Archives 2023

अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब


अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोबअभ्यास

1. सही विकल्प चुनें-

(i) एक देशांतर से दूसरे देशांतर की दूरी तय करने में समय लगता है-
(क) चार मिनट
(ख) पाँच मिनट
(ग) चालीस मिनट
(घ) चार संकेण्ड
उत्तर- (क) चार मिनट

(ii) सबसे अधिक गर्मी पड़ती है-
(क) शीत कटिबंध में
(ख) शीतोष्ण कटिबंध में
(ग) उष्ण कटिबंध में
(घ) उत्तरी ध्रुव में
उत्तर- (ग) उष्ण कटिबंध में

(iii) कर्क रेखा है-
(क) 90° अक्षांश पर
(ख) 23½° उत्तरी अक्षांश
(ग) 23½° दक्षिणी अक्षांश
(घ) ध्रुव पर
उत्तर- (ख) 23½° उत्तरी अक्षांश

(iv) अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा से पूरब जाने पर-
(क) दिन-रात में परिवर्तन होता है
(ख) एक तिथि घटा दी जाती है
(ग) एक तिथि बढ़ा दी जाती है
(घ) तिथि में कोई परिवर्तन नहीं करते हैं
उत्तर- (ग) एक तिथि बढ़ा दी जाती है

अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब

2. कम शब्दों में उत्तर दें-

(क) पृथ्वी के दिये गये नमूने का क्या नाम है?
उत्तर- पृथ्वी के दिये गये नमूने का नाम ग्लोब है।

(ख) यह नमूना किस आकृति का होगा? जैसे त्रिकोण, गोल, त्रिभुजाकार आदि।
उत्तर- यह नमूना गोल आकृति का होगा।

(ग) इस नमूने की आकृति वाले किन्हीं अन्य दो वस्तुओं के नाम लिखिये।
उत्तर- इस नमूने की आकृति वाले संतरा, खरबूजा हैं।

(घ) पृथ्वी के इस नमूने पर कौन-सी रेखाएँ बनी हैं? उनके नाम लिखिये।
उत्तर- पृथ्वी के इस नमूने पर अक्षांश रेखा,भूमध्य रेखा, कर्क रेखा, मकर रेखा, आर्कटिक रेखा और अन्टार्टिक बनी है।

(ङ) इस नमूने के अलावा, आप और किन माध्यमों से पृथ्वी पर स्थित किसी स्थान का पता लगा सकते हैं?
उत्तर- इस नमूने के अलावा, मैं आसमान में सूरज की स्थिति या रात में ध्रुवतारे को देखकर किसी स्थान की स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं, लेकिन इसमें बहुत समस्या होती है।

       पृथ्वी पर स्थित स्थानों को जानने के लिए कम्पास (दिक् सूचक) और नक्शे से ठिकाना खोजना आसान हो गया। इस प्रकार इन माध्यमों के द्वारा भी हम पृथ्वी पर स्थित स्थानों को पता लगा सकते हैं।

3. ग्लोब पर कुछ पड़ी एवं खड़ी रेखाएँ बनी हुई हैं। इन्हें गौर से देखकर निम्न प्रश्नों के उत्तर तालिका में लिखिए-

अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब

(क) पड़ी/खड़ी रेखाएँ किन दिशाओं के बीच में खींची गयी-
उत्तर- पड़ी रेखायें पूरब-पश्चिम और खड़ी रेखाएँ उत्तर-दक्षिण दिशाओं के बीच में खींची गयी हैं।

(ख) अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा क्या है?
उत्तर- पृथ्वी का आकार गोल है जो एक वृत्त के समान है। एक वृत्त में 360° होते हैं। इसी आधार पर पृथ्वी पर 360 देशांतर रेखाएँ खींची जा सकती हैं। इनमें दो देशांतर रेखाएँ महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ये हैं 0° तथा 180° देशांतर रेखाएँ।

        0° देशांतर को प्रधान देशांतर रेखा या प्रधान मध्याह्न रेखा तथा 180º देशांतर रेखा को अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहते हैं।

(ग) किन्हीं दो पड़ी अथवा खड़ी रेखाओं के बीच किस प्रकार की दूरी है? (समान/असमान)
उत्तर- किन्हीं दो पड़ी रेखाओं के बीच की दूरी समान और खड़ी रेखाओं के बीच की दूरी असमान होती है।

(घ) पड़ी/खड़ी रेखाओं को क्या कहते हैं?
उत्तर- पड़ी रेखाओं को अक्षांश रेखा और खड़ी  को देशांतर रेखा कहते हैं।

(ङ) पड़ी एवं खड़ी रेखाओं में से कौन-सी आपस में मिलती है?
उत्तर- पड़ी एवं खड़ी रेखाओं में से खड़ी रेखा आपस में मिलती है।

4. बताइये-

(i) अक्षांश वृत्त किसे कहते हैं?
उतर- भूमध्य रेखीय वृत्त एवं किसी स्थान के बीच जो कोण बनता है उसे उस स्थान का अक्षांश वृत्त कहा जाता है।

(ii) दो प्रमुख अक्षांश रेखाओं के नाम बताइये।
उत्तर- दो प्रमुख अक्षांश रेखाओं के नाम-विषुवत एवं कर्क रेखा हैं।

(iii) पृथ्वी पर कितने कटिबंध हैं? इन कटिबंधों की विशेषताएँ बतलाइये।
उत्तर- पृथ्वी पर तीन कटिबंध हैं।

(क) उष्ण कटिबंध- कर्क एवं मकर रेखाओं के बीच अन्य अक्षांशों की तुलना में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है जिसके कारण इसे उष्ण कटिबंध कहा जाता है। यहाँ दिन और रात की स्थितियाँ सालों भर होती है तथा सूर्य की  किरणें लम्बवत् पड़ती हैं।

(ख) सम शीतोष्ण कटिबंध- कर्क एवं मकर रेखा के बाद उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव वृत्त तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव वृत्त के बीच वाले क्षेत्र में तापमान मध्यम रहता है। यहाँ जाड़े में सर्दी पड़ती है तथा गर्मी में तापमान अधिक रहता है। इसे सम शीतोष्ण कटिबंध कहते हैं। दिन और रात की स्थितियाँ होती हैं परन्तु सूर्य की किरणें कभी लम्बवत् नहीं पड़ती हैं।

(ग) शीत कटिबंध- उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिण गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव क्षेत्रों में सालों भर ठंड पड़ती है। इसे शीत कटिबंध कहा जाता है। यहाँ छ: महीने का दिन एवं छः महीने की रात होती है।

(iv) देशान्तर रेखा किसे कहते हैं?
उत्तर- ग्लोब पर उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव को जोड़ती हुई रेखाएँ खींची गई हैं। ये सभी लम्बवत् रेखाएँ देशांतर रेखाएँ हैं। 0° तथा 180° दो प्रमुख देशांतर रेखाएँ है। एक वृत्त में 360° होते हैं। इसी आधार पर पृथ्वी पर 360 देशांतर रेखाएँ खींची गई हैं। इनकी लम्बाई समान होती है। इसकी संख्या 360 होती है। देशांतर रेखाएँ तिथि निर्धारण में सहयोग देती हैं।

(v) प्रधान मध्याह्न रेखा क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर- 0° देशांतर को प्रधान देशांतर रेखा या प्रधान मध्याह्न रेखा कहते हैं। पृथ्वी पर किसी स्थान की स्थिति दर्शाने तथा समय निश्चित करने के लिए देशांतर रेखाओं का ज्ञान होना आवश्यक है। इससे तिथि निर्धारण में भी सहयोग मिलता है।

(vi) अक्षांश रेखाओं तथा देशांतर रेखाओं की कुल संख्या कितनी है?
उत्तर- ग्लोब प कुल अक्षांश रेखाओं की संख्या 179 तथा देशांतर रेखाओं की कुल संख्या 360 है।


Read More:- 

अध्याय-8 हमारा राज्य बिहार

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-8 हमारा राज्य बिहार


अध्याय-8 हमारा राज्य बिहार

अभ्यास

1. सही विकल्पों पर (√) का निशान लगाएँ

(i) रबी फसलों के लिए मशहूर ताल क्षेत्र अवस्थित है-
(क) तराई क्षेत्र
(ख) पटना से पूरब
(ग) पटना से पश्चिम
(घ) शाहाबाद में
उत्तर- (ख) पटना से पूरब

(ii) सोमेश्वर पहाड़ियाँ हैं-
(क) तराई क्षेत्र में
(ख) राजगीर में
(ग) कैमूर में
(घ) मंदार हिल में
उत्तर- (क) तराई क्षेत्र में

(iii) सरैसा क्षेत्र में शामिल जिले हैं-
(क) सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल
(ख) सुपौल, सहरसा, अररिया
(ग) वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर
(घ) जहानाबाद, गया, पटना
उत्तर- (ग) वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर

(iv) गन्ना उत्पादक जिले हैं-
(क) किशनगंज, अररिया, जोगबनी
(ख) पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर
(ग) गया, नवादा, बिहार
(घ) गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी
उत्तर- (घ) गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी

2. प्रश्नों के उत्तर लिखें-

(क) बिहार की चौहद्दी लिखें।
उत्तर- बिहार के उत्तर दिशा में नेपाल देश, पूरब में पश्चिम बंगाल, दक्षिण में झारखंड तथा पश्चिम में उत्तर प्रदेश राज्य स्थित है।

(ख) ताल क्षेत्र की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर- ताल क्षेत्र में किसी का भी घर नहीं होता है। ताल क्षेत्र में हम रबी की फसल ही केवल उगाई जाती हैं। खरीफ की फसल तो बोते ही नहीं हैं। बरसात में नदियों का पानी का बड़ा हिस्सा पूरे इलाके में दूर-दूर तक फैल जाता है और एक बड़ा ताल-सा दृश्य दिखाई देता है, इसीलिए इसे ताल क्षेत्र कहते हैं।

          अक्टूबर के महीने में जब सारा पानी धरती सोख लेती है और जमीन दलदली होती है तब हम इनमें दलहन और रबी की फसलों को बो देते हैं। इनमें चना, मसूर, सरसों, तीसी, गेहूँ होता है। मिट्टी दलदली होने के कारण रबी की जबरदस्त फसल होती है।

          टाल या ताल क्षेत्र में दुधारू पशुओं के लिए पर्याप्त भूसा मिलता है। यह पशुओं के लिए अत्यंत ही लाभदायक होता है। रबी की फसल अच्छी होने के कारण ही यहाँ दाल छाँटने वाली कई मिलें भी हैं। ताल क्षेत्र में दलहन की फसल अत्यधिक मात्रा में होती है जिससे यहाँ खेती की पैदावार काफी अच्छी होती है।

(ग) सरैसा क्षेत्र में कौन-कौन से जिले आते हैं और उनका क्या महत्व है?
उत्तर- उत्तर बिहार में समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों के कुछ-कुछ प्रखंडों में तम्बाकू उपजाया जाता है। इस इलाके को संयुक्त रूप से ‘सरैसा क्षेत्र’ कहा जाता है। यह किसी खास क्षेत्र न होकर पूरे इलाके का ही नाम है। इस इलाके का तम्बाकू देश के अन्य राज्यों में भी भेजा जाता है। वहाँ के किसानों की खेती-बाड़ी का अर्थ खेतों को साफ करके तम्बाकू के पौधों को लगाना उसके पत्तों को सुखाना और उन्हें व्यापारियों के हाथों में बेचना है।

           इस इलाके के किसान बड़ी मेहनत से तम्बाकू के पौधे को उगाते हैं। यहाँ की मिट्टी भी चूनायुक्त होती है। तंबाकू के पौधे धीरे-धीरे बड़े होकर फैलते हैं। बाद में इसे सुखाते हैं। इसको धीरे-धीरे पत्ते को लपेटकर रखते हैं। चूँकि सरैसा इलाके के तम्बाकू काफी कड़कदार होते हैं। इसलिए तम्बाकू बेचने वाले सरैसा के नाम का इस्तेमाल तम्बाकू को प्रभावशाली बनाने के लिए करते हैं।

(घ) बिहार की ज्यादातर चीनी मिलें उत्तर बिहार में हैं। क्यों?
उत्तर- बिहार की ज्यादातर चीनी मिलें उत्तर बिहार में ही हैं। क्योंकि उत्तर बिहार में नेपाल की पहाड़ियों से पानी बहकर आता है और मिट्टी में चूने का अंश चला आता है। यह मिट्टी ईख की खेती के लिए काफी उपयुक्त है।

              यहाँ भारी मात्रा में ईख की खेती की जाती है, और उसकी पैदावार भी अच्छी होती है। एक बड़े किसान अकेले सौ सवा सौ ट्रैक्टर गन्ने बेचते हैं और किसानों के गन्ने खरीदने के लिए मिलें तैयार रहती हैं और उन्हें नकद पैसा भी देती है। इसलिए यहाँ के किसान गन्ना उपजाना पसंद करते हैं। किसान भी गन्ने के फसल एक ही खेत में बार-बार लगातार उपजाते हैं जिससे यहाँ उसकी खरीद-बिक्री भी ज्यादा मात्रा में होती है।

(च) बाढ़ का पानी उतरते ही गाँवों एवं घरों की प्राथमिक जरूरतें क्या होती होगी?
उत्तर- बाढ़ का पानी उतरते ही गाँवों एवं घरों की प्राथमिक जरूरत अपने मवेशियों को ऊँचे स्थानों पर रखकर सुरक्षित करते हैं। ऐसा इसलिए कि बाढ़ का पानी इनकी मवेशियों को बहा न ले जाएँ। बरसात के दिनों में वे लोग बाढ़ से बचने के लिए तटबंधों और स्परों पर रहने चले जाते हैं।

         उसकी प्राथमिक जरूरत अपने और अपने मवेशियों को सुरक्षित जगहों तक पहुँचाना होता है ताकि अपने मवेशियों की जान बचा सकें, इसलिए वे फुस और प्लास्टिक के कामचलाऊ छत और दीवार बनाकर रहते हैं। घरों को छोड़कर तटबंध पर जाने से पहले खेतों में मनीजर के बीज छींट देते हैं। बाद में बाढ़ का पानी उतरने पर मनीजर के पौधे डंठल के रूप में तैयार हो जाते हैं। इस प्रकार वह अपने-आपको तैयार करते हैं जिससे वह अपना बचाव कर सकें।

अध्याय-8 हमारा राज्य बिहार

(छ) बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को किस प्रकार की कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं?
उत्तर- बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को निम्नलिखित प्रकार की कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं:-

⇒ बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को वर्ष में लगभग 3-4 महीने दोहरी जिंदगी जीते हैं।

⇒ मवेशियों को बचाने के लिए उसे ऊँचे स्थानों पर रखकर सुरक्षित करना पड़ता है जिससे वह बाढ़ के पानी में बहकर कहीं चले न जाएँ।

⇒ गाँव से पानी उतरते ही लोग वापस गाँव में आते हैं और फिर आठ महीनों के लिए फिर से गृहस्थी जमाते हैं। फिर अगले साल पुनः चार महीने बाढ़ की विभीषिका झेलने को तैयार रहना पड़ता है।

⇒ बरसात के मौसम में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जनजीवन पर बहुत ही गहरा असर पड़ता है।

⇒ बरसात में किसानों, गरीब मजदूरों पर अन्न, जल और आवास की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

⇒ बाढ़ का पानी बढ़ने से परेशान लोगों को अपने घरों को छोड़कर तटबंधों या अन्य सुरक्षित जगहों पर रहने के लिए जाना पड़ता है।

(ज) बाढ़ से बचाव का क्या समाधान है?
उत्तर- बाढ़ से बचाव का निम्नलिखित समाधान किया जा सकता है:-

⇒ बाढ़ की समस्या का सामना सभी को एक साथ मिल-जुलकर करना चाहिए।

⇒ बाढ़ से बचने के लिए सभी को भूमि अपरदन की क्रिया को रोकना चाहिए।

⇒ बड़े-बड़े नदियों के जल को मजबूत बाँध बनाकर उसकी दिशाओं को बदलकर उससे बचाव किया जा सकता है।

⇒ बरसात के पानी से बचने के लिए नावों की व्यवस्था भी रखनी चाहिए जिससे पानी बढ़ने पर हम उन नावों के द्वारा दूसरे गाँवों की ओर पलायन कर सके।

⇒ बाढ़ से बचने के लिए हमें अपने घरों को छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर सुरक्षित पहुँचना चाहिए।

⇒ अपने मवेशियों को किसी ऊँचे स्थानों पर ले जाकर रखना चाहिए।

⇒ अपनी जरूत की चीजों को पहले से ही अपने पास उपलब्ध करा लेना चाहिए। जिससे सही समय पर उसका उपयोग कर सकें।


Read More:- 

अध्याय-9 बिहार दर्शन-1

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-9 बिहार दर्शन-1


अध्याय-9 बिहार दर्शन-1

अध्याय-9 बिहार दर्शन-1

अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें।

(i) गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई थी?

(क) पावापुरी

(ख) वैशाली

(ग) बोधगया

(घ) सासाराम

उत्तर- (ग) बोधगया

(ii) गया में अवस्थित विष्णुपद मंदिर किसने बनवाया था?

(क) रानी अहिल्या बाई

(ख) अजातशत्रु

(ग) अशोक

(घ) जरासंध

उत्तर- (क) रानी अहिल्या बाई

(ii) बिहार में गर्म जलकुंड कहाँ अवस्थित है?

