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अध्पयाय 1 पर्यावरण/Environment/CHAPTER-1 NCERT CLASS-7

NCERT CLASS-7 Geography Solutions

               (हिन्दी माध्यम)            

अध्याय-1. पर्यावरण (Environment)

एनसीईआरटी के 7वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



   Environment

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(क) पारितंत्र क्या है?

उत्तर – वैसे तंत्र जिसमें समस्त जीवधारी आपस में एक-दूसरे के साथ तथा पर्यावरण के उन भौतिक एवं रासायनिक कारकों के साथ परस्पर क्रिया करते हैं जिसमें वे निवास करते हैं, उसे पारितंत्र कहा जाता है। वह सब ऊर्जा और पदार्थ के स्थानांतरण द्वारा सम्बद्ध है। 

      इस प्रकार सभी पेड़-पौधे, जीव-जंतु एवं मानव अपने आसपास के पर्यावरण पर आश्रित होते हैं। प्रायः वे एक-दूसरे पर भी आश्रित हैं। जीवधारियों का आपसी एवं अपने आस-पास के पर्यावरण के बीच का संबंध ही पारितंत्र का निर्माण करता है। अधिक वर्षा वाले वन घासस्थल, रेगिस्तान, पर्वत, नदी, महासागर एवं छोटे-से ताल का भी एक पारितंत्र हो सकता है।

(ख) प्राकृतिक पर्यावरण से आप क्या समझते हैं? 

उत्तर – भूमि, जल, वायु, पेड़-पौधे एवं जीव-जंतुओं से मिलकर बनने वाले पर्यावरण को प्राकृतिक पर्यावरण कहा जाता है।

(ग) पर्यावरण के प्रमुख घटक कौन-कौन से है ?

उत्तर – पर्यावरण के प्रमुख घटक दो होते हैं-

जैविक घटक (जीवीय) – पेड़-पौधे तथा जीव-जंतु

अजैविक घटक (अजीवीय) – भूमि, जल, वायु इत्यादि।

(घ) मानव निर्मित पर्यावरण के चार उदाहरण दीजिए।

उत्तर – मानव निर्मित पर्यावरण के चार उदाहरण निम्नलिखित है –

◆फसल उगाना 

◆पशुपालन 

◆ औद्योगिक क्रांति

◆ व्यापार एवं वाणिज्य

(च) स्थल मंडल क्या है ?

उत्तर – पृथ्वी की ठोस पर पर्पटी या कठोर ऊपरी परत को स्थलमंडल कहते हैं। यह चट्टानों एवं खनिजों से बना होता है एवं मिट्टी की पतली परत से ढका होता है। या पहाड़, पठार, मैदान, घाटी आदि जैसी विभिन्न स्थल आकृतियों वाला विषम धरातल होता है। ये स्थलाकृतियाँ महाद्वीपों के अलावा महासागर की सतह पर भी पाई जाती है। अर्थात स्थलमंडल वह क्षेत्र है जो हमें वन, कृषि एवं मानव बस्तियों के लिए भूमि पशुओं को चरने के लिए घास स्थल प्रदान करता है। यह खनिज संपदा का भी एक सोच है।

(छ) जीवीय पर्यावरण के दो प्रमुख घटक क्या है?

उत्तर – जीवीय पर्यावरण – पेड़-पौधे तथा जीव-जंतु।

(ज) जैवमंडल क्या है ?

उत्तर- पादप एवं जीव-जंतु मिलकर जलमंडल या सजीव संसार का निर्माण करते हैं। यह पृथ्वी वह संकीर्ण क्षेत्र है जहाँ स्थल, जल एवं वायु मिलकर जीवन को संभव बनाते हैं।

1. सही उत्तर चिह्नित कीजिए –

(क) इनमें से कौन-सा प्राकृतिक परितंत्र नहीं है?

(i) मरुस्थल

(ii) ताल

(iii) वन

उत्तर – (ii) ताल

(ख) इनमें से कौन सा मानवीय पर्यावरण का घटक नहीं है?

(i) स्थल

(ii) धर्म

(iii) समुदाय

उत्तर – (i) स्थल

(ग) इनमें से कौन-सा मानव-निर्मित पर्यावरण है?

(i) पहाड़

(ii) पर्वत

(iii) सड़क

उत्तर – (iii) सड़क

(घ) इनमें से कौन-सा पर्यावरण के लिए खतरा है?

(i) पादप-वृद्धि

(ii) जनसंख्या वृद्धि

(iii) फसल वृद्धि

उत्तर –(ii) जनसंख्या वृद्धि

3. निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए-

                              उत्तर 

(क) जैवमंडल  – (v) वह संकीर्ण क्षेत्र जहाँ स्थल, जल एवं वायु पारस्परिक क्रिया करते हैं।

(ख) वायुमंडल – (i) पृथ्वी को घेरने वाले वायु की चादर 

(ग) जलमंडल – (ii) जलीय क्षेत्र

(घ) पर्यावरण – (iv) हमारे आस-पास का क्षेत्र

4. कारण बताइए –

(क) मानव अपने पर्यावरण में परिवर्तन करता है।

उत्तर – कार का धूआँ वायु को प्रदूषित करता है, पानी को पात्र में एकत्रित किया जाता है, भोजन को बर्तनों में परोसा जाता है और भूमि पर कारखानों का निर्माण होता है।

           मानव कार, मिल, कारखानों एवं बर्तनों का निर्माण करता है। इस प्रकार से मानव प्राकृतिक पर्यावरण में परिवर्तन करता है।

(ख) पौधे एवं जीव जंतु एक दूसरे पर आश्रित है।

उत्तर – सभी पेड़-पौधे जीव-जंतु एवं मानव अपने आसपास के पर्यावरण पर आश्रित होते हैं। प्रायः वे एक-दूसरे पर भी आश्रित है। जीवधारियों का आपसी एवं अपने आस-पास के पर्यावरण के बीच का संबंध ही पारितंत्र का निर्माण करता है। अधिक वर्षा वाले वन, घासस्थल, रेगिस्तान, पर्वत, झील, नदी, महासाग एवं छोटे-से ताल भी एक पारितंत्र हो सकता है।


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अध्याय 8 भारत : जलवायु, वनस्पति तथा वन्य प्राणी / NCERT CLASS 6 Geography Solutions (हिन्दी माध्यम)

NCERT CLASS -6 Geography Solutions

(हिन्दी माध्यम) 

अध्याय 8 भारत : जलवायु, वनस्पति तथा वन्य प्राणी

एनसीईआरटी के 6वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



अध्याय 8 भारत

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।
(i) कौन-सी पवन भारत में वर्षा लाती है? यह इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर- मानसून पवन भारत में वर्षा लाती है क्योंकि मानसून पवन बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर से स्थल की ओर बहती है एवं वे अपने साथ नमी भी लाती है और यह पवन पहाड़ों से टकराकर वर्षा करती है। इसीलिए यह पवन भारत में काफी महत्वपूर्ण है। 
(ii) भारत के विभिन्न मौसमों के नाम लिखिए।
उत्तर- सामान्यत: भारत में प्रमुख मौसम होते हैं:
◆ दिसंबर से फरवरी तक ठंडा मौसम (सर्दी)
◆ मार्च से मई तक गर्म मौसम (गर्मी)
◆ जून से सितंबर तक दक्षिण पश्चिम मानसून का मौसम (वर्षा)
◆ अक्टूबर और नवंबर में मानसून के लौटने का मौसम (शरद) 
(iii) प्राकृतिक वनस्पति क्या है ?
उत्तर- घास, झाड़ियाँ तथा पेड़-पौधे जो बिना मनुष्य की सहायता के उगते हैं उन्हें प्राकृतिक वनस्पति कहा जाता है। 
(iv) भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के नाम लिखिए।
उत्तर – भारत की वनस्पतियों को पाँच प्रकार में विभाजित किया जा सकता है- 
● उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन,
● उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वन,
● कंटीली झाड़ियाँ,
● पर्वतीय वनस्पति तथा 
● मैंग्रोव। 
(v) सदाबहार वन तथा पतझड़ वन में क्या अंतर है?
उत्तर- सदाबहार वन- उष्णकटिबंधीय वर्षा वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा बहुत अधिक होती है। यह इतने घने होते हैं कि सूर्य का प्रकाश भी जमीन तक नहीं पहुँच पाता है। वृक्ष की अनेक प्रजातियाँ इन वनों में पाई जाती है। ये एक वर्ष के अलग-अलग समय में अपनी पत्तियाँ गिराते हैं फलत: वे हमेशा हरे-भरे दिखाई देते हैं और उन्हें सदाबहार वन कहा जाता है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूहों, उत्तर-पूर्वी राज्यों के कुछ भागों तथा पश्चिमी घाट की संकरी पट्टी में पाए जाने वाले प्रमुख वृक्ष महोगनी,एबोनी तथा रोजवुड है।
पतझड़ वन- हमारे देश के बहुत बड़े भाग में इस प्रकार के वन पाए जाते हैं। इन वनों को मानसूनी वन भी कहा जाता है। यह कम घने होते हैं और वर्ष के एक निश्चित समय में अपनी पत्तियाँ गिराते हैं। इन वनों में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण पेड़ साल, सागौन, पीपल, नीम एवं शीशम हैं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा तथा महाराष्ट्र के कुछ भागों में पाए जाते हैं। 
(vi) कटिबंधीय वर्षा वनों को सदाबहार वन क्यों कहा जाता है?
उत्तर- उष्णकटिबंधीय वर्षा वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा बहुत अधिक होती है। यह इतने घने होते हैं कि सूर्य का प्रकाश भी जमीन तक नहीं पहुँच पाता है। वृक्ष की अनेक प्रजातियाँ इन वनों में पाई जाती है। ये एक वर्ष के अलग-अलग समय में अपनी पत्तियाँ गिराते हैं फलत: वे हमेशा हरे-भरे दिखाई देते हैं यही कारण है कि उन्हें सदाबहार वन कहा जाता है। अंडमान-निकोबा द्वीप समूहों, उत्तर-पूर्वी राज्यों के कुछ भागों तथा पश्चिमी घाट की संकरी पट्टी में पाए जाने वाले प्रमुख वृक्ष महोगनी,एबोनी तथा रोजवुड है। 
 
