनीतिक भूगोल का कार्यक्षेत्र

            किसी भी विषय का अध्ययन का वर्णन उसकी विषय वस्तु अथवा कार्यक्षेत्र होता है अर्थात् अध्ययन हेतु क्या सम्मिलित किया जाए और क्या नहीं? किसी भी विज्ञान को सीमाबद्ध करना आवश्यक होता है। क्रमबद्ध विज्ञान की शाखा अथवा भूगोल की विभिन्न शाखाओं के अनुरूप राजनीतिक भूगोल मुख्यतः एक प्रासंगिक अध्ययन है। इसके अन्तर्गत अध्ययन प्रसंग राजनीतिक दृष्टि से संगठित क्षेत्र अथव राज्य है। राजनीतिक क्षेत्र वह क्षेत्र है जिसमें सर्वत्र एक अथव एक से अधिक स्वरूप की राजनीतिक घटनाएं पाई जाती हैं। राजनीतिक घटनाएं वे हैं, जो राजनीतिक लक्षणों से सम्बन्धित हैं तथा जिनका उद्भव राजनीतिक विचारों में निहित शक्तियों के कारण होता है।

           राजनीतिक भूगोल के अन्तर्गत राजनीतिक भूदृश्य प्रारूप का विश्लेषण तथा विवरण प्रस्तुत किया जाता है, जो सम्पूर्ण सांस्कृतिक भूदृश्यावली का अंश है अथवा इसमें राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु धरातलीय क्षेत्र के संगठित प्रयोग का अध्ययन किया जाता है। यदि सम्पूर्ण मानव निर्मित भूदृश्यावली का वर्गीकरण विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति तथा उपयोग के आधार पर किया जाए तो राजनीतिक भूदृश्यावली के अन्तर्गत दृश्यमान तत्व सम्भवतः अल्पतम् तथा आर्थिक भूदृश्यावली के तत्व अधिकतम होंगे।

संक्षेप में राजनीतिक भूगोल का अध्ययन क्षेत्र निम्नांकित है:-

(1) राजनीतिक भूगोल के अन्तर्गत राजनीतिक राज्य का सम्पूर्ण अध्ययन किया जाता है।

(2) राज्य में स्थित प्राकृतिक संसाधन जो राज्य की जनसंख्या को प्रश्रय देता है तथा अन्य कार्यों को पूर्ण करता है।

(3) राज्य में निवास करने वाली जनसंख्या का सामाजिक एवं प्रजातीय स्वरूप राज्य की आन्तरिक प्रशासन व्यवस्था को प्रभावित करता है। अतः राजनीतिक भूगोल के अन्तर्गत जनसंख्या, भाषा, जाति, धर्म, आदि का अध्ययन किया जाता है।

(4) राज्य आन्तरिक साधनों के साथ-साथ अन्य राज्यों से प्राप्त संसाधनों पर भी आधारित रहता है। अतः इन्हें प्राप्त करने के लिए विभिन्न समझौतों को करना पड़ता है। ये समझौते विभिन्न कारणों से किए जाते हैं। अतः राजनीतिक भूगोल में इन समझौतों का भी अध्ययन किया जाता है।

(5) राजनीतिक निर्णयों में भौगोलिक उपक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अतः इनका भी अध्ययन किया जाता है।

(6) राजनीतिक भूगोल में निर्वाचन से सम्बन्धित तथ्यों का भी अध्ययन किया जाता है।

(7) राजनीतिक भूगोल उन क्षेत्रों का भी अध्ययन करता है जो राजनीतिक दृष्टि से संगठित नहीं हैं, फिर भी किसी भी प्रका से राजनीतिक घटना से सम्बन्धित होते हैं तथा भविष्य के सम्भावित राजनीतिक क्षेत्र हो सकते हैं।

