1. भारत की जलवायु की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता कौन-सी है?
(a) हवाओं का मौसमी परिवर्तन
(b) वर्ष भर लगातार वर्षा
(c) पवनों की दिशा में परिवर्तन
(d) ग्रीष्म एवं शीतकालीन पवनों का प्रभावी होना
(a) हवाओं का मौसमी परिवर्तन
2. भारतीय मानसून का वर्णन सबसे पहले किस अरब विद्वान् द्वारा किया गया?
(a) अलबरूनी
(b) अल मसूदी
(c) अल अहमदी
(d) इब्न खुरदाद बेह
(b) अल मसूदी
3. निम्नलिखित में से कौन भारतीय मानसून को प्रभावित नहीं करता है?
(a) एलनिनो
(b) जेटस्ट्रीम
(c) तिब्बत का पठार
(d) गल्फस्ट्रीम
(d) गल्फस्ट्रीम
4. भारत में सर्वाधिक वर्षा किस मानसून से होती है?
(a) दक्षिण-पूर्वी मानसून
(b) दक्षिण-पश्चिम मानसून
(c) उत्तर-पूर्वी मानसून
(d) उत्तर-पश्चिम मानसून
(b) दक्षिण-पश्चिम मानसून
5. निम्नलिखित में से किस राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून से वर्षा नहीं होती है?
(a) राजस्थान
(b) तमिलनाडु
(c) कर्नाटक
(d) पंजाब
(b) तमिलनाडु
6. तमिलनाडु के तटीय भागों में जाड़ों में वर्षा की प्राप्ति किससे होती है?
(a) उत्तर-पूर्वी मानसून से
(b) दक्षिण-पश्चिम मानसून से
(c) स्थलीय एवं सागरीय समीर से
(d) बंगाल की खाड़ी के चक्रवात से
(a) उत्तर-पूर्वी मानसून से
7. दक्षिण-पश्चिम मानसून निम्नलिखित में से किस प्रदेश में सर्वप्रथम प्रवेश करता है?
(a) तमिलनाडु
(b) महाराष्ट्र
(c) गोवा
(d) केरल
(d) केरल
8. देश के किस भाग में मानसून के अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी दोनों ही शाखाओं से वर्षा होती है?
(a) मध्य प्रदेश
(b) बिहार
(c) पंजाब
(d) उड़ीसा
(c) पंजाब
9. असम, पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा राज्यों में मानसून पूर्व आने वाली तड़ित झंझाएं निम्न में से किस नाम से जानी जाती है ?
(a) नारवेस्टर्स
(b) नारईस्टर्स
(c) ईस्टवेस्टर्स
(d) साउथईस्टर्स
(a) नारवेस्टर्स
10. भारत के कोरोमण्डल तट पर सर्वाधिक वर्षा होती है-
(a) जनवरी-फरवरी में
(c) मार्च-मई में
(b) जून-सितम्बर में
(d) अक्तूबर-नवम्बर में
(d) अक्तूबर-नवम्बर में
11. भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में शीतकालीन वर्षा का कारण है-
(a) स्थानीय झंझवात
(b) लौटता मानसून
(c) पश्चिमी विक्षोभ
(d) पूर्वी विक्षोभ
(c) पश्चिमी विक्षोभ
12. तमिलनाडु में शीतकालीन वर्षा का कारण है-
(a) उत्तर-पश्चिम मानसून
(b) उत्तर-पूर्वी मानसून
(c) दक्षिण-पश्चिम मानसून
(d) पश्चिमी विक्षोभ
(b) उत्तर-पूर्वी मानसून
13. भारत में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला स्थान है-
(a) बीकानेर
(b) चेरापूँजी
(c) मासिनराम
(d) शिमला
(c) मासिनराम
14. भारत में सबसे अधिक तथा सबसे कम वर्षा प्राप्त करने वाले दो राज्यों का सही क्रम निम्नलिखित में से कौन है?
(a) केरल तथा मध्य प्रदेश
(b) मेघालय तथा राजस्थान
(c) असम तथा राजस्थान
(d) केरल तथा राजस्थान
(b) मेघालय तथा राजस्थान
15. मावसिनराम और चेरापूंजी में अधिक वर्षा होती है क्योंकि
(a) यहीं निम्न दाब रहता है
(b) यहाँ सदा भाप भरी हवाएँ चलती है
(c) यहाँ वर्ष भर वर्षा होती रहती है
(d) यहाँ की पहाड़ियों कीप की आकृति की है
(d) यहाँ की पहाड़ियों कीप की आकृति की है
16. दिल्ली में अधिक वार्षिक तापान्तर का कारण है-
(a) अल्प वर्षा
(b) कर्क रेखा से निकटता
(c) मरुस्थल से निकटता
(d) समुद्र से अधिक दूरी
(d) समुद्र से अधिक दूरी
17. भारत में शरदकालीन वर्षा का क्षेत्र है-
(a) तमिलनाडु-कर्नाटक
(b) पंजाब-राजस्थान
(c) पंजाब-तमिलनाडु
(d) उड़ीसा-कर्नाटक
(a) तमिलनाडु-कर्नाटक
18. जम्मू-कश्मीर में होने वाली शीतकालीन वर्षा का कारण कौन-सा है?
(a) लौटता मानसून
(b) पश्चिमी विक्षोभ
(c) स्थानीय पवन
(d) शीतकालीन मानसून
(b) पश्चिमी विक्षोभ
19. वर्षा की सर्वाधिक विरलता निम्नलिखित में से कहाँ पायी जाती है?
(a) लेह
(b) जैसलमेर
(c) जोधपुर
(d) बीकानेर
(a) लेह
20. यदि भारत में कर्क रेखा के स्थान पर विषुवत् रेखा होती, तो यहाँ की जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता?
(a) अधिक ताप एवं कम वर्षा
(b) अधिक ताप एवं अधिक वर्षा
(c) कम ताप एवं कम वर्षा
(d) कम ताप एवं अधिक वर्षा
(b) अधिक ताप एवं अधिक वर्षा
21. मानसून वर्षा की विशेषता नहीं है-
(a) मौसमी वर्षा
(b) अनिश्चित तथा अनियमित वर्षा
(c) वर्षा का असमान वितरण
(d) वर्षा होने वाले दिनों की निरन्तरता
(d) वर्षा होने वाले दिनों की निरन्तरता
22. भारत का अधिकांश भाग कर्क रेखा के उत्तर में स्थित है पर इसे एक उष्ण कटिबन्धीय देश कहते हैं, क्योंकि-
(a) कर्क रेखा भारत के मध्य से गुजरती है
(b) भारत के निवासी उष्ण कटिबन्ध से आये हैं
(c) जनसंख्या का अधिक घनीकरण उष्ण कटिबंधीय भाग में है
(d) देश की जलवायु का निर्धारण उष्ण कटिबंधीय मानसून से होता है
(d) देश की जलवायु का निर्धारण उष्ण कटिबंधीय मानसून से होता है
23. पुणे में मुम्बई से कम वर्षा होती है, क्योंकि-
(a) पुणे कम ऊँचाई पर स्थित है
(b) इसके निकट घने वन नहीं है
(c) यह मुंबई की अपेक्षा विषुवत् रेखा से अधिक दूर है
(d) यह वृष्टि छाया में पड़ता है
(d) यह वृष्टि छाया में पड़ता है
24. यद्यपि भारत का केवल दक्षिणी भाग उष्ण कटिबंध में स्थित है, तथापि सम्पूर्ण भारत की जलवायु उष्ण कटिबन्धीय है। इसका कारण है-
(a) भारत मानसून के प्रभाव के अन्तर्गत आता है।
(b) भारत के उत्तर भाग की स्थिति महाद्वीपीय है।
(c) देश के मध्य भाग से कर्क रेखा गुजरती है।
(d) ऊँची हिमालय पर्वत श्रेणियाँ उत्तरी ठण्डी हवाओं से इसकी रक्षा करती है।
(d) ऊँची हिमालय पर्वत श्रेणियों उत्तरी ठण्डी हवाओं से इसकी रक्षा करती है।
25. भारत में वर्षा का औसत है-
(a) 98 सेमी०
(b) 118 सेमी०
(c) 128 सेमी०
(d) 138 सेमी०
(b) 118 सेमी०
26. मानसूनी जलवायु की प्रमुख विशेषता है-
(a) मूसलाधार एवं पर्वतीय वर्षा
(b) मूसलाधार एवं चक्रवातीय वर्षा
(c) मूसलाधार एवं संवाहनिक वर्षा
(d) वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन
(d) वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन
27. भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में शीतकाल में वर्षा होती है-
(a) झंझावतों से
(b) लौटते मानसून से
(c) पश्चिमी विक्षोभों से
(d) उष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों से
(c) पश्चिमी विक्षोभों से
28. भारत के उत्तरी मैदानों में शीतकाल में वर्षा होती है-
(a) पश्चिमी विक्षोभ से
(b) बंगाल की खाड़ी की मानसूनी शाखा से
(c) अरब सागर की मानसूनी शाखा से
(d) लौटते मानसून से
(a) पश्चिमी विक्षोभ से
29. निम्न में से भारत के किन क्षेत्रों में 200 मिमी० वर्षा होती है?
(a) केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक
(b) जम्मू कश्मीर
(c) पं० बंगाल, उड़ीसा, बिहार
(d) असम, मणिपुर, त्रिपुरा
(b) जम्मू कश्मीर
30. आम्र वर्षा (Mango Shower)-
(a) आमों की बौझार
(b) आम का टपकना
(c) बिहार एवं बंगाल में मार्च एवं अप्रैल में होने वाली वर्षा
(d) आम की फसल
(c) बिहार एवं बंगाल में मार्च एवं अप्रैल में होने वाली वर्षा
31. भारत में वर्षा का आधिक्य होते हुए भी यह देश प्यासी धरती समझा जाता है, इसका कारण है-
(a) वर्षा के पानी का तेजी से वह जाना
(b) वर्षा का पानी शीघ्रता से भाप बनकर उड़ जाता है
(c) वर्षा का कुछ थोड़े ही महीनों में जोर होना
(d) इनमें से सभी
(d) इनमें से सभी
32. भारत में सबसे कम वर्षा का क्षेत्र है-
(a) कच्छ से लेकर पंजाब-हरियाणा तक
(b) पंजाब से लेकर दिल्ली तक
(c) मध्य प्रदेश का क्षेत्र
(d) उड़ीसा का बालागीर क्षेत्र
(a) कच्छ से लेकर पंजाब-हरियाणा तक
33. नीचे स्थानों के युग्म दिये गये हैं, उनमें कौन-सा ऐसा युग्म है जिसके दोनों नगर लगभग समान अक्षांश पर अवस्थित हैं फिर भी उनकी वार्षिक वर्षा की कुल मात्रा में अन्तर सर्वाधिक सुस्पष्ट है?
(a) बंगलौर और चेन्नई
(b) अजमेर और शिलांग
(c) मुम्बई और विशाखापतनम
(d) नागपुर और कोलकाता
(b) अजमेर और शिलांग
34. भारतीय उपमहाद्वीप पर ग्रीष्म ऋतु में उच्च तापमान एवं निम्न दाब हिन्द महासागर में वायु का आकर्षण करते हैं जिसके कारण प्रभावित होती
(a) दक्षिण-पूर्व मानसून
(b) दक्षिण-पश्चिम मानसून
(c) व्यापारिक हवाएँ
(d) पश्चिमी हवाएँ
(b) दक्षिण-पश्चिम मानसून
35 . अल्पकालिक जलवायु सम्बन्धी भविष्य कथन के लिए पिछले दशक में ज्ञात हुई निम्नलिखित स्थितियों में से कौन-सी एक भारतीय उपमहाद्वीप में विरल क्षीण वर्षा मानसून से सम्बद्ध है?
(a) ला-नीना
(b) धारा प्रवाह की गति
(c) एलनिनो तथा दक्षिणी दोलन
(d) विश्वव्यापी स्तर पर पादप गृह प्रभाव
(c) एलनिनो तथा दक्षिणी दोलन
36. निम्नलिखित में कौन सुमेलित नहीं है?
(a) नार्वेस्टर पूर्वी-भारत
(b) आँधी-उत्तर प्रदेश
(c) चेरी ब्लासम-कर्नाटक
(d) आम्र बौछार-आन्ध्र प्रदेश
(d) आम्र बौछार-आन्ध्र प्रदेश
37. ग्रीष्मकाल में आने वाले तूफानों को निम्नलिखित में से किस राज्य में ‘काल वैशाखी’ के नाम से जाना जाता है?
(a) पंजाब
(b) हरियाणा
(c) राजस्थान
(d) पश्चिम बंगाल
(d) पश्चिम बंगाल
38. विश्व में सर्वाधिक वर्षा मावसिनराम में होने का कारण है-
(a) पहाड़ियों का कीपाकार आकृति में होना
(b) वहाँ सदा निम्न दाब बना रहना
(c) वहाँ सदा उच्च दाब बना रहना
(d) वहाँ काफी सघन वनस्पति पाया जाना
(a) पहाड़ियों का कीपाकार आकृति में होना
39. दक्षिण-पश्चिम मानसूने से सम्पूर्ण भारत में कुल कितने प्रतिशत वर्षा मिलती है?
(a) लगभग 40%
(b) लगभग 75%
(c) लगभग 90%
(d) लगभग 100%
(b) लगभग 75%
40. चेन्नई में जाड़ों में वर्षा होती है-
(a) दक्षिण-पश्चिम मानसून से
(b) उत्तर-पूर्वी मानसून से
(c) स्थलीय व सामुद्रिक हवाओं से
(d) इनमें से कोई नहीं
(b) उत्तर-पूर्वी मानसून से
41. चेन्नई की जलवायु कोलकाता की जलवायु की तुलना में गर्म क्यों रहती है, जबकि दोनों स्थान समुद्र तट पर स्थित हैं?
(a) क्योंकि चेन्नई कोलकाता की अपेक्षा समुद्र तट से कुछ ही दूरी पर है।
(b) चेन्नई के आस-पास रेत ही रेत है।
(c) चेन्नई विषुवत् रेखा के अधिक समीप है।
(d) चेन्नई ठंडी हवाओं के मार्ग में नहीं पड़ता है, जबकि कोलकाता पड़ता है।
(c) चेन्नई विषुवत् रेखा के अधिक समीप है।
42. मानसून निवर्तन से सबसे अधिक वर्षा कहां होती है?
(a) मुम्बई
(b) दिल्ली
(c) चेन्नई
(d) कोलकाता
(c) चेन्नई
43. ‘आम्र बौछार’ (Mango Showers) के बारे में कौन-सा कथन सत्य है?
(a) यह केरल राज्य में मानसून के पश्चात् होती है।
(b) यह केरल राज्य तथा पश्चिमी तटीय मैदानी भाग में मानसून पूर्व काल में प्राप्त होती है।
(c) यह पंजाब तथा हरियाणा में मानसून पूर्व काल में प्राप्त होती है।
(d) उपर्युक्त सभी।
(b) यह केरल राज्य तथा पश्चिमी तटीय मैदानी भाग में मानसून पूर्व काल में प्राप्त होती है।
44. निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता भारतीय वर्षा की नहीं है?
(a) भारत में वर्षा की अनिश्चितता है।
(b) भारत के समस्त क्षेत्रों में वर्षा का वितरण समान है।
(c) यहाँ के अधिकांश क्षेत्रों में वर्ष के कुछ ही महीनों में वर्षा होती है।
(d) यहाँ के सभी क्षेत्रों में वर्षा का वितरण समान नहीं है।
(b) भारत के समस्त क्षेत्रों में वर्षा का वितरण समान है।
45. भारतीय मानसून मौसमी विस्थापन से इंगित है, जिसका कारण है-
(a) स्थल तथा समुद्र का विभेदी तापन
(b) मध्य एशिया की ठंडी हवा
(c) तापमान की अति एकसमानता
(d) इनमें से कोई नहीं
(b) मध्य एशिया की ठंडी हवा
46. भारत के किस राज्य में जाड़े के मौसम में वर्षा होती है?
(a) केरल
(b) तमिलनाडु
(c) प० बंगाल
(d) उड़ीसा
(b) तमिलनाडु
47. भारत के पश्चिमी समुद्री तट पर वर्षा किस मानसून से होती है?
2. निम्नलिखित में से नदियों की लम्बाई का सही अवरोही क्रम कौन-सा है?
(a) ब्रह्मपुत्र-गंगा-गोदावरी-नर्मदा
(b) गंगा-गोदावरी-ब्रह्मपुत्र-नर्मदा
(c) ब्रह्मपुत्र-नर्मदा-गोदावरी-गंगा
(d) गंगा-ब्रह्मपुत्र-गोदावरी-नर्मदा
(a) ब्रह्मपुत्र-गंगा-गोदावरी-नर्मदा
3. भारत में प्रवाहित होने वाली सबसे बड़ी नदी है-
(a) गंगा
(b) ब्रह्मपुत्र
(c) कृष्णा
(d) गोदावरी
(a) गंगा
4. गंगा नदी को बांग्लादेश में किस नाम से जाना जाता है?
(a) पद्मा
(b) जमुना
(c) मेघना
(d) सांगपो
(a) पद्मा
5. गंगा एवं ब्रह्मपुत्र की संयुक्त जलधारा किस नाम से जानी जाती है?
(a) पद्मा
(b) जमुना
(c) मेघना
(d) सांगपो
(c) मेघना
6. भारत की सबसे अधिक नौगम्य दो नदियाँ हैं-
(a) कावेरी और गोदावरी
(b) गंगा और ब्रह्मपुत्र
(c) गंगा और सिन्धु
(d) ब्रह्मपुत्र और यमुना
(b) गंगा और ब्रह्मपुत्र
7. निम्नलिखित नदियों में से भारत में किस पर सबसे लम्बा सड़क सेतु है?
(a) सोन
(b) नर्मदा
(c) महानदी
(d) गंगा
(d) गंगा
8. सुन्दर वन का डेल्टा कौन-सी नदी बनाती है?
(a) गंगा
(c) गंगा-ब्रह्मपुत्र
(b) ब्रह्मपुत्र
(d) नर्मदा-तापी
(c) गंगा-ब्रह्मपुत्र
9. गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों का उद्गम स्थान क्रमशः स्थित है?
(a) नेपाल तथा तिब्बत में
(b) तिब्बत तथा सिक्किम में
(c) उत्तर प्रदेश तथा तिब्बत में
(d) उत्तराखंड तथा तिब्बत में
(d) उत्तराखंड तथा तिब्बत में
10. निम्नलिखित नदियों में से किसका उद्गम स्थान भारतीय क्षेत्र में नहीं है?
(a) महानदी
(b) ब्रह्मपुत्र
(c) रावी
(d) चिनाब
(b) ब्रह्मपुत्र
11. तिब्बत में बहने वाली नदी सांगपो निम्नलिखित में से किससे होकर भारत में प्रवेश करती है?
(a) असम
(b) सिक्किम
(c) अरुणाचल प्रदेश
(d) मणिपुर
(c) अरुणाचल प्रदेश
12. सिन्धु नदी की लम्बाई उतनी ही है जितनी की ब्रह्मपुत्र की, यह लम्बाई कितनी है?
(a) 2700 किमी०
(b) 2900 किमी०
(c) 3000 किमी०
(d) 3300 किमी०
(b) 2900 किमी०
13. तिब्बत में मानसरोवर झील के पास किस नदी का उद्गम स्रोत स्थित है?
(a) सिन्धु
(b) सतलज
(c) ब्रह्मपुत्र
(d) इनमें से सभी
(d) इनमें से सभी
14. विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप ‘माजुली’ का निर्माण करने वाली नदी हैं-
(a) कृष्णा
(b) कावेरी
(c) गोदावरी
(d) ब्रह्मपुत्र
(d) ब्रह्मपुत्र
15. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित होती है?
(a) गोदावरी
(b) कावेरी
(c) कृष्णा
(d) बेतवा
(d) बेतवा
16. निम्न में किस नदी को ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है?
(a) गंडक
(b) कोसी
(c) सोन
(d) गंगा
(b) कोसी
17. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी अपना मार्ग बदलने के लिए जानी जाती है?
(a) नर्मदा
(b) यमुना
(c) कोसी
(d) सोन
(c) कोसी
18. निम्नलिखित नदियों में से कौन एक ‘विनाशक नदी’ कहलाती है?
(a) नर्मदा
(b) तापी
(c) कोसी
(d) गंडक
(c) कोसी
19. निम्नलिखित में से कौन नदी ‘बंगाल का शोक’ कहलाती है?
(a) सोन
(b) गंडक
(c) हुगली
(d) दामोदर
(d) दामोदर
20. वे दो प्रमुख नदियाँ कौन-सी है जो अमरकंटक पठार से निकलती है परन्तु वे अलग-अलग दिशाओं में बहती है?
(a) चम्बल और बेतवा
(b) चम्बल और सोन
(c) नर्मदा और सोन
(d) नर्मदा और बेतवा
(c) नर्मदा और सोन
21. तवा किसकी सहायक नदी है?
(a) नर्मदा
(b) तापी
(c) महानदी
(d) गोदावरी
(a) नर्मदा
22. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी प्रारंभ में अरुण नदी के नाम से जानी जाती है?
(a) सोन
(b) कोसी
( c) चम्बल
(d) यमुना
(b) कोसी
23. निम्नलिखित में से किस नदी को ‘उड़ीसा का शोक’ कहा जाता है?
(a) महानदी
(b) ब्राह्मणी
(c) वैतरणी
(d) दामोदर
(a) महानदी
24. चम्बल नदी का उद्गम स्थल है-
(a) नाग पहाड़ी
(b) जनापाव पहाड़ी
(c) ब्रह्मगिरि पहाड़ी
(d) अमरकंटक पठार
(b) जनापाव पहाड़ी (मध्य प्रदेश)
25. भारत की लवण नदी के नाम से जानी जाती है
(a) माही
(b) लूनी
(c) बनास
(d) साबरमती
(b) लूनी
26. कौन-सी नदी भेड़ाघाट के समीप कपिलधारा जलप्रपात का निर्माण करती है?
(a) नर्मदा
(b) तापी
(c) गोकक
(d) शरावती
(a) नर्मदा
27. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी ज्वारनदमुख का निर्माण करती है?
(a) राप्ती
(b) महानदी
(c) नर्मदा
(d) स्वर्णरेखा
(c) नर्मदा
28. प्रायद्वीपीय भारत की निम्न नदियों में से कौन शेष तीन से विशिष्ट रूप से भिन्न है?
(a) नर्मदा
(b) कावेरी
(c) कृष्णा
(d) गोदावरी
(a) नर्मदा
29. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी एश्चुअरी नहीं बनाती है?
(a) नर्मदा
(b) तापी
(c) माण्डवी
(d) महानदी
(d) महानदी
30. कौन-सी नदी अपने मुहानों पर डेल्टा का निर्माण नहीं करती है?
(a) कावेरी
(b) गोदावरी
(c) तापी
(d) महानदी
(c) तापी
31. क्षिप्रा नदी निम्नलिखित में से किसकी सहायक नदी है?
(a) गोदावरी
(b) चम्बल
(c) महानदी
(d) नर्मदा
(b) चम्बल
32. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी अमरकंटक के पठार से नहीं निकलती है?
(a) गोदावरी
(b) नर्मदा
(c) तवा
(d) सोन
(a) गोदावरी
33. महानदी, नर्मदा तथा सोन नदियाँ कहाँ से निकलती है?