2. सही उत्तर चिन्हित (√) कीजिए। 
(i) विश्व में सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र कौन-सा है-
क. मुंबई
ख. आसनसोल
ग. मौसिनराम
उत्तर – ग. मौसिनराम 
(ii) मैंग्रोव वन कहाँ हो सकते हैं ?
क. खारे जल में
ख. साफ जल में
ग. प्रदूषित जल में
उत्तर – क. खारे जल में 
(iii) महोगनी एवं रोजवुड वृक्ष पाए जाते हैं –
क. मैंग्रोव वन में
ख. उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वन में
ग. उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन में
उत्तर – ग. उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन में 
(iv) जंगली बकरी तथा हिम तेंदुए कहाँ पाए जाते हैं?
क. हिमालय क्षेत्र में
ख. प्रायद्वीपीय क्षेत्र में
ग. गिर वन में
उत्तर – क. हिमालय क्षेत्र में
(v) दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय आर्द्र पवनें कहाँ बहती है?
क. स्थल से समुद्र की ओर
ख. समुद्र से स्थल की ओर
ग. पठार से मैदान की ओर
उत्तर – ख. समुद्र से स्थल की ओर
3. खाली स्थान भरें।
(i) गर्मी में दिन के समय शुष्क तथा गर्म पवनें चलती है जिन्हें लू कहा जाता है।
(ii) आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु में मानसून के लौटने/जाड़े के मौसम में बहुत अधिक मात्रा में वर्षा होती है।
(iii) गुजरात के गिर वन एशियाई शेरों का निवास है।
(iv) सुंदरी मैंग्रोव वन की प्रजाति है।

(v) उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वन को मानसून वन भी कहा जाता है।


अध्याय 7 हमारा देश : भारत / NCERT CLASS 6 Geography Solutions (हिंदी माध्यम)

 NCERT CLASS -6 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम)

अध्याय 7 हमारा देश : भारत 

एनसीईआरटी के 6वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



 
हमारा देश 
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।
(i) भारत को कितने भौतिक भागों में विभाजित किया जा सकता है ? उनके नाम लिखिए।
उत्तर – भारत को पाँच भौतिक भागों में विभाजित किया जा सकता है। उनके नाम इस प्रकार है-
◆ उत्तर का हिमालय पर्वत
◆ भारत का उत्तरी विशाल मैदान
◆ प्रायद्वीपीय पठार
◆ तटीय मैदान
◆ द्वीप समूह 
(ii) भारत की स्थलीय सीमा सात देशों से जुड़ी है । उनके नाम लिखिए।
उत्तर – भारत की स्थलीय सीमा 7 देशों से जुड़ी है उनके नाम इस प्रकार है-
◆ पाकिस्तान
◆ अफगानिस्तान
◆ चीन
◆ नेपाल
◆ भूटान
◆ म्यांमार
◆ बांग्लादेश 
(iii) कौन सी दो प्रमुख नदियाँ अरब सागर में गिरती है?
उत्तर – अरब सागर में गिरने वाली दो प्रमुख नदियाँ नर्मदा तथा ताप्ती है 
(iv) गंगा एवं ब्रह्मपुत्र के द्वारा बनाए गए डेल्टा का नाम लिखिए।
उत्तर – गंगा एवं ब्रह्मपुत्र के द्वारा सुंदरबन डेल्टा का निर्माण होता है।
(v) भारत में कितने राज्य तथा कितने केंद्र शासित प्रदेश है? किन दो राज्यों की राजधानी है एक ही है?
उत्तर – भारत में वर्तमान में 28 राज्य तथा 8 केंद्र शासित प्रदेश है। पंजाब एवं हरियाणा राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ एक ही है।
(vi) उत्तरी मैदान में अधिक जनसंख्या में निवास करती है क्यों?
उत्तर –भारत का उत्तरी मैदान अत्यधिक जनसंख्या निवास करने वाला प्रदेश है क्योंकि यह मैदान काफी अधिक समतल एवं उपजाऊ है जिसके कारण यहाँ सघन कृषि कार्य किया जाता है। यहाँ यातायात के साधन, उद्योग-धंधे, नगरों का काफी विकास हुआ है । यहाँ की जलवायु मानव बसाव के लिए भी काफी उपयुक्त है। 
(vii) लक्ष्यद्वीप को प्रवाल द्वीप कहा जाता है, क्यों?
उत्तर – प्रवाल छोटे समुद्री जंतुओं के कंकाल है, जिसे पॉलिप कहा जाता है। जब जीवित पॉलिप मरते हैं तब उनका कंकाल बच जाता है। अन्य पॉलिप की वृद्धि इन ठोस कंकालों के ऊपर होती है जो बढ़ते-बढ़ते काफी ऊँचे होते जाते हैं तथा इस प्रकार प्रवाल द्वीपों का निर्माण करते हैं का निर्माण करते है । लक्षद्वीप का निर्माण भी इन्हीं प्रवालों से हुआ है। यही कारण है कि लक्षद्वीप को प्रवाल द्वीप कहा जाता है।
2. सही उत्तर चिन्हित (√) कीजिए।
(i) हिमालय के सबसे दक्षिणी भाग को क्या कहा जाता है?
क. शिवालिक
ख. हिमाद्रि
ग. हिमाचल
उत्तर – क. शिवालिक
(ii) सह्याद्रि को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
क. अरावली
ख. पश्चिमी घाट
ग. हिमाद्रि
उत्तर – ख. पश्चिमी घाट
(iii) पाक जल सधि किन देशों के बीच स्थित है
क. श्रीलंका तथा मालदीव
ख. भारत तथा श्रीलंका
ग. भारत तथा मालदीव
उत्तर – ख. भारत तथा श्रीलंका 
(iv) अरब सागर में स्थित भारतीय द्वीप समूह कौन-से है?
क. अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
ख. लक्ष्यद्वीप द्वीप समूह
ग. मालदीव
उत्तर – ख. लक्ष्यद्वीप द्वीप समूह 
(v) भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला कौन-सी है?
क. अरावली
ख. पश्चिमी घाट
ग. हिमालय
उत्तर – क. अरावली
3. खाली स्थान भरें।
(i) भारत का क्षेत्रफल लगभग 32.8 लाख वर्ग किमी. है।
(ii) महान हिमालय को हिमाद्री के नाम से भी जाना जाता है।
(iii) क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है।
(iv) नर्मदा नदी अरब सागर में गिरती है। 

(v) कर्क रेखाभारत के लगभग मध्य भाग से होकर गुजने वाली अक्षांश रेखा है।


अध्याय 6 पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप / NCERT CLASS 6 Geography Solutions (हिन्दी माध्यम)

 NCERT CLASS -6 Geography Solutions

(हिन्दी माध्यम)

अध्याय 6 पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप

एनसीईआरटी के 6वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए
(i) प्रमुख स्थल स्वरूप कौन-कौन से है?
उत्तर – विभिन्न स्थलरूपों को उनकी ऊँचाई एवं ढाल के आधार पर पर्वत, पठार एवं मैदान में वर्गीकृत कर सकते हैं।
(ii) पर्वत एवं पठार में क्या अंतर है?
उत्तर – पर्वत- पर्वत पृथ्वी की सतह की प्राकृतिक ऊंचाई हैं। पर्वत का शिखर छोटा तथा आधार चौड़ा होता है। यह आस-पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचा होता है। कुछ पहाड़ बादलों से भी ऊँचे होते हैं। अधिक ऊँचाई जाने पर जलवायु ठंडी होती जाती है। 
पठार- पठार उठी हुई एवं सपाट भूमि होती है। यह आस-पास के क्षेत्रों से अधिक उठा होता है तथा इसका ऊपरी भाग मेज के समान सपाट होता है। किसी पठार के एक या एक से अधिक किनारे होते हैं जिनके ढाल खड़े होते हैं।पठारों की ऊँचाई प्रायः कुछ सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक हो सकती है। पर्वतों की तरह पठार भी नए या पुराने हो सकते हैं। 
(iii) पर्वतों के विभिन्न प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर – पर्वत मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं – वलित पर्वत, भ्रंशोत्थ पर्वत तथा ज्वालामुखी पर्वत।
(iv) मनुष्यों के लिए पर्वत किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर – मनुष्य के लिए पर्वत निम्नलिखित प्रकार से उपयोगी है –
◆ पर्वत जल के संग्रहागार होते हैं।
◆ बहुत-सी नदियों का स्त्रोत पर्वतों में स्थित हिमानयों में होता है।
◆ पर्वतों के जल का उपयोग सिंचाई तथा पनबिजली के उत्पादन में भी किया जाता है।
◆ नदी घाटियाँ तथा वेदिकाएँ कृषि के लिए उपयुक्त होती है।
◆ पर्वतों में अलग-अलग प्रकार की वनस्पतियाँ तथा जीव-जंतु पाए जाते हैं।
◆ वनों से हमें ईंधन, चारा, आश्रय तथा दूसरे उत्पाद जैसे गोंद, रेजीन इत्यादि प्राप्त होते हैं।
◆ सैलानियों के लिए पर्वतीय भाग उपयुक्त स्थान है। वे पर्वतों की यात्रा उनकी प्राकृतिक सुंदरता को देखने के लिए करते हैं।
◆ विभिन्न प्रकार के खेल; जैसे- पैराग्लाइडिंग, हैंग ग्लाइडिंग, रिवर राफ्टिंग तथा स्कीइंग पर्वतों के प्रचलित खेल है।
(v) मैदानों का निर्माण किस प्रकार होता है ?
उत्तर – मैदान समतल भूमि के बहुत बड़े भाग होते हैं। अधिकांश मैदान मुख्य नदियों तथा उनकी सहायक नदियों के द्वारा लाए गए मलबों के निक्षेप से बने हैं।
        नदियों पर्वतों के ढालों पर नीचे की ओर बहती है तथा उन्हें अपरदित पदार्थों को अपने साथ आगे की ओर ले जाती है। अपने साथ ढ़ोये जाने वाले पदार्थों; जैसे पत्थर, बालू तथा सिल्क को यह घाटियों में निक्षेपित कर देती है। इन्हीं निक्षेपों से मैदानों का निर्माण होता है।
(vi) नदियों द्वारा निर्मित मैदान सघन जनसंख्या वाले होते हैं, क्यों ?
उत्तर – नदियों द्वारा निर्मित मैदान सघन जनसंख्या वाले होते हैं, इसके निम्नलिखित कारण हैं –
◆ यह मैदान कृषि कार्य के लिए काफी उपजाऊ होता है।
◆ यह मैदान लगभग समतल होता है जहाँ मकानों को आसानी से बनाया जाता है।
◆ औद्योगिक स्थल के लिए भी उपयुक्त होता है।
◆ पेयजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाता है।
◆ परिवहन के साधन जैसे सड़क आसानी से निर्मित किए जाते हैं। 
(vii) पर्वतों में जनसंख्या कम होती है, क्यों?
उत्तर – पर्वतों में कम जनसंख्या होती है जिसके निम्नलिखित कारण हैं –
◆ कठोर जलवायु 
◆ खारी ढाल वाला धरातल 
◆ कृषि योग्य भूमि की कमी
◆ परिवहन सुविधाओं का अभाव
◆ पीने योग्य पानी का अभाव इत्यादि।
2. सही उत्तर चिन्हित (√) कीजिए।
(i) पर्वत पठारों से भिन्न होते हैं-
क. ऊँचाई
ख. ढाल
ग. अभिमुखता
उत्तर- क. ऊँचाई 
(ii) हिमानी कहाँ पाई जाती है?
क. पर्वतों में
ख. मैदानों में
ग. पठारों में
उत्तर- क. पर्वतों में 
(iii) दक्कन पठार कहाँ स्थित है?
क. केन्या
ख. ऑस्ट्रेलिया
ग. भारत
उत्तर- ग. भारत 
(iv) यांग्त्से नदी कहाँ बहती है?
क. दक्षिण अमेरिका
ख. ऑस्ट्रेलिया
ग. चीन
उत्तर- ग. चीन 
(v) यूरोप की एक महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखला कौन सी है?
क. एंडीज
ख. आल्प्स
ग. रॉकीज
उत्तर- ख. आल्प्स 
3. खाली स्थान भरें।
(i) समतल भूमि वाले विस्तृत क्षेत्र को मैदान कहते हैं।
(ii) हिमालय एवं आल्प्स वलित पर्वतों के उदाहरण है। 
(iii) पठारी क्षेत्रों में खनिजों की प्रचुता होती है। 
(iv) पर्वत  श्रृंखला पर्वतों का एक क्रम है। 

(v) मैदानी क्षेत्र कृषि के लिए सबसे अधिक उत्पादक क्षेत्र होते हैं।


अध्याय 5 पृथ्वी के प्रमुख परिमंडल / NCERT CLASS 6 Geography Solutions (हिंदी माध्यम)

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अध्याय 5 पृथ्वी के प्रमुख परिमंडल 

एनसीईआरटी के 6वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

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पृथ्वी के प्रमुख
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।
(i) पृथ्वी के चार प्रमुख परिमंडल कौन-कौन से हैं?
उत्तर- पृथ्वी के चार प्रमुख परिमंडल है: भूमंडल, जलमंडल, वायुमंडल तथा जीवमंडल।
(ii) पृथ्वी के प्रमुख महाद्वीपों का नाम लिखिए।
उत्तर- पृथ्वी पर सात प्रमुख महाद्वीप है। यह विस्तृत जल राशि के द्वारा एक दूसरे से अलग है। यह महाद्वीप है: एशिया, यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, आस्ट्रेलिया तथा अंटार्कटिका। 
(iii) दो महाद्वीपों के नाम लिखिए जो पूरी तरह से दक्षिणी गोलार्ध में स्थित हों।
उत्तर- आस्ट्रेलिया तथा अंटार्कटिका महाद्वीप जो की पूरी तरह से दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित है।
(iv) वायुमंडल की विभिन्न परतों के नाम लिखिए।
उत्तर- वायुमंडल की विभिन्न परतों का नाम पृथ्वी की सतह से शुरु करते हुए क्षोभ मंडल, समताप मंडल, मध्य मंडल, आयन मंडल तथा बहिर्मण्डल है।
(v) पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहा जाता है?
उत्तर- पृथ्वी को नीला ग्रह कहा जाता है क्योंकि पृथ्वी का 71 प्रतिशत भाग पर जल तथा 29 प्रतिशत भाग पर स्थल है। जलमंडल में जल के सभी रूप उपस्थित है। इसमें महासागर एवं नदियाँ, झीलें, हिमनदियाँ, भूमिगत जल तथा वायुमंडल के जलवाष्प सभी सम्मिलित हैं। इसीलिए पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने पर नीला दिखाई पड़ती है।
(vi) उत्तरी गोलार्ध को स्थलीय गोलार्ध क्यों कहा जाता है?
उत्तर- उत्तरी गोलार्ध को स्थलीय गोलार्ध कहा जाता है क्योंकि स्थल का बहुत बड़ा भाग उत्तरी गोलार्ध में पाया जाता है।
(vii) जीवित प्राणियों के लिए जीवमंडल क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर- जीवमंडल स्थल, जल तथा हवा के बीच का एक सीमित भाग है। यह वह भाग है जहाँ जीवन मौजूद है। यहाँ जीवों की बहुत सी प्रजातियाँ है जो कि सूक्ष्मजीवों तथा बैक्टीरिया से लेकर बड़े स्तनधारियों के आकार में पाई जाती है। मनुष्य सहित सभी प्राणी, जीवित रहने के लिए एक-दूसरे से तथा जीवमंडल से जुड़े हुए हैं।
         जीवित प्राणियों के लिए जीवमंडल का बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भूमंडल, वायुमंडल तथा जलमंडल के बीच के प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। यह तीनों परिमंडल आपस में पारस्परिक क्रिया करते हैं तथा एक दूसरे को किसी न किसी रूप में प्रभावित भी करते हैं।
2. सही उत्तर चिन्हित (√) कीजिए।
(i) कौन सी पर्वत श्रृंखला एशिया एवं यूरोप को अलग करती है ?
क. एंडीज
ख. हिमालय
ग. युराल
उत्तर – ग. यूराल
(ii) उत्तरी अमेरिका दक्षिण अमेरिका से कैसे जुड़ा हुआ है-
क. स्थलसंधि 
ख. जलसंधि
ग. नहर
उत्तर – क. स्थलसंधि
(iii) वायुमंडल में किस गैस का प्रतिशत सर्वाधिक है –
क. नाइट्रोजन
ख. ऑक्सीजन
ग. कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर – क. नाइट्रोजन
(iv) पृथ्वी का कौन सा भाग दोस्त चट्टानों का बना है –
क. वायुमंडल
ख. जलमंडल
ग. स्थलमंडल
उत्तर – ग. स्लथमंडल
(v) सबसे बड़ा महाद्वीप कौन सा है –
क. अफ्रीका
ख. एशिया
ग. ऑस्ट्रेलिया
उत्तर – ख एशिया
3. खाली स्थान भरें । 
(i) पृथ्वी का सबसे गहरा भाग मेरियाना गर्त प्रशांत महासागर में स्थित है ।
(ii)  हिन्द महासागर का नाम एक देश के नाम पर रखा गया है
(iii) जीवमंडल स्थल, जल एवं हवा का एक सीमित भाग है, जो जीवन के लिए सहायक है ।
(iv) यूरोप एवं एशिया महाद्वीप को एक साथ यूरेशिया कहा जाता है ।

(v) पृथ्वी प सबसे ऊँचा पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट है।


अध्याय 4 मानचित्र / NCERT CLASS 6 Geography Solutions (हिन्दी माध्यम)

 NCERT CLASS -6 Geography Solutions

(हिन्दी माध्यम)

अध्याय 4 मानचित्र

एनसीईआरटी के 6वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



अध्याय 4 मानचित्र
1.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए। 
 
(i) मानचित्र के तीन घटक कौन-कौन से है?
उत्तर – मानचित्र के तीन घटक है : दूरी, दिशा और प्रतीक। 
(ii) प्रधान दिग्बिन्दु कौन-कौन से हैं?
उत्तर – चार मुख्य दिशाओं उत्तर, दक्षिण, पूर्व एवं पश्चिम को प्रधान दिग्बिन्दु कहे जाते हैं।
(iii) मानचित्र के पैमाने से आप क्या समझते हैं?
उत्तर – स्थल पर वास्तविक दूरी तथा मानचित्र पर दिखाई गई दूरी के बीच के अनुपात को पैमाना कहा जाता है। अर्थात इससे कागज पर एक छोटी दूरी स्थल की बड़ी दूरी को व्यक्त करते है।
              उदाहरण के लिए यदि विद्यालय एवं घर के बीच की दूरी 10 किमी. है और जिसे मानचित्र पर 2 सेंमी. दूरी से व्यक्त किया गया है तो इसका अभिप्राय है कि मानचित्र का 1 सेंमी. स्थल के 5 किमी. को दर्शायेगा। अर्थात मानचित्र का पैमाना होगा, 1 सेंमी. = 5 किमी.
(iv) ग्लोब की अपेक्षा मानचित्र अधिक सहायक होते हैं, क्यों?
उत्तर – ग्लोब पृथ्वी का लघु रूप में एक वास्तविक प्रतिरूप है। ग्लोब विभिन्न आकार एवं प्रकार के हो सकते हैं- बड़े ग्लोब जो आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान नहीं ले जा सकते हैं। 
               
          ग्लोब में अध्ययन की कुछ सीमाएँ होती है। जब हम पूरी पृथ्वी का अध्ययन करना चाहते हैं तब ग्लोब हमारे लिए काफी उपयोगी साबित होता है। लेकिन जब हम पृथ्वी के केवल एक भाग जैसे- अपने देश, राज्यों, जिलों, शहरों तथा गाँवों के बारे में अध्ययन करना चाहते हैं तो यह हमारे लिए उतना उपयोगी साबित नहीं होता है। ऐसी स्थिति में हम मानचित्रों का उपयोग करते हैं।
         मानचित्र पृथ्वी की सतह या इसके एक भाग का पैमाने के माध्यम से चपटी सतह पर खींचा गया चित्र है। लेकिन एक गोलाकार सतह को पूरी तरह से चपटा करना असंभव है। यही कारण है कि ग्लोब की अपेक्षा मानचित्र अधिक सहायक होते हैं।
(v) मानचित्र एवं खाका के बीच अंतर बताएँ।
उत्तर – एक छोटे क्षेत्र का बड़े पैमाने पर खींचा गया रेखाचित्र खाका कहा जाता है। एक बड़े पैमाने वाले मानचित्र से हमें बहुत सी जानकारियाँ प्राप्त होती है लेकिन कुछ ऐसी चीजें होती है जिन्हें हम कभी-कभी जानना चाहते हैं। जैसे किसी कमरे की लंबाई एवं चौड़ाई जिसे मानचित्र में नहीं दिखाया जा सकता है। उस समय हम लोग बड़े पैमाने वाला एक रेखाचित्र खींच सकते हैं जिसे खाका कहा जाता है।
(vi) कौन-सा मानचित्र विस्तृत जानकारी प्रदान करता है?उत्तर – जब बड़े क्षेत्रफल वाले भागों जैसे महाद्वीप या देशों को कागज पर दिखाना होता है तब हम लोग छोटे पैमाने का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए मानचित्र पर 5 सेंमी. स्थल के 500 किमी. को दर्शाता है। इसको छोटे पैमाने वाला मानचित्र कहते है।
      जब एक छोटे क्षेत्रफल वाले भाग जैसे कोई  गाँव या शहर को कागज पर दिखाना होता है तब हम बड़े पैमाने का उपयोग करते हैं जैसे स्थल पर 500 मीटर की दूरी को मानचित्र पर मात्र 5  सेंमी. से दर्शाया जाता है। इस प्रकार के मानचित्र को बड़े पैमाने वाला मानचित्र कहते हैं।
      इस प्रकार स्पष्ट है कि बड़े पैमाने वाले मानचित्र छोटे पैमाने वाले मानचित्र की अपेक्षा अधिक जानकारी प्रदान करते हैं।
(vii) प्रतीक किस प्रकार मानचित्रो के अध्ययन में सहायक होते हैं?
उत्तर – प्रतीक किसी भी मानचित्र का तीसरा प्रमुख घटक है। किसी भी मानचित्र पर वास्तविक आकार एवं प्रकार में विभिन्न आकृतियों; जैसे- भवनों, सड़कों, पुलों, वृक्षों, रेल की पटरियों या कुएँ को दिखाना संभव नहीं होता है। इसलिए यह निश्चित अक्षरों, छायाओं, रंगो, चित्रों तथा रेखाओं का उपयोग करके दर्शाए जाते हैं। यह प्रतीत कम स्थान में अधिक जानकारी प्रदान करते हैं। इन प्रतीकों के इस्तेमाल के द्वारा मानचित्र को आसानी से खींचा जा सकता है तथा इनका अध्ययन करना आसान होता है। इन प्रतीकों के उपयोग के संबंध में एक अंतरराष्ट्रीय सहमति भी है।
 
