Category BA SEMESTER/PAPER IV

PPU UG Semester-IV Geography Question Paper 2026 | MIC-4 (Minor Core Course) | Regular Examination

PPU UG Semester-IV Geography

Question Paper 2026

(Session: 2024-28)

(MIC-4: MINOR CORE COURSE)

GEOGRAPHY

Paper Code: 420807

(Population Geography)

Time: Three Hours]      [Maximum Marks: 70

Note: Candidates are required to give their answers in their 7 own words as far as practicable. The figures in the margin indicate full marks. Answer from all sections as directed.

परीक्षार्थी यथासम्भव अपने शब्दों में ही उत्तर दें। उपांत के अंक पूर्णांक के द्योतक हैं। निर्देशानुसार सभी खण्डों से उत्तर दीजिए।

Section-A / खण्ड-अ

(Multiple Choice Questions)

(बहुविकल्पीय प्रश्न)

Note: Choose the correct option from each question. [10×2-20]

प्रत्येक प्रश्न से सही विकल्प का चयन कीजिए।

1. (i) Which of the following is not related to the study of the population?

(a) Fertility

(b) Migration

(c) International Trade

(d) Mortality

निम्नलिखित में से कौन जनसंख्या के अध्ययन से सम्बन्धित नहीं है?

(a) प्रजननता

(b) प्रवासन

(c) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार

(d) मृत्युता

(ii) Which one of the following scholar is not related to the field of Population Geography?

(a) Malthus

(b) GT. Trewartha

(c) F.W. Notestein

(d) Alfred Wagener

निम्नलिखित में से कौन-सा विद्वान जनसंख्या भूगोल के क्षेत्र से सम्बन्धित नहीं है?

(a) माल्थस

(b) जी.टी. ट्रिवार्था

(c) एफ.डब्ल्यू. नॉटस्टीन

(d) अल्फ्रेड वेगनर

(iii) As per Census of India (2011), what is the sex ratio of the country’s population?

(a) 953

(b) 955

(c) 933

(d) 943

2011 की भारत की जनगणना के अनुसार, देश की जनसंख्या का लिंगानुपात क्या है?

(a) 953

(b) 955

(c) 933

(d) 943

(iv) Who is the proponent of the Demographic Transition Theory?

(a) Malthus

(b) GT. Trewartha

(c) John Clarke

(d) F.W. Notestein

जनसांख्यिकी संक्रमण सिद्धान्त का प्रस्तावक कौन है?

(a) माल्थस

(b) जी.टी. ट्रिवार्था

(c) जॉन क्लार्क

(d) एफ.डब्ल्यू. नॉटस्टीन

(v) What are the major events/advancement of human history that has influenced population growth?

(a) Agriculture development

(b) Industrial revolution

(c) Medical revolution

(d) All of the above

मानव इतिहास की प्रमुख घटनाएँ/उन्नति क्या हैं, जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित किया है?

(a) कृषि का विकास

(b) औद्योगिक क्रान्ति

(c) चिकित्सा क्रान्ति

(d) उपरोक्त सभी

(vi) What is the percentage of Indian people who live in Urban Areas?

(a) 27.50%

(b) 28.50%

(c) 31.16%

(d) 32.60%

कितने प्रतिशत भारतीय लोग शहरी क्षेत्रों में निवास करते हैं?

(a) 27.50%

(b) 28.50%

(c) 31.16%

(d) 32.60%

(vii) Which state has the highest decadal population growth rate (2011) in India?

(a) Uttar Pradesh

(b) Bihar

(c) Madhya Pradesh

(d) Tamil Nadu

भारत के किस राज्य की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर (2011) सबसे अधिक है?

(a) उत्तर प्रदेश

(b) बिहार

(c) मध्य प्रदेश

(d) तमिलनाडु

(viii) What is the main purpose of India’s Population Policy?

(a) Increase the India’s Population

(b) Control the India’s population growth

(c) Reduce the India’s poverty

(d) Control the International migration

भारत की जनसंख्या नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(a) भारत की जनसंख्या को बढ़ाना

(b) भारत की जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना

(c) भारत की गरीबी को कम करना

(d) अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास पर नियंत्रण

(ix) Generally, a country with higher economic development has :

(a) High mortality

(b) High birth rate

(c) Low mortality

(d) High poverty

आमतौर पर उच्च आर्थिक विकास वाले देश में पाया जाता है?

(a) उच्च मृत्यु दर

(b) उच्च जन्म दर

(c) निम्न मृत्यु दर

(d) उच्च गरीबी

(x) Which of the following countries has the base of the age-sex pyramid broad and the apex narrow?

(a) Developed countries

(b) Developing countries

(c) Large countries

(d) Small countries

निम्नलिखित में से किस देश का आयु-लिंग पिरामिड़ का आधार चौड़ा और शीर्ष संकीर्ण पाया जाता है?

