BIHAR CET BEd Examination 2025 QUESTION BOOKLET PAPER

BIHAR CET BEd Examination 2025

QUESTION BOOKLET PAPER



Bihar BEd Exam QUESTION BOOKLET PAPER

       बिहार बैचलर ऑफ एजुकेशन कंबाइंड एंट्रेंस टेस्ट (बिहार बीएड सीईटी) 2025 की परीक्षा 28 मई को ऑफलाइन मोड में सम्पन्न हुआ। यह परीक्षा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू), दरभंगा द्वारा प्रत्येक वर्ष बिहार के विभिन्न परीक्षा केन्द्रों पर ली जाती है। दो वर्षीय बैचलर ऑफ एजुकेशन (बी.एड.) कार्यक्रम में प्रवेश के लिए इस एंट्रेंस टेस्ट का उद्देश्य बिहार के 350 से अधिक सरकारी और निजी कॉलेजों में लगभग 36,000 से अधिक सीटें भरना है

      इस परीक्षा की पैटर्न और अंको की योजना जानने के लिए नीचे दी गई तालिका को ध्यानपूर्वक देखने से ही पता चलता है कि यह प्रश्न पत्र चार खंडों में विभाजित किया गया है, जिसमें 120 अंकों के लिए 120 बहुविकल्पीय प्रश्न शामिल हैं।


New Pattern of Bihar BEd Exam

Subjects Number of Questions Total Marks
General English Comprehension (Regular Mode)
Or General Sanskrit Comprehension (Shiksha Shastri)
15 15
General Hindi 15 15
Logical & Analytical Reasoning 25 25
Teaching-Learning Environment in Schools 25 25
General Awareness 40 40

Bihar B.Ed. Common Entrance Test (CET-BED)-2025 का QUESTION BOOKLET PAPER का पीडीएफ देखने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर क्लिक करें। 

CET BEd Examination 2025 QUESTION BOOKLET PAPER

BPSC 70th Mains Solved Optional Question Paper 2025

BPSC 70th Mains

Solved Optional Question Paper 2025

Geography (भूगोल)



1. Boundary between which of the following countries is not formed by a river?

(A) Argentina and Paraguay

(B) India and Sri Lanka

(C) Zambia and Zimbabwe

(D) Colombia and Venezuela

निम्नलिखित में से किन देशों के बीच की सीमा नदी द्वारा नहीं बनती है?

(A) अर्जेंटीना और पैराग्वे

(B) भारत और श्रीलंका

(C) जाम्बिया और ज़िम्बाब्वे

(D) कोलंबिया और वेनेजुएला

[read more] (B) भारत और श्रीलंका [/read]

2. Which of the following Sea has the highest salinity?

(A) Aral Sea

(B) Caspian Sea

(C) Dead Sea

(D) Black Sea

निम्नलिखित में से किस सागर में सर्वाधिक लवणता है?

(A) अरल सागर

(B) कैस्पियन सागर

(C) मृत सागर

(D) काला सागर

[read more] (C) मृत सागर [/read]

3. More than 50% of the population in India will be urban by which of the following years as per the projections of the Government of India?

(A) 2035

(B) 2050

(C) 2055

(D) 2040

भारत सरकार के अनुमान के अनुसार निम्नलिखित में से किस वर्ष तक भारत की 50% से अधिक जनसंख्या शहरी हो जाएगी?

(A) 2035

(B) 2050

(C) 2055

(D) 2040

[read more] (B) 2050 [/read]

4. Which among the following states had the population density higher than the national average in the Census 2011?

(A) Gujarat

(B) Karnataka

(C) Maharashtra

(D) Jharkhand

जनगणना 2011 में निम्नलिखित में से किस राज्य का जनसंख्या घनत्व राष्ट्रीय औसत से अधिक था?

(A) गुजरात

(B) कर्नाटक

(C) महाराष्ट्र

(D) झारखंड

[read more] (D) झारखंड [/read]

5. Black soil is deficient in which of the following?

(A) Calcium

(B) Potash

(C) Phosphorous

(D) Magnesium

काली मिट्टी में निम्नलिखित में से किसकी कमी होती है?

(A) कैल्शियम

(B) पोटाश

(C) फॉस्फोरस

(D) मैग्नीशियम

[read more] (C) फॉस्फोरस [/read]

6. Concentric Zone Model of Internal Structure of Cities was proposed in which of the following years?

(A) 1909

(B) 1929

(C) 1939

(D) 1919

शहरों की आंतरिक संरचना का संकेन्द्रीय क्षेत्र मॉडल निम्नलिखित में से किस वर्ष में प्रस्तावित किया गया था?

(A) 1909

(B) 1929

(C) 1939

(D) 1919

[read more] (B) 1929 [/read]

7. When did the Governing council of the NITI Ayog came into effect?

(A) January 2014

(B) January 2015

(C) February 2015

(D) February 2014

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल कब लागू हुई?

(A) जनवरी 2014

(B) जनवरी 2015

(C) फरवरी 2015

(D) फरवरी 2014

[read more] (C) फरवरी 2015 [/read]

8. Who among the following is considered to be the founder of Human Geography?

(A) Paul Vidal de la Blache

(B) Richard Hartshorne

(C) Oscar Peschel

(D) None of the above

निम्नलिखित में से किसे मानव भूगोल का संस्थापक माना जाता है?

(A) पॉल वाइडल डी ला ब्लॉश

(B) रिचर्ड हार्टशोर्न

(C) ऑस्कर पेशेल

(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

[read more] (A) पॉल वाइडल डी ला ब्लॉश [/read]

9. What is the name of India’s first cloned cow?

(A) Ganga

(B) Kamdhenu

(C) Nandini

(D) Gauri

भारत की पहली क्लोन गाय का क्या नाम था?

(A) गंगा

(B) कामधेनु

(C) नंदिनी

(D) गौरी

[read more] (A) गंगा [/read]

10. Which one of the following is not a landform?

(A) Meander

(B) Pediments

(C) Playas

(D) Moraine

निम्नलिखित में से कौन-सा एक स्थलाकृति नहीं है?

(A) विसर्प

(B) पेडिमेंट

(C) प्लाया

(D) मोरेन/हिमोढ़

[read more] (D) मोरेन/हिमोढ़ [/read]

11. Which country currently holds possession of the Island of Diego Garcia, located in the Indian Ocean?

(A) England

(B) Spain

(C) United States of America

(D) Portugal

हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर वर्तमान में किस देश का अधिकार है?

(A) इंग्लैंड

(B) स्पेन

(C) संयुक्त राज्य अमेरिका

(D) पुर्तगाल

[read more] (A) इंग्लैंड [/read]

12. Which one of the following industrial city is not situated in the Ahmadabad-Vadodra Industrial region?

(A) Anand

(B) Kheda

(C) Krishnanagar

(D) Ankleshwar

निम्नलिखित में से कौन-सा औद्योगिक शहर अहमदाबाद-वडोदरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित नहीं है?

(A) आनंद

(B) खेड़ा

(C) कृष्णानागर

(D) अंकलेश्वर

[read more] (C) कृष्णानागर [/read]

13. Which of the following lakes do not form international boundary between Canada and the United States of America?

(A) Huron

(B) Ontario

(C) Superior

(D) Michigan

निम्नलिखित में से कौन-सी झील कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं बनाती है?

(A) ह्यूरॉन

(B) ओंटारियो

(C) सुपीरियर

(D) मिशिगन

[read more] (D) मिशिगन [/read]

14. At which of the following latitudes is the smallest change in temperature of oceanic water is observed with increasing depth?

(A) North Pole

(B) Tropic of Capricorn

(C) Equator

(D) Tropic of Cancer

निम्नलिखित में से किस अक्षांश पर बढ़ती गहराई के साथ महासागरीय जल के तापमान में सबसे कम परिवर्तन देखा जाता है?

(A) उत्तरी ध्रुव

(B) मकर रेखा

(C) भूमध्य रेखा

(D) कर्क रेखा

[read more] (C) भूमध्य रेखा [/read]

15. Which of the following city in Bihar was not included in the 100 cities selected by Government of India as part of Smart City Mission?

(A) Bihar Sharif

(B) Muzaffarpur

(C) Nalanda

(D) Bhagalpur

बिहार के निम्नलिखित में से कौन-सा शहर भारत सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चुने गए 100 शहरों में शामिल नहीं था?

(A) बिहार शरीफ

(B) मुजफ्फरपुर

(C) नालन्दा

(D) भागलपुर

[read more] (C) नालन्दा [/read]

16. Who proposed the Sequential Stage Model of Urbanisation?

(A) Carter

(B) Evans

(C) Gibbs

(D) Clark

शहरीकरण का अनुक्रमिक चरण मॉडल किसने प्रस्तावित किया?

(A) कार्टर

(B) इवांस

(C) गिब्स

(D) क्लार्क

[read more] शहरीकरण का अनुक्रमिक चरण मॉडल “वैन डेन बर्ग” (van den Berg) द्वारा प्रस्तावित किया गया था। इस मॉडल में शहरी विकास को चार चरणों में विभाजित किया गया है:- शहरीकरण, उपनगरीकरण, विशहरीकरण और पुनः शहरीकरण [/read]

17. What is the average annual rainfall in region of Dry deciduous forest in India?

(A) 30-50 cm

(B) 70-100 cm

(C) 100-120 cm

(D) 50-70 cm

भारत में शुष्क पर्णपाती वन के क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा कितनी है?

(A) 30-50 सेमी

(B) 70-100 सेमी

(C) 100-120 सेमी

(D) 50-70 सेमी

[read more] (B) 70-100 सेमी [/read]

18. Highest temperatures are found at which among the following in the atmosphere?

(A) Tropopause

(B) Mesosphere

(C) Mesopause

(D) Stratopause

वायुमंडल में निम्नलिखित में से कहाँ उच्चतम तापमान पाया जाता है?

(A) ट्रोपोपॉज

(B) मीसोस्फीयर

(C) मेसोपॉज

(D) स्ट्रैटोपॉज

[read more] (D) स्ट्रैटोपॉज [/read]

19. Which of the following is the highest peak of the Eastern Ghats?

(A) Anai Mudi

(B) Dhupgarh

(C) Mahendragiri

(D) Doda Betta

निम्नलिखित में से पूर्वी घाट की सबसे ऊंची चोटी कौन-सी है?

(A) अनई मुडी

(B) धूपगढ़

(C) महेन्द्रगिरी

(D) डोडा बेट्टा

[read more] (C) महेन्द्रगिरी [/read]

20. Who was the author of the book ‘Civilization and Climate’ that was published in the year 1915?

(A) Gilbert White

(B) Peter Gould

(C) Wolpert

(D) Ellsworth Huntington

वर्ष 1915 में प्रकाशित पुस्तक ‘सिविलाइज़ेशन एंड क्लाइमेट’ के लेखक कौन थे?

(A) गिल्बर्ट व्हाइट

(B) पीटर गोल्ड

(C) वोल्पर्ट

(D) एल्सवर्थ हंटिंगटन

[read more] (D) एल्सवर्थ हंटिंगटन [/read]

21. Which one of the following is not a Federal State?

(A) Australia

(B) Saudi Arabia

(C) United States of America

(D) Canada

निम्नलिखित में से कौन-सा एक संघीय राज्य नहीं है?

(A) ऑस्ट्रेलिया

(B) सऊदी अरब

(C) संयुक्त राज्य अमेरिका

(D) कनाडा

[read more] (B) सऊदी अरब [/read]

22. Which pair of river and the dam built on it is not correctly matched?

(A) Cauvery-Mettur

(B) Chenab-Salal Project

(C) Chandrabhaga-Pravara

(D) Chambal-Gandhi Sagar

नदी और उस पर बने बाँध का कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?

(A) कावेरी-मेट्दूर

(B) चिनाब-सलाल परियोजना

(C) चन्द्रभागा-प्रवरा

(D) चंबल-गांधी सागर

[read more] (C) चन्द्रभागा-प्रवरा [/read]

23. What percentage of earth’s water is stored as groundwater?

(A) Less than 1 percent

(B) 2 to 4 percent

(C) More than 4 percent

(D) 1 to 2 percent

पृथ्वी का कितना प्रतिशत जल भूजल के रूप में संग्रहित है?

(A) 1 प्रतिशत से कम

(B) 2 से 4 प्रतिशत

(C) 4 प्रतिशत से ज्यादा

(D) 1 से 2 प्रतिशत

[read more] (A) 1 प्रतिशत से कम- पृथ्वी पर कुल जल का लगभग 0.7% भूजल के रूप में संग्रहित है। [/read]

24. Which of the following city is not situated on the Rhine waterway in Europe?

(A) Basel

(B) Rotterdam

(C) Strasburg

(D) Berlingo

निम्नलिखित में से कौन-सा शहर यूरोप में राइन जलमार्ग पर स्थित नहीं है?

(A) बासेल

(B) रॉटरडैम

(C) स्ट्रासबर्ग

(D) बर्लिन

[read more] (D) बर्लिन [/read]

25. What is the name given to the type of farming in which crops are combined with livestock?

(A) Commercial farming

(B) Mixed farming

(C) Subsistence farming

(D) Extensive farming

खेती के उस प्रकार को क्या नाम दिया गया है जिसमें फसलों का पशुधन के साथ संयोजन किया जाता है?

(A) वाणिज्यिक खेती

(B) मिश्रित खेती

(C) जीविका खेती व

(D) व्यापक खेती

[read more] (B) मिश्रित खेती [/read]

26. Which one of the following is the third stage in human evolution?

(A) Homo Sapiens

(B) Homo Habilis

(C) Homo Erectus

(D) None of the above

निम्नलिखित में से कौन सा मानव विकास का तीसरा चरण है?

(A) होमो सेपियन्स

(B) होमो हैबिलिस

(C) होमो इरेक्टस

(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

[read more] (C) होमो इरेक्टस [/read]

27. National Waterway Number-10 (NW-10) in India has been developed on which of the following river?

(A) Agniyar

(B) Amaravati

(C) Arvari

(D) Amba

भारत में राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-10 (NW-10) निम्नलिखित में से किस नदी पर विकसित किया गया है?

(A) अगनियार

(B) अमरावती

(C) अरवारी

(D) अंबा

[read more] (D) अंबा -राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-10 (NW-10) अंबा नदी पर विकसित किया गया है, जो महाराष्ट्र राज्य में स्थित है। [/read]

28. Which of the following is a Warm Ocean Current?

(A) Alaska Current

(B) California Current

(C) Oyashio Current

(D) Benguela Current

निम्नलिखित में से कौन-सा गर्म महासागरीय धारा है?

(A) अलास्का धारा

(B) कैलिफोर्निया धारा

(C) ओयाशियो धारा

(D) बेंगुएला धारा

[read more] (A) अलास्का धारा [/read]

29. As per the Census of India classification, what is the population of Class-I (One) city in India?

(A) More than 1,00,000

(B) 10,000 to 19,999

(C) Less than 5000

(D) 50,000 to 99,999

भारत की जनगणना द्वारा वर्गीकरण के अनुसार, भारत में वर्ग-। (एक) शहर की जनसंख्या कितनी है?

(A) 1,00,000 से अधिक

(B) 10,000 से 19,999

(C) 5,000 से भी कम

(D) 50,000 से 99,999

[read more] (A) 1,00,000 से अधिक [/read]

30. Who used the term ‘Megalopolis’ for the first time?

(A) Jean Gottman

(B) Patrick Geddes

(C) Victor Jones

(D) Nelson

‘मेगालोपोलिस’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया था?

(A) जीन गॉटमैन

(B) पैट्रिक गेडेस

(C) विक्टर जोन्स

(D) नेल्सन

[read more] (A) जीन गॉटमैन [/read]

31. Indira Gandhi Canal starts from which of the following places?

(A) Ambala in Haryana

(B) Harike in Punjab

(C) Solan in Himachal Pradesh

(D) Ganganagar in Rajasthan

इंदिरा गांधी नहर निम्नलिखित में से किस स्थान से शुरू होती है?

(A) हरियाणा में अम्बाला

(B) पंजाब में हरिके

(C) हिमाचल प्रदेश में सोलन

(D) राजस्थान में गंगानगर

[read more] (B) पंजाब में हरिके- इंदिरा गांधी नहर हरिके बैराज (पंजाब) से शुरू होती है, जो सतलज और ब्यास नदियों के संगम पर स्थित है। [/read]

32. Which of the following inert gases is found in smallest volume in the atmosphere?

(A) Argon

(B) Neon

(C) Xenon

(D) Helium

निम्नलिखित में से कौन-सी अक्रिय गैस वायुमंडल में सबसे कम मात्रा में पाई जाती है?

(A) ऑर्गन

(B) नियोन

(C) जेनॉन

(D) हीलियम

[read more] (C) जेनॉन [/read]

33. The National Population Policy of the year 2000 in India had how many Demographic Goals?

(A) 04

(B) 14

(C) 18

(D) 08

भारत में वर्ष 2000 की राष्ट्रीय जनसंख्या नीति में कितने जनसांख्यिकीय लक्ष्य थे?

(A) 04

(B) 14

(C) 18

(D) 08

[read more]  (B) 14 [/read]

34. Which of the following is not an example of atmospheric hazard?

(A) Drought

(B) Frost

(C) Hailstorm

(D) Flood

निम्नलिखित में से कौन-सा वायुमंडलीय आपदा का उदाहरण नहीं है?

(A) सूखा

(B) पाला

(C) ओलावृष्टि

(D) बाढ़

[read more] (D) बाढ़ [/read]

35. Radcliffe Line marks India’s border with which of the following countries?

(A) Bhutan

(B) Nepal

(C) Pakistan

(D) China

रेडक्लिफ रेखा निम्नलिखित में से किस देश के साथ भारत की सीमा चिह्नित करती है?

(A) भूटान

(B) नेपाल

(C) पाकिस्तान

(D) चीन

[read more] (C) पाकिस्तान [/read]

36. Who authored the landmark book ‘Geography of Peace’?

(A) Alexander de Seversky

(B) Michael Woods

(C) Nicholas Spykman

(D) Halford Mackinder

ऐतिहासिक पुस्तक ‘ज्योग्राफी ऑफ पीस’ के लेखक कौन हैं?

(A) अलेक्जेंडर डी सेवरस्की

(B) माइकल वुड्स

(C) निकोलस स्पाईकमैन

(D) हेलफोर्ड मैकिंडर

[read more] (C) निकोलस स्पाईकमैन [/read]

37. Which of the following Ocean Current moves from the equator towards the poles?

(A) Auglhas Current

(B) Oyashio Current

(C) West Australia Current

(D) Canaries Current

निम्नलिखित में से कौन-सी महासागरीय धारा भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर चलती है?

(A) अगुलहास धारा

(B) ओयाशियो धारा

(C) पश्चिम ऑस्ट्रेलियाई धारा

(D) कैनरी धारा

[read more] (A) अगुलहास धारा [/read]

38. State Reorganisation Act in India was passed in which of the following years?

(A) 1947

(B) 1950

(C) 1956

(D) 1949

भारत में राज्य पुनर्गठन अधिनियम निम्नलिखित में से किस वर्ष पारित किया गया था?

(A) 1947

(B) 1950

(C) 1956

(D) 1949

[read more] (C) 1956 [/read]

39. Who among the following proposed the Least Cost Theory of Industrial Localion?

(A) Christaller

(B) Smith

(C) Weber

(D) Losch

निम्नलिखित में से किसने औद्योगिक स्थान का न्यूनतम लागत सिद्धांत प्रस्तावित किया?

(A) क्रिस्टेलर

(B) स्मिथ

(C) वेबर

(D) लॉस्च

[read more] (C) वेबर [/read]

40. Tropical Cyclones are termed as Willy-Willies in which of the following regions?

(A) East Australia

(B) East South Africa

(C) West South Africa

(D) West Australia

निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को विली-विलीज कहा जाता है?

(A) पूर्वी ऑस्ट्रेलिया

(B) पूर्वी दक्षिण अफ्रीका

(C) पश्चिम दक्षिण अफ्रीका

(D) पश्चिम ऑस्ट्रेलिया

[read more] (D) पश्चिम ऑस्ट्रेलिया [/read]

41. River basin of which of the following river is situated in eastern most part of Bhar?

(A) Baghmati

(B) Kosi

(C) Mahananda

(D) Kamla

निम्नलिखित में से किस नदी की नदी बेसिन बिहार के सबसे पूर्वी भाग में स्थित है?

(A) बागमती

(B) कोसी

(C) महानंदा

(D) कमला

[read more] (C) महानंदा [/read]

42. Which one of the following is not considered important for classification of human races?

(A) Colour of Skin

(B) Shape of Head

(C) Type of Hair

(D) Intelligence

निम्नलिखित में से कौन-सा मानव प्रजाति के वर्गीकरण के लिए महत्वपूर्ण नहीं माना जाता है?

(A) त्वचा का रंग

(B) सिर का आकार

(C) बालों का प्रकार

(D) बुद्धिमत्ता

[read more] (D) बुद्धिमत्ता [/read]

43. Which among the following is not among the top three States with largest number of tribal populations as per the Census 2011?

(A) Madhya Pradesh

(B) Meghalaya

(C) Odisha

(D) Maharashtra

जनगणना 2011 के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य सबसे अधिक जनजातीय आबादी वाले शीर्ष तीन राज्यों में से नहीं है?

(A) मध्य प्रदेश

(B) मेघालय

(C) ओड़िशा

(D) महाराष्ट्र

[read more] (B) मेघालय [/read]

44. Which one of the following is not cultivated as part of plantation Agriculture?

(A) Coffee

(B) Rubber

(C) Tea

(D) Cotton

निम्नलिखित में से किसकी खेती वृक्षारोपण कृषि के भाग के रूप में नहीं की जाती है?

(A) कॉफी

(B) रबड़

(C) चाय

(D) कपास

[read more] (D) कपास [/read]

45. Which of the following Railway Zone in India along with its headquarter is not correctly matched?

(A) South Eastern-Kolkata

(B) South East Central-Bilaspur

(C) South Western-Mumbai CST

(D) South Central-Secunderabad

भारत में निम्नलिखित में से कौन-सा रेल्वे ज़ोन अपने मुख्यालय से सुमेलित नहीं है?

(A) दक्षिण पूर्वी-कोलकाता

(B) दक्षिण पूर्व मध्य-बिलासपुर

(C) दक्षिण पश्चिमी-मुंबई सीएसटी

(D) दक्षिण मध्य-सिकंदराबाद

[read more] (C) दक्षिण पश्चिमी-मुंबई सीएसटी [/read]

46. Carlsberg Ridge is situated in which of the following region of the Indian Ocean?

(A) North East Indian Ocean

(B) South West Indian Ocean

(C) South East Indian Ocean

(D) North West Indian Ocean

कार्ल्सबर्ग रिज, हिंद महासागर के निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में स्थित है?

(A) उत्तर पूर्व हिंद महासागर

(B) दक्षिण पश्चिम हिंद महासागर

(C) दक्षिण पूर्व हिंद महासागर

(D) उत्तर पश्चिम हिन्द महासागर

[read more] (D) उत्तर पश्चिम हिन्द महासागर [/read]

47. As per the National Commission on Agriculture, which one of the following is not a category of Social Forestry?

(A) Agro Forestry

(B) Farm Forestry

(C) Urban Forestry

(D) Commercial Forestry

राष्ट्रीय कृषि आयोग के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा सामाजिक वानिकी की श्रेणी नहीं है?

(A) कृषि वानिकी

(B) फार्म वानिकी

(C) शहरी वानिकी

(D) वाणिज्यिक वानिकी

[read more] (D) वाणिज्यिक वानिकी [/read]

48. Udaipur Wildlife Sanctuary is situated in which of the following districts of Bihar?

(A) Jamui

(B) East Champaran

(C) West Champaran

(D) Jehanabad

उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य बिहार के निम्नलिखित में से किस जिले में स्थित है?