15. जेट स्ट्रीम / Jet Sream

15.  जेट स्ट्रीम / Jet Sream


जेट स्ट्रीम

       ऊपरी वायुमण्डल में अर्थात क्षोभमंडल के ऊपर तथा समताप मंडल के नीचे क्षैतिज एवं तीव्र गति से चलने वाले वायु को जेट स्ट्रीम कहते हैं। यह हवा प्रायः 9-18 km की ऊँचाई के बीच चलती है। इस जेटस्ट्रीम की खोज द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने किया था। कालान्तर में स्वीडिश वैज्ञानिक रॉक्सबी (स्वेडेन) ने इसका व्यापक अध्ययन किया। इसलिए उनके नाम पर इसे रॉक्सबी तरंग भी कहते हैं।

        जेट स्ट्रीम हमारे वायुमण्डल का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। इसे मौसम वैज्ञानिकों ने “मौसम का नियंत्रणकर्ता” बताया है। यह मानसून की उत्पत्ति तथा भारत में आने वाला बाढ़ एवं सुखाड़ का भी वैज्ञानिक विश्लेषण करता है।

         प्रारंभ में जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति के विषय में मतभेद थे। कुछ वैज्ञानिकों ने इसकी उत्पत्ति की व्याख्या हेडली शेल के माध्यम से किया है।

जेट स्ट्रीम

त्रि- कोशकीय मॉडल

         वर्तमान समय में सेटेलाइट के अध्ययन से भी स्पष्ट हो चुका है कि इसकी उत्पत्ति की व्याख्या हेडली सेल के माध्यम से किया जा सकता है। अर्थात यह कहा जाता है कि जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति का मूल कारण निम्न वायुमण्डल की तापीय विशेषता है। वस्तुतः जब निम्न वायुमण्डल के वायु जब ऊपरी वायुमण्डल में पहुँचते हैं तो ठण्डी एवं भारी होकर क्षैतिज अवस्था में चलने लगते हैं। इसी क्षैतिज वायु को जेट स्ट्रीम कहते हैं। जेट स्ट्रीम कहने का मुख्य कारण इसमें जेट जैसी आवाज उत्पन्न होती है। वस्तुतः मौसम वैज्ञानिकों ने चार प्रकार के जेटस्ट्रीय बताया है:-

(1) ध्रुवीय रात्री जेट वायु

(2) ध्रुवीय सीमाग्र जेट वायु

(3) उपोष्ण जेट वायु

(4) उष्ण पूर्वी जेट वायु

(1) ध्रुवीय जेट वायु-

         ध्रुवीय रात्री जेट वायु 60° अक्षांश के आगे दोनों गोलार्द्धों में चला करती है। उत्तरी गोलार्द्ध में इसे आर्कटिक जेट हवा एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में अण्टार्कटिक जेट हवा कहते हैं। यह पश्चिम से पूरब दिशा की ओर चलती है। यह जेट हवा पूरे विश्व में ध्रुवीय क्षेत्र में चलती है। इसकी उत्पत्ति का आधार उपध्रुवीय निम्न वायुदाब से कोरिऑलिस प्रभाव के कारण ऊपर उठती हुई हवा है।

       कुछ ऊँचाई के बाद तापीय ह्रास के कारण पुनः यह वायु ऊपर नहीं जा पाती और क्षैतिज रूप ग्रहण कर लेती है। इसकी क्षैतिज दिशा मुख्यतः ध्रुवीय ऊपरी भाग में होती है। क्योंकि ध्रुवों के ठीक ऊपर निम्न वायुदाब बना होता है। जाड़े के दिनों में ध्रुवीय प्रदेश में रात की अवधि काफी लम्बी (छ: महीने) होती है। रात में यह वायु अति तीव्र गति से प्रवाहित होती है। इसलिए इसे ध्रुवीय रात्रि जेट हवा कहते हैं।

(2) ध्रुवीय सीमाग्र जेट हवा-

       45°-65° अक्षांश के बीच केवल उत्तरी गोलार्द्ध में चलने वाली जेट हवा है। इसकी दिशा भी पश्चिम-पूरब की ओर होती है। यह भी उपरोक्त अक्षांश के बीच पूरे भूमण्डल पर चलती है। ध्रुवीय सीमाग्र जेट वायु की उत्पत्ति निम्न वायुमण्डल के उस क्षेत्र में होती है जहाँ ध्रुवीय एवं पछुआ हवा मिलकर सीमाग्र का निर्माण करते हैं।