(a) रामगढ़ गुम्बद से
(b) पंचमढ़ी पहाड़ी से
(c) ग्वाल पहाड़ी से
(d) अमरकंटक पहाड़ी से
(d) अमरकंटक पहाड़ी से
34. निम्नलिखित नदी युग्मों में से कौन ज्वारनदमुख का निर्माण करती है?
(a) नर्मदा एवं तापी
(b) गंगा एवं ब्रह्मपुत्र
(c) कृष्णा एवं कावेरी
(d) कृष्णा एवं गोदावरी
(a) नर्मदा एवं तापी
35. निम्न में से कौन-सी नदी रिफ्ट घाटी Rift Valley) से होकर बहती है?
(a) गोदावरी
(b) तापी
(c) कावेरी
(d) कृष्णा
(b) तापी
36. निम्नलिखित में से किस नदी के मुहाने पर डेल्टा नहीं बनता है?
(a) कावेरी
(b) महानदी
(c) गोदावरी
(d) तापी
(d) तापी
37. दक्षिण भारत के पठारी प्रदेश को कौन-सी नदी दो भागों में विभाजित करती है?
(a) तापी
(b) नर्मदा
(c) माही
(d) साबरमती
(b) नर्मदा
38. दक्षिण भारत की नदियों में सबसे लम्बी नदी है-
(a) गोदावरी
(b) कृष्णा
(c) कावेरी
(d) नर्मदा
(a) गोदावरी
39. निम्नलिखित में से किस नदी को ‘वृद्ध गंगा’ के नाम से जाना जाता है?
(a) गोदावरी
(b) महानदी
(c) कृष्णा
(d) कावेरी
(a) गोदावरी
40. गोदावरी नदी का उद्गम स्थल है-
(a) मुल्ताई नगर
(b) त्र्यंबक गाँव
(c) जनापाव पहाड़ी
(d) ब्रह्मगिरि पहाड़ी
(b) त्र्यंबक गाँव (महाराष्ट्र में नासिक के पास त्र्यंबकेश्वर से निकलती है)
41. वैनगंगा तथा पैनगंगा किसकी सहायक नदी है?
(a) गोदावरी
(b) कृष्णा
(c) गंगा
(d) झेलम्
(a) गोदावरी
42. भारत की सबसे लम्बी नदी जिसका उद्गम तथा मुहाना दोनों भारतीय क्षेत्र में स्थित है-
(a) गंगा
(b) गोदावरी
(c) ब्रह्मपुत्र
(d) नर्मदा
(b) गोदावरी
43. कावेरी नदी का उद्गम स्थल है-
(a) तिरूची
(b) मैसूर
(c) ब्रह्मगिरि
(d) अमरकंटक
(c) ब्रह्मगिरि
44. कावेरी नदी गिरती है
(a) बंगाल की खाड़ी में
(b) अरब सागर में
(c) पाक जलडमरूमध्य में
(d) खम्भात की खाड़ी में
(a) बंगाल की खाड़ी में
45. कावेरी नदी जल विवाद मुख्यतः किन दो राज्यों के मध्य है?
(a) आ० प्र० तथा तमिलनाडु
(b) केरल तथा कर्नाटक
(c) केरल तथा तमिलनाडु
(d) कर्नाटक तथा तमिलनाडु
(d) कर्नाटक तथा तमिलनाडु
46. निम्न में से किस नदी को उसकी पवित्रता के कारण ‘दक्षिणी भारत की गंगा’ कहा जाता है ?
(a) महानदी
(b) गोदावरी
(c) कृष्णा
(d) कावेरी
(d) कावेरी, कावेरी नदी को उसकी पवित्रता, धार्मिक महत्व और दक्षिण भारत में इसके प्रति लोगों की श्रद्धा के कारण “दक्षिणी भारत की गंगा” कहा जाता है।
47. कृष्णा नदी का उद्गम स्थल किसके समीप है?
(a) महाबलेश्वर
(b) उदगमंडलम
(c) खण्डाला
(d) पंचमढ़ी
(a) महाबलेश्वर
48. पंचगंगा तथा दूधगंगा किसकी सहायक नदी है?
(a) कृष्णा
(b) गोदावरी
(c) गंगा
(d) झेलम
(a) कृष्णा
49. इण्डोब्रह्मा है
(a) एक पौराणिक नदी
(b) एक द्वीप
(c) एक पर्वत श्रेणी
(d) एक झील
(a) एक पौराणिक नदी
50. दामोदर नदी निकलती है-
(a) तिब्बत से
(b) छोटानागपुर पठार से
(c) नैनीताल के पास से
(d) सोमेश्वर पहाड़ी से
(b) छोटानागपुर पठार से
51. निम्नलिखित में से कौन भूमि बन्धित नदी हैं?
(a) तापी
(b) कृष्णा
(c) लूनी
(d) नर्मदा
(c) लूनी
52 . भारत की सबसे बड़ी वाह नदी है
(a) महानदी
(b) गोदावरी
(c) गंगा
(d) नर्मदा
(c) गंगा
53. विश्व का बृहत्तम डेल्टा निर्मित होता है-
(a) गंगा एवं ब्रह्मपुत्र द्वारा
(b) मिसिसीपी-मिसौरी द्वारा
(c) यांगसी कियांग द्वारा
(d) ह्वांगहों द्वारा
(a) गंगा एवं ब्रह्मपुत्र द्वारा
54. पश्चिम की ओर प्रवाहित होने वाली नदियाँ है-
(i) नर्मदा (ii) तापी (iii) राप्ती
(a) (i) एवं (ii)
(b) (ii) एवं (iii)
(c) (i) एवं (iii)
(d) (i), (ii) एवं (iii)
(a) (i) एवं (ii)
55. मानस किस नदी की उपनदी है?
(a) गोदावरी
(b) महानदी
(c) कृष्णा
(d) ब्रह्मपुत्र
(d) ब्रह्मपुत्र
56. कौन-सी नदी भ्रंश द्रोणी से होकर बहती है?
(a) नर्मदा
(b) सोन
(c) गोदावरी
(d) कावेरी
(a) नर्मदा
57. सोन, नर्मदा और महानदी निकलती है
(a) पलामू पहाड़ से
(b) अमरकन्टक से
(c) पूर्वी घाट से
(d) अरावली से
(b) अमरकन्टक से
58. निम्न नदियों में से सबसे अधिक पथ परिवर्तन किया है
(a) सोन नदी
(b) गंडक नदी
(c) कोसी नदी
(d) गंगा नदी
(c) कोसी नदी
59. हिमालय काटकर एवं बहकर आने वाली नदियाँ हैं-
(a) सतलज, सिन्धु, गंगा
(b) ब्रह्मपुत्र, सतलज, सिन्धु
(d) सतलज, ब्रह्मपुत्र, यमुना
(c) ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, गंगा
(b) ब्रह्मपुत्र, सतलज, सिन्धु
60. निम्नलिखित में वह नदी कौन-सी है जो एक विभ्रंश-घाटी (Rift Valley) से होकर बहती है?
(a) गोदावरी
(b) नर्मदा
(c) कृष्णा
(d) महानदी
(b) नर्मदा
61. प्रयद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी कौन-सी है?
(a) नर्मदा
(b) गोदावरी
(c) महानदी
(d) कावेरी
(b) गोदावरी
62. निम्नलिखित में से वह नदी कौन-सी है जिसका उद्गम भारतीय राज्य क्षेत्र में नहीं है?
(a) गोदावरी
(b) झेलम
(c) रावी
(d) घाघरा
(d) घाघरा
63. निम्नलिखित में से वह नदी कौन-सी है जिसका उद्गम भारतीय क्षेत्र में नहीं है?
(a) महानदी
(b) ब्रह्मपुत्र
(c) रावी
(d) चिनाब
(b) ब्रह्मपुत्र
64. कौन-सी नदी पश्चिम की ओर बहते हुए अरब सागर में प्रवेश करती है?
(a) गोदावरी
(b) कृष्णा
(c) कावेरी
(d) नर्मदा
(d) नर्मदा
65. निम्नलिखित में नर्मदा नदी के सम्बन्ध में सभी सही है, सिवाय-
(a) यह अमरकंटक के निकट से निकली है।
(b) इसके किनारे प्रसिद्ध महाकालेश्वर मन्दिर है।
(c) यह मार्बल रॉक्स के समूह के बीच से बहती है।
(d) इस नदी पर प्रसिद्ध सरदार सरोवर बांध बनया जा रहा है।
(b) इसके किनारे प्रसिद्ध महाकालेश्वर मन्दिर है।, महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन (मध्य प्रदेश) में स्थित है और यह शिप्रा नदी के किनारे स्थित है, नर्मदा नदी के किनारे नहीं।
66. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी कृष्णा नदी की सहायक नहीं है?
(a) तुंगभद्रा
(b) मालप्रभा
(c) घाटप्रभा
(d) अमरावती
(d) अमरावती
67. लूनी नदी किसमें गिरती है?
(a) गंगा मुहाना
(b) केरल का समुद्री तट
(c) कच्छ का रण
(d) गोदावरी का मुहाना
(c) कच्छ का रण
68. नर्मदा नदी का अधिकांश भाग भारत के किस राज्य में बहता है?
(a) गुजरात
(b) महाराष्ट्र
(c) मध्य प्रदेश
(d) राजस्थान
(c) मध्य प्रदेश
69. भारत में डेल्टा बनाने वाली नदियाँ है-
(a) गंगा, महानदी, नर्मदा
(b) कृष्णा, गंगा, तापी
(c) कावेरी, गंगा, महानदी
(d) नर्मदा, तापी, कृष्णा
(c) कावेरी, गंगा, महानदी
70. भागीरथी और अलकनंदा मिलकर गंगा कहाँ बन जाती है?
(a) कर्ण प्रयाग
(b) देव प्रयाग
(c) रूद्र प्रयाग
(d) गंगोत्री
(b) देव प्रयाग
71. अरावली पर्वत श्रृंखला निम्नलिखित नदी प्रणाली से द्वि विभाजित होती है-
(a) चम्बल और सरस्वती
(b) चम्बल और साबरमती
(c) नर्मदा और बनास
(d) लूनी और बनास
(b) चम्बल और साबरमती
72. सिन्धु नदी का उद्गम स्थल है-
(a) रोहतांग दर्रा
(b) शेषनाग झील
(c) मानसरोवर झील
(d) मप्सातुंग हिमानी
(c) मानसरोवर झील
73. गोदावरी नदी कहाँ से होकर बहती है?
(a) महाराष्ट्र, तेलंगाना व आन्ध्र प्रदेश
(b) महाराष्ट्र, उड़ीसा व आन्ध्र प्रदेश
(c) महाराष्ट्र, कर्नाटक व आन्ध्र प्रदेश
(d) महाराष्ट्र, कर्नाटक, उड़ीसा व आन्ध्र प्रदेश
(a) महाराष्ट्र, तेलंगाना व आन्ध्र प्रदेश
74. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी प्रायद्वीपीय पठार उपांत से नहीं निकली है।
(a) यमुना
(b) दामोदर
(c) चम्बल
(d) सोन
(a) यमुना
75. कावेरी नदी निम्नलिखित में गिरती है-
(a) बंगाल की खाड़ी
(b) अरब सागर
(c) पाक जलडमरुमध्य
(d) इनमें से कोई नहीं
(a) बंगाल की खाड़ी
76. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पश्चिम की ओर नहीं बहती है?
(a) नर्मदा
(b) तापी
(c) नेत्रावती
(d) वैगाई
(c) नेत्रावती
77. नदियों को जोड़ने की योजना का प्रस्ताव किसके शासन काल में रख गया था?
(a) संयुक्त मोर्चा सरकार
(b) राजग सरकार
(c) यू० पी० ए० सरकार
(d) इनमें से कोई नहीं
(b) राजग सरकार
78. नेत्रावती नदी बहती है
(a) पूरब की ओर
(b) पश्चिम की ओर
(c) दक्षिण की ओर
(d) उत्तर की ओर
(c) दक्षिण की ओर
79. भारत में सबसे बड़ा नदी मुख किस नदी के मुख पर है?
(a) गोदावरी
(b) कृष्णा
(c) भागीरथी
(d) हुगली
(d) हुगली
80. पंजाब के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण नदी कौन-सी है?
(a) सतलज
(b) व्यास
(c) झेलम
(d) सिन्धु
(d) सिन्धु
81. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी विन्ध्यन तथा सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के मध्य से होकर गुजरती है?
(a) नर्मदा
(b) ताप्ती
(c) गंडक
(d) गोदावरी
(a) नर्मदा
82. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी अरब सागर में गिरती है?
दर्रे सामान्यत: दो पहाड़ियों के बीच की निचली जगह होती है, जिसका निर्माण प्राय: नदियों के बहने के कारण होता है।
दूसरे शब्दों में कह सकते है कि पहाडि़यों एवं पर्वतीय क्षेत्रों में दो पहाड़ो के बीच प्राकृतिक रूप से बनने वाले रास्ते को दर्रा कहते है। हालाँकि इन दर्रों के बननें के कई अन्य कारण जैसे कि भूकम्प, ज्वालामुखी, भू-स्खलन (जमीन का खिसकना) आदि भी हो सकता है।
दर्रे को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जा सकता है-
(A) हिमालय प्रदेश की दर्रा और
(B) प्रायद्वीपीय भारत की दर्रा
हिमालय प्रदेश की दर्रा
हिमालय प्रदेश में प्रमुख दर्रे निम्नलिखित मिलते है:-
लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश
1. कराकोरम दर्रा:
➤ कराकोरम दर्रा (Karakoram Pass) भारत के लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में स्थित है।
➤ यह दर्रा लद्दाख क्षेत्र में काराकोरम श्रेणियों के मध्य स्थित है।
➤ यह 5,654 मीटर ऊंचा है।
➤ यहां से चीन को एक सड़क भी बनाई गई है।
➤ प्राचीन काल में इस दर्रें से यारकंद भी जाते थे।
2. जोजिला दर्रा:
➤ लद्दाख (Ladakh) केंद्र शासित प्रदेश की जास्कर श्रेणी में दर्रा स्थित है।
➤ इसकी ऊंचाई 3,529 मीटर है।
➤ श्रीनगर से लेह जाने का मार्ग इसी दरें से गुजरता है।
जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)
1. पीर पंजाल दर्रा:
➤ यह जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश) के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
➤ यह पीरपंजाल के मध्य 3,494 मीटर ऊंचा दर्रा है।
2. बनिहाल दर्रा:
➤ यह जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश) के दक्षिण-पश्चिम में पीर-पंजाल श्रेणियों में स्थित है।
➤ इसकी ऊंचाई 2,832 मीटर है।
➤ जम्मू से श्रीनगर का मार्ग इसी दर्रें से गुजरता है।
3. बुर्जिल दर्रा:
➤ यह जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश) का एक ऐतिहासिक दर्रा।
➤ यह श्रीनगर को पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थित गिलगित और स्कर्दू से जोड़ता है।
हिमाचल प्रदेश
1. शिपकी ला दर्रा:
➤ यह दर्रा हिमाचल प्रदेश के जास्कर श्रेणी में स्थित है।
➤ इस दर्रें से होकर शिमला से तिब्बत जाने का मार्ग है।
नोटः ज्ञात हो कि दर्रे को तिब्बती भाषा में ‘ला’ कहते हैं। नियमानुसार इसे शिपकी दर्रा अथवा शिपकी ला कहना चाहिए, परंतु प्रचलन में शिपकी ला दर्रा ही है। इस प्रकार ‘शिपकी ला दर्रा’ कहना ‘दर्रे’ शब्द को दोहराने जैसा है, लेकिन यह प्रयोग फिर भी प्रचलित है।
2. रोहतांग दर्रा:
➤ हिमाचल प्रदेश में पीर पंजाल श्रेणियों में यह दर्रा स्थित है।
➤ इसकी ऊंचाई 4,631 मीटर है।
3. बड़ालाचा दर्रा:
➤ यह हिमाचल प्रदेश में जास्कर श्रेणियों के मध्य स्थित है।
➤ इसकी ऊंचाई 4,512 मीटर है।
➤ मंडी से लेह जाने के मार्ग में इसी दर्रे से गुजरना पड़ता है।
उतराखंड
1. नीति दर्रा:
➤ यह दर्रा भी उत्तराखंड के कुमायूं प्रदेश में स्थित है।
➤ यह 5,389 मीटर ऊंचा है।
➤ यहां से भी मानसरोवर झील और कैलाश घाटी जाने का मार्ग खुलता है।
2. माना दर्रा:
➤ यह भी उत्तराखंड के कुमायूं श्रेणियों में स्थित है।
➤ इस दर्रें से होकर भारतीय तीर्थयात्री मानसरोवर झील और कैलाश घाटी के दर्शन हेतु जाते हैं।
3. लिपुलेख दर्रा:
➤ यह भारत के उत्तराखण्ड राज्य के पिथौरागढ़ जिले और चीन द्वारा नियंत्रित तिब्बत के नगरी के बीच हिमालय में स्थित है।
➤ यह भारत के कुमाऊँ क्षेत्र को तिब्बत के बालाकोट (पुरंग) शहर से जोड़ता है।
➤ यह प्राचीनकाल से व्यापारियों और तीर्थयात्रियों द्वारा भारत और तिब्बत के बीच आने-जाने के लिये प्रयोग किया जा रहा है।
➤ यह दर्रा भारत से कैलाश पर्वत व मानसरोवर जाने वाले यात्रियों द्वारा विशेष रूप से इस्तेमाल होता है।
➤ यह नेपाल की सीमा के समीप भी स्थित है और नेपाल इस क्षेत्र को अपना होने का दावा करता है। नेपाल के अनुसार यह दार्चुला ज़िले की ब्यास गाँउपालिका में है।
सिक्किम
1. नाथू ला दर्रा:
➤ सिक्किम राज्य में डोगेक्या श्रेणी में नाथू ला दर्रा स्थित है।
➤ यह भारत-चीन युद्ध में अपने सामरिक महत्व के कारण अधिक चर्चित रहा था।
➤ यहां से दार्जिलिंग और चुंबी घाटी होकर तिब्बत जाने का मार्ग है।
2. जैलेप्ला दर्रा:
➤ यह दर्रा भी सिक्किम राज्य में है।
➤ भूटान जाने वाला मार्ग इसी दर्रें से गुजरता है।
➤ यहां से भी दार्जिलिंग और चुंबी घाटी होकर तिब्बत जाने का मार्ग है।
अरुणाचल प्रदेश
1. बोम्डि ला दर्रा:
➤ यह अरुणाचल प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है।
➤ बोम्डि ला से तवांग होकर तिब्बत जाने का मार्ग है।
2. यांग्याप दर्रा:
➤ अरुणाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्व में स्थित है।
➤ इसके पास से ही ब्रह्मपुत्र नदी भारत (अरुणाचल प्रदेश) में प्रवेश करती है।
➤ यहां से चीन के लिए मार्ग भी खुलता है।
3. दिफू दर्रा:
➤ अरुणाचल प्रदेश के पूर्व में म्यांमार सीमा पर यह दर्रा स्थित है।
4. पांग साउ दर्रा:
➤ पांगसौ दर्रा अथवा ‘पन सौंग दर्रा’ अरुणाचल प्रदेश के दक्षिण म्यांमार सीमा पर स्थित है।
➤ पांगसौ दर्रा समुद्री तल से 1,136 मीटर की ऊंचाई पर है।
➤ इस दर्रे से होकर डिब्रूगढ़ से म्यांमार के लिए मार्ग जाता हे।
➤ यह दर्रा म्यांमार से पश्चिम में असम के मैदानी इलाक़ों तक पहुँचने का सबसे सरल मार्ग है।
➤ इतिहासकार अनुमान लगाते हैं कि असम में 13वीं सदी में आकर बसने वाले अहोम लोगों ने इसी दर्रे से भारत में प्रवेश किया था।
➤ इस दर्रे का नाम म्यांमार के एक ग्राम ‘पंगसौ’ के नाम पर पड़ा है, जो दर्रे से दो कि.मी. पूर्व में बसा हुआ है।
➤ भारत को म्यांमार से जोड़ने वाला ‘लेडो मार्ग’ इसी दर्रे से निकलता है।
मणिपुर
1. तुजु दर्रा:
➤ यह मणिपुर राज्य के दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
➤ इंफाल से तामु और म्यांमार जाने के लिए इसी दर्रें से रास्ता जाता है।
प्रायद्वीपीय भारत की दर्रा
1. थाल घाट दर्रा:
➤ यह महाराष्ट्र राज्य में पश्चिमी घाट की श्रेणियों में स्थित प्रमुख दर्रा है।
➤ इसकी ऊंचाई 583 मीटर है।
➤ यहां से होकर दिल्ली-मुंबई के प्रमुख सड़क व रेलमार्ग गुजरते हैं।
2. भोर घाट दर्रा:
➤ यह दर्रा भी महाराष्ट्र राज्य के पश्चिमी घाट श्रेणियों में स्थित है।
➤ पुणे-बेलगाम रेलमार्ग और सड़क मार्ग इसी दर्रें से गुजरता है।
3. पाल घाट दर्रा:
➤ यह केरल राज्य के मध्य-पूर्व में नीलगिरि की पहाड़ियों में स्थित है।
➤ इसकी ऊंचाई 305 मीटर है।
➤ कालीकट त्रिचोर से कोयंबटूर-इंडोर के रेल व सड़क मार्ग इसी दरें से गुजरते हैं।
4. शेनकोट्टा दर्रा:
➤ यह केरल राज्य के दक्षिण-पूर्व में इलायची पहाड़ियों में 210 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
➤ यह दर्रा तिरुवनंतपुरम (केरल) और मदुरै (तमिलनाडु) को आपस में जोड़ता है।
भारत के प्रमुख दर्रे एक नजर में
क्रम
दर्रे
राज्य
1.
काराकोरम दर्रा
लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश
2.
जोजिला दर्रा
लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश
3.
पीरपंजाल दर्रा
जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश
4.
बनिहाल दर्रा
जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश
5.
बुर्जील दर्रा
जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश
6.
शिपकिला दर्रा
हिमाचल प्रदेश
7.
रोहतांग दर्रा
हिमाचल प्रदेश
8.
बड़ालाचा दर्रा
हिमाचल प्रदेश
9.
नीति दर्रा
उतराखंड
10.
माना दर्रा
उतराखंड
11.
लिपुलेख दर्रा
उतराखंड
12.
नाथुला दर्रा
सिक्किम
13.
जैलेप्ला दर्रा
सिक्किम
14.
बोम्डिला दर्रा
अरुणाचल प्रदेश
15.
यांग्याप दर्रा
अरुणाचल प्रदेश
16.
दिफू दर्रा
अरुणाचल प्रदेश
17.
पांग साउ दर्रा
अरुणाचल प्रदेश
18.
तुजु दर्रा
मणिपुर
19.
थाल घाट दर्रा
महाराष्ट्र
20.
भोर घाट दर्रा
महाराष्ट्र
21.
पाल घाट दर्रा
केरल
22.
शेनकोट्टा दर्रा
केरल
भारत के प्रमुख दर्रों से सम्बंधित महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. आर्यों ने भारत में किस दर्रे से होकर प्रवेश किया था?
(a) खैबर
(b) बोलन
(c) काराकोरम
(d) शिपकी
(a) खैबर
2. खैबर दर्रा स्थित है-
(a) तिब्बत और सिक्किम के बीच
(b) पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच
(c) चीन और अरुणाचल प्रदेश के बीच
(d) हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड के बीच
(b) पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच
3. ‘जवाहर सुरंग’ नाम किस प्राकृतिक पर्वतीय दर्रे को दिया गया है?