(A) जमुई

(B) पूर्वी चंपारण

(C) पश्चिमी चंपारण

(D) जहानाबाद

[read more] (C) पश्चिमी चंपारण [/read]

49. Which of the following is mainly responsible for acid rain?

(A) Oxides of Ammonia

(B) Oxides of Chlorine

(C) Oxides of Sulphur

(D) Oxides of Carbon

निम्नलिखित में से कौन-सा अम्लीय वर्षा के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है?

(A) अमोनिया के ऑक्साइड

(B) क्लोरीन के ऑक्साइड

(C) सल्फर के ऑक्साइड

(D) कार्बन के ऑक्साइड

[read more] (C) सल्फर के ऑक्साइड [/read]

50. Which of the following is found in appreciable amount in Laterite soil in India?

(A) Calcium

(B) Potash

(C) Nitrogen

(D) Phosphate

भारत में लैटेराइट मिट्टी में निम्नलिखित में से कौन-सा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है?

(A) कैल्शियम

(B) पोटाश

(C) नाइट्रोजन

(D) फॉस्फेट

[read more] (B) पोटाश [/read]

51. What type of settlement pattem is commonly found at the confluence of two rivers?

(A) Circular

(B) Square

(C) Triangular

(D) Linear

दो नदियों के संगम पर सामान्यतः किस प्रकार का अधिवास प्रतिरूप पाया जाता है?

(A) वृत्ताकार

(B) वर्ग

(C) त्रिकोणीय

(D) रेखीय

[read more] (C) त्रिकोणीय [/read]

52. The decadal growth in Urbanisation was recorded highest in which of the following Census years?

(A) 197100

(B) 1991

(C) 2001

(D) 1981

निम्नलिखित में से किस जनगणना वर्ष में शहरीकरण में दशकीय वृद्धि सबसे अधिक दर्ज की गई थी?

(A) 1971

(B) 1991

(C) 2001

(D) 1981

[read more] (B) 1991 [/read]

53. Which of the following districts in Bihar has significant reserves of Pyrites?

(A) Nawada

(B) Rohtas

(C) Vaishali

(D) Nalanda

बिहार के निम्नलिखित में से किस जिले में पाइराइट का महत्वपूर्ण भंडार है?

(A) नवादा

(B) रोहतास

(C) वैशालीफ

(D) नालन्दा

[read more] (B) रोहतास [/read]

54. Which pair of agricultural products selected for One District One Product by Ministry of Food Processing Industries. Government of India and the corresponding district is not correctly matched ?

(A) Banana-Purnia

(B) Mango-Madhepura

(C) Pineapple-Kishanganj

(D) Litchi-West Champaran

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक जिला एक उत्पाद के लिए चयनित कृषि उत्पादों और संबंधित जिले का कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

(A) केला-पूर्णिया

(B) आम-मधेपुरा

(C) अनानास-किशनगंज

(B) लीची-पश्चिमी चंपारण

[read more] (B) आम-मधेपुरा [/read]

55. Which among the following states in North East India had the highest density of population as per the Census 2011?

(A) Assam

(B) Meghalaya

(C) Mizoram

(D) Manipur

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर पूर्व भारत में निम्नलिखित में से किस राज्य में जनसंख्या का घनत्व सबसे अधिक था?

(A) असम

(B) मेघालय

(C) मिजोरम

(D) मणिपुर

[read more] (A) असम [/read]

56. Which of the following is not a glacial landform?

(A) Cirque

(B) Hom

(C) Lapies

(D) Fiords

निम्नलिखित में से कौन-सा हिमानी स्थलाकृति नहीं है?

(A) सर्क

(B) हॉर्न

(C) लैपीज

(D) फियोर्ड

[read more] (C) लैपीज [/read]

57. Which of the following is not a part of Block level planning?

(A) Mandal Parishad

(B) Panchayat Samiti

(C) Block Panchayat

(D) None of the above

निम्नलिखित में से कौन ब्लॉक स्तरीय नियोजन का हिस्सा नहीं है?

(A) मंडल परिषद

(B) पंचायत समिति

(C) ब्लॉक पंचायत

(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

[read more] (A) मंडल परिषद [/read]

58. Which pair of city and its main industrial output in Chotanagpur Industrial Region is not correctly matched?

(A) Bokaro-Iron and Steel

(B) Khalari-Glass

(C) Sindri-Fertiliser

(D) Chittranjan-Locomotives

छोटानागपुर औद्योगिक क्षेत्र में शहर और उसके मुख्य औद्योगिक उत्पादन का कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

(A) बोकारो-लोहा और इस्पात

(B) खलारी-कांच/ग्लास

(C) सिंदरी-उर्वरक

(D) चित्तरंजन-लोकोमोटिव

[read more] (B) खलारी-कांच/ग्लास [/read]

59. What type agricultural activity was proposed by Johann Heinrich von Thunen in his model to the second ring outside the central city area?

(A) Cattle Rearing

(B) Market Gardens

(C) Wood Production

(D) Intensive Crop Rotation

जोहान हेनरिक वॉन ध्यूनेन ने अपने मॉडल में केंद्रीय शहरी क्षेत्र के बाहर दूसरी रिंग में किस प्रकार की कृषि गतिविधि प्रस्तावित की थी?

(A) पशु पालन

(B) बाजार उद्यान

(C) लकड़ी का उत्पादन

(D) गहन फसल चक्रण

[read more] (C) लकड़ी का उत्पादन [/read]

60. As per the India State of Forest Report 2021, which of the following districts in Bihar has the largest area under scrub?

(A) Gaya

(B) Kaimur

(C) Katihar

(D) Gopalganj

भारत राज्य वन रिपोर्ट 2021 के अनुसार, बिहार में निम्नलिखित में से किस जिले में झाड़ी के अंतर्गत सबसे बड़ा क्षेत्र है?

(A) गया

(B) कैमूर

(C) कटिहार

(D) गोपालगंज

[read more] (B) कैमूर [/read]

61. Which of the following is not an example of Greenhouse gas?

(A) Carbon Dioxide

(B) Methane

(C) Water Vapour

(D) Carbon Monoxide

निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रीनहाउस गैस का उदाहरण नहीं है?

(A) कार्बन डाईऑक्साइड

(B) मीथेन

(C) जल वाष्प

(D) कार्बन मोनोऑक्साइड

[read more] (D) कार्बन मोनोऑक्साइड [/read]

62. Who put forward the ‘Intervening Opportunity Model’ with reference to migration?

(A) E. S. Lee

(B) W. J. Reilly

(C) Wolpert

(D) Stouffer

प्रवासन के संदर्भ में ‘हस्तक्षेप अवसरों का सिद्धांत’ किसने प्रस्तुत किया?

(A) ई. एस. ली

(B) डब्ल्यू. जे. रेली

(C) वोल्पर्ट

(D) स्टॉफर

[read more] (D) स्टॉफर [/read]

63. Which Class of Towns in India holds the highest Urban Population as per the Census 2011?

(A) Class I

(B) Class IV

(C) Class VI

(D) Class II

2011 की जनगणना के अनुसार भारत में किस श्रेणी के शहरों में सबसे अधिक शहरी जनसंख्या है?

(A) श्रेणी ।

(B) श्रेणी IV

(C) श्रेणी VI

(D) श्रेणी ॥

[read more] (A) श्रेणी । [/read]

64. Which of the following soil is found in regions of equatorial rainforests?

(A) Alfisols

(B) Oxisols

(C) Ultisols

(D) Inceptisols

निम्नलिखित में से कौन-सी मिट्टी भूमध्यरेखीय वर्षावनों के क्षेत्रों में पाई जाती है?

(A) अल्फिसोल्स

(B) ऑक्सिसोल्स

(C) अल्टीसोल्स

(D) इन्सेप्टिसोल्स

[read more] (B) ऑक्सिसोल्स [/read]

65. Which among the following Union Territories had the lowest density of population as per the Census 2011?

(A) Andaman and Nicobar Islands

(B) Puducherry

(C) Lakshadweep

(D) Chandigarh

2011 की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित केंद्र शासित प्रदेशों में से किसका जनसंख्या घनत्व सबसे कम था?

(A) अंडमान व निकोबार द्वीप समूह

(B) पुदुचेरी

(C) लक्षद्वीप

(D) चंडीगढ़

[read more] (A) अंडमान व निकोबार द्वीप समूह [/read]

66. India shares its longest international border with which of the following countries?

(A) Bangladesh

(B) Myanmar

(C) Pakistan

(D) China

भारत अपनी सबसे लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा निम्नलिखित में से किस देश के साथ साझा करता है?

(A) बांग्लादेश

(B) म्यांमार

(C) पाकिस्तान

(D) चीन

[read more] (A) बांग्लादेश [/read]

67. Who among the following did not believed in Possibilism?

(A) Carl Ritter

(B) Lucien Febvre

(C) Jean Brunhes

(D) Isiah Bowman

निम्नलिखित में से कौन संभववाद में विश्वास नहीं करता था?

(A) कार्ल रिटर

(B) ल्यूसियन फ्रेब्रे

(C) जीन ब्रूनहेस

(D) ईसायाह बोमन

[read more] (A) कार्ल रिटर [/read]

68. Which pair of city important for paper industry and the state where it is located is not correctly matched?

(A) Amlai-Madhya Pradesh

(B) Chandawar-Uttarakhand

(C) Dalmianagar-Bihar

(D) Billimora-Maharashtra

कागज उद्योग के लिए महत्वपूर्ण शहर और राज्य जहाँ वह स्थित है, का कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

(A) अमलाई- मध्य प्रदेश

(B) चंदावर-उत्तराखंड

(C) डालमियानगर-बिहार

(D) बिलिमोरा-महाराष्ट्र

[read more] (B) चंदावर-उत्तराखंड [/read]

69. Which of the following plains in Bihar is not situated along the international border with Nepal?

(A) Madhubani Plains

(B) Saharsa Plains

(C) Saran Plains

(D) Motihari Plains

बिहार में निम्नलिखित में से कौन-सा मैदान नेपाल के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित नहीं है?

(A) मधुबनी का मैदान

(B) सहरसा का मैदान

(C) सारण का मैदान

(D) मोतिहारी का मैदान

[read more] (C) सारण का मैदान [/read]

70. Which tribal region in the Himalayas is known as the homeland of the Gaddi tribe?

(A) Bharmaur

(B) Mana

(C) Nathu La

(D) Kargil

हिमालय में किस जनजातीय क्षेत्र को गद्दी जनजाति की मातृभूमि के रूप में जाना जाता है?

(A) भरमौर

(B) माणा

(C) नाथू ला

(D) कारगिल

[read more] (A) भरमौर – गद्दी जनजाति को हिमाचल प्रदेश के भरमौर क्षेत्र में अपनी मातृभूमि के रूप में जाना जाता है। [/read]

71. Who gave the concept of Social Darwinism? 

(A) Alfred Hettner

(B) Griffith Taylor

(C) Richthofen

(D) Friedrich Ratzel

सामाजिक डार्विनवाद की अवधारणा किसने दी?

(A) अल्फ्रेड हेटनर

(B) ग्रिफिथ टेलर

(C) रिचथोफ़ेन

(D) फ्रेडरिक रेट्‌जेल

[read more] (A) अल्फ्रेड हेटनर [/read]

72. Which of the following term is used for a condition of fodder shortage due to drought in India?

(A) Jalkal

(B) Trinkal

(C) Akal

(D) None of the above

भारत में सूखे के कारण चारे की कमी की स्थिति के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द प्रयोग किया जाता है? 

(A) जलकाल

(B) त्रिकाल

(C) अकाल

(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

[read more] (C) अकाल [/read]

73. Which among the following are the primary consumers in an ecosystem?

(A) Herbivores

(B) Omnivores

(C) Canivores

(D) None of the above

निम्नलिखित में से कौन-सा एक पारिस्थितिकी तंत्र में प्राथमिक उपभोक्ता हैं?

(A) शाकाहारी

(B) सर्वाहारी

(C) मांसाहारी

(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

[read more] (A) शाकाहारी [/read]

74. Which one of the following rivers forms the Eastern boundary of the Ganga Plains?

(A) Brahmaputra

(B) Meghna

(C) Teesta

(D) Hooghly

निम्नलिखित में से कौन-सी नदी गंगा के मैदान की पूर्वी सीमा बनाती है?

(A) ब्रह्मपुत्र

(B) मेघना

(C) तीस्ता

(D) हुगली

[read more] (B) मेघना- मेघना नदी गंगा के मैदान के पूर्वी भाग में बहती है और यह गंगा के मैदान की पूर्वी सीमा बनाती है।  [/read]

75. Which of the following statements with reference to Savanna Biome is not correct?

(A) Cycle of rainy and dry season

(B) Fire occurs frequently

(C) Trees are short and are evergreen

(D) Grazing animals are commonly found

सवाना बायोम के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

(A) वर्षा एवं शुष्क ऋतु का चक्र

(B) अक्सर आग लगती रहती है

(e) पेड़ ऊंचाई में छोटे और सदाबहार होते हैं

(D) चरने वाले जानवर आमतौर पर पाए जाते हैं

[read more] (e) पेड़ ऊंचाई में छोटे और सदाबहार होते हैं [/read]

76. Gutenberg discontinuity is found between which of the following layers within the earth’s interior?

(A) Crust and Upper Mantle

(B) Lower Mantle and Outer Core

(C) Outer Core and Inner Core

(D) Upper Mantle and Lower Mantle

गुटेनबर्ग असंबद्धता पृथ्वी के आंतरिक भाग में निम्नलिखित में से किन परतों के बीच पाई जाती है?

(A) भूपर्पटी और ऊपरी मेंटल

(B) निचला मेंटल और बाहरी कोर

(C) बाहरी कोर और आंतरिक कोर

(D) ऊपरी मेंटल और निचला मेंटल

[read more] (B) निचला मेंटल और बाहरी कोर [/read]

77. Who among the following used the Is Gravity Model to explain migration?

(A) Harris

(B) Stewart

(C) Zipf

(D) Peterson

निम्नलिखित में से किसने प्रवासन को समझाने के लिए ग्रेविटी मॉडल का उपयोग किया?

(A) हैरिस

(B) स्टीवर्ट

(C) जिप्फ

(D) पीटरसन

[read more] (B) स्टीवर्ट [/read]

78. Which of the following is not a port of the North Atlantic Ocean?

(A) Casablanca

(B) Lagos

(C) Luanda

(D) Dakar

निम्नलिखित में से कौन उत्तरी अटलांटिक महासागर का बंदरगाह नहीं है?

(A) कासाब्लांका

(B) लागोस

(C) लुआंडा

(D) डकार

[read more] (C) लुआंडा [/read]

79. Which of the following Tectonic Plate is not located in Pacific Ocean?

(A) Caroline Plate

(B) Nazca Plate

(C) Scotia Plate

(D) Cocos Plate

निम्नलिखित में से कौन-सी विवर्तनिक (टेक्टोनिक) प्लेट प्रशांत महासागर में स्थित नहीं है?

(A) कैरोलीन प्लेट

(B) नाज्का प्लेट

(C) स्कोश्या प्लेट

(D) कोकोस प्लेट

[read more] (C) स्कोश्या प्लेट [/read]

80. Hill Area Development Programmes was initiated during which of the following Five Year Plan?

(A) Third Five Year Plan

(B) Fifth Five Year Plan

(C) Seventh Five Year Plan

(D) Fourth Five Year Plan

पहाड़ी क्षेत्र विकास कार्यक्रम निम्नलिखित में से किस पंचवर्षीय योजना के दौरान शुरू किए गए थे?

(A) तीसरी पंचवर्षीय योजना

(B) पाँचवी पंचवर्षीय योजना

(C) सातवीं पंचवर्षीय योजना

(D) चौथी पंचवर्षीय योजना

[read more] (B) पाँचवी पंचवर्षीय योजना [/read]

81. Which one of the following was not part of the Inner Crescent in the Heartland theory proposed by Mackinder?

(A) Manchuria

(B) North Africa

(C) Siberia

(D) Monsoon Asia

मैकिंडर द्वारा प्रस्तावित हार्टलैंड सिद्धांत में निम्नलिखित में से कौन-सा भीतरी वर्धमान (इनर क्रेसेंट) का हिस्सा नहीं था?

(A) मंचूरिया

(B) उत्तरी अफ्रीका

(C) साइबेरिया

(D) मानसून एशिया

[read more] (B) उत्तरी अफ्रीका [/read]

82. Who among the following gave the concept of isotherm?

(A) Alexander von Humboldt

(B) Emmanuel Kant

(C) Ellsworth Huntington

(D) Carl Ritter

निम्नलिखित में से किसने समताप रेखा की अवधारणा दी?

(A) अलक्ज़ेंडर वॉन हम्बोल्ट

(B) इमैनुएल कांट

(C) एल्सवर्थ हंटिंगटन

(D) कार्ल रिटर

[read more] (A) अलक्ज़ेंडर वॉन हम्बोल्ट [/read]

83. Which one of the following is not an important centre for production of Manganese?

(A) Balaghat

(B) Sundergarh

(C) Shivamogga

(D) Ballari

निम्नलिखित में से कौन-सा मैंगनीज के उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र नहीं है?

(A) बालाघाट

(B) सुंदरगढ़

(C) शिवमोगा

(D) बल्लारी

[read more] (C) शिवमोगा [/read]

84. Marine West Coast Climate is found in which of the following regions of the world?

(A) South Africa

(B) South Eastern Australia

(C) South Western Australia

(D) South California

विश्व के निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में समुद्री पश्चिमी तट जलवायु पाई जाती है?

(A) दक्षिण अफ्रीका

(B) दक्षिण पूर्वी ऑस्ट्रेलिया

(C) दक्षिण पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया

(D) दक्षिण कैलिफोर्निया

[read more] (D) दक्षिण कैलिफोर्निया [/read]

85. Which one of the following is not an important centre of Aluminum industry?

(A) Angul

(B) Jamnagar

(C) Jaykaynagar

(D) Belgaum

निम्नलिखित में से कौन-सा एल्युमीनियम उद्योग का एक महत्वपूर्ण केंद्र नहीं है?

(A) अंगुल

(B) जामनगर

(C) जयकैनगर

(D) बेलगाम

[read more] (B) जामनगर [/read]

86. Classification of cities by Harris was based on which of the following aspects?

(A) Area

(B) History

(C) Population

(D) Functionality

हैरिस द्वारा शहरों का वर्गीकरण निम्नलिखित में से किस पहलू पर आधारित था?

(A) क्षेत्रफल

(B) इतिहास

(C) जनसंख्या

(D) कार्यात्मकता

[read more] (D) कार्यात्मकता [/read]

87. What percentage of Carbon is found in Atmosphere?

(A) 10%

(B) 11%

(C) 01%

(D) None of the above

कार्बन का कितना प्रतिशत वायुमंडल में पाया जाता है?

(A) 10%

(B) 11%

(C) 01%

(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

[read more] (D) उपर्युक्त में से कोई नहीं- वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की मात्रा लगभग 0.04% होती है, न कि कार्बन की मात्रा। [/read]

88. The Golden Quadrilateral road network passes through which of the following major port in India?

(A) Mangaluru

(B) Paradip

(C) Vishakhapatnam

(D) Kandla

स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क नेटवर्क भारत में निम्नलिखित में से किस प्रमुख बंदरगाह से होकर गुज़रता है?

(A) मंगलूरु

(B) पारादीप

(C) विशाखापत्तनम

(D) कांडला

[read more] (C) विशाखापत्तनम [/read]

89. Land kept fallow for how many years is termed as Culturable Wasteland?

(A) 1-2 Years

(B) 3-5 Years

(C) More than 5 years

(D) 2-3 Years

कितने वर्षों तक परती पड़ी भूमि को कृषि योग्य बंजर भूमि कहा जाता है?

(A) 1-2 वर्ष

(B) 3-5 वर्ष

(C) 5 वर्ष से अधिक

(D) 2-3 वर्ष

[read more] (C) 5 वर्ष से अधिक [/read]

90. Which of the following is not found below the surface of the earth?

(A) Batholith

(B) Lacolith

(C) Lapolith

(D) Caldera

निम्नलिखित में से क्या पृथ्वी की सतह के नीचे नहीं पाया जाता है?

(A) बाथोलिथ

(B) लैकोलिथ

(C) लैपोलिथ

(D) काल्डेरा

[read more] (D) काल्डेरा [/read]

91. What was the time span of the Tenth Five Year Plan in India?

(A) 2001-2006

(B) 2003-2008

(C) 2004-2009

(D) 2002-2007

भारत में दसवीं पंचवर्षीय योजना की समय अवधि क्या थी?

(A) 2001-2006

(B) 2003-2008

(C) 2004-2009

(D) 2002-2007

[read more] (D) 2002-2007 [/read]

92. Mango showers are experienced in which State of India?

(A) Bihar

(B) Telangana

(C) Uttar Pradesh

(D) Kerala

92. आम्र वर्षा भारत के किस राज्य में अनुभव की जाती है?

(A) बिहार

(B) तेलंगाना

(C) उत्तर प्रदेश

(D) केरल

[read more] (D) केरल [/read]

93. Which one of the following is not an important centre of Jute industry?

(A) Cuttack

(B) Kanpur

(C) Modinagar

(D) Guntur

निम्नलिखित में से कौन-सा जूट उद्योग का महत्वपूर्ण केंद्र नहीं है?

(A) कटक

(B) कानपुर

(C) मोदीनगर

(D) गुंटूर

[read more] (B) कानपुर [/read]

94. Which of the following Ramsar Wetland sites is not situated in Bihar?

(A) Nagi Bird Sanctuary

(B) Kabartal Wetland

(C) Kolleru Lake

(D) Nakti Bird Sanctuary

निम्नलिखित में से कौन-सा रामसर आर्द्रभूमि स्थल बिहार में स्थित नहीं है?

(A) नागी पक्षी अभयारण्य

(B) कबरताल आर्द्रभूमि

(C) कोलेरु झील

(D) नकटी पक्षी अभयारण्य

[read more] (C) कोलेरु झील [/read]

95. Monsoon forests are not found in which one of the following countries?

(A) Cambodia

(B) Malaysia

(C) Thailand

(D) Myanmar

निम्नलिखित में से किस देश में मानसून वन नहीं पाए जाते हैं?

(A) कंबोडिया

(B) मलेशिया

(C) थाईलैंड

(D) म्यांमार

[read more] (B) मलेशिया [/read]

96. Sir Creek is situated along the coast of which of the following State in India?

(A) Goa

(B) Tamil Nadu

(C) West Bengal

(D) Gujarat

सर क्रीक भारत में निम्नलिखित में से किस राज्य के तट पर स्थित है?

(A) गोवा

(B) तमिलनाडु

(C) पश्चिम बंगाल

(D) गुजरात

[read more] (D) गुजरात [/read]

97. The concept of ‘Limits to Growth’ was proposed by which among the following?

(A) Club of Rome

(B) World Bank

(C) World Economic Forum

(D) United Nations Development Programme

‘लिमिट्स टू ग्रोथ’ / ‘विकास की सीमाएं’ की अवधारणा निम्नलिखित में से किसके द्वारा प्रस्तावित की गई थी?

(A) क्लब ऑफ रोम

(B) विश्व बैंक

(C) विश्व आर्थिक मंच

(D) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम

[read more] (A) क्लब ऑफ रोम [/read]

98. Which of the following statements with reference to Saline soil is not correct?

(A) They are rich in Nitrogen

(B) They develop in waterlogged areas

(C) Occurs in arid and semi-arid regions

(D) Contains Sodium and Potassium salts

लवणीय मिट्टी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

(A) इनमें नाइट्रोजन प्रचुर मात्रा में होती है

(B) ये जलजमाव वाले क्षेत्रों में विकसित होते हैं

(C) शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में होते हैं

(D) इसमें सोडियम और पोटेशियम लवण होते हैं

[read more] (A) इनमें नाइट्रोजन प्रचुर मात्रा में होती है [/read]

99. Who among the following has given Laws of Migration?

(A) Clark

(B) Ravenstein

(C) Weber

(D) Evans

निम्नलिखित में से किसने प्रवासन के नियम दिए हैं?

