अध्याय 2 प्रवास-प्रकार, कारण और परिणाम (Migration: Types, Causes and Consequences)

इकाई-1 अध्याय 2 प्रवास-प्रकार, कारण और परिणाम

(Migration: Types, Causes and Consequences)

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)

अध्याय 2 प्रवास-प्रकार, कारण और परिणाम

प्रवास-प्रकार

(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए –
1. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में पुरुष प्रवास का मुख्य कारण है?
(क) शिक्षा
(ख) काम और रोजगार
(ग) व्यवसाय
(घ) विवाह
उत्तर – (ग) व्यवसाय
2. निम्नलिखित में से किस राज्य में सर्वाधिक संख्या में अप्रवासी आते हैं?
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) महाराष्ट्र
(ग) दिल्ली
(घ) बिहार
उत्तर – (ग) दिल्ली
3. भारत में प्रवास की निम्नलिखित धाराओं में से कौन-सी एक धारा पुरुष प्रधान है?
(क) ग्रामीण से ग्रामीण
(ख) ग्रामीण से नगरीय
(ग) नगरीय से ग्रामीण
(घ) नगरीय से नगरीय
उत्तर – (ग) नगरीय से ग्रामीण
4. निम्नलिखित में से किस नगरीय समूहन में प्रवासी जनसंख्या का अंश सर्वाधिक है?
(क) मुंबई नगरीय समूहन
(ख) बैंगलौर नगरीय समूहन
(ग) दिल्ली नगरीय समूहन
(घ) चेन्नई नगरीय समूहन
उत्तर – (क) मुंबई नगरीय समूहन
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें।
प्रश्न 1. जीवनपर्यंत प्रवासी पिछले निवास के अनुसार प्रवासी में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – भारत की जनगणना में प्रवास की गणना दो आधारों पर की गई है –
जन्म का स्थान – यदि जन्म का स्थान गणना के स्थान से भिन्न है, इसे जीवनपर्यंत प्रवासी के नाम से जाना जाता है।
निवास का स्थान – यदि निवास का पिछला स्थान गणना के स्थान से भिन्न है, इसे निवास के पिछले स्थान से प्रवासी के रूप में जाना जाता है।
प्रश्न 2. पुरुष/स्त्री वरणात्मक प्रवास के मुख्य कारण की पहचान कीजिए।
उत्तर – पुरुषों और स्त्रियों के लिए प्रवास के कारण भिन्न हैं। उदाहरण के तौर पर काम और रोजगार पुरुष प्रवास के मुख्य कारण रहे हैं जबकि स्त्रियाँ विवाह के उपरांत अपने मायके से बाहर ससुराल जाती हैं। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में यह सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारण है, मेघालय इसका अपवाद है जहाँ स्थिति ठीक इसके विपरीत है।
प्रश्न 3. उद्दगम और गंतव्य स्थान की आयु एवं लिंग संरचना पर ग्रामीण-नगरीय प्रवास का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर – ग्रामीण-नगरीय प्रवास नगरों में जनसंख्या की वृद्धि में योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण कारकों में से एक है। ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले युवा आयु, कुशल एवं दक्ष लोगों का बाह्य प्रवास ग्रामीण जनांकिकीय संघटन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। यद्यपि उत्तरांचल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पूर्वी महाराष्ट्र से होने वाले बाह्य प्रवास ने इन राज्यों की आयु एवं लिंग संरचना में काफी गंभीर असंतुलन की समस्या पैदा कर दिया है। ऐसे ही असंतुलन की समस्या उन राज्यों में भी उत्पन्न हो गए हैं जिनमें ये प्रवासी जाते हैं।
(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।
प्रश्न 1. भारत में अंतर्राष्ट्रीय प्रवास के कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर – भारत में पड़ोसी देशों से आप्रवास और उन देशों की ओर भारत से उत्प्रवास भी हुआ है। निम्नलिखित तालिका से पड़ोसी देशों से प्रवासियों का ब्यौरा पता चलता है। जनगणना 2001 में अंकित है कि भारत में अन्य देशों से 50 लाख व्यक्तियों का प्रवास हुआ है। इनमें 96 प्रतिशत पड़ोसी देशों से आए हैं, बांग्लादेश (30 लाख) इसके बाद पाकिस्तान (9 लाख) और नेपाल (5 लाख)। इनमें तिब्बत, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान और म्यांमार के 1.6 लाख शरणार्थी भी शामिल हैं। जहाँ तक भारत से उत्प्रवास का प्रश्न है, ऐसा अनुमान है कि भारतीय डायास्पोरा के लगभग 2 करोड़ लोग हैं जो 110 से अधिक देशों में फैले हुए हैं।
तालिका- भारत में सभी अवधियों में पड़ोसी देशों से पिछले निवास स्थान के अनुसार आप्रवासीस्रोत: भारत की जनगणना, 2001
प्रश्न 2. प्रवास के सामाजिक जनांकिकीय परिणाम क्या-क्या है?
उत्तर – प्रवासी सामाजिक परिवर्तन के अभिकर्ताओं के रूप में कार्य करते हैं। नवीन प्रौद्योगिकियों, परिवार नियोजन, बालिका शिक्षा इत्यादि से संबंधित नए विचारों का नगरीय क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर विसरण इन्हीं के माध्यम के माध्यम से होता है।

            प्रवास से विविध संस्कृतियों के लोगों का अंतर्मिश्रण होता है। इसका संकीर्ण विचारों को भेदना तथा मिश्र संस्कृति के उद्द्विकास में सकारात्मक योगदान होता है और यह अधिकतर लोगों के मानसिक क्षितिज को विस्तृत करता है। किंतु इसके गुमनामी जैसे गंभीर नकारात्मक परिणाम भी होते हैं जो व्यक्तियों में सामाजिक निर्वात और खिन्नता की भावना भर देते हैं। खिन्नता की सतत् भावना लोगों को अपराध और औषध दुरुपयोग (drug abuse) जैसी असामाजिक क्रियाओं के जाल में फंसने के लिए अभिप्रेरित कर सकती है।


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(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)
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PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER सम्पूर्ण हल सहित (बिहार बोर्ड भूगोल 12वीं कक्षा)

अध्याय 1 जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि एवं संघटन (Population: Distribution, Density, Growth and Composition)

इकाई -1 अध्याय 1 जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि एवं संघटन

(Population: Distribution, Density, Growth and Composition)
बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)

अध्याय 1 जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि एवं संघटन

अध्याय 1 जनसंख्या

(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए-
1. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या निम्नलिखित में से कौन-सी है?
(क) 102.8 करोड़
(ख) 318.2 करोड़
(ग) 318.2 करोड़
(घ) 2 करोड़
उत्तर – (क) 102.8 करोड़
2. निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक है?
(क) पश्चिम बंगाल
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) केरल
(घ) पंजाब
उत्तर – (क) पश्चिम बंगाल
3. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से किस राज्य में नगरीय जनसंख्या का अनुपात सर्वाधिक है?
(क) तमिलनाडु
(ख) केरल
(ग) महाराष्ट्र
(घ) गुजरात
उत्तर – (ख) केरल
4. निम्नलिखित में से कौन-सा एक समूह भारत में विशालतम भाषाई समूह है?
(क) चीनी-तिब्बती
(ख) आस्ट्रिक
(ग) भारतीय-आर्य
(घ) द्रविड़
उत्तर – (ग) भारतीय-आर्य

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें।
प्रश्न 1. भारत के अत्यंत ऊष्ण एवं शुष्क तथा अत्यंत शीत व आर्द्र प्रदेशों में जनसंख्या का घनत्व निम्न है। इस कथन के दृष्टिकाण से जनसंख्या के वितरण में जलवायु की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – भू: विन्यास और जल की उपलब्धता के साथ जलवायु प्रमुख रूप से जनसंख्या के वितरण के प्रतिरूपों का निर्धारण करती है। परिणामस्वरूप उत्तर भारत के मैदानों, डेल्टाओं और तटीय मैदानों में जनसंख्या का अनुपात दक्षिणी और मध्य भारत के राज्यों के आंतरिक जिलों, हिमालय, उत्तर-पूर्वी और पश्चिमी कुछ राज्यों की अपेक्षा उच्चतर है। यही कारण है कि भारत के अत्यंत ऊष्ण एवं शुष्क तथा अत्यंत शीत व आर्द्र प्रदेशों में जनसंख्या का घनत्व निम्न है।
प्रश्न 2. भारत के किन राज्यों में विशाल ग्रामीण जनसंख्या है? इतनी विशाल ग्रामीण जनसंख्या के लिए उत्तरदायी एक कारण को लिखिए।
उत्तर – बिहार और सिक्किम जैसे राज्यों में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत बहुत अधिक है। गोआ और महाराष्ट्र राज्यों की कुल जनसंख्या का लगभग आधे से अधिक भाग गाँवों में बसता है। अंतर-राज्य और अंतः राज्य दोनों स्तरों पर नगरीकरण का सापेक्षिक परिमाण और ग्रामीण-नगरीय प्रवास का विस्तार ग्रामीण जनसंख्या के सांद्रण को नियंत्रित करते हैं।
प्रश्न 3. भारत के कुछ राज्यों में अन्य राज्यों की अपेक्षा श्रम सहभागिता ऊँची क्यों है?
उत्तर – भारत जैसे देश के संदर्भ में ऐसा समझा जाता है कि आर्थिक विकास के निम्न स्तरों वाले क्षेत्रों में सहभागिता दर ऊँची है क्योंकि निर्वाह अथवा लगभग निर्वाह की आर्थिक क्रियाओं के निष्पादन के लिए अनेक कामगारों की जरूरत पड़ती है।
प्रश्न 4. “कृषि सेक्टर में भारतीय श्रमिकों का सर्वाधिक अंग संलग्न है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – कुल श्रमजीवी जनसंख्या का लगभग 60 प्रतिशत कृषक और कृषि मजदूर हैं जबकि केवल 4 प्रतिशत श्रमिक घरेलू उद्योगों में लगे हैं और 36 प्रतिशत अन्य श्रमिक हैं जो गैर-घरेलू उद्योगों, व्यापार, वाणिज्य, विनिर्माण और मरम्मत तथा अन्य सेवाओं में कार्यरत हैं।
 
(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दो।
प्रश्न 1. भारत में जनसंख्या के घनत्व के स्थानिक वितरण की विवेचना कीजिए।
उत्तर – जनसंख्या के घनत्व को प्रति इकाई क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। इससे भूमि के संदर्भ में जनसंख्या के स्थानिक वितरण को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलती है। वर्तमान समय में भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. (2011) है। 1951 ई में जनसंख्या का घनत्व 117 व्यक्ति/वर्ग किमी. से बढ़कर 2011 में 382 व्यक्ति/प्रतिवर्ग किमी. होने से विगत 50 वर्षों में 265 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. की उत्तरोत्तर वृद्धि हुई हैं।
          अरुणाचल प्रदेश में सबसे कम 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. से लेकर दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 11320 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. तक है। उत्तरी भारत के राज्यों में बिहार (1106) और पश्चिम बंगाल (480) में उच्चतर घनत्व पाया जाता है। असम (398), गुजरात (308), आंध्र प्रदेश (308), हरियाणा (573), झारखंड (414), उड़ीसा (270) में मध्यम घनत्व पाया जाता है।
                हिमाचल प्रदेश  पर्वतीय राज्यों में (123) और असम को छोड़कर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में अपेक्षाकृत निम्न घनत्व है जबकि अंडमान और निकोबार द्वीपों को छोड़कर केंद्र-शासित प्रदेशों में जनसंख्या के उच्च घनत्व पाए जाते हैं। जनसंख्या का घनत्व एक अशोधित माप है। कुल कृषित भूमि पर जनसंख्या के दबाव के संदर्भ में मानव संघटन अनुपात को बेहतर समझने के लिए कायिक और कृषीय घनत्वों को ज्ञात करना चाहिए जो भारत जैसे विशाल कृषि जनसंख्या वाले देश के लिए सार्थक है।
 
