Archives 2024

12. Important Grasslands of the World (विश्व के महत्वपूर्ण घास के मैदान)

Important Grasslands of the World

(विश्व के महत्वपूर्ण घास के मैदान)



➤ शीतोष्ण घास प्रदेश (Temperate Grasslands)

पम्पास- अर्जेंटीना, उरुग्वे, ब्राजील

प्रेयरी- उत्तरी अमेरिका

डाउंस- आस्ट्रेलिया

वेल्ड- दक्षिण अफ्रीका

स्टेपीज- पश्चिम रूस, मध्य एशिया (यूरेशिया)

केंटरबरी- न्यूजीलैंड

पुस्ताज- हंगरी (यूरोप)

बुग्याल और मर्ग- भारत

नोट: गढ़वाल हिमालय में पाए जाने वाले उच्च अक्षांशीय अल्पाइन घास भूमियों को ‘बुग्याल’ कहा जाता है।

important-grasslands

➤ उष्णकटिबन्धीय घास प्रदेश (Tropical Grasslands)

सवाना- पूर्वी अफ्रीका (केन्या, तंजानिया), वेनेजुएला, कोलंबिया, ब्राजील

लानोज- वेनेजुएला

कैम्पास- ब्राजीलियन उच्च भूमि

पार्कलैंड- दक्षिणी अफ्रीका

सेल्वास- अमेजन बेसिन

सेराडो- ब्राजील

पटाना- श्रीलंका

साहेल (अकेसिया सवाना)- अफ्रीका महाद्वीप में लाल सागर से अटलांटिक सागर तक एक पट्टी के रूप में

प्रमुख प्रश्नोत्तर

1. निम्न में से कौन शीतोष्ण कटिबंधीय घासभूमि नहीं है?

(A) पम्पाज     

(B) लानोज

(C) पुस्ताज     

(D) कैण्टरबरी

उत्तर- (B) लानोज

2. कनाडा के मध्य अक्षांशीय घास के मैदान कहलाते हैं?

(A) प्रेयरी

(B) पम्पास

(C) स्टेपी

(D) डाउन्स

उत्तर- (A) प्रेयरी

3. निम्नलिखित में से उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान हैं?

1. कैम्पोस

2. पम्पास

3. सवाना

4. स्टेपी

कूट: 

(A) 1 और 4

(B) 1 और 3

(C) 2 और 3

(D) 1 और 2

उत्तर- (B) 1 और 3

4. निम्नलिखित में से कौन शीतोष्ण कटिबंधीय घासभूमि है?

(A) सवाना

(B) कैम्पोस

(C) वेल्ड

(D) लानोज

उत्तर- (C) वेल्ड

5. निम्न में से कौन शीतोष्ण कटिबंधीय घासभूमि है?

(A) सवाना

(B) कैम्पोस

(C) वेल्ड

(D) लानोज

उत्तर- (C) वेल्ड

6. अर्जेण्टीना में पाये जाने वाले शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान को क्या कहा जाता है?

(A) वेल्ड

(B) लानोज

(C) पम्पास

(D) स्टेपी

उत्तर- (C) पम्पास

7. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सही उत्तर का चयन कीजिए-

सूची-I (घासभूमियाँ)  सूची-II (अवस्थिति)

अ. पम्पास  1. उत्तरी एशिया

ब. डाउन्स  2. ऑस्ट्रेलिया

स. स्टेपी    3. अर्जेंटीना

द. प्रेयरी    4. उत्तरी अमेरिका

कूट:

      अ. ब. स. द.

(A) 3 2  4  1

(B) 3 2  1  4

(C) 2 3  4  1

(D) 2 3  1  4

उत्तर- (B) 3 2  1  4

8. निम्न में से कौन उष्ण कटिबंधीय घासभूमि कहलाते हैं?

(A) लोनाज

(B) वेल्ड

(C) प्रेयरी

(D) स्टेपी

उत्तर- (A) लोनाज

9. निम्नलिखित में सही सुमेलित है-

(A) डाउन्स- ऑस्ट्रेलिया

(B) कैम्पास- ब्राजील

(C) पार्कलैंड- अफ्रीका

(D) उपर्युक्त सभी

उत्तर- (D) उपर्युक्त सभी

10. निम्नलिखित में सही सुमेलित नहीं है-

(A) दक्षिण अफ्रीका- वेल्ड

(B) अर्जेंटीना- पम्पास

(C) ऑस्ट्रेलिया- डाउंस

(D) ब्राजील- लानोज

उत्तर- (D) ब्राजील- लानोज

11. दक्षिण अफ्रीका में चरागाह क्षेत्र को क्या कहा जाता है?

(A) डाउन्स

(B) स्टेपी

(C) प्रेयरी

(D) वेल्ड

उत्तर- (D) वेल्ड

12. पम्पास एवं स्टेपी निम्नलिखित में से किस श्रेणी में आते हैं?

(A) उच्च अक्षांशीय घासभूमि

(B) मध्य अक्षांशीय घासभूमि

(C) निम्न अक्षांशीय घासभूमि

(D) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर- (C) निम्न अक्षांशीय घासभूमि

13. पटाना नामक उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान निम्न में से किस देश में पाये जाते हैं?

(A) ब्राजील

(B) हंगरी

(C) श्रीलंका

(D) इण्डोनेशिया

उत्तर- (C) श्रीलंका

14. सवाना घास भूमियाँ मुख्यत: कहाँ पायी जाती है?

(A) मध्य एशिया में

(B) उत्तरी अमेरिका में

(C) उत्तरी मध्य अफ्रीका में

(D) ऑस्ट्रेलिया में

उत्त– (C) उत्तरी मध्य अफ्रीका में

15. सुमेलित नहीं है-

(A) कैंटरबरी- न्यूजीलैंड

(B) वेल्ड- दक्षिण अफ्रीका

(C) पार्कलैंड- ब्राजील

(D) लानोज- वेनेजुएला

उत्त– (C) पार्कलैंड- ब्राजील

16.  विश्व में किस घास के मैदान को विश्व के रोटी का टोकरी कहा जाता है

(A) डाउन्स

(B) स्टेपी

(C) प्रेयरी

(D) वेल्ड

उत्तर- (B) स्टेपी 

11. विश्व में सर्वाधिक ऊँचा, लम्बा, गहरा, बड़ा, छोटा व प्रथम

11. विश्व में सर्वाधिक ऊँचा, लम्बा, गहरा, बड़ा, छोटा व प्रथम

General Geography Capsule 10

सामान्य भूगोल



1. भारत की सबसे बड़ी तथा खारे जल की झील है

➤ चिल्का झील (उड़ीसा)

2. विश्व की सबसे बड़ी तथा खारे जल की झील है

कैस्पियन सागर (रूस) 

3. भारत की सबसे बड़ी मीठे जल की झील है

➤ वुलर झील (जम्मू-कश्मीर) 

4. विश्व की सबसे बड़ी ताजे पानी की झील है

➤ सुपीरियर झील (अमेरिका)

5. भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है

➤ गोविन्द सागर झील

6. विश्व की सबसे गहरी झील है

➤ बैकाल झील (रूस)

7. विश्व की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है

➤ वोल्गा झील (घाना)

8. भारत का सबसे बड़ा रेगिस्तान है

➤ थार मरूभूमि (राजस्थान)

9. विश्व का सबसे बड़ा रेगिस्तान है

➤ सहारा मरूभूमि (अफ्रिका)

10. भारत का सबसे ऊँचा बाँध है

➤ भाखड़ा बाँध (सतलज नदी, पंजाब)

11. भारत का सबसे लम्बा बाँध है

➤ हीराकुण्ड बाँध (महानदी, उड़ीसा)

12. विश्व का सबसे ऊँचा बाँध है

रोगुन्वस्की (तजाकिस्तान, रूस)

13. भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात है

➤ जोग या गरसोप्पा (शरावती नदी, कर्नाटक)

14. विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात है

➤ एंजिल (वेनेजुएला)

15. भारत की सबसे लम्बी नहर है

➤ इंदिरागांधी नहर या राजस्थान नहर (राजस्थान)

16. विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है

➤ सुन्दरवन डेल्टा (भारत)

17. विश्व की सबसे लम्बी नदी है

➤ नील नदी (मिस्र)

18. विश्व की सबसे चौड़ी नदी है

➤ आमेजन (द० अमेरीका)

19. विश्व की सबसे छोटी नदी है

➤ डी नदी ( USA)

20. विश्व का सबसे बड़ा नहर है

➤ स्वेज नहर (1869 ई. में निर्मित)

21. विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप है

➤ माजूली (ब्रह्मपुत्र नदी, असम)

22. विश्व का सबसे छोटा नदी द्वीप है

➤ उमानंद (असम)

23. विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है

➤ एशिया 

24. विश्व का सबसे छोटा महाद्वीप है

➤ आस्ट्रेलिया

25. सबसे बड़ा एवं गहरा महासागर है

➤ प्रशांत महासागर

26. विश्व का सबसे छोटा महासागर है

➤ आर्कटिक महासागर

27. सबसे बड़ा द्वीप है

➤ ग्रीनलैण्ड (डेनमार्क)

28. सबसे बड़ा द्वीप समूह है

➤ इण्डोनेशिया

29. सबसे बड़ा प्रायद्वीप है

➤ अरब प्रापद्वीप

30. झील के अन्दर झील है

➤ मेनीटू (कनाडा)

31. सबसे बड़ा जलडमरूमध्य है

➤ डेविस जलडमरूमध्य

32. सबसे बड़ी खाड़ी है

➤ मैक्सिको की खाड़ी

33. क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा देश है

➤ रूस

34. क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा देश है

➤ वेटिकन सिटी

35. भारत की सबसे लम्बी सुरंग है

जबाहर सुरंग (जम्मू-कश्मीर)

36. विश्व का सबसे व्यस्त व्यापारिक नदी है

➤ राईन नदी (जर्मनी)

37. विश्व की सर्वाधिक सीमाओं वाला देश है

➤ चीन (14 देशों के साथ)

38. विश्व में सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित झील है

➤ टिटिकाका (द० अमेरीका)

39. विश्व में सबसे निचले स्थान पर स्थित झील है

➤ मृतसागर (प्रशांत महासागर में

40. विश्व की सबसे ऊँची जाग्रत ज्वालामुखी है

➤ कोटोपैक्सी (इक्वेडोर, दक्षिण अमेरिका में)

41. संसा का सबसे छोटा ज्वालामुखी है

➤ ताल (फिलीपिंस)

42. एशिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान है

➤ गोबी (मंगोलिया)

43. सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है

➤ मासिनराम (मिजोरम, भारत)

44. लम्बा प्लेटफार्म है

➤ खड़गपुर (प. बंगाल)

45.  सबसे लम्बी रेलवे है 

➤ ट्रांस साइबेरियन रेलवे (6000 मील)

नोट:  रूस का यह प्रमुख रेलमार्ग पश्चिम में सेंट पीटर्सबर्ग से पूरब में प्रशान्त महासागर तट पर स्थित ब्लाडीवोस्टक तक जाता है।

विश्व में सर्वाधिक ऊँचा

46. लम्बा मुहाना किस नदी का है

➤ ओब (रूस)

47. सर्वाधिक ज्वालामुखी है 

➤ इंडोनेशिया में

48. सबसे ऊँची राजधानी है 

➤ ल्हासा (तिब्बत)

49. बड़ी दीवार है

➤ चीन की दीवार (2225 किमी०)

50. सबसे ऊँचा नग है

➤ बेन चुआन (चीन, 16000 फुट)

31. Wind Rose / Star Diagram (पवनारेख / तारा आरेख)

31. Wind Rose / Star Diagram

(पवनारेख / तारा आरेख)



         पवनारेखों को तारा आरेख भी कहा जाता है। किसी स्थान के पवनों की दिशा तथा बारंबारता प्रकट करने के लिए इस आरेख का प्रयोग किया जाता है।

      तारा आरेखों को वृत्त या घड़ी आरेख (Clock Diagram), रोज आरेख (Rose Diagram) तथा वेक्टर आरेख (Vector Diagram) आदि विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। इन आरेखों के द्वारा सदिश या वेक्टर मूल्यों को केंद्र या मूल बिंदु से संबंधित दिशाओं में सरल रेखाएँ या कॉलम खींचकर प्रकट करते हैं तथा इन आरेखों या कॉलमों की लंबाइयों को दिए हुए मूल्यों के अनुपात में मापनी (Scale) के अनुसार निश्चित करते हैं।

      किसी स्थान पर दिशाओं के अनुसार वर्ष में पवनों की बारंबारता दिखलाने के लिए यह आरेख बहुत उपयोगी होते हैं परंतु आर्थिक वितरण जैसे व्यापार की दिशा अथवा विभिन्न दिशाओं में जनसंख्या के स्थानांतरण के आंकड़ों को भी इन आरेखों के द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।

पवनारेख के प्रकार (Types of Wind Rose)

1. साधारण पवनारेख (Simple Wind Rose):-

    इस आरेख के द्वारा किसी स्थान की एक वर्ष में पवन की दिशा तथा शांत दिनों की संख्या को प्रदर्शित किया जाता है। पवन चलने के दिनों को लंबी रेखाओं द्वारा तथा शांत पवन वाले दिनों को केन्द्र पर बनाये गये छोटे वृत्त के भीतर अंकों में लिखकर इंगित करते हैं।

उदाहरण:

(i) निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से जयपुर का पवनारेख बनाइए।

Wind Direction / पवन की दिशा
N NE E SE S SW W NW Calm
No. of Days 24 23 25 15 29 58 77 79 17

रचना विधि:

      साधारण पवनारेख बनाने हेतु पहले सुविधानुसार कोई अर्द्धव्यास लेकर एक छोटा वृत्त खींचते हैं एवं इसके भीतर शांत पवनों की दिश (17) लिखते हैं। इसके बाद वृत्त के केन्द्र से दी हुई दिशाओं की ओर सरल रेखाएँ खींचते हैं। अब इन रेखाओं में किसी उचित मापनी के अनुसार वृत्त की परिधि से मापते हुए संबंधित दिनों की संख्या के बराबर दूरियाँ काटकर रेखाओं के सिरों का सरल रेखाओं द्वारा मिला देते हैं। इस प्रकार बने अष्टभुज के प्रत्येक कोने पर उसकी दिशा लिख देते हैं एवं आरेख के नीचे दिनों की मापनी बनाकर Windrose पूर्ण कर लेते हैं।

       सामान्यतः साधारण पवन आरेख में पवन की आठ दिशाएँ (उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम) प्रकट की जाती है परंतु आवश्यकता होने पर उत्तर-उत्तर पूर्व, उत्तर पूर्व-पूर्व आदि शेष आठ दिशाओं की पवनों की बारंबारताओं को भी आरेख में प्रदर्शित किया जा सकता है।

2. पवन तथा दृश्यता रोज (Wind and Visibility Rose):

     ये साधारण पवनारेखों की भाँति ही बनाए जाते हैं, परन्तु इनमें केवल इतना अंतर है कि इस आरेख में किसी स्तंभ की लंबाई उस दिशा में चलने वाली पवनों के कुल दिनों में उत्तम दृश्यता (Good Visibility) अथवा अत्यल्प दृश्यता (Bad Visibility) के दिनों की बारंवारता का प्रतिशत प्रकट करती है।

उदाहरण :

(ii) किसी काल्पनिक स्थान पर प्रेक्षित निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर एक पवन तथा दृश्यता रोज की रचना कीजिए।

 पवन की दिशा
पवन की बारम्बारता (दिन) N NE E SE S SW W NW Calm
30 20 30 50 12 20 80 100 23
अत्यल्प दृश्यता की बारंबारता (दिन) 12 14 18 20 3 3 8 5

रचना विधि:

    पवन तथा दृश्यता रोज बनाने के लिए सर्वप्रथम एक छोटा वृत्त बनाकर उसमें शांत दिनों की संख्या (23) लिख दिया जाता है। उसके बाद कोई उचित मापनी लेकर पहले बतलाई गयी विधि के अनुसार वृत्त की परिधि से संबंधित दिशाओं में अत्यल्प दृश्यता की बारंबारताओं के प्रतिशत मूल्यों के बराबर लंबाईयों वाले स्तंभ खींचा जाता है। अंत में अब आरेख के नीचे मापनी बनाक आरेख पूर्ण क लिया जाता है।

Wind Rose

14. Uniform Civil Code (समान नागरिक संहिता)

14. Uniform Civil Code

(समान नागरिक संहिता)



Uniform Civil Code

परिचय

भारतीय संविधान के भाग 4 (राज्य के नीति निदेशक तत्त्व) के तहत अनुच्छेद 44 के अनुसार भारत के सभी नागरिकों के लिये एक समान नागरिक संहिता लागू होगी। इसका व्यावहारिक अर्थ है कि भारत के सभी धर्मों के नागरिकों के लिये एक समान धर्मनिरपेक्ष कानून होना चाहिये। हालांकि संविधान के संस्थापकों ने राज्य के नीति निदेशक तत्त्व के माध्यम से इसको लागू करने की जिम्मेदारी बाद की सरकारों को हस्तांतरित कर दी थी।

इस कानून के तहत व्यक्तिगत कानून, संपत्ति संबंधी कानून और विवाह, तलाक तथा गोद लेने से संबंधित कानूनों में समानता है।

नोट: वर्तमान समय में भारत में अधिकतर व्यक्तिगत कानून धर्म के आधार पर तय किये जाते हैं। हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्मों के व्यक्तिगत कानून हिंदू विधि से संचालित किये जाते हैं, वहीं मुस्लिम तथा ईसाई धर्मों के लोंगों के लिए अपना अलग व्यक्तिगत कानून हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों का कानून शरीयत पर आधारित है, जबकि अन्य धार्मिक समुदायों के लोगों के लिए व्यक्तिगत कानून भारतीय संसद द्वारा बनाए गए कानून पर आधारित हैं। वर्तमान समय में गोवा ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पर समान नागरिक संहिता लागू है।

इस संहिता की जड़ें 1867 के पुर्तगाली नागरिक संहिता में मिलती हैं, जिसे पुर्तगालियों द्वारा लागू किया गया था और बाद में इसे वर्ष 1966 में नए संस्करण के साथ बदल दिया। गोवा में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, तलाक, विरासत आदि के संबंध में समान कानून हैं।

महत्वपूर्ण बिंदुः

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राष्ट्र ने अभी तक अपने नागरिकों के लिये एक समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अनेकों ऐतिहासिक निर्णयों में सरकार से UCC को लागू करने का आह्वान किया है और समय-समय पर न्यायालय ने केंद्र सरकार से इस पर अपना रुख भी स्पष्ट करने को कहा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान के संस्थापकों ने उम्मीद जताई थी कि एक दिन राज्य समान नागरिक संहिता की अपेक्षाओं को पूरा करेंगे और नियमों का एक समान सेट प्रत्येक धर्म के रीति-रिवाजों जैसे- विवाह, तलाक आदि के अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह लेगा।

वर्ष 1956 में हिंदू कानूनों को संहिताबद्ध कर दिया गया था, लेकिन देश के तभी नागरिकों के लिये एक समान नागरिक संहिता लागू करने का गंभीर प्रयास नहीं किया गया है।

मोहम्मद अहमद खास बनाम शाह बानो बेगम के ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया और समुदाय के व्यक्तिगत कानूनों की बजाय भारत के कानून CrPC को प्राथमिकता दी थी।

इस फैसले में अदालत ने यह भी कहा था कि संविधान का अनुच्छेद-44 वर्तमान समय में एक बेकार पड़ा हुआ आर्टिकल बनकर रह गया है।

UCC का इतिहास

UCC का इतिहास 100 साल से भी ज्यादा पुराना है।

UCC का इतिहास 19वीं शताब्दी में भी खोजा जा सकता है, जब शासकों ने अपराधों, सबूतों और अनुबंधों से संबंधित भारतीय कानून के संहिताकरण में एकरूपता की आवश्यकता पर बल दिया था। हालांकि, तब विशेष रूप से सिफारिश की गई थी कि हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को इस तरह के कानून से बाहर रखा जाना चाहिए।

ब्रिटिश लोग एकेश्वरवादी ईसाई था, इस कारण उनके लिए भारत में चल रही जटिल प्रथाओं को समझना मुश्किल था। साथ ही अंग्रेजो का मुख्य उद्देश्य भारत से पैसा लूटना था, इसलिए वे इस प्रकार के विवाद में नहीं पड़ना चाहता था।

स्वतंत्रता के बाद UCC पर चर्चा

भारत की स्वतंत्रता के बाद UCC पर अलग-अलग विचार थे। कुछ सदस्यों का मानना ​​था कि UCC भारत जैसे अलग-अलग धर्मों और संप्रदायों वाले देश में लागू करना ठीक या बेहतर नहीं होगा, जबकि अन्य का मानना ​​था कि UCC देश में अलग-अलग समुदायों के बीच एक देश-एक कानून की तर्ज पर लोगों में सद्भाव लाएगा।

UCC पर आंबेडकर और नेहरू का विचार

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर का इस मुद्दे पर मानना ​​था कि UCC कोई थोपा हुआ नहीं बल्कि केवल एक प्रस्ताव था। वहीं, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का कहना था, “मुझे नहीं लगता कि वर्तमान समय में भारत में मेरे लिए इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करने का समय आ गया है।”

PM मोदी और UCC

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समान नागरिक संहिता की पुरजोर वकालत करते हुए विरोधियों से सवाल किया कि दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चलेगा? उन्होंने साथ ही कहा कि संविधान में भी सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार का उल्लेख है।

पीएम मोदी ने हाल ही में एक चुनावी रैली के दौरान कहा था कि भाजपा ने तय किया है कि वह तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के बजाय ‘संतुष्टिकरण’ के रास्ते पर चलेगी।

उन्होंने यह भी कहा था विपक्ष समान नागरिक संहिता के मुद्दे का इस्तेमाल मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने और भड़काने के लिए कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय मुसलमानों को यह समझना होगा कि कौन से राजनीतिक दल उन्हें भड़काकर उनका फायदा लेने के लिए उनको कमजोर बर्बाद कर रहे हैं।

साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा था, “हम देख रहे हैं समान नागरिक संहिता के नाम पर लोगों को भड़काने का काम हो रहा है। एक घर में परिवार के एक सदस्य के लिए एक कानून हो, दूसरे के लिए दूसरा, तो क्या वह परिवार चल पाएगा। फिर ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा? हमें याद रखना है कि भारत के संविधान में भी नागरिकों के समान अधिकार की बात कही गई है।”

UCC के पक्ष में तर्क

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 42वें संशोधन के माध्यम से धर्मनिरपेक्षता शब्द को जोड़ा गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय संविधान का उद्देश्य भारत के समस्त नागरिकों के साथ धार्मिक आधार पर किसी भी भेदभाव को समाप्त करना है लेकिन वर्तमान समय तक समान नागरिक संहिता के लागू न हो पाने के कारण भारत में एक बड़ा वर्ग अभी भी धार्मिक कानूनों की वजह से अपने अधिकारों से वंचित है।

मूल अधिकारों में विधि के शासन की अवधारणा विद्यमान है लेकिन इन्हीं अवधारणाओं के बीच लैंगिक असमानता जैसी कुरीतियाँ भी व्याप्त हैं। विधि के शासन के अनुसार, सभी नागरिकों हेतु एक समान विधि होनी चाहिये लेकिन आजादी के 75 वर्षों के बाद भी जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग अपने मूलभूत अधिकारों के लिये संघर्ष कर रहा है। इस प्रकार समान नागरिक संहिता का लागू न होना एक प्रकार से विधि के शासन और संविधान की प्रस्तावना का उल्लंघन है।

सामासिक संस्कृति के सम्मान के नाम पर किसी वर्ग की राजनीतिक समानता का हनन करना संविधान के साथ-साथ संस्कृति और समाज के साथ भी अन्याय है क्योंकि प्रत्येक संस्कृति तथा सभ्यता के मूलभूत नियमों के तहत महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार प्राप्त होता है लेकिन समय के साथ इन नियमों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर असमानता उत्पन्न कर दी जाती है।

धार्मिक रुढ़ियों की वजह से समाज के किसी वर्ग के अधिकारों का हनन रोका जाना चाहिये साथ ही विधि के समक्ष समता की अवधारणा के तहत सभी के साथ समानता का व्यवहार करना चाहिये।

वैश्वीकरण के वातावरण में महिलाओं की भूमिका समाज में महत्त्वपूर्ण हो गई है, इसलिये उनके अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता में किसी भी प्रकार की कमी उनके व्यक्तित्त्व तथा समाज के लिये हानिकारक है।

राजनीतिक लाभ के कारण कई बार सरकारें इन धार्मिक मुद्दों में छेड़छाड़ से बचती हैं इसलिये सरकारों को भी ऐसे मामलों को धार्मिक मुद्दों के बजाय व्यक्तिगत अधिकारों की दृष्टि से देखना चाहिये। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शाहबानो मामले में दिये गए निर्णय को तात्कालीन राजीव गांधी सरकार ने धार्मिक दबाव में आकर संसद के कानून के माध्यम से पलट दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने संपत्ति पर समान अधिकार और मंदिर प्रवेश के समान अधिकार जैसे न्यायिक निर्णयों के माध्यम से समाज में समता हेतु उल्लेखनीय प्रयास किया है इसलिये सरकार तथा न्यायालय को समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए समग्र एवं गंभीर प्रयास भी करने चाहिये।

UCC के विरोध में तर्क

समान नागरिक संहिता का मुद्दा किसी सामाजिक या व्यक्तिगत अधिकारों के मुद्दे से हटकर एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है, इसलिये जहाँ एक ओर कुछ राजनीतिक दल इस मामले के माध्यम से राजनीतिक तुष्टिकरण कर रहे है, वहीं दूसरी ओर कई राजनीतिक दल इस मुद्दे के माध्यम से धार्मिक ध्रुवीकरण का प्रयास कर रहे हैं।

हिंदू या किसी और धर्म के मामलों में बदलाव उस धर्म के बहुसंख्यक समर्थन के बगैर नहीं किया गया है, इसलिये राजनीतिक तथा न्यायिक प्रक्रियाओं के साथ ही धार्मिक समूहों के स्तर पर मानसिक बदलाव का प्रयास किया जाना अति आवश्यक है।

सामासिक संस्कृति की विशेषता को भी वरीयता दी जानी चाहिये क्योंकि समाज में किसी धर्म के असंतुष्ट होने से अशांति की स्थिति बन सकती है।

UCC पर विधि आयोग (Law Commission) का विचार:

विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 में समान नागरिक संहिता से संबंधित मुद्दों के समग्र अध्ययन हेतु विधि आयोग का गठन किया गया।

विधि आयोग ने कहा कि समान नागरिक संहिता का मुद्दा मूलाधिकारों के तहत अनुच्छेद 14 और 25 के बीच द्वंद्व से प्रभावित है।

भारतीय बहुलवादी संस्कृति के साथ ही महिला अधिकारों की सर्वोच्चता के मुद्दे को इंगित किया।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा की जा रही कार्यवाहियों के मद्देनजर विधि आयोग ने कहा कि महिला अधिकारों को वरीयता देना प्रत्येक धर्म और संस्थान का कर्तव्य होना चाहिये।

विधि आयोग के अनुसार, समाज में असमानता की स्थिति उत्पन्न करने वाली समस्त रुढ़ियों की समीक्षा की जानी चाहिये। इसलिये सभी निजी कानूनी प्रक्रियाओं को संहिताबद्ध करने की जरूरत है जिससे उनसे संबंधित पूर्वाग्रह और रूढ़िवादी तथ्य सामने आ सकें।

वैश्विक स्तर पर प्रचलित मानवाधिकारों की दृष्टिकोण से सर्वमान्य व्यक्तिगत कानूनों को वरीयता मिलनी चाहिये। लड़कों और लड़कियों की विवाह की 18 वर्ष की आयु को न्यूनतम मानक के रूप में तय करने की सिफारिश की गई जिससे समाज में समानता स्थापित की जा सके।

निष्कर्ष:

   इस प्रकार निष्कर्षत: कहा जा सकता है कि भारत के सभी धर्मों एवं समाजों की प्रगति और सौहार्द्रता हेतु उस धर्म और समाज में विद्यमान सभी पक्षों के बीच समानता का भाव होना अत्यंत आवश्यक है। इसलिये यह अपेक्षा की जा सकती है कि वर्तमान समय में बदलती परिस्थितियों के मद्देनज समाज की संचना में परिवर्तन होना चाहिये।

स्रोत: hindi.business-standard.com, द हिन्दू and drishtiias.com

33. Interpretation of Weather Map (मौसम मानचित्रों का विश्लेषण)

33. Interpretation of Weather Map

(मौसम मानचित्रों का विश्लेषण)



मौसम सम्बन्धी तत्व और उनके निरूपण (Weather Phenomena and their Representation)

संघनन- जल के गैसीय अवस्था से तरल या ठोस अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को संघनन कहा जाता है। यदि हवा का तापमान ओसांक बिन्दु से नीचे पहुंच जाये तो संघनन की क्रिया प्रारंभ होती है। संघनन की प्रक्रिया पर वायु के आयतन, तापमान, वायुदाब एवं आर्द्रता का प्रभाव पड़ता है।

यदि संघनन हिमांक (Freezing Point) से नीचे होता है, तो तुषार (Frost), हिम (Snow) एवं पक्षाभ मेघ (Cirrus Cloud) का निर्माण होता है।

यदि संघनन हिमांक से ऊपर होता है तो ओस, कुहरा, कुहासा एवं बादलों का निर्माण होता है।

 यदि संघनन पृथ्वी के धरातल के समीप होता है तो ओस (Dew), पाला (Frost), कुहरा एवं कुहासे का निर्माण होता है।

 जब संघनन की क्रिया अधिक ऊँचाई पर होती है तो बादलों का निर्माण होता है।

ओस (Dew)- हवा का जलवाष्प जब संघनित होकर छोटी-छोटी बूंदों के रूप में धरातल पर पड़ी वस्तुओं (घास पत्तियों आदि) पर जमा हो जाता है, तो इसे ओस कहा जाता है। ओस के निर्माण के लिए साफ आकाश, लगभग शांत वायुमंडल, उच्च सापेक्षिक आर्द्रता एवं ठंडी तथा लंबी रात का होना आवश्यक है।
ओस के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि तापमान हिमांक से ऊपर हो।

तुषार या पाला (Frost)- जब संघनन की क्रिया हिमांक से नीचे होती है (0°C या उससे कम पर) तो जलवाष्प जल कणों के बदले हिम कणों में परिवर्तित हो जाता है। इसे ही तुषार या पाला कहा जाता है। पाला के निर्माण के लिए उन सभी अन्य परिस्थितियों का होना आवश्यक है, जो ओस के निर्माण के लिए हैं।

नोट :- ओस या पाला ऊपर से नहीं गिरता है, बल्कि यह वहीं बनता है जहां हम इसे देखते हैं।

कुहरा (Fog)- कुहरा एक प्रकार का बादल है। जब जलवाष्प का संघनन धरातल के बिल्कुल समीप होता है तो कुहरे का निर्माण होता है। कुहरे में कुहासे की तुलना में जल के कण अधिक छोटे एवं सघन होते हैं।

कुहासा (Mist)- कुहासा भी एक प्रकार का कुहरा है, जिसमें कुहरे की अपेक्षा दृश्यता (Visibility) दूर तक रहती है। इसमें दृश्यता एक किलोमीटर से अधिक, परंतु दो किलोमीटर से कम होती है।

धुआंसा (Smog)- बड़े-बड़े शहरों में फैक्टरियों के निकट जब कुहरे में धुएं के कण मिल जाते हैं तो उसे धुआंसा (Smoke+Fog = Smog) कहा जाता है। धुआंसा कुहरे की तुलना में और अधिक सघन होता है एवं इसमें दृश्यता और भी कम होती है।

बादल (Clouds):-

    जब वायु का तापमान ओसांक (Dew-point) से नीचे गिर जाता है, तो जलवाष्प धूल तथा धुँए के कणों पर केन्द्रित होकर बादल का रूप धारण कर लेती है। बादलों को निम्नलिखित चार प्रमुख प्रकारों में विभक्त किया जाता है:-

1. वर्षा-मेघ (Nimbus):-

    काले-काले मेघ जब आकाश घेर लेते हैं तथा पृथ्वी के निकट होते हैं, तो इन्हें वर्षा-मेघ कहते हैं। इनसे काफी वर्षा होती है।

2. स्तरी मेघ (Stratus):-

   ये पृथ्वी से 300-2500 मीटर की ऊँचाई पर होते हैं तथा आकाश पर पूर्णतया छा जाते हैं। इनका निर्माण दो भिन्न पवनों के मिलने से होता है।

3. कपासी पेघ (Cumulus):-

   इनकी आकृति, रूई के ढेर जैसी होती है। इन बादलों में गड़गड़ाहट होती है।

4. पक्षाभ मेघ (Circus):-

   ये बहुत अधिक ऊँचाई (5-13 किमी) पर होते हैं। प्राय: ये घुँघराले बालों जैसे दिखाई पड़ते हैं। इनके द्वारा वर्षा नहीं होती।

समवायु-दाब रेखाओं का अध्ययन

    मौसम-मानचित्रों में समवायु-दाब रेखाएँ खींची जाती हैं। किसी भी मौसम-मानचित्र का अध्ययन इन रेखाओं के अध्ययन पर ही अधिकतर अवलम्बित होता है। समभार रेखाओं के अनेक आकार होते हैं, परन्तु इसके निम्न तीन मुख्य आकार हैं:

(क) चक्रवात (Cyclone),

(ख) प्रतिचक्रवात (Anti-Cyclone),

(ग) कोल (Coal)।

चक्रवात (Cyclones):-

    इसमें समदाब-रेखाओं का आकार वृत्ताकार होता है तथा रेखाएँ मिली होती हैं और वायु-दाब भीतर की ओर कम होता जाता है। सबसे कम वायु-दाब रेखा के भीतर ‘Low’ लिखा रहता है। प्रत्येक चक्रवात एक निश्चित दिशा की ओर चलने लगता है। उत्तरी गोलार्द्ध के चक्रवात में पवनें अन्दर की ओर घड़ी की सुइयों के विपरीत दिशा में चलती हैं।