(क) पावापुरी

(ख) राजगीर

(ग) गया

(घ) चाँदचारा

उत्तर- (ख) राजगीर

(iv) ककोलत प्रसिद्ध है-

(क) ठंडे जल के लिए

(ख) गर्म जल के लिए

(ग) मंदिरों के लिए

(घ) घाटों के लिए

उत्तर- (क) ठंडे जल के लिए

(v) जरासंध का अखाड़ा अवस्थित है-

(क) राजगीर में

(ग) बोधगया में

(ख) नालंदा में

(घ) वैशाली में

उत्तर- (क) राजगीर में

2. खाली जगहों को भरिए।

(i) पितृ पक्ष का मेला कृष्ण पक्ष में लगता है।

(ii) महाबोधि मंदिर के निकट मुचलिंद सरोवर है।

(iii) पावापुरी में जल मंदिर है।

(iv) महावीर ने  शरीर त्यागकर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।

(v) नालंदा विश्वविद्यालय ज्ञान-विज्ञान का अन्तर्राष्ट्रीय केंद्र था।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।

(i) बोधगया क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर- बोधगया में ही महाबोधि मंदिर है। यह मंदिर विश्व के धरोहरों में जाना जाता है। इसी मंदिर में ध्यानरत बुद्ध की प्रतिमा है। यहीं बोधिवृक्ष के नीचे गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे गौतम बुद्ध कहलाने लगे। इस प्रकार बोधगया मुख्य रूप से गौतम बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति स्थान के लिए प्रसिद्ध है।

(ii) अपने स्कूल से आप राजगीर जायेंगे तो रास्ते में आपको क्या-क्या नजर आएगा?

उत्तर- अपने स्कूल से राजगीर जाएँगे तो रास्ते में हमें सर्वप्रथम महाबोधि मंदिर के दर्शन होंगे और रास्ते में बोधिवृक्ष जहाँ गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था, स्थित है, और वे उसके बाद ही गौतम बुद्ध कहलाने लगे थे। फल्गू नदी के तट पर गया में स्थित ‘विष्णुपद’ मंदिर है। राजगीर के गर्म जलकुंड, मनियारमठ और जरासंध का अखाड़ा, शांति स्तूप नजर आएंगे।

(ii) विष्णुपद मंदिर का निर्माण किसने करवाया था? इसमें किस तरह के पत्थरों का उपयोग किया गया है?

उत्तर-  विष्णुपद मंदिर का निर्माण रानी अहिल्याबाई ने करवाया था। यह काले पत्थरों से बनवाया गया है। यहाँ भगवान विष्णु के पदचिह्न हैं।

(iv) राजगीर में गर्म जल कुंड है। क्यों?

उत्तर- राजगीर चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ है और इन पहाड़ियों में गंधक है। इसलिए यहाँ से गर्म पानी का स्राव होता रहता है। इसलिए राजगीर में गर्म जलकुंड हैं। राजगीर के गर्म जलकुंड में हाथ-पाव धोने से सभी की थकावट मिट जाती है।

(v) जलमंदिर कहाँ है और क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर- जलमंदिर पावापुरी में स्थित है। तालाब के बीचों-बीच स्थित जलमंदिर में भगवान महावीर हैं। तालाब में मछलियों और कमल के फूल प्राकृतिक रूप में मंदिर की शोभा बढ़ाते हैं। यही वह जगह है जहाँ भगवान महावीर ने शरीर त्यागकर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। इसलिए जलोदर अपना खास योगदान के द्वारा ही जलोदर मनमोहक और आकर्षित लगता है। इसी वजह से जलमंदि दुनिया में सुप्रसिद्ध है।

अध्याय-9 बिहार दर्शन-1

4. सही मिलान करें।

                                  उत्तर-

(i) मुचलिंद सरोवर- (घ) बोध गया

(ii) रानी अहिल्या बाई- (ग) विष्णुपद मंदिर

(iii) शांतिस्तूप- (ख) राजगीर की पहाड़ी

(iv) ककोलत जल प्रपात- (क) नवादा जिला


Read More:- 

अध्याय-10 बिहार दर्शन-2

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-10 बिहार दर्शन-2


अध्याय-10 बिहार दर्शन-2

अध्याय-10 बिहार दर्शन-2अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें।

(i) गुरु गोविंद सिंह का जन्म स्थान है-

(क) पटना

(ख) आरा

(ग) सासाराम

(घ) पटना सिटी

उत्तर- (क) पटना

(ii) गोलघर कहाँ अवस्थित है?

(क) आरा

(ख) पूर्णिया

(ग) पटना

(घ) वैशाली

उत्तर- (ग) पटना

(iii) दीदारगंज कहाँ है?

(क) वैशाली

(ख) समस्तीपुर

(ग) पटना

(घ) गया

उत्तर- (ग) पटना

2. खाली जगहों को भरिये-

(i) गोलघर का निर्माण 1786 ई. में करवाया गया था।

(ii) शेरशाह का मकबरा सासाराम में है।

(iii) पटना स्थित संग्रहालय में 5000 वर्ष पुरानी एक विशाल पेड़ की डाल रखी है।

(iv) यक्षिणी की मूर्ति दीदारगंज में मिली थी।

(v) तख्त श्री हरमंदिर पटना साहिब में स्थित है।

(vi) शेरशाह का मकबरा अष्ट कोणीय है।

(vii) ग्रैंडकोर्ड रेलवे दिल्ली-हावड़ा को जोड़ती है।

(viii) गोलघर का निर्माण  कैप्टन जान गॉलस्टीन ने करवाया।

3. सही मिलान करें।

                                उत्तर-

(i) गुरु गोविंद सिंह- (ख) पटना साहिब

(ii) पटना संग्रहालय- (ग) राजेन्द्र कक्ष

(ii) गोलघर- (घ) अनाज का भंडारण

(iv) रोहतास- (क) सासाराम

प्रश्न 4. सही कथनों में सही (√) का चिह्न लगाएँ एवं गलत कथन में गलत (x) का चिह्न लगाएँ-

(क) शेरशाह को हराकर हुमायूँ ने भारत की गद्दी पर कब्जा किया।- (x)

(ख) पटना से गया को जोड़ने वाली रेलवे लाईन ग्रैंड कार्ड लाईन कहलाती है।-(x)

(ग) पटना का गोलघर कैप्टन जान गॉलस्टीन ने बनवाया था।- (√)

(घ) पत्थर की मूर्ति “यक्षिणी” पटना के दीदारगंज में मिली थी।- (√)

(ड़) गुरुगोविन्द सिंह का जन्म स्थल तख्त श्री हरमंदिर जी कहलाता है।- (√)

प्रश्न 5. बताइये-

(क) गोलघर कहाँ है ? इसका निर्माण क्यों करवाया गया?
उत्तर- गोलघर पटना के गाँधी मैदान के पश्चिम में स्थित है। इसका निर्माण कैप्टन जान गॉलस्टीन ने 1786 ई में अनाज के सुरक्षित भंडारण के उद्देश्य से करवाया था ताकि दुर्भिक्ष काल अर्थात अकाल के समय इस अनाज से मदद पहुँचाई जा सके, जिससे सभी को अनाज की समस्याओं का सामना करना नहीं पड़े।

(ख) शेरशाह कौन थे? इनका मकबरा कहाँ है?
उत्तर- शेरशाह के बचपन का नाम फरीद खाँ था जो युवा काल में ही अपने संरक्षक की रक्षा करते हुए शेर को तलवार से एक ही बार में दो टुकड़े कर दिये थे, तभी से उसे शेरशाह के नाम से पुकारा जाने लगा। रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में अफगान शासक शेरशाह का मकबरा स्थित है। यह मकबरा अष्टकोणीय है, जो लाल पत्थरों से बना हुआ है। यह मकबरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है।

(ग) अगर आप पटना संग्रहालय जायेंगे तो आपको कौन-कौन सी चीजें नजर आएंगी?
उत्तर- पटना संग्रहालय का भवन राजस्थानी शैली में बना हुआ है। संग्रहालय के बगीचे में सामने ही तोप रखे हैं, चारों ओर कई बड़ी-बड़ी दुर्लभ मूर्तियाँ भी हैं। मुख्य भवन में जाते ही एक विशाल पेड़ देखने को मिलेगा। जो लगभग 5000 वर्ष पुराना है। उसकी लकड़ियाँ अब पत्थरनुमा हो गई हैं। यह पत्थरनुमा वृक्ष जीवाश्म का उदहारण है।

         यहाँ भगवान बुद्ध और जैन तथा मौर्यकाल की महत्वपूर्ण मूर्तियों, सिक्कों और बर्तनों को भी देखते हैं। पटना संग्रहालय में ही आगे बढ़कर जाने पर एक राजेन्द्र कक्ष बना हुआ है। यहाँ राष्ट्रपति के रूप में राजेन्द्र प्रसाद को मिले हुए उपहारों को भी देख सकते हैं जो उनकी स्मृति के रूप में रखा हुआ है।

(घ) गुरुगोविन्द सिंह का जन्म-स्थान आज किस नाम से प्रसिद्ध है? वहाँ सिक्ख क्यों आते हैं?
उत्तर- गुरुगोविन्द सिंह का जन्म-स्थान आज तख्त श्री हरमंदिर साहब गुरुद्वारा के नाम से प्रसिद्ध है। यह सफेद संगमरमर से बना हुआ है। यह सिक्खों का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यहाँ सभी श्रद्धालु अपने सिर पर रुमाल रखकर जाते है। गुरुगोविन्द सिंह के जन्मदिवस पर यहाँ मेला लगता है। यहाँ देश-विदेश के सिक्ख बड़ी संख्या में भाग लेने आते हैं। सिक्खों के इस पवित्र स्थल के अंदर गुरुग्रंथ साहिब खा हुआ है और गुरुवाणी पढ़ी जाती है। यहाँ प्रत्येक दिन लंगर भी चलता है जहाँ लोगों को नि:शुल्क भोजन कराया जाता है।


Read More:- 

अध्याय-5 दिशाएँ

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-5 दिशाएँ



अध्याय-5 दिशाएँ

अध्याय-5 दिशाएँ

अभ्यास

1. सही विकल्प चुनें।

(i) प्रमुख दिशाएँ कितनी होती हैं?

