27. भारत के आर्थिक जीवन पर मानसून का प्रभाव

भारत के आर्थिक जीवन पर मानसून का प्रभाव

भारत के आर्थिक

               भारत एक मानसूनी जलवायु प्रधान देश है। यहाँ मानसून की उत्पति तिब्बत का पठार, हिमालय पर्वत, उत्तर का मैदानी क्षेत्र, वायुसंचरण और हिन्द महासागर के सम्मिलित प्रभाव के कारण होता है। भारत में मानसून से ग्रीष्म ऋतु में वर्षण का कार्य होती है। यहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून से 80% वर्षा होती है जबकि 20% वर्षा  उ०-पू० मानसून एवं पछुआ विक्षोभ से होती है।

        भारत के आर्थिक जीवन पर मानसून का प्रभाव निम्नलिखित क्षेत्रों पर पड़ता है:-

(1) कृषि पर प्रभाव:-

        भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। भारत में कृषि मानसून पर निर्भर करती है। जिस वर्ष मानसून भारत में समय पर आती है और मानसून सामान्य रहती है तो उस वर्ष भारतीय किसानों के घर अन्न से भर जाते हैं। यदि मानसून समय पर नहीं आती है और अनावृष्टि या अतिवृष्टि होती है तो फसलें बर्बाद हो जाती है जिससे हमारे भारतीय किसानों को काफी क्षति उठानी पड़ती है। इसीलिए कहा भी जाता है कि-“भारतीय किसान मानसून के साथ जुआ खेलते है।”

(2) उद्योगों पर प्रभाव:-

       भारत के कई उद्योग कृषि पर आधारित हैं; जैसे- चीनी उद्योग, वस्त्र उद्योग, कागज उद्योग, जूट उद्योग, चावल मील, इत्यादि। यदि भारतीय मानसून गन्ना, कपास, धान आदि फसलों को बर्बाद करती है तो इन उद्योगों में कच्चे माल की कमी हो जाती हैं। जब मानसून का प्रभाव अच्छा रहता है तो आसानी से इन उद्योगों को पर्याप्त कच्चे माल मिल जाते हैं।

(3) मत्स्य पालन पर प्रभाव:-

          भारतीय मानसून से पर्याप्त वर्षा होती हैं तो यहाँ के छोटे-बड़े तालाबों में पर्याप्त जल संग्रहित कर लिये जाते हैं जिससे इन जलाशयों में मत्स्य पालन का कार्य किया जाता है।

(4) पशुपालन पर प्रभाव:-

     भारतीय मानसून से अतिवृष्टि या अनावृष्टि होने से फसलें नष्ट हो जाती है। चारागाह पर चारे की फसले नष्ट हो जाती है जिसके कारण पशुओं के लिए चारा की कमी हो जाती है। फलस्वरूप पशुपालन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है। यदि मानसून सामान्य प्रका की होती है तो पशुपालन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। फलतः दुध एवं माँस के उत्पादन में वृद्धि होती हैं।

प्रश्न प्रारूप

1. भात के आर्थिक जीवन पर मानसून का प्रभाव का वर्णन करें

28. भारत में शीतकालीन वर्षा का आर्थिक जीवन पर प्रभाव

28. भारत में शीतकालीन वर्षा का आर्थिक जीवन पर प्रभाव

भारत में शीतकालीन वर्षा

          भारत में जाड़े की ऋतु में होने वाली वर्षा को शीतकालीन वर्षा कहते हैं। यह वर्षा दो प्रकार की होती है। एक- पछुआ विक्षोभ के कारण होने वाली वर्षा और दूसरा- उ०-पू० मानसून की वर्षा। पछुआ विक्षोभ के कारण उ०-पू० भारत में वर्षा होती है। जबकि उ०-पू० मानसून से भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्रों में वर्षा होती है। इन दोनों प्रकार की वर्षा से भारत के आर्थिक जीवन की कई क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ता है। जैसे-

(1) कृषि पर प्रभाव⇒

          भारत में पछुआ विक्षोभ के कारण जाड़े की ऋतु में वर्षा होती है। यह वर्षा गेहूँ एवं अन्य रबी फसल के लिए फायदेमंद होती है। पंजाब में यह वर्षा जनवरी या फरवरी महीने में होती है। यहाँ की कृषि के लिए यह वर्षा काफी महत्व रखती है क्योंकि वहाँ की रबी फसल की सफलता इस वर्षा पर निर्भर करती है।

       उ०-पूर्वी मानसून से मुख्यतः भारत के पूर्वी तटीय भागों में वर्षा होती है। यह वर्षा विशेष रूप से तमिलनाडु में होती है। इस वर्षा से मुख्यतः रबी फसलों की सिंचाई होती है, जिसके कारण उसके उत्पादन में वृद्धि होती है। उत्पादन में वृद्धि होने से किसानों की आमदनी बढ़ती है। शीतकालीन वर्षा का कृषि पर कुछ नकारात्मक प्रभाव पड़ते है। जैसे:- यदि एक सप्ताह तक शीतकालीन वर्षा के कारण मौसम गड़बड़ रहती है तो मौसम खराब रहने के कारण आलू, प्याज, मसूर आदि फसलों को पाला लग जाती है। इसके कारण उत्पादन में कमी हो जाती है और किसानों को काफी हानि उठानी पड़ती है।