(a) पीरपंजाल दर्रा
(b) बुन्दिल पीर दर्रा
(c) बनिहाल दर्रा
(d) शिपकी ला दर्रा
(c) बनिहाल दर्रा
4. निम्नलिखित में से कौन-सा दर्रा पश्चिमी घाट पर्वतमाला में स्थित नहीं है?
(a) थाल घाट
(b) भोर घाट
(c) पाल घाट
(d) पीपली घाट
(d) पीपली घाट
5. पीपली घाट दर्रा किस पर्वतीय भाग में स्थित है?
(a) पश्चिमी घाट
(b) पूर्वी घाट
(c) विन्ध्याचल श्रेणी
(d) अरावली
(d) अरावली
6. निम्नलिखित में से कौन-सा पर्वतीय दर्रा लेह को श्रीनगर से जोड़ता है?
(a) बोम-डि-ला
(b) काराकोरम
(c) लिपुलेख
(d) जोजिला
(d) जोजिला
7. पाल घाट दर्रा निम्नलिखित में से किन दो राज्यों को जोड़ता है?
(a) केरल – तमिलनाडु
(b) कर्नाटक – तमिलनाडु
(c) आन्ध्र प्रदेश – तमिलनाडु
(d) कर्नाटक – केरल
(a) केरल – तमिलनाडु
8. तुजू दर्रा भारत को किस देश से जोड़ता है?
(a) चीन
(b) म्यान्मार
(c) नेपाल
(d) भूटान
(b) म्यान्मार
9. नाथूला दर्रा किस राज्य में स्थित है?
(a) उत्तरांचल
(b) हि० प्र०
(c) सिक्किम
(d) मणिपुर
(c) सिक्किम
10. बोम-डि-ला दर्रा भारत के किस राज्य में स्थित है?
(a) सिक्किम
(b) मणिपुर
(c) उत्तराखण्ड
(d) अरुणाचल प्रदेश
(d) अरुणाचल प्रदेश
11. जोजिला दर्रा किस राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में स्थित है?
(a) हिमाचल प्रदेश
(b) लद्दाख
(c) उत्तराखण्ड
(d) सिक्किम
(b) लद्दाख
12. निम्नलिखित में कौन-सा दर्रा सिक्किम राज्य में स्थित है?
(a) माना दर्रा एवं नीति दर्रा
(b) नाथूला एवं जैलेप्ला दर्रा
(c) बुर्जिल एवं जोजिला दर्रा
(d) शिपकी ला एवं यांग्याप दर्रा
(b) नाथूला एवं जैलेप्ला दर्रा
13. जम्मू से श्रीनगर का मार्ग किस दर्रे से होकर गुजरता है?
(a) जोजिला
(b) बुर्जिल
(c) बनिहाल
(d) पीरपंजाल
(c) बनिहाल
14. किस पर्वतीय दर्रे से होकर भारतीय तीर्थयात्री मानसरोवर झील तथा कैलाश पर्वतीय घाटी के दर्शन हेतु जाते हैं?
(a) शिपकी ला
(b) बारा लाचा
(c) माना
(d) नाथूला
(c) माना
15. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए-
सूची-I (पर्वतीय दर्रे) सूची-II (स्थिति)
A. नाथूला दर्रा 1. अरुणाचल प्रदेश
B. बोमडिला दर्रा 2. मणिपुर
C. तुजू दर्रा 3. सिक्किम
D. शिपकी ला दर्रा 4. हिमाचल प्रदेश
कूट : A B C D
(a) 1 3 4 2
(b) 2 1 3 4
(c) 3 1 2 4
(d) 3 2 1 4
(c) 3 1 2 4
16. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
(a) जोजिला दर्रा – जम्मू-कश्मीर
(b) शिपकी ला दर्रा – हि० प्र०
(c) जैलेप्ला दर्रा – अरुणाचल प्र०
(d) तुजू दर्रा – मणिपुर
(c) जैलेप्ला दर्रा – अरुणाचल प्र०
17. निम्नलिखित दर्रों में से कौन-सा सतलज घाटी में पड़ता है?
(a) नाथूला
(b) जैलेप्ला
(c) शिपकी ला
(d) शेराबथांगा
(c) शिपकी ला
18. खैबर का दर्रा कहाँ है?
(a) भूटान
(b) बांग्लादेश
(c) भारत
(d) पाकिस्तान
(d) पाकिस्तान
19. खैबर दर्रे से कौन से दो देश जुड़े हैं?
(a) भारत और पाकिस्तान
(b) भारत और अफगानिस्तान
(c) अफगानिस्तान और पाकिस्तान
(d) अफगानिस्तान और तजाकिस्तान
(c) अफगानिस्तान और पाकिस्तान
20. निम्नलिखित में से कौन-सा दर्रा हिमाचल प्रदेश में स्थित नहीं है?
(a) बारा ला
(b) पाचा ला
(c) शिपकी ला
(d) जैलेप्ला
(d) जैलेप्ला
21. बुर्जिल तथा जोजिला दर्रा निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित है?
➤ सम्पूर्ण भारत के 10.7% भूभाग पर पर्वत श्रेणियाँ, 18.6% भूभाग पर पहाड़ियाँ, 27.7% भूभाग पर पठारों, तथा शेष 43% भूभाग पर मैदानों का विकास हुआ है।
➤ भारत के उत्तर में विशालकाय मोड़दार पर्वतों की कई श्रृंखलाएँ मौजूद है जिसका विस्तार लगभग 5 लाख वर्ग किमी० पर हुआ है।
➤ इसी क्षेत्र में विश्व की कई ऊँची-2 चोटियाँ पायी जाती है।
➤ सुविधा के दृष्टिकोण से उत्तर के पर्वतीय क्षेत्र को तीन भागों में बाँटकर अध्ययन करते हैं।
1. ट्राँस हिमालय (ट्राँस = उस पार)
2. हिमालय
3. पूर्वांचल हिमालय
1. ट्राँस हिमालय
मुख्य हिमालय के उत्तर में जितने भी पर्वतीय श्रृंखलाएँ हैं, उन्हें ट्राँस हिमालय से संबोधित करते हैं। भारतीय भूभाग पर ट्राँस हिमालय की तीन श्रृंखलाएँ मौजूद हैं:-
(i) काराकोरम श्रेणी
(ii) लद्दाख श्रेणी
(iii) जास्कर श्रेणी।
➤ उपरोक्त तीन श्रृंखलाओं के अतिरिक्त चीन में स्थित टिएन्सान और क्यूनलून पर्वत और पाकिस्तान में स्थित हिन्दूकुश पर्वत ट्राँस हिमालय के उदाहरण हैं।
➤ ये सभी श्रृंखलाएँ मिलकर कश्मीर के उत्तरी भाग में एक गाँठ का निर्माण करती हैं जिसे पामीर का पठार कहते हैं। इसे ‘दुनिया के छ्त’ से भी सम्बोधित करते है।
➤ इसकी ऊँचाई समुद्रतल से 4500 मीटर से अधिक है। भारत में अवस्थित ट्रांस हिमालय श्रृंखलाओं की संक्षिप्त चर्चा नीचे की जा रही है।
(i) काराकोरम श्रेणी
➤ सिन्धु नदी के उत्तर में भारत और चीन के सीमा पर स्थित है जो पामीर के पठार से निकलकर उत्तर-पश्चिम से द०-पूरब की ओर विस्तृत है।
➤ इसका प्राचीन नाम ‘कृष्णा गिरि’ है।
➤ इसकी औसत ऊँचाई 6000 मी० है।
➤ इसकी सबसे ऊँची चोटी K-2 (केल्विन-2 या (गॉडविन ऑस्टिन) है जिसकी ऊँचाई 8611 मी० है।
➤ यह विश्व की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है। काराकोरम पर्वत की चौड़ाई 80 किमी० है।
➤ यह सालों भर बर्फ से ढका रहता है।
➤ इस पर्वत पर कई हिमानी मिलते हैं। जैसे:- बटुरा, हिस्पार, स्कामरी, बियाफो, बल्टोरो, सियाचीन हिमानी आदि।
➤ काराकोरम पर्वत पर हिमानी के अपरदन से कई दर्रे बने हैं। जैसे- खंजरेब, इन्दिरा कॉल, अगहिल इत्यादि।
➤ हिमानी के अपरदन से इसका ढाल सीढ़ीनुमा बन चुका है।
➤ यह विशुद्ध रूप से अर्द्ध मरुस्थलीय भूदृश्य प्रस्तुत करता है।
(ii) लद्दाख श्रेणी
➤ काराकोरम श्रेणी और जास्कर श्रेणी के बीच स्थित है।
➤ इसकी औसत ऊँचाई 5300 मी० है।
➤ हिमानी के अपरदन के कारण यह पठार के रूप में तब्दील हो चुका है।
➤ इसका दक्षिणी-पूर्वी भाग चीन में जाकर कैलाश पर्वत के नाम से जाना जाता है।
➤ इस श्रृंखला पर प्रसिद्ध पुगा की घाटी मिलती है जो भूतापीय ऊर्जा का विशाल स्रोत है।
नोट: भूतापीय बिजली संयंत्र बिजली उत्पादन के लिए भाप का उपयोग करते हैं। भाप पृथ्वी की सतह से कुछ नीचे पाए जाने वाले गर्म पानी के भंडारों से आती है। भाप सबसे पहले टरबाइन को घुमाती है जो कि एक जनरेटर को सक्रिय करती है, जिससे बिजली पैदा होती है।
➤ इस पठार पर सिन्धु की सहायक नदी श्योक नदी बहती है।
➤ लद्दाख श्रेणी के उत्तर-पूरब में सोड्डा का मैदान और देप्सांग का मैदान स्थित है।
(iii) जास्कर श्रेणी
➤ लद्दाख श्रेणी के दक्षिण में समान्तर रूप से फैला हुआ है।
➤ यह पर्वत 76°E देशान्तर रेखा के पास महान हिमालय से निकलती है।
➤ इस पर्वत की वहीं विशेषताएँ है जो लद्दाख एवं काराकोरम श्रेणी की है।
चित्र: ट्रांस हिमालय
2. हिमालय
‘हिमालय’ दो शब्दों के मिलने से बना है- प्रथम- हिम, दूसरा- आलय। हिम का तात्पर्य बर्फ से है जबकि आलय का तात्पर्य घर से है, अर्थात हिमालय एक ऐसा नवीन मोड़दार पर्वत है जहाँ लाखों वर्षों से हिम स्थायी रूप से निवास करता है।
➤ यह पर्वत भारत के उत्तरी भाग में एक चाप के समान है।
➤ इसका विस्तार सिन्धु गॉर्ज से लेकर ब्रह्मपुत्र गॉर्ज तक है।
➤ इसकी कुल लम्बाई 2500 किमी० है जबकि इसकी चौड़ाई अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग है। जैसे अरुणाचल प्रदेश में इसकी चौ० 150 किमी० है जबकि जम्मू कश्मीर में इसकी चौड़ाई 450 किमी० है।
➤ हिमालय पर्वत में तीन प्रमुख श्रृंखलाएँ हैं जो महान हिमालय, लघु हिमालय तथा शिवालिक हिमालय के नाम से प्रसिद्ध है।
➤ इसकी उत्पत्ति की व्याख्या हेतु कई सिद्धांत प्रस्तुत किये गये है उनमें सबसे वैज्ञानिक सिद्धांत प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत है।
➤ ‘प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत’ के अनुसार हिमालय एक नवीन मोड़दार पर्वत है।
➤ आज जहाँ पर हिमालय अवस्थित है वहाँ पर प्लीस्टोसीन कल्प तक एक विशाल सागर अवस्थित था जो टेथिस सागर के नाम से प्रसिद्ध था।
➤ टेथिस सागर के उत्तर में अंगारालैण्ड और दक्षिण में गोंडवाना लैण्ड था।
➤ टेथिस सागर के मलबों में वलन एवं उत्थान की क्रिया से हिमालय जैसे विशाल पर्वत का निर्माण हुआ।
चित्र: हिमालय पर्वत की उत्पत्ति
➤ हिमालय पर्वत को तृतीयक काल का पर्वत भी कहा जाता है क्योंकि इसका निर्माण का कार्य तृतीयक काल में ही सम्पन्न हुआ था।
➤ इस काल में महान भू-संचलन की क्रिया सम्पन्न हुई थी जिसे अल्पाइन भू-संचलन के नाम से जानते है।
➤ हिमालय पर्वत का निर्माण भी अल्पाइन भूसंचलन से हुआ, इसीलिए हिमालय को अल्पाइन पर्वत के नाम से जानते हैं।
हिमालय पर्वत का विकास
अल्पाइन भू-संचलन के फलस्वरूप टेथिस सागर के अवसादों में वलन के फलस्वरूप अचानक हिमालय का निर्माण नहीं हुआ बल्कि इसके विकास में करोड़ों वर्ष का समय लगा है। हिमालय का विकास आज भी जारी है क्योंकि आज भी गोंडवाना लैण्ड के द्वारा हिमालय के भूगर्भ में दबाव लगाये जाने के कारण प्रतिवर्ष 4 से 5 सेमी० हिमालय का उत्थान हो रहा है।
➤ भूगर्भशास्त्रियों के अनुसार, हिमालय में स्थित दोनों श्रृंखलाओं का विकास अलग-2 अवस्था (समय) में हुआ है। दूसरे शब्दों में हिमालय पर्वत के निर्माण तीन अवस्थाओं में हुआ है।
➤ प्रथम अवस्था में महान हिमालय का निर्माण हुआ है। महान हिमालय के निर्माण का कल्प मुख्यतः ओलिगोसीन निर्धारित किया गया है क्योंकि उसके भूगर्भ से भी ओलीगोसिन के अवसादों का प्रमाण मिलता है।
➤ द्वितीय अवस्था लघु हिमालय का निर्माण मयोसीन कल्प में माना जाता है। लेकिन कुछ क्षेत्रों का निर्माण प्लायोसीन कल्प तक जारी रहा।
➤ तीसरी अवस्था में शिवालिक पर्वत का निर्माण कार्य प्लायोसीन में प्रारंभ हुआ और प्लीस्टोसीन में उसका निर्माण कार्य पूरा हुआ।
➤ शिवालिक पर्वत के बारे में कहा जाता है कि जब महान हिमालय और लघु हिमालय का निर्माण हो गया तो उसके बाद लघु हिमालय के दक्षिणी भाग में टेथिस सागर का अवशिष्ट भाग बचा रहा गया जो शिवालिक नदी या इण्डो ब्रह्मा नदी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस नदी में महान हिमालय और लघु हिमालय के द्वारा लाई गई मलबा का निक्षेपण लाखों वर्षों तक होता रहा। पुन: गोंडवाना लैंड के उत्तर की ओर खिसकने से या मलबा पर दबाव पड़ने से शिवालिक पर्वत का विकास हुआ।
हिमालय की संरचना
संरचनात्मक दृष्टिकोण से हिमालय को तीन श्रृंखला में बाँटते हैं-
(1) महान हिमालय
(2) लघु/मध्य हिमालय
(3) शिवालिक हिमालय
➤ महान हिमालय पूर्व से पश्चिम की ओर एक लगातार श्रृंखला के रूप में है।
➤ कहीं-2 पूर्ववर्ती नदी (जैसे- सिन्धु, सतलज, कोशी, ब्रह्मपुत्र) के कारण दर्रों का विकास हुआ है।
➤ लघु हिमालय में महान हिमालय की तुलना में अधिक विखण्डन देखा जा सकता है।
➤ शिवालिक हिमालय एक ऐसा पर्वत है जो पूर्ण रूप से विखण्डित हो चुकी है।
➤ इसका विस्तार पश्चिम में पोटवार के पठार से लेकर पूरब में अरुणाचल प्रदेश तक हुआ है।
प्रत्येक हिमालय के श्रृंखलाओं की संरचना की चर्चा नीचे के शीर्षक में की जा रही है:-
(1) महान हिमालय/हिमाद्री-
➤ इसका विस्तार सिन्धु गॉर्ज से नामचा बरबा गॉर्ज तक हुआ है।
➤ इसकी औसत ऊँचाई 6000 मी० है।
➤ इसका आकार एक चाप के समान है।
➤ इसकी चोटियाँ सालोंभर बर्फ से ढकी रहती है।
➤ गंगोत्री, यमुनोत्री जैसी कई हिमानी पायी जाती है। इसका उत्तरी ढाल मंद और दक्षिणी ढाल तीव्र है।
➤ महान हिमालय पर विश्व की कई ऊँची-ऊँची चोटियाँ पायी जाती है। जैसे- माउंट एवरेस्ट (8850 मी०) विश्व की सबसे ऊँची चोटी है।
➤ कंचनजंघा (8598 मी०) हिमालय की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है।
➤ इसके अलावे नंगा पर्वत, कामेट, केदारनाथ (6945 मी०), धौलागिरी, गौरीशंकर, गोसाईथान इत्यादि भी ऐसी चोटियाँ है जिसकी ऊँचाई 6000 मी० से भी अधिक है।
महान हिमालय की प्रमुख चोटियाँ:
(i) एवरेस्ट (8850 मी०)
(ii) कंचनजंघा (8598 मी०)
(iii) मकालू (8481 मी०)
(iv) चोयू (8201 मी०)
(v) धौलागिरी (8172 मी०)
(vi) मंसालू (8156 मी०)
(vii) नंगा पर्वत (8126 मी०)
(viii) अन्नपूर्णा (8078 मी०)
(ix) नंदादेवी (7817 मी०)
(x) नामचाबरबा (7756 मी०)
(xi) कामेत (7756 मी०)
(xii) गौरीशंकर (7145 मी०)
(xiii) बद्रीनाथ (7138 मी०)
(xiv) एपी (7132 मी०)
(xv) नीलकंठ (7073 मी०)
➤ हिमालय पर्वत को कई नदियों एवं हिमानियों ने काटकर कई दर्रों एवं कॉल का निर्माण किया है। उतराखंड में अवस्थित माना और नीति दो प्रसिद्ध कॉल के उदाहरण है। जबकि कश्मीर का जोजीला और बुर्जिला, हिमाचल प्रदेश का शिपकीला, उत्तराखण्ड का पिथौरागढ़, थागला और लिपुलेख, अरुणाचल प्रदेश का बोमडिला, सिक्किम का जेलेप्ला और नाथुला प्रमुख दर्रों के उदाहरण है।
नोटः वृहद हिमालय लघु हिमालय से मेन सेंट्रल थ्रस्ट के द्वारा अलग होती है।
(2) लघु / मध्य हिमालय / हिमाचल हिमालय
➤ इसे हिमाचल / लघु हिमालय के नाम से जानते हैं।
➤ इसे कश्मीर में पीरपंजाल, हिमाचल प्रदेश में धौलाधर, नेपाल में “महाभारत श्रेणी”, अरुणाचल प्रदेश में “मिश्मी और डाफला” के नाम से जानते हैं।
➤ इस पर्वत का भी उतरी ढाल मंद और दक्षिणी ढाल तीव्र है।
➤ यह पर्वत अवसादी और कांग्लोमरेट चट्टानों के अलावे रूपान्तरित चट्टानों से निर्मित है। रूपान्तरित चट्टानों का निर्माण अत्याधिक दबाव एवं ताप के कारण हुआ है।
➤ मध्य हिमालय की औसत ऊँचाई 4500 मी० है।
➤ इसमें कई अनुप्रस्थ घाटियों का विकास हुआ है। जैसे- कुल्लू-मनाली की घाटी इसका प्रसिद्ध उदा० है।
➤ इस पर्वत पर मसूरी, नैनीताल, दार्जीलिंग, शिमला जैसे कई पर्यटक नगर अवस्थित है।
➤ महान हिमालय और लघु हिमालय के बीच में लगभग 200 किमी० की दूरी है।
➤ कश्मीर में इन दोनों श्रृंखलाओं के बीच में जो स्थिर जल बच गया था वह करेवा झील के नाम से प्रसिद्ध था।
➤ डल एवं वुलर झील इसी महान झील का अवशिष्ट भाग है, करेवा झील में मलवा के निक्षेपण से ही कश्मीर घाटी का विकास हुआ है।
नोटः लघु हिमालय शिवालिक से मेन बाउंड्री फॉल्ट (main boundry fault) के द्वारा अलग होती है।
(3) शिवालिक पर्वत/ उप हिमालय
➤ शिवालिक पर्वत की औसत ऊँचाई 600 मी० है।
➤ इसका विस्तार पूरब में कोशी नदी से पश्चिम में पाकिस्तान के पोटवार पठार तक हुआ है।
➤ यह पूर्णत विखंडित श्रृंखला है। कहीं-2 पर इसकी ऊँचाई पर्वतीय मान्यता से भी कम है।
➤ शिवालिक पर्वत अवसादी और काँग्लोमरेट चट्टानों से निर्मित है।
3. पूर्वांचल हिमालय
➤ पूर्वांचल हिमालय का विस्तार नामचाबरबा गॉर्ज से लेकर बर्मा के अराकान योमा पहाड़ी तक हुआ है।
➤ अराकानयोमा पहाड़ी के दक्षिण में अवस्थित द्वीपीय क्षेत्र (अंडमान निकोबार द्वीप समूह) पूर्वांचल हिमालय का ही अवशिष्ट भाग के रूप में है।
➤ पूर्वांचल हिमालय का विस्तार भारत के अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड, मणिपुर, त्रिपुरा एवं मिजोरम राज्य में हुआ है।
➤ यह मूलत: उ०-पूर्वी भारत और म्यानमार के बीच में सीमा का निर्माण करती है।
➤ बर्मा में इसी पर्वत को ‘अराकान योमा’ के नाम से जानते हैं।
➤ नामचाबरबा के पास हिमालय अचानक दक्षिण की ओर मुड़ जाती है।
➤ उत्तर से दक्षिण की ओर जाने पर पूर्वांचल हिमालय में पर्वतों का क्रम है- अरुणाचल प्रदेश में पटकोईबुम, नागालैण्ड में नागा की पहाड़ी, मणिपुर में मणिपुर पहाड़ी, मिजोरम में मिजो की पहाड़ी या लुशाई की पहाड़ी, त्रिपुरा में अगरतल्ला की पहाड़ी कहलाता है।
➤ मेघालय में जयंतिया की पहाड़ी और मणिपुर की पहाड़ी एक छोटी-सी पहाड़ी से जुड़ जाती है जिसे बैरल की पहाड़ी कहते हैं।
➤ पूर्वांचल हिमालय का एक छोटा-सा भाग बंगलादेश में भी है जिसे चटगाँव की पहाड़ी कहते हैं।
➤ पूर्वांचल हिमालय का विस्तृत भाग ही म्यांमार में जाकर अराकानयोमा की पहाड़ी कहलाती है।
➤ पूर्वांचल हिमालय की सबसे ऊँची चोटी माउंट दफा (4578 मी०) है जो अरुणाचल प्रदेश में स्थित है।
➤ मिजो पहाड़ी की सबासे ऊँची चोटी ‘द ब्लू माऊण्टेन’ (2157 मी०) हैं।
चित्र: पूर्वांचल हिमालय की पहाड़ियाँ
➤ पूर्वांचल हिमालय में कई छोटी-छोटी दर्रे भी पाये जाते हैं जैसे दिफू, कुमजावती, हफूंगान, चौकन और पांगशू।
➤ पूर्वांचल हिमालय में कई अनुवर्ती घाटियों का विकास हुआ है जिसमें बराक की घाटी, कोहिमा की घाटी सबसे प्रसिद्ध हैं।
हिमालय का प्रादेशिक विभाजन
➤ हिमालय एक नवीन मोड़दार पर्वत है जो भारत के उत्तर में एक चाप के रूप में अवस्थित है।
➤ इसका विस्तार सिन्धु गॉर्ज/दर्रा से लेकर ब्रह्मपुत्र गॉर्ज(नामचा बरबा) के मध्य हुआ है।
