Category CARTOGRAPHY(मानचित्र कला)

22. प्रमुख सममान रेखाएँ

22. मानचित्रों पर दर्शाएँ जाने वाली प्रमुख सममान रेखाएँ


प्रमुख सममान रेखाएँ⇒

सममान रेखाएँ या आइसोप्लेथ (Isopleth):- मानचित्रों पर किसी वस्तु के समान मूल्य या घनत्व वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएँ को सममान रेखाएँ कहा जाता है। जैसे- समताप रेखा, सममेघ रेखा, समवर्षा रेखा, समदाब रेखा इत्यादि।

(नोट : सम = बराबर, मान = मूल्य अर्थात मानचित्र पर किसी तत्व या वस्तु के समान मूल्य / घनत्व) 

प्रमुख सममान रेखाएँ

मानचित्रों पर दर्शाएँ जाने वाली प्रमुख सममान रेखाएँ:

1. आइसोनीफ (Isonif)⇒ समान हिम वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आइसोनीफ कहते है।

2.  सममेघ रेखा या आइसोनेफ (Isoneph)⇒ समान मेघ आच्छादन वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आइसोनेफ कहते है।

3. आइसो बाथ (Isobath)⇒ समुद्र के अंदर समान गहराई वाले स्थानों को मिलाकर खींचे जाने वाली रेखा को आइसो बाथ कहते है।

4. आइसो ब्रांट (Isobront)⇒ एक समान समय पर तूफान आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

5. समपवनवेग रेखा या आइसोटैक (Isotach)⇒ मौसम मानचित्र पर पवन की समान गति वाले स्थानों को मिलाकर खींची गई रेखा।

6. समताप रेखा (Isotherm)⇒ समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

7. आइसोपैच (Isopach)⇒ हिमानी अथवा चट्टानों के समान मोटाई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

8.  समकाल रेखा या आइसोक्रोन (Isochrone)⇒ किसी बिंदु से एक समान समय में तय कि गई दूरी वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

9. समदिक्पाती रेखा (Isogone)⇒ समान चुंबकीय झुकाव वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

10. समलवणता रेखा (Isohaline)⇒ समुद्री जल में खारेपन की समान मात्रा मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा

11. आइसोरेमे (Isoraime)⇒पाला गिरने की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

12. आइसोस्टेड (Isostade)⇒ समान अधिवासीय संख्या को मिलाने वाली रेखा।

13. समभूकंपीय (Isoseismal)⇒ भूकंपीय तीव्रता की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

14. सहभूकंप रेखा या होमोसिस्मल (Homoseismal) ⇒ भूकंप के एक ही समय आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

15. आइसोथेरे (Isothere)⇒ ग्रीष्मकाल के समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

16. समदाब रेखा (Isobars)⇒ समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

17. इसालोबार (Isallobar)⇒ एक विशिष्ट अवधि में वायुमंडलीय दबाव में होने वाले समान परिवर्तन के स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

18. आइसोहेल (Isohel)⇒ सूर्य के प्रकाश की समान अवधि वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

19. समोच्च रेखा या आइसोहाइप (Contour lines or Isohypes)⇒ समुद्र तल से समान ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

20. आइसोपाइकनिक (Isopycnic)⇒ मानव जनसंख्या के समान घनत्व वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

21. आइसोकाइनेटिक (Isokinetic)⇒ समान पवन वेग के स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

22. समवर्षा रेखा (Isohytes)⇒ वर्षा की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

23. आइसोमेर (Isomer)⇒ वर्षा की वार्षिक मात्रा की प्रतिशत के रूप में व्यक्त की जाने वाली उसकी औसत मासिक मात्रा के स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

24. आइसोपाथ (Isopath)⇒ भूगर्भिक अथवा भू भौतिक परत की समान मोटाई वाले बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा।

25. आइसोसिस्ट (Isoseist)⇒ समान भूकंपीय लहरों को एक समय में ही अनुभव करने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

26. आइसोटालेंटोज (Isotalantose)⇒ औसत मासिक तापांतर की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

27. आइसोइकेते (Isoikete)⇒ लोगों केहने योग्य निवास की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

