Unique Geography Notes हिंदी में

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BA SEMESTER/PAPER IVRESEARCH METHODOLOGY

14. Measurement of Dispersion (प्रसरण / अपकिरण / विचलन / प्रकीर्णन / फैलाव का मापन)

Measurement of Dispersion

(प्रसरण का मापन)




Measurement of Dispersion

परिचय

     सांख्यिकी में केवल केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप (Mean, Median, Mode) से किसी आँकड़ा-समूह की पूर्ण जानकारी नहीं मिलती। दो अलग-अलग आँकड़ा-समूहों का औसत समान हो सकता है, परंतु उनके मानों का फैलाव (विचलन) अलग-अलग हो सकता है। आँकड़ों के इसी फैलाव या बिखराव को प्रसरण (Dispersion) कहा जाता है। अतः प्रसरण का मापन यह बताता है कि आँकड़े अपने केन्द्रीय मान (Mean, Median, Mode) से कितनी दूरी तक फैले हुए हैं।

सरल शब्दों में, प्रसरण का मापन आँकड़ों की अस्थिरता, विविधता तथा समानता/असमानता को मापने का साधन है।

✍️ Dispersion measures the extent to which the items vary from some central value.

✍️ Average deviation is known as dispersion.

✍️ Central value- Mean, Median, Mode

✍️ Dispersion is also known as scatter, spread or variation.

Example

(i) 2, 4, 9

AM = Σx/n

      ̄ = 2+4+9/3

      ̄  = 15/3

      ̄  = 3

(ii)

Series A Series B Series C
100 98 1
100 99 2
100 100 3
100 101 4
100 102 490
̄ = 500/5= 100 500/5 = 100 500/5 = 100

       यह तालिका दर्शाती है कि तीनों श्रेणियों (Series A, B और C) का औसत (̄ = 100) समान है, लेकिन मानों का वितरण अलग-अलग है। Series A में कोई प्रसरण नहीं, Series B में कम प्रसरण, जबकि Series C में अत्यधिक प्रसरण है।

प्रसरण की परिभाषा

        कई विद्वानों ने अपकिरण को परिभाषित किया है जिनमें निम्न प्रमुख हैं :-

(1) बुक्स एवं डिक (B. C. Brooks and W. F. L. Dick) के अनुसार, “अपकिरण अथवा प्रसार, एक केन्द्रीय मूल्य के इर्द-गिर्द चर मूल्यों (variables) के विचरण अथवा बिखराव की सीमा है।”

(2) प्रो. किंग (W. I. King) के शब्दों में, “अपकिरण शब्द का प्रयोग यह स्पष्ट करने के लिए किया जाता है कि एक दिये गये समूह के पद-मूल्यों में भिन्नता है। दूसरे शब्दों में, उसके मूल्यों में एकरूपता का अभाव है। “

(3) प्रो. कॉनर (L. R. Connor) के अनुसार, “अपकिरण उस सीमा, जिस तक व्यक्तिगत पद विलित है, की एक माप है।”

क्रॉक्सटन और काउडेन के अनुसार-

      “प्रसरण वह माप है जो यह दर्शाता है कि किसी श्रृंखला के व्यक्तिगत मान औसत के चारों ओर किस सीमा तक बिखरे हुए हैं।

प्रसरण के मापन की आवश्यकता (महत्त्व)

    प्रसरण के मापन की आवश्यकता निम्न कारणों से होती है-

✍️ आँकड़ों की स्थिरता या अस्थिरता का ज्ञान

✍️ दो या अधिक श्रृंखलाओं की तुलना

✍️ औसत की विश्वसनीयता जाँचने हेतु

✍️ जोखिम (Risk) और अनिश्चितता के विश्लेषण में

✍️ नीति निर्माण, योजना तथा अनुसंधान में सहायता

✍️ आर्थिक, भौगोलिक एवं सामाजिक अध्ययनों में उपयोग

प्रसरण के मापन के प्रकार

   प्रसरण के मापन को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है-

1. निरपेक्ष माप (Absolute Measures)

2. सापेक्ष माप (Relative Measures)

(1) निरपेक्ष माप (Absolute Measure):-

     जब किसी श्रेणी के बिखराव की माप निरपेक्ष रूप में उस श्रेणी की इकाई में ही व्यक्त की जाती है तो वह अपकिरण की निरपेक्ष माप कहलाती है, जैसे कीमत रुपयो में, लम्बाई मीटर में, वजन किलोग्राम में व्यक्त किया जाता है। यदि यह कहा जाए कि श्रमिको के एक समूह की औसत मजदूरी ₹200 है तथा अपकिरण ₹ 15 है तो यह मद अपकिरण का निरपेक्ष माप कहलाएगा।

    अपकिरण के ऐसे मापों की तुलना तभी सम्भव होती है जब दो श्रेणियाँ एक जैसी हो तथा उन्हें एक जैसी इकाइयां, जैसे-किलोग्राम, रुपये आदि द्वारा प्रकट किया जाए। यदि वितरण दो अलग समंकों से सम्बन्धित है तथा इनकी इकाइयाँ भिन्न है है तो ये माप तुलना में सहायक नहीं होते।

(2) सापेक्ष माप (Relative Measure):-

      जैसा कि हमने अध्ययन किया कि अपकिरण के निरपेक्ष माप में यह दोष है कि इसमें विभिन्न श्रेणियों की इकाइयों अलग-अलग होने पर उनमें परस्पर तुलना सम्भव नहीं होती है। अतः इनके मापों को तुलना योग्य बनाने के लिए इनको सापेक्ष रूप में बदला जाता है। अपकिरण के निरपेक्ष माप को श्रेणी के माध्य भाग देने पर जो अनुपात आता है, उसे अकिरण की सापेक्ष माप कहते हैं।

      उदाहरण के लिए, यदि कहा जाए कि भारत में 27 प्रतिशत व्यक्ति निर्धनता रेखा से नीचे है तो यह सापेक्ष माप होगी। सापेक्ष माप को ज्ञात करने के लिए मध्य मूल्य को औसत से भाग कर दिया जाता है या उसका प्रतिशन ज्ञात किया जाता है। स्पष्ट है कि सापेक्ष माप समंक श्रेणी की इकाई में व्यक्त न होकर एक अनुपात या प्रतिशत के रूप में व्यक्त होती है। इसे अपकिरण गुणांक (Co-efficient of Dispersion) भी कहते है।

अपकिरण मापने की विधियाँ (Method of  Measuring Dispersion)

        अपकिरण मापने की विधियाँ इस प्रकार है-

Measures of Dispersion
Absolute Measure (Same unit) Relative Measure (Unit free)
1. Rane 1. Coefficient of Range
2. Quartile Deviation 2. Coefficient of Quartile Deviation
3. Mean Deviation 3. Coefficient of Mean Deviation
4. Standard Deviation 4. Coefficient of Standard Deviation
5. Variance 5. Coefficient of Variance

निष्कर्ष:

     प्रसरण का मापन सांख्यिकी का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण अंग है। केवल औसत आँकड़ों की पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं कर सकता, जब तक कि उसके साथ प्रसरण का अध्ययन न किया जाए।

    परास, चतुर्थक विचलन, औसत विचलन, परिवर्तन तथा मानक विचलन ये सभी प्रसरण के विभिन्न स्तरों को समझने में सहायक हैं। विशेष रूप से मानक विचलन और परिवर्तन गुणांक आधुनिक सांख्यिकीय विश्लेषण में सर्वाधिक उपयोगी माने जाते हैं।

    अतः किसी भी आँकड़ा-विश्लेषण को पूर्ण और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रसरण के मापन का अध्ययन अनिवार्य है।



नोट: सिर्फ सांख्यिकीय माध्य का ज्ञान रखने वाले एक व्यक्ति ने सपरिवार नदी पार करने से पहले नदी की औसत गहराई और अपने परिवार की औसत ऊँचाई ज्ञात की।

    नदी की औसत गहराई 4 फीट तथा उसके परिका की औसत ऊँचाई 5 फीट थी। इस विश्वास के साथ सभी लोग नदी पार करने लगे, परन्तु एक स्थान पर नहीं की गहराई 10 फीट थी जहाँ वह परिवार डूब गया।

   यदि उस व्यक्ति ने नदी की अधिकतम गहराई और आने परिवार के सदस्यों की न्यूनतम ऊँचाई को गणना कर ली होती तो शायद यह कहावत सुनने को नहीं मिलती कि-

लेखा जोखा ज्यों का त्यों,

सारा कुनबा डूबा क्यों।

    वह व्यक्ति सपरिवार डूब गया क्योंकि उसे अपकिरण की माप की जानकारी नहीं थी। अपकिरण की माप से हमे इस बात की जानकारी मिलती है कि आंकड़े औसत से कितनी दूरी पर अवस्थित है।

     उपर्युक्त लघु-कथा यह स्पष्ट करती है कि विभिन्न पद-मूल्यों का माध्य में विचलन महत्वपूर्ण होता है। किसी देश में औसत आय अथवा सम्पति काफी अधिक हो सकती है, साथ ही वहाँ उसके वितरण में पर्याप्त असमानता के कारण अधिकांश जनसंख्या निर्धनता की सीमा के नीचे हो सकती है। इस प्रकार के विचलनों को मापना तथा उन्हें एक संख्या में व्यक्त करना आवश्यक होता है।

I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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