प्रश्न प्रारूप

1. भात में शीतकालीन वर्षा का आर्थिक जीवन प प्रभाव बतायें।

7. प्राचीनतम कल्प के धारवाड़ क्रम की चट्टानों का आर्थिक महत्त्व

7. प्राचीनतम कल्प के धारवाड़ क्रम की चट्टानों का आर्थिक महत्त्व


प्राचीनतम कल्प के धारवाड़ क्रम की चट्टानों का आर्थिक महत्त्व       

          भारत में प्राचीनतम कल्प से लेकर नवीनतम कल्प की चट्टानें पायी जाती हैं। प्राचीनतम कल्प में एक प्रमुख चट्टान धारवाड़ समूह की है। इसका निर्माण 2500 मिलियन वर्ष पूर्व से 1500 मिलियन वर्ष पूर्व के बीच मानी जाती है। यह मूलत: प्री कैम्ब्रीयन  कल्प की चट्टान है जिसका खोज सर्वप्रथम राबर्ट ब्रशफुट महोदय ने कर्नाटक के धारवाड़ जिला से किया था।

धारवाड़ क्रम के चट्टानों की विशेषताएँ

      धारवाड़ चट्टान की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं। जैसे- 

(1) यह भारत का सबसे प्राचीनतम परतदार चट्टान का उदाहरण है।

(2) लम्बे समय के कारण इसका काफी रूपान्तरण हो चूका है।

(3) धारवाड़ क्रम  के चट्टानों से किसी भी प्रकार का जीवाश्म नहीं मिलता है क्योंकि उस वक्त पृथ्वी पर जीवों की उत्पत्ति हुई ही नहीं थी।

(4) धारवाड़ समूह की चट्टानों में नीस और शिस्ट प्रकार की चट्टानें मिलती हैं।

(5) प्री कैम्ब्रीयन कल्प में भूपटल के फैलाव और सिकुड़न से कई महासागरों और प्राचीन मोड़दार पर्वतों का निर्माण हुआ है। राजस्थान की अरावली की पहाड़ी इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।

(6) भारत में इसका विस्तार 15600 वर्ग किमी० क्षेत्र में हुआ है।

(7) भारत में धारवाड़ प्रकार की चट्टान कर्नाटक के धारवाड़ जिला, विशाखापत्तनम के पास कूदोराइट श्रेणी की चट्टान, रीवा & हजारीबाग के बीच में गोंडाइट क्रम की चट्टान, जम्मू-कश्मीर की सेलखाला क्रम की चट्टान, राजस्थान के अरावली क्षेत्र में, झारखण्ड और उड़ीसा के सीमा पर लौहक्रम की चट्टान, धारवाड़ समूह के चट्टान माने जाते हैं।

प्राचीनतम कल्पआर्थिक महत्व

         धारवाड़ क्रम की चट्टानें भारत में धात्विक खनिजों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस चट्टान से लोहा, सोना, मैगनीज, यूरेनियम, ताम्बा, जिंक, क्रोमियम जैसे- धात्विक खनिज प्राप्त किये जाते हैं। राजस्थान की खेतरी का खान ताम्बा के लिए प्रसिद्ध रही है।

         कर्नाटक, गोआ, झारखण्ड, उड़ीसा इत्यादि से हेमाटाइट और मैग्नेटाइट जैसे लौह अयस्क प्राप्त किये जाते है।मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बाला घाट, उड़ीसा के कालाहांडी और बोलांगिर क्षेत्र से मैंग्नीज प्राप्त किया जाता है।

        धारवाड़ क्रम की चट्टानों से एस्बेस्ट, कोबाल्ट, अभ्रक, प्लेटीनम, सूरमा, सीसा, फ्यूराइट, इल्मेनाइट (नाभिकीय खनिज का स्रोत), गारनेट, संगमरमर, कोरंडम जैसे खनिज भी प्राप्त किये जाते हैं। 

    धारवाड़ क्रम चट्टानें भारत में लाल और लैटेराइट मिट्टी के निर्माण में भी सहायक रहा है जो विभिन्न प्रकार के वनस्पतियों के लिए आधार का कार्य करती है।

निष्कर्ष

       इस ऊप के तथ्यों से स्पष्ट है कि धावाड़ क्रम की चट्टानें अपनी विशिष्टता एवं आर्थिक महत्व के लिए विश्व प्रसिद्ध रही हैं।