28. आइसोफीन (Isophene)⇒ समान मौसमी घटनाओं को दर्शाने वाली रेखा।

29. आइसोथर्मो बाथ (Isothermobath)⇒ सागरीय जल की गहराई के अनुसा समान ताप वाले बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा।

30. आइसोचाइम (Isochime)⇒ औसत शीत की तापमान की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

31. आइसोफाइट (Isophite) ⇒ वनस्पतियों की समान ऊंचाई अथवा समान ऊंचाई वाले वनस्पति के स्तरों को मिलाने वाली रेखा।

32. आइसोप्रैक्ट (Isopract)⇒ मानव जनसंख्या के समान वितरण वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।



1. मानचित्र पर बनायी गई वे रेखाएँ जो समुद्र से बराबर ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाते हैं, क्या कहलाती है?

(a) आइसोबार

(b) आइसोथर्म

(c) आइसोटोप

(d) कन्टूर

[read more] (d) कन्टूर [/read]

2. मानचित्र पर वर्षा का वितरण दिखाने के लिए किस रेखा का प्रयोग किया जाता है?

(a) आइसोहाइट

(b) आइसोथर्म

(c) आइसोबार

(d) आइसोहेलाइन

[read more] (a) आइसोहाइट [/read]

3. सामान जनसंख्या घनत्व वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएँ है-

(a) आइसोप्रैक्ट

(b) आइसोडोपेन

(c) आइसोटैक

(d) आइसोपाइक्निक

[read more] (d) आइसोपाइक्निक [/read]

4. महासागरीय एवं सागरीय भागों में लवणता की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा निम्न में से किस नाम से जानी जाती है?

(a) आइसोबाथ

(b) आइसोहेल

(c) आइसोसैलाइन

(d) आइसोहैलाइन

[read more] (d) आइसोहैलाइन [/read]

5. समान मेघाच्छन्नता को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोनिफ

(b) आइसोनेफ

(c) आइसोराइम

(d) आइसोफेन

[read more] (b) आइसोनेफ [/read]

6. समान चुम्बकीय झुकाव वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोबाथ

(b) आइसोब्राण्ट

(c) आइसोगोनल

(d) आइसोक्रोन

[read more] (c) आइसोगोनल [/read]

7. आइसोथर्म नामक रेखाएँ मानचित्र पर उन स्थानों को दर्शाने के लिए बनायी जाती है जहाँ पर-

(a) एकसमान तापमान रहता है

(b) एकसमान दबाब रहता है

(c) एकसमान लवणता रहती है

(d) एकसमान उँचाई होती है

[read more] (a) एकसमान तापमान रहता है [/read]

8. आइसोबार (Isobar) मानचित्र पर उन स्थानों को दर्शाने के लिए खींची गई रेखाएँ हैं, जहाँ पर-

(a) एक जैसा वायुमंडलीय दाब हैं

(b) एक जैसा तापमान है

(c) एक जैसा ऊँचाई है

(d) एक जैसा लवणता है

[read more] (a) एक जैसा वायुमंडलीय दाब हैं [/read]

9. आइसोहेल (Isohel) रेखाओं द्वारा क्या प्रदर्शित किया जाता है?

(a) समान वर्षा

(b) समान धूप

(c) समान ऊँचाई

(d) समान हिमपात

[read more] (b) समान धूप [/read]

10. विश्व मानचित्र पर एक ही समदिकपाती रेखा पर स्थित दो स्थानों पर समान होगा-

(a) भू-प्रदूषण

(b) भूकम्पीय क्रिया

(c) मेघाच्छादन

(d) चुम्बकीय विचलन

[read more] (d) चुम्बकीय विचलन [/read]

11. एकसमान समय पर तूफान आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोसीस्मल

(b) आइसोकाइम

(c) आइसोब्राण्ट

(d) आइसोक्लाइन

[read more] (c) आइसोब्राण्ट [/read]

12. समुद्र के अन्दर समान गहराई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा कहलाती है-

(a) आइसोबार

(b) आइसोबाथ

(c) आइसोथर्म

(d) आइसोक्रोन

[read more] (b) आइसोबाथ [/read]

13. सूर्यातप के समान अवधि वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोहेल

(b) आइसोनिफ

(c) आइसोक्रोन

(d) आइसोहाइप

[read more] (a) आइसोहेल [/read]

14. समान हिमपात वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएँ क्या कहलाती है?

