23. Petro-Chemical Complexes with Reference to India / पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स : भारत के संदर्भ में
Petro-Chemical Complexes with Reference to Indiaपेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स : भारत के संदर्भ में |

परिचय:
पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स वे एकीकृत औद्योगिक परिसर हैं जहाँ कच्चे तेल (Crude Oil) अथवा प्राकृतिक गैस से विभिन्न आधारभूत एवं उच्च मूल्य के रासायनिक उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। ये कॉम्प्लेक्स आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था के केंद्रीय स्तंभ माने जाते हैं, क्योंकि इनके उत्पाद प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, रबर, उर्वरक, डिटर्जेंट, पेंट, दवा, पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अनेक उद्योगों के लिए कच्चा माल प्रदान करते हैं।
भारत में पेट्रोकेमिकल उद्योग का विकास 1960 के दशक में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से प्रारंभ हुआ, परंतु 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद निजी क्षेत्र की भागीदारी और विदेशी निवेश के कारण इस क्षेत्र में तीव्र वृद्धि हुई। आज भारत विश्व के प्रमुख पेट्रोकेमिकल उपभोक्ता और उत्पादक देशों में सम्मिलित है।
पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स की संरचना
पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स सामान्यतः तीन स्तरों में विभाजित होते हैं:
(1) अपस्ट्रीम (Upstream):-
इस चरण में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का अन्वेषण एवं उत्पादन किया जाता है। रिफाइनरी में कच्चे तेल का आसवन कर विभिन्न अंश प्राप्त किए जाते हैं, जैसे- नेफ्था, एलपीजी, एथेन आदि। यही पदार्थ आगे पेट्रोकेमिकल उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
(2) मिडस्ट्रीम (Midstream):-
इस चरण में क्रैकिंग प्रक्रिया द्वारा नेफ्था या गैस को तोड़कर एथिलीन, प्रोपिलीन, ब्यूटाडीन जैसे ओलेफिन तथा बेंजीन, टोल्यून, जाइलिन जैसे एरोमैटिक्स तैयार किए जाते हैं। ये आधारभूत रसायन आगे पॉलीमर उत्पादन में प्रयुक्त होते हैं।
(3) डाउनस्ट्रीम (Downstream):-
इस चरण में पॉलीइथिलीन (PE), पॉलीप्रोपिलीन (PP), पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC), सिंथेटिक रबर, पॉलिएस्टर फाइबर, प्लास्टिक उत्पाद आदि का निर्माण होता है। यही उत्पाद उपभोक्ता वस्तुओं और औद्योगिक उत्पादों में उपयोग किए जाते हैं।
भारत के प्रमुख पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स
1. जामनगर (गुजरात):-
जामनगर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित भारत का सबसे प्रमुख रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल केंद्र है। यहाँ विश्व के सबसे बड़े एकीकृत रिफाइनरी परिसरों में से एक स्थापित है, जिसका संचालन Reliance Industries द्वारा किया जाता है। जामनगर परिसर में दो विशाल रिफाइनरियाँ तथा उन्नत पेट्रोकेमिकल इकाइयाँ कार्यरत हैं।
इस कॉम्प्लेक्स की प्रमुख विशेषता Oil-to-Chemicals (O2C) मॉडल है, जिसमें कच्चे तेल को रिफाइन कर सीधे उच्च मूल्य वाले रसायनों और पॉलिमर उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है। यहाँ एथिलीन, प्रोपिलीन, पॉलीइथिलीन, पॉलीप्रोपिलीन, एरोमैटिक्स तथा विभिन्न स्पेशलिटी केमिकल्स का उत्पादन होता है।
जामनगर की तटीय स्थिति और आधुनिक बंदरगाह सुविधा के कारण कच्चे तेल का आयात और तैयार उत्पादों का निर्यात अत्यंत सुगम है। यह परिसर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, निर्यात आय और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
उन्नत तकनीक, डिजिटल नियंत्रण प्रणाली और पर्यावरणीय मानकों के पालन के कारण जामनगर पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी माना जाता है। यह भारत को विश्व पेट्रोकेमिकल मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
2. पानीपत (हरियाणा):-
