11. Graphical Construction of Simple, Comparative and Diagonal Scales / सरल, तुलनात्मक एवं विकर्ण मापक का आलेखीय निर्माण

11. Graphical Construction of Simple, Comparative and Diagonal Scales / सरल, तुलनात्मक एवं विकर्ण मापक का आलेखीय निर्माण

Graphical Construction of Simple, Comparative and Diagonal Scales 

सरल, तुलनात्मक एवं विकर्ण मापक का आलेखीय निर्माण

Graphical Construction of Simple

परिचय:

    मानचित्रण (Cartography) में मापक (Scale) वह अनुपात है जिसके द्वारा मानचित्र पर दर्शाई गई दूरी एवं धरातल की वास्तविक दूरी के बीच संबंध स्थापित किया जाता है।

    मानचित्रों पर दूरी को सही एवं सुविधाजनक ढंग से मापने के लिए ग्राफिकल स्केल (Graphical Scale) का निर्माण किया जाता है। ग्राफिकल स्केल विशेष रूप से तब उपयोगी होते हैं जब मानचित्र का आकार बड़ा या छोटा हो जाए, क्योंकि इनकी शुद्धता बनी रहती है।

परिभाषा: ग्राफिकल मापक वह रेखीय मापक है जिसमें एक सीधी रेखा को समान भागों में विभाजित कर वास्तविक दूरी प्रदर्शित की जाती है। इसकी सहायता से दूरी को सीधे मापा जा सकता है।

ग्राफिकल मापक मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं-

1. सरल मापक (Simple Scale)

2. तुलनात्मक मापक (Comparative Scale)

3. विकर्ण मापक (Diagonal Scale)

1. सरल मापक (Simple Scale)

    सरल मापक सबसे सामान्य एवं सरल प्रकार का ग्राफिकल मापक है। इसका उपयोग दो इकाइयों (जैसे किलोमीटर एवं मीटर) तक की दूरी मापने के लिए किया जाता है।

निर्माण की विधि:

1. दिए गए RF (Representative Fraction) के आधार पर स्केल की लंबाई ज्ञात करें।

2. आवश्यक लंबाई की एक सीधी रेखा खींचें।

3. रेखा को समान भागों में विभाजित करें।

4. प्रत्येक भाग एक मुख्य इकाई (जैसे 1 किमी) को प्रदर्शित करेगा।

5. पहले भाग को छोटे-छोटे उपभागों (मीटर) में विभाजित करें।

6. इकाइयों को दाएँ एवं बाएँ उचित रूप से अंकित करें।

उपयोग:

✍️ सड़क दूरी मापने में।

✍️ स्थलाकृतिक मानचित्रों में।

✍️ विद्यालय एवं महाविद्यालय के मानचित्र अभ्यास में।

लाभ:

✍️ बनाना सरल।

✍️ दूरी मापना आसान।

✍️ अधिक शुद्ध।

उदाहरण (1)

प्रश्न: 1 : 316,800 निरूपक भिन्न (Representative Fraction) पर 1 मील तक पढ़ी जा सकने वाली सरल मापनी (Plain Scale) बनाइए।

हल (Solution)

दिए गए R.F. = 1 : 316,800

अर्थात्

मानचित्र पर 1 इंच = धरातल पर 316,800 इंच

चूँकि 63,360 इंच = 1 मील

इसलिए,

316,800 ÷ 63,360 = 5 मील

अर्थात् मानचित्र का 1 इंच = धरातल के 5 मील के बराबर होगा।

अब यदि 6 इंच लंबी रेखा ली जाए, तो वह दर्शाएगी-

6 × 5 = 30 मील

मापनी बनाने की विधि (Construction):-

1. सबसे पहले 6 इंच लंबी एक सीधी रेखा खींचिए।

2. इस रेखा को 6 बराबर भागों में बाँट दीजिए।

3. प्रत्येक बड़ा भाग 5 मील को प्रदर्शित करेगा।

4. बाईं ओर के पहले भाग को 5 बराबर छोटे भागों में विभाजित कीजिए।

5. प्रत्येक छोटा भाग 1 मील को प्रदर्शित करेगा।

6. बड़े और छोटे भागों के मिलन बिंदु पर 0 (शून्य) अंकित कीजिए।

7. शून्य के दाईं ओर क्रमशः 5, 10, 15, 20 और 25 मील लिखिए।

8. शून्य के बाईं ओर छोटे भागों पर 1, 2, 3, 4 और 5 मील लिखिए।

9. मापनी के दोनों सिरों पर Miles तथा ऊपर R.F. = 1 : 316,800 लिखकर मापनी पूर्ण कीजिए।

Plain Scale

2. तुलनात्मक मापक (Comparative Scale)

   तुलनात्मक मापक वह ग्राफिकल मापक है जिसमें एक ही रेखा पर दो अलग-अलग मापन प्रणालियाँ प्रदर्शित की जाती हैं। जैसे- किलोमीटर एवं मील, किलोमीटर एवं नौटिकल माइल

निर्माण की विधि

1. दिए गए RF के अनुसार दोनों इकाइयों की लंबाई निर्धारित करें।

2. दो समानांतर रेखाएँ खींचें।

3. ऊपर वाली रेखा पर एक इकाई (जैसे किलोमीटर) अंकित करें।

4. नीचे वाली रेखा पर दूसरी इकाई (जैसे मील) अंकित करें।

5. दोनों स्केलों की प्रारम्भिक बिन्दु (Zero Point) समान रखें।

उपयोग

✍️ अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों में।

✍️ नौवहन (Navigation) में।

✍️ वायु परिवहन मानचित्रों में।

✍️ विभिन्न देशों की मापन प्रणालियों की तुलना में।

लाभ

✍️ दो इकाइयों में दूरी मापी जा सकती है।

✍️ इकाई परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती।

✍️ समय की बचत होती है।

उदहारण-

प्रश्न: 1 : 150,000 निरूपक भिन्न (R.F.) पर ऐसी तुलनात्मक मापनी (Comparative Scale) बनाइए, जिसमें दूरी मील (Miles) तथा किलोमीटर (Kilometres) दोनों में पढ़ी जा सके।

हल (Solution):-

इस प्रश्न में एक ही R.F. (1 : 150,000) का उपयोग करके दो मापनियाँ बनानी हैं-

1. मील (Miles) की मापनी

2. किलोमीटर (Kilometres) की मापनी

(1) मील की मापनी (Scale in Miles)

दिए गए R.F. के अनुसार-

मानचित्र पर 1 इंच = धरातल पर 150,000 इंच

चूँकि 63,360 इंच = 1 मील

इसलिए,

मानचित्र पर 5 इंच = धरातल पर लगभग 11.83 मील

सुविधा के लिए इसे 12 मील माना जाता है।

अब 12 मील प्रदर्शित करने के लिए 5.07 इंच लंबी सीधी रेखा खींचिए।

✍️ इस रेखा को 4 बराबर भागों में बाँटिए।

✍️ प्रत्येक बड़ा भाग 3 मील प्रदर्शित करेगा।

✍️ बाईं ओर के पहले भाग को 3 छोटे भागों में बाँटिए।

✍️ प्रत्येक छोटा भाग 1 मील प्रदर्शित करेगा।

(2) किलोमीटर की मापनी (Scale in Kilometres)

दिए गए R.F. के अनुसार-

मानचित्र पर 1 सेमी = धरातल पर 150,000 सेमी = 1.5 किमी

इस प्रकार,

मानचित्र पर 15 सेमी = धरातल पर 22.5 किमी

सुविधा के लिए इसे 20 किमी माना जाता है।

अब 20 किमी प्रदर्शित करने के लिए 13.33 सेमी लंबी सीधी रेखा खींचिए।

✍️ इस रेखा को 5 बराबर भागों में बाँटिए।

✍️ प्रत्येक बड़ा भाग 4 किमी प्रदर्शित करेगा।

✍️ बाईं ओर के पहले भाग को 4 छोटे भागों में विभाजित कीजिए।

✍️ प्रत्येक छोटा भाग 1 किमी प्रदर्शित करेगा।

अंतिम चरण (Final Step)

✍️ दोनों मापनियों पर उनके मान (Values) लिखिए।

✍️ मील और किलोमीटर की दोनों मापनियों को एक-दूसरे के ऊपर या नीचे इस प्रकार बनाइए कि दोनों का शून्य (0) एक ही ऊर्ध्वाधर (Vertical) रेखा में आए।3. विकर्ण मापक (Diagonal Scale)

