अध्याय 13 समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन

 खण्ड (ब)  अध्याय 13 समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन 

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें


 अध्याय 13 समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन 

13 समुदाय आधारित आपदा प्रबंवस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
 
1. आपदा प्रबंधन के तीन प्रमुख अंगों में कौन एक निम्नलिखित में शामिल नहीं है?
(क) पूर्वानुमान,चेतावनी एवं प्रशिक्षण
(ख) आपदा के समय प्रबंधन गतिविधियाँ
(ग) आपदा के बाद निश्चित रहना
(घ) आपदा के बाद प्रबंधन का कार्य करना
उत्तर – (ग) आपदा के बाद निश्चित रहना 
2. प्रत्येक ग्रीष्म ऋतु में कौन सी आपदा लगभग निश्चित है?
(क) आगजनी
(ख) वायु दुर्घटना
(ग) रेल दुर्घटना
(घ) सड़क दुर्घटना
उत्तर – (क) आगजनी
3. सामुदायिक प्रबंधन के अन्तर्गत निम्नलिखित में से कौन एक प्राथमिक क्रियाकलाप में शामिल नहीं है? 
(क) निकटतम प्राथमिक चिकित्सा केंद्र को सूचना। 
(ख) प्रभावित लोगों को स्वछ जल और भोजन की उपलब्धता की गारंटी करना।
(ग) आपदा की जानकारी प्रशासन तंत्र को नहीं देना।
(घ) आपातकालीन राहत शिविर की व्यवस्था करना। 
उत्तर – (ग) आपदा की जानकारी प्रशासन तंत्र को नहीं देना। 
4. ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति के प्रमुख कार्य नहीं है?
(क) प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं करना।
(ख) सभी को सुरक्षा देना।
(ग) राहत शिविर का चयन एवं राहत पहुँचाने का कार्य करना।
(घ) स्वछता का ख्याल रखना।
उत्तर – (क) प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं करना।
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1.अग्निशमन दस्ता आने के पूर्व समुदाय द्वारा कौन से प्रयास किए जाने चाहिए?
उत्तर- अग्निशमन दस्ता के आने के पूर्व ही समुदाय इसके प्रभाव को कम करने का प्रयास करता है। ये निम्नलिखित काम होना चाहिए-
◆झुलसे हुए लोगों को एक जगह ले जाकर प्राथमिक उपचार आवश्यक है। 
◆आगजनी स्थिति में पंचायत या विद्यालय भवन में ले जाना महत्वपूर्ण है। 
◆ जले हुए भाग पर पानी डालना और चंदन के लेप लगाने से जले लोगों को बड़ी राहत मिलती है 
◆ जले हुए भाग पर बर्फ के उपयोग से भी राहत मिलती है। 
◆टेलीफोन या मोबाइल का प्रयोग करते हुए निकटतम अस्पताल से एंबुलेंस को मंगाकर अर्द्ध जले हुए लोगों को अच्छे उपचार के लिए अस्पताल पहुँचाना चाहिए।
◆ जले हुए क्षेत्र पर जल का छिड़काव करें या खलिहान के फसल को हटाने का कार्य करें।
2.ग्रामीण स्तर पर आपदा प्रबंधन समिति के गठन में कौन-कौन से सदस्य शामिल होते हैं?
उत्तर- ग्रामीण स्तर पर आपदा प्रबंधन समिति के गठन में निम्नलिखित सदस्य होते हैं-
◆ विद्यालय के प्रधानाचार्य
◆ गाँव के मुखिया
◆ गाँव के सरपंच
◆ गाँव के दो समर्पित
◆ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का एक डॉक्टर
◆ राष्ट्रीय सुरक्षा सेवा के सदस्य (NSS)
◆ ग्राम सेवक
◆  स्वयं सहायता समूह की दो महिलाएँ 
3.आपदा प्रबंधन के लिए समुदाय में किन अच्छे गुणों का होना आवश्यक है?
उत्तर- आपदा प्रबंधन के लिए समुदाय में निम्नलिखित अच्छे गुणों का होना आवश्यक है-
◆ समुदाय के लोग व्यक्तिगत हितों की अपेक्षा समाज के हित का ध्यान रखें।
◆ सामूहिक कार्यों के लिए साहसी, परिश्रमी लोगों का चयन करना चाहिए। कमजोर, आलसी और लालची लोग समाज पर बोझ बन जाते हैं।
◆ सामूहिक संगठन के सदस्यों में जात-पात, धर्म-संप्रदाय की तुच्छ भावना की जगह मानव कल्याण और सद्भाव की भावना रहनी चाहिए।
◆ सदस्यों में सजगता आवश्यक है जिससे वे आपदा से निपटने के लिए तुरंत काम कर सकें। अनेक ऐसे उदाहरण है जब समाज के प्रबुद्ध लोगों ने संप्रदायिक मतभेदों को दूर कर बड़ी घटनाओं को रोका है।
◆ समुदाय के लोगों में साहस, उत्साह तथा न्याय के गुण होने चाहिए, गैर-कानूनी कार्य करने वालों पर सख्ती बरतना भी समुदाय का आवश्यक गुण है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. आपदा प्रबंधन में समुदाय की केंद्रीय भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर- आपदा का रूप कोई भी क्यों ना हो उसका विनाशकारी प्रभाव जान-माल पर पड़ती ही है। आपदा का पहला झटका मनुष्य को ही लगता है और मनुष्य ही आपदा को पहला झटका भी देता है। जब वह आपदा को न्यून करने का समुदायिक प्रयास प्रारंभ करता है। आपदा से होने वाली वास्तविक ह्रास का सही अनुमान समुदाय ही लगा सकता है। आपदा प्रबंधन के लिए जो भी आकस्मिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती है उसके वितरण में तथा प्रत्येक परिवार तक उसके लाभ को पहुँचाने में समुदाय की केंद्रीय भूमिका होती है।
        समुदाय ही आपदा के पूर्वानुमान की जानकारी देता है और समुदाय के लोग ही सबसे पहले आपदा का सामना करते हैं। आपदा में मकान जल सकते हैं, घरें गिर सकती है, बाढ़ आ सकता है, किंतु समुदाय नहीं टूटता है। समुदाय सुख-दुख का साथी होता है और भारत जैसे ग्रामीण देश में आपदा प्रबंधन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी समुदाय की होती है। प्रशासनिक प्रबंधन कार्य और स्वयंसेवी संस्थाओं का प्रबंधन कार्य भी सामुदायिक नेतृत्व के माध्यम से ही सफलता पूर्वक संभव होता है।
2. ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति के कार्यों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर – ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति के निम्नलिखित कार्य होते हैं-
◆ पूर्वानुमान के आधार पर चेतावनी एवं सूचना देना- यह प्रबंधन समिति जिला मुख्यालय से प्राप्त सूचनाओं को तत्काल लोगों तक पहुंच जाएगा।
◆ राहत शिविर का चयन और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने का कार्य- इसी के साथ जिला प्रशासन को सूचित करेगा अगर आगजनी है तो दमकल को सूचित करेगा।
◆ राहत कार्य- मुख्य रूप से लोगों को भोजन एवं पेयजल उपलब्ध कराना। 
◆ प्राथमिक उपचार की व्यवस्था।
◆ सभी को सुरक्षा देना- महिला, बच्चों को विशेष रुप से ध्यान देना।
◆ स्वच्छता का ख्याल रखना- स्वच्छता रखने से विभिन्न प्रकार की बीमारी नहीं फैलती है।
3. आपदा प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी को कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है?
उत्तर- आपदा प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी को निम्नलिखित प्रकार से सुनिश्चित किया जा सकता है-
◆ निकटतम विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच यह घोषित करना कि बाढ़ अथवा आंधी की संभावना है इसलिए घर में लोगों को सचेत कर देना।
◆ मंदिर, मस्जिद या गिरजाघर में जाकर प्राकृतिक अथवा मानव जनित संभावित आपदाओं की जानकारी देना। यह जानकारी उस समय उचित होगा जब प्रार्थना के लिए अधिक से अधिक लोग उपस्थित हों। यदि आवश्यक हो तो धर्मस्थल में लगे हुए सार्वजनिक उदघोषणा के द्वारा भी जानकारी दी जा सकती है।
◆ ऐसे परिवारों की सूची बनाना जहाँ अत्यधिक उम्र के वृद्ध, शिशु, गर्भवती महिला, बीमार और विक्षिप्त लोग हों। ऐसे लोगों के विस्थापन हेतु विशेष दल का गठन करना।
◆ पंचायत भवन और गाँव के विद्यालय में राहत शिविर के लिए आपातकालीन व्यवस्था करना जिसमें खान-पान के अतिरिक्त नाव, तैरनेवाले जैकेट, चिकित्सक और अभियंताओं की व्यवस्था करना।

◆ आगजनी, महामारी, जाति और संप्रदायिक तनाव और ओलावृष्टि जैसे आपदा में परिवहन की व्यवस्था खना, जो संबंधित अधिकारी तक मोबाइल अथवा फोन नहीं रहने पर सूचना पहुँच सके।


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बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

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अध्याय 11 मानवीय गलतियों के कारण घटित आपदाएँ : नाभिकीय, जैविक और रासायनिक

अध्याय 11 मानवीय
11.3 नाभिकीय
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. इनमें से कौन परमाणु ऊर्जा केन्द्र है?
(क) कैगा
(ख) वाराणसी
(ग) दिल्ली
(घ) मेरठ
उत्तर – (क) कैगा
 
2. हीरोशिमा किस देश में है?
(क) भारत
(ख) जापान
(ग) चीन
(घ) ताईवान
उत्तर – (ख) जापान
 
3. परमाणु विस्फोट से बचने के लिए सर्वप्रथम प्रतीक चिन्ह का विकास किसने किया है?
(क) टोकियो विश्विद्यालय
(ख) कैम्ब्रिज विश्वद्यालय
(ग) कैलिफोर्निया विश्विद्यालय
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर – (ग) कैलिफोर्निया विश्विद्यालय (1946)
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. परमाणु ऊर्जा क्या है?
उत्तर – परमाणु के नाभिक के संलयन तथा विखंडन की प्रक्रियाओं द्वारा काफी अधिक मात्रा में ऊर्जा निकलती है जिसे परमाणु ऊर्जा कहा जाता है। इसके अंतर्गत यूरेनियम और प्लूटोनियम जैसे खनिजों का उपयोग किया जाता है।
 
2. विश्व में सर्वप्रथम परमाणु बम किस देश पर गिराया गया था?
उत्तर – परमाणु बम का सर्वप्रथम विस्फोट 1945 ई० में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में जापान के दो नगरों पर परमाणु बम गिराया गया था। सर्वप्रथम 6 अगस्त, 1945 में हवाई हमले के द्वारा हिरोशिमा पर तथा पुनः 9 अगस्त, 1945 को नागासाकी पर परमाणु बम गिराये गए। इससे लाखों लोगों की मौत हुई।
 
3. भारत के किस राज्य में परमाणु परीक्षण किया गया?
उत्तर – भारत के राजस्थान के मरुस्थल(पोखरण) में परमाणु परीक्षण किया गया था।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. रेडियेशन से क्या क्या हानि होती है ? मनुष्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी दें।
उत्तर – रेडियेशन से निम्नलिखित हानि होती है- 
(i) रेडियेशन के प्रभाव से जीवों में अनुवांशिक पदार्थ (Genetic Materials) में उत्परिवर्तन की दर में वृद्धि होती है जिसके परिणामस्वरुप हड्डी का टी० वी०, कैंसर, शारीरिक विकृतियां तथा अंगों के समुचित विकास में असमानताएँ उत्पन्न हो सकती है। 
(ii) पराबैगनी किरणों के प्रभाव से त्वचा संबंधी रोग  हो सकते हैं। 
(iii) नाभिकीय विस्फोटों  होने से ओजोन की सुरक्षा परत का क्षय होता है।
(iv) रेडियोधर्मी पदार्थों के रेडियेशन से ब्लड कैंसर, बांझपन, दृष्टिदोष आदि रोग हो सकते हैं।
 
2. परमाणु ऊर्जा से क्या लाभ है।  वर्णन करें।
उत्तर – परमाणु ऊर्जा से निम्नलिखित लाभ होते हैं-
◆ बिजली के उत्पादन में,
◆ परमाणु बम्ब बनाने में,
◆ इससे गाड़ियाँ चलाई जा सकती है,
11.2 रासायनिक आपदा (Chemical Disaster)
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
 
1. भोपाल में रसायनिक गैस रिसाव कब हुआ था?
(क) 1984
(ख) 1990
(ग) 1930
(घ) 2004
उत्तर – (क) 1984
 
2. तूतीकोरिन में 1997 ई० में गैस रिसाव से कौन-सी बीमारी उतपन्न हुई थी?
(क) उल्टी होना
(ख) सर्दी एवं खाँसी
(ग) उल्टी होना एवं छाती में जलन
(घ) मस्तिष्क ज्वर
उत्तर – (ग) उल्टी होना एवं छाती में जलन
 