➤ इसकी लम्बाई लगभग 2500Km है।
➤ कश्मीर में इसकी चौड़ाई सबसे अधिक (450 Km) और अरुणाचल प्रदेश में इसकी चौड़ाई सबसे कम (150 Km) है।
➤ हिमालय का निर्माण अल्पाइन भूसंचलन से तृतीयक काल में हुआ है।
उत्तर से दक्षिण की ओर जाने पर इसमें तीन प्रमुख श्रृंखलाएँ मिलती हैं लेकिन पश्चिम से पूर्व की ओर जाने पर स्थलाकृतिक विशेषता के आधार पर इसे चार भागों में वर्गीकृत करते हैं। जैसे-
(1) पंजाब हिमालय / कश्मीर हिमालय / हिमाचल हिमालय
(2) कुमायूँ हिमालय
(3) नेपाल हिमालय
(4) असम हिमालय
चित्र: हिमालय के स्थलाकृतिक प्रदेश
हिमालय का प्रादेशिक विभाजन
प्रादेशिक विभाग
लंबाई
विस्तार
पंजाब हिमालय
560 किमी०
सिन्धु एवं सतलज नदियों के मध्य
कुमायूँ हिमालय
320 किमी०
सतलज एवं काली नदियों के मध्य
नेपाल हिमालय
800 किमी०
काली एवं तीस्ता नदियों के मध्य
असम हिमालय
720 किमी०
तीस्ता एवं दिहांग नदियों के मध्य
प्रायद्वीपीय भारत के पर्वत
प्रायद्वीपीय भारत में छोटी-बड़ी कई पर्वतीय श्रंखलाएँ मिलती है। जैसे-
अरावली पर्वत
➤ अरावली पर्वत राजस्थान में द०-प० से उ०-पू० दिशा में अवस्थित है।
➤ इसका विस्तार गुजरात के सीमा से लेकर दिल्ली तक हुआ है।
➤ दिल्ली में अरावली पर्वत को ‘दिल्ली कटक’ के नाम से जानते हैं।
➤ हिमालय और अरावली पर्वत के बीच में एक गैप है, जिसे अम्बाला गैप कहते हैं।
➤ अरावली न सिर्फ भारत की बल्कि विश्व की सबसे पुरानी पर्वत है।
➤ यह कभी विश्व का सबसे लम्बा वलित पर्वत हुआ करता था लेकिन अब अवशिष्ट पहाड़ी के रूप में बदल चुका है।
➤ इसकी सबसे ऊँची चोटी गुरुशिखर (1722 मी०) है जो राजस्थान के सिरोही जिला में माउण्ट आबू के पास स्थित है।
➤ अरावली की लम्बाई 800 किमी० और औरत ऊँचाई 700-900 मी० मानी जाती है।
➤ अरावली में कई दर्रे भी मिलते हैं जिसमें पिपलीघाट, देवारी, बेसूर दर्रा सबसे प्रमुख हैं।
➤ इसके गर्भ में कई खनिज पाये जाते हैं।
➤ इसे राजस्थान के ‘खनिजों का अजायबघर’ कहा जाता है।
➤ अपरदन एवं ऋतुक्षरण के कारण कई स्थानों पर यह विखण्डित हो चुकी है। लेकिन दक्षिण-पश्चिम अरावली पर्वतीय भाग की ऊँचाई आज भी पर्याप्त है।
विन्ध्यन पर्वत
➤ विन्ध्यन पर्वत प्रायद्वीपीय भारत के उत्तरी सीमा का निर्माण करती है।
➤ यह नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है।
➤ इसकी औसत ऊँचाई 500-700 मी० है।
➤ इस पर्वत का उत्तरी ढाल भ्रंशन क्रिया से बना है जिसके कारण उत्तरी भाग का ढाल तीव्र है जबकि दक्षिणी भाग का ढाल मंद है।
➤ इसका विस्तार गुजरात की सीमा से लेकर बिहार के गंगा नदी तक हुआ है।
➤ पश्चिम से पूरब की ओर जाने पर इसे क्रमश: विन्ध्यन पर्वत, भारनेर पर्वत, कैमूर की पहाड़ी, बराबर की पहाड़ी और खड़गपुर की पहाड़ी के नाम जानते हैं।
राजमहल की पहाड़ी
➤ राजमहल की पहाड़ी बिहार और झारखण्ड की सीमा पर भागलपुर के पास अवस्थित है।
➤ इसकी औसत ऊँचाई 500-7oo मी० है।
➤ यह उत्तर से दक्षिण दिशा में फैला हुआ है।
➤ राजमहल पहाड़ी के कारण गंगा नदी को भागलपुर के पास उत्तरायण होना पड़ता है।
➤ राजमहल की पहाड़ी पर जूरासिक काल में हुए लावा का प्रमाण मिलता है।
सतपुड़ा पर्वत
➤ सतपुड़ा एक ब्लॉक पर्वत है जो नर्मदा और ताप्ती भ्रंश घाटी के बीच अवस्थित है।
➤ इसकी औसत ऊँचाई 900-1100 मी० है।
➤ सतपुड़ा श्रृंखला के पूरब में महादेव, मैकाल, रामगढ़ और गढ़जात की पहाड़ी अवस्थित है।
➤ सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटी धूपगढ़ (1350 मी०) है। जबकि मैकाल की सबसे ऊँची चोटी अमरकंटक (1127 मी०) है।
➤ मैकाल पर ही पंचमढ़ी नामक पर्वतीय पर्यटक नगर अवस्थित है।
➤ सतपुड़ा पर्वत के समान्तर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिला में अजन्ता की पहाड़ी और नागपुर में गाविलगढ़ की पहाड़ी स्थित है।
अजंता पर्वत
➤ अजंता पर्वत श्रृंखला भारत में केवल एक ही राज्य महाराष्ट्र में फैली हुई है।
➤ यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में पाया जाता है।
➤ यह श्रृंखला दक्कन के पठार की उत्तरी दीवार बनाती है और गोदावरी और तापी नदियों की सहायक नदियों के बीच जल विभाजक के रूप में कार्य करती है।
➤ तापी मध्यप्रदेश के बैतुल जिले के मुल्लाई नामक स्थान से निकलती है तथा यह सतपुड़ा एवं अजंता पहाड़ी के बीच भ्रंश घाटी में बहती है।
गारो, खांसी और जयंतिया की पहाड़ी
➤ ये मेघालय राज्य में पश्चिम से पूरब की ओर क्रमशः फैला हुआ है।
➤ गारो एक अलग पहाड़ी के रूप में अवस्थित है जबकि खाँसी और जयन्तिया आपस में जुड़े हुए हैं।
➤ जयन्तिया पहाड़ी से एक भाग पृथक होकर काफी पूरब की ओर चला गया है जिसे मिकिर की पहाड़ी कहते हैं जो असम में अवस्थित है।
➤ गारो, खाँसी जयन्तिया की सबसे ऊँची चोटी नॉरकेक है जो गारो पहाड़ी पर स्थित है।
➤ औसत ऊँचाई के दृष्टिकोण से जयन्तिया की पहाड़ी सबसे ऊँची है, जबकि गारो पहाड़ी सबसे नीची है।
पश्चिमी घाट-
➤ यह प्रायद्वीपीय भारत के पश्चिमी किनारे पर अवस्थित है।
➤ यह अरब सागर के समानान्तर लेकिन तट से दूर स्थित है लेकिन कर्नाटक में यह श्रृंखला समुद्र के नजदीक आ जाती है।
➤ इसका विस्तार उत्तर में ताप्ती नदी के मुहाना से दक्षिण में कन्याकुमारी तक हुआ है।
➤ इसकी कुल लम्बाई 1600 किमी० है।
➤ इसकी औसत ऊँचाई 915 मी० है।
पश्चिमी घाट को कई छोटे-2 भागों में विभक्त कर उसके भूदृश्य का अध्ययन करते हैं। जैसे:-
➤ ताप्ती नदी से लेकर 16º उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित पश्चिमी घाट को सह्याद्री पर्वत कहते है जिसकी सबसे ऊँची चोटी कालसुबाई (1646 मी०) है।
➤ 16º उतरी अक्षांश के दक्षिण वाले भाग की सबसे ऊँची चोटी कुद्रेमुख (1892 मी०) है।
➤ पश्चिमी घाट के तीसरी शाखा का प्रारंभ नीलगिरि से होता है क्योंकि यहाँ पश्चिमी एवं पूर्वी घाट आपस में आकर मिल जाती है।
➤ ताप्ती से 16º उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित पश्चिमी घाट पर्वत के ऊपर बैसाल्ट चट्टान या लावा उदगार का प्रमाण मिलता है।
➤ इसमें थालघाट और भोरघाट दो प्रसिद्ध दर्रे है।
➤ गोदावरी और कृष्णा नदी का क्षेत्र में उद्गम स्थल पाया जाता है।
➤ इस क्षेत्र में स्थित पहाड़ का एक भाग धँसकर भ्रंशोत्थ/ब्लाँक पर्वत का निर्माण करता हैं।
➤ 16º उत्तरी अक्षांश से नीलगिरि पहाड़ी तक अवस्थित पश्चिमी घाट की ऊँचाई बहुत अधिक है लेकिन इसका पश्चिमी ढाल अधिक तीव्र है जबकि पूर्वी ढाल मंद है।
➤ पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट के मिलने से एक गाँठ का निर्माण होता है जिसे नीलगिरी कहते हैं।
➤ नीलगिरि की सबसे ऊँची चोटी दोदाबेटा (2636 मी०) है, इसी पहाड़ी पर ऊपर बहुत ही प्रसिद्ध पर्यटक स्थल ऊँटी (उटकमण्डलम्) है।
➤ नीलगिरि के दक्षिण में क्रमश: अन्नामल्लई, कार्डेमम, नागर कोयल और स्वामी विवेकानन्द रॉक अवस्थित है। इसे सम्मिलित रूप से दक्षिण की पहाड़ी के रूप में सम्बोधित करते हैं।
➤ अन्नामलाई की सबसे ऊँची चोटी अन्नाईमुडी (2695 मी०) है।
➤ अन्नामलाई के उत्तर-पूर्व में पालिनी पर्वत श्रृंखला है जिस पर कोडाईकनाल नामक पर्वतीय नगर अवस्थित है।
➤ नीलगिरि और अन्नामलाई के बीच में पाल नायक दर्रा स्थित है जो किसी प्राचीन नदी के अपरदन द्वारा निर्मित है।
➤ इसी तरह अन्नामलई और कार्डमम पहाड़ी के बीच में शेनकोटा दर्रा अवस्थित है।
➤ शेनकोट दर्रा के दक्षिण में पहाड़ियों की ऊँचाई बहुत कम हो जाती है और अन्ततः हिन्द महासागर में प्रक्षेपित हो जाती है।
➤ इसका अन्तिम बिन्दु स्वामी विवेकानन्द रॉक कहलाता है।
पूर्वी घाट
➤ पूर्वी घाट प्रायद्वीपीय भारत के पूर्वी तट के समानान्तर उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर फैला है।
➤ यह तट से 200-400 किमी० अन्दर अवस्थित है।
➤ इस पर्वत का निर्माण कुडप्पा संरचना से हुआ है। इसमें डोलोमाइट, खोंडोलाइट, चर्कोनाइट जैसे खनिजों से निर्मित चट्टान पाए जाते हैं।
➤ यह एक विखण्डित श्रृंखला है क्योंकि इसे महानदी, गोदावरी, कृष्णा जैसी नदियों ने जगह-2 पर काट डाला है।
➤ पूर्वी घाट की औसत ऊँचाई 900 मी० मानी जाती है।
पूर्वी घाट को मूलतः तीन भागों में बाँटकर भूदृश्य का अध्ययन करते हैं। जैसे:-
(a) धुर उत्तरी भाग-
➤ यह महानदी के उत्तर में अवस्थित है।
➤उड़ीसा के मयूरभंज में इसका विस्तार सर्वाधिक हुआ है।
➤ उत्तर से दक्षिण की ओर जाने पर इस भाग में कई पर्वतीय चोटी मिलती है। जैसे- मलयगिरि (1187 मी०), मेघासनी (1165 मी०), गन्धमार्तन (1160 मी०) इत्यादि।
➤ उड़ीसा में अवस्थित सम्मिलित पर्वतीय श्रृंखला को ‘मलयास्क’ के नाम से जानते हैं।
➤ उड़ीसा और आन्ध्रप्रदेश में पूर्वी समुद्र तट के समानांतर पूर्वी घाट उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़ जाती है।
➤ इन क्षेत्र में पूर्वी घाट की सबसे ऊँची चोटी महेन्द्रगिरि (1501 मी०) अवस्थित है।
➤ गोदावरी नदी पूर्वी घाट को काटकर गहरे गॉर्ज का निर्माण करती है।
(b) मध्यवर्ती श्रृंखला-
➤ कृष्णा नदी से लेकर पेलार नदी के बीच स्थित पूर्वीघाट श्रृंखला को मध्यवर्ती श्रृंखला कहते हैं।
➤ इनमें नालामाला, पालकोंडा, वेलीकोंडा श्रृंखला प्रमुख हैं।
➤ पालकोंडा और वेलीकोंडा पहाड़ी के मध्य भाग से पनेरू नदी प्रवाहित होती है।
(c) तमिलनाडु श्रृंखला-
➤ पूर्वीघाट को तमिलनाडु में जावदी, गिंजी, शिवराय पहाड़ी के नाम से जानते हैं। ये सभी श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से पृथक-2 हैं।
➤ पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट बीच-2 में आपस में जुड़े हुए हैं। जैसे- मुम्बई और हैदराबाद के बीच हरिचन्द्र पर्वत और बालाघाट पर्वत स्थित है और बंगलोर के पास बाबाबुदन तथा श्रीसैलम पहाड़ी से जुड़ी हैं।
भारत के प्रमुख पर्वत से सम्बंधित प्रमुख वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित पर्वत है-
(a) अरावली
(b) हिमालय
(c) नीलगिरि
(d) मैकाल
(b) हिमालय
2. हिमालय पर्वत एक मुख्य प्रकार है-
(a) ज्वालामुखी पर्वत का
(b) वलित पर्वत का
(c) ब्लॉक पर्वत का
(d) अवशिष्ट पर्वत का
(b) वलित पर्वत का
3. भारत का सर्वोच्च पर्वत शिखर है-
(a) गाडविन आस्टिन
(b) कंचनजंगा
(c) नंगा पर्वत
(d) नन्दा देवी
(a) गाडविन आस्टिन
4. भारत में हिमालय की सर्वोच्च पर्वत चोटी है-
(a) नन्दा देवी
(b) नंगा पर्वत
(c) कंचनजंगा
(d) धौलागिरि
(c) कंचनजंगा
5. भारत की कौन-सी पर्वत श्रेणी नवीनतम है?
(a) सहयाद्रि
(b) अरावली
(c) हिमालय
(d) सतपुड़ा
(c) हिमालय
6. निम्नलिखित में से कौन भारत का सर्वोच्च पर्वत शिखर है?
(a) एवरेस्ट
(c) नन्दा देवी
(b) नंगा पर्वत
(d) कंचनजंगा
(d) कंचनजंगा
7. निम्नलिखित में कौन-सी हिमालय की पर्वत चोटी असम राज्य में स्थित है?
(a) नन्दा देवी
(b) नाम्चाबारवे
(c) धौलागिरि
(d) कंचनजंगा
(b) नाम्चाबारवे, व्याख्या: असम राज्य में कोई प्रमुख हिमालयी पर्वत चोटी नहीं है, पर दिए गए विकल्पों में नाम्चाबारवे (Namcha Barwa) अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बिल्कुल निकट, पूर्वी हिमालय के उस भाग में स्थित है जो असम के भौगोलिक निकटतम क्षेत्र में आता है। अन्य सभी चोटियाँ- नन्दा देवी, धौलागिरि और कंचनजंगा अलग-अलग राज्यों/देशों में स्थित हैं। इसलिए परीक्षा के दृष्टिकोण से सही विकल्प नाम्चाबारवे माना जाता है।
8. हिमालय की उत्पत्ति किस भू-सन्नति से हुई है?
(a) टेथीस
(b) इण्डोब्रह्मा
(c) शिवालिक
(d) गोदावरी
(a) टेथीस
9. हिमालय का पाद प्रदेश (Foothill Regions) निम्न में से किस नाम से जाना जाता है?
(a) ट्रान्स हिमालय
(b) महान् हिमालय
(c) पीरपंजाल
(d) शिवालिक
(d) शिवालिक
10. उतराखंड हिमालय में सर्वोच्च पर्वत शिखर है-
(a) चौखम्भा
(b) धौलागिरि
(c) नंदा देवी
(d) त्रिशूल
(c) नंदा देवी
11. निम्नलिखित में हिमालय का पर्वत पदीय प्रदेश है-
(a) शिवालिक
(b) ट्रान्स हिमालय
(c) वृहत् हिमालय
(d) अरावली
(a) शिवालिक, व्याख्या: शिवालिक पर्वत श्रृंखला को हिमालय का पदीय (फुटहिल / Foothills) प्रदेश कहा जाता है। यह मुख्य हिमालयी श्रेणियों में सबसे बाहरी और सबसे कम ऊँचाई वाली श्रृंखला है, जो हिमालय के पाद-प्रदेश में स्थित होती है।
अन्य विकल्प क्यों नहीं:
(b) ट्रान्स-हिमालय – हिमालय के उत्तर में स्थित है, पदीय प्रदेश नहीं है।
(c) वृहत् हिमालय (ग्रेट हिमालय) – हिमालय की सबसे ऊँची और भीतरी श्रेणी है।
(d) अरावली – हिमालय का भाग नहीं है; यह प्राचीन पर्वत श्रृंखला पश्चिमी भारत में स्थित है।
12. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए।
सूची-1 सूची-II
A. पंजाब हिमालय 1. सतलज तथा काली के मध्य
B. कुमायूँ हिमालय 2. तिस्ता तथा दिहांग के मध्य
C. नेपाल हिमालय 3. सिन्धु तथा सतलज के मध्य
D. असम हिमालय 4. काली तथा तिस्ता के मध्य
कूट :
A B C D
(a) 3 1 4 2
(b) 3 4 2 1
(c) 1 2 3 4
(d) 4 3 2 1
(a) 3 1 4 2
13. हिमालय में हिम रेखा (Snow line) निम्न के बीच होती है-
(a) 5400 से 6000 मी० पूर्व में
(b) 4000 से 5800 मी० पश्चिम में
(c) 4500 से 6000 मी० पूर्व में
(d) 4500 से 6000 मी० पश्चिम में
(d) 4500 से 6000 मी० पश्चिम में
14. निम्न में से कौन-सी पर्वत चोटी संसार की दूसरी सर्वोच्च पर्वत चोटी है?
(a) गाडविन आस्टिन
(b) कंचनजंगा
(c) नन्दादेवी
(d) नंगा पर्वत
(a) गाडविन आस्टिन
15. काराकोरम पर्वत श्रेणी का पूर्व नाम है-
(a) K-2 श्रेणी
(b) कृष्णागिरि
(c) सागरमाथा
(d) राकापोशी
(b) कृष्णागिरि
16. हिमालय श्रेणी क्षेत्र में मिलने वाली संकीर्ण तथा अनुदैर्ध्य (लम्बी) घाटियों को किस नाम से जाना जाता है?
(a) दून
(b) चोस
(c) दुआर
(d) मर्ग
(a) दून
17. लघु हिमालय श्रेणी के ढालों पर मिलने वाले छोटे-छोटे घास के मैदानों को जम्मू-कश्मीर में क्या कहा जाता है?
(a) मर्ग
(b) बुग्याल
(c) पयार
(d) दुआर
(a) मर्ग
18. लघु हिमालय श्रेणी के ढालों पर मिलने वाले छोटे-छोटे घास के मैदानों को उत्तराखण्ड में क्या कहा जाता है?
(a) दून
(b) मर्ग
(c) चोस
(d) बुग्याल एवं पयार
(d) बुग्याल एवं पयार
19. सतलज एवं काली नदियों के बीच हिमालय का कौन-सा प्रादेशिक विभाग स्थित है?
(a) पंजाब हिमालय
(b) नेपाल हिमालय
(c) कुमाऊँ हिमालय
(d) असम हिमालय
(c) कुमाऊँ हिमालय, व्याख्या: हिमालय को विभिन्न नदियों के आधार पर कई प्रादेशिक भागों में बाँटा गया है:
1. पंजाब हिमालय – यह सिंधु और सतलज नदियों के बीच फैला है।
2. कुमाऊँ हिमालय – यह सतलज और काली (शारदा) नदी के बीच स्थित है।
3. नेपाल हिमालय – यह काली नदी से लेकर तीस्ता नदी तक फैला है।
4. असम हिमालय – यह तीस्ता से दीहांग नदी तक फैला है।
20. काली एवं तिस्ता नदियों के बीच हिमालय का कौन-सा प्रादेशिक विभाग स्थित है?
(a) पंजाब हिमालय
(b) नेपाल हिमालय
(c) असम हिमालय
(d) कुमायूं हिमालय
(b) नेपाल हिमालय
21. निम्नलिखित में से किसे ‘सागरमाथा’ के नाम से जाना जाता है?
(a) कंचनजंगा
(b) एवरेस्ट
(c) गाडविन आस्टिन
(d) नाम्चाबारवे
(b) एवरेस्ट
22. एडमण्ड हिलेरी तथा तेनजिंग नोर्गे द्वारा विश्व की सर्वोच्च पर्वत चोटी माउण्ट एवरेस्ट पर सबसे पहले किस वर्ष विजय प्राप्त की गई?
(a) 1898 ई० में
(b) 1953 ई० में
(c) 1957 ई० में
(d) 1969 ई० में
(b) 1953 ई० में
23. नन्दा देवी चोटी है-
(a) असम हिमालय का भाग
(b) कुमायूं हिमालय का भाग
(c) नेपाल हिमालय का भाग
(d) पंजाब हिमालय का भाग
(b) कुमायूं हिमालय का भाग
24. हिमालय पर्वत की एक श्रेणी अराकानयोमा कहाँ स्थित है?
(a) बलूचिस्तान
(b) म्यान्मार
(c) नेपाल
(d) थाईलैंड
(b) म्यान्मार
25. जम्मू-कश्मीर में स्थित निम्नलिखित पर्वत श्रेणियों का पूर्व से पश्चिम की ओर क्रम होगा-
27. कुल्लू घाटी निम्नलिखित पर्वत श्रेणियों के बीच अवस्थित है-
(a) धौलाधर तथा पीरपंजाल
(b) रणज्योति तथा नागटिब्बा
(c) लद्दाख तथा पीरपंजाल
(d) मध्य हिमालय तथा शिवालिक
(a) धौलाधर तथा पीरपंजाल, व्याख्या:, कुल्लू घाटी हिमाचल प्रदेश में स्थित एक सुंदर हिमालयी घाटी है, जो मुख्यतः धौलाधर पर्वत श्रेणी (उत्तर-पूर्व में) और पीर पंजाल पर्वत श्रेणी (दक्षिण-पश्चिम में) के बीच अवस्थित है। इसलिए विकल्प (a) सही है।
28. उतराखंड का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है
(a) बद्रीनाथ
(b) केदारनाथ
(c) कामेत
(d) नन्दादेवी
(d) नन्दादेवी
29. शिवालिक श्रेणी का निर्माण हुआ-
(a) इयोजोइक
(b) पैल्योजोइक
(c) मेसोजोइक
(d) सेनोजोइक
(d) सेनोजोइक
30. हिमालय का दूसरा सबसे ऊँचा पर्वत शिखर कंचनजंगा भारत के किस राज्य में स्थित है?
(a) असम
(b) उत्तराखंड
(c) सिक्किम
(d) हि० प्र०
(c) सिक्किम
31. निम्नलिखित में से सबसे प्राचीन पर्वत श्रेणी कौन-सी है?
(a) हिमालय
(b) अरावली
(c) विन्ध्य
(d) सतपुड़ा
(b) अरावली
32. भारत में निम्नलिखित में से कौन-सी पर्वत श्रेणी केवल एक राज्य में फैली हुई है?
(a) अरावली
(b) सतपुड़ा
(c) अजन्ता
(d) सह्यादि
(c) अजन्ता
33. भारत में सबसे प्राचीन वलित पर्वतमाला कौन-सी है?
(a) विन्ध्याचल
(b) सतपुड़ा
(c) अरावली
(d) नीलगिरि
(c) अरावली
34. अरावली पर्वत का सर्वोच्च शिखर क्या कहलाता है?
(a) गुरुशिखर
(b) सेर
(c) दोदाबेट्टा
(d) अमरकंटक
(a) गुरुशिखर
35. पश्चिमी घाट क्या है?
(a) एक अवशिष्ट पर्वत
(b) एक मोड़दार पर्वत
(c) एक भ्रंश कगार
(d) एक ज्वालामुखी पर्वत
(c) एक भ्रंश कगार
36. निम्नलिखित में से किस पर्वतमाला को ‘सह्यादि’ के नाम से भी जाना जाता है?
(a) सतपुड़ा
(b) पश्चिमी घाट
(c) पूर्वी घाट
(d) अरावली
(b) पश्चिमी घाट
37. पश्चिमी घाट (सहयाद्रि) की सबसे ऊँची शिखर है-
(a) धूपगढ़
(b) दोदाबेड्डा
(c) आनाईमुदी
(d) गुरुशिखर
(c) आनाईमुदी
38. पूर्वी घाट एवं पश्चिमी घाट पर्वत श्रेणियों का सम्मिलन स्थल है-
(a) पालनी पहाड़ी
(b) नीलगिरि पहाड़ी
(c) अन्नामलाई पहाड़ी
(d) शेवराय पहाड़ी
(b) नीलगिरि पहाड़ी
39. भारत के सबसे दक्षिणी भाग में स्थित पहाड़ियाँ निम्न में से कौन-सी है?
(a) नीलगिरि
(b) कार्डेमम
(c) पालनी
(d) अन्नामलाई
(b) कार्डेमम, भारत की सबसे दक्षिणी पर्वत शृंखला कार्डेमम केरल में स्थित है।
40. पूर्वी घाट पर्वत श्रेणी का सर्वोच्च शिखर है-
(a) पंचमढ़ी
(b) महेन्द्रगिरि
(c) दोदाबेट्टा
(d) अनाईमुदी
(b) महेन्द्रगिरि
41. कार्डेमम पहाड़ी कहाँ अवस्थित है?
(a) जम्मू-कश्मीर
(b) हिमाचल प्रदेश
(c) केरल
(d) महाराष्ट्र
(c) केरल
42. गिरनार पहाड़ियों कहाँ स्थित है?
(a) बिहार
(b) गुजरात
(c) कर्नाटक
(d) राजस्थान
(b) गुजरात
43. गारो, खासी और जयन्तिया पहाड़ियाँ किस राज्य में स्थित है?
(a) मेघालय
(b) मणिपुर
(c) त्रिपुरा
(d) असम
(a) मेघालय
44. दक्षिण भारत का सर्वोच्च पर्वत शिखर है-
(a) अनाईमुदी
(b) दोदाबेट्टा
(c) महाबलेश्वर
(d) महेन्द्रगिरि
(a) अनाईमुदी
45. भारत एवं म्यान्मार के बीच सीमा निर्धारण करने वाली तीन पर्वत श्रेणियाँ हैं-
(a) नागा, पटकोई तथा अराकानयोमा
(b) अल्टाई पर्वत श्रृंखला
(c) ग्रेट डिवाइडिंग रेंज
(d) इनमे से कोई नहीं
(a) नागा, पटकोई तथा अराकानयोमा
46. निम्नलिखित पर विचार कीजिए-
1. महादेव पहाडियाँ 2. सह्याद्रि पर्वत 3. सतपुड़ा पर्वत
उपर्युक्त का उत्तर से दक्षिण की ओर सही अनुक्रम कौन-सा है?
(a) 1, 2, 3
(b) 2, 1, 3
(c) 1, 3, 2
(d) 2, 3, 1
(c) 1, 3, 2
47. छोटानागपुर पठार की सबसे ऊँची पर्वत चोटी है
(a) धूपगढ़
(b) पंचमढ़ी
(c) पारसनाथ
(d) महाबलेश्वर
(c) पारसनाथ
48. पाट भूमि पायी जाती है-
(a) दण्डकारण्य में
(b) छोटानागपुर में
(c) विदर्भ मैदान में
(d) विन्ध्य उच्च भूमि में
(b) छोटानागपुर में
49. छोटानागपुर पठार-
(a) एक अग्रगम्भीर है
(b) एक गर्त है
(c) एक पदस्थली है
(d) एक सम्प्राय भूमि है
(d) एक सम्प्राय भूमि है
50. सबसे बड़ा हिमनद निम्न में से कौन है?
(a) कंचनजंगा
(b) रुंडन
(c) गंगोत्री
(d) केदारनाथ
(b) रुंडन
51. महाराष्ट्र और कर्नाटक में पश्चिमी घाट……..कहलाते हैं।
(a) नीलगिरि पर्वत
(b) सह्याद्रि
(c) दक्कन पठार
(d) इनमें से कोई नहीं
(b) सह्याद्रि
52. निम्नलिखित में वह पर्वत श्रेणी कौन-सी है, जो भारत में सबसे पुरानी है?
(a) हिमालय
(b) विन्ध्याचल
(c) अरावली
(d) सहयाद्रि
(c) अरावली
53. हिमालय के सर्वोच्च शिखर माउन्ट एवरेस्ट की ऊँचाई कितनी है?
(a) 8200 मीटर
(b) 8848 मीटर
(c) 8500 मीटर
(d) 9000 मीटर
(b) 8848 मीटर
54. कोडाईकनाल किस पर्वत श्रृंखला पर स्थित है?
(a) पालनी
(b) नीलगिरि
(c) विन्ध्याचल
(d) अरावली
(a) पालनी
55. निम्नलिखित में से कौन-सी पर्वत श्रृंखला सबसे पुरानी है?
संघनन- जल के गैसीय अवस्था से तरल या ठोस अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को संघनन कहा जाता है। यदि हवा का तापमान ओसांक बिन्दु से नीचे पहुंच जाये तो संघनन की क्रिया प्रारंभ होती है। संघनन की प्रक्रिया पर वायु के आयतन, तापमान, वायुदाब एवं आर्द्रता का प्रभाव पड़ता है।
➤ यदि संघनन हिमांक (Freezing Point) से नीचे होता है, तो तुषार (Frost), हिम (Snow) एवं पक्षाभ मेघ (Cirrus Cloud) का निर्माण होता है।
➤ यदि संघनन हिमांक से ऊपर होता है तो ओस, कुहरा, कुहासा एवं बादलों का निर्माण होता है।
➤ यदि संघनन पृथ्वी के धरातल के समीप होता है तो ओस (Dew), पाला (Frost), कुहरा एवं कुहासे का निर्माण होता है।
➤ जब संघनन की क्रिया अधिक ऊँचाई पर होती है तो बादलों का निर्माण होता है।
ओस (Dew)- हवा का जलवाष्प जब संघनित होकर छोटी-छोटी बूंदों के रूप में धरातल पर पड़ी वस्तुओं (घास पत्तियों आदि) पर जमा हो जाता है, तो इसे ओस कहा जाता है। ओस के निर्माण के लिए साफ आकाश, लगभग शांत वायुमंडल, उच्च सापेक्षिक आर्द्रता एवं ठंडी तथा लंबी रात का होना आवश्यक है।
➤ ओस के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि तापमान हिमांक से ऊपर हो।
तुषार या पाला (Frost)- जब संघनन की क्रिया हिमांक से नीचे होती है (0°C या उससे कम पर) तो जलवाष्प जल कणों के बदले हिम कणों में परिवर्तित हो जाता है। इसे ही तुषार या पाला कहा जाता है। पाला के निर्माण के लिए उन सभी अन्य परिस्थितियों का होना आवश्यक है, जो ओस के निर्माण के लिए हैं।
नोट :- ओस या पाला ऊपर से नहीं गिरता है, बल्कि यह वहीं बनता है जहां हम इसे देखते हैं।
कुहरा (Fog)- कुहरा एक प्रकार का बादल है। जब जलवाष्प का संघनन धरातल के बिल्कुल समीप होता है तो कुहरे का निर्माण होता है। कुहरे में कुहासे की तुलना में जल के कण अधिक छोटे एवं सघन होते हैं।
कुहासा (Mist)- कुहासा भी एक प्रकार का कुहरा है, जिसमें कुहरे की अपेक्षा दृश्यता (Visibility) दूर तक रहती है। इसमें दृश्यता एक किलोमीटर से अधिक, परंतु दो किलोमीटर से कम होती है।
धुआंसा (Smog)- बड़े-बड़े शहरों में फैक्टरियों के निकट जब कुहरे में धुएं के कण मिल जाते हैं तो उसे धुआंसा (Smoke+Fog = Smog) कहा जाता है। धुआंसा कुहरे की तुलना में और अधिक सघन होता है एवं इसमें दृश्यता और भी कम होती है।
बादल (Clouds):- वायुमंडल में संघनन के पश्चात हिमकणों अथवा जलसीकरों (Droplets/Rain Drops) के समूह को बादल कहा जाता है। अर्थात् जब वायु का तापमान ओसांक (Dew-point) से नीचे गिर जाता है, तो जलवाष्प धूल तथा धुँए के कणों पर केन्द्रित होकर बादल का रूप धारण कर लेती है।
कुहरा(Fog)- जब 100 मीटर से कम दूरी दिखाई दे।
कुहासा(Mist)- जब 100 मीटर से अधिक दूरी दिखाई दे।
तुषार/पाला(Frost)- पानी से हिम बनना
➤बादलों का निर्माण प्रायः क्षोभमंडल के ऊपरी भाग में होता है। बादल निर्माण हेतु वायुमंडल में जलवाष्प का होना एक अनिवार्य तत्व है। वायुमंडल में जलवाष्प की प्राप्ति मुख्यतः तीन प्रक्रियाओं से होती है।
(i) वाष्पीकरण (Evaporation)
(ii) वाष्पोतर्जन
(iii) उर्ध्वपातन
किसी वाष्प या गैस का द्रव या ठोस के रूप में परिवर्तन होना संघनन कहलाता है। वस्तुतः संघनन वाष्पीकरण का उल्टा प्रक्रिया होता है। वाष्पीकरण में जल गैस के रूप में तब्दील करता है जबकि संघनन में गैस द्रव्य या ठोस के रूप में बदलता है। वाष्पीकरण में गुप्त ऊष्मा ग्रहण किया जाता है जबकि संघनन क्रिया में गुप्त ऊष्मा बाहर की ओर निकलता है।
➤ वायु में जितना जलवाष्प ग्रहण करने की क्षमता है उतना ही जलवाष्प मौजूद हो तो उसे संतृप्त वायु कहते हैं।
➤ अगर जिस वायु में जितना आर्द्रता ग्रहण करने की क्षमता है और उतनी मात्रा में जलवाष्प मौजूद नहीं हो तो वैसी वायु को संतृप्त वायु कहते हैं।
➤ अगर संतृप्त वायु का तापमान बढ़ा दिया जाए तो वह असंतृप्त वायु में तब्दील कर जाती है।
➤ जब असंतृप्त वायु का तापमान घटा दिया जाए तो वह संतृप्त वायु में बदल जाती है।
➤ किस तापमान पर वायु संतृप्त हो जाती है उस तापमान को ओसांक बिंदु (Dew Point) कहते हैं।
➤ जल के वाष्पीकरण से वर्षण तक निम्नलिखित चरण पाये जाते है:-
जल का वाष्पीकरण- असंतृप्त वायु- ओसांक बिंदु- संतृप्त वायु- संघनन- वर्षण
➤ संतृप्त वायु में संघनन की क्रिया तब ही प्रारंभ होती है जब वायुमंडल में सूक्ष्म जलग्राही नाभिक प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं। वायुमंडल में निम्नलिखित जलग्राही नाभिक मौजूद होते हैं।
1. लवण
2. सल्फर डाइऑक्साइड
3. नाइट्रिक ऑक्साइड
D. ब्रन्ट – वायुमंडल में 2000-5000 की संख्या में जल ग्राही नाभिक मौजूद रहने के बाद ही संघनन प्रारंभ होता है।
➤ जलग्राही कणों का आकार 0.01 माइक्रोन से 50 माइक्रोन तक होता है।
➤ जलग्राही नाविकों का तापमान सबसे कम होता है तभी उसके चारों ओर जलवाष्प का संघनन होता है। संघनन के पूर्व वायुमंडल की सापेक्षिक आर्दता 100% पहुँच जाती है।
➤ संघनन के बाद पहले धूंध या कुहासा उसके बाद कुहरा, कुहरा के बाद बादल और बादल के बाद जल बूँदों या हिमकणों का निर्माण होता है।
मेघाच्छान्नता का विश्व वितरण
आकाश का जितना भाग मेघों से आच्छादित रहता है उसे मेघाच्छान्नता कहते हैं। इसके वितरण नीचे के तालिका में देखा जा सकता है –
क्षेत्र- मेघाच्छान्नता का विश्व में क्रम- कारण- वर्षा
1. विषुवतीय क्षेत्र- दूसरे स्थान- संवहन धारा- सर्वाधिक
2. 30°-60° अक्षांश- प्रथम स्थान- शीतोष्ण चक्रवात- दूसरे स्थान पर
3. उपोष्ण कटिबंध उच्च वायुदाब – अति अल्प- प्रतिचक्रवात- अल्प
बादलों का वर्गीकरण
बादलों का वर्गीकरण कई आधार पर किया जाता है। अन्तराष्ट्रीय मौसम विभाग ने 1932 ई० में बादलों को 3 वर्गों में बाँटा है-
1. अधिक ऊँचाई वाले बादल- 7-12 Km के बीच
2. मध्यम ऊँचाई वाले बादल- 2.5 -7 Km के बीच
3. निम्न ऊँचाई वाले बादल- 2.5Km के नीचे
1. अधिक ऊँचाई वाले बादल- 3 प्रकार
(i) Cirus Clouds (पक्षाभ बादल)
(ii) Cirro Stratus (पक्षाभ स्तरी बादल)
(iii) Cirro Cumulus (पक्षाभ कपासी बादल)
(i) Cirus Clouds (पक्षाभ बादल)-
पक्षाभ बादल सबसे अधिक ऊँचाई पर बनने वाला बादल है। देखने में बच्चों के घुंघराले बाल या पंख की भांति होता है। बादलों में सूक्ष्म हिमकण पाए जाते हैं। जब यह आसमान में असंगठित रूप में मौजूद होता है तो मौसम साफ होने का सूचना देता है। लेकिन जब संगठित रूप से इसका विस्तार बहुत अधिक होता है तो मौसम खराब होने का सूचना देता है। इस बादल के कारण शाम के वक्त नैनाभिराम दृश्य (जो देखने में आकर्षित कर ले) उत्पन्न होता है।
(ii) Cirro Stratus (पक्षाभ स्तरी बादल)-
पक्षाभ स्तरी बादल 7 से 12 Km के बीच बनता है वर्गीकरण में इसे दूसरा स्थान प्राप्त है। इस कारण दूधिया और स्वरूप चादर के समान है। यह बादल सूर्य और चंद्रमा के चारों ओर प्रभामंडल (Halo) का निर्माण करते हैं। इस बादल की उपस्थिति बताती है कि निकट भविष्य में चक्रवात आने वाला है।
(iii) Cirro Cumulus (पक्षाभ कपासी बादल)-
7-12 Km के बीच पाया जाता है। इसे वर्गीकरण में तीसरा स्थान प्राप्त है। इसकी संरचना रुई के ढेर के समान होती है। इसका रंग श्वेत होता है और इसका आकार लहरनुमा होता है।
इसे मैकरल स्काई क्लाइड भी कहते हैं। ऐसे बादल से धरातल पर छाया का निर्माण नहीं होता।
2. मध्यम ऊँचाई वाले बादल- 2 प्रकार
(i) मध्य स्तरी बादल (Alto Stratus Clouds)
(ii) मध्य कपासी बादल (Alto Cumulus Clouds)
(i) मध्य स्तरी बादल (Alto Stratus Clouds):-
यह मध्यम ऊँचाई का बादल है जो देखने में रुई के ढेर के समान होता है। इस बादल का रंग ग्रे या काला होता है। इससे कभी-कभी बूँदा-बूँदी होती है।
(ii) मध्य कपासी बादल (Alto Cumulus Clouds)
इसे पताका मेघ कहा जाता है। यह भी रुई के ढ़ेर के समान होता है लेकिन इसका मध्य भाग काला या भूरा रंग का होता है जबकि बाहरी भाग चमकीला होता है। इस बादल के कारण कभी इंद्रधनुष का निर्माण होता है। ऐसे बादल पर्वतों के शिखर पर बनते हैं। इसलिए इसे पर्वतीय मेघ बादल कहा जाता है।
निम्न ऊँचाई पर ही दो अन्य विशिष्ट प्रकार के बादल बनते है:-
(i) कपासी बादल
(ii) कपासी बर्षी बादल
(i) स्तरी कपासी बादल (Strato Cumulus Clouds)
यह 300-2500 m के बीच बनती है। इसमें बादल के कई स्तर मिलते हैं। जिसके कारण पृथ्वी पर गहरा छाया उत्पन्न होता है। इस बादल में कई स्तर उत्पन्न होते हैं तथा इससे कभी-कभी भारी वर्षा होती है।
(ii) स्तरी बादल (Stratus Clouds)
यह कुहासा के समान होता है। इस बादल का निर्माण दो विपरीत स्वभाव वाली हवाओं के मिलने से उत्पन्न होता है। इस बादल के कारण आकाश लंबे समय तक धुंधला रहता है और बूँदा-बाँदी की संभावना रहती है।
इसे वर्षा वाला बादल भी कहते हैं क्योंकि इससे वर्षा अधिक होती है। यह बादल शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात के उष्ण वाताग्र के क्षेत्र में तथा उष्णकटिबंधीय चक्रवात के दौरान इस भारत का निर्माण होता है। इस बादल के कारण कभी-कभी ओले भी गिरते हैं।
कपासीबादल (Cumulus Clouds)
इसका आकार फूल गोभी के समान होता है। इस बादल का निर्माण दोपहर के बाद विषुवतीय क्षेत्र में होता है। इस बादल का लम्बवत विस्तार अधिक होता है। यह बादल गर्जन एवं चमक के साथ वर्षा लाती है।
कपासी बर्षी बादल (Cumulo Nimbus Clouds)
इसे थंडर क्लाउड या ओलावृष्टि या तूफान को जन्म देने वाला बादल कहा जाता है। इस बादल का आकार कीप के समान होता है। इस बादल के निचले भाग में वर्षा वाले बादल पाए जाते हैं। भारत में यह बादल मार्च-अप्रैल में बनता है। तड़ित झंझा, मूसलाधार वर्षा तथा ओला कपासी वर्षी बादल की प्रमुख विशेषता है।
बादलसे सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. निम्नलिखित में से किस मेघ को ‘मोती का माता’ कहा जाता है?
धरातल पर इकाई क्षेत्रफल पर वायु द्वारा लगाया जाने वाला बल को वायुदाब कहते है। धरातल पर औसतन 1013 mb वायुदाब लगता है। विश्व में सर्वाधिक वायुदाब साईबेरिया में स्थित बैकाल झील के ऊपर मापा गया है और सबसे कम वायुदाब उत्तरी अमेरिका में आने वाले टॉरनेडो चक्रवात के केंद्र में मापा गया है। अत: इससे स्पष्ट होता है कि निम्न वायुमंडलीय क्षेत्र में सभी जगह वायुदाब परिस्थितियाँ एक सामान नहीं है। वायुदाब की विषमता मुख्यतः तीन कारणों से उत्पन्न होती है-
1. सूर्य का तलीय प्रभाव
2. कोरियालिसिस प्रभाव
3. स्थलमंडल और जलमंडल के वितरण में विषमता
ये तीनों कारकों के कारण ही वायुदाब में विषमताएँ उत्पन्न होती है फिर भी ये अक्षांशीय विस्तार को बनाये रखते है। जलवायुवेताओं ने वायुदाब का अध्ययन कर यह बतलाया है की वायुदाब पेटी दो प्रकार के होते है–
(A) निम्न वायुदाब पेटी
1. विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी
2. उ० गोलार्द्ध की उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी
3. द० गोलार्द्ध की उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी
(B) उच्च वायुदाब पेटी
1. उ० गोलार्द्ध की ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी
2. उ० गोलार्द्ध की उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी
3. द० गोलार्द्ध की ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी
4.. द० गोलार्द्ध की उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी
उपरोक्त वर्गीकरण से स्पष्ट है कि पुरे पृथ्वी पर कुल सात वायुदाब पेटी मिलते हैं जिसमें तीन निम्न और चार उच्च वायुदाब पेटी है। इनका वितरण उपरोक्त चित्र में देखा जा सकता है।
विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी
इसका विस्तार 5°N से 5°S के बीच विषुवतीय क्षेत्रों में पाया जाता है। यहाँ पर निम्न वायुदाब का प्रमुख कारण सालों भर सूर्य के लम्बवत किरण पड़ने के कारण उच्च तापमान का होना है। इसके परिणाम यह होता है कि दोनों गोलार्द्धों से आने वाली हवा प्रारंभ में आपस में मिलकर अंतरउष्ण अभिसरण (डोलड्रम/शांत पेटी) का निर्माण करती है। उसके बाद सूर्य के तापीय प्रभाव के कारण वायु गर्म होकर ऊपर उठने की प्रवृति रखती है जिससे संवहन तरंग का निर्माण होता है और अंतत: स्थायी निम्न वायुदाब क्षेत्र का निर्माण होता है।
उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी
इसका विस्तार दोनों गोलार्द्धों में 30° से 35° अक्षांश के बीच हुआ है। इसके उत्पत्ति के दो प्रमुख कारण है-
(i) तुलनात्मक दृष्टि से इस क्षेत्र में कोरियालिसिस प्रभाव और सूर्य के तापीय प्रभाव कम होना है।
(ii) विषुवतीय प्रदेश और उपध्रुवीय प्रदेश से उठने वाली वायु उपरी वायुमंडल में क्षैतिज हो जाती है और ठंडा होकर पुन: इस प्रदेश में बैठने की प्रवृति रखती है। जिसके कारण उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी का निर्माण होता है।
उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी
इसका निर्माण दोनों गोलार्द्धों में 60° से 65° अक्षांश के बीच हुआ है। इसकी उत्पत्ति का प्रमुख कारण पृथ्वी का घूर्णन गति या कोरियालिसिस प्रभाव है। कोरियालिसिस प्रभाव के कारण पृथ्वी के सतह से सटे वायु के कण ऊपर की ओर ऊठने की प्रवृति रखती है। इसका सर्वाधिक प्रभाव मध्य अक्षांशीय क्षेत्रों में (खासकर 60° से 65°) के बीच होता है।
ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी
इसका विस्तार दोनों गोलार्द्धों में 70° से 90° अक्षांश के बीच हुआ है। इसके उत्पत्ति के दो प्रमुख कारण है-
◆ ध्रुवीय क्षेत्रों में सालोंभर तापमान का निम्न होना।
◆ उपध्रुवीय क्षेत्र से ऊपर उठने वाली वायु का पुन: 70° से 90° के बीच बैठना।
वायुदाब पेटी में मौसमी संशोधन
यद्धपि ऊपर में बतलाये गए सभी वायुदाब की पेटियाँ स्थायी प्रकृति की होती है। लेकिन सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन होने से थोड़ा बहुत अक्षांशीय खिसकाव भी होती है। सामान्तय: यह खिसकाव 2° से 7° अक्षांश तक होता है। लेकिन उत्तरी गोलार्द्ध में यह खिसकाव मौसमी विशेषताओं के दृष्टिकोण से अधिक महत्पूर्ण है। उ० गोलार्द्ध में स्थल एवं जल के असमान वितरण के कारण विरूपित हो जाती है। जबकि द० गोलार्द्ध में जलमंडल के समान वितरण के कारण अपने अक्षांशीय स्थिति को बनाये रखते है।
उ० गोलार्द्ध में जब गर्मी की ऋतू होती है तो विषुवतीय वायुदाब पेटी उत्तर की ओर खिसकर स्थलीय भागों में 30°N से 35°N अक्षांश के बीच चली आती है। अर्थात सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप और द०पू०, द० USA निम्न वायुदाब क्षेत्र में बदल जाते है जिसके कारण यहाँ कई मौसमी, स्थानीय और चक्रवातीय वायु का निर्माण होता है।
शीत ऋतु में सूर्य दक्षिणायन हो जाता है जिसके कारण उ० गोलार्द्ध की सभी वायुदाब पेटियाँ दक्षिण की ओर खिसकने की प्रवृति रखती है। तिब्बत के पठार के अत्यधिक ऊँचाई होने के कारण सम्पूर्ण चीन और साइबेरिया ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी में बदल जाती है। और उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब क्षेत्र जाफना प्रायद्वीप के पास पहुँच जाती है। तिब्बतीय क्षेत्र में ध्रुवीय उच्च वायुदाब क्षेत्र के बनने से बुरान,पुर्गा जैसे स्थानीय हवा का जन्म होता है।
लेकिन द० गोलार्द्ध में इस तरह का कोई परिवर्तन नहीं होता है। 30°S से 35°S अक्षांश के बीच निर्मित होने वाली उपोष्ण उच्च वायुदाब करीब 9 महीने तक स्थिर रहती है। यह विश्व का सर्वाधिक स्थिर वायुदाब पेटी है। इसे अश्व अक्षांश के नाम से भी संबोधित करते है क्योंकि औपनिवेशिक काल में वायुमंडलीय विशेषताओं का पूर्ण ज्ञान नहीं था तो घोड़ा से लदे जहाज डूबने लगते थे तो कुछ घोड़ों को समुद्र में फेंक कर जहाज के दबाव को कम कर दिया जाता था। इसी कारण से इसे अश्व अक्षांश भी कहते है।
वैसी हवा जो सलोंभर निश्चित दिशा में बहती है। जैसे- वाणिज्यिक हवा, पछुआ हवा, ध्रुवीय हवा।
2. मौसमी हवा
वैसी हवा जो मौसमी विशेष में निश्चित दिशा में बहती है।
3. स्थानीय हवा
वैसी हवा जो स्थानीय परिस्थितियों के प्रभाव से उत्पन्न होती है। ये प्रभाव इसके दिशा निर्धारित करते है। यही कारण है कि अलग-अलग स्थानीय हवा के अलग-अलग दिशा होती है।
स्थायी /प्रचलित/ग्रहीय वायु
उच्च वायुदाब पेटियाँ ही वायु के स्रोत क्षेत्र होते हैं। H.P. से ही वायु L.P. की ओर चला करती है। फेरल नियम के अनुसार उत्तरी गोलार्ध में वायु दायीं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में वायु बायीं ओर मुड़ जाती है। अपने मार्ग से विचलन का प्रमुख कारण पृथ्वी की घूर्णन गति है। अतः पृथ्वी रूपी ग्रह का प्रभाव वायु पर पड़ता है इसलिए ऐसे वायु को ग्रहीय वायु करते हैं। यह तीन प्रकार के होते हैं
1. वाणिज्यक/व्यापारिक/सन्मार्गी वायु
2. पछुआ वायु
3. ध्रुवीय वायु
1. वाणिज्यक/व्यापारिक/सन्मार्गी वायु-
इसका स्रोत क्षेत्र उपोष्ण भार का क्षेत्र होता है। उत्तरी गोलार्ध में इसकी दिशा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण-पूरब से उत्तर-पश्चिम की ओर होती है। इस हवा का लक्ष्य क्षेत्र विषुवतीय निम्न भार का केंद्र होता है।
दोनों गोलार्द्धों से चलने वाली वाणिज्यिक हवाएँ विषुवतीय निम्न वायुदाब के अंतर्गत मिलने की प्रवृत्ति रखती है। जिसे अंतर उष्ण अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) कहते हैं। इस अभिसरण के बाद वायुदाब में थोड़ी वृद्धि होती है जिसके कारण वायु में गतिशीलता समाप्त हो जाती है, जिसे शांत पेटी या डोलड्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। डोलड्रम का निर्माण प्रायः समुद्री सतह पर होता है। विषुवतीय क्षेत्र में वायु के अभिसरण से प्रतिरोधी विषुवतीय वायु भी उत्पन्न होती है जिसे विषुवतीय पछुआ हवा कहते हैं।
2. पछुआ वायु
इस वायु का भी स्रोत क्षेत्र उपोष्ण उष्ण वायुदाब का क्षेत्र होता है लेकिन इसका लक्ष्य क्षेत्र उपध्रुवीय निम्नवायु दाब का क्षेत्र होता है। उतरी गोलार्द्ध में इसकी दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूरब की ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में उतर-पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम की ओर होती है। यह निम्न अक्षांश से उच्च अक्षांश की ओर जाने वाली वायु है जिसके कारण तापमान में सामान्यतः कमी आती है।
इस वायु का अभिसरण ध्रुवीय वायु से होता है। ध्रुवीय वायु अत्यधिक ठंडा जबकि उसके तुलना में पछुआ वायु गर्म होता है। इसीलिए दोनों मिलकर एक वाताग्र का निर्माण करते है और अंततः वाताग्र के सहारे (शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात) की उत्पति होती है।
दक्षिण गोलार्द्ध में पछुआ वायु तुलनात्मक दृष्टि से अधिक स्थिर और बाधारहित मार्ग से गुजरती है क्योंकि दक्षिण गोलार्द्ध में समुद्र का विस्तार अधिक हुआ है। जब पछुआ हवा 40° दक्षिण अक्षांश के पास से गुजरती है तो उसे गरजता चालीसा कहते है। 50°S अक्षांश के पास प्रचण्ड पचासा/गरजता पचासा और 60°S अक्षांश के पास चीखता साठा कहलाता है।
3. ध्रुवीय वायु
इसका स्रोत क्षेत्र ध्रुवीय उच्च वायुदाब का क्षेत्र होता है और लक्ष्य क्षेत्र उपध्रुवीय निम्न वायुदाब का क्षेत्र होता है। दक्षिणी गोलार्द्ध में उतर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पूरब से उत्तर-पश्चिम की ओर चलती है। ध्रुवीय वायु की पछुआ वायु से मिलकर शीतोष्ण चक्रवात को जन्म देती है।
निष्कर्ष:
ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि विश्व के जलवायु और मौसमी परिस्थतियों के निर्माण में वायुदाब पेटी और स्थायी हवा का विशेष योगदान है।
स्थानीय हवा/LOCAL WINDS
स्थानीय वायु मौसम विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है क्योंकि ये बादल निर्माण में मदद करते है। यह दो प्रकार का होता है।
(A) गर्म स्थानीय वायु
(B) ठंडी स्थानीय वायु
(A) गर्म स्थानीय वायु
1. सिरक्को (Sirocco)
◆ यह हवा सहारा मरुस्थल में उत्पन्न होकर भूमध्यसागरीय भागों में प्रवाहित होती है।
◆ तापमान 3.7℃
◆ सापेक्ष आर्द्रता 10-20%
◆ यह हवाएँ लगातार 24 घंटे से 43 घंटे तक चला करती है।
◆ स्रोत क्षेत्र- सहारा मरुस्थल
◆ धूल के कणों से वायुमंडल इतना अंधेरा हो जाता है कि सूर्य भी दिखाई नहीं पड़ता।
◆ यह हवाएँ भूमध्य सागर को पार करके दक्षिण फ्रांस तथा इटली पहुँचती है तो इनमें आर्द्रता की मात्रा अधिक पाई जाती है। इस आर्द्रता को यह भूमध्य सागर से प्राप्त कर लेती है।
◆ इटली में जब बारिश होती है तो इन बालू के कणों के कारण वर्षा की बूँदे लाल रंग की हो जाती है जिसे Blood Rain कहते हैं।
◆ सिरक्को को अलग-अलग देश में अलग-अलग नाम से जानते हैं।
(i) खमसिन
◆ मिस्र के डेल्टा की ओर चलने वाली धूल भरी आँधी है जिसका स्रोत क्षेत्र सहारा है।
◆ प्रायः वसंत ऋतु में ही चलती है।
(ii) लेवेची
◆ स्पेन में सहारा क्षेत्र से चलने वाली हवा।
(iii) लेस्ट
◆ मदिरा तथा कनारी द्वीप समूह में चलने वाले गर्म एवं शुष्क पूर्वी हवाओं को, जो सहारा के उष्ण मरुस्थल से चलती है, लेस्ट के नाम से पुकारा जाता है।
(iv) हरमट्टान
◆ इस पवन की उत्पत्ति शीतकाल में सहारा मरुस्थलीय क्षेत्र में होती है।
◆ यह पश्चिम अफ्रीका के सहारा से उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में चलने वाले गर्म एवं अति शुष्क हवा है।
◆ गिनी के तट पर इसका प्रभाव शीतलकारी होता है।
◆ नाइजीरिया और घाना में इसे डॉक्टर हवा कहते हैं क्योंकि वहाँ के निवासियों को आर्द्र मौसम से राहत देती है।
◆ परंतु सहारा के मरुस्थल में यह पवन ऊँट के काफीलों के लिए काफी कष्टदायक होती है।
2. ब्रिकफील्डर (Brick Filder)
◆ ऑस्ट्रेलिया में मरुस्थलीय प्रदेशों में चलने वाले गर्म एवं शुष्क पवन को ब्रिकफील्डर कहा जाता है।
◆ दक्षिण आस्ट्रेलिया (एडिलेड के पश्चिम) में उत्तर से दक्षिण की ओर चलने वाली हवा है।
3. ब्लैक रोलर
◆ उत्तरी अमेरिका के विशाल मैदान में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूरब की ओर तेज धूल भरी आँधियाँ चला करती है। जिनसे कभी-कभी मार्ग में पड़ने वाली इमारतें रेत के ढेर के नीचे दब जाती है। इन स्थानीय हवा को ब्लैक रोलर कहा जाता है।
◆ स्रोत क्षेत्र- कोलरेडो के मरुस्थलीय क्षेत्र (न्यू मैक्सिको)
◆ प्रभाव- मिसीसिपी मिसौरी के मध्यवर्ती क्षेत्र में
◆ धूल कण का आकार बड़ा-बड़ा होता है।
4. शामल
◆ मेसोपोटामिया तथा फारस की खाड़ी की ओर उत्तर-पूरब से चलने वाली गर्म हवा को शामिल कहा जाता है।
◆ इराक में चलने वाली हवा है।
◆ वस्तुतः यह सिमूम हवा ही है।
5. नार्वेस्टर
◆ न्यूजीलैंड में वहाँ की पर्वत मालाओं से उत्पन्न गर्म, शुष्क तथा झोंकेंदार पवन को नॉर्वेस्टर कहा जाता है।
6. गिबली
◆ लीबिया में सहारा क्षेत्र में चलने वाली हवा।
7. चिली
◆ ट्यूनीशिया की स्थानीय हवा जो सहारा क्षेत्र से चलती है।
◆ यह धूल भरी आंधी के समान है।
8. सिमूम
◆ अफ्रीका एवं अरब के मरुस्थलों में गर्म एवं शुष्क आँधियाँ चलती है जिनको सिमूम कहते हैं।
◆ यह अरब मरुस्थल के मध्य से चलने वाली हवा है जो इराक और कुवैत की ओर (पर्शियन गल्फ) चलती है।
◆ इनके साथ रेत की मात्रा अधिक होती है जिससे दृश्यता समाप्त हो जाती है।
◆ यह बवण्डर की तरह उठती है।
◆ यह दमघोंटू हवा है।
9. लू
◆ गर्मी के महीने में उत्तरी भारत में चलने वाली पश्चिमी एवं उत्तर-पश्चिमी गर्म तथा अत्यधिक शुष्क वायु को लू कहते हैं।
◆ थार के मरुस्थल से उत्तरी भारत एवं पाकिस्तान के मैदान में मई एवं जून में प्रवाहित होती है।
◆ इनकी गति पर प्रायः 20 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक होती है।
◆ उत्तर में लू दोपहर के थोड़ा पहले से सूर्यास्त तक प्रभावित होती है।
◆ मानसून के आविर्भाव के साथ लू खत्म हो जाती है।
◆ यह गर्म हवा है जिसकी धूलकण बनारस तक और इसका प्रभाव भागलपुर तक रहता है।
◆ तापमान- 40℃ से 50℃
◆ इसे Heat Waves भी कहते हैं।
10. काराबूरान
➤ यह मध्य एशिया के तारिम बेसिन और गोबी मरूस्थल से चलने वाली गर्म हवा है।
➤ यह धूल से भरी वायु है।
➤ मध्य एशिया में लोएस का मैदान का निर्माण इसी वायु से हुआ है।
11. सांता आना (Santa Ana)
➤ पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित घाटियों में जब ऊँचाई पर एकत्रित वायु पूंज तीव्र गति से नीचे उतरती है, तो उन शुष्क और गर्म हवाओं को फॉल विन्डस (fall winds) की संज्ञा प्रदान की जाती है।
➤ उ० अमेरिका के कैलिफोर्निया में सांताआना कैनियन (घाटी) से होकर तटवर्ती मैदानों (कैलिफोर्निया) की ओर चलने वाली धूल भरी आँधी को सांताआना कहा जाता है।
➤ ये आंधियाँ उत्तर अथवा उत्तर- पू० की ओर से चलती है।
➤ उत्पति का मूल स्थान- ग्रेट बेसिन
➤ शुष्कता अत्यधिक
➤ अत्यधिक शुष्क एवं गर्म हवाओं से कैलीफोर्निया के फल के बगीचों की अपार क्षति होती है।
➤ प्रबल वेग
➤ इन हवाओं से पेड़ सूख जाती है तथा जंगलों में आग लग जाती है।
➤ हवा में रेत की महीन कणों की मात्रा अधिक होने के कारण श्वास लेना भी कठिन हो जाता है।
12. योमा (Yoma)
➤ सांताआना के समान जापान में चलने वाली गर्म हवा को योमा कहा जाता है।
➤ पश्चिमी तट पर ताप को बढ़ा देता है।
➤ यह जाड़े की ऋतु में साइबेरिया से आने वाली ठंडी हवा के प्रभाव को कम करती है।
➤ इसका प्रभाव होन्शू द्वीप पर पड़ता है।
13. जोंडा (zonda)
➤ एंडीज पर्वत से प० पेंटागोनियाँ में चलने वाली स्थानीय हवाओं को जोंडा कहते है।
➤ यह सांताआना के समान है।
➤ पम्पास प्रदेश (द० अमेरिका) में चलने वाली है।
➤ यह पम्पास के मैदान में चारे की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
➤ यह घाटियों से एंडीज पर्वत के पूरब की ओर उतरने वाली हवा है।
14. फॉन (Fochn)
➤ उन पर्वतीय क्षेत्रों में जहाँ चक्रवातीय तुफान चला करते हैं, फॉन नामक गर्म और शुष्क स्थानीय हवायें पायी जाती है।
➤ इनकी उत्पति पर्वतों के वायु विमुख ढाल की ओर वायु के अवतलन के कारण होती है।
➤ यह आल्प्स से उत्तर की ओर चलने वाली हवा है।
➤ चीनूक और फॉन का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से 15 डिग्री सेल्सियस तक होता है इसलिए जाड़े के लिए यह उपयुक्त होती है।
➤ इस स्थानीय हवा को तथा ऑस्ट्रिया तथा जर्मनी में फॉन कहा जाता है।
➤ इसका प्रभाव स्वीटजरलैंड पर भी पड़ता है।
➤ यह हवा सेब, अंगूर की खेती के लिए उपयुक्त होती है।
15. चिनूक (chinook)
➤ संयुक्त राज्य अमेरिका (उत्तरी अमेरिका) में रॉकी पर्वत के पश्चिमी ढाल के सहारे चढ़ती है एवं पूर्वी ढाल के सहारे गर्म होकर उतरती है जो कोलेरेडो से कोलंबिया तक के प्रांतों को प्रभावित करती है।
➤ इन हवाओं को पश्चिमी कनाडा तथा USA में चिनूक कहा जाता है।
➤ ये हवाएं अधिकांशत: जाड़े के ऋतु में प्रभावित होती है।
➤ मृत घाटी सियरा नेवादा के पवन विमुख ढाल पर स्थित है।
➤ फॉन तथा चिनूक हवाओं के गर्म होने के दो प्रमुख कारण है:-
(i) वायु अभिमुख ढाल पर आरोही पवन में संघनन की गुप्त ऊष्मा द्वारा वायु के तापमान में वृद्धि है।
(ii) उन हवाओं के अवरोहण के समय संपीडन के कारण उनके तापमान में अतिरिक्त वृद्धि है।
➤ इसके तापमान बढ़ने की दर 10 से 15 मिनट में 3ºC से 10ºC तक रहती है। 24 घंटे में 12 से 15ºC तापमान बढ़ जाता है।
➤ इसे हिम भक्षिणी Snow Eaters भी कहा जाता है।
➤चिनूक हवा शुष्क रुद्दोष्म दर से गर्म होता है
अन्य गर्म हवा
16. बाग्यो (Bayuio)
➤ फिलिपिंस में चलने वाली उष्ण कटिबंधीय चक्रवातीय हवा है
➤ यह उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात भी है।
17. सुखोवे
➤ रूस एवं कजाकिस्तान में चलने वाली गर्म हवा है।
18. गोरिच
➤ ईरान में प्रवाहित होने वाली गर्म एवं शुष्क पवन है।
19. मारिन
➤ द० फ्रांस में बहने वाली गर्म एवं आर्द्र पवन है।
20. अयाला
➤ फ्रांस के मध्य मैसिफ में चलने वाली गर्म हवा है।
21. कोयम बैग
➤ यह इंडोनेशिया में चलने वाली गर्म हवा है।
➤ इससे तम्बाकू के फसल को हानि होती है।
22. सिस्टन (seistan या 120 दिन की पवन)
➤ पूर्वी ईरान की गर्म हवा है।
23. वीरोजन (virozon)
➤ पेरू तथा चिली के प० तटों पर बहने वाली हवा है।
24. वेन्डावेल्स (vendavales)
➤ जिब्राल्टर तथा स्पेन के पूर्वी तट पर चलने वाली ठंडी हवा को वेन्डावेल्स कहते है।
25. टेम्पोराल्स (Temporals)
➤ मध्य अमेरिका के प्रशांत तट पर की हवा है।
➤ मैक्सिको की भी हवा है।
26. सोमून (Somun)
➤ ईरान में कुर्दिस्तान पर्वत से उत्तर-पश्चिम की हवा है।
27. हबूब (Haboob)
➤ सूडान में उत्तर-पूर्व दिशा की ओर चलने वाली हवा है।
➤ स्रोत- सहारा मरुस्थल
28. ग्रेगल
➤ पश्चिमी यूरोप में उत्तर-पूर्व दिशा की ओर चलने वाली हवा है।
29. मेस्ट्रो (Maestro)
➤ भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उ०-प० (स्पेन और पुर्तगाल की ओर चलने वाली हवा)
30. बर्ग
➤ द० अफ्रीका में फॉन के समान वायु, जो आंतरिक पठारी भाग से तटवर्ती क्षेत्र की ओर चलती है।
नोट:- प्रमुख गर्म हवाएँ-
फॉन, चिनुक, सिमूम, सिरॉको।
ब्रिकफिल्डर, ब्लैक रोलर, काराबुरान, हरमट्टान।।
खमसिन, गिबली, चिली, जोंडा।
लू, सोलैनो, कोयमबैंग, अयाला।।
शांताआना, योमा, शामल, नार्वेस्टर।
बर्ग, बाग्यो, गोरिच, सुखोवे।।
(B) ठंडी स्थानीय वायु
गुरुत्व पवन (Gravity Winds):-
समुद्र के तटवर्ती क्षेत्रों में जहां पठार अथवा पर्वतों से घिरे मैदानी भाग है वहां शीत ऋतु में भारी मात्रा में शीतल वायु एकत्रित हो जाती है। इन पठारों अथवा पर्वतों के ढालों से खिसक कर वायु की कुछ राशि घाटियों तथा नदी कंदराओं में एकत्रित हो जाती है।
साधारण स्थिति में ये हवाएं मंद पवन या समीर के रूप में तट की ओर प्रवाहित होती है। किंतु जब कभी चक्रवातों का आगमन होता है तो न्यून वायु भार व्यवस्था के अंतर्गत शीतल और भारी वायु राशि प्रबल वेग के रूप में तट की ओर प्रवाहित होने लगती है। इस प्रकार के पवनों को अवरोही पवन, गुरुत्व पवन, फॉल विंड्स (Fall Winds), ड्रेनेज विंड्स (Drainage Winds) अथवा केटाबेटिक विंड्स आदि कई नामों से अलंकृत किया जाता है।
इन अवरोही पवनोंं को विभिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न से जाना जाता है:-
गुरुत्व पवन (Gravity Winds):-
(i) बोरा (Bora)
➤ बोरा एक शीतल स्थानीय पवन है जो उत्तर/उ०-पू० दिशा से एड्रियाटिक सागर के उत्तरी तट पर चला करता है।
➤ इन पवनों का वेग 128 km/h से लेकर 196 km/h hota है।
➤ तीव्र झोंका के साथ चलने वाली शीतल हवा है।
➤ यह आल्प्स पर्वत की हवा है।
➤ यह आल्प्स पर्वत के दर्रों से आनेवाली हवा है।
➤ यह फॉन का उल्टा हवा है।
➤ यह इटली, यूनान, युगोस्लाविया के तट पर कष्टकर स्थिति उत्पन्न करती है।
➤ रसेदार फसलों के लिए हानिकारक है।
(ii) गिरती पवन (Fall Winds)
नार्वेजियन तट पर इसको गिरती पवन (Fall Winds) कहा जाता है।
(iii) मिस्ट्रल (Mistral)
➤ फ्रांस के भूमध्यसागरीय तट पर गुरुत्व पवन को मिस्ट्रल कहा जाता है।
➤ यह द० फ्रांस की हवा है जो मध्यवर्ती यूरोप से आती है और भूमध्यसागर की ओर बहती है।
➤ रसेदार फसलों के लिए हानिकारक होती है।
हिमझंझा (Blizzard)
➤ अत्यधिक सर्द, वेगवान तथा हिमकणों से युक्त पवन को हिम झंझा कहा जाता है।
➤ प्रारंभ में इस पवन का नामकरण USA स्थित रॉकी पर्वत के पूर्व की ओर मैदानी भागों में चलने वाली बर्फीली आंधियों के लिए किया गया था।
➤ इनकी उत्पत्ति शीतकालीन चक्रवातों के पृष्ठ भाग में स्थित प्रतिचक्रवातों से होती है।
➤ इनमें भारी मात्रा में हिमकण प्रवाहित होती है।
➤ यह जाड़े की ऋतु में उत्तरी अमेरिका में ध्रुवीय प्रदेश से आने वाली हवा है।
➤ कपास, प्याज के लिए हानिकारक साबित होता है।
➤ इससे उत्तरी अमेरिका में पाला पड़ने लगता है।
➤ आजकल उच्च अक्षांशों में चलने वाली पवनों में यदि हिमकण मिश्रित होते है तो उन्हें ब्लिजार्ड कहा जाता है।
➤ अंटार्कटिका में प्राय: ऐसे हिमझंझावत चला करते है जिनमें पवन का वेग कभी-कभी 80 Km/h तथा तापमान -7ºC होता है।
(i) बुरान (Buran)/ पुर्गा
➤ सोवियत रूस तथा मध्य साइबेरिया में उ०-पू० से चलने वाली अत्यधिक सर्द हवाओं को बुरान कहा जाता है तथा बर्फीली आंधियों को पूर्गा (Purga) कहते है।
(ii) बाइज (Bise)/लेवांतर
➤ शीत ऋतु में प्रबल वेग से चलने वाली अत्यधिक ठंडी हवाओं को दक्षिणी फ्रांस में बाइज कहा जाता है तथा स्पेन में लेवांतर (Levanter) कहा जाता है। स्रोत क्षेत्र- Northerly Winds.