प्रतिचक्रवात (Anti Cyclone)

     चक्रवात का उल्टा प्रतिचक्रवात होता है। प्रतिचक्रवात के केन्द्र में एक अपना वायुदाब केन्द्र का निर्माण होता और हवाएँ केन्द्र से बाहर की ओर निकलने की प्रवृति रखती है। उत्तरी गोलार्द्ध में प्रतिचक्रवात Clock wise और दक्षिणी गोलार्द्ध में Anticlock wise घुमने की प्रवृति रखती है।

चक्रवात और प्रतिचक्रवात में अंतर

1. चक्रवात की स्थिति में निम्न वायुदाब केन्द्र और प्रतिचक्रवात की स्थिति में उच्च वायुदाब केन्द्र का निर्माण होता है।

2. चक्रवात में हवा बाहर से केन्द्र की ओर आने की प्रवृत्ति रखती है जबकि प्रतिचक्रवात में केन्द्र से बाहर की ओर जाने की प्रवृत्ति रखती है।

3. चक्रवात की स्थिति में परिवर्तन के फलस्वरूप बादल, वर्षण एवं तेज हवाएं जैसी मौसमी परिस्थतियाँ उत्पन्न होती हैं। वहीं प्रतिचक्रवात की स्थिति में मौसम साफ होने की प्रवृति रखती है।

4. चक्रवात के केन्द्र में हवाएँ नीचे से ऊपर की ओर उठने की प्रवृति रखती है जबकि प्रतिचक्रवात में हवाएँ ऊपर से नीचे की ओर बैठने की प्रवृति रखती है।

5. जिस स्थान पर चक्रवातीय स्थिति उत्पन्न होती है। ठीक उसके ऊपर प्रतिचक्रवातीय स्थिति उत्पन्न होती है। अत: स्पष्ट है कि चक्रवात और प्रतिचक्रवात जलवायु विज्ञान की दो अलग-2 धारणाएँ है।

ब्यूफोर्ट संकेत (Beaufort Notation)

b नीला आकाश

h ओले (Hail)

bc आकाश कुछ साफ (Sky partly clean)

p वर्षा के मेघ गुजर रहते हैं (Passing Shower)

e आकाश अधिकतर बादलों से घिरा हुआ (Generally cloudy sky)

f धुन्ध (Fog)

m कुहरा (Mist)

o आकाश बादलों से सम्पूर्ण घिरा हुआ (Over-cast sky)

x पाला (Frost)

w ओस (Dew)

d फुहार (Drizzle), वर्षा (Rain), हिम (Snowfall)

q अल्पकालिक झंझा (Squall)

t गरज (Thunder)

I बिजली (Lighting)

s सहिम वृष्टि (Sleet)

i कभी चमक कभी गरज (Intermittent)

Interpretation of Weatherकोल (Col):-

    दो चक्रवातों अथवा दो प्रति चक्रवातों से घिरे मध्यस्थ क्षेत्र को हम ‘कोल’ कहते हैं। यहाँ पर पवन शांत रहती है। ग्रीष्म ऋतु में गरज तथा विद्युत की कड़क सुनाई देती है।

गौण अपदान (Secondary Depresion):-

     जब विशाल चक्रवात में छोटा वायु-दाब क्षेत्र (Low Pressure Area) बन जाता है, तो उसे गौण अपदाब कहते हैं। इसमें मौसम अस्थायी (Varaible) होता है, कभी शांत होता है, कभी विद्युत की गरज होती है। गौण अवदाब मुख्य चक्रवात के साथ ही आगे बढ़ता है।

‘V’ आकार का चक्रवात:-

    जब चक्रवात का न्यून वायु-दाब क्षेत्र ‘V’ के आकार का हो जाता है, तो से Trough of Low Pressure कहते हैं। इसके अगवाड़े में गर्मी तथा वर्षा होती है। यदि वह उष्ण वाताग्र (Warm Front) प्रकार का होता है तो धूप तथा ठंड होती है। इसमें वायु-दाब बाहर की ओर बढ़ता जाता है।

फान (Wedge):-

    अनेक बार दो चक्रवातों के बीच समदाब रेखाओं का आकार उल्टे ‘V’ की भाँति हो जाता है तथा भीतरी वायु-दाब अधिक होता जाता है। इसके अग्रभाग (Front Part) में मौसम शांत तथा सुहावना होता है, ज्योंहि पिछला भाग (Rear Part) आता है, मौसम बादलों से घिरा तथा खराब हो जाता है।

भारत का सामान्य मौसम मानचित्र

    भारतीय मौसम मानचित्रों के अध्ययन में देश में पाई जाने वाली विभिन्न मौसमों की जानकारी की अधिक आवश्यकता पड़ती है। परम्परानुसार भारत में एक वर्ष की अवधि को तीन ऋतुओं में विभक्त किया जाता है:

(i) जाड़े की ऋतु (नवम्बर से फरवरी के अन्त तक)

(ii) गर्मी की ऋतु (प्रारम्भिक मार्च से मध्य जून तक)

(iii) वर्षा ऋतु (मध्य जून से अक्टूबर के अन्त तक)

    मौसम की दृष्टि से वर्षा का महत्व अधिक होता है इस मौसम के मानचित्रों पर अनेक संश्लिष्ट दृश्य भी उभरते है।

दक्षिणी-पश्चिमी मानसून की ऋतु (मध्य जून से मध्य सितम्बर या अक्टूबर तक):-

     इस मौसम के मानचित्र की प्रमुख विशेषता यह है कि उत्तरी-पश्चिमी पाकिस्तान के ऊपर निम्न वायु दाब केन्द्र तथा हिन्द महासागर में प्रायः श्रीलंका के पश्चिम उच्च वायु दाब पाया जाता है। इसके फलस्वरूप उच्च दाब का एक उभार या गर्त बना जाता है और पश्चिमी तट पर विशेष रूप से उसके दक्षिणी भाग में समदाब रेखाएँ कुछ उत्तर की ओर मुड़ जाती है। प्रायद्वीप के दक्षिणी अर्द्धभाग में ये रेखाएँ दक्षिण की ओर मुड़ जाती है।

    पश्चिम के आधे भाग पर ये प्रायः पश्चिम दिशा में फैली होती है। पूर्व में समदाब रेखाओं की आकृति चक्रवात की उपस्थिति पर निर्भर करती है। उत्तरी प्रायद्वीप को पार करने वाली समदाब रेखाएँ प्रायः चक्रवात को दक्षिण भाग में घेरने की कोशिश करती है। यदि चक्रवात नहीं है तो ये प्राय: उत्तर की ओर से बंगाल की खाड़ी के ऊपर मुड़ जाती है और हिमालये से 60° के कोण पर मिलती है।

लौटती मानसून की ऋतु (मध्य सितम्बर से दिसम्बर)-

    मानसून के समाप्त होते ही पश्चिमोत्तर भारत का निम्न दाब क्षेत्र धीरे-धीरे उच्च दाब में बदल जाता है। पश्चिमी पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में एक उच्च दाब का क्षेत्र उपस्थित रहता है। इस केन्द्र से गंगा के मैदान में उच्च दाब का एक कटक (Wedge) फैला रहता है फिर भी यहाँ दाब प्रवणता बहुत कम रहता है। समदाब रेखाएँ पहले उत्तरी पश्चिमी पाकिस्तान के ऊपर पश्चिम से उत्तर-पूरब की ओर चलती है और फिर गुजरात तथा काठियावाड़ा से पूर्व पश्चिम हो जाती है।

    श्रीलंका के पूर्व में बंगाल की खाड़ी पर एक निम्न दाब का क्षेत्र उपस्थित रहता है। जब गंगा के मैदान पर उच्च दाब क्षेत्र रहता है, पश्चिमी पाकिस्तान तथा पश्चिमी भारत पर फैली समभार रेखाएँ उच्च दाब के पश्चिम किनारे के समान्तर हो जाती है और उनकी दिशा उत्तर-दक्षिण हो जाती है।

शीत ऋतु या जाड़े का मौसम (जनवरी से मार्च के मध्य तक)-

     इस समय के मौसम मानचित्र पर उत्तरी-पश्चिमी उच्च दाब के स्थान पर एक हल्का निम्न दाब क्षेत्र बन जाता है। क्षेत्र की वास्तविक स्थिति चक्रवात पर निर्भर करती है।

ग्रीष्म ऋतु (मार्च से जून तक)-

    इस समय गर्मी अधिक बढ़ जाने से भारत के उत्तरी-पश्चिम भाग और पाकिस्तान के ऊपर निम्न दाब का क्षेत्र बनना प्रारम्भ हो जाता है। बाद में वह गंगा के मैदान में फैलता है। उच्च दाब क्षेत्र अरब सागर पर स्थित रहता है। अतः समभार रेखाएँ पश्चिमी घाट पर उत्तर से दक्षिण मुँह की हो जाती हैं। मध्य प्रायद्वीप के उत्तरी भाग में समदाब रेखाएँ अपनी दिशा को बदल उत्त-पूर्वी दिशा में मुड़ जाती हैं। वायुदाब रेखाओं के कम होने के कारण दाब प्रवणता अल्प तथा इस प्रकार वायुगति अधिक तेज नहीं होती।

भारतीय मौसम मानचित्रों की व्याख्या

     किसी दैनिक मौसम मानचित्र का अध्ययन निम्न शीर्षकों में किया जाता है:-

1. भूमिका- दिन, मानचित्र की तिथि तथा समय, ऋतु आदि।

2. आकाश की दशा (Sky Conditions)

(i) मेघ आवरण की मात्रा (Amount of Cloudiness)

(ii) मेघों के प्रकार या प्रकृति

(iii) अन्य घटनाएँ-कोहरा, बिजली, तुषार आदि वायुमण्डलीय तत्व

3. वायुदाब का वितरण:

(i) मौसमी निम्न वायुदाब (Low) क्षेत्र की स्थिति

(ii) मौसमी उच्च वायुदाब (High) को स्थिति

(iii) समदाब रेखाओं की प्रवृत्ति (Trends of isobars)

(iv) वायुदाब को प्रवणता (Pressure Gradient)

(v) चक्रवात को उपस्थिति और मौसम पर उसका प्रभाव

4. वायु (Wind)

(1) पवन की दिशा और

(ii) पवन की गति

5. सामान्य वायुदाब से विचलन

6. वर्षा का वितरण (Precipitation)

(i) सामान्य वितरण, साधारण, अधिक, कम आदि

(ii) भारी वर्षा के प्रमुख क्षेत्र

7. सामान्य तापमान से विचलन (Departure from normal Temp.)

8. समुद्र की दशा (Sea Condition)

   उपर्युक्त शीर्षकों के अन्तर्गत सामान्यतः प्रातः कालीन (08.30) मुख्य मानचित्र का सविस्तार वर्णन मानचित्र पर उद्धत कुछ प्रमुख संकेतों की सहायता से करते हैं। छोटे मानचित्र भी उपरोक्त समय की दशा को ही दर्शाते हैं जिनका उपयोग पठन में किया जाता है।

शीतकाल का ऋतु मानचित्र (बुधवार 31 जनवरी, सन् 1973 शक्, 11 माघ 1894):-

(a) प्रारम्भिक सूचना-

    शीतकाल के इस मुख्य ऋतु मानचित्र में बुधवार दिनांक 31 जनवरी, सन् 1973, भारतीय समयानुसार प्रातः 8.30 बजे की मौसम की वास्तविक दशाओं का चित्रण किया गया है। ऋतु मानचित्र के ऊपरी भाग में दिनांक, दिन एवं भारतीय समय के अतिरिक्त ग्रीनविच समय (0300 GMT) दिया है। यहाँ ई० सन् के साथ-साथ शक् संवत् भी दिया रहता है। ऋतु मानचित्र में मंगलवार दिनांक 30 जनवरी, सन् 1973, भारतीय समयानुसार सायं 5.30 17.30) की मौसम की वास्तविक दशाओं का वर्णन किया गया है। मौसम की वास्तविक दशाओं का वर्णन करते समय दोनों पृष्ठों के मुख्य एवं सहायक मानचित्रों की भी आवश्यकतानुसार सर्वत्र सहायता ली गयी है।

(b) वायुदाब व्यवस्था-

    मानचित्र में वायुदाब व्यवस्था अधिक सरल है। इसमें वायुदाब की सामान्य प्रवणता हिन्द महासागर से उ०-५० भारत की ओर है। सम्पूर्ण मानचित्र में समदाब रेखाएँ दूर- दूर फैली हुई हैं। हिन्द महासागर एवं केरल तट के सहारे 1014 मिलीबार की समदाब रेखा अण्डाकार स्वरूप बनाती हुई सर्पिल मार्ग से पूर्व की ओर चली गयी है। अधिकांश दक्षिण का पठार 1014 और 1016 मिलीबार समभार रेखा की सीमा में आ जाता है।

निम्न वायुदाब के क्षेत्र-

    ऋतु मानचित्र में स्पष्टत: उ० प० भारत और संलग्न पाकिस्तान में निम्न वायुदाब का विकास हुआ है। यहाँ पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में 1018 मिलीबार समभार रेखा अण्डाक्ति बनाती है। इसी भाँति दक्षिणी पठार के पश्चिमी भाग को 1010 मिलीबार समभार रेखा घेरे हुए हैं। यह दोनों ही निम्न भार के केन्द्र हैं।

उच्च वायुदाब के क्षेत्र-

    सर्वाधिक वायुदाब पृष्ठ छः के मुख्य ऋतु मानचित्र में उत्तरी-पश्चिमी भारत एवं पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में विकसित हुआ है। यहाँ 1022 मिलीबार वायुदाब पाया जाता है। यह वायुदाब उत्तरी राजस्थान और उत्तरी-पूर्वी भारत में उपूसी और सलंग्न वर्मा में विकसित हुआ है। सामान्यतः सारे ही उत्तरी भारत में 1020 से 1022 मिलीबार के बीच उच्च वायुदाब की दिशा पायी जाती है। यहाँ की समभार रेखाएँ उत्तर प्रदेश के पश्चिम में पश्चिमोत्तर दिशा में और पूर्व में पूर्वोत्तर दिशा में मुड़ गयी हैं।

     दक्षिणी भारत में 1014, 16 और मिलोबार की तीन समभार रेखाएँ अरब सागर से भूमि की ओर तेजी से मुड़कर एवं पुनः सागर की ओर झुककर पूर्व की ओर चली गयी हैं। उत्तरी भारत में इनका वितरण अधिक व्यवस्थित एवं दो उपखण्डों पूर्वोत्तर और पश्चिमोत्तर में बँट गया है। समदाब रेखाओं की उपयुक्त व्यवस्था से तो यही आभास होता है कि स्थानीय अपवादों को छोड़ कुछ घण्टों तक सर्वत्र मौसम खुला एवं स्वच्छ रहना चाहिए।

सामान्य वायुदाब के विचलन (प्रातः 8.30 बजे)-

    दक्षिणी-पूर्वी कोने में दिये गये लघु मानचित्र को ध्यान से देखने से स्पष्ट हो जाता है कि प्रायः सारे ही देश में औसत से अधिक वायुदाब की दशा का विकास हुआ है। केवल मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र के कुछ ही भागों में औसत वायुदाब मिलता है। सामान्यतः ज्यों-ज्यों हम उत्तर की ओर जाते हैं वायुदाब उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है। सर्वाधिक विचलन पश्चिमोत्तर एवं पूर्वोत्तर भारत +4 मिलीबार और दक्षिण भारत में +2 मिलीबार से कम पाया गया है।

वायु दिशा एवं वायुवेग-

    ऋतु मानचित्र के उत्तरी-पश्चिमी भाग में वायु प्रायः शान्त है। उत्तरी भारत के अधिकांश भागों में वायु धीमी गति (5 नॉट या कम) से बह रही है। कंवल बारीसाल (बंगला देश) के निकट इसकी सर्वाधिक गति 20 नॉट प्रति घण्टा कित की गई है। इस ऋतु मानचित्र में कंवल उत्तरी भारत में ही ‘अ’ श्रेणी के बीस ऐसे केन्द्र बनाए गए हैं जहाँ कि वायु शान्त है। दक्षिणी भारत के अधिकांश केन्द्रों पर वायु प्रवाह की गति 5 से 15 नॉट के बीच है। इस भाग में वायु प्रवाह की सामान्य दिशा अरब सागर की ओर है। निकोबार के दक्षिण-पश्चिमी सागर में वायु गति 20 नॉट प्रति घण्टा अंकित की गई है। यहाँ पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है।

1.5 किमी0 ऊँचाई पर वायु की स्थिति-

    दक्षिण-पूर्व कोने में ऑकत लघु मानचित्र में 1.5 किमी० की ऊँचाई पर देश के विभिन्न स्टेशनों से लिये गये प्रेक्षण के आधार पर वायु की दिशा एवं गति दर्शायी गई है। मानचित्र के अध्ययन से स्पष्ट है कि उपर्युक्त ऊँचाई पर वायु की गति 5 से 20 नॉट के बीच है। पश्चिमी तट एवं हिमालय के ढालों के निकट वायु प्रवाह अपेक्षाकृत तेज है। सम्पूर्ण उत्तरी भारत में वायु की दिशा भूमि की भाँति ही है। दक्षिणी भारत के विक्षोभ मण्डल में पवन धीमी गति से पश्चिम से पूर्व, उत्तर-पूर्व से पश्चिम की ओर बह रही है।आकाशीय दशा एवं मेघाच्छन्नता-

    शीत ऋतु होने से देश के अधिकांश मौसम केंन्द्र मेघ रहित है। पूर्ण मेघाच्छन्नता श्रीनगर, शिमला, चांदा और देहरादून में पायी जाती है। खण्डित मेघाच्छन्नता कहीं-कहीं उत्तरी मध्य और दक्षिण-पश्चिमी भारत एवं दोनों सागरों में एक-चौथाई से तीन-नौथाई तक पायी जाती है। सर्वत्र निम्न मेघों का ही वितरण दर्शाया गया है। आधे से अधिक मेघान्छन्नता भारत में जबलपुर और दक्षिणी भारत में औरंगाबाद व बंगलौर और मिनिकोय, कोलम्बो एवं वर्मा के दक्षिण में मिलती है। आकार में मेघों के अतिरिक्त जबलपुर के निकट तड़ित (lightning) अंकित की गयी है। मानचित्र में पूर्ण मेघाच्छन्नता पश्चिमी उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में अंकित की गई है।

वर्षा और भूतल पर आर्द्रता के विभिन्न रूप-

     उच्च भार एवं प्रायः मेघरहित आकाश होने से देश के अधिकांश भाग में वर्षा रहित मौसम अंकित किया गया है। ऋतु मानचित्र में शिमला और श्रीनगर के निकट हिमपात होता हुआ बताया गया है। दिल्ली और इलाहाबाद में हल्का कुहरा एवं कहीं-कहीं धुंध (Haze) भी फैली हुई है। पिछले 24 घण्टों में कहीं भी जलवृष्टि, हिमपात या ओलावृष्टि अंकित नहीं की गयी है।

समुद्र की दशा-

    बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की दशा प्रायः शान्त बतायी गयी है। बंगाल की खाड़ी में गंगा के डेल्टा के मुहाने, मद्रास और खाड़ी के दीपों के निकट कहीं भी दशा विशेष को उल्लिखित नहीं किया गया है। मद्रास व म्यांसार के बीच सागर मध्य तरंगित (moderate) बताया गया है। इसी भाँति अरब सागर में द्वीपों के निकट सागर कुछ अशान्त है, शेष भागों में यह प्रायः शान्त है।

न्यूनतम तापमान का औसत दशा से विचलन (सायं 8.30 बजे):-

    पश्चिम के लघु मानचित्र के अनुसार सम्पूर्ण उत्तरी-पश्चिमी भारत में औसत न्यूनतम तापमान से वास्तविक न्यूनतम तापमान 2° स 4°C कम रहे हैं। गुजरात, दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 4°C या अधिक नीचे तापमान रहे हैं। दूसरी ओर सम्पूर्ण दक्षिणी-पूर्वी और पूर्वी भारत के तापमान औसत से 2°C तक ऊँचे अंकित किये गये हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र एवं आंध्र के संलग्न भागों में वृद्धि 4°C तक अंकित की गई है। औसत तापमान रेखा या 0°C विचलन रेखा मार्मा गोआ एवं भारत के मध्यवर्ती भागों से होकर सुदूर पूर्वी भारत में पूर्वी हिमालय की ओर मुड़ गई है।

अधिकतम तापमान का औसत दशा से विचलन (सांय 5.30 बजे):-

    दक्षिण-पश्चिम के लघु मानचित्र के अनुसार देश के सारे उत्तर और मध्य भाग में अधिकतम तापमान औसत से 2° से 4°C तक कम अंकित किये गये हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश के वास्तविक तापमान 4°C से भी कम अंकित किये गये हैं। देश के शेष भागों में अधिकतम तापमान प्राय: औसत के निकट रहे। केवल महाराष्ट्र में कहीं-कहीं औसत से 2°C अधिक तापमान अंकित किये गये। औसत समताप रेखा अत्यधिक बल खाती हुई भूमि की ओर मुड़कर पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत में पूर्वी हिमालय की ओर मुड़ गयी है।

ग्रीष्मकाल का ऋतु मानचित्र (बुधवार 16 मई सन् 1973, शक 26 वैशाख 1895)

(i) प्रारंभिक सूचना:-

    ग्रीष्मकाल के इस मुख्य ऋतु मानचित्र में बुधवार दिनांक 16 मई, सन् 1973, भारतीय समयानुसार प्रातः 8.30 की मौसम की वास्तविक दशा का चित्रण किया गया है। मानचित्र के ऊपरी भाग में भारतीय समय के साथ-साथ ग्रीनविच समय (3.00 बजे) एवं ईसवी सन् के साथ-साथ शक् सम्वत् भी दिया गया है। मानचित्र में मंगलवार 15 मई, सन् 1973 भारतीय समयानुसार सायं 5.30 बजे की मौसम की वास्तविक दशा का चित्रण किया गया है। मौसम की वास्तविक दशा का वर्णन करते समय दोनों ही मुख्य मानचित्रों एवं उनके नीचे के चारों लघु मानचित्रों की भी आवश्यकतानुसार सहायता ली गयी है।

(ii) वायुदिशा एवं वायुवेग:-

    मुख्य ऋतु मानचित्र के अधिकांश भाग में पवन धीमी गति से बह रही है। उत्तरी भाग में वायु की गति 10 से 5 नॉट के बीच और मध्यवर्ती भाग में 5 से 15 नॉट के बीच ऑकत की गई है। देश में सबसे तेज पवन नागपुर के निकट 25 नॉट प्रति घण्टा की गति से चल रही है। उत्तरी भारत में वायु के प्रायः शान्त रहने का मुख्य कारण वहाँ पायी जाने वाली वायुदाब और समदाब रेखाओं का दूर-दूर होना है।

   दक्षिणी-पश्चिमी भारत एवं तटवर्ती भाग में वायु प्रायः पश्चिमी एवं उत्तर-पश्चिमी दिशा में प्रवाहित हो रही है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी तट पर इसकी दिशा अनिश्चित है। पूर्वी तट पर हवा एक-दूसरे से विपरीत दिशा में प्रवाहित होती हुई दर्शायी गयी है। मध्यवर्ती भारत में हवाएँ उत्तर-पश्चिम और पश्चिम दिशा से और पूर्व में दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व से प्रवाहित हो रही है। देश के शेष भागों में पवन प्रायः शान्त है। मानचित्र में वायुदाब की भाँति ही वायु प्रवाह की दिशा भी अधिक व्यवस्थित है, यहाँ पश्चिमी भारत एवं पश्चिमी तट पर हवा पश्चिम या उत्तर-पश्चिम से एवं मध्यवर्ती भारत में उत्तर-पश्चिम से प्रवाहित हो रही है। शेष भागों में पवन प्रायः शान्त है।

(iii) आकाशीय दशा एवं मेघाच्छन्नता:-

     ग्रीष्म ऋतु के कारण मुख्य मानचित्र के अधिकांश मौसम केन्द्रों पर आकाश मेघरहित बताया गया है। परन्तु तटवर्ती मौसम केन्द्रों की स्थिति इससे कुछ भिन्न है। यहाँ पर कच्छ से कोचीन तक न्यूनाधिक मेघाच्छन्नता पायी जाती है। कोचीन, कालीकट और त्रिवेन्द्रम के निकट 7/8 से लेकर पूर्ण आकाश मेघाच्छादित है। इसी भाँति पूर्वी भारत में पूर्ण मेघाच्छन्नता कटक, बालासोर और गौहाटी में, पश्चिम भारत में चण्डीगढ़ में पूर्ण, दिल्ली व देहरादून में 7/8, अण्डमान निकोबार में 5/8 और बीकानेर में 1/2 भाग मेघाच्छादित है। मानचित्र के दक्षिण और पूर्वी तट, द्वीप समूहों और पूर्वी भारत में अधिक मेघाच्छन्नता पायी जाती है।

     दोनों ही मुख्य ऋतु मानचित्रों में उत्तरी और मध्यवर्ती भारत में कई स्थानों पर धूल भरी आँधियाँ चलती हुई बतायी गयी हैं। इसके अतिरिक्त, मद्रास के निकट तड़ित (lightning) चमकते हुए भी बताया गया है।

(iv) सामान्य वायुदाब से विचलन (प्रातः 8.30 बजे):-

    दक्षिणी-पूर्वी कोने के लघु मानचित्र से स्पष्ट है कि इस समय देश के अधिकांश भाग में लगभग औसत बायुदाब की दशा ही पायी जाती है। मध्यवर्ती व उत्तरी भारत में कहीं-कहीं औसत से 2 मिलीबार अधिक एवं मद्रास के निकट 2 मिलीबार कम वायुदाब दर्शाया गया है। सम्पूर्ण पूर्वी व दक्षिणी-पूर्वी भाग में औसत से कम और शेष भागों से औसत से अधिक वायुदाब पाये जाते हैं। (५०-५० मानचित्र देखें)

(v) 1.5 किमी० की ऊँचाई पर वायु की स्थिति:-

    दक्षिण-पूर्व के लघु मानचित्र में 1.5 किमी० की ऊंचाई पर प्रवाहित हवाओं को देखने से स्पष्ट है कि यहाँ की वायु गति अधिक तीव्र है, और इसकी दिशा में भी अव्यवस्था है। सम्पूर्ण पश्चिमी भारत में उत्तर से दक्षिण तक वायु गति से 10 से 40 नॉट के बीच है। सर्वाधिक गति 40 नॉट भुज के निकट ऑकत की गई है। देश के मध्यवर्ती भागों में हवाएँ उत्तर-पश्चिम एवं उत्तर की ओर से और पूर्वी भारत में अनिश्चित दिशा में प्रवाहित हो रही है। यहाँ इनकी गति धीमी है।

(vi) वायुदाब व्याख्या:-

    मानचित्र की वायुदाब व्याख्या विषम है। इस समय देश के उत्तरी और दक्षिण दोनों भागों में वायुदाब वितरण भिन्न प्रकार का है। दक्षिणी प्रायद्वीप के पश्चिमी एवं मध्यवर्ती भाग और सौराष्ट्र में समदाब रेखाएँ अपेक्षाकृत अधिक निकट हैं। मध्यवर्ती एवं सम्पूर्ण उत्तरी-पश्चिमी एवं अधिकांश उत्तरी भारत को केवल 1002 और 1004 मिलीबार की दो समभार रेखाएँ घेरे हुए हैं। देश के इस भाग से बाहर की ओर सर्वत्र वायुदाब बढ़ता हुआ है। मानचित्रों की समभार रेखाएँ अधिक स्पष्ट विकसित हैं। इस पर निम्न एवं उच्च भार केन्द्रों का अधिक व्यवस्थित विकास हुआ है। यहाँ भी पश्चिम घाट के सहारे समभार रेखाएँ तेजी से निकट होती हुई चली गई हैं।

निम्न वायुदाब के क्षेत्र-

    मानचित्र में तीन भार के केन्द्र बने हुए हैं। इनमें से दो केन्द्रों का न्यूनतम वायुभार 1001 मिलीबार है। पहला वृत्ताकार केन्द्र द० पू० मध्य प्रदेश और उत्तरी-पश्चिमी उड़ीसा की सीमा पर दूसरे विषम आकृक्ति के केन्द्र का वायु भार भी 1001 मिलीबार है, यह पूर्वी राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकसित हुआ है। अर्द्ध-विकसित निम्न भार की दशा हिमाचल प्रदेश, जम्मू और संलग्न पाकिस्तान में दर्शायी गई है।

    मानचित्र में भी सुस्पष्ट दो निम्न वायुदाब के केन्द्र विकसित हुए हैं। पहला अण्डाकार केन्द्र उत्तर-पश्चिमी राजस्थान एवं संलग्न पाकिस्तान की सीमा पर 996 मिलीबार वायुदाब दर्शाता है। इतने ही निम्न वायुदाब का दूसरा केन्द्र पूर्वी मध्य प्रदेश की सीमा पर विकसित हुआ है।

उच्च वायुदाब क्षेत्र-

     ऋतु मानचित्रों में भारतवर्ष के बाहर निकटवर्ती सागरों के सुदूर क्षेत्र में उच्च भार की दशा दर्शायी गई है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की बाहरी सीमा पर 1008 मिलीबार एवं मानचित्र में लगभग इन्हीं स्थानों पर 1010 मिलीबार समभार रेखाएँ गुजरती हैं। यहीं पर ‘H’ (उच्च भार) लिखा है। इस भाँति मानचित्र में पूर्वांचल अरब सागर में सहायक उच्च भार के क्षेत्र दर्शाये गये हैं।

    उत्तरी एवं मध्य भारत में सामान्यतः निम्नदाब की दशा ग्रीष्म के लक्षणों को ही सुस्पष्ट करते हैं।

(vii) वर्षा और भूतल पर आर्द्रता के विभिन्न रूप:-

     ग्रीष्म ऋतु होने से बहुत ही कम स्थानों पर पिछले 24 घण्टों में वर्षा अंकित की गई है। सर्वाधिक वर्षा निकोबार द्वीपसमूह के दोनों केन्द्रों पर क्रमश: 8 और 7 सेमी०, नेपाल में काठमाण्डू में । सेमी० वर्षा व माण्डले में 2 सेमी० वर्षा अंकित की गई है। केवल मेघालय और निकोबार में ही प्रेक्षण के समय वर्षा हो रही थी। अहमदाबाद केन्द्र पर हल्का कुहरा (Haze) छाया हुआ है। शेष भागों में वायुमण्डल स्वच्छ और मौसम शुष्क बताया गया है।

(viii) समुद्र की दशा:-

     मानचित्र में अधिकांश अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की दशा को नहीं बताया गया है जो कि सम्भवतः सामान्य मानी गयी है। विशाखापतनम से श्रीलंका से बीच का सागर सरल एवं मन्द तरंगित (Smooth & Slight) और दक्षिण में मध्य तराँगत (mod) बताया गया है। पश्चिमी अरब सागर की दशा को भी कहीं-कहीं सरल एवं मन्द तरंगित (Slight & smooth) बताया गया है।

(ix) अधिकतम तापमान का औसत दशा में विचलन (सायं 5.30 बजे):-

      दक्षिण-पश्चिम के लघु मानचित्र के अनुसार सारे उत्तर-पश्चिम और पूर्वी मध्यवर्ती भारत में अधिकतम ताप का औसत से विचलन 0° से 8°C तक रहा। सबसे कम 8°C (या -8°C) दिल्ली, निकटवर्ती राजस्थान और हरियाणा की सीमा पर अंकित किये गये। दूसरी ओर सारे दक्षिणी भारत और पूर्वांचल के तापमान का विचलन 0° से 6°C के बीच अधिक (+) रहा। दक्षिणी-पूर्वी भारत में यह विचलन 2° से 4° के बीच और मद्रास एवं उसके उत्तरी तट पर 6°C (या +6°C) तक अधिक रहा। औसत समताप रेखा गुजरात से बांग्लादेश की ओर लहरदार मार्ग से चली गयी है। बर्मा के अधिकांश भाग में औसत से 0° से 6°C के बीच कम तापामन अंकित किया गया है।

(x) न्यूनतम तापमान का औसत दशा से विचलन (प्रात: 8.30 बजे):-

     दक्षिण-पश्चिम के लघु मानचित्र के अनुसार औसत न्यूनतम तापमान से विचलन की दशा अधिक विषम है। उत्तरी-पश्चिमी भारत में औसत 0° से 6°C (या -6°C) के बीच तापमान अंकित किये गये, जबकि निकट ही उत्तर, प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं विहार की सीमा पर तापमान औसत से 0° से 4°C (या +4°C) के बीच अधिक अंकित किये गये। देश के शेष भागों में तापमान औसत या औसत से कुछ अधिक अंकित किये गये।

    पहली औसत समताप रेखा उत्तरी-पश्चिमी भारत में कच्छ के तट से महाराष्ट्र की ओर मुड़कर पुनः कर्नाटक से उत्तर की ओर घूमती हुई पश्चिमी एवं मध्य उत्तर प्रदेश होकर जम्मू-कश्मीर तक चली गयी है। दूसरी औसत समताप रेखा मध्य नेपाल से पश्चिमी बिहार के दक्षिण से उड़ीसा होकर वहाँ से पुनः उ०-पु० बंगाल की ओर घूमती हुई हिमाचल की ओर चली गयी है। वर्मा के अधिकांश भाग और खाड़ी के द्वीपों में तापमान औसत के निकट अंकित किये गये हैं। (चित्र द०पू० लघु मानचित्र देखें)

वर्षा काल का ऋतु मानचित्र (शुक्रवार 6 जुलाई, सन् 1973; शक 15 आषाढ़ 1895)