         विभिन्न रंगों का उपयोग भी उसी उद्देश्य किया जाता है। उदाहरण के लिए सामान्यतः नीले रंग का इस्तेमाल जलाशयों और भूरा रंग पर्वतों, पीला रंग पठारों और हरा रंग मैदानों को दर्शाने के लिए किया जाता है।
 
 2. सही उत्तर चिन्हित (√) कीजिए।
 
(i) वृक्षों के वितरण को दिखाने वाले मानचित्र है –
क. भौतिक मानचित्र
ख. थिमैटिक मानचित्र
ग. राजनीतिक मानचित्र
उत्तर – ख. थिमैटिक मानचित्र 
 
(ii) नीले रंग का इस्तेमाल किसे दिखाने में किया जाता है-
क. जलाशयों
ख. पर्वतों
ग. मैदानों
उत्तर – क. जलाशयों 
 
(iii) दिक्सूचक का उपयोग किया जाता है –
क. प्रतीकों को दिखाने के लिए
ख. मुख्य दिशा का पता लगाने के
ग. दूरी मापने के लिए
उत्तर – ख. मुख्य दिशा का पता लगाने के
 
 (iv) पैमाना आवश्यक है-
क. मानचित्र के लिए
ख. रेखाचित्र के लिए
ग. प्रतीकों के लिए

उत्त – क. मानचित्र के लिए


अध्याय 3 पृथ्वी की गतियाँ/NCERT CLASS 6 Geography Solutions (हिन्दी माध्यम)

 NCERT CLASS -6 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम)

 अध्याय 3 पृथ्वी की गतियाँ

एनसीईआरटी के 6वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



अध्याय 3 पृथ्वी

1.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।

(i) पृथ्वी के अक्ष का झुकाव कोण क्या है ?
उत्तर – पृथ्वी के अक्ष का झुकाव कोण 23°30′ है।
(ii) घूर्णन एवं परिक्रमण को परिभाषित करें।
उत्तर – घूर्णन- पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना घूर्णन कहलाता है। इसके कारण पृथ्वी पर दिन रात होती है।
परिक्रमण- सूर्य के चारों ओर एक स्टील कच्छ में पृथ्वी की गति को परिक्रमण कहते हैं। इसके कारण पृथ्वी पर ऋतुओं का परिवर्तन होता है।
नोट: ग्लोब पर वह वृत्त जो दिन तथा रात को विभाजित करता है उसे प्रदीप्ति वृत्त कहते हैं।
(iii) लीप वर्ष क्या है?
उत्तर- पृथ्वी एक वर्ष या 365 दिन 6 घण्टे में सूर्य का एक चक्कर लगाती है। हम लोग एक वर्ष 365 दिन का मानते हैं तथा सुविधा के लिए 6 घंटे को इसमें नहीं जोड़ते हैं। चार वर्षों में प्रत्येक वर्ष के बचे हुए 6 घंटे मिलकर एक दिन यानी 24 घंटे के बराबर हो जाते हैं। इसके एक अतिरिक्त दिन को फरवरी के महीने में जोड़ा जाता है। इस प्रकार प्रत्येक चौथे वर्ष फरवरी माह 28 के बदले 29 दिन का होता है। ऐसा वर्ष जिसमें 366 दिन होते हैं उसे लीप वर्ष कहा जाता है। 
(iv) उत्तर एवं दक्षिण अयनांतों में अंतर बताइए।
उत्तर- उत्तर अयनांत- 21 जून को विषुवत वृत के उत्तरी भाग में सबसे लंबा दिन तथा सबसे छोटी रात होती है। ठीक इसके विपरीत इसी दिन दक्षिणी गोलार्ध में सबसे लंबी रात एवं छोटी दिन होती है। पृथ्वी की इस अवस्था को उत्तर अयनांत कहते है।  
दक्षिण अयनांत- 22 दिसंबर को विषुवत वृत के दक्षिणी भाग में सबसे लंबा दिन तथा सबसे छोटी रात होती है।ठीक इसके विपरीत इसी दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबी रात एवं छोटी दिन होती है। पृथ्वी की इस अवस्था को दक्षिण अयनांत कहते है।
(v) विषुव क्या है?
उत्तर – 21 मार्च एवं 23 सितंबर को सूर्य की किरणें  विषुवत वृत्त पर सीधी पड़ती है। इस अवस्था में कोई भी ध्रुव सूर्य की ओर नहीं झुका रहता है, इसलिए पूरी पृथ्वी पर रात एवं दिन बराबर होते हैं। इसे विषुव कहा जाता है।
       23 सितंबर को उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु होती है जबकि दक्षिणी गोलार्ध में बसंत ऋतु होती है। 21 मार्च को स्थिति ठीक इसके विपरीत होती है क्योंकि इस दिन उत्तरी गोलार्ध में बसंत ऋतु तथा दक्षिणी गोलार्ध में शरद ऋतु होती है। 
(vi) दक्षिणी गोलार्ध में उत्तरी गोलार्ध की अपेक्षा उत्तर एवं दक्षिण का अयनांत अलग-अलग समय में होता है, क्यों?
उत्तर- जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की तरफ झुका होता है तब उस समय सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती है, इसलिए उसी समय उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु होती है तथा दक्षिणी गोलार्ध में शीत ऋतु होती है और जब दक्षिणी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है तब सूर्य की किरणें मकर रेखा पर सीधी पड़ती है, इसलिए उस समय दक्षिणी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु तथा उत्तरी गोलार्ध में शीत ऋतु होती है।
(vii) ध्रुवों पर लगभग 6 महीने का दिन एवं 6 महीने की रात होती है, क्यों?
उत्तर- सूर्य की किरणें लगातार 6 माह उत्तरी गोलार्ध में और 6 माह दक्षिणी गोलार्ध में पड़ती है क्योंकि जब सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध में पड़ती है उस समय उत्तरी ध्रुव सूर्य की तरफ झुका होता है तथा उत्तरी ध्रुव रेखा के बाद वाले भागों पर लगभग 6 महीने तक लगातार दिन और इसी समय दक्षिणी गोलार्ध में रात रहता है।
 
     ठीक इसके विपरीत जब सूर्य की किरणें दक्षिणी गोलार्ध में पड़ती है उस समय दक्षिणी ध्रुव सूर्य की तरफ झुका होता है तथा दक्षिणी ध्रुव रेखा के बाद वाले भागों पर लगभग 6 महीने तक लगातार दिन और इसी समय उत्तरी गोलार्ध में रात रहता है। यही कारण है कि ध्रुवों पर लगभग 6 महीने का दिन एवं 6 महीने की रात होती है।
2. सही उत्तर चिन्हित (√) कीजिए।
(i) पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की गति को कहा जाता है-
क. घूर्णन
ख. परिक्रमण
ग. झुकाव
उत्तर – ख. परिक्रमण
(ii) सूर्य की सीधी किरणें विषुवत वृत्त पर किस दिन पड़ती है- 
क. 21 मार्च
ख. 21 जून
ग. 22 दिसंबर
उत्तर -क. 21 मार्च
(iii) गर्मी में क्रिसमस का पर्व कहाँ मनाया जाता है-
क. जापान
ख. भारत
ग. ऑस्ट्रेलिया
उत्तर – ग. ऑस्ट्रेलिया
(iv) ऋतु में परिवर्तन पृथ्वी की किस गति के कारण होता है-
क. घूर्णन
ख. परिक्रमण
ग. गुरुत्वाकर्षण
उत्तर – ख. परिक्रमण
3. खाली स्थान भरें।
(i) एक लीप वर्ष में दिनों की संख्या 366 होती है।
(ii) पृथ्वी की प्रतिदिन की गति को दैनिक गति कहते हैं।
(iii) पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक स्थिर कक्षा में घूमती है।
(iv) 21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा सीधी पड़ती है।

(v) शीत ऋतु में दिन छोटे होते हैं।


अध्याय 2 ग्लोब अक्षांश एवं देशांतर/NCERT CLASS 6 Geography Solutions (हिंदी माध्यम)

 NCERT CLASS -6 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम)