(a) आइसोनेफ

(b) आइसोहाइट

(c) आइसोनिफ

(d) आइसोब्राण्ट

[read more] (c) आइसोनिफ [/read]

15. किसी प्रदेश में समान भाषा वाले स्थानों को वर्गीकृत करने वाली सीमा रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोपाइक्निक

(b) आइसोफाइट

(c) आइसोडाइन

(d) आइसोग्लॉस

[read more] (d) आइसोग्लॉस [/read]

16. भूकम्पीय तीव्रता की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है ?

(a) आइसोगोनल

(b) होमोसिस्मल

(c) आइसोसिस्मल

(d) आइसोकायनेटिक

[read more] (c) आइसोसिस्मल [/read]

17. भूकम्प के एक ही समय पर आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोसिस्मल

(b) होमोसिस्मल

(c) आइसोब्राण्ट

(d) आइसोगोनल

[read more] (b) होमोसिस्मल [/read]

18. महासागरों व सागरों की लवणीयता को मानचित्र पर प्रदर्शित करने वाली रेखाएँ क्या कहलाती है?

(a) आइसोथर्म

(b) आइसोबार

(c) आइसोहेलाइन

(d) आइसोहाइट

[read more] (c) आइसोहेलाइन [/read]

19. आइसोबाथ रेखाएँ प्रदर्शित करती है-

(a) समान वर्षा वाले क्षेत्र

(b) समान बादल वाले क्षेत्र

(c) समान वायुदाब वाले क्षेत्र

(d) समुद्र तल के समान गहराई वाले क्षेत्र

[read more] (d) समुद्र तल के समान गहराई वाले क्षेत्र [/read]

20. मानचित्र में वे रेखाएँ जहाँ दाब सम हो, कहलाती है-

(a) देशान्तर रेखाएँ

(b) अक्षांश रेखाएँ

(c) समदाब रेखाएँ

(d) समस्थानिक

[read more] (c) समदाब रेखाएँ [/read]

21. मानचित्र पर आइसोहाइप्स रेखाओं द्वारा निम्न में से किसका प्रदर्शन किया जाता है?

(a) समान वर्षा की मात्रा

(b) पवन की समान गति वाले स्थान

(c) मेघाच्छादन के समान क्षेत्र

(d) समुद्रतल से समान ऊँचाई

[read more] (d) समुद्रतल से समान ऊँचाई [/read]

 2. मानचित्र के प्रकार 

 2. मानचित्र के प्रकार / Type of Map


मानचित्र के प्रकार

मानचित्र मापनी के आधार पर दो प्रकार के होते हैं: 

(1) Large Scale Map (बड़ी मापक मानचित्र)

(i) Cadastral Map (भूसम्पति मान‌चित्र) 

(ii) Topographical Map (स्थलाकृति मानचित्र)

(2) Small Scale Map (छोटी मापक मानचित्र)

(i) Wall Map (दीवारी मानचित्र)

(ii) Atlas Map (एटलस मानचित्र)

1. Large Scale Map (बड़ी मापनी मानचित्र)

            एक छोटे भूभाग को बड़े इकाई (Scale/ मापनी) पर दिखाये जाने वाले मानचित्र को Large Scale Map कहते हैं।

1cm = 10km.

(i) Cadastral Map (भूसम्पति मानचित्र) 

⇒ यह एक Large Scale Map है।

⇒ यह एक ऐसा Map है जिस पर किसी एक गाँव का, ग्राम पंचायत का, खेतों के मेढ़ को, ग्रामीण रास्तों को, गाँव में मिलने वाला कुँआ, छोटे -2 जलाशय, सार्वजनिक स्थान इत्यादि को प्रदर्शित किया जाता है। यह Map भूमि Survey करने वाले अमीन, C.O. और जिला में अवस्थित survey विभाग के पास होता है।

⇒ भूसम्पति मानचित्र का प्रयोग भूराजस्व पदाधिकारी कर वसूली में करते हैं। इसके अलावे इसका प्रयोग नगर नियोजन एवं भूमि उपयोग के नियोजन में किया जाता है।

⇒ भारत के गाँवों में 1:3960 या 16″ = 1 मील से 1:1980 (32″ = 1 मील) तक पैमाना पर भूसम्पत्ति मानचित्र बनाये जाते हैं।

(ii) स्थलाकृतिक मानचित्र (Topographical Map)

⇒ जहाँ Cadastral Map में निजी भवन, ग्रामीण कुँआ, जलाशय इत्यादि को प्रदर्शित किया जाता है वहीं स्थलाकृतिक मानचित्र पर विभिन्न प्रकार के स्थलाकृतिक लक्षण जैसे उच्चावच, प्रवाह प्रणाली, वन क्षेत्र, दलदली क्षेत्र इत्यादि को गाँव के साथ -2 दिखाया जाता है।

⇒ स्थलाकृतिक मानचित्र पर प्राकृतिक विशेषताओं के साथ-साथ सांस्कृतिक भूदृश्य को भी प्रदर्शित करते हैं।

⇒  स्थलाकृतिक मानचित्र सामान्यत: 1: 2,50,000 (1″ = 4 मील) से 1: 62500 (1″ = 1 मील) तक की मापनी पर बनाया जाता है।

⇒ 1″ = 4 मील से छोटी मापनी पर बनने वाला स्थलाकृतिक मानचित्र को ही भौगोलिक मानचित्र कहते हैं।

⇒ भारत में स्थलाकृतिक मानचित्रों का निर्माण 1: 62500 को 1: 50000 की मापनी में बदलकर प्रदर्शित किया जाता है।

(2) छोटी मापनी का मानचित्र (Small Scale Map)

⇒ छोटी मापनी के मानचित्र पर बहुत बड़े भूभाग को मानचित्र के छोटे इकाई पर प्रदर्शित करते हैं। जैसे:- 1m = 10,000 km 

(i) दीवाल मानचित्र (Wall Map)

⇒ दीवाल मानचित्र एक ऐसा मानचित है जिसपर पूरे विश्व को, एक महाद्वीप को, एक देश को, एक राज्य को, एक जिला को प्रदर्शित किया जाता है।

⇒ Wall Map का प्रयोग मुख्यतः शिक्षण संस्थानों या कार्यालयों में किया जाता है।

⇒  Wall Map की मापनी Atlus Map के मापनी से बड़ी होती है। लेकिन स्थलाकृतिक मानचित्र के तुलना में छोटी होती हैं।

⇒  भारत में Wall Map 1: 15000000 1: 25,00000 के मापनी पर बनाया जाता है।

(ii) Atlas Map (एटलस मानचित्र)

Atlas Map एक Small Scale Map है। इन मानचित्रों में एक छोटे से कागज के पन्नों पर पूरे विश्व, महाद्वीप, देश, इत्यादि को प्रदर्शित किया जाता है। इस प्रकार के मानचित्र 1:2,0000000 के मापनी पर बनाये जाते हैं। इस प्रकार के मानचित्र पर अलग -2 क्षेत्रों को अलग-2 रंग से प्रदर्शित करते हैं। इसलिए इसे “क्षेत्र वर्णी मानचित्र” भी कहते हैं।

भारत में सरकारी एटलस का प्रकाशन Survey of India, देहरादून द्वारा होता है

⇒ भारतीय सर्वेक्षण विभाग भारत के रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

⇒ भारत में सर्वप्रथम प्रो० S.P. चटर्जी ने “बंगाल इन Maps” एटलस प्रकाशित किया था।

⇒ भारत के महापंजीकार कार्यालय के अधीन कार्यरत जनगणना विभाग ने पूरे देश और सभी प्रान्तों का 32 खण्डों में विभक्त कर एक एटलस का प्रकाशन किया है।

NOTE ग्लोब⇒ यह पृथ्वी का वास्तविक प्रतिरूप होता है। इसका आकार गोल तथा 23 1/2° अक्ष पर झुका होता है।

⇒ उद्देश्य एवं विषय सामग्री के आधार पर मानचित्र के प्रकार। 

               इसके आधार पर मानचित्र को दो भागों में बाँटते है:

(A) प्राकृतिक मानचित्र 

(i) खगोलीय मानचित्र (Astronomical Map)

(ii) स्थलीय मानचित्र (Orographic Map) Relief Map

(iii) भूगर्भीक मानचित्र (Geological Map) – इसमें चट्टानों के संस्तर को प्रदर्शित करते हैं। चट्टानों के एक संस्तर को Bed कहते हैं।

मानचित्र के प्रकार

(iv) जलवायु मानचित्र (Climate Map) 

(v) वनस्पति मानचित्र (Vegitation Map) 

(vi) मृदा मानचित्र (Soil Map)

(B) सांस्कृतिक मानचित्र 

        यह भी कई प्रकार का होता है। जैसे- आर्थिक मानचित्र,  राजनीतिक मानचित्र, सैनिक मानचित्र, ऐतिहासिक मानचित्र, सामाजिक मानचित्र, वितरण मानचित्र 

वितरण मानचित्र  (Distribution Map)

⇒ भौगोलिक तत्वों को वितण मानचित्र के माध्यम से प्रदर्शित करते हैं। यह मूलतः चार प्रकार का होता है।

(i) रंगारेखी मानचित्र (Chromatic Map) 

⇒ जब मानचित्र पर विभिन्न आकड़ों को विभिन्न रंगों के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है तो उसे Chromatic Map (रंगारेखी मानचित्र) कहते हैं।

(ii) प्रतीक चिह्न

⇒ इसमें फसलों, खनिजों आदि के वितरण प्रदर्शित करने वाले मानचित्र में अक्षरों एवं वर्णों का प्रयोग कर जो मानचित्र प्रस्तुत किया जाता है। वैसे Map को क्रोसमैटिक मैप कहते हैं।

(iii) सम्मान रेखा मानचित्र (Isopleth)

⇒ ऐसा मानचित्र जिसपर भौगोलिक तत्वों को समताप रेखा (Isotherm), समवर्षा रेखा (Isohyte), समधूप रेखा (lsohel), समोच्च रेखा (Contour) के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। 

(iv) वर्णमात्री मानचित्र (Choropleth map) 

⇒ वैसा मानचित्र जिसमें भौगोलिक तत्वों को आड़ी तिरछी लम्बवत रेखाओं के द्वारा प्रदर्शित करते हैं उसे Choropleth कहते हैं।

नोट:- Atlas में सबसे ज्यादा प्रयोग रंगारेखी मानचित्र (Chromatic Map) का किया जाता है।


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  1.Cartography / मानचित्रावली

Cartography

मानचित्रावली

         पृथ्वी के समस्त भूभाग अथवा किसी एक भाग को कागज पर सांकेतिक चिन्हों के द्वारा उचित मापक (Scale) तथा प्रक्षेप (Projection) पर चित्रण को ही मानचित्र कहते हैं। और इस प्रकार मानचित्रों के संग्रह को मानचित्रावली अथवा एटलस (Atlas) कहा जाता हैं। 

 किसी भी मानचित्र की शुद्धता एवं उपयोगिता निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है:-

(1) दिशा (Direction) – 10

Cartography

N = North – उत्तर

S = south – दक्षिण

E = East – पूरब

W = West – पश्चिम

NE = इषाण कोण

NW =  वायु कोण

SW = नैऋत्य कोण

SE = आग्नेय कोण

Zenith = आकाश

Nadir = पाताल

(2) मापक (Scale)

(3) उचित प्रक्षेप (Suitable Projection)

(4) उचित सांकेतिक चिह्न

(5) मानचित्रकार की कुशलता

(6) उचित निर्माण की विधि

✶मानचित्र निर्माण करने की विधि

(1) सर्वेक्षण विधि के द्वारा

(2) फोटोचित्रण विधि के द्वारा

(3) रेखाचित्रों एवं आरेख के द्वारा

(4) कम्प्यूटर एवं दूर संवेदन विधि के द्वारा 

नोट :- सर्वेक्षण विधि में मानचित्र बनाने हेतु जरीब, थियोडोलाइट, प्रिज्मेटिक कम्पास, शाहुल जैसे उपकरण का प्रयोग किया जाता है।

✶मानचित्र रचना के इतिहास को निम्नलिखित चरण में बाँटते हैं:-

(1) प्राचीन काल

(2) अंध काल – युरानी -रोमन के पत्नन से शुरू

(3) पुनर्जागरण काल – 1500-1600 ई०

(4) आधुनिक काल – औद्योगिक क्रांति से

I प्राचीन काल

➡ 3000 वर्ष पूर्व सर्वप्रथम मिस्र के लोगों ने मानचित्र निर्माण की कला का विकास किया।