3. अम्लीय वर्षा का सर्वाधिक प्रभाव कहाँ पड़ा
(क) पटना महानगर
(ख) दामोदर घाटी क्षेत्र
(ग) उत्तरी बिहार
(घ) असम घाटी क्षेत्र
उत्तर – (ख) दामोदर घाटी क्षेत्र
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. किस देश द्वारा गैस के प्रयोग से यहूदियों को मारा गया था।
उत्तर – जर्मनी द्वारा गैस के प्रयोग से यहूदियों को मारा गया था।
 
2. कीटनाशक में किस रासायनिक पदार्थ का प्रयोग होता है?
उत्तर – कीटनाशक में मिथाइल आइसोसाइनेट तथा हाइड्रोजन साइनाइड रसायन का प्रयोग किया जाता है 
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
 
1. गैस रिसाव होने पर किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए?
उत्तर – गैस रिसाव की स्थिति में वहाँ मौजूद सभी लोगों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की जरूरत है ताकि वे सभी लोग वायु की उल्टी दिशा में जायें। गैस रिसाव पर लोगों को यथाशीघ्र मास्क लगा लेना चाहिए। सभी कर्मचारियों की एक निश्चित अंतरात पर चिकित्सों द्वारा जाँच होनी चाहिए। कारखानों में सायरन की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि तत्काल सभी को सूचित किया जा सके।
 
2. रासायनिक आपदा के अंतर्गत आने वाली समस्याओं का वर्णन करें।
उतर – रासायनिक आपदा के अंतर्गत निम्नलिखित तीन समस्याएँ आती है-
 
(i) विषेले रासायनिक उत्पाद से उत्पन्न छिपी हुई आपदाएँ
 
(ii) रासायनिक युद्ध सामग्री के उपयोग से उत्पन्न आपदाएँ 
 
(iii) रासायनिक औद्योगिक इकाइयों में रिसाव और कचरे से उत्पन्न आपदाएँ
 
(i) विषैले रासायनिक उत्पाद से उत्पन्न छिपी हुई आपदाएँ – इसआपदा का सर्वाधिक प्रभाव कृषि उत्पाद पर देखने को मिलता है। रासायनिक खाद और कीटनाशक के प्रयोग से न सिर्फ मृदा के सूक्षम जीवों का विनाश होता है बल्कि उत्पाद भी विषैली हो जाता है। इसके अलावा कई प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती है जो जानलेवा साबित होती हैं। इससे हमेशा अम्लीय वर्षा का डर बना रहता है विशेषकर महानगरों में।
 
(ii) रासायनिक युद्ध सामग्री के उपयोग से उत्पन्न आपदाएँ – रासायनिक आयुध के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के जहरीले गैसों के प्रयोग के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थों में भी ऐसे गैस सन्निहित होते हैं जिनके प्रभाव से त्वचा में जलन और गलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है यहाँ तक कि मृत्यु भी हो जाती है।
 
(ii) रासायनिक औद्योगिक इकाइयों में रिसाव और कचरे से उत्पन्न आपदा – गैस रिसाव बड़ी आपदा का रूप ले सकता है। भोपाल गैस रिसाव (1984) इसका प्रमाण है। पुनः 1999 में तमिलनाडु के तूतीकोरिन गैस रिसाव के उदाहरण है। 
 
11.3  जैविक आपदा (Biological Disaster)
 
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
 
1. डेंगू बीमारी का क्या कारण है?
(क) आग लगने से
(ख) एक बर्तन में अधिक समय तक पानी रहने से
(ग) बाढ़ आने से
(घ) गंदे भोजन से
उत्तर – (ख) एक वर्तन में अधिक समय तक पानी रखने से
 
2. एंथ्रेक्स क्या है?
(क) अति सूक्ष्म जीव
(ख) युद्धपोत
(ग) जंगली जानवर
(घ) युद्ध का एक अस्त्र
उत्तर – (क) अति सूक्ष्म जीव
 
3. भारत में एड्स से लगभग कितने लोग प्रभावित है?
(क) 25 लाख
(ख) 30 लाख
(ग) एक करोड़
(घ) 50 लाख
उत्तर – (क) 25 लाख
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर:
 
1. प्लेग और हैजे का क्या कारण है?

उत्तर – प्लेग – पास्चुरेला पेस्टिस नामक जीवाणु से होता है 

हैजे – विब्रियो कॉमा नामक जीवाणु से होता है
2.एड्स की बीमारी के कारणों को बतायें।
उत्तर – एड्स वायरस जनित बीमारी है। इसका फैलाव वंशानुगत या दूषित रक्त चढ़ाने से होता है। बड़ों में यह असुरक्षित यौन संबंध के कारण होता है।
 
3. हेपाटाइटिस बीमारी के कारणों को बतायें।
उत्तर – यह हेपेटाईटिस बी (HBV) नामक वायरस के कारण होता है। इससे लीवर व यकृत को क्षति होती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर:
 
1. जैविक आपदा कितने प्रकार के हैं ? उनका संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर – जैविक आपदा को चार वर्गों में विभाजित किया गया है-
(i) कम विनाशकारी बीमारियाँ
(ii) घातक बीमारियाँ
(iii) भरे क्षेत्र को प्रभावित करने वाले अति घातक बीमारियाँ
(iv) दीर्घकाल तक प्रभावित करने वाली बीमारियाँ
 
(i) कम विनाशकारी बीमारियाँ- प्रथम वर्ग में उन बीमारियों को रखा गया है जिसका कारण सूक्ष्म जीवाणु और वायरस होता है। ये वो जीवाणु और वायरस होते हैं जो चिकन पॉक्स, केनिन, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियाँ उत्पन्न करते हैं। ये वो बीमारी है जो अति विनाशकारी नहीं होते हैं। इसे तात्कालिक बचाव के लिए कुछ सामान्य नियमों का पालन करना आवश्यक है। जैसे- ग्लब्स, मास्क जैसे सामानों का सतत प्रयोग करना चाहिए। दूषित पदार्थों के उपयोग से भी जैविक आपदा उत्पन्न होती है।
 
(ii) घातक बीमारियाँ- इस जैविक आपदा के अंतर्गत ऐसी बीमारियों को रखा गया है जिनकी उत्पत्ति का कारण सूक्ष्म जीवाणु और वायरस है। इस वर्ग से उत्पन्न बीमारियों में हेपेटाइटिस ए, बी और सी, इनफ्लुएंजा, लाइम डिजीज मिजिल्स, चिकेन-पॉक्स और एड्स जैसी बीमारियाँ संभव है। ऐसी बीमारियों से बचने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण आवश्यक है।
 
(iii) भरे क्षेत्र को प्रभावित करने वाले अति घातक बीमारियाँ- जैविक आपदा के तीसरे भाग में ऐसे सूक्ष्म जीवाणु और वायरस को रखा गया है जो मानव समूह के लिए विनाशकारी आपदा ला सकता है। इसके अंतर्गत एंथ्रेक्स, पश्चिमी नील वायरस, वेनेजुएलियन एन्सेफेलाइटिस, स्मॉल पॉक्स, ट्यूबरक्लोसिस वायरस, रिफ्ट वैली बुखार, येलो बुखार तथा मलेरिया, हैजा, डायरिया प्रमुख है।
 
(iv) दीर्घकाल तक प्रभावित करने वाली बीमारियाँ- चौथे स्तर के जैविक आपदा के अंतर्गत अति विनाशकारी वायरस को रखा गया है। इसमें आने वाले वायरस वोलीवियन तथा अर्जेंटियन बुखार तथा वर्ल्ड फ्लू, एड्स, डेंगू बुखार, मारवर्ग बुखार, एबोला बुखार इत्यादि प्रमुख है।
 
2. जैविक अस्त्र क्या है ? इससे उत्पन्न समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर – युद्ध के मारक अस्त्रों में अब नई तकनीक के अस्त्र बनाए गए हैं जिन्हें जैविक अस्त्र कहते हैं। इसे भारी विनाश का अस्त्र भी कहा गया है। जैविक अस्त्रों की तकनीक का विकास जापानियों द्वारा किया गया। किंतु जैविक अस्त्रों का वास्तविक प्रयोग 2001 में संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले के बाद प्रारंभ हुआ। एंथ्रेक्स नाम के जवानों को अमेरिका के महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्रों में डाक सेवा के द्वारा अथवा अज्ञात व्यक्तियों द्वारा पहुँचाया जाने लगा।                       
 
3. जैविक आपदा से बचाव के उपाय बतायें।
उत्तर – जैविक आपदा से बचाव के लिए आपदा जोखिम प्रबंधन की आवश्यकता होती है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित बातें हैं-
(i) गर्म पानी पीना एवं ताजा भोजन ग्रहण करना चाहिए।
(ii) आवश्यक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव तथा प्रशासनिक प्रतिबद्धता आवश्यक है। 
(iii) अनजान व्यक्ति द्वारा दिये गये किसी भी प्रकार के डिब्बे या सामान को हाथ लगाने या छूने की जरूरत नहीं क्योंकि इसमें एंथ्रेक्स की संभावना हो सकती है। 
(iv) किसी अनजान वस्तु को छूने के लिए ग्लब्स का प्रयोग किया जाना चाहिए।
(v) कुत्ते के दलों की मदद से जैविक अस्त्रों की जगह की पहचान की जानी चाहिए है।

(vi) जैविक अस्त्रों के विरुद्ध अत्यन्त कठोर अंतरराष्ट्रीय स्त पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।


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अध्याय 12 सामान्य आपदायें : निवारण एवं नियंत्रण

अध्याय 12 सामान्य

वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर 

1. सामान्य आपदाओं को कितने वर्गो में रखा गया है?
(क) 1
(ख) 2
(ग) 3
(घ) 4
उत्तर – (ख) 2
 
2. तीव्र ज्वार का कारण है?
(क) जीवाणु
(ख) विषाणु
(ग) फंगस
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (क) जीवाणु
 
3. नगरों में सड़क कहाँ से पार करनी चाहिए?
(क) जहाँ जेब्रा का चिन्ह नहीं बना हो
(ख) जहाँ जेब्रा का चिन्ह बना हो
(ग) अपनी स्वेच्छा के अनुसार
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (ख) जहाँ जेब्रा चिन्ह बना हो
 
4.पैदल चलते समय सड़क पर चलना आदर्श है?
(क) दायीं तरफ
(ख) बीच से
(ग) बायीं तरफ
(घ) स्वेच्छा से
उत्तर – (ग) बायीं तरफ 
 
5. रेल यात्रा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
(क) रेल फाटकों को पार करते समय दायीं बायीं नहीं देखना चाहिए।
(ख) रेल यात्रा के दौरान ज्वलनशील पदार्थ नहीं ले जाना चाहिए।
(ग) बच्चों को रेलवे लाइन पर करने के नियमों की जानकारी नहीं होनी चाहिए।
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (क) रेल यात्रा के दौरान ज्वलनशील पदार्थ नहीं ले जाना चाहिए।
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. हवाई यात्रा करते समय सुरक्षा के कौन से नियम ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर – हवाई यात्रा करते समय सुरक्षा के निम्नलिखित नियम ध्यान में रखना चाहिए-
◆ यात्री सुरक्षा संबंधी नियमों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसका पालन करें।
◆ जब आप सीट पर बैठें तो सीट बेल्ट बांधे रखें और संकेतों का पालन करें।
◆ आपातकालीन द्वार के बारे में पहले से जानकारी प्राप्त कर लें।
◆ यात्रियों की शिनाख्त कड़ाई के साथ किया जाना चाहिए।
◆ विमान में चढ़ने के पूर्व यात्रियों के सामानों का अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों की मदद से जांच की जानी चाहिए।
 
2. रेलवे फाटक पार करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर – रेलवे फाटक पार करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए –
◆ रेलवे लाइन पार करते समय सिग्नल तथा दोनों तरफ रेल पथ  को देख लेना चाहिए।
◆ रेल फाटक पर बतियाँ लगी होती है, जो गाड़ी आने की सूचना देती है। लाल बत्ती दिखाई दे तो यह समझना चाहिए कि फाटक बंद है और गाड़ी आने वाली है। सफेद या हरी बत्ती फाटक के खुला रहने का संकेत है। इसी समय रेल लाइन पार करना चाहिए। बंद फाटक पार करने पर 3 साल की जेल की सजा हो सकती है।
 
3. सड़क यात्रा के दौरान किन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए?
उत्तर – सड़क यात्रा के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए-
◆ सड़क पर चलते समय हमेशा बाईं ओर से चले।
◆ गाड़ी चलाते समय सड़क पर बने गति अवरोधक पर गाड़ी धीरे चलानी चाहिए।
◆ सड़क के किनारे लगे पुल मोड़ इत्यादि के संकेतों का पालन करना चाहिए।
◆ सड़क पार करते समय दाहिने-बाएँ देखकर तथा जेब्रा क्रॉसिंग के सहारे सड़क पार करें। क्रॉसिंग पर हरी बत्ती की प्रतीक्षा करें। जेब्रा पार करने के लिए भी एक प्रकार की बत्ती लगी होती है।
◆ गाड़ी में बैठने के बाद शरीर का कोई अंग गाड़ी की खिड़की के बाहर नहीं रहना चाहिए।
◆ विद्यालय की बसों के ड्राइवर का प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। गाड़ी खड़ी होने पर ही उतरना या चढ़ना चाहिए।
 