अध्याय 2 ग्लोब : अक्षांश एवं देशांतर

एनसीईआरटी के 6वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

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अध्याय 2 ग्लोब
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए। 
(i) पृथ्वी का सही आकार क्या है?
उत्तर- हमारी पृथ्वी गोलाकार नहीं है। यह उत्तर एवं दक्षिण ध्रुवों पर थोड़ी चपटी तथा मध्य में थोड़ उभरी हुई है। अर्थात पृथ्वी का एक अपना आकार है जिसे जॉइड (Geoid) कहते है।
(ii) ग्लोब क्या है ?
उत्तर- ग्लोब पृथ्वी का लघु रूप में एक वास्तविक प्रतिरूप है।
(iii) कर्क रेखा का अक्षांशीय मान क्या है?
उत्तर- कर्क रेखा का अक्षांशीय मान 23°30′ उत्तरी अक्षांश है।
(iv) पृथ्वी के तीन ताप कटिबंध कौन-से है?
उत्तर- पृथ्वी के तीन ताप कटिबंध है- 
◆ उष्ण कटिबंध 
शीतोष्ण कटिबंध
◆ शीत कटिबंध
(v) अक्षांश एवं देशांतर रेखाएँ क्या है?
उत्तर- अक्षांश- विषुवत वृत से ध्रुवों तक स्थित सभी समानांतर वृतों को अक्षांश रेखाएँ कहा जाता है। अक्षांशों को अंश में मापा जाता है। विषुवत वृत्त के उत्तर के सभी समानांतर रेखाओं को उत्तरी अक्षांश तथा विषुवत वृत्त के दक्षिण में स्थित सभी समानांतर रेखाओं को दक्षिणी अक्षांश कहा जाता है।
देशांतर-  वह रेखा जो ग्लोब पर उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव के बीच खींची जाती हो उसे देशांतर रेखा कहा जाता है। ये अर्धवृत्त है तथा उनके बीच की दूरी ध्रुवों की तरफ बढ़ने पर घटती जाती है एवं ध्रुवों पर शून्य हो जाती है, जहाँ सभी देशांतरीय याम्योत्तर आपस में मिलती है। 
(vi) ऊष्मा की सबसे अधिक मात्रा उष्ण कटिबंध क्यों प्राप्त करते हैं?
उत्तर- कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच के सभी अक्षांशों पर सूर्य दिन में एक बार दोपहर में सिर के ठीक ऊपर होता है। इसीलिए इस क्षेत्र में सबसे अधिक ऊष्मा प्राप्त होती है तथा इसे उष्ण कटिबंध कहा जाता है।
(vii) जब भारत में शाम के 5:30 बजते हैं, तब लंदन में दोपहर के 12:00 क्यों बजते हैं?
उत्तर – चूँकि, भारत ग्रीनविच के पूर्व 82°30′ पूर्वी देशांतर पर स्थित है तथा जहाँ का समय ग्रीनविच समय से 5 घण्टा 30 मिनट (82°30’×4=330 मिनट) आगे है। इसलिए जब भारत में शाम के 5:30 बजते हैं, तब लंदन में दोपहर के 12:00 बजे हैं।
2. सही उत्तर चिन्हित (√) कीजिए।
(i) प्रमुख याम्योत्तर का मान है-
क. 90°
ख. 0°
ग. 60°
उत्तर –  ख. 0°
(ii) शीत कटिबंध किसके नजदीक पाया जाता है?
क. ध्रुवों
ख. विषुवत वृत्त
ग. कर्क रेखा
उत्तर – क. ध्रुवों
(iii) देशांतरों की कुल संख्या है-
क. 360
ख. 180
ग. 90
उत्तर – क. 360
(iv) दक्षिण ध्रुव वृत स्थित है –
क. उत्तरी गोलार्ध में
ख. दक्षिणी गोलार्ध में
ग. पूर्वी गोलार्ध में
उत्तर – ख. दक्षिणी गोलार्ध में
(v) ग्रिड किस का जाल है –
क. अक्षांशों (समानांतर) रेखाओं एवं देशांतरीय याम्योत्तरों का
ख. कर्क रेखा और मकर रेखा
ग. उत्तर ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव
उत्तर – क. अक्षांशों (समानांतर) रेखाओं एवं देशांतरीय याम्योत्तरों का
3. खाली स्थान भरें।
(i) मकर रेखा पर 23°30′ दक्षिण अक्षांश पर स्थित है।
(ii) भारत का मानक याम्योत्तर 82°30′ पूर्वी देशांतर है।
(iii) 0° याम्योत्तर को प्रमुख याम्योत्तर/ ग्रीनविच के नाम से जाना जाता है।
(iv) देशान्तरों के बीच की दूरी ध्रुव की तरफ घटती जाती है।

(v) उत्त ध्रुव वृत्त उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है।


अध्याय 1 सौरमंडल में पृथ्वी/NCERT CLASS 6 Geography Solutions (हिंदी माध्यम)

NCERT CLASS 6 Geography Solutions
(हिंदी माध्यम)

अध्याय 1 सौरमंडल में पृथ्वी

एनसीईआरटी के 6वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

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सौरमंडल

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।

(i) ग्रह और तारे में क्या अंतर है?
उत्तर- ग्रह – वह खगोलीय पिंड जिसका अपना ऊष्मा तथा प्रकाश नहीं होता है और वे तारों के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं, ऐसे खगोलीय पिंड ग्रह कहलाते हैं। जैसे- बुध,शुक्र, पृथ्वी इत्यादि।
तारा– वह खगोलीय पिंड जिसके पास अपनी ऊष्मा तथा प्रकाश होता है और वे बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं, वैसे खगोलीय पिंड को तारा कहा जाता है। जैसे सूर्य एक तारा है।

(ii) सौर मंडल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- सूर्य, आठ ग्रह, उपग्रह तथा कुछ अन्य खगोलीय पिंड जैसे क्षुद्र ग्रह एवं उल्का पिंड मिलकर सौरमंडल का निर्माण करते हैं। उसे हम सौर परिवार का नाम देते हैं जिसका मुखिया सूर्य है। सूर्य सौरमंडल के केंद्र में स्थित है।
(iii) सूर्य से उनकी दूरी के अनुसार सभी ग्रहों के नाम लिखें।
उत्तर- हमारे सौरमंडल में कुल 8 ग्रह है। सूर्य से दूरी के अनुसार वे हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस तथा नेपच्यून।
(iv) पृथ्वी को अद्भुत ग्रह क्यों कहा जाता है?
उत्तर- जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ संभवत केवल पृथ्वी पर ही पाई जाती है। पृथ्वी ना तो अधिक गर्म है और ना ही अधिक ठंडे ययाँ पानी एवं वायु उपस्थित है जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है। वायु में जीवन के लिए आवश्यक गैसें, जैसे- ऑक्सीजन मौजूद है। इन्हीं कारणों से पृथ्वी सौरमंडल का सबसे अद्भुत है।
(v) हम हमेशा चंद्रमा के एक ही भाग को क्यों देख पाते हैं?
उत्तर- चंद्रमा पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 27 दिन में पूरा करता है। लगभग इतने ही समय में अपने अक्ष पर एक चक्कर भी पूरा करता है।  इसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी से हमें चंद्रमा का केवल एक ही भाग दिखाई पड़ता है। 
(vi) ब्रह्मांड क्या है?
उत्तर- ब्रह्मांड की विशालता की कल्पना करना अत्यधिक कठिन है। वैज्ञानिक अभी भी उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्रित करने में जुटे हैं। इसके आकार के संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं है लेकिन फिर भी हम जानते हैं कि हम सभी इसी ब्रह्मांड का हिस्सा है  हमारा सौरमंडल अकाश गंगा मिल्की वे का एक भाग है जो प्रमाण का हिस्सा है।
         
      अर्थात आकाशगंगा करोडों तारो, बादलों तथा गैसों की एक प्रणाली है।  इस प्रकार की लाखों अकाशगंगाएँ मिलकर ब्रह्मांड का निर्माण करती है। 
2. सही उत्तर चिन्हित (√) कीजिए।
(i) किस ग्रह को पृथ्वी के जुड़वाँ ग्रह के नाम से जाना जाता है?
क. बृहस्पति
ख. शनि
ग. शुक्र
उत्तर – ग. शुक्र
(ii) सूर्य से तीसरा सबसे नजदीक ग्रह कौन-सा है?
क. शुक्र
ख. पृथ्वी
ग. बुध
उत्तर – ख. पृथ्वी
(iii) सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर किस प्रकार के पथ पर चक्कर लगाते हैं-
क. वृत्तीय पथ पर
ख. आयताकार पथ पर
ग. दीर्घवृताकार
उत्तर – ग. दीर्घवृताकार
(iv) ध्रुव तारे से किस दिशा का ज्ञान होता है-
क. दक्षिण
ख. उत्तर
ग. पूर्व
उत्तर – ख.  उत्तर
(v) क्षुद्र ग्रह किन कक्षाओं के बीच पाए जाते हैं-
क. सनी एवं बृहस्पति
ख. मंगल एवं बृहस्पति
ग. पृथ्वी एवं मंगल
उत्त –  ख. मंगल एवं बृहस्पति
3. खाली स्थान को भरें।
(i) तारों का एक समूह जो विभिन्न प्रति रूपों का निर्माण करता है, उसे नक्षत्रमंडल कहते हैं।
(ii) तारों की एक बहुत बड़ी प्रणाली को आकाशगंगा कहा जाता है।
(iii) बुध पृथ्वी के सबसे करीब है।
(iv) पृथ्वी सूर्य से तीसरा सबसे नजदीक ग्रह है।
(v) ग्रहों के पास अपनी प्रकाश तथा ऊष्मा नहीं होती है।

 

1. थार्नथ्वेट का जलवायु वर्गीकरण / Climatic Classification Of Thornthwaite

 1. थार्नथ्वेट का जलवायु वर्गीकरण

(Climatic Classification Of Thornthwaite)


थार्नथ्वेट का जलवायु वर्गीकरण ⇒

थार्नथ्वेट का जलवायु वर्

         थार्नथ्वेट एक अमेरिकी मौसम वैज्ञानिक थे जिन्होंने कोपेन के जलवायु वर्गीकरण की आलोचना करते हुए एक वैकल्पिक जलवायु वर्गीकरण की योजना प्रस्तुत की। वर्तमान समय में कोपेन के जलवायु वर्गीकरण की तुलना में थार्नथ्वेट के वर्गीकरण को अधिक मान्यता प्राप्त है। थार्नथ्वेट ने अपना जलवायु वर्गीकरण अनुसंधान प्रपत्रों के माध्यम से (1931, 1948) प्रस्तुत किया। लेकिन सर्वाधिक मान्यता 1948 में प्रस्तुत जलवायु वर्गीकरण की योजना महत्त्व रखता है। 1948 ई० में प्रस्तुत योजना “ज्योग्राफिकल रिव्यू” नामक पत्रिका में “An approach towards a rational classification of climate” नामक शीर्षक से प्रस्तुत किया।

जलवायु वर्गीकरण का आधार

        थार्नथ्वेट ने अपना जलवायु वर्गीकरण हेतु वनस्पति, तापमान और वर्षा को आधार बनाया। थार्नथ्वेट के अनुसार वनस्पति जलवायु का वायुदाब (बैरोमीटर) मापक यंत्र होता है। अर्थात वनस्पति की विशेषता को जानने के लिए तापमान एवं वर्षा के उन गुणों को जानना आवश्यक है जो वनस्पति के विकास, उनके प्रकार एवं विशेषताओं को निर्धारित करता है।

          थॉर्नथ्वेट ने कहा है कि जलवायु वर्गीकरण हेतु जलवायु के कार्यिक (Functional) अध्ययन आवश्यक है। क्योंकि वर्षा और तापमान की संपूर्ण मात्रा वनस्पतियों के विशेषताओं के निर्धारक नहीं होते है। अतः जलवायु के कार्यिक अध्ययन तापमान एवं वर्षा के प्रभावोत्पादकता के आधार पर किया जाना चाहिए। वर्षा एवं तापमान की प्रभावोत्पादकता को जानने के लिए वाष्पोत्सर्जन का अध्ययन आवश्यक है। अतः यह कहा जा सकता है कि थॉर्नथ्वेट के अनुसार जलवायु का मुख्य आधार वाष्पोत्सर्जन की क्रिया है न कि प्रत्यक्षता वनस्पति, वर्षा और तापमान है।

