Chapter 4 Distribution of Oceans and Continents (महासागरों और महाद्वीपों का वितरण)

Chapter 4 Distribution of Oceans and Continents

(महासागरों और महाद्वीपों का वितरण)

(भाग – 1 : भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत)

बिहार बोर्ड तथा NCERT कक्षा 11वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर



Chapter 4 Distribution of Oceans

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

(i) निम्न में से किसने सर्वप्रथम यूरोप, अफ्रीका व अमेरिका के साथ स्थित होने की संभावना व्यक्त की?

(क) अल्फ्रेड वेगनर

(ख) अब्राहम आरटेलियस

(ग) एनटोनियो पेलग्रिनी

(घ) एमंड हैस

उत्तर- (ख) अब्राहम आरटेलियस

व्याख्या:

    अब्राहम आरटेलियस (Abraham Ortelius) ने सन् 1596 में सर्वप्रथम यह विचार प्रस्तुत किया कि यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका महाद्वीप पहले एक साथ जुड़े हुए थे, परंतु बाद में वे अलग हो गए।

    यह विचार आगे चलकर अल्फ्रेड वेगनर (1912) के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory) का आधार बना।

(ii) पोलर फ्लिंग बल (Polar fleeing force) निम्नलिखित में से किससे सम्बन्धित है?

(क) पृथ्वी का परिक्रमण

(ख) पृथ्वा का घूर्णन

(ग) गुरुत्वाकर्षण

(घ) ज्वारीय बल

उत्तर (ख) पृथ्वा का घूर्णन

व्याख्या:

    पोलर फ्लिंग बल (Polar Fleeing Force) या अपकेन्द्रीय बल (Centrifugal Force) पृथ्वी के घूर्णन (Rotation) से उत्पन्न होता है।

    जब पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, तो इसके कारण भूमध्य रेखा (Equator) पर वस्तुओं को बाहर की ओर धकेलने वाली एक काल्पनिक बल उत्पन्न होती है। इस बल का प्रभाव ध्रुवों पर न्यूनतम और भूमध्य रेखा पर अधिकतम होता है। इसी कारण पृथ्वी का आकार थोड़ा चपटा (Oblate Spheroid) है।

(iii) इनमें से कौन सी लघु (Minor) प्लेट नहीं है?

(क) नाजका

(ख) फिलिप्पिन

(ग) अरब

(घ) अंटार्कटिक

उत्तर- (घ) अंटार्कटिक

व्याख्या:

     पृथ्वी की प्लेटों को दो श्रेणियों में बाँटा गया है-

1. मुख्य (Major) प्लेटें

2. लघु (Minor) प्लेटें

मुख्य प्लेटें हैं-

→ प्रशांत (Pacific)

→ उत्तर अमेरिकी (North American)

→ दक्षिण अमेरिकी (South American)

→ अफ्रीकी (African)

→ यूरेशियन (Eurasian)

→ अंटार्कटिक (Antarctic)

→ इंडो-ऑस्ट्रेलियाई (Indo-Australian)

लघु प्लेटें हैं —

→ नाजका (Nazca)

→ अरब (Arabian)

→ फिलिप्पिन (Philippine)

→ कोकोस (Cocos) आदि

     इसलिए अंटार्कटिक प्लेट लघु नहीं बल्कि मुख्य प्लेट है।

(iv) सागरीय तल विस्तार सिद्धांत की व्याख्या करते हुए हेस ने निम्न से किस अवधारणा को नहीं विचारा?

(क) मध्य-महासागरीय कटकों के साथ ज्वालामुखी क्रियाएँ

(ख) महासागरीय नितल की चट्टानों में सामान्य व उत्क्रमण चुम्बकत्व क्षेत्र की पट्टियों का होना।

(ग) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण

(घ) महासागरीय तल की चट्टानों की आयु।

उत्तर- (ग) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण

व्याख्या:

    हेस (Harry H. Hess) ने सागरीय तल विस्तार सिद्धांत (Sea Floor Spreading Theory) में यह बताया कि महासागरीय मध्य कटकों (Mid-Oceanic Ridges) से नए बेसाल्टिक पदार्थ निकलते हैं, जिससे समुद्री तल दोनों ओर फैलता है।

   उन्होंने अपने सिद्धांत में निम्न अवधारणाओं पर विचार किया था-

(क) मध्य-महासागरीय कटकों के साथ ज्वालामुखी क्रियाएँ

(ख) महासागरीय नितल की चट्टानों में सामान्य व उत्क्रमण चुम्बकत्व क्षेत्र की पट्टियाँ

(घ) महासागरीय तल की चट्टानों की आयु में भिन्नता

    लेकिन विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण का विचार अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory) से संबंधित है, न कि हेस के सिद्धांत से।

(v) हिमालय पर्वतों के साथ भारतीय प्लेट की सीमा किस तरह की प्लेट सीमा है?

(क) महासागरीय-महाद्वीपीय अभिसरण

(ख) अपसारी सीमा

(ग) रूपांतर सीमा

(घ) महाद्वीपीय अभिसरण

उत्तर (घ) महाद्वीपीय अभिसरण

व्याख्या:

   हिमालय पर्वतों का निर्माण भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव (अभिसरण) से हुआ है। दोनों ही महाद्वीपीय प्लेटें हैं।

    जब भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियन प्लेट से टकराई, तो इस टक्कर से पृथ्वी की परतें मुड़कर ऊपर उठीं और हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ। इसलिए यह एक महाद्वीपीय-अभिसरण (Continental Convergent) सीमा का उदाहरण है।

(vi) महाद्वीपीय विस्थापन के सिद्धांत का प्रतिपादन किसने किया?

(क) वेगनर

(ख) बेकन

(ग) टेलर

(घ) हेनरी हेस

उत्तर- (क) वेगनर

व्याख्या:

      महाद्वीपीय विस्थापन का सिद्धांत (Continental Drift Theory) अल्फ्रेड वेगनर (Alfred Wegener) ने सन् 1912 में प्रस्तुत किया था।

    उन्होंने यह विचार दिया कि सभी महाद्वीप पहले एक साथ जुड़े हुए थे और एक महाद्वीप पैंजिया (Pangaea) के रूप में अस्तित्व में था, जो बाद में टूटकर वर्तमान महाद्वीपों में विभाजित हो गया।

(vii) निम्नलिखित में से कौन-सा सबसे छोटा महासागर है?