पानीपत हरियाणा राज्य में स्थित उत्तर भारत का एक प्रमुख रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल केंद्र है। यहाँ स्थित पानीपत रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का संचालन Indian Oil Corporation (IOCL) द्वारा किया जाता है। यह भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन एवं रिफाइनिंग कंपनी है।
पानीपत कॉम्प्लेक्स की विशेषता इसकी नाफ्था क्रैकर इकाई है, जो एथिलीन और प्रोपिलीन जैसे आधारभूत पेट्रोकेमिकल्स का उत्पादन करती है। इन्हीं रसायनों से पॉलीइथिलीन, पॉलीप्रोपिलीन और अन्य पॉलिमर तैयार किए जाते हैं, जो प्लास्टिक, पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल, वस्त्र एवं उपभोक्ता उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग होते हैं।
यह कॉम्प्लेक्स राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और उत्तर भारत के औद्योगिक बाजारों के निकट स्थित है, जिससे तैयार उत्पादों की आपूर्ति सुगम होती है। साथ ही, यह क्षेत्र रेल और सड़क नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
पानीपत पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स ने क्षेत्रीय आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आधुनिक तकनीक, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय मानकों के पालन के कारण यह भारत के प्रमुख एकीकृत पेट्रोकेमिकल परिसरों में गिना जाता है।
3. दाहेज (गुजरात):-
दाहेज गुजरात राज्य के भरूच (Bharuch) जिले में खंभात की खाड़ी (Gulf of Khambhat) के तट पर स्थित है। इसकी समुद्री स्थिति इसे एक प्रमुख औद्योगिक और बंदरगाह केंद्र बनाती है। यहाँ गहरे पानी का बंदरगाह (Deep Draft Port) उपलब्ध है, जिससे बड़े जहाज सीधे कच्चा माल और तैयार माल का परिवहन कर सकते हैं।
अर्थात Dahej क्षेत्र को PCPIR (Petroleum, Chemicals and Petrochemical Investment Region) के रूप में विकसित किया गया है। यह क्लस्टर आधारित औद्योगिक मॉडल का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहाँ LNG टर्मिनल, बंदरगाह सुविधा और अनेक केमिकल इकाइयाँ स्थित हैं। यह भारत के सबसे बड़े निवेश आकर्षण क्षेत्रों में से एक है।
4. हल्दिया (पश्चिम बंगाल):-
हल्दिया पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले में स्थित एक प्रमुख औद्योगिक एवं पेट्रोकेमिकल केंद्र है। यहाँ Haldia Petrochemicals Limited कार्यरत है, जो पॉलीइथिलीन, पॉलीप्रोपिलीन तथा अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों का निर्माण करती है। हल्दिया बंदरगाह (Haldia Dock Complex) की उपलब्धता के कारण कच्चे माल का आयात और तैयार उत्पादों का निर्यात सुगम है। यह पूर्वी एवं उत्तर-पूर्वी भारत के लिए पेट्रोकेमिकल आपूर्ति का महत्वपूर्ण आधार है तथा क्षेत्रीय औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
5. हजीरा (गुजरात):-
हजीरा गुजरात राज्य के सूरत जिले में अरब सागर के तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं पेट्रोकेमिकल केंद्र है। इसकी तटीय स्थिति और विकसित बंदरगाह सुविधा इसे कच्चे माल के आयात तथा तैयार उत्पादों के निर्यात के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है।
हजीरा में गैस आधारित पेट्रोकेमिकल इकाइयाँ प्रमुख हैं। यहाँ Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) की गैस प्रसंस्करण इकाइयाँ तथा अन्य निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ कार्यरत हैं। प्राकृतिक गैस की उपलब्धता के कारण यहाँ एथिलीन, प्रोपिलीन तथा विभिन्न पॉलिमर उत्पादों का निर्माण होता है।
हजीरा औद्योगिक क्षेत्र दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC) से जुड़ा हुआ है, जिससे परिवहन एवं लॉजिस्टिक सुविधाएँ मजबूत हुई हैं। यह क्षेत्र गुजरात को भारत का अग्रणी पेट्रोकेमिकल हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसके अतिरिक्त, हजीरा क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रबंधन, आधुनिक अवसंरचना तथा ऊर्जा आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए आकर्षक केंद्र बना हुआ है।