(A) क्लार्क

(B) रेवेनस्टीन

(C) वेबर

(D) इवांस

[read more] (B) रेवेनस्टीन [/read]

100. As per the Annual Report 2023-24 of Ministry of Mines, Government of India, Odisha is the leading producer of which of the following mineral?

(A) Bauxite

(B) Manganese

(C) Zinc

(D) Copper

100. भारत सरकार के खान मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार, ओडिशा निम्नलिखित में से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है?

(A) बॉक्साइट

(B) मैंगनीज

(C) जस्ता

(D) तांबा

[read more] (A) बॉक्साइट [/read]

27. Atomic Power (परमाणु शक्ति)

Atomic Power

(परमाणु शक्ति)



      परमाणु शक्ति वह शक्ति है जिसे नियंत्रित (गैर-विस्फोटक) नाभिकीय अभिक्रिया से उत्पन्न किया जाता है।   

   इस शक्ति का उपयोग विनाशकारी एवं निर्माणकारी दोनों ही है। इसका अधिक उपयोग सामरिक महत्व की शक्ति के रूप में किया जा रहा है। केवल इससे निःसृत रेडियोधर्मी समस्थानिकों (Radioactive isotopes) का उपयोग विज्ञान के क्षेत्र में किया जा रहा है। भारत भी इस ऊर्जा का उपयोग निर्माणकारी कार्यों में करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

   इसका उपयोग कम कोयला एवं खनिज तेल उत्पादक देशों तथा अन्य ऊर्जा के अभाव वाले देशों में किया जा सकता है।

परमाणु ऊर्जा के स्रोत:-

    इस शक्ति के प्रमुख स्त्रोत यूरेनियम तथा थोरियम खनिज हैं। बेरीलियम, लीथियम तथा जिरकोनियम खनिजों का भी उपयोग होता है। अच्छी यूरेनियम, पिचब्लैंड तथा कानोंटाइट अयस्कों से प्राप्त होती है। यूरेनियम की यूरेनिनाइट ऑक्साइड पिचब्लैंड से प्राप्त होती है और यह परमाणु ऊर्जा उत्पादन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। विश्व के ज्ञात यूरेनियम क्षेत्रों का 70% उत्तरी अमेरिका तथा अफ्रीका महाद्वीपों में उपलब्ध है।

अणु शक्ति का विकास:-

    अणु शक्ति का ज्ञान वर्ष 1930 के लगभग हो गया। इस शक्ति का विनशकारी उपयोग द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान के हिरोशिमा नगर पर हुआ। इसके विकास में रेडियो सहधर्मी कणों से सुरक्षा, विखण्डित पदार्थों का निस्तारण तथा अधिक लागत प्रमुख समस्याएँ हैं जिनका समाधान आवश्यक है।

     विश्व के राष्ट्र अणुशक्ति के विकास की होड़ में संलग्न हैं। यूरेनियम एवं थोरियम की कुल उपलब्ध मात्रा 1700 × 10 लाख अरब ब्रिटिश ताप मापक इकाई मानी जाती है।

अणु शक्ति के उत्पादक देश:-

     परमाणु शक्ति का विश्व में वितरण विभिन्न देशों के बीच असमान है। कुछ देशों के पास परमाणु ऊर्जा के उत्पादन और उपयोग के लिए अधिक संसाधन हैं, जबकि अन्य देशों के पास परमाणु शक्ति का उपयोग करने की क्षमता काफी सीमित है

    इस शक्ति के मुख्य उत्पादक देश स्वतंत्र देशों के राष्ट्रमंडल, संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन, चीन तथा भारत हैं। कनाडा, इटली, जापान, स्वीडन, चेक गणराज्य, जर्मनी तथा ऑस्ट्रेलिया में भी परमाण्विक शक्ति गृह हैं। इस समय विभिन्न देशों में एक सौ से अधिक अभिक्रियक क्रियाशील हैं।

स्वतंत्र देशों का राष्ट्रमंडल:-

     सर्वप्रथम सन् 1954 में पाँच हजार किलोग्राम की क्षमता का परमाणु शक्ति गृह बनाया गया। इस समय कई परमाणु शक्ति गृह कार्यरत हैं। जिनमें कुछ की क्षमता एक लाख किलोवाट तक है।

   मुख्य केन्द्र नीवो-वोरेनश, बेलीयार्क्सकोया, लेनिनग्राड, कोला तथा बिलविना हैं। मानग्रीश्लाक प्रायद्वीप पर 3.5 लाख किलोवाट का अभिक्रियक है, जो विश्व में सबसे बड़ा केन्द्र है।

नोट: स्वतंत्र राष्ट्रों का राष्ट्रमंडल (CIS) सोवियत संघ के विघटन के बाद 1991 में स्थापित एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसमें 12 देश शामिल हैं: रूस, बेलारूस, यूक्रेन, आर्मेनिया, अजरबैजान, जॉर्जिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मोल्दोवा, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान।

संयुक्त राज्य अमेरिका-

    वर्ष 1958 में पिट्सबर्ग, नेपिंगनेटा, शिपिंगपोर्ट में आण्विक शक्ति गृह स्थापित हुआ। इसके बाद अणुशक्ति प्रायद्वीप द्वारा कई केन्द्र स्थापित किये गये, जिनमें प्रमुख ओहियो, टेनेसी तथा कोलम्बियो नदी घाटियों में हैं। बर्कले तथा लिवरमोर (कैलिफोर्निया), हैसफोड (वाशिंगटन), लासवेगास (नेवादा), सेनेक्टैडी बुकहेवे (न्यूयार्क), आर्को (इडाहो), लास आलामास (न्यूमेक्सिको) तथा सवाना (जार्जिया) प्रमुख केन्द्र हैं। वर्तमान में यहाँ 7,167.7 अरब यूनिट परमाणु ऊर्जा उत्पादित होती हैं।

ग्रेट ब्रिटेन-

    वर्ष 1957 में कैल्डरहाल विश्व का द्वीतीय आण्विक संयन्त्र स्थापित किया गया, जिसकी उत्पादन क्षमता 65 हजार किलोवाट है। अल्प केन्द्र हटर्सटन, ट्राब्सफिनिड, केले, विण्डस्केल, चैकेलकास, विनफ्रिथ, ओल्डबरी, हिंकले, प्वाइण्ट, साइजवेल तथा डाउनेर हैं। अगले वर्ष तक आवश्यक विद्युत शक्ति का 40% परमाणु शक्ति के उत्पादन का लक्ष्य है।

फ्रांस-

    पश्चिम यूरोप के छः देशों जर्मनी, फ्रांस, इटली, बेल्जियम, नीदरलैण्डस तथा लक्सेम्बर्ग ने यूरेटम (Euratom-European Atomic Energy Community) का गठन किया है जो अणु शक्ति के विकास में प्रयत्नशील है। फ्रांस में मारकूले के निकट 40 मेगावाट क्षमता की अणु भट्टी स्थापित की गयी है।

   अन्य शक्ति केन्द्र तैयार हो रहे हैं। इस देश में सम्पूर्ण विद्युत शक्ति परमाणु शक्ति करने का लक्ष्य है। इस देश के समक्ष शक्ति की गम्भीर समस्या है, क्योंकि 40% शक्ति की आपूर्ति आयातित कोयला एवं खनिज तेल से करनी पड़ रही है।

   यूरोप महाद्वीप के देश इटली में भी वर्ष 1965 से परमाणु शक्ति का उत्पादन हो रहा है। इस समय पाँच कम्पनियाँ अणु गृहों पर कार्य कर रहीं हैं। स्वीडन में अणु शक्ति का विकास जारी है।

चीन-

    इस देश में अणु तथा हाइड्रोजन बमों के कई सफल विस्फोट किये गये है। यहाँ अणु शक्ति का प्रयोग सैनिक कार्यों में किया जा रहा है। अनुमान है कि विश्व परमाणु शक्ति का पाँचवा शक्तिशाली देश चीन है।

भारत-

    विश्व के ऊपर वर्णित पाँच देशों के पश्चात इसका स्थान विश्व में छठवाँ है। अणु शक्ति के उत्पादन का श्रीगणेश वर्ष 1969 में हुआ। प्रथम परमाणु भट्टी तारापुर (महाराष्ट्र) में स्थापित हुई जिसकी क्षमता 420 मेगावाट है। दूसरी इकाई राणा प्रताप सागर (राजस्थान) के रावतभाटा स्थान पर है, जहाँ 220 मेगावाट की दो इकाइयाँ कार्यरत हैं। इनकी कुल क्षमता 440 मेगावाट है। तीसरा केन्द्र कलपक्कम (तमिलनाडु) में है। इसकी क्षमता 470 मेगावट होगी। इसमें केवल भारतीय इंजीनियर तथा वैज्ञानिक कार्यरत हैं। उन तीनों भट्टियों में स्वस्थानिकों का उत्पादन हो रहा है जिनका निर्यात ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, चेक गणराज्य, हांगकांग तथा फिलिपीन्स को हो रहा है।

    नरोरा (उ.प्र). में भी एक अणु शक्ति गृह चालू है। इसकी क्षमता 440 मेगावाट है। इस समय सभी चौदह केन्द्रों की क्षमता 2,720 मेगावट है। 2016 तक भारत में आठ परमाणु ऊर्जा केन्द्रों पर 22 रियक्टर कार्यरत है। जिसकी क्षमता 6780 मेगावाट है। 6 अन्य परमाणु रियक्टर के बन जाने से 4300 मेगावाट क्षमता और बढ़ गयी है।

जापान-

    इस देश में वर्ष 1957 में अभिक्रिया की स्थापना हुई। इबाराकी प्रीफ्रेक्चर में टोकियो से 112 किमीo दूर टोकाई स्थान पर अणु भट्टी की स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से हुई। सुरूगा में भी एक अणु भट्टी है। इस समय परमाणु शक्ति का उत्पादन 5 लाख किलोवाट है। चार संयंत्र लग रहे हैं। इनका उत्पादन लक्ष्य 780 लाख किलोवाट है। देश की आधी आवश्यकता परमाणु शक्ति से पूरी होने लगी है।

Atomic Power

28. Non-Conventional Sources of Energy (ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्त्रोत)

Non-Conventional Sources of Energy

(ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्त्रोत)



    Non-Conventional Sources of Energy

     ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्त्रोत वे हैं जो प्राकृतिक रूप से नवीकरणीय होते हैं तथा जिनका उपयोग ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जा सकता है। जैसे- सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत ऊर्जा, बायोमास, भू-तापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, लहर ऊर्जा आदि। 

    ये स्रोत पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं और पारंपरिक स्रोतों की तुलना में बहुत कम प्रदूषण करते हैं।

   आज विकासशील देशों में बढ़ते हुए औद्योगिकरण के कारण जीवाश्म ईंधन संसाधन जैसे कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस और परमाणु ऊर्जा एक सीमित संसाधन के रूप में रह गये हैं।

     ब्रून्श ने तो कोयला और खनिज तेल को लुटेरा संसाधन बताया है। वह दिन दूर नहीं है जब विश्व में इन संसाधनों के संचित भण्डार समाप्त हो जायेंगे। इसी डर के कारण आज विश्व के देश ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्त्रोतों पर निर्भर रहने लगे हैं।

    ऊर्जा के इन स्त्रोंतों का प्रयोग होने से न केवल जीवाश्म ईंधन की बचत होगी वरन् बहुत कुछ विदेशी मुद्रा भी बचेगी।

(i) सौर ऊर्जा (Solar Energy):-

       यद्यपि सौर ऊर्जा विश्व के सभी देशों में उपलब्ध है परन्तु सौर ऊर्जा की सर्वाधिक सम्भावता उष्ण कटिबंधीय देशों में है जहाँ सूर्य की किरणें सालोंभर अधिक तेज पड़ती हैं। विषुवत रेखा से उत्तर और दक्षिण बढ़ने के बाद सूर्यातप कम होने लगता है।

     सबसे अधिक सूर्याताप की सम्भावना मरूस्थलीय क्षेत्रों में होती है। सूर्य की किरणों से ऊर्जा तब प्राप्त होती है जब सीधी किरणें फोटो-वोल्टिक सैल (Photo-Voltaic-Cells) से टकराती हैं फिर उससे ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस विधि द्वारा ऊर्जा दो प्रकार से उत्पन्न की जाती है-

(i) फोटोवोल्टिक ऊर्जा इस विधि द्वारा ऊर्जा सूर्य की किरणों से (Semi-conductor device) द्वारा उत्पन्न होती है। लेकिन इस विधि द्वारा उत्पन्न ऊर्जा काफी महँगी पड़ती है। आज अनेक शोधों द्वारा फोटो वोल्टिक विधि से ऊर्जा बनाने की विधि को सस्ता किया गया है।

   इस विधि से सौर की किरणों को बड़े-बड़े आतिशी शीशों, लेंसों अथवा रिफ्लेक्टरों की सहायता से बड़ी मात्रा में एकत्र किया जाता है।

(ii) दूसरी विधि से सौर ऊर्जा से सीधे विद्युत बनाई जाती है। इसके लिये विभिन्न प्रकार के सिलिकॉन सैलों का प्रयोग किया जाता है।

    ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्त्रोतों में विश्व ऊर्जा का 0.5% सौर ऊर्जा से प्राप्त होता है। सौर ऊर्जा के उत्पादन की सम्भावनाएँ भारत और चीन में पर्याप्त हैं। यहाँ सौर ऊर्जा से पानी गर्म करने, सौर कुकर बनाने तथा फसल पकाने आदि की तकनीकी विकसित की जा चुकी है।

भारत-

     यहाँ सौर ऊर्जा के विकास की पर्याप्त सम्भावनाएँ हैं। ऊर्जा मंत्रालय ने 25 से 100 kW की तीन प्रकार की सौर फोटो-वोल्टिक ऊर्जा परियोजनाएँ स्थापित की हैं-

(i) सार्वजनिक भवनों की छत पर प्रणाली लगाना ताकि प्रमुख शहरी क्षेत्रों में पीक लोडिंग सेविंग हो सके।

(ii) सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रिड के अन्तिम भाग के लिये ही एण्ड स्पोर्ट प्रणाली की व्यवस्था।

(iii) दूर दराज क्षेत्रों में डीजल की बचत करने वाला लगाना।

    भारत में राजस्थान के जोधपुर जिले में 140 MW की एक समन्वित सौर शक्ति संयुक्त चक्र बिजली सहित 35 MW की ताप ऊर्जा प्रणाली की स्थापना का प्रस्ताव भी है। भारतवर्ष में 10 ग्रिड इंसेंटिव एस. पी. वी. परियोजनाएँ लगाई जा रही हैं जिनकी कुल क्षमता 925 kW है।

चीन-

    यहाँ सौर ऊर्जा से लगभग 20,000 Heat Collectors तैयार किये जाते हैं।

  सौर ऊर्जा की ओर विश्व के अन्य देश जैसे श्रीलंका, इण्डोनेशिया, यू. एस. ए. प्रयत्नशील हैं। यू एस. ए. में तो कैलीफोर्निया में 600 MW का एक संयंत्र स्थापित किया गया।

   वैज्ञानिकों की योजना है कि सूर्यातप को इस्पात नलिकाओं में एकत्रित करके आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जा सके। इसके लिये नलिकाओं में नाइट्रोजन प्रवाह करना होगा, जो इस ताप को गलित लवणों के टैंकों में परिवहित कर देंगी। यह टैंक बहुत दिनों तक ताप को बनाये रखते हैं, आवश्यकता पड़ने पर इसे टरबाइन जेनरेटर और परम्परागत बायलर में विद्युत उत्पादन के लिये प्रयोग किया जा सकेगा।

   आज अन्तरिक्ष उपग्रहों का भी सहयोग इसके लिये लिया जा रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलीफोर्निया और फ्लोरिडा में वाणिज्यिक स्तर पर सौर हीटरों का प्रचलन है। सौर कुकर, हीटर, ड्रायर, सिलिकन आदि सौर तापीय उपकरण विकसित किये गये हैं।

    विश्व की विषालतम सौर भट्टी लॉस एंजिलिस से 140 मील उत्तर-पूर्व की ओर है। यह मोजाब मरूस्थल में लूज में स्थापित है। इससे 10 विशाल सौर विद्युत उत्पादक संयंत्र संचालित होते हैं।

(ii) पवन ऊर्जा (Wind Energy):-

    पवन ऊर्जा, जिसे विंड एनर्जी भी कहते हैं। इसमें हवा की गतिज ऊर्जा का उपयोग करके बिजली का उत्पादन किया जाता है।

    पवन चक्कियों का प्रयोग ऊर्जा के रूप में बहुत समय से किया जा रहा है। ईरान में अन्न पीसने के लिये पहले पवन चक्कियों का प्रयोग होता है। इंग्लैण्ड में हल के निकट सन् 1186 में पवन चक्कियाँ स्थापित की गई थीं। आज हालैण्ड में पवन चक्कियों का प्रयोग ऊर्जा उत्पादन में होता है। इंग्लैण्ड की सबसे पुरानी पवन चक्की सन् 1670 की आज भी स्थित है।

     इस विधि द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करने में पवन द्वारा गतिज (Kinetic) ऊर्जा का प्रयोग टरबाइन के माध्यम से विद्युत उत्पादन में होता है।

    पवन द्वारा ऊर्जा उत्पादन सबसे अधिक जर्मनी में होता है। यहाँ सन् 2000 तक 9.369 पवन टरबाइन लगे हुए थे जिनसे 6,094.8 MW विद्युत उत्पादन होता है।

    संयुक्त राज्य अमेरिका का दूसरा स्थान है। यहाँ सन् 1999 तक 2,502 MW पवन ऊर्जा का उत्पादन हुआ। किसी समय तो अमेरिका के पश्चिमी मैदान में जल की पंपिंग के लिए पवन चक्की का प्रयोग होता था। यहाँ अधिकतर पवन ऊर्जा उत्पादन केन्द्र कैलीफोर्निया राज्य में हैं। यहाँ लगभग 15,000 टरबाइन ऊर्जा उत्पादन में कार्यरत हैं। जबकि डेनमार्क विश्व में तीसरा पवन ऊर्जा उत्पादक देश है। यहाँ सन् 2000 तक 2,417 MW विद्युत का उत्पादन हुआ।

     ग्रेट ब्रिटेन यहाँ सन् 2001 में 69 पवन फार्म थे जिनमें 941 टरबाइन लगे हुए थे तथा इनमें 473.6 MW विद्युत उत्पादित होती है।

    भारत भी पवन ऊर्जा के उत्पादन में पीछे नहीं हैं। भारत में पवन ऊर्जा उत्पादन में तेजी से वृद्धि हो रही है। भारत में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 2023 में 42.633 गीगावाट थी, और देश दुनिया में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में चौथे स्थान पर है। 

    एशिया की विशालतम 150 MW उत्पादन क्षमता परियोजना मुप्पंडाल (तमिलनाडु) में है। इस समय देश में 179 विण्ड मैपिंग और 83 विण्ड मोनीटरिंग स्टेशन कार्यरत हैं। तामिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में लगभग 80 स्थानों की पहचान की जा चुकी है।

(iii) भूतापीय शक्ति (Geo-thermal Energy):-

    पृथ्वी के आन्तरिक भाग में गहराई के अनुसार तापमान में वृद्धि होती है। ऐसा अनुमान है कि पृथ्वी के आंतरिक भाग का तापमान 4,500°C है जहाँ पर लोहा तथा निकिल जैसे भारी धात्विक पदार्थ भी तरल अवस्था में हैं।

    पृथ्वी की परत के धरातल पर दरार पड़ने के कारण मैग्मा बाहर आ जाता है। इसके ताप को एकत्रित करके विद्युत उत्पादन किया जा सकता है। यही विद्युत उत्पादन भूतापीय शक्ति कहलाता है।

    विशेषज्ञों का मत है कि इस ऊर्जा का उपयोग कूप खोदकर तथा शीत जल को पम्प द्वारा इस विभंगित शैल में प्रवाहित किया जाता है यह जल शैल की ऊष्मा से 350°F तक गर्म होकर संवहन द्वारा धरातल की ओर, को उठेगा, तब इसकी ऊर्जा को टरबाइनों में चलाने के लिये प्रयोग किया जायेगा।

     एक अन्य विचारधारा के अनुसार भूतापीय ऊर्जा के उपयोग के लिये दो कूपों (Shafts) को बनाया जाए। एक कूप जल को पम्प से नीचे की ओर भेजेगा जब जल अत्याधिक गर्म हो जायेगा तो दूसरे कूप से इसे ऊपर खींच लिया जायेगा और विद्युत शक्ति के उत्पादन में प्रयोग किया जायेगा।

     भूतापीय ऊर्जा प्रदूषण मुक्त एवं सस्ती होती है। न्यूजीलैण्ड, आइसलैण्ड और इटली में प्राकृतिक रूप से प्राप्त ऊष्मा का प्रयोग काफी पहले से किया जा रहा है। इटली के ट्यूस्केनी प्रान्त में फ्लोरेन्स के दक्षिण-पश्चिम में लारडेरेल्लो का प्राकृतिक वाष्प क्षेत्र सन् 1913 से विद्युत उत्पादन कर रहा है।

    भारतवर्ष में भी भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा देश भर में 340 भूतापीय गर्म झरनों की पहचान कर ली गई है। हाल ही में छत्तीसगढ़ में तातापानी भूतापीय क्षेत्रों में 300 kW क्षमता का भूतापीय बिजली संयंत्र लगाने की मंजुरी दी गई है।

    इसी प्रकार जम्मू-कश्मीर में पूगा, भूतापीय क्षेत्रों में जलाशय की क्षमता का मूल्यांकन करने तथा बिजली संयंत्र लगाने की संभाव्यता की जाँच का काम राष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान हैदराबाद द्वारा किया गया है।

    कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) में मणिवर्ण स्थान पर भूतापीय ऊर्जा पर आधारित एक कोल्ड स्टोरेज और एक बिजलीघर स्थापित किया गया है।

(iv) ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy):-

    ज्वारीय ऊर्जा, जिसे टाइडल एनर्जी भी कहा जाता है, समुद्र के ज्वार-भाटे के प्राकृतिक उतार-चढ़ाव से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा का एक नवीकरणीय रूप है।

   वर्तमान समय में ज्वार ऊर्जा द्वारा भी विश्व के कई देशों में विद्युत उत्पादन किया जाता है। विश्व में सर्वप्रथम ज्वार ऊर्जा उत्पादक प्लाण्ट फ्रांस के  ब्रिटनी में रेन्स नदी की एस्चुअरी पर स्थापित किया गया। इनमें ब्रिटेनी तट पर समुद्री टरबाइन लगे हैं जो ज्वार शक्ति से चालित होते हैं।

     इसी प्रकार कनाडा के न्यू ब्रुसविक और संयुक्त राज्य अमेरिका के मेन राज्य में पुंडी की खाड़ी के विभिन्न क्षेत्रों में जहाँ ज्वार 10 से 25 मीटर तक ऊँचे उठते हैं। ज्वार शक्ति से विद्युत उत्पादित की जाती है।

   रूस की किशलाया खाड़ी में भी इसी प्रकार के प्लाण्ट स्थापित किये गये हैं, भारतवर्ष में खम्भात की खाड़ी तथा सुन्दरवन इसके संभावित क्षेत्र हैं। यहाँ उत्पादित क्षमता 8,000-9,000 kW तक है।

(v) शहरी और औद्योगिक कचरे से ऊर्जा (Energy from Urban and Industrial Waste):-

     नगरों एवं औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले कूड़े-कचरे से पर्यावरण दूषित होता है। इस कूड़े-कचरे का उपचार करके न केवल पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है वरन् ऊर्जा उत्पादन में भी वृद्धि की जा सकती है। बड़े-बड़े महानगरों में यह कार्यक्रम विकसित किया जा रहा है।