         सीमाग्र निर्माण में ध्रुवीय वायु में बैठने की प्रवृत्ति होती है जबकि पछुवा वायु तुलनात्मक दृष्टि से गर्म होने के कारण ऊपर की ओर उठने की प्रवृति रखती है। ऐसी स्थिति में 9-18 Km. की ऊँचाई के बीच वायुप्रवणता का विकास होता है और इस प्रवणता के अनुसार जब गर्म प्रदेश की वायु ठण्डे प्रदेश की ओर चलने लगती है तो उसे “ध्रुवीय सीमाग्र जेट हवा” कहा जाता है।

(3) उपोष्ण जेट हवा-

       उपोष्ण जेट हवा 20°-35° अक्षांश के बीच मुख्यतः उतरी गोलार्द्ध में चलती है। यह पश्चिम से पूरब की ओर प्रवाहित होती है। यह भी एक विश्वस्तरीय हवा है। इसकी उत्पत्ति का कारण विषुवतीय प्रदेश की वह गर्म वायु है जो सूर्य के तापीय प्रभाव कारण वायु गर्म होकर ऊपरी वायुमण्डल तक पहुँचता है, ऊपरी वायुमण्डल में जब तापीय कमी आती है तो यह क्षैतिज रूप से उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में चलने लगती है।

       लेकिन, धीरे-2 कोरिआलिस प्रभाव में वृद्धि होने के कारण पश्चिम से पूरब दिशा की ओर चलने लगती है। ऊपरी वायुमण्डल की यही हवा 30°-35° अक्षांश में बैठकर धरातल पर HP का निर्माण करती है।

(4) उष्ण पूर्वी जेट वायु-

         यह एक स्थानीय जेट हवा है जो 8°- 35° अक्षांश के बीच सिर्फ उतरी गोलार्द्ध में चलती है। यह जेट हवा दक्षिण एशिया, द०-पूर्वी एशिया, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, उ०पूर्वी अफ्रीका के ऊपर ग्रीष्म ऋतु में चलती है। यह जेट हवा स्थलाकृतिक विषमताओं के कारण उत्पन्न होती है। जैसे:- मार्च महीने से ही तिब्बत का पठार तीव्र गति से गर्म होने लगता है और उसके सम्पर्क में आने वाला वालु गर्म होकर ऊपर उठने लगती है।

        ऊपरी वायुमंडल में यही हवा तापीय ह्रास के कारण ठण्डी एवं भारी होने लगती है और पुन: क्षैतिज रूप से उत्तर एवं दक्षिण दिशा में चलने लगती है। लेकिन दक्षिण की ओर आने वाली क्षैतिज हवा फेरल के नियमानुसार प्रारंभ में उ०-पू० से द०-प० की ओर चलने लगती है और बाद में धीरे-धीरे पूर्णत: पूरब से प० दिशा में प्रवाहित होने लगती है, इसीलिए इसे ही उष्ण पूर्वी जेट हवा कहते हैं।

निष्कर्ष:-

         इस तह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि प्रथम तीन जेट, वायु विश्वस्तरीय जेट हवा है जबकि अंतिम स्थानीय जेट हवा का उदाहरण है। कोटेश्वरम महोदय ने बताया कि अंतिम दो जेट वायु का संबंध मानसून की उत्पत्ति से है। उष्ण पूर्वी जेट हवा के कारण दक्षिण-पश्चिमी मानसून की उत्पत्ति होती है जबकि उपोष्ण जेट हवा के कारण लौटती हुई मानसून की उत्पत्ति होती है। मौसम वैज्ञानिकों का यह मानना है कि, जेट स्ट्रीम का अभी पूर्ण अध्ययन किया जाना शेष है। इसके अध्ययन से जलवायु विज्ञान की कई जटिल समस्याएँ समाधान होने की संभावना है।


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