पेट्रो-केमिकल कॉम्प्लेक्स के प्रमुख उत्पाद:
✍️ प्लास्टिक और पॉलिमर: पॉलीइथाइलीन (PE), पॉलीप्रोपाइलीन (PP), पॉलिविनाइल क्लोराइड (PVC), पॉलीस्टाइनिन (PS)।
✍️ सिंथेटिक फाइबर: पॉलिएस्टर, नायलॉन, ऐक्रेलिक (कपड़ा उद्योग के लिए)।
✍️ सिंथेटिक रबर: टायर और ऑटोमोबाइल पार्ट्स के लिए।
✍️ औद्योगिक रसायन: एथिलीन ग्लाइकॉल, एसिड, एसीटोन, और सॉल्वैंट्स।
✍️ अन्य: उर्वरक (यूरिया), डिटर्जेंट, पेंट, और डिटर्जेंट के लिए कच्चे माल।
भारत के प्रमुख पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के स्थान चयन के कारक:
(i) कच्चे माल की उपलब्धता – नेफ्था, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल की निकटता उत्पादन लागत को कम करती है।
(ii) तटीय स्थिति एवं बंदरगाह – आयात–निर्यात सुविधा हेतु गहरे पानी के बंदरगाह आवश्यक होते हैं (जैसे गुजरात तट)।
(iii) ऊर्जा संसाधन – पेट्रोकेमिकल उद्योग ऊर्जा-गहन है, इसलिए बिजली एवं गैस की निरंतर आपूर्ति जरूरी है।
(iv) जल उपलब्धता – शीतलन (Cooling) एवं औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त जल की आवश्यकता होती है।
(v) परिवहन सुविधा – सड़क, रेल, पाइपलाइन एवं बंदरगाह नेटवर्क से जुड़ाव लागत घटाता है।
(vi) बाजार की निकटता – तैयार उत्पादों की खपत के लिए बड़े औद्योगिक एवं शहरी बाजार महत्वपूर्ण हैं।
(vii) सरकारी नीतिगत समर्थन – PCPIR /Petroleum, Chemicals and Petrochemicals Investment Region, औद्योगिक कॉरिडोर और कर प्रोत्साहन स्थान चयन को प्रभावित करते हैं।
(viii) भूमि एवं अवसंरचना – बड़े भू-क्षेत्र और विकसित औद्योगिक ढाँचा आवश्यक होता है।
आर्थिक महत्व:
✍️ विनिर्माण GDP में महत्वपूर्ण योगदान।
✍️ प्लास्टिक, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, पैकेजिंग एवं फार्मा उद्योग को कच्चा माल उपलब्ध कराना।
✍️ निर्यात आय में वृद्धि।
✍️ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन।
✍️ MSME / Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises क्षेत्र को किफायती कच्चा माल।
✍️ औद्योगिक आत्मनिर्भरता और आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा।
सरकारी नीतियाँ:
✍️ PCPIR (Petroleum, Chemicals & Petrochemical Investment Region) नीति।
✍️ मेक इन इंडिया पहल।
✍️ आत्मनिर्भर भारत अभियान।
✍️ उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ।
✍️ विदेशी निवेश (FDI) को प्रोत्साहन।
✍️ औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC आदि) का विकास।
पर्यावरणीय प्रभाव:
✍️ वायु प्रदूषण (SOx, NOx, CO₂ उत्सर्जन)।
✍️ जल प्रदूषण एवं रासायनिक अपशिष्ट।
✍️ ठोस एवं खतरनाक कचरा।
✍️ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन।
✍️ समुद्री एवं तटीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव।
✍️ समाधान हेतु ग्रीन टेक्नोलॉजी और रीसाइक्लिंग की आवश्यकता।
चुनौतियाँ:
✍️ कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव।
✍️ उच्च पूंजी निवेश की आवश्यकता।
✍️ वैश्विक प्रतिस्पर्धा।
✍️ पर्यावरणीय नियमों का कड़ाई से पालन।
✍️ तकनीकी निर्भरता और नवाचार की कमी।
✍️ प्लास्टिक उपयोग पर वैश्विक प्रतिबंधों का प्रभाव।
भविष्य की संभावनाएँ:
✍️ Oil-to-Chemicals (O2C) मॉडल का विस्तार।
✍️ स्पेशलिटी केमिकल्स उत्पादन में वृद्धि।
✍️ बायो-पेट्रोकेमिकल्स का विकास।
✍️ निर्यात उन्मुख उत्पादन रणनीति।
✍️ डिजिटल ऑटोमेशन और ऊर्जा दक्षता।
✍️ सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन टेक्नोलॉजी को अपनाना।
निष्कर्ष:
पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भारत की औद्योगिक संरचना के महत्वपूर्ण आधार हैं। ये न केवल आर्थिक विकास को गति देते हैं, बल्कि रोजगार, निर्यात और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को भी सुदृढ़ करते हैं। उचित नीति, पर्यावरण संतुलन और तकनीकी नवाचार के माध्यम से भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