(i) प्रारम्भिक सूचना:-

    वर्षाकाल के इस मुख्य मानचित्र पें शुक्रवार दिनांक 6 जुलाई, सन् 1973 भारतीय समयानुसार प्रातः 8.30 बजै की मौसम की वास्तविक दशा का चित्रण किया गया है। मानचित्र में गुरुवार दिनांक 5 जुलाई, सन् 1973 भारतीय समयानुसार सायं 5.30 बजे की मौसम की वास्तविक दशा को दर्शाया गया है। आगे के वर्णन एवं विश्लेषण में दोनों बड़े व चार लघु मानचित्रों के मौसम के विभिन्न तत्वों की विकसित एवं परिवर्तनशील दशाओं का भी सर्वत्र ध्यान रखा गया है।

(ii) वायुदाब व्यवस्था:-

     मुख्य मानचित्र की वायुदाब व्यवस्था वर्षा काल होने से विशेष प्रकार से विकसित है। सारे भारतीय उपमहाद्वीप की समभार रेखाएँ विकसित चक्रवातों का अनुसरण करती हैं। दक्षिणी भारत और निकटवर्ती सागरों पर समभार रेखाएँ रेखाओं 998, 996 और 994 मिलीबार का ही विस्तार है। समभार रेखाओं की सामान्य व्यवस्था भी इससे मिलती-जुलती है।

निम्न वायुदाब के केन्द्र और गर्त चक्र-

     मानचित्र में भारतीय उप-महाद्वीप में तीन वायुदाब के केन्द्र बताये गये हैं इनमें से सबसे महत्वपूर्ण पूर्वी भारत का विकसित चक्रवात (Depresion) है। यहाँ मानचित्र में D लिखा है। वृत्ताकार आकृक्ति के इस चक्रवात को 922 और 994 दो समभार रेखाएँ सभी ओर से एवं अगली चार समभार रेखा तीन ओर से घेरे हुए हैं। उपर्युक्त सभी सम्भार रेखाएँ एक-दूसरे से प्रायः समानान्तर हैं। इनकी प्रवणता पूर्व एवं दक्षिण-पूर्व की ओर अधिक तीव्र है। मानचित्र में अंकित इसी चक्रवात के अध्ययन से स्पष्ट है कि यह धीमी गति से भीतर की ओर बढ़ रहा है। इसमें गर्त चक्र या चक्रवात की भीतरी समभार रेखा 900 मिलीबर है। यह वायुदाब सामान्य से बहुत निम्न है।

    दूसरे निम्न वायुदाब केन्द्र का विकास सौराष्ट्र के निकट हुआ है, जहाँ कि 995 मिलीबार के घेरे में L (निम्न भार) लिख है। इसे एवं पूर्व के चक्रवात दोनों को ही वृहद अण्डाकार में 994 मिलीबार समभार रेखा घेरे हुए हैं। ये समतल भाग में दो गर्ती जैसी प्रतीत होती है, क्योंकि दोनों ही निम्न भार के बीच कोई भी समभार रेखा नहीं गुजरती है। इस वृहद व्यवस्था के उत्तर और दक्षिण की ओर वायुदाब बराबर बढ़ता जाता है। तीसरे निम्न वायुदाब के केन्द्र का विकास पाकिस्तान के सुदूर पश्चिम में एवं ईरान की सीमा पर हुआ है।

     ऋतु मानचित्र में कटक के निकट के चक्रवात या गर्त चक्र के अतिरिक्त राजस्थान और मध्यप्रदेश में भी निम्न वायुदाब केन्द्रों का विकास हुआ है। इनमें से पूर्वी निम्न भार स्फान (wedge) की भाँति फैला हुआ है। सभी को 990 मिलीबार समभार रेखा प्रायः वृत्ताकार घेरे हुए हैं।

उच्च वायुदाब के केन्द्र:-

   ग्रीष्मकालीन वर्षा काल के इस ऋतु मानचित्र के हिन्द महासागर या मानचित्र के सुदूर दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व और उत्तर में कश्मीर के उत्तरी भाग में उच्च वायुदाब की दिशा का विकास बताया गया है। इसमें हिन्द महासागर में 1006 मिलीबार रेखा और कश्मीर में 1002 मिलीबार रेखा पूर्व-पश्चिम दिशा में गयी है। इस प्रकार दक्षिणी उच्च वायुदाब अधिक गहन और विकसित है। इस कारण भी 8.30 बजे वाले ऋतु मानचित्र में दक्षिणी भारत में समभार रेखाएँ अधिक निकट हैं।

     सामान्यतः समभार रेखाओं की दिशा पूर्व-पश्चिम है, और सागर पर यह अधिक नियमित है। मध्यवर्ती और पूर्वी भारत में यह निम्न वायुदाब के केन्द्रों की ओर मुड़ गयी है। इसी कारण सुदूर पूर्व की समभार रेखाओं की दिशा उत्तर-दक्षिण हो गयी है।(iii) सामान्य वायुदाब से विचलन:-

     प्रातः 8.30 बजे के सम्बन्धित मानचित्र के अध्ययन से स्पष्ट है कि देश के उत्तरी-पश्चिमी भाग को छोड़ सर्वत्र औसत से कम वायुदाब पाया जाता है। यही नहीं कर्क रेखा में दक्षिण में यह औसत से 4 से 8 मिलीबार तक कम है। सबसे कम वायुदाब-8 मिलीबार दक्षिणी सौराष्ट्र, कोंकण के तट और निकटवर्ती सागर एवं पूर्वी भारत में उड़ीसा के तट व निकटवर्ती सागर पर पाया जाता है।

    स्पष्टतः इसका सीधा सम्बन्ध उस निम्न वायुदाब व्यवस्था से है जो कि इन केन्द्रों के निकट ही विकसित हुए हैं। औसत से 6 मिलीचार समदाब रेखा उपर्युक्त दोनों केन्द्रों पर, -8 मिलीबार समुदाब रेखा को घेरे हुए हैं। औसत वायुदाब की 0 समभार रेखा पाकिस्तान से उत्तरी राजस्थान होकर पश्चिमी भारत को घेरते हुए कश्मीर की ओर मुड़ गयी है। पूर्वी भारत में यद्यपि औसत से कुछ कम वायुदाब (-2 से -4 तक) पाया जाता है परन्तु यहाँ इसकी प्रवणता धीमी है।

(iv) वायु दिशा एवं वायु वेग:-

      सारे भारतीय उप महाद्वीप में इस समय स्पष्टतः दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ चल रही हैं। ये हवाएँ दक्षिणी भारत में दक्षिण-पश्चिम, उत्तरी बंगाल की खाड़ी में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व और देश के शेष भागों में पूर्व दिशा से चल रही है। पश्चिमी तट एवं बंगाल की खाड़ी के तट पर इन हवाओं का वेग देश के अन्य भागों की तुलना में अधिक है।

    यहाँ हवा की गति 10 से 30 नॉट के बीच है। 30 नॉट की गति मार्मा गोआ और पूना के निकट अंकित की गयी है। देश के शेष भागों में वायु वेग सामान्यतः 0 से 10 नॉट प्रति घण्टा के बीच है। अधिकांश भागों में वायु वेग 5 नॉट से भी कम अंकित किया गया है। ऋतु मानचित्र में सर्वाधिक वायु वेग उत्तरी लक्षद्वीप में 40 नॉट प्रति घण्टा विशेष उल्लेखनीय है।

    पूर्वी भारत के चक्रवात के कारण यहाँ वायु दिशा औसत दिशा से भिन्न है और स्थानीय रूप से प्रभवित हुई है।

(v) 1.5 कि० मी० की ऊँचाई पर वायु की स्थिति:-

    इस ऊँचाई पर देश के अधिकांश विक्षोभ मण्डल में वायु तीव्र गति से चल रही है। दक्षिणी भारत में इसकी गति 30 से 70 नॉट है जबकि पूर्वी भारत में 10 से 30 नॉट एवं सबसे धीमी गति उत्तरी-पश्चिमी भारत में 5 से 15 नॉट के बीच है।

    सबसे तेज गति से वायु मछलीपट्टनम (आंध्र प्रदेश) में 70 नॉट एवं दक्षिणी लक्षद्वीप में 65 नॉट प्रति घण्टा अंकित की गयी है। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस ऊँचाई पर भी वायु की दशा सर्वत्र दक्षिण-पश्चिमी मानसून हवाओं के अनुसार ही है।

(vi) आकाशीय दशा एवं मेघाच्छन्नता:-

    वर्षाकाल होने से देश के सभी भागों में मेघ छाये हुए हैं। कोटा, डाल्टेनगंज, लखनऊ और तेजपुर ही अपवाद स्वरूप ऐसे मौसम केन्द्र हैं, जहाँ कि मेघाच्छन्न 1/8 से कम है। सर्वाधिक मेघाच्छन्नता दक्षिणी भारत में पायी जाती है।

    यहाँ के अधिकांश केन्द्र पूर्ण मेघाच्छादित बताये गये हैं। इनमें से अधिकांश केन्द्रों पर या तो वर्षा हो रही है या पिछले 24 घण्टों में वर्षा हुई है। शेष भारत में मेघाच्छन्नता अनिश्चित है। 7/8 या अधिक मेघाच्छन्नता पश्चिमी भारत में उदयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, जयपुर, देहरादून, शिमला एवं गंगा के डेल्टा, उड़ीसा और खाड़ी के द्वीपों में दर्शायी गयी है।

    सारे ऋतु मानचित्र में एक भी केन्द्र ऐसा नहीं है जहाँ कि आकाशीय दशा अनिश्चित बतायी गयी हो। पूर्व दिन की संध्या के मानचित्र में भी मेघाच्छन्नता प्रायः इसी भाँति ही है।

(vii) वर्षा और भूतल पर आर्द्रता के विभिन्न रूप:-

     वर्षा काल, अधिक मेघाच्छन्नता और चक्रवात सभी व्यापक वर्षा के लिए अनुकूल दशाएँ उत्पन्न करते हैं। ऋतु मानचित्र में पिछले 24 घण्टों में दूर-दूर तक वर्षा हुई भी है। वर्षा की मात्रा प्रत्येक केन्द्र के वृत्त के दक्षिण-पूर्व दिशा में अंकित की गई है। सर्वाधिक वर्षा पश्चिमी तट पर हुई है। यहाँ पिछले 24 घण्टों में पूना में 18, कोलावा में 16, होनावर में 14, रत्नागिरी और कोल्हापुर में 11-11, मंगलौर एवं मुम्बई में 9.9 और शेष स्थानों पर 3 से 8 सें० मी० के बीच वर्षा ऑकत की गयी है।

    मुख्य पठार पर नागपुर में 9 से० मी० और शेष भागों में ०.25 से 3 से० मी० के बीच, बंगाल की खाड़ी के उत्तरी तट पर 1 से 3 से० मी० के बीच, खाड़ी के द्वीपों में क्रमशः 7 से 11 से० मी० और उत्तरी लक्षद्वीप में 3 से० मी० वर्षा अंकित की गयी। इस मानचित्र में उत्तरी एवं उत्तरी-पश्चिमी भारत में वर्षा प्रायः नहीं के बराबर हुई है। यहाँ सबसे अधिक वर्षा झालावाड़ में 3 से० मी०, उदयपुर और जोधपुर में 1-1 से० मी० अंकित की गयी।

    वर्तमान में (6 जुलाई, 1973) को प्रातः 8.30 बजे) सारे पश्चिमी तट पर एवं खाड़ी द्वीपों में दूर-दूर तक वर्षा हो रही है। मुख्य पठार और उत्तरी बंगाल की खाड़ी में कहीं-कहीं वर्षा और बौछारें हो रही हैं, देश के शेष भागों में इस समय वर्षा प्रायः नहीं हो रही है।

(viii) समुद्र की दशा:-

     बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में समभार रेखाएँ पास-पास होने से यहाँ तेज पवन चल रही है। सागर में सभी स्थानों पर 20 से 25 नॉट के बीच पवन बह रहा है अतः सामान्य सागर की दशा भी प्रतिकूल है।

    अरब सागर में अशान्त (Rough) और बंगाल की खाड़ी में अति अशान्त (V. Rough) से उत्तंग तरंग गति (V. High) के बीच सागर दशा अंकित की गयी है। यद्यपि अरब सागर में केवल एक स्थान पर और बंगाल की खाड़ी में दो स्थानों पर ही सागर की दशा अंकित की गयी है। परन्तु इसमें ही सागर की दशा का स्पष्ट आभास हो जाता है।

(ix) अधिकतम तापमान का सामान्य दशा से विचलन (सायं 5.30 बजे):-

     दक्षिण-पश्चिम के लघु मानचित्र के अनुसार अधिकांश दक्षिणी और उत्तरी-पश्चिमी भारत में अधिकतम तापमान औसत से कम अंकित किये गये। सबसे कम -4°C उत्तरी आन्ध्र प्रदेश, पश्चिमी कश्मीर और निकटवर्ती पाकिस्तान में अंकित किये गये। औसत से अधिक तापमान +4°C हाड़ौती (राजस्थान) और मालवा (मध्य प्रदेश) एवं उत्तरी-पूर्वी उत्तर प्रदेश में अंकित किये गये।

    अधिकतम औसत या 0°C विचलन वाली समताप रेखा देश की तीन स्थानों से होकर गुजरती है। पहली दक्षिणी-पश्चिमी कर्नाटक से केरल होती हुई श्रीलंका की तरफ चली गयी है। दूसरी सौराष्ट्र, पूर्वी गुजरात, उत्तरी महाराष्ट्र, उत्तरी-पूर्वी मध्य प्रदेश, उड़ीसा और दक्षिणी-पश्चिमी बंगाल होती हुई खाड़ी की ओर मुड़ गयी है और तीसरी पाकिस्तान से पश्चिमी व उत्तरी राजस्थान की सीमा से पूर्व की ओर मुड़कर पश्चिम उत्तर प्रदेश से हिमालय की ओर मुड़ गयी है। इस प्रकार औसत अधिकतम तापमान की दशा इस समय प्रायः विषम है।

(x) न्यूनतम तापमान का औसत दशा से विचलन (प्राय: 8.30 बजे):-

     दक्षिण-पश्चिम के लघु मानचित्र के अनुसार देश के अधिकांश मध्यवर्ती, उत्तरी-पूर्वी और सुदूर पूर्वी भागों में न्यूनतम तापमान औसत से अधिक से अधिक और शेष दक्षिण पठार और उत्तरी-पश्चिम भारत में औसत से कम तापमान अंकित किये गये हैं।

     औसत दशा से कहीं भी +2℃ या -2°C से अधिक का विचलन नहीं पाया जाता। अधिकांश दक्षिणी पठार और मध्यवर्ती भारत में यह विचलन इससे भी कम है। औसत तापमान रेखा रेखा सर्वाकार मार्ग से प्रथम उत्तर से दक्षिण की ओर जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात एवं महाराष्ट्र होकर पुनः उत्तर-पूर्व की ओर कर्नाटक, महाराष्ट्र, पूर्वी मध्य प्रदेश, उड़ीसा, उत्तरी बंगाल व बंग्लादेश होती हुई सुदू पूर्व की ओ चली गयी है।

34. Climograph and Hythergraph

Climograph and Hythergraph



क्लाइमोग्राफ

         Climograph का आविष्कार सर्वप्रथम ग्रिफिथ टेलर महोदय ने किया था।

Climograph X-अक्ष पर Relative Humidity (सापेक्षिक आर्द्रता) को और Y-अक्ष पर Wet Bulb Temperature (आर्द्र बल्ब तापमान) को ध्यान में रखकर मानचित्र या ग्राफ बनाया जाता है।

इंग्लैण्ड के निवासी औपनिवेशिक काल में Climograph का उपयोग वैश्विक स्तर पर निवास करने योग्य स्थान के निर्धारण में किया कर‌ते थे।

जबकि हीदरग्राफ का प्रयोग स्थानीय स्तर पर निवास करने योग्य स्थान का निर्धारण किया करते थे।

प्रश्न 1. क्लाइमोग्राफ (Climograph) के अभिप्राय को समझाते हुए दिए आँकड़ों के आधार पर भोजपुर का क्लाइमोग्राफ बनाइए।

 

Months JAN. FUB. MAR. APR. MAY. JUN. JUL. AUG. SEP. OCT. NOV. DEC.
आर्द्र-वल्ब तापमान (0°C) 13 15 17 19 22 24 26 25 23 20 18 14
आपेक्षिक आर्द्रता 40 30 14 10 12 42 71 74 74 60 42 40

उत्तर-

       Climograph का आविष्कार सर्वप्रथम ग्रिफिथ टेलर महोदय ने किया था। इनके द्वारा क्लाइमोग्राफ का विकास शीत कटिबन्ध में निवास करने वाले यूरोपियों के लिए उष्ण कटिबन्ध में निवास करने की संभावना को ध्यान में रख कर किया गया।

     इससे किसी स्थान के आर्द्र बल्ब तापमान (Wet bulb temperature) तथा प्रतिशत में सापेक्षिक आर्द्रता (Relative humidity) की आवश्यकता होती है इन्हीं दोनों आँकड़ों की सहायता से ग्राफ पेपर पर स्केल के अनुसार x-अक्ष पर सापेक्षिक आर्द्रता तथा y-अक्ष पर आर्द्र बल्ब तापमान को प्रदर्शित करके, प्रत्येक महीना के लिए निर्देशांक से 12 बिन्दु प्राप्त करके उन्हें क्रम से रेखा में मिला देते हैं। इससे क्लाइमोग्राफ का निर्माण हो जाता है।

     टेलर महोदय ने एक निवास्यता मापक्रम का भी निर्माण किया है। जिससे हमें वहाँ की जलवायु सुखद है या दुःखद है, इसका भी आसानी से ग्राफ देखकर पता चलता है।

निवास्यता मापक्रम (Hability Scale)

क्रम सुखद या दुःखद के प्रकार तापमान
1. अत्यल्प दुःखद (Very rarely uncomfortable) 40° से 45° F (4° से 7° C)
2. आदर्श (Ideal) 45° से 55° F (7° से 13° C)
3.

अत्यल्प दुःखद (Very rarely uncomfortable)

55° से 60° F (13° से 16° C)
4. बहुधा दुःखद (Sometimes uncomfortable) 60° से 70° F (16° से 19° C)
5.

बहुधा दुःखद (Often comfortable)

65° से 70° F (19° से 21° C)
6. हमेशा दुःखद (Usually uncomfortable) 70° से 75° F (21° से 24° C)

          टेलर ने कुछ विशेष प्रकार की जलवायु को भी दर्शाया है जो क्लाइमोग्राफ के चारों कोनों पर होता है। इसके चार प्रकार हैं:

1. झुलसता हुआ (SCORCHING):-

        NW कोने पर, आर्द्र बल्ब तापमान 60° F से अधिक तथा सापेक्षिक आर्द्रता 40% से कम अर्थात् उष्ण-शुष्क जलवायु।

2. उमसदार (MUGGY):-

       NE कोने पर तापमान 60° F से अधिक तथा सापेक्षिक आर्द्रता 70% से अधिक अर्थात् उष्णार्द्र जलवायु।

3. शीतार्द्र (RAW):-

      SE कोने पर, तापमान 40° F से कम तथा सापेक्षिक आर्द्रता 70% से अधिक अर्थात् ठंडी आर्द्र जलवायु।

4. शीत-शुष्क (KEEN):-

       SW कोने पर, तापमान 40° F से कम तथा सापेक्षिक आर्द्रता 40% से कम अर्थात् शीत व शुष्क जलवायु।

    इस प्रकार क्लाइमोग्राफ की आकृतियों से विभिन्न स्थानों की जलवायु में भिन्नता का पता चलता है। जैसे- शुष्क क्षेत्रों के लिए क्लाइमोग्राफ की आकृति तकुए की भाँति होती है, भूमध्यसागरीय जलवायु हेतु विकर्ण तथा मानसूनी जलवायु हेतु उल्टे विकर्ण की आकृति बनती है। जिससे विभिन्न स्थानों की जलवायु का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है।

CLIMOGRAPH OF BHOJPUR

रचना विधि:

      एक ग्राफ कागज लेकर क्षैतिज रेखा खींचा जो X-अक्ष हुआ। इस पर समान दूरी के अंतर पर आपेक्षिक आर्द्रता के आँकड़ों के अनुसार मापनी निश्चित कर 0, 10, 20, 30, 40, 50, 60, 70, 80 लिखा। इसके नीचे मोटे अक्षरों में RELATIVE HUMIDITY (In %) लिख दिया। X-अक्ष पर लंब डाला और Y-अक्ष बनाया। अब भोजपुर के आर्द्र बल्ब तापमान (Wet bulb Temperature) के आँकड़ों के अनुसार मापनी निश्चित कर 0, 10, 20, 30 व 40 लिखा तथा इसके समीप ही WET BULB TEMPERATURE (°C) लिख दिया।

    अब January के आर्द्र बल्ब तापमान 13°C और आपेक्षिक आर्द्रता 40% के आँकड़ों को मिलाते हुए सीधी रेखाएँ खीचीं। जिस बिन्दु पर ये दोनों रेखाएँ मिलती हैं उसे चिह्नित कर J लिखा। इसी प्रकार Febuary, March से November तथा December तक के आर्द्र बल्ब तापमान और आपेक्षिक आर्द्रता के आँकड़ों को मिलाते हुए खीचें बिन्दुओं पर क्रमशः F, M ……. N व D लिखा।

     अब सरल रेखा द्वारा January के बिन्दु को Febuary के बिन्दु से, Febuary के बिन्दु को March के बिन्दु से… November के बिन्दु को December के बिन्दु से तथा अंततः December के बिन्दु को January के बिन्दु से मिलाते हुए 12 रेखाएँ खींची। इस प्रकार प्राप्त 12 भुजी आकृति ही हमारा अभीष्ट Climograph होगा। Climograph के NW कोने पर SCORCHING, NE कोने पर MUGGY, SE कोने पर RAW तथा SW कोने पर KEEN लिख दिया।

Climograph



हीदरग्राफ

          हीदरग्राफ का निर्माण सर्वप्रथम टेलर महोदय ने किया था।

हीदरग्राफ में जलवायु के आँकड़े को प्रदर्शित किया जाता है।

हीदरग्राफ में X-अक्ष पर वर्षा और Y-अक्ष पर तापमान को दिखाया जाता है।

हीदरग्राफ का प्रयोग औपनिवेशिक काल में अँग्रेज लोग बड़े पैमाने पर किया करते थे।

हीदरग्राफ पर बहुत अधिक गर्म, बहुत अधिक ठण्डा, बहुत अधिक सूखा और बहुत अधिक आर्द्रता के साथ-2 अधिवासित होने के लिए उपयुक्त क्षेत्र को प्रदर्शित किया जाता था।

प्रश्न 1. हीदरग्राफ (Hythergraph) के अभिप्राय को समझाते हुए दिये गये आँकड़ों के आधार पर भोजपुर के हीदरग्राफ की रचना कीजिए।

Months JAN. FUB. MAR. APR. MAY. JUN. JUL. AUG. SEP. OCT. NOV. DEC.

औसत मासिक तापमान (0°C)

17 20 27 30 32 31 30 28 28 27 23 18
औसत मासिक वर्षा (cm) 2 2 1 1 3 12 28 25 18 5 1 1

उत्तर-

      हीदरग्राफ (Hydhergraph) एक ऐसा आरेख है जिसमें वर्षा और तापमान के सम्बन्धों एक साथ को प्रदर्शित किया जाता है। इसमें वर्षा तथा तापमान के मासिक वितरण को प्रदर्शित किया जाता है।

    इसमें क्षैतिज भुजा (X-axis) पर मिलीमीटर या इंचों में वर्षा और लम्बवत् भुजा (Y-axis) पर °F या °C में तापमान बताये जाते हैं। टेलर का हीदरग्राफ पहले के विद्वानों फास्टर व हटिंगटन द्वारा बनाया गया क्लाइमोग्राफ ही है। इसमें मासिक वर्षा और शुष्क तापमान को टेलर के क्लाइमोग्राफ की भाँति प्रतिमास अंकित कर बारह बिन्दु प्राप्त करते हैं। इन्हें आपस में जोड़कर बन्द आकृति बना दी जाती है।

     इसके द्वारा किसी स्थान विशेष की वर्षा और वाष्पीकरण के सम्बन्ध को समझाकर वास्तविक जल उपलब्धता को समझा जा सकता है। टेलर के हीदरग्राफ में तापमान और वर्षा की सीमा नहीं दी गई है। जिन भागों में गर्मियों में वर्षा होती है वाष्पीकरण भी अधिक होने से वास्तविक जल उपलब्धता तेजी से घटने लगती है।

HYTHERGRAPH OF BHOJPUR

रचना विधि:

     एक ग्राफ कागज लेकर आधार के समानांतर एक रेखा खींचा जो X-अक्ष होगा। इस अक्ष पर एक लंबवत् रेखा खींचा जो Y-अक्ष होगा। X-अक्ष पर औसत मासिक वर्षा के आँकड़ों के अनुसार समान दूरी के अंतर पर मापनी निश्चित करके 0, 5, 10, 15, 20, 25, 30 व 35 की संख्याएँ लिखीं। इनके नीचे मोटे अक्षरों में AVERAGE MONTHLY RAINFALL (CM) लिख दिया।

    अब Y-अक्ष पर औसत मासिक तापमान के आँकड़ों को आधार मानकर मापनी निश्चित करके 0, 5, 10, 15, 20, 25, 30 व 35 की संख्याएँ लिख दीं। इसके ऊपर मोटे अक्षरों में AVERAGE MONTHLY TEMPERATURE (°C) लिख दिया।

     अब January के तापमान 17°C और वर्षा 2 cm के आँकड़ों को मिलाते हुए रेखाएँ खींची। जहाँ ये दोनों रेखाएँ मिलती हैं, उस बिन्दु को चिह्नित क J लिखा। इसी प्रका Febuary, March….. November, December के तापमान एवं वर्षा के आँकड़ों के आधार पर 12 बिन्दु चिह्नित करके संबंधित बिन्दुओं क्रमशः F, M, N, तथा D लिखा।

      अब January के बिन्दु को सरल रेखा द्वारा Febuary के बिन्दु से, Febuary के बिन्दु को March के बिन्दु से November के बिन्दु को December के बिन्दु से तथा अंततः December के बिन्दु को January के बिन्दु से मिलाते हुए 12 भुजी बहुभुज बनाया जो अभीष्ट Hythergraph हुआ।

Bihar Board 12th Geography Model Paper 2025 (बिहार बोर्ड 12वीं भूगोल मॉडल पेपर 2025)

Bihar Board 12th Geography Model Paper 2025

(बिहार बोर्ड 12वीं भूगोल मॉडल पेपर 2025)


बिहार बोर्ड 12वीं भूगोल मॉडल पेपर 2025

Theory / सैद्धांतिक

खण्ड – अ / SECTION – A

वस्तुनिष्ठ प्रश्न / Objective Type Questions

प्रश्न संख्या 1 से 70 तक के प्रत्येक प्रश्न के लिए चार विकल्प दिए गए हैं, जिनमें से एक सही है। अपने द्वारा चुने गए सही विकल्प को OMR शीट पर चिह्नित करें। आपको 35 प्रश्नों के उत्तर देने हैं । 35 × 1 = 35

Question Nos. 1 to 70 have four options, out of which only one is correct. You have to mark your selected options on the OMR sheet. Only 35 questions are to be answered. 35 x 135

1. निम्नलिखित में से कौन मानव भूगोल का उपागम नहीं है?

(A) क्षेत्रीय विभिन्नता

(B) अन्वेषण और वर्णन

(C) स्थानिक संगठन

(D) मात्रात्मक क्रान्ति

Which of the following is not an approach to human geography?

(A) Areal differentiation

(B) Exploration and description

(C) Spatial organisation

(D) Quantitative revolution

उत्तर- (D) मात्रात्मक क्रान्ति

2. नवनिश्चयवाद की संकल्पना का प्रतिपादन किसने किया?

(A) अल्बर्ट डिमांजियाँ

(B) अल्फ्रेड हेटनर

(C) ग्रिफिथ टेलर

(D) फ्रेड्रिक रैटजेल

Who promulgated the concept of Neodeterminism?

(A) Albert Demangeon

(B) Alfred Hettner

(C) G. Taylor

(D) Friedrich Ratzel

उत्तर- (C) ग्रिफिथ टेलर

3. किसने कहा “मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच सम्बन्धों का संश्लेषित अध्ययन है”?

(A) रिटर

(B) रैटजेल

(C) एलन सी० सेम्पल

(D) टेलर

Who said “Human geography is the synthetic study of relationship between human societies and earth’s surface”?

(A) Ritter

(B) Ratzel

(C) Ellen C. Semple

(D) Taylor

उत्तर- (C) एलन सी० सेम्पल

4. व्यवहारवादी भूगोल, मानव भूगोल के किस क्षेत्र का उपक्षेत्र है?

(A) नगरीय भूगोल

(B) जनसंख्या भूगोल

(C) आर्थिक भूगोल

(D) सामाजिक भूगोल

Behavioural geography is a sub-field of which field of human geography?

(A) Urban geography

(C) Economic geography

(B) Population geography

(D) Social geography

उत्तर- (D) सामाजिक भूगोल

5. कृषि भूगोल, मानव भूगोल के किस क्षेत्र का उपक्षेत्र है?

(A) सामाजिक भूगोल

(B) जनसंख्या भूगोल

(C) आर्थिक भूगोल

(D) नगरीय भूगोल

Agriculture geography is a sub-field of which field of human geography?

(A) Social geography

(B) Population geography

(C) Economic geography

(D) Urban geography

त्तर- (C) आर्थिक भूगोल

निम्नलिखित में कौन विरल जनसंख्या वाला क्षेत्र है?

(A) पश्चिमी यूरोप

(B) दक्षिण-पूर्व एशिया

(C) उत्तर-पूर्व संयुक्त राज्य अमेरिका

(D) पश्चिमी आस्ट्रेलिया

Which of the following is sparsely populated region?

(A) Western Europe

(B) South East Asia

(C) North East United States of America

(D) Western Australia

त्तर- (D) पश्चिमी आस्ट्रेलिया

7. निम्नलिखित में कौन एक जन-स्थानान्तरण का प्रतिकर्ष कारक नहीं है?

(A) शैक्षणिक सुविधाएँ

(B) बेरोजगारी

(C) महामारियाँ

(D) जलाभाव

Which of the following is not a push factor of human migration?

(A) Educational facilities

(B) Unemployment

(C) Epidemics

(D) Water shortage

उत्तर- (A) शैक्षणिक सुविधाएँ

8. जनसंख्या वृद्धि दर सर्वाधिक है

(A) अफ्रीका में

(B) एशिया में

(C) उत्तर अमेरिका में

(D) दक्षिण अमेरिका में

The highest growth rate of population is in

(A) Africa

(B) Asia

(C) North America

(D) South America

उत्तर- (A) अफ्रीका में

9. निम्नलिखित देशों में किसका लिंगानुपात विश्व में सबसे कम है?

(A) संयुक्त अरब अमीरात

(B) भारत

(C) फ्रांस

(D) इनमें से कोई नहीं

Which of the following countries has the lowest sex-ratio in the world?

(A) United Arab Emirates

(B) India

(C) France

(D) None of these

उत्तर- (D) इनमें से कोई नहीं (लैटविया)

10. निम्नलिखित संख्या में कौन जनसंख्या के कार्यशील आयु वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है?

(A) 15 से 59

(B) 15 से 60

(C) 18 से 60

(D) 18 से 65

Which of the following figures represents the working age group of

population ?

(A) 15 to 59

(B) 15 to 60

(C) 18 to 60

(D) 18 to 65

उत्तर- (A) 15 से 59

11. निम्नलिखित में कौन मानव विकास सूचकांक का मापक है?

(A) स्वास्थ्य

(B) शिक्षा

(C) संसाधनों तक पहुँच

(D) इनमें से सभी

Which of the following is a measure of Human Development Index?

(A) Health

(B) Education

(C) Access to resources

(D) All of these

उत्तर- (D) इनमें से सभी

12. डॉ० महबूब-उल-हक मूल निवासी थे

(A) भारत के

(B) पाकिस्तान के

(C) इराक के

(D) अफगानिस्तान के

Dr. Mahbub ul Haq was the native of

(A) India

(B) Pakistan

(C) Iraq

(D) Afghanistan

उत्तर– (B) पाकिस्तान के

13. मानव विकास सूचकांक में विश्व के निम्नलिखित देशों में से किसकी कोटि उच्चतम है?

(A) जर्मनी

(B) नीदरलैंड

(C) नार्वे

(D) स्विट्जरलैंड

Which of the following countries of the world has the highest rank in the Human Development Index?

(A) Germany

(B) Netherlands

(C) Norway

(D) Switzerland

उत्तर- (C) नार्वे

14. निम्नलिखित में किसे कर्तन-दहन कृषि भी कहते हैं?

(A) रोपण कृषि

(B) सघन निर्वाह कृषि

(C) आदिम निर्वाह कृषि

(D) मिश्रित कृषि

Which among the following is also called slash and burn agriculture?

(A) Plantation farming

(B) Intensive subsistence farming

(C) Primitive subsistence farming

(D) Mixed farming

उत्तर- (C) आदिम निर्वाह कृषि

15. सहकारी कृषि अधिक सफल रही है

(A) स्वीडन में

(C) इटली में

(B) डेनमार्क में

(D) भारत में

Co-operative farming has been more successful in

(A) Sweden

(B) Denmark

(C) Italy

(D) India

उत्तर- (B) डेनमार्क में

16. कोको किस प्रकार की कृषि की उपज है?

(A) रोपण कृषि

(B) भूमध्यसागरीय कृषि

(C) प्रारम्भिक स्थानबद्ध कृषि

(D) मिश्रित कृषि

Cocoa is the product of which type of farming?

(A) Plantation farming

(B) Mediterranean farming

(C) Primitive sedentary farming

(D) Mixed farming

उत्तर- (A) रोपण कृषि

17. निम्नलिखित में कौन रोपण फसल है?