      इस ऊर्जा से विद्युत के साथ-साथ गैस भी उत्पादित की जा सकती है। भारतवर्ष में सन् 1995 से शहरी, नगरपालिका और औद्योगिक कचरे से ऊर्जा प्राप्ति का राष्ट्रीय कार्यक्रम चल रहा है।

(vi) बायोमास ऊर्जा (Biogas Energy):-

      इसके अन्तर्गत कृषि और वन्य अवशेषों का उपयोग किया जाता है। इससे विद्युत के अतिरिक्त गैस भी उत्पन्न की जाती है। भारतवर्ष में बायोमास गैसीय कार्यक्रम के अन्तर्गत औद्योगिक उपयोगों के लिए ताप ऊर्जा उत्पन्न करने, पानी की पंपिंग और 500 kW तक बिजली पैदा करने के लिये बायोमास गैसीफायर विकसित किये गये हैं।

     इन गैसीफायर में लकड़ी के टुकड़ों और दूसरी वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। भारतवर्ष में 53.1 मेगावाट की क्षमता के बायोमास, गैसीफायर अब तक विकसित किये जा चुके हैं।

     इसके अतिरिक्त नई ऊर्जा प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत फ्यूज सेल्स, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों के बीच अभिक्रिया के जरिये बिजली पैदा होती है।

    हाइड्रोजन ऊर्जा, इसका प्रयोग व्यापक रूप से जीवाश्म ईंधन के रूप में किया जाता है। जैव ईंधन आदि का प्रयोग भी विद्युत उत्पादन में किया जाता है।

26. The Idustrial Regions of USA (संयुक्त राज्य अमेरिका के औद्योगिक प्रदेश)

The Idustrial Regions of USA

(संयुक्त राज्य अमेरिका के औद्योगिक प्रदेश)



प्रश्न प्रारूप Q. संयुक्त राज्य अमेरिका के औद्योगिक प्रदेश पर प्रकाश डालें ।

(What light on the Idustrial regions of USA)

उत्तर- संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया के प्रमुख औद्योगिक प्रदेशों में से एक है, जिसका इतिहास औद्योगीकरण और तकनीकी उन्नति से भरा हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका में अनेक औद्योगिक क्षेत्र हैं जो विभिन्न उद्योगों में काफी अधिक विशेषज्ञता रखते हैं। 

       संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र निम्नलिखित हैं:-

(i) दक्षिणी न्यू इंग्लैंड औद्योगिक क्षेत्र

(ii) मध्य-अटलांटिक तटीय औद्योगिक क्षेत्र

(iii) पिट्सबर्ग-लेक एरी औद्योगिक क्षेत्र

(iv) डेट्रॉयट औद्योगिक क्षेत्र

(v) वृहद झील औद्योगिक क्षेत्र

(vi) दक्षिणी अप्लेशिया औद्योगिक क्षेत्र

(vii) पूर्वी टेक्सास औद्योगिक क्षेत्र

(viii) प्रशांत तटीय औद्योगिक क्षेत्र

(ix) रॉकी पर्वत-पदीय औद्योगिक क्षेत्र

(i) दक्षिणी न्यू इंग्लैंड औद्योगिक क्षेत्र:-

⇒ सूती वस्त्र (Cotton Textile)- सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile) के लिए बोस्टन (Boston) प्रसिद्ध है।

⇒ ऊनी वस्त्र (Woolen Textile)- ऊनी वस्त्र उद्योग के लिए लोवेल (Lowel) और प्रोविडेंस (Providence) प्रसिद्ध है।

⇒ हार्टफोर्ड (Hartford)- बीमा उद्योग का अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (International Center of Insurance Industry) हार्टफोर्ड (Hartford) में स्थित है।

⇒ पैटरसन (Paterson)- सिल्क सिटी (Silk City) पैटरसन (Paterson) को कहा जाता है। क्योंकि पैटरसन में रेशम का अत्यधिक उत्पादन होता है।

(ii) मध्य-अटलांटिक तटीय औद्योगिक क्षेत्र:-

⇒ मध्य-अटलांटिक तटीय औद्योगिक क्षेत्र संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है। 

⇒ यह क्षेत्र पेंसिल्वेनिया के पूर्वी भाग, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, फिलाडेल्फिया, और मैरीलैंड राज्यों में फैला हुआ है। 

⇒ यह क्षेत्र अपने कुशल श्रम शक्ति, जल-विद्युत, रेल परिवहन, मशीनों और निकटवर्ती बाजार की सुविधाओं के कारण औद्योगिक गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है।  

⇒ स्टील (Steel)- स्टील उद्योग (Steel) के लिए स्पैरो पोइंट (Sparrows Point) व मोरिसविल्ले (Morrisville) प्रसिद्ध है।

(iii) पिट्सबर्ग-लेक एरी औद्योगिक क्षेत्र:-

⇒ यह औद्योगिक प्रदेश मध्य अटलांटिक तटीय औद्योगिक प्रदेश तथा मिशीगन औद्योगिक प्रदेश के बाद तीसरा महत्व औद्योगिक प्रदेश है।

⇒ यह क्षेत्र लोहा-इस्पात के लिए प्रसिद्ध है।

⇒ यहां यंग्सटाउन, बिहलिंग तथा जॉन्सटाउन द्वारा बनाए गए त्रिभुज के अंदर उद्योगों का केंद्रीकरण है।

⇒ इस त्रिभुज के मध्य में पिट्सबर्ग है। यह त्रिभुज धातु उद्योग, लोहा इस्पात तथा इंजिनियरिंग उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

(iv) डेट्रॉयट औद्योगिक क्षेत्र:-

⇒ यह अमेरिका का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल विनिर्माण क्षेत्र है, जिसका केंद्र डेट्रॉयट है।

⇒ यह शहर पहले वैगन और कैरिज-निर्माण का केंद्र था, जिसके बाद इस क्षेत्र में ऑटोमोबाइल की असेंबली होने लगी।

⇒ यह फोर्ड, क्रिसलर और जनरल मोटर्स सहित कई विशाल मोटर निगमों का मुख्यालय है।

(v) वृहद झील औद्योगिक क्षेत्र:-

⇒ महान झील प्रदेश को ही मिडवेस्ट प्रदेश कहा जाता है।

⇒ महान झील प्रदेश या मिडवेस्ट प्रदेश स्टील (Steel) उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

⇒ महान झील प्रदेश या मिडवेस्ट प्रदेश में पीट्सबर्ग (Pittsburgh)- पेन्सिलवेनिया राज्य (Pennsylvania State), डुलुथ (Duluth), क्लीवलेंड (Cleveland), बफैलो (Buffalo)- न्यूयॉर्क राज्य (New York State), गैरी (Gary) स्थान स्टील उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

⇒ महान झील प्रदेश या मिडवेस्ट प्रदेश में शिकागो (Chicago) स्थान मांस प्रसंस्करण (Meat Processing) उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

⇒ महान झील प्रदेश या मिडवेस्ट प्रदेश में डेट्रॉइट (Detroit) स्थान ऑटोमोबाइल (Automobile) उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। 

⇒ महान झील प्रदेश या मिडवेस्ट प्रदेश में एक्रोन (Akron) स्थान सिंथेटिक रबर (Synthetic Rubber) उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

(vi) दक्षिणी अप्लेशिया औद्योगिक क्षेत्र:-

⇒ दक्षिणी अप्लेशियन औद्योगिक क्षेत्र एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है। 

⇒ इस क्षेत्र में कोयला, लकड़ी, और अन्य संसाधनों की प्रचुरता है, जिसके कारण यह वस्त्र, रसायन, और धातु उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बन गया है।

⇒ लौह इस्पात (Iron and Steel)- लौह इस्पात उद्योग के लिए अलबामा राज्य में बर्मिंघम प्रसिद्ध है।

(vii) गल्फ तटीय प्रदेश या पूर्वी टेक्सास औद्योगिक क्षेत्र:-

⇒ पूर्वी टेक्सास प्रदेश को ही गल्फ तटीय प्रदेश कहा जाता है।

⇒ पूर्वी टेक्सास प्रदेश तेल रिफाइनरी (Oil Refineries) और हवाई जहाज (Aircraft) उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

⇒ पूर्वी टेक्सास प्रदेश या गल्फ तटीय प्रदेश में डलास (Dallas), ह्यूस्टन (Houston), न्यू आर्लीन्स (New Orleans) स्थान तेल रिफाइनरी के लिए प्रसिद्ध है।

⇒ पूर्वी टेक्सास प्रदेश या गल्फ तटीय प्रदेश में फोर्टवर्थ (Fort Worth) स्थान हवाई जहाज उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

(viii) प्रशांत तटीय औद्योगिक क्षेत्र:-

⇒ प्रशांत तटीय प्रदेश में सिएटल (Seattle) स्थान वायुयान निर्माण (Aircraft Manufacturing) उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

⇒ प्रशांत तटीय प्रदेश में पोर्टलैंड (Portland) स्थान जहाज निर्माण (Ship Manufacturing) उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

⇒ प्रशांत तटीय प्रदेश में सेनफ्रांसिस्को (San Francisco) और सेन डीएगो (San Diego) सूचना एवं प्रौद्योगिकी (Information Technology- IT Industry) उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

⇒ सेनफ्रांसिस्को को सिलिकॉन वैली (Silicon Valley) भी कहा जाता है।

सेनफ्रांसिस्को क्षेत्र कैलीफोर्निया (California) में स्थित है।

⇒ प्रशांत तटीय प्रदेश में लॉस एंजिलीस (Los Angeles) स्थान हॉलीवुड़ (Hollywood) (फिल्म उद्योग) के लिए प्रसिद्ध है।

(ix) रॉकी पर्वत-पदीय औद्योगिक क्षेत्र:-

     रॉकी पर्वत-पदीय औद्योगिक क्षेत्र उत्तरी अमेरिका में एक व्यापक क्षेत्र है जो रॉकी पर्वत श्रृंखला के पूर्वी ढलान और उसके आसपास के इलाकों में स्थित है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि, पर्यटन और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उद्योगों के लिए जाना जाता है।

निष्कर्ष:

    निष्कर्षत: कहा जा सकता कि संयुक्त राज्य अमेरिका का औद्योगिक प्रदेश एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो कि देश की अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, और समाज को आकार देता है। यह विभिन्न उद्योगों, प्राकृतिक संसाधनों, और श्रम शक्ति के कारण विश्व भर में एक प्रमुख औद्योगिक शक्ति है।



नोट:

संक्षेप में

USA का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र:

1. उत्तर-पूर्वी क्षेत्र:

   इस क्षेत्र में पिट्सबर्ग, क्लीवलैंड, डेट्रायट, शिकागो, ओहियो, मिशिगन और विस्कॉन्सिन जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। यह क्षेत्र संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे पुराना और सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है, जिसमें विनिर्माण उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान है।

2. मध्य-पश्चिमी क्षेत्र:

   इसमें मुख्यतः शिकागो-गैरी, पिट्सबर्ग-लेक एरी, सेंट लुइस, कैनसस सिटी, ओमाहा, सिनसिनाटी, इंडियानापोलिस क्षेत्र शामिल है। यह क्षेत्र कृषि, परिवहन, और विनिर्माण उद्योगों के लिए जाना जाता है।

3. दक्षिण क्षेत्र:

     इसमें मिसिसिपी, टेनेसी, जॉर्जिया, फ्लोरिडा, अलबामा, ओक्लाहोमा और टेक्सास जैसे जगह शामिल हैं। इस क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक उत्पादों में कपड़ा, खाद्य और पेय पदार्थ, तंबाकू, फर्नीचर, पेट्रोकेमिकल्स, विमान और भारी रसायन शामिल हैं। यह क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि, तेल, और गैस उद्योगों के लिए जाना जाता है।

4. पश्चिमी क्षेत्र:

    इसमें व्योमिंग, यूटा, कोलोराडो, नेवादा और एरिजोना राज्य शामिल हैं। यह क्षेत्र प्रौद्योगिकी, पर्यटन, और फिल्म उद्योगों के लिए जाना जाता है। 

नोट :

विनिर्माण: कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहा जाता है।

23. The Industrial Regions of Japan (जापान के औद्योगिक क्षेत्र)

23. The Industrial Regions of Japan

(जापान के औद्योगिक क्षेत्र)



प्रश्न प्रारूप

Q. जापान के औद्योगिक क्षेत्र पर प्रकाश डालें।

(Throw light on the Industrial regions of Japan.)

उत्तर-

जापान के औद्योगिक प्रदेश-

    उद्योगों की स्थापना की दृष्टि से जापान प्राचीन काल से ही एक विकसित देश रहा है, जहाँ पहले परम्परागत हस्त उद्योगों में उत्पादन होता था लेकिन 1870 के बाद जापान के उद्योगों में स्वचालित मशीनों द्वारा उत्पादन कार्य होने लगा। प्राचीन उद्योग रेशमी वस्त्र, चीनी मिट्टी के बर्तन, पोशाक, खिलौने, हस्त कलाकारी की वस्तुओं आदि का उत्पादन हाथ के बजाय स्वचालित मशीनों द्वारा होने लगा।

     निर्मित माल की विदेशों में बढ़ती हुई माँग को देखते हुए जापान सरकार ने 1930 के बाद भारी उद्योगों की स्थापना पर अधिक बल दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के समय में जापान में लोह इस्पात तथा विविध इंजीनियरिंग उद्योगों का विकास तीव्र गति से हुआ। सूती वस्त्र उद्योग जापान का प्राचीन उद्योग है जिसमें स्वचालित मशीनों द्वारा उत्पादन होने के कारण जापान का मुख्य उद्योग बन गया।

    1945 में आणविक बम विस्फोटों से अधिकतर उद्योग नष्ट हो गए थे लेकिन 1950 के बाद जापान सरकार की औद्योगिक नीति के द्वारा उद्योगों का सर्वाधिक विकास हुआ। जापान विश्व में संयुक्त राज्य तथा रूस के बाद तीसरा और एशिया में औद्योगिक विकास की दृष्टि से प्रथम स्थान रखता है।

    विविध खनिज पदार्थों की कमी होते हुए भी जापान विदेशों से आयातित कच्चे पदार्थों के आधार पर एक विकसित औद्योगिक देश बन गया है जिसके लिए द्विपीय स्थिति के कारण सस्ता जल परिवहन, कुशल श्रमिक, सघन जनंसख्या, तटीय स्थिति आदि सुविधाओं का प्रमुख योगदान है। जापान में उद्योगों के लिए कच्चा माल अन्य देशों से आयात करने के कारण उद्योगों की स्थापना महासागर के तटवर्ती क्षेत्र में अधिक हुई है। जापान के निम्नांकित पाँच औद्योगिक प्रदेश प्रमुख हैं-

1. क्वान्तो औद्योगिक प्रदेश

2. नगोया औद्योगिक प्रदेश

3. किंकी औद्योगिक प्रदेश

4. किता क्यूशू औद्योगिक प्रदेश

5. हिरोशिमा-कुरे-उत्तरी शिकोकु प्रदेश

The Industrial Regions of Japan

1. क्वान्तो या टोकियो-याकोहामा औद्योगिक प्रदेश:-

    क्वान्तो प्रदेश जापान के दक्षिण-पूर्व में स्थित जापान का सबसे बड़ा मैदान है जो प्रशान्त महासागर के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित है। क्वान्तो जापान का सबसे बड़ा औद्योगिक प्रदेश है जहाँ टोकियो, याकोहामा, कावासाकी, चीबा, इथिकावा; काबागुची, हिताची, मितो, उरावा, कोगा, कोनोसू, ओमिया, ताबिकावा, तनावा इस क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक केन्द्र हैं।

    क्वान्तो प्रदेश में पर्वतीय क्षेत्र से बहकर आने वाली नदियों से जल की प्राप्ति, तटीय क्षेत्र में स्थिति के कारण जल परिवहन की सुविधा जिसके द्वारा कच्चे पदार्थों के आयात तथा निर्मित माल के निर्यात का प्रमुख यातायात साधन है। सस्ते तथा कुशल श्रमिकों की व्यवस्था, उच्च तकनीकि सुविधाएँ, श्रमिकों की अपने कार्य के प्रति वफादारी, सघन जनसंख्या जिसके कारण पर्याप्त श्रमिक तथा स्थानीय बाजार की व्यवस्था तथा टोकियो जापान की राजधानी होने के साथ-साथ सबसे बड़ा आर्थिक सांस्कृतिक नगर है तथा रेलमार्गों द्वारा जापान के प्रमुख नगरों से जुड़ा हुआ है।

     इन विभिन्न सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र जापान का प्रमुख औद्योगिक प्रदेश बन गया है। इस क्षेत्र में लौह-इस्पात, वायुयानों का निर्माण, वस्त्र उद्योग, कृषि यन्त्र, रासायनिक पदार्थ, कागज आदि उद्योग इस क्षेत्र में सघन रूप से अवस्थित हैं।

     टोकियो, कावासाकी, चीता तथा इथिकावा में लौह इस्पात, योकोहामा कावासाकी में भारी धातु निर्माण उद्योग, टोकियो-याकोहामा, कावासाकी उकागा में जलपोत निर्माण, ताविकावा-मिआमी तथा तनावा में वायुयान निर्माण उद्योगों की प्रधानता है।

2. नगोया औद्योगिक प्रदेश:-

    क्वान्तो औद्योगिक प्रदेश के पश्चिम में जापान के दक्षिणी तटवर्ती क्षेत्र में नगोया औद्योगिक प्रदेश स्थित है जहाँ नगोया, गिफू, ओकाजाकी, आकोशी, अन्जो, इशीकी, तायोहाशी, हिकोने, कामेयामा, तजू, ओका, तोबा प्रमुख औद्योगिक केन्द्र हैं। जापान का यह औद्योगिक प्रदेश वस्त्र निर्माण उद्योगों की स्थापना के लिए प्रसिद्ध है जहाँ सूती, ऊनी, रेशमी तथा कृत्रिम रेयन वस्त्रों के निर्माण उद्योगों की प्रधानता है।

      वस्त्र उद्योग के अतिरिक्त, मशीन निर्माण, भारी धातु निर्माण, वायुयान तथा जलयान निर्माण, रसायन उद्योग, बिजली के सामान तथा रेल के डिब्बे तथा रेल इंजन निर्माण उद्योग भी अवस्थित हैं। नगोया-वाकायामा जापान के वस्त्र निर्माण के प्रमुख केन्द्र हैं जहाँ वर्तमान में वस्त्र निर्माण के अतिरिक्त मशीन निर्माण उद्योगों की स्थापना भी की गयी है।

     वायुयान निर्माण मिताका तथा इनाबागून में, जलपोत निर्माण उरागा में, मिट्टी के बर्तन गनोया में तथा यातायात के साधनों के निर्माण से सम्बन्धित उद्योग नगोया तथा शिगा में स्थित हैं। इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित होने का प्रमुख कारण समतल भूमि, तटीय स्थिति तथा सघन जनसंख्या है।

3. किंकी या कोबे-ओसाका क्योटो औद्योगिक प्रदेश:-

     नगोया औद्योगिक प्रदेश के पश्चिमी भाग में तटीय क्षेत्र में स्थित कोबे-ओसाका तथा क्योटो नगरों में किंकी औद्योगिक प्रदेश का विस्तार पाया जाता है। अतः इसे कोबे-ओसाका क्योटो औद्योगिक प्रदेश भी कहते हैं। ओसाका, कोबे-क्योटो, हिमेजी, सकाई फ्यूजे, वाकायामा, नारा, किजू, यवाता, यासू, अवाजी, ओमिजो, अमागासाकी, निशिनोमिया इस क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक केन्द्र हैं।

    इस क्षेत्र में लोह इस्पात उद्योगों की प्रधानता है। इसके अतिरिक्त ओसाका में सूती, ऊनी, रेशमी, वस्त्र निर्माण उद्योगों की प्रधानता है जिसके कारण इसे जापान का मेनचेस्टर कहा जाता है। जलयान, वायुयान, रासायनिक पदार्थ, मशीन निर्माण तथा खाद्य पदार्थों के निर्माण उद्योग भी इस क्षेत्र में पाए जाते हैं। इस औद्योगिक क्षेत्र में ओसाका खाड़ी पर स्थित होने के कारण स्वच्छ जल की प्राप्ति तथा सघन जनसंख्या के कारण पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध हैं।

4. किता क्यूशू या मौजी नागासाकी औद्योगिक प्रदेश:-

     जापान के दक्षिण-पश्चिम में समुद्र तटीय क्षेत्र में इस औद्योगिक प्रदेश का विस्तार पाया जाता है। यह प्रदेश जापान में लौह-इस्पात उद्योगों की दृष्टि से अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है जहाँ जापान के कुल लौह-इस्पात में उत्पादन का 50 प्रतिशत उत्पादित होता है। तटीय क्षेत्र में स्थिति के कारण तथा एशियाई देशों के समीप स्थित होने के कारण लौह अयस्क, कोयला आदि कच्चे पदार्थ जल परिवहन द्वारा आसानी से आयात कर लिया जाता है।

    निर्मित पदार्थों को जलयानों द्वारा विदेशों में निर्यात कर दिया जाता है। अतः यह प्रदेश पूर्णतया आयातित कच्चे पदार्थों पर आधारित है। क्यूशू-केमोगी-यावाता-कोकुश-वाकामात्सु-शिमोनो-सेकी-मोजी-ऊबे-फुकुओका-सासेबे-नागासाकी इस क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक प्रदेश हैं जहाँ लौह इस्पात के अतिरिक्त धातु निर्माण उद्योग, इंजीनियरिंग पदार्थों का निर्माण, सीमेंट, मोटर गाड़ियाँ, जलयान निर्माण तथा रासायनिक पदार्थों से सम्बन्धित उद्योग भी पाए जाते हैं।

5. हिरोशिमा-कुरे-उत्तरी शिकोकु प्रदेश:-

     जापान के दक्षिण-पश्चिम में किंकी तथा किता-क्यूशू औद्योगिक प्रदेशों के मध्यवर्ती भाग में इस प्रदेश का विस्तार पाया जाता है। हिरोशिमा-कुरे-नोमी ओकायामा-मत्सूयामा-ताकामात्सू-कूबा इस क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक केन्द्र हैं जहाँ लौह इस्पात भारी धातु निर्माण-जलयान पेट्रो शोधन कारखाने-यंत्र निर्माण-बिजली के सामान तथा विविध रासायनिक पदार्थों के निर्माण से सम्बन्धित उद्योग पाए जाते हैं। जापान के ये सभी औद्योगिक प्रदेश दक्षिणी क्षेत्र में स्थित हैं।

     इनके अतिरिक्त उत्तर में सेन्दाई क्षेत्र तथा होकैडो द्वीप के दक्षिणी भाग में भी लघु औद्योगिक क्षेत्र हैं जहाँ केवल सामान्यतः उपभोक्ता वस्तुओं का ही उत्पादन किया जाता है। इस क्षेत्र में जलवायु दशाएँ प्रतिकूल तथा कच्चे पदार्थों की कमी के कारण जनसंख्या भी न्यूनतम ही पायी जाती है। अतः औद्योगिक विकास वर्तमान में अपनी प्रारम्भिक अवस्था में ही है।



नोट:

जापान में औद्योगिक उन्नति के कारण

     जापान एशिया महाद्वीप का अकेला ऐसा देश है जो औद्योगिक विकास की उस चरम सीमा तक पहुँच गया है, जहाँ तक पहुँचना साधन सम्पन्न विकसित देशों के लिए भी बहुत कठिन है। यह विश्व का प्रमुख औद्योगिक राष्ट्र है। 20वीं शताब्दी में जापान ने अद्वितीय औद्योगिक विकास किया है। जापान की औद्योगिक उन्नति के निम्नलिखित कारण हैं-

(1) भौगोलिक स्थिति- जापान की स्थिति द्वीपीय होने के कारण इसका जलमार्गों द्वारा विभिन्न देशों से सम्पर्क स्थापित हो सका है। जापान के लिए कच्चे माल के स्रोत एशियाई देश इसके बहुत समीप हैं।

