10. Development of Weather Forecasting Technology / मौसम पूर्वानुमान प्रौद्योगिकी का विकास

10. Development of Weather Forecasting Technology / मौसम पूर्वानुमान प्रौद्योगिकी का विकास

Development of Weather Forecasting Technology 

मौसम पूर्वानुमान प्रौद्योगिकी का विकास

परिचय (Introduction):-

    मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecasting) वह वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी स्थान के भविष्य के मौसम की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। आधुनिक युग में मौसम पूर्वानुमान उपग्रहों, रडार, कंप्यूटर मॉडल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा सुपरकंप्यूटर जैसी उन्नत तकनीकों के कारण अत्यधिक सटीक और विश्वसनीय हो गया है।

मौसम पूर्वानुमान प्रौद्योगिकी का विकास

(Development of Weather Forecasting Technology)

1. प्रारम्भिक काल (Ancient Period):-

✍️ प्राचीन समय में मौसम का अनुमान प्राकृतिक संकेतों के आधार पर लगाया जाता था।

✍️ लोग बादलों के रंग, हवा की दिशा, सूर्य एवं चन्द्रमा की स्थिति तथा पशु-पक्षियों के व्यवहार को देखकर मौसम का अनुमान लगाते थे।

✍️ यह विधि अनुभव पर आधारित थी और इसकी शुद्धता सीमित थी।

2. वैज्ञानिक युग का प्रारम्भ (Scientific Era):-

✍️ 17वीं–18वीं शताब्दी में वैज्ञानिक उपकरणों का विकास हुआ।

✍️ थर्मामीटर (Thermometer), बैरोमीटर (Barometer) तथा हाइग्रोमीटर (Hygrometer) के आविष्कार से तापमान, वायुदाब एवं आर्द्रता का मापन संभव हुआ।

✍️ इससे मौसम विज्ञान को वैज्ञानिक आधार मिला।

3. मौसम वेधशालाओं का विकास (Development of Meteorological Observatories):-

✍️ 19वीं शताब्दी में विभिन्न देशों में मौसम वेधशालाओं की स्थापना हुई।

✍️ टेलीग्राफ के माध्यम से विभिन्न स्थानों से मौसम संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान होने लगा।

✍️ पहली बार बड़े क्षेत्रों के मौसम का पूर्वानुमान तैयार किया जाने लगा।

4. रेडियो और रडार तकनीक का विकास (Radio and Radar Technology):-

✍️ द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रडार तकनीक विकसित हुई।

✍️ रडार द्वारा वर्षा, तूफान, ओलावृष्टि तथा चक्रवातों की पहचान संभव हुई।

✍️ इससे अल्पकालिक (Short-range) मौसम पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ी।

5. मौसम उपग्रहों का विकास (Weather Satellite Technology):-

✍️ 1960 में पहला मौसम उपग्रह TIROS-1 प्रक्षेपित किया गया।

✍️ उपग्रहों से बादलों, समुद्री तूफानों, मानसून तथा वैश्विक मौसम प्रणालियों का निरंतर अवलोकन संभव हुआ।

✍️ आज ध्रुवीय (Polar) तथा भूस्थिर (Geostationary) दोनों प्रकार के मौसम उपग्रह उपयोग में हैं।

6. कंप्यूटर एवं संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (Numerical Weather Prediction):-

✍️ सुपरकंप्यूटरों के विकास से विशाल मौसम संबंधी आँकड़ों का तीव्र विश्लेषण संभव हुआ।

✍️ गणितीय एवं भौतिक मॉडल के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान तैयार किया जाता है।

✍️ इसे Numerical Weather Prediction (NWP) कहा जाता है।

7. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) का उपयोग:-

✍️ वर्तमान समय में AI एवं मशीन लर्निंग का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

✍️ AI मौसम संबंधी विशाल आँकड़ों का विश्लेषण कर अधिक सटीक पूर्वानुमान प्रदान करता है।

✍️ इससे चक्रवात, भारी वर्षा तथा हीट वेव जैसी चरम मौसम घटनाओं की समय रहते चेतावनी दी जा सकती है।

8. आधुनिक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली (Modern Weather Forecasting System):-

   वर्तमान मौसम पूर्वानुमान में निम्नलिखित तकनीकों का संयुक्त उपयोग किया जाता है-

✍️ मौसम उपग्रह (Weather Satellites)

✍️ डॉप्लर मौसम रडार (Doppler Weather Radar)

✍️ स्वचालित मौसम केन्द्र (Automatic Weather Stations)

✍️ रेडियोसॉन्ड (Radiosonde)

✍️ सुपरकंप्यूटर

✍️ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)

✍️ संख्यात्मक मौसम मॉडल (NWP)

महत्त्व (Importance):

✍️ कृषि उत्पादन में सहायता।

✍️ चक्रवात, बाढ़ एवं तूफान की पूर्व चेतावनी।

✍️ विमानन एवं समुद्री परिवहन की सुरक्षा।

✍️ आपदा प्रबंधन में सहयोग।

✍️ जल संसाधन प्रबंधन।

✍️ जन-धन की हानि में कमी।

भारत में मौसम पूर्वानुमान

✍️ भारत में मौसम पूर्वानुमान का कार्य भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) द्वारा किया जाता है।

✍️ IMD की स्थापना 1875 में हुई थी।

✍️ वर्तमान में IMD उपग्रह, डॉप्लर रडार, स्वचालित मौसम केन्द्र तथा सुपरकंप्यूटरों की सहायता से मौसम का पूर्वानुमान जारी करता है।

निष्कर्ष (Conclusion):-

   मौसम पूर्वानुमान प्रौद्योगिकी ने पारंपरिक अनुभव-आधारित प्रणाली से विकसित होकर आधुनिक उपग्रह, रडार, सुपरकंप्यूटर एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली का रूप ले लिया है।

    इससे मौसम पूर्वानुमान की शुद्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा कृषि, परिवहन, आपदा प्रबंधन और जनसुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।

Dr. Amar Kumar

Website: https://www.geographynotespdf.com

I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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