(क) हिन्द महासागर

(ख) आर्कटिक महासागर

(ग) अटलांटिक महासागर

(घ) प्रशांत महासागर

उत्तर- (ख) आर्कटिक महासागर

व्याख्या:

    आर्कटिक महासागर (Arctic Ocean) पृथ्वी का सबसे छोटा और सबसे उथला महासागर है। यह उत्तरी ध्रुव के चारों ओर स्थित है और अधिकांश भाग वर्षभर बर्फ से ढका रहता है।

(viii) निम्नलिखित में से कौन-सा पटल विरूपण से संबंधित नहीं है?

(क) पर्वत बल

(ख) प्लेट विवर्तनिक

(ग) महादेश जनक बल।

(घ) संतुलन

उत्तर- (घ) संतुलन।

व्याख्या:

     पटल विरूपण (Crustal deformation) से तात्पर्य पृथ्वी की भूपर्पटी में होने वाले मोड़, भ्रंश, उत्थान आदि परिवर्तनों से है, जो मुख्यतः अंतर्जात बलों जैसे- पर्वत निर्माण बल (ओरोजेनी), प्लेट विवर्तनिकी आदि के कारण होते हैं।

    जबकि “संतुलन” (Isostasy) पृथ्वी के पर्पटीय द्रव्यमान के संतुलित स्थिति से संबंधित है, न कि विरूपण से।

(ix) समुद्रतल पर सामान्य वायुमंडलीय दाब कितना होता है?

(क) 1031.25 मिलीबार

(ख) 1013.25 मिलीबार

(ग) 1013.52 मिलीबार

(घ) 1031.52 मिलीबार

उत्तर- (ख) 1013.25 मिलीबार

व्याख्या:

   समुद्रतल पर सामान्य वायुमंडलीय दाब को मानक वायुमंडलीय दाब (Standard Atmospheric Pressure) कहा जाता है, जिसका मान 1013.25 मिलीबार (या 1 वायुमंडल, 760 mm Hg) माना जाता है।

(x) लवणता को प्रति, समुद्र तल में घुले हुए नमक (ग्राम) को मात्रा से व्यक्त किया जाता है

(क) 10 ग्राम

(ख) 100 ग्राम

(ग) 1000 ग्राम

(घ) 10,000 ग्राम

उत्तर- (ग) 1000 ग्राम

व्याख्या:

      समुद्र जल की लवणता (Salinity) को इस प्रकार व्यक्त किया जाता है-

       “1000 ग्राम (अर्थात् 1 किलोग्राम) समुद्री जल में घुले हुए नमक की मात्रा (ग्राम में)”।

    उदाहरण: औसत लवणता ≈ 35‰ (प्रति हजार) होती है, अर्थात् 1000 ग्राम समुद्री जल में लगभग 35 ग्राम नमक घुला होता है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

(i) महाद्वीपों के प्रवाह के लिए वेगनर ने निम्नलिखित में से किन बलों का उल्लेख किया?

उत्तर- वेगनर ने महाद्वीपों के प्रवाह के लिए दो बलों का उल्लेख किया- ज्वारीय बल (Tidal Force) और पोलर फ्लिंग बल (Polar Fleeing Force), जो पृथ्वी के घूर्णन व चंद्रमा के आकर्षण से उत्पन्न होते हैं।

(ii) मैंटल में संवहन धाराओं के आरम्भ होने और बने रहने के क्या कारण हैं?

उत्तर- मैंटल में संवहन धाराओं (Convection Currents) के आरम्भ होने और बने रहने के मुख्य कारण हैं-

1. पृथ्वी के अन्दर ऊष्मा का असमान वितरण:-

     पृथ्वी के भीतरी भाग (कोर) में अत्यधिक ताप होता है, जबकि ऊपर के भाग अपेक्षाकृत ठंडे होते हैं।

2. गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव:-

     गर्म, हल्का पदार्थ ऊपर उठता है और ठंडा, भारी पदार्थ नीचे की ओर जाता है।

3. रेडियोधर्मी तत्त्वों का अपक्षय:-

    यूरेनियम, थोरियम आदि तत्त्वों के अपघटन से निरंतर ऊष्मा उत्पन्न होती है, जो संवहन को बनाए रखती है।

    परिणामस्वरूप, यह ऊष्मा प्रवाह मैंटल में निरंतर ऊपर-नीचे की गति पैदा करता है, जिसे संवहन धाराएँ कहते हैं।

(iii) प्लेट की रूपांतर सीमा, अभिसरण सीमा और अपसारी सीमान्त में मुख्य अन्तर क्या है?

उत्तर- रूपांतर सीमा में प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर सरकती हैं, अभिसरण सीमा में प्लेटें टकराती हैं, जबकि अपसारी सीमा में प्लेटें एक-दूसरे से दूर हटती हैं।

(iv) दक्कन ट्रैप के निर्माण के दौरान भारतीय स्थलखण्ड की स्थिति क्या थी?

उत्तर- दक्कन ट्रैप के निर्माण के समय भारतीय स्थलखण्ड गोंडवाना भूभाग का हिस्सा था और भूमध्यरेखीय क्षेत्र के दक्षिण में स्थित था। लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पूर्व, जब भारत अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया से अलग होकर उत्तर की ओर बढ़ रहा था, तब इस क्षेत्र में तीव्र ज्वालामुखीय गतिविधियाँ हुईं।

   इन्हीं विस्फोटों से विशाल मात्रा में बेसाल्ट लावा निकला, जिसने परत-दर-परत फैलकर दक्कन ट्रैप का निर्माण किया। उस समय भारतीय प्लेट तेजी से यूरेशियाई प्लेट की ओर बढ़ रही थी, जिससे इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

(i) महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के पक्ष में दिये गये प्रमाणों का वर्णन करें?