6. भारत में गोण्डवानाक्रम के चट्टानों के निर्माण का आधार, वितरण एवं आर्थिक महत्व

6. भारत में गोण्डवानाक्रम के चट्टानों के निर्माण का आधार, वितरण एवं आर्थिक महत्व


भारत में गोण्डवानाक्रम के चट्टानों के निर्माण का आधार, वितरण एवं आर्थिक महत्व

         भारत में विभिन्न भूगर्भिक काल में निर्मित अनेक प्रकार की चट्टानें पायी जाती हैं। इसका संबंध पैलियोजोइक महाकल्प के कार्बोनीफेरस कल्प से लेकर मीसोजोइक कल्प के मध्य रहा है।

भारत में गोण्डवाना क्रम की चट्टानें

        ‘गोंडवाना’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1872 ई० में एच०बी० मेडलीकॉट और 2876 ई० में ओ० फीस्टमेंटल महोदय ने किया था। इस शब्द की उत्पत्ति मध्य प्रदेश के गोंड क्षेत्र से हुआ है क्योंकि सबसे पहले गोण्ड जनजातियों के निवास क्षेत्र से ही गोंडवानाक्रम की चट्टानों की खोज की गई थी। बाद में इस प्रकार की चट्टानें जहाँ कहीं भी प्राप्त हुआ उसे गोडवाना क्रम के चट्टानों से सम्बोधित किया।

         वस्तुत: विन्ध्यन क्रम की चट्टानों का निर्माण हो जाने के बाद प्रायद्वीपीय भारत का भूखण्ड लम्बे समय तक भूगर्भिक हलचल/भूकंप से मुक रहा है। लेकिन, कार्बोनीफेरस के पूर्वार्द्ध में भयंकर भूसंचलन हुआ जिसे हर्सीनियन भू-संचलन के नाम से जानते हैं।

      हर्सीनियन भू-संचलन भूसंचलन का प्रभाव लगभग सम्पूर्ण पृथ्वी पर पड़ा। इस समय जल और स्थल के वितरण में भारी परिवर्तन हुआ। +जैसे: पेन्जिया रूपी विशालकाय भूखण्ड के मध्यवर्ती भाग में धंसान की क्रिया से एक विशाल टेथिस सागर का निर्माण हुआ। इसका विस्तार पश्चिम में भूमध्यसागर से लेकर पूरब में प्रशान्त महासागर तक था। टेथिस सागर के उतरी भाग अंगारालैण्ड कहलाया जबकि दक्षिणी भाग गोण्डवानालैण्ड कहलाया।

भारत में गोण्डवानाक्रम

         कार्बोनीफेरस कल्प में ही पृथ्वी पर कुछ क्षेत्रों में हिमयुग का आगमन हुआ था। पर्वतीय क्षेत्रों / पर्वतों के ऊँचाई वाले भाग में हिम के जमने और हिमस्खलन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों का अपरदन होने लगा। अपरदित सामाग्री गोंडवाना भूखण्ड के विभिन्न नदी घाटियों और गर्तों में जमा कर दिये जाने से उपजाऊ समतल मैदान का विकास हुआ है। उस वक्त मानवीय उद्भव नहीं होने के कारण सभी मैदानी क्षेत्र सघन वनस्पतियों से ढक गये। इन वनस्पतियों में ग्लोसोप्टेरिस और टीलोफाइलम समूह की वनस्पत्ति अधिक थी। भूसंचलन के कारण ये वनस्पति गिरकर यत्र-तत्र जमने लगे।

         पुन: अत्याधिक ताप एवं दाब के कारण ये वनस्पति कोयले में रूपान्तरित हो गये। जगह-2 पर आज भी इन वनस्पतियों के परतों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। चूँकि कार्बोनीफेरस कल्प में इन वनस्पतियों का विकास एवं भूमि के अन्दर दबने की क्रिया नदी घाटी क्षेत्रों में हुआ था। इसीलिए आज भी कोयला की पेटियाँ नदी घाटी क्षेत्रों में मिलती है।

वितरण

      भारत में गोंडवनाक्रम की चट्टानें प्रायद्वीपीय भारत और प्रायद्वीपीय भारत के बाहरी क्षेत्रों में देखा जा सकता है। जैसे-

झारखण्ड- दामोदर नदी घाटी, उत्तरी कोल क्षेत्र, डाल्टेनगंज क्षेत्र।

बिहार- ललमटिया ये लेकर राजमहल की पहाड़ी तक।

उड़ीसा- महानदी घाटी क्षेत्र में।

आन्ध्रप्रदेश- गोदावरी एवं उनके सहायक नदी घाटी क्षेत्र में।

छतीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश- सोन नदी घाटी क्षेत्र।

महाराष्ट्र- वर्दा नदी घाटी क्षेत्र।

पश्चिम बंगाल- दामोदर और बराकर नदी घाटी क्षेत्र में।

         उपरोक्त क्षेत्रों के अलावे कश्मीर, असम, सिक्कीम और दार्जलिंग में भी गोंडवाना प्रकार की चट्टानें पायी जाती है।

भारत में गोण्डवानाक्रम

चित्र: गोंडवाना समूह की चट्टानों का वितरण

आर्थिक महत्व

(1) भारत का 96% एन्थ्रासाइट और बिटुमिनस कोपला गोंडवाना क्रम की चट्टानों से मिलता है। थोड़ा-बहुत लिग्नाइट कोयला इस समूह की चट्टान से प्राप्त होता है।

(2) गोंडवानाक्रम की चट्टानों से बलुआ पत्थर मिलता है जिसका उपयोग भवन निर्माण में किया जाता है।

(3) कोयले की खानों ने चिका मिट्टी और फायर क्ले प्राप्त किये जाते हैं जिसका प्रयोग ईट और बर्तन के निर्माण में किया जाता है।

(4) गोंडवानाक्रम की चट्टानें, सीमेन्ट और रासायनिक उर्वरक के निर्माण में काफी उपयोगी माने जाते हैं।

(5) गोंडवाना क्रम की चट्टानों से मिलने वाला कंक्रीट का प्रयोग, नाभिकीय भट्टी के निर्माण में किया जाता है।

निष्कर्ष

      इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत में मिलने वाला गोडवानाक्रम की चट्टान से कोयला जैसे ऊर्जा संसाधन के लिए विश्व प्रसिद्ध है जिसकी महत्ता अपने आप में सर्वविदित है।

प्रश्न प्रारूप

Q. भात में गोण्डवानाक्रम के चट्टानों के निर्माण का आधा, वितरण एवं आर्थिक महत्व की विवेचना कीजिए।

4. नदियों के किनारें बसे प्रमुख नगर

नदियों के किनारें बसे प्रमुख नगर




भारत में नदियों के किनारे बसे प्रमुख नगर
क्रम  नगर का नाम  नदियाँ  
1. आगरा यमुना
2.  बद्रीना      अलकनंदा
3. प्रयागराज    गंगा, यमुना
4. दिल्ली, कोंटासाहेब, मथुरा यमुना 
5. फिरोजपुर सतलज
6. हरिद्वार, ऋषिकेष गंगा
7. कानपुर, बक्सर गंगा
8. अयोध्या, फैजाबाद सरयू
9. कोलकाता, हल्दिया, डायमण्ड हार्बर हुगली
10. लखनऊ गोमती
11.   डिब्रूगढ़ ब्रह्मपुत्र
12. गुवाहाटी ब्रह्मपुत्र 
13. जबलपुर नर्मदा
14. कोटा चम्बल
15. कुर्नूल तुंगभद्रा
16. सोकोवा घाट ब्रह्मपुत्र
17. कन्नौज गंगा
18. श्रीनगर, लेह झेलम
19. सूरत ताप्ती
20. हैदराबाद मूसी
21. मथुरा यमुना
22. अहमदाबाद, गांधीनगर साबरमती
23. राँची, जमशेदपुर स्वर्णरेखा नदी
24. पंढरपुर  भीमा नदी
25. बरेली रामगंगा
26. कटक, भुवनेश्वर महानदी
27. नासिक गोदावरी
28. सम्बलपुर महानदी
29. श्रीरंगपट्टनम कावेरी
30. जौनपुर गोमती
31. ओरछा बेतबा
32. वाराणसी गंगा
33. उज्जैन, कोटा क्षिप्रा
34. लुधियाना सतलज
35. विजयवाड़ा कृष्णा
36. तिरुचिरापल्ली, मैसूर कावेरी
37. पटना  गंगा
38. भागलपुर, फरक्का गंगा
39. मुंगेर  गंगा
40. सोनपुर, हाजीपुर गंडक
41. गोरखपुर  रापती
42. गंगटोक तिस्ता
43. बोधगया निरंजना
44. गया फल्गु
45. लखीसराय किऊल
46. मुम्बई माहिम
47. जम्मू तवी
48. दुर्ग, रायपुर शिवनाथ
 


नदियों के किनारें बसे प्रमुख नगर से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर



1. निम्नलिखित में से कौन-सा शहर गंगा नदी के तट पर स्थित नहीं है?

(a) कानपुर

(b) पटना

(c) वाराणसी

(d) दिल्ली

[read more] (d) दिल्ली [/read]

2. निम्नलिखित में से कौन-सा नगर गोमती नदी के किनारे स्थित नहीं है?

(a) चित्रकूट

(b) लखनऊ

(c) जौनपुर

(d) सुल्तानपुर

[read more] (a) चित्रकूट [/read]

3. गंगा नदी पर कौन-सी प्रान्तीय राजधानी स्थित है?

(a) कोलकाता

(b) लखनऊ

(c) भुवनेश्वर

(d) पटना

[read more] (d) पटना [/read]

4. गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्थित नगर है-

(a) हरिद्वार

(b) वाराणसी

(c) प्रयागराज

(d) कर्ण प्रयाग

[read more] (c) प्रयागराज [/read]

5. गोवा राज्य की राजधानी पणजी किस नदी के किनारे स्थित है?

(a) कोयना

(b) माण्डवी

(c) मूठा

(d) भीमा

[read more] (b) माण्डवी [/read]

6. आगरा किस नदी के किनारे स्थित है?

(a) गंगा

(b) अलकनंदा

(c) यमुना

(d) भागीरथी

[read more] (c) यमुना [/read]

7. आन्ध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) कृष्णा

(b) मूसी

(c) मूठा

(d) माण्डवी

[read more] (b) मूसी [/read]

8. जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) चिनाब

(b) रावी

(c) व्यास

(d) झेलम

[read more] (d) झेलम [/read]

9. सूरत किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) नर्मदा

(b) तापी

(c) सोन

(d) कावेरी

[read more] (b) तापी [/read]

10. उज्जैन किस नदी के किनारे स्थित है?

(a) नर्मदा

(b) तवा

(c) तापी

(d) क्षिप्रा

[read more] (d) क्षिप्रा [/read]

11. जमशेदपुर किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) दामोदर

(b) स्वर्णरखा

(c) मयूराक्षी

(d) अजय

[read more] (b) स्वर्णरखा [/read]

12. नासिक किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) महानदी

(b) गोदावरी

(c) नर्मदा

(d) कावेरी

[read more] (b) गोदावरी [/read]

13. जौनपुर किस नदी के तट पर स्थित है?

(a) गंगा

(b) सरयू

(c) गोमती

(d) रिहन्द

[read more] (c) गोमती [/read]

14. निम्नलिखित में से कौन-सा नगर किसी नदी के तट पर नहीं बसा है?

(a) सू

(b) कटक

(c) भोपाल

(d) मैसूर

[read more] (c) भोपाल [/read]

15. गंगा नदी के किनारे स्थित सबसे बड़ा शहर है-

(a) वाराणसी

(b) पटना

(c) कानपुर

(d) प्रयागराज

[read more] (c) कानपुर [/read]

16. निम्नलिखित में से कौन-सा शहर गंगा के तट पर नहीं बसा है?

(a) कानपुर

(b) पटना

(c) बरौनी

(d) दिल्ली

[read more] (d) दिल्ली [/read]

17. स्टील सिटी राउरकेला किस नदी के किनारे स्थित है?

(a) महानदी

(b) ब्राह्मणी

(c) वैतरणी

(d) स्वर्णरेखा

[read more] (b) ब्राह्मणी,

व्याख्या: 

    राउरकेला (Steel City) ओडिशा राज्य में स्थित है और ब्राह्मणी नदी के तट पर बसा हुआ है।

नदियों के किनारें बसे [/read]

18. निम्नलिखित में से सरयू नदी के किनारे कौन-सा शहर स्थित है?

(a) पटना

(b) प्रयागराज

(c) अयोध्या

(d) वाराणसी

[read more] (c) अयोध्या [/read]

19. कावेरी नदी के तट पर कौन-सा शहर स्थित है?

(a) तिरूचिरापल्ली

(c) बंगलौर

(b) मैसूर

(d) हैदराबाद

[read more] (a) तिरूचिरापल्ली [/read]

20. साबमती नदी किस शहर के किनारे बहती है?

(a) मुम्बई

(b) अहमदाबाद

(c) हैदराबाद

(d) विजयवाड़ा

[read more] (b) अहमदाबाद [/read]

3. भारत के प्रमुख जलप्रपात

3. भारत के प्रमुख जलप्रपात



भारत के प्रमुख जलप्रपात

        भारत में जलप्रपातों (Waterfalls) की संख्या नगण्य है। सभी जलप्रपात छोटे हैं। अधिकांश दक्षिण भारत में ही पाये जाते हैं। देश के प्रमुख जलप्रपात निम्नवत हैं:-

भारत के प्रमुख जलप्रपात
क्रम जलप्रपात  स्थिति ऊँचाई
1. धुँआधार नर्मदा नदी 30 मीटर
2. येन्ना  येन्ना नदी 183 मीटर
3. चूलिया चम्बल नदी 18 मीटर
4. पुनासा चम्बल नदी 12 मीटर
5. शिवसमुद्रम कावेरी नदी 90 मीटर
6. गोकक घाटप्रभा नदी 55 मीटर
7.  बिहार टोंस नदी 100 मीटर
8. हुंडरू स्वर्णरेखा नदी  98 मीटर
9. जोग या गरसोप्पा शरावती नदी  255 मीटर
10. पायकारा नीलगिरि क्षेत्र
⇒ जोग या गरसोप्पा / महात्मा गाँधी जलप्रपात शरावती नदी पर 255m ऊँचा है, जिसके निर्माण में राजा, रानी, राकेट तथा रोरर नामक चार छोटे-छोटे जलप्रपातों का योगदान है।

⇒ जोग या गरसोप्पा जलप्रपात का नया नाम महात्मा गाँधी जलप्रपात रखा गया है।

⇒ भारत की प्रथम जल-विद्युत परियोजना शिवसमुद्रम, जलप्रपात (कर्नाटक) पर 1902 ई० में स्थापित की गई है।

⇒ भारत में दूसरा सबसे बड़ा जलप्रपात कावेरी नदी बनाती है जिसे शिवसमुद्रम जलप्रपात के नाम से जानते हैं।

⇒ शिवसमुद्रम जलप्रपात मैसूर, बंगलोर तथा कोलार स्वर्ण क्षेत्र को विद्युत प्रदान करता है।

⇒ कावेरी नदी में दो द्वीप हैं- श्रीरंगपट्टनम & शिवसमुद्रम।

शिवसमुद्रम द्वीप के दोनों ओ जलप्रपात बनते हैं।

भारत के प्रमुख जलप्रपात

शिवसमुद्रम



भारत के प्रमुख जलप्रपात से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर



1. भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात है-

(a) कपिल धारा जलप्रपात

(b) धुआँधार जलप्रपात

(c) जोग जलप्रपात

(d) सहस्त्र धारा जलप्रपात

[read more] (c) जोग जलप्रपात [/read]

2. विश्वविख्यात जोग या गरसोप्पा जलप्रपात किस राज्य में स्थित है?

(a) कर्नाटक

(b) महाराष्ट्र

(c) आ० प्र०

(d) केरल

[read more] (a) कर्नाटक [/read]

3. जोग या गरसोप्पा जलप्रपात का नया नाम क्या है?

(a) सरदार पटेल जलप्रपात

(b) महात्मा गाँधी जलप्रपात

(c) जवाहरलाल नेहरू जलप्रपात

(d) इन्दिरा गाँधी जलप्रपात

[read more] (b) महात्मा गाँधी जलप्रपात [/read]

4. जोग जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

(a) शरावती

(b) कावेरी

(c) नर्मदा

(d) चम्बल

[read more] (a) शरावती [/read]

5. धुआँधार जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

(a) नर्मदा

(b) तापी

(c) इन्द्रावती

(d) चम्बल

[read more] (a) नर्मदा [/read]

6. कपिल धारा जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

(a) तापी

(b) शरावती

(c) नर्मदा

(d) इन्द्रावती

[read more] (c) नर्मदा [/read]

7. शिवसमुद्रम जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

(a) नर्मदा नदी

(b) कृष्णा नदी

(c) गोदावरी नदी

(d) कावेरी नदी

[read more] (d) कावेरी नदी [/read]

8. गोकक जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

(a) कावेरी

(b) ताम्रपर्णी

(c) शरवती

(d) घाटप्रभा 

[read more] (d) घाटप्रभा [/read]

9. हुण्डरू जलप्रपात निर्मित है-

(a) स्वर्ण रेखा नदी पर

(b) कावेरी नदी पर

(c) इन्द्रावती नदी पर

(d) नर्मदा नदी पर

[read more] (a) स्वर्ण रेखा नदी पर [/read]

10. बिहार जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?

( a) चम्बल

(b) टोंस

(c) नर्मदा

(d) कावेरी

[read more] (b) टोंस [/read]

 11. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए-

सूची-I (जलप्रपात)  सूची-II (नदी)

A. जोग जलप्रपात 1. शरावती

B. शिवसमुद्रम जलप्रपात 2. कावेरी

C. धुआँधार जलप्रपात 3. नर्मदा

D. गोकक जलप्रपात 4. गोकक

कूट: 

A B C D

(a) 2 1 4 3

(b) 2 3 1 4

(c) 4 2 3 1

(d) 1 2 3 4

[read more] (d) 1 2 3 4 [/read]

12. एशिया का सबसे बड़ा जलप्रपात (Falls) ‘हुण्डरू’ किस जगह के पास है?

(a) राँची

(b) हजारीबाग

(c) जमशेदपुर

(d) बोधगया

[read more] (a) राँची [/read]

13. महात्मा गाँधी जल विद्युत् उत्पादक प्लाण्ट कहाँ स्थित है?

(a) जोग प्रपात

(b) शिवसमुद्रम प्रपात

(c) गोकक प्रपात

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (a) जोग प्रपात [/read]

14. गोकक प्रपात किस जिले में स्थित है?

(a) बेलगाँव

(b) धारवाड़

(c) रायचूर

(d) बीदर

[read more] (a) बेलगाँव [/read]

15. राजा, रानी, रोरर और रॉकेट…… से सम्बन्धित है।

(a) कावेरी

(b) कृष्णा

(c) जोग प्रपात

(d) श्रृंगेरी

[read more] (c) जोग प्रपात [/read]

16. ककोलत जलप्रपात बिहार के किस जिले में स्थित है?