4. आग से उत्पन्न आपदा क्या है?
उत्तर – आग से उत्पन्न आपदा मानव जनित आपदाओं में प्रमुख है। यह खाना बनाने, कपड़ा प्रेस करने या अन्य कारण से लग सकती है। मानवीय भूल से आग लगने पर जान-माल की भारी क्षति होती है। ऐसा भी देखने में आता है कि चक्रवात, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं में प्रतिवर्ष जितने लोग मरते हैं उससे कहीं ज्यादा लोगों की मृत्यु आग से उत्पन्न आपदा से होती है।
 
5. सांप्रदायिक दंगों से बचाव के किन्हीं तीन उपायों का वर्णन करें।
उत्तर – सांप्रदायिक दंगों से बचाव के तीन उपायों निम्नलिखित है-
(i) सांप्रदायिक दंगों से बचाव के लिए आवश्यक है कि हम ना तो अफवाह फैलाएँ और ना ही उसमें विश्वास करें।
(ii) अपवाह की सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन में दे।
(iii) सांप्रदायिक दंगों में लगे हुए लोगों को पनाह नहीं दें।
 
6. आतंकवादी आपदा से बचाव के किन्हीं तीन उपायों का वर्णन करें।
उत्तर – आतंकवादी आपदा से बचाव के तीन उपायों निम्नलिखित है-
(i) यदि अचानक कोई गठरी, सूटकेस, संदूक या थैला रखा हुआ मिल जाए तो उसे छूना नहीं चाहिए बल्कि पुलिस को तत्काल सूचित करना चाहिए।
(ii) विद्यालय में बच्चों को आतंकवाद से उत्पन्न समस्याओं की जानकारी देनी चाहिए।
(iii) यदि आपको किसी व्यक्ति की गतिविधियों पर शक हो तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। यदि आप पुलिस तक नहीं जा सकते तो अपने शिक्षक या अभिभावक को दें।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. आग से उत्पन्न आपदा के अंतर्गत आग लगने के कारणों तथा रोकथाम के उपायों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर- आग लगने के कारण
◆ ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण सुरक्षित स्थानों पर ना होना।
◆ बीड़ी और सिगरेट पीने के बाद यत्र-तत्र फेंक देना।
◆ भोजन बनाते समय स्टोव, गैस चूल्हा या लकड़ी के चूल्हे से भी असावधानीवश आग लग सकती है। आजकल गैस सिलेंडर से लगने वाली आग प्रायः आम घटना हो गई।
◆ बिजली वायरिंग के गड़बड़ी से शॉर्ट सर्किट द्वारा आग लगने की संभावना बनी रहती है।
◆ कूड़ा-करकट और बेकार वस्तुओं में आग लगाने से आस-पास के मकान में क्षति की संभावना होती है।
 
 आग की रोकथाम के उपाय
◆ घर के भीतर अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ न रखें।
◆ प्रत्येक घर में अग्निशमन यंत्र रखें और इसे इस्तेमाल करने के लिए घर के प्रत्येक व्यक्ति को प्रशिक्षित करें।
◆ घर से बाहर जाते समय बिजली के सभी उपकरणों को बंद करें।
◆ खाना बनाने के पश्चात गैस के नॉब को बंद करना ना भूलें।
◆ आग लगने की स्थिति में घर से बाहर निकलने का रास्ता सदैव याद रखें।
◆ एक ही सॉकेट में बहुत सारे उपकरण ना लगाएं।
◆ आलमारी लगाकर प्रवेश मार्ग को बंद नहीं करें।
◆ जिस घर में धुआँ हो वहाँ हाथ पैर या पेट के बल रेंग कर चलने का प्रयास करें।
◆ आग लगने पर दमकल विभाग को बुलाएं, दमकल विभाग को अपने घर का पता स्पष्ट रूप से बताएं।
◆ बिजली के कारण आग लगने पर पानी का प्रयोग नहीं करें क्योंकि पानी डालने पर करंट लग सकता है।
◆ बच्चों के हाथ में माचिस कभी ना दें तथा घर के भीतर बीड़ी-सिगरेट किसी को पीने ना दे।
2. आतंकवाद क्या है? आतंकवादी आपदा से बचाव के उपायों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर – आतंकवाद मानव जनित आपदा है जो हिंसात्मक मार्ग से राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति चाहता है। यह राजनीति से प्रेरित हिंसा होती है। इसका एकमात्र उद्देश्य वर्तमान शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकना है। विश्व के अधिकतर बड़े आतंकवादी संगठन एक ही राजनीतिक सीमा के अंतर्गत कार्य नहीं करते हैं बल्कि एक से अधिक क्षेत्रों में कार्य करते हैं। अलकायदा विश्वव्यापी आतंकवादी संगठन का रूप ले चुका है। संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर एक 11 सितंबर 2001 को हवाई वाहन की मदद से किया गया आतंकवादी हमला उनकी क्रूरता और कठोरता का चरम स्वरूप है। इसमें सैकड़ों लोग अपने जीवन गवा बैठे थे।
                 
          आतंकवादियों द्वारा बम का विस्फोट तथा गोली चलाने की घटना अधिकांशत सड़कों, मुख्य बाजार, सार्वजनिक तथा सामुदायिक स्थल, रेलवे स्टेशन तथा बस स्टैंड पर किया जाता है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या आतंकवादियों द्वारा ही की गई। हाल ही में 15 अगस्त 2021 को तालिबानी आतंकवादी संगठनों ने अफगानिस्तान के शासन को उखाड़ कर अपना शासन तंत्र स्थापित कर लिया। तालिबानी आतंकवादी संगठनों के डर से हजारों-लाखों अफगानी नागरिक देश छोड़कर भाग गए और हजारों लोगों को मौत के घाट भी उतार दिए गए।
 
आतंकवादी आपदा से बचाव के निम्नलिखित उपाय है-
◆ यदि अचानक कोई गठरी, सूटकेस, संदूक या थैला रखा हुआ मिल जाए तो उसे छूना नहीं चाहिए बल्कि पुलिस को तत्काल सूचित करना चाहिए।
◆ विद्यालय में बच्चों को आतंकवाद से उत्पन्न समस्याओं की जानकारी देनी चाहिए।
◆ यदि आपको किसी व्यक्ति की गतिविधियों पर शक हो तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। यदि आप पुलिस तक नहीं जा सकते तो अपने शिक्षक या अभिभावक को दें।
◆ अपने मकान में किराएदार रखने के वक्त उसका सही शिनाख्त करें और फोटोग्राफ सहित उसकी जानकारी पुलिस को दें।
◆ प्रत्येक गाँव और शहर मोहल्ले में आतंकवाद के विरुद्ध सामाजिक वातावरण बनाने के लिए समिति का गठन किया जाना चाहिए।
 
3. विद्यालय स्तरीय आपदा प्रबंधन की जानकारी का वर्णन करें।
उत्तर – शिक्षकों द्वारा विद्यालय स्तरीय आपदा प्रबंधन की निम्नलिखित जानकारी दी जानी चाहिए –
◆ सड़क मार्ग पर सदैव सदैव बायें चले।
◆ यदि सड़क पार करना हो तो हरी बत्ती जलने पर जब्रा क्रॉसिंग के पास ही सड़क पार करें।
गाड़ी चलाते समय सड़क पर बने गति अवरोधक पर गाड़ी धीरे चलानी चाहिए।
◆ सड़क के किनारे लगे पुल मोड़ इत्यादि के संकेतों का पालन करना चाहिए।
◆ सड़क पार करते समय दाहिने-बाएँ देखकर तथा जेब्रा क्रॉसिंग के सहारे सड़क पार करें। क्रॉसिंग पर हरी बत्ती की प्रतीक्षा करें। जेब्रा पार करने के लिए भी एक प्रकार की बत्ती लगी होती है।
◆ गाड़ी में बैठने के बाद शरीर का कोई अंग गाड़ी की खिड़की के बाहर नहीं रहना चाहिए।
◆ विद्यालय की बसों के ड्राइवर का प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। गाड़ी खड़ी होने पर ही उतरना या चढ़ना चाहिए।
◆ विद्यालय में प्राथमिक उपचार की सुविधा होनी चाहिए। जैसे- खेलकूद के समय कट-फट जाने पर उसे दवा लगाकर डॉक्टर के पास भेजा जाए।
◆ विद्यालय में बच्चों को यह बताना चाहिए कि जलने की स्थिति में तुरंत उस पर ठंडा जल डाला जाए। यदि उपलब्ध हो तो वर्क के टुकड़े को भी जले हुए अंग पर रखना चाहिए।
◆ बच्चों की यह जानकारी भी देनी चाहिए कि जलने की स्थिति में कंबल से भी ढक देना चाहिए।
4. लघु स्त्तरीय आपदाओं के कारणों एवं उनसे बचाव के तरीकों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर – लघु स्तरीय आपदाएँ मुखयतः खान-पान और जीवनशैली को स्वस्थ रुप से संचालित न करने पर उत्पन्न होते हैं। यह व्यक्तिगत, परिवारिक और कभी-कभी सामूहिक स्तर पर भी उत्पन्न होता है। 
 
लघु स्तरीय आपदाओं के कारण-
◆ गरीब परिवारों में भोजन की समस्या रहती है। कभी-कभी ऐसे पदार्थ खाने के लिए विवश होते हैं जो या तो अपाच्य होता है या अखाद्य। इससे पेट की बीमारियाँ हो जाती है।
◆ गंदी बस्तियों में जल के दूषित होने या हवा की गंदगी से है जहाँ प्लेग, मलेरिया तथा कालाजार होता रहता है। यह परिवार से फैलकर सामूहिक रूप ले लेता है।
 लघु स्तरीय आपदाओं से बचने के तरीकें-
◆ पेट की गड़बड़ी में नमक और चीनी का घोल अथवा इलेक्ट्रोल पाउडर का घोल एक 1 घंटे के अंतराल पर देते रहना चाहिए।
◆ यदि समस्या गंभीर हो तो फोन या अन्य साधन से निकटवर्ती स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करना चाहिए। हो सके तो संबंधित व्यक्ति को स्वास्थ्य केंद्र पहुंच जाना चाहिए।
◆ स्वयंसेवी संस्थाएँ या ग्राम पंचायतें नुक्कड़ नाटकों या परिचर्चाओं द्वारा लोगों को इस संबंध में सावधानी रखने के लिए जागरूक कर सकती है। 
◆ हैजा, प्लेग इत्यादि शीघ्र ही महामारी का रूप ले लेते हैं। अतः स्वास्थ्य केंद्रों को सूचित करने के साथ ही इन बीमारियों के कारण अर्थात गंदगी की सफाई भी आवश्यक है।

◆ कुछ ऐसी सामान्य बीमारियों के लक्षण जानना आवश्यक है जिससे उनकी पहचान शीघ्र हो सके। जैसे मलेरिया या कालाजार गंदे जल या हवा से फैलते हैं। दोनों में तेज बुखार के साथ कँपकँपी होती है। इनसे मस्तिक प भी प्रभाव पड़ता है। इनके इलाज की सुविधा बड़े अस्पतालों में ही होती है। परिवार को घबराने से रोकने के लिए उसे साहस देना भी आवश्यक है।


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खण्ड (ब)अध्याय 10 आपदा प्रबंधन : एक परिचय

 खण्ड (ब) अध्याय 10 आपदा प्रबंधन : एक परिचय

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्त देना सीखें



 

अध्याय 10 आपदा
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
 
1. आपदा प्रबंधन के प्रमुख घटक है- 
(i) आपदा के पूर्व वैयक्तिक स्तर पर तैयारी करना।
(ii) आपदा के पूर्व सामुदायिक स्तर पर तैयारी करना।
(iii) रोकथाम के लिए दूसरों पर निर्भर रहना।
(iv) आपदा के संबंध में जानकारी नहीं रखना।
उत्तर- (ii) आपदा के पूर्व सामुदायिक स्तर पर तैयारी करना।
 
2. मानव जनित आपदा के प्रभाव को कम करने के कौन-से उपाय हैं?
(i) भूमि उपयोग की जानकारी नहीं रखना।
(ii) आपदारोधी भवन का निर्माण करना।
(iii) सामुदायिक जागरूकता पर ध्यान देना।
(iv)  जोखिम क्षेत्रों में बसाव को बढ़ाना।
उत्तर- (iii) सामुदायिक जागरूकता पर ध्यान देना।
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
 
1. आपदा प्रबंधन क्या है?
उत्तर – आपदा मानव जनित अथवा प्राकृतिक घटना है जिसका प्रभाव मानव जीवन के लिए त्रासदी लाता है। आपदा मानव जनित हो अथवा प्राकृतिक उनका प्रबंधन आवश्यक है। आपदा को पूर्णत: समाप्त कर देना लगभग असंभव है, लेकिन इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके प्रभाव को कम करने से त्रासदी का प्रभाव कम होता है और मरने वालों की संख्या कम होती है।
 
2. आपदा को कम करने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जाने चाहिए?
उत्तर – आपदा को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिए –
(i) जोखिम क्षेत्रों में मानव  बसाव को रोकना।
(ii) भूमि उपयोग की योजना तैयार करना। 
(iii) आपदा-रोधी भवनों का निर्माण करना।
(iv) आपदा आने से पहले जोखिम को कम करने के लिए लोगों को जागरूक करना।
 
3. तुम आपदा प्रभावित क्षेत्र में लोगों की किस प्रकार मदद करोगे?
उत्तर – हम आपदा प्रभावित क्षेत्र में लोगों को आनेवाले विभिन्न प्रकार के आपदा के विषय में समझा सकते है, आपदा से घबराने से मना करेंगें। सभी लोगों को मिलजुल कर उससे बचाव का प्रयास करना चाहेंगें। हम अपने मित्रों एवं शिक्षकों की सहायता से इस काम में लग जायेंगें। अगर भवन की आवश्यकता हो तो विद्यालय भवन को राहत कार्य हेतु अपने शिक्षकों से अनुमति लेकर वहाँ लोगों को रहने की  व्यवस्था करेंगें  और  गाँव से सहयोग लेकर भोजन एवं चिकित्सा की भी व्यवस्था करेंगें।
 
4. विद्यालय द्वारा किस प्रकार आपदा प्रभावित लोगों को मदद पहुँचाया जा सकता है?
उत्तर –  आपदा के समय अगर भवन की आवश्यकता हो तो विद्यालय भवन को राहत कार्य हेतु उपयोग में लाया जा सकता है ताकि लोगों को रहने की  व्यवस्था हो सके और आपदा में फसें लोगों को बचाव व राहत सामाग्रियों  के वितरण  लिए छात्र दलों का भी सहयोग लिया जा सकता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
 
1. आपदा प्रबंधन में ग्राम पंचायत की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर – आपदा प्रबंधन में ग्राम पंचायत की भूमिका निम्नलिखित है-  
(i) पूर्वानुमान के आधार ग्राम पंचायत से प्राप्त सूचनाओं को तत्काल लोगों तक पहुँचना।  
(ii) राहत शिविर का चयन और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने का कार्य करना 
(iii) जिलास्तार पर सूचना भेजना।
(iv) अगर आगजनी है तो दमकल आदि की मांग प्रशानिक/थाना स्तर से करबाना।
(v) राहत कार्य प्रभावित लोगों को शिविरों में रखना एवं उनके भोजन की व्यवस्था करना। 
(vi) पेयजल तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करना। 
(vii) प्राथमिक उपचार की व्यवस्था करना।
(viii) सभी को सुरक्षा प्रदान करना खासकर छोटे बच्चों बूढों पर विशेष ध्यान।  
(ix) स्वच्छता का ख्याल रखना ताकि  कोई महामारी पंचायत में न फैल जाए।
 
2. आपदा प्रबंधन में राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करें।
उत्तर- भारत के प्रायः सभी क्षेत्रों में लगभग सालों भर प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदाओं का सैलाब देखने को मिलता है। हलाकि राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की कई योजनाएँ बनाई गई है। आपदा प्रबंधन में राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा निम्नलिखित है-
◆ आपदा प्रबंधन के लिए प्रति वर्ष बजट में आकस्मिक निधि का प्रबंधन किया गया है। जिससे संकट के समय धनराशि की समस्या नहीं होती है।
◆ आपदा प्रबंधन हेतु प्रधानमंत्री राहत कोष का भी गठन किया गया है।
◆ आपदाओं की बारंबारता के क्षेत्र का मानचित्रीकरण किया जा रहा है। जिससे उसके क्षेत्र के बारे में जानकारी प्राप्त किया जा सके।
◆ आपदा प्रबंधन में लगे हुए लोगों के लिए प्रशिक्षण का कार्य भी आवश्यक है। अतः उसके लिए अनेक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय में आपदा प्रबंधन की पढ़ाई भी प्रारंभ की गई है

◆ आपदा प्रबंधन में स्वयंसेवी संस्थाओं का योगदान भी महत्वपूर्ण है। यह परामर्श दात्री के रूप में महत्वपूर्ण कार्य करता है।


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खण्ड (अ) अध्याय 9 क्षेत्रीय अध्ययन

 खण्ड (अ) अध्याय 9 क्षेत्रीय अध्ययन

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



अध्याय 9 क्षेत्रीय
I. वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर-
1. क्षेत्र में जाकर इकट्ठे किये गए आँकड़ों को क्या कहा जाता है?
(क) द्वितीयक आँकड़ा
(ख) प्राथमिक आँकड़ा
(ग) तृतीयक आँकड़ा
(घ) चतुर्थक आँकड़ा
उत्तर – (क) प्राथमिक आँकड़ा 
2. भूगोल में क्षेत्रीय अध्ययन है-
(क) एक उपागम
(ख) एक विधितन्त्र
(ग) एक सिद्धांत
(घ) एक मॉडल
उत्तर -(क) एक उपागम
II. लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर-
1. भौगोलिक अध्ययन में क्षेत्रीय अध्ययन के महत्व को स्पष्ट करें।
उत्तर- क्षेत्रीय अध्ययन भूगोल का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह मूलतः एक अध्ययन उपागम है जिसके द्वारा क्षेत्र विशेष के मानव और इसके परिवेश के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। यह जानकारी मानव वातावरण संबंध को समझने में संजीवनी का काम करता है। अलग-अलग क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक परिस्थितियों में अंतर पाया जाता है। किसी विशेष क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों के जीवन पर स्थलाकृति, जलवायु, अपवाह, कृषि उत्पादकता, औद्योगिक विकास, नगरीकरण इत्यादि का स्पष्टत: प्रभाव पड़ता है। लोगों के रहन-सहन का तरीका इन सभी तत्वों से जुड़ा है। मानवीय गतिविधियाँ भी अपने परिवेश पर प्रभाव डालती है। इन बातों को समझने के लिए क्षेत्रीय अध्ययन अति आवश्यक है।
2. भूमि का कृषि के लिए उपयोग किस क्षेत्र में अधिक होता है?
उत्तर – समतल, उपजाऊ तथा सिंचित भूमि का उपयोग कृषि क्षेत्र में अधिक होता है
3. वायु प्रदूषण से किस प्रकार की हानि होती है?
उत्तर – वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभाव श्वास पर पड़ता है। साँस लेने के लिए ऑक्सीजन का प्रयोग करते हैं परन्तु वायु प्रदूषित होने की वजह से ऑक्सीजन की मात्रा घटती जा रही है और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है। यही प्रदूषित वायु हम साँस लेते हैं जिससे श्वास  संबंधी बीमारियाँ होती है। वायु के प्रदूषित होने से उसमें सी०एफ० सी० गैसों की मात्रा की अहम भूमिका होती है, इस गैस के बढ़ने से ओजोन परत का क्षय होने लगता है जिससे पाराबैगनी किरणें  की वायुमण्डल में वृद्धि होने लगती है जिससे जीव जन्तु में चर्म कैंसर की संभावना बढ़ जाती है SO2 की सान्द्रता बढ़ने से अम्लीय वर्षा होती है। इस प्रकार वायु प्रदूषण से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है।
4. जल-प्रदूषण से होने वाली हानि की चर्चा करें।
उत्तर – जल-प्रदूषण से होने वाली हानि निम्नलिखित है-
(i) प्रदूषित जल से पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो जाता है। जलीय वनस्पति, मछलियाँ, अन्य जलीय जीव  तथा उस जल को पीने वाले अन्य जीव के अस्तित्व खतरे में आ जाते हैं। 
(ii) खेतों में सिंचाई के रूप में प्रदूषित जल प्रयोग करने से उत्पादन की मात्रा घट जाती है।
(iii) प्रदूषित जल में उपस्थित विषैले पदार्थ प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला (Natural Food Chain) में प्रवेश कर जाते हैं तथा अप्रत्यक्ष रूप से अन्य जीवों तथा मनुष्यों को भी प्रभावित करते हैं। 
(iv) प्रदूषित जल, जल से फैलने वाली बीमारियों को फैलाते है। जैसे- हैजा, तपेदिक, पीलिया, पेचिस, डायरिया आदि रोग महामारी के रूप में तेजी से फैलते हैं।
5. वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर – वर्षा जल का संग्रहण विभिन्न विधियों से किया जाता है।
(i) वर्षा जल को विभिन्न प्रकार के भवनों की छतों पर संग्रह करना चाहिए। 
(ii) सीधे जमीन पर पड़ने वाले वर्षा जल को तालाबों आदि में संग्रह करना चाहिए। 
(iii) वर्षा के मौसम में जब नदियों में बाढ़ आई हुई हो तो उस जल को गड्ढों में जमा करना चाहिए।
6. एक आलेख की सहायता से वर्षा जल संग्रहण को दिखायें।
उत्तर – 

                     इस प्रकार से पक्के पकानों की छतों पर संग्रह किये गये वर्षा जल को पाइप के माध्यम से कुएँ या जलाशयों में जमा किया जाता है।

7. क्षेत्रीय अध्ययन से क्या समझते हैं।
उत्तर- किसी विशिष्ट क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों के जीवन पर स्थलाकृति, जलवायु, अपवाह प्रणाली, कृषि उत्पादकता, औद्योगीकरण, नगरीकरण इत्यादि कारकों  स्पष्टत: प्रभाव पड़ता है। इन सभी कारकों का किसी विशिष्ट क्षेत्र का अध्ययन करना ही क्षेत्रीय अध्ययन कहलाता है।
8. क्षेत्रिय अध्ययन से क्या लाभ है?
उत्तर – क्षेत्रीय अध्ययन से निम्नलिखित लाभ है –
(i) इससे क्षेत्र विशेष के मानव और इसके परिवेश की जानकारी मिलती है। 
(ii) इससे किसी क्षेत्र के मानवीय गतिविधियों एवं क्रियाकलापों की जानकारी मिलती है।
(iii) क्षेत्र विशेष में निवास करने वाले लोगों के जीवन पर स्थलाकृति, जलवायु, अपवाह प्रणाली, कृषि उत्पादकता, औद्योगीकरण, नगरीकरण आदि की जानकारी मिलती है। 
9. क्षेत्र का चयन करते समय किन बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए?
उत्तर – किसी भी क्षेत्र  का चयन हेतु इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि उस क्षेत्र के मुख्य मुद्दों को उसमें शामिल किया जाय। जैसे – किसी क्षेत्र के जलस्तर में गिरावट, भूमि उपयोग, प्रदूषण के विभिन्न प्रकार जैसे- वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, मृदा प्रदुषण  आदि।
 
III. दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर –
1. नीचे दी गई सारणी का अध्ययन कर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दें –
(क) उस भू-उपयोग वर्ग का नाम लिखें जिसका क्षेत्रफल लगातार घट रहा है?
उत्तर – वन 
(ख) फसल क्षेत्र के लगातार बढ़ने का मुख्य कारण स्पष्ट करें।
उत्तर – जनसंख्या लगातार बढ़ने के कारण खाद्यान्न की समस्या उत्पन्न हो रही है और खाद्यान्न की समस्या को दूर करने के लिए फसलों का अधिक उत्पादन किया जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप फसल क्षेत्र लगातार बढ़ रहे हैं।  
(ग) किस भू-उपयोग वर्ग के अंतर्गत सबसे कम भू-क्षेत्र का उपयोग हुआ है?
उत्तर –  तृषा भूमि
2. क्षेत्र अध्ययन के लिए प्रश्नावली के विभिन्न विधियों की चर्चा करें।
उत्तर – किसी क्षेत्र अध्ययन में सर्वेक्षण के लिए अनेक प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। प्रश्नों की प्रकृति, वांछित आंकड़ों की प्रकृति तथा वहाँ के लोगों की पृष्ठभूमि पर निर्भर करती है। कुछ प्रश्नों के उत्तर ‘हाँ या नहीं में होगा। बहुविकल्प वाले प्रश्नों के उत्तर में कुछ विकल्प दिए जाते हैं उनमें से केवल एक ही सही होता है प्रश्नावली के द्वारा जानकारी इकट्ठा कर प्राप्त आँकड़ों का अध्ययन करके प्रतिवेदन तैयार किया जाता है। जैसे- बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का अध्ययन किसी गाँव या नगर की भूमि के उपयोग में क्या परिवर्तन आया है? नगर में वाहनों की संख्या में वृद्धि से प्रदूषण के स्तर में कितनी वृद्धि हुई। इस तरह की प्रश्नावली तैयार की जाती है।
3. वायु प्रदूषण के चार स्रोतों का वर्णन करें।
उत्तर –  वायु प्रदूषण के चार स्रोत निम्नलिखित है-
(i) उद्योगों से निकलने वाली गैस तथा अन्य उपशिष्ट
(ii) वाहनों द्वारा उत्सर्जित गैसीय एवं कणिकीय पदार्थ
(iii) शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सर्जित गैस तथा 
((iv) नाभिकीय परीक्षण
IV. क्षेत्रीय अध्ययन : प्रश्नावली मॉडल
1. क्षेत्र का नाम-
उत्तर – नवादा 
2. उत्तर दाता का नाम एवं पता।
उत्तर – ग्राम – छातरवार
पोस्ट – कोनंदपु 
जिला – नवादा 
पिन कोड – 805124
(बिहार)
3. क्या कृषि क्षेत्र में वृद्धि हुई है?
उत्तर – हाँ  
4. क्या आपके गांव में नलकूप है?
उत्तर – हाँ  
5. कुएँ का जलस्तर पिछले पाँच वर्षों में बढ़ा है या घटा है?
उत्तर –  कुएँ का जलस्तर पिछले पाँच वर्षों में घटा है
6. सिंचाई के कौन-कौन से साधन इस क्षेत्र में उपलब्ध है?
उत्तर – इस क्षेत्र में सिचाई के निम्नलिखित साधन उपलब्ध है-
 नलकूप, तालाब, नहर, पाईन, अहरा, सकरी नदी
7. एक वर्ष में कौन-कौन सी बीमारियाँ बड़े स्तर पर उस क्षेत्र में हुई है?
उत्तर – हैजा, पीलिया, मलेरिया , डेंगू
8. अध्ययन क्षेत्र में किस प्रकार का प्रदूषण है ?
उत्तर – जल प्रदुषण, वायु प्रदुषण, मृदा प्रदुषण 
9. जल स्तर के घटने के क्या कारण है ?
उत्तर – नलकूपों की अधिकता तथा वर्षा में कमी
10. क्या आप वर्षा जल का संग्रह करते हैं?
उत्तर – नहीं 
11. आप वर्ष में कौन-कौन सी फसलें उत्पन्न करते हैं?

उत्तर – धान, गेहूँ, मक्का, पान, मूंगफली, दलहन, तथा तेलहन


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अध्याय 8. मानचित्र अध्ययन

अध्याय 8. मानचित्र अध्ययन

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



 
मानचित्र अI. वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
(i) कौन-सी मापक विधि सर्वाधिक मान्य है?
(क) प्रकथन
(ख) निरूपक विधि
(ग) आरेख
(घ) कोई नहीं
उत्तर- (ख) निरुपक विधि
(ii)  मानचित्र की दूरी को मापनी में कैसे जाना जाता है?
(क) अंश
(ख) हर
(ग) मापनी का प्रकथन
(घ) कोई नहीं
उत्तर- (क) अंश
(iii) मापनी में हर व्यक्त करता है –
(क) धरातल की दूरी
(ख) मानचित्र की दूरी
(ग) दोनों दूरियाँ
(घ) उनमें से कोई नहीं
उत्तर- (क) धरातल की दूरी
(iv) निम्नलिखित में से कौन सा मापक निरूपक भिन्न का है।
(क) मीटर
(ख) सेंटीमीटर
(ग) इंच
(घ) इनमें से कोई भी नहीं
उत्तर- (घ) इनमें से कोई नहीं
(v) निम्न में किस मापनी द्वारा किलोमीटर और मील दोनों की दूरियों को दर्शाया जा सकता है?
(क) रेखीय मापनी
(ख) आरेखीय मापनी
(ग) प्रतिनिधि भिन्न
(घ) तुलनात्मक मापनी
उत्तर -(घ) तुलनात्मक मापनी
 
II. लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. मापक क्या है ? मापक का क्या महत्व है ? स्पष्ट करें।
उत्तर- मापक वह विधि है जिसके द्वारा समस्त पृथ्वी अथवा उसके किसी एक विभाग को आवश्यकतानुसार, मानचित्र बनाकर प्रदर्शित किया जाता है। उस मानचित्र की सहायता से धरातल पर दो स्थानों के बीच की वास्तविक दूरियाँ ज्ञात की जाती है।
     
            दूसरे शब्दों में मानचित्र पर प्रदर्शित किए गए किन्हीं दो बिंदुओं के बीच की दूरी और धरातल पर उन्हीं दो बिंदुओं के बीच की वास्तविक दूरी के अनुपात को मापने की विधि को मापक का कहते हैं।
मापक का महत्व-
           भूगोल को मानचित्र का विज्ञान भी कहते हैं। मानचित्र बनाने के लिए मापक का उपयोग अनिवार्य है। इसके बिना कोई भी मानचित्र नहीं बनाया जा सकता है। मापक के द्वारा ही धरातल के क्षेत्रों को मानचित्र पर सही-सही प्रदर्शित किया जाता है।
2. मापक को प्रदर्शित करने की विधियाँ बताएँ।
उत्तर – मानचित्र पर मापक को निम्नलिखित तीन विधियों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है-
(i) कथन विधि 
(ii) प्रदर्शन विधि 
(iii) रैखिक मापक विधि
3. प्रतिनिधि अथवा प्रदर्शक भिन्न क्या है?
उत्तर – इस विधि में मानचित्र की दूरी और धरातल की दूरी को एक भिन्न द्वारा प्रकट किया जाता है। इस भिन्न का अंश सदैव एक होता है जो मानचित्र की दूरी को प्रदर्शित करता है तथा हर उसी इकाई में होता है और धरातल की दूरी को प्रदर्शित करता है। प्रदर्शक भिन्न को उपलक्षक एवं निरूपक भिन्न भी कहते हैं।
प्रदर्शक भिन्न (R.F.) = मानचित्र की दूरी : धरातल की दूरी   
या Map Distance : Ground Distance
              इस विधि द्वारा प्रत्येक देश का नागरिक आसानी से मानचित्र का अध्ययन कर सकता है। जैसे- 1:25 000 0000 का तात्पर्य मानचित्र पर 1 इंच,धरातल के 250000000 इंच को प्रकट कर रहा है। इसी तरह मानचित्र का 1 सें०मी० धरातल के 250000000 से०मी० को प्रदर्शित कर रहा है।
4. मापक कितने प्रकार का होता है?
उत्तर- माफ कर दो प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित है-
(i) लघु मापक
(ii) दीर्घ मापक
5. मापक की दो विभिन्न प्रणालियाँ कौन-कौन सी है?
उत्तर- मापक की दो प्रणालियाँ निम्नलिखित है-
(i) कथनात्मक प्रणाली
(ii) प्रतिनिधि भिन्न प्रणाली
6. प्रदर्शक भिन्न विधि को सर्वमान्य विधि क्यों कहा जाता है?
उत्तर- विश्व के सभी देशों में एक ही मापक प्रणाली का प्रयोग नहीं किया जाता है। कथन-विधि प्रणाली संबंधित देशों में ही उपयोगी होता है। इस प्रकार की कठिनाइयों को दूर करने के लिए प्रदर्शक भिन्न का प्रयोग किया जाता है।इस विधि में मानचित्र की दूरी और धरातल की दूरी को एक भिन्न द्वारा प्रकट किया जाता है।
           
        प्रदर्शक भिन्न को विश्व के किसी भी देश की मापन प्रणाली के अनुसार बदलकर समझा जा सकता है। इसीलिए इसे अन्तर्राष्ट्रीय मापक अर्थात सर्वमान्य विधि भी कहा जाता है। 
7. आलेखी विधि के मुख्य उपयोग क्या है?
उत्तर- आलेखी विधि का मुख्य उपयोग मानचित्र पर स्थित किन्हीं भी दो स्थानों के बीच की दूरी तथा धरातल पर स्थित उन्हीं दो स्थानों के बीच की दूरी ज्ञात करना है।
8. तुलनात्मक मापक की क्या विशेषताएँ हैं?
 उत्तर- तुलनात्मक मापक में एक या एक से अधिक प्रणालियों में दूरियाँ प्रदर्शित की जाती है। जैसे-मील, फ्लार्ग, किलोमीटर, मीटर, तथा गज आदि का प्रयोग लिखिए मापक में किया जाता है। कभी-कभी इसमें दो भिन्न तत्वों को भी प्रदर्शित किया जाता है।
           जैसे दूरी एवं समय को दर्शाया जाता है। इस मापक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके द्वितीयक और प्राथमिक मापक का शुरुआत एक ही संदर्भ रेखा अर्थात सलमान से होता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. मापक क्या है? मानचित्र के लिए इसका क्या महत्व है?मापक को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न विधियों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर- मापक वह विधि है जिसके द्वारा समस्त पृथ्वी अथवा उसके किसी एक विभाग को आवश्यकतानुसार, मानचित्र बनाकर प्रदर्शित किया जाता है। उस मानचित्र की सहायता से धरातल पर दो स्थानों के बीच की वास्तविक दूरियाँ ज्ञात की जाती है।
 
          दूसरे शब्दों में मानचित्र पर प्रदर्शित किए गए किन्हीं दो बिंदुओं के बीच की दूरी और धरातल पर उन्हीं दो बिंदुओं के बीच की वास्तविक दूरी के अनुपात को मापने की विधि को मापक का कहते हैं।
मापक का महत्व-
              मानचित्र के निम्नलिखित महत्व है-
◆ मापक धरातल के क्षेत्र को मानचित्र पर सही-सही प्रदर्शित करने की विधि है।
◆ मापक के माध्यम से हम विस्तृत भू-खंडों को मानचित्र पर लघु रूप में प्रदर्शित कर सकते हैं।
◆ मापक से किसी क्षेत्र के क्षेत्रफल की जानकारी प्राप्त होती है।
◆ मापक की सहायता से किसी भी धरातल को बड़े तथा छोटे आकार में प्रदर्शित किया जा सकता है।
◆ भवन,कारखाने, रेलवे लाइन इत्यादि सभी के चित्र बनाने के लिए मापक आवश्यक होता है।
◆ भू-सर्वेक्षण के लिए भी मापक अनिवार्य होता है।
            मानचित्र पर मापक को निम्नलिखित तीन विधियों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है-
(i) कथन विधि 
(ii) प्रदर्शन विधि 
(iii) रैखिक मापक विधि
(i) कथन विधि-
                इस विधि में मापक को एक कथन द्वारा व्यक्त किया जाता है। जैसे 1 सेंमी० = 5 किमी० या 1 ईंच = 18 मील आदि। 
                1 सेंमी० = 5 किमी० का अर्थ यह है कि मानचित्र पर 1 सेंमी० की दूरी धरातल पर 5 किमी० की दूरी को प्रदर्शित करता है। इसी प्रकार 1 ईंच = 18 मील से अभिप्राय है कि मानचित्र पर 1 ईंच की दूरी धरातल पर 18 मील की दूरी को प्रदर्शित करता है। इस कथन का पहला भाग मानचित्र पर किन्हीं दो स्थानों के बीच की दूरी प्रदर्शित करता है तथा दूसरा भाग भू-पृष्ठ पर उन्हीं दो स्थानों के बीच की दूरी को दिखाता है।
(ii) प्रदर्शन विधि-
                इस विधि में मानचित्र की दूरी और धरातल की दूरी को एक भिन्न द्वारा प्रकट किया जाता है। इस भिन्न का अंश सदैव एक होता है जो मानचित्र की दूरी को प्रदर्शित करता है तथा हर उसी इकाई में होता है और धरातल की दूरी को प्रदर्शित करता है। प्रदर्शक भिन्न को उपलक्षक एवं निरूपक भिन्न भी कहते हैं।
प्रदर्शक भिन्न (R.F.) = मानचित्र की दूरी : धरातल की दूरी   
या Map Distance : Ground Distance
                  इस विधि द्वारा प्रत्येक देश का नागरिक आसानी से मानचित्र का अध्ययन कर सकता है। जैसे- 1:25 000 0000 का तात्पर्य मानचित्र पर 1 इंच,धरातल के 250000000 इंच को प्रकट कर रहा है। इसी तरह मानचित्र का 1 सें०मी० धरातल के 250000000 से०मी० को प्रदर्शित कर रहा है।
(iii) रैखिक मापक विधि-
               इस विधि को सरल मापक विधि कहते हैं। सरल रेखा की लंबाई कथन अथवा प्रदर्शन भिन्न की सहायता से गणित के आधार पर निश्चित की जाती है। इसके बाद इस रेखा के मूल(प्राइमरी) तथा गौण(सेकेंडरी) भागों में ज्यामितीय विधि द्वारा विभक्त किया जाता है। मुख्य या मूल भाग पर बड़ी इकाई जैसे मील अथवा किलोमीटर तथा गौण या उपविभाग पर छोटी इकाई जैसे फ्लार्ग या मीटर दर्शाया जाता है।
2. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए –
(i) प्रदर्शक भिन्न
उत्तर- इस विधि में मानचित्र की दूरी और धरातल की दूरी को एक भिन्न द्वारा प्रकट किया जाता है। इस भिन्न का अंश सदैव एक होता है जो मानचित्र की दूरी को प्रदर्शित करता है तथा हर उसी इकाई में होता है और धरातल की दूरी को प्रदर्शित करता है। प्रदर्शक भिन्न को उपलक्षक एवं निरूपक भिन्न भी कहते हैं।
प्रदर्शक भिन्न (R.F.) = मानचित्र की दूरी : धरातल की दूरी   
या Map Distance : Ground Distance
                  इस विधि द्वारा प्रत्येक देश का नागरिक आसानी से मानचित्र का अध्ययन कर सकता है। जैसे- 1:25 000 0000 का तात्पर्य मानचित्र पर 1 इंच,धरातल के 250000000 इंच को प्रकट कर रहा है। इसी तरह मानचित्र का 1 सें०मी० धरातल के 250000000 से०मी० को प्रदर्शित कर रहा है।
(ii) रैखिक मापक 
उत्तर- इस विधि को सरल मापक विधि भी कहते हैं। सरल रेखा की लंबाई कथन अथवा प्रदर्शन जिनकी सहायता से गणित के आधार पर निश्चित की जाती है। इसके बाद इस रेखा की मूल तथा गौण विभागों में ज्यामितीय विधि द्वारा विभक्त किया जाता है मुख्य मूल भाग पर खरी इकाई जैसे मील अथवा किलोमीटर तथा गांव या उपविभाग पर छोटी कायदे से फरार हो या मीटर दर्शाया जाता है।
(iii) कथनात्मक मापक
उत्तर- इस विधि में मापक को एक कथन द्वारा व्यक्त किया जाता है। जैसे 1 सेंमी० = 5 किमी० या 1 ईंच = 18 मील आदि। 

                1 सेंमी० = 5 किमी० का अर्थ यह है कि मानचित्र पर 1 सेंमी० की दूरी धरातल पर 5 किमी० की दूरी को प्रदर्शित करता है। इसी प्रकार 1 ईंच = 18 मील से अभिप्राय है कि मानचित्र पर 1 ईंच की दूरी धरातल पर 18 मील की दूरी को प्रदर्शित करता है। इस कथन का पहला भाग मानचित्र प किन्हीं दो स्थानों के बीच की दूरी प्रदर्शित करता है तथा दूसरा भाग भू-पृष्ठ पर उन्हीं दो स्थानों के बीच की दूरी को दिखाता है।


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खण्ड (अ) अध्याय 7 भारत के पड़ोसी देश (य) पाकिस्तान

 खण्ड (अ) अध्याय 7 भारत के पड़ोसी देश

(य) पाकिस्तान



अध्याय 7 भारत
 
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. पाकिस्तान का सबसे बड़ा हवाई अड्डा कहाँ है?
(क) इस्लामाबाद
(ख) करांची
(ग) स्यालकोट
(घ) मुल्तान
उत्तर- (ख) करांची
2. खेल का सामान बनाने में विश्व प्रसिद्ध है-
(क) करांची
(ख) रावलपिण्डी
(ग) स्यालकोट
(घ) लाहौर
उत्तर- (ग) स्यालकोट
3. पाकिस्तान की सबसे प्रसिद्ध चोटी तख्त सुलेमान की ऊँचाई क्या है?
(क) 3850 मी०
(ख) 3770 मी०
(ग) 3700 मी०
(घ) 4400 मी०
उत्तर- (ख) 3770 मी०
4. सिंधु नदी बहती है –
(क) दक्षिण से उत्तर
(ख) पूरब से पश्चिम
(ग) उत्तर से दक्षिण
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (ग) उत्तर से दक्षिण
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. पाकिस्तान को ‘सिंधु की देन’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर- पाकिस्तान के मुख्य नदी सिंधु और उसकी सहायक नदियों में झेलम, चिनाव, रावी, सतलज एवं व्यास है। इन्हें ‘पंचनद’ कहा जाता है, और सिंधु को ‘नद’ के नाम से पुकारा जाता है। सिंधु का उद्गम हिमालय पहाड़ से है जो अपना लंबा सफर तय करता हुआ अरब सागर में समा जाता है। इसकी सभी सहायक नदियाँ उत्तर-पूर्व (भारत के उत्तर-पश्चिम) से मैदान के मध्यवर्ती भाग में आकर इससे मिलती है।
             सिंधु की सहायक नदियों में काबुल नदी भी है, जो अफगानिस्तान होते हुए उत्तर-पश्चिम से आकर सिंधु में मिलती है। पाकिस्तान को सिंधु की देन कहा जाता है। यह सत्य है कि यदि सिंधु पाकिस्तान से अनुपस्थित हो जाए तो पूरा देश पत्थरों और रेगिस्तान का ढेर तुल्य रह जाएगा।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. पाकिस्तान की जलवायु की विशेषताओं की व्याख्या करें।
उत्तर- पाकिस्तान की जलवायु मानसून एवं उष्ण मरुस्थलीय है। यहाँ गर्मी में बेहद गर्मी और जाड़े में कड़ाके की सर्दी पड़ती है। जाड़े के मौसम में औसत तापमान 7° सेंटीग्रेड से काम रहता है और उत्तर के पर्वतीय भाग में बर्फ जम जाता है। गर्मी ऋतु में तापमान 45° सेंटीग्रेड तक पहुँच जाता है। इस समय ‘जैकोबाबाद’ का तापमान 55° सेंटीग्रेड तक पहुँच जाता है, यह पाकिस्तान का ही नहीं वरन एशिया का सबसे गर्म स्थान है। पूर्वी मरुस्थलीय भाग में धूल भरी आँधियाँ चलती है और चारों ओर रेत के टीले भी दिखाई पड़ते हैं। 
                             यहाँ वर्षा का अभाव है, वार्षिक वर्षा का औसत मात्र 35 सेंटीमीटर है। जाड़ें में चक्रवात द्वारा वर्षा होती है और गर्मी में बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून से होती है। यहाँ वर्षा का वितरण एक समान नहीं है। उत्तर के पर्वतीय क्षेत्र में 75 से 80 सेंटीमीटर, पूर्वी मैदान में 35 से 50 सेंटीमीटर, जबकि पश्चिम क्षेत्र में 10 से 25 सेंटीमीटर ही वर्षा होती है।
2. पाकिस्तान के खनन एवं उद्योगों के विकास का वर्णन करें।
उत्तर- खनिज पदार्थों की दृष्टि से पाकिस्तान एक गरीब देश है। यहाँ मिलने वाले खनिज में कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, क्रोमाइट, जिप्सम, लोहा, सेंधा नमक, चूना पत्थर, बॉक्साइट एवं गंधक प्रमुख है। खनिज तेल का उत्पादन बालाकासार, खैरपुर, अटक, चाकवाल में होता है। रावलपिंडी, मजराबल, हैदराबाद के कई क्षेत्रों में कोयला खनन किया जाता है।
 
           अटक, सरगोधा, जितरल एवं मियाँवाली क्षेत्र से लौह अयस्क प्राप्त किया जाता है। बलूचिस्तान की जोब घाटी में क्रोमियम का भंडार है। मैंगनीज लासबेला और कोहाट क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है। प्राकृतिक गैस का मुख्य क्षेत्र सुई, खैरपुर और लायलपुर है।
            यहाँ कृषि एवं रसायन पर आधारित उद्योगों को अधिक विकसित किया गया है। इनमें सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, चीनी, खेल के सामान, कागज, रासायनिक तथा दियासलाई के उद्योग प्रमुख है। खनिज पर आधारित उद्योगों में सीमेंट, तेल शोधक एवं प्राकृतिक गैस आधारित उद्योग मुख्य है। वन आधारित उद्योगों में खेल का सामान तैयार करने के लिए स्यालकोट विश्व प्रसिद्ध है।
               मुल्तान, कराची, लायलपुर, लाहौर उकाड़ा सूत एवं सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केंद्र है। हरनाई,बन्नू एवं कदियाबाद ऊनी वस्त्र के केंद्र है। नौशेरा और रहवाली में फाइन पेपर तथा दफ्ती पेपर उद्योग बांस आधारित है। चारसद्दा, मारदान, जौहरबाद में चीनी की मिलें स्थापित है। मारदान (पेशावर) में एशिया की सबसे बड़ी चीनी मिल है।
              कराची, हैदराबाद, दाउदखेल, बाह तथा रोहरी में सीमेंट उद्योग का विकास हुआ है। दाउदखेल में रसायन पदार्थ बनाने का सबसे बड़ा केंद्र है। इसके अतिरिक्त नौशेरा, लायलपुर, हरिपुर में कास्टिक सोडा, गंधक, तेजाब, रसायनिक, डी०डी०टी०, रेजिन, पेनसीलिन और रंग बनाए जाते हैं।

            कराची के मोगाह में तेल शोधन और सुई में गैस आधारित उद्योग स्थापित है। कुहुरा में परमाणु शक्ति उत्पादन केंद्र स्थापित है।


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खण्ड (अ) अध्याय 7 भारत के पड़ोसी देश (द) श्रीलंका

        खण्ड (अ) अध्याय 7 भारत के पड़ोसी देश

(द) श्रीलंका

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

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अध्याय 7वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. श्रीलंका की आकृति कैसी है?
(क) आयताकार
(ख) अण्डाकार
(ग) त्रिभुजाकार
(घ) वृत्ताकार
उत्तर- (ख) अण्डाकार
2. पिदुरतालगाला श्रीलंका का एक प्रमुख स्थलाकृति है-
(क) नदी
(ख) झील
(ग) शिखर
(घ) गर्त
उत्तर- (ग) शिखर
3. श्रीलंका की राजधानी है-
(क) कैंडी
(ख) कोलंबो
(ग) जाफना
(घ) अनुराधानगर
उत्तर- (ख) कोलंबो
4. भारत से श्रीलंका को अलग करता है-
(क) पाक जलसंधि
(ख) श्रीलंका जलसंधि
(ग) हरमुज जलसंधि
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (क) पाक जलसंधि
5. श्रीलंका में लोकतंत्र की स्थापना कब हुई?
(क) 1948 में
(ख) 1949 में
(ग) 1955 में
(घ) 1956 में
उत्तर- (क) 1948 में
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. श्रीलंका की जलवायु किस प्रकार की है?
उत्तर- श्रीलंका की जलवायु मानसूनी है। विषुवत रेखा के नजदीक होने के कारण यहाँ सालोंभर गर्मी पड़ती है और वर्षा भी होती है।
2. ‘पूर्व की मोती’  श्रीलंका को क्यों कहा जाता है ?
उत्तर- श्रीलंका में हीरे-मोत, जवाहरात एवं अन्य रत्नों के पर्याप्त भंडार होने के कारण इसे ‘पूर्व की मोती’ या ‘मोतियों के द्वीप’ के नाम से विभूषित किया गया है।
3. श्रीलंका में किस प्रकार की वनस्पति पायी जाती है।
उत्तर- श्रीलंका में मुख्यत: विषुवतीय वनस्पति पाई जाती है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. श्रीलंका की जलवायु का वर्णन कीजिए।
उत्तर- श्रीलंका की जलवायु मानसूनी है। विषुवत रेखा के नजदीक होने के कारण यहाँ सालोंभर गर्मी पड़ती है और वर्षा भी होती रहती है। जाड़े की ऋतु यहाँ नहीं होती है। यहाँ तटीय भाग में वर्षा 200 सें०मी० तक और पर्वतीय क्षेत्रों में 500 सें०मी० से भी अधिक वर्षा होती है। यहाँ जाड़ें एवं गर्मी की ऋतु में वार्षिक तापांतर (5°सें० -7°सें०) नहीं के बराबर होती है। जाड़े की ऋतु में औसत तापमान 22° सेंटीग्रेट रहता है। पर्वतीय भाग में तापमान 20° सेंटीग्रेट रहता है।

       यहाँ की प्रमुख नदियों में महावली गंगा, पान और अरुबी है, जो मध्यवर्ती उच्चभूमि से निकलकर तटवर्ती क्षेत्रों से बहती हुई समुद्र में गिरती है। मपद और बुद्धपद जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में दियालुमा, लक्सपाना औ पेरावाला सुंदर जलप्रपात भी हैं।


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खण्ड (अ) अध्याय 7 भारत के पड़ोसी देश (स) बंगलादेश