उत्तर-  अल्फ्रेड वेगनर ने सन् 1912 में महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory) प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, आज के सभी महाद्वीप एक समय में “पैंजिया” नामक एक महाद्वीप के भाग थे, जो बाद में टूटकर वर्तमान स्थिति में आ गए।

         इस सिद्धांत के समर्थन में वेगनर ने कई वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत किए-

1. भौगोलिक प्रमाण:-

      अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के तटरेखाएँ पज़ल के टुकड़ों की तरह एक-दूसरे से मिलती हैं, जिससे पता चलता है कि ये कभी जुड़े हुए थे।

2. जीवाश्म प्रमाण:-

     विभिन्न महाद्वीपों जैसे दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, भारत और ऑस्ट्रेलिया में एक ही प्रकार के जीवाश्म (जैसे ग्लॉसोप्टेरिस पौधा और मेसोसॉरस जन्तु) पाए गए, जो यह दर्शाते हैं कि ये स्थलखंड पहले जुड़े हुए थे।

3. भूगर्भिक संरचना:-

     एक जैसे पर्वत शृंखलाएँ और चट्टानों की बनावट अलग-अलग महाद्वीपों पर पाई जाती हैं, जैसे उत्तरी अमेरिका और यूरोप की अपलाचियन तथा कैलिडोनियन पर्वतमालाएँ।

4. जलवायु प्रमाण:-

     आज ठंडे क्षेत्रों में कोयले की परतें और गर्म क्षेत्रों में हिमनदीय अवशेष मिलते हैं, जो पूर्व की जलवायु में परिवर्तन का संकेत देते हैं।

     इन सभी प्रमाणों से स्पष्ट होता है कि महाद्वीप वास्तव में अतीत में एक साथ जुड़े थे और धीरे-धीरे अलग हुए।

(ii) महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत व प्लेट विवर्तनिक सिद्धान्त में मूलभूत अंतर बताइए।

उत्तर- महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory) का प्रतिपादन 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने किया था।

    इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी के सभी महाद्वीप एक समय “पैंजिया” नामक एक ही भूखंड का भाग थे, जो लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले टूटकर विभिन्न दिशाओं में खिसक गए और वर्तमान स्थिति में आ गए। वेगनर ने महाद्वीपों के प्रवाह के लिए “ज्वारीय बल” और “पोलर फ्लिंग बल” को कारण बताया।

    यद्यपि उनके सिद्धांत ने महाद्वीपों के समान तट रेखाओं, जीवाश्मों और शैल संरचनाओं में समानता का उल्लेख किया, परंतु इसमें महाद्वीपों के विस्थापन के वास्तविक बलों की वैज्ञानिक व्याख्या का अभाव था, इसलिए इसे पूर्णतः स्वीकार नहीं किया गया।

     दूसरी ओर, प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत (Plate Tectonic Theory) 1960 के दशक में विकसित हुआ, जो सागरीय तल विस्तार (Seafloor Spreading) और महाद्वीपीय विस्थापन दोनों को समाहित करता है। इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी का बाहरी कठोर भाग कई बड़ी और छोटी लिथोस्फेरिक प्लेटों में विभाजित है, जो पृथ्वी की दुर्बल मंडल (Asthenosphere) पर तैरती हैं। इन प्लेटों की गति के कारण ही पर्वत निर्माण, भूकंप, ज्वालामुखी और महासागरीय गर्त जैसी भौगोलिक घटनाएँ होती हैं।

      इस प्रकार, मुख्य अंतर यह है कि वेगनर का सिद्धांत केवल महाद्वीपों की गति तक सीमित था, जबकि प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत सम्पूर्ण पृथ्वी की प्लेटों की गति और उनसे जुड़ी भौगोलिक प्रक्रियाओं की वैज्ञानिक व्याख्या करता है।

(iii) महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के उपरान्त की प्रमुख खोज क्या है, जिससे वैज्ञानिकों ने महासागर वितरण के अध्ययन में पुनः रुचि ली?

उत्तर- अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत (Continental Drift Theory) के उपरांत 20वीं शताब्दी के मध्य में वैज्ञानिकों ने कई महत्वपूर्ण खोजें कीं, जिनसे महासागर के वितरण और संरचना के अध्ययन में पुनः गहरी रुचि उत्पन्न हुई।

      इनमें सबसे प्रमुख खोज थी “सागरीय तल प्रसार सिद्धांत (Sea Floor Spreading Theory)”, जिसे 1960 के दशक में हैरी हेस (Harry Hess) ने प्रस्तुत किया।

   इस सिद्धांत के अनुसार, महासागरों के मध्य में स्थित मध्य-महासागरीय पर्वतमालाओं (Mid-Oceanic Ridges) से नये भू-पटल का निर्माण होता है, और यह धीरे-धीरे दोनों ओर फैलता जाता है।

     इसके समर्थन में चुंबकीय अनियमितताओं (Magnetic anomalies), समुद्री तल की आयु, तथा गहराई के सर्वेक्षणों से प्राप्त प्रमाण मिले। यह भी पाया गया कि महासागरों का तल अपेक्षाकृत नया है और इसका निरंतर पुनर्निर्माण होता रहता है। इस खोज से यह स्पष्ट हुआ कि महाद्वीप वास्तव में गतिशील हैं और पृथ्वी की सतह प्लेटों में विभाजित है जो आपस में गतिमान हैं।

   इस प्रकार, सागरीय तल प्रसार सिद्धांत तथा प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) के विकास ने वेगनर के विचारों को वैज्ञानिक आधार दिया और पृथ्वी के महाद्वीपोंमहासागरों के वितरण, गति तथा उनके विकास को समझने का नया दृष्टिकोण प्रदान किया।

Chapter 2 The Origin and Evolution of the Earth (पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास)

Chapter 2 The Origin and Evolution of the Earth

(पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास)

(भाग – 1 : भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत)

बिहार बोर्ड तथा NCERT कक्षा 11वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर



Chapter 2 The Origin and Evolution

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

(i) निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या पृथ्वी की आयु को प्रदर्शित करती है?

(क) 46 लाख वर्ष

(ख) 4600 मिलियन वर्ष

(ग) 13.7 अरब वर्ष

(घ) 13.7 खरब वर्ष

उत्तर- (ख) 4600 मिलियन वर्ष

व्याख्या:

    वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार पृथ्वी की आयु लगभग 4.6 अरब वर्ष (यानी 4600 मिलियन वर्ष) मानी जाती है। यह अनुमान रेडियोधर्मी तत्वों जैसे यूरेनियम और सीसा के विश्लेषण द्वारा लगाया गया है।

(ii) निम्न में कौन-सी अवधि सबसे लम्बी है

(क) इओन (Eons)

(ख) कल्प (Period)

(ग) महाकल्प (Era)

(घ) युग (Epoch)

उत्तर- (क) इओन (Eons)

व्याख्या:

    भूवैज्ञानिक समय को विभिन्न इकाइयों में बाँटा गया है-

1. इओन (Eon) – सबसे बड़ी और सबसे लंबी समय इकाई।

2. महाकल्प (Era) – इओन का उपविभाग।

3. कल्प (Period) – महाकल्प का उपविभाग।

4. युग (Epoch) – कल्प का उपविभाग।

अतः क्रम होगा: Eon > Era > Period > Epoch

       इसलिए सबसे लंबी अवधि इओन (Eon) होती है।

(iii) निम्न में कौन सा-तत्त्व वर्तमान वायुमण्डल के निर्माण व संशोधन में सहायक नहीं है?

(क) सौर पवन

(ख) गैस उत्सर्जन

(ग) विभेदन

(घ) प्रकाश संश्लेषण

उत्तर- (ग) विभेदन 

व्याख्या:

  सौर पवन, गैस उत्सर्जन, और प्रकाश संश्लेषण ये तीनों तत्त्व पृथ्वी के वायुमण्डल के निर्माण और संशोधन में योगदान देते हैं।

सौर पवन ने प्रारम्भिक वायुमण्डल की गैसों को प्रभावित किया।

गैस उत्सर्जन (Volcanic emission) ने नए गैसों को वायुमण्डल में जोड़ा।

प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) ने ऑक्सीजन बढ़ाकर वायुमण्डल की संरचना बदली।

जबकि विभेदन (Differentiation) पृथ्वी के आन्तरिक भागों के अलग-अलग स्तरों (कोर, मेंटल, क्रस्ट) में विभाजन से सम्बन्धित है, न कि सीधे वायुमण्डल के निर्माण या संशोधन से।

(iv) निम्नलिखित में से भीतरी ग्रह कौन से हैं

(क) पृथ्वी व सूर्य के बीच पाए जाने वाले ग्रह।

(ख) सूर्य व क्षुद्र ग्रहों की पट्टी के बीच पाए जाने वाले ग्रह।

(ग) वे ग्रह जो गैसीय हैं।

(घ) बिना उपग्रह वाले ग्रह।

उत्तर- (ख) सूर्य व क्षुद्र ग्रहों की पट्टी के बीच पाए जाने वाले ग्रह।

व्याख्या:

    भीतरी ग्रह (Inner Planets) वे हैं जो सूर्य और क्षुद्र ग्रहों की पट्टी (Asteroid Belt) के बीच स्थित हैं।

   इनमें चार ग्रह शामिल हैं-

1. बुध (Mercury)

2. शुक्र (Venus)

3. पृथ्वी (Earth)

4. मंगल (Mars)

    ये ग्रह छोटे, ठोस तथा चट्टानी होते हैं, जबकि बाहरी ग्रह गैसीय होते हैं।

(v) पृथ्वी पर जीवन निम्नलिखित में से लगभग कितने वर्षों पहले आरम्भ हुआ।

(क) 1 अरब 37 करोड़ वर्ष पहले

(ख) 460 करोड़ वर्ष पहले

(ग) 38 लाख वर्ष पहले

(घ) 3 अरब, 80 करोड़ वर्ष पहले।

उत्तर- (घ) 3 अरब, 80 करोड़ वर्ष पहले।

व्याख्या:

   वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार, पृथ्वी पर जीवन का आरंभ लगभग 3.8 अरब (380 करोड़) वर्ष पहले हुआ था। प्रारंभिक जीवन सूक्ष्म जीवों (micro organisms) के रूप में समुद्रों में उत्पन्न हुआ था।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

(i) पार्थिव ग्रह चट्टानी क्यों हैं?

उत्तर- ये ग्रह पृथ्वी की भाँति ही शैलों और धातुओं से बने हैं और अपेक्षाकृत अधिक घनत्व वाले ग्रह हैं। अर्थात पार्थिव ग्रह चट्टानी हैं क्योंकि ये सूर्य के निकट बने, जहाँ उच्च तापमान के कारण हल्की गैसें उड़ गईं और केवल भारी तत्व जैसे लोहा, सिलिका आदि रह गए, जिनसे ठोस सतह बनी।

   ये ग्रह छोटे होने के कारण उनकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी कम रही जिसके फलस्वरूप इनसे निकली हुई गैस इन पर रुकी नहीं रह सकी।

(ii) पृथ्वी की उत्पत्ति संबंधित दिये गए तर्कों में निम्न वैज्ञानिकों के मूलभूत अंतर बताएँ-

(क) कान्ट व लाप्लेस (ख) चैम्बरलेन व मोल्टेन

उत्तर-

(क) कान्ट व लाप्लेस: कान्ट व लाप्लेस की परिकल्पना के अनुसार ग्रहों का निर्माण धीमी गति से घूमते हुए पदार्थों के बादल से हुआ जो कि सूर्य की युवा अवस्था से संबद्ध थे।

(ख) चैम्बरलेन व मोल्टेन: चैम्बरलेन व मोल्टेन ने कहा कि ब्रह्मांड में एक अन्य भ्रमणशील तारा सूर्य के पास से गुजरा। इसके परिणामस्वरूप तारे के गुरुत्वाकर्षण से सूर्य-सतह से सिगार के आकार का कुछ पदार्थ निकलकर अलग हो गया।

    यह पदार्थ सूर्य के चारों तरफ घूमने लगा और यहीं पर धीरे-धीरे संघनित होकर ग्रहों के रूप में परिवर्तित हो गया।

(iii) विभेदन प्रक्रिया से आप क्या समझते हैं?

उत्तर-  विभेदन प्रक्रिया से तात्पर्य है- जब पृथ्वी के निर्माण के दौरान भारी तत्व (जैसे लोहा, निकेल) केंद्र में और हल्के तत्व (जैसे सिलिका, एल्युमिनियम) ऊपर की ओर आ गए, जिससे परतें बनीं।

विस्तार से व्यख्या- पृथ्वी की उत्पत्ति के दौरान और उत्पत्ति के तुरंत बाद अत्यधिक ताप के कारण, पृथ्वी आंशिक रूप से द्रव अवस्था में रह गई और तापमान की अधिकता के कारण ही हल्के और भारी घनत्व के मिश्रण वाले पदार्थ घनत्व के अंतर के कारण अलग होना शुरू हो गए ।

     इसी अलगाव से भारी पदार्थ (जैसे लोहा), पृथ्वी के केन्द्र में चले गए और हल्के पदार्थ पृथ्वी की सतह या ऊपरी भाग की तरफ आ गए। समय के साथ यह और ठंडे हुए और ठोस रूप में परिवर्तित होकर छोटे आकार के हो गए।

    अंततोगत्वा यह पृथ्वी की भूपर्पटी के रूप में विकसित हो गए। हल्के व भारी घनत्व वाले पदार्थों के पृथक होने की इस प्रक्रिया को विभेदन (Differentiation) कहा जाता है।

(iv) प्रारंभिक काल में पृथ्वी के धरातल का स्वरूप क्या था?

उत्तर- प्रारंभ में पृथ्वी, चट्टानी गर्म और वीरान ग्रह थी जिसका वायुमण्डल विरल था जो हाइड्रोजन व हीलीयम से बना था।

    अर्थात प्रारंभिक काल में पृथ्वी का धरातल अत्यंत गर्म, अस्थिर और पिघले हुए पदार्थों से बना था। इसमें ठोस भू-पर्पटी नहीं थी तथा ज्वालामुखीय क्रियाएँ निरंतर होती रहती थीं।

(v) पृथ्वी के वायुमंडल को निर्मित करने वाली प्रारम्भिक गैसें कौन-सी थीं?

उत्तर- हाइड्रोजन व हीलीयम।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

(i) बिग बैंग सिद्धांत का विस्तार से वर्णन करें।

उत्तर- बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का विस्तार निम्न अवस्थाओं में हुआ है-

1. आरम्भ में वे सभी पदार्थ, जिनसे ब्रह्मांड बना है, अति छोटे गोलक (एकाकी परमाणु) के रूप में एक ही स्थान पर स्थित थे। जिसका आयतन अत्यधिक सूक्ष्म एवं तापमान तथा घनत्व अनंत था ।

2. बिग बैंग की प्रक्रिया में इस अति छोटे गोलक में भीषण विस्फोट हुआ। इस प्रकार की विस्फोट प्रक्रिया से वृहत् विस्तार हुआ। वैज्ञानिकों का विश्वास है कि बिग बैंग की घटना आज से 13.7 अरब वर्षों पहले हुई थी।

    ब्रह्मांड का विस्तार आज भी जारी है। विस्तार के कारण कुछ ऊर्जा पदार्थ में परिवर्तित हो गई। विस्फोट (Bang) के बाद एक सेकेंड के अल्पांश के अंतर्गत ही वृहत् विस्तार हुआ। इसके बाद विस्तार की गति धीमी पड़ गई। बिग बैंग होने के आरम्भिक तीन मिनट के अंतर्गत ही पहले परमाणु का निर्माण हुआ।

3. बिग बैंग के कारण 3 लाख वर्षों के दौरान, तापमान 4500° केल्विन तक गिर गया और परमाणवीय पदार्थ का निर्माण हुआ। ब्रह्मांड पारदर्शी हो गया। ब्रह्मांड के विस्तार का अर्थ है आकाशगंगाओं के बीच की दूरी में विस्तार का होना।

    हॉयल (Hoyle) ने इसका विकल्प ‘स्थिर अवस्था संकल्पना’ (Steady State Concept) के नाम से प्रस्तुत किया । इस संकल्पना के अनुसार ब्रह्मांड किसी भी समय में एक ही जैसा रहा हैं। यद्यपि ब्रह्मांड के विस्तार संबंधी अनेक प्रमाणों के मिलने पर वैज्ञानिक समुदाय अब ब्रह्मांड विस्तार सिद्धांत के ही पक्षधर हैं।

(ii) पृथ्वी के विकास संबंधी अवस्थाओं को बताते हुए हर अवस्था या चरण को संक्षेप में वर्णित करें।

उत्तर- पृथ्वी के विकास की प्रक्रिया अत्यंत दीर्घ और जटिल रही है, जो लगभग 4.6 अरब वर्ष पूर्व सौरमंडल के निर्माण के साथ आरंभ हुई। इस विकास को विभिन्न अवस्थाओं या चरणों में विभाजित किया जा सकता है-

1. निहारिका अवस्था (Nebular Stage):-

    सौरमंडल प्रारंभ में गैसों और धूल कणों के विशाल बादल के रूप में था। गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव से यह निहारिका सिमटने लगी और इसके केंद्र में सूर्य का निर्माण हुआ, जबकि परिक्रमा करती धूल और गैस से ग्रहों की उत्पत्ति हुई।

2. प्रोटो-पृथ्वी अवस्था (Proto-Earth Stage):-

     संकुचन और संलयन के परिणामस्वरूप धूल और गैस के कण आपस में मिलकर प्रोटो-पृथ्वी का निर्माण करने लगे। इस समय पृथ्वी अत्यंत गर्म और अस्थिर अवस्था में थी।

3. विभेदन अवस्था (Differentiation Stage):-

     पृथ्वी के भीतर तापमान बढ़ने के कारण भारी तत्व (जैसे लोहा, निकेल) केंद्र की ओर चले गए और हल्के तत्व (जैसे सिलिका, एलुमिनियम) ऊपर की ओर आ गए। परिणामस्वरूप पृथ्वी का आंतरिक ढांचा – कोर, मेंटल और क्रस्ट बना।

4. वायुमंडल और महासागर निर्माण अवस्था:-

     ज्वालामुखीय गैसों और जलवाष्प के उत्सर्जन से प्रारंभिक वायुमंडल बना। जलवाष्प के संघनन से वर्षा हुई और महासागरों का निर्माण हुआ।

5. जैविक विकास अवस्था:-

     लगभग 3.8 अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन का उद्भव हुआ, जिसने धीरे-धीरे पृथ्वी के वायुमंडल और पर्यावरण को परिवर्तित कर वर्तमान स्वरूप दिया।

     इस प्रकार, पृथ्वी का विकास एक सतत भौतिक, रासायनिक और जैविक प्रक्रिया का परिणाम है।

Chapter 1 Geography as a Discipline (भूगोल एक विषय के रूप में)

Chapter 1 Geography as a Discipline

(भूगोल एक विषय के रूप में)

(भाग – 1 : भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत)

बिहार बोर्ड तथा NCERT कक्षा 11वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर



Chapter 1 Geography as a Discipline

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

(i) निम्नलिखित में से किस विद्वान् ने भूगोल (Geography) शब्द (Terms) का प्रयोग किया?

(क) हेरोडोटस

(ख) गैलिलियो

(ग) इरेटास्थिनीज

(घ) अरस्तू

उत्तर- (ग) इरेटास्थिनीज

व्याख्या:

“भूगोल” (Geography) शब्द का प्रयोग सबसे पहले यूनानी विद्वान इरेटास्थिनीज (Eratosthenes) ने किया था। यह शब्द दो ग्रीक शब्दों से मिलकर बना है:

Geo = पृथ्वी,  Graphy = वर्णन या लेखन अर्थात्, Geography का अर्थ हुआ ‘पृथ्वी का वर्णन या अध्ययन’।

(ii) निम्नलिखित में से किस लक्षण को भौतिक लक्षण कहा जा सकता है?

(क) बंदरगाह

(ख) मैदान

(ग) सड़क

(घ) जल उद्यान

उत्तर- (ख) मैदान

व्याख्या:

   भौतिक लक्षण (Physical features) वे होते हैं जो प्रकृति द्वारा निर्मित होते हैं, जैसे- पर्वत, नदियाँ, मैदान, पठार आदि। जबकि अन्य विकल्प- बंदरगाह, सड़क, जल उद्यान – ये मानव द्वारा निर्मित (मानव निर्मित या कृत्रिम) लक्षण हैं।

(iii) स्तम्भ I एवं II के अंतर्गत लिखे गए विषयों को पढ़िए।

स्तम्भ I प्राकृतिक सामाजिक विज्ञान स्तम्भ II भूगोल की शाखाएँ
1. मौसम विज्ञान अ. जनसंख्या भूगोल
2. जनांकिकी ब. मृदा भूगोल
3. समाजशास्त्र स. जलवायु विज्ञान
4. मृदा विज्ञान द. सामाजिक भूगोल

सही मेल को चिह्नांकित कीजिए

(क) 1.ब, 2.स, 3.अ, 4.द

(ग) 1.अ, 2.द, 3.ब, 4.स

(ख) 1.द. 2.ब, 3.स, 4.अ

(घ) 1.स, 2.अ, 3.द, 4.ब

उत्तर- (घ) 1.स, 2.अ, 3.द, 4.ब

(iv) निम्नलिखित में से कौन-सा प्रश्न कार्य-कारण सम्बन्ध से जुड़ा हुआ है?

(क) क्यों

(ख) क्या

(ग) कहाँ

(घ) कब

उत्तर- (क) क्यों

व्याख्या:
   “क्यों” प्रश्न का प्रयोग किसी घटना या स्थिति के कारण (cause) को जानने के लिए किया जाता है। इसलिए यह कार्य-कारण संबंध (cause-effect relationship) से जुड़ा हुआ प्रश्न होता है।

(v) निम्नलिखित में से कौन-सा विषयकालिक संश्लेषण करता है?

(क) समाजशास्त्र

(ख) मानवशास्त्र

(ग) इतिहास

(घ) भूगोल

उत्तर- (घ) भूगोल

व्याख्या:

    भूगोल (Geography) एक ऐसा विषय है जो स्थानिक (spatial) और कालिक (temporal) दोनों प्रकार के विश्लेषण करता है।

   यह विभिन्न समय अवधियों (कालों) में पृथ्वी की सतह पर घटित परिवर्तनों का अध्ययन करता है- जैसे स्थलरूप, जलवायु, जनसंख्या, उद्योग आदि में समय के साथ होने वाले परिवर्तन।

   इसीलिए भूगोल को “विषयकालिक संश्लेषण” (Temporal Synthesis) करने वाला विषय कहा जाता है।

(vi) निम्नलिखित में से किस विद्वान द्वारा क्रमबद्ध भूगोल प्रवर्तित किया गया?

(क) इरेटॉस्थनीज

(ख) हम्बोल्ट

(ग) स्ट्रेबो

(घ) टॉलेमी

उत्तर- (ख) हम्बोल्ट

व्याख्या:
   क्रमबद्ध भूगोल (Systematic Geography) की अवधारणा अलेक्ज़ेंडर वॉन हम्बोल्ट ने दी थी। उन्होंने प्राकृतिक घटनाओं को कारण-कार्य संबंध के आधार पर व्यवस्थित रूप से अध्ययन करने की परंपरा शुरू की।

   वहीं, कार्ल रिटर (Carl Ritter) ने प्रादेशिक भूगोल (Regional Geography) की परंपरा को आगे बढ़ाया।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) आप विद्यालय जाते समय किन महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक लक्षणों का पर्यवेक्षण करते हैं? क्या वे सभी समान हैं अथवा असमान? उन्हें भूगोल के अध्ययन में सम्मिलित करना चाहिए अथवा नहीं? यदि हाँ तो क्यों?

उत्तर- हम विद्यालय जाते समय मानव द्वारा सृजित ग्रामों, नगरों, सड़कों, रेलों, बदंरगाहों, बाजारों, मंदिर, मस्जिद, वस्त्र, भाषा एवं मानव-जनित अन्य कई महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक लक्षणों का पर्यवेक्षण करते हैं। वे सभी लक्षण असमान हैं। उन्हें भूगोल के अध्ययन में सम्मिलित करना चाहिए क्योंकि ये मानव-पर्यावरण संबंध को दर्शाते हैं।

(ii) आपने एक टेनिस गेंद, क्रिकेट गेंद, संतरा एवं लौकी को देखा होगा। इनमें से कौन-सी वस्तु की आकृति पृथ्वी की आकृति से मिलती-जुलती है? आपने इस विशेष वस्तु को पृथ्वी की आकृति को वर्णित करने के लिए क्यों चुना?

उत्तर- पृथ्वी का आकार जियोइड (Geoid) है, क्योंकि पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और विषुवत् रेखा पर उभरी होती है, इसलिए व्यवहार में इसे संतरे की तरह गोल माना जाता है।

(iii) क्या आप अपने विद्यालय में वन महोत्सव समारोह का आयोजन करते हैं? हम इतने पौधारोपण क्यों करते हैं? वृक्ष किस प्रकार पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं?

उत्तर- हाँ, हमारे विद्यालय में वन महोत्सव मनाया जाता है। हम पर्यावरण संरक्षण हेतु पौधारोपण करते हैं। वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर और ऑक्सीजन छोड़कर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं।

(iv) आपने हाथी, हिरण केंचुए, वृक्ष एवं घास को देखा है। ये कहाँ रहते एवं बढ़ते हैं? उस मण्डल को क्या नाम दिया गया है? क्या आप इस मण्डल के कुछ लक्षणों का वर्णन कर सकते हैं?