➤ तापमान हिमांक से नीचे चला जाता है जबकि मिस्ट्रल का तापमान हिमांक से ऊपर रहता है।
(iii) पैम्पीरो (Pampero)
➤ द० अमेरिका में अर्जेंटीना के पंपास क्षेत्र में उरुग्वे से प्रचंड वेग वाली सर्द हवाएं चला करती है जिन्हें वहां पैम्पीरो कहते है।
➤ इन हवाओं के साथ धूल भरी आंधियां भी चला करती है।
(iv) पापागायो (Papagayo)
➤ कोस्टा रीका के उत्तरी-पश्चिमी तट तथा समीपवर्ती प्रशांत तटवर्ती क्षेत्रों में पापागायो की खाड़ी में शीतकालीन उत्तर-पूर्वी हवाएं चलती है जिन्हें उस खाड़ी के नाम पर पापागायो कहा जाता है।
➤ ये हवाएं बड़ी प्रचंड होती है।
(v) टेहुयांटिपेकर (Tehuanterpecer)
➤ दक्षिणी मैक्सिको तथा उत्तरी मध्य अमेरिका से जाड़े के मौसम में धूलभरी तेज आंधियाँ चला करती है जिसे टेहुयांटिपेकर कहा जाता है।
➤ कोलेरेडो और ग्रेट बेसिन से जाड़े की ऋतु में चलती है।
(vi) फ्राइजेम (Friagem)
➤ ब्राजील के उष्ण कटिबंधीय कम्पोज तथा मध्य अमेजन घाटी में मई तथा जून के महीनों में भीषण शीत लहरी का प्रकोप हो जाता है, फ्राइजेम कहा जाता है।
➤ इन सर्द हवाओं का प्रकोप 3 से 5 दिन रहता है।
➤ जाड़े की ऋतु में एंडीज पर्वत से नीचे उतरने वाली हवा है।
➤ यह भी आनंददायक हवा है।
सदर्न बस्टर (Southern Buster)
➤ ध्रुवीय प्रदेशों से द० ऑस्ट्रेलिया (न्यू साउथ वेल्स) में प्रवाहित होने वाली हवा है।
नेवाडोह
➤ यह दक्षिणी अमेरिका के एंडीज के हिम क्षेत्रों से इक्वाडोर की उच्च घाटियों में प्रवाहित होने वाली पवन है।
➤ यह एक पर्वत समीर है।
ट्रामोण्टाना
➤ पश्चिमी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में शीत काल में प्रवाहित होने वाली शुष्क एवं शीतल हवा है।
केप डाक्टर
➤ द० अफ्रीका के पठारी क्षेत्र से दक्षिणी तट की ओर बहती है।
➤ इस हवा को टेबल क्लॉथर कहा जाता है क्योंकि यह पवन पर्वतीय क्षेत्रों में बादलों का निर्माण करती है।
नार्दर (Norther)
➤ यह वास्तव में एक ध्रुवीय पवन है जो अवरोध के अभाव के कारण दक्षिण में अमेरिका के टेक्सास एवं खाड़ी तटीय क्षेत्रों तक पहुंच जाती है।
➤ इसका अगला क्रम मध्य अमेरिका में Norte कहलाता है।
विलीवाव (Willywaw)
➤ यह एक गुरुत्व पवन है।
➤ अंटार्कटिका में शीतल और भारी हवाएं पठारी ढालों से नीचे उतरकर तीव्र वेग से चलती है जिसे विलीवाव कहा जाता है।
➤ अलास्का में इस पवन को बिलिबॉब कहते है।
➤ जब सूर्य दक्षिणायन होती है तब यह पवन चलती है।
मौसमी हवा या सामयिक पवन
मौसम के अनुसार या समय के साथ चलने वाली हवा को मौसमी हवा कहते हैं। यह कुल तीन प्रकार के होते हैं-
1. स्थलीय समीर और सागर समीर
2. पर्वत समीर और घाटी समीर
3. मानसून पवनें
1. स्थलीय समीर और सागर समीर (Land Breeze and Sea Breeze)
➤ दिन के समय समुद्र के निकटवर्ती क्षेत्र, समुद्र की तुलना में जल्दी गर्म हो जाते हैं जिससे स्थल पर LP का और समुद्र पर HP का निर्माण हो जाता है जिससे हवा समुद्र से स्थल की ओर प्रवाहित होने लगती है, इसे सागरीय या समुद्री समीर कहते हैं।
➤ इसके विपरीत रात के समय पार्थिव विकिरण के कारण स्थलीय भाग सागरीय भाग की तुलना में शीघ्रता से ठंडी हो जाती है जिससे स्थल पर HP एवं समुद्र पर LP का निर्माण होता है, जिसके कारण हवा स्थल से समुद्र की ओर चलने लगती है, इसे स्थलीय समीर कहते हैं।
स्थलीय समीर और समुद्री समीर की निम्नलिखित विशेषताएँ है-
◆ 24 घंटे में इनकी दिशा में दो बार परिवर्तन होता है।
◆ ये समीर तटीय क्षेत्रों को एक पतली पेटी में प्रभावित करती है।
◆ इसी समीर के कारण तटीय क्षेत्रों में मौसम हमेशा सम बना रहता है। दिन के समय समुद्र से आने वाली हवा के कारण वायु में आर्द्रता की मात्रा अधिक रहती है जबकि स्थालीय समीर के कारण रात के समय मौसम शीतल हो जाता है। यही कारण है कि तटीय क्षेत्रों में अवस्थित नगरों में आर्थिक गतिविधियाँ देर रात तक संचालित होती रहती है।
2. पर्वत समीर और घाटी समीर
➤ ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में दो प्रकार की दैनिक हवाएँ चलती है- पर्वत समीर एवं घाटी समीर।
➤ दिन के समय पर्वतीय ढाल वाला क्षेत्र घाटियों की तुलना में जल्दी एवं अधिक गर्म हो जाते हैं जिससे ढलानों पर LP और घाटी में HP का निर्माण हो जाता है। जिसके कारण पवन का संचरण ढालों के सहारे नीचे से ऊपर की ओर होने लगती है, इसे घाटी समीर कहते हैं।
➤ इसके विपरीत रात्रि के समय बढ़ती ऊँचाई के कारण तापमान में कमी आ जाती है जिससे पर्वतों के ऊपरी क्षेत्रों में हवा ठंडी एवं भारी हो जाती है एवं HP का निर्माण कर लेती है जबकि घाटी में LP की स्थिति बनती है। अतः हवा पर्वतीय ढालों के सहारे नीचे की ओर संचरित होने लगती है, इसे पर्वतीय समीर कहा जाता है।
विशेषताएँ
◆ यह एक दैनिक हवा है जो पर्वतीय ढालों के सहारे चलती है। घाटी समीर ‘एनाबेटिक हवा’ है जबकि पर्वतीय समीर एक ‘केटाबेटिक’ हवा है।
◆ उष्ण एवं शीतोष्ण प्रदेशों में 35° से 50° अक्षांश के बीच इस हवा को स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है।
◆ यह हेडली सेल के विपरीत कार्य करता है। इसी समीर के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में फलों के बागान, नगरों का विकास, या अधिवासी क्षेत्र का निर्माण न तो घाटी में होता है और न ही पर्वतीय कटकों पर बल्कि इनका विकास पर्वतीय ढलान पर होता है।
3. मानसूनी हवा
यह मौसम विशेष की हवा है। हेडली महोदय ने इसे परिभाषित करते हुए कहा है कि मानसून एक ऐसी हवा है जो 6 महीने स्थल से समुद्र की ओर और अगले 6 महीने समुद्र से स्थल की ओर चलती है।
विशेषताएँ
◆ मानसून की उत्पत्ति के संबंध में चार सिद्धांत दिए हैं-
(i) तापीय सिद्धांत
(ii) पछुआ हवा सिद्धांत
(iii) जेट स्ट्रीम सिद्धांत और
(iv) अलनीनो सिद्धांत
◆ यह एक अनिश्चिताओं से भरी हुई हवा है क्योंकि इसके आने और जाने की तिथि अनिश्चित है।
◆ इसकी विश्वसनीयता संदिग्ध है।
◆ वर्षा का वितरण एवं मात्रा दोनों अनिश्चित है।
◆ बादल विस्फोट की घटना घटित होती है।
◆ इस हवा की उत्पत्ति 8° से 35° अक्षांश के बीच में होती है। इसका विस्तार भारतीय उपमहाद्वीप, उत्तरी-पूर्वी आस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्वी ब्राजील, दक्षिणी चीन, मेडागास्कर, संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य इत्यादि में हुआ है।
हवाओं से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. व्यापारिक हवाएँ (Trade winds) किन अक्षांशों से किन अक्षांशों की ओर बहती है?
[A] विषुवत रेखा से उष्ण कटिबन्ध की ओर [B] उष्ण कटिबन्ध से ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर [C] अश्व अक्षांशों से विषुवत रेखा की ओर [D] उपर्युक्त सभी
[C] अश्व अक्षांशों से विषुवत रेखा की ओर
2. उच्च दाब क्षेत्र से भूमध्य सागर की ओर चलने वाली पवनें होती है-
[A] पछुआ हवाएँ [B] व्यापारिक पवनें [C] व्यापारिक पवनें [D] समुद्री पवनें
[B] व्यापारिक पवनें
3. व्यापारिक हवाएँ होती है-
[A] नियमित व स्थिर [B] अनियमित [C] अंशतः अनियमित [D] उपर्युक्त में कोई नहीं
[A] नियमित व स्थिर
4. पूरे वर्ष एक ही दिशा में प्रवाहित होने वाली पवनें क्या कहलाती है?
[A] स्थानीय पवन [B] सामाजिक पवन [C] सनातनी पवन [D] ध्रुवीय पवन
[C] सनातनी पवन
5. उपोष्ण उच्च दाब से विषुवत रेखीय निम्न दाब की ओर चलने वाली पवनें क्या कहलाती है?
[A] विषुवतीय निम्न दाब से [B] ध्रुवीय उच्च दाब से [C] उपोष्ण उच्च दाब से [D] अधोध्रुवीय निम्न दाब से
[C] उपोष्ण उच्च दाब से
7. वे नियमित हवाएँ जो कि ‘गरजता चालीसा’, ‘प्रचण्ड पचासा’ तथा ‘चीखता साठा’ के उपनाम से जानी जाती है, निम्न में से किस प्रकार की हवाएँ है?
[A] ध्रुवीय [B] पछुआ [C] चक्रवातीय [D] व्यापारिक
[B] पछुआ
8. दहाड़ता चालीसा क्या है?
[A] 40° दक्षिणी अक्षांश की जलधारा [B] 40° उत्तरी अक्षांश की जलधारा [C] दक्षिणी गोलार्द्ध में 40° अक्षांश के पास चलने वाली तेज हवा [D] इनमें से कोई नहीं
[C] दक्षिणी गोलार्द्ध में 40° अक्षांश के पास चलने वाली तेज हवा
9. भयंकर पचासा चलते हैं-
[A] 50° उत्तरी अक्षांश पर [B] 50° दक्षिणी अक्षांश पर [C] 50° N से 60° N के मध्य [D] इनमें से कोई नहीं
[B] 50° दक्षिणी अक्षांश पर
10. चीखता साठा पवन प्रवाहित होती है-
[A] 60° पूर्वी देशान्तर के निकट [B] 60° पश्चिमी देशान्तर के निकट [C] 60° उत्तरी अक्षांश के निकट [D] 60° दक्षिणी अक्षांश के निकट
[D] 60° दक्षिणी अक्षांश के निकट
11. मानसून शब्द का तात्पर्य है-
[A] हवाओं का सदैव एक ओर ही बहना [B] हवाओं का बहुत तेजी से बहना [C] हवाओं का बहुत धीमी गति से बहना [D] हवाओं के रूख का बदलना
[D] हवाओं के रूख का बदलना
12. मानसूनी हवाएँ-
[A] उच्च दाब क्षेत्र से उच्च दाब क्षेत्र की ओर चलती है। [B] उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर चढ़ती है। [C] निम्न दाब क्षेत्र से उच्च दाब क्षेत्र की ओर चलती है। [D] निम्न दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर चलती है।
[B] उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर चढ़ती है।
13. आल्पस पर्वत के उत्तरी भाग में बहने वाली उष्ण शुष्क स्थानीय हवाओं को क्या कहा जाता है?
[A] खमसिन [B] सिराँको [C] चिनूक [D] फॉन
[D] फॉन
14. अर्जेण्टीना के पम्पास क्षेत्र में उरूग्वे की ओर से प्रचण्ड वेग से चलने वाली ठंडी हवाओं को क्या कहा जाता है?
[A] टपीरो [B] पैम्पीरा [C] हरमट्टन [D] काराबुरान
[B] पैम्पीरा
15. न्यूजीलैंड में उच्च पर्वतीय क्षेत्रों से उतरने वाली गर्म शुष्क एवं धूल भरी स्थानीय हवा निम्न में से किस नाम से जानी जाती है?
ठोस पृथ्वी के चारों ओर गैंसों का एक आवरण मिलता है जिसे वायुमण्डल (Atmosphere) कहते हैं। इसकी कई विशेषताएँ है। जैसे:-
➤ वायुमण्डल के ही अंतर्गत कई प्रकार के मौसमी एवं जलवायु सबंधित घटनाएँ घटित होती है।
➤ हमारा वायुमण्डल गैस, जलवाष्प और धुलकण से निर्मित है।
➤ जलवाष्प की उपस्थिति के कारण ही मौसमी घटनायें घटित होती है।
➤ हमारा वायुमंडल कई उप-पेटियों में विभक्त है।
➤ वायुमण्डल में प्रतिरोधात्मक क्षमता है।
➤ गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वायुमंडल पृथ्वी से चिपका हुआ है।
➤ वायुमण्डल में वायुदाब, वायुसंचरण, जलवायु परिवर्तन जैसे गुण पाये जाते हैं।
➤ वायुमण्डल अपने आपको लगातार स्वच्छ बनाए रखता है।
वायुमण्डल का संगठन (Composition of the Atmosphere)
हमारा वायुमण्डल मुख्यत: गैस, जलवाष्प और धुलकण से निर्मित है। वायुमण्डल को निर्मित करने वाले संघटन की चर्चा नीचे कर रहे हैं-
(1) गैस (Gases)- हमारा वायुमंडल कई प्रकार के गैसों से निर्मित हैं।
क्रम
गैस
सूत्र
आयतन (% में)
1.
नाइट्रोजन
N2
78.03
2.
ऑक्सीजन
O2
20.95
3.
आर्गन
Ar
0.93
4.
कार्बन डाई ऑक्साइड
CO2
0.036
5.
नियॉन
Ne
0.002
6.
हीलियम
He
0.0005
7.
क्रिप्टन
Kr
0.001
8.
जेनन
Xe
0.00009
9.
हाइड्रोजन
H2
0.00005
उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि वायुमण्डल में नाइट्रोजन की मात्रा सर्वाधिक है। वायुमण्डल में यह दो कार्यों को सम्पन्न करता है-
(i) ऑक्सीकरण की क्रिया को मंद करता है या रोकता है।
(ii) नाइट्रोजन चक्र को संचालित करता है।
➤ हमारे वायुमण्डल में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण गैस ऑक्सीजन है जो ऑक्सीकरण तथा प्रज्वलन की क्रिया में मदद करता है। साथ ही जैविक श्वसन क्रिया का प्रमुख आधार है।
➤ हमारे वायुमण्डल में तीसरा सबसे महत्वपूर्ण गैस अक्रिय गैसे हैं। जैसे- आर्गन, नियॉन इत्यादि।
➤ सभी अक्रिय गैसों को मिलाने पर वायुमण्डल में इनकी मात्रा 1% है। इनमें भी सर्वाधिक आर्गन (0.93%) है। ये वायुमण्डल में अति अल्प मात्रा में मौजूद है। वायुमण्डल में रहकर यह कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ को निष्क्रिय करती है।
➤ हमारे वायुमण्डल में ऑक्सीजन का एक अपरूप ओजोन (O3)के रूप में मौजूद है।
➤ यह गैस समताप मण्डल के ओजोन परत में पायी जाती है।
➤ यह सूर्य से आने वाली हानिकारक किरणों को शोखकर पृथ्वी को सुरक्षित करती है, इसलिए ओजन परत को “वायुमण्डल का छतरी” कहा जाता है।
➤ हमारे वायुमण्डल का अगला महत्वपूर्ण गैस ग्रीनहाउस गैसें हैं।
➤ इसके अंतर्गत CO2, CO, CFC, CH4 (मिथेन) जैसे गैसों को शामिल करते हैं।
➤ इनमें सिर्फ CO2 को छोड़कर शेष सभी गैस वायुमण्डल में प्रदूषक के रूप में मौजूद रहते हैं।
➤ CO2 गैस प्राकृतिक रुप से वायुमण्डल में मौजूद रहता है।
➤ CO2 गैस ही पार्थिव विकिरण को अवशोषित कर वायुमण्डल को गर्म बनाये रखता है।
➤ CO2 को “वायुमण्डल का कम्बल” भी कहा जाता है।
➤ अंतिम महत्वपूर्ण गैस हाइड्रोजन है जो जलवाष्प एवं जल के निर्माण में मदद करता है।
सामान्यतः समुद्रतल से 80 Km की ऊँचाई तक गैस समान अनुपात में पाये जाते हैं लेकिन उसके बाद गैंसों का भिन्न -2 स्तर पाया जाता है। जैसे:-
ऊँचाई गैसों का स्तर (i) 90 – 200 किमी०- N2 गैस के अणुओं का स्तर (ii) 200-400 किमी०- O2 गैस के परमाणु का स्तर (iii) 1100-3500 किमी०- He गैस का स्तर (iv) 3500-10000 किमी०- H2 परमाणु का स्तर
(2) जलवाष्प (Water Vapour)-
➤ जलवाष्प हमारे वायुमण्डल का दूसरा प्रमुख संघटक है।
➤ यह वायुमण्डल में 12 किमी० की ऊँचाई तक पायी जाती है। लेकिन 90% हिस्सा 8 किमी० की ऊँचाई तक ही मिलती है।
➤ कभी-2 वायु में चलने वाले संवहन तरंगों के कारण जलवाष्प को 50 किमी० की ऊँचाई तक पहुँचा दी जाती है।
➤ ये जलवाष्प ब्रह्माण्डीय धुल-कणों के साथ मिलकर विश्व में सबसे ऊँचाई पर मिलने वाले बादल “निशा दीप्ति बादल”का निर्माण करती है।
➤ वायुमण्डलीय जलवाष्प के कारण ही वर्षण क्रिया, बादल निर्माण क्रिया, कुहरा, कुहासा, ओस और आर्द्रण की क्रिया होती है।
➤ वायुमण्डल में जलवाष्प की आपूर्ति पृथ्वी के धरातल से ही वाष्पोत्सर्जन, वाष्पीकरण, उर्ध्वपातन (ठोस से गैस) की क्रिया द्वारा होता है।
नोट: वाष्पोत्सर्जन की दर को जिस यंत्र द्वारा मापा जा सकता है उसे पोटोमीटर कहते हैं।
(3) धुलकण (Dust Particle)-
➤ वायुमण्डल का तीसरा सबसे प्रमुख संघटक धूलकण है।
➤ वायुमण्डल में इसकी आपूर्ति दो स्थानों से होती है- ब्रह्माण्ड और पृथ्वी के धरातल से।
➤ ब्रह्मण्ड से मिलने वाले धुलकण को ब्रह्मण्डलीय धूलकण कहते हैं।
➤ ये धुलकण दूसरे ग्रह, उपग्रह से विखण्डित होकर पृथ्वी पर गिरने वाला पदार्थ है।
➤ कभी-2 इनके आकार इतनी बड़ी होती है कि पृथ्वी पर उल्का वृष्टि की घटना घटती है।
➤ पार्थिव धूलकण का मुख्य स्रोत धरातल है।
➤ ये परागण एवं हाइग्रोस्कोपिक (आर्द्रताग्राही) कण के रूप में मौजूद रहते हैं।
➤ वायुमण्डल में सर्वाधिक धुलकण की आपूर्ति समुद्र तटीय भागों से होती है।
➤ ये धूलकण वायुमंडल में जाकर जल की तुलना में पहले ठण्डी होने की प्रवृत्ति रखते हैं। इस कणों के इर्द-गिर्द आर्द्रता या जलवाष्प का संघनन होने लगता है जिससे जलबून्दों का निर्माण होने लगता है।
➤ सामान्य तौर पर वायुमण्डल में 12 Km की ऊँचाई तक धूलकण पाये जाते हैं लेकिन इसका अधिकांश भाग 5 किमी० की ऊँचाई तक मिलते हैं।
निष्कर्ष:
सैद्धांतिक रूप से हमारा वायुमण्डल गैस, जलवाष्प और धूलकण से निर्मित है। लेकिन तीव्र औद्योगिकीकरण, नगरीकरण, बढ़ती जनसंख्या इत्यादि के कारण कई प्रदूषक तत्व वायुमण्डल में छोड़े जा रहे हैं जिसके कारण वायु प्रदूषण, ओजोन क्षरण, ग्लोबल वार्मिंग, अम्ल वर्षा जैसी घटनायें घटित हो रही हैं। अत: आवश्यकता इस बात का है कि वायुमण्डल में मौजूद गैस, जलवाष्प एवं धुलकण के अनुपात को नियत बनाकर रखा जाय।
वायुमण्डल का संगठनसे सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. पृथ्वी के वायुमण्डल का कितना प्रतिशत भाग 29 km की ऊँचाई तक पाया जाता है?
[A] 29% [B] 57% [C] 76% [D] 97%
[D] 97%
2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
[A] वायुमण्डल की ऊपरी सीमा लगभग 10,000 km की ऊँचाई तक है। [B] वायुमण्डल का 50% भाग 5-6 km की ऊँचाई तक सीमित है। [C] ऊँचाई में वृद्धि के साथ-साथ जलवाष्प की मात्रा में वृद्धि होती है। [D] वायुमण्डल के निचले स्तर में भारी गैस एवं ऊपरी स्तर में हल्की गैसों की प्रधानता है।
[C] ऊँचाई में वृद्धि के साथ-साथ जलवाष्प की मात्रा में वृद्धि होती है।
3. वायुमण्डल का सर्वाधिक स्थायी तत्व है-
[A] नाइट्रोजन [B] ऑक्सीजन [C] कार्बन डाइऑक्साइड [D] जलवाष्प
[D] जलवाष्प
4. वायुमण्डल में सर्वाधिक कौन-सी गैस मिलती है?
[A] ऑक्सीजन [B] हाइड्रोजन [C] नाइट्रोजन [D] कार्बन डाइऑक्साइड
[C] नाइट्रोजन
5. वायुमण्डल में सर्वाधिक मात्रा में विद्यमान अक्रिय गैस कौन-सी है?
[A] ऑर्गन [B] क्रिप्टॉन [C] हीलियम [D] नियॉन
[A] ऑर्गन
6. वायुमण्डल मुख्यतः गर्म होता है-
[A] सूर्य की सीधी किरणों से [B] पृथ्वी से विकिरण द्वारा [C] पृथ्वी के अंदर की ऊष्मा से [D] पृथ्वी की गति के घर्षण से
[B] पृथ्वी से विकिरण द्वारा
7. निम्न में से कौन-सा युग्म वायुमण्डल की गैसों की बढ़ती मात्रा को दर्शाता है?
[A] ओजोन, कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन [B] नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, ओजोन [C] कार्बन डाइऑक्साइड, ओजोन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन [D] आर्गन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड
[A] ओजोन, कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन
8. निम्नलिखित में से कौन-सी गैस ग्रीन हाऊस प्रभाव के लिये उत्तरदायी है?
[A] क्लोरीन [B] ऑक्सीजन [C] कार्बन डाइऑक्साइड [D] हाइड्रोजन
[C] कार्बन डाइऑक्साइड
9. सूर्य की तीव्र किरणों द्वारा झुलसने से वायुमण्डल की कौन-सी गैस हमारी रक्षा करती है?
[A] ऑक्सीजन [B] नाइट्रोजन [C] ओजोन [D] आर्गन
[C] ओजोन
10. पृथ्वी के वायुमण्डल में पायी जाने वाली निम्नलिखित गैसों का सही अवरोही क्रम क्या होगा?
20. क्षोभ मण्डल के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
[A] यह वायुमण्डल का सघनतम परत है। [B] बादलों का निर्माण क्षोभ मण्डल में ही होता है। [C] क्षोभ मण्डल की ऊपरी सीमा पर समताप सीमा स्थित है। [D] इनमें से कोई नहीं
[C] क्षोभ मण्डल की ऊपरी सीमा पर समताप सीमा स्थित है।
21. क्षोभ मण्डल एवं समताप मण्डल के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र को क्या कहा जाता है?
[A] समताप सीमा [B] मध्य सीमा [C] क्षोभ सीमा [D] बाह्य सीमा
[C] क्षोभ सीमा
22. पृथ्वी के वायुमण्डल का सर्वाधिक घनत्व कहाँ पर होता है?
32. समताप मंडल के सम्बन्ध में निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
[A] समताप मण्डल का विस्तार 50 किमी० की ऊँचाई तक पाया जाता है। [B] समताप मंडल की सीमा आयन मण्डल से मिलती है। [C] इस मण्डल में बादलों का अभाव पाया जाता है। [D] इस मण्डल में धूल कण और जलवाष्प की मात्रा काफी कम होती है।
[B] समताप मंडल की सीमा आयन मण्डल से मिलती है।
33. ओजोन परत के प्रतिवर्ष 7 प्रतिशत की दर से अवक्षय के कारण उसमें 10 मिलियन वर्ग किमी० आकार का एक बड़ा छिद्र बन गया है। यह छिद्र अवस्थित है-
[A] आर्कटिक के ऊपर [B] ध्रुवों के ऊपर [C] अंटार्कटिका के ऊपर [D] अमेरिका एवं यूरोप के ऊपर
[C] अंटार्कटिका के ऊपर
34. दीर्घ रेडियो तरंगें पृथ्वी की किस सतह से परावर्तित होती है?
47. वायुदाब प्रायः सर्वाधिक होता है जब वायु होती है-
[A] ठण्डी तथा शुष्क [B] उष्ण तथा शुष्क [C] ठण्डी तथा नम [D] उष्ण तथा नम
[A] ठण्डी तथा शुष्क
48. वायुदाब में अचानक आने वाली कमी निम्न में से किसका सूचक होती है?
[A] स्वच्छ मौसम [B] अत्यधिक शीतल मौसम [C] तूफानी मौसम [D] वर्षा का मौसम
[C] तूफानी मौसम
49. सामान्य वायुदाब पाया जाता है-
[A] पर्वतों पर [B] सागरतल पर [C] रेगिस्तान में [D] धरातल के 5 km ऊपर
[B] सागरतल पर
50. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
[A] सागर तल पर वायुदाब अधिकतम होता है। [B] वायुदाब को मिलीबार (mb) में मापा जाता है। [C] किसी भी स्थान पर वायुदाब दो बार बढ़ता एवं दो बार घटता है। [D] उपर्युक्त सभी।
[D] उपर्युक्त सभी।
51. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
[A] वायुदाब के घटने-बढ़ने की क्रिया को ‘वायुदाब उच्चावचन’ (Barometric tide) कहते हैं। [B] वायुदाब में उतार-चढ़ाव विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर कम होता जाता हैं। [C] 60° अक्षांश के बाद वायुदाब का दैनिक उतार चढ़ाव नहीं देखा जाता है। [D] उपर्युक्त सभी।
[D] उपर्युक्त सभी।
52. ग्लोब पर दाब कटिबंधों (pressure belts) की संख्या कितनी है?
[A] 5 [B] 6 [C] 7 [D] 9
[C] 7
53. विषुवतीय निम्न दाब पेटी का विस्तार विषुवत रेखा के दोनों ओर कितने अक्षांश तक मिलता है?
[A] 5° [B] 10° [C] 15° [D] 20°
[A] 5°
54. डोलड्रम पेटी का विस्तार सामान्यतः पाया जाता है-
[A] 0° – 5° उत्तर [B] 0° – 5° दक्षिण [C] 0°- 10° उत्तर [D] 5°N – 5° दक्षिण
[D] 5°N – 5° दक्षिण
55. डोलड्रम क्षेत्र की विशेषता होती है-
[A] निम्न दाब एवं वायु का अवतलन [B] निम्न दाब एवं मन्द पूर्वी पवन [C] सामान्य दाब एवं वायु का अवतलन [D] निम्न दाब एवं शान्त पवन
हमारी पृथ्वी वायु की एक पतली परत से चरों ओर से घिरी हुई है जिसका विस्तार पृथ्वी की सतह से कई किलोमीटर ऊपर तक है, जिसे वायुमंडल कहते हैं।
➤ हमारे वायुमंडल की उत्पत्ति लगभग 1 अरब वर्ष पहले हुआ। लेकिन वर्तमान स्वरूप में 58 करोड़ वर्ष पूर्व में आया।
➤ अमेरिकी भूगोलवेता स्ट्रॉलर के अनुसार धरातल से 80 हजार किमी० की ऊँचाई तक वायुमंडल मौजूद है।
➤आयतन के दृष्टिकोण से 97% हिस्सा 29 किमी० की ऊँचाई तक और द्रव्यमान के दृष्टिकोण से 50% हिस्सा 5.6 किमी० की ऊँचाई तक मौजूद है।
➤ हमारे वायुमंडल में 95% हिस्सा गैसों का और 5% जलवाष्प एवं धूलकणों का है।
वायुमण्डल की संरचना का अध्ययन कई विधियों से सम्पन्न किया गया है जिससे ज्ञात होता है कि हमारा वायुमण्डल कई सकेन्द्रीय पेटियों में विभक्त है। जैसे:-
(A) प्रमुख मण्डल
(1) क्षोभ मण्डल / परिवर्तन मण्डल
(2) समताप मण्डल
(3) मध्य मण्डल
(4) ताप या आयन मण्डल
(5) बर्हिमण्डल
(6) चुम्बकीय मण्डल
(B) गौण मण्डल
(i) क्षोभ सीमा
(ii) समताप सीमा
(iii) मध्य सीमा
(1) क्षोभ मण्डल / परिवर्तन मण्डल (Troposphere):-
➤ यह वायुमण्डल का सबसे नीचला परत है जो धरातल से 8 से 18 किमी० की ऊँचाई तक पायी जाती है।
➤ सूर्य के तापीय प्रभाव के कारण विषुवत रेखा पर इसकी ऊँचाई अधिक 18 किमी० और ध्रुवों पर 8 किमी० है।
➤ इसमें सम्पूर्ण वायुमंडल का 75% भार पाया जाता है।
➤सभी प्रकार की मौसमी घटनाएँ इसी मण्डल में घटित होती हैं। जैसे:- बादल का फटना, वर्षण, कुहरा, कुहासा आदि।
➤क्षोभमण्डल के ऊपरी भाग में तेज गति से चलने वाली वायु को जेटस्ट्रीम कहते है।
➤ क्षोभमण्डल में नीचे से ऊपर जाने पर तापमान में कमी प्रति 165 मी० की ऊँचाई पर 1ºC और प्रत्येक 1,000 मी० पर 6.5ºC या प्रति 1 हजार फीट की ऊँचाई पर 3.6ºF की कमी आती है।
➤ क्षोभमण्डल के ऊपरी भाग में तापमान घटकर -45°C से -80°C तक पहुँच जाता है।
➤अत्याधिक मौसमी घटनायें घटित होने के कारण इसे परिवर्तन मंडल भी कहते हैं।
(2) समताप मण्डल (Stratosphere):-
➤यह मण्डल क्षोभमण्डल के ऊपरी भाग में पायी जाती है।
➤इसका अधिकतम ऊपरी विस्तार धरातल से 50 km तक है।
➤इस मण्डल में ओजोन गैस की उपस्थिति के कारण बढ़ते हुए ऊँचाई के साथ तापमान में बढ़ोतरी होती है।
➤इस मण्डल के ऊपरी भाग में तापमान बढ़कर 0°C तक पहुँच जाता है।
➤समताप मण्डल में 25-35 km के बीच ओजोन गैस की एक घना परत पायी जाती है जो सूर्य से आने वाली पराबैगनी किरणों को अवशोषित कर धरातल को सुरक्षित रखती है।
➤ओजोन परत का सर्वप्रथम खोज रामसनमहोदय ने किया था।
➤समताप मंडल प्राय: जलवाष्प, धूलकण से रहित होता है। परन्तु कभी-2 इस मण्डल में हल्के मेघ का निर्माण होता है जिसे Mother of Pearl Cloudकहते हैं।
(3) मध्यमण्डल (Mesosphere):-
➤मध्यमण्डल धरातल से 80km की ऊँचाई तक पायी जाती है।
➤ इस मंडल में बढ़ते हुए ऊँचाई के साथ तापमान में कमी आती है।
➤मध्यमण्डल के ऊपरी भाग में तापमान घटकर -80°C से -100°C तक पहुँच जाता है।
➤इस मण्डल में ब्रह्माण्डलीय धूल कण के कारण Noctilucent Cloud “निशादीप्ति बादल”का निर्माण होता है।
➤ताप या आयनमण्डल मध्यमंडल के ऊपरी भाग में पायी जाती है।
➤ इसकी ऊपरी सीमा धरातल से 500 km की ऊँचाई तक पायी जाती है।
➤ इस मंडल में तापमान बढ़कर 25°C तक पहुँच जाता है।
➤ इसमें आयनीकृत गैस पाये जाते हैं, इसलिए इसे आयनमंडल भी कहते हैं।
➤ इसमें ध्रुवीय ज्योति की घटना घटती है जिसे उत्तरी गोलार्द्ध में“अरोरा बोरियालेसिस”और दक्षिणी गोलार्द्ध में “अरोराऑस्ट्रेलेसिस“ कहते हैं।
⇒ तापमंडल को पुन: कई परतों में बांटा जाता है। जैसेः-
क्रम
उप परत
मोटाई
विशेषता
1
D परत
80-90 किमी०
➤सूर्यास्त के समय समाप्त हो जाता है।
➤ यह लघु रेडियों तरंगों को परावर्तित करता है।
2
E परत
90-130 किमी०
➤ इसे क्रनेली हेवीसाइट परत भी कहते है।
➤ इसमें मध्यम एवं दीर्घ रेडियों तरंगों का परावर्तन होता है।
3
विशिष्ट E परत
110 किमी०
➤उल्का पिंड घुसने के दौरान बनता है।
4
E परत
150 किमी०
➤ इसे एफलिटन परत भी कहते है।
5
F1 तथा F2 परत
150-380 किमी०
➤ इसे Appleton परत भी कहते है।
➤ यह परत सूर्य धब्बा दिखाई देने के दौरान बनता है।
6
G परत
400-500 किमी०
➤यह सभी प्रकार के रेडियों तरंगों का परावर्तन करता है।
(5) बर्हिमण्डल / आयतन मण्डल (Exosphere):-
➤ धरातल से बर्हिमण्डल की ऊँचाई 2000 km तक है।
➤ इसकी ऊपरी सीमा पर तापमान बढ़कर 1000ºC तक पहुँच जाता है।
➤ इस मंडल में गैसों का इतना आयनीकरण हो जाता है कि गैस के अणु परमाणु के रूप में मिलने लगते है।
➤इसी मण्डल में गैसों के अलग-अलग परत पाये जाते हैं।
(6) चुम्बकीय मण्डल:-
➤यह वायुमंडल का सबसे उपरी परत है।
➤ इसकी ऊपरी सीमा 80 हजार किमी० तक संभावित है।
➤ इस मंडल को कुछ विद्वान वायुमण्डल का हिस्सा नहीं मानते हैं।
➤इस मंडल में गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव नगण्य हो जाता है।
➤इस मंडल में गैस के अणु इलेक्ट्रॉन एवं प्रोटोन में टूट जाते हैं।
➤इस मंडल में विभिन्न प्रकार के कॉस्मिक किरणों का प्रभाव होता है। इस मंडल में सौर लपट का प्रभाव पड़ता है।
(B) गौण मण्डल- उपरोक्त प्रमुख मंडलों के अलावे भी तीन गौण मंडल भी पाये जाते हैं। जैसे:-
(i) क्षोभ सीमा
➤स्थिति- क्षोभ मंडल और समताप मंडल के बीच की संक्रमण की पेटी
➤ मोटाई-1.5 किमी०
(ii) समताप सीमा
➤समताप मंडल और मध्यमंडल के बीच की संक्रमण की पेटी
➤ मोटाई-5 किमी०
(iii) मध्य सीमा
➤मध्यमंडल और तापमंडल के बीच की संक्रमण की पेटी
➤ मोटाई-10 किमी०
➤ ये तीनों पेटियाँ एक संक्रमण पेटी के समान है जिसमें किसी भी प्रकार की मौसमी घटनाएँ नहीं घटती है।
रासायनिक संघटन के दृष्टिकोण से वायुमण्डल को दो भागों में बाँटते है :-
(1) सममण्डल:-
इसके अंतर्गत क्षोभ मंडल, समताप मंडल और मध्यमंडल को शामिल किया जाता है। इसमें गैसों का अनुपात एक समान रहता है।
(2) विषममण्डल:-
➤ इसके अंतर्गत तापमंडल, बर्हिमण्डल एवं चुम्बकीय मण्डल को शामिल करते हैं।
➤इसमें बढ़ते हुए ऊँचाई के साथ गैसों के अनुपात में परिवर्तन होते रहता है।
वायुमण्डल की संरचना से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. पृथ्वी के वायुमण्डल का कितना प्रतिशत भाग 29 km की ऊँचाई तक पाया जाता है?
[A] 29% [B] 57% [C] 76% [D] 97%
[D] 97%
2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
[A] वायुमण्डल की ऊपरी सीमा लगभग 10,000 km की ऊँचाई तक है। [B] वायुमण्डल का 50% भाग 5-6 km की ऊँचाई तक सीमित है। [C] ऊँचाई में वृद्धि के साथ-साथ जलवाष्प की मात्रा में वृद्धि होती है। [D] वायुमण्डल के निचले स्तर में भारी गैस एवं ऊपरी स्तर में हल्की गैसों की प्रधानता है।
[C] ऊँचाई में वृद्धि के साथ-साथ जलवाष्प की मात्रा में वृद्धि होती है।
3. वायुमण्डल का सर्वाधिक स्थायी तत्व है-
[A] नाइट्रोजन [B] ऑक्सीजन [C] कार्बन डाइऑक्साइड [D] जलवाष्प
[D] जलवाष्प
4. वायुमण्डल में सर्वाधिक कौन-सी गैस मिलती है?
[A] ऑक्सीजन [B] हाइड्रोजन [C] नाइट्रोजन [D] कार्बन डाइऑक्साइड
[C] नाइट्रोजन
5. वायुमण्डल में सर्वाधिक मात्रा में विद्यमान अक्रिय गैस कौन-सी है?
[A] ऑर्गन [B] क्रिप्टॉन [C] हीलियम [D] नियॉन
[A] ऑर्गन
6. वायुमण्डल मुख्यतः गर्म होता है-
[A] सूर्य की सीधी किरणों से [B] पृथ्वी से विकिरण द्वारा [C] पृथ्वी के अंदर की ऊष्मा से [D] पृथ्वी की गति के घर्षण से
[B] पृथ्वी से विकिरण द्वारा
7. निम्न में से कौन-सा युग्म वायुमण्डल की गैसों की बढ़ती मात्रा को दर्शाता है?
[A] ओजोन, कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन [B] नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, ओजोन [C] कार्बन डाइऑक्साइड, ओजोन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन [D] आर्गन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड
[A] ओजोन, कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन
8. निम्नलिखित में से कौन-सी गैस ग्रीन हाऊस प्रभाव के लिये उत्तरदायी है?
[A] क्लोरीन [B] ऑक्सीजन [C] कार्बन डाइऑक्साइड [D] हाइड्रोजन
[C] कार्बन डाइऑक्साइड
9. सूर्य की तीव्र किरणों द्वारा झुलसने से वायुमण्डल की कौन-सी गैस हमारी रक्षा करती है?
[A] ऑक्सीजन [B] नाइट्रोजन [C] ओजोन [D] आर्गन
[C] ओजोन
10. पृथ्वी के वायुमण्डल में पायी जाने वाली निम्नलिखित गैसों का सही अवरोही क्रम क्या होगा?
20. क्षोभ मण्डल के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
[A] यह वायुमण्डल का सघनतम परत है। [B] बादलों का निर्माण क्षोभ मण्डल में ही होता है। [C] क्षोभ मण्डल की ऊपरी सीमा पर समताप सीमा स्थित है। [D] इनमें से कोई नहीं
[C] क्षोभ मण्डल की ऊपरी सीमा पर समताप सीमा स्थित है।
21. क्षोभ मण्डल एवं समताप मण्डल के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र को क्या कहा जाता है?
[A] समताप सीमा [B] मध्य सीमा [C] क्षोभ सीमा [D] बाह्य सीमा
[C] क्षोभ सीमा
22. पृथ्वी के वायुमण्डल का सर्वाधिक घनत्व कहाँ पर होता है?
32. समताप मंडल के सम्बन्ध में निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
[A] समताप मण्डल का विस्तार 50 किमी० की ऊँचाई तक पाया जाता है। [B] समताप मंडल की सीमा आयन मण्डल से मिलती है। [C] इस मण्डल में बादलों का अभाव पाया जाता है। [D] इस मण्डल में धूल कण और जलवाष्प की मात्रा काफी कम होती है।
[B] समताप मंडल की सीमा आयन मण्डल से मिलती है।
33. ओजोन परत के प्रतिवर्ष 7 प्रतिशत की दर से अवक्षय के कारण उसमें 10 मिलियन वर्ग किमी० आकार का एक बड़ा छिद्र बन गया है। यह छिद्र अवस्थित है-
[A] आर्कटिक के ऊपर [B] ध्रुवों के ऊपर [C] अंटार्कटिका के ऊपर [D] अमेरिका एवं यूरोप के ऊपर
[C] अंटार्कटिका के ऊपर
34. दीर्घ रेडियो तरंगें पृथ्वी की किस सतह से परावर्तित होती है?
47. वायुदाब प्रायः सर्वाधिक होता है जब वायु होती है-
[A] ठण्डी तथा शुष्क [B] उष्ण तथा शुष्क [C] ठण्डी तथा नम [D] उष्ण तथा नम
[A] ठण्डी तथा शुष्क
48. वायुदाब में अचानक आने वाली कमी निम्न में से किसका सूचक होती है?
[A] स्वच्छ मौसम [B] अत्यधिक शीतल मौसम [C] तूफानी मौसम [D] वर्षा का मौसम
[C] तूफानी मौसम
49. सामान्य वायुदाब पाया जाता है-
[A] पर्वतों पर [B] सागरतल पर [C] रेगिस्तान में [D] धरातल के 5 km ऊपर
[B] सागरतल पर
50. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
[A] सागर तल पर वायुदाब अधिकतम होता है। [B] वायुदाब को मिलीबार (mb) में मापा जाता है। [C] किसी भी स्थान पर वायुदाब दो बार बढ़ता एवं दो बार घटता है। [D] उपर्युक्त सभी।
[D] उपर्युक्त सभी।
51. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
[A] वायुदाब के घटने-बढ़ने की क्रिया को ‘वायुदाब उच्चावचन’ (Barometric tide) कहते हैं। [B] वायुदाब में उतार-चढ़ाव विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर कम होता जाता हैं। [C] 60° अक्षांश के बाद वायुदाब का दैनिक उतार चढ़ाव नहीं देखा जाता है। [D] उपर्युक्त सभी।
[D] उपर्युक्त सभी।
52. ग्लोब पर दाब कटिबंधों (pressure belts) की संख्या कितनी है?
[A] 5 [B] 6 [C] 7 [D] 9
[C] 7
53. विषुवतीय निम्न दाब पेटी का विस्तार विषुवत रेखा के दोनों ओर कितने अक्षांश तक मिलता है?
[A] 5° [B] 10° [C] 15° [D] 20°
[A] 5°
54. डोलड्रम पेटी का विस्तार सामान्यतः पाया जाता है-
[A] 0° – 5° उत्तर [B] 0° – 5° दक्षिण [C] 0°- 10° उत्तर [D] 5°N – 5° दक्षिण
[D] 5°N – 5° दक्षिण
55. डोलड्रम क्षेत्र की विशेषता होती है-
[A] निम्न दाब एवं वायु का अवतलन [B] निम्न दाब एवं मन्द पूर्वी पवन [C] सामान्य दाब एवं वायु का अवतलन [D] निम्न दाब एवं शान्त पवन