(2) अनुकूल जलवायु- इस देश की जलवायु रेशम, कपास आदि के उत्पादन के लिए अनुकूल है। अक्षांशीय विस्तार अधिक होने के कारण इसके उत्तरी व दक्षिणी भागों में जलवायुवीय भिन्नता पायी जाती है।

(3) कच्चे माल की प्राप्ति- यद्यपि जापान में लोहा, कोयला, कपास आदि कच्चे मालों की कमी है फिर भी जापान अति तीव्र गति से औद्योगिक विकास हो रहा है। इसका प्रमुख कारण विदेशों से सस्ते कच्चे माल का प्राप्त होना है।

(4) जल-विद्युत- औद्योगिक शक्ति के साधन कोयले की कमी सस्ती जल-विद्युत द्वारा पूरी कर दी जाती है। यदि जापान में जल विद्युत उत्पादन की अनुकूल भौगोलिक दशाएँ न होर्ती तो जापान औद्योगिक दृष्टि से बहुत अधिक पिछड़ा हुआ होता।

(5) कुशल श्रमिक- देश की अधिकांश जनसंख्या के औद्योगिक क्षेत्रों में निवास करने से पर्याप्त मात्रा में सस्ते व कुशल श्रमिक उपलब्ध हो जाते हैं।

(6) बाजार की समीपता- जापान द्वारा निर्मित माल को इसके समीप दक्षिण व दक्षिण-पूर्वी एशिया के देश आयात कर लेते हैं।

(7) सामुद्रिक स्थिति- जापान के चारों ओर से समुद्र से घिरा होने के कारण यहाँ जल यातायात द्वारा कच्चा माल आयात करने तथा तैयार माल निर्यात करने की बहुत सुविधा है।

(8) परिवहन की सुविधाएँ- जापान की अधिकांश जनसंख्या का जमाव तटीय भागों में है। अतः यहाँ उद्योगों का विकास भी तटीय केन्द्रों पर ही हुआ है।

(9) सरकारी सहयोग- जापान की सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए अनेक प्रकार सहयोग किया है। यहाँ सरकार द्वारा नवीन उद्योगों को संरक्षण दिया जाता है तथा वित्तीय सहायता दी जाती है। यहाँ सरकार औद्योगिक नीति को उदार और प्रगतिशील रखकर अनुकूल वातावरण प्रदान करती है।

(10) आधुनिक मशीनरी का प्रयोग- यहाँ कारखानों में आधुनिकतम मशीनरी का प्रयोग किया जाता है तथा ऐसी विधियों का प्रयोग किया जाता है जिनसे श्रम की बचत होती है। ये मशीनें सुविधाजनक भी होती हैं। आधुनिक मशीनरी के विकास की ओर जापान में विशेष ध्यान दिया जाता है।

(11) औद्योगिक सम्बन्ध- यहाँ उद्योगों का विकास निराले ढंग से किया गया है। बड़े उद्योगों की कुटीर उद्योगों से प्रतिस्पर्धा न करके बड़े उद्योगों और कुटीर उद्योगों में सम्पर्क रखा गया है।

(12) चीन-जापान संघर्ष- जब चीन तथा जापान का संघर्ष प्रारम्भ हुआ, जापान में वस्त्र व वस्त्र निर्माण उद्योगों का विकास प्रारम्भ हुआ।

(13) प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध- विश्व युद्ध में शामिल हो जाने के कारण जापान को सैनिक तथा आम जनता की माँग की पूर्ति के लिए सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, रेशमी वस्त्र, जलयान, वायुयान, मशीनरी आदि के निर्माण में वृद्धि करनी पड़ी।

40. SCALES OF MEASUREMENT (मापन के पैमाने)

SCALES OF MEASUREMENT

(मापन के पैमाने)



      भौगोलिक आँकड़ों के मापन का तात्पर्य नियमों के अनुसार आँकड़ों का वर्गीकरण, विश्लेषण और मानचित्रण है। आँकड़ों में अन्तरनिहित समरूपता के आधार पर आँकड़ों का कई तरह से प्रदर्शन ही मापक कहा जाता है। सामान्यतया भौगोलिक आँकड़ों के मापन स्तर के 4 वर्ग हैं।

1. नामिक मापक (Nominal Scale):-

     इसे प्रतीक मापक कहा जा सकता है क्योंकि यह आँकड़ों की किसी उल्लेखनीय विशेषता के आधार पर उनका वर्णन नहीं करता है। केवल प्रतीक रूप में वर्गीकरण और विश्लेषण प्रस्तुत करता है। जैसे- पशुओं का गाय, बैल, भैंस, बकरी में विभाजन या यौनानुपात में स्त्री-पुरुष, मिट्टी विभाजन में दोमट, बलुई आदि नामिक मापक के उदाहरण है।

    इस मापक से आँकड़ों के वास्तविक मूल्य का बोध नहीं होता है, बल्कि उनके प्रतीकों का बोध होता है। भौगोलिक विश्लेषण में बहुलक (Mode) का प्रयोग इसके आधार पर किया जाता है।

2. क्रमसूचक मापक (Ordinal Scale):-

      इसके अन्तर्गत विभिन्न आँकड़ों को अधिकतम और न्यूनतम परिमाण के आधार पर आरोही अथवा अवरोही क्रमों में रखते हैं। इस तरह आँकड़ों में अन्तर का आधार उनकी मात्रा (Quantity) रहती है। जैसे आकार के आधार पर नगरों, गाँवों का वर्गीकरण, दुकानों की संख्या, खुलनशीलता के आधार पर वर्गीकरण, उत्पादन के अनुसार विभिन्न इकाइयों का वर्गीकरण इसके उदाहरण हैं।

   इस प्रकार के आँकड़ों के विश्लेषण में अनेक सांख्यिकीय विधियों, आरेख और मानचित्र उपयोगी हैं। जैसे नगरों या गाँवों के वितरण में क्रमशः आकार के अनुसार वर्गीकरण, उच्चावचन में अधिक ऊँचा, मध्यम या न्यून ऊँचा क्षेत्र आदि है।

3. अन्तराल मापक (Interval Scale):-

    अन्तराल मापन समान इकाई मापक के आधार पर आँकड़ों का वर्णन करता है। इसमें क्रमसूचक मापक के अनुसार आँकड़ों के बीच का अन्तराल परिवर्तनशील होता है। इससे असंख्य आँकड़ों को संक्षेप में व्यवस्थित कर लेते हैं और आँकड़ों का क्रम भी बना रहता है। जैसे- < 5, 5-10, 10-15, 15-20 आदि। इसमें 0 से 20 तक जितने भी प्रेक्षण हैं, सभी किसी भी अन्तराल वर्ग में रखे जा सकते हैं। इस पर माध्य, मानक विचलन, सहसम्बन्ध आदि अनेक सांख्यिकीय विधियाँ प्रयोग में लायी जाती हैं।

4. आनुपातिक मापक (Ratio Scale):-

    आनुपातिक मापक का प्रयोग करके बड़ी संख्या में आँकड़ों को लघुतम रूप में व्यक्त कर सकते हैं। जैसे 10/100 को 1/10, 5/50, 2/20 आदि रूप में व्यक्त कर सकते हैं। अधिकांश भौगोलिक आँकड़े आनुपातिक मापक पर ही पाये जाते हैं।

उत्तर लिखने का दूसरा तरीका

(i) नाममात्र पैमाना (Nominal Scale):-

     नाममात्र पैमाना मापन का सबसे सरल और प्रारंभिक पैमाना है। इसमें आँकड़ों को केवल नाम या श्रेणी के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

विशेषताएँ

✍️ इसमें संख्याएँ केवल पहचान (Identification) के लिए होती हैं

✍️ न तो क्रम होता है और न ही परिमाण

✍️ गणितीय क्रियाएँ संभव नहीं

भूगोल में उदाहरण

✍️ भूमि उपयोग के प्रकार (कृषि, वन, बंजर)

✍️ मिट्टी के प्रकार

✍️ जलवायु के प्रकार

✍️ धर्म, भाषा, जाति

महत्व

     नाममात्र पैमाना भूगोल में वर्गीकरण और मानचित्रण के लिए उपयोगी है, जैसे- भूमि उपयोग मानचित्र।

(ii) क्रमिक पैमाना (Ordinal Scale):-

    क्रमिक पैमाने में आँकड़ों को क्रम या रैंक के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है।

विशेषताएँ

✍️ इसमें क्रम (Order) होता है

✍️ परंतु दो मानों के बीच का अंतर ज्ञात नहीं होता

✍️ केवल तुलना संभव होती है

भूगोल में उदाहरण

✍️ जनसंख्या घनत्व: उच्च, मध्यम, निम्न

✍️ विकास स्तर: विकसित, विकासशील, अविकसित

✍️ नगरीय श्रेणीकरण

महत्व

     यह पैमाना भूगोल में क्षेत्रीय तुलना और स्तरीकरण (Ranking) के लिए अत्यंत उपयोगी है।

(iii) अंतराल पैमाना (Interval Scale):-

     अंतराल पैमाने में आँकड़ों के बीच समान अंतर होता है, परंतु पूर्ण शून्य (True Zero) नहीं होता।

विशेषताएँ

✍️ क्रम और अंतर दोनों मौजूद

✍️ शून्य केवल सांकेतिक होता है

✍️ गुणा और भाग संभव नहीं

भूगोल में उदाहरण

✍️ तापमान (सेल्सियस, फारेनहाइट)

✍️ तिथियाँ और वर्ष

✍️ ऊँचाई (समुद्र तल के सापेक्ष)

महत्व

    यह पैमाना भौतिक भूगोल में-

✍️ जलवायु विश्लेषण

✍️ तापमान प्रवृत्ति

✍️ समय आधारित अध्ययन के लिए उपयोगी है।

(iv) अनुपात पैमाना (Ratio Scale):- 

    अनुपात पैमाना मापन का सबसे उन्नत और पूर्ण पैमाना है। इसमें समान अंतर के साथ-साथ पूर्ण शून्य भी होता है।

विशेषताएँ

✍️ क्रम, अंतर और अनुपात तीनों मौजूद

✍️ सभी गणितीय क्रियाएँ संभव

✍️ सबसे विश्वसनीय पैमाना

भूगोल में उदाहरण- जनसंख्या, वर्षा की मात्रा, दूरी, क्षेत्रफल, उत्पादन

महत्व

     अनुपात पैमाना भूगोल में-

✍️ सांख्यिकीय विश्लेषण

✍️ मॉडल निर्माण

✍️ पूर्वानुमान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मापन के पैमानों का तुलनात्मक सार

पैमाना क्रम अंतर पूर्ण शून्य
नाममात्र
क्रमिक
अंतराल
अनुपात

भूगोल में मापन पैमानों का महत्व

✍️ भौगोलिक आँकड़ों की वैज्ञानिक व्याख्या

✍️ उपयुक्त सांख्यिकीय विधि का चयन

✍️ मानचित्रण एवं मॉडलिंग

✍️ क्षेत्रीय योजना और नीति निर्माण

✍️ शोध एवं परियोजना कार्य

निष्कर्ष 

       मापन के पैमाने भूगोल में सांख्यिकीय अध्ययन की आधारशिला हैं। ये आँकड़ों को अर्थपूर्ण, तुलनात्मक और विश्लेषण योग्य बनाते हैं। प्रत्येक पैमाने की अपनी सीमाएँ और उपयोगिता है। भूगोल के छात्र के लिए इन पैमानों की स्पष्ट समझ आवश्यक है, क्योंकि इनके बिना सांख्यिकीय विश्लेषण अधूरा माना जाता है।

22. What is language? Origin and classification of languages ​​in India (भाषा क्या है? उत्पत्ति तथा भारत में भाषाओं का वर्गीकरण)

What is language? Origin and classification of languages ​​in India

(भाषा क्या है? उत्पत्ति तथा भारत में भाषाओं का वर्गीकरण)



     भाषा अभिव्यक्ति का सबसे उत्तम साधन है। यदि मानव के पास भाषा न होती तो उसके आविष्कारों का विस्तार एवं प्रसार अत्यन्त सीमित हो जाता। मानव की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं राजनीतिक उन्नति का प्रमुख कारण आविष्कार है और आविष्कार को प्रसारित करने का सबसे अधिक श्रेय मनुष्य की भाषा शक्ति को है।

    भाषा द्वारा मानव अपने मन के भाव प्रकट करता है, सामाजिक आदान-प्रदान या अन्तःक्रिया में भाग लेता है। संगीत रचना करता है और गाता है, साहित्य की सृष्टि करता है और आविष्कारों का प्रसार मानवीय धरातल में करता है।

    भाषा का अर्थ बोलना है, क्योंकि इसका मुख्य प्रयोग बोलकर ही किया जाता है, किन्तु दूरस्थ व्यक्ति को विचार लिखकर ही व्यक्त किए जाते हैं।

परिभाषा

स्टर्टीवेण्ट के अनुसार, “भाषा मुंह से उच्चारण किए जाने वाले संकेतों की वह व्यवस्था है जिसके द्वारा एक सामाजिक समूह के सदस्य सहयोग तथा अन्तः क्रिया करते हैं।”

पतंजलि मुनि के अनुसार, “जिस व्यापार में वाणी द्वारा वर्ण व्यक्त किए जाते हैं। वह व्यक्त वाक् अर्थात् भाषा है।

हर्सकोविट्ज के अनुसार, “भाषा मुंह से उच्चारण किए जाने वाले संकेतों की वह व्यवस्था है जिसके द्वारा एक सामाजिक समूह के सदस्य सहयोग तथा अन्तः क्रिया करते हैं और जिसके माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को सफल बनाया जाता है तथा जीवन की एक विधि विशेष को निरन्तरता एवं परिवर्तनशीलता दोनों ही प्राप्त होती हैं।”

भाषा की उत्पत्ति:-

      भाषा की उत्पत्ति के सम्बन्ध में विभिन्न मत हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार भाषा की उत्पत्ति उन परिस्थितियों का परिणाम है जिनमें प्रारम्भिक काल में मानव निवास करता था। उस समय प्राकृतिक वस्तुएं एवं घटनाएं देखकर अनायास मुंह से आवाजें निकल पड़ती थीं।

     धीरे-धीरे आवाजें निकालकर ही वह अपने भावों को दूसरों तक पहुंचाता था। धीरे-धीरे सामाजिक अन्तः क्रिया के दौरान एक-एक विशिष्ट आवाज एक-एक विशेष प्रकार के संकेत के रूप में स्थापित व क्रियाशील हुई। इन्हीं संकेतों के क्रमिक विकास से भाषा की उत्पत्ति हुई।

      भाषा की उत्पत्ति के सम्बन्ध में द्वितीय मत यह है कि मानव ने बोलने की प्रेरणा प्रकृति से ही ली है। प्रारम्भिक समय में मानव ने प्रकृति में कुछ आवाजें सुनीं जिनकी नकल की जिससे बाद में संकेतों का जन्म हुआ तथा भाषा की उत्पत्ति हुई।

     भाषा की उत्पत्ति के सम्बन्ध में तृतीय सिद्धान्त प्राणीशास्त्रीय है। मानव में कुछ प्राणीशास्त्रीय विशेषताएं पाई जाती हैं जिनके कारण वाणी अथवा भाषा की उत्पत्ति होती है।

भाषाओं का वर्गीकरण:-

    भारत में बोली जाने वाली भाषाएं निम्नांकित चार परिवारों से सम्बन्धित हैं:

(1) ऑस्ट्रिक (Ausric)

(2) द्रविण (Dravidian)

(3) चीनी-तिब्बती (Sino-Tibetan)

(4) इण्डो-यूरोपियन (Indo-European)

(1) ऑस्ट्रिक:-

    इसकी दो शाखाएं हैं-

(ⅰ) ऑस्ट्रो-एशियाटिक शाखा एवं

(ii) ऑस्ट्रोनेशियन शाखा।

   ऑस्ट्रो-एशियाटिक शाखा के अन्तर्गत मध्य एवं पूर्वी भारत की कोल एवं मुण्डा बोलियां, निकोबार द्वीप समूह की बोली तथा थाईलैण्ड और वियतनाम की भाषाएं सम्मिलित हैं जबकि ऑस्ट्रोनेशियन शाखा के अन्तर्गत इण्डोनेशिया की राष्ट्रभाषा तथा मलाया, माइक्रोनेशिया, मैलेनेशिया तथा पोलिनेशिया, आदि की भाषाएं सम्मिलित हैं। इनमें सबसे बड़ा भाग सन्थाली बोलने वालों का है।

(2) द्रविण:-

     इसके सदस्य मध्य और दक्षिणी भारत में रहते हैं। इसके अन्तर्गत निम्नांकित चार साहित्यिक भाषाएं आती हैं-तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालय। द्रविण समूह में निम्नांकित तीन समूह हैं-

(i) दक्षिणी द्रविण,

(ii) मध्य द्रविण तथा

(iii) उत्तरी द्रविण।

     दक्षिणी द्रविण समूह में दक्षिणी भारत का बड़ा भाग सम्मिलित है जिसमें तमिल, मलयालम तथा कन्नड़ भाषाएं बोली जाती हैं। मध्य द्रविण में तेलुगु तथा गोंडी भाषाएं सम्मिलित हैं जबकि उत्तरी द्रविण समूह में कुराख (ओरांव) तथा माल्टो हैं।

(3) चीनी-तिब्बती:-

      इसे भाषाओं का किरात समूह भी कहा जाता है। इस भाषा परिवार में हिमालय के दक्षिणी ढालों, उत्तरी पंजाब से भूटान, उत्तरी तथा पूर्वी बंगाल और असम में पाई जाने वाली इण्डो मंगोलाइड प्रगति के लोगों में प्रचलित भाषाएं आती हैं। भारत में तिब्बती भाषा बोलने वालों की निम्नांकित शाखाएं हैं:-

(i) तिब्बत-हिमालयी,

(ii) उत्तरी असम,

(iii) असम म्यांमारी। (बर्मी)।

      तिब्बत-हिमालयी शाखा में भूटिया समूह तथा हिमालयन समूह हैं। भूटिया समूह में तिब्बत, बेल्टी, लद्दाखी, लाहुली, शेरपा तथा सिक्किम भूटिया सम्मिलित हैं। हिमालयन समूह में चम्बा, कनौरी तथा लेप्चा हैं।

     उत्तरी असम समूह में अका, इफला, अबोर, मिरी, मिशमी तथा निशिंग हैं। इनमें मिरी सबसे अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है।

    असम म्यांमारी भाषा को पुनः निम्नांकित उपविभागों में विभाजित किया जा सकता है-बोडा, नागा, कचिन, कुकिचिन, म्यांमार।

(4) इण्डो यूरेपियन:-

      इसके अन्तर्गत दो मुख्य शाखाएं हैं:

(i) डारडिक तथा

(ii) इण्डो-आर्यन।

    डारडिक समूह में दारदी, शिना, कोहिस्तानी तथा कश्मीरी, आदि हैं। इनमें कश्मीरी सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाती है।

    इण्डो-आर्यन शाखा को पुनः उत्तर-पश्चिमी, दक्षिणी, पूर्वी, पूर्वी-मध्य, मध्य तथा उत्तरी समूहों में उपविभाजित किया जाता है।

प्रश्न प्रारूप 

Q. भाषा क्या है? इसकी उत्पत्ति तथा भारत में भाषाओं का वर्गीकण कीजिए।

21. Fundamental Concepts in Human Geography (मानव भूगोल में मौलिक अवधारणाएँ)

Fundamental Concepts in Human Geography

(मानव भूगोल में मौलिक अवधारणाएँ)



अवधारणाएँ (Concepts):-

      अवधारणाएँ किसी भी विषय का एक महत्वपूर्ण अंग होती है, क्योंकि वे उस विषय को एक अलग पहचान देने का काम करती है। जबकि एक विषय की मौलिक अवधारणाएँ उस विषय में अध्ययन किए गए तथ्यों की प्रकृति और उन तथ्यों का अध्ययन करने हेतु अपनाए गए परिप्रेक्ष्य या दृष्टिकोण पर निर्भर करती है, क्योंकि पृथक् पृथक् विषय तथ्यों के पृथक् पृथक् समूहों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं और पृथक पृथक परिप्रेक्ष्य का प्रयोग करते है इसलिए उनके पास अवधारणाओं का उनका अपना विशिष्ट समूह होता है।

    मानव भूगोल की कुछ अवधारणाएँ तो अभिन्न अंग है जो मानव भूगोल की विशिष्ट प्रकृति को चरित्रित करने में उपयोगी है। इसी कारण इन्हें मानव भूगोल की मूलभूत अवधारणाओं के रूप में जाना जाता है। मानव भूगोल की मूलभूत अवधारणाएँ समय (काल), स्थान/जगह, अवस्थिति, स्थानिक वितरण, स्थानिक अंत: क्रिया और स्थानिक संगठन मानव भूगोल की अपनी मूल अवधारणाएँ है।

     जबकि दूसरी ओर समय (काल), समाज, संस्कृति, धारणा, व्यवहार, विकास और असमानता जैसी अवधारणाएँ व्युत्पन्न अवधारणाएँ है। अतः मानव भूगोल की मूलभूत अवधारणाओं का विस्तृत अध्ययन निम्न प्रकार है-

(1) मापक (Scale):-

    मानचित्र का मापक मानचित्र पर दूरी तथा धरातल पर वास्तविक दूरी का अनुपात है। जैसे मानचित्र पर 1 इंच धरातल पर 20 मील को प्रदर्शित कर सकता है। द्वितीय मापक का विश्लेषण किसी क्षेत्रीय इकाई के आकार के रूप में करता है जिस पर किसी समस्या का विश्लेषण किया जाता है, जैसे- देश, राज्य या जिला स्तर।

    तथ्य विषयक/ परिघटनात्मक मापक का मतलब उस आकार से है जिस पर भौगोलिक संरचनाएँ उपलब्ध है अथवा जिस पर भौगोलिक प्रक्रिया संसार में काम कर रही है। विद्वानों द्वारा अध्ययन किए गए तथ्य-विषयकों/परिघटना को सूक्ष्म, समष्टि या वृहत् स्तर पर देखा जा सकता है। यह स्थानीय, प्रादेशिक या वैश्विक स्तर पर भी उपलब्ध हो सकते है। जैसे- एक समुदाय द्वारा बोली जाने वाली बोली स्थानीय स्तर पर मिलती है जबकि एक भाषा प्रादेशिक स्तर या वैश्विक स्तर पर मिलती है।

(2) समय/काल और जगह/स्थान (Time/Period and Place/Space):-

      समय तथा जगह दोनों पृथ्वी की सतह पर किसी भी वस्तु के अस्तित्व की दो मूलभूत वास्तविकताएँ है। काण्ट (1724-1804) का मत था कि समय (काल) और जगह स्थान मानव अनुभव की सम्पूर्ण परिधि को भरते है। मानव सहित समस्त कुछ समय (काल) और जगह स्थान के अन्तर्गत होता है।

   समय (काल) और जगह दोनों को रोजमर्रा के शब्दों के रूप में जाना जाता है, क्योंकि हम समस्त अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में समय एवं जगह सम्बन्धी तथ्यों का सामना करते हैं। फलस्वरूप, हम सभी को इन शब्दों के बारे में सामान्य समझ है। इसके बावजूद इन अवधारणाओं को परिभाषित करना मुश्किल है। समय के साथ दो लगातार घटित घटनाओं का पृथक्‌करण है। जबकि जगह को दो स्थानों के मध्य पृथक्‌करण के रूप में माना गया है।

     इतिहास समय (काल) के साथ सम्बन्धित है। इसी कारण इतिहासकार वास्तविकता के लौकिक या सामयिक आयाम से सम्बन्ध रखते है। वे मुख्य रूप से समाज के लौकिक या सामयिक क्रम विकास का अध्ययन करने में रुचि रखते हैं। मानव इतिहास में अब तक जो कुछ घटित हुआ है, वह केवल विशिष्ट स्थानों पर हुआ है जबकि भूगोल का सम्बन्ध जगह से है। इसलिए भूगोलवेत्ता वास्तविकता के स्थानिक आयामों से सम्बन्ध रखते है। अतः भूगोल को एक क्षेत्र या स्थानिक विज्ञान के रूप में परिभाषित किया गया है।

      समय एवं जगह की अवधारणाओं की परस्पर अन्तनिर्भरता इतिहास और भूगोल के मध्य घनिष्ठ सम्बन्ध की वकालत करते है। यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस (485-428 ई. पू.) का मत है कि “सम्पूर्ण इतिहास को भौगोलिक रूप से देखना चाहिए और सम्पूर्ण भूगोल को ऐतिहासिक रूप से देखना चाहिए।”

(3) क्षेत्र, स्थान और प्रदेश (Area, Place and Region):-

     कई विद्वानों ने संसार को समझने हेतु क्षेत्र, स्थान एवं प्रदेश की अवधारणा को विकसित किया है। क्षेत्र शब्द सामान्यतः किसी स्थान के एक भाग या पृथ्वी की सतह के एक भाग के रूप में माना गया है जिसका एक निश्चित विस्तार एवं सीमा होती है, परन्तु यह किसी आकार का हो सकता है। यह एक सामान्य अवधारणा है, परन्तु इसकी कोई निश्चित अवस्थिति नहीं होती है।

    वहीं दूसरी ओर एक स्थान अपनी भौतिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं या कार्यों के रूप में विशिष्टता व विलक्षणता के कारण निश्चित या अनिश्चित सीमा का क्षेत्र है। किसी स्थान की भौतिक विशेषताओं में भू-आकृतियाँ, जलाशय, मिट्टी, तापमान, वर्षा, वायु, जीव एवं वनस्पति तथा जीवन आदि सम्मिलित है। जबकि सांस्कृतिक विशेषताओं में मानव अधिवास, कारखाने, अस्पताल, विद्यालय, रक्षा प्रतिष्ठान, सड़कें, रेलवे, भाषा, धर्म आदि सम्मिलित है।

(4) तंत्र (Mechanism):-

     तंत्र एक-दूसरे से अंतः परस्पर या एक-दूसरे से जुड़े तत्वों का समूह है या जुड़े हुए सिरों का समूह तंत्र है। पृथ्वी की सतह पर अवस्थित या वितरित तत्व स्थानिक तत्व है। परिवहन तंत्र स्थानिक तंत्र की व्यापक श्रेणी से सम्बन्धित है। जबकि जैविक प्रणाली, सामाजिक तंत्र, कार्यालय व्यवस्थान गैर-स्थानिक तंत्र के उत्तम उदाहरण है। भूगोल विशेषज्ञ अधिकतर स्थानिक तंत्र में ध्यान केन्द्रित रखते है।

     एक तंत्र एवं उसकी संयोजकता का प्रतीकात्मक प्रदर्शन रेखाचित्र के रूप में होता है। यह संधियों द्वारा जुड़े असंधियों या किनारों का एक समूह होता है। स्थानिक तंत्र के दो सबसे महत्वपूर्ण तत्व शीर्ष (Vertex) और छोर (edge or link) है। एक असंधि एक रेखाचित्र का एक अंतिम बिंदु या प्रतिच्छेदन बिंदु है। परिवहन तंत्र में असंधि (nodes) का उत्तम उदाहरण सड़क का चौराहा या परिवहन टर्मिनल है।

    मानव भूगोल के प्रमुख विद्वान मानव के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक तत्वों को पृथ्वी की सतह पर व्यवस्थित और संरचित करने के तरीकों के अध्ययन में रुचि लेते हैं। इनमें सड़क तंत्र, रेलवे तंत्र, बिजली तंत्र, संचार तंत्र, सामाजिक एवं संपर्क तंत्र आदि प्रमुख है।

(5) स्थानिक अंतः क्रिया (Spatial Interaction):

     स्थानिक अंतःक्रिया द्वारा पृथ्वी एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। इसलिए एक स्थान के व्यक्ति दूसरे स्थान के व्यक्तियों से सम्पर्क एवं सम्बन्ध स्थापित करते हैं। गाँव से गाँव के मध्य, गाँव से शहरों के मध्य, शहरों का शहरों के मध्य और बन्दरगाह एवं आन्तरिक प्रदेशों के मध्य अन्त: क्रिया होती है। व्यक्ति वस्तुओं, सेवाओं, पैसा, सूचना और विचारों का संचार तथा आदान-प्रदान के कारण स्थानों के मध्य स्थापित अंतर्निर्भरता का सम्बन्ध स्थानिक अंत: क्रिया कहा जाता है।

(6) अवस्थिति एवं स्थानिक वितरण (Location and Spatial Distribution):-

     मानव भूगोल में भूगोलवेत्ता पृथ्वी पर स्थानों, परिघटनाओं की अवस्थिति एवं वितरण की व्याख्या करते हैं, जबकि मानव भूगोल में प्रयुक्त होने वाली अवस्थिति और वितरण की अवधारणा को जानने हेतु सर्वप्रथम स्थानिक, वितरण, अवस्थिति, परिघटना और परिमाण की अवधारणाओं को जानना होगा। गॉर्डन जे. फील्डिंग (1974) ने इन शब्दों की अवधारणाओं के मध्य अन्तर स्पष्ट किया है। स्थानिक शब्द इंगित करता है कि एक परिघटना पृथ्वी की सतह के एक हिस्से को अधिग्रहित करती है। जबकि वितरण एक-दूसरे से सम्बन्धित परिघटनाओं का संयोजन है और वितरण एक प्रकार की परिघटना की व्यवस्था है।

(7) पदानुक्रम और स्थानिक व्यवस्थापन (Hierarchy and Spatial Organisation):-

    पदानुक्रम (Hierarchy) आकार, कार्य या महत्व के किसी अन्य आधार पर वस्तुओं को क्रमबद्ध या श्रेणीबद्ध किया जाता है। स्थानिक शब्द में कल्पना की जाती है कि संसार का आकार, कार्यात्मक महत्व या भौगोलिक महत्व का पदानुक्रम में व्यवस्थित करता है। पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों और वस्तुओं की श्रेणी या क्रम को स्थानिक पदानुक्रम में रखा जाता है। जैसे भारत में बस्तियों का पदानुक्रम।

     जनसख्या के आधार पर भारत में बस्तियों सबसे बड़ी इकाई (महानगर) से लेकर सबसे छोटी इकाई (पल्ली गाँव) तक होती हैं। इसके अलावा भारत की जनगणना के आधार पर शहरी बस्तियों के पदानुक्रम में रखा गया है। स्थानिक पदानुक्रम का एक उत्तम उदाहरण प्रादेशिक पदानुक्रम है। एक प्रदेश समान श्रेणी के प्रदेशों के पदानुक्रम में एक नियत स्थान रखता है। जैसे भारत का सम्पूर्ण क्षेत्र 6 जल संसाधन प्रदेशों में बंटा है। प्रत्येक जल संसाधन प्रदेश में अनेक द्रोणियाँ है। एक द्रोणी कई जलग्रहण क्षेत्रों के मिलने से बनती है एक जलग्रहण क्षेत्र में कई उप-जलग्रहण क्षेत्र होते हैं। एक उप-जलग्रहण क्षेत्र कई वाटरशेड में विभाजित होते है।

    मानवीय बस्तियों का आकार मुख्यतः उनके मध्य अन्तः क्रिया का स्तर निर्धारित करता है। कम जनसंख्या वाली बस्तियों की तुलना में अधिक जनसंख्या वाली बस्तियों के मध्य से सम्बन्धित है। जबकि देहरादून दूरी के कारण दिल्ली के निकट है मुम्बई-देहरादून की तुलना में दिल्ली से अधिक दूर होने पर भी यहाँ स्थानिक पदानुक्रम की अवधारणा का प्रयोग देश के प्रशासन और विकास की योजना का निर्धारण होता है। जैसे-प्रशासनिक उद्देश्य हेतु देश राज्यों और जिलों में बाँट दिया जाता है।

(8) अन्तर्सम्बन्ध की संकल्पना (Concept of Inter-relationship):-

   इसे पार्थिव एकता की संकल्पना के नाम से भी जाना जाता है। विश्व के सभी भौगोलिक तत्व चाहे वे प्राकृतिक हो या मानवीय एक-दूसरे से किसी-न-किसी रूप में सम्बन्धित होते है और किसी भी तत्व का अकेले तथा स्वतंत्र कोई अस्तित्व नहीं है। सभी तथ्य एक-दूसरे को प्रभावित करते है।

    अतः किसी प्रदेश का वास्तविक भृदृश्य वहाँ के सभी तथ्यों के मिले-जुले प्रभावों का परिणाम होता है। किसी प्रदेश में मानव जीवन के विवेचन के लिए वहाँ की भौगोलिक दशाओं का अध्ययन आवश्यक हो जाता है, क्योंकि मानव जीवन उनसे निश्चित रूप से सम्बन्धित तथा प्रभावित होता है। इसी कारण मानव भूगोल को “मानव पारिस्थितिकी” का अध्ययन माना जाता है।

    जर्मन विद्वान फ्रेडरिक रैटजेल ने “पार्थिव एकता के सिद्धान्त” को ही प्रमुखता प्रदान की थी। इनके अलावा ब्लाश, बूंश, डिमांजिया आदि भूगोलविदों ने भी ‘पार्थिव एकता या अन्तर्सम्बन्धों के सिद्धान्त’ को मानव भूगोल का प्रमुख सिद्धान्त माना है।

(9) कालिक परिवर्तन की संकल्पना (Concept of Temporal Change):-

    कालिक परिवर्तन की संकल्पना को ‘क्रियाशीलता का सिद्धान्त’ के नाम से भी जाना जाता है। विश्व में कोई तत्व पूर्णतः स्थायी नहीं है. क्योंकि यह दुनिया ही परिवर्तनशील है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। पर्यावरण के सभी तत्व चाहे वे प्राकृतिक हों या सास्कृतिक, जड़ हो या चेतन सभी परिवर्तनशील हैं। उनमें परिवर्तन की क्रिया निरन्तर क्रियाशील रहती है। बूंश के शब्दों में “हमसे सम्बन्धित प्रत्येक वस्तु परिवर्तित हो रही है, प्रत्येक वस्तु बढ़ रही है या घट रही है। वास्तव में कुछ भी बिना परिवर्तन के नहीं है।” प्रत्येक जीव अथवा वस्तु सभी अपनी उत्पत्ति से विनाश तक जीवन चक्र में परिवर्तित होती रहती है।

(10) सांस्कृतिक भूदृश्य की संकल्पना (Concept of Cultural Landscape):-

    किसी प्रदेश में भू-आकृत्तियों, वनस्पतियाँ, जलाशयों, मानव भूमि उपयोग तथा अन्य प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक तत्वों के सम्पूर्ण योग को भूदृश्य कहा जाता है। तत्वों की प्रकृति के अनुसार उन्हें प्राकृतिक भूदृश्य और सांस्कृतिक भूदृश्य में बाँटा जाता है। भूदृश्य की संकल्पना परम्परागत भूगोल का अभिन्न अंग रही है। जर्मन भाषा में भूदृश्य के समानार्थी ‘लैण्डशाफ्ट’ (Landschaft) शब्द का प्रयोग किया जाता है।

    अमेरिकी भूगोलवेत्ता कार्ल सावर ने भूदृश्य की व्याख्या की है और उन्होंने कहा है कि सम्पूर्ण भूदृश्य में प्राकृतिक तत्वों के समुच्चयिक स्वरूप को प्राकृतिक भूदृश्य और मानवकृत तत्वों के समुच्चयक स्वरूप को सांस्कृतिक भूदृश्य कहा जा सकता है। मानव द्वारा निर्मित गृह, ग्राम, नगर, मार्ग, सड़क, खेत, बाग-बगीने, फसलें, कल-कारखाने, खेल के मैदान, पार्क आदि सांस्कृतिक भूदृश्य के प्रमुख घटक है।

(11) नियतिवाद की संकल्पना (Concept of Determinism):-

     भूगोल में मानव एवं पर्यावरण के बीच संबंधो का अध्ययन हेतु अनेक पद्धति एवं वैचारिक सम्प्रदाय का विकास हुआ। उनमें से एक विचार निश्चवादी के नाम से जाना जाता है। भूगोल में द्वितीय विश्वयुद्ध तक निश्चयवादी विचार का प्रभाव बना रहा। निश्चयवादी विचार का तात्पर्य है- समय का इतिहास, सभ्यता, जीवनशैली, संस्कृति एवं राष्ट्र की सभी धारणाएँ पर्यावरण के द्वारा निर्धारित एवं संचालित होती है।

    भौतिक दशाओं के अनुसार ही मानव के शारीरिक गठन, उसके भोजन, वस्त्र, आवास आदि प्राथमिक आवश्यकताओं, व्यवसायी तथा सामाजिक व सांस्कृतिक क्रियाओं का निर्धारण होता है। इसमें प्रकृति की प्रबलता पर बल दिया है और मनुष्य को प्रकृति का दास माना है। जर्मन भूगोलवेत्ता रैटजेल इस विचारधारा के प्रबल समर्थक थे। इस विद्यारधारा को पर्यावरणवाद या पर्यावरणीय नियतिवाद के नाम से भी जाना जाता है।

(12) सम्भववाद की संकल्पना (Concept of Possibilism):-

    ‘सम्भववाद’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग फ्रांसीसी भूगोलवेत्ता लुसियन फैबे (1922) ने किया था, लेकिन इसका प्रतिपादन इससे पूर्व विडाल डी ला ब्लाश के द्वारा किया जा चुका था। अधिकतर फ्रांसीसी भूगोलवेत्ताओं ने मानव की स्वतन्त्रता और उसके कार्यों को बल दिया तथा नियतिवाद विचारधारा की कटु आलोचना की। ब्लाश के अनुसार, “प्राकृतिक वातावरण मानव को सम्भावनाएँ प्रदान करता है, उसके बदले में मानव अपनी आवश्यकताओं, इच्छाओं तथा क्षमताओं के आधार पर उनका उपयोग करता है।” एक अन्य स्थान पर ब्लाश ने लिखा है, “प्रकृति असंख्य सम्भावनाएँ प्रदान करती है तथा इन सम्भावनाओं का उपयोग मानवीय छांट पर निर्भर करता है।”

(13) नवनिश्चयवाद की संकल्पना (Concept of Neodeterminism):-

    नवनिश्चयवाद, नियतिवाद की संशोधित विचारधारा है, जो व्यावहारिक जगत् के अधिक पास है। इसका प्रतिपादन अमेरिकन भूगोलवेत्ता ग्रिफ्थ टेलर ने किया। टेलर ने इस विचारधारा को ‘वैज्ञानिक निश्चयवाद’ तथा रुको और जाओ निश्चयवाद की संज्ञा दी। टेलर का मानना था कि न तो प्रकृति का मानव पर पूर्ण नियन्त्रण है और न ही मानव का प्रकृति पर। दोनों में एक सक्रिय क्रियात्मक अन्तर्सम्बंध है।

(14) व्यवहारपरक भूगोल की संकल्पना (Concept of Behavioural Geography):-

    यह मानव भूगोल की एक नवीन संकल्पना है। इस विचारधारा का प्रारम्भ अमेरिकन भूगोलवेत्ता विलियम किर्क द्वारा प्रकाशित लेख ‘Historical Geography and the Concept of Behavioural Environment’ के माध्यम से हुआ। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अन्तरविषयक अध्ययन का दौर प्रारंभ हुआ। अन्तरविषयक अध्ययन के परिणाम स्वरूप भूगोल में कई क्रांतियों का आगमन हुआ जिनमें मात्रात्मक क्रांति और आचारपरक या व्यावहारात्मक क्रांति प्रमुख था।

    आचारपरक क्रांति का अभ्युदय मात्रात्मक क्रांति के विरोध में हुआ क्योंकि मात्रात्मक क्रांति ने मानव को पूर्णतः मशीनीकृत बना दिया था। मात्रात्मक क्रांति ने मानवीय चेतना, बौद्धिकता, व्यवहार, सौंदर्य, श्रृंगार रस इत्यादि को कोई महत्व नहीं दिया था। अर्थात मात्रात्मक क्रांति ने भूगोल को एक निर्जीव विषय बना दिया था। इस तरह भूगोल में मनोविज्ञान तथ्यों का अध्ययन प्रारंभ किया गया ताकि भूगोल को मानवीय चेतनाओं से मुक्त विषय बनाया जाय।

(15) अतिवादी भूगोल की संकल्पना (Concept of Radical Geography):-

    अतिवादी भूगोल को उग्र सुधारवाद या अमूल्य चुल परिवर्तनवादी क्रांतिकारी उपागम के नाम से जानते है। अतिवादी भूगोल का जन्म 1960-70 ई० के दशक में USA में हुआ। भूगोल में अतिवाद का उदय मात्रात्मक क्रांति और स्थानिक विश्लेषण के विरोध में हुआ। यह साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित है लेकिन इसका उद‌य साम्यवादी या समाजवादी देशों में न होकर पूँजीवादी देश USA में हुआ है।

    अतिवादी भूगोल के विचारधारा को विकसित करने में अमेरिका के क्लार्क विश्वविद्यालय और वहाँ से प्रकाशित होने वाला पत्रिका ‘एंटीपोड’ का विशेष योगदान है। व्यक्तिगत रूप से डेविड हार्वे और जे.आर. पीट जैसे भूगोलवेताओं का योगदान रहा है। इस विचारधारा का विकास मूलतः पूर्व संस्थापित नियमो की नकारात्मक प्रतिक्रिया के रूप में हुआ था जिसका केन्द्र बिन्दु मानव कल्याण से सम्बद्ध सामाजिक मूल्यों का प्रश्न है।

        निष्कर्षतः जा सकता है कि मात्रात्मक कांति, व्यावहारात्मक क्रांति,  प्रत्यक्षवादी दर्शन, भूगोल को मानवीय समस्याओं के समाधान से दूर रखकर इसके आधार को ही समाप्त कर रहे थे लेकिन अतिवादी भूगोल ने सामाजिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर भूगोल में नई दृष्टि का सूत्रपात्र किया।

(16) मानवतावादी भूगोल की संकल्पना (Concept of Humanistic Geography):-

    मानवतावादी भूगोल प्रत्यक्षवाद के भी विरुद्ध है क्योंकि प्रत्यक्षवाद उन्हीं तथ्यों का अध्ययन करता है जिसे आँखों से देखा जा सके। लेकिन मानवतावाद एवं कल्याणकारी उपागम वैसे तथ्यों का अध्ययन करता है जिसे मात्र अनुभव किया जा सके। ‘मानवतावादी’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1976 में ‘तुआन’ ने किया था।

     मानववाद का सर्वप्रथम आरम्भ 20वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में ब्लाश के नेतृत्व में फ्रांसीसी विद्वानों ने किया था। भौगोलिक अध्ययनों में मानवतावादी दृष्टिकोण का समावेश 1970 के दशक में प्रारम्भ हुआ। मानवतावादी विचारधारा भौगोलिक अध्ययनों में मानवीय जागरूकता, मानवीय चेतना तथा मानवीय क्रियात्मकता को केन्द्रीय एवं सक्रिय भूमिका प्रदान करती है। इस विचारधारा से अनुप्रेरित मानववादी भूगोल अपने भौगोलिक अध्ययनी में मानवीय अनुभवो, मानवीय मूल्यों के आकलन एवं मूल्यांकन की महत्व प्रदान करता है।

(17) कल्याणपरक भूगोल की संकल्पना (Concept of Welfare Geography):-

      मानव भूगोल की इस अभिनव प्रवृत्ति के अन्तर्गत विकसित इस विचारधारा ने मानव भूगोल की एक नवीन शाखा को उद्धृत किया है, जिसे परिवर्तनवादी भूगोल अथवा क्रान्तिकारी भूगोल की संज्ञा दी जा रही है। यद्यपि मानव कल्याणपरक भूगोल से सम्बन्धित अध्ययन सन् 1960 के बाद ही प्रारम्भ हो गये थे, किन्तु सन् 1971 में लन्दन में प्रकाशित ‘एरिया’ शोध पत्रिका में डेविड स्मिथ के क्रान्तिकारी भूगोल पर लेख प्रकाशित हुए। सन् 1977 में इससे सम्बन्धित दो पुस्तके प्रकाशित हुई।

    वर्तमान में मानव कल्याणपरक विचारधारा विकराल रूप लेती जा रही मानवीय समस्याओं, जैसे गरीबी, भुखमरी, अकाल, युद्ध, जाति-भेद, रंग-भेद, नैतिक मूल्यों में गिरावट, पर्यावरण प्रदूषण आदि से सम्बन्धित है। इसके अन्तर्गत हम समाज के कल्याण पर विभिन्न भौगोलिक नीतियों के सम्भावित प्रभावों का अध्ययन करते है। यह संकल्पना ‘सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय’ की अवधारणा पर आधारित है।

1. River Valley Regions (नदी घाटी क्षेत्र)

1. River Valley Regions

(नदी घाटी क्षेत्र)



        नदी घाटी क्षेत्र एक ऐसी घाटी होती है जो नदी द्वारा आसपास के परिदृश्य को काट कर बनाई जाती है, जिससे V-आकार का रूप बनता है। यह क्षेत्र कृषि, जल संसाधन और परिवहन के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं।

नदी घाटी क्षेत्र की विशेषताएं:-

(i) V-आकार की घाटी:-

        नदी के पानी में बहने वाली चट्टानें नदी के तल को काटती हैं, जिससे V-आकार की घाटी बनती है।

(ii) कृषि के लिए उपजाऊ:-

        नदी के किनारे की मिट्टी जिसे खादर कहते है, काफी उपजाऊ होती है। यह मिट्टी कृषि के लिए उपयुक्त होती है।

(iii) जल संसाधन:-

        नदियाँ पीने और सिंचाई के लिए पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

(iv) परिवहन:-

       नदियाँ परिवहन के लिए भी महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि वे जलमार्ग प्रदान करती हैं।

(v) सभ्यता का विकास:-

       कई प्राचीन सभ्यताएँ नदी घाटियों में ही विकसित हुई हैं, जैसे कि सिंधु घाटी सभ्यता।

भारत में नदी घाटी परियोजनाएँ:

     भारत में कई नदी घाटी परियोजनाएँ जो कि बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ हैं। ये मुख्यतः बिजली उत्पादन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण, नौ संचालन, मत्स्य पालन जैसे उद्देश्यों के लिए बनाई गई हैं। 

जैसे- दामोदर नदी घाटी परियोजना, नर्मदा नदी घाटी परियोजना, भाखड़ा नांगल परियोजना, इडुक्की परियोजना, उकाई परियोजना, ऊपरी कृष्णा परियोजना, कोसी परियोजना, गण्डक परियोजना आदि। 
River Valley Regions

नदी घाटी क्षेत्र की संकल्पना:

      नदी घाटी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्र है जिसे क्षेत्रीय विकास नियोजन में एक इकाई के रूप में लिया जा सकता है। इसमें मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा प्रवाहित क्षेत्र शामिल है। यह भौतिक और सामाजिक रूप से एकीकृत क्षेत्र है और इसे नियोजन क्षेत्र की एक आदर्श इकाई के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

    नदी घाटी नियोजन विकास और संरक्षण दोनों को एक साथ लाने का एक पारिस्थितिक रूप से सुदृढ़ और आर्थिक रूप से लागत प्रभावी साधन है। संपूर्ण नदी बेसिन को विकसित करने में शामिल विचार क्षेत्रवार आधार पर विकास को प्रेरित करना है ताकि सभी प्राकृतिक संसाधन बेसिन की सभी उप-इकाइयों को स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हों। इसलिए नदी बेसिन नियोजन की अवधारणा को क्षेत्रीय विकास दृष्टिकोण के एक भाग के रूप में देखा जाता है।

नदी घाटी क्षेत्र के लिए अलग नियोजन:

    भारत के सिंचाई आयोग (1972) ने नदी बेसिन योजना के निर्माण के लिए निम्नलिखित नीति की सिफारिश की है-

(i) बेसिन योजना को क्षेत्रीय और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए भूमि-जल संसाधनों की एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करनी चाहिए।

(ii) मांग के अनुसार जरूरतों को पूरा करने के लिए बेसिन में विभिन्न इंजीनियरिंग कार्य किए जाने चाहिए। जैसे- जल संसाधनों का प्राथमिकता के अनुसार उपयोग, परियोजनाओं की प्राथमिकता।

(iii) योजना की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए तथा बदलती जरूरतों और आपूर्ति के मद्देनजर आवश्यकतानुसार इसमें संशोधन किया जाना चाहिए।

       यह अर्थव्यवस्था को प्रेरित करने के लिए जल प्रेरित विकास पर आधारित है तथा अंतरराज्यीय नदी बेसिन के लिए सहयोग की आवश्यकता है।

उद्देश्य:

      नदी घाटी क्षेत्र नियोजन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:-

(i) जल संसाधनों का उचित प्रबंधन:-

      नदी घाटी क्षेत्र में जल की उपलब्धता, उपयोग और वितरण को योजनाबद्ध तरीके से प्रबंधित करना ताकि सभी क्षेत्रों और उपयोगों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके।

(ii) बाढ़ नियंत्रण:-

     बाढ़ के खतरों को कम करने और बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए बांध, तटबंध और अन्य संरचनाओं का निर्माण करना।

(iii) समुचित सिंचाई की व्यवस्था करना:-

      कृषि के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई प्रणालियों का विकास करना, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हो सके।

(iv) बिजली उत्पादन:-

       जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से बिजली का उत्पादन करना जो ऊर्जा की आवश्यकता को पूरा करने में मदद करता है।

(v) भूमि उपयोग योजना:-

    नदी घाटी क्षेत्र में भूमि के विभिन्न उपयोगों (जैसे कृषि, उद्योग, आवास) को योजनाबद्ध तरीके से व्यवस्थित करना, ताकि संसाधनों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग हो सके।

(vi) पर्यावरण संरक्षण:-

       नदी घाटी क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करना, ताकि भविष्य में भी इनका लाभ उठाया जा सके।

(vii) सामाजिक-आर्थिक विकास:-

       नदी घाटी क्षेत्र के निवासियों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, जैसे कि रोजगार सृजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार।

(viii) मत्स्य पालन और पर्यटन:-

      नदी घाटी क्षेत्र में मत्स्य पालन और पर्यटन को बढ़ावा देना, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के अवसर मिल सकें।

नदी घाटी क्षेत्र की समस्याएं:

1. विभिन्न फसलों के लिए भूमि और जल की उपयुक्तता और उपयोग के लिए उचित भूमि-जल प्रबंधन नहीं होना।

2. वैकल्पिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभाव।

3. बाढ़, फसलों की अनिश्चितता, जीवन और संपत्ति।

4. प्रति हेक्टेयर कम उत्पादन।

5. वर्षा पर कृषि की निर्भरता।

6. ग्रामीण संरचनात्मक सुविधाओं का अभाव।

7. वर्षा जल की बर्बादी।

8. मृदा अपरदन।

9. पेयजल की समस्या।

10. वन अपरदन।

11. फसल की उपयुक्तता के लिए मिट्टी के वैज्ञानिक परीक्षण और उचित नियोजन का अभाव

योजना और संभावनाएँ:

(i) कृषि

(ii) मत्स्य पालन

(iii) जलीय कृषि

(iv) उद्योग

(v) जल विज्ञान शक्ति

      बाढ़ प्रतिरोधी फसलें- अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, मनीला द्वारा 2004 में “स्वर्ण जलमग्नता-I” के रूप में विकसित चावल की किस्म और ढाका में चावल अनुसंधान द्वारा प्रचलित।

     एक नदी बेसिन का जल निकासी बेसिन योजनाबद्ध विकास के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य, शारीरिक रूप से एकीकृत और व्यापक रूप से स्वीकृत क्षेत्रीय इकाई साबित हुआ है।

     नदी बेसिन एक प्राकृतिक अपेक्षाकृत आसानी से परिभाषित क्षेत्र है। इसमें संसाधन संपदा के कई तत्व हैं, जो अधिकांश भाग में सांस्कृतिक और पारिस्थितिक प्रक्रिया से जुड़े हैं, सतह विन्यास, मिट्टी, वनस्पति और जलवायु उन तत्वों में से हैं जो जल निकासी बेसिन के भीतर पानी से जुड़े हैं।

     नदी बेसिन को पहली बार संयुक्त राज्य अमेरिका में क्षेत्रीय नियोजन के लिए एक इकाई के रूप में 1933 में लिया गया था जब टेनेसी वैली अथॉरिटी (TVA- टेनेसी घाटी प्राधिकरण) की स्थापना की गई थी।

    भारत में मार्च, 1948 में दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) को नदी बेसिन विकास के उद्देश्य से एक केंद्रीय सरकारी एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ को नियंत्रित करना और सिंचाई, बिजली उत्पादन, नौवहन, जल आपूर्ति, मृदा संरक्षण, मत्स्य विकास आदि के लिए प्रावधान करना था।

वाटरशेड क्षेत्र

      वाटरशेड एक भौगोलिक क्षेत्र है जो वर्षा जल को एक सामान्य बिंदु पर बहा देता है। अर्थात वाटरशेड भूमि का वह क्षेत्र होता है जिसका समस्त अपवाहित जल एक ही बिंदु से होकर गुजरता है। वर्षा जल का आकार इसके आगे के वर्गीकरण का आधार बनता है।

      वाटरशेड क्षेत्र को आकार के अनुसार कई प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है। जैसे-

(i) मिनी-वाटरशेड (Mini-Watershed):

      यह सबसे छोटा प्रकार का वाटरशेड है, जिसका क्षेत्र 1 से 100 हेक्टेयर तक होता है।

(ii) माइक्रो-वाटरशेड (Micro-Watershed):

      इस प्रकार के वाटरशेड का क्षेत्र 100 से 1000 हेक्टेयर के बीच होता है।

(iii) मिली-वाटरशेड (Milli-Watershed):

       इस प्रकार के वाटरशेड का क्षेत्र 1000 से 10,000 हेक्टेयर के बीच होता है।

(iv) सब-वाटरशेड (Sub-Watershed):

        इस प्रकार के वाटरशेड का क्षेत्र 10,000 से 50,000 हेक्टेयर के बीच होता है।

(v) मैक्रो-वाटरशेड (Macro-Watershed):

      यह सबसे बड़ा प्रकार का वाटरशेड है, जिसका क्षेत्र 50,000 हेक्टेयर से अधिक होता है।

योजना का उद्देश्य:

1. जल संरक्षण

2. वर्षा जल संचयन

3. पेयजल का समाधान

4. सिंचाई सुविधाएँ

5. वानिकी और मत्स्य पालन

6. कृषि और जलीय कृषि

नियोजन के लिए एक इकाई के रूप में नदी घाटी क्षेत्र: समस्याएं

⇒ इसमें भौतिक, सामाजिक और आर्थिक एकरूपता नहीं है और इसलिए इसे बहु-स्तरीय नियोजन की आवश्यकता है।

⇒ इसकी बहु-राष्ट्रीय सीमाएँ हो सकती हैं।

विकास की गति में असमानता

⇒ अंतर-राज्यीय विवाद

39. Relief and Slope Analysis / उच्चावच एवं ढाल विश्लेषण

Relief and Slope Analysis

(उच्चावच एवं ढाल विश्लेषण)



उच्चावच (Relief)

     धरातल के किसी भूभाग का सबसे अधिक तथा सबसे कम ऊँचाई में जो अन्तर होता है, वह उस भूभाग का उच्चावच (Relief) कहलाता है। उच्चावच कई विधियों द्वारा दर्शाया जाता है, जैसे समुद्रतल स्थल की ऊँचाई (Spot height), समोच्च रेखायें (Contour lines), छाया (Shading) एवं रंग (Colouring)।

    “धरातलीय मानचित्र में Spot height किसी स्थान का समुद्रतल से ऊंचाई दिखता है। नीचे चित्र में Spot height, समोच्च रेखा द्वारा, छाया द्वारा तथा रंग द्वारा दिखाया गया है। यह रंग भारत के सर्वेक्षण विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त है। मैदानी भाग को हरा रंग से, अधिक ऊँचे भाग को भूरा, पठारी भाग को पीला तथा जलीय भाग को नीला रंग से प्रदर्शित किया जाता है।

    समोच्च रेखा द्वारा धरातल पर विद्यमान अनेक भूआकृतियों को दिखाया जाता है। यह समोच्च रेखा का मान, उसकी आकृति दो समोच्च रेखा के बीच की दूरी से पता चलता है कि धरातल पर कौन-सा पहाड़ी भाग है और कौन सा मैदानी भाग कहाँ झील है तो कहाँ जलप्रपात तो कहाँ पर घाटी है। अतः भू-आकृतियों को प्रदर्शित करने का यह उत्तम विधि है।

    समोच्च रेखा के माध्यम से धरातल की ढाल तथा उसकी दिशा की भी जानकारी होती है। किस स्थान की ढाल कैसी है, इसकी जानकारी भी समोच्च रेखा देती है। जहाँ समोच्च रेखा सटी-सटी रहती है, वहाँ की ढाल तीव्र होती है तथा जहाँ पर समोच्च रेखा दूर-दूर पर रहती है, वहाँ की ढाल कम रहती है।

     ऐसे तो हैश्यूर विधि (Hachure Method), ब्लॉक आरेख (Block diagram) द्वारा भी उच्चावच प्रदर्शित किया जाता है। परन्तु समोच्च रेखा सबसे अधिक उपयुक्त है। समोच्च रेखा द्वारा किसी क्षेत्र का प्रोफाइल (Profile) बनाया जाता है।

ढाल (Slope)

   मानचित्र (Map) में भूमि की ऊँचाई गहराई तथा पृथ्वी की सतह की सूक्ष्म स्थलाकृतियों (Details of topography) को मुख्यतः समोच्च रेखाओं (Contours lines) के द्वारा दिखलाया जाता है। इसीलिए समोच्च्च रेखाओं की आकृति (Shape) और पारस्परिक समोच्च रेखाओं के बीच की दूरी (Relative distance) की सहायता से मानचित्र में विभिन्न स्थल रूपों (Land forms) को पहचाना जाता है।

     प्रत्येक स्थलरूप को दिखाने के लिए समोच्च रेखाओं की एक निश्चित आकृति होती है और प्रत्येक में उनकी पारस्परिक दूरी भी विशेष प्रकार की होती है। उदाहरण स्वरूप एक गुम्बद (Dome), एक शंक्वाकार पहाड़ी (Conical hill) दोनों में समोच्च रेखायें लगभग गोलाकार (Round) होती है परन्तु इन स्थलरूपों में उनकी पारस्परिक दूरी अलग-अलग होती है।

     इसी प्रकार विभिन्न प्रकार की समोच्च रेखायें एक-दूसरे के लगभग समानान्तर होती है। परन्तु उनकी पारस्परिक दूरी अलग-अलग होती है। जहाँ भूमि की ढाल अधिक होती है (जैसे एक कगार (Escarpment), वहाँ समोच्च रेखायें लगभग समानान्तर और एक-दूसरे के बहुत समीप होती है।

    दूसरी ओर जहाँ भूमि की ढाल बहुत कम होगी वहाँ भी समोच्च रेखायें लगभग समानान्तर परन्तु एक-दूसरे से बहुत दूर-दूर पर होती है। इसी प्रकार सम ढाल (Regular slope), असमान ढाल (Irregular slope) सोपान ढाल (Terraced slope), नतोदर ढाल (Concave slope) तथा उन्नतोदर ढाल (Convex slope) इत्यादि में समोच्च रेखाओं की पारस्परिक दूरी अलग-अलग होती है।

     मानचित्र में स्थल रूपों को पहचानने तथा उनका वर्णन और व्याख्या करने के लिए समोच्च रेखाओं की आकृति तथा उनकी पारस्परिक दूरी का विश्लेषण करना आवश्यक है। मानचित्र के किन्हीं दो स्थानों के बीच की ढाल की गणना (Calculation) करने के लिए दो तथ्यों की आवश्यकता होती है-

(1) दोनों स्थानों के बीच की ऊँचाई का अन्तर (Difference of elevation), जिसे लम्बवत् अन्तर (Vertical interval) कहा जाता है।

(2) दोनों स्थानों के बीच की क्षैतिजीय दूरी (Horizontal distances) जिसे क्षैतिजीय अन्तर अथवा क्षैतिजीय तुल्यांक (Horizontal equivalent) कहा जाता है।

      मान लिया जाए कि एक पहाड़ी की चोटी A की ऊँचाई समुद्रतल से 3275 मीटर है और उसके नीचे स्थित नदी घाटी का निम्नतल (Bottom) B की ऊँचाई समुद्रतल से 2475 मीटर है। A और B बिन्दुओं के बीच की ढाल ज्ञात करना है।

      सबसे पहले A और B के बीच लम्बवत् अन्तर 3275-2475 = 800 मीटर हुआ। यदि मानचित्र में इन स्थानों की दूरी 8 सेन्टीमीटर है और मानचित्र का मापक 1 सेमी. = 5 किमी. है तो A और B की वास्तविक दूरी अर्थात् उनके बीच क्षैतिजीय दूरी 40 किमी. होगी।

     A और B स्थानों के बीच की ढाल को निम्नलिखित अनुपात से व्यक्त किया जा सकता है-

Relief and Slope Analysis

     यहाँ ध्यान देने की एक आवश्यक बात यह है कि ढाल व्यक्त करने वाले भिन्न में अंश (Numerator), हमेशा इकाई (Unit) में होता है और अंश (Numerator) तथा हर (Denominator) दोनों मापन की एक ही इकाई (Unit of measurement), होती है।

    उपरोक्त उदाहरण में ढाल व्यक्त करने वाला भिन्न है, जिसमें अंश (Numerator) ‘एक’ है और हर (Denominator) ‘पचास’ है। दोनों मापन की 50 एक ही इकाई ‘मीटर’ में है। इस सम्बंध को एक अनुपात (Ratio) के रूप में अर्थात् 1: 50 में व्यक्त किया जा सकता है।

    ढाल व्यक्त करने वाले भिन्न 1/50 अथवा अनुपात 1:50 से यह समझना चाहिए कि 50 मीटर की क्षैतिजीय दूरी पर भूमि पहले की अपेक्षा एक मीटर नीची हो जाती है। इस नियम का उल्लंघन करके ढाल को ‘फीट प्रति मील’ अथवा ‘सेंटीमीटर प्रति किलोमीटर’ में व्यक्त करने का प्रचलन सा हो गया है।

     जैसा कि हम पहले देख चुके हैं कि ढाल का क्षैतिज रेखा से कोणीय दूरी (Angular distance) अर्थात् अंशों (Degrees) में भी व्यक्त किया जाता है। उपरोक्त उदाहरण में वर्णित दो स्थानों को यदि चित्र में A और B मान लिया जाए तो AB रेखा की लम्बाई 2 मील है। A से AC लम्ब है जो A और B के बीच के लम्बवत् अन्तर अर्थात् 4750 फीट का प्रतिनिधित्व करती है। C पर AB, के बराबर और समानान्तर CB1 रेखा खींची गयी है तथा A और B के बीच के क्षैतिजीय दूरी है। CB को मिला दिया। यह AB से AB’ की झुकाव अर्थात् A और B के बीच की ढाल का प्रतिनिधित्व करती है।

     ABC एक समकोण त्रिभुज है, जिसका आधार AB 2 मील है तथा लम्ब AC = 4750 फीट है।

 

    अब साधारण tan टेबुल से जिस कोण का tan मान (Value) .4481 है, उसका मान Log Table द्वारा अंशों में निकाल लिया जा सकता है।

जैसे- .44981 का tan का मान 24°12′ होता है। अर्थात् AB की ढाल 24°12′ की हुई है।

2. Metropolitan Regions (मेट्रोपोलिटन क्षेत्र)

    2. Metropolitan Regions

(मेट्रोपोलिटन क्षेत्र)



     मेट्रोपोलिटन शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘महानगर’ अर्थात बड़े नगरों को ही महानगर कहा जाता है।

     भारतीय संविधान के 74वें संशोधन में महानगरीय क्षेत्र को “दस लाख या उससे अधिक की आबादी वाला क्षेत्र, जो एक या एक से अधिक नगर पालिकाओं के अंतर्गत आता हो और दो या अधिक नगर पालिकाओं और ग्राम पंचायत या अन्य समीपवर्ती क्षेत्रों से मिलाकर बना हो, जिसे राज्य प्रमुख द्वारा लिखित अधिसूचना द्वारा महानगरीय क्षेत्र घोषित किया गया हो” के रूप में परिभाषित किया गया है।

      इस प्रकार भारत में दस लाख से अधिक आबादी वाले नगर महानगर कहलाता हैं। वर्तमान समय में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण से महानगरीय प्रदेश का महत्त्वपूर्ण स्थान है। विश्व के प्रायः सभी देशों में देश के आर्थिक विकास में महानगरीय प्रदेश की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। इस प्रदेश में नगर के आस-पास का क्षेत्र भी सम्मिलित रहता हैं। महानगरीय प्रदेश के विकास में सबसे महत्त्वपूर्ण कारक यातायात के साधनों का विकास है। महानगरीय प्रदेश अर्थात् मेट्रोपोलिटन प्रदेशों में नगरों और उसके आस-पास के क्षेत्रों के बीच पारस्पारिक एवं अन्योनाश्रित संबंध रहता है।

     कोई भी वृहत् नगर अपने आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में फैलता जाता है। नगरों के आकार में वृद्धि होने के साथ ही नगरों के क्रिया-कलापों में भी वृद्धि होने लगती हैं। इसके बाद नगरों के बाहर 20-30 कि.मी. की परिधि में स्थित सभी गांवों और छोटे-छोटे नगरों को मिला लिया जाता हैं। इस प्रकार नगर तथा नगर के संपूर्ण सम्मिलित नगरीय तथा ग्रामीण भाग को महानगरीय (Metropolitan) प्रदेश के नाम से जाना जाता हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली NCR मेट्रोपोलिटन प्रदेश, मुम्बई मेट्रोपोटन प्रदेश, कोलकाता, चिन्नई, अहमदाबाद नगर के मेट्रापोलिटन प्रदेशों का नाम लिया जा सकता हैं।

     इस प्रदेश को नियोजन कहना अधिक उचित होगा क्योंकि संपूर्ण मेट्रोपोलिटन प्रदेश का वातावरण एक सा रहता है। अतः उसके विकास कार्य के लिए समस्त क्षेत्रों का समान रूप से विकास करने की आवश्यकता है। डिकिन्सन के शब्दों में यह महानगर प्रदेश आर्थिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण स्थान रखता हैं क्योंकि बड़े नगर आस-पास के छोटे नगरों पर अपना प्रभाव डालता है। पटना महानगर प्रदेश में स्थित दानापुर, फुलवारी, फतुहा आदि छोटे नगर प्रभावित होते हैं। इसी प्रकार दिल्ली मेट्रोपोलिटन प्रदेश में स्थित रोहतक, पानीपत सोनीपत, मेरठ, गजियाबाद, बुलंदशहर, फरीदाबाद, गुड़गांव, अलबर, रिवाड़ी आदि नगर दिल्ली से प्रभावित होते हैं।

नगरीकरण की प्रवृति:

      भारत में नगरीकरण की प्रवृति में तीव्रता आयी हैं। वर्ष 1981 ई. में भारत में 12 महानगर थे जो बढ़कर 1991 ई. में 23 और 2001 में 35 और 2011 में 53 हो गये। इन महानगरों में भारत की कुल नगरीय जनसंख्या का 1991 ई. में 32.54% तथा 2001 ई. में 37. 8% 2011 में 64.4% निवास करती है। 1981-91 के बीच इसकी जनसंख्या में 67.76% जबकि 1991-2001 में 52.69% की वृद्धि हुई है। 1941-51 में यह वृद्धि 121.56% हुई थी, 1981 ई. में इन 12 महानगरों की कुल जनसंख्या 42121700 थी जबकि 1991 ई. में यह बढ़कर 23 महानगरों में 70661259 तथा 2001 ई. में 35 महानगरों में 107881836 हो गयी और अब  2011 में 53 महानगरों में 16,07,00,000 (16.07 करोड़) हो गई।

     जनसंख्या का इतनी अधिक वृद्धि के कारण नगरों में अनेक समस्याओं का जन्म हुआ साथ ही नगर नियोजन भी असफल हो गया। नगर नियोजन का मुख्य उद्देश्य नगर के पुराने क्षेत्रों की दशा सुधारना होता है, जबकि मेट्रोपोलिटन प्रदेश में नये क्षेत्रों का समावेश होता है। अतः अब महानगरों की दशा सुधारने के साथ-साथ उसके आस-पास के क्षेत्रों की, जिसे मेट्रोपोलिटन प्रदेश (Metropolitan Region) कहते हैं, दशा में सुधार लाने की आवश्यकता समझी जाने लगी है।

     महानगर के पुराने क्षेत्र तथा नगरीय प्रदेश के नये क्षेत्रों की सेवाओं और सुविधाओं में काफी अंतर दिखने लगा है क्योंकि नये विकसित क्षेत्र में सुधार की संभावनायें अधिक पायी जाती है जबकि पुराने नगर के क्षेत्रों में सुधार लाने के लिए परिवर्तन की आवश्यकता हो जाती है जो बहुत ही कठिन हो जाता है। इसके विकास के लिये कुछ बातों पर ध्यान देना आवश्यक हैं।

1. महानगरों तथा महानगरीय प्रदेशों का योजनाबद्ध एवं सीमाबद्ध विकास कार्य किये जाय जिससे नये तथा पुराने दोनों क्षेत्रों का समुचित विकास हो सके।

2. कार्य एवं उपयोगिता के आधार पर इन प्रदेशों की भूमि का उपयोग होना चाहिए।

3. विकास के लिए पूर्व निश्चित योजना बनायी जाय।

4. गंदी बस्तियों को नहीं पनपने दिया जाय।

5. नगर तथा उस प्रदेश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नियोजन कार्य किये जाय।

      किसी मेट्रापोलिटन प्रदेश में तीन संरचनात्मक कटिबंध (पेटी) होते हैं –

1. नगरीय क्षेत्र (Urban area)

2. ग्रामीण-नगर उपांत् (Rural-urbanfringe) तथा

3. समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्र (Peripheral rural area),

      मेट्रोपोलिटन प्रदेश में नगर का विस्तार सड़क तथा रेल के किनारे तीव्र गति से होता हैं फिर भी महानगरीय सीमा का निर्धारण एक कठिन समस्या है। अनेक विद्वानों ने इस प्रदेश का सीमांकन को अलग-अलग ढंग से किया है। भारत में इस प्रदेश की जनसंख्या दस लाख से अधिक मानी गयी हैं। इसमें नगर के आस-पास जितने भी छोट-छोटे नगर हैं तथा उससे सटे गांव है, उन सभी को मिलाकर महानगर (मेट्रापोलिटन प्रदेश) कहा गया है। भारत में वर्त्तमान (2015 ई.) समय में 57 महानगर है। इन महानगरों का प्रभाव क्षेत्र की आर्थिक एवं सामाजिक विशेषताऐं भी अलग-अलग रहती हैं। जैसे-

(i) महानगरों में मकानों की भीड़ तथा ऊँचे-ऊँचे मकान रहती है।

(ii) नगरीय जीवन में भी भारी गिरावट आ जाती हैं। इतना ही नहीं, नगरों के अधिकांश भाग जल, वायु एवं ध्वनि प्रदूषण से ग्रसित हो जाते हैं।

(iii) रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड, हवाई अड्‌डे तथा मुख्य बाजारों में भारी भीड़ रहती हैं।