(a) नवादा

(b) रोहतास

(c) कटिहार

(d) भागलपुर

[read more] (a) नवादा [/read]

17. सहस्रधारा पर्यटन स्थल स्थित है-

(a) देहरादून

(b) मसूरी

(c) पंतनगर

(d) श्रीनगर

[read more] (a) देहरादून [/read]

18. नीलगिरि के पर्वतीय क्षेत्र में कौन-सा जलप्रपात स्थित है?

(a) जोग

(b) येन्ना

(c) धुआँधार

(d) पायकारा

[read more] (d) पायकारा [/read]

19. निम्नलिखित में कौन सुमेलित नहीं है?

(a) शिवसमुद्रम प्रपात- कावेरी

 (b) धुआँधार प्रपात- नर्मदा

(c) सहस्र धारा प्रपात- नर्मदा

(d) गरसोप्या प्रपात- कावेरी

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20. निम्नलिखित में कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?

(a) जोग- कर्नाटक

(b) पापनाशम- हि० प्र०

(c) धुआँधार- म० प्र०

(d) हुण्डरू- झारखण्ड

[read more] (b) पापनाशम- हि० प्र० [/read]

1. सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान (The Indus-Ganga-Brahmaputra Plain)

1. सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान

(The Indus-Ganga-Brahmaputra Plain)


सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान⇒

             हिमालय पर्वत तथा दक्षिणी प्रायद्वीपीय पठार के बीच सिन्धु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदियों की निक्षेप क्रिया द्वारा निर्मित एक विशाल मैदान स्थित है, जिसे सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान कहा जाता हैं। भारत के उत्तरी भाग में स्थित होने के कारण इसे उत्तरी भारत का मैदान भी कहते हैं। गंगा और सिन्धु नदियों के मुहाने के बीच पूर्व-पश्चिम दिशा में इसकी लम्बाई लगभग 3,200 किमी तथा चौड़ाई 150 से 300 किमी है। असम में यह मैदान संकरा है और यहां इसकी चौड़ाई 90 से 100 किमी है।

          यह मैदान पूर्व से पश्चिम की ओर चौड़ा होता जाता है। राजमहल की पहाड़ियों के पास इसकी चौड़ाई 160 किमी है जो बढ़कर प्रयागराज के निकट 280 किमी हो जाती है। इस मैदानी भाग में नदियों द्वारा तलछट के निरन्तर निक्षेपण से जलोढ़ की बहुत ही मोटी परतें जम गई हैं। अधिकांश भाग पर जलोढ़ की मोटाई 2,000 मीटर तक पायी गई है। उच्चावच की दृष्टि से इस मैदानी भाग का विवरण निम्नलिखित है :

(i) भाबर प्रदेश (Bhabar Region)-

      भाबर प्रदेश शिवालिक के गिरिपाद प्रदेश में सिन्धु नदी से तिस्ता नदी तक पाया जाता है। यह प्रदेश 8 से 16 किमी चौड़ाई वाली संकरी पट्टी के रूप में स्थित है। गिरिपाद पर स्थित होने के कारण इस क्षेत्र में नदियां बड़ी मात्रा में पत्थर, कंकर, बजरी आदि लाकर जमा कर देती हैं जिससे पारगम्य चट्टानों का निर्माण होता है। अतः इस क्षेत्र में पहुंचकर अनेक छोटी-छोटी नदियां भूमिगत होकर अदृश्य हो जाती हैं। यह प्रदेश कृषि के लिए अधिक उपयोगी नहीं है।

(ii) तराई प्रदेश (Terai Region)-

        यह भाबर के दक्षिण में वह मैदानी भाग होता है, जहां भाबर की लुप्त नदियां फिर से भूमि पर प्रवाहित होती हुई दिखाई देने लगती हैं। इसे ही तराई प्रदेश कहते हैं। नदियों द्वारा निक्षेपित जलोढ़ के कण भाबर प्रदेश की तुलना में यहां अपेक्षाकृत महीन होते हैं फलस्वरूप तराई प्रदेश में दलदल की अधिकता होती है।

         इसकी चौड़ाई 20 से 30 किमी होती है। दलदल तथा नमी की अधिकता के कारण तराई प्रदेश में घने वन तथा विविध प्रकार के वन्य जीव पाये जाते हैं। उत्तरी भारत के अधिकांश राष्ट्रीय उद्यान तथा वन्य जीव अभयारण्य तराई प्रदेश में ही हैं।

(iii) बांगर प्रदेश (Bangar Region)-

       बांगर प्रदेश मैदान का वह ऊंचा भाग होता है जहां नदियों की बाढ़ का जल नहीं पहुंचता है। यह पुरानी जलोढ़ मिट्टी द्वारा बना होता है। इसमें कंकड़ के रूप में चूनायुक्त संग्रहों की अधिकता होती है। यह प्रदेश कृषि के लिए अधिक उपयोगी नहीं है। पंजाब के मैदान में बांगर को ‘धाया’ कहते हैं।

(iv) खादर प्रदेश (Khadar Region)-

       खादर प्रदेश वह नीचा भाग है जहां नदियों की बाढ़ का जल प्रति वर्ष पहुंचता है। बाढ़ के जल के साथ नवीन मिट्टी भी इस प्रदेश में बिछती रहती है, अतः खादर प्रदेश का निर्माण नवीन जलोढ़ द्वारा होता है। खादर प्रदेश अत्यधिक उपजाऊ होते हैं और यहां गहन खेती की जाती है। पंजाब के मैदान में खादर प्रदेश को ‘बेट’ कहते हैं।

(v) रेह (Reh)-

        बांगर मिट्टी के उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई कार्यों की अधिकता है, वहां पर कहीं-कहीं भूमि पर एक नमकीन सफेद परत बिछी हुई पायी जाती है। सफेद परत वाली इस मिट्टी को ‘रेह या कल्लर’ के नाम से पुकारते हैं। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के शुष्क भागों में इसका विस्तार सबसे अधिक है।

(vi) भूड (Bhur)-

       बांगर मिट्टी के उन क्षेत्रों में जहां आवरण क्षय के फलस्वरूप ऊपर की मुलायम मिट्टी नष्ट हो गई है वहां अब कंकरीली ऊंची भूमि मिलती है। ऐसी भूमि को भूड़ कहते हैं। गंगा और रामगंगा नदियों के प्रवाह क्षेत्रों में भूड़ का जमाव विशेष रूप से पाया जाता है।

(vii) शंकु तथा अन्तःशंकु (Cones and Inter cones)-

        इस विशाल मैदान में नदियों के निक्षेपण के परिणामस्वरूप जलोढ़ पंख अथवा शंकु तथा अन्तः शंकुओं का निर्माण हुआ है। हिमालय की घाघरा नदी को छोड़कर बाकी सभी नदियों ने जलोढ़ शंकुओं का निर्माण किया है। इन शंकुओं का आधार दक्षिण में मैदान की तरफ तथा शीर्ष पहाड़ियों से नदी के निकास बिन्दु की तरफ होता है। इनका तल उत्तल (Convex) होता है। अन्तः शंकुओं का आकार इसके ठीक विपरीत होता है और इसके किनारे अवतल (Concave) होते हैं।

         निक्षेप के विस्तार के साथ-साथ शंकु एवं अन्तः शंकुओं के कुछ स्थानों पर आपस में मिलने से शंकु-पाद मैदानों (Cone-foot Plains) का निर्माण हुआ है। हिमालय की अधिकांश नदियों ने सामान्य शंकु बनाये हैं जबकि व्यास रावी एवं महानन्दा तिस्ता नदियों ने मिश्रित शंकुओं (Composite cones) का निर्माण किया है। उत्तरी बिहार में गंडक और कोसी, झारखण्ड में महानन्दा और तिस्ता नदियों ने बड़े पैमाने पर शंकुओं का निर्माण किया है। ये शंकु एक-दूसरे से अन्तः शंकुओं द्वारा विभाजित हैं।

(viii) डेल्टा (Delta)-

        गंगा तथा सिन्धु नदियों के डेल्टा इस मैदानी भाग के दो महत्वपूर्ण संरचनात्मक अंग हैं। गंगा का डेल्टा राजमहल की पहाड़ियों से सुन्दरवन के किनारे तक 430 किमी की लम्बाई में फैला हुआ है। इसकी चौड़ाई 480 किमी है। गंगा के डेल्टा में तलछट के निक्षेप की मात्रा अधिक तथा अत्यधिक गहराई तक विद्यमान है। इस डेल्टा में निक्षेपित तलछट के कण बहुत ही महीन हैं। सिन्धु नदी का डेल्टा यद्यपि 960 किमी लम्बा है किन्तु इसकी चौड़ाई 160 किमी ही है। सिन्धु नदी के डेल्टा में तलछट के निक्षेप की मात्रा औ गहराई भी कम है। इस डेल्टा में निक्षेपित तलछट के कण भी अपेक्षाकृत मोटे हैं।

प्रश्न प्रारूप

सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों का वर्णन कीजिए।


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22. मानसून उत्पत्ति का जेट स्ट्रीम सिद्धांत

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26. मानसून के विकास में हिमालय तथा तिब्बत के पठार का योगदान

27. भारत के आर्थिक जीवन पर मानसून का प्रभाव

28. भारत में शीतकालीन वर्षा का आर्थिक जीवन पर प्रभाव

29. पश्चिमी विक्षोभ क्या है? भारतीय कृषि पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?

30. हिमालय के आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालें।

31. भारत में उष्णकटिबंधीय चक्रवात

32. भारत में बाढ़ के कारण, प्रभावित क्षेत्र एवं समाधान

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34. भारत की प्राकृतिक वनस्पति

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