(a) विकसित देशों का

(b) विकासशील देशों का

(c) बड़े देशों का

(d) छोटे देशों का

Section-B / खण्ड-ब

(Short Answer Type Questions)

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any four questions of the following: [4×5=20]

निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

2. Explain the difference between Demography and Population studies.

जनसांख्यिकी और जनसंख्या अध्ययन के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।

3. Briefly describe the major indices that measure the population mortality.

जनसंख्या मृत्युता को मापने वाले प्रमुख सूचकांकों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

4. Explain the major factors that contribute to the declining sex ratio in India.

भारत में घटते लिंगानुपात में योगदान देने वाले प्रमुख कारकों की व्याख्या कीजिए।

5 Elaborate the rural-urban structure of the Indian population with example.

भारतीय जनसंख्या की ग्रामीण-शहरी संरचना को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

6. Explain the concept of Invisible population with examples.

अदृश्य जनसंख्या की अवधारणा को उदाहरणों सहित समझाइए।

7. Briefly describe the major sources of population data of India.

भारत की जनसंख्या आँकडों के प्रमुख स्रोतों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

Section-C / खण्ड-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any three questions of the following: [3×10=30]

निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

8. Define population geography and describe the nature and scope of population geography in detail.

जनसंख्या भूगोल को परिभाषित कीजिए तथा जनसंख्या भूगोल की प्रकृति और विषय क्षेत्र का विस्तार से वर्णन कीजिए।

9. Describe the major factors that determine the population growth of a country in detail.

किसी देश की जनंसख्या वृद्धि को निर्धारित करने वाले प्रमुख कारकों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

10. Define Age-sex pyramid. Explain different types of age-sex pyramid and its components for a population in detail.

आयु-लिंग पिरामिड़ को परिभाषित कीजिए। जनसंख्या के लिए आयु-लिंग पिरामिड़ के विभिन्न प्रकारों और इसके घटकों को विस्तार से समझाइए।

11. Explain the different types of population policies and describe India’s Population Policy (2000) in detail.

विभिन्न प्रकार की जनसंख्या नीतियों की व्याख्या कीजिए तथा भारत की जनसंख्या नीति (2000) का विस्तार से वर्णन कीजिए।

12. What do you understand by Migration? Describe causes and consequences of migration in detail.

प्रवास से आप क्या समझते है? प्रवास के कारणों और परिणामों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

PPU UG Semester-IV Geography Question Paper 2026 | MJC-5/6/7 (Major Core Course) | Regular Examination

PPU UG Semester-IV Geography

Question Paper 2026

(Session: 2024-28)

(MJC-5: MAJOR CORE COURSE)

GEOGRAPHY

Paper Code: 410808

(Human Geography)

Time: Three Hours] [Maximum Marks: 70

Note: Candidates are required to give their answers in their own words as far as practicable. The figures in the margin indicate full marks. Answer from all the sections as directed.

परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें। उपांत के अंक पूर्णांक के द्योतक हैं। निर्देशानुसार सभी खण्डों से उत्तर दीजिए।

Section-A / खण्ड-अ

(Multiple Choice Type Questions)

(बहुविकल्पीय प्रश्न)

1. Choose the correct option from each questions: [10×2=20]

प्रत्येक प्रश्न से सही विकल्प का चयन कीजिए

(i) Which approach of Human Geography was followed during the colonial period?

(a) Behavioural

(b) Spatial organization

(c) Regional

(d) Areal differentiation

औपनिवेशिक काल के दौरान मानव भूगोल का कौन-सा दृष्टिकोण अपनाया गया?

(a) व्यवहारिक

(b) स्थानिक संगठन

(c) क्षेत्रीय

(d) क्षेत्रीय विभेदन

(ii) Stop and Go determinism thought is also known as:

(a) Possibilism

(b) Determinism

(c) Neo-determinism

(d) None of the above

रुको और जाओ नियतिवाद विचार को अन्य नामों से भी जाना जाता है?

(a) संभववाद

(b) नियतिवाद

(c) नव-नियतिवाद

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

(iii) In which year “Demographic Transition Theory” was started?

(a) 1929

(b) 1950

(c) 1960

(d) 1970

“जनसांख्यिकी संक्रमण सिद्धांत” किस वर्ष प्रस्तु किया गया था?

(a) 1929

(b) 1950

(c) 1960

(d) 1970

(iv) Which is the largest tribal group in India as per 2011 census?

(a) Munda

(b) Santhal

(c) Bhil

(d) Gond

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में सबसे बड़ा जनजातीय समूह कौन-सा है?

(a) मुंडा

(b) संथाल

(c) भील

(d) गोंड

(v) What are the causes of migration?

(a) Push factor

(b) Pull factor

(c) Both (a) and (b)

(d) None of the above

प्रवासन के क्या कारण हैं?

(a) पुश फैक्टर

(b) पुल फैक्टर

(c) दोनों (a) और (b)

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

(vi) What are the main reason behind male migration in India from rural to urban areas?

(a) Employment

(b) Marriage

(c) Education

(d) None of the above

भारत में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में पुरुषों के पलायन के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

(a) रोजगार

(b) विवाह

(c) शिक्षा

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

(vii) Who propounded the central place theory?

(2) W. Christaller

(b) A. Weber

(c) Von Thunen

(d) Malthus

केंद्रीय स्थान सिद्धांत का प्रतिपादन किसने किया?

(a) डब्ल्यू. क्रिस्टालर

(b) ए. वेबर

(c) वॉन थुनेन

(d) माल्थस

(viii) Which among the following is not a cause of growth of cities?

(a) Trade and Commerce

(b) Industrialism

(c) Transport development

(d) Hygienic outlook of people

निम्नलिखित में से कौन-सा शहरों के विकास का कारण नहीं है?

(a) व्यापार और वाणिज्य

(b) औद्योगिकीकरण

(c) परिवहन विकास

(d) लोगों का स्वच्छता संबंधी दृष्टिकोण

(ix) What are push factors in migration?

(a) Factors that attