Archives 2023

4. नदियों के किनारें बसे प्रमुख नगर

नदियों के किनारें बसे प्रमुख नगर




भारत में नदियों के किनारे बसे प्रमुख नगर
क्रम  नगर का नाम  नदियाँ  
1. आगरा यमुना
2.  बद्रीना      अलकनंदा
3. प्रयागराज    गंगा, यमुना
4. दिल्ली, कोंटासाहेब, मथुरा यमुना 
5. फिरोजपुर सतलज
6. हरिद्वार, ऋषिकेष गंगा
7. कानपुर, बक्सर गंगा
8. अयोध्या, फैजाबाद सरयू
9. कोलकाता, हल्दिया, डायमण्ड हार्बर हुगली
10. लखनऊ गोमती
11.   डिब्रूगढ़ ब्रह्मपुत्र
12. गुवाहाटी ब्रह्मपुत्र 
13. जबलपुर नर्मदा
14. कोटा चम्बल
15. कुर्नूल तुंगभद्रा
16. सोकोवा घाट ब्रह्मपुत्र
17. कन्नौज गंगा
18. श्रीनगर, लेह झेलम
19. सूरत ताप्ती
20. हैदराबाद मूसी
21. मथुरा यमुना
22. अहमदाबाद, गांधीनगर साबरमती
23. राँची, जमशेदपुर स्वर्णरेखा नदी
24. पंढरपुर  भीमा नदी
25. बरेली रामगंगा
26. कटक, भुवनेश्वर महानदी
27. नासिक गोदावरी
28. सम्बलपुर महानदी
29. श्रीरंगपट्टनम कावेरी
30. जौनपुर गोमती
31. ओरछा बेतबा
32. वाराणसी गंगा
33. उज्जैन, कोटा क्षिप्रा
34. लुधियाना सतलज
35. विजयवाड़ा कृष्णा
36. तिरुचिरापल्ली, मैसूर कावेरी
37. पटना  गंगा
38. भागलपुर, फरक्का गंगा
39. मुंगेर  गंगा
40. सोनपुर, हाजीपुर गंडक
41. गोरखपुर  रापती
42. गंगटोक तिस्ता
43. बोधगया निरंजना
44. गया फल्गु
45. लखीसराय किऊल
46. मुम्बई माहिम
47. जम्मू तवी
48. दुर्ग, रायपुर शिवनाथ
 


नदियों के किनारें बसे प्रमुख नगर से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर



1. निम्नलिखित में से कौन-सा शहर गंगा नदी के तट पर स्थित नहीं है?

(a) कानपुर

(b) पटना

(c) वाराणसी

(d) दिल्ली

[read more] (d) दिल्ली [/read]

2. निम्नलिखित में से कौन-सा नगर गोमती नदी के किनारे स्थित नहीं है?

(a) चित्रकूट

(b) लखनऊ

(c) जौनपुर

(d) सुल्तानपुर

[read more] (a) चित्रकूट [/read]

3. गंगा नदी पर कौन-सी प्रान्तीय राजधानी स्थित है?

(a) कोलकाता

(b) लखनऊ

(c) भुवनेश्वर

(d) पटना

[read more] (d) पटना [/read]

4. गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्थित नगर है-

(a) हरिद्वार

(b) वाराणसी

(c) प्रयागराज

(d) कर्ण प्रयाग

[read more] (c) प्रयागराज [/read]

5. गोवा राज्य की राजधानी पणजी किस नदी के किनारे स्थित है?

(a) कोयना

(b) माण्डवी

(c) मूठा

(d) भीमा

[read more] (b) माण्डवी [/read]

6. आगरा किस नदी के किनारे स्थित है?

(a) गंगा

(b) अलकनंदा

(c) यमुना

(d) भागीरथी

[read more] (c) यमुना [/read]

7. आन्ध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) कृष्णा

(b) मूसी

(c) मूठा

(d) माण्डवी

[read more] (b) मूसी [/read]

8. जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) चिनाब

(b) रावी

(c) व्यास

(d) झेलम

[read more] (d) झेलम [/read]

9. सूरत किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) नर्मदा

(b) तापी

(c) सोन

(d) कावेरी

[read more] (b) तापी [/read]

10. उज्जैन किस नदी के किनारे स्थित है?

(a) नर्मदा

(b) तवा

(c) तापी

(d) क्षिप्रा

[read more] (d) क्षिप्रा [/read]

11. जमशेदपुर किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) दामोदर

(b) स्वर्णरखा

(c) मयूराक्षी

(d) अजय

[read more] (b) स्वर्णरखा [/read]

12. नासिक किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) महानदी

(b) गोदावरी

(c) नर्मदा

(d) कावेरी

[read more] (b) गोदावरी [/read]

13. जौनपुर किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) गंगा

(b) सरयू

(c) गोमती

(d) रिहन्द

[read more] (c) गोमती [/read]

14. निम्नलिखित में से कौन-सा नगर किसी नदी के तट पर नहीं बसा है?

(a) सू

(b) कटक

(c) भोपाल

(d) मैसूर

[read more] (c) भोपाल [/read]

15. गंगा नदी के किनारे स्थित सबसे बड़ा शहर है-

(a) वाराणसी

(b) पटना

(c) कानपुर

(d) प्रयागराज

[read more] (c) कानपुर [/read]

16. निम्नलिखित में से कौन-सा शहर गंगा के तट पर नहीं बसा है?

(a) कानपुर

(b) पटना

(c) बरौनी

(d) दिल्ली

[read more] (d) दिल्ली [/read]

17. स्टील सिटी राउरकेला किस नदी के किनारे स्थित है?

(a) महानदी

(b) ब्राह्मणी

(c) वैतरणी

(d) स्वर्णरेखा

[read more] (b) ब्राह्मणी,

व्याख्या: 

    राउरकेला (Steel City) ओडिशा राज्य में स्थित है और ब्राह्मणी नदी के तट पर बसा हुआ है।

नदियों के किनारें बसे [/read]

18. निम्नलिखित में से सरयू नदी के किनारे कौन-सा शहर स्थित है?

(a) पटना

(b) प्रयागराज

(c) अयोध्या

(d) वाराणसी

[read more] (c) अयोध्या [/read]

19. कावेरी नदी के तट पर कौन-सा शहर स्थित है?

(a) तिरूचिरापल्ली

(c) बंगलौर

(b) मैसूर

(d) हैदराबाद

[read more] (a) तिरूचिरापल्ली [/read]

20. साबमती नदी किस शहर के किनारे बहती है?

(a) मुम्बई

(b) अहमदाबाद

(c) हैदराबाद

(d) विजयवाड़ा

[read more] (b) अहमदाबाद [/read]

3. भारत के प्रमुख जलप्रपात

3. भारत के प्रमुख जलप्रपात



भारत के प्रमुख जलप्रपात

        भारत में जलप्रपातों (Waterfalls) की संख्या नगण्य है। सभी जलप्रपात छोटे हैं। अधिकांश दक्षिण भारत में ही पाये जाते हैं। देश के प्रमुख जलप्रपात निम्नवत हैं:-

भारत के प्रमुख जलप्रपात
क्रम जलप्रपात  स्थिति ऊँचाई
1. धुँआधार नर्मदा नदी 30 मीटर
2. येन्ना  येन्ना नदी 183 मीटर
3. चूलिया चम्बल नदी 18 मीटर
4. पुनासा चम्बल नदी 12 मीटर
5. शिवसमुद्रम कावेरी नदी 90 मीटर
6. गोकक घाटप्रभा नदी 55 मीटर
7.  बिहार टोंस नदी 100 मीटर
8. हुंडरू स्वर्णरेखा नदी  98 मीटर
9. जोग या गरसोप्पा शरावती नदी  255 मीटर
10. पायकारा नीलगिरि क्षेत्र
⇒ जोग या गरसोप्पा / महात्मा गाँधी जलप्रपात शरावती नदी पर 255m ऊँचा है, जिसके निर्माण में राजा, रानी, राकेट तथा रोरर नामक चार छोटे-छोटे जलप्रपातों का योगदान है।

⇒ जोग या गरसोप्पा जलप्रपात का नया नाम महात्मा गाँधी जलप्रपात रखा गया है।

⇒ भारत की प्रथम जल-विद्युत परियोजना शिवसमुद्रम, जलप्रपात (कर्नाटक) पर 1902 ई० में स्थापित की गई है।

⇒ भारत में दूसरा सबसे बड़ा जलप्रपात कावेरी नदी बनाती है जिसे शिवसमुद्रम जलप्रपात के नाम से जानते हैं।

⇒ शिवसमुद्रम जलप्रपात मैसूर, बंगलोर तथा कोलार स्वर्ण क्षेत्र को विद्युत प्रदान करता है।

⇒ कावेरी नदी में दो द्वीप हैं- श्रीरंगपट्टनम & शिवसमुद्रम।

शिवसमुद्रम द्वीप के दोनों ओ जलप्रपात बनते हैं।

भारत के प्रमुख जलप्रपात

शिवसमुद्रम



भारत के प्रमुख जलप्रपात से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर



1. भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात है-

(a) कपिल धारा जलप्रपात

(b) धुआँधार जलप्रपात

(c) जोग जलप्रपात

(d) सहस्त्र धारा जलप्रपात

[read more] (c) जोग जलप्रपात [/read]

2. विश्वविख्यात जोग या गरसोप्पा जलप्रपात किस राज्य में स्थित है?

(a) कर्नाटक

(b) महाराष्ट्र

(c) आ० प्र०

(d) केरल

[read more] (a) कर्नाटक [/read]

3. जोग या गरसोप्पा जलप्रपात का नया नाम क्या है?

(a) सरदार पटेल जलप्रपात

(b) महात्मा गाँधी जलप्रपात

(c) जवाहरलाल नेहरू जलप्रपात

(d) इन्दिरा गाँधी जलप्रपात

[read more] (b) महात्मा गाँधी जलप्रपात [/read]

4. जोग जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

(a) शरावती

(b) कावेरी

(c) नर्मदा

(d) चम्बल

[read more] (a) शरावती [/read]

5. धुआँधार जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

(a) नर्मदा

(b) तापी

(c) इन्द्रावती

(d) चम्बल

[read more] (a) नर्मदा [/read]

6. कपिल धारा जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

(a) तापी

(b) शरावती

(c) नर्मदा

(d) इन्द्रावती

[read more] (c) नर्मदा [/read]

7. शिवसमुद्रम जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

(a) नर्मदा नदी

(b) कृष्णा नदी

(c) गोदावरी नदी

(d) कावेरी नदी

[read more] (d) कावेरी नदी [/read]

8. गोकक जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

(a) कावेरी

(b) ताम्रपर्णी

(c) शरवती

(d) घाटप्रभा 

[read more] (d) घाटप्रभा [/read]

9. हुण्डरू जलप्रपात निर्मित है-

(a) स्वर्ण रेखा नदी पर

(b) कावेरी नदी पर

(c) इन्द्रावती नदी पर

(d) नर्मदा नदी पर

[read more] (a) स्वर्ण रेखा नदी पर [/read]

10. बिहार जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

( a) चम्बल

(b) टोंस

(c) नर्मदा

(d) कावेरी

[read more] (b) टोंस [/read]

 11. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए-

सूची-I (जलप्रपात)  सूची-II (नदी)

A. जोग जलप्रपात 1. शरावती

B. शिवसमुद्रम जलप्रपात 2. कावेरी

C. धुआँधार जलप्रपात 3. नर्मदा

D. गोकक जलप्रपात 4. गोकक

कूट: 

A B C D

(a) 2 1 4 3

(b) 2 3 1 4

(c) 4 2 3 1

(d) 1 2 3 4

[read more] (d) 1 2 3 4 [/read]

12. एशिया का सबसे बड़ा जलप्रपात (Falls) ‘हुण्डरू’ किस जगह के पास है?

(a) राँची

(b) हजारीबाग

(c) जमशेदपुर

(d) बोधगया

[read more] (a) राँची [/read]

13. महात्मा गाँधी जल विद्युत् उत्पादक प्लाण्ट कहाँ स्थित है?

(a) जोग प्रपात

(b) शिवसमुद्रम प्रपात

(c) गोकक प्रपात

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (a) जोग प्रपात [/read]

14. गोकक प्रपात किस जिले में स्थित है?

(a) बेलगाँव

(b) धारवाड़

(c) रायचूर

(d) बीदर

[read more] (a) बेलगाँव [/read]

15. राजा, रानी, रोरर और रॉकेट…… से सम्बन्धित है।

(a) कावेरी

(b) कृष्णा

(c) जोग प्रपात

(d) श्रृंगेरी

[read more] (c) जोग प्रपात [/read]

16. ककोलत जलप्रपात बिहार के किस जिले में स्थित है?

(a) नवादा

(b) रोहतास

(c) कटिहार

(d) भागलपुर

[read more] (a) नवादा [/read]

17. सहस्रधारा पर्यटन स्थल स्थित है-

(a) देहरादून

(b) मसूरी

(c) पंतनगर

(d) श्रीनगर

[read more] (a) देहरादून [/read]

18. नीलगिरि के पर्वतीय क्षेत्र में कौन-सा जलप्रपात स्थित है?

(a) जोग

(b) येन्ना

(c) धुआँधार

(d) पायकारा

[read more] (d) पायकारा [/read]

19. निम्नलिखित में कौन सुमेलित नहीं है?

(a) शिवसमुद्रम प्रपात- कावेरी

 (b) धुआँधार प्रपात- नर्मदा

(c) सहस्र धारा प्रपात- नर्मदा

(d) गरसोप्या प्रपात- कावेरी

[read more] (d) गरसोप्या प्रपात- कावेरी [/read]

20. निम्नलिखित में कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?

(a) जोग- कर्नाटक

(b) पापनाशम- हि० प्र०

(c) धुआँधार- म० प्र०

(d) हुण्डरू- झारखण्ड

[read more] (b) पापनाशम- हि० प्र० [/read]

General Geography Capsule 6

General Geography Capsule 6

सामान्य भूगोल


General Geography Capsule 6

1. विश्व का सबसे बड़ा मांस निर्यातक देश है-

उत्तर- अर्जेंटीना 

2. दक्षिण अमेरिका का वह स्थान जहाँ जड़ों में वर्षा होती है-

उत्तर- मध्य चिल्ली

3. विश्व का एकमात्र महाद्वीप जिससे कर्क वृत्त, मकर वृत्त एवं विषुवत वृत्त होकर गुजरता है-

अफ्रीका महाद्वीप

4. एण्डीज पर्वतमाला (द० अमेरिका) की सर्वोच्च पर्वत चोटी का नाम है-

उत्तर- अकांकागुआ

5. मैनीगॉट रेखा किन दो देशों के बीच की सीमा रेखा है-

उत्तर- जर्मनी एवं फ़्रांस 

6. जपान पहले किस नाम से जाना जाता था-

उत्तर- निप्पन

7. अर्जेन्टीना देश की राजधानी है-

उत्तर- ब्यूनस ऑयर्स

8. सीयर्स टावर स्थित है-

उत्तर- शिकागो में 

9. उत्तरी सागर और बाल्टिक सागर को जोड़ने वाली नहर है-

उत्तर- कील नहर 

10. बेरूत किस देश की राजधानी है-

उत्तर-  लेबनान

11. ब्लैक हिल, ब्लू हिल तथा ग्रीन हिल नामक पहाड़ियाँ किस देश में है-

उत्तर- संयुक्त राज्य अमेरिका में

12. पहले ‘स्याम’ के नाम से जाना जाने वाला देश है-

उत्तर- थाईलैंड

13. विश्व के मानचित्र के सर्वप्रथम निर्माणकर्त्ता थे-

उत्तर- अनेग्जीमेंडर

14. ‘पृथ्वी का अंतिम स्वर्ग’ कहा जाता है-

उत्तर- इंडोनेशिया द्वीप को

15. संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा की बीच की सीमा रेखा है-

उत्तर- 49वीं समांतर रेखा

16. ‘महाद्वीपों का महाद्वीप’ कहा जाता है-

उत्तर- एशिया को 

17. विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल सहारा स्थित है-

उत्तर- उत्तरी अफ्रीका में 

18. विश्व में जूट उत्पादन में अग्रणी देश है-

उत्तर- बांग्लादेश 

19 आर्कटिक एवं प्रशांत महासागर को जोड़ती है-

उत्तर- बेरिंग जलडमरूमध्य

20. लेब्रोडोर उत्तरी अटलांटिक महासागर की जलधारा की प्रक्रति है-

उत्तर-  ठंडी जलधारा

21. गल्फस्ट्रीम उत्तरी अटलांटिक महासागर की जलधारा की प्रक्रति है-

उत्तर- गर्म जलधारा

22. दक्षिणी अमेरिका का उष्ण मरूस्थल है-

उत्तर- पेंटागोनिया 

23. मिसीसिपी-मिसौरी नदी का उद्गम स्थल, जो मैक्सिको की खाड़ी में गिरती है-

उत्तर- लटास्का झील” (उत्तरी मिनेसोटा)

24. ‘सूर्योदय का देश’ कहा जाता है-

उत्तर- जापान को

25. नील नदी का उदग्न स्थल है-

उत्तर- विक्टोरिया झील 

26. ‘मध्यरात्रि के सूर्य का देश’ कहा जाता है-

उत्तर- नार्वे को

27. ‘आँसूओं का प्रवेश द्वार’ अथवा दुःख का द्वार के रूप में जाना जाता है-

उत्तर- बाब-उल-मंदब जलडमरूमध्य को 

नोट : बाब-उल-मंदब अरब प्रायद्वीप पर यमन और अफ़्रीका के सींग पर जिबूती, इरिट्रिया  और उत्तरी सोमालिया के बीच स्थित एक जलडमरूमध्य है।  

28. ‘यांगटीसीक्यांग नदी’ का उद्गम स्थल है-

उत्तर- सीकांग के पहाड़ी क्षेत्र से (तिब्बत की पठार, चीन)

29. ‘मृतक घाटी’ (Death Valley) स्थित है-

उत्तर- पूर्वी कैलीफोर्निया में

30. पिग्मी जनजाति निवास करती है-

उत्तर- कांगो बेसिन (अफ्रीका) में

31. आस्वान बांध किस नदी पर निर्मित है-

उत्तर- नील नदी पर 

32. वोल्गा नदी किस सागर में गिरती है-

उत्तर- कैस्पियन सागर

33. करा नहर (Kra Canal) किस देश में स्थित है-

उत्तर- थाईलैंड

नोट: प्रस्तावित “करा नहर” का मुख्य उद्देश्य दक्षिण चीन सागर एवं हिंद महासागर के बीच की नौवहन दूरी को कम करना है। नहर का निर्माण करा के स्थलडमरूमध्य के माध्यम से किया जाएगा। ये नहर थाईलैंड की खाड़ी और अंडमान सागर को जोड़ने का काम करेगी।

34. अंकोरवाट कहाँ है-

उत्तर- कम्बोडिया 

35. प्रायद्वीपों का महाद्वीप’ कहा जाता है-

उत्तर- यूरोप को 

36. आस्ट्रेलिया में किस नदी के किनारे घना आबादी है-

उत्तर- मर्रे-डार्लिंग 

37. नियाग्रा जल प्रपात किन दो देशों को विभाजित करती है-

उत्त– USA और कनाडा को 

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नियाग्रा जल प्रपात

General Geography Capsule 6

38. ‘प्रशांत महासागर के चौराहा’ के उपनाम से जाना जाता है-

उत्तर- हवाई द्वीप को 

39. विश्व का सर्वाधिक व्यस्त एवं महत्त्वपूर्ण जलमार्ग है-

उत्तर- उत्तरी अतलांतिक जलमार्ग

40. मलक्का जलसंधि (इंडोनेशिया) जोड़ती है-

उत्तर- अंडमान सागर एवं दक्षिणी चीन सागर को

41. कोलोराडो नदी स्थित है-

उत्तर-  USA में

42. महत्त्वपूर्ण मत्स्य ग्रह क्षेत्र ‘ग्रैण्ड बैंक’ स्थित है-

उत्तर- उत्तरी अतलांतिक महासागर में 

43. आस्ट्रेलिया के ऊपर चलने वाला उष्ण कटिबंधीय चक्रवात है-

उत्तर- विली-विली

44. जर्मनी और पोलैण्ड की बीच की सीमा रेखा है-

उत्तर- ऑडरनीस रेखा

45. विश्व का सबसे प्राचीन राजतंत्र है-

उत्तर- जापान

46. विश्व में निम्नत्तम प्रजनन दर है-

उत्तर- स्वीडन की 

47. विश्व में सर्वाधिक अम्लीय वर्षा वाला देश है-

उत्तर- नार्वे 

48. ‘चकमा’ शरणार्थी है-

उत्तर-  बांग्लादेश की

49. नील नदी (6690 किमी०) का उद्गम स्थल है-

उत्तर- विक्टोरिया झील

50. पेट्रोनेस टावर स्थित है-

उत्तर- मलेशिया में

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General Geography Capsule 5

सामान्य भूगोल


General Geography Capsule 5

एक नजर में इसे जरुर पढ़ें

1. विश्व का सबसे बड़ा प्रायद्वीप है-

उत्तर- अरब प्रायद्वीप

2. विश्व की छत (Roof of the World) कहा जाता है-

उत्तर- पामीर के पठार को

3. विश्व की कुल जनसंख्या है-

उत्तर-  7.78 अरब (लगभग)

4. विश्व में जनसंख्या दृष्टि से सबसे बड़ा देश हो गया है-

उत्तर- भारत

5. विश्व का सबसे छोटा देश है-

उत्तर- वेटिकन सिटी (44 हेक्टेयर)

6. महाद्वीपों की कुल संख्या है-

उत्तर- 7

7. विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है-

उत्तर- एशिया

8. विश्व का सबसे छोटा महाद्वीप है-

उत्तर- आस्ट्रेलिया

9. विश्व में ग्रामीण जनसंख्या है-

उत्तर- लगभग (50%)

10. सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है-

उत्तर- माउन्ट एवरेस्ट (नेपाल में 8848 मी०)

11. विश्व में सर्वाधिक जन्म दर वाला महाद्वीप है-

उत्तर- अफ्रीका

12. विश्व में सर्वाधिक मृत्यु दर वाला महाद्वीप है-

उत्तर- अफ्रीका

13. विश्व में न्यूनत्तम साक्षरता वाला देश है-

उत्तर- नाइजर (17.6%)

14. विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला देश है-

उत्तर- बांग्लादेश (926 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी०)

15. विश्व का सर्वाधिक गरीब देश है-

उत्तर- पूर्वी तिमोर

16. विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है-

उत्तर- चीनी (मंदारिन)

17. विश्व की सबसे गहरी झील है-

उत्तर- बैकाल झील  (धरातल से 1940 मीटर गहरा)

18. एशिया को उत्तरी अमेरिका से अलग करता है-

उत्तर- बेरिंग जलसन्धि

19. विश्व में सिंचाई नहरों का सबसे बड़ा जाल है-

उत्तर- पाकिस्तान में

20. विश्व का सबसे बड़ा सिनकोना उत्पादक केंद्र है-

उत्तर- इंडोनेशिया 

21. विश्व में सर्वाधिक जलयान बनाने वाला देश है-

उत्तर- जापान

22. जनसंख्या दृष्टि से विश्व का सबसे छोटा महानगर है-

उत्तर- शंघाई  (चीन)

23. विश्व का सबसे बड़ा देश (क्षेत्रफल में) है-

उत्तर- रूस (यूरोप महाद्वीप)

24. विश्व का सबसे छोटा गणतंत्र है-

उत्तर- नौरु

25. एशिया महादेश में विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है-

उत्तर- मासिनराम (मेघालय, भारत)

26. विश्व की कुल जनसंख्या का कितना प्रतिशत एशिया में निवास करती है-

उत्तर – 60 प्रतिशत

27. एशिया में सर्वाधिक घना रूप से बसा द्वीप है-

उत्तर- जावा

28. श्रीलंका की सबसे लम्बी नदी है-

उत्तर-  महावेली

29. संसार का सबसे बड़ा सागर है-

उत्तर- दक्षिण चीन सागर

30. लाल सागर एवं भूमध्य सागर को जोड़ने वाली नहर है-

उत्तर- स्वेज नहर 

31. एशिया महादेश में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा देश है-

उत्तर- चीन

32. एशिया महादेश में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा देश है-

उत्तर- मालदीव

33. विश्व का सर्वाधिक मछली पकड़ने वाला देश है-

उत्तर- चीन

34. विश्व का सर्वाधिक प्राकृतिक रबड़ उत्पादित करने वाला देश है-

उत्तर- थाईलैंड

35. विश्व का सर्वाधिक अबरख उत्पादित करने वाला देश है-

उत्तर- भारत

36. विश्व का सर्वाधिक चाय उत्पादित करने वाला देश है-

उत्तर- भारत

37. विश्व में सर्वाधिक टिन उत्पादित करने वाला देश है-

उत्तर- मलेशिया

38. अंध महाद्वीप (Black/Dark Continent) कहा जाता है-

उत्तर- अफ्रीका को

39. बुशमैन (कलाहारी) तथा पिग्मी (कांगो बेसिन) प्रमुख जनजातियाँ है-

उत्तर- अफ्रीका महादेश का

40. विश्व का प्रमुख स्वर्ण उत्पादक नगर है-

उत्तर- जोहांसबर्ग (अफ्रीका में)

41. अफ्रीका के उष्ण तथा शीतोष्ण घास का मैदान कहलाता है-

उत्तर- सवाना तथा वेल्ड्स

42. विश्व को सबसे बड़ी हीरे की खान है-

उत्तर- किम्बरले (दक्षिण अफ्रीका)

43. विश्व में सर्वाधिक कोको उत्पादन देश है-

उत्तर- आइबरी कोस्ट (अफ्रीका)

44. उत्तरी अमेरिका की खोज की गई थी-

उत्तर- कोलंबस

45. रेड इंडियन और नीग्रो प्रजातियाँ निवास करती है-

उत्तर- उत्तरी अमेरिका में

46. कालगुर्ली और कूलगार्डी सोने कि प्रसिद्ध खाने है- 

उत्तर-  आस्ट्रेलिया में

47. आस्ट्रेलिया में भेड़ पालक मजदूरों को कहा जाता है-

उत्तर- जेकारू

48. गोल्ड कोस्ट के नाम से जाना जाने वाला देश है-

उत्तर- घाना

General Geography Capsule 5

गोल्ड कोस्ट

49. वनों का देश किसे कहा जाता है-

उत्तर- कांगो देश को

50. मिस्र के किसान को क्या कहा जाता है-

उत्त– फेल्लाह


 

20. हीदरग्राफ, क्लाइमोग्राफ, मनारेख और अरगोग्रफ

20. हीदरग्राफ, क्लाइमोग्राफ, मनारेख और अरगोग्रफ


हीदरग्राफ

       हीदरग्राफ का निर्माण सर्वप्रथम टेलर महोदय ने किया था।

⇒ हीदरग्राफ में जलवायु के आँकड़े को प्रदर्शित किया जाता है।

⇒ हीदरग्राफ में X-अक्ष पर वर्षा और Y-अक्ष पर तापमान को दिखाया जाता है।

⇒ हीदरग्राफ का प्रयोग औपनिवेशिक काल में अँग्रेज लोग बड़े पैमाने पर किया करते थे।

⇒ हीदरग्राफ पर बहुत अधिक गर्म, बहुत अधिक ठण्डा, बहुत अधिक सूखा और बहुत अधिक आर्द्रता के साथ-2 अधिवासित होने के लिए उपयुक्त क्षेत्र को प्रदर्शित किया जाता था।

हीदरग्राफ

 

 

क्लाइमोग्राफ

       Climograph का आविष्कार सर्वप्रथम ग्रिफिथ टेलर महोदय ने किया था।

⇒ Climograph X-अक्ष पर Relative Humidity (सापेक्षिक आर्द्रता) को और Y-अक्ष पर Wet Bulb Temperature (आर्द्र बल्ब तापमान) को ध्यान में रखकर मानचित्र या ग्राफ बनाया जाता है।

⇒ इंग्लैण्ड के निवासी औपनिवेशिक काल में Climograph का उपयोग वैश्विक स्तर पर निवास करने योग्य स्थान के निर्धारण में किया कर‌ते थे।

⇒ जबकि हीदरग्राफ का प्रयोग स्थानीय स्तर पर निवास करने योग्य स्थान का निर्धारण किया करते थे।

⇒ टेलर ने कुछ विशेष प्रकार की जलवायु को भी दर्शाया है जो क्लाइमोग्राफ के चारों कोनों पर होता है। इसके चार प्रकार हैं:

1. झुलसता हुआ (SCORCHING):-

        NW कोने पर, आर्द्र बल्ब तापमान 60° F से अधिक तथा सापेक्षिक आर्द्रता 40% से कम अर्थात् उष्ण-शुष्क जलवायु।

2. उमसदार (MUGGY):-

       NE कोने पर तापमान 60° F से अधिक तथा सापेक्षिक आर्द्रता 70% से अधिक अर्थात् उष्णार्द्र जलवायु।

3. शीतार्द्र (RAW):-

      SE कोने पर, तापमान 40° F से कम तथा सापेक्षिक आर्द्रता 70% से अधिक अर्थात् ठंडी आर्द्र जलवायु।

4. शीत-शुष्क (KEEN):-

       SW कोने पर, तापमान 40° F से कम तथा सापेक्षिक आर्द्रता 40% से कम अर्थात् शीत व शुष्क जलवायु।

 

Cartogram (मानारेख)

        मानारेख में किसी क्षेत्र की मूल आकृति को किसी विशेष उद्देश्य से विकृत कर सांख्यिकीय आंकड़ों का आरेखी विधि से मानचित्र पर प्रदर्शन किया जाता है। यह एक अति सारगर्भित एवं सरल मानचित्र होता है तथा आधुनिक भूगोल में काफी लोकप्रिय है।

⇒ इरविन रेख ने मानारेख को परिभाषित करते हुए कहा कि-“किसी एकल विचार को आरेखी ढंग से दिखाने के लिए बनाया गया अमूर्त और सरलीकृत मानचित्र को मानारेख कहते हैं।”

       मानारेख चार प्रकार का होता है:-

(1) क्षेत्र मूल मानारेख

        क्षेत्र मूल मानारेख में संसार अथवा किसी महाद्वीप, देश अथवा राज्य के क्षेत्रफल को आयत चित्र के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।

क्षेत्र मूल मानारेख

(2) यातायात परिवहन मानारेख (Traffic flow Cartogram)

        वैसा मानारेख जिस पर सड़‌क पर चलने वाली गाड़ियों के भार को प्रदर्शित किया जाता है। इसे Star Diagram भी कहते हैं।

⇒ Star Diagram पर नियत समय में दिशा के अनुरूप चलने वाली वायु को प्रदर्शित किया जाता है।

⇒ इस आरेख में  शांत दिनों की संख्या को केन्द्र में लिख दिया जाता है या नहीं तो Calm Days लिख दिया जाता है। ऐसे Diagram को Wind Diagram कहते है।

यातायात परिवहन मानारेख

(3) Isochronic Diagram (समकालीन मानारेख)

         किसी निश्चित बिन्दु से समान समय में पहुँच वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समकालीन रेखा कहते हैं।

⇒ जब परिवहन मार्ग पर समकालीन रेखा को प्रदर्शित किया जाता है तो Isochronic Diagram का निर्माण होता है।

Isochronic Diagram

(4) समान मूल्य दूरी मानारेख

         किसी भी क्षेत्र के संदर्भ में सड़क अथवा रेलमार्ग पर तय की जाने वाली समान दूरी अन्तराल पर खींचे जाने वाली क्रमिक ट्रैफिक को प्रदर्शित करने वाले मानचित्र को समान मूल्य दूरी मानारेख कहते है।

⇒ समान मूल्य दूरी मानारेख पर दूरी एवं परिवहन के भार को साथ-2 प्रदर्शित किया जाता है।

समान मूल्य दूरी मानारेख

अरगोग्राफ

       अरगोग्राफ का निर्माण सर्वप्रथम गेडिज महोदय ने किया था।

⇒ अरगोग्राफ कृषकों के लिए काफी उपयोगी है।

⇒ अरगोग्राफ प तापमान, वर्षा, फसलों की संख्या और उत्पादन को एक साथ प्रदर्शित किया जाता है।


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3. मानचित्र प्रक्षेपों का वर्गीकरण

3. मानचित्र प्रक्षेपों का वर्गीकरण


मानचित्र प्रक्षेपों का वर्गीकरण

      प्रकाश या ज्यामितीय विधि द्वारा समतल सतह पर निर्मित अक्षांश व देशांतर रेखाओं के जाल या भू-ग्रिड को मानचित्र प्रक्षेप कहा जाता है। गोलाकार पृथ्वी अथवा इसके किसी बड़े भू-भाग का समतल सतह पर मानचित्र बनाने के लिए मानचित्र प्रक्षेप का प्रयोग किया जाता है। अक्षांश एवं देशांतर रेखाओं के जाल को Graticule, Net या Mesh के नाम से भी जाना जाता है।

मानचित्र प्रक्षेपों

           पृथ्वी की आकृति का यथार्थ चित्रण केवल ग्लोब के द्वारा ही संभव है एवं कोई भी मानचित्र प्रक्षेप आकार, क्षेत्रफल एवं दिशा, तीनों ही दृष्टि से सही नहीं होता है। परन्तु समक्षेत्र, यथाकृतिक अथवा शुद्ध दिशा के गुणों में से किसी विशेष गुण का प्रक्षेप बनाना संभव है। अतः मानचित्र के उद्देश्य को ध्यान में रखकर उपयुक्त प्रक्षेप का चयन किया जाता है।

    मानचित्र प्रक्षेप को तीन आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

(1) प्रकाश के प्रयोग के आधार पर

(2) गुण के आधार पर

(3) रचना विधि के आधार पर

(I) प्रकाश के प्रयोग के आधार पर

            प्रकाश के प्रयोग के आधार पर प्रक्षेप दो प्रकार के होते हैं:-

(1) संदर्श मानचित्र-प्रक्षेप (Perspective Map Projection or Geometrical Projection):-

         यह एक ऐसा Projection है जिसमें ग्लोब पर स्थित भूग्रिड को समतल कागज पर प्रकाश के माध्यम से प्रक्षेपित करते हैं।

        इस प्रक्षेप में प्रकाश के स्रोत की तीन स्थिति हो सकती है। जैसे-

(1) केन्द्र में,

(2) पृथ्वी के परिधि पर और

(3) अनन्त पर।

          इन तीनों स्थितियों के आधार पर प्रक्षेप तीन प्रकार के होते हैं:-
(i) केन्द्रक प्रक्षेप (Gnomonic Projection)

⇒ इसमें प्रकाश स्रोत ग्लोब के केंद्र में होता है।

(ii) त्रिविम प्रक्षेप (Stereograophic Projection)

इसमें प्रकाश स्रोत ग्लोब के परिधि पर होता है।

(iii) लम्ब-कोणीय प्रक्षेप (Orthographic Projection)

इसमें प्रकाश स्रोत अनंत पर होता है।

(2) असंदर्श मानचित्र प्रक्षेप (Non-Perspective Map Projection):-

          इसमें गणितीय विधि के आधार पर भूग्रिड को समतल कागज पर प्रक्षेपित किया जाता है। इस विधि में प्रकाश स्रोत को केन्द्र में स्थिर कर दिया जाता है और समतल कागज को अलग-2 स्थितियों में बदलकर प्रक्षेपण का कार्य किया जाता है। इसके आधार पर यह Projection तीन प्रकार का होता है-

(i) Polar Zenithal Projection (ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप)

⇒ इसमें समतल कागज को ग्लोब के ध्रुव पर फैलाकर रखा जाता है।

(ii) Equatorial Zenithal Projection (विषुवतीय खमध्य प्रक्षेप)

⇒ इसमें समतल कागज विषुवत रेखा को स्पर्श करता है।
(iii) Oblique Zenithal Projection (तिर्यक खमध्य प्रक्षेप)

⇒ इसमें समतल कागज ध्रुव और विषुवत रेखा के बीच के किसी स्थान को स्पर्श करता है।

(II) गुण के आधार पर 

             गुण के आधार पर प्रक्षे तीन प्रकार के होते हैं:-

(1) यथाआकृति प्रक्षेप (Orthomorphic Projection)

(2) समक्षेत्र प्रक्षेप (Homolographic Projection or Equal Area Projection)

(3) शुद्ध दिशा प्रक्षेप (Azimuthal Projection)

(III) रचना विधि के आधार पर

           इसमें गणित और प्रकाश दोनों का सहारा अपने सुविधा के अनुसार लिया जाता है।

⇒ रचना विधि के आधार पर प्रक्षेप कई प्रकार के होते हैं:-
(1) शंकु प्रक्षेप (Conical Projection)

      शंकु प्रक्षेप चार प्रकार का होता है-

(i) One Standard Parallel Conical Projection (एक मानक अक्षांश वाला शंकु-प्रक्षेप)

(ii) Two Standard Parallel Conical Projection (दो मानक अक्षांशों वाला शंकु प्रक्षेप)

(iii) Bonne’s Projection (बोन प्रक्षेप)

(iv) Polyconic Projection (बहुशंकुक प्रक्षेप)

(2) बेलनाकार प्रक्षेप (Cylindrical Projection)

(i) Cylindrical Equi-Distance Projection (समदूरस्थ बेलनाकार प्रक्षेप)

(ii) Cylindrical Equal-Area Projection (बेलनाकार समक्षेत्र प्रक्षेप)

(iii) Mercator’s Projection (मर्केटर प्रक्षेप या यथाकृति प्रक्षेप)

(iv) Gall Projection (गॉल प्रक्षेप)

(3) Zenithal Projection (खमध्य प्रक्षेप)
              प्रकाशीय स्थिति के आधार पर खमध्य प्रक्षेप तीन प्रकार का होता है:-

(1) Gnomonic Projection (केन्द्रक नोमॉनिक प्रक्षेप)

(ii) Stereograophic Projection (त्रिविम प्रक्षेप)

(ii) Orthographic Projection (लम्बकोणीय प्रक्षेप)

             खमध्य प्रक्षेप कागज तल स्थिति के आधार पर तीन प्रकार का होता है:-

(i) Polar Zenithal Projection (ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप)

(ii) Oblique Zenithal Projection (तिर्यक प्रक्षेप)

(iii) Equatorial Zenithal Projection (विषुवतीय खमध्य प्रक्षेप)

(4) रूढ़ प्रक्षेप (Conventional Porojection)

(i) मॉलवीड प्रक्षेप (Mollveide Projection)

(ii) ज्यावक्रीय या सिनुसॉयडल प्रक्षेप (Sinusoidal or Sanson Flamstead Projection)

(iii) गोलाकार प्रक्षेप (Globular Projection)

(iv) विच्छिन्न मॉलवीड प्रक्षेप (Interrupted Mollveide Projection)

(v) विच्छिन्न सैन्सन फ्लैम्स्टीड या सिनुसॉयडल प्रक्षेप (Interrupted Sinusoidal or Sanson Flamstead Projection)

मानचित्र प्रक्षेपों का वर्गीकरण


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19. आरेख का प्रकार एवं उपयोग

आरेख का प्रकार एवं उपयोग

(Diagram: Types & uses or Statistical Representation of Data)


आरेख का प्रकार एवं उपयोग

         द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भूगोल के विषयवस्तु एवं विधि तंत्र में मात्रात्मक क्रांति का आगमन हुआ। इसी मात्रात्मक क्रान्ति का यह प्रभाव था कि भूगोल में अनेक प्रकार के भौगोलिक तत्वों का निरूपण हेतु आरेख (Diagram) का निर्माण किया जाने लगा।

⇒ मात्रात्मक क्रान्ति- भूगोल में गणितीय विधि का प्रयोग करना।

भौगोलिक तत्वों को ग्राफ या चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित करने की विधि को आरेख (Diagram) कहते हैं।

⇒ भूगोल में प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक वातावरण के किसी तत्व का वितरण प्रदर्शित करने वाले मानचित्र को वितरण मानचित्र कहते है।

⇒ वितरण मानचित्र को दो भागों में बाँटते हैं-

(1) अमात्रात्मक विधि के द्वारा निर्मित वितरण मानचित्र या गुण प्रधान वितरण मानचित्र

(2) मात्रात्मक विधि पर आधारित वितरण मानचित्र या सांख्यिकी मानचित्र

गुण प्रधान मानचित्र /वितरण मानचित्र

       गुण प्रधान मानचित्र मोटे तौर पर चार प्रकार का होता है:-

(1) रंगारेखा विधि (Choro-Chromatic Method)

(2) सामान्य छाया विधि (Sketching Map) पर आधारित मानचित्र

(3) चित्रीय विधि (Pictorial Map) पर आधारित मानचित्र

(4) वर्ण प्रतीकी विधि पर आधारित मानचित्र (Choros-Chematic Map)

मात्रात्मक मानचित्र

      मात्रात्मक मानचित्र भी चार प्रकार का होता है-

(i) वर्णमात्री विधि पर आधारित मानचित्र

(ii) सममान प्रतीक विधि पर आधारित मानचित्र

(iii) बिन्दु विधि पर आधारित मानचित्र

(iv) आरेखी विधि आधारित मानचित्र

(1) रंगारेखी विधि मानचित्र (Colour patch Map)

⇒ इसे Colour Map या Choro-Chromatic Map भी कहते हैं।

⇒ प्राकृतिक, राजनीतिक एवं प्रशासकीय ने प्रदेशों के विस्तार, भूमि उपयोग, मिट्टी एवं वनस्पतियों के प्रकार का वितरण प्रदर्शित करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है।

⇒ रंगारेखी मानचित्र पर अलग-2 भौगोलिक तत्वों को अलग-2 रंग से प्रदर्शित करते हैं।

(2) Sketching Map (सामान्य छाया विधि)

⇒ sketching Map में एक भौगोलिक तत्व के उपविभाग को एक ही रंग से अलग-2 तीव्रता (Intensity) प्रदर्शित करते हैं।

(3) चित्रीय विधि पर आधारित मानचित्र

        किसी देश के दर्शनीय स्थान, पर्यटन केन्द्र, वेष-भूषा एवं ऐतिहासिक इमारतों के चित्रों के माध्यम से मानचित्र परम प्रस्तुत करना चित्रीय मानचित्र कहलाता है।

(4) वर्ण प्रतीकी मानचित्र

        वैसा मानचित्र जिस पर कई तत्त्वों के वितरण को एक ही मानचित्र पर दिखाया जाता है।

⇒ वर्ण प्रतीकी मानचित्र पर खनिजों का वितरण, औद्योगिक वितरण एवं फसल उत्पादन के वितरण प्रदर्शित करते हैं और Index बनाकर इसमें संकेत के रूप प्रदर्शित कर देते हैं।

⇒ कभी-2 Index का निर्माण कर सीधे-2 भौगोलिक तत्व के पहला अक्षर को मिलने वाले स्थान पर लिख दिया जाता है। ऐसे मानचित्र को नामांकन विधि मानचित्र कहते है।

मात्रात्मक विधि

       जब भौगोलिक तत्वों जैसे वस्तुओं के मूल्य, मात्रा, घनत्व इत्यादि को भौगोलिक मानचित्र पर या सांख्यिकी विधि द्वारा प्रकट किया जाता है तो उसे मात्रात्मक विधि घर आधारित आरेख (मानचित्र) कहते हैं।

यह कई प्रकार का होता है। जैसे-

(1) वर्णमात्री विधि (Choropleth)

        ऐसे मानचित्र में भिन्न-2 घनत्त्व वाली भौगोलिक तत्त्वों को मानचित्र पर प्रति इकाई औसत या प्रतिशत के मूल में प्रदर्शित करते हैं। जैसे- जनघनत्व (प्रति इकाई क्षेत्रफल पर निवासित जनसंख्या), कृषि भूमि का प्रतिशत, उत्पादकता (kg प्रति इकाई क्षेत्रफल) को दिखाया जाता है।

⇒ इसमें मूल्यों के बढ़ने के साथ रंगों के गहराई में भी वृद्धि होते जाती है।

(2) सममान रेखा विधि (Isopleth Map)

          मानचित्र पर किसी वस्तु के समान मूल्य या धनत्व को मिलाने वाली रेखा को Isopleth रेखा कहते हैं।

⇒ Isopleth जलवायु के तत्वों को दिखलाने के लिए काफी उपयोगी है। इसके अलावे इस पर निम्नलिखित तत्त्वों को प्रदर्शित किया जा सकता है। जैसे- समताप रेखा, सममेघ रेखा, समवर्षा रेखा, समदाब रेखा इत्यादि।

1. आइसोनीफ (Isonif)⇒ समान हिम वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आइसोनीफ कहते है।

2.  सममेघ रेखा या आइसोनेफ (Isoneph)⇒ समान मेघ आच्छादन वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आइसोनेफ कहते है।

3. आइसो बाथ (Isobath)⇒ समुद्र के अंदर समान गहराई वाले स्थानों को मिलाकर खींचे जाने वाली रेखा को आइसो बाथ कहते है।

4. आइसो ब्रांट (Isobront)⇒ एक समान समय पर तूफान आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

5. समपवनवेग रेखा या आइसोटैक (Isotach)⇒ मौसम मानचित्र पर पवन की समान गति वाले स्थानों को मिलाकर खींची गई रेखा।

6. समताप रेखा (Isotherm)⇒ समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

7. आइसोपैच (Isopach)⇒ हिमानी अथवा चट्टानों के समान मोटाई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

8.  समकाल रेखा या आइसोक्रोन (Isochrone)⇒ किसी बिंदु से एक समान समय में तय कि गई दूरी वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

(3) बिन्दु विधि (Dot Method)

          इसे बनाने से पूर्व चार तथ्यों पर ध्यान देना पड़ता है-

(i) बिन्दुओं के आकार को निश्चित करना पड़ता है।

(ii) बिन्दु मूल्य सुनिश्चित करना पड़ता है।

⇒ बिन्दुओं के मूल्य का निर्धारण दो आधार पर होता है:

(a) क्षेत्रीय या स्टिल जेन बोअर विधि (क्षेत्रफल के लिए)

(b) आयतनी या स्टेनडी गीयर विधि (आयतन के लिए)

(iii) बिन्दुओं को अंकित करना- यह भी दो प्रकार का हो सकता है:-

(a) समवितरण प्रणाली पर आधारित

(b) असमवितरण प्रणाली पर आधारित

(iv) एक समान बिन्दु बनाना।

⇒ बिन्दु विधि या आधारित मानचित्र में केवल एक वस्तु का विवरण दिखाते हैं। जैसे:- जनसंख्या,पालतू पशु

क्षेत्रीय या स्टिल जेन बोअर विधि

⇒ यह बिन्दु विधि वितरण मानचित्र का एक संशोधित रूप है।

⇒ इस विधि के द्वारा ग्रामीण एवं नगरीय जनसंख्या को स्पष्ट रूप से दिखाया जा सकता है।

⇒ इस विधि में ग्रामीण जनसंख्या को बिंदु के द्वारा और नगरीय जनसंखा को अनुपातिक वृत के द्वारा दिखाया जाता है।

इसमें आनुपातिक वृत को क्षेत्रफल के रूप में प्रदर्शित करते हैं।

⇒ वृतों की त्रिज्या सम्बंधित जनसंख्या का वर्गमूल निकालकर बिन्दु के आकार से गुणा करके प्राप्त किया जाता है।

आयतनी या स्टेनडी गीयर विधि

⇒ इसमें भी ग्रामीण एवं नगरीय जनसंख्या के वितरण को मानचित्र पर दिखाया जाता है।

⇒ बोअर विधि में कभी-2 नगरीय केन्द्र की जनसंख्या अधिक होने पर आकार बहुत बड़ा हो जाता है, जिसके कारण वृत नगर सीमा के बाहर चली जाती है।

⇒ अत: इस समस्या से निपटने हेतु नगरीय जनसंख्या को समानुपातिक गोला के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। 

⇒ गोला का अर्द्ध व्यास जनसंख्या के घनमूल निकालकर ज्ञात करते हैं।

⇒ स्टेन डी गियर विधि में ग्रामीण जनसंख्या को बिन्दुओं एवं नगरीय जनसंख्या को गोलों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

(4) आरेखी विधि पर आधारित मानचित्र

         वैसा मानचित्र जिसमें भौगोलिक तत्वों को सरल रेखा, वृत, दण्ड इत्यादि के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। उसे आरेख कहते हैं।

आरेख चार प्रकार के होते हैं-

(i) दण्डारेख (Bar Diagram)

(ii) वृत आरेख (Pie Diagram)

(iii) रेखीय आरेख (Line Graph)

(iv) त्रिविम आरेख (Three Dimensional)

(i) दण्डारेख (Bar Diagram)

        दण्ड-आरेख पा पिछले शताब्दी के जनसंख्या को प्रदर्शित किया जा सकता है। इसमें समय को x-axis पर और जनसंख्या को Y-axis पर दिखाया जाता है।

      वस्तुतः दण्डारेख दो प्रकार का होता है:-

(a) साधारण दण्ड आरेख (Simple Bar Diagram):- साधारण दण्ड आरेख में कुल मात्रा को एक दण्ड के रूप में प्रदर्शित करते है।

साधारण दण्ड आरेख

(b) मिश्रित दण्ड आरेख (Compound Bar Diagram):- यदि दिया गया डाटा सतत (Continuous) हो तो दण्डारेख आयत चित्र के रूप में बनते है। 

मिश्रित दण्ड आरेख

(c) बहुदण्ड आरेख (Multiple Bar Diagram):- इसमें दो या अधिक वस्तुओं के आँकड़े एक साथ प्रदर्शित किये जाते हैं। तुलनात्मक अध्ययन में ये विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।

बहुदण्ड आरेख

(ii) वृत आरेख (Pie Diagram)

                  यह आँकड़ों को प्रदर्शित करने की एक सरल ज्यामितीय विधि है। वृत्तारेख में वृत्त का कुल क्षेत्रफल आँकड़ों का कुल योग तथा विभिन्न त्रिज्याखंड आँकड़ों के प्रत्येक घटक को प्रदर्शित करते हैं। वृत्तारेख बनाने के लिए सर्वप्रथम सुविधानुसार कोई अर्द्धव्यास से वृत्त खींचकर आँकड़ों के योग को प्रदर्शित करते हैं। इसके बाद आँकड़ों के विभिन्न घटकों या उपविभागों के अंशों में मान निम्न प्रकार ज्ञात करते हैं:

आरेख का प्रकार एवं उपयोग

            इस प्रकार ज्ञात किये गये कोणों को वृत्त में कहीं भी अर्द्धव्यास खींचकर बनाया जा सकता है, परन्तु उत्तर दिशा से प्रारंभ करके घड़ी की सूई की दिशा में तथा अवरोही क्रम में बनाये गये कोण अधिक श्रेयस्कर होते हैं।

वृत आरेख

(iii) रेखीय आरेख (Line Graph)

              Line Diagram प्रवृति का द्धोतक है। Line Diagram से जनसंख्या वृद्धि, Market Price, Index को पर्दर्शित करते है। 

Line Diagram

(iv) त्रिविम आरेख (Three Dimensional)

               जैसा कि नाम से पता चलता है, इन आरेखों के तीन आयाम होते हैं, अर्थात लंबाई, चौड़ाई और गहराई। घनीय और गोलाकार आरेख त्रिविम या त्रिआयामी आरेखों के मुख्य उदाहरण हैं। त्रिवि या त्रिआयामी रेखाचित्रों का आयतन उनके द्वारा दर्शायी जाने वाली मात्राओं के समानुपाती होता है, और इसीलिए उन्हें आयतन आरेख भी कहा जाता है। यह आरेख द्विविम या द्विआयामी आरेखों की तुलना में बहुत कम जगह घेरते हैं। इस प्रकार, वे विशेष रूप से उपयोगी होते हैं जब दिए गए मात्राओं के मूल्य बहुत भिन्न होते हैं। इन आरेखों को वितरण मानचित्रों पर स्थित आरेखों के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

त्रिविम आरेख

त्रिविम आरेख


पिरामिड आरेख (Piramidal Diagram) 

                     पिरामिड Diagram द्वारा दो विपरीत भौगोलिक आंकड़ों को विरूपित किया जाता है। जैसे- पुरुष-महिला के लिंगानुपात, आयात-निर्यात, औसत आयु (स्त्री- पुरुष) को दिखाते है।

पिरामिड आरेख

पट्टिका-ग्राफ (Band Graph)

             जब किसी उत्पादन का आंकड़ा कई वर्षों का और कई देशों का उपलब्ध हो तो उसे Band Graph के माध्यम से प्रदर्शित करते है।

पट्टिका-ग्राफ

Poly Graph 

⇒ Poly Graph  का प्रयोग जनसँख्या भूगोल में किया जाता है

⇒ Poly Graph  पर मृत्यु दर, जन्म दर और प्राकृतिक वृद्धि दर को प्रदर्शित किया जाता है

Poly Graph 


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18. आलेखी / रैखिक विधि (Graphical or Linear Method)

आलेखी / रैखिक विधि (Graphical or Linear Method)



आलेखी / रैखिक विधि⇒

            आलेखी विधि का प्रयोग कर मानचित्र पर की दूरी को और धरातल के वास्तविक दूरी को मापने हेतु एक रेखा खींचकर उस पर मापनी अंकित कर दिया जाता है।

गुण एवं उपयोगिता के आधार पर रेखीय मापनी निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

(1) साधारण रेखीय मापक (Simple Linear Seale)

       यह मानचित्र पर दूरी मापने का सर्वोत्तम Scale है। इस मापनी को मानचित्र के एक भाग में एक साधारण रेखा खींचकर दो भागों में बाँट देते हैं। एक भाग प्राथमिक पैमाना कहलाता है और दूसरा भाग द्वितीयक पैमाना कहलाता है। प्राथमिक पैमाना को हमेशा दाईं ओर प्रदर्शित करते हैं। जबकि द्वितीयक पैमाना को हमेशा बाईं ओर प्रदर्शित करते हैं।          

आलेखी

साधारण रेखीय मापक

       प्राथमिक मापनी में केवल एक उपविभाग होता है जबकि द्वितीयक मापनी में दस उपविभाग होता है। इसका तात्पर्य है कि साधारण मापनी से 1km के 10वें भाग के दूरी को भी ज्ञात कर सकते हैं।

(2) तुलनात्मक मापनी (Comaprative Scale)

        तुलनात्मक मापनी को बनाने के पीछे उद्देश्य यह है कि मानचित्र की विभिन्न मापों के मापकों जैसे- मील और किमी०, मीटर और गज, फैदम और मीटर इत्यादि में एक साथ दूरियाँ ज्ञात कर ली जाय।

       रचना के दृष्टि से तुलनात्मक मापनी भी साधारण मापनी के समान होता है। लेकिन इसमें एक ही स्थान पर दो मापनी अलग-2 इकाई के बना दिये जाते हैं।

तुलनात्मक मापनी

तुलनात्मक मापनी

⇒ तुलनात्मक मापक दो साधारण मापकों का समिश्रण है।

⇒ दोनों साधारण मापक समान लम्बाई के होते हैं।

⇒ दोनों साधारण मापक का मापन एक ही प्रदर्शक भिन्न पर निर्मित किये जाते हैं।


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17. विकर्ण तथा वर्नियर स्केल (Vernier and Diagonal Scale)

17. विकर्ण तथा वर्नियर स्केल

(Diagonal and Vernier Scale)



विकर्ण मापनी (Diagonal Scale)⇒

        विकर्ण मापनी एक ऐसा मापनी है जिसके माध्यम से तीन इकाई तक दूरियों का मापन कर सकते हैं। या इसी शब्दों में यह कहा जा सकता है कि इसके द्वारा दशमलव के बाद दो अंकों तक (100वाँ भाग तक) की दूरी को ज्ञात किया जा सकता है।

       इस मापनी में विकर्णों की सहायता से द्वितीयक मापनी को पुन: और छोटे-2 भागों में विभाजित कर दिया जाता है। इसे नीचे के चित्र में देखा जा सकता है।

विकर्ण मापनी

विकर्ण मापनी

 

वर्नियर स्केल (Vernier Scale)⇒

वर्नियर स्केल

वर्नियर स्केल

         वर्नियर स्केल एक ऐसा यंत्र है जिसके माध्यम से सूक्ष्म दूरियों को पढ़ा जा सकता है। 

⇒ सर्वेक्षण कार्य के दौरान और वायुयान के पायलट अपने पास वर्नियर स्केल रखते है, ताकि सूक्ष्मतम स्तर तक दूरियों का मापन कर सके।

⇒ वर्नियर पैमाना का आविष्कार पियरे वर्नियर ने किया था।

⇒ सर्वेक्षण के दौरान थियोडोलाइट नामक उपकरण के साथ इसका प्रयोग किया जाता है।

⇒ भारत में वार्नियर स्केल का निर्माण मुजफ्फरनगर के मोती झील (मुहल्ला) में किया जाता है।

⇒ वर्नियर मापनी के द्वारा मापा जाने वाला सबसे छोटी दूरी को Least Count (लीस्ट काउंट) कहते हैं।

Least Count = 1/N XP

यहाँ, P = प्राथमिक मापनी के सबसे छोटे भाग का मान

N = वर्नियर मापनी में बनाए गए भागों की कुल संख्या।

⇒ वर्नियर पैमाना में दो प्रकार का स्केल होता है।

(1) प्राथमिक/प्रधान पैमाना,

(2) वर्नियर पैमाना

⇒ जर्मनी में निर्मित वर्नियर में 0 के स्थान पर “तीर” का  प्रयोग होता है। 

⇒ किसी गोल पृष्ठ वाले सतह का सूक्ष्मतम मोटाई या वक्रता का मापन स्फैरोमीटर के द्वारा करते हैं। 


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21. जनसंख्या मानचित्र के प्रकार एवं प्रदर्शन की विधियाँ

21. जनसंख्या मानचित्र के प्रकार एवं प्रदर्शन की विधियाँ


जनसंख्या मानचित्र के प्रकार एवं प्रदर्शन की विधियाँ⇒

           जनसंख्या वितरण एवं घनत्व मानचित्रों का भूगोल के अध्ययन में विशेष महत्व है। इन मानचित्रों के अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि धरातल, जलवायु तथा अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों का मनुष्य के घनत्व एवं वितरण के ऊपर क्या प्रभाव पड़ता है। समय अथवा स्थान परिवर्तन के साथ-साथ किस प्रकार मनुष्य की भौतिक तथा सामाजिक परिस्थिति परिवर्तित होती है तथा इस परिवर्तन का मनुष्य के वितरण एवं घनत्व पर क्या प्रभाव पड़ता है, इन सभी प्रश्नों का उत्तर जनसंख्या-मानचित्र के अध्ययन से प्राप्त होता है।

जनसंख्या मानचित्र के प्र

जनसंख्या मानचित्र के प्रकार

             जनसंख्या मानचित्रों के निम्नलिखित तीन मुख्य प्रकार होते हैं:- 

1. जनसंख्या वितरण मानचित्र (Maps Showing Population Distribution):-

           इस प्रकार के मानचित्रों से जनसंख्या के वितरण का चित्रण किया जाता है। यह चित्रण वास्तविक आंकड़ों (Absolute Figures) के आधार पर किया जाता है। इस प्रकार के जनसंख्या वितरण मानचित्र जनसंख्या के वितरण का शुद्ध एवं सजीव चित्रण प्रस्तुत करते हैं। इस प्रकार के मानचित्रों द्वारा किसी क्षेत्र की ग्रामीण एवं शहरी जनसंख्या का सांख्यिकीय वितरण भी प्रस्तुत किया जा सकता है।

2. जनसंख्या घनत्व मानचित्र (Maps Showing Relative Density of Population or Choropleth Maps):-

           इस प्रकार के मानचित्रों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या के औसत घनत्व को प्रदर्शित किया जाता है। इस प्रकार मानचित्रों द्वारा क्षेत्र की भौगोलिक एवं अन्य परिस्थितियों का जनसंख्या के घनत्व पर क्या प्रभाव पड़ता है इत्यादि प्रश्नों का उत्तर प्राप्त होता है। रेखा द्वारा छाया देकर विभिन्न घनत्व प्रदर्शित किए जाते हैं।

3. परिमाणविहीन मानचित्र (Non-Statistical Population Maps or Chorochromatic Maps):-   

           इस प्रकार के मानचित्र द्वारा जनसंख्या सम्बन्धी ऐसी दशाओं का वितरण प्रस्तुत होता है, जिनमें आंकड़ों की आवश्यकता नहीं होती, जैसे—धर्म, भाषा, जाति, आदि का वितरण। परिमाणविहीन मानचित्रों में नामांकन विधि, चित्रात्मक विधि तथा रंगछाया-विधि द्वारा जनसंख्या सम्बन्धी दशाओं का क्षैतिज वितरण प्रस्तुत किया जाता है।

             जनसंख्या के वितरण एवं घनत्व को निम्नलिखित विधियों द्वारा मानचित्र पर प्रदर्शित किया जाता है।

1. समान बिन्दु विधि (Uniform Dot Method):-

             मापनी के अनुसार एक-समान गोलाई के बिन्दुओं द्वारा क्षेत्र की जनसंख्या का क्षेत्रीय वितरण प्रदर्शित किया जाता है। बिन्दुओं को भरने में विशेष सावधानी की आवश्यकता पड़ती है। इसका उल्लेख पहले ही किया जा चुका है। इस विधि द्वारा जनसंख्या वितरण के प्रदर्शन का मुख्य दोष यह है कि ग्रामीण अथवा शहरी जनसंख्या का अलग-अलग प्रदर्शन इस विधि द्वारा सम्भव नहीं है।

2. आनुपातिक बिन्दु तथा वृत्त विधि (Proportional Dot and Circle Method):-

              इस विधि द्वारा जनसंख्या के वितरण आदि का प्रदर्शन मापनी के अनुसार मानचित्र के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के बिन्दु तथा वृत्त बनाकर किया जाता है। इस विधि का दोष यह है कि कभी-कभी वृत्त एक-दूसरे को ढंक लेते हैं तथा मानचित्र स्पष्ट (Clear) आंकड़े प्रदर्शित नहीं करता।

3. बिन्दु एवं वृत्त विधि (Dot and Circle Method):-

               इस विधि को स्टिलजेनबौर विधि (Stilgenbaur’s Method) भी कहते हैं। इस विधि द्वारा ग्रामीण जनसंख्या बिन्दुओं द्वारा तथा नगर जनसंख्या वृत्तों द्वारा प्रदर्शित की जाती है। नगरों की विभिन्न जनसंख्या विभिन्न क्षेत्रफल वाले वृत्तों द्वारा प्रदर्शित की जाती है। इस विधि के आंकड़ों के प्रदर्शन हेतु बनाए गए वृत्तों तथा बिन्दुओं के अर्द्धव्यास में महान असमानताएं होने के कारण यह विधि अधिक प्रचलित नहीं है। उदाहरण के लिए, यदि 1/20 इंच के अर्द्धव्यास का बिन्दु 103 जनसंख्या प्रदर्शित करता है तो 10,00,000 जनसंख्या वाले नगर के लिए 5 इंच के अर्द्धव्यास का वृत्त खींचा जाएगा जो अत्यन्त असंगत होगा। इस दोष को दूर करने के लिए गोलीय आरेखों (Spherical Diagrams) का प्रयोग बिन्दु विधि साथ करते हैं। बिन्दु एवं वृत्त विधि में वृत्तों का अर्द्धव्यास वर्गमूल सूत्र विधि द्वारा निकाला जाता है।

4. बिन्दु एवं गोला विधि (Dot and Sphere Method):-

               इस विधि को स्टेन डी गियर विधि (Sten De Geer Method) भी कहते हैं। इस विधि द्वारा ग्रामीण जनसंख्या बिन्दुओं द्वारा तथा नगरीय जनसंख्या गोलों द्वारा प्रदर्शित की जाती है। गोलों के अर्द्धव्यास विभिन्न नगरों की जनसंख्या के आंकड़ों की सहायता से परिकलित (Calculate) किए जाते हैं। बिन्दु समान अर्द्धव्यास के होते हैं तथा नगरों की जनसंख्या का प्रदर्शन करने वाले गोले मापनी के अनुसार ही अर्द्धव्यास के होते हैं। इनकी मापनी भी बिन्दुओं की मापनी के अनुसार होती है। गोलों का अर्द्धव्यास निकालने के लिए घनमूल मापनी विधि प्रयोग में लाते हैं।

5. आनुपातिक बिन्दु विधि (Multiple Dot Method):-

            इस विधि द्वारा जनसंख्या प्रदर्शन में बिन्दुओं का आकार जनसंख्या के साथ घटता-बढ़ता रहता है। अधिक जनसंख्या प्रदर्शित करने के लिए बड़े आकार के बिन्दु मानचित्र में भरे जाते हैं तथा छोटे आकार के बिन्दु कम जनसंख्या प्रदर्शित करते हैं।

जनसंख्या घनत्व प्रदर्शन विधियाँ

             जनसंख्या घनत्व मानचित्र मनुष्य तथा भूमि का साधारण आनुपातिक सम्बन्ध प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार के सम्बन्ध को गणितीय घनत्व (Arithmetric Density) भी कहते है। इस घनत्व का यह अर्थ समझा जाता है कि प्रति वर्ग किमी भूमि पर कितने मनुष्य रहते हैं।

             कृषि योग्य भूमि तथा जनसंख्या के घनत्व के सम्बन्ध को भी मानचित्रों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इस प्रकार का घनत्व (Physiological Density) जनसंख्या तथा कृषि योग्य भूमि का आनुपातिक घनत्व कहलाता है। इसी प्रकार जनसंख्या का खेतिहर घनत्व (Agricultural Density) अथवा आर्थिक घनत्व (Economic Density) अथवा पौष्टिक घनत्व (Nutrition Density) आदि का भी प्रदर्शन जनसंख्या घनत्व प्रदर्शन मानचित्रों द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है।

              इस प्रकार के मानचित्रों में विभिन्न घनत्व प्रदर्शन के लिए साधारण रेखा छाया विधि (Simple Shading Method or Choropleth Method) का प्रयोग करते हैं। इस विधि द्वारा जनसंख्या घनत्व प्रदर्शन की सीमाओं का उल्लेख पहले ही किया जा चुका है।

            जनसंख्या घनत्व प्रदर्शन के लिए समरेखा विधि (Isopleth Method) का भी उपयोग कर सकते हैं, परन्तु यह विधि इस कार्य के लिए अधिक रुचिकर नहीं है तथा प्रचलित भी नहीं है।

              अन्य प्रकार के मानचित्र, जैसे Stock Maps, आदि में बिन्दु विधि तथा छाया विधि प्रयोग में लाते हैं। यही विधि कृषि मानचित्रों (Crop Maps) में क्षेत्रफल अथवा पैदावार की मात्रा प्रदर्शन के लिए प्रयोग की जाती है। फसलों अथवा विशेष क्षेत्रफल के अनुपात के लिए वृत्त चित्रों का प्रयोग करते हैं। जलवायवीय मानचित्रों में समरेखा विधि (Isopleth Method) का प्रयोग करते हैं तथा अन्य प्रकार के मानचित्रों में अन्य यथायोग्य विधियों का प्रयोग करते हैं।

             जनसंख्या की वृद्धि रैखिक आरेख (Line Graph) द्वारा आयु तथा लिंग-भेद (Age and Sex Structure) पिरामिड विधि द्वारा तथा व्यावसायिक विशेषताएँ (Occupational Structure) चक्राकार आरेख (Wheel Diagrams) अथवा दण्डारे (Bar Diagrams) द्वारा प्रदर्शित करते हैं।


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14. कार्ल रिटर

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कार्ल रिटर⇒

कार्ल रिटर

प्रश्न प्रारूप

Q. भूगोल के विकास में रिटर के योगदानों का मूल्यांकन कीजिए।

अथवा, “रिटर उन्नीसवीं शताब्दी का महत्वपूर्ण भूगोलवेत्ता था”। विवेचना कीजिये।

परिचय

      आनुभाविक अनुसंधान में विश्वास रखने वाले, उद्देश्यवादी और सशक्त प्रकृतिवादी रिटर ने भूगोल को अपने अथक प्रयास से एक नया स्वरूप प्रदान किया है, इसलिए इन्हें आधुनिक भूगोल के भवन का आधार कहा जाता है। कार्ल रिटर एवं अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट दोनों ही समकालीन, आधुनिक वैज्ञानिक भूगोल के संस्थापक एवं भूगोल के चिरसम्मत काल के पर्याय थे।

    कार्ल रिटर भौगोलिक प्रतिरूपों में ईश्वर की झलक देखता था जबकि हम्बोल्ट धर्मनिरपेक्ष एवं तत्कालीन जर्मन आदर्शवाद का पैरोकार था। 

जीवनी- जन्म- 1789 ई० में जर्मनी के क्लेडिलन बर्ग में एक साधारण  चिकित्सक परिवार में हुआ। 

शिक्षा- प्रारंभिक शिक्षा रूसो तथा पेस्टोलॉजी के सिद्धांतों पर आधारित स्नेप पेंथल नामक स्कूल में 1785 ई० से प्रारंभ हुई। इसके बाद, 

◆ 17 वर्ष की आयु में हाले विश्वविद्यालय में प्रवेश।

◆ 19 वर्ष की आयु में फ्रैंकफर्ट नगर में प्राइवेट शिक्षक।

◆ 1814 ई० में गोटेंजन विश्वविद्यालय में शोध कार्य किया।

◆ 1819 ई० में जिम्नेशियम ऑफ फ्रैंकफर्ट विश्वविद्यालय में इतिहास भूगोल के प्रोफेसर बने।

◆ 1820-59 ई० तक बर्लिन विश्विद्यालय में प्राध्यापक।

नोट: 1807 में रिटर की मुलाकात हम्बोल्ट से हुई तथा इसके बाद दोनों ने मिलकर भूगोल का विकास किया।

मृत्यु- 1859 ई० को बर्लिन में

भूगोल रिटर का योगदान 

         रिटर के योगदान की चर्चा निम्न शीर्षकों के अंतर्गत की जा सकती है-

(1) भौगोलिक समिति के संस्थापक के रूप में:-

            भौगोलिक ज्ञान के प्रसार तथा भौगोलिक पत्रिका के प्रकाशन हेतु 1828 में ‘बर्लिन भौगोलिक संस्था’ (Berlin Geographical Society) की स्थापना की।

 

(2) एक भौगोलिक लेखक के रूप में:-

कार्ल रिटर

(3) भौगोलिक विधितंत्र के विश्लेषक के रूप में:-

(i) आनुभविक विधि (Emperical Method)

(ii) तुलनात्मक विधि (Comperative Method)

(iii) प्रादेशिक विधि (Regional Method)

(iv) विश्लेषण तथा संश्लेषण विधि (Analysis and Synthesis Method) 

(v) मानचित्र विधि (Cartographic Method)

(vi) निगमनात्मक विधि (Deductive Method)

          इसके अलावे विभिन्न दर्शनग्राही विधि, क्षेत्र वर्णनी विधि, परिस्थितिकी विधि को भूगोल में रिटर की देन है।

नोट: भौगोलिक अध्ययन विधि के क्षेत्र में रिटर ने फॉरस्टर को महान माना।

(4) प्रदेशों के पदानुक्रम को स्पष्ट करने में:-

          प्रदेशों के पदानुक्रम को स्पष्ट करना रिटर का भूगोल में एक प्रमुख योगदान है। इसने भू-आकृतियों का द्वि-स्तरीय वर्गीकरण प्रस्तुत किया है:-

कार्ल रिटर

नोट: महाद्वीप को रिटर ने जर्मन भाषा में ‘आर्डटिल’ (Erdteule) कहा है।

कार्ल रिटर

चित्र: रिटर के तृतीय कोटि प्रदेश का उच्चावच

(5) भौगोलिक संकल्पनाओं के क्षेत्र में:-

कार्ल रिटर

नोट: रिटर को ‘आर्म चेयर ज्योग्रफर’ कहा जाता है।           

(6) भौगोलिक विचारधाराओं के प्रतिपादक के रूप में:-

(A) भूगोल के क्षेत्र (The Field of Geography)- रिटर के अनुसार भूगोल में तीन चीजों का होना आवश्यक है-

कार्ल रिटर

(B) नियतिवाद (Determinism)- रिटर के अनुसार भौगोलिक विविधता के द्वारा ऐतिहासिक विविधता उत्पन्न   होती है। अत: मानव स्वतंत्र नहीं है बल्कि प्रकृति के नियत्रण में उसके अधीन है। 

कार्ल रिटर

(C) सम्पूर्णता की संकल्पना (Concept of Wholeness)- रिटर के अनुसार केवल प्राकृतिक तथा मानवीय पक्ष से भूगोल का निर्माण नहीं होता। अत: सम्पूर्णता के लिए विभिन्न शक्तियों का संयोजन आवश्यक है।

कार्ल रिटर

(D) मानव केन्द्रित भूगोल (Anthropocentric)- केवल पृथ्वी तल का अध्ययन ही भूगोल का उद्देश्य नहीं है बल्कि मानवीय क्रियाओं का वर्णन विशेष महत्व रखता है।

कार्ल रिटर

(E) क्षेत्रीय अध्ययन (Chorological Study)- रिटर के अनुसार, जिस तरह कालक्रम इतिहास का आधार होता है, उसी तरह कोई क्षेत्र भौगोलिक अध्ययन का आधार होता है।

(F) भूगोल आनुभाविक विज्ञान है- रिटर के अनुसार भूगोल एक आनुभाविक विज्ञान है जो प्रेक्षण, परिणाम और सूचना पर आधारित है। 

(G) प्रादेशिक अध्ययन- रिटर ने प्रादेशिक अध्ययन की व्याख्या के लिए ‘Landerkunde’ और ‘Augemeine Erdkunde’ नामक शब्द का प्रयोग किया।

धरातल विभाजन का आधार⇒ प्राकृतिक 

  • Landerkunde (प्राकृतिक प्रदेश)⇒ विशिष्ट अध्ययन से सम्बंधित
  • Augemeine Erdkunde (सामान्य भूगोल)⇒ प्राकृतिक +मानवीय

नोट: रिटर को प्रादेशिक भूगोल का जनक कहा जाता है।

कार्ल रिटर

(H) ईश्वरवादी विचारधारा (Teleological Approach)- रिटर का मानना था कि पृथ्वी की रचना ईश्वर ने उद्देश्यपूर्वक की है। इनके अनुसार पृथ्वी मानव की शिक्षण और पोषण भूमि है। 

(I) विविधता में एकता (Unity in Diversity)- प्रकृति में विविधता में एकता इनके प्रादेशिक भूगोल का मूल मंत्र था।

(J) मानचित्र विधि (Cartographic Process)- भौगोलिक वर्णन के लिए रिटर ने मानचित्र विधि को एक प्रमुख अस्त्र बनाया।

आलोचना

(i) रिट अपनी प्रादेशिक अध्ययन में तुलनात्मक विधि का व्यवहार करने में असफल रहे।

(ii) रिटर भूगोल का स्पष्ट तथा युक्तिपूर्ण ढाँचा गढ़ने में लगभग असफल रहे।

(iii) बाद के वर्षों में उन पर द्वैधता का पोषक होने का भी आरोप लगा। 

निष्कर्ष 

       उपर्युक्त आलोचनाओं के बावजूद रिटर का योगदान भौगोलिक ज्ञान के प्रसारण में महत्वपूर्ण रहा है। अंततः हम कह सकते हैं कि कार्ल रिटर ही भूगोल में वस्तुत: द्वैतवाद का जनक था। उसी ने इस अवधारणा का सृजन किया कि पृथ्वी का अध्ययन मनुष्य के लिए किया जाता है। उसने यह भी कहा कि मनुष्य का अध्ययन पृथ्वी का अंग मानकर किया जाता है। इस तरह भौतिक भूगोल एवं मानव भूगोल दोनों की नींव पड़ी।

उत्तर लिखने का दूसरा तरीका

           यदि उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम चरण में भूगोलवेत्ताओं ने अपने नवीन विज्ञान की अधिकांश संकल्पनाओं को विकसित किया तो उनके “विचारों, मांगों तथा इच्छाओं को तथ्यों में परिणत करने” का श्रेय बहुत कुछ अलेक्जेन्डर वॉन हम्बोल्ट तथा कार्ल रिटर को जाता है। रिटर का जन्म जर्मनी की हार्ल्स पहाड़ियों में स्थित क्वेडली बुर्ग गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। प्राथमिक शिक्षा, पिता की मृत्यु व आर्थिक कठिनाई के कारण घर पर ही हुई थी। घरेलू अध्यापक गुटस मुथ्स थे। 1776 में इन्होंने हाल विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया।

      1825 में फ्रिडरीश विश्वविद्यालय, बर्लिन में प्रोफेसर बने। 1828 में जब बर्लिन में भूगोल परिषद की स्थापना हुई तो वे इसके प्रथम अध्यक्ष बने और जीवन पर्यन्त इसके अध्यक्ष रहे।

रिटर की रचनायें (Works of Ritter):-

      रिटर ने भूगोल के प्रचार-प्रसार के लिये अनेक ग्रन्थ लिखे, मानचित्र बनाये व शोध पत्र प्रकाशित किये। 1804 में रिटर का प्रथम ग्रन्थ- Europe: A Geographical, Historical and Statistical Painting प्रकाशित हुआ। इस पुस्तक का दूसरा खण्ड 1806 में प्रकाशित हुआ। 1817 में रिटर की सर्वाधिक महत्वपूर्ण रचना अर्डकुण्डे (Erdkunde) का प्रथम खण्ड (अफ्रीका महाद्वीप) प्रकाशित हुआ। 1818 में अर्डकुण्डे का दूसरा खण्ड (एशिया महाद्वीप) प्रकाशित हुआ। इस प्रकार 1859 तक अर्डकुण्डे के 19 खण्डों का प्रकाशन हुआ। अन्तिम खण्ड रिटर की मृत्यु के मात्र दो दिन पूर्व प्रकाशित हुआ था। रिटर ने यूरोप की मानचित्रावली भी 1806 में प्रकाशित की थी। इसमें छः मानचित्र थे।

रिटर का विधि-तंत्र (Methodology of Ritter):-

      रिटर की अध्ययन प्रणाली भी हम्बोल्ट की अध्ययन प्रणाली के समान ही थी। उसने अपने अध्ययन के लिये निम्नलिखित विधियाँ अपनायीं-

(i) आनुभविक विधि (Empirical Method):-

      रिटर आनुभविक विधि द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण (Field Survey) करने में विश्वास करता था। उसका मत था कि सावधानीपूर्वक शुद्ध प्रेक्षण करना व सत्य का पता लगाना अध्ययन का उद्देश्य होना चाहिये। रिटर भूगोल को आनुभविक विज्ञान (Empirical Science) मानता था।

(ii) विश्लेषण एवं संश्लेषण विधि (Analysis and Synthesis Method):-

      भौगोलिक तथ्यों को प्रेक्षणों (Observations) द्वारा एकत्र करना व उनका संश्लेषण एवं विश्लेषण करना तथा अन्त में सामान्यीकरण करना-रिटर की इस पद्धति ने भूगोल को वैज्ञानिकता प्रदान की।

(iii) तुलनात्मक विधि (Comparative Method):-

      रिटर ने विभिन्न तथ्यों में कार्य कारण सम्बन्ध (Causal relationship) व अन्तर समझाने के लिये तुलनात्मक विधि अपनाई।

(iv) मानचित्र विधि (Cartographic Method):

       मानचित्रण को रिटर ने भूगोल का अभिन्न अंग माना था। उसने स्वयं अपने ग्रन्थों आदि में मानचित्रों का उपयोग किया। यूरोप के मानचित्रों की एक मानचित्रावली प्रकाशित की।

रिटर की विचारधारा (Ritter’s Ideology)-

     रिटर व हम्बोल्ट समकालीन विद्वान थे। आयु में हम्बोल्ट रिटर से 10 वर्ष बड़ा था। रिटर पर हम्बोल्ट का काफी प्रभाव पड़ा था। रिटर ने स्वयं भी इस तथ्य को स्वीकार किया था। परन्तु फिर भी इन दोनों महान विद्वानों की विचारधाराओं में पर्याप्त अंतर था। रिटर की विचारधारा के मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:-

(i) रिटर के विभिन्न ग्रन्थों व लेखों को पढ़ने पर ज्ञात होता है कि रिटर की विचारधारा विकासशील थी।

(ii) रिटर वातावरण निश्चयवाद (Environmental Determinism) का पोषक था। उसने मानव व वातावरण के सम्बन्धों के अध्ययन को भूगोल का अभिन्न अंग बताया था तथा स्वयं ने इन सम्बन्धों का अध्ययन करके वातावरण को अधिक शक्तिशाली बताया था।

(iii) रिटर ने होम्मेयर व गट्टेरेर की शुद्ध भूगोल (Reine/Pure Geography) की विचारधारा की न केवल आलोचना की, वरन् उसे अवैज्ञानिक बताते हुए अस्वीकार भी कर दिया था। उसके अनुसार- “Pure Geography is nothing more than a general description of terrain.”

(iv) रिटर ने प्रादेशिक अध्ययन पद्धति को अपनाया था तथा प्रादेशिक व्यक्तित्व में सम्पूर्ण की कल्पना की थी। रिटर का सर्वाधिक प्रसिद्ध ग्रन्थ अर्डकुण्डे (Erdkunde) इसी विचारधारा पर आधारित था। उसने अर्डकुण्डे के प्रथम खण्ड में ही अफ्रीका महाद्वीप को विभिन्न प्रदेशों में बांट कर प्रत्येक का सम्पूर्ण वर्णन किया है।

(v) रिटर की विचारधारा ईश्वरवादी (Teleological) विचारधारा थी । उसका मत था कि ईश्वर ने पृथ्वी पर प्रत्येक वस्तु किसी न किसी उद्देश्य से बनाई है।

(vi) रिटर के अनुसार उसका उद्देश्य- ‘समस्त थल’ (Whole Land) का सजीव चित्रण प्रस्तुत करना है, जिसमें उसके प्राकृतिक और कृषि के (Cultivated) उत्पादनों को, उसके प्राकृतिक और मानवीय लक्षणों (Features) को तथा इन सबको एक सम्बद्धपूर्ण (Coherent whole) के रूप में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाना है कि मानव और प्रकृति (Nature) के विषय में सबसे अधिक महत्वपूर्ण अनुमान स्वयं प्रत्यक्ष हो जायें, विशेषकर जब उनकी साथ-साथ तुलना की जाय।

(vii) रिटर के अनुसार भूगोल का उद्देश्य पृथ्वी तल का वर्णन करना मात्र नहीं वरन् उसकी घटनाओं का सकारण (Causal) वर्णन करना है।

अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन


अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें।

(i) जमीन के बड़े भाग को कागज पर दिखाने के लिए प्रयोग करते हैं:

(क) छोटे मापक का

(ख) बड़े मापक का

(ग) दोनों मापक का

(ङ) उपर्युक्त सभी

उत्तर- (क) छोटे मापक का

(ii) जिस मानचित्र में पर्वत पठार, मैदान इत्यादि को दर्शाते हैं उसे कहते हैं-

(क) थिमेटिक मानचित्र

(ख) भौतिक मानचित्र

(ग) राजनैतिक मानचित्र

(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

उत्तर- (ख) भौतिक मानचित्र

(iii) मानचित्र में मैदान को दिखाते हैं-

(क) काले रंग से

(ख) नीले रंग से

(ग) हरे रंग से

(घ) लाल रंग से

उत्तर- (ग) हरे रंग से

(iv) मानचित्र में दक्षिण दिशा होती है-

(क) दायीं ओर

(ख) बायीं ओर

(ग) ऊपर की ओर

(घ) नीचे की ओर

उत्तर- (घ) नीचे की ओर

(v) मानचित्र निर्माण में ध्यान रखना चाहिए-

(क) संकेतों का

(ख) दिशाओं का

(ग) मापक का

(घ) उपर्युक्त सभी का

उत्तर- (घ) उपर्युक्त सभी का

2. खाली जगहों को भरिए।

(i) मानचित्र में जलीय भाग को नीला रंग से दिखाया जाता है।

(ii) मानचित्र में उत्तर दिशा हमेशा ऊपर की तरफ होती है।

(iii) जनसंख्या मानचित्र थिमेटिक मानचित्र का उदाहरण है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।

(i) चित्र एवं मानचित्र में क्या अंतर है?

उत्तर- चित्र एवं मानचित्र में निम्नलिखित आधारभूत अंतर है-

⇒ चित्रों में आमतौर पर चीजें वैसी ही बनाई जाती हैं, जैसी वह दिखती हैं परन्तु मानचित्र में चीजों को चिह्न या संकेत के रूप में दिखाई जाती है।

⇒ चित्र आमतौर पर ऐसे बनाये जाते हैं जैसे कोई उस जगह किनारे खड़े होकर देखता हो और वह उसी प्रकार दिखाई भी देता है लेकिन मानचित्र हमेशा ऐसा बनाया जाता है जैसे उस जगह को ऊपर या आसमान से देख रहे हैं।

⇒ चित्र में मापक (स्केल) का उपयोग नहीं होता परन्तु मानचित्र में मापक (स्केल) का उपयोग किया जाता है।

(ii) अगर आपको विश्व का मानचित्र बनाना हो तो किन-किन बातों का ध्यान रखना होगा?

उत्तर- अगर विश्व का मानचित्र बनाना हो तो निम्न बातों को ध्यान में रखकर बना सकते-

⇒ नक्शे में अगर कोई दुरी सेमी० में है तो वह वास्तविक रूप में कमरे में 1 मीटर के बराबर होगा।

⇒ 1 सेमी = 1 मीटर, जिससे पता किया जा सकता है कि नक्शे में जो दूरी है वह वास्तव में कितनी दूरी के बराबर है। इस प्रकार हम मानचित्र को छोटा, बड़ा कर सकते हैं। जितना बड़ा मानचित्र बनाना होता है पैमाने का निर्धारण भी उसी प्रकार करते हैं।

⇒ मानचित्र में दिशा सूचक रेखा बनाई जाती है।

जैसे-
अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

⇒ मानचित्र से हमें बहुत अधिक जानकारी प्राप्त होती है। मानचित्रों में दी गई सूचनाओं के आधार पर उनका नामकरण किया जाता है। जैसे- जलवायु मानचित्र, वनस्पति मानचित्र, जनसंख्या मानचित्र, वर्षा मानचित्र, उद्योग मानचित्र आदि।

⇒ नक्शे में रंगों एवं चिह्नों की सहायता से हमें वहाँ की जानकारी प्राप्त करने में सहायता होती है। जैसे- जलाशय-नीला रंग, पर्वत- भूरा रंग, पठार- पीला रंग, मैदान- हरा रंग आदि।

इस प्रकार हम उपर्युक्त इन सभी बातों को ध्यान में रखकर विश्व का मानचित्र बना सकते हैं।

(iii) मानचित्र में इस्तेमाल किए गए रंग किसके प्रतीक हैं?

उत्तर- मानचित्र में जलाशय- नीले रंग का, पर्वत- भूरा रंग का, पठार- पीला रंग का और मैदान- हरा रंग का प्रतीक है।

(iv) मानचित्र के कितने प्रकार है? लिखें।

उत्तर- मानचित्र के निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-

⇒ पर्वत, पठारों, मैदानों, नदियों, महासागरों आदि को दर्शाने वाले मानचित्र, प्राकृतिक मानचित्र कहलाते हैं।

⇒ गाँव, शहर, राज्य, देश एवं विश्व के विभिन्न देशों तथा उनकी सीमाओं को दर्शाने वाले मानचित्र, राजनीतिक मानचित्र कहलाते हैं।

⇒ इन मानचित्रों में दी गई सूचनाओं के आधार पर उनका नामकरण किया जाता है। जैसे-जलवायु मानचित्र, वनस्पति मानचित्र, जनसंख्या मानचित्र, वर्षा मानचित्र, उद्योग मानचित्र आदि।

(v) मानचित्र में दिशाओं का निर्धारण कैसे करते हैं?

उत्तर- मानचित्र में दिशाओं का निर्धारण दिशा सूचक रेखा के द्वारा किया जाता है। मानचित्र में उत्तर दिशा जो ऊपर की ओर है उसे उत्तर दिशा सूचक रेखा के माध्यम से दिखाई जाती है। जैसे-उत्तर की ओर चिह्न को दर्शाया जाता है।

जैसे-
अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

(vi) मापक क्या है? उदाहरण देकर समझाएँ।

उत्तर- मानचित्र पर दो किन्हीं स्थानों के बीच की दूरी और धरातल पर उन्हीं दो स्थानों के बीच की वास्तविक दूरी के अनुपात को मापक/पैमाना (Scale) कहते हैं। उदाहरण के लिए यदि किन्हीं दो स्थानों के बीच की वास्तविक दूरी 500 किमी० है, और इसे मानचित्र प 5 सेमी० द्वारा दिखाया जाता है तो संबंधित मानचित्र का पैमाना 1 सेमी० = 100 किमी० होगा।


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