(क) चार

(ख) छह

(ग) तीन

(घ) बारह

उत्तर- (क) चार

(ii) कुल दिशाओं की संख्या कितनी है?

(क) 5

(ख) 7

(ग) 4

(घ) 10

उत्तर- (घ) 10

(iii) बंगाल की खाड़ी भारत के किस दिशा में है?

(क) उत्तर-पश्चिम

(ख) दक्षिण-पश्चिम

(ग) उत्तर-पूर्व

(घ) दक्षिण-पूरब

उत्तर- (ग) उत्तर-पूर्व

2. खाली जगहों को भरें।

(i) हिमालय पर्वत भारत के उत्तर दिशा में है।

(ii) उत्तर तथा पूरब के बीच उत्तर-पूरब दिशा होती है।

(iii) अरब सागर, बंगाल की खाड़ी से दक्षिण दिशा में है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।

(i) आपके स्कूल के उत्तर दिशा में क्या है?

उत्तर- मेरे स्कूल के उत्तर दिशा में पान की खेती है।

(ii) ध्रुवतारा किस दिशा में नजर आता है?

उत्तर- ध्रुवतारा एक अकाशीय  पिंड अर्थात तारा है, जो हमेशा उत्तर दिशा में नजर आता है। रात्रि के समय आकाश में उत्तर की तरफ देखने पर जो सबसे चमकता हुआ तारा नजर आता है, उसे ही ध्रुवतारा कहा जाता है।

(iii) दिशासूचक यंत्र से दिशा की जानकारी कैसे करते हैं?

उत्तर- दिशासूचक यंत्र में एक सूई लगी रहती है, जिसके दोनों छोर में चुम्बकीय शक्ति होने के कारण ये हमेशा उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव के तरफ घुमता है जो कि दिशा को दर्शाता है। अतः दिशासूचक यंत्र का उपयोग कर हम दिशा की वास्तविक ज्ञान प्राप्त करते हैं।

(iv) आपका घर विद्यालय से किस दिशा में है?

उत्तर- हमारे घर विद्यालय से दक्षिण दिशा में स्थित है।

(v) आपके मित्रों के घर विद्यालय से किन-किन दिशाओं में है?

उत्तर- हमारे मित्रों का घर विद्यालय से दक्षिण, पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में स्थित है। 

(vi) आपके विचा से आपके गाँव/मुहल्ले को सुंदर बनाने के लिए किस-किस परिवर्तन की जरूरत है?

उत्तर- छात्र शिक्षक की मदद से स्वयं करने का प्रयास करें


Read More:- 

अध्याय-4 पृथ्वी के प्रमुख स्थल रुप

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-4 पृथ्वी के प्रमुख स्थल रुप


अध्याय-4 पृथ्वी के प्रमुख स्थल रुप

अध्याय-4 पृथ्वी के प्रमुख स्थल रुप

अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें।

1. बिहार में सोन नदी किस तरह के क्षेत्र से होकर गुजरती है?

(क) पहाड़ी क्षेत्र

(ग) मैदानी क्षेत्र

(ख) पठारी क्षेत्र

(घ) रेगिस्तानी क्षेत्र

उत्तर- (ग) मैदानी क्षेत्र

ii. बाल्मीकीनगर बिहार के किस क्षेत्र में अवस्थित है?

(क) पश्चिमी क्षेत्र

(ख) पूर्वी क्षेत्र

(ग) दक्षिणी क्षेत्र

(घ) उत्तरी क्षेत्र

उत्तर- (घ) उत्तरी क्षेत्र

iii. धान की फसल के लिए उपयुक्त मिट्टी है-

(क) बलुआही मिट्टी

(ख) चिकनी मिट्टी

(ग) पर्वतीय मिट्टी

(घ) दोमट मिटटी

उत्तर- (ख) चिकनी मिट्टी

iv. पठार के ऊपर की सतह होती है-

(क) नुकीला

(ग) संर्कीण

(ख) सपाट

(घ) ढालदार

उत्तर- (ख) सपाट

2. खाली स्थानों को भरें

i. बिहार का अधिकतर भाग गंगा नदी के दोनों ओर मैदानी भाग के रूप में फैला है।

ii. पामीर पठार को संसार का छत कहा जाता है।

iii. पहाड़ों की लम्बी श्रृंखला को पर्वत श्रेणी कहते हैं।

iv. शिमला और कश्मीर देश के प्रमुख केंद्र पर्यटन स्थल के उदाहरण हैं।

v. प्राकृतिक वातावरण के बदलते स्वरूप के मुख्य कारण बढ़ती आबादी है।

3. बताइए-

(i) मैदानी क्षेत्र की क्या-क्या विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर- प्रायः समतल भूमि का प्रदेश मैदान कहलाता है। मैदानों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे समुद्र से ऊँचे या नीचे हो सकते हैं परंतु अपने समीपवर्ती पठार तथा पर्वत से ऊँचे नहीं हो सकते हैं। मैदान प्रायः एक ही मिट्टी के बने होते हैं।

⇒ वे मैदान जिनकी रचना में अपरदन की क्रिया का प्रमुख स्थान होता है, अपरदन मूलक मैदान कहलाते हैं।

⇒ निक्षेपण के क्रिया द्वारा नदियों, हिमानी, वायु तथा सागरीय तरंगों से जो मैदान बनते हैं उन्हें निक्षेपण के मैदान कहते हैं।

(ii) सड़क-निर्माण का कार्य किस क्षेत्र में आसान होगा और क्यों?
उत्तर- सडक-निर्माण का कार्य मैदानी क्षेत्र में आसानी से होगा क्योंकि मैदानी क्षेत्र प्रायः समतल भूमि का प्रदेश होता है। मैदानों की वजह से प्रायः एक ही प्रकार की मिट्टी पायी जाती है। इन क्षेत्रों को आसानी से उपयोग करके सड़क का निर्माण किया जा सकता है, जिससे यहाँ परिवहन की सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध होंगी और सड़क का निर्माण करने में भी बहुत कम खर्च लगेगा और सड़क का कार्य जल्दी ही पूरा हो जाता है।

(iii) पर्वत, पठार और मैदान के दोहन से इस पर क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर- बढ़ती जनसंख्या के कारण ही पर्वत, पठार और मैदानी क्षेत्रों का दोहन हो रहा है। वनों को काटा जा रहा है, इससे प्रदूषण की समस्या भी बढ़ी है। सड़क निर्माण में इन्हीं पठारों, पहाड़ों को काटा जा रहा है, जिससे यह विलुप्त होते जा रहे हैं। मैदानी क्षेत्रों में परिवहन, जल, समतल भूमि होने के कारण कल-कारखाने बन रहे हैं जिससे आबादी काफी घनी हो गई है। कारखानों के लिए खनिजों की उपलब्धता पठारों से है। इसलिए पठारों का दोहन हो रहा है, जिससे प्राकृतिक सुंदरता घटी हैं और प्रदूषण बढ़ा है।

        रचनात्मक मैदान का निर्माण पृथ्वी के आंतरिक हलचलों के द्वारा होता है। मैदानी क्षेत्रों में जीवन-यापन के लिए भोजन, जल, आवास परिवहन की सुविधाएँ आसानी से हो सकती है। यहाँ सड़क मार्ग, रेलमार्ग एवं अन्य सुविधाएँ आसानी से प्रदन की जा सकती हैं। बिहार का अधिकतर भाग गंगा नदी के दोनों तरफ मैदानी भाग के रूप में फैला हुआ है। इसमें कृषि कार्य होता है। ऐसे मैदानी क्षेत्र अन्न उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। मैदानी क्षेत्र पश्चिम में पंजाब से लेकर पूरब में आसम तक ये इलाके सतलज, गंगा और ब्रह्मपुत्र का मैदान कहलाते हैं। ये सभी क्षेत्र कृषि के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।