 खण्ड (अ) अध्याय 7 भारत के पड़ोसी देश

(स) बांग्लादेश

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

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अध्याय 7 भारत के
I. वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
(i)  बांग्लादेश के पूर्व नाम क्या था?
(क) पूर्वी पाकिस्तान
(ख) पूर्वी बंगाल
(ग) पाकिस्तान
(घ) मुजिबनगर
उत्तर- (के) पूूर्वी पाकिस्तान
(ii) भारत के साथ बांग्लादेश की स्थलीय सीमा कितनी लंबी है?
(क) 4018 कि०मी०
(ख) 4096 कि०मी०
(ग) 4180 कि०मी०
(घ) 4009 कि०मी ०
उत्तर- (ख) 4096 कि०मी०
(iii) बांग्लादेश कब स्वतन्त्र हुआ?
(क) 17 दिसंबर,1970
(ख) 18 अक्टूबर,1971
(ग) 17 दिसंबर,1971
(घ) 18 मार्च, 1981
उत्तर- (ख) 17 दिसम्बर,1971
(iv) बांग्लादेश एशिया महाद्वीप के किस भाग में है?
(क) पश्चिमी भाग
(ख) दक्षिणी भाग
(ग) उत्तरी भाग
(घ) पूर्वी भाग
उत्तर- (ख) दक्षिणी भाग
(v) ब्रह्मपुत्र नदी को बांग्लादेश में किस नाम से जाना जाता है?
(क) मेघना
(ख) जमुना
(ग) सूरमा
(घ) कर्णफूली
उत्तर- (ख) जमुुना
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. ढाका नगर की स्थिति एवं महत्व पर प्रकाश डालें।
उत्तर- भारत विभाजन के बाद 1947 ई० में ढाका पूर्वी पाकिस्तान की प्रशासनिक राजधानी बना तथा 17 दिसंबर 1971 ई० में बांग्लादेश के स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आने पर यह राष्ट्रीय राजधानी घोषित हुआ। बूढ़ी गंगा नदी के तट पर स्थित यह देश का सबसे बड़ा शहर है। राजधानी होने के अलावा यह बांग्लादेश का औद्यौगिक और प्रशासनिक केन्द्र भी है। यहाँ पर धान, गन्ना और चाय का व्यापार होता है।
          ढाका की जनसंख्या लगभग 1.1 (2001 के अनुसार) करोड़ है जो इसे दुनिया के ग्यारहवें सबसे बड़ी जनसंख्या वाले शहर का दर्जा भी दिलाता है। ढाका न सिर्फ देश का सबसे साक्षर (63%) शहर है बल्कि बांग्लादेश के शहरों में सबसे ज्यादा विविधता वाला शहर भी है। ढाका का अपना इतिहास रहा है और इसे दुनिया में मस्जिदों के शहर के नाम से जाना जाता है।
2. बंगलादेश के धरातल का विवरण दीजिए।
उत्तर- बांग्लादेश डेल्टाई प्रदेश है जो विश्व के सबसे बड़े डेल्टा अर्थात गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा के मध्य स्थित है। इस मैदानी देश के अधिकतर भाग की ऊँचाई समुद्र तल से 25 मीटर से भी कम है। डेल्टा क्षेत्र में इन नदियों की ढाल बहुत कम है जिसके कारण आसपास के भागों में पानी भर जाता है। मैदान प्रतिवर्ष नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी की परतों से बने हैं जिसके परिणाम स्वरूप अत्यंत उर्वर है। तटवर्ती क्षेत्र दलदली क्षेत्र है।
        डेल्टा क्षेत्र में तट के पास नदियों द्वारा जमा की गई मिट्टी के कारण अनेक छोटे-छोटे टापू बन गए हैं। बांग्लादेश के पूर्वी तट पर स्थित कॉक्स बाजार विश्व का सबसे बड़ा बालुई ‘बीच’ है।
3.बांग्लादेश के आर्थिक संसाधनों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर – बांग्लादेश का अर्थतंत्र कृषि पर टिका है। देश की 80% जनसंख्या कृषि कार्य में लगी हुई है। कृषि का सकल घरेलू उत्पाद में लगभग एक-तिहाई योगदान है। देश के लगभग 63% भूमि पर कृषि कार्य किया जाता है। यहाँ फसलोत्पादन, पशुपालन, मछली पकड़ना तथा वानिकी प्रमुख आर्थिक क्रिया है। समस्त रोजगार का 81℅ विदेशी व्यापार से प्राप्त आय का 80% तथा राष्ट्रीय उत्पाद का 50% से अधिक कृषि से ही प्राप्त होता है।
          बांग्लादेश खनिज संसाधन के दृष्टिकोण से निर्धन है। यहाँ पर खनिज भंडारों की कमी है। देश में मिलने वाले प्रमुख खनिज कोयला, चुना-पत्थर, नमक, कांच की बालू, लोहा तथा प्राकृतिक गैस है।
         जमालपुर तथा फरीदपुर क्षेत्र में कोयला मिलता है, लेकिन उच्च किस्म का नहीं है। प्राकृतिक गैस सीलहट, टिपरा तथा रसीदपुर क्षेत्र से प्राप्त की जाती है। तितास में प्राकृतिक गैस का उत्पादन होता है जो पाइप लाइन द्वारा ढाका भेजी जाती है। चटगाँव में तेल शोधन का एक प्रमुख कारखाना है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
1. बांग्लादेश के भौगोलिक वर्णन विस्तार से करें।
उत्तर – 1947ई० में भारत विभाजन के फलस्वरूप बांग्लादेश ‘पूर्वी पाकिस्तान’ के रूप में पाकिस्तान का एक अंग घोषित किया गया। लेकिन 17 दिसंबर 1971ई० को बांग्लादेश के नाम से यह एक सार्वभौम स्वतंत्र देश घोषित हुआ। इसकी सीमा पश्चिम, उत्तर और पूर्व की ओर भारत की सीमा से सटी हुई है। जिसकी लंबाई करीब 4096 किलोमीटर है। इसके पूर्व में म्यांमार तथा दक्षिण में बंगाल की खाड़ी स्थित है।
         उत्तर में भारत के असम तथा मेघायल है। पूर्व में त्रिपुरा तथा मिजोरम एवं पश्चिम बंगाल राज्य स्थित है। बांग्लादेश के कुल क्षेत्रफल 148393 वर्ग किलोमीटर है। यह देश 20° उत्तरी अक्षांश से 97° उत्तरी अक्षांश तथा 85° पूर्वी देशांतर से 93° पूर्वी देशांतर तक फैला हुआ है। 
           
         जनसंख्या के दृष्टिकोण से बांग्लादेश एशिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। बांग्लादेश की जनसंख्या करीब 15 करोड़ (2006) है। यहाँ आशी 880 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर घनत्व है। देश की 98% जनसंख्या बंगाली समुदाय की है। शेष लोग जनजाति है। लगभग 83% जनसंख्या मुसलमानों की है।
               
         बांग्लादेश डेल्टाई प्रदेश है जो विश्व की सबसे बड़ी डेल्टा अर्थात गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा के मध्य स्थित है। इस मैदानी देश के अधिकतर भाग की ऊँचाई समुद्र तल से 25 मीटर से भी कम है। डेल्टा क्षेत्र में इन नदियों की ढाल बहुत कम है। जिसके कारण आस-पास के भागों में पानी भर जाता है।
          मैदान प्रतिवर्ष नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी की परतों से बने हैं। जिसके परिणाम स्वरूप भूमि अत्यंत उर्वर भी है। तटवर्ती क्षेत्र दलदल क्षेत्र है। यहाँ की जलवायु भरत की तरह मानसूनी है। खनिज संपदा के मामले में भी बांग्लादेश निर्धन है। यहाँ खनिज भंडारों की भारी कमी है।
2. बांग्लादेश की कृषि का आर्थिक महत्व बताते हुए प्रमुख व्यापारिक फसलों का वर्णन करें।
उत्तर- बांग्लादेश का अर्थतंत्र कृषि पर टिका है। देश की 80% जनसंख्या कृषि कार्य में लगी हुई है। कृषि का सकल घरेलू उत्पाद में लगभग एक-तिहाई योगदान है। देश के लगभग 63% भूमि पर कृषि कार्य किया जाता है। यहाँ फसलोत्पादन, पशुपालन, मछली पकड़ना तथा वानिकी प्रमुख आर्थिक क्रिया है। समस्त रोजगार का 81℅ विदेशी व्यापार से प्राप्त आय का 80% तथा राष्ट्रीय उत्पाद का 50% से अधिक कृषि से ही प्राप्त होता है।

         देश की 82% कृषि भूमि प चावल, 6% पर जूट, 4% पर गेहूँ तथा 10% पर सब्जी, फल व नकदी फसलें बोई जाती है। यहाँ धान की तीन फसलें अमन 67%, औस 25% तथा बोरो 3.5 ℅भूमि पर होती है। यहाँ विश्व का 6% से अधिक कच्चा जूट उगाया जाता है। देश का 7% जूट मैमन सिंह के लिए में पैदा होता है।

          चाय- सिलहट तथा चटगाँव की पहाड़ियों के ढलानों पर पैदा होती है। गन्ना तंबाकू तथा गेहूँ अन्य फसलें हैं। पशुपालन व्यवसाय कृषि के पूरक के रूप में प्रचलित है। प्राय: प्रत्येक परिवार अपने उपभोग के लिए मुर्गी या बत्तख, मांस के लिए तथा दुध व ईंधन के लिए मवेशी पालता है। भेड़ व बकरियाँ भी पाली जाती है।


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अध्याय 7 भार
 
I. वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर 
(i) भूटान की राजधानी कहाँ है?
(क) काठमांडू
(ख) ढाका
(ग) थिम्पू
(घ) यंगून
उत्तर- (ग) थिम्पू
(ii) भूटान हिमालय की सर्वाधिक ऊँचाई है?
(क) 8848 मीटर
(ख) 7554 मीटर
(ग) 7115 मीटर
(घ) 8850 मीटर
उत्तर- (ख) 7574 मीटर
(iii) भूटान में औसत वार्षिक वर्षा होती है?
(क) 350 से०मी०
(ख) 300 से०मी०
(ग) 250 से०मी०
(घ) 380 से०मी०
उत्तर- (ख) 250 से०मी०
(iv) भूटान के कितने प्रतिशत क्षेत्र पर वनों का विस्तार है?
(क) 20%
(ख) 50%
(ग) 70%
(घ) 21%
उत्तर- (ग) 68 %
(v) भूटान की साक्षरता दर कितना प्रतिशत है?
(क) 30 %
(ख) 40%
(ग) 42%
(घ) 50%
उत्तर- (ग) 42%
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर –
1. भूटान के धरातल का विवरण दीजिए।
उत्तर – भूटान के दक्षिणी किनारे पर लगभग 16 किलोमीटर चौड़ी मैदानी पट्टी है। जिसको द्वार कहते हैं। द्वार प्रदेश जो 600 मीटर तक ऊँची एक संकरी पट्टी है। मैदान के उत्तर में निचले हिमालय पर्वत हैं। जिनकी ऊँचाई 1500 से 3000 मीटर के बीच है। इन पर्वतमालाओं के उत्तर में ग्रेटर हिमालय है। जिसकी भूटान में सर्वाधिक ऊँचाई 7574 मीटर है।
2. भूटान के आर्थिक संसाधनों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर – भूटान औद्योगिक दृष्टि से बहुत पिछड़ा देश है। विषम धरातल, कठोर जलवायु तथा परिवहन के साधनों की कमी के कारण यहाँ संसाधनों के विकास में भारी कठिनाइयाँ है।  लघु तथा कुटीर उद्योगों का विकास यहाँ हुआ है। यहाँ प्लाईवुड, पैकिंग, डिस्टिलरी, रेजीन व तारपीन के तेल के उद्योग स्थापित है। यहाँ पर्यटन उद्योग का विकास तेजी से हो रहा है।       
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. भूटान का संक्षिप्त परिचय लिखें।
उत्तर – भूटान भारत का एक प्रमुख पड़ोसी देश है। यह पर्वतीय देश है जो पूर्वी हिमालय के मध्य अवस्थित है। भूटान 26°45′ एवं 28°20′ उत्तरी अक्षांश तथा 89°45′ एवं 92°05′ पूर्वी देशांतर के मध्य विस्तृत है। भूटान का क्षेत्रफल 46 500 वर्ग किलोमीटर है। भूटान के उत्तर में चीन(देश), पूर्व में अरुणाचल प्रदेश, दक्षिण में असम तथा पश्चिम में सिक्किम स्थित है। यह सभी भारत के राज्य है। भूटान चारों ओर स्थल से घिरा हुआ है। भूटान की राजधानी थिंफू है।
2. भूटान की जलवायु विशेषताओं की व्याख्या करें।
उत्तर – भूटान की जलवायु पर्वतीय मानसूनी है। यहाँ तापमान पर ऊँचाई का स्पष्ट प्रभाव पड़ता है। वर्षभर कठोर सर्दी पड़ती है। जनवरी का औसत तापमान 4° सेंटीमीटर तथा जुलाई का 17° सेंटीमीटर रहता है। वर्षा 185 सेंटीमीटर से अधिक मई से सितंबर के मध्य होती है। वार्षिक औसत वर्षा 250 सेंटीमीटर होता है। 
            मैदानी भाग द्वार की जलवायु उष्ण कटिबंधीय है। जिसमें जनवरी का महीना ठंडा होता है। लगभग 1050 मीटर से 550 मीटर ऊँचे पर्वतीय प्रदेश में जलवायु शीतोष्ण है। देश की अधिकतर जनसंख्या इसी प्रदेश में निवास करती है। इससे अधिक ऊँचाई वाले भागों की जलवायु बहुत ठंडी है।और वे बर्फ से ढँके रहते हैं। ऊँची पठारी भागों में बहुत कम लोग निवास करते हैं तथा प्राकृतिक वनस्पति भी नाम मात्र का है। पर्वतों के दक्षिणी ढलानों पर अधिक वर्षा होती है और 500 से 750 सेंटीमीटर तक का रिकॉर्ड की जाती है।
3. भूटान की कृषि विशेषताओं तथा औद्योगिक विकास का वर्णन करें।

उत्तर – भूटान की 10% से भी कम भूमि पर कृषि कार्य की जाती है। कृषि कार्य नदियों की आंतरिक घाटियों एवं मध्यम ढालों पर होती है। दक्षिणी-पश्चिमी भाग में कृषि अधिक विकसित है। पूर्वी भाग में स्थानांतरण कृषि होती है। फसलों का उत्पादन ढाल एवं ऊँचाई के अनुसा होता है। चावल, गेहूँ, जौ, आलू, मक्का, सब्जियाँ यहाँ प्रमुख रूप से उपजाई जाती है।


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खण्ड (अ) अध्याय 7 भारत के पड़ोसी देश (अ) नेपाल

 खण्ड (अ) अध्याय 7 भारत के पड़ोसी देश
(अ) नेपाल

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



अध्याय 7 भा
 
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर 
1. नेपाल की सीमा भारत के किस राज्य से मिलती है?
(क) अरुणाचल प्रदेश
(ख) मणिपुर
(ग) सिक्किम
(घ) पंजाब
उत्तर- (ग) सिक्किम
 
2. महाभारत लेख क्या है?
(क) पर्वत श्रृंखला
(ख) लेखागार
(ग) मैदान
(घ) राजमहल
उत्तर- (क) पर्वत श्रृंखला
 
3. गण्डक नदी को नेपाल में किस नाम से जाना जाता है? 
(क) काली गण्डक नदी
(ख) नारायणी नदी
(ग) त्रिशुल नदी
(घ) कृष्णा नदी
उत्तर- (ख) नारायणी नदी
लघुउत्तरीय प्रश्नोत्तर  
 
1. नेपाल के सर्वोच्च शिखर का नाम एवं ऊँचाई बताएँ।
उत्तर- विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट जिसकी ऊँचाई 8848 मीटर है। नेपाल तिब्बत सीमा पर अवस्थित है। स्थानीय लोग इस चोटी को सागरमाथा के नाम से पुकारते हैं।
 
2. नेपाल की तीन प्रमुख नदियों के नाम लिखें।
उत्तर- नेपाल में पूर्व से पश्चिम तीन प्रमुख नदी तंत्र का क्रम है क्रमशः कोसी, गण्डक तथा घाघरा नदी। यहाँ की सबसे लंबी नदी करनाली है जो घागरा की सहायक नदी है।
 
3. नेपाल के पड़ोसी देश और सीमावर्ती भारतीय राज्यों का नाम लिखें।
उत्तर  –  नेपाल के उत्तर में तिब्बत (चीन) स्थित है। जिसके बीच महान हिमालय दीवार जैसा खड़ा है। अन्य तीन तरफ से भारत के राज्य पड़ते हैं। नेपाल के पूर्व में सिक्किम एवं पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तराखंड तथा दक्षिण में बिहार एवं उत्तर प्रदेश राज्य स्थित है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. नेपाल की अर्थव्यवस्था का विवरण दीजिए।
उत्तर- नेपाल में जीवन-निर्वाह कृषि के साथ-साथ पशुपालन मुख्य व्यवसाय है। यहाँ 18% भूभाग पर खेती होती है।
 
              नेपाल में खनिजों का घोर अभाव है। अभ्रक यहाँ मुख्य खनिज है। अल्प मात्रा में लिग्नाइट, तांबा, कोबाल्ट आदि मिलते हैं। शक्ति के साधन के रूप में भारत के सहयोग से देवी घाट जल विद्युत परियोजना चालू किया गया है। यहाँ जल विद्युत विकास की असीम संभावनाएँ है। किंतु इसका विकास नहीं के बराबर हुआ है। 
 
            औद्योगिक दृष्टि से नेपाली पिछड़ा देश है। बड़े उद्योग स्थापित होने वाले कारकों का अभाव है। यहाँ कृषि एवं वन आधारित उद्योगों का विकास किया जा रहा है। यहाँ सूती वस्त्र, चीनी, जूट, चमड़ा,वनस्पति तेल, तंबाकू, दियासलाई, कागज तथा लुग्दी इत्यादि का निर्माण होता है। सीमेंट तथा कृषि उपकरण भी बनाए जा रहे हैं। यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थल तथा पर्वतारोहण सैलानियों को आकर्षित करते हैं। यहाँ पर्यटन उद्योग का तेजी से विकास हो रहा है।
 
2. नेपाल की जलवायु, मृदा और जलप्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर- नेपाल की जलवायु शीत प्रधान है। यहाँ की जलवायु भू आकृतियों से प्रभावित है। दक्षिण के तराई वाले भाग को छोड़कर सभी स्थानों पर तापमान कम रहता है। क्योंकि 75% भूभाग की ऊँचाई समुद्र तल से काफी ऊँचा होता है। काठमांडू का तापमान जाड़ें में 2° सेंटीग्रेट से भी नीचे चला जाता है। जबकि गर्मी में 30° सेंटीग्रेट तक पहूँच जाता है। यहाँ का वार्षिक औसत तापमान 10℃ है। यहाँ का वार्षिक औसत तापमान 10℃ है। यहाँ मार्च से अगस्त तक ग्रीष्म ऋतु तथा सितंबर से फरवरी तक शीत ऋतु रहता है। गर्मी में मानसूनी हवाओं से नेपाल के पूर्वी भाग में 200 सेंटीमीटर तथा पश्चिमी भाग में 100 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा होती है। जाड़े में देश के उत्तरी भाग में हिमपात होते हैं तथा शीतकालीन चक्रवातीय वर्षा भी होती है।
 
3. नेपाल की अर्थव्यवस्था पर उद्योगों के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर- नेपाल में खनिजों का घोर अभाव है। अभ्रक यहाँ मुख्य खनिज है। अल्प मात्रा में लिग्नाइट,तांबा, कोबाल्ट आदि मिलते हैं। शक्ति के साधन के रूप में भारत के सहयोग से देवी घाट जल विद्युत परियोजना चालू किया गया है। यहाँ जल विद्युत विकास की असीम संभावनाएँ है। किंतु इसका विकास नहीं के बराबर हुआ है।  

              औद्योगिक दृष्टि से नेपाली पिछड़ा देश है। बड़े उद्योग स्थापित होने वाले कारकों का अभाव है। यहाँ कृषि एवं वन आधारित उद्योगों का विकास किया जा रहा है। यहाँ सूती वस्त्र, चीनी, जूट, चमड़ा, वनस्पति तेल, तंबाकू, दियासलाई, कागज तथा लुग्दी इत्यादि का निर्माण होता है। सीमेंट तथा कृषि उपकरण भी बनाए जा हे हैं। यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थल तथा पर्वतारोहण सैलानियों को आकर्षित करते हैं। यहाँ पर्यटन उद्योग का तेजी से विकास हो रहा है।


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खण्ड (अ) अध्याय 6 जनसंख्या

 खण्ड (अ) अध्याय 6 जनसंख्या

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



अध्याय 6 जनसंख्या
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर  
1. भारत में सर्वाधिक साक्षरता दर किस राज्य की है?
(क) पश्चिम बंगाल
(ख) महाराष्ट्र
(ग) बिहार
(घ) केरल
उत्तर- (घ) केरल
2. भारत की औसत आयु संरचना क्या है?
(क) 64.6 वर्ष
(ख) 64.9 वर्ष
(ग) 81.6 वर्ष
(घ) 70.2 वर्ष
उत्तर- (क) 64.6 वर्ष (2001)
3. 2001 ई० की जनगणना में प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं के अनुपात की क्या स्थिति है?
(क) 927 महिलाएँ
(ख) 990 महिलाएँ
(ग) 933 महिलाएँ
(घ) 1010 महिलाएँ
उत्तर- (ग) 933 महिलायें
4. भारत का औसत जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग कि०मी० क्या है?
(क) 318 व्यक्ति
(ख) 325 व्यक्ति
(ग) 302 व्यक्ति
(घ) 288 व्यक्ति
उत्तर – (ख) 325 व्यक्ति
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
1. 1951 ई० में भारत की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर – 1951 ई० में भारत की जनसंख्या 361 लाख  थी।
2. भारत में 2001 ई० में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत क्या था?
उत्तर – भारत में 2001 ई० में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत 27.78 था।
3. केरल में प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या क्या है?
उत्तर – केरल में प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 1058 है । (जनगणना 2001 के अनुसार)
4. भारत की साक्षरता दर का वर्णन करें।
उत्तर – साक्षरता जनसंख्या का बहुत ही महत्वपूर्ण संसाधनात्मक गुण होता है। स्पष्टत: केवल एक शिक्षित और जागरूक नागरिक ही बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय ले सकता है तथा शोध एवं विकास के कार्यों को कर सकता है। साक्षरता स्तर में कमी आर्थिक प्रगति में गंभीर बाधक होता है।
            भारत की साक्षरता के स्तर में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है 2001 ई० की जनगणना के अनुसार देश की साक्षरता दर 64.84% पुरुषों का 73% एवं महिलाओं की 53.67% है। परंपरागत मान्यताओं के कारण महिलाओं की साक्षरता दर कम है। लेकिन इसमें तेजी से सुधार हो रहा है।
5. भारत के लिंग अनुपात की विशेषताओं को बताएँ।
उत्तर – प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को लिंग अनुपात कहा जाता है। यह जानकारी किसी दिए गए समय में, समाज में पुरुषों एवं महिलाओं के बीच समानता की सीमा मापने के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सम्यक है। देश में लिंग अनुपात महिलाओं के पक्ष में नहीं है। सन 1951 से 2001 के बीच के लिंग अनुपात की सारणी इस प्रकार है-
जनगणना वर्ष             लिंग अनुपात
 1951 –                          946
  1961 –                          941
  1971 –                          930
  1981 –                         934
  1991 –                          929
  2001 –                         933
भारत में लिंग अनुपात 1951-2001
6. जनगणना से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – एक निश्चित समय अंतराल की आधिकारिक गणना को जनगणना कहते हैं। भारत में सबसे पहले 1872 ई० में जनगणना की गई थी। सन 1881 में पहली बार संपूर्ण जनगणना की गई थी। उसी समय से प्रत्येक 10 वर्ष पर जनगणना होती है। भारतीय जनगणना जनसांख्यिकी, समसामयिक तथ्यों तथा आर्थिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. भारत की जनसंख्या वृद्धि की विशेषताओं को बताएँ।
उत्तर – भारत की जनसंख्या वृद्धि की विशेषताएँ मुख्यतः चार हैं-
(i) जन्मदर
(ii) मृत्युदर
(iii) प्रवास तथा
(iv) व्यावसायिक संरचना।
(i) जन्मदर- एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में जितने बच्चों का जन्म होता है, उसे जन्मदर कहते हैं। यह जनसँख्या वृद्धि का एक प्रमुख घटक है क्योंकि भारत में हमेशा जन्मदर मृत्युदर से अधिक रहा है। भारत की आबादी 1951 में 36 करोड़ 10 लाख से बढ़कर 2011 में 1 अरब 21 करोड़ हो गई।
(ii) मृत्युदर- क वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों के मरने की संख्या को मृत्युदर कहा जाता है। मृत्युदर में तेजी से गिरावट भारत की जनसंख्या में वृद्धि की दर का प्रमुख कारण है। 1980 तक उच्च जन्मदर में धीमी गति से एवं मृत्युदर में तीव्र गति से गिरावट के कारण जन्मदर और मृत्युदर में काफी बड़ा अन्तर आ गया है । इसके कारण जनसंख्या में विस्फोट हो गया।
(iii) प्रवास-  लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। प्रवास केवल जनसंख्या के आकार को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उम्र एवं लिंग के वृद्धि में ग्रामीण-नगरीय प्रवास के कारण शहरों तथा नगरों की जनसंख्या में नियमित वृद्धि हुई है। 1951 में कुल जनसंख्या की 17.29% नगरीय जनसंख्या थी, जो 2011 में बढ़ कर 37.8% हो गई।
(iv) व्यावसायिक संरचना- आर्थिक रूप से क्रियाशील जनसंख्या का प्रतिशत विकास का एक महत्त्वपूर्ण सूचक है। विभिन्न प्रकार के व्यवसायों के अनुसार किए गए जनसंख्या के आर्थिक वितरण को व्यावसायिक संरचना कहते हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश है अत: 64% जनसंख्या गाँवों में कृषि कार्य पर आधारित है। शहरों में जीविका-निर्वाह के साधनों के बढ़ने से सुरक्षा के ख्याल से भी नगरों की संख्या बढ़ रही है।
2. भारत के विषम जनसंख्या घनत्व वर्णन कीजिए।
उत्तर – जनसंख्या घनत्व का तात्पर्य भूमि के प्रति इकाई पर आधिवासिस होने वाली जनसंख्या है। भारतीय जनगणना विभाग द्वारा स्तरीय मापक के रूप में प्रति वर्ग किलोमीटर को एक इकाई माना गया है। इस दृष्टि से भारत की जनगणना 2001 के अनुसार भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 325 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। लेकिन इसमें भारी विषमता है। मैदानी राज्यों में सर्वाधिक घनत्व है। तटीय राज्यों में भी काफी घनत्व है। लेकिन इसमें भारी वविषमता है। मैदानी राज्यों में आदिवासी आर्थिक संरचनात्मक सुविधा की कमी के कारण, कम घनत्व पाए जाते हैं। पठारी राज्यों में सामान्य घनत्व की स्थिति है। 

             भारतीय राज्यों में सर्वाधिक घनत्व पश्चिम बंगाल का है। यहाँ औसतन प्रति वर्ग किलोमीटर 904 व्यक्ति रहते हैं। इसके बाद क्रमशः बिहार(881), केरल(819), का स्थान आता है। सबसे कम घनत्व अरुणाचल प्रदेश अर्थात पर्वतीय राज्य का है जहां औसत घनत्व मात्र 13 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। केंद्र शासित प्रदेशों को सम्मिलित कर देखा जाए तो सर्वाधिक दिल्ली में है। यह 9340 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीट है। लेकिन सबसे कम घनत्व अरुणाचल प्रदेश में ही है। केंद्र शासित प्रदेशों में  निकोबार द्वीप समूह का घनत्व 34 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।


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