    विकर्ण मापक सबसे अधिक शुद्ध (Accurate) ग्राफिकल मापक है। इसका उपयोग तीन इकाइयों तक की दूरी (जैसे किलोमीटर, मीटर एवं दशमलव मीटर) मापने के लिए किया जाता है।

निर्माण की विधि

1. RF के अनुसार स्केल की कुल लंबाई निर्धारित करें।

2. एक आयत (Rectangle) बनाएं।

3. नीचे की रेखा को मुख्य इकाइयों में विभाजित करें।

4. प्रथम भाग को उपभागों में विभाजित करें।

5. आयत की ऊँचाई को समान भागों में विभाजित करें।

6. इन बिंदुओं को विकर्ण (Diagonal) रेखाओं द्वारा जोड़ें।

7. विकर्ण रेखाओं की सहायता से सूक्ष्म दूरी (Fine Measurement) पढ़ी जाती है।

उपयोग

✍️ कैडस्ट्रल मानचित्र (Cadastral Maps)

✍️ इंजीनियरिंग सर्वेक्षण

✍️ रेलवे एवं सड़क परियोजनाएँ

✍️ GIS एवं सर्वेक्षण कार्य

✍️ सैन्य मानचित्र

लाभ

✍️ अत्यधिक शुद्ध।

✍️ छोटी दूरी भी मापी जा सकती है।

✍️ पेशेवर सर्वेक्षण में उपयोगी।

उदाहरण (1)

प्रश्न: 1 : 40,000 निरूपक भिन्न (R.F.) पर बने मानचित्र के लिए ऐसी विकर्ण मापनी (Diagonal Scale) बनाइए, जिससे 1 डेमी (Decametre) तक की दूरी पढ़ी जा सके।

हल (Solution)

दिए गए R.F. = 1 : 40,000

अर्थात्,

मानचित्र पर 1 सेमी = धरातल पर 40,000 सेमी

यदि मानचित्र पर 12 सेमी लंबी रेखा ली जाए, तो वह धरातल पर-

12 × 40,000 = 4,80,000 सेमी = 4.8 किमी

दूरी प्रदर्शित करेगी।

सुविधा के लिए 4.8 किमी के स्थान पर 5 किमी लिया जाता है।

अब समानुपात से,

4.8 किमी = 12 सेमी

5 किमी = (12 × 5) ÷ 4.8 = 12.5 सेमी

अतः 5 किमी दर्शाने के लिए 12.5 सेमी लंबी रेखा खींचनी होगी।

मापनी बनाने की विधि (Construction):-

1. 12.5 सेमी लंबी एक सीधी रेखा खींचिए।

2. इस रेखा को 5 बराबर भागों में विभाजित कीजिए।

3. प्रत्येक बड़ा (प्राथमिक) भाग 1 किमी की दूरी प्रदर्शित करेगा।

4. बाईं ओर के पहले भाग को 10 बराबर छोटे भागों में बाँटिए।

5. प्रत्येक छोटा (गौण) भाग 1 हेक्टोमीटर (100 मीटर) की दूरी प्रदर्शित करेगा।

6. डेमी (10 मीटर) पढ़ने के लिए बाईं ओर खींचे गए लंब (Vertical) पर 10 समान चिह्न लगाइए।

7. अब इन चिह्नों से आवश्यक समानांतर (Parallel) तथा विकर्ण (Diagonal) रेखाएँ खींचिए। इन्हीं विकर्ण रेखाओं की सहायता से 1 डेमी (10 मीटर) तक की दूरी आसानी से पढ़ी जा सकती है।

Diagonal Scaleसरल, तुलनात्मक एवं विकर्ण मापक में अंतर

आधार सरल मापक तुलनात्मक मापक विकर्ण मापक
इकाइयाँ दो दो (भिन्न मापन प्रणालियाँ) तीन
शुद्धता सामान्य अधिक सर्वाधिक
निर्माण सरल मध्यम जटिल
उपयोग सामान्य मानचित्र अंतरराष्ट्रीय मानचित्र इंजीनियरिंग एवं सर्वेक्षण
मापन मुख्य एवं उप-इकाई दो अलग इकाइयाँ सूक्ष्म मापन

भूगोल में मापक के अनुप्रयोग

(Applications of Scale in Geography)

1. मानचित्र निर्माण (Cartography):-

     मापक का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग मानचित्र निर्माण में होता है। इसके माध्यम से पृथ्वी की वास्तविक दूरी एवं क्षेत्रफल को निश्चित अनुपात में छोटा करके सटीक एवं स्पष्ट मानचित्र तैयार किए जाते हैं।

    विभिन्न प्रकार के विषयगत (Thematic) एवं स्थलाकृतिक मानचित्रों के निर्माण में उपयुक्त मापक का चयन आवश्यक होता है।

2. स्थलाकृतिक सर्वेक्षण (Topographical Survey):-

   स्थलाकृतिक सर्वेक्षण में पर्वत, पठार, घाटी, नदी, ढाल, समोच्च रेखाएँ (Contours) तथा अन्य भू-आकृतियों का सटीक मापन एवं निरूपण मापक की सहायता से किया जाता है। इससे धरातलीय स्वरूप का सही अध्ययन संभव होता है।

3. भूमि मापन (Land Survey):-

    भूमि सर्वेक्षण में खेतों, भू-खंडों, संपत्तियों तथा राजस्व अभिलेखों का सही मापन करने के लिए बड़े मापक (Large Scale) का उपयोग किया जाता है। यह भूमि सीमांकन, भू-अभिलेख तैयार करने तथा भूमि विवादों के समाधान में अत्यंत उपयोगी है।

4. परिवहन योजना (Transport Planning):-

    सड़क, रेलमार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, हवाई मार्ग तथा जलमार्गों की योजना एवं निर्माण में मापक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी सहायता से मार्गों की वास्तविक दूरी, दिशा एवं संपर्क का सही निर्धारण किया जाता है।

5. नगर एवं क्षेत्रीय नियोजन (Urban and Regional Planning):-

   नगरों के विस्तार, आवासीय क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों, सड़कों, पार्कों तथा सार्वजनिक सुविधाओं की योजना बनाने में बड़े मापक वाले मानचित्रों का उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार क्षेत्रीय विकास योजनाओं के निर्माण में भी मापक अत्यंत उपयोगी होता है।

6. GIS एवं Remote Sensing:-

   भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) एवं सुदूर संवेदन (Remote Sensing) में डिजिटल मानचित्रों का निर्माण, स्थानिक (Spatial) विश्लेषण, उपग्रह चित्रों की व्याख्या तथा प्राकृतिक संसाधनों के अध्ययन में विभिन्न मापकों का प्रयोग किया जाता है। इससे अधिक सटीक एवं वैज्ञानिक परिणाम प्राप्त होते हैं।

7. सैन्य एवं रक्षा मानचित्रण (Military and Defence Mapping):-

    सीमा निर्धारण, सैन्य ठिकानों की स्थापना, सैनिकों की आवाजाही, युद्ध रणनीति तथा सुरक्षा योजनाओं के निर्माण में मापक का व्यापक उपयोग किया जाता है। बड़े एवं मध्यम मापक वाले मानचित्र रक्षा कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

8. इंजीनियरिंग परियोजनाएँ (Engineering Projects):-

   बाँध, पुल, भवन, नहर, रेलवे लाइन, राजमार्ग तथा अन्य निर्माण परियोजनाओं की योजना एवं डिज़ाइन तैयार करने में मापक का प्रयोग किया जाता है। इंजीनियरिंग सर्वेक्षण में सटीक मापक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं शुद्धता सुनिश्चित करता है।

निष्कर्ष:

     ग्राफिकल मापक मानचित्रण का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो वास्तविक दूरी को सरल, सटीक एवं व्यावहारिक रूप में प्रदर्शित करता है।

    सरल मापक सामान्य दूरी मापन के लिए, तुलनात्मक मापक दो भिन्न मापन प्रणालियों की तुलना के लिए तथा विकर्ण मापक अत्यधिक सूक्ष्म एवं शुद्ध दूरी मापन के लिए उपयोग किया जाता है।

     भूगोल, सर्वेक्षण, इंजीनियरिंग, GIS तथा क्षेत्रीय नियोजन में इनका व्यापक महत्व है। UG स्तर पर इन तीनों मापकों की अवधारणा, निर्माण विधि एवं अनुप्रयोग का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।

Dr. Amar Kumar

Website: https://www.geographynotespdf.com

I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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