* वास्तव में यूनानी विद्वानों को मानचित्र प्रारंभ करने का श्रेय जाता है। जैसे: –

(1) इरैटोस्थनीज ने सर्वप्रथम पृथ्वी के परिधि को अनुमानित किया तथा उसने भूमध्य रेखा को भी निर्धारित करने का प्रयास किए।

(2) हिप्पारकस ने पहली बार विश्व मानचित्र पर अक्षांश और देशान्तर रेखाओं का जाल खींचा। 

(3) क्रेटस ने पहली बार यह अनुमान लगाया कि पृथ्वी की आकृति एक गोलाभ के समान है।

(4) टॉलेमी

पुस्तक- “ज्योगरफिया सिन्टैक्सिस” या “अल्मागस्ट”

           इस पुस्तक में टॉलमी ने मानचित्र निर्माण हेतु वैज्ञानिक आधार प्रस्तुत किए। उन्होंने मानचित्र के संबंध में बताया कि मानचित्र में निम्नलिखित तीन गुण आवश्य होना चाहिए:-

(1) दिशा शुद्ध होनी चाहिए।

(2) आकृति शुद्ध होती चाहिए।

(3) क्षेत्रफल शुद्ध होनी चाहिए।

II अंध काल

➡अंधकाल में बनाये गये मानचित्र में पृथ्वी को चपटा दिखाया गया और पृथ्वी के केन्द्र में एरुसेलम या जेरूसेलम को दिखाया गया। 

➡अंध काल का प्रारंभ: 6 ठी शताब्दी से मानी जाती है। और 15वीं शताब्दी तक रही। इस काल में रोमन सभ्यता का उदय हुआ। लोगों के सोच पर चर्च और पोप का जबरदस्त प्रभाव पड़ा जिसके कारण लोगों के वैज्ञानिक चिंतन समाप्त हो गई। 

III. पुनर्जागरण काल

➡ पुनर्जागरण काल की   शुरूआत 16वीं शताब्दी से होती है। 

➡डच (आयरलैण्ड)वैज्ञानिक/विद्वान मर्केंटर महोदय ने मानचित्र कला को टॉलेमी के प्रभाव से मुक्त किया।  

➡ फ्रांसीसी विद्वान कैसीनी वे 1779 ई० में फ्रांस के सर्वेक्षण कर मानचित्रावली का प्रकाशन किया।

➡इसी काल में या 1767 ई० में सर्वेक्षण विभाग की स्थापना की गई। 

IV आधुनिक काल

➡ आधुनिक काल की  शुरुआत औद्योगिक क्रांति के बाद से मानी जाती है। इसे मानचित्र निर्माण कला का स्वर्ण युग कहा जाता है।

➡ इस चरण में मानचित्र का निर्माण सुदूर संवेदन प्रणाली इत्यादि के द्वारा किया जाने लगा ।

➡भारत में 1924 ई0 से कैमरा के द्वारा या वायुफोटोग्राफी की पद्धति प्रारंभ हुई। 

➡भारत में 1975 ई० से सुदूर संवेदन प्रणाली का विकास हुआ।

➡भारत में मुद्रणकला का विकास 1804 ई०-1860 ई० के बीच हुआ। इसी काल में जर्मनी में Stieler, फ्रांस में ब्लाश और मारटीन तथा इंगलैण्ड में “Bartholemou” नामक मानचित्रावली प्रकाशित की गई।

✶मानचित्र के निर्माण में निम्नलिखित उपकरण की आवश्यकता पड़ती है।

(1) Set BoX (औजार बॉक्स)

(2) Protactar (चाँद) 

(3) Scale

(4) Dividers

(5) Pencil

(5) Set Square (प्रकाल)

(6) इरेजर

(2) T- Square का Scale

(3) Drawing Board / Table 

(4) स्लाइड कैलीपस

(5) इंडियन इंक

(6) Sticking टेप

(7) साण्डरस या काइंड्स किण्ड Drawing Paper

(8) UNO स्टेनसिल

(9) लीराय Pen


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