(A) राई

(B) गेहूँ

(C) कपास

(D) मक्का

Which of the following is a plantation crop?

(A) Rye

(B) Wheat

(C) Cotton

(D) Maize

त्तर- (C) कपास

18. निम्नलिखित में कौन द्वितीयक आर्थिक क्रियाकलाप है?

(A) खेती

(B) मछली पकड़ना

(C) व्यापार

(D) वस्त्र निर्माण

Which of the following is secondary economic activity?

(A) Farming

(B) Catching fish

(C) Trading

(D) Making garments

उत्तर- (D) वस्त्र निर्माण

19. निम्नलिखित में कौन कृषि आधारित उत्पाद नहीं है?

(A) चीनी

(B) नमक

(C) कॉफी

(D) चाय

Which of the following is not an agro based product?

(A) Sugar

(B) Salt

(C) Coffee

(D) Tea

उत्तर- (B) नमक

20. निम्नलिखित में से किस अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्वामित्व व्यक्तिगत होता है?

(A) पूँजीवादी

(B) समाजवादी

(C) मिश्रित

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर- (A) पूँजीवादी

In which of the following economies production is owned individually?

(A) Capitalistic

(B) Socialistic

(C) Mixed

(D) None of these

21. निम्नलिखित में कौन वन आधारित उद्योग है?

(A) लाख उद्योग

(B) चमड़ा उद्योग

(C) गंधक उद्योग

(D) इनमें से कोई नहीं

Which of the following is forest based industry?

(A) Lac industry

(B) Leather industry

(C) Sulphur industry

(D) None of these

उत्तर- (A) लाख उद्योग

22. निम्नलिखित में से कौन चतुर्थक आर्थिक क्रियाकलापों से सम्बन्धित है?

(A) पुस्तकों का मुद्रण

(B) संगणक विनिर्माण

(C) कागज और लुग्दी निर्माण

(D) विश्वविद्यालय शिक्षण

Which of the following is related to quaternary economic activities?

(A) Printing books

(B) Manufacturing computer

(C) Paper and pulp production

(D) University teaching

उत्तर- (D) विश्वविद्यालय शिक्षण

23. निम्नलिखित में कौन एक पंचम क्रियाकलाप है?

(A) खेती

(B) आखेट

(C) बाह्यस्रोतन

(D) व्यापार

Which of the following is a quinary activity?

(A) Farming

(B) Hunting

(C) Outsourcing

(D) Trade

उत्तर- विचारधाराओं की रचना

24. लम्बी दूरी तक भारी सामान ढोने के लिए कौन सबसे सस्ता परिवहन साधन है?

(A) सड़क परिवहन

(B) रेल परिवहन

(C) जल परिवहन

(D) वायु परिवहन

Which mode of transportation is the cheapest for transporting heavy goods for long distance?

(A) Roadways

(B) Railways

(C) Waterways

(D) Airways

उत्तर- (C) जल परिवहन

25. बृहद ट्रंक मार्ग सम्बन्धित है-

(A) उत्तर अटलांटिक समुद्री मार्ग से

(B) उत्तमाशा अन्तरीप समुद्री मार्ग से

(C) भूमध्यसागर-हिन्द महासागर मार्ग से

(D) उत्तर प्रशान्त समुद्री मार्ग से

Great Trunk route is related to

(A) the North Atlantic Ocean route

(B) the Cape of Good Hope Ocean route

(C) the Mediterranean-Indian Ocean route

(D) the North Pacific Ocean route

त्तर- (A) उत्तर अटलांटिक समुद्री मार्ग से

Note: उत्तरी अटलांटिक समुद्री मार्ग लोकप्रिय रूप से Big Trunk Route (बृहद ट्रंक मार्ग) के रूप में जाना जाता है। इसमें विश्व के विदेशी व्यापार का एक-चौथाई हिस्सा शामिल है।

26. बिग इंच पाइप लाइन परिवाहित करता है

(A) दूध

(B) जल

(C) पेट्रोलियम

(D) तरल पेट्रोलियम गैस (LPG)

Big Inch pipeline transports

(A) Milk

(B) Water

(C) Petroleum

(D) Liquid Petroleum Gas (LPG)

त्तर- (C) पेट्रोलियम

27. विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय कहाँ है?

(A) ब्रुसेल्स

(B) वियना

(C) जेनेवा

(D) न्यूयार्क

Where is the headquarters of World Trade Organisation?

(A) Brussels

(B) Vienna

(C) Geneva

(D) New York

त्तर- (C) जेनेवा

Note: इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है।

28. भारत एक सदस्य है

(A) साफ्टा का

(B) ओईसीडी का

(C) आसियान का

(D) ओपेक का

India is a member of

(A) SAFTA

(B) OECD

(C) ASEAN

(D) OPEC

त्तर- (C) आसियान का

29. यूरोपीय संघ (ई०यू०) का मुख्यालय कहाँ है?

(A) ब्रुसेल्स

(B) मिस्क

(C) जकार्ता

(D) वियना

Where is the headquarters of European Union (EU)?

(A) Brussels

(B) Minsk

(C) Jakarta

(D) Vienna

उत्तर- (A) ब्रुसेल्स 

30. लेनिनग्राद किस प्रकार का पत्तन है?

(A) विस्तृत पत्तन

(B) वाणिज्यिक पत्तन

(C) औद्योगिक पत्तन

(D) इनमें से कोई नहीं

Which type of port is Leningrad?

(A) Comprehensive port

(B) Commercial port

(C) Industrial port

(D) None of these

उत्तर– (C) औद्योगिक पत्तन

31. निम्नलिखित आर्थिक क्रियाओं में कौन नगरीय अधिवासों से सम्बन्धित है?

(A) द्वितीयक

(B) तृतीयक

(C) चतुर्थक

(C) औद्योगिक पत्तन

Which of the following economic activities is associated with urban settlements?

(A) Secondary

(B) Tertiary

(C) Quaternary

(D) All of these

उत्तर- (C) औद्योगिक पत्तन

32. पर्वतीय प्रदेशों में किस प्रतिरूप का अधिवास पाया जाता है?

(A) रैखिक

(13) वृत्ताकार

(C) सीढ़ीनुमा

(D) तारा

Which pattern of settlement is found in mountainous region?

(A) Linear

(B) Circular

(C) Terraced

(D) Star

त्तर- (C) सीढ़ीनुमा

33. निम्नलिखित में कौन नियोजित नगर है?

(A) लाहौर

(C) ढाका

(B) कैनबरा

(D) इनमें से कोई नहीं

Which of the following is a planned city ?

(A) Lahore

(B) Canberra

(C) Dhaka

(D) None of these

उत्तर– (B) कैनबरा

34. निम्नलिखित प्रदेशों में कौन सुप्रलेखित प्राचीनतम नगरीय बस्ती है?

(A) मेसोपोटामिया

(B) स्वाँग हो घाटी

(C) नील घाटी

(D) सिन्धु घाटी

Which of the following regions is the oldest well-documented urban settlement?

(A) Mesopotamia

(B) Hwang Ho valley

(C) Nile valley

(D) Indus valley

उत्तर- (A) मेसोपोटामिया

35. निम्नलिखित में कौन परिवहन नगर है?

(A) सिंगापुर

(B) अदीस अबाबा

(C) मक्का

(D) बीजिंग

Which of the following is a transport town?

(A) Singapore

(C) Mecca

(B) Addis Ababa

उत्तर- (A) सिंगापुर

36. 2011 की जनगणना के अनुसार किस राज्य का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है?

(A) बिहार

(B) पश्चिम बंगाल

(C) हरियाणा

(D) केरल

According to 2011 census which state has the highest density of population?

(A) Bihar

(B) West Bengal

(C) Haryana

(D) Kerala

उत्तर- (A) बिहार

Note: 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में बिहार सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है, यहाँ प्रति वर्ग किमी0 में 1106 लोग रहते हैं।

37. किस भाषा परिवार की जनसंख्या सबसे कम है?

(A) द्रविड

(B) आस्ट्रिक

(C) भारतीय-यूरोपीय

(D) चीनी-तिब्बती

Which linguistic family has the lowest population?

(A) Dravidian

(B) Austric

(C) Indo-European

(D) Sino-Tibetan

उत्तर- (D) चीनी-तिब्बती

38. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व था

(A) 482 व्यक्ति/वर्ग किमी

(B) 382 व्यक्ति/वर्ग किमी

(C) 324 व्यक्ति/वर्ग किमी

(D) 282 व्यक्ति/वर्ग किमी

According to 2011 census, the density of population of India was

(A) 482 persons/sq.km

(B) 382 persons/sq.km

(C) 324 persons/sq.km

(D) 282 persons/sa km

उत्तर- (B) 382 व्यक्ति/वर्ग किमी

39. भारत में पुरुष प्रवास की प्रमुख धारा है-

(A) नगरीय से नगरीय

(B) ग्रामीण से नगरीय

(C) ग्रामीण से ग्रामीण

(D) नगरीय से ग्रामीण

The main stream of male migration in India is

(A) urban to urban

(B) rural to urban

(C) rural to rural

(D) urban to rural

उत्तर- (D) नगरीय से ग्रामीण

40. मानव विकास सूचकांक, 2011 के संदर्भ में विश्व के देशों में भारत की निम्न में से कौन कोटि थी?

(A) 131

(B) 129

(C) 134

(D) 128

Which of the following was India’s rank in term of Human Development Index among the countries of the world in 2011?

(A) 131

(B) 129

(C) 134

(D) 128

उत्तर- (C) 134

41. मानव विकास सूचकांक में भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किसकी कोटि उच्चतम है?

(A) केरल

(B) तमिलनाडु

(C) हरियाणा

(D) पंजाब

Which of the following states of India has the highest rank in Human Development Index?

(A) Kerala

(B) Tamil Nadu

(C) Haryana

(D) Punjab

उत्तर– (A) केरल

42. निम्नलिखित केन्द्र शासित प्रदेशों में किसकी साक्षरता दर उच्चतम है?

(A) लक्षद्वीप

(B) दमन और दीव

(C) अंडमान और निकोबार

(D) चंडीगढ़

Which of the following union territories has the highest literacy rate?

(A) Lakshadweep

(B) Daman & Diu

(C) Andaman & Nicobar

(D) Chandigarh

उत्तर- (A) लक्षद्वीप

43. निम्नलिखित में कौन गैरिसन नगर है?

(A) मथुरा

(B) पटना

(C) जमशेदपुर

(D) उधमपुर

Which of the following is a garrison town?

(A) Mathura

(B) Patna

(C) Jamshedpur

(D) Udhampur

उत्तर- (D) उधमपुर

44. निम्नलिखित में कौन खनन नगर है?

(A) कानपुर

(B) अंबाला

(C) रानीगंज

(D) पुरी

Which of the following is a mining town?

(A) Kanpur

(B) Ambala

(C) Raniganj

(D) Puri

उत्तर- (C) रानीगंज

45. हरित क्रांति सम्बन्धित है-

(A) दूध उत्पादन से

(B) खाद्यान्न उत्पादन से

(C) चाय उत्पादन से

(D) इनमें से कोई नहीं

Green revolution is related to

(A) milk production

(B) food production

(C) tea production

(D) none of these

उत्तर- (B) खाद्यान्न उत्पादन से

46. निम्नलिखित में कौन भारतीय कृषि की समस्या है?

(A) अनियमित मानसून

(B) विखंडित जोत

(C) निम्न उत्पादकता

(D) इनमें से सभी

Which of the following is the problem of Indian agriculture?

(A) Erratic monsoon

(B) Fragmented landholdings

(C) Low productivity

(D) All of these

त्तर- (D) इनमें से सभी

47. निम्नलिखित में कौन रेशेदार फसल नहीं है?

(A) कपास

(B) जूट

(C) चाय

(D) मेस्टा

Which of the following is not a fibrous crop?

(A) Cotton

(B) Jute

(C) Tea

(D) Mesta

उत्तर- (C) चाय

48. निम्नलिखित में कौन फसल शुष्क कृषि से सम्बन्धित नहीं है?

(A) ज्वार

(B) बाजरा

(C) रागी

(D) गन्ना

Which of the following crops is not related to dry farming?

(A) Jawar

(B) Bajra

(C) Ragi

(D) Sugarcane

उत्तर- (D) गन्ना

49. निम्नलिखित में कौन खाद्य फसल है?

(A) कपास

(B) गन्ना

(C) चाय

(D) गेहूँ

Which among the following is a food crop?

(A) Cotton

(B) Sugarcane

(C) Tea

(D) Wheat

उत्तर- (D) गेहूँ

50. निम्नलिखित राज्यों में से कौन कॉफी उत्पादक है?

(A) कर्नाटक

(B) केरल

(C) तमिलनाडु

(D) इनमें से सभी

Which of the following states is a coffee producer?

(A) Karnataka

(B) Kerala

(C) Tamil Nadu

(D) All of these

उत्तर- (D) इनमें से सभी

51. निम्नलिखित में कौन भू-उपयोग संवर्ग नहीं है?

(A) परती भूमि

(B) निवल बोया गया क्षेत्र

(C) सीमांत भूमि

(D) कृषि योग्य व्यर्थ भूमि

Which of the following is not a land use category?

(A) Fallow land

(B) Net sown area

(C) Marginal land

(D) Cultivable waste land

उत्तर(C) सीमांत भूमि

52. निम्नलिखित में कौन भारत का सबसे लम्बा राष्ट्रीय महामार्ग है?

(A) एन०एच०-1

(B) एन०एच०-6

(C) एन०एच०-44

(D) इनमें से कोई नहीं

Which of the following is the longest National Highway of India?

(A) NH 1

(B) NH 6

(C) NH 44

(D) None of these

त्तर- (C) एन०एच०-44

Note NH-44 भारत का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी लंबाई 3745 किमी0 है जो उत्तर में श्रीनगर से दक्षिण में कन्याकुमारी तक जाती है।

53. जल है

(A) जैव संसाधन

(B) अजैव संसाधन

(C) अनवीकरणीय संसाधन

(D) इनमें से कोई नहीं

Water is

(B) Abiotic resource

(A) Biotic resource

(C) Non-renewable resource

(D) None of these

उत्तर- (B) अजैव संसाधन

54. निम्नलिखित नदियों में कौन पूर्व की ओर प्रवाहित नहीं होती है?

(A) कृष्णा

(B) कावेरी

(C) नर्मदा

(D) महानदी

Which of the following rivers does not flow towards the east?

(A) Krishna

(B) Kaveri

(C) Narmada

(D) Mahanadi

उत्तर- (C) नर्मदा

55. केन्द्र सरकार द्वारा चलाई गई “हरियाली प्रोजेक्ट” सम्बंधित है-

(A) वायु संरक्षण से

(B) जल संरक्षण से

(C) (A) और (B) दोनों

(D) इनमें से कोई नहीं

Central Government’s “Hariyali Project” is associated with

(A) air conservation

(B) water conservation

(C) both (A) and (B)

(D) none of these

उत्तर- (C) (A) और (B) दोनों

56. निम्नलिखित में कौन परम्परागत ऊर्जा स्रोत है?

(A) कोयला

(B) पेट्रोलियम

(C) प्राकृतिक गैस

(D) इनमें से सभी

Which of the following is a conventional source of energy?

(A) Coal

(B) Petroleum

(C) Natural gas

(D) All of these

उत्तर– (D) इनमें से सभी

57. हीराकुड परियोजना अवस्थित है-

(A) ओडिशा में

(B) छत्तीसगढ़ में

(C) मध्य प्रदेश में

(D) झारखंड में

Hirakud project is located in

(A) Odisha

(B) Chhattisgarh

(C) Madhya Pradesh

(D) Jharkhand

त्तर- (A) ओडिशा में

Note :- हीराकुद बाँध ओड़िशा में महानदी पर निर्मित एक बाँध है।

58. भंडारा मैंगनीज क्षेत्र किस राज्य में स्थित है?

(A) महाराष्ट्र

(B) ओडिशा

(C) छत्तीसगढ़

(D) मध्य प्रदेश

In which state is Bhandara manganese area located?

(A) Maharashtra

(B) Odisha

(C) Chhattisgarh

(D) Madhya Pradesh

उत्तर- (A) महाराष्ट्र

59. भारत में प्रथम नाभिकीय ऊर्जा परियोजना स्थापित की गई थी-

(A) कलपक्कम में

(B) तारापुर में

(C) नरोरा में

(D) कैगा में

The first atomic power project was established in

(A) Kalpakkam

(B) Tarapur

(C) Narora

(D) Kaiga

उत्तर- (B) तारापुर में

60. निम्नलिखित राज्यों में किसमें काकरापार नाभिकीय ऊर्जा केन्द्र अवस्थित है?

(A) महाराष्ट्र

(B) कर्नाटक

(C) गुजरात

(D) राजस्थान

In which of the following states is Kakrapar atomic power centre located?

(A) Maharashtra

(B) Karnataka

(C) Gujarat

(D) Rajasthan

उत्तर- (C) गुजरात

61. विजयनगर लौह-इस्पात केन्द्र अवस्थित है-

(A) आन्ध्र प्रदेश में

(B) तमिलनाडु में

(C) कर्नाटक में

(D) छत्तीसगढ़ में

Vijayanagar iron and steel centre is located in

(A) Andhra Pradesh

(B) Tamil Nadu

(C) Karnataka

(D) Chhattisgarh

उत्तर- (C) कर्नाटक में

62. प्रमुख तेल क्षेत्र स्थित है-

(A) पश्चिम बंगाल में

(B) बिहार में

(C) असम में

(D) तमिलनाडु में

Major oil fields are located in

(A) West Bengal

(B) Bihar

(C) Assam

(D) Tamil Nadu

त्तर- (C) असम में

63. निम्नलिखित में कौन उत्तर-पूर्वी रेल मंडल का मुख्यालय है?

(A) हाजीपुर

(B) गोरखपुर

(C) इलाहाबाद

(D) कोलकाता

Which of the following is the headquarters of North-Eastern Railway zone?

(A) Hajipur

(B) Gorakhpur

(C) Allahabad

(D) Kolkata

उत्तर- (A) हाजीपुर

64. नई औद्योगिक नीति की घोषणा कब की गई?

(A) 1987

(B) 1991

(C) 1993

(D) इनमें से कोई नहीं

When was the new industrial policy announced?

(A) 1987

(B) 1991

(C) 1993

(D) None of these

उत्तर- (B) 1991

65. भारत में वायु परिवहन सेवा की शुरुआत हुई

(A) 1911 में

(B) 1948 में

(C) 1921 में

(D) 1925 में

Air transport in India was introduced in

(A) 1911

(B) 1948

(C) 1921

(D) 1925

त्तर- (A) 1911 में

66. उत्तर-दक्षिण गलियारा जोड़ता है-

(A) जम्मु को तिरुवनन्तपुरम से

(B) बारामुला को कन्याकुमारी से

(C) श्रीनगर को नागरकोइल से

(D) श्रीनगर को कन्याकुमारी से

North-South corridor connects

(A) Jammu with Thiruvananthapuram

(B) Baramula with Kanyakumari

(C) Srinagar with Nagercoil

(D) Srinagar with Kanyakumari

उत्तर- (D) श्रीनगर को कन्याकुमारी से

67. निम्नलिखित में से कौन स्थलबद्ध पोताश्रय है?

(A) हल्दिया

(C) विशाखापट्नम

(B) मुंबई

(D) एन्नोर

Which of the following is a landlocked harbour?

(A) Haldia

(C) Vishakhapatnam

(B) Mumbai

(D) Ennore

उत्तर- (C) विशाखापट्नम

68. कांदला पत्तन अवस्थित है-

(B) गुजरात में

(A) महाराष्ट्र में

(C) गोवा में

(D) कर्नाटक में

Kandla port is located in

(A) Maharashtra

(B) Gujarat

(C) Goa

(D) Karnataka

उत्तर- (B) गुजरात में

69. दो देशों के मध्य व्यापार कहलाता है

(A) अन्तरराज्यीय व्यापार

(B) स्थानीय व्यापार

(C) बाह्य व्यापार

(D) अंतरराष्ट्रीय व्यापार

Trade between two countries is termed as

(A) interstate trade

(B) local trade

(C) external trade

(D) international trade

उत्तर- (D) अंतरराष्ट्रीय व्यापार

70. ध्वनि प्रदूषण का प्रमुख स्रोत है

(A) उद्योग

(B) मोटर वाहन

(C) लाउडस्पीकर

(D) इनमें से सभी

The main source of noise pollution is

(A) industry

(B) motor vehicle

(C) loudspeaker

(D) all of these

उत्तर- (D) इनमें से सभी



खंड- ब /Section- B 

Short Answer Type 2uestions

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न संख्या 1 से 20 लघु उत्तरीय हैं । किन्हीं 10 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक के लिए 2 अंक निर्धारित हैं। 10 x 2 = 20

Question Nos. 1 to 20 are Short Answer Type. Answer any 10 questions. Each question carries 2 marks. 10 x 2 = 20

1. नवनिश्चयवाद क्या है?

What is neodeterminism?

उत्तर- नवनिश्चयवाद- नवनियतिवाद की संकल्पना में यह बताया गया कि प्रकृति एवं मानव दोनों श्रेष्ठ है और दोनों ही एक-दूसरे के पूरक है। मानव के बिना प्रकृति अपने आप में अर्थहीन है जबकि प्रकृति के बिना मानव का अस्तित्व संभव नहीं है। नवनियतिवाद संकल्पना को विकसित करने का श्रेय अमेरिकी भूगोलवेता ग्रिफिथ टेलर को जाता है।

2. प्रवास से सम्बन्धित किन्हीं दो अपकर्ष कारकों का उल्लेख करें।

Mention any two pull factors related to migration.

उत्तर- प्रवास के अपकर्ष कारक- वे सभी कारक जो किसी स्थान पर जनसंख्या को बसने के लिए आकर्षित करता हो उसे प्रवास के अपकर्ष कारक कहते है। जैसे – बेहतर रोजगार के अवसर, रहन-सहन की अच्छी दशाएं, शांति व स्थायित्व, जीवन व संपत्ति की सुरक्षा तथा अनुकूल जलवायु इत्यादि।

3. मानव विकास के चार प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।

Name four main components of human development.

उत्तर- मानव विकास के चार प्रमुख घटक समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता और सशक्तिकरण है। जिस प्रकार किसी इमारत को स्तंभों का सहारा होता है ठीक उसी प्रकार मानव विकास के लिए भी ये सभी घटकों काफी महत्वपूर्ण होते हैं।

4. आयु-संरचना का क्या महत्व है?

What is the significance of age-structure?

उत्तर- आयु-संरचना का महत्व- आयु संरचना के द्वारा किसी भी देश में निवास करने वाले  विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की संख्या को प्रदर्शित किया जाता है। जनसंख्या संघटन का यह एक महत्वपूर्ण सूचक है, क्योंकि 15 से 59 आयु वर्ग के बीच जनसंख्या का बड़ा आकार एक विशाल कार्यशील जनसंख्या को इंगित करता है। 

5. मिश्रित कृषि की किन्हीं चार फसलों के नाम लिखिए।

Name any four crops of mixed farming.

उत्तर- मिश्रित कृषि की किन्हीं चार फसलों के नाम- 

(i) गेहूँ + सरसों,

(ii) मूंगफली + सूरजमुखी,

(iii) अरहर + मूंगफली,

(iv) बाजरा + उड़द

6.सामूहिक कृषि क्या है?

What is collective farming?

उत्तर- सामूहिक कृषि- वैसी कृषि प्रणाली जिसमें दो या दो से अधिक किसान परिवार के सदस्य मिल-जुलकर खेती या खेती संबंधित उद्योग व्यवसाय करते है ऐसी कृषि प्रणाली को सामूहिक खेती या सामूहिक कृषि कहा जाता है।

7. कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Distinguish between cottage industry and small scale industry.

उत्तर- कुटीर उद्योग- इस उद्योग में वस्तुओं का निर्माण स्थानीय कच्चे माले का प्रयोग करके घरों में किया जाता है। इसमें कम पूँजी की आवश्यकता होती है। इस उद्योग में गाँव में विकसित विविध शिल्प रंगाईछपाई, चटाइयाँमिट्टी के बर्तनईंटे, सोना, चाँदी के आभूषण बनाए जाते हैं। 

लघु उद्योग- इस उद्योग में थोड़ी-सी पूँजी द्वारा छोटी-छोटी मशीनों की सहायता से वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। इस उद्योग में खिलौनेजूते, रेडियोटी. वी., घड़ी के पूर्जे आदि का निर्माण होता है।

8. कच्चे मालों के आधार पर उद्योगों को वर्गीकृत कीजिए।

Classify industries on the basis of raw materials.

उत्तर- कच्चे मालों के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण-

(i) कृषि आधारित उद्योग- इसमें कच्चा माल कृषि उत्पाद से प्राप्त होता है, जैसे- सूती वस्त्र उद्योग।

(ii) खनिज आधारित उद्योग- इसमें कच्चा माल खनिजों से प्राप्त होता है, जैसे- लोह-इस्पात उद्योग।

(iii) वन आधारित उद्योग- इसमें कच्चा माल वनों से प्राप्त होता है, जैसे- कागज उद्योग।

9. चार तृतीयक आर्थिक क्रियाकलापों का उल्लेख कीजिए।

Mention four tertiary economic activities.

उत्तर- चार तृतीयक आर्थिक क्रियाकलापों का नाम- व्यापार, परिवहन, संचार और सेवाएँ

10. राइन जलमार्ग के किन्हीं चार महत्व का उल्लेख करें।

Mention any four importances of the Rhine waterways.

उत्तर- राइन जलमार्ग के चार महत्व-

(i) राईन नदी स्विट्जरलैंड से फ्रांस की पूर्वी सीमा होती हुई जर्मनी और नीदरलैंड्स तक बहती है।

(ii) राईन जलमार्ग के कारण फ्रांस, बेल्जियम और नीदरलैंड जैसे कई अन्य औद्योगिक एवं व्यापारिक देशों का सम्पर्क अटलांटिक से सीधे हो गया है।

(iii) बेसल से रोटरडम तक इसकी लंबाई 700 किलोमीटर है।

(iv) यह पूरा बेसिन आर्थिक रूप से समृद्ध है, राईन के तट पर ड्यूसेलडर्फ क्षेत्र की औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों की जान है।

11. भारत के किन्हीं दो व्यावसायिक संवर्गों का उल्लेख करें।

Mention any two occupational categories of India.

उत्तर- दो व्यावसायिक संवर्गों- बैंकिंग, बीमा, परिवहन, भण्डारण एवं संप्रेषण सेवाएँ। (कोई दो) 

12. कायिक घनत्व क्या है?

What is physiological density?

उत्तर- कायिक घनत्व- किसी क्षेत्र के कुल जनसंख्या तथा उसी क्षेत्र के निवल कृषित क्षेत्र के अनुपात को कायिक घनत्व कहा जाता है।

13. भारत के चार प्रमुख लौह-इस्पात उद्योग केन्द्रों के नाम लिखें।

Name four important centres of iron and steel industry of India.

उत्तर- भारत के चार प्रमुख लौह-इस्पात उद्योग केन्द्रों के नाम-

(i) भिलाई इस्पात कारखाना- छत्तीसगढ़

(ii) दुर्गापुर इस्पात कारखाना- पश्चिम बंगाल

(iii) राउरकेला इस्पात कारखाना- ओड़िसा

(iv) बोकारो इस्पात कारखाना- झारखंड

14. भारत के चार प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केन्द्रों के नाम लिखिए।

Name four important nuclear power centres of India.

उत्तर- भारत के चार प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केन्द्रों के नाम-

(i) तारापुर (महाराष्ट्र)

(ii) रावतभाटा (राजस्थान)

(iii) कलपक्कम (तमिलनाडु)

(iv) नरोरा (उत्तर प्रदेश)

15. सतत् पोषणीय विकास की संकल्पना को परिभाषित कीजिए।

Define the concept of sustainable development.

उत्तर- सतत्पोपणीय विकास का तात्पर्य ऐसा विकास से है जिसमें भविष्य में आने वाली पीढ़ियाँ की आवश्यकता पूर्ति को प्रभावित किए बिना वर्तमान पीढ़ी द्वारा अपनी आवश्यकता की पूर्ति की जाती है। अर्थात सतत्पोपणीय विकास एक बहुआयामी संकल्पना है और अर्थव्यवस्था, समाज तथा पर्यावरण में सकारात्मक व अनुत्क्रमीय परिवर्तन का द्योतक है।

16.  सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Write a short note on drought-prone area programme.

उत्तर- सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम-

        यह कार्यक्रम चौथी पंचवर्षीय योजना में शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सूखा प्रवण क्षेत्रों में गरीब ग्रामीण लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना तथा सूखे के प्रभाव को कम करना था। इसमें समन्वित विकास पर विशेष जोर दिया गया था। ये कार्यक्रम सिंचाई परियोजनाओं, भूमि विकास कार्यक्रम, वनारोपण, घास भूमि विकास, ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युतीकरण और अवसंरचनात्मक विकास कार्यक्रम से सम्बन्धित थे।

17. भारत के पश्चिमी तट पर स्थित चार समुद्री पत्तनों के नाम लिखिए।

Name four seaports situated on the western coast of India.

उत्तर- भारत के पश्चिमी तट पर स्थित चार समुद्री पत्तनों के नाम-

(i) कांडला पोर्ट

(ii) जवाहरलाल नेहरू पोर्ट

(iii) मुंबई पोर्ट

(iv) मोरमुगाओ पोर्ट

18. स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग पर टिप्पणी लिखिए।

Write a note on Golden Quadrilateral Highway.

उत्तर- वर्ष 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के चार बड़े महानगरों अर्थात् दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा चेन्नई को चार से छह लेन वाले राजमार्गों के नेटवर्क से जोड़ने की एक योजना बनाई। चूँकि यह राजमार्ग मानचित्र पर देखे जाने पर चतुर्भुज आकार का दिखता है, इसी कारण से इस राजमार्ग को स्वर्णिम चतुर्भुज कहा जाता है

19. पाइप लाइन परिवहन के लाभ का उल्लेख कीजिए।

Mention the advantage of pipeline transportation.

उत्तर- लाभ-

(i) पाइप लाइनों गैसों एवं तरल पदार्थों के लंबी दूरी तक परिवहन हेतु अत्यधिक सुविधाजनक एवं सक्षम परिवहन प्रणाली है।

(ii) इनके द्वारा ठोस पदार्थों को भी घोल या गारा में बदल कर परिवहित किया जा सकता है।

20. भू-निम्नीकरण से आप क्या समझते हैं?

What do you mean by land degradation?

उत्तर- भूमि निम्नीकरण- भूमि निम्नीकरण से तात्पर्य मानव प्रेरित या प्राकृतिक प्रक्रिया से है, जो किसी भी पारितंत्र में भूमि को प्रभावशाली ढंग से कार्य करने की क्षमता को घटा देती है अर्थात् भूमि की उत्पादकता में कमी आ जाती है। फसलों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन घट जाता है। किसानों को इससे काफी आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। वनों और चरागाहों की उत्पादकता भी काफी घट जाती है।



दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

Long Answer Type Questions

प्रश्न संख्या 21 से 26 दीर्घ उत्तरीय हैं। किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दें । प्रत्येक के लिए 5 अंक निर्धारित हैं। 3 x 5 = 15

Question Nos. 21 to 26 are Long Answer Type. Answer any three questions. Each question carries 5 marks. 3 x 5-15

21. विस्तृत वाणिज्यिक कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

Describe the characteristics of extensive commercial farming.

उत्तर- विस्तृत वाणिज्यिक कृषि की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-

(i) इस प्रकार की कृषि विस्तृत भू-जोतों पर की जाती है।

(ii) इनका क्षेत्रफल प्राय: 240 से 1600 हैक्टेयर तक होता है।

(iii) इस कृषि में खेत तैयार करने से फसल काटने तक का सभी कार्य मशीनों के द्वारा किया जाता है।

(iv) इस प्रकार की खेती के लिए ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, श्रेसर, कम्बाईन, विनोअर आदि मुख्य यंत्र हैं।

(v) इस प्रकार की कृषि की मुख्य फसलें गेहूँ, जौ, जई, राई, तिलहन आदि बोई जाती है।

(vi) खाद्यान्नों को सुरक्षित रखने के लिए बड़े-बड़े माल गोदाम बनाए जाते हैं।

(vii) इस कृषि में मानवीय श्रम का उपयोग न्यूनतम होता है।

(viii) इस कृषि में प्रति हेक्टेयर उपज कम तथा प्रति व्यक्ति उपज अधिक होती है।

(ix) इस प्रकार की कृषि शीतोष्ण कटिबन्धीय घास के मैदानों में की जाती है।

(x) यूरेशिया के स्टेपीज, उत्तरी अमेरिका के प्रेयरीज, अर्जेन्टाइना के पम्पास, दक्षिणी अफ्रीका के वेल्डस, आस्ट्रेलिया के डाउन्स तथा न्यूजीलैंड के कैंटरबरी के मैदानों में इस प्रकार की कृषि की जाती है।

(xi) इस कृषि के क्षेत्रों में निरन्तर जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि क्षेत्र निरन्तर घटता जा रहा है।

(xii) इस प्रकार की कृषि करने वाले सभी देश विकसित हैं।

(xiii) यह कृषि यंत्रीकृत व उच्च तकनीक पर आधारित कृषि है।

22. विश्व में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारकों की विवेचना कीजिए। 

Discuss the geographical factors influencing the distribution of population in the world.