उत्तर- हाथी, हिरण, केंचुआ, वृक्ष एवं घास को हमने वनों में देखा है जहाँ वे रहते हैं, एवं बढ़ते हैं। उस जगह को जैवमण्डल का नाम दिया गया है। इसमें वायु, जल और भूमि के जीवित तत्व परस्पर क्रिया करते हैं।

(v) आपको अपने निवास से विद्यालय जाने में कितना समय लगता है? यदि विद्यालय आपके घर की सड़क के उस पार होता तो आप विद्यालय पहुंचने में कितना समय लेते? आने-जाने के समय पर आपके घर एवं विद्यालय के बीच की दूरी का क्या प्रभाव पड़ता है? क्या आप समय को स्थान तथा, इसके विपरीत, स्थान को समय में परिवर्तित कर सकते?

उत्तर- मुझे अपने निवास से विद्यालय पहुँचने में लगभग 20 मिनट का समय लगता है। यदि विद्यालय मेरे घर की सड़क के उस पार होता, तो मात्र 2–3 मिनट में पहुँच सकता था। इससे स्पष्ट होता है कि घर और विद्यालय के बीच की दूरी आने-जाने के समय को सीधे प्रभावित करती है- दूरी जितनी अधिक होगी, समय भी उतना ही अधिक लगेगा।

    वास्तव में, दूरी और समय का गहरा संबंध है; हम दूरी को समय में और समय को दूरी में परिवर्तित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि विद्यालय 2 किलोमीटर दूर है और मैं 6 किमी/घंटा की गति से चलता हूँ, तो विद्यालय पहुँचने में लगभग 20 मिनट लगेंगे। 

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

(i) आप अपने परिस्थान (Surrounding) का अवलोकन करने पर पाते हैं कि प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक दोनों तथ्यों में भिन्नता पाई जाती है। सभी वृक्ष एक ही प्रकार के नहीं होते। सभी पशु एवं पक्षी जिसे आप देखते हैं भिन्न-भिन्न होते हैं। ये सभी भिन्न तत्व धरातल पर पाये जाते हैं। क्या अब आप यह तर्क दे सकते हैं कि भूगोल प्रादेशिक क्षेत्रीय भिन्नता का अध्ययन है?

उत्तर- हाँ, हम यह तर्क दे सकते हैं कि भूगोल प्रादेशिक (क्षेत्रीय) भिन्नता का अध्ययन है, क्योंकि भूगोल का मूल उद्देश्य पृथ्वी की सतह पर पाए जाने वाले प्राकृतिक और सांस्कृतिक तत्वों की विविधता को समझना है।

     जब हम अपने आसपास के वातावरण का अवलोकन करते हैं, तो पाते हैं कि कहीं पर्वत हैं तो कहीं मैदान, कहीं वन हैं तो कहीं रेगिस्तान। इसी प्रकार, मानव जीवन की संस्कृति, निवास, वेशभूषा, भाषा और जीवनशैली भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर भिन्न होती है।

    इन सभी भिन्नताओं का अध्ययन भूगोल करता है और यह समझने का प्रयास करता है कि इन भिन्नताओं के पीछे कौन-से प्राकृतिक कारण (जैसे जलवायु, स्थलरूप, मृदा) तथा मानवीय कारण (जैसे आर्थिक क्रियाएँ, तकनीकी विकास, संस्कृति) जिम्मेदार हैं। अतः भूगोल वास्तव में पृथ्वी की सतह पर क्षेत्रीय विविधताओं और उनके पारस्परिक संबंधों का वैज्ञानिक अध्ययन है।

(ii) आप पहले ही भूगोल, इतिहास, नागरिकशास्त्र एवं अर्थशास्त्र का सामाजिक विज्ञान के घटक के रूप में अध्ययन कर चुके हैं। इन विषयों के समाकलन का प्रयास उनके अंतरापृष्ठ (Interface) पर प्रकाश डालते हुए कीजिए।

उत्तर- भूगोल, इतिहास, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र ये चारों सामाजिक विज्ञान के प्रमुख घटक हैं, जो मानव समाज के विभिन्न पहलुओं को समझने में एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

     इतिहास हमें समय के साथ मानव सभ्यता के विकास और परिवर्तन की जानकारी देता है, जबकि भूगोल यह बताता है कि भौगोलिक परिस्थितियाँ मानव जीवन और समाज को कैसे प्रभावित करती हैं।

    अर्थशास्त्र संसाधनों के उत्पादन, वितरण और उपभोग का अध्ययन करता है, जो भौगोलिक संसाधनों और ऐतिहासिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है।

    नागरिक शास्त्र समाज में शासन, अधिकारों और दायित्वों की समझ प्रदान करता है, जो इतिहास और आर्थिक संरचना दोनों से प्रभावित होते हैं।

    इन विषयों का अंतरापृष्ठ (interface) यह दर्शाता है कि सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय प्रक्रियाएँ परस्पर निर्भर हैं। इस प्रकार, इनका समाकलन मानव समाज की समग्र समझ विकसित करने में सहायक होता है।

Chapter 3 Interior of the Earth (पृथ्वी की आंतरिक संरचना)

Chapter 3 Interior of the Earth

(पृथ्वी की आंतरिक संरचना)

(भाग – 1 : भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत)

बिहार बोर्ड तथा NCERT कक्षा 11वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर



1.  बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

(i) निम्नलिखित में से कौन भूगर्भ की जानकारी का प्रत्यक्ष साधन है-

(क) भूकम्पीय तरंगें

(ख) गुरुत्वाकर्षण बल

(ग) ज्वालामुखी

(घ) पृथ्वी का चुम्बकत्व

उत्तर- (क) भूकम्पीय तरंगें

(ii) दक्कन ट्रैप की शैल समूह किस प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार का परिणाम है-

(क) शील्ड

(ख) मिश्र

(ग) प्रवाह

(घ) कुण्ड

उत्तर- (ग) प्रवाह

(iii) निम्नलिखित में से कौन सा स्थलमण्डल को वर्णित करता है?

(क) ऊपरी व निचले मैंटल

(ख) भूपटल व क्रोड

(ग) भूपटल व ऊपरी मैंटल

(घ) मैंटल व क्रोड

उत्तर- (ग) भूपटल व ऊपरी मैंटल

(iv) निम्न में से कौन सी भूकम्प तरंगें चट्टानों में संकुचन व फैलाव लाती हैं-

(क) ‘P’ तरंगे

(ख) ‘S’ तरंगे

(ग) धरातलीय तरंगे

(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर- (क) ‘P’ तरंगे

(v) पृथ्वी की क्रोड पर कौन से दो पदार्थ पाये जाते हैं।

(क) निकिल व ताँबा

(ख) तांबा व लोहा

(ग) निकिल व लोहा

(घ) लोहा व चूना

उत्तर- (ग) निकिल व लोहा

(vi) निम्नलिखित में कौन-सा सक्रीय ज्वालामुखी है?

(क) स्ट्रांबोली

(ख) विसूवियस

(ग) बैरन द्वीप

(घ) पोपा

उत्तर- (क) स्ट्रांबोली

(vii) निम्नलिखित में से किस शहर में दिन का अवधि सर्वाधिक है?

(क) मुंबई

(ख) चेन्नई

(ग) श्रीनगर

(घ) दिल्ली

उत्तर- (ग) श्रीनगर

(viii) निम्नलिखित में से किस राज्य की जनसंख्या सर्वाधिक है?

(क) पं० बंगाल

(ख) बिहार

(ग) उत्तर प्रदेश

(घ) आन्ध्र प्रदेश

उत्तर- (ग) उत्तर प्रदेश

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) भूगर्भीय तरंगें क्या हैं?

उत्तर- भूगर्भीय तरंगें (Body Waves): भूगर्भीय तरंगें भूकंप के केंद्र (Earthquake’s epicenter) पर मुक्त ऊर्जा का परिणाम होती हैं। ये पृथ्वी के आंतरिक भाग से गुजरते हुए सभी दिशाओं में फैलती हैं। भूगर्भीय तरंगों को मुख्यतः दो प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है: P-Waves और S-Waves

(ii) भूगर्भ की जानकारी के लिए प्रत्यक्ष साधनों के नाम बाताइए।

उत्तर- हलांकि पृथ्वी की आंतरिक संरचना के विषय में हमारी अधिकतर जानकारी परोक्ष रूप से प्राप्त अनुमानों पर आधारित है।

    भूगर्भ की जानकारी के प्रत्यक्ष स्रोत हैं: ज्वालामुखी, खनन, धरातलीय चट्टानें, और उल्कापिंड। ये स्रोत सीधे तौर पर पृथ्वी के आंतरिक भाग से संबंधित हैं या उनसे प्राप्त जानकारी प्रदान करते हैं।

(iii) भूकंपीय तरंगे छाया क्षेत्र कैसे बनाती हैं?

उत्तर- जहाँ कोई भी भूकंपीय तरंग अंकित नहीं होती, ऐसे क्षेत्र को भूकंपीय छाया क्षेत्र (Shadow Zone) कहा जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भूकंप अधिकेंद्र से 105° और 145° के बीच का क्षेत्र जहाँ कोई भी भूकंपीय तरंग अंकित नहीं होती है।  यह क्षेत्र दोनों प्रकार की तरगों के लिए छाया क्षेत्र (Shadow zone) हैं।

(iv) भूकंपीय गतिविधियों के अतिरिक्त भूगर्भ की जानकारी संबंधी अप्रत्यक्ष साधनों का संक्षेप में वर्णन करें।

उत्तर- भूकंपीय गतिविधियों के अलावा भूगर्भ की जानकारी प्राप्त करने के लिए कई अप्रत्यक्ष साधन हैं। इनमें गुरुत्वाकर्षण सर्वेक्षण, चुंबकीय क्षेत्र, उल्कापिंडों का विश्लेषण, और पृथ्वी के तापमान, दबाव और घनत्व में परिवर्तन शामिल हैं। ये विधियां भूगर्भ की संरचना और गुणों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) भूकंपीय तरंगों के संचरण का उन चट्टानों पर प्रभाव बताएं जिनसे होकर यह तरंगे गुजरती हैं?

उत्तर- भिन्न-भिन्न प्रकार की भूकंपीय तरंगों के संचरित होने की प्रणाली भिन्न-भिन्न होती है। जैसे ही ये संचरित होती हैं तो चट्टानों में कंपन पैदा होती है।

भूकंपीय तरंगों के प्रकार का प्रभाव:

P-तरंगें (Primary Waves):-

      ये सबसे तेज तरंगें हैं और ठोस, तरल और गैसों से गुजर सकती हैं। ये चट्टानों को संकुचित और विरलीकृत करती हैं।

S-तरंगें (Secondary Waves):

   ये तरंगें केवल ठोस पदार्थों से होकर गुजर सकती हैं और चट्टानों को ऊपर-नीचे या एक तरफ से दूसरी तरफ गतिमान करती हैं।

सतही तरंगें (Surface Waves):

    ये तरंगें पृथ्वी की सतह के साथ-साथ यात्रा करती हैं और सबसे अधिक विनाशकारी होती हैं, खासकर लव तरंगें। 

(ii) अंतर्वेधी आकृतियों से आप क्या समझते हैं? विभिन्न अंतर्वेधी आकृतियों का संक्षेप में वर्णन करें।

उत्तर- अंतर्वेधी ज्वालामुखी स्थलाकृति-

 जब मैग्मा पदार्थ अपने स्रोत क्षेत्र से ऊपर उठकर भूपटल के नीचे ही ठंडा होने की प्रवृति रखता है, तब उससे अंतर्वेधी या आन्तरिक ज्वालामुखी स्थलाकृति का निर्माण होता है। जैसे– डाइक, सिल, लैकोलिथ, लोपोलिथ, फैकोलिथ, बैथोलिथChapter 3 Interior of the Earth

 जब मैग्मा पदार्थ अपने स्रोत क्षेत्र से ऊपर उठकर लम्बत ठोस होता है तो डाइक, क्षैतिज ठोस होता है तो सिलजब उत्तल दर्पण के समान ठोस होता है तो लैकोलिथ, जब अवतल दर्पण के समान ठोस होता है तो लोपोलिथ, जब तरंग के समान ठोस होता है तो फैकोलिथ स्थलाकृति का निर्माण होता है।

 इसी तरह जब मैग्मा पदार्थ अपने स्रोत क्षेत्र से ऊपर उठकर एक गुम्बद के समान ठोस हो जाते है तो उससे बैथोलिथ का निर्माण होता है।

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