(iv) नगरों में दिनों-दिन पानी तथा बिजली आपूर्ति की समस्या जटिल होती जाती हैं।

(v) महानगरों में मनोरंजन स्थल का अभाव होने लगता है।

(vi) भूमि तथा मकानों के दामों में तेजी से बढ़ोतरी होने लगती है।

(vii) यातायात मार्गों पर नगर उपांत की बढ़ोतरी में तीव्रता आ जाती है।

(viii) नगरों में छोड़े गये उद्योग के लिए भूमि का अतिक्रमण होना प्रारंभ हो जाता है।

(ix) सामाजिक ढांचे के बदलाव की प्रवृति होने लगती हैं। लोग अपने काम में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि उनके लिए अपने पड़ोसियों से बात करना कठिन हो जाता है। बहुत आवश्यक हुआ तो उनसे टेलिफोन पर बातें कर लेते हैं।

(x) टेलिफोन यहां की आवश्यक वस्तु हो जाती हैं तथा सभी मध्यमवर्ग के लोगों के लिए टेलिफोन सुविधा अनिवार्य हो जाती है। वर्तमान समय में टेलिफोन का स्थान मोबाइल ने ले लिया है।

(xi) नगर के मध्य भाग में आबादी का घनत्त्व बहुत रहता है। काम करने वालों में लगभग 50% लोग नगर के बाहर से अर्थात ग्रामीण नगरीय उपांत एवं ग्रामीण-नगरीय क्रमबद्धता (Rural Urban Fringe or Rural Urban Continuum) और सीमावर्ती क्षेत्र (Peripheral zone) से आते हैं, और रात में वे पुनः अपने-अपने घर लौट जाते है।

(xii) महानगरों में सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से जनसंख्या का प्रवास तीव्र गति से होता है क्योंकि लोगों की यह धारणा रहती हैं कि नगरीय क्षेत्र में रोजगार की कमी नहीं रहती हैं।

(xiii) नगरीय सीमा के आस-पास अधिक किराया देने से बचने के लिए शयनागार (Dormitory) नगर का विकास होता है।

(xiv) महानगरों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में दिनों-दिन घटती जाती है। जबकि महानगरों से सटे छोटे नगरों में बड़े नगरों की तुलना में महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रहती है। ऐसा इसलिए होता है कि सीमावर्ती क्षेत्रों से पुरुष श्रमिकों का पलायन तीव्र गति से होता है। महिलायें घर में रहती हैं और पुरुष रोजगार की तलाश में बाहर चला जाता हैं।

(xv) अन्य नगरों की भांति महानगर भी उस प्रदेश की सांस्कृतिक एवं सामाजिक स्थितियों का सही प्रतिनिधित्त्व करता है क्योंकि किसी भी महानगर का अस्तित्व महानगरीय प्रदेश के प्रभाव क्षेत्र पर निर्भर करता है जो नगर से 20-30 कि. मी. की दूरी तक चारों ओर फैला रहता हैं। महानगर ही इस प्रदेश को आर्थिक एवं सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।

      यहां कई छोटे-बड़े सेवा केन्द्र विकसित होते हैं। जैसे- दिल्ली महानगर के आस-पास गाजियाबाद, गुड़गांव, सोनीपत, फरीदाबाद, आदि नगरों में अनेक प्रकार के उद्योग विकसित हुए हैं। यहां के उद्योग के विकास में दिल्ली महानगर का महत्त्वपूर्ण स्थान है क्योंकि दिल्ली में बाजार की सुविधा उपलब्ध हैं इसलिए आस-पास के नगरों में उद्योगों का विकास हुआ है। यही स्थिति प्रायः सभी महानगरों में तथा उसके सीमावर्ती प्रदेशों के साथ लागू होता है। यहां आवागमन की सुविधा का विकास होता है जिससे लोग कम खर्च एवं कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक आ जा सकते हैं। यहां झुग्गी-झोपड़ी की सख्या में भी तीव्रता से बढ़ोतरी होती है। दिल्ली से दूर-दूर तक व्यापारी लोग सामान ले जाते हैं। इसलिए दिल्ली के आस-पास के नगरों में उद्योग का विकास हुआ है।

    इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि महानगर से 20-30 कि.मी. की दूरी तक चारों तरफ महानगरीय प्रदेश (Metropolitan Region) का विस्तार रहता है, जहां से लोगों का रोजाना संपर्क बना रहता है। लोग रेल अथवा सड़क मार्ग से संपर्क बनाये रखते हैं।

    इस प्रकार महानगर तथा महानगरीय प्रदेश के बीच पारस्पारिक संबंध बना रहता है। महानगर के आस-पास से दूध, जलावन, हरी सब्जी, फल, अनाज आदि नगरों में आता है और सीमावर्ती क्षेत्र के लोग चिकित्सा, शिक्षा, मनोरंजन, बाजार आदि की सुविधा महानगरों से प्राप्त करते हैं। कुछ वर्षों में सीमावर्ती भाग महानगर में विलीन हो जाता है और पुनः महानगरीय प्रदेश का विस्तार होता है। जो महानगर जितना अधिक बड़ा होता हैं उसका महानगरीय प्रदेश भी उतना ही विकसित एवं विस्तृत होता है। महानगर के केन्द्र से जैसे-जैसे दूर जाते हैं लिंग अनुपात तथा जनसंख्या के घनत्त्व में कमी आ जाती है। महानगरीय प्रदेश में अनेक गहन कटिबंध (Zones) का विकास होता है जिसकी आर्थिक विशेषतायें अलग-अलग होती है।

    मुम्बई महानगर के आस-पास अनेक उपनगर पाये जाते हैं जहां विभिन्न प्रकार के उद्योगों का विकास हुआ है। इन उपनगरों से नगर में दूध, अंडा, मुर्गा, फल, सब्जी आदि भी आता है। 1991, 2001 तथा 2011 ई. में मुम्बई भारत का सबसे बड़ा नगर हो गया है। यहां 1991 ई. 35 लाख तथा 2001 ई. 56 लाख से भी अधिक जनसंख्या गंदी बस्तियों में रहती है। 20% जनसंख्या के रहने के लिए आवास नहीं है। एक लाख से अधिक लोग फुटपाथ पर रहते हैं।

      इस प्रकार महानगरीय प्रदेशों का आर्थिक महत्त्व बहुत ही अधिक है। यहां की 75% कार्यरत जनसंख्या अकृषित कार्य में लगी रहती हैं। महानगरीय प्रदेश किसी देश अथवा प्रदेश की नगरीकरण का द्योतक होता है। यह देश के आर्थिक विकास का सूचक है क्योंकि महानगरों के विकास पर औद्योगिकरण का प्रभाव पड़ता है। उद्योग वाले क्षेत्र में नगरीकरण की प्रवृति बहुत ही तीव्र रहती है। उसके साथ महानगरीय प्रदेश (Metropolitan Region) भी विकसित होता है। लोग गांवों से नगरों की ओर प्रवास करते हैं क्योंकि वहां यातायात, सुरक्षा, चिकित्सा, रोजगार, शिक्षा आदि की सुविधा रहती है। कुछ विद्वान महानगरीय प्रदेश को प्रभाव क्षेत्र (Umland) कहते हैं पर प्रभाव क्षेत्र का विस्तार बहुत अधिक दूर तक रहता है पर मेट्रोपोलिटन प्रदेश का विस्तार अपेक्षाकृत कम रहता है।

वृहत् मुम्बई (Greater Mumbai) प्रदेश (Metropolitan Region of Mumbai):-

     वृहत् मुम्बई की जनसंख्या 1991 में 12571720 थी जो बढ़कर 1995 में 151 लाख हो गयी। वर्त्तमान समय में मुम्बई का स्थान विश्व में सबसे बड़े नगरों में पांचवां है। इससे बड़ा दिल्ली महानगर है। यह भारत का एक महत्त्वपूर्ण बन्दरगाह है। अभी देश का लगभग 42% विदेशी व्यापार इसी बंदरगाह से होता है। यह देश के सबसे अधिक विकसित वृहत् नगरीय प्रदेश है। यहाँ अधिकांश वित्तीय संस्थायें तथा बैंकों का प्रधान दफ्तर (Head Office) केन्द्रित है। इस प्रदेश में राज्य का लगभग 69.2% नगरीय जनसंख्या निवास करती है। कुल औद्योगिक श्रमिकों का 2/5वां हिस्सा इसी प्रदेश में कार्यरत है। इसकी पृष्ठभूमि भी काफी विकसित है।

    मुम्बई सात द्वीपों में फैला हुआ हैं जहां पहले किसान तथा मछुआरे रहा करते थे। प्रारंभ में इसके सातों द्वीपों को परस्पर जोड़ दिया गया था तथा दो द्वीपों के बीच समुद्र के छिछले तथा संकरे गढ्ढे को भर दिया गया था। 1853 ई. में मुम्बई तथा थाने को रेल मार्ग द्वारा जोड़ दिया गया था। भारत के पश्चिमी तट पर मुम्बई एक महत्त्वपूर्ण बन्दरगाह है। यहां की जलवायु भी मातदिल है। दिसम्बर से फरवरी तक यहां का तापमान लगभग 20 से. रहता है तथा मार्च में मुम्बई का मौसम शुष्क हो जाता है। मई के बाद लगभग चार महीने तक वर्षा ऋतु का मौसम रहता है।

    बसीन, विरार, कल्याण, उड़ान, अरनाल, सतपती आदि मुम्बई के उपनगर है जो नगर को मछली, साग-सब्जी, दूध, अण्डे तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति करता हैं। मुम्बई नगरीय प्रदेश में प्रायः सभी उपनगर शयनागार नगरों के रूप में हैं। थाने, जो पहले उपनगर था, अब वह मुम्बई महानगर का मुख्य औद्योगिक क्षेत्र बन गया है। अतः वर्तमान समय में, महानगरीय प्रदेश में अनेक प्रकार के उद्योगों का विकास हुआ है। यहां से आस-पास के क्षेत्रों से कच्चा माल प्राप्त कर उद्योगों से तैयार माल देश तथा विदेशों के बाजार में भेजा जाता है। यहां रोजगार की भी सुविधा है और बाजार की भी है। इस प्रदेश में धन का भी अभाव नहीं है। इसलिए यह देश के महत्त्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ है।

     मुम्बई महानगर में जनसंख्या में भी तीव्र गति से वृद्धि हुई है। कहा जाता है पुर्तगाल के समय यहां लगभग दस हजार जनसंख्या थी बाद में अंग्रेजों के समय यह संख्या बढ़कर 60 हजार हो गयी। 1901 ई. यहां की आबादी 7.7 लाख थी जो बढ़कर 1951 ई. 23.2 लाख हो गयी। जनसंख्या की वृद्धि निम्न तालिका से स्पष्ट किया जा सकता है।

तालिका

वृहत् मुम्बई प्रदेश की जनसंख्या

वर्ष  जनसँख्या हजार में वृद्धि % प्रति दशक
1901 928
1911 1139 +23.8
1921 1380 +20.2
1931 1398 +1.3
1941 1801 +28.4
1951 2994 +66.2
1961 4152 +38.7
1971 5971 +43.8
1981 8243 +42.2
1991 12572 +52.5
2001 16368 +30.1
2011 18414 +30.1

       मुम्बई के आस-पास के उपनगरों की जनसंख्या में काफी वृद्धि हुई है। 1991 ई. में वृहत् मुम्बई की जनसंख्या 9910 हजार तथा 2001 ई. में 11914 हजार थी। शेष जनसंख्या इसके उपनगरों में थी। 1971 में 52% जनसंख्या नगरीय द्वीप में 28% भीतरी उपनगर में और 20% बाहरी उपनगर में थी। 1991 ई. में कुल जनसंख्या का 49% मुख्य द्वीपीय नगर में 29% भीतरी उपनगर में और 22% बाहरी उपनगर में थी। 1971 ई. में यहाँ जनसंख्या का घनत्व 13.6 हजार प्रतिवर्ग कि. मी. थी जो 1991 ई. में बढ़कर 16.4 एवं 2001 ई. 20. 3 हजार हो गयी थी। 2011 में 21000 प्रति वर्ग कि. मी. हो गयी।

     इस महाप्रदेश में लगभग 70% जनसंख्या शिक्षित है। 1981 ई. यहां प्रति 1000 पुरुष में 773 महिलायें थी जो बढ़कर 1991 ई. में 829 और 2001 में 823 हो गयी। जनसंख्या के वृद्धि के कारण यहां अनेक समस्यायें उत्पन्न हो गयी हैं। इन समस्याओं का निदान नहीं करने पर इस प्रदेश में जनसंख्या की वृद्धि अविवेक पूर्ण हो जायगी।

मुम्बई मेट्रोपोलिटन प्रदेश 3361 वर्ग कि. मी. में फैला हुआ हैं इसके उत्तर में शंसा नदी घाटी, दक्षिण में पाटल गंगा नदी, पूर्व में माठेरन पहाड़ी तथा पश्चिम में समुद्र है। यहां की जनसंख्या का 89% नगरीय है जिसमें 28 नगर और 847 गांव है। कुल मिलाकर यहां दस तहसील (तालुका) है।

      वृहत् मुम्बई में 1991 ई. में 1981 ई. की तुलना में 52.5 तथा 2001 ई. 1991 की तुलना में 30.1% जनसंख्या की वृद्धि हुई। यही वृद्धि यदि पूरे मुम्बई मेट्रोपोलिटन प्रदेश में मान ली जाय तो इस प्रदेश में जनसंख्या बहुत अधिक हो जायेगी जिसके कारण कई समस्यायें उत्पन्न होती है। जैसे-

1. मकानों की कमी तथा प्रति कमरा घनत्त्व में वृद्धि

2. औद्योगिक केन्द्रों का असमान वितरण

3. वायु एवं ध्वनि प्रदुषण में वृद्धि

4. विद्युत एवं पेयजल की आपूर्ति में कमी

5. भूमि की कीमतों में वृद्धि

6. मनोरंजन तथा खुले स्थानों की कमी

7. अभिगमनकर्त्ताओं में वृद्धि

8. हरी-पेटी के क्षेत्र में ह्रास तथा उस पर सड़क एवं मकानों का अतिक्रमण

9. नगरीय जीवन में भारी गिरावट

10. रेलवे स्टेशन, हवाई, अड्‌डा, बन्दरगाह जैसे सार्वजनिक स्थानों पर जनसंख्या का भारी जमाव

11. नगर के बाहरी क्षेत्रों में औद्योगिक केन्द्रों द्वारा भूमि का अविवेकपूर्ण अतिक्रमण

12. सामाजिक ढांचे में आपसी मेल का अभाव

13. द्रुतगामी आवागमन के साधनों में कमी

14. अपराधों में वृद्धि

15. रेल तथा सड़क दुर्घटना में वृद्धि

16. गंदी बस्तियों का विस्तार

17. पर्यावरण के संतुलन में ह्रास

     इस प्रकार मुम्बई महानगरीय प्रदेश में इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इस प्रदेश का नियोजन करना चाहिए अन्यथा प्रदेश का अनियंत्रित विकास होने पर समस्यायें विकराल रूप धारण कर सकती है जिसका समाधान संभव नहीं होगा। नगरीय जीवन स्तर बिगड़ता चला जायेगा। गंदी बस्तियां बढ़ती चली जायगी और आर्थिक एवं सामाजिक स्तर गिरता चला जाएगा। नगरीय सुविधाओं का असमान वितरण होगा।

     इन्हीं सभी दुष्परिणामों से बचने के लिये मुम्बई महानगरीय प्रदेश के नियोजन की आवश्यकता है जिससे इस प्रदेश का संतुलित विकास हो सके। इस कार्य के लिए कुछ नये कदम उठाने की आवश्यकता है। जिसमें निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण है।

1. बढ़ती हुई जनसंख्या के लिये नये आवास कॉलनी बनाने की आवश्यकता पर बल देना होगा।

2. औद्योगिक ईकाईयों की स्थापना प्रदेश के प्रायः सभी क्षेत्रों में करनी होगी जिससे औद्योगिक ईकाईयों के वितरण में संतुलन बना रहे। ऐसा करने से उस प्रदेश में जनसंख्या का वितरण संतुलित हो सकेगा।

3. नगर में आर्थिक क्रियाओं के विकेन्द्रीकरण की आवश्यकता है जिससे जनसंख्या का खिंचाव एक जगह केन्द्रित नहीं हो बल्कि अनेक केन्द्रों की ओर आकर्षित हो।

4. अभिगमनकर्त्ताओं (Daily Commuters) की संख्या में कमी करने के लिए आर्थिक क्रियाओं का विकेन्द्रीकरण आवश्यक है तथा अभिगमनकर्त्ताओं की संख्या में कमी लाने का भी प्रयास करना आवश्यक हो जाएगा। यह भी उद्योग एवं आर्थिक क्रियाओं के विकेन्द्रीकरण से ही संभव है।

5. नये बन्दरगाह का निर्माण किया जाना चाहिए जिससे जनसंख्या का संतुलित वितरण हो सके।

6. पूरे प्रदेश में नगर तथा नगरीय प्रदेश के बीच यातायात की सुविधा में विकास करने की आवश्यकता है।

7. प्रदेश में अनेक नये नगरों का विकास करना होगा जिससे जनसंख्या का संतुलित वितरण हो सके।

8. प्रदेश में मुम्बई की तरह अन्य नगरों का भी विकास करने की आवश्यकता है।

9. सामाजिक विषमता को दूर करने का भी प्रयास आवश्यक है।

10. कल्याण, कोलशेट, बालखून, खौपौली मीरा-ममडार आदि नगरों को औद्योगिक नगर के रूप में विकसित करना भी इस प्रदेश के नियोजन में शामिल किया जाना चाहिये।

11. नये बन्दरगाह बनाकर उसके पास नया मुम्बई नगर की स्थापना भी इस नियोजन में शामिल है क्योंकि इससे मुम्बई नगर पर बढ़ते दबाव को रोका जा सकता है।

    मुम्बई महानगरीय प्रदेश नियोजन के अंतर्गत नये मुम्बई नगर की (New, Mumbai) स्थापना की गयी है। यह नगर थाने की संकरी घाटी के पूर्वी किनारे पर बसायी गयी हैं। इसके एक ओर कोल्बा बेलपुर सड़क मार्ग है तथा दूसरी ओर आवासीय क्षेत्र विकसित किया गया है। मुम्बई से पूना जाने वाली सड़क मार्ग इस नगर के मध्य से जाता है जो थाने के संकरी खाड़ी पर बने पुल से होता हुआ गुजरता है। इस नये नगर के आवासीय क्षेत्र को कई सेक्टर में बांटा गया है। प्रत्येक सेक्टर में हर प्रकार की नगरीय सुविधायें उपलब्ध है।

      यहां तीन बड़े व्यापारिक क्षेत्र हैं- उत्तरी भाग, दक्षिणी भाग तथा मध्य भाग। हरी-पेटी के निकट पार्क बनाये गये हैं तथा खुला मैदान भी छोड़ दिया गया है जहां लोग शाम अथवा सुबह में खुली हवा का आनन्द ले सकते हैं। यहां न्हेवा-शेवा नाम का एक नया बंदरगाह विकसित किया गया है जिससे इस नये नगर को विकसित होने में मदद मिल सकेगी।

    प्रशासन से संबंधित कुछ कार्यालय को जो मुम्बई में स्थित था, उसे नये नगर में स्थानान्तरित किया गया है जिससे पुराने मुम्बई नगर पर जनसंख्या के दबाव को कम किया जा सके। यह नया नगर 5000 हेक्टयर भूमि में विकसित किया गया हैं जिसकी लम्बाई 20 कि. मी. है। इस नये नगर को मुम्बई नगर की तरह हर प्रकार की सुविधायें प्रदान की जाती हैं और भविष्य में भी ऐसी सुविधायें मिलती रहेगी जिससे अंर्त्तराष्ट्रीय स्तर पर भी यह नया मुम्बई नगर पुराने मुम्बई महानगर की तरह महत्त्वपूर्ण रह सकेगा।



नोट:

1. नगरीय क्षेत्र (Urban area):-

            नगरीय क्षेत्र का तात्पर्य उस सामूहिक अधिवासीय स्थल से है जहाँ की दो-तिहाई जनसंख्या द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों  में संलग्न रहती है। यहाँ पर द्वितीय एवं तृतीय कार्यों का तात्पर्य उद्योग, निर्माण, विनिर्माण, परिवहन, वाणिज्य व व्यापार एवं सेवा क्षेत्र से है।

2. ग्रामीण-नगर उपांत् (Rural-Urban Fringe):-

        “ग्रामीण-नगरीय उपान्त क्षेत्र” का शाब्दिक अर्थ है- नगरों की सीमाओं पर स्थित वह क्षेत्र जहाँ ग्रामीण एवं नगरीय भूदृश्य की विशेषताएँ देखने को मिलती है। दूसरे शब्दों में उपान्त क्षेत्र वह क्षेत्र है जो नगर और ग्रामीण बस्ती के बीच में विकसित होते हैं तथा वहाँ पर नगरीय और ग्रामीण आर्थिक-क्रियाकलाप साथ-2 चलते रहती है। इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1942 ई० में बेहरबिन महोदय ने किया था।

           ग्रामीण-नगरीय उपान्त क्षेत्र को ग्रामीण नगरीय सांतत्य शब्द से संबोधित किया जाता है। इस संकल्पना में बताया गया है कि नगर के केन्द्र में विशुद्ध रूप से नगरीय संस्कृति होती है लेकिन ज्यों-2 नगर के केन्द्र से दूर जाते हैं त्यों-2 नगरीय संस्कृति या नगरीय विशेषता में कमी आते जाती है और ग्रामीण विशेषताएँ बढ़ने लगती हैं।

              दूसरे शब्दों में ग्रामीण-नगरीय उपान्त क्षेत्र मुख्यतः दो शब्दों का संग्रह है- उसमें से एक ग्रामीण उपान्त क्षेत्र एवं दूसरा नगरीय उपान्त क्षेत्र है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि ग्रामीण- नगरीय उपान्त अतिक्रमण क्षेत्र का प्रतीक है। यह नगर के चारों ओर एक ऐसी संक्रमण पेटी का प्रतिनिधित्व करता है जो न तो पूर्णतया ग्रामीण है और न ही पूर्णतया नगरीय। इस प्रकार के संक्रमण पेटी में ग्रामीण एवं नगरीय दोनों प्रकार का वातावरण देखने को मिलता है।

3. समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्र (Peripheral rural area):-

         पेरिफेरल रूरल एरिया का मतलब है, “शहर के बाहर में स्थित ग्रामीण क्षेत्र” अर्थात शहरों के बाहरी इलाके में स्थित ग्रामीण इलाकों को ही समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्र कहते हैं।

भारत के 53 महानगरों की सूची:

  1. मुंबई

  2. दिल्ली

  3. कोलकाता

  4. चेन्नई

  5. बेंगलुरु

  6. हैदराबाद

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  9. सूरत

  10. जयपुर

  11. कानपुर

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  13. नागपुर

  14. इंदौर

  15. भोपाल

  16. पटना

  17. लुधियाना

  18. आगरा

  19. वाराणसी

  20. मेरठ

  21. प्रयागराज (इलाहाबाद)

  22. गाज़ियाबाद

  23. नोएडा

  24. फरीदाबाद

  25. गुरुग्राम

  26. अमृतसर

  27. जालंधर

  28. देहरादून

  29. हरिद्वार

  30. चंडीगढ़

  31. पंचकूला

  32. मोहाली

  33. श्रीनगर

  34. जम्मू

  35. रांची

  36. जमशेदपुर

  37. धनबाद

  38. बोकारो

  39. दुर्ग–भिलाई

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  41. बिलासपुर

  42. विशाखापट्टनम

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  46. कोयंबटूर

  47. मदुरै

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  49. सलेम

  50. कोच्चि

  51. तिरुवनंतपुरम

  52. कोझिकोड

  53. मल्लापुरम

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