उत्तर- जनसंख्या वितरण एवं घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है:-

(A) भौगोलिक कारक-
(i) जल की उपलब्धता-
      जल जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है। अतः लोग उन क्षेत्रों में बसने को प्राथमिकता देते हैं जहाँ जल आसानी से उपलब्ध होता है। यही कारण है कि नदी-घाटियाँ विश्व के सबसे सघन घने बसे हुए क्षेत्र हैं।
(ii) भू-आकृति- 
    लोग समतल मैदानों और मंद ढालों पर बसने को वरीयता देते हैं क्योंकि ऐसे क्षेत्र फसलों के उत्पादन सड़क, निर्माण और उद्योगों के लिए अनुकूल होते हैं। गंगा का मैदान विश्व के सर्वाधिक सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों में से एक है जबकि हिमालय के पर्वतीय भाग विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र हैं।
(iii) जलवायु-     
      अति उष्ण अथवा ठंडे मरुस्थलों की विषम जलवायु मानव बसाव के लिए सुविधाजनक नहीं होती है अर्थात सुविधाजनक जलवायु वाले क्षेत्र जिनमें अधिक मौसमी परिवर्तन नहीं होते वहाँ अधिक लोगों का बसाव होता है।
(iv) मृदाएँ-
      कृषि तथा इससे संबंधित क्रियाओं के लिए उपजाऊ मृदाओं का महत्वपूर्ण है इसीलिए उपजाऊ दोमट मिट्टी वाले प्रदेशों में अधिक लोगों का निवास होता है क्योंकि यह मृदाएँ गहन कृषि का कार्य के लिए उपयुक्त होती है।
(B) आर्थिक कारक-
(i) खनिजों की उपस्थिति-
      खनिजों से युक्त क्षेत्र उद्योगों को आकृष्ट करते हैं क्योंकि खनन और औद्योगिक गतिविधियाँ रोजगार उत्पन्न करते हैं। अतः कुशल एवं अर्ध कुशल कर्मी इन क्षेत्रों में पहुँचते हैं और जनसंख्या को सघन बना देते हैं।
(ii) नगरीकरण-
      नगर रोजगार के बेहतर अवसर, शैक्षणिक व चिकित्सा संबंधी सुविधाएँ तथा परिवहन और संचार के बेहतर साधन प्रस्तुत करते हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास होता है। इस प्रकार नगर के आकार में वृद्धि होती है।
(iii) औधोगिकरण-
       औद्योगिक पेटियाँ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती है और बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करती है। इनमें केवल कारखानों के श्रमिक ही नहीं होते बल्कि परिवहन परिचालक, दुकानदार, बैंक कर्मी, डॉक्टर, अध्यापक तथा अन्य सेवाएँ उपलब्ध कराने वाले भी होते हैं।
(C) सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक-      
        कुछ स्थान धार्मिक अथवा सांस्कृतिक महत्व के कारण अधिक लोगों को आकर्षित करते हैं। ठीक इसी प्रकार लोग उन क्षेत्रों को छोड़कर चले जाते हैं जहाँ सामाजिक और राजनीतिक अशांति होती है। कई बार सरकारें लोगों को विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में बसने अथवा भीड़-भाड़ वाले स्थानों से चले जाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

23. अन्तरराष्ट्रीय व्यापार में पनामा नहर मार्ग के महत्त्व का वर्णन कीजिए।

Describe the importance of the Panama canal route in international trade.

उत्तर- अन्तरराष्ट्रीय व्यापार में पनामा नहर मार्ग के महत्त्व-

          पनामा नहर को विस्तार के बाद 26 जून 2016 को विशाल जहाजों के लिए खोल दिया गया। इसके विस्तार पर करीब 5.4 अरब डॉलर खर्च हुए। चीन के एक विशाल जहाज का कास्को शिपिंग पनामा ने इस विस्तारित नहर का उ‌द्घाटन किया। करीब 9000 कंटेनरों के साथ जहाज ने नहर में प्रवेश किया। नहर में पहले की तुलना में 3 गुना ज्यादा बड़े जहाज गुजर सकेंगे। इससे पनामा नहर प्राधिकरण को 2021 तक सालाना लगभग 2.1 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

      अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच की दूरी इस नहर से होकर गुजरने पर तकरीबन 8,000 मील घट जाती है क्योंकि इसके ना होने की स्थिति में जलयानों को दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर केप हॉर्न अंतरीप से होकर चक्कर लगाते हुए जाना पड़ता था। पनामा नहर को पार करने में जलयानों को 8 घंटे का समय लगता है।

Panama Canal

       इस नहर के द्वारा समुद्री मार्ग से न्यूयॉर्क एवं सैन फ्रांसिस्को के मध्य लगभग 13000 किलोमीटर की दूरी कम हो गई है। इसी प्रकार पश्चिमी यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तट, उत्तर पूर्वी और मध्य संयुक्त राज्य अमेरिका और पूर्वी तथा दक्षिण पूर्वी एशिया के मध्य की दूरी बेहद कम हो गई है।

      पनामा नहर जल मार्ग से होकर विश्व के लगभग 5% से अधिक जहाज गुजरते हैं। इस नहर द्वारा अमेरिका, कनाडा, पश्चिमी यूरोप, चीन, कोरिया, और दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों की कंपनियों द्वारा ऑटोमोबाइल, खाद्य पदार्थ, वस्त्र, दवाइयाँ, रसायन, मशीनरी, कोयला, पेट्रोलियम आदि विभिन्न उत्पादों का परिवहन किया जाता है। इस नहर का अधिकतम उपयोग अमेरिकी जलयान करते हैं जो चीन, जापान, कोलंबिया तथा साउथ कोरिया को जाते हैं।

24. भारतीय कृषि की समस्याओं की विवेचना कीजिए।

Discuss the problems of Indian agriculture.

उत्तर- भारत एक कृषि प्रधान देश है, परन्तु यहाँ कृषि की दशा संतोषजनक नहीं है। भारत की जनसंख्या का लगभग 70% भाग कृषि कार्य में लगा हुआ है लेकिन इसके उपरान्त भी भारतीय कृषक की दशा अच्छी नहीं है। 

        भारतीय किसान कृषि कार्य को एक व्यवसाय के रूप में नहीं करता है, बल्कि जीविकोपार्जन के लिए करता है। कृषि की पुरानी विधियों, पूँजी की कमी, भूमि सुधार की कमी, विपणन एवं वित्त सम्बन्धी कठिनाइयों आदि के कारण भारतीय कृषि की उत्पादकता अत्यन्त न्यून है। भारतीय कृषि की कुछ प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं-

(i) भूमि पर जनसंख्या का निरन्तर बढ़ता हुआ भार:-

 भारत में जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है, अतः भूमि पर जनसंख्या का भार निरन्तर बढ़ता जा रहा है। जनसंख्या वृद्धि के कारण प्रतिव्यक्ति उपलब्ध भूमि का औसत कम होता जा रहा है।

(ii) भूमि का असमान वितरण:-

       भारत में भूमि का वितरण बहुत ही असमान एवं असन्तुलित है। देश में आज भी 62 प्रतिशत कृषि भूमि केवल 10 प्रतिशत किसानों के पास है तथा शेष 38 प्रतिशत भाग ही 90 प्रतिशत किसानों के पास है। 

(iii) कृषि जोतों का बिखराव एवं भूमि का विभाजन:-

         भारत में उत्तराधिकार के नियमों के कारण भूमि का बंटवारा होता रहता है। इस कारण खेतों का आकार बहुत छोटा हो गया है। छोटे-छोटे खेत एक स्थान पर न होकर अनेक स्थानों पर बिखरे हुए रहते हैं। इस कारण आधुनिक यंत्रों के द्वारा उन्नत कृषि नहीं की जा सकती है।

(iv) कृषि की न्यून उत्पादकता:-

        1970 तक देश के अधिकांश भागों में औसत उत्पादन स्तर अधिकांश विकसित व कई विकासशील देशों (मैक्सिको, ब्राजील, फिलीपीन्स) से भी काफी कम रहा, लेकिन अब हरित क्रांति एवं सरकारी प्रयत्नों से स्थिति में कुछ सुधार अवश्य हुआ है।

(v) सिंचाई के साधनों की कमी:-

       भारतीय कृषि अधिकतर मानसूनी वर्षा पर ही निर्भर है और मानसून हमेशा अनियमित बना रहता है।

(vi) कृषि आदानों का अभाव:-

       भारतीय कृषकों के पास कृषि आदानों (कृषि सामाग्रियों) का हमेशा अभाव बना रहता है, जिससे वे अच्छे बीज, खाद, सिंचाई, कृषि यंत्र आदि का उपयोग नहीं कर पाते हैं। 

(vii) साख सुविधाओं की कमी:-

        भारतीय कृषकों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, इस कारण उनके सामने हमेशा आर्थिक संकट बना रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में साख-सुविधाओं का आज भी अभाव है। अतः कृषकों को वित्त पूर्ति के लिए गांव के महाजन एवं साहूकारों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। 

(viii) मृदा अपरदन:-

        मृदा अपरदन के कारण कृषि भूमि को क्षति पहुंचती है, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है। 

(ix) धार्मिक एवं सामाजिक कारण:-

      भारतीय कृषक भाग्यवादी एवं अंधविश्वासी होता है। वह कृषि के विकास पर व्यय करने की अपेक्षा शादी, मृत्यु-भोज, सामाजिक रीति-रिवाजों व त्योहारों पर अपनी क्षमता से अधिक खर्च करता है। 

(x) कृषि बीमा का अभाव:-

        भारत में कृषि बीमा का अभाव है। किसानों को किसी-किसी वर्ष बाढ़, सूखा एवं विभिन्न प्रकार के कृषि रोगों से कृषि उत्पादन में भारी क्षति उठानी पड़ती है, यहाँ तक कि उस आय से वह उत्पादन का खर्च भी प्राप्त नहीं कर पाता और उनकी स्थिति इतनी दयनीय हो जाती है कि वे आत्महत्या तक के लिए विवश हो जाते हैं। 

(xi) विपणन व्यवस्था का अभाव:-

         विपणन व्यवस्था का अभाव भारतीय किसान की एक महत्वपूर्ण समस्या है, क्योंकि इसके अभाव में किसान को अपने फसल उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त नहीं हो पाता है। 

25. भारत में लौह अयस्क के वितरण का विवरण दीजिए।

Give an account of the distribution of iron ore in India.

उत्तर- भारत में लौह अयस्क प्रायः सभी राज्यों में पाया जाता है परन्तु यहाँ के कुल भण्डार का 96% कर्नाटक, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, गोवा, झारखण्ड, राज्यों में सीमित है। शेष भण्डार तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश, महाराष्ट्र एवं अन्य राज्यों में अवस्थित है। भारत में 1950-51 में 42 लाख टन लोहे का उत्पादन हुआ जो 2004-05 में बढ़कर 1427.1 लाख टन हो गया। अतः लोहे के उत्पादन में भारी विकास हुआ है।

        कर्नाटक राज्य भारत का लगभग एक-चौथाई लोहा उत्पादन करता है। यहाँ बेल्लारी, हास्पेट, सुदूर क्षेत्रों में लौह अयस्क की खानें हैं।
         
      छत्तीसगढ़ देश का दूसरा उत्पादन राज्य है जो देश का करीब 20 प्रतिशत लोहा उत्पन्न करता है। दाँतेवाड़ा जिले का बैलाडिला तथा दुर्गा जिले के डल्ली एवं राजहरा प्रमुख उत्पादक हैं। रायगढ़, विलासपुर तथा सरगुजा अन्य उत्पादक जिले हैं। यहाँ का अधिकांश लोहा विशाखापट्नम बंदरगाह से जापान को निर्यात किया जाता है।
           
        उड़ीसा देश का 19 प्रतिशत लोहा उत्पादन करता है। यहाँ की प्रमुख खानें गुरु माहिषानी, बादम पहाड़ (मगूरगंज) एवं किरिबुरू हैं।
         
        गोवा देश का चौथा बड़ा लोहा उत्पादक राज्य है तथा 16 प्रतिशत देश का लोहा यहीं से प्राप्त होता है। यहाँ की प्रमुख खाने साहक्वालिम, संग्यूम, क्यूपेम, सतारी, पौडा एवं वियोलिम में स्थित हैं। यहाँ के मर्मागांव पतन से लोहा निर्यात किया जाता है।
           
      झारखण्ड देश का पांचवां बड़ा अयस्क उत्पादक राज्य है और 15 प्रतिशत से अधिक लोहे का उत्पादन करता है। यहाँ के सिंहभूम, पलामू, धनबाद, हजारीबाग, लोहरदगा तथा राँची मुख्य उत्पादक जिले हैं।
   
       महाराष्ट्र में लौह अयस्क की खाने चन्द्रपुर, रत्नागिरि और भण्डारा जिलों में स्थित हैं।
             
      आन्ध्रप्रदेश के कसीमनगर, बारंगल, कुर्नुल, कड़प्पा आदि जिले लौह अयस्क उत्पादक हैं जबकि तमिलनाडु के तीर्थ मल्लाई पहाड़ियों (सलेम) एवं यादपल्ली (नीलगिरी) क्षेत्र में लोहे के भण्डार हैं।
Geography Model Paper 2025

26. भारत का मानचित्र बनाइए और निम्नलिखित को प्रदर्शित कीजिए:

(A) कांडला

(B) राँची

(C) चेन्नई

(D) कोच्चि

(E) शिमला।

Draw a map of India and show the following:

(A) Kandla

(B) Ranchi

(C) Chennai

(D) Kochi

(E) Shimla

उत्तर-

 



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PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER सम्पूर्ण हल सहित (बिहार बोर्ड भूगोल 12वीं कक्षा)

7. Major Historical Events (प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ)

7. Major Historical Events

(प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ)



क्रम घटनाओं का नाम वर्ष
1. भारत में आर्यों का आगमन 1500 ई० पू०
2. महावीर का जन्म 540 ई० पू०
3. महावीर का निर्वाण 468 ई० पू०
4. गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई० पू०
5. गौतम बुद्ध का महा परिनिर्वाण 483 ई० पू०
6. सिकंदर का भारत पर आक्रमण 326-325 ई० पू०
7. अशोक द्वारा कलिंग पर विजय 261 ई० पू०
8. विक्रम सम्वत् का आरंभ 58 ई० पू०
9. शक् सम्वत् का आरंभ 78 ई०
10. हिजरी सम्वत् का आरंभ 622 ई०
11. फाह्यान की भारत यात्रा 405-11 ई०
12. हर्षवर्धन का शासनकाल 606-647 ई०
13. ह्वेनसांग की भारत यात्रा  630 ई०
14. सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण 1025 ई०
15. तराईन का प्रथम युद्ध 1191 ई०
16. तराईन का द्वितीय युद्ध 1192 ई०
17. गुलामवंश की स्थापना 1206 ई०
18. वास्कोडिगामा का भारत आगमन 1498 ई०
19. पानीपत का प्रथम युद्ध 1526 ई०
20. पानीपत का द्वितीय युद्ध 1556 ई०
21. पानीपत का तीसरा युद्ध 1761 ई०
22. अकबर का राज्यारोहण 1556 ई०
23. हल्दी घाटी का युद्ध 1576 ई०
24. दीन-ए-इलाही धर्म की स्थापना 1582 ई०
25. प्लासी का युद्ध 1757 ई०
26. बक्सर का युद्ध 1764 ई०
27.  बंगाल में स्थायी बंदोबस्त 1793 ई०
28. बंगाल का प्रथम विभाजन 1905 ई०
29. मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 ई०
30. मार्ले-मिण्टो सुधार 1909 ई०
31. प्रथम विश्वयुद्ध 1914-18 ई०
32. द्वितीय विश्वयुद्ध 1939-45 ई०
33. असहयोग आन्दोलन 1920-22 ई०
34. साइमन कमीशन का आगमन  1928 ई०
35. दांडी मार्च नमक सत्याग्रह 1930 ई०
36. गाँधी इरविन समझौता 1931 ई०
37. कैबिनेट मिशन का आगमन 1946 ई०
38. महात्मा गाँधी की हत्या 1948 ई०
39. चीन का भारत पर आक्रमण 1962 ई०
40. भारत-पाक युद्ध 1965 ई०
41. ताशकंद-समझौता 1966 ई०
42. तालीकोटा का युद्ध 1565 ई०
43. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध 1767-69 ई०
44. द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध 1780-84 ई०
45. तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध 1790-92 ई०
46. चतुर्थ आंग्ल-मैसू युद्ध 1799 ई०
47. कागिल युद्ध 1999 ई०
48. प्रथम गोलमेज सम्मेलन 1930 ई०
39. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन 1931 ई०
40. तृतीय गोलमेज सम्मेलन 1932 ई०
41. क्रिप्स मिशन का आगमन 1942 ई०
42. चीनी क्राति 1911 ई०
43. फ्रांसीसी क्रांति 1789 ई०
44. रूसी क्रांति 1917 ई०
45. अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम 1776 ई०

 

5. Modern Indian History (आधुनिक भारतीय इतिहास)

5. Modern Indian History

(आधुनिक भारतीय इतिहास)



1. भारत में आने वाला प्रथम पुर्तगाली था

➤ वास्कोडिगामा (20 मई, 1498 ई को, कालीकट में)

Modern Indian History

वास्कोडिगामा

2 वास्कोडिगामा दूसरी बार भारत आया था

➤ 1502 ई. में

3. वास्कोडिगामा को भारत पहुँचने पर उसका स्वागत किया था

➤ कालीकट के शासक जमोरिन ने

4. भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया था

➤ फ्रांसिस्को-द-अल्मेडा (1505 ई में)

5. अल्बुकर्क ने 1510 ई. में गोवा जीता था

➤ बीजापुर के युसुफ आदिशाह से

6. पुर्तगालियों ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी खोली थी

➤ कोचीन में

7. भारत आने वाला प्रथम डच नागरिक था

➤ कारनेलिस डे हस्तमान (1596 ई. में)

8. प्रथम डच फैक्ट्री की स्थापना की गई थी

मसुलीपट्टनम् में (1605 में)

9. भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना हुई थी

➤ 31 दिसम्बर 1600 ई. को (महारानी एलिजाबेथ से आज्ञा पत्र प्राप्त कर)

10. ईस्ट इंडिया कंपनी का पहला गवर्नर था

➤ टॉम्स स्मिथ

11. मुगल दरबार में आने वाला प्रथम अंग्रेज था

➤ कैप्टन हॉकिन्स (1609 में जहाँगीर के दरबार में)

12. अंग्रेजों की प्रथम व्यापारिक कोठी (फैक्ट्री) खुली थी

➤ 1608 ई० में (सूरत में)

13. कलकत्ता (कोलकाता) नगर की नींव रखी थी

➤ जॉर्ज चारनौक ने

14. प्रथम फ्रांसीसी गवर्नर था

➤ डुप्ले

15. अंग्रेजी साम्राज्य का संस्थापक था

➤ लॉर्ड क्लाइव

16. प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746-48 ई०) समाप्त हुआ था

➤ ए-ला-शापल की संधि द्वारा

17. दूसरा कर्नाटक युद्ध (1749-54 ई०) समाप्त हुआ था

➤ पांडीचेरी की संधि द्वारा

18. तीसरा कर्नाटक युद्ध (1756-63 ई०) समाप्त हुआ था

➤ पेरिस की संधि द्वारा

19. वांडीवाश की लड़ाई (1760 ई०) में फ्रांसीसीयों को बुरी तरह हराया था

➤ अंग्रेजी सेना ने (सर आयरकूट के नेतृत्व में)

20. अंग्रेजों ने पांडिचेरी को फ्रांसीसीयों से छीना

➤ 1761 ई. में

21. भारत आने वाले विदेशियों का सही क्रम है

➤ पुर्तगाली, डच, अंग्रेजी, डेनिश, फ्रांसीसी

22. प्लासी का युद्ध 23 जून, 1757 ई० को हुआ था

➤ रार्बट क्लाइव एवं सिराजुद्दौला के बीच

23. अपनी राजधानी को मुर्शिदाबाद से मुंगेर (मुगदलपुर) स्थानान्तरित किया था

➤ मीरकासिम ने

24. बक्सर का युद्ध (अंग्रेजों एवं मीरकासिम, अवध के नवाब शुजाद्दौला एवं मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के सम्मिलित सेना के बीच) हुआ था

➤ 1764 ई० में

25. बक्सर की लड़ाई (1764 ई०) में अंग्रेज सेनापति था

➤ हेक्टर मुनरो

26. टीपु सुल्तान (हैदर अली का पुत्र) की राजधानी थी

➤ श्री रंगपट्टनम्

27. कलकत्ता में ब्लैक होल की घटना घटी थी

➤ 20 जून 1756 को (सिराजुद्दौला के समय)

28. टीपू सुल्तान शासक था

➤ मैसूर का

29. मैसूर राज्य की स्थापना की थी

➤ हैदर अली ने (1766 ई० में)

30. जयपुर शहर का निर्माण करवाया था

➤ सवाई जयसिंह ने

31. टीपू सुल्तान की मृत्यु हुई थी

➤ 1799 ई में (चतुर्थ ऑग्ल मैसूर युद्ध के दरम्यान)

32. अंग्रेज और फ्रांसीसीयों के मध्य हुए युद्ध को कहा जाता है

➤ कर्नाटक युद्ध

33. मार्च 1784 ई० में मंगलौर की संधि हुई थी

➤ टीपू सुल्तान और अंग्रेजों के मध्य

34. टीपू सुल्तान और अंग्रेजों के बीच श्री रंगपट्टनम की संधि हुई थी

➤ 1792 ई. में

35. अलीनगर की संधि फरवरी 1757 को हुई थी

➤ सिराजुद्दौला और क्लाइव के बीच

36. इलाहाबाद की प्रथम संधि (बक्सर के युद्ध के बाद 12 अगस्त 1765 ई० को) हुई थी

➤ शाहआलम द्वितीय एवं क्लाईव के बीच

37. इलाहाबाद की दूसरी संधि 16 अगस्त 1765 ई० को हुई थी

➤ अवध के नबाब शुजाउद्दौला और क्लाइव के बीच

38. भारत आने वाला प्रथम ब्रिटिश नागरिक था

➤ जॉन मिल्डेन हॉल

39. फोर्ट विलियम (कलकता) का प्रथम शासक था

➤ चार्ल्स आयर

40. भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम था

➤ 1857 की क्रांति

41. 1857 की क्राति का प्रारंभ हुआ था

➤ 10 मई 1857 को (मेरठ से)

42. 1857 के क्रांति के समय इंगलैण्ड के प्रधानमंत्री थे

➤ लार्ड पामर्स्टन

43. 1857 के क्राति के समय भारत का गवर्नर जनरल था

➤ लार्ड कैनिंग

44. 1857 के विद्रोह के समय भारत का सम्राट था

➤ बहादुर शाह जफर (बहादुरशाह-II)

45. 1857 के क्रांति का तत्कालिक कारण था

➤ चर्बीयुक्त कारतुस व एनफिल राईफल का प्रयोग

46. मंगल पांडे को फांसी दी गई थी

➤ 8 अप्रैल, 1857 को

47. 1857 के क्राति को ‘राष्ट्रीय विद्रोह’ की संज्ञा दी थी

➤ बेन्जामिन डिजरेली ने

48. 1857 की क्राति को ‘स्वतंत्रता संग्राम’ कहा था

➤ वी० डी० सावरकर ने

49. 1857 की क्राति ‘स्वतंत्रता संग्राम नहीं था’ कहा था

➤ आर० सी० मजुमदार ने

50. 1857 के विद्रोह को ‘सैनिक विद्रोह’ कहा था

➤ सर जॉन लॉरेंस, सीले तथा होम्ज ने

51. बिहार में 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया था

➤ वीर कुंवर सिंह ने (जगदीशपुर के)

52. झाँसी में 1857 की क्राति का नेतृत्व किया था

➤ लक्ष्मीबाई ने (बचपन का नाम – मनुबाई)

53. 1857 की क्राति में लक्ष्मीबाई का सामना हुआ था

➤ ब्रिटिश नायक ह्यूरोज से

54. कानपुर में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया था

➤ नाना साहेब ( बाजीराव द्वितीय के पुत्र) ने

55. तात्या टोपे का वास्तविक नाम था

➤ रामचन्द्र पांडुरंग

56. लखनऊ में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया था

➤ बेगम हजरत महल ने

57. कानपुर तथा लखनऊ में हुए विद्रोह को दबाने वाले थे

➤ ब्रिटिश नायक कैंपबेल

58. 1857 के विद्रोह को ‘बर्बरता तथा सभ्यता का युद्ध’ कहा था

➤ टी० आर० होम्स ने

59. खुद को ‘बंगाल का शेर’ कहता था

➤ लॉर्ड वेलेजली

60. बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना की थी

➤ राबर्ट क्लाईव ने

61. बंगाल का प्रथम गवर्नर जनरल था

➤ वारेन हेस्टिंग्स (1774-85 ई०)

62. कलकत्ता में एक उच्च न्यायालय की स्थापना की गई थी

➤ रेग्यूलेटिंग एक्ट के तहत (वारेन हेस्टिंग्स के समय, 1774 ई० में)

63. एकमात्र गवर्नर जनरल जिस पर महाभियोग चलाया गया था

➤ वारेन हेस्टिंग्स (1775 ई० में)

64. बंगाल में स्थायी बन्दोबस्त पद्धति को लागू किया था

➤ लॉर्ड कार्नवालिस ने (1793 ई० में)

65. भारत में प्रशासनिक सेवा (नागरिक सेवा) का जनक माना जाता है

➤ लार्ड कार्नवालिस को

66. सहायक संधि (1798 ई०) का जन्मदाता कहा जाता है

➤ लार्ड वेलेजली को (1798-1805 ई०)

67. भारत का पहला गवर्नर जनरल हुआ

➤ लार्ड विलियम बैंटिक

68. सती प्रथा (1829 ई० में) तथा ठगी प्रथा (1830 ई० में) को समाप्त किया था

➤ लार्ड विलियम बैंटिक ने

69. बंगाल का विभाजन (1905 में) तथा रेलवे बोर्ड का गठन (1905 में) हुआ था

➤ लॉर्ड कर्जन के समय

70. भारतीय रेल, डाक तथा तार का प्रारंभ हुआ था

➤ लॉर्ड डलहौजी के समय

71. भारतीय नागरिक सेवा हेतु पहली बार प्रतियोगिता परीक्षा की शुरूआत हुई थी

➤ लॉर्ड डलहौजी के समय

72. लॉर्ड मैकाले की अनुशंसा पर अंग्रेजी को 1835 ई० में शिक्षा का माध्यम बनाया गया

➤ लॉर्ड विलियम बैंटिक के समय

73. भारत का अंतिम गवर्नर जनरल तथा प्रथम वायसराय था

➤ लॉर्ड कैनिंग

74. बंगाल में भयंकर अकाल तथा पंजाब में कूका आन्दोलन हुआ था

➤ लॉर्ड नार्थब्रुक के समय (1872-76 ई०)

75. वर्नाक्यूलर प्रेस ऐक्ट पारित हुआ था

➤ 1878 को (लार्ड लिटन के समय में)

76. स्थानीय स्वशासन (1882 ई०) की शुरूआत तथा वर्नाकुलर प्रेस एक्ट (1882 ई०) को समाप्त किया था

➤ लॉर्ड रिपन ने

77. 1 जनवरी 1879 को महारानी विक्टोरिया को कैसर-ए-हिन्द की उपाधि से सम्मानित किया था

➤ लॉर्ड लिटन ने (दिल्ली दरबार में)

78. बंगाल विभाजन को रद्द (1911 ई.) तथा राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानान्तरित किया था

➤ लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय ने

79. सिविल सर्विसेज में प्रवेश की आयु को 19 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष किया था

➤ लार्ड रिपन ने (1880-1884)

80. 1861 ई० में कलकत्ता, दिल्ली तथा मुम्बई में उच्च न्यायालय का गठन हुआ था

➤ लॉर्ड कैनिंग के समय

81. बंग-भंग आन्दोलन तथा पुलिस आयोग (1902 ई०) का गठन हुआ था

➤ लार्ड कर्जन के समय

82. बम्बई का वास्तविक संस्थापक था

➤ गैरॉल्ड ऑगयार

83. मुगल साम्राज्य के प्रमुख शासकों का क्रम है

➤ बाबर, हुमायूँ, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ, और औरंगजेब

84. ‘भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता’ कहा जाता है

➤ चार्ल्स मेटकॉफ को

85. 1905 के स्वदेशी आन्दोलन के प्रमुख नेता थे

➤ लाल-बाल-पाल

86. गणपति उत्सव (1893 ई०) तथा शिवाजी उत्सव (1895 ई०) मनाना प्रारंभ किया था

➤ बाल गंगाधर तिलक ने

87. ‘इंडियन होमरूल सोसाइटी’ की स्थापना किया था

➤ श्यामजी कृष्ण वर्मा ने (1905 में, लंदन में)

88. पटना में 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया था

➤ पीर अली ने

89. 1 नवम्बर, 1913 ई० को लाला हरदयाल ने गदर पार्टी की स्थापना की थी

➤ सेन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में

90. गदर पार्टी के प्रथम अध्यक्ष थे

➤ सोहन सिंह भखना

91. महात्मा गांधी को अंग्रेज सरकार ने कैसर-ए-हिन्द उपाधि से सम्मानित किया था

➤ 1915 ई० में

92. अंग्रेजों को तीनकठिया प्रथा को समाप्त करना पड़ा था

➤ चम्पारण विद्रोह (1917 में) के कारण

93. होमरूल लीग (1916 ई०) की स्थापना की थी

➤ ऐनी बेसेंट ने (मद्रास में)

94. रौलेक्ट ऐक्ट (काला कानून) लागू किया गया था

➤ 19 मार्च 1919 को (लार्ड चेम्सफोर्ड के समय)

95. जलियाँवाला बाग हत्याकांड (अमृतसर में) हुआ था

➤ 13 अप्रैल 1919 को (लार्ड चेम्सफोर्ड के समय)

96. जलियाँवाला बाग हत्याकांड को अंजाम दिया था

➤ जनरल ओ-डायर ने

97. रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘सर’ तथा जमनालाल बजाज ने ‘राय बहादुर’ की उपाधि लौटा दी

➤ जलियाँवाला बाग हत्या कांड के विरोध में

98. जलियाँवाला बाग हत्याकांड की जाँच के लिए गठित समिति थी

➤ हंटर समिति (19 अक्टूबर, 1919 में)

99. चौरी-चौरा कांड (उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला में) हुआ था

➤ 5 फरवरी, 1922 को

100. गांधी जी ने 12 फरवरी 1922 ई० को असहयोग आन्दोलन स्थगित कर दिया था

➤ चौरी-चौरा घटना से दुखित होकर

101. काकोरी कांड (रेल षड्यंत्र) हुआ था

➤ 9 अगस्त 1925 ई० को

102. साइमन कमीशन (वाइट मैन कमीशन) भारत आया था

➤ 3 फरवरी 1928 को (लार्ड इरविन के समय)

103. क्रिप्श मिशन भारत आया था

➤ 22 मार्च 1942 को

104. ‘यह आगे की तारीख का चेक था (पोस्टडेटेड चेक)’ कहा था

➤ महात्मा गांधी ने (क्रिप्स मिशन के बारे में)

105. जार्ज पंचम के आगमन के समय भारत का वायसराय था

➤ लॉर्ड हार्डिंग-II

106. ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ पास होने के विरोध में ‘केन्द्रीय विधानसभा’ में बम फेंका था

➤ बटुकेश्वर दत्त तथा भगत सिंह ने (8 अप्रैल 1929 ई० को)

107. प्रथम गोलमेज सम्मेलन हुआ था

➤ 12 नवम्बर 1930 को (लार्ड इरविन के समय)

108. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन हुआ था

➤ 7 सितम्बर 1931 को (लार्ड वेलिंगटन के समय)

109. चन्द्रशेखर आजाद पुलिस मुठभेड़ में शहीद हुए थे

➤ 23 फरवरी 1931 को (अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद)

110. काँग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना हुई थी

➤ मई 1934 को

111. 1 मई 1939 को ‘फारवर्ड ब्लॉक’ की स्थापना की गई

➤ सुभाषचन्द्र बोस द्वारा

112. पंजाब के भूतपूर्व लैफ्टिनेंट गवर्नर ओ-डायर की गोली मारकर हत्या कर दी थी

➤ उद्यम सिंह ने (13 मार्च 1940 को लंदन में)

113. मुहम्मद अली जिन्ना ने भारत से अलग मुस्लिम राष्ट्र ‘पाकिस्तान’ की माँग की

➤ 1940 के मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में

114. आजाद हिन्द फौज का गठन सिंगापुर में हुआ था

➤ 1 सितम्बर 1942 को (कैप्टन मोहन सिंह द्वारा)

115. सुभाष चन्द्र बोस का जन्म हुआ था

➤ 23 जनवरी 1897 को (कटक, उड़ीसा में)

116. कैबिनेट मिशन भारत आया था

➤ 24 मार्च 1946 को

117. कैबिनेट मिशन (तीन सदस्य) के अध्यक्ष थे

➤ लार्ड पैथिक लॉरेंस (भारत में मंत्री)

118. सुभाष चन्द्र बोस के राजनीतिक गुरू थे

➤ देश-बंधु चितरंजन दास

119. भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी दी गई थी

➤ 23 मार्च 1931 को (लाहौर केस षड्यंत्र के अंतर्गत)

120. भूख हड़ताल के कारण मृत्यु हुई थी

➤ जतिनदास की (64 दिनों के भूख हड़ताल)

121. जवाहर लाल नेहरू द्वारा अंतरिम सरकार का गठन हुआ था

2 सितम्बर, 1946 को

122. पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री थे

लियाकत अली

123. मुस्लिम लीग ने ‘मुक्ति दिवस’ मनाया था

22 दिसम्बर 1939 को

124. ‘पाकिस्तान’ का विचार सर्वप्रथम दिया था

चौधरी रहमत अली ने

125. व्यक्तिगत सत्याग्रह आन्दोलन (1940 ई.) के प्रथम एवं द्वितीय सत्याग्रही थे

क्रमशः विनोवा भावे व पं. जवाहर लाल नेहरू

126. अगस्त प्रस्ताव (8 अगस्त, 1940) की घोषणा की थी

वायसराय लार्ड लिनलिथगो ने

127. राज्य हड़प भीति (ड्रॉक्टिन ऑफ सैप्स) चलाई थी

लॉर्ड डलहौजी ने

128. सहायक संधि की पद्धति शुरू की थी

लॉर्ड वेलेजली ने

129. रिपन को ‘भारत के उद्धारक’ की उपाधि दी थी

फ्लोरेंस नाइटिंगल ने

130. गाँधी जी ने किस आन्दोलन में ‘करो या मरो’ का नारा दिया था

भारत छोड़ों आन्दोलन (9 अगस्त, 1942 ई०)

131. भारत सरकार अधिनियम पास किया गया था

1935 ई० में

132. भारत के स्वतंत्रता के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे

क्लीमेंट एटली (लेबर पार्टी)

133. ‘बिना ताज के बादशाह’ कहा जाता है

सुरेन्द्रनाथ बनर्जी को

134. ‘भारतीय हरिजन संघ’ की स्थापना की थी

महात्मा गांधी ने

135. ‘भारत का विस्मार्क’ कहा जाता है

सरदार वल्लभ भाई पटेल को

136. ‘भारत भारतीयों के लिए’ नारा है

आर्य समाज का

137. ‘पूर्ण स्वतंत्रता’ की माँग का प्रस्ताव रखा गया था

➤  लाहौर अधिवेशन (1929 ई०) में

138. ‘हरमिट ऑफ शिमला’ कहा जाता है

ए० ओ० ह्यूम को (स्कौटलैंड वासी)

139. ‘धन निष्कासन के सिद्धांत’ को प्रतिपादित किया था

दादाभाई नौरोजी ने

140. बंगाल में ‘अनुशीलन समिति’ का गठन किया था

वारीन्द्र घोष ने

141. ‘मोपला विद्रोह’ मालाबार (केरल) में हुआ था

1921 ई० में

142. मुंडा विद्रोह (1899-1900 ई) के नेतृत्वकर्ता थे

बिरसा मुण्डा

143. 1857 के विद्रोह के ठीक बाद बंगाल में विद्रोह हुआ

नील विद्रोह

144. ‘पहला कारखाना अधिनियम’ पारित हुआ था

1881 ई० को (लॉर्ड रिपन के समय)

145. ‘भारत एक राष्ट्र नहीं, दो राष्ट्र है’ कथन है

मुहम्मद अली जिन्ना का

146. आजादी के पूर्व प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था

26 जनवरी 1930 को

147. भारत का विभाजन हुआ था

माउण्टबेटन योजना (1947) के तहत

148. ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना हुई थी

1906 में

149. प्रथम सिपाही विद्रोह हुआ था

1764 ई० को (बंगाल में)

150. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की स्थापना की गयी थी

हेडगेवेर द्वारा (1921 में, नागपुर में)

151. मांटेग्यू चेम्स फोर्ड सुधार को लाया गया था

➤ 1919 ई० में

152. लखनऊ में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया था।

➤ बेगम हजरत महल ने

153. रैयतबाड़ी व्यवस्था लागू की गयी थी

➤ मद्रास और बम्बई प्रेसीडेंसी में

154. ‘मराठा’ तथा ‘केसरी’ का सम्पादन किया था

➤ तिलक ने

155. प्रथम दिल्ली दरबार का आयोजन हुआ था

➤ 1877 ई० में (आयोजक- लार्ड लिटन)

156. कलकत्ता में ‘फोर्ट विलियम कॉलेज’ स्थापित हुआ था

➤ 1800 ई० में (लॉर्ड वेलेजली द्वारा)

157. भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा जाता है

➤ 1854 ई० के चार्ल्स वुड डिस्पैच को

158. वैवेल योजना (1945) पर विचार हेतु शिमला समझौता हुआ था

➤ 25 जून 1945 को

159. कांग्रेस को ‘चापलूसों का सम्मेलन’ कहा था

➤ तिलक ने

160. ‘बंद समाज’ को स्थापना किया था

➤ श्री धरालू नायडू ने (1864 में, मद्रास में)

161. आदि ब्रह्म समाज की स्थापना किया था

➤ केशवचन्द्र सेन ने (1865 ई० में)

162. ‘मोहम्मद अली जिन्ना’ को ‘कायदे आजम’ नाम से संबोधित किया था

➤ गांधीजी ने

163. ‘प्रिंस ऑफ वेल्स’ भात की यात्रा प आए थे

➤ अप्रैल 1921 में

164. तृतीय गोलमेज सम्मेलन हुआ था

➤ 17 नवम्बर, 1932 को

8. Population problems and government policies in India (भारत में जनसंख्या की समस्याएँ एवं सरकारी नीतियाँ)

8. Population problems and government policies in India

(भारत में जनसंख्या की समस्याएँ एवं सरकारी नीतियाँ)



    Population problems

      वस्तुतः किसी, देश की जनसंख्या उसका एक संसाधन होती है, लेकिन विपरीत परिस्थिति में वह समस्या का कारण भी बन जाती है, स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद भारत की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने का प्रयास तब शुरू किया गया जब इसका भार असहज होने लगा।

    जनसंख्या को समस्या के रूप में तब देखा जाता है जब उपलब्ध भौतिक संसाधनों की तुलना में जनसंख्या ही अधिक हो जाता है। भारत की स्थिति ऐसी ही हो गई है। फलतः अधिक जनसंख्या के कारण देश में न्यूनतम प्रति व्यक्ति आय, गरीबी, अशिक्षा, बीमारी, बेरोजगारी, निराशा और क्षेत्रीय अलगाव जैसे कठिनाइयों के कारण भारत की प्रगति धीमी हो गई है।

     50 वर्षों के प्रयास के बावजूद जनसंख्या सम्बन्धी समस्याएँ सुलझने के स्थान पर उलझती ही जा रही हैं। भारत कहने के लिए कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भर हो गया है फिर भी एक विशाल जनसंख्या कुपोषण से ग्रसित है।

    कुपोषण बीमारियों का कारण बन गया है, भारत की आधी से कुछ कम या लगभग 37% जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे है। गरीबी भारत की जनसंख्या की सबसे बड़ी समस्या है, क्योंकि गरीब व्यक्ति जानवरों से भी बदतर जीवन जीने के लिए बाध्य है।

     भारत की जनसंख्या संबंधी समस्याओं को सुविधा के लिए निम्नलिखित वर्गों में विभक्त किया जा सकता है।

(1) तीव्र जनसंख्या वृद्धि:-

      भारत की जनसंख्या में औसतन 1.6 करोड़ से अधिक व्यक्ति प्रतिवर्ष जुड़ जाते हैं। 1901 में जहां देश की जनसंख्या केवल 23.83 करोड़ थी वहीं 1951 में बढ़कर 36.10 करोड़ हो गई तथा 60 वर्षों के बाद 2021 को 1.21 अरब से ऊपर हो गई। यह वृद्धि दर विकसित देशों की अपेक्षा बहुत अधिक है। भारत कृषि प्रधान देश होने के कारण यह जन भार कृषिगत भूमि की वहन क्षमता से अधिक है। भारत अपनी अधिकतम भूमि का उपयोग करने के लिए वनों का विनाश भी कर चुका है जो एक अलग समस्या है।

     स्पष्ट है कि संसाधनों के विकास के लिए भूमि के गहन उपयोग के साथ अन्य संसाधनों के विकास के भी प्रयास करने होंगे, लेकिन अनेकानेक कारणों से संसाधनों का विकास मन्द गति से हो रहा है, जबकि जनसंख्या वृद्धि सतत् बनी हुई है।

     अतः इस तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या का यथा सम्भव नियंत्रण करना समस्या समाधान के लिए एक आवश्यकता है। विगत दशकों के सरकारी प्रयास निराशाजनक रहे हैं।

     भारत में जनसंख्या विस्फोट की गूंज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी है और इसके समाधान के लिए अनेक उपाय सुझाए जा रहे हैं। जैसे स्त्री शिक्षा, रोगों की रोकथाम, जन्म-नियंत्रण, जन-चेतना का प्रचार-प्रसार, स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता आदि, लेकिन भारत जैसे जनसंख्या बोझिल देश में कठोर कदम उठाए बिना इसका समाधान कठिन है। ऐसे उपायों में से निम्न उपाय विशेष उल्लेखनीय हैं- दो से अधिक बच्चा पैदा करने पर दण्ड की व्यवस्था, शादी की वैधानिक आयु का कठोरता से पालन, संतति सुधार कार्यक्रम, स्त्रियों में शिक्षा का प्रसार, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम, आर्थिक विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, अन्धविश्वासों एवं भ्रान्तियों से निजात, मनोरंजन के साधनों का विस्तार, परिवार नियोजन कार्यक्रम एवं प्रवास इत्यादि।

(2) जनसंख्या का असमान वितरण:-

      अनेकानेक प्राकृतिक, आर्थिक, सामाजिक और ऐतिहासिक कारणों से भारत की जनसंख्या के क्षेत्रीय वितरण में अत्यधिक विषमता है जिसके कारण संसाधनों के उपयोग में अतिशयता पायी जाती है। अधिकांश जनसंख्या कृषि पर आधारित होने के कारण उपजाऊ मृदा और अनुकूल जलवायु क्षेत्रों पर ही केन्द्रित हैं।

     उत्तरी भारत का विशाल मैदानी क्षेत्र, तटीय मैदान और दक्षिण के पठार का कृषिगत क्षेत्र ऐसे ही जनाधिक्य के क्षेत्र हैं, यदि कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों में परिवहन के साधनों, सिंचाई, उद्योग-धन्धों आदि की सुविधा प्राप्त हो जाए तो इस विषमता को कम किया जा सकता है।

      भारत में जनसंख्या के क्षेत्रीय स्थानान्तरण की कोई नीति न होने के कारण इस दिशा में अब तक कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ है। पश्चिमी बंगाल, केरल, बिहार, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में घनत्व अत्यधिक है।

    यदि राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, छोटा नागपुर पठार जैसे इलाकों में जीविका के साधनों के लिए उचित प्रबन्ध किया जाए तो सघन बसे इलाकों के लोगों को वहां स्थाई रूप से बसाया जा सकता है। सरकार को इस दिशा में गम्भीरता से पहल करनी चाहिए, क्योंकि क्षेत्रवाद से जनसंख्या के स्थानान्तरण पर प्रश्न-चिन्ह लगता दिखाई दे रहा है।

(3) प्रति व्यक्ति कम आय:-

     सरकार द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों एवं विविध प्रयासों के बावजूद भी हमारे देश के लोगों की आय इतनी कम है कि उससे जीवन स्तर में सुधार लाना कठिन है। यहां मात्र 39.26% जनसंख्या कार्यशील है और उनमें से भी कम पारिश्रमिक पाने वालों की संख्या सर्वाधिक है। यही कारण है कि सामान्यतः आधी कार्यशील जनसंख्या अपने परिवार के लिए मात्र जीने का साधन जुटा ले, यही बहुत बड़ी उपलब्धि है। कम आय का मुख्य कारण विकास कार्यों में शिथिलता है।

     पिछले 50 वर्षों के नियोजित विकास कार्यक्रमों के बावजूद भारत का एक विस्तृत क्षेत्र जहां देश की आधी से अधिक जनसंख्या निवासित है, निम्न स्तर का ही विकास हो पाया है।

(4) अशिक्षा, बेरोजगारी, गरीबी और बीमारी:-

    अशिक्षा, बेरोजगारी, गरीबी और बीमारी ये सभी समस्याएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। अशिक्षा धनोपार्जन में बाधक है और कम आय से गरीबी पनपती है। गरीबी कुपोषण को प्राश्रय देती है। भारत की बढ़ती बेरोजगारी, विशेषकर पढ़े-लिखे लोगों में कुण्ठा को जन्म दे रही है, इससे न केवल उत्पादकता का ह्रास होता है, अपितु सामाजिक तनाव को भी बढ़ावा मिल रहा है।

     सम्प्रति भारत सरकार की सूचना के अनुसार 2005-06 में 942 रोजगार कार्यालयों में 7,289.5 हजार व्यक्तियों का पंजीकरण हुआ था, जिसमें केवल 177.0 हजार व्यक्तियों को रोजगार मिल सका था। स्पष्ट है कि जनसंख्या वृद्धि दर की अपेक्षा रोजगार के अवसरों में बहुत धीमी वृद्धि हो रही है।

      सरकार के अथक प्रयास के बावजूद भी गरीबी और बेकारी बढ़ती जा रही है। कुछ विशेष राज्यों में यह समस्या और अधिक विकट है जैसे-बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, त्रिपुरा, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों की आधे-से-अधिक जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है।

(5) सीमित भूखण्ड:-

     देश में विश्व की 16.87 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है, जबकि विश्व क्षेत्रफल का केवल 2.4% भाग ही भारत में उपलब्ध है। स्पष्ट है कि सीमित भू-खण्ड पर जनसंख्या का भारी दबाव है। कृषि देश की अर्थव्यवस्था और अधिकांश लोगों की जीविका का प्रमुख साधन है, लेकिन यहाँ प्रति व्यक्ति कृषि उपयुक्त भूमि की उपलब्धता केवल 0.3 हेक्टेयर या उससे भी कम है।

    इसी तरह देश में प्रतिवर्ग किलोमीटर के पीछे 324 व्यक्ति निवास करते हैं। जबकि विश्व का औसत घनत्व 44 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी ही है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भूखण्ड पर बढ़ते दबाव के कारण, कृषि भूमि की अनुपलब्धता, आवास एवं पर्यावरण असन्तुलन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही है।

(6) अन्य प्राकृतिक विपदाएँ:-

     विशाल जनसंख्या के लिए कृषि भूमि की आवश्यकताओं की पूर्ति एवं अन्य कारणों से वनों के अत्यधिक ह्रास से पर्यावरण प्रदूषण जैसे अनेक कारणों से पारिस्थितिकी सन्तुलन तेजी से बिगड़ा है, फलस्वरूप देश में अकाल, सूखा, महामारी, भुखमरी जैसी अनेक आपदाएं उत्पन्न हो गई हैं।

(7) असमान आर्थिक विकास से उत्पन्न समस्याएँ:-

     आधुनिक काल में आर्थिक विकास का स्वरूप बदल गया है। संसाधन दोहन, पूंजी, प्रबन्ध और व्यवसायीकरण आदि क्षेत्रों में धन एकत्र हो गया है। इस प्रकार आर्थिक स्तर के अनुसार देश की जनसंख्या उच्च आय वर्ग, औसत आय वर्ग और निम्न आय वर्ग में बंटी हुई है। स्पष्ट है कि आर्थिक असमानता देश की जनसंख्या की सबसे बड़ी समस्या बन गई है।

(8) पर्यावरणीय समस्याएँ:-

     आज भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में विकास की अंधी दौड़ में संसाधनों का निर्ममता पूर्ण दोहन होने लगा है। वहीं पर्यावरण प्रदूषण जैसी भीषण समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। अनेक बीमारियाँ, बाढ़, सूखा, मृदा क्षरण, संसाधनों की कमी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। अनेक महानगरों में तो ये समस्याएँ अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी हैं।

(9) सामाजिक-धार्मिक दुःख से उपजी समस्याएँ:-

      आज जनसंख्या वृद्धि के साथ ही भौतिकवादिता, स्वच्छन्दता, कट्टता, आतंकवाद, साम्प्रदायिकता जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। चोरी, हत्या, बलात्कार जैसी समस्याएं निरन्तर बढ़ती जा ही हैं। आज मानव मूल्य, प्रेम, दया, करुणा, सहिष्णुता, भाईचारा जैसी भावनाएं विलुप्त होती जा रही हैं। वहीं उद्दण्डता, घृणा, दुराचार, नैतिक पतन जैसे दुर्गुणों को बढ़ावा मिला है। आज देश की अधिकांश जनसंख्या अनेक सामाजिक, धार्मिक, दैहिक व मानसिक समस्याओं से घिरी हुई है। इन समस्याओं का निराकरण ढूंढ़ना हम सबके लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है।

भारत में जनसंख्या नीति

स्वतंत्रता प्राप्ति के ठीक बाद से ही भारत सरकार भारत की बढ़ती हुई जनसंख्या को लेकर चिंतित थी। पहली पंचवर्षीय योजना के समय से ही भारत सरकार ने भारत की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के प्रयास किए हैं। इसी कड़ी में परिवार नियोजन कार्यक्रम को अपनाने वाला भारत विश्व का पहला देश बना था।

सर्वप्रथम वर्ष 1960 में एक विशेषज्ञ समूह ने भारत में एक जनसंख्या नीति बनाने का सुझाव दिया था। इसके बाद वर्ष 1976 में भारत ने पहली जनसंख्या नीति अपनाई थी।

भारत सरकार ने एम. एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ दल गठित किया था। इसकी सिफारिश के आधार पर वर्ष 2000 में भारत ने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति अपनाई थी। भारत की इस नवीनतम जनसंख्या नीति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(i) प्रति 1000 जीवित बच्चों पर शिशु मृत्यु दर 30 से कम करना।

(ii) प्रति 1 लाख बच्चों के जन्म पर मातृ मृत्यु 100 से कम करना।

(iii) प्रजनन और शिशु स्वास्थ्य की देखभाल के लिए एक समुचित सेवा प्रणाली विकसित करना।

(iv) गर्भ निरोधक एवं स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित बुनियादी ढांचा सुदृढ़ करना।

(v) वर्ष 2010 तक 2.1 की ‘सकल प्रजनन दर’ (TFR) प्राप्त करना तथा वर्ष 2045 तक जनसंख्या स्थायित्व प्राप्त करना।

(vi) लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु में वृद्धि करना।

(vii) एड्स का प्रसार रोकना और प्रजनन अंग संबंधी रोगों के प्रबंधन व ‘राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन’ (NACO) के बीच समन्वय स्थापित करना।

(vii) 80% प्रसव अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि में संपन्न कराना तथा इस कार्य हेतु प्रशिक्षित लोगों को नियुक्त करना।

(ix) प्रत्येक व्यक्ति को सूचना व परामर्श देना तथा गर्भ निरोधक संबंधित अनेक विकल्प उपलब्ध कराना।

(x) चौदह वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए स्कूली शिक्षा को नि:शुल्क और अनिवार्य बनाना।

(xi) बीच में ही स्कूली पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या 20% से कम करना।

(xii) सभी बच्चों को टीका जनित प्रतिरक्षित उपलब्ध करना।

(xiii) जन्म, मरण, विवाह और गर्भ का 100% पंजीकरण सुनिश्चित करना।

(xiv) संक्रामक रोगों को नियंत्रित करना तथा प्रजनन और शिशु स्वास्थ्य सुविधाओं को घर-घर तक पहुंचाना।

(xv) एक ‘राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग’ गठित करना।

राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग

     ‘राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000’ के अंतर्गत मई 2000 में एक ‘राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग’ गठित किया गया था। इस आयोग के अंतर्गत एक ‘राष्ट्रीय जनसंख्या स्थिरता कोष’ की स्थापना भी की गई थी, लेकिन आगे इसे ‘स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग’ को हस्तांतरित कर दिया गया था। इस आयोग की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है। इस आयोग के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा करना।

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की निगरानी करना तथा इससे संबंधित दिशा-निर्देश देना।

इस जनसंख्या नीति हेतु स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण व अन्य विकास कार्यक्रमों में समन्वय स्थापित करना।

इससे संबंधित कार्यक्रमों की योजना बनाने व उन्हें क्रियान्वित करते समय अंतर क्षेत्रीय समन्वय को बढ़ावा देना।

9. Earthquake and Tsunami (भूकंप व सुनामी)

9. Earthquake and Tsunami

(भूकंप व सुनामी)



भूकम्प दो शब्दों के मिलने से बना है- भू + कम्प

भू= भूपटल

कम्प= कम्पन

इस प्रकार भूपटल में उत्पन्न होने वाला किसी भी प्रकार के कम्पन को भूकम्प कहते है। 

समुद्र के अंदर उत्पन्न होने वाले भूकंप को सूनामी (Tsunami) कहते है।

सूनामी जापानी शब्द है जिसका अर्थ बंदरगाह लहर होता है।

विज्ञान की वह शाखा जिसमें भूकम्प का अध्ययन किया जाता है उसे सिस्मोलोजी (Seismology) कहते है। 

भूपटल के जिस बिंदु से भूकम्प प्रारंभ होती है। उसे भूकम्प केंद्र (Focus) कहते है।

Earthquake and Tsunami

अधिकेंद्र- भूपटल के जिस बिंदु पर भूकम्प का झटका सबसे पहले अनुभव होता है उसे अधिकेंद्र कहते है।

प्रघात (Shocks)- अधिकेंद्र पर भूकम्पीय तरंग के द्वारा अनुभव किया गया पहला भूकम्पीय झटका को प्रघात कहते है।

जब भूकंप समाप्त हो जाता है तो भी कई दिनों तक हल्के भूकम्प के झटके महसूस किए जाते है उसे After Shock कहा जाता है।

बिहार में औसतन प्रत्येक 17 वर्ष पर भूकम्प आता है।

सिस्मोग्राफ: सिस्मोग्राफ भूकम्पीय तरंगों के प्रवृति को रेखांकन करने वाला यंत्र है।

समभूकम्प रेखा: समान भूकम्पीय तीव्रता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समभूकम्पीय रेखा कहते है।

सहभूकम्प रेखा: एक ही समय पर पहुँचने वाले भूकम्पीय तरंगों को मिलने वाली सरल रेखा को सह-भूकम्प रेखा कहते है।

भूकम्प के प्रकार

       भूकम्प का वर्गीकरण दो आधार पर किया जाता है:-

(A) गहराई के आधार पर

(B) समय के आधार पर

      गहराई के आधार पर भूकम्प तीन प्रकार के होते है-

(i) छिछला भूकम्प– फोकस 50 KM की गहराई तक होता है।

(ii) मध्यम भूकम्प– फोकस 50-250 KM के बीच

(iii) गहरा भूकम्प– फोकस 250-700 KM के बीच

(B) समय के आधार पर

     समय के आधार पर भूकम्प दो प्रकार के होते है:-

(i) धीमा भूकम्प

(ii) अचानक भूकम्प

धीमा भूकम्प की तीव्रता कम होती है लेकिन इसके झटके लम्बे समय तक अनुभव किये जाते है। ऐसे भूकम्प से ही वलित पर्वत तथा पठारों का निर्माण होता है।

अचानक भूकम्प की तीव्रता अधिक होती है। इसके झटके अति उच्च समय तक अनुभव किये जाते है। इसके चलते इससे ज्वालामुखी पर्वत तथा ब्लॉक पर्वत का निर्माण होता है।

विश्व में सर्वाधिक छिछले उदगम वाले भूकम्प होते हैं जिसका प्रभाव लम्बे समय तक होता है।

 भूकम्प के कारण

      भूकम्प क्यों आते है उन कारणों को दो भागों में बाँटकर अध्ययन किया जा सकता है:-

(A) मानवीय कारण

(B) प्राकृतिक कारण

(A) मानवीय कारण :-

(i) परमाणु विस्फोट

(ii) मानव के द्वारा किया जा रहा खनन कार्य

(iii) बड़े-बड़े बाँधों का निर्माणEarthquake

(iv) पर्वतीय क्षेत्रों में किया जा रहा विकास कार्यक्रम जैसे- सड़क निर्माण, वन ह्रास इत्यादि।

(B) प्राकृतिक कारक:-

ज्वालामुखी उदगार, मोड़दार एवं ब्लॉक पर्वत का निर्माण जब कभी होता है। भूकम्प आने से संबंधित प्राकृतिक कारणों की व्याख्या होती है।

       भूकम्प आने से संबंधित प्राकृतिक कारणों की व्याख्या करने हेतु दो सिद्धान्त दिए गए है:-

(1) प्रत्यास्थ पुनश्चलन का सिद्धान्त (Elastic Rebond Theory)

इस सिद्धांत को अमेरिकी वैज्ञानिक H.F. रीड ने दिया था।

इनके अनुसार भुपटल प्रत्यास्थ चट्टानों से निर्मित है।

जब इन चट्टानों पर बाहरी दबाव बल कार्य करता है तो चट्टानें फैलती है और जब दबाव हटता है तो चट्टानें सिकुड़ने के क्रम में ही भूकम्प उत्पन्न होता है।

2) प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त (Plate Tectonic Theory)

इस सिद्धान्त के प्रतिपादक हैरीहेस महोदय है।

इन्होंने बताया कि पृथ्वी का भूपटल कई प्लेटों से निर्मित है।

यही प्लेट जब क्षैतिज या उदग्र रूप से गति करते है तो भूकम्प उत्पन्न होते है।

प्लेटों में सर्वाधिक भूकम्प प्लेट के किनारे अनुभव किये जाते है।

भूकम्प के आधार पर प्लेट के किनारों को तीन भागों में बांटा गया है-

I. अपसरण सीमा

II. अभिसरण सीमा

III. संरक्षी सीमाEarthquake

प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त में यह बताया गया है कि प्लेटों में गति चार कारणों से उत्पन्न होती है:-

जैसे:-

(i) चन्द्रमा एवं ब्रहाण्डीय पिण्डों का आकर्षण बल

(ii) एक प्लेट के सापेक्ष में दूसरे प्लेट का 45° कोण पर झुका हुआ होना

(iii) पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल

(iv) दुर्बलमण्डल में उत्पन्न होने वाला संवहन तरंग

            प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त में उपरोक्त सभी कारणों को भूकम्प के लिए जिम्मेवार बताये गये है लेकिन इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण संवहन तरंग है।

जिन किनारों पर संवहन तरंग ऊपर की ओर उठकर फैलने की प्रवृति रखती है वहाँ पर अपसरण सीमा का निर्माण होता है और प्लेटों में उत्पन्न होने वाले गति को अपसरण गति कहते है।

जैसे- अटलांटिक कटक के सहारेEarthquake

जब किसी प्लेट के नीचे संवहन तरंग बैठने की पवृति रखती है वहाँ पर अभिसरण सीमा (किनारा) का निर्माण होता है। अभिसरण किनारों के सहारे प्लेटों में अभिसरण गति उत्पन्न होती है। 
Earthquake
जब दो प्लेट आपस में समांतर रूप से रगड़ खाते है तो वैसे स्थानों पर संरक्षी सीमा का निर्माण होता है और प्लेटों में उत्पन्न होने वाले गति को संरक्षी गति कहते है। जापान, फिलीपींस, इंडोनेशिया जैसे द्वीप समूह संरक्षी सीमा पर अवस्थित है। यही कारण है कि यहाँ सबसे अधिक तीव्र वाले भूकम्प रिकॉर्ड किया जाता है।
Earthquake
       इस तरह उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि भूकम्प के कारणों का सर्वाधिक वैज्ञानिक व्याख्या प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त द्वारा किया जाता है।

भूकम्प का वितरण

विश्व में मुख्यतः भूकम्प के तीन क्षेत्र है:-

(i) प्रशांत महासागर के चारों ओर-

     विश्व में सर्वाधिक भूकम्प प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में ही आती है। यहाँ अधिकांश गहरे केंद्र वाले भूकम्प आते है।

(ii) मध्य महाद्वीपीय क्षेत्र-

        यह क्षेत्र यूरेशियन प्लेट और इसके दक्षिण में स्थित भारतीय प्लेट तथा अफ्रीकन प्लेट के मध्य स्थित है। यहाँ मध्यम एवं छिछले किस्म के भूकम्प आते है।

(iii) मध्य अटलांटिक कटक एवं पूर्वी अफ्रीका के भ्रंश घाटी क्षेत्र- 

      अटलांटिक महासागर में अपसरण सीमा के सहारे भूकम्प आती है जिसका विस्तार उत्तर में आइसलैंड के थोड़ा ऊपर से दक्षिण में बोवेट द्वीप तक हुआ है।

भूकम्पीय तीव्रता एवं इसका मापन

भूकम्प के आगमन के दौरान बड़ी मात्रा में ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। इसी ऊर्जा का मापन भूकम्पीय तीव्रता कहलाता है।

वैज्ञानिकों ने भूकम्पीय तीव्रता की मापन हेतु दो प्रकार के पैमाने का विकास किया है-

1. मार्सेली पैमाना

2. रिक्टर (Richter) पैमाना

मार्सेली पैमाना

मार्सेली पैमाना का विकास फ्रांस के मार्सेली महोदय द्वारा किया गया था।

इन्होंने इसे ज्ञानेन्द्रियों के अनुभव एवं विनाशकारी प्रभाव पर विकसित किया।

इस पैमाने से न्यूनतम 1 और अधिकतम 12 इकाई तक भूकम्पीय तीव्रता का मापन किया जाता है।

रिचर पैमाना

रिचर पैमाना का विकास 1835 ई० में सी.एफ. रिचर महोदय ने किया था। 

सके अंतर्गत भूकम्पीय तीव्रता का मापन 1 से 9 इकाई तक किया जाता है। रिचर पैमाना में भूकम्पीय तीव्रता का मापन 10 के घात के रूप में होता है।

रिचर पैमाना पर तीव्रता प्रभाव
1 केवल यंत्रों द्वारा अनुभव किया जाता है।
2 केवल अधिकेन्द्र के पास हल्का कम्पन होता है।
3 चट्टानों में सामान्य कम्पन होती है
4 केन्द्र से 32 किमी० की त्रिज्या में भूकम्प अनुभव की जाती है
5 अधिकेन्द्र से 5 हजार किमी० की दूरी तक भूकम्प अनुभव किया जाता है और पेड़-पौधे हिलने लगते हैं
6 विनाश प्रारंभ हो जाता है और दीवारों में दरारें पड़ने लगती हैं।
7 दीवारें ध्वस्त हो जाती है, वृहत भूकम्प की स्थिति उत्पन्न होती है।
8 इसका प्रभाव विश्वव्यापी होती है, नदियाँ अपना मार्ग बदल लेती है।
9 सम्पूर्ण सर्वनाश (नदी, नाला, मकान) की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी।
           
अगर रिचर स्केल पर भूकम्प तीव्रता 6.5 हो तो यह मानव के लिए विनाशात्मक साबित होता है। 

भूकम्पीय तरंग एवं इसकी विशेषता

      भूकम्प के दौरान कई प्रकार के प्रमुख एवं गौण तरंगों की उत्पति होती है:-

(A) प्रमुख तरंग 

I. P तरंग

II. S तरंग

III. L तरंग

(B) गौण तरंग

I. P* तथा S*

II. Pg तथा Sg

(A) प्रमुख तरंग 

P तरंग 

P तरंग को कई नामों से जानते है। जैसे: प्राथमिक तरंग, Pull & Push तरंग या अनुधैर्य तरंग।

इसे ध्वनि तरंग से तुलना की जा सकती है क्योंकि यह ठोस, द्रव्य और गैस तीनों प्रकार के माध्यम से संचारित हो सकती है।

इसकी गति 7.8 Km/Sec होती है।

P तरंग भूकम्प रिकॉर्डिंग स्टेशन पर सबसे पहले पहुँचती है या अनुभव किया जाता है।

इसकी उत्पत्ति भूकम्पीय केंद्र/फोकस से होती है।

S तरंग

S तरंग को द्वितीयक तरंग या अनुप्रस्थ तरंग कहते है।

इसकी तुलना प्रकाश तरंग से की जा सकती है।

यह तरंग तरल भाग में विलुप्त हो जाती है।

भूकम्प रिकॉर्डिंग स्टेशन पर P तरंग की तुलना में S तरंग देरी से पहुंचती है।

S तरंग की भी उत्पति भूकम्पीय केंद्र/फोकस से होती है।

P तरंग अपने संचरण अक्ष के क्षैतिज जबकि S तरंग अपने संचरण मार्ग के लम्बवत गमन करती है।

S तरंग की औसत गति 4.5 Km/Sec होता है।

L तरंग 

L तरंग को सतही तरंग (Surface Wave or Long Wave) भी कहा जाता है।

L तरंगों की खोज H. D. Love ने की थी, इसलिए इन्हें Love Waves के नाम से भी जाना जाता है।

L तरंग की उत्पति अधिकेंद्र (Epicentre) से होती है।

L तरंग रिकॉर्डिंग स्टेशन पर सबसे देर से पहुँचती है।

L तरंग के कारण ही सर्वाधिक क्षति होती है।

L तरंग की गति काफी अनियमित होती है। 

भूकंपीय छाया क्षेत्र (Shadow Zone)

         भूकंप लेखी यंत्र (सिस्मोग्राफ) पर दूर के क्षेत्रों से आने वाली भूकंपीय तरंग अंकित होती हैं, परन्तु कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहाँ कोई भी भूकंपीय तरंग अंकित नहीं होती है, ऐसे क्षेत्र को भूकंपीय छाया क्षेत्र कहते है।

भूकंप अधिकेंद्र से 105° और 145° के बीच का क्षेत्र जहाँ कोई भी भूकंपीय तरंग अंकित नहीं होती है।  यह क्षेत्र दोनों प्रकार की तरगों के लिए छाया क्षेत्र (Shadow zone) हैं।

105° के परे पूरे क्षेत्र में ‘S’ तरंगें नहीं पहुँचतीं।

‘S’ तरंगों का छाया क्षेत्र ‘P’ तरंगों के छाया क्षेत्र से अधिक विस्तृत है।

भूकंप अधिकेंद्र के 105° से 145° तक ‘P’ तरंगों का छाया क्षेत्र एक पट्टी (Band) के रूप में पृथ्वी के चारों तरफ प्रतीत होता है।

‘S’ तरंगों का छाया क्षेत्र न केवल विस्तार में बड़ा है, वरन् यह पृथ्वी के 40 प्रतिशत भाग से भी अधिक है। 

(B) गौण तरंग
P* तथा S* तरंग 

पृथ्वी  का भुपटल मुख्यत: दो प्रकार के चट्टानों से निर्मित है:-

(1) ग्रेनाइट तथा

(2) बैसाल्ट चट्टान

P* तथा S* ऐसा तरंग है जो केवल बैसाल्टिक चट्टानों से होकर गुजरती है।

P* की गति=6-7 Km/Sec

S* की गति=3-4 Km/Sec

ये तरंग समुद्री भूपटल और महाद्वीपों के आंतरिक भागों में चलती है।

इस तरंगों की खोज 1923 ई० में कोनार्ड महोदय के द्वारा किया गया था।

इस तरंगों की खोज कोनार्ड ने टायर्न में आये भूकम्प के दौरान किया गया था।

Pg तथा Sg तरंग 

ये दोनों तरंगे ग्रेनाइट चट्टानों से होकर गुजरती है।

इसका खोज जेफरीज महोदय ने 1909 ई० में क्रोएशिया (Croatia) के कुपा घाटी में आये भूकम्प के दौरान किया था।

Pg तरंग की औसत गति =5.4 Km/Sec

Sg तरंग की औसत गति =3.3 Km/Sec

Pg & Sg एक ऐसी तरंग है जो केवल महाद्वीपीय भागों से होकर गुजरती है। 

निष्कर्ष:-

        इस तह उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि भूकम्प के दौरान अलग-अलग प्रका के तरंगों की उत्पत्ति होती है जिनकी अपनी विषिष्टता होती है। इन्हीं विशिष्टताओं के आधार पर पृथ्वी के आंतरिक भागों के अध्ययन वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है।


सूनामी (Tsunami) 

➤ सुनामी समुद्र के नीचे भूकंप या ज्वालामुखी विस्फोट के कारण उत्पन्न होने वाली विनाशकारी लहरें हैं।

➤ “सुनामी” एक जापानी शब्द से लिया गया है , जिसका अर्थ है “बंदरगाह लहर”

‘सुनामी’ शब्द वास्तव में दो शब्दों ‘सू’ अर्थात ‘बंदरगाह’ और ‘नामी’ अर्थात ‘विनाशकारी लहरें’ से मिलकर बना है

सुनामी एक दीर्घ तरंग (Long wave) है जो समुद्र तल के समानांतर विशाल तरंगें (Giant waves) के रूप में संचरित होती है

सुनामी की तरंग आवृत्ति (Wave Frequency) एवं तरंग आयाम (Wave Amplitude) में तट (Coast) की ओर निरंतर वृद्धि होती है।

सुनामी लहरों के साथ जल की गति संपूर्ण गहराई तक होती है, इसलिए ये अधिक प्रलयकारी होती हैं।

सुनामी का तरंग दैर्ध्य 160 किमी. तक देखा गया है, साथ ही इनकी गति अत्यधिक होती है जो कभी-कभी 650 किमी० प्रति घंटा भी देखी गई है।

खुले सागरों में इन तरंगों की ऊँचाई अधिकतम 1 मी. की होती है, परंतु जब ये तटवर्ती उथले जल क्षेत्र में प्रवेश करती है तो इनकी ऊँचाई में अचानक असामान्य वृद्धि हो जाती है जिससे बहुत कम समय में ही भीषण विनाश की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

सुनामी लहरों की दृष्टि से प्रशांत महासागर सबसे संवेदनशील स्थिति में है। महासागरीय प्लेटों के अभिसरण क्षेत्र में ये सर्वाधिक शक्तिशाली होती हैं।

इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में 26 दिसंबर, 2004 को हिंद महासागर के तल के नीचे उत्पन्न सुनामी लहरें भारतीय प्लेट के बर्मी प्लेट के नीचे क्षेपण (Subduction) का परिणाम था।

टेलीसुनामी (Teletsunami) 

जब सुनामी लहरों का प्रसार तथा प्रभाव इतना अधिक व्यापक हो कि वे अपनी उत्पत्ति वाले समुद्री क्षेत्र को भी पार करते हुए हज़ारों मील दूर स्थित क्षेत्र तक को भी अपनी चपेट में ले लेता हो, तो इस सुनामी को टेलीसुनामी या मेगासुनामी या समुद्रपारीय सुनामी (Trans-oceanic tsunami) कहा जाता हैं।

1883 की क्राकाटोआ सुनामी और इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में 26 दिसंबर, 2004 की हिंद महासागर की सुनामी, 2021 की दक्षिणी अटलांटिक महासागर की सुनामी इत्यादि इसी प्रकार की सुनामी थी जिसका प्रभाव हजारों मील दूर के क्षेत्रों पर भी देखा गया था।

इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में 26 दिसंबर, 2004 की हिंद महासागर सुनामी का प्रभाव पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तटीय भाग, मेडागास्कर और अफ्रीका महाद्वीप के पूर्वी व सुदूर दक्षिणी भाग तक देखा गया था।



भूकंप व सुनामी से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर



1. प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धान्त निम्नलिखित में से किसकी उत्पत्ति की व्याख्या करता है?

(a) ज्वालामुखी

(b) भूकम्प

(c) चक्रवात

(d) भूकम्प एवं ज्वालामुखी

[read more] (b) भूकम्प [/read]

2. भूकम्प की उत्त्पत्ति से सम्बन्धित प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया है?

(a) होम्स

(b) रीड

(c) जॉली

(d) डेली

[read more] (b) रीड [/read] 

3. पृथ्वी की आन्तरिक संरचना की विश्वसनीय जानकारी प्राप्त करने का सबसे प्रमुख स्रोत है-

(a) भूकम्प विज्ञान

(c) ज्वालामुखी

(b) तापमान

(d) दबाव एवं घनत्व

[read more] (a) भूकम्प विज्ञान [/read]

4. भू-गर्भ में जिस स्थान पर भूकम्पीय तरंगों की उत्पत्ति होती है, उस स्थान को क्या कहा जाता है?

(a) अधिकेन्द्र

(b) भूकम्प अधिकेन्द्र

(c) भूकम्प केन्द्र

(d) इक्लोजाइट

[read more] (c) भूकम्प केन्द्र [/read]

5. भूकम्प-मूल (Focus) वह स्थान होता है जहाँ-

(a) धरातल पर भूकम्पीय लहरों का सर्वप्रथम ज्ञान होता है।

(b) जहाँ से भूकम्प की उत्पत्ति होती है।

(c) जहाँ से भूकम्प की उत्पत्ति के पश्चात् उसकी लहरें ठीक नीचे स्थित स्थान तक यात्रा करके पुनः वापस लौट आती है।

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

[read more] (b) जहाँ से भूकम्प की उत्पत्ति होती है। [/read]

6. अधिकेन्द्र (Epicentre) भूकम्प का एक बिन्दु है, जो सम्बन्धित है-

(a) पृथ्वी के अंदर भूकम्प के उद्गम स्थान से

(b) भूकम्प उद्गम केन्द्र के ऊपर भूपृष्ठीय बिन्दु से

(c) वह स्थान जहाँ भूकम्प का अनुभव किया जाता है।

(d) भू-पृष्ठ का वह बिन्दु जहाँ पहला झटका अनुभव किया जाता है।

[read more] (d) भू-पृष्ठ का वह बिन्दु जहाँ पहला झटका अनुभव किया जाता है।, (b) भूकम्प उद्गम केन्द्र के ऊपर भूपृष्ठीय बिन्दु से  [/read]

7. धरातल के जिस स्थान पर सर्वप्रथम भूकम्प का अनुभव किया जाता है, कहलाता है-

(a) भूकम्प मूल

(b) भूकम्प अधिकेन्द्र

(c) भूकम्प केन्द्र

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (b) भूकम्प अधिकेन्द्र [/read]

8. भूकम्प में धरातलीय तरंगें होती है-

(a) गौण तरंगें

(b) L तरंगे

(c) प्राथमिक तरंगें

(d) प्राथमिक एवं गौण तरंगें

[read more] (b) L तरंगे [/read]

9. निम्नलिखित में से कौन-सी भूकम्पीय तरंगें सर्वाधिक क्षति पहुँचाती है?

(a) प्राथमिक

(b) द्वितीयक

(c) दीर्घ पृष्ठीय

(d) क्षितिजीय

[read more] (c) दीर्घ पृष्ठीय [/read]

10. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

(a) भूकम्प के कारण समान बर्बादी वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समभूकम्प रेखा कहा जाता है।

(b) समभूकम्प रेखा का आकार नियमित (Regular) होता है।

(c) उन स्थानों को मिलाने वाली रेखा जहाँ भूकम्प एक साथ आते हैं, सहभूकम्प रेखा कहलाती है।

(d) भूकम्पीय तरंगों को अंकित करने वाला यंत्र सिस्मोग्राफ कहलाता है।

[read more] (b) समभूकम्प रेखा का आकार नियमित (Regular) होता है। [/read]

11 . निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

(a) रिक्टर स्केल भूकम्प की तीव्रता मापने का एक यंत्र है।

(b) रिक्टर स्केल एक लोगारिथमिक स्केल होता है।

(c) यह स्केल भूकम्प की ऊर्जा को मापता है।

(d) इनमें से कोई नहीं।

[read more] (d) इनमें से कोई नहीं। [/read]

12. अन्तः सागरीय भूकम्पों द्वारा उत्पन्न समुद्री लहरों को क्या कहा जाता है?

(a) सर्क

(b) सुनामी

(c) स्केल

(d) केम

[read more] (b) सुनामी [/read]

13. सुनामी का मुख्य कारण निम्नलिखित में से कौन है?

(a) ज्वालामुखी

(b) भूकम्प

(c) चक्रवात

(d) प्रतिचक्रवात

[read more] (b) भूकम्प [/read]

14. विश्व के सर्वाधिक (63% के लगभग) भूकम्प निम्न में से किस पेटी में आते हैं?

(a) परिप्रशान्त महासागरीय पेटी

(b) मध्य महाद्वीपीय पेटी

(c) मध्य अटलांटिक पेटी

(d) हिन्द महासागरीय पेटी

[read more] (a) परिप्रशान्त महासागरीय पेटी [/read]

15. भूकम्पों का प्रभाव महाद्वीपीय भागों के अतिरिक्त महासागरीय भागों पर भी पड़ता है और इससे महासागरों में भयंकर लहरें उत्पन्न होती है। इन लहरों को किस नाम से जाना जाता है?

(a) ज्वार भित्ति

(b) सीचेस लहरें

(c) सदाशिव

(d) सुनामी

[read more] (d) सुनामी [/read]

16. सुनामी किस भाषा का शब्द है?

(a) जर्मन

(b) पुर्तगाली

(c) जापानी

(d) चीनी

[read more] (c) जापानी [/read]

17. किस देश में भूकम्प से उत्पन्न विनाशकारी समुद्री तरंगों को सुनामी कहते हैं?

(a) मैक्सिको

(b) जापान

(c) ब्रिटेन

(d) न्यूजीलैंड

[read more] (b) जापान [/read]

18. तरल पदार्थों से होकर न गुजर सकने वाली भूकम्पीय लहर कौन-सी है?

(a) P-तरंगें

(b) L-तरंगें

(c) S-तरंगें

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (c) S-तरंगें [/read]

19. रिक्टर स्केल मापता है-

(a) भूकम्प की तीव्रता

(b) सापेक्षिक आर्द्रता

(c) वर्षा की मात्रा

(d) ताप

[read more] (a) भूकम्प की तीव्रता [/read]

20. सिस्मोग्राफ किसे मापने के लिए काम में लाया जाता है?

(a) सागरीय तरंगों को

(b) ज्वार-भाटे को

(c) भूकम्पीय तरंगों को

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (c) भूकम्पीय तरंगों को [/read]

21. भूकम्प का अध्ययन कहलाता है-

(a) सिस्मोलॉजी

(b) टेराटोलॉजी

(c) पीडोलॉजी

(d) आइकोनोलॉजी

[read more] (a) सिस्मोलॉजी [/read]

22. समान भूकम्पीय तीव्रता अर्थात् समान बर्बादी वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को क्या कहा जाता है?

(a) समभूकम्प रेखा

(b) सहभूकम्प रेखा

(c) समताप रेखा

(d) समदाब रेखा

[read more] (a) समभूकम्प रेखा [/read]

23. किसी क्षेत्र के उन स्थानों को मिलाने वाली रेखा जहाँ भूकम्प एक साथ अनुभव किया जाता है, कहलाती है-

(a) समभूकम्प रेखा

(b) सहभूकम्प रेखा

(c) आइसोपाइक्निक रेखा

(d) आइसोगोनल रेखा

[read more] (b) सहभूकम्प रेखा [/read]

24. समभूकम्प रेखा (Iso Seismal Line) का आकार प्रायः होता है-

(a) नियमित

(b) अनियमित

(c) वृत्ताकार

(d) एकरेखीय

[read more] (b) अनियमित [/read]

25. भूकम्प मापी यंत्र के अनुसार एक वर्ष की अवधि में सामान्यतः कितने बार भूकम्प आते हैं?

(a) 5000 से 7000

(b) 8000 से 10000

(c) 10000 से 12000

(d) 1200 से 15000

[read more] (b) 8000 से 10000 [/read]

26. अग्नि वलय (Circle of Fire) प्रशान्त महासागर के उस विशाल क्षेत्र को कहते हैं जहाँ कुल भूकम्प का… .आता है।

(a) 68%

(b) 40%

(c) 30%

(d) 25%

[read more] (a) 68% [/read]

27. भूकम्पीय तरंगों का मापन निम्नलिखित में से किस यंत्र द्वारा किया जाता है?

(a) बैरोग्राफ

(b) क्लाइमोग्राफ

(c) सीस्मोग्राफ

(d) इर्गोग्राफ

[read more] (c) सीस्मोग्राफ [/read]

28. निम्नलिखित में से कौन-सी घटना धरातल पर नहीं घटित होती है?

(a) ज्वालामुखी

(b) अपक्षय

(c) अपरदन

(d) सुनामी

[read more] (d) सुनामी [/read]

10. Volcanic Action (ज्वालामुखी क्रिया)

10. Volcanic Action

(ज्वालामुखी क्रिया)



ज्वालामुखी क्रिया:-

         ज्वालामुखी क्रिया दो शब्दों सेे मिलकर बना है। प्रथम ज्वालामुखी, द्वितीय क्रिया। पुनः ज्वालामुखी शब्द को भी दो भागों में बांटा जा सकता है:- प्रथम ज्वाला द्वितीय मुखी।

जब पृथ्वी के भूपटल में किसी भी प्रकार का छिद्र का निर्माण होता है तो उसे मुख कहते है, जब उस मुख से पृथ्वी के दुर्बल मण्डल का मैग्मा पदार्थ जल एवं बाष्प बाहर की ओर निकलता है तो उसे ज्वाला कहते है। ज्वाला और मुख को सम्मिलित रूप से ज्वालामुखी कहते है।

क्रिया का तात्पर्य विभिन्न प्रकार के प्रक्रियाओं से है। ज्वालामुखी उदगार में निकलने वाला पदार्थ भुपटल के ऊपर निकलने का प्रयास करता है या निकल जाता है पुनः निकलकर अनेक प्रकार के स्थलाकृतियों को जन्म देता है। इस सम्पूर्ण परिघटना को ही ज्वालामुखी क्रिया (Volcanism) कहा जाता है।

ज्वालामुखी क्रिया शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग वारसेस्टर महोदय ने किया था। उन्होनें ज्वालामुखी क्रिया को परिभाषित करते हुए कहा कि “ज्वालामुखी क्रिया एक ऐसी प्रक्रिया है कि जिसमे गर्म पदार्थ की धरातल के तरफ या धरातल के ऊपर आने वाली सभी प्रक्रिया को शामिल किया जाता है।”

परिभाषा से स्पष्ट होता है कि ज्वालामुखी क्रिया दो प्रकार का होता  है- प्रथम आन्तरिक ज्वालामुखी की क्रिया दूसरा बाह्य ज्वालामुखी की क्रिया।

आन्तरिक ज्वालामुखी क्रिया में गर्म पदार्थ अपने स्रोत क्षेत्र से ऊपर उठकर धरातल के नीचे ही ठोस होने की प्रवृत्ति रखता है जबकि बाह्य ज्वालामुखी क्रिया में गर्म पदार्थ धरातल के ऊपर प्रकट होकर अनेक स्थलाकृतियां को जन्म देता है। 

ज्वालामुखी क्रिया में निकलने वाला पदार्थ- ज्वालामुखी उदगार के दौरान निकलने वाला पदार्थ को तीन श्रेणी में विभाजित करते है:-

(i) गैस तथा जलवाष्प

(ii) विखण्डित पदार्थ

(iii) लावा पदार्थ

(i) गैस तथा जलवाष्प

सर्वप्रथम जब ज्वालामुखी का उदगार होता है तो गैस एवं जलवाष्प धरातल को तोड़कर सबसे पहले तेजी से बाहर निकलते है।

इसमें जलवाष्प की मात्रा सर्वाधिक होती है।

सम्पूर्ण गैस का 60 से 90 प्रतिशत भाग जलवाष्प का होता है।

इसमें जलवाष्प के अलावा कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2), सल्फर डाई ऑक्साइड (SO2), जैसे गैस भी मौजूद रहते है।

(ii) विखण्डित पदार्थ

विखण्डित पदार्थ में बारीक धूलकण से लेकर बड़े बड़े चट्टानी टुकड़ों को शामिल किया जाता है।

इसका मुख्य स्रोत भूपटलीय चट्टान होता है।

जब गैस निलकना मंद पड़ता है तो ये विखण्डित चट्टानें धरातल पर पुनः वापस आने लगते है जिससे ऐसा लगता है कि अकाश से बम्ब बरसाए जा रहे है।

ज्वालामुखी उदगार के दौरान अकाश से नीचे गिरने वाले बड़े-बड़े चट्टानी टुकड़ों को “ज्वालामुखी बम्ब” कहा जाता है।

इसका व्यास कुछ इंच से लेकर कुछ फीट तक होता है।

जब विखण्डित चट्टानों के आकार मटर के दाना या अखरोट के आकार का होता है तो उसे ‘लैपिली’ कहते है।

जब टुकड़ों का आकार लैपिली से थोड़े छोटे हो तो उसे स्कोरिया कहते है।

जब विखण्डित चट्टानों के आकार अत्यंत बारीक होता है तो उसे ज्वालामुखी राख एवं धूलकण कहते है।

जब लावा का जमाव का आकार त्रिकोण के समान होता है तो उसे ब्रेसिया कहा जाता है।

(iii) लावा पदार्थ

ज्वालामुखी उद्गार के दौरान सबसे अंत में लावा या मैग्मा पदार्थ बाहर निकलता है।

लावा पदार्थ का स्रोत दुर्बलमण्डल में मिलने वाला मैग्मा चैम्बर या ‘बेनी ऑफ जोन’ होता है।

ये लावा रासायनिक दृष्टि से दो प्रकार के होते है- प्रथम अम्लीय लावा तथा द्वितीय क्षारीय लावा

➤ अम्लीय लावा का रंग पीला भार में हल्का लेकिन गाढ़ा होता है। अर्थात इसमें सिलिका की मात्रा अधिक होती है। जिसके कारण अति उच्च तापमान पर पिघलता है।

➤ क्षारीय लावा का रंग गहरा तथा काला होता है। इसमें सिलिका की मात्रा कम होने के कारण शीघ्र पिघलने की क्षमता रखता है, यह पतला और शीघ्र जमकर ठोस रूप धारण करने वाला होता है।

जब लावा पदार्थ पानी के अंदर जमकर ठोस हो जाता है तो उसे ‘टफ(Tuff)’ कहते है 

जब लावा पदार्थ धरातल के ऊपर आकर ठोस तथा छिद्रदार हो जाता है तो उसे ‘प्यूमिस (Pumiss)’ कहते है।

ज्वालामुखी उदगार के कारण 

         ज्वालामुखी उदगार के चार कारण है-

(1) भूगर्भ में ताप का अधिक होना,

(2) अत्यधिक ताप तथा दबाव के कारण लावा की उत्पति

(3) गैस तथा वाष्प की उत्पति,

(4) लावा पदार्थ का ऊपर की ओर आना।

1. भूगर्भ में ताप की वृद्धि-

भूपटल के नीचे की ओर जाने पर प्रति 32 मीटर पर 1℃ तापमान बढ़ जाता है। इस कारण पृथ्वी के आन्तरिक भाग का तापमान अत्यधिक होता है।

तापमान में बढ़ोतरी होना पृथ्वी के आन्तरिक भागों में रेडियोसक्रिय पदार्थों के उपस्थिति का होना बतलाया जाता है।

पृथ्वी के अंदर तापमान बढ़ने से चट्टानें पिघल जाती है और पिघलकर हल्की हो जाती है। यही पिघला हुआ पदार्थ धरातल को तोड़कर बाहर निकलता है या भूपटल के नीचे ही ठंडा हो जाता है तो ज्वालामुखी उत्पन्न होता है।Volcano2. अत्यधिक ताप एवं दबाव के कारण लावा की उत्पति-

पृथ्वी के धरातल से ज्यों-ज्यों पृथ्वी के केन्द्र की ओर जाते है त्यों-त्यों पृथ्वी के दबाव में बढ़ोतरी होती जाती है।

ज्यों-ज्यों दबाव बढ़ता है त्यों-त्यों तापमान में बढ़ोतरी होती जाती है।

इसी तापमान की बढ़ोतरी से चट्टानें पिघलकर मैग्मा पदार्थ का निर्माण करती है।

यह मैग्मा पदार्थ जब अपने स्रोत क्षेत्र से बाहर आने का प्रयास करता है तो ज्वालामुखी का उदगार होता है।

3. गैस तथा वाष्प की उत्पति-

ज्वालामुखी उदगार के समय कई तरह की गैस एवं जलवाष्प निकलती है।

ज्वालामुखी गैसों की उत्पति के विषय में उनेेेक मत प्रचलित है। जैसे- जब भूमिगत जल रिसकर पृथ्वी के दुर्बलमण्डल में पहुंच जाते है तो अत्यधिक ताप के कारण बड़े पैमाने पर गैस तथा जलवाष्प का निर्माण होता है।

दूसरे मत के अनुसार वर्षा जल जब संरोधी चट्टानों के सहारे धरातल के अंदर पहुंचते है तो भी बड़े पैमाने पर गैस एवं जलवाष्प का  निर्माण होता है। भूपटल के नीचे निर्मित ये जलवाष्प एवं गैस ही भूकम्पीय उदगार को जन्म देते है।

4. लावा पदार्थ का ऊपर की ओर अग्रसर होना-

पृथ्वी के अंदर स्थित दुर्बलमण्डल में मैग्मा पदार्थ स्थायी रूप से मौजूद है।

दुर्बलमण्डल के चारों ओर स्थलमण्डल अवस्थित है।

जब स्थलमण्डल में पर्वत निर्माणकारी भूसंचलन या भूकंप या किसी कारण वश स्थलमण्डल कमजोर पड़ता है तो स्वत: मैग्मा पदार्थ धरातल से बाहर निकलने का प्रयास करते है और ज्वालामुखी उदगार को जन्म देते है।  

प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त ज्वालामुखी उदगार की व्याख्या करने वाला सबसे सटीक संकल्पना है। इस संकल्पना के अनुसार पृथ्वी अनेक प्लेटों से निर्मित है।Volcano

ये प्लेट संवहन तरंगों के कारण हमेशा गतिशील रहते है।

इन प्लेटों में तीन प्रकार के सीमा का निर्माण होता है:-

I. निर्माणकारी सीमा या अपसरण सीमा

II. विनाशकारी  या अभिसरण सीमा

III. संरक्षी सीमा

विश्व के अधिकांश ज्वालामुखी के प्रमाण इन्हीं सीमाओं के सहारे मिलते है।

अपसरण सीमा में उठते हुए संवहन तरंग के कारण दो प्लेटें एक दूसरे से दूर खिसकती है जिससे लम्बे दरार का निर्माण होता है। इन दरारों से मैग्मा चैंबर का लावा पदार्थ बाहर निकलता है और ज्वालामुखी उदगार को जन्म देता है। मध्य अटलांटिक कटक के सहारे इसी प्रक्रिया से ज्वालामुखी का उदगार हो रहा है। 

विश्व के लगभग 15 प्रतिशत ज्वालामुखी रचनात्मक प्लेट किनारों के सहारे पाये जाते हैं।

विश्व के लगभग 80 प्रतिशत ज्वालामुखी विनाशी प्लेट किनारों के सहारे पाये जाते हैं।

इनके अलावा कुछ ज्वालामुखी का उद्भेदन प्लेट के आन्तरिक भाग में भी होता है।

विनाशात्मक प्लेट सीमा का निर्माण नीचे गिरते हुए संवहन तरंगों के कारण होता है।

प्रशान्त महासागर के चारों ओर इस प्रकार का सीमा का निर्माण हुआ है।

विनाशात्मक प्लेट सीमा के सहारे अधिक घनत्व वाले महासागरीय प्लेट कम घनत्व वाले महाद्वीपीय प्लेट के अंदर प्रविष्ट करने की प्रवृति रखते है।

महासागरीय प्लेट का नीचे की ओर प्रक्षेपित भाग पिघलकर “बेनी ऑफ जोन” का निर्माण करते है।

बेनी ऑफ जोन का ही मैग्मा पदार्थ धरातल से ऊपर आकर ज्वालामुखी उदगार को जन्म देता है। 

कभी-कभी संरक्षी सीमा के सहारे भी ज्वालामुखी का उदगार होता है- जैसे जापान के होंशु द्वीप के सहारे दो महासागरीय प्लेट आपस में रगड़ खा रहे है। एक प्लेट जापान सागर प्लेट कहलाता है तो दूसरा प्लेट  प्रशान्त महासागरीय प्लेट कहलाता है।

प्रशान्त महासागरीय प्लेट का सापेक्षिक घनत्व अधिक होने के कारण जापान सागर प्लेट के नीचे प्रक्षेपित हो गया है और होन्शु द्वीप के नीचे ‘बेनी ऑफ जोन’ का निर्माण हुआ है।

Volcano

यहां जापान सागर प्लेट स्थिर है जबकि प्रशांत प्लेट ही गतिशील है।

इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि प्लेट टेक्टोनिक संकल्पना ज्वालामुखी उदगार का व्याख्या करने वाला सबसे सटीक मत है।

ज्वालामुखी क्रिया का प्रकार

         ज्वालामुखी क्रिया दो प्रकार का होता है-

A. केंद्रीय उदगार वाले ज्वालामुखी क्रिया:-

इस प्रकार के उदगार में भूपटल में एक सँकरा छिद्र का निर्माण होता है और इन्ही छिद्रों के सहारे ज्वालामुखी पदार्थ बाहर की ओर निकलते है।

इस प्रकार के उदगार में मुख का व्यास कुछ 100 फीट से अधिक नहीं होता है।

मुख का आकार लगभग गोल होता है। जिससे गैस, लावा एवं विखण्डित पदार्थ अत्यधिक भयंकर विस्फोट के साथ बाहर निकलते हैं तथा आकाश में काफी ऊँचाई तक पहुंच जाते हैं। ऐसे उदगार को ही केंद्रीय ज्वालामुखी उदगार कहते है।

इस प्रकार का उदगार काफी विनाशकारी होता है। उदगार के समय भयंकर भूकम्प आती है।

केन्द्रीय ज्वालामुखी उदगार को भी चार भागों में बांटा गया है:-

1. हवाईतुल्य ज्वालामुखी उदगार

2. स्ट्राम्बोली तुल्य ज्वालामुखी उदगार

3. वोल्केनियन तुल्य ज्वालामुखी उदगार

4. पिलियन तुल्य ज्वालामुखी उदगार

1. हवाई तुल्य ज्वालामुखी उद्गार- 

इस प्रकार का ज्वालामुखी का उद्गार काफी शांत तरीके से होता है। क्योंकि इसमें निकलने वाला मैग्मा पदार्थ काफी पतला तथा गैसों की मात्रा कम होती है। इस कारण विस्फोट तीव्र नहीं होता है।

इसमें निकलने वाला विखण्डित पदार्थ नगण्य होता है।

उद्गार के समय लावा के छोटे-छोटे लाल पिंड गैसों के साथ ऊपर उछाल दिए जाते है जिसे हवाई द्वीप के निवासी “अग्नि देवी पिलीकेश राशि” कहते है।

इस तरह का उद्गार खासकर हवाई द्वीप पर देखने को मिलता है, इसीलिए इसे हवाईयन प्रकार का ज्वालामुखी कहते है।Volcano

2. स्ट्राम्बोली तुल्य ज्वालामुखी उद्गार– 

हवाईयन के तुलना में ये ज्यादा विस्फोटक होता है।

➤ इसमें तरल लावा पदार्थ एवं अन्य विखण्डित पदार्थ उसके तुलना में अधिक निकलते है।

उदगार के समय विखण्डित पदार्थ काफी ऊँचाई पर चले जाते है और जाकर पुनः क्रेटर में गिरते रहते है।

इस प्रकार का उदगार इटली के लिपारी द्वीप पर स्थित स्ट्राम्बोली ज्वालामुखी में पाया जाता है, इसीलिए इसे स्ट्राम्बोली तुल्य ज्वालामुखी उदगार कहते है।Volcano

3. वोल्केनियन ज्वालामुखी उदगार–

इस प्रकार का उदगार काफी भयंकर एवं विस्फोटक होता है।

इससे निकलने वाला लावा काफी चिपचिपा एवं लसदार होता है। जिसके कारण दो उदगार के बीच यह ज्वालामुखी छिद्र पर जमकर ढक देता है। जिसके कारण ज्वालामुखी नली में बड़ी मात्रा में गैस एवं जलवाष्प जमा हो जाते है जब विस्फोट होता है तो काफी तीव्रता के साथ बाहर निकलते है।

इसमें गैस बाहर निकलने के बाद यह आसमान में फूलगोभी के समान दिखाई देता है।

इसका नामांकरण लीपारी द्वीप पर स्थित वोल्केनो पर्वत के नाम पर किया गया है।Volcano

4. पीलियन तुल्य ज्वालामुखी उदगार-

यह उदगार सबसे अधिक विस्फोटक एवं भयंकर होता है।

इसमें निकलने वाला लावा सबसे अधिक चिपचिपा एवं लसदार होता है।

➤ इसमें विस्फोट के समय काफी तीव्रता से आवाज उत्पन्न होता है।

8 May,1902 ई० को वेस्टइंडीज में स्थित पिल्ली ज्वालामुखी के भयंकर विस्फोट के आधार पर इसे पीलियन ज्वालामुखी उदगार कहते है।

1883 में हुआ क्राकातोआ विस्फोट (जावा और सुमात्रा द्वीप के बीच में) पीलीयन प्रकार का विस्फोट था। यह अब तक का सबसे भयंकर ज्वालामुखी विस्फोट का उदाहरण है।

         कुछ विद्वान एक अन्य प्रकार के विसुवियस तुल्य ज्वालामुखी उदगार भी मानते है।

इस प्रकार के उदगार का पहला अध्ययन प्लिनी (इटली) ने किया था, इसलिए इसे प्लिनियन प्रकार का ज्वालामुखी उद्गार भी कहते है।

यह भी काफी विस्फोटक होता है लेकिन इसमें लावा पदार्थ काफी ऊँचाई तक पहुंच जाते है और ज्वालामुखी बादल का आकार गोलाकार हो जाता है।

Volcano

(B) दरारी उदभेदन वाले ज्वालामुखी–

ब ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान गैस की मात्रा कम और लावा की मात्रा अधिक होती है तो भूपटल में दरार का विकास होता है और उससे लावा निकलकर ठोस होने की प्रवित्ति रखती है तो इसे ही दरारी उदभेदन वाले ज्वालामुखी कहते है।

इससे निकलने वाला लावा प्रायः क्षारीय (Basic) प्रकार का होता है।

कोलम्बिया का पठार (USA), दक्कन का पठार दरारी उदगार के प्रमुख उदाहरण है।

ज्वालामुखी स्थलाकृति

      ज्वालामुखी क्रिया से मुख्यत: दो प्रकार के स्थलाकृति का निर्माण होता है।

1. आन्तरिक ज्वालामुखी स्थलाकृति और

2. बाह्य ज्वालामुखी स्थलाकृति।

1. आन्तरिक ज्वालामुखी स्थलाकृति-

 जब मैग्मा पदार्थ अपने स्रोत क्षेत्र से ऊपर उठकर भूपटल के नीचे ही ठंडा होने की प्रवृति रखता है, तब उससे आन्तरिक ज्वालामुखी स्थलाकृति का निर्माण होता है। जैसे–Volcano

 जब मैग्मा पदार्थ अपने स्रोत क्षेत्र से ऊपर उठकर लम्बत ठोस होता है तो डाइक, क्षैतिज ठोस होता है तो सिलजब उत्तल दर्पण के समान ठोस होता है तो लैकोलिथ, जब अवतल दर्पण के समान ठोस होता है तो लोपोलिथ, जब तरंग के समान ठोस होता है तो फैकोलिथ स्थलाकृति का निर्माण होता है।

 इसी तरह जब मैग्मा पदार्थ अपने स्रोत क्षेत्र से ऊपर उठकर एक गुम्बद के समान ठोस हो जाते है तो उससे बैथोलिथ का निर्माण होता है।

2. बाह्य स्थलाकृति-

     जब गर्म पदार्थ भूपटल को तोड़कर बाहर निकलती है तो निम्नलिखित स्थलाकृति का निर्माण करते है:-

(i) क्रैटर- वैसा ज्वालामुखी छिद्र जिसका व्यास कम हो तथा समय-समय पर लावा निकलता रहता हो उसे क्रैटर कहते है,

(ii) कोल्डेरा- जिस ज्वालामुखी के छिद्र का व्यास बहुत अधिक हो तथा लावा निकलना बंद हो गया हो तो उसे कोल्डेरा कहते है।

 अमेरिका का ओरेगन झील और भारत का लोनार झील क्रैटर का उदाहरण है जबकि किलिमंजारो पर्वत के ऊपर तथा भारत के पुष्कर झील कोल्डेरा का उदाहरण है।

लुनार झील

पुष्कर झील

(iii) सोल्फतारा और धुँआरा- जब ज्वालामुखी उदगार के बाद लावा निकलना बन्द हो जाता है तो लम्बे समय तक गैस एवं जलवाष्प निकलते रहते है तो उसे धुँआरा कहते है लेकिन जिस धुँआरे में गंधक की मात्रा अधिक होती है तो उसे सोल्फतारा कहते है।