         वाष्पोत्सर्जन एक जटिल प्रक्रिया है। यह मृदा के नमी और भूमिगत जल स्तर के द्वारा निर्धारित होता है। दूसरी ओर वाष्पोत्सर्जन क्रिया भी मृदा के नमी, भूमिगत जल स्तर, वनस्पति और कृषि को भी निर्धारित करता है। थॉर्नथ्वेट महोदय ने वाष्पोत्सर्जन से सम्बंधित ऐसे चार कसौटियों का पहचान किया है जो जलवायु के निर्धारण में सहायक है। ये चारों कसौटियाँ निम्न प्रकार से है-

(i) नमी /आर्द्रता पर्याप्तता

(ii) तापीय दक्षता

(iii) नमी पर्याप्तता में मौसमी विषमता

(iv) तापीय दक्षता का ग्रीष्म ऋतु में केंद्रीयकरण

         ऊपर के चारों कसौटियों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि तीसरा कसौटी पहला से और चौथा कसौटी दूसरा से संबंधित है। थॉर्नथ्वेट ने यह भी बताया कि प्रथम दो कसौटी वार्षिक परिस्थितियों को बताता है जबकि अंतिम दो कसौटी मौसमी एवं मासिक परिस्थितियों को बताता है।

जलवायु वर्गीकरण की प्रणाली एवं योजना

        थॉर्नथ्वेट महोदय उपरोक्त चारों कसौटियों को आधार मानकर अपना जलवायु वर्गीकरण प्रस्तुत किया। इन्होंने अपने वर्गीकरण में सांख्यिकी विधियों का प्रयोग कर इसे अधिक वैज्ञानिक स्वरूप देने का प्रयास किया। इन्होंने ने भी जलवायु वर्गीकरण में कोपेन की भाँति सांकेतिक अक्षरों का प्रयोग किया लेकिन कोपेन के सांकेतिक अक्षर जलवायु के प्रत्यक्ष विशेषता को प्रकट करता है जबकि थॉर्नथ्वेट के संकेतिक अक्षर जलवायु के अप्रत्यक्ष गुणों को स्पष्ट करता है।

         थॉर्नथ्वेट ने जलवायु वर्गीकरण हेतु “संभावित वाष्पोत्सर्जन सूचक” को विकसित किया। इसका परिष्कृत मान cm से होगा। थॉर्नथ्वेट ने संभावित वाष्पोत्सर्जन इसलिए ज्ञात करने का प्रयास किया  क्योंकि वाष्पोत्सर्जन का वास्तविक मान कभी भी ज्ञात नहीं किया जा सकता। उन्होंने संभावित वाष्पोतर्जन निकालने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया है। जैसे-

PE=1.6 (10 t/i)a cm.

जहाँ

PE = संभावित वाष्पोत्सर्जन

t = डिग्री सेंटीग्रेड में वार्षिक औसत तापमान

i = प्रत्येक महीने के तापमान के योग का 1/5वाँ भाग

a = यह नियतांक है जिसका मान 1.514 होगा।

        संभावित वाष्पोत्सर्जन सूचकांक की मदद से उन्होंने नमी पर्याप्तता सूचक विकसित किया ताकि पूरे पृथ्वी पर “आर्द्रता प्रदेश” का निर्धारण किया जा सके। थॉर्नथ्वेट के अनुसार प्रत्येक आर्द्रता प्रदेश से एक विशिष्ट जलवायु का सूचक होगा। आर्द्रता प्रदेश के निर्धारण हेतु उन्होंने नमी पर्याप्तता सूचक निम्नलिखित सूत्र के माध्यम से ज्ञात किया है:-

Im= 100 P/PE-1

जहाँ :-

Im = नमी पर्याप्तता सूचक

P = वार्षिक वर्षा cm में

PE = संभावित वाष्पोत्सर्जन

      नमी पर्याप्तता सूचकांक के मदद से विश्व को उन्होंने 9 आर्द्रता प्रदेश या उपजलवायु क्षेत्र  में बाँटा:-

क्रम संकेत आर्द्रता प्रदेश या

उपजलवायु क्षेत्र

Im का मान (आर्द्रता सूचकांक)
1. A अति आर्द्र जलवायु 100 तथा उससे अधिक
2. B4 आर्द्र जलवायु आर्द्र जलवायु 80-100
3. B3 आर्द्र जलवायु 60-80
4. B2 आर्द्र जलवायु 40-60
5. B1 आर्द्र जलवायु 20-40
6. C2 नमी युक्त उपार्द्र जलवायु 0-20
7. C1 शुष्क उपार्द्र जलवायु -33.3 से 0
8. D अर्द्ध मरुस्थलीय जलवायु -66.7 से -33.3
9. E मरुस्थलीय जलवायु -100 से -66.7
              
        थॉर्नथ्वेट ने दूसरी कसौटी अर्थात तापीय दक्षता के आधार पर जलवायु प्रदेशों को उप जलवायु प्रदेशों में बाँटा। तापीय दक्षता का भी निर्धारण संभावित वाष्पोत्सर्जन सूचकांक के आधार पर उन्होंने किया था। उन्होंने तापीय दक्षता के आधार पर विश्व जलवायु को 9 प्रदेश या उप जलवायु प्रदेश में बाँटा:-
क्रम संकेत

तापीय दक्षता प्रदेश

या उप जलवायु क्षेत्र

PE का मान
1. A’ अति गर्म / उष्ण जलवायु 114 तथा उससे अधिक
2. B’4 गर्म जलवायु 99.7 से 114
3. B’3 गर्म जलवायु 85.5 से 99.7
4. B’2 गर्म जलवायु 71.2 से 85.5
5. B’1 गर्म जलवायु 57.0 से 71.2
6. C’2 न्यून उष्ण जलवायु 42.7 से 57.0
7. C’1 न्यून उष्ण जलवायु 28.5 से 42.7
8. D’ टुन्ड्रा जलवायु 14.2 से 28.5
9. E’ हिमाच्छादित जलवायु 14.2 से कम

          थॉर्नथ्वेट महोदय ने यह भी बताया है कि वार्षिक वर्षा और वार्षिक तापमान किसी भी जलवायु प्रदेश के अंदर पाई जाने वाली मौसमी विशेषता को स्पष्ट नहीं करता है। इसलिए थॉर्नथ्वेट महोदय ने आर्द्रता प्रधान वाले जलवायु क्षेत्र के लिए शुष्कता सूचक और शुष्क जलवायु प्रदेश के लिए आर्द्रता सूचक विकसित किया है।

       शुष्कता सूचक A से लेकर C2 तक के लिए और आर्द्रत सूचक C1 से लेकर E तक लागू होता है। थॉर्नथ्वेट ने ऐसा करने के पीछे तर्क यह दिया कि A से लेकर C2 तक वाले जलवायु क्षेत्र में नमी की कमी नहीं होती है। लेकिन कुछ ऐसे महीने हो सकते हैं जो शुष्क हो। इसी तरह C1 से लेकर E तक वाले जलवायु क्षेत्र में कुछ महीने ऐसे हो सकते हैं। जहाँ हल्की वर्षा या आकस्मिक वर्षा के कारण ही उपलब्ध हो जाती हो।  इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखकर उन्होंने मौसमी विभिन्नता को स्पष्ट करने हेतु तीसरे चरण का उपयोग किया। जैसे:-

A से C2 के लिए शुष्कता सूचक तालिका

क्रम सांकेतिक अक्षर  आर्द्रता का स्तर  शुष्कता सूचक 
1. r आर्द्रता की कमी कभी नहीं  0-10
2. s ग्रीष्म ऋतु में आर्द्रता की सामान्य कमी  10-20
3. w जाड़े की ऋतु में आर्द्रता में सामान्य कमी  10-20
4. s2 ग्रीष्म ऋतु में आर्द्रता में भारी कमी  20 से अधिक 
5. w2 जाड़े की ऋतु में आर्द्रता की भारी कमी  20 से अधिक 
C1 से लेकर E तक के लिए आर्द्रता सूचक तालिका 
क्रम  सांकेतिक अक्षर  शुष्कता का स्तर  आर्द्रता सूचक 
6. d किसी भी महीने में आर्द्रता की कमी नहीं  0-16.7
7. s जाड़े की ऋतु में अतिरिक्त  16.7-33.3
8. w ग्रीष्म ऋतु में अतिरिक्त आर्द्रता  16.7-33.3
9. s2 जाड़े की ऋतु में बहुत अधिक आर्द्रता  33.3 से अधिक 
10. w2 ग्रीष्म ऋतु में बहुत अधिक आर्द्रता  33.3 से अधिक 
                 
        थॉर्नथ्वेट महोदय ने यह भी बताया है कि औसत तापीय दक्षता का सर्वाधिक प्रभाव ग्रीष्म ऋतु में होता है अर्थात चौथे कसौटी के आधार पर थॉर्नथ्वेट ने कहा है कि तापीय दक्षता को केंद्रीयकरण ग्रीष्म ऋतु में होता है। अतः तापीय दक्षता का मापन थॉर्नथ्वेट ने प्रतिशतता के रूप में व्यक्त करते हुए एक और तालिका का विकास किया है जो ग्रीष्म ऋतु में तापीय दक्षता के केंद्रीयकरण को स्पष्ट करता है। 
क्रम  सांकेतिक अक्षर  गर्मी ऋतू में कुल तापीय दक्षता का प्रतिशत 
1. a’ 48% से कम 
2. b’4 48 – 51.9
3. b’3 51.9 – 56.3
4. b’2 56.6 – 61.6
5. b’1 61.6 – 68 
6. C’2 68 – 76.3
7. C’1 76.3 – 88
8. d’ 88 से अधिक 
               
     थॉर्नथ्वेट ने उपरोक्त चारों को कसौटियों के आधार पर विश्व की जलवायु को वर्गीकृत किया है। प्रथम दो कसौटियों के आधार पर उन्होंने आर्द्रता प्रदेश और तापीय दक्षता प्रदेश का निर्धारण किया। प्रथम और द्वितीय तालिका से स्पष्ट है कि पूरे विश्व को 9 आर्द्रता प्रदेश और 9 तापीय दक्षता प्रदेश में वर्गीकृत है। पुनः अंतिम दो कसौटियों के आधार पर सूक्ष्म स्तर पर जलवायु क्षेत्रों का विश्लेषण करने का प्रयास किया है। थॉर्नथ्वेट ने बताया है कि उपरोक्त चारों कसौटियों के आधार पर पूरे विश्व को 120 जलवायु क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है। लेकिन सभी का वर्णन करना संभव नहीं है। इसे कुछ उदाहरण से ही स्पष्ट किया जा सकता है। जैसे :-

(1) C1B’1da’ – भूमध्यसागरीय जलवायु या सन फ्रांसिस्को प्रकार की जलवायु

(2) C2C’2rb’1 – महाद्वीपीय या मास्को प्रकार की जलवायु

(3) EA’da’ – आंतरिक उष्ण मरुस्थलीय जलवायु या एलिस स्प्रिंग प्रकार की जलवायु

आलोचना

वर्षा और तापमान के द्वारा उत्पन्न प्रभावो-उत्पादकता का सही मूल्यांकन संभव नहीं हैं। थॉर्नथ्वेट महोदय ने इस तथ्य को स्वीकार करते हुए संभावित वाष्पोत्सर्जन शब्द का उपयोग किया है जिससे स्पष्ट होता है कि इनका भी वर्गीकरण अनुमानों पर आधारित है।

◆ यह एक जटिल वर्गीकरण की योजना है जिसमें कई सांख्यिकीय विधियों तथा तालिकाओं का प्रयोग किया गया है।

◆ ट्रीवार्था महोदय ने इनका आलोचना करते हुए कहा है कि थॉर्नथ्वेट ने अपने वर्गीकरण में उच्चावच का कोई महत्व नहीं दिया है।

◆ थॉर्नथ्वेट द्वारा प्रस्तावित जलवायु वर्गीकरण की योजना के आधार पर जलवायु क्षेत्र का निर्धारण तभी संभव है जब अति लघु सर पर आँकड़े उपलब्ध हो।

◆ थॉर्नथ्वेट में तापमान एवं वर्षा को अधिक महत्व नहीं दिया है। लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकतर फसलों के चयन में वर्षा एवं तापमान को अधिक महत्व दिया जाता है।

निष्कर्ष

       ऊपर वर्णित खामियों के बावजूद थॉर्नथ्वेट की योजना सर्वाधिक विश्वसनीय योजना मानी जाती है क्योंकि इस योजना के मदद से भूमिगत जल स्तर का निर्धारण, जल प्रबंधन और वानिकी जैसे कार्यों को नई दिशा प्रदान की जा सकती है। 1949 ई० में यूएसए के नवीन कृषि नीति में थॉर्नथ्वेट के जलवायु वर्गीकरण को विशेष महत्त्व दिया गया था। अतः इससे स्पष्ट होता है कि इनका जलवायु वर्गीकरण की विश्वसनीयता बरकरार है।

♦उत्तर लिखने का दूसरा सरल तरीका♦….

       सी. डब्ल्यू. थार्नथ्वेट नामक अमेरिकन जलवायु विज्ञानी ने अपने जलवायु वर्गीकरण की रूपरेखा को 1931 में प्रस्तुत किया। यह वर्गीकरण उत्तरी अमेरिका को आधार बनाकर प्रस्तुत किया गया था। 1933 में इन्होंने इसी वर्गीकरण को आधार बनाकर सम्पूर्ण विश्व को विभिन्न प्रकार के जलवायु प्रदेशों में विभक्त किया। थार्नथ्वेट का वर्गीकरण भी कोपेन के वर्गीकरण से साम्यता रखता है, क्योंकि

(i) कोपेन की भांति थार्नथ्वेट ने भी जलवायु प्रदेशों का सीमांकन मात्रात्मक विधि से किया।

(ii) यह वर्गीकरण भी वनस्पति पर आधारित है।

(iii) विभिन्न जलवायु प्रकारों को कोपेन की भांति ही अक्षरों के संयोगों द्वारा प्रदर्शित किया गया है।

1931 में प्रस्तुत जलवायु वर्गीकरण

        कोपेन की भांति थार्नथ्वेट का भी यह मानना था कि वनस्पति जलवायु की सूचक होती है तथा वनस्पति वर्षा की मात्रा, तापमान एवं वाष्पीकरण से प्रभावित होती है। थार्नध्वेट ने आंकड़ों की सहायता से वर्षण-वाष्पीकरण सूचक तैयार कर आर्द्रता प्रदेशों (Humidity Provinces) का निर्धारण किया। ये ही आर्द्रता प्रदेश उसके जलवायु वर्गीकरण में प्रथम क्रम के जलवायु प्रदेश बने।

       1931 में थार्नथ्वेट द्वारा प्रस्तुत जलवायु वर्गीकरण वर्षण प्रभाविता (Rainfall Effectiveness) और तापीय दक्षता (Temperature Efficiency) पर आधारित था । वर्षण प्रभावित अनुपात (Ratio) या P/E Ratio ज्ञात करने के लिए कुल मासिक वर्षा को कुल मासिक वाष्पीकरण से विभाजित कर देते हैं तथा 12 महीनों के वर्षण प्रभाविता अनुपात (P/E Ratio) का योग करके वर्षण प्रभाविता सूचक (P/E Index) प्राप्त किया जाता है।

P/E Ratio वर्षण प्रभाविता अनुपात = 11.5 (P/T- 10) 10/9

P = औसत मासिक वर्षण (इंचों में)

T = औसत मासिक तापमान (डिग्री फारेनहाइट में)

        इस सूत्र की सहायता से थार्नथ्वेट ने विश्व को 5 आर्द्रता प्रदेशों में बांटा जिनके बीच की सीमाएं संख्यात्मक रूप से ज्ञात की गईं। ये पांच आर्द्रता प्रदेश विश्व के पांच बड़े वानस्पतिक प्रदेशों यथा वर्षा प्रचुर वन (Rain Forest), वन (Forest), घास के मैदान (Grass land), स्टेपी (Steppe) और मरुस्थल (Desert) से सम्बन्धित है।

        P/E सूचक की भांति ही थार्नथ्वेट ने तापमान दक्षता सूचक (T/ E Ratio) का परिकलन (T – 32) / 4 सूत्र की सहायता से किया। इस सूत्र में T = औसत मासिक तापमान डिग्री फारेनहाइट में है।

        P/E सूचक और T/E सूचक तथा वर्षण के मौसमी वितरण के आधा पर थार्नथ्वेट ने विश्व को 32 जलवायु प्रकारों में विभाजित किया।

आर्द्रता और तापमान पर आधारित जलवायु प्रदेश तथा वर्षण का मौसमी वितरण

आर्द्रता पर आधारित जलवायु प्रदेश

अक्षर/संकेत आर्द्रता प्रदेश वनस्पति का प्रकार वर्षण प्रभाविता सूचकांक
A अत्यधिक आर्द्र वर्षा प्रचुर वन  128 से अधिक 
B आर्द्र वन 64-127
C उपआर्द्र  घास का मैदान 32-63
D अर्द्ध शुष्क  स्टेपी 16-31
E शुष्क मरुस्थल  16 से कम

तापमान पर आधारित जलवायु प्रदेश

अक्षर/संकेत तापमान प्रदेश तापीय दक्षता सूचकांक
A’ उष्णकटिबन्धीय 128 एवं अधिक
B’ समशीतोष्ण कटिबन्ध 64-127
C’ शीतोष्ण कटिबन्ध 32-63
D’ टैगा 16-31
E’ टुन्ड्रा 1-15
F’ हिमाच्छादित 0

वर्षण का मौसमी वितरण

r = सभी ऋतुओं में प्रचुर वर्षा

s = ग्रीष्म में वर्षा की कमी

w = ऋतु शीत ऋतु में वर्षा की कमी

d = सभी ऋतुओं में वर्षा की कमी

थार्नथ्वेट का विश्व का 32 जलवायु प्रकार

AA’r BA’r. CA’r DA’w EA’d D’   E’  F’
AB’r BA’w CA’w DA’d EB’d
AC’r BB’r CA’d DB’w EC’d
BB’w CB’r DB’s
BB’s CB’w DB’d
BC’s CC’r
BC’r CB’d
CB’s  DC’d
CC’s
CC’d

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NCERT CLASS 12 Geography Solutions हिंदी माध्यम इकाई 4 अध्याय10 मानव बस्ती

 NCERT CLASS -12 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम)
इकाई -4
अध्याय-10. मानव बस्ती 
1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए :
(i) निम्न में से किस प्रकार की बस्तियाँ सड़क, नदी या नहर के किनारे होती है?
(क) वृत्ताकार 
(ख) चौक पट्टी
(ग) रेखीय
(घ) वर्गाकार
उत्तर – (ग) रेखीय 
(ii) निम्न में से कौन-सा एक आर्थिक क्रिया ग्रामीण बस्तियों की मुख्य आर्थिक क्रिया है?
(क) प्राथमिक
(ख) तृतीयक
(ग) द्वितीयक
(घ) चतुर्थ
उत्तर – (क) प्राथमिक
(iii) निम्न में से किस प्रदेश में प्रलेखित प्राचीनतम नगरीय बस्ती रही है?
(क) ह्वांगहो की घाटी
(ख) सिंधु घाटी
(ग) नील घाटी
(घ) मेसोपोटामिया
उत्तर – (ख) सिंधु घाटी
(iv) 2006 के प्रारम्भ में भारत मे कितने मिलियन सिटी थे।
(क) 40
(ख) 41
(ग) 42
(घ) 43
उत्तर – (क) 40
(v) विकासशील देशों की जनसँख्या के सामाजिक ढाँचे के विकास एवं विकास आवश्यकताओं  की पूर्ति में कौन से प्रकार के संसाधन सहायक है?
(क) वित्तिय
(ख) मानवीय
(ग) प्राकृतिक
(घ) सामाजिक
उत्तर – (घ) सामाजिक 
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: 
(i) आप बस्ती को कैसे परिभाषित करेंगे?
उत्तर – वैसे भौगोलिक क्षेत्र जहाँ मानव साधारणतया सामूहिक  रूप से निवास करता हो उसे मानव बस्ती कहते हैं। मकानों का स्वरूप बदला जा सकता है, उनके कार्य बदल सकते हैं परंतु बस्तियाँ समय एवं स्थान के साथ निरंतर बसती रहेगी।  
(ii) स्थान ( साइट) एवं स्थिति (सिचुएसन) के मध्य अंतर बताएँ।
उत्तर – स्थान ( साइट) से तात्पर्य वैसे भौगोलिक क्षेत्र से है जहाँ मानव बस्ती बनाकर निवास करते है, उसे स्थान (साईट) कहा जाता है  जबकि  स्थिति (सिचुएसन) से तात्पर्य बस्ती के आस-पास मौजूद उन सभी भौगोलिक अर्थात पर्यावरणीय दशाओं से है जो एक बस्ती को प्रभावित करता है 
(iii) बस्तियों के वर्गीकरण के क्या आधार हैं?
उत्तर – बस्तियों के वर्गीकरण कार्यों के आधार पर मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है –
(क) ग्रामीण बस्ती
(ख) नगरिय बस्ती
                कार्यों के आधार पर ग्रामीण एवं नगरीय बस्ती को ही भूगोल में सर्वाधिक मानता प्राप्त है। 
(iv) मानव भूगोल में बस्तियों के अध्ययन का औचित्य बताएँ।
उत्तर – बस्ती भूगोल मानव भूगोल की एक नई शाखा है। बस्ती भूगोल मानव द्वारा निर्मित आवासों पर भौतिक तथा सांस्कृतिक तत्वों के प्रभाव का अध्ययन करता है, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार मानव भूगोल मानव एवं वातावरण के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण करता है। इस प्रकार मानव बस्ती का अध्ययन मानव भूगोल का मूल तत्व है क्योंकि किसी भी क्षेत्र में बस्तियों का रूप उस क्षेत्र के वातावरण से मानव का सीधा संबंध रहता है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) ग्रामीण एवं नगरीय बस्ती किसे कहते है? उनकी विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर – ग्रामीण बस्ती – वैसे बस्ती जहाँ की आबादी 5000 व्यक्ति से कम हो, 75% पुरुष कृषि कार्यों में संलग्न हो तथा जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से कम हो, ऐसे स्थानीय क्षेत्र को ग्रामीण बस्ती कहा जाता है।
               दूसरे शब्दों में जहाँ की 75% पुरुष प्राथमिक कार्यों में संलग्न हो उसे ग्रामीण बस्ती कहा जाता है। 
नगरीय बस्ती – वैसे बस्ती जहाँ की आबादी कम से कम 5000 व्यक्ति से अधिक हो, 75% पुरुष गैर कृषि कार्यों में संलग्न हो तथा जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से अधिक हो, ऐसे स्थानीय क्षेत्र को नगरीय बस्ती कहा जाता है। यहाँ नगरपालिका, निगम, छावनी बोर्ड या अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति होती है।            
              दूसरे शब्दों में संक्षेप में  जहाँ की 75% पुरुष द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों में संलग्न हो उसे नगरीय बस्ती कहा जाता है।
ग्रामीण बस्तियों की विशेषताएँ 
◆ ग्रामीण बस्ती प्रत्यक्ष रूप से भूमि से नजदीकी सम्बन्ध रखती है
◆ यहाँ कि अधिकांश जनसंख्या प्राथमिक कार्यों (कृषि, मछली पकड़ना, आखेट, पशुपालन आदि)  से जुड़े होते है 
◆ बस्तियों का आकार प्राय: छोटा होता है
◆ जनसंख्या 5000 से कम होता है
◆ यहाँ के लोग सामाजिक, सांकृतिक, धार्मिक एवं राजनितिक रूप से आपस में जुड़े होते है 
नगरीय बस्तियों की विशेषताएँ 
◆ यहाँ नगर निगम, निगम, छावनी बोर्ड या अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति होती है। 
◆ यहाँ की जनसंख्या 5000 से अधिक होती है
◆ यहाँ कि अधिकांश जनसंख्या द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों में संलग्न रहती है
◆ ग्रामीण बस्तियों के अपेक्षा नगरों कि स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण होता है
◆ नगरों का विकास और विस्तार काफी तेजी से होता है  
(ii) विकासशील देशों के नगरीय बस्तियों की समस्याओं का विवेचना किजिए।
उत्तर – नगरीकरण विकास का सूचक माना जाता है। परिणामस्वरुप विश्व के सभी देशों तथा विकसित एवं विकासशील देशों में नगरों का वितरण भिन्न रूपों में पाया जाता है। विकसित देशों में नगरीय सुविधाएँ बढ़ी है जबकि विकासशील देशों में समस्याएँ बढ़ी है। छोटे-छोटे कस्बों एवं क्षेत्रों से कार्यकारी जनसंख्या का पलायन हो रहा है। रोजगार के ज्यादा अवसर बड़े-बड़े शहरों तक सीमित है। वृहत आकार की जनसंख्या में अकुशल, अर्धकुशल एवं अनुत्पादकों की संख्या बढ़ती जा रही है। अकुशल, अर्धकुशल श्रमिकों को छोटे स्तर पर काम मिलने से उनका जीवन स्तर निम्न स्तर का होता है। यहाँ कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक बुराइयाँ जन्म ले रही है। यहाँ का लिंगानुपात बिगड़ रहा है। अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है। पर्यावरणीय समस्याएँ तथा यातायात संबंधी समस्याएँ लगातार बढ़ती जा रही है। 
                                               दूसरे शब्दों में संक्षेप में विकासशील देशों के नगरीय बस्तियों की समस्याएँ निम्नलिखित है :-
◆ अधिकांश शहरों का अनियोजित होना।
◆ अधिकांश शहरों में भीड़ की स्थिति होना
◆ सभी निवासियों को आधारभूत नागरिक सुविधाओं का अभाव होना 
◆ बहुमंजिला मकान तथा गंदी बस्तियों की बढ़ोतरी होना
◆जनसंख्या का काफी अधिक भाग निम्न स्तरीय आवासों जैसे- गंदी बस्तियों एवं अवैध बस्तियों में रहना
◆ स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण का अभाव होना
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NCERT CLASS 12 Geography Solutions हिंदी माध्यम इकाई 3 अध्याय 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

 NCERT CLASS -12 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम)
इकाई -3
अध्याय-9. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 
1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए :
(i) संसार के अधिकांश महान पत्तन इस प्रकार वर्गीकृत किए गए हैं –
(क) नौसेना पत्तन
(ख) विस्तृत पत्तन
(ग) तैल पत्तन
(घ) औद्योगिक पत्तन
उत्तर – (क) नौसेना पत्तन
(ii) निम्नलिखित महाद्वीपों में से किस एक से विश्व व्यापार का सर्वाधिक प्रवाह होता है?
(क) एशिया
(ख) यूरोप
(ग) उत्तरी अमेरिका
(घ) अफ्रीका
उत्तर – (ख) यूरोप
(iii) दक्षिण अमेरिकी राष्ट्रों में से कौन-सा एक ओपेक का सदस्य है?
(क) ब्राजील
(ख) वेनेजुएला
(ग) चिली
(घ) पेरू
उत्तर – (ग) चिली
(iv) निम्न व्यापार समूहों में से भारत किसका एक सह-सदस्य है ?
(क) साफ्टा(SAFTA)
(ख) आसियान(ASEAN)
(ग) ओइसीडी(OECD)
(घ) ओपेक(OPEC)
उत्तर – (क) साफ्टा(SAFTA)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: 
(i) विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य कौन-से है?
उत्तर – विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य निम्नलिखित है –
◆ यह विश्व स्तर पर व्यापार के नियमों का निर्धारण करता है। 
विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों के बीच होने वाले विवादों का निपटारा करता है।
◆ यह विश्व स्तर पर व्यापार के लिए आवश्यक दूरसंचार व बैंकिंग सेवाओं के साथ-साथ बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार को भी अपने कार्यों में सम्मिलित करता है। 
(ii) ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का होना किसी देश के लिए क्यों हानिकारक होता है?
उत्तर – जब किसी देश का आयात मूल्य, उसके निर्यात मूल्य से अधिक होता है तब देश का व्यापार संतुलन ऋणात्मक अथवा प्रतिकूल कहा जाता है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है और यह वित्तीय संचय की समाप्ति को अभिप्रेरित करता है। यही कारण है कि ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का होना किसी देश के लिए हानिकारक होता है। 
(iii) व्यापारिक समूहों के निर्माण द्वारा राष्ट्रों को क्या लाभ प्राप्त होते है?
उत्तर – व्यपारिक समूहों का निर्माण राष्ट्रों के लिए पारस्परिक लाभदायक होता है, यदि यह प्रादेशिक  विशिष्टीकरण, उत्पादन के उच्च स्तर, रहन-सहन के स्तर, वस्तुओं एवं सेवाओं की विश्वव्यापी उपलब्धता, कीमतों और वेतन का समानीकरण, ज्ञान एवं संस्कृति के प्रस्फुरण को प्रेरित करता है   
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) पतन किस प्रकार व्यापार के लिए सहायक होते है? पत्तनों का वर्गीकरण उनकी अवस्थिति के आधार पर कीजिए।
उत्तर – अंतरराष्ट्रीय व्यापार के दुनिया के मुख्य प्रवेश द्वार पोताश्रय तथा पत्तन होते हैं। इन पत्रों के द्वारा जहाजी माल तथा यात्री विश्व के एक भाग से दूसरे भाग को जाते हैं। 
       पत्तन जहाज के लिए गोदी, लादने, उतारने तथा भंडारण हेतु सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इन सुविधाओं को प्रदान करने के उद्देश्य से पत्तन के प्राधिकारी नौगम्य द्वारों का रख-रखाव, रस्सों व बजरों की व्यवस्था करने और श्रम एवं प्रबंधकीय सेवाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था करते हैं। एक पत्तन  के महत्व को नौगम्य के आकार और निपटाए किए गए जहाजों की संख्या द्वारा निश्चित किया जाता है।
                         अवस्थिति के आधार पर पत्तन दो प्रकार होते हैं – 
(a) अंतर्देशीय पत्तन  – ये पत्तन समुद्री तट से दूर अवस्थित होते हैं। ये समुद्र से एक नदी अथवा नहर द्वारा जुड़े होते हैं। ऐसे पतन चौरस तल वाले जहाज या बजरी द्वारा ही गम्य होते हैं। उदाहरणस्वरूप – कोलकत्ता हुगली नदी जो गंगा नदी की एक शाखा है पर स्थित है। 
(b) बाह्य पत्तन – ये गहरे जल के पत्तन है जो वास्तविक पत्तन से दूर बने होते हैं। ये उन जहाजों, जो अपने बड़े आकार के कारण उन तक पहुँचने में अक्षम है, को ग्रहण करके पैतृक पत्तनों को सेवाएँ प्रदान करते हैं। उदाहरणस्वरूप एथेंस तथा यूनान में इसके बाह्य पत्तन पिरेइअस एक उच्च कोटि का संयोजन है। 
(ii) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से देश कैसे लाभ प्राप्त करते है?
उत्तर – दो या दो से अधिक देशों के बीच होने वाले व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है। इससे व्यापारिक सदस्य देशों को निम्नलिखित प्रकार से लाभ  होते है –
◆ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वस्तुओं के स्थानान्तरण के सिद्धांत पर निर्भर करता है जिससे व्यापारिक सदस्य देशों को लाभ पहुँचता है
◆कीमतों और वेतन का समानीकरण से व्यापारिक सदस्य देशों को लाभ पहुँचता है
◆ व्यापारिक सदस्य देशों में आपसी सहयोग एवं भाईचारा बढ़ता है, इससे इनके बीच मैत्रिक संबंध अच्छे बनते है
◆ व्यापारिक सदस्य देशों में हर देश अपनी सर्वश्रेष्ठ सामान को बाजार में उतारता है जिससे अन्य आर्थिक क्रियाओं का विकास होता है
◆ इसके अंतर्गत तकनीकी ज्ञान, संकृति एवं अन्य बौद्धिक ज्ञानों का आदान-प्रदान किया जाता है, इससे दोनों देशों को लाभ पहुँचता है
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