नोट :- कायिक घनत्व = कुल जनसंख्या/निवल कृषित क्षेत्र।
कृषीय घनत्व = कुल कृषि जनसंख्या/निवल कृषित क्षेत्र। कृषि जनसंख्या में कृषक, कृषि मजदूर और उनके परिवार के सदस्य शामिल होते हैं।
 
प्रश्न 2. भारत की जनसंख्या के व्यावसायिक संघटन का विवरण दीजिए।
उत्तर – जनसंख्या के व्यावसायिक संघटन- जनसंख्या के व्यावसायिक संघटन से तात्पर्य किसी भी देश या प्रदेश के कार्यशील जनसंख्या (अर्थात 15 से 59 आयु वर्ग में स्त्री और पुरुष) से है जो कि कृषि, वानिकी, मत्स्यन, विनिर्माण, निर्माण, व्यवसायिक परिवहन, सेवाओं, संचार तथा अन्य अवर्गीकृत सेवाओं जैसे व्यवसायों से जुड़े होते हैं। व्यावसायिक संघटन को मुख्यतः चार भागों में बाँटा जा सकता है :-
(क) प्राथमिक कार्यशील जनसंख्या- इसके अंतर्गत कृषि, वानिकी, मत्स्यन तथा खनन जैसे कार्यों को रखा जाता है।
(ख) द्वितीयक कार्यशील जनसंख्या- इसके अंतर्गत निर्माण, विनिर्माण से संबंधित कार्य किए जाते हैं। शक्ति उत्पादन से संबंधित क्रिया भी इसी समूह में शामिल है।
(ग) तृतीयक कार्यशील जनसंख्या- इसके अंतर्गत व्यापार, आयात-निर्यात तथा अन्य कार्य सम्मिलित है।
(घ) चर्तुथक कार्यशील जनसंख्या- अनुसंधान और वैचारिक विकास से जुड़े कार्यों को चतुर्थक कार्यशील जनसंख्या के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

            उपरोक्त चार खंडों में कार्यशील जनसंख्या का अनुपात किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास के स्तरों का एक अच्छा सूचक है। इसका कारण यह है कि केवल उद्योगों और अवसंरचना से युक्त एक विकसित अर्थव्यवस्था ही द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक क्षेत्रों में अधिक कर्मियों को समायोजित कर सकती है। यदि अर्थव्यवस्था अभी भी आदिम अवस्था में है तब प्राथमिक क्रियाओं में संलग्न लोगों का अनुपात अधिक होगा क्योंकि इसमें मात्र प्राकृतिक संसाधनों का दोहन होता है।


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अध्याय 10 मानव बस्ती 

इकाई-4 अध्याय 10 मानव बस्ती

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)




अध्याय 10 मानव बस्ती

अध्याय 10 मानव बस्ती

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:

(i) निम्न में से किस प्रकार की बस्तियाँ सड़क, नदी या नहर के किनारे होती है?

(क) वृत्ताकार

(ख) चौक पट्टी

(ग) रेखीय

(घ) वर्गाकार

उत्तर – (ग) रेखीय

(ii) निम्न में से कौन-सा एक आर्थिक क्रिया ग्रामीण बस्तियों की मुख्य आर्थिक क्रिया है?

(क) प्राथमिक

(ख) तृतीयक

(ग) द्वितीयक

(घ) चतुर्थ

उत्तर – (क) प्राथमिक

(iii) निम्न में से किस प्रदेश में प्रलेखित प्राचीनतम नगरीय बस्ती रही है?

(क) ह्वांगहो की घाटी

(ख) सिंधु घाटी

(ग) नील घाटी

(घ) मेसोपोटामिया

उत्तर – (ख) सिंधु घाटी

(iv) 2006 के प्रारम्भ में भारत मे कितने मिलियन सिटी थे।

(क) 40

(ख) 41

(ग) 42

(घ) 43

उत्तर – (क) 40

(v) विकासशील देशों की जनसँख्या के सामाजिक ढाँचे के विकास एवं विकास आवश्यकताओं  की पूर्ति में कौन से प्रकार के संसाधन सहायक है?

(क) वित्तिय

(ख) मानवीय

(ग) प्राकृतिक

(घ) सामाजिक

उत्तर – (घ) सामाजिक

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) आप बस्ती को कैसे परिभाषित करेंगे?

उत्तर – वैसे भौगोलिक क्षेत्र जहाँ मानव साधारणतया सामूहिक  रूप से निवास करता हो उसे मानव बस्ती कहते हैं। मकानों का स्वरूप बदला जा सकता है, उनके कार्य बदल सकते हैं परंतु बस्तियाँ समय एवं स्थान के साथ निरंतर बस्ती रहेगी।  

(ii) स्थान ( साइट) एवं स्थिति (सिचुएसन) के मध्य अंतर बताएँ।

उत्तर – स्थान ( साइट) से तात्पर्य वैसे भौगोलिक क्षेत्र से है जहाँ मानव बस्ती बनाकर निवास करते है, उसे स्थान (साईट) कहा जाता है  जबकि  स्थिति (सिचुएसन) से तात्पर्य बस्ती के आस-पास मौजूद उन सभी भौगोलिक अर्थात पर्यावरणीय दशाओं से है जो एक बस्ती को प्रभावित करता है

(iii) बस्तियों के वर्गीकरण के क्या आधार हैं?

उत्तर – बस्तियों के वर्गीकरण कार्यों के आधार पर मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है –

(क) ग्रामीण बस्ती

(ख) नगरिय बस्ती

        कार्यों के आधार पर ग्रामीण एवं नगरीय बस्ती को ही भूगोल में सर्वाधिक मानता प्राप्त है।

(iv) मानव भूगोल में बस्तियों के अध्ययन का औचित्य बताएँ।

उत्तर – बस्ती भूगोल मानव भूगोल की एक नई शाखा है। बस्ती भूगोल मानव द्वारा निर्मित आवासों पर भौतिक तथा सांस्कृतिक तत्वों के प्रभाव का अध्ययन करता है, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार मानव भूगोल मानव एवं वातावरण के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण करता है। इस प्रकार मानव बस्ती का अध्ययन मानव भूगोल का मूल तत्व है क्योंकि किसी भी क्षेत्र में बस्तियों का रूप उस क्षेत्र के वातावरण से मानव का सीधा संबंध रहता है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) ग्रामीण एवं नगरीय बस्ती किसे कहते है? उनकी विशेषताएँ बताएँ।

उत्तर – ग्रामीण बस्ती- वैसे बस्ती जहाँ की आबादी 5000 व्यक्ति से कम हो, 75% पुरुष कृषि कार्यों में संलग्न हो तथा जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से कम हो, ऐसे स्थानीय क्षेत्र को ग्रामीण बस्ती कहा जाता है।

      दूसरे शब्दों में जहाँ की 75% पुरुष प्राथमिक कार्यों में संलग्न हो उसे ग्रामीण बस्ती कहा जाता है।

नगरीय बस्ती- वैसे बस्ती जहाँ की आबादी कम से कम 5000 व्यक्ति से अधिक हो, 75% पुरुष गैर कृषि कार्यों में संलग्न हो तथा जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से अधिक हो, ऐसे स्थानीय क्षेत्र को नगरीय बस्ती कहा जाता है। यहाँ नगरपालिका, निगम, छावनी बोर्ड या अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति होती है।

         दूसरे शब्दों में संक्षेप में  जहाँ की 75% पुरुष द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों में संलग्न हो उसे नगरीय बस्ती कहा जाता है।

ग्रामीण बस्तियों की विशेषताएँ-

◆ ग्रामीण बस्ती प्रत्यक्ष रूप से भूमि से नजदीकी सम्बन्ध रखती है

◆ यहाँ कि अधिकांश जनसंख्या प्राथमिक कार्यों (कृषि, मछली पकड़ना, आखेट, पशुपालन आदि)  से जुड़े होते है

◆ बस्तियों का आकार प्राय: छोटा होता है

◆ जनसंख्या 5000 से कम होता है

◆ यहाँ के लोग सामाजिक, सांकृतिक, धार्मिक एवं राजनितिक रूप से आपस में जुड़े होते है

नगरीय बस्तियों की विशेषताएँ-

◆ यहाँ नगर निगम, निगम, छावनी बोर्ड या अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति होती है।

◆ यहाँ की जनसंख्या 5000 से अधिक होती है

◆ यहाँ कि अधिकांश जनसंख्या द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों में संलग्न रहती है

◆ ग्रामीण बस्तियों के अपेक्षा नगरों कि स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण होता है

◆ नगरों का विकास और विस्तार काफी तेजी से होता है

(ii) विकासशील देशों के नगरीय बस्तियों की समस्याओं का विवेचना किजिए।

उत्तर- नगरीकरण विकास का सूचक माना जाता है। परिणामस्वरुप विश्व के सभी देशों तथा विकसित एवं विकासशील देशों में नगरों का वितरण भिन्न रूपों में पाया जाता है। विकसित देशों में नगरीय सुविधाएँ बढ़ी है जबकि विकासशील देशों में समस्याएँ बढ़ी है। छोटे-छोटे कस्बों एवं क्षेत्रों से कार्यकारी जनसंख्या का पलायन हो रहा है। रोजगार के ज्यादा अवसर बड़े-बड़े शहरों तक सीमित है। वृहत आकार की जनसंख्या में अकुशल, अर्धकुशल एवं अनुत्पादकों की संख्या बढ़ती जा रही है।

        अकुशल, अर्धकुशल श्रमिकों को छोटे स्तर पर काम मिलने से उनका जीवन स्तर निम्न स्तर का होता है। यहाँ कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक बुराइयाँ जन्म ले रही है। यहाँ का लिंगानुपात बिगड़ रहा है। अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है। पर्यावरणीय समस्याएँ तथा यातायात संबंधी समस्याएँ लगातार बढ़ती जा रही है।       

       दूसरे शब्दों में संक्षेप में विकासशील देशों के नगरीय बस्तियों की समस्याएँ निम्नलिखित है:-

◆ अधिकांश शहरों का अनियोजित होना।

◆ अधिकांश शहरों में भीड़ की स्थिति होना

◆ सभी निवासियों को आधारभूत नागरिक सुविधाओं का अभाव होना

◆ बहुमंजिला मकान तथा गंदी बस्तियों की बढ़ोतरी होना

◆ जनसंख्या का काफी अधिक भाग निम्न स्तरीय आवासों जैसे- गंदी बस्तियों एवं अवैध बस्तियों में रहना

◆ स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण का अभाव होना




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अध्याय 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

इकाई-3 अध्याय 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


अध्याय 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

अध्याय 9 अंतर्राष्ट्रीय

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:
(i) संसार के अधिकांश महान पत्तन इस प्रकार वर्गीकृत किए गए हैं-
(क) नौसेना पत्तन
(ख) विस्तृत पत्तन
(ग) तैल पत्तन
(घ) औद्योगिक पत्तन
उत्तर – (क) नौसेना पत्तन
(ii) निम्नलिखित महाद्वीपों में से किस एक से विश्व व्यापार का सर्वाधिक प्रवाह होता है?
(क) एशिया
(ख) यूरोप
(ग) उत्तरी अमेरिका
(घ) अफ्रीका
उत्तर – (ख) यूरोप
(iii) दक्षिण अमेरिकी राष्ट्रों में से कौन-सा एक ओपेक का सदस्य है?
(क) ब्राजील
(ख) वेनेजुएला
(ग) चिली
(घ) पेरू
उत्तर – (ग) चिली
(iv) निम्न व्यापार समूहों में से भारत किसका एक सह-सदस्य है ?
(क) साफ्टा(SAFTA)
(ख) आसियान(ASEAN)
(ग) ओइसीडी(OECD)
(घ) ओपेक(OPEC)
उत्तर – (क) साफ्टा(SAFTA)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: 
(i) विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य कौन-से है?
उत्तर – विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य निम्नलिखित है-
◆ यह विश्व स्तर पर व्यापार के नियमों का निर्धारण करता है। 
विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों के बीच होने वाले विवादों का निपटारा करता है।
◆ यह विश्व स्तर पर व्यापार के लिए आवश्यक दूरसंचार व बैंकिंग सेवाओं के साथ-साथ बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार को भी अपने कार्यों में सम्मिलित करता है। 
(ii) ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का होना किसी देश के लिए क्यों हानिकारक होता है?
उत्तर– जब किसी देश का आयात मूल्य, उसके निर्यात मूल्य से अधिक होता है तब देश का व्यापार संतुलन ऋणात्मक अथवा प्रतिकूल कहा जाता है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है और यह वित्तीय संचय की समाप्ति को अभिप्रेरित करता है। यही कारण है कि ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का होना किसी देश के लिए हानिकारक होता है। 
(iii) व्यापारिक समूहों के निर्माण द्वारा राष्ट्रों को क्या लाभ प्राप्त होते है?
उत्तर- व्यपारिक समूहों का निर्माण राष्ट्रों के लिए पारस्परिक लाभदायक होता है, यदि यह प्रादेशिक  विशिष्टीकरण, उत्पादन के उच्च स्तर, रहन-सहन के स्तर, वस्तुओं एवं सेवाओं की विश्वव्यापी उपलब्धता, कीमतों और वेतन का समानीकरण, ज्ञान एवं संस्कृति के प्रस्फुरण को प्रेरित करता है   
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) पतन किस प्रकार व्यापार के लिए सहायक होते है? पत्तनों का वर्गीकरण उनकी अवस्थिति के आधार पर कीजिए।
उत्त – अंतरराष्ट्रीय व्यापार के दुनिया के मुख्य प्रवेश द्वार पोताश्रय तथा पत्तन होते हैं। इन पत्रों के द्वारा जहाजी माल तथा यात्री विश्व के एक भाग से दूसरे भाग को जाते हैं। 
     
        पत्तन जहाज के लिए गोदी, लादने, उतारने तथा भंडारण हेतु सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इन सुविधाओं को प्रदान करने के उद्देश्य से पत्तन के प्राधिकारी नौगम्य द्वारों का रख-रखाव, रस्सों व बजरों की व्यवस्था करने और श्रम एवं प्रबंधकीय सेवाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था करते हैं। एक पत्तन  के महत्व को नौगम्य के आकार और निपटाए किए गए जहाजों की संख्या द्वारा निश्चित किया जाता है।
                         अवस्थिति के आधार पर पत्तन दो प्रकार होते हैं- 
(a) अंतर्देशीय पत्तन- ये पत्तन समुद्री तट से दूर अवस्थित होते हैं। ये समुद्र से एक नदी अथवा नहर द्वारा जुड़े होते हैं। ऐसे पतन चौरस तल वाले जहाज या बजरी द्वारा ही गम्य होते हैं। उदाहरणस्वरूप- कोलकत्ता हुगली नदी जो गंगा नदी की एक शाखा है पर स्थित है। 
(b) बाह्य पत्तन- ये गहरे जल के पत्तन है जो वास्तविक पत्तन से दूर बने होते हैं। ये उन जहाजों, जो अपने बड़े आकार के कारण उन तक पहुँचने में अक्षम है, को ग्रहण करके पैतृक पत्तनों को सेवाएँ प्रदान करते हैं। उदाहरणस्वरूप एथेंस तथा यूनान में इसके बाह्य पत्तन पिरेइअस एक उच्च कोटि का संयोजन है। 
(ii) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से देश कैसे लाभ प्राप्त करते है?
उत्तर – दो या दो से अधिक देशों के बीच होने वाले व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है। इससे व्यापारिक सदस्य देशों को निम्नलिखित प्रकार से लाभ  होते है –
◆ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वस्तुओं के स्थानान्तरण के सिद्धांत पर निर्भर करता है जिससे व्यापारिक सदस्य देशों को लाभ पहुँचता है
◆कीमतों और वेतन का समानीकरण से व्यापारिक सदस्य देशों को लाभ पहुँचता है
◆ व्यापारिक सदस्य देशों में आपसी सहयोग एवं भाईचारा बढ़ता है, इससे इनके बीच मैत्रिक संबंध अच्छे बनते है
◆ व्यापारिक सदस्य देशों में हर देश अपनी सर्वश्रेष्ठ सामान को बाजार में उतारता है जिससे अन्य आर्थिक क्रियाओं का विकास होता है

◆ इसके अंतर्गत तकनीकी ज्ञान, संकृति एवं अन्य बौद्धिक ज्ञानों का आदान-प्रदान किया जाता है, इससे दोनों देशों को लाभ पहुँचता है


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(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)

Part 1: Principal of Human Geography
बिहा बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)
Part 2: India- People and Economy

PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER सम्पूर्ण हल सहित (बिहार बोर्ड भूगोल 12वीं कक्षा)

अध्याय 8 परिवहन एवं संचार 

इकाई-3 अध्याय 8 परिवहन एवं संचार

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


अध्याय 8 परिवहन एवं संचार

अध्याय 8 परिवहन
1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए: 
(i) पारमहाद्वीपीय स्टुवर्ट महामार्ग किनके मध्य से गुजरता है?
(क) डार्विन और मेलबॉर्न
(ख) एडमंटन और एंकॉरेज
(ग) बैंकूवर और सेंट जॉन नगर
(घ) चेगडू और ल्हासा
उत्तर – (क) डार्विन और मेलबॉर्न
(ii) किस देश में रेल मार्गों के जाल का सघनतम घनत्व पाया जाता है?
(क) ब्राजील
(ख) कनाडा
(ग) संयुक्त राज्य अमेरिका
(घ) रूस
उत्तर – (ख) कनाडा
(iii) बृहद ट्रक मार्ग होकर जाता है-
(क) भूमध्य सागर हिंद महासागर से होकर
(ख) उत्तर अटलांटिक महासागर से होकर
(ग) दक्षिण अटलांटिक महासागर से होकर
(घ) उत्तर प्रशांत महासागर से होकर 
उत्तर – (क) भूमध्य सागर हिंद महासागर से होकर
(iv) ‘बिग इंच’ पाइप लाइन के द्वारा परिभाषित किया जाता है।
(क) दूध
(ख) जल
(ग) तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी)
(घ) पेट्रोलियम
उत्तर – (ग) तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी)
(v) चैनल टनल जोड़ता है 
(क) लंदन-बर्लिन
(ख) बर्लिन-पेरिस
(ग) पेरिस-लंदन
(घ) बार्सिलोना-बर्लिन
उत्तर – (ख) बर्लिन-पेरिस
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) पर्वतों, मरुस्थलों तथा बाढ़ संभावित प्रदेशों में स्थल परिवहन की क्या-क्या समस्याएँ हैं?
उत्तर- पर्वतों, मरुस्थलों तथा बाढ़ संभावित प्रदेशों में स्थल परिवहन की निम्लिखित समस्याएँ हैं-
◆ विषम भौगोलिक कारकों का होना,
◆ सड़क एवं रेलमार्ग निर्माण के लिए आसानी से सामाग्री प्राप्त न होना,
◆ जनसंख्या घनत्व कम होना।
(ii) पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग क्या होता है?
उत्तर- वैसे रेलमार्ग जो पुरे महाद्वीप से होकर गुजरते हुए इसके दोनों छोरों को जोड़ते हैं उसे पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग कहते है। इसका निर्माण आर्थिक और राजनितिक कारणों से विभिन्न दिशाओं में लम्बी यात्राओं कि सुविधा प्रदान करने के लिए किया गया था।
(iii) जल परिवहन के क्या लाभ है?
उत्तर- जल परिवहन के निम्लिखित लाभ है-
◆ इसमें मार्गों का निर्माण नहीं करना पड़ता है।
◆ यह परिवहन काफी सस्ता पड़ता है।
◆जल परिवहन की उर्जा लागत की अपेक्षाकृत कम होती है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) “एक सुप्रबंधित परिवहन प्रणाली में विभिन्न एक-दूसरे की संपूरक होती है,” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- परिवहन योजक और वाहक उपलब्ध कराता है जिनके माध्यम से व्यापर संभव होता है।परिवहन, संचार एवं व्यापार, उत्पादन केंद्रों और उपभोग केंद्रों को जोड़ते हैं। परिवहन समाज की आधारभूत आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए रचा गया एक संगठित सेवा उद्योग है। परिवहन व्यक्तियों और वस्तुओं को एक स्थान से दुसरे स्थान तक वहां करने की सेवा या सुविधा को कहते है। जिसमें मनुष्यों, पशुओं तथा विभिन्न प्रकार की गाड़ियों का प्रयोग किया जाता है। इसके अंतर्गत परिवहन मार्गों, लोगों और वस्तुओं के वहन के लिए गाडियों, मार्गों के रख-रखाव और लदान, उतराव तथा वितरण का निपटान करने के लिए संस्थाओं का समावेश किया जाता है।
      विश्व परिवहन की प्रमुख विधाएँ हैं- स्थल, जल, वायु और पाइपलाइन आदि। इनका प्रयोग अन्तर्प्रादेशिक  तथा अंतरा-प्रादेशिक परिवहन के लिए किया जाता है और पाइपलाइन को छोड़कर प्रत्येक यात्रियों और माल दोनों का वहन करता है।
          
      किसी विधा की सार्थकता परिवहित की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार, परिवहन की लागतों और उपलब्ध विधा पर निर्भर करता है। वस्तुओं के अंतर्राष्ट्रीय संचलन का निपटान भारी वाहन जलयानों द्वारा किया जाता है। कम दूरी एवं एक घर से दूसरे घर की सेवाएं प्रदान करने में सड़क परिवहन सस्ता एवं तीव्रगामी है। किसी देश के भीतर स्थूल पदार्थों के विशाल परिणाम को लंबी दूरियों तक परिवहन करने के लिए रेल सर्वाधिक अनुकूल साधन है। उच्च मूल्य वाली; हल्की तथा नाशवान वस्तुओं का वायुमार्गों द्वारा परिवहन सर्वश्रेष्ठ होता है। परिवहन के लिए वायु यातायात अच्छी विधि है। एक सुप्रबंधित परिवहन तंत्र में ये विभिन्न विधाएँ एक-दूसरे की पूरक होती है।
(ii) विश्व की वे  कौन-से प्रमुख प्रदेश हैं जहाँ वायुमार्ग का सघनतंत्र पाया जाता है?
उत्तर – उत्तरी गोलार्द्ध में अंतर-महाद्वीपीय वायुमार्गों की एक सुस्पष्ट पूर्व-पश्चिम पट्टी है। पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोप और दक्षिण-पूर्वी एशिया में वायुमार्गों का सघन जाल पाया जाता है। विश्व के कुल वायुमार्गों के 60 प्रतिशत भाग का प्रयोग अकेला संयुक्त राज्य अमेरिका करता है। न्यूयार्क, लंदन, पेरिस, एमस्टर्डम और शिकागो नोडीय बिंदु हैं। जहाँ  अभिसरित होते हैं अथवा सभी महाद्वीपों की ओर विकरित होते हैं। 
       अफ्रीका, रूस के एशियाई भाग और दक्षिण अमेरिका में वायु सेवाओं का अभाव है। दक्षिण गोलार्द्ध में 10-35 अक्षांशों के मध्य अपेक्षाकृत विरल जनसंख्या, सीमित स्थलखंड और आर्थिक विकास के कारण सीमित वयुसेवाएँ उपलब्ध है।
(iii) वे कौन सी विधाएँ हैं जिनके द्वारा साइबर स्पेस मनुष्यों के समकालीन आर्थिकी और सामाजिक स्पेस की वृद्धि करेगा?
उत्तर – साइबर स्पेस विधुत द्वारा कम्पयूटरीकृत  स्पेस का संसार है। यह वर्ल्ड वाइड वेबसाइट जैसे इन्टरनेट द्वारा आवृत है। सरल शब्दों में यह भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के शारीरिक संचलन के बिना कंप्यूटर पर सूचनाओं के प्रेषण और प्राप्ति कि विधुतीय अंकीय दूनियाँ है। इसे इन्टरनेट के नाम से भी जाना जाता है। साइबर स्पेस हर जगह विद्यमान है। यह किसी कार्यालय में जल में चलती नौका में, उड़ते जहाजों में और वास्तव में कहीं भी हो सकता है।

        प्रतिवर्ष करोड़ों लोग प्रतिवर्ष इंटरनेट का प्रयोग करते है। साइबर स्पेस लोगों के समकालीन आर्थिक और सामाजिक स्पेस को ई. मेल, ई. वाणिज्य, ई. शिक्षा और ई. प्रशासन के माध्यम से विस्तृत करेगा। फैक्स, टेलिविजन और रेडियो के साथ इंटरनेट समय और स्थान की सीमाओं को लांघते हुए अधिक लोगों तक पहुंचेगा। ये आधुनिक संचार प्रणालियाँ  हैं जिन्होंने परिवहन से कहीं ज्यादा वैश्विक ग्राम की संकल्पना को साकार किया है।


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अध्याय 7 तृतीयक और चतुर्थ क्रियाकलाप

इकाई-3 अध्याय 7 तृतीयक और चतुर्थ क्रियाकलाप

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


अध्याय 7 तृतीयक और चतुर्थ क्रियाकलाप 

अध्याय 7 तृतीयक

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए: 

(i) निम्नलिखित में से कौन-सा एक तृतीयक क्रियाकलाप है?

(क) खेती

(ख) बुनाई

(ग) व्यापार

(घ) आखेट

उत्तर –  (ग) व्यापार

(ii) निम्नलिखित क्रियाकलापों में से कौन-सा एक द्वितीयक सेक्टर का क्रियाकलाप नहीं है?

(क) इस्पात प्रगलन

(ख) वस्त्र निर्माण

(ग) मछली पकड़ना

(घ) टोकरी बुनाना

उत्तर – (ग) मछली पकड़ना

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक सेक्टर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में सर्वाधिक रोजगार प्रदान करता है?

(क) प्राथमिक

(ख) द्वितीयक

(ग) पर्यटन

(घ) सेवा

उत्तर – (घ) सेवा

(iv) वे काम जिनमें उच्च परिणाम और स्तर वाले अन्वेषण सम्मिलित होते हैं, कहलाते हैं:

(क) द्वितीयक क्रियाकलाप

(ख) पंचम क्रियाकलाप

(ग) चतुर्थ क्रियाकलाप

(घ) प्राथमिक क्रियाकलाप

उत्तर – (ख) पंचम क्रियाकलाप

(v) निम्नलिखित में से कौन-सा क्रियाकलाप चतुर्थ सेक्टर से संबंधित है?

(क) संगणक विनिर्माण

(ख) विश्वविद्यालयी अध्यापन

(ग) कागज और कच्ची लुगदी निर्माण

(घ) पुस्तकों का मुद्रण

उत्तर – (घ) पुस्तकों का मुद्रण

(vi) निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक सत्य नहीं है?

(क) बाह्यस्रोतन दक्षता को बढ़ाता है और लागतों को घटाता है।

(ख) कभी-कभार अभियांत्रिकी और विनिर्माण कार्यों की भी बाह्यस्रोतन की जा सकती है।

(ग) बी.पी.ओज के पास के.पी.ओज की तुलना में बेहतर व्यवसाय का अवसर होते हैं।

(घ) कामों के बाह्यस्रोतन करने वाले देशों में काम की तलाश करने वालों में असंतोष पाया जाता है।

उत्तर – (घ) कामों के बाह्यस्रोतन करने वाले देशों में काम की तलाश करने वालों में असंतोष पाया जाता है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) फुटकर व्यापार सेवा को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – ये वह व्यापारिक क्रियाकलाप है जो उपभोक्ताओं को वस्तुओं के प्रत्यक्ष-विक्रय से संबंधित हैं। अधिकांश फुटकर व्यापार केवल विक्रय से नियत प्रतिष्ठानों और भंडारों में संपन्न होता है। फेरी, रेहड़ी, ट्रक, द्वार से द्वार, डाक आदेश, दूरभाष, स्वचालित बिक्री मशीनें तथा इंटरनेट फुटकर बिक्री के भंडार रहित उदाहरण हैं।

(ii) चतुर्थ सेवाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर- चतुर्थ क्रियाकलाप अनुसंधान और विकास पर आधारित होते हैं और विशिष्टीकृत ज्ञान प्रौद्योगिकी कुशलता और प्रशासकीय सामर्थ्य से संबद्ध सेवाओं के उन्नत नमूने के रूप में देखे जाते हैं। जैसे- सूचना का संग्रहण, उत्पादन और प्रकीर्णन अथवा सूचना का उत्पादन।

(iii) विश्व में चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से उभरते हुए देशों के नाम लिखिए।

उत्तर- भारत विश्व में चिकित्सा पर्यटन में अग्रणी देश बनकर उभरा है। भारत, थाइलैंड, सिंगापुर और  मलेशिया जैसे विकासशील देशों को चिकित्सा पर्यटन से अनेक लाभ प्राप्त होते है। भारत, स्विटजरलैंड और आस्ट्रेलिया के अस्पताल विकिरण बिंबों के अध्ययन से लेकर चुंबकीय अनुनाद बिंबों के निर्वचन और पराश्राव्य परीक्षणों तक की विशिष्ट चिकित्सा सुविधाओं को उपलब्ध करा रहे हैं।

(iv) अंकीय विभाजन क्या है?

उत्तर- आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में अंतर के कारण विकसित और विकसित और विकाशशील देशों में नागरिकों को सूचना और संचार सुविधाएँ उपलब्ध कराने में पर्याप्त अंतर पाया जाता है। इसे ही अंकीय विभाजक कहा जाता है। इस संबंध में अंत: एवं अंतरप्रादेशिक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की सार्थकता और वृद्धि की चर्चा कीजिए।

उत्तर- सेवाएँ विभिन्न स्तरों पर पाई जाती हैं। कुछ सेवाएँ उद्योगों को चलाती है, कुछ लोगों को और कुछ उद्योगों और लोगों दोनों को, उदाहरणतः परिवहन तंत्र। निम्नस्तरीय सेवाएँ जैसे- पंसारी की दुकानें, धोबीघाट, उच्चस्तरीय सेवाओं अथवा लेखाकार, परामर्शदाता और काय चिकित्सक जैसी अधिक विशिष्टीकृत सेवाओं की अपेक्षा अधिक सामान्य और विस्तृत हैं। सेवाएँ भुगतान कर सकने वाले व्यक्तिगत उपभोक्ताओं को उपलब्ध होती हैं। माली, धोबी और नाई मुख्य रूप से शारीरिक श्रम करते हैं। अध्यापक, वकील, चिकित्सक, संगीतकार और अन्य मानसिक श्रम करते हैं। दैनिक जीवन में काम को सुविधाजनक बनाने के लिए लोगों को व्यक्तिगत सेवाएँ  भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

     अनेक सेवाएँ अब नियमित हो गई हैं। महामार्गों एवं पुलों का निर्माण और अनुरक्षण, अग्निशमन विभागों का अनुरक्षण और शिक्षा की पूर्ति अथवा पर्यवेक्षण और ग्राहक-सेवा महत्वपूर्ण सेवाओं में से हैं, जिनका पर्यवेक्षण अथवा निष्पादन प्रायः सरकारों अथवा कंपनियों द्वारा किया जाता है।

    राज्य और संघ विधान ने परिवहन, दूरसंचार, ऊर्जा और जलापूर्ति जैसी सेवाओं के विपणन के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए निगमों की स्थापना की है। स्वास्थ्य की देखभाल, अभियांत्रिकी, विधि और प्रबंधन व्यावसायिक सेवाएँ हैं। मनोरंजनात्मक और प्रमोद सेवाओं की स्थिति बाजार पर निर्भर करती है। मल्टीप्लेक्स और रेस्तराओं की स्थिति केन्द्रीय व्यापार क्षेत्र (सी.बी.डी.) के अंदर अथवा निकट हो सकती है।  इस प्रकार हम कह सकते है कि सेवा सेक्टर में रोजगार की प्रवृति बढ़ रही है। जबकि प्राथमिक और द्वितीयक क्रियाकलापों में यह  अपरिवर्तित अथवा घट रही है। अत: आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की सार्थकता में लगातार वृद्धि हो रही है।

(ii) परिवहन और संचार सेवाओं की सार्थकता को विस्तार पूर्वक स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – परिवहन एक ऐसी सेवा अथवा सुविधा है जिससे व्यक्तियों, विनिर्मित माल तथा सम्पत्ति को भौतिक रूप से एक स्थान से दुसरे स्थान पर ले जाया जाता है। यह  मनुष्य की गतिशीलता की मूलभूत आवश्यकता को पूरा करने के लिए निर्मित एक संगठित उद्योग है। आधुनिक समाज वस्तुओं के उत्पादन, वितरण और उपभोग में सहायता देने के लिए तीव्र और सक्षम परिवहन व्यवस्था चाहते हैं। इस जटिल व्यवस्था की प्रत्येक अवस्था में परिवहन द्वारा पदार्थ का मूल्य अत्यधिक बढ़ जाता है।

        परिवहन दूरी को किलोमीटर दूरी अथवा मार्ग लंबाई की वास्तविक दूरी, समय दूरी अथवा एक मार्ग पर यात्रा करने में लगने वाले समय, और लागत दूरी अथवा मार्ग पर यात्रा के खर्च के रूप में मापा जा सकता है। परिवहन के साधन के चयन में समय अथवा लागत के संदर्भ में एक निर्णायक कारक है। परिवहन की माँग जनसंख्या के आकार से प्रभावित होती है। जनसंख्या का आकार जितना बड़ा होगा परिवहन की माँग उतनी ही अधिक होगी। नगरों, कस्बों, गाँवों, औद्योगिक केंद्रों और कच्चे माल, उनके मध्य व्यापार के प्रारूप, उनके भू-दृश्य की प्रकृति, जलवायु के प्रकार और मार्ग की लंबाई पर आने वाले व्यवधानों को दूर करने के लिए उपलब्ध निधियों पर मार्ग निर्भर करते हैं।

      संचार सेवाओं में शब्दों और संदेशों, तथ्यों और विचारों का प्रेषण सम्मिलित है। लेखक के आविष्कार ने संदेशों को संरक्षित किया और संचार को परिवहन के साधनों पर निर्भर करने में सहायता की। यही कारण है कि परिवहन के सभी रूपों को संचार पथ कहा जाता है। जहाँ परिवहन जाल-तंत्र सक्षम होता है वहाँ संचार का फैलाव सरल होता है। मोबाइल दूरभाष और उपग्रहों जैसे कुछ विकासों ने संचार को परिवहन से मुक्त कर दिया है। लेकिन अभी भी सभी रूपों का साहचर्य पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है।

      आज भी पूरे विश्व में विशाल मात्रा में डाक का निपटारन डाकघरों द्वारा हो रहा है। मोबाइल क्रांति ने संचार को प्रत्यक्ष और तत्काल बना दिया है। उपग्रह संचार पृथ्वी और अंतरिक्ष से सूचना का प्रसारण करता है। इंटरनेट ने वैश्विक संचार तंत्र में वास्तव में क्रांति ला दी है।



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अध्याय 6 द्वितीयक क्रियाएँ 

इकाई-3 अध्याय 6 द्वितीयक क्रियाएँ 

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


अध्याय 6 द्वितीयक क्रियाएँ 

अध्याय 6 द्वितीयक

 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:
(i) निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(क) हुगली के सहारे जूट के कारखाने सस्ती जल यातायात की सुविधा के कारण स्थापित हुए।
(ख) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छंद उद्योग है।
(ग) खनिज तेल एवं जल विद्युत शक्ति के विकास ने उद्योगों की अवस्थिति कारक के रूप में कोयला शक्ति के महत्व को कम किया है।
(घ) पतन नगरों ने भारत में उद्योगों को आकर्षित किया है।
उत्तर – (घ) पतन नगरों ने भारत में उद्योगों को आकर्षित किया है।
(ii) निम्न में से कौन-सी एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्वामित्व व्यक्तिगत होता है।
(क) पूँजीवाद
(ख) मिश्रित
(ग) समाजवाद
(घ) कोई भी नहीं
उत्तर – (क) पूँजीवाद
(iii) निम्न में से कौन-सा एक प्रकार का उद्योग अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल का उत्पादन करता है?
(क) कुटीर उद्योग
(ख) छोटे पैमाने के उद्योग
(ग) आधारभूत उद्योग
(घ) स्वच्छंद उद्योग
उत्तर – (ग) आधारभूत उद्योग 
(iv) निम्न में से कौन-सा एक जोड़ा सही मेल खाता है?
(क) स्वचालित वाहन उद्योग …  लॉस एंजिल्स
(ख) भूत निर्माण उद्योग     …  लुसाका
(ग) वायु निर्माण उद्योग    …  फ्लोरेंस
(घ) लौह इस्पात उद्योग    …  पिट्सबर्ग
उत्तर – (घ) लौह इस्पात उद्योग  …  पिट्सबर्ग
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग
उत्तर- निर्माण क्रियाओं में उच्च प्रौद्योगिकी नवीनतम पीढ़ी है। इसमें उन्नत वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग उत्पादकों का निर्माण गहन शोध एवं विकास के प्रयोग द्वारा किया जाता है। उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग में यंत्रमानव, कंप्यूटर आधारित डिजाइन (कैड) तथा निर्माण, धातु पिघलाने एवं शोधन के इलेक्ट्रोनिक नियंत्रण एवं नए रासायनिक व औषधीय उत्पाद प्रमुख स्थान रखते हैं। 
(ii) विनिर्माण
उत्तर- विनिर्माण का शाब्दिक अर्थ है किसी भी वस्तु का उत्पादन। इसमें हस्तशिल्प एवं यंत्रों द्वारा बनाया गया सामान सम्मिलित किया जाता है। हस्तशिल्प कार्य से लेकर लोहे व इस्पात को गढ़ना, प्लास्टिक के खिलौने बनाना, कंप्यूटर के अति सूक्ष्म घटकों को जोड़ना एवं अंतरिक्षयान निर्माण इत्यादि सभी प्रकार के उत्पादन को निर्माण के अंतर्गत माना जाता है।
(iii)  स्वच्छंद उद्योग
उत्तर- स्वच्छंद उद्योग व्यापक विविधता वाले स्थानों में स्थित होते हैं। यह किसी विशिष्ट कच्चे माल जिनके भार में कमी हो रही है अथवा नहीं, पर निर्भर नहीं रहते हैं। यह उद्योग संघटक पुरजों पर निर्भर रहते हैं जो कहीं से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। इसमें उत्पादन कम मात्रा में होता है एवं श्रमिकों की भी कम आवश्यकता होती है। सामान्यतः ये उद्योग प्रदूषण नहीं फैलाते। इनकी स्थापना में महत्वपूर्ण कारक सड़कों के जाल द्वारा अभिगम्यता होती है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) प्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविधियों में क्या अंतर है।
उत्तर – प्राथमिक गतिविधियाँ कृषि, मत्स्य पालन, आखेट, खनन, पशुचारण, वनों से लकड़ी काटना एवं भोजन संग्रह से सम्बंधित है जबकि द्वितीयक गतिविधियाँ विनिर्माण, प्रसंस्करण और निर्माण(अवसंरचना) उद्योग से सम्बन्धित है। 
(ii) विश्व के विकसित देशों के उद्योगों के संदर्भ में आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं की मुख्य प्रवृतियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर – आधुनिक निर्माण की विशेषताएँ हैं-
(क) एक एक जटिल प्रौद्योगिकी यंत्र
(ख) अत्यधिक विशिष्टीकरण एवं श्रम विभाजन के द्वारा कम प्रयास एवं अल्प लागत से अधिक माल का उत्पादन करना
(ग) अधिक पूँजी
(घ) बड़े संगठन एवं
(ड़) प्रशासकीय अधिकारी-वर्ग।
              आधुनिक निर्माण के मुख्य संकेन्द्रण कुछ ही स्थानों में सीमित हैं। विश्व के कुल स्थलीय भाग के 10 प्रतिशत से कम भू-भाग पर इनका विस्तार है। यह देश आर्थिक एवं राजनीतिक शक्ति के केन्द्र बन गए हैं। कुल क्षेत्र को आच्छादित करने की दृष्टि से विनिर्माण स्थल, प्रक्रियाओं की अत्यधिक गहनता के कारण बहुत कम स्पष्ट है तथा कृषि की अपेक्षा बहुत छोटे क्षेत्रों में संकेन्द्रित हैं। जैसे अमेरिका के मक्का की पेटी के 2.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में साधारणतया चार बड़े फार्म होते है जिनमें 10-20 श्रमिक कार्य करते है जिनमे 50-100 मनुष्यों का भरण -पोषण होता है। जबकि इतने ही क्षेत्र में अनेकों वृहद् समाकलित कारखानों को समाविष्ट कर हजारों श्रमिकों को रोजगार दिया जा सकता है।
          विकसित देशों के उद्योगों में आधुनिक स्वचालित यंत्रीकरण की विकसित अवस्था है। जिससे उद्योग अपनी लागत घटाकर लाभ को बढ़ाते हैं। इनके पास व्यापक बाजार है। पश्चिमी यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भागों में अत्यधिक परिवहन तंत्र विकसित होने के कारण सदैव इन क्षेत्रों में उद्योगों का संकेंद्रण हुआ है। आधुनिक उद्योग अपृथक्करणीय ढंग से परिवहन तंत्र से जुड़े हैं। इन उद्योग को कच्चा माल अपेक्षाकृत सस्ता एवं सरलता से मिल जाता है।
(iii) अधिकतर देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के परिधि क्षेत्रों में ही क्यों विकसित हो रहे हैं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर- विगत कुछ दशकों से औद्योगीकरण में नवीन प्रवृत्तियों का विकास हुआ है, अतः उच्च प्रौद्योगिक उद्योगों का तीव्रता से विकास तथा विस्तार हो रहा है। उच्च तकनीकी उद्योग स्वच्छंद उद्योगों की श्रेणी में आते हैं और स्वच्छंद उद्योग की प्रवृत्ति उद्देश्य आधारित औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित होने की होती है। अत: ये उद्योग मुख्य महानगरों के परिधि क्षेत्र में विकसित हो रहे हैं। परिधि क्षेत्र, नगर के आंतरिक भाग की तुलना में अधिक लाभ प्रदान करते हैं।
a) जहाँ तक मंजिलें कारखाने तथा भविष्य में विस्तार के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होता है।
b) नगर-परिधि पर भूमि का मूल्य कम होता है अतः भूमि सस्ते दामों पर मिल जाती है।
c) यह मुख्य सड़कों तथा वाहन मार्गों द्वारा नगर से जुड़ा होता है।
d) यहाँ का पर्यावरण शांत और सुखद होता है, क्योंकि यह हरित पट्टी क्षेत्र होता है।
e) यहाँ निकटवर्ती आवासीय क्षेत्र और पड़ोसी ग्रामों से प्रतिदिन आने-जाने वाले लोगों से श्रम की आपूर्ति होती है।
(iv) अफ्रीका में अपरिमित प्राकृतिक संसाधन है फिर भी औद्योगिक दृष्टि से यह बहुत पिछड़ा महाद्वीप है। समीक्षा कीजिए।
उत्तर – कच्चे माल को कारखाने तक लाने के लिए तथा  परिष्कृत सामग्री को बाजार तक पहुँचाने के लिए तीव्र और सक्षम परिवहन सुविधाएँ औद्योगिक विकास के लिए अत्यावश्यक है। परिवहन लागत किसी औद्योगिक इकाई की अवस्थिति को निश्चित करने में महत्वपूर्ण कारक हैं। किसी उद्योग का आकार उसमें निवेदित पूँजी, कार्यरत, श्रमिकों की संख्या एवं उत्पादन की मात्रा पर निर्भर करता है। उद्योगों की अवस्थिति में श्रम एक प्रमुख कारक है। उद्योगों के लिए कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

          जबकि अफ्रीकी देशों के पास इन सभी संसाधनों के साथ कुशल श्रमिकों की कमी भी है। उद्योगों की स्थापना में सबसे प्रमुख कारक उसके द्वारा उत्पादित माल के लिए उपलब्ध बाजार का होना आवश्यक है। उस क्षेत्र में तैयार वस्तुओं की मांग और  वहाँ के निवासियों में खरीदने की क्षमता होनी चाहिए लेकिन अफ्रीकी देश गरीब होने के कारण महंगे उत्पाद नहीं खरीद सकते। इनके अतिरिक्त विद्युत , जल आपूर्ति की कमियों, भौगोलिक परिस्थितियों, आधुनिक तकनीक, शिक्षा आदि की कमी होने के कारण अपरिमित प्राकृतिक संसाधन होते हुए भी अफ्रीका औद्योगिक दृष्टि से बहुत पिछड़ा महाद्वीप है।


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(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)

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(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)
Part 2: India- People and Economy

PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER सम्पूर्ण हल सहित (बिहार बोर्ड भूगोल 12वीं कक्षा)

अध्याय 5 प्राथमिक क्रियाएँ

इकाई-3 अध्याय 5 प्राथमिक क्रियाएँ

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


अध्याय 5 प्राथमिक क्रियाएँ

अध्याय 5 प्राथमिक

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:

(i) निम्न में से कौन-सी रोपण फसल नहीं है?

(क) कॉफी

(ख) गन्ना

(ग) गेहूँ

(घ) रबड़

उत्तर – (ग) गेहूँ

(ii) निम्न देशों में से किस देश में सहकारी कृषि का सफल परीक्षण किया गया है?

(क) रूस

(ख) डेनमार्क

(ग) भारत

(घ) नीदरलैंड

उत्तर – (ख) डेनमार्क

(iii) फूलों की कृषि कहलाती है?

(क) ट्रक फार्मिंग

(ख) कारखाना कृषि

(ग) मिश्रित कृषि

(घ) पुष्पोत्पादन

उत्तर – (घ) पुष्पोत्पादन

(iv) निम्न में से कौन-सी कृषि के प्रकार का विकास यूरोपीय औपनिवेशिक समूहों द्वारा किया गया?

(क) कोलखहोज

(ख) अंगूरोत्पादन

(ग) मिश्रित कृषि

(घ) रोपण कृषि

उत्तर – (घ) रोपण कृषि

(v) निम्न प्रदेशों में से किसमें विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि नहीं की जाती है?

(क) अमेरिका एवं कनाडा के प्रेयरी क्षेत्र

(ख) अर्जेंटीना के पंपास क्षेत्र

(ग) यूरोपीय स्टैपीज क्षेत्र

(घ) अमेजन बेसिन

उत्तर – (घ) अमेजन बेसिन

(vi) निम्न में से किस प्रकार की कृषि में खट्टे रसदार फलों की कृषि की जाती है?

(क) बाजारीय सब्जी कृषि

(ख) भूमध्यसागरीय कृषि

(ग) रोपण कृषि

(घ) सहकारी कृषि

उत्तर – (ख) भूमध्यसागरीय कृषि

(vii) निम्न कृषि के प्रकारों में से कौन-सा प्रकार कर्तन-दहन कृषि का प्रकार है?

(क) विस्तृत जीवन निर्वाह कृषि

(ख) आदिकालीन निर्वाहक कृषि

(ग) विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि

(घ) मिश्रित कृषि

उत्तर – (ख) आदिकालीन निर्वाहक कृषि

(viii) निम्न में से कौन-सी एकल कृषि नहीं है?

(क) डेयरी कृषि

(ख) मिश्रित कृषि

(ग) रोपण कृषि

(घ) वाणिज्य अनाज कृषि

उत्तर – (ख) मिश्रित कृषि

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) स्थानांतरित कृषि का भविष्य अच्छा नहीं है। विवेचना कीजिए।

उतर- स्थानांतरित कृषि का भविष्य अच्छा नहीं है क्योंकि इस कृषि में एक कृषि भूमि की उर्वरता समाप्त होते ही उसे छोड़ना पड़ता है और दूसरे वन भूमि के टुकड़े की वनस्पति को काट व जलाकर साफ करना पड़ता है। इस प्रकार इस कृषि में भूमि तथा पर्यावरण दोनों को हानि होती है। यही कारण है कि स्थानांतरित कृषि का भविष्य अच्छा नहीं है।

(ii) बाजारीय सब्जी कृषि नगरीय क्षेत्रों के समीप ही क्यों की जाती है?

उत्तर- इस प्रकार की कृषि में अधिक मुद्रा मिलती है इसकी मांग नगरीय क्षेत्रों में अधिक होती है इस कृषि में खेती का आकार छोटा होता है एवं खेत अच्छे यातायात साधनों के द्वारा नगरीय केंद्रों जहां ऊंचाई वाले उपभोक्ता रहते हैं। इसमें गहन श्रम एवं अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि बाजारीय सब्जी कृषि नगरीय क्षेत्रों के समीप की जाती है।

(iii) विस्तृत पैमाने पर डेरी कृषि का विकास यातायात के साधनों एवं प्रशीतकों के विकास के बाद ही क्यों संभव हो सका है?

उत्तर- विस्तृत पैमाने पर डेरी कृषि का विकास यातायात के साधनों एवं प्रशीतकों के विकास के बाद ही संभव हो सका क्योंकि विकसित यातायात के साधन, प्रशीतकों का उपयोग, पास्तेरीकरण की सुविधा के कारण विभिन्न डेयरी उत्पादों को अधिक समय तक रखा जा सकता है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) चलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुधन पालन में अंतर कीजिए।

उत्तर – चलवासी पशुचारण कृषि पशु आधारित जीवन-निर्वाह कृषि है। इसमें कृषकों का अस्थायी निवास होता है। पशु ही कृषकों कि संम्पत्ति होते है। पशुओं के साथ वे एक स्थान से दुसरे स्थान चारागाह एवं पानी की उपलब्धता के लिए स्थान्तरित होते रहते है। पशु उत्पाद का उपयोग निजी कार्य के लिए किया जाता है।

       दूसरी ओर, वाणिज्य पशुपालन तुलनात्मक रूप से अधिक व्यवस्थित, स्थायी एवं पूंजी प्रधान कृषि है। यह कृषि पश्चिमी संकृति से प्रभावित है।यह एक ऐसी कृषि प्रकार है जिसमें केवल एक ही प्रकार के पशु का पालन वैज्ञानिक ढंग से किया जाता है। इन पशुओं से प्राप्त उत्पाद दुग्ध एवं मांस को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भेजा जाता है। विश्व स्तर पर अमेरिका, उरुग्वे, अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड में इस प्रकार की कृषि की जाती है। 

(ii) रोपण कृषि की मुख्य विशेषताएँ बतलाइए एवं भिन्न-भिन्न देशों में उगाई जाने वाली कुछ प्रमुख रोपण फसलों के नाम बतालाइए।

उत्तर – रोपण कृषि के मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है-

◆ इसमें कृषि क्षेत्र का आकार बहुत विस्तृत होता है।

◆ इसमें अधिक पूँजी निवेश की आवश्यकता होती है।

◆ इसमें उच्च प्रबंधन एवं तकनीकी आधार एवं वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है।

◆ यह एक फसली कृषि है जिसमें किसी एक फसल के उत्पादन पर ही सकेंद्रण किया जाता है।

◆ इसमें सस्ते श्रमिक एवं यातायात की सुविधा भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है।       

      यूरोपीय लोगों ने विश्व के अनेक भागों का औपनिवेशीकरण किया तथा कृषि के कुछ अन्य रूपों की शुरुआत की जैसे रोप कृषि, जो कि वृहद स्तरीय लाभोन्मुख उत्पादन प्रणाली है। यूरोपीय उपनिवेशों ने अपने अधीन उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में चाय, कॉफी, कोको, रबड़, कपास, गन्ना, केले एवं अन्नानास की पौधे लगाई।



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अध्याय 3 जनसंख्या संघटन

इकाई-2 अध्याय 3 जनसंख्या संघटन

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


अध्याय 3 जनसंख्या संघटन

अध्याय 3 जनसंख्या संघटन

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:

(i) निम्नलिखित में से किस ने संयुक्त अरब अमीरात के लिंग अनुपात को निम्न किया है?

(क) पुरुष कार्यशील जनसंख्या का चयनित प्रवास।

(ख) पुरुषों की उच्च जन्म दर

(ग) स्त्रियों की निम्न जन्म दर

(घ) स्त्रियों का उच्च उत्प्रवास

उत्तर – (क) पुरुष कार्यशील जनसंख्या का चयनित प्रवास।

(ii) निम्नलिखित में से कौन सी संख्या जनसंख्या के कार्यशील आयु वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है?

(क) 15 से 65 वर्ष

(ख) 15 से 66 वर्ष

(ग) 15 से 64 वर्ष

(घ) 15 से 59 वर्ष
उत्तर – (घ) 15 से 59 वर्ष

(iii) निम्नलिखित में से किस देश का लिंग अनुपात विश्व में सर्वाधिक है?

(क) लैटविया

(ख) जापान

(ग) संयुक्त अरब अमीरात

(घ) फ्रांस

उत्तर – (क) लैटविया

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) जनसंख्या संघटन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- किसी राज्य अथवा देश में निवास करने वाली कुल जनसंख्या में स्त्रियों एवं पुरुषों की संख्या, लिंगानुपात, आयु-वर्ग संरचना, व्यवसाय, शिक्षा का स्तर, जीवन-प्रत्याशा के जनांकिकीय विशेषताओं को जनसंख्या संघटन कहते हैं।

(ii) आयु-संरचना का क्या महत्व है?

उत्तर- आयु संरचना के द्वारा किसी भी देश में निवास करने वाले  विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की संख्या को प्रदर्शित किया जाता है। जनसंख्या संघटन का यह एक महत्वपूर्ण सूचक है, क्योंकि 15 से 59 आयु वर्ग के बीच जनसंख्या का बड़ा आकार एक विशाल कार्यशील जनसंख्या को इंगित करता है। 

(iii) लिंग-अनुपात कैसे मापा जाता है?

उत्तर- किसी देश कि कुल जनसंख्या में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या के बीच के अनुपात को लिंग अनुपात कहा जाता है।

कुछ देशों में यह निम्न सूत्र द्वारा परिकलित किया जाता है –

पुरुष की कुल जनसंख्या / स्त्रियों की कुल जनसंख्या ×1000

अर्थात प्रति हजार स्त्रियों पर पुरुषों की संख्या।

भारत में इस सूत्र का प्रयोग कर लिंग अनुपात ज्ञात किया जाता है :

स्त्रियों कि कुल जनसंख्या / पुरुषों की कुल जनसंख्या ×1000

अर्थात प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) जनसंख्या के ग्रामीण-नगरीय संघटन का वर्णन कीजिए।

उत्तर- जनसंख्या का ग्रामीण और नगरीय संघटन में विभाजन निवास के आधार पर होता है। यह विभाजन आवश्यक है क्योंकि ग्रामीण और नगरीय जीवन आजीविका और सामाजिक दशाओं में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में आयु-लिंग संघटन, व्यवसायिक संरचना, जनसंख्या का घनत्व तथा विकास के स्तर अलग-अलग होते हैं।

      यद्यपि ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या में अंतर करने के मापदंड सभी देशों में अलग-अलग होते हैं। सामान्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र वे होते हैं जिनमें अधिकांश लोग प्राथमिक क्रियाओं में संलग्न रहते हैं और नगरीय क्षेत्र वे होते हैं जिनमें अधिकांश कार्यशील जनसंख्या द्वितीयक एवं तृतीयक क्रियाओं में संलग्न होती है।

     कनाडा और फिनलैंड जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों में ग्रामीण और नगरीय लिंग अनुपात में अंतर अफ्रीकी और एशियाई देशों क्रमशः जिंबाब्वे तथा नेपाल के ग्रामीण और नगरीय लिंग अनुपात के विपरीत है। पश्चिमी देशों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों की संख्या अधिक है, जबकि नगरीय क्षेत्रों में स्त्रियों की संख्या पुरुषों की अपेक्षा अधिक है। नेपाल, पाकिस्तान और भारत जैसे देशों में स्थिति इससे विपरीत है। नगरीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की अधिक संभावनाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाओं के आगमन के परिणामस्वरुप यूरोप, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के नगरीय क्षेत्रों में महिलाओं की अधिकता है।

      कृषि भी इन विकसित देशों में अत्यधिक मशीनीकृत है और यह लगभग पुरुष प्रधान व्यवसाय है। इसके विपरीत एशिया के नगरीय क्षेत्रों में पुरुष प्रधान प्रवास के कारण लिंग अनुपात भी पुरुषों के अनुकूल है। उल्लेखनीय है कि भारत जैसे देशों में ग्रामीण क्षेत्रों के कृषि कार्यों में महिलाओं की सहभागिता काफी ऊँची है। नगरों में आवास की कमी, रहन-सहन की उच्च लागत, रोजगार के अवसरों की कमी और सुरक्षा की कमी महिलाओं के गाँव से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास को रोकता है।

(ii) विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदाई कारकों तथा व्यावसायिक संरचना की विवेचना कीजिए।

उत्तर- आयु-लिंग अनुपात किसी  देश में स्त्रियों की स्थिति के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना होती है। जिन प्रदेशों में लिंग भेदभाव अनियंत्रित होता है वहाँ लिंग अनुपात निश्चित रूप से स्त्रियों के प्रतिकूल होता है। इन क्षेत्रों में स्त्री भ्रूण हत्या तथा स्त्री-शिशु हत्या और स्त्रियों के प्रति घरेलू हिंसा की प्रथा प्रचलित है। इसका एक कारण इन क्षेत्रों में स्त्रियों की सामाजिक-आर्थिक स्तर का निम्न होना हो सकता है।

     सामान्यत:  एशिया में लिंग अनुपात निम्न है। चीन, भारत, सऊदी अरब, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों में लिंग अनुपात और भी भिन्न है दूसरी ओर रूस, सहित यूरोप के एक बड़े भाग में पुरुष अल्प संख्या में है यूरोप के अनेक देशों में पुरुषों की कमी, वहाँ स्त्रियों की बेहतर स्थिति तथा भूतकाल में विश्व के विभिन्न भागों में अत्यधिक पुरुष उत्प्रवास के कारण है।

व्यावसायिक संरचना 

     व्यावसायिक संरचना से तात्पर्य किसी भी देश या प्रदेश के कार्यशील जनसंख्या (अर्थात 15 से 59 आयु वर्ग में स्त्री और पुरुष) से है जो कि कृषि, वानिकी, मत्स्यन, विनिर्माण, निर्माण, व्यवसायिक परिवहन, सेवाओं, संचार तथा अन्य अवर्गीकृत सेवाओं जैसे व्यवसायों से जुड़े होते हैं। व्यावसायिक संरचना को मुख्यतः चार भागों में बाँटा जा सकता है:-

(क) प्राथमिक कार्यशील जनसंख्या- इसके अंतर्गत कृषि, वानिकी, मत्स्यन तथा खनन जैसे कार्यों को रखा जाता है।

(ख) द्वितीयक कार्यशील जनसंख्या- इसके अंतर्गत निर्माण, विनिर्माण से संबंधित कार्य किए जाते हैं। शक्ति उत्पादन से संबंधित क्रिया भी इसी समूह में शामिल है।

(ग) तृतीयक  कार्यशील जनसंख्या- इसके अंतर्गत व्यापार, आयात-निर्यात तथा अन्य कार्य सम्मिलित है

(घ) चर्तुथक कार्यशील जनसंख्या- अनुसंधान और वैचारिक विकास से जुड़े कार्यों को चतुर्थक कार्यशील जनसंख्या के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

        उपरोक्त चार खंडों में कार्यशील जनसंख्या का अनुपात किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास के स्तरों का एक अच्छा सूच है। इसका कारण यह है कि केवल उद्योगों और अवसंरचना से युक्त एक विकसित अर्थव्यवस्था ही द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक क्षेत्रों में अधिक कर्मियों को समायोजित कर सकती है। यदि अर्थव्यवस्था अभी भी आदिम अवस्था में है तब प्राथमिक क्रियाओं में संलग्न लोगों का अनुपात अधिक होगा क्योंकि इसमें मात्र प्राकृतिक संसाधनों का दोहन होता है।



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अध्याय 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि

 इकाई-2 अध्याय 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)



अध्याय 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि

अध्याय 2 विश्व जनसंख्या

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:

(i) निम्नलिखित में से किस महाद्वीप में जनसंख्या वृद्धि सर्वाधिक है?

(क) अफ्रीका

(ख) एशिया

(ग) दक्षिण अमेरिका

(घ) उत्तर अमेरिका

उत्तर – (ख) एशिया

(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक विरल जनसंख्या वाला क्षेत्र नहीं है?

(क) अटाकामा

(ख) भूमध्यरेखीय प्रदेश

(ग) दक्षिण-पूर्वी एशिया

(घ) ध्रुवीय प्रदेश

उत्तर – (ग) दक्षिण-पूर्वी एशिया

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रतिकर्ष कारक नहीं है?

(क) जलाभाव

(ख) बेरोजगारी

(ग) चिकित्सा/शैक्षणिक सुविधाएँ

(घ) महामारियाँ

उत्तर – (ग) चिकित्सा/शैक्षणिक सुविधाएँ

(iv) निम्नलिखित में से कौन-सा एक तथ्य सही नहीं है?

(क) विगत 500 वर्षों में मानव जनसंख्या 10 गुणा से अधिक बढ़ी है।

(ख) 5 अरब से 6 अरब तक बढ़ने में जनसंख्या को 100 वर्ष लगे।

(ग) जनांकिकीय संक्रमण की प्रथम अवस्था में जनसंख्या वृद्धि उच्च होती है।

उत्तर – (ग) जनांकिकीय संक्रमण की प्रथम अवस्था में जनसंख्या वृद्धि उच्च होती है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले तीन भौगोलिक कारकों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले तीन भौगोलिक कारण निम्नलिखित है:-

(क) जल की उपलब्धता-

         जल जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है। अतः लोग उन क्षेत्रों में बसने को प्राथमिकता देते हैं जहां जल आसानी से उपलब्ध होता है।

(ख) भू-आकृति-

        अधिकांश लोग समतल मैदानों और मन्द ढालों पर बसने को प्राथमिकता देते हैं। क्योंकि ऐसे क्षेत्र फसलों के उत्पादन, सड़क निर्माण, और उद्योगों के लिए अनुकूल होते हैं

(ग) जलवायु-

        अनुकूल जलवायु वाले क्षेत्र जिनमें अधिक मौसम परिवर्तन नहीं होते, अधिक लोगों को आकृष्ट करते हैं।

(ii) विश्व मे उच्च जनसंख्या घनत्व वाले अनेक क्षेत्र हैं। ऐसा क्यों होता है?

उत्तर- विश्व के अनेकों ऐसे क्षेत्र है जहाँ जनसंख्या घनत्व उच्च है क्योंकि यहाँ पर्याप्त जल की मात्रा, अनुकूल जलवायु, विस्तृत समतल भूमि की उपलब्धता, उपजाऊ मिट्टियाँ जैसे भौगोलिक कारक तथा खनिजों, नगरीकरण, औद्योगिकरण जैसे आर्थिक कारक उपलब्ध है।  जैसे- संयुक्त राज्य अमेरिका का उत्तरी पूर्वी-भाग, यूरोप का उत्तरी-पश्चिमी भाग तथा दक्षिणी, दक्षिणी-पूर्वी और पूर्वी एशिया के भाग इत्यादि।

(iii) जनसंख्या परिवर्तन के तीन घटक कौन-से है?

उत्तर- जनसंख्या परिवर्तन के तीन घटक है- जन्म, मृत्यु और प्रवास।

3. अंतर स्पष्ट कीजिए:

(i) जन्म दर और मृत्यु दर

उत्तर – जन्म दर– किसी क्षेत्र विशेष में किसी वर्ष के दौरान प्रति एक हजार स्त्रियों द्वारा जन्म दिए जीवित बच्चों की संख्या को जन्म दर कहा जाता है।

अशोधित जन्म दर= किसी वर्ष विशेष में जीवित जन्म / किसी क्षेत्र विशेष में वर्ष के मध्य जनसंख्या ×1000

मृत्यु दर- किसी क्षेत्र विशेष में किसी वर्ष के दौरान प्रति एक हजार जनसंख्या के पीछे मरने वालों संख्या को मृत्यु दर कहा जाता है।

अशोधित मृत्यु दर= किसी वर्ष विशेष में मृतकों की संख्या / उस वर्ष के मध्य में अनुमानित जनसंख्या ×1000

(ii) प्रवास के प्रतिकर्ष कारक और अपकर्ष कारक

उत्तर – प्रवास के प्रतिकर्ष- वे सभी कारक जो किसी स्थान पर जनसंख्या को बसने के लिए आकर्षित नहीं करता हो उसे प्रवास के प्रतिकर्ष कारक कहते है। जैसे – बेरोजगारी, रहन-सहन की निम्न दशाएं, राजनीतिक उपद्रव, प्रतिकूल जलवायु, प्राकृतिक विपदाएँ, महामारीयाँ तथा सामाजिक आर्थिक पिछड़ेपन इत्यादि।

प्रवास के अपकर्ष कारक- वे सभी कारक जो किसी स्थान पर जनसंख्या को बसने के लिए आकर्षित करता हो उसे प्रवास के अपकर्ष कारक कहते है। जैसे – बेहतर रोजगार के अवसर, रहन-सहन की अच्छी दशाएं, शांति व स्थायित्व, जीवन व संपत्ति की सुरक्षा तथा अनुकूल जलवायु इत्यादि।

4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) विश्व में  जनसंख्या के वितरण और घनत्व को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना कीजिए।

उत्तर- जनसंख्या वितरण एवं घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है:-

(A) भौगोलिक कारक-

(i) जल की उपलब्धता-

     जल जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है। अतः लोग उन क्षेत्रों में बसने को प्राथमिकता देते हैं जहाँ जल आसानी से उपलब्ध होता है। यही कारण है कि नदी-घाटियाँ विश्व के सबसे सघन घने बसे हुए क्षेत्र हैं।

(ii) भू-आकृति-

     लोग समतल मैदानों और मंद ढालों पर बसने को वरीयता देते हैं क्योंकि ऐसे क्षेत्र फसलों के उत्पादन सड़क, निर्माण और उद्योगों के लिए अनुकूल होते हैं। गंगा का मैदान विश्व के सर्वाधिक सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों में से एक है जबकि हिमालय के पर्वतीय भाग विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र हैं।

(iii) जलवायु-

     अति उष्ण अथवा ठंडे मरुस्थलों की विषम जलवायु मानव बसाव के लिए सुविधाजनक नहीं होती है अर्थात सुविधाजनक जलवायु वाले क्षेत्र जिनमें अधिक मौसमी परिवर्तन नहीं होते वहाँ अधिक लोगों का बसाव होता है।

(iv) मृदाएँ-

      कृषि तथा इससे संबंधित क्रियाओं के लिए उपजाऊ मृदाओं का महत्वपूर्ण है इसीलिए उपजाऊ दोमट मिट्टी वाले प्रदेशों में अधिक लोगों का निवास होता है क्योंकि यह मृदाएँ गहन कृषि का कार्य के लिए उपयुक्त होती है।

(B) आर्थिक कारक-

(i) खनिजों की उपस्थिति-

     खनिजों से युक्त क्षेत्र उद्योगों को आकृष्ट करते हैं क्योंकि खनन और औद्योगिक गतिविधियाँ रोजगार उत्पन्न करते हैं। अतः कुशल एवं अर्ध कुशल कर्मी इन क्षेत्रों में पहुँचते हैं और जनसंख्या को सघन बना देते हैं।

(ii) नगरीकरण-

    नगर रोजगार के बेहतर अवसर, शैक्षणिक व चिकित्सा संबंधी सुविधाएँ तथा परिवहन और संचार के बेहतर साधन प्रस्तुत करते हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास होता है। इस प्रकार नगर के आकार में वृद्धि होती है।

(iii) औधोगिकरण-

     औद्योगिक पेटियाँ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती है और बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करती है। इनमें केवल कारखानों के श्रमिक ही नहीं होते बल्कि परिवहन परिचालक, दुकानदार, बैंक कर्मी, डॉक्टर, अध्यापक तथा अन्य सेवाएँ उपलब्ध कराने वाले भी होते हैं।

(C) सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक-

     कुछ स्थान धार्मिक अथवा सांस्कृतिक महत्व के कारण अधिक लोगों को आकर्षित करते हैं। ठीक इसी प्रकार लोग उन क्षेत्रों को छोड़कर चले जाते हैं जहाँ सामाजिक और राजनीतिक अशांति होती है। कई बार सरकारें लोगों को विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में बसने अथवा भीड़-भाड़ वाले स्थानों से चले जाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

(ii) जनांकिकीय संक्रमण की तीन अवस्थाओं की विवेचना कीजिए।

उत्तर- जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत का प्रतिपादन थॉम्पसन एवं नॉटेस्टीन द्वारा किया गया था। इस सिद्धांत का उपयोग किसी क्षेत्र की जनसंख्या के वर्णन तथा भविष्य की जनसंख्या के पूर्वानुमान के लिए किया जा सकता है। इस सिद्धांत से हमें पता चलता है कि जैसे ही ग्रामीण समाज खेतिहर और अशिक्षित अवस्था से उन्नति करके नगरीय औद्योगिक और साक्षर बनता है तो किसी प्रदेश की जनसंख्या उच्च जन्म और निम्न जन्म व निम्न मृत्यु में परिवर्तित होती है। यह परिवर्तन मुख्यतः तीन अवस्थाओं में होते हैं जिन्हें सामूहिक रूप से जनांकिकीय चक्र के रूप में जाना जाता है।:-

(क) प्रथम अवस्था- 

        उच्च जन्म दर तथा उच्च मृत्यु दर इस अवस्था की प्रमुख विशेषता है। जनसंख्या वृद्धि धीमी होती है और अधिकांश लोग खेती में कार्यरत होते हैं। यहाँ बड़े परिवारों को परिसंपत्ति माना जाता है। जीवन-प्रत्याशा निम्न होती है। अधिकांश लोग अशिक्षित होते हैं और उनके प्रौद्योगिकी स्तर निम्न होते हैं। 200 वर्ष पूर्व विश्व के लगभग सभी देश इसी अवस्था में थे। जैसे- बांग्लादेश, वर्षा वानों के आदिवासी इत्यादि।

(ख) द्वितीय अवस्था-

      इस अवस्था में जन्म दर उच्च रहती है परंतु मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आती है। स्वास्थ्य संबंधी दशाओं व स्वच्छता में सुधार के साथ मृत्यु दर में कमी आती है। इस अंतर के परिणामस्वरूप जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि होती है। जैसे- पेरू, श्रीलंका, केन्या आदि देश इस अवस्था से गुजर रहे हैं।

(ग) तृतीय अवस्था-

        इस अवस्था में जन्म दर में तेजी से कमी आती है साथ ही मृत्यु दर भी धीरे-धीरे घटती जाती है। इस प्रकार इस अवस्था में जनसंख्या वृद्धि दर या तो स्थिर हो जाती है या मन्द गति से बढ़ती है। जनसंख्या नगरीय और शिक्षित हो जाती है तथा उसके पास तकनीकी ज्ञान होता है। ऐसी जनसंख्या विचार पूर्वक परिवार के आकार को नियंत्रित करती है। जैसे- जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, इत्यादि।


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अध्याय 4 मानव विकास

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(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


अध्याय 4 मानव विकास

अध्याय 4 मानव विकास

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा विकास का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
(क) आकार में वृद्धि
(ख) गुण में धनात्मक परिवर्तन
(ग) आकार में स्थिरता
(घ) गुण में साधारण परिवर्तन
उत्तर – (ख) गुण में धनात्मक परिवर्तन
(ii) मानव विकास की अवधारणा निम्नलिखित में से किस विद्वान की देन है?
(क) प्रो. अमर्त्य सेन
(ख) डॉ. महबूब-उल-हक
(ग) एलन सी. सेम्पुल
(घ)  रैटजेल
उत्तर – (ख) डॉ. महबूब-उल-हक
 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र कौन-से है?
उत्तर – मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र संसाधनों तक पहुँच, स्वास्थ्य एवं शिक्षा है। इन पक्षों में से प्रत्येक के मापन के लिए उपयुक्त सूचकों का विकास किया गया है। दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन जीना, ज्ञान प्राप्त कर पाना तथा एक शिष्ट जीवन जीने के पर्याप्त साधनों का होना मानव विकास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष है।
(ii) मानव विकास के चार प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।
उत्तर – मानव विकास के चार प्रमुख घटक समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता और सशक्तिकरण है। जिस प्रकार किसी इमारत को स्तंभों का सहारा होता है ठीक उसी प्रकार मानव विकास के लिए भी ये सभी घटकों काफी महत्वपूर्ण होते हैं।
(iii) मानव विकास सूचकांक के आधार पर देशों का वर्गीकरण किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर – मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निष्पादन के आधार पर देशों का क्रम तैयार करता है। यह क्रम 0 से 1 के बीच के स्कोर पर आधारित होता है जो एक देश, मानव विकास के महत्वपूर्ण सूचकों में अपने रिकॉर्ड से प्राप्त करता है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) मानव विकास शब्द से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर – मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन डॉ० महबूब-उल-हक के द्वारा किया गया था। डॉ० महबूब-उल-हक ने मानव विकास का वर्णन एक ऐसे विकास के रूप में किया जो लोगों के विकल्पों में वृद्धि करता है और उनके जीवन में सुधार लाता है। दीर्घ और स्वस्थ्य जीवन जीना, ज्ञान प्राप्त कर पाना और उच्च जीवन स्तर मानव विकास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष  हैं।
          मानव विकास के अन्य विकल्प हैं, राजनीतिक स्वतंत्रता, मानव अधिकारों की गारंटी, आत्म निर्भरता तथा स्वाभिमान के विविध घटक। लोगों के विकल्पों के परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है। मानव विकास की कल्पना केवल अर्थव्यवस्था के विकास से संबंधित न होकर, मानव के संपूर्ण विकास से संबंधित है। आर्थिक कारकों के समान राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कारकों को भी उतना ही महत्त्व दिया जाता है।
       
       इसके अतिरिक्त विकास के लक्ष्य और साधनों, दोनों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। मानव विकल्पों के विस्तार को तो विकास का लक्ष्य माना जाता है लेकिन आपके विस्तार हो इसका आवश्यक साधना माना जाता है।
(ii) मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत समता और सत पोषणीयता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर – मानव विकास के चार प्रमुख घटक समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता और सशक्तिकरण है। जिस प्रकार किसी इमारत को स्तंभों का सहारा होता है ठीक उसी प्रकार मानव विकास के लिए भी ये सभी घटकों काफी महत्वपूर्ण होते हैं।

          समता का तात्पर्य प्रत्येक व्यक्ति को उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुँच की व्यवस्था करने से है। लोगों को उपलब्ध अवसर लिंग, प्रजाति, आय और भारत के संदर्भ में जाति के भेदभाव के विचार के बिना समान होने चाहिए। यद्यपि ऐसा ज्यादातर तो नहीं होता फिर भी यह लगभग प्रत्येक समाज में घटित होता है। उदाहरण के तौर पर किसी भी देश में यह जानना रुचिकर होता है कि विद्यालय में विरत अधिकांश छात्र किस वर्ग से हैं। तब ऐसी घटनाओं के पीछे कारणों का पता लगना चाहिए।

        भारत में स्त्रियाँ और सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्ग के व्यक्ति बड़ी संख्या में विद्यालय से विरत होते हैं। इससे पता चलता है कि शिक्षा तक पहुँच न होना किस प्रकार इन वर्गों के विकल्पों को सीमित करता है।


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PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER सम्पूर्ण हल सहित (बिहार बोर्ड भूगोल 12वीं कक्षा)

अध्याय-1. मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

इकाई-1 अध्याय-1. मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

मानव भूगोल प्रकृति

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:

(i) निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक भूगोल का वर्णन नहीं करता?

(क) समाकलनात्मक अनुशासन

(ख) मानव और पर्यावरण के बीच अंतर-संबंधों का अध्ययन

(ग) द्वैधता पर आश्रित

(घ) प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप आधुनिक समय में प्रासंगिक नहीं।

उत्तर – (ग) द्वैधता पर आश्रित

(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक भौगोलिक सूचना का स्रोत नहीं है?

(क) यात्रियों के विवरण

(ख) प्राचीन मानचित्र

(ग) चन्द्रमा से चट्टानी पदार्थों के नमूने

(घ) प्राचीन महाकाव्य

उत्तर – (घ) प्राचीन महाकाव्य

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक लोगों और पर्यावरण के बीच अन्योन्यक्रिया का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है?

(क) मानव बुद्धिमता

(ख) प्रौद्योगिकी

(ग) लोगों के अनुभव

(घ) मानवीय भाईचारा

उत्तर – (ख) प्रौद्योगिकी

(iv) निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव भूगोल का उपागम नहीं है?

(क) क्षेत्रीय विभिन्नता

(ख) मात्रात्मक क्रांति

(ग) स्थानिक संगठन

(घ) अन्वेषण और वर्णन

उत्तर – (ग) स्थानिक संगठन

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- मानव भूगोल, मानव विकास के विभिन्न चरणों में उस पर पड़ने वाले भौगोलिक प्रभाव का आदर्श अध्ययन है।  अर्थात मानव भूगोल, मानव और उसके भौतिक वातावरण के संबंधों का संपूर्ण अध्ययन करता है।

     दूसरे शब्दों में मानव भूगोल वह विज्ञान है जिसमें मनुष्य तथा वातावरण के पारस्परिक संबंधों का क्षेत्रीय आधार पर अध्ययन किया जाता हैं।

(ii)  मानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम बताइए।

उत्तर – मानव भूगोल के उप-क्षेत्र  निम्नलिखित है-

    व्यवहारवादी भूगोल, सामाजिक कल्याण का भूगोल, ऐतिहासिक भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, संसाधन भूगोल, कृषि भूगोल, उद्योग भूगोल, पर्यटन भूगोल, इत्यादि।

(iii) मानव भूगोल किस प्रकार अन्य सामाजिक विज्ञानों से संबंधित है?

उत्तर- मानव भूगोल, मानव जीवन के सभी तत्वों तथा अंतराल, जिसके अंतर्गत वे घटित होते हैं के मध्य संबंध की व्याख्या करने का प्रयत्न करती है। इस प्रकार मानव भूगोल की प्रकृति अत्यधिक अंतर विषयक है। पृथ्वी तल पर पाए जाने वाले मानवीय तत्वों को समझने व उनकी व्याख्या करने के लिए मानव भूगोल अन्य सामाजिक विज्ञानों के सहयोगी विषयों के साथ घनिष्ठ अंतर्संबंध विकसित करती है

 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) मानव के प्रकृतीकरण की व्याख्या कीजिए।

उत्तर – मनुष्य अपने प्रौद्योगिकी की सहायता से अपने भौतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया करता है। यह महत्वपूर्ण नहीं है कि मानव क्या उत्पन्न और निर्माण करता है बल्कि यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि ‘वह किन उपकरणों और तकनीकों की सहायता से उत्पादन और निर्माण करता है’।

    प्रौद्योगिकी किसी समाज के सांस्कृतिक विकास के स्तर की सूचक होती है। मानव प्रकृति के नियमों को बेहतर ढंग से समझने के बाद ही प्रौद्योगिकी का विकास कर पाया। जैसे घर्षण और ऊष्मा की संकल्पनाओं ने अग्नि की खोज में हमारी सहायता की। इसी प्रकार डीएनए और अनुवांशिकी के रहस्य की समझ ने हमें अनेक बीमारियों पर विजय पाने के योग्य बनाया। अधिक तीव्र गति से चलने वाले यान विकसित करने के लिए हम वायु गति के नियमों का प्रयोग करते हैं। इस प्रकार प्रकृति का ज्ञान प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है और प्रौद्योगिकी मनुष्य पर पर्यावरण की बंदिशों को कम करती है।

    प्राकृतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया की आरंभिक अवस्थाओं में मानव से अधिक प्रभावित हुआ था। उन्होंने प्रकृति के आदेशों के अनुसार अपने आप को ढाल लिया। इसका कारण यह है कि प्रौद्योगिकी का स्तर अत्यंत निम्न था और मानव के सामाजिक विकास की अवस्था भी आदिम थी। आदिम मानव समाज और प्रकृति की प्रबल शक्तियों के बीच इस प्रकार की अन्योन्यक्रिया को पर्यावरणीय निश्चयवाद कहा गया। प्रौद्योगिकी विकास की उस अवस्था में हम प्राकृतिक मानव की कल्पना कर सकते हैं जो प्रकृति को सुनता था उसकी प्रचंडता से भयभीत होता था और उसकी पूजा करता था।

(ii) मानव भूगोल के विषय क्षेत्र पर एक टिप्पणी लिखिए।

उत्तर मानव भूगोल भौतिक अथवा प्राकृतिक एवं मानव जगत के बीच संबंध मानवीय परिघटनाओं का स्थानिक वितरण तथा उनके घटित होने के कारण एवं विश्व के विभिन्न भागों में सामाजिक और आर्थिक विविधताओं का अध्ययन  है। अर्थात मानव एवं भौतिक पर्यावरण के बीच अंतर संबंधों का अध्ययन ही मानव भूगो कहलाता है।

    इस प्रकार मानव भूगोल की प्रकृति अत्यधिक अंतर-विषयक है। पृथ्वी तल पर पाए जाने वाले मानवीय तत्वों को समझने व उनकी व्याख्या करने के लिए मानव भूगोल सामाजिक विज्ञानों के सहयोगी विषयों के साथ घनिष्ठ अंतरा पृष्ठ विकसित करती है। ज्ञान के विस्तार के साथ नए क्षेत्रों का विकास होता है और मानव भूगोल के साथ भी ऐसा ही हुआ है।

     मानव भूगोल के कई क्षेत्र जैसे- सामाजिक भूगोल, नगरीय भूगोल, राजनीतिक भूगोल, जनसंख्या भूगोल, आवास भूगोल, आर्थिक भूगोल इत्यादि है। मानव भूगोल के कई उपक्षेत्र भी है जैसे- व्यवहारिक भूगोल, सामाजिक कल्याण का भूगोल, अवकाश का भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, लिंग भूगोल, ऐतिहासिक भूगोल, चिकित्सा भूगोल, निर्वाचन भूगो, सैन्य भगोल, संसाधन भूगोल, कृषि भूगोल,  विपणन भूगोल, पर्यटन भूगोल, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का भूगोल इत्यादि।



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