 अलास्का के कटमई ज्वालामुखी के पास 10000 (दस हजार) धुँआरों की घाटी, न्यूजीलैण्ड के प्लेनेटी के खाड़ी में व्हाइट टापू का धुँआरा, ईरान में कोह सुल्तान का धुँआरा का विकास हुआ है।

(iv) गीजर यह एक ऐसी ज्वालामुखी स्थलाकृति है जिसमें भिन्न-भिन्न समयांतराल पर गर्म जलवाष्प फव्वारे के रूप में बाहर निकलते है।

 इसका सबसे अच्छा उदाहरण USA के वायोमिंग राज्य में स्थित ओल्डफेथफुल गीजर है।

 इसी तरह आइसलैंड  के द ग्रेट गीसिर और न्यूजीलैंड के वायमान्यू गीजर प्रसिद्ध है।

(v) गर्म जल के सोते– यह एक ऐसी ज्वालामुखीय स्थलाकृति है, जिसके मुख से गर्म पानी बाहर निकलता रहता है। जैसे- राजगीर का सूर्य कुंड, नानक कुंड, हजारीबाग का सूर्य कुंड, सीताकुंड और मुंगेर का सीताकुंड प्रसिद्व है।

(vi) ज्वालामुखी पठार एवं मैदान- दरारी ज्वालामुखी उदगार के समय पर्याप्त मात्रा में क्षारीय लावा धरातल पर प्रकट होकर ठंडा हो जाते है और पठार जैसी स्थलाकृति का निर्माण करते है। 

 भारत का दक्कन का पठार, USA का कोलम्बिया का पठार, इथोपिया का पठार और अनातोलिया का पठार इसका उदाहरण है।

(vii) ज्वालामुखी पर्वत- जब केंद्रीय ज्वालामुखी उदगार होती है तो उससे पर्याप्त मात्रा में अम्लीय लावा बाहर की ओर निकलती है जो काफी गाढ़ा होता है। इनके जमाव से निर्मित पर्वतीय स्थलाकृति को ज्वालामुखी पर्वत कहते है। ज्वालामुखी पर्वत तीन प्रकार का होता है। 

1. सक्रीय/जीवित ज्वालामुखी पर्वत-

       वैसा ज्वालामुखी पर्वत जिसके क्रेटर से वर्त्तमान समय में भी मलवा बाहर निकल रहा हो। विश्व में कुल 500 जीवित ज्वालामुखी पर्वत है। जैसे– इटली का एटना, स्ट्रोम्बोली इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। “स्ट्रोम्बोली को भूमध्यसागर का प्रकाश स्तम्भ” कहते है। 

2. शांत ज्वालामुखी पर्वत-

     जब ज्वालामुखी का उदगार पूर्णतया समाप्त हो गया हो या भविष्य में भी उदगार की कोई संभावना न हो, उसे शांत या मृत ज्वालामुखी कहते है। जैसे– इरान का कोह-सुल्तान, म्यंनमार का माउंट पोपो मृत ज्वालामुखी के उदाहरण है।

3. प्रसुप्त ज्वालामुखी पर्वत-

      वैसा ज्वालामुखी पर्वत जिनके क्रेटर से वर्तमान समय में लावा का उत्सर्जन नहीं हो रहा हो लेकिन भविष्य में लावा का उत्सर्जन  की पूरी संभावना हो, उसे प्रसुप्त या सुषुप्त ज्वालामुखी पर्वत कहते है। जैसे- इटली का विसुवियस, जावा व सुमात्रा के मध्य क्राकाटोवा, इक्वेडोर का चिम्बराजों और चिली का एकांकागुआ इत्यादि।

(viii) शंकु- केन्द्रीय ज्वालामुखी उदगार के दौरान निकले विखण्डित पदार्थों के निक्षेपण से शंकु का निर्माण होता है। शंकु कई प्रकार का होता है। जैसे:-

1. सिंडर शंकु Volcano

जैसे – म्यांमार का प्यूमा शंकु

2. मिश्रित शंकु

Volcano

जैसे- जापान का फ्यूजियामा

3. सैटेलाइट शंकु

Volcanic Action

सैटेलाइट शंकु

जैसे- जापान का फ्यूजियामा

विश्व में ज्वालामुखी का वितरण

        विश्व में ज्वालामुखी वितरण का एक निश्चित क्रम है जिसे नीचे की शीर्षक में चर्चा की जा रही है।

1. परिप्रशान्त मेखला के सहारे मिलने वाला ज्वालामुखी–

              यह मेखला प्रशांत महासागर के सहारे चारों ओर स्थित है, इसे “प्रशांत अग्निवलय” के नाम से भी जानते है। विश्व में सर्वाधिक ज्वालामुखी इसी क्षेत्र में मिलते है। जैसे जापान का फ्यूजियामा, फिलीपींस का माउंट टाल, USA का माउंट सस्ता, इक्वेडोर का कोटोपैक्सी और चिम्बरजो, अर्जेंटीना का एकांकागुआ, कनाडा का माउंट रेनजल इत्यादि।

        विश्व के अधिकांश ऊँचे ज्वालामुखी पर्वत एवं चोटियाँ इसी मेखला के सहारे मिलती है।       

2. मध्य महाद्वीपीय पेटी:-

           इस पेटी का विस्तार पूर्व में प्रशांत महासागर से लेकर पश्चिम में अटलांटिक महासागर के केनारी द्वीप तक हुआ है। यह हिमालय और आल्पस पर्वत से होकर गुजरती है। यह प्लेट अभिसरण का क्षेत्र है। हिमालय क्षेत्र में बाहरी ज्वालामुखी का प्रमाण मिलने की पूरी-पूरी संभावना है। जबकि इसी पेटी में स्थित भूमध्यसागरीय क्षेत्र में अनेक जीवित एवं प्रसुप्त ज्वालामुखी का प्रमाण मिलता है। जैसे- इटली का विसुवियस, स्ट्राम्बोली, एटना, एल्बुर्ज, ईरान का कोह-सुल्तान इत्यादि।

3. मध्य अटलांटिक कटक पेटी:

           यह पेटी अटलांटिक महासागर के मध्य भाग में उत्तर से दक्षिण दिशा से होकर गुजरती है। यह प्लेट अपसरण का क्षेत्र है। यहाँ पर लम्बे दरार का निर्माण हुआ है। जिससे बैसाल्टिक लावा बाहर निकलता है और ठंडा होकर मध्य अटलांटिक कटक को जन्म दिया है। जैसे- आइसलैंड का माउंट हेकला, माउंट लोकी, सक्रिय ज्वालामुखी है, जो मध्य अटलांटिक पेटी में ही पड़ते है।

4. अन्य क्षेत्र:-

     विश्व के कई ऐसे छोटे-छोटे क्षेत्र है जहाँ पर ज्वालामुखी उदगार का प्रमाण मिलता है। जैसे- अफ्रीका के पूर्वी भाग में निर्मित महान भ्रंश घाटी के सहारे तंजानिया का किलिमंजारो, केन्या का  माउंट केनिया पर्वत मिलते है। इसी तरह क्रिटैशियस काल में हुए लावा उदगार से दक्कन के पठार पर ज्वालामुखी का प्रमाण मिलता है तथा अंडमान एवं निकोबार में बैरन (सक्रिय) एवं नरकोंडम (प्रसुप्त) द्वीप ज्वालामुखी के ही उदहारण है।

        अतः उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विश्व के अधिकांश ज्वालामुखी के क्षेत्र प्लेट के किनारे पर अवस्थित है।

 विश्व के प्रमुख सक्रिय (Active) ज्वालामुखी

क्रम नाम  देश ऊँचाई (मीटर में)
1. कोटापैक्सी इक्वाडोर 5897
2. क्लूचेवस्काया रूस 4750
3. मौनालोआ हवाई द्वीप (USA) 4170
4. कैमरून कैमरून 4070
5. इरेबस (माउन्ट एर्बुस) रॉस द्वीप, अंटार्कटिका 3795
6. एटना सिसली,  इटली 3340
7. सेंट हेलेंस पर्वत  USA 2530
8. किलाउएला हवाई द्वीप (USA) 1277
9. स्ट्रोम्बोली इटली (लिपारी द्वीप /भूमध्य सागर) 925
10. बैरेन द्वीप  अंडमान-निकोबार (भारत)  354

 विश्व के प्रमुख सुषुप्त (Dormant) ज्वालामुखी

क्रम नाम  देश ऊँचाई (मीटर में)
1. विसुवियस इटली (नेपल्स की खाड़ी) 1277
2. क्राकाटाओ सुमात्रा व जावा द्वीप के मध्य, इंडोनेशिया 110
3. नारकोंडम अंडमान-निकोबार (भारत)  710
4. मेयाना फिलीपींस 2,463
5. फ्यूजीयामा जापान 3776

 विश्व के प्रमुख मृत (Dead or Extinct) ज्वालामुखी

क्रम नाम  देश ऊँचाई (मीटर में)
1. मौना केआ हवाई द्वीप (USA) 4,207 
2. माउंट फूजी जापान 3,776
3.

किलीमंजारो

केन्या (अफ्रीका) 5,895
4. देमबंद व कोह सुल्तान ईरान 5,610 व 2334
5. चिम्बराजो इक्वेडोर 6,263
6. पोपा म्यांमार 1,518
7. एकान्कागुआ (एंडीज पर्वतमाला ) अर्जेंटीना 6,961

 महाद्वीपों की सर्वोच्च ज्वालामुखी चोटियाँ

क्रम चोटी पर्वत श्रेणी महाद्वीप देश ऊँचाई (मीटर में)
1. ओजोस डेल सलाडो एंडीज दक्षिण अमेरिका चिली /अर्जेंटीना 6,893
2. किलीमंजारो किलिमंजारो अफ्रीका तंजानिया 5,895
3. एल्ब्रस काकेशस यूरोप रूस 5,642
4. पिको डे ओरिजाबा ट्रांसमेक्सिकन ज्वालामुखी बेल्ट उत्तरी अमेरिका मेक्सिको 5,636
5. देमबंद एल्बोर्ज एशिया ईरान 5,610
6. माउन्ट गिलुवे सदर्न उच्च भूमि प्रशांत ओशिनिया, आस्ट्रेलिया पापुआ न्यूगिनी 4,367
7. माउन्ट सिडले एक्जीक्यूटिव कमेटी श्रेणी अंटार्कटिका 4,285

 मानवीय क्रियाकलापों पर ज्वालामुखी का प्रभाव:

      मानवीय क्रियाकलापों को ज्वालामुखी सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से प्रभावित करता है।

1. मानवीय क्रियाकलापों पर ज्वालामुखी का सकारात्मक प्रभाव:

         मानवीय क्रियाकलापों पर ज्वालामुखियों के सकारात्मक प्रभाव निम्नलिखित हैं:-

 ज्वालामुखी से बहुत सारे नए भू-आकृतियों का निर्माण होता है। जैसे- क्रेटर और काल्डेरा झीलें, लावा मैदान, गेसर, ज्वालामुखीय पठार और ज्वालामुखी पर्वत।

 यह दुर्बलमंडल (Asthenosphere) से सतह पर सोना, लोहा, निकेल और मैग्नीशियम जैसे मूल्यवान तत्व को पृथ्वी के सतह पर लाता है। उदाहरण के लिए, दक्षिण अफ्रीका में जोहान्सबर्ग का सोना और कनाडा में सडबरी का निकेल निक्षेप ज्वालामुखी निक्षेपण के उदाहरण हैं।

आग्नेय शैल लावा के ठंडा होने के बाद बनता है, जिसका उपयोग निर्माण जैसी विभिन्न गतिविधियों के लिए किया जाता है।

 ज्वालामुखी हमें उपजाऊ भूमि प्रदान करते हैं। ज्वालामुखी की धूल और राख का जमाव भूमि को उपजाऊ बनाता है। उदाहरण के लिए, दक्कन ट्रैप की काली मिट्टी और जावा द्वीपों की उपजाऊ भूमि ज्वालामुखी द्वारा बनाई गई है।

 यह सुंदर दृश्य भी बनाता है और जिससे यह पर्यटकों को आकर्षित करता है।

यह पृथ्वी के आंतरिक भाग के बारे में भी बहुत सारी जानकारी प्रदान करता है।

 यह टेक्टोनिक प्लेट सीमाओं और प्लेटों की गति की स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

 यह भूतापीय ऊर्जा का एक संभावित स्रोत भी है। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, इटली और जापान जैसे कई देश भूतापीय ऊर्जा का उत्पादन कर रहे हैं।

2. मानवीय क्रियाकलापों पर ज्वालामुखी का नकारात्मक प्रभाव:

      मनुष्य पर ज्वालामुखी के नकारात्मक प्रभाव निम्नलिखित हैं:-

ज्वालामुखी की धूल और गैसें वातावरण को अपारदर्शी बना देती हैं जिससे वायु परिवहन मुश्किल हो जाता है, श्वसन रोग बढ़ जाता है और सूर्यातप को पृथ्वी की सतह तक पहुंचने से भी रोकता है अर्थात यह पृथ्वी को ठंण्डा करता है।

 ज्वालामुखी विस्फोट के बाद क्षेत्र में लावा का जमाव होने से वहाँ की जमीन को सरंध्र बनाती है जिससे क्षेत्र में पानी की कमी हो जाती है।

ज्वालामुखियों के अचानक फटने से मानव बस्ती, मानव जीवन और उसकी संपत्ति को काफी नुकसान होता  है। उदाहरण के लिए, माउंट वेसुवियस (जो एक ज्वालामुखी विस्फोट से बना है) ने 78 ई० में इटली में पोम्पेई शह को नष्ट कर दिया।

 जब समुद्र में ज्वालामुखियों का विस्फोट होता है तो यह आसपास के जल को गर्म कर देता है जिससे की वहाँ के जलीय जीवों पर विपरीत प्रभाव पड़ता हैं।



ज्वालामुखी से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर



1. निम्नलिखित में से किसे ‘प्रकृति का सुरक्षा वाल्व’ कहा जाता है?

(a) भूकम्प

(b) ओजोन गैस

(c) ज्वालामुखी

(d) नदियाँ

[read more] [c] ज्वालामुखी [/read]

2. ज्वालामुखियों के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है?

(a) यह पृथ्वी की क्रस्ट की एक नली होती है जिसके माध्यम से भू-गर्भ की पिघली चट्टानें (Magma) तथा अन्य पदार्थ बाहर आते हैं।

(b) अक्सर इनकी नली के चारों ओर गोल कीपाकार पहाड़ी अथवा पर्वतीय भाग का विस्तार हो जाता है।

(c) ज्वालामुखी जाग्रत, प्रसुप्त या शान्त तथा मृत तीन प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत किये जाते हैं।

(d) उपर्युक्त सभी।

[read more] [d] उपर्युक्त सभी [/read]

3. निम्नलिखित में से कौन-सा ज्वालामुखी के उन तीन वर्गों में शामिल नहीं है जो उनके उद्भव की आवृत्ति के आधार पर वर्गीकृत किये गये हैं?

(a) जाग्रत ज्वालामुखी

(b) प्रसुप्त ज्वालामुखी

(c) मृत ज्वालामुखी

(d) यौगिक ज्वालामुखी

[read more] [d] यौगिक ज्वालामुखी [/read]

4. किस ज्वालामुखी में अक्सर उद्गार होती रहती है?

(a) जाग्रत ज्वालामुखी

(b) प्रसुप्त ज्वालामुखी

(c) मृत ज्वालामुखी

(d) शान्त ज्वालामुखी

[read more] [a] जाग्रत ज्वालामुखी [/read]

5. किस ज्वालामुखी में ऐतिहासिक काल से उद्गार नहीं हुए हैं?

(a) जाग्रत ज्वालामुखी

(b) प्रसुप्त ज्वालामुखी

(c) शान्त ज्वालामुखी

(d) मृत ज्वालामुखी

[read more] [d] मृत ज्वालामुखी [/read]

6. लम्बे समय तक शान्त रहने के पश्चात् विस्फोट होने वाला ज्वालामुखी क्या कहलाता है?

(a) मृत ज्वालामुखी

(b) सुसुप्त ज्वालामुखी

(c) सक्रिय ज्वालामुखी

(d) निष्क्रिय ज्वालामुखी

[read more] [b] सुसुप्त ज्वालामुखी [/read]

7. पृथ्वी की पपड़ी (Earth’s Crust) की ठोस चट्टानों के नीचे जो पिघला हुआ पदार्थ होता है, जो कभी-कभी ज्वालामुखी के उद्गार के साथ धरती के ऊपरी तल पर आ जाता है, उसे क्या कहते हैं?

(a) मैग्मा

(b) मैक्युस

(c) मार्श

(d) मेसेटा

[read more] [a] मैग्मा [/read] 

8. ‘पेले अश्रु’ (Pale’s Tear) की उत्पत्ति कब होती है?

(a) भूकम्प के समय

(b) सेट विवर्तनिकी से

(c) ज्वालामुखी उद्‌गार के समय

(d) पर्वत निर्माण के समय

[read more] [c] ज्वालामुखी उद्‌गार के समय [/read]

9. ज्वालामुखी में जलवाष्प के अलावा मुख्य गैसें होती है

(a) नाइट्रोजन, ऑक्सीजन

(b) हाइड्रोजन, ऑक्सीजन

(c) कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन

(d) सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन

[read more] [d] सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन [/read]

10. ज्वालामुखी उद्‌गार के फलस्वरूप प्राप्त लावा एवं घरातलीय चट्टानों के टुकड़े को सम्मिलित रूप से क्या कहा जाता है?

(a) पायरोक्लास्ट

(b) ब्रेसिया

(c) लैपिली

(d) स्कोरिया

[read more] [a] पायरोक्लास्ट [/read]

11. क्रेटर तथा काल्डेरा स्थलाकृतियाँ निम्नलिखित में से किससे सम्बन्धित है?

(a) उल्कापात

(b) ज्वालामुखी क्रिया

(c) पवन क्रिया

(d) हिमानी क्रिया

[read more] [b] ज्वालामुखी क्रिया [/read]

12. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थलाकृति ज्वालामुखी क्रिया से सम्बन्धित नहीं है?

(a) क्रेटर

(b) काल्डेरा

(c) गैसर

(d) फियोर्ड

[read more] [d] फियोर्ड [/read] 

13. किस स्थलाकृति का निर्माण ज्वालामुखी क्रिया से नहीं होता है?

(a) लावा पठार

(b) लावा मैदान

(c) सिल तथा डाइक

(d) विसर्प

[read more] [d] विसर्प [/read]

14. डाइक क्या है?

(a) ज्वालामुखी निर्मित बहिवर्ती स्थलाकृति

(b) ज्वालामुखी निर्मित आन्तरिक स्थलाकृति

(c) तटीय स्थलाकृति

(d) हिमनद निर्मित स्थलाकृति

[read more] [b] ज्वालामुखी निर्मित आन्तरिक स्थलाकृति [/read]

15. काल्डेरा सम्बन्धित है-

(a) हिमनद से

(b) भूकम्प से

(c) ज्वालामुखी से

(d) अंश से

[read more] [c] ज्वालामुखी से [/read]

16. वह कौन-सा महाद्वीप है जहाँ एक भी ज्वालामुखी नहीं है?

(a) आस्ट्रेलिया

(b) अफ्रीका

(c) अंटार्कटिका

(d) यूरोप

[read more] [a] आस्ट्रेलिया [/read]

17. अग्नि वलय (Circle of Fire) किसे कहा जाता है?

(a) अटलांटिक परिमेखला

(b) हिन्द परिमेखला

(c) प्रशान्त परिमेखला

(d) आर्कटिक परिमेखला

[read more] [c] प्रशान्त परिमेखला [/read]

18. लैकोलिथ सम्बन्धित है-

(a) ज्वालामुखी से

(b) भूकम्प से

(c) पर्वत निर्माण से

(d) महाद्वीपीय प्रवाह से

[read more] [a] ज्वालामुखी से [/read]

19. पेण्टपॉट (Paintpot) के विषय में कौन-सा कथन सत्य है?

(a) ज्यालामुखी क्षेत्रों का एक छिद्र जिससे गर्म एवं गहरे रंग का द्रव्य कीचड़ (Mud) बाहर निकलता है।

(b) इसके साथ सामान्यतः गेसर पाये जाते हैं।

(c) पैण्टपॉट USA के वेलोस्टोन नेशनल पार्क में पाये जाते हैं।

(d) उपर्युक्त सभी।

[read more] [d] उपर्युक्त सभी। [/read]

20. विश्व में सर्वाधिक जागृत ज्वालामुखी कहाँ स्थित है?

(a) आन्ध्र महासागर के आस-पास

(b) प्रशान्त महासागर के आस पास

(c) हिन्द महासागर के आस पास

(d) आर्कटिक महासागर के आस पास

[read more] [b] प्रशान्त महासागर के आस पास [/read]

21. विश्व की अधिकांश ज्वालामुखी घटनाएँ घटित होती है-

(a) रचनात्मक प्लेट किनारों पर

(b) भ्रंश मेखला के सहारे

(c) मोड़दार मेखला के सहारे

(d) विनाशात्मक प्लेट किनारों पर

[read more] [d] विनाशात्मक प्लेट किनारों पर [/read]

22. विश्व के अधिकांश सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं-

(a) प्राचीन पठारी क्षेत्रों में

(b) गहन सागरीय मैदानों में

(c) नवीन मोड़दार पर्वतीय क्षेत्रों में

(d) मैदानी क्षेत्रों में

[read more] [c] नवीन मोड़दार पर्वतीय क्षेत्रों में [/read]

23. प्रशान्त महासागर के चारों तरफ स्थित ज्वालामुखी की पेटी को क्या कहा जाता है?

(a) नुइस अरडेंटे

(b) हार्नितो

(c) अग्नि श्रृंखला

(d) सोल्फ तारा

[read more] [c] अग्नि श्रृंखला [/read]

24. विश्व के अधिकांश सक्रिय ज्वालामुखी निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में पाये जाते हैं?

(a) मध्य महाद्वीपीय पेटी

(b) मध्ये अटलांटिक पेटी

(c) परिप्रशांत पेटी

(d) अफ्रीका की भ्रंश घाटी

[read more] [c] परिप्रशांत पेटी [/read]

25. निम्नलिखित में से कौन-सा ज्वालामुखी पर्वत का उदाहरण नहीं है?

(a) माउण्ट एटना

(b) माउण्ट फ्यूजीयामा

(c) माउण्ट ब्लैक

(d) माउण्ट किलिमंजारो

[read more] [c] माउण्ट ब्लैक [/read]

26. विश्व का सबसे ऊँचा ज्वालामुखी पर्वत कोटोपैक्सी कहाँ थित है?

(a) जापान 

(b) फिलीपीन्स

(c) इक्वेडोर

(d) हवाई द्वीप

[read more] [c] इक्वेडोर [/read]

27. स्ट्राम्बोली (Stramboli) किस प्रकार का ज्वालामुखी है?

(a) जाग्रत

(b) सुसुप्त

(c) मृत या शान्त

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] [a] जाग्रत [/read]

28. मृत ज्वालामुखी किलिमंजारो किस देश में स्थित है?

(a) इटली

(b) तंजानिया

(c) मैक्सिको

(d) सं० स० अ०

[read more] [b] तंजानिया [/read] 

29. फ्यूजीयामा किस देश का ज्वालामुखी पर्वत है?

(a) इटली

(b) जापान

(c) कीनिया

(d) मैक्सिको

[read more] [b] जापान [/read]

30. निम्नलिखित में से किस ज्वालामुखी को भूमध्य सागर का प्रकाश स्तम्भ (Light house of the Mediterranean sea) कहा जाता है?

(a) एटना

(b) क्राकाटाओ

(c) स्ट्राम्बोली

(d) विसुवियस

[read more] [c] स्ट्राम्बोली [/read]

31. फौसा मैग्ना है एक-

(a) ज्वालामुखी

(b) V-आकार की घाटी

(c) भ्रंशोत्थ पर्वत

(d) दरार घाटी

[read more] [a] ज्वालामुखी [/read]

32. एयर बस ज्वालामुखी कहाँ स्थित है?

(a) अटलांटिक महासागर

(b) आर्कटिक महासागर

(c) अण्टार्कटिका महाद्वीप

(d) अण्डमान निकोबार द्वी० स०

[read more] [c] अण्टार्कटिका महाद्वीप [/read]

33. माउण्ट एटना ज्वालामुखी किस द्वीप पर स्थित है?

(a) लिपारी

(b) सिसली

(c) कोर्सिका

(d) त्रिस्टान-डि-कुन्हा

[read more] [b] सिसली [/read]

34. निम्नलिखित में से कौन-सा एक ज्वालामुखी पर्वत नहीं है?

(a) फ्यूजीयामा

(b) एण्डीज

(c) विसुवियस

(d) वास्जेज

[read more] [d] वास्जेज [/read]

35. विसुवियस ज्वालामुखी किस देश में स्थित है?

(a) कीनिया

(b) इटली

(c) इण्डोनेशिया

(d) मैक्सिको

[read more] [b] इटली [/read]

36. मौनालोआ उदाहरण है-

(a) सक्रिय ज्वालामुखी

(b) प्रसुप्त ज्वालामुखी

(c) मृत ज्वालामुखी

(d) ज्वालामुखी क्षेत्र में पठार का

[read more] [b] प्रसुप्त ज्वालामुखी [/read]

37. क्राकाटाओ ज्वालामुखी निम्नलिखित में से किस द्वीप समूह में स्थित है?

(a) पापुआ न्यू गिनी में

(b) स्प्रैटली द्वीप समूह में

(c) इण्डोनेशिया में

(d) पश्चिमी द्वीप सुमह में

[read more] [b] स्प्रैटली द्वीप समूह में [/read]

38. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?

(a) एटना-इटली

(c) पोपा- म्यान्मार

(b) फ्यूजीवामा- जापान

(d) काकाटाओ- मलेशिया

[read more] [d] काकाटाओ- मलेशिया [/read]

39. किलिमंजारों पर्वत निम्नलिखित में से किस महाद्वीप में स्थित है?

(a) एशिया

(b) यूरोप

(c) अफ्रीका

(d) आस्ट्रेलिया

[read more] [c] अफ्रीका [/read]

40. एड मिस्टी (El-Misti) ज्वालामुखी किस देश में हैं?

(a) इटली

(b) चिली

(c) पेरू

(d) कोलम्बिया

[read more] [c] पेरू [/read]

41. ज्वालाखण्डाश्मी (Pyroclastics) क्या होता है?

(a) तप्त शैल के टुकड़े और लावा

(b) लावा स्तर

(c) निराविषी गैस

(d) भाप विस्फोटक

[read more] [a] तप्त शैल के टुकड़े और लावा [/read]

42. फिलीपीन्स में कौन-सा ज्वालामुखी लगभग छह शताब्दियों तक सुप्त रहने के बाद फट पड़ा था?

(a) माउण्ट बैरन

(b) माउण्ट फ्यूजीयामा

(c) माउण्ट उन्जेन

(d) माउण्ट पिनेटुबो

[read more] [d] माउण्ट पिनेटुबो [/read]

43. क्रेटर (ज्वालामुखी छिद्र) मुख्यतः किस आकृति के होते हैं?

(a) गोलाकार

(b) कीपाकार

(c) शंक्वाकार

(d) लम्बवत

[read more] [b] कीपाकार [/read]

44. निम्नलिखित में से कौन-सी गैस ज्वालामुखी उद्भेदन के समय नहीं निकलती है?

(a) ऑक्सीजन

(b) हाइड्रोजन

(c) अमोनिया

(d) कार्बन डाइऑक्साइड

[read more] [a] ऑक्सीजन [/read]

45. ज्वालामुखी के उद्‌गार के समय निकलने वाली गैस में जलवाष्प की मात्रा कितनी होती है?

(a) 40 से 50 प्रतिशत

(b) 50 से 60 प्रतिशत

(c) 60 से 70 प्रतिशत

(d) 80 से 90 प्रतिशत

[read more] [d] 80 से 90 प्रतिशत [/read]

46. विश्व का सर्वाधिक ज्वालामुखी वाला क्षेत्र है-

(a) फिलीपाइन द्वी० स०

(b) जापान द्वी० स०

(c) पश्चिमी द्वी० स०

(d) इण्डोनेशिया द्वी० स०

[read more] [a] फिलीपाइन द्वी० स० [/read]

47. निम्न में से कौन सुमेलित नहीं है?

(a) शान्त ज्वालामुखी- देमवन्द

(b) जाग्रत ज्वालामुखी- स्ट्राम्बोली

(c) प्रसुप्त ज्वालामुखी- क्राकाटाओ

(d) निष्क्रिय ज्वालामुखी- एटना

[read more] [d] निष्क्रिय ज्वालामुखी- एटना [/read]

48. स्ट्राम्बोली ज्वालामुखी कहाँ स्थित है?

(a) मार्टिनिक द्वीप में

(b) लक्षद्वीप में

(c) लिपारी द्वीप में

(d) हवाई द्वीप में

[read more] [c] लिपारी द्वीप में [/read]

49. विश्व का सबसे ऊँचा सक्रिय ज्वालामुखी निम्नलिखित में से कौन है? 

(a) एटना

(b) मौनालोआ

(c) चिम्बोरेजो

(d) कोटोपैक्सी

[read more] [d] कोटोपैक्सी [/read]

50. माउण्ट एरेबसो ज्वालामुखी निम्नलिखित में से किस महाद्वीप में स्थित है?

(a) यूरोप

(b) एशिया

(c) अण्टार्कटिका

(d) अफ्रीका

[read more] [c] अण्टार्कटिका [/read]

51. निम्नलिखित में से कौन प्रसुप्त ज्वालामुखी है?

(a) मौनालोआ

(b) स्ट्राम्बोली

(c) काकाटाओ

(d) चिम्बोरेजो

[read more] [c] काकाटाओ [/read]

उत्तर– (c) 

52. निम्नलिखित में से कौन सक्रिय ज्वालामुखी नहीं है?

(a) स्ट्राम्बोली

(b) किलिमंजारो

(c) एटना

(d) कोटोपैक्सी

[read more] [b] किलिमंजारो [/read]

53. निम्नलिखित में से कौन मृत ज्वालामुखी नहीं है?

(a) चिम्बोरेजो

(b) कोह सुल्तान

(c) मौनालोआ

(d) देमवन्द

[read more] [c] मौनालोआ [/read]

54. ‘दस हजार धुआँरों की घाटी’ (A valley of ten thousand smokes) पायी जाती है

(a) अलास्का में

(b) भूमध्य सागर में

(c) अंटार्कटिका में

(d) हवाई द्वीप समूह में

[read more] [a] अलास्का में [/read]

55. विस्फोट की तीव्रता के आधार पर ज्वालामुखियों के प्रकारों का सही आरोही क्रम है-

(a) हवाई तुल्य, स्ट्राम्बोली तुल्य, पीलियन तुल्य, वल्केनियन तुल्य

(b) हवाई तुल्य, स्ट्राम्बोली तुल्य, वल्केनियन तुल्य, पीलियन तुल्य

(c) हवाई तुल्य, वल्केनियन तुल्य, पीलियन तुल्य, स्ट्राम्बोली तुल्य

(d) हवाई तुल्य, वल्केनियन तुल्य, स्ट्राम्बोली तुल्य, पीलियन तुल्य

[read more] [b] हवाई तुल्य, स्ट्राम्बोली तुल्य, वल्केनियन तुल्य, पीलियन तुल्य [/read]

56. निम्नलिखित में से किस प्रकार के ज्वालामुखी में सर्वाधिक विस्फोटक उद्गार होता है?

(a) हवाई तुल्य

(b) पीलियन तुल्य

(c) स्ट्राम्बोली तुल्य

(d) वल्केनियन तुल्य

[read more] [b] पीलियन तुल्य [/read]

57. पेले के बाल (Pale’s hair) का सम्बन्ध निम्नलिखित में से किस प्रकार के ज्वालामुखी से है?

(a) टिलनियन तुल्य

(b) पीलियन तुल्य

(c) हवाई तुल्य

(d) वल्केनियन तुल्य

[read more] [c] हवाई तुल्य [/read]

58. निम्नलिखित में से किस प्रकार के ज्वालामुखी की आकृति गोभी के फूल जैसी होती है?

(a) वल्केनियन तुल्य

(b) पीलियन तुल्य

(c) स्ट्राम्बोली तुल्य

(d) हवाई तुल्य

[read more] [a] वल्केनियन तुल्य [/read]

59. निम्नलिखित में से किस प्रकार के ज्वालामुखी को पीलियन तुल्य ज्वालामुखी भी कहा जाता है? 

(a) वल्केनियन तुल्य

(b) विसुवियस तुल्य

(c) स्ट्राम्बोली तुल्य

(d) हवाई तुल्य

[read more] [b] विसुवियस तुल्य [/read]

60. पृथ्वी की सतह के नीचे द्रवीभूत शैल कहलाता है-

(a) बैसाल्ट

(b) लेकोलिय

(c) लावा

(d) मैग्मा

[read more] [d] मैग्मा [/read]

61. ‘कोटोपैक्सी’ कहाँ स्थित है? 

(a) इक्वाडोर

(c) द० अफ्रीका

(b) जापान

(d) कनाडा

[read more] [a] इक्वाडोर [/read]

62. विश्व में तीन-चौथाई से भी अधिक ज्वालामुखी पाये जाते हैं-

(a) अभिसारी सीमांत क्षेत्र में

(c) अपसारी सीमांत क्षेत्र में

(b) संरक्षक सीमांत क्षेत्र में

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] [a] अभिसारी सीमांत क्षेत्र में [/read]

63. येलोस्टोन पार्क जहां लगभग 100 गीजर और 4,000 गर्म जल के झरने हैं, निम्नलिखित किस देश में अवस्थित है?

[A] आइसलैण्ड
[B] सं. रा. अमेरिका
[C] न्यूजीलैण्ड
[D] आस्ट्रेलिया

[read more] [B] सं. रा. अमेरिका [/read]

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