(iv) मैदान में ही अधिक लोग क्यों बसते हैं?
उत्तर- मैदान में ही अधिक लोग बसते हैं क्योंकि मैदान की भूमि समतल होती है। जिससे लोग यहाँ कृषि-कार्य आसानी से करते हैं। इसमें लोग धान, गेहूँ, चना इत्यादि उपजाकर अपना जीवन-यापन कर सकते हैं। मैदानी क्षेत्रों में जीवन के लिए सभी सुख-सुविधा उपलब्ध हैं। भोजन, जल, आवास, परिवहन की सुवधिा आसानी से उपलब्ध होती है। ऐसे क्षेत्रों में संडक मार्ग आसानी से प्रदान हो जाती हैं। मैदानी क्षेत्र अन्न उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। 

(v) पर्वत कितने प्रकार के होते हैं? सभी के नाम लिखें।
उत्तर- पर्वत निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं:-

(क) वलित पर्वत- इनकी सतह ऊबड़-खाबड़ एवं शिखर शंक्वाकार होती है। जैसे-भारत का हिमालय पर्वत एवं दक्षिण अमेरिका का एन्डीज पर्वत।

(ख) भ्रंशोत्थ पर्वत- पृथ्वी के आंतरिक हलचलों के कारण पृथ्वी पर दरारें पड़ जाती हैं और उन दो दरारों के बीच का भाग ऊपर उठ जाता है, इस ऊँचे उठे भाग को ही भ्रंशोत्थ पर्वत कहा जाता है। भारत का सतपुड़ा पर्वत इसका उदाहरण है।

(ग) ज्वालामुखी पर्वत- ज्वालामुखी से निकले लावा एवं अन्य पदार्थों के ठंडा होकर जम जाने से जिन पर्वतों का निर्माण होता है उसे ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं। इटली का विसुवियस पर्वत इसका उदाहरण है। भारत के अण्डमान निकोबार के बैन द्वीप में सक्रिय ज्वालामुखी पर्वत पाए जाते हैं। कम ऊँचाई के पर्वतों को पहाड़ी कहा जाता है।


Read More:- 

अध्याय-3 पृथ्वी के परिमंडल

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-3 पृथ्वी के परिमंडल


अध्याय-3 पृथ्वी के परिमंडलअध्याय-3 पृथ्वी के परिमंडल

अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें।

(i) जीवन पनपता है-

(क) स्थलमंडल पर

(ख) जलमंडल पर

(ग) वायुमंडल पर

(घ) जैवमंडल पर

उत्तर- (क) स्थलमंडल पर

(ii) अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय थे-

(क) अशोक शर्मा

(ख) राकेश शर्मा

(ग) रमेश वर्मा

(घ) रवीश मलहोत्रा

उत्तर- (ख) राकेश शर्मा

(iii) जलडमरु मध्य जोड़ता है-

(क) दो बड़े भू-स्थलों को

(ख) दो बड़े जल-भागों को

(ग) दो झीलों को

(घ) दो नदियों को

उत्तर- (ख) दो बड़े जल-भागों को

(iv) समतापमंडल होता है-

(क) जलमंडल में

(ख) स्थलमंडल में

(ग) वायुमंडल में

(घ) जैवमंडल में

उत्तर- (ग) वायुमंडल में

2. खाली जगहों को भरिए-

(i) स्थल का एक संकरा भाग जो दो बड़े स्थलीय भागों को जोड़ता है स्थल संधि कहलाता है।

(ii) पानी का संकरा भाग जो दो बड़ी जलराशियों को एक-दूसरे से जोड़ता है जलडमरू मध्य या जल संधि कहलाता है।

(iii) चंद्रमा पर हवा और पानी नहीं होने से वहाँ जीवन सम्भव नहीं है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।

1. पृथ्वी पर जीवन का क्या कारण है?

उत्तर- पृथ्वी के चारों ओर घिरे हुए आवरण को वायुमंडल कहते हैं। वायुमंडल पृथ्वी पर जीवों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। सभी जीवों को जीवित रहने के लिए भोजन, पानी और हवा की आवश्यकता होती है। इन्हें ये तीनों चीजें स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल से मिलती हैं। हमारी पृथ्वी पर ये तीनों मंडल उपस्थित होने के कारण ही जीवन पनपता है। यही कारण है कि पृथ्वी पर जीवन पाया जाता है।

i. पृथ्वी पर प्रमुख परिमण्डल कौन-कौन से हैं?

उत्तर- पृथ्वी पर प्रमुख परिमण्डल स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल है।

iii. पृथ्वी के प्रमुख महाद्वीपों के नाम लिखिए।

उत्तर- पृथ्वी के प्रमुख महाद्वीपों के नाम निम्नलिखित है-

1. एशिया

2. यूरोप

3 . अफ्रिका

4 . उत्तरी

5 . दक्षिणी अमेरिका

6 . अंटार्कटिका

7. 3. आस्ट्रेलिया।

iv. पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहते हैं?

उत्तर-  हमारी पृथ्वी जिस पर हम रहते हैं पृथ्वी पर ही जीवन मिलता है क्योंकि वहाँ जल एवं जीवन के लिए आवश्यक गैसें मौजूद है। अंतरिक्ष से देखने पर यह नीली नजर आती है। क्योंकि वायुमंडल में प्रकाश की किरणें परावर्तित होती हैं तथा समुद्र की सतह से नीले रंग का परावर्तन सर्वाधिक है। हमारी पृथ्वी पर लगभग 71% भू-भाग जल से घिरा है तथा मात्र 29% स्थल मंडल है, अतएव जलीय भाग के अधिक रहने के कारण परावर्तन अधिक होता है, फलतः यह नीला दिखाई देता है। इसलिए इसे नीला ग्रह भी कहते हैं।

v. पृथ्वी के प्रमुख महासागरों के नाम लिखिए।

उत्तर- पृथ्वी के प्रमुख महासागरों के नाम निम्नलिखित हैं-

1. हिंद महासागर

2. प्रशांत महासागर

3. अटलांटिक महासागर

4. आर्कटिक महासागर।

vi. जैवमण्डल किसे कहते है? इसका विस्तार कहाँ है?

उत्तर- जैवमण्डल पृथ्वी के चारों तरफ फैले लगभग 30 किमी मोटी वायु, जल, स्थल, मृदा, तथा शैल युक्त एक जीवनदायी परत होती है। इसके अंतर्गत सभी पेड़-पौधों एवं जीव-जन्तुओ का जीवन सम्भव होता है। अर्थात जैवमण्डल में पृथ्वी के स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल के हर उस अंग का समावेश है जहाँ जीवन पनपता है।

vii. जीवन के लिए वायुमंडल आवश्यक है। कैसे?

उत्तर- पृथ्वी के चरों ओर फैले हुए विभिन्न गैसों के आवरण को ही वायुमंडल कहते हैं। वायु के बिना तो हमलोग एक पल भी जीवित नहीं रह सकते हैं। वायुमंडल पृथ्वी पर जीवों के लिए अति आवश्यक है। इसकी उपस्थिति के कारण ही हमलोग सांस लेते हैं और पेड़-पौधे भी अपना भोजन इसकी मदद से बनाते हैं।

हमलोग जो सर्दी-गर्मी महसूस करते हैं वह हवाओं के माध्यम से ही करते हैं। ये वायु ही बादलों को गतिशील बनाती हैं जिससे वर्षा होती है। सभी जीवों को जीवित रहने के लिए वायु की जरूरत होती है जो हमें वायु वायुमंडल से प्राप्त होती है। जलचर भी पानी में घुलनशील हवाओं के द्वारा ही जीवित रहते हैं। इस प्रकार जीवन के लिए वायुमंडल आवश्यक है।

viii. स्थलमंडल किसे कहते है ? यह क्यों उपयोगी है?

उत्तर- पृथ्वी का वह ऊपरी ठोस भाग जिसमें मिट्टी, कंकड़, पत्थर, पहाड़, मैदान, पठार आदि सम्मिलित है, वह स्थलमंडल कहलाता है। इस स्थलमंडल पर ही सारे जीव-जन्तु, मनुष्य, अपना घर बनाकर अपना जीवन-यापन करते हैं।

             स्थलमंडल पर ही मनुष्य खेती-बाड़ी करके अपनी जीविकोपार्जन करते हैं। स्थलमंडल के बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। स्थलमंडल हमारे जीवन का अस्तित्व है। स्थलमंडल पर ही पेड़-पौधे का भी जीवन पाया जाता है। इस प्रकार स्थलमंडल हमारे लिए अति उपयोगी है।

ix. जलीय क्षेत्रों के जीव-जंतु एवं पौधे कौन-कौन से हैं? सूची बनाइए।

उत्तर- जलीय क्षेत्रों के जीव-जन्तु- कछुआ, साँप, मगमच्छ, मछली, मेढ़क, हंस, बतख इत्यादि हैं। जलीय क्षेत्रों के पौधे- कमल, केला का पौधा इत्यादि है।


Read More:- 

अध्याय-2 पृथ्वी एवं उसकी गतियाँ

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-2 पृथ्वी एवं उसकी गतियाँ


अध्याय-2 पृथ्वी एवं उसकी गतियाँ

अभ्यास

1. सही विकल्प को चुने-

(i) समदिवा रात्रि होते हैं-

(क) 22 जून एवं 21 सितम्बर

(ख) 25 दिसम्बर

(ग) 21 मार्च एवं 23 सितम्बर

(घ) ध्रुवों पर

उत्तर- (ग) 21 मार्च एवं 23 सितम्बर

(ii) सबसे बड़ा दिन होता है-

(क) 21 जून
(ख) 22 जून
(ग) 25 दिसम्बर
(घ) 22 दिसम्बर
उत्तर- (क) 21 जून और (घ) 22 दिसम्बर

(iii) पृथ्वी अपने अक्ष पर झुकी है-

(क) 32½°
(ख) 33½°
(ग) 67½°
(घ) 23½°
उत्तर- (घ) 23½°

(iv) शीतोष्ण कटिबंध में-

(क) बहुत गरमी पड़ती है

(ख) कम गरमी पड़ती है

(ग) बहुत बरसात होती है

(घ) अधिक ठंड एवं कम गरमी पड़ती है

उत्तर- (घ) अधिक ठंड एवं कम गरमी पड़ती है

(v) जहां सालों भर गरमी पड़ती है वह क्षेत्र कहलाता है-

(क) शीतोष्ण कटिबंध

(ख) उष्ण कटिबंध

(ग) ध्रुव

(घ) विषुवत रेखा पर

उत्तर- (ख) उष्ण कटिबंध

(vi) पृथ्वी आकार में चंद्रमा से-

(क) छोटी है

(ख) बड़ी है

(ग) समान है

उत्तर- (ख) बड़ी है

(vii) चांद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति कौन थे?

(क) राकेश शर्मा

(ग) तेन सिंह

(ख) यूरी गागरिन

(घ) नील आर्मस्ट्रांग

उत्तर- (घ) नील आर्मस्ट्रांग

2. खाली जगहों को भरिए-

(i) उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा अक्ष कहलाती है।

(ii) पृथ्वी की  दैनिक या घूर्णन गति के कारण दिन-रात होते हैं।

(iii) विषुवतीय प्रदेश में सूर्य की किरणें सालों भर सीधी पड़ती हैं।

(iv) पृथ्वी पश्चिम से पूरब की ओर घूमती है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।

(i) ध्रुवों पर छह महीने लगातार दिन और रात क्यों होते हैं?

उत्तर- जब उत्तरी ध्रुव पर सूर्य का प्रकाश लगातार 6 महीने पड़ता है तो यहाँ छ: महीने लगातार दिन होते हैं और ठीक उसी समय दक्षिणी ध्रुव में अंधेरा होने के कारण ही दक्षिणी ध्रुव में लगातार 6 महीने रात होती हैं। ठीक इसी प्रकार जब दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य का प्रकाश लगातार 6 महीने पड़ता है तो यहाँ छ: महीने लगातार दिन होते हैं और ठीक उसी समय उत्तरी ध्रुव में अंधेरा होने के कारण ही उत्तरी ध्रुव में लगातार 6 महीने रात होती हैं।

(ii) दैनिक गति और वार्षिक गति में क्या अंतर है?

उत्तर- दैनिक गति- जिस हिस्से पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है वह हिस्सा हमें दिखाई देता है अर्थात वहाँ दिन होता है और जहाँ प्रकाश नहीं पड़ता है वहाँ दिखाई नहीं पड़ता और वहाँ रात होती है। पृथ्वी को इस तरह का चक्कर पूरी करने में 24 घंटे अर्थात एक दिन का समय लगता है। पृथ्वी की इस गति को घूर्णन गति या दैनिक गति कहते हैं। इस गति के कारण ही दिन और रात होते हैं।

वार्षिक गति- घूर्णन गति से ही पृथ्वी की परिभ्रमण गति भी जुड़ी हुई है। इसके कारण ही पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन होता है। पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती हुई 365 दिन अर्थात एक वर्ष में धीरे-धीरे खिसकते हुए सूर्य का एक चक्कर पूरा कर लेती है। पृथ्वी की इस वार्षिक गति को ही परिभ्रमण गति कहा जाता है।

(iii) ‘अक्ष’ किसे कहते हैं?

उत्तर- पृथ्वी पश्चिम से पूरब घूमती रहती है। उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा अक्ष कहलाती है। इसी अक्ष पर पृथ्वी घूम रही है। लेकिन पृथ्वी पर ग्लोब की तरह उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रव को मिलाने वाली कोई रेखा नहीं है। ग्लोब पृथ्वी का नमूना हैं इसलिए ग्लोब अपने अक्ष पर सीधी नहीं खड़ी होकर एक ओर झुकी हुई है क्योंकि पृथ्वी अपने अक्ष पर 23½° झुकी हुई है।

(iv) पृथ्वी किस दिशा में घूमती है?

उत्तर- पृथ्वी पश्चिम दिशा से परब दिशा की ओर घूमती है।

(v) पृथ्वी के किस भाग में सबसे कम गर्मी पड़ती है और क्यों?

उत्तर- पृथ्वी के ‘शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र’ में जैसे-जैसे उत्तर या दक्षिण में बढ़ते हैं सूर्य की किरणें तिरछी होती जाती हैं और बड़े हिस्से में फैल जाती है जिसके कारण कम गर्मी पड़ती है।

(vi) पृथ्वी पर कितने कटिबंध हैं? कटिबंधों में सूर्य के प्रकाश की क्या स्थिति होती है?

उत्तर- पृथ्वी पर तीन कटिबंध निम्नलिखित हैं-

(क) उष्ण कटिबंध- कर्क एवं मकर रेखाओं के बीच अन्य अक्षांशों की तुलना में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है जिसके कारण इसे उष्णकटिबंध कहा जाता है। यहाँ दिन और रात की स्थितियाँ सालों भर होती है तथा सूर्य की किरणें लम्बवत् पड़ती हैं।

(ख) समशीतोष्ण कटिबंध- कर्क एवं मकर रेखा के बाद उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव वृत्त तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव वृत्त के बीच वाले क्षेत्र में तापमान मध्यम रहता है। यहाँ जाड़े में सर्दी पड़ती है तथा गर्मी में तापमान अधिक रहता है। इसे सम शीतोष्ण कटिबंध कहते हैं। दिन और रात की स्थितियाँ होती हैं परन्तु सूर्य की किरणें कभी लम्बवत् नहीं पड़ती हैं।

(ग) शीत कटिबंध- यहाँ छ: महीने का दिन एवं छः महीने की रात होती है। ध्रुवों के निकट सूर्य की किरणें अत्यधिक तिरछी पड़ती हैं यही कारण है कि छह महीने का दिन होने के बावजूद ये किरणें वहां के धरातल एवं वातावरण को गर्म नहीं कर पातीं। अतः यहाँ वर्षभर बर्फ जमी रहती है। इस क्षेत्र को शीत कटिबंध’ की पेटी कहा जाता है।

4. पता कीजिए।

(i) विषुवत रेखा किन-किन देशों से होकर गुजरती है?

उत्तर- विषुवत रेखा कुल 13 देशों से गुजरती है, जो इस प्रकार हैं-

⇒ दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के देश- इक्वाडोर, कोलम्बिया एवं ब्राजील

⇒ अफ्रीका महाद्वीप के देश- गैबन, कांगो गणराज्य, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा, केन्या, सोमालिया

⇒ एशिया महाद्वीप के देश- मालदीव, इंडोनेशिया, किरिबाती, साओटोम और पिंसिप

(ii) शीत कटिबंध में स्थित कुछ देशों के नाम-

उत्तर- शीत कटिबंध में स्थित देश उत्तरी यूरोप के देश है जिसमें डेनमार्क, जर्मनी, नार्वे, स्वीडन, फिनलैंड, लिथुआनिया तथा रूस एवं कनाडा हैं। दक्षिणी गोलार्द्ध में न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया का दक्षिणी हिस्सा तथा दक्षिणी अमेरिका के चिल्ली देश है।

(iii) शीतोष्ण कटिबंध में स्थित कुछ देशों के नाम-

उत्तर- शीतोष्ण कटिबंध में स्थित कुछ देशों के नाम- संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और यूरोप, मध्य एशिया, दक्षिणी अमेरिका के दक्षिणी देश और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह क्षेत्र कर्क रेखा और मक रेखा के बीच स्थित हैं।

5. दिए गए चित्र में सही स्थान पर कटिबंधों के नाम लिखिए।

उत्तर-


Read More:- 

अध्याय-1 हमारा सौरमंडल

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-1 हमारा सौरमंडल


अध्याय-1 हमारा सौरमंडल

अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें-

(i) राशियों की कुल संख्या कितनी है?

(क) 5

(ग) 8

(ख) 12

(घ) 27

उत्तर- (ख) 12

(ii) सूर्य की आकृति कैसी है?

(क) गोल

(ख) चिपटी

(ग) वर्गाकार

(घ) आयताकार

उत्तर- (क) गोल

(ii) सौर परिवार का मुखिया कौन है?

(क) पृथ्वी

(ख) चन्द्रमा

(ग) सूर्य

(घ) नक्षत्र

उत्तर- (ग) सूर्य

(iv) ग्रहों की कुल कितनी संख्या है?

(क) 8

(ख) 9

(ग) 12

(घ) 27

उत्तर- (क) 8

(v) सप्तर्षि कितने तारों का समूह है?

(क) 27

(ख) 8

(ग) 12

(घ) 7

उत्तर- (घ) 7

2. खाली जगहों को भरिए-

(i) पृथ्वी एक नक्षत्र को 14 दिनों में पार करती है।

(ii) विषुवत रेखा पर ध्रुवतारा क्षितिज पर दिखाई पड़ता है।

(iii) मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच क्षुद्रग्रह पाए जाते हैं।

(iv) वृहस्पति के 63 उपग्रह हैं।

(v) सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक लगभग 8 मिनट में पहुँचता है।

3. निम्न प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(i) सूर्य से दूरी के अनुसार विभिन्न ग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर- सूर्य से दूरी के अनुसार बुध, ग्रह, शुक्र ग्रह, पृथ्वी ग्रह, मंगल ग्रह, वृहस्पति ग्रह, शनि ग्रह, यूरेनस, नेप्ट्यून हैं।

(ii) सूर्य से सबसे नजदीकी ग्रह क्या नाम है?
उत्तर- बुध सूर्य के सबसे नजदीकी ग्रह है।

(iii) सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन है?
उत्तर- सौर मंडल का सबसे बड़ा वृहस्पति ग्रह है।

(iv) पृथ्वी के निकटवर्ती ग्रह कौन-कौन हैं?
उत्तर- पृथ्वी के सबसे नजदीक सूर्य और चन्द्रमा हैं।

(v) उस ग्रह का क्या नाम है जिसके चारों ओर छल्ले पाये जाते हैं?
उत्तर- उस ग्रह का नाम शनि है जिसके चारों ओर छल्ले पाये जाते हैं।

(vi) सौर मंडल का कौन-सा ग्रह आपको सबसे अलग लगा और क्यों?
उत्तर- सौर मंडल का पृथ्वी ग्रह हमें सबसे अलग लगता है क्योंकि यही वह ग्रह है जहाँ जीवन मिलता है। यहाँ जल एवं जीवन के लिए आवश्यक गैसें मौजूद हैं और अंतरिक्ष से देखने पर यह नीली दिखाई देती है। यही है हमारी पृथ्वी जिस पर हम रहते हैं।

(vii) पृथ्वी के उपग्रह का क्या नाम है? का क्या नाम है?
उत्तर- पृथ्वी के उपग्रह का नाम चाँद है।

(viii) वे कौन-कौन से ग्रह हैं जो पृथ्वी के घूमने की विपरीत दिशा में घूमते हैं?
उत्तर- शुक्र तथा अरुण ग्रह जो पृथ्वी के घूमने की विपरीत दिशा में घूमते हैं।

(ix) आकाशगंगा क्या है?

उत्तर- आकाशगंगा लाखों तारों का एक समूह है।

4. अकाशीय पिण्ड एवं दी गई विशेषताओं का मिलान कीजिए-

                          उत्तर-

(i) बुध- (ग) सबसे छोटा ग्रह

(ii) पृथ्वी- (घ) नीला ग्रह

(iii) चन्द्रमा- (ख) पृथ्वी का उपग्रह

(iv) उल्कापिंड- (ड़) सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले पत्थरों के छोटे टुकड़े

(v) आकाशगंगा- (च) लाखों तारों का समूह

(vi) ब्रह्माण्ड- (क) लाखों आकाश गंगा का समूह

5. आपस में चर्चा कीजिए एवं लिखिए।

(i) कई तारे सूर्य से बड़े हैं फिर भी छोटे क्यों दिखाई देते हैं?
उत्तर- कई तारे सूर्य से बड़े हैं फिर भी छोटे दिखाई देते हैं क्योंकि यह पृथ्वी से काफी दूर हैं।

(ii) तारे आकाश में ही हैं फिर भी दिन में क्यों नहीं दिखाई देते?
उत्तर- तारे आकाश में ही हैं फिर भी दिन में सूर्य की रोशनी के कारण हमें दिखाई नहीं देते हैं।

(iii) चन्द्रमा तारों से छोटा है फिर भी हमें बड़ा क्यों दिखाई देता है?
उत्तर- चन्द्रमा तारों से छोटा है फिर भी हमें बड़ा दिखाई देता है क्योंकि पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी कम होने के कारण वह हमें तारों से बड़ा दिखाई देता है।

(iv) अगर किसी आकाशीय पिण्ड में प्रकाश न हो तो क्या वह हमें नजर आएगा? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर- अगर किसी आकाशीय पिण्ड में प्रकाश न हो तो वह हमें दिखाई नहीं देगा क्योंकि हम प्रकाश के बिना किसी भी वस्तु को देख नहीं सकते हैं।

6. इनमें किन-किन अकाशीय पिंडों के नाम छुपे हैं-

हमारा सौरमंडल

उत्तर-

(i) बुध

(ii) शुक्र

(iii) पृथ्वी

(iv) मंगल

(v) वृहस्पति

(vi) शनि

(vii) अरुण

(viii) वरुण

(ix) टाइटन

(x) सिरस।

7. सौमंडल का मॉडल/चित्र बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर-

हमारा सौरमंडल


Read More:- 

12. अजब-गजब

12. अजब-गजब


 अजब-गजब⇒

            इस देश में सब कुछ अजब-गजब हो रहा है। हमको तो लगता है कि यह देसे है अजब और गजब लोगों का।

         तो, हम कह रहे थे… कह कहाँ रहे थे। कहेंगे तो अब। देखिये जी, यहाँ नेता और जनता का संबंध वैसा है, जैसा दूध के साथ पानी का पगार के साथ घूस का। बाजार के साथ महँगाई का। आलू के साथ झुलसा रोग का…। अब ये एक-दूसरे से पूछकर तो अपना काम नहीं करेगा न।

          झुलसा रोग आलू से पूछकर आयेगा क्या? न महँगाई बाजार से पूछकर आया करेगी और न ही घूस पगार के बारे में पूछताछ करेगी। और पानी तो दूध का लंगोटिया यार है, फिर पूछने की क्या जरूरत है?

अजब-गजब

         लेकिन नहीं…नेतागिरी में ऐसा नहीं होता। आप वाले जनता से पूछकर ही हर्र-हुर्र कर रहे हैं। कहाँ झाडू मारना है कहाँ नहीं, जनता से ही पूछेंगे। जनता ने सरकार बनाने के लिए थोड़े न वोट दिया, वो तो सिर्फ राइट टू पूछने के वास्ते दिया था। सरकार बनाएँ कि नहीं, बड़ी कोठी तथा सुरक्षा लें कि नहीं, लाल बत्ती जलाएँ कि नहीं-सब काम केजरीवाल ने जनता से पूछकर ही किया न। जनता भी ‘पुछवाकर तृप्त। उधर, राहुल गांधी की सारी उमर मम्मी से पूछने में ही घिस रही है।

          गरीब के घर का खाना पचा लेंगे, लेकिन जब गरीब को अपने घर खाने पर बुलाना हो तो मम्मी से ही पूछेंगे। तो, प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी लेनी है कि नहीं, यह भी तो मम्मीजी से पूछकर ही तय करेंगे न। लेकिन सबका गुरु निकले नरेन्द्र भाई। गुरुई में तो उन्होंने अपने ‘गुरुओं’ का गुड़ गोबर का दिया। और पूछने के मामले में सबको पछाड़ डाला। इसलिए कि खुद ही जनता से पूछते हैं और खुदहि जवाब देते परन्तु मंच पर से पूछते जरूर हैं, ताकि जनता ये न बूझे कि पूछा नहीं…।

       तो, है न यह अजब-गजब? अब तो घोड़ा भी घास से पूछकर ही चरा करेगा। चोर कोतवाल से पूछेगा कि चोरी कर लें? और तो औ, राजा प्रजा से पूछेगा कि हम भी थोड़ा-बहुत ‘अराजक’ हो लें-तुम्हारी तरह?

स्रोत: दे दे राम, दिला दे राम !, (विरेन्द्र नारायण झा)

11. सकारात्मक विचारों का प्रभाव

11. सकारात्मक विचारों का प्रभाव


सकारात्मक विचारों का प्रभाव⇒

           सकारात्मक विचारों का भी मन, मस्तिष्क, शरीर तथा समस्याओं के हल की दिशा में इतना अनुकूल प्रभाव पडता है कि वह चमत्कार जैसा ही लगता है। विधेयक विचार यदि ईश प्रार्थना से संयुक्त हो जाए तो यह दैवी शक्ति का प्रवाह बन जाता है, जिसमें चिंताएं, व्याकुलताएं, रोग, शोक, आधि- व्याधि सभी प्रवाहित हो जाते हैं।

              सकारात्मक विचार ईश प्रार्थना से संयुक्त हो या दृढ़ मनोबल से- दोनों का शुभ फल अवश्य मिलता है। प्राकृतिक चिकित्सा के प्रसिद्ध विद्वान डॉ. हेनरी लिट्ठर ने भी अपनी पुस्तक ‘प्रैक्टिस ऑफ थेराप्यूटिक्स’ में लिखा है-‘मनोभावों में इतना सामर्थ्य है कि उनके द्वारा कोई रोगी स्वयं को पूर्ण स्वस्थ और कोई स्वस्थ व्यक्ति विकृत विचार आरोपण व निषेधात्मक चिंतन द्वारा अपने को अशक्त, असमर्थ तथा रुग्ण बना सकता है।

सकारात्मक विचारों का प्र

             श्रीमती मर्टिल फिल्मोर प्रायः बीमार रहा करती थी। दवा खाते-खाते टूट चुकी थी। डॉक्टर भी अब और कुछ कर सकने में अपने को असक्षम समझ रहे थे। एक बार श्रीमती मर्टिल अपने पति चार्ल्स फिल्मोर के साथ एक आध्यात्मिक भाषण सुनने गई।

          भाषण के एक वाक्य को उसके मन ने दृढ़ता से पकड़ लिया ‘I am child of God and therefore I do not inherit sickness.’ ‘मैं ईश्वर की संतान हूं, अतः मुझमें कोई रोग नहीं।’ मन हमेशा इस बात की आवृत्ति करता रहता। इस बात पर उसे इतना अधिक विश्वास हो गया कि उसका जीवन बदल गया। वह स्वास्थ्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती और पोषक (Positive) विचारों के द्वारा अपने में शक्ति भी भरती रहती। फलतः वह पूर्ण स्वस्थ हो गई।

             श्री कैस्के जन्म से पंगु था। वह चल नहीं सकता था। श्रीमती मर्टिल फिल्मोर से प्रेरित होकर वह ईश्वर विश्वास से अभिभूत हो पोषक विचारों को पोषित करने लगा। वह बारंबार इस विचार की आवृत्ति करता कि उस पर परमात्मा की असीम कृपा बरस रही है। प्रभु कृपा से अब वह स्वस्थ होता जा रहा है, उसके पैर अच्छे होते जा रहे हैं। उसके पैर सभी कार्य करने में सक्षम हो गए हैं, वह चल सकता है, दौड़ सकता है इत्यादि। फलतः वह भी स्वस्थ हुआ।

         प्रसिद्ध चिकित्सक हीलर अलबई क्लिक की पुरानी पेट पीड़ा मन की शुभ भावनाओं ने शांत कर दी।

        प्रसिद्ध चिकित्सक रिबेका ने मधुमेह (डायबिटिज) रोग को निर्मूल करने की दवा बताई ‘सकारात्मक विचार।’ रिबेका के शब्दों में, ‘इस रोग को निर्मूल करने की एकमात्र दवा है प्रेम और मन का सदा निश्चित और प्रसन्न रहना।’

      एलिस न्यूटन नाम की स्त्री पेट के कैंसर से बुरी तरह पीड़ित थी, उसका उदर फूला हुआ था। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। वह ईश प्रार्थना के साथ पोषक विचारों में जुट गई और अंततः रोगमुक्त हुई। भारत में तो ऐसे उदाहरण आए दिन देखने को मिलते हैं।

        अब तो यह स्पष्ट परिलक्षित हो गया कि शुभ औ विधेयक विचारों की शुभ परिणति एवं अशुभ और निषेधात्मक विचारों के घातक परिणाम होते हैं।

        आप चिंतन की प्रक्रिया द्वारा प्रभु की शांति, निर्विकारिता, प्रज्ञावानतादि को निश्चय ही अपने में उभार सकते हैं। व्यक्ति का चिंतन उसके शरी, स्वास्थ्य और क्रियाशक्ति पर आश्चर्यजनक ढंग से प्रभाव डालता है। चिंतन से अंतर्मन के साथ-साथ बाह्य जगत भी प्रभावित और परिवर्तित होता है। अतएव स्वसंकेत (ओटो सजेशन) द्वारा अपने भीतर स्थित ईश्वरीय गुणों को उभारें, प्रकट करें।

स्रोत: चिंता क्यों?

10. नकारात्मक विचारों से कैसे उबरें?

10. नकारात्मक विचारों से कैसे उबरें?


नकारात्मक विचारों से कैसे उबरें?

                यह तो नकारात्मक विचारों का प्रभाव हुआ। अतः आप नकारात्मक विचारों को अपने पर हावी न होने दें। जब कभी आपको लगे कि आप पर नकारात्मक विचारों का आक्रमण हो रहा है, तब आप तत्काल सावधान हो जाएं। नकारात्मक विचारों को हटाने के एक-दो सुझाव प्रस्तुत हैं-

1. आप दो-चार गहरा श्वास लें और छोड़ें। इन श्वासों का अनुभव करें। तदुपरांत आंखें बंद कर लें और आते-जाते श्वासों को गहराई से अनुभव करें। श्वासों से भली प्रकार जुड़ जाएं। आपके मन की आंखों को धोखा देकर एक भी श्वास आने-जाने न पाए। आप सावधानीपूर्वक हर आते-जाते श्वास का अनुभव और आनंद लें। यदि कोई विचार आपको परेशान कर रहा हो तो आत्मविश्वास के साथ मन को आदेश दे, ऐ मन! चुप हो जाओ। शांत हो जाओ। अभी मैं आनन्द सरोवर में तैराकी कर रहा हूं। ॐ शांति! ॐ आनंद! ॐ प्रसन्नता! ॐ आह्लाद !

2. नकारात्मक भाव संवेग यथा-क्रोध, चिढ़, द्वेष, नफरत, क्षोभ, आक्रोश आदि पर नियंत्रण भी जरूरी है। आप सावधान रहें कि ये दुष्ट संवेग आपके भीतर प्रवेश न कर पाएं और यदि प्रवेश कर भी जाएं तो ठहर न पाएं। इसके लिए एक दो पहलू पर ध्यान दें। याद रखें, सभी व्यक्तियों की सोच, रूचि व आदतें भिन्न-भिन्न होती है। अतः जो जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार करें। यदि आप उसकी सोच या आदतों पर अपने विचार थोपने का प्रयत्न करेंगे तो वह कुछ ऐसा कह सकता है, जिससे आप क्षुब्ध हो जाएं। अतः शांति और रिश्तों में मधुरता के लिए शांत मौन ही बेहतर है।

नकारात्मक विचारों से

3. दूसरों के अपशब्दों को नजर अंदाज करना सीखे, इससे व्यर्थ के कलह-अशांति से सहज ही बच जाएंगे।

4. जहां तर्क-वितर्क में बहसा-बहसी की संभावना हो रही हो तो वहां से कुछ समय के लिए हट जाएं, इससे नकारात्मक भाव-संवेगों से आपका बचाव हो सकेगा।

5. नकारात्मक भाव-संवेगों के उभार पर भी आप हिम्मत न हारें, इससे मुक्त होने के लिए आप अपने ध्यान को अन्यत्र लगाने का प्रयास करें। नाक से लम्बा श्वास लेकर झटके के साथ मुंह से श्वास फेंक दें। ऐसा आठ-दस बार करें।

6. जहां जाने से, जिसके साथ रहने से, जिसकी बात सुनने से तनाव बढ़ता हो, वहां से नम्रतापूर्वक दूरी बनाए रखना ही बुद्धिमत्ता है।

7. याद रखें, दुख – तनाव अभाव में कम और स्वभाव में अधिक होता है। स्वभाव को विधेयक बनाएं और दुख-तनाव से मुक्ति पाएँ।

8. चिंता या तनाव के उद्रेक में किसी पुरानी और आनंददायक घटना या बात याद करें। ऐसा अनुभव करें, जैसे वह वर्तमान में ही घटित हो रही है। घटना इस तरह सिलसिलेवार याद करें कि चिंता-तनाव का मन में प्रवेश पाना असम्भव हो जाए।

9. तनाव का अहसास होते ही श्वासों के साथ प्रभु सुमिरण में लग जाएं। प्रभु की स्नेहिल छत्रछाया सदैव आपके सिर पर है, इसे बार-बार बोलें और इसका अनुभव करें। जैसे प्रह्लाद के सिर पर नरसिंह भगवान बड़े ही प्रेम और ममता से अपना हाथ फेरे थे, उसी तरह दयालु प्रेमिल प्रभु बड़े ही लाड़-दुलार से आपके सिर पर हाथ फेर रहे हैं, इसे अनुभव कर भावविभोर हो जाएं। ज्ञान, वैराग्य, भक्ति भरा कोई भजन गुनगुनाने लगें।

कहा भी गया है-

महाविपत्तौ संसारे यः स्मरन्मधुसूदनम्।

विपत्तौ तस्य सम्पत्तिर्भवेदित्याह शंकरः।।     देवी भा. पु. ९/४०/४१

             अर्थात् ‘जो पुरुष महाविपत्ति के अवसर पर भगवान का स्मरण करता है, उसके लिए वह विपत्ति संपत्ति हो जाती है, ऐसा शंकर जी का वचन है।’

स्रोत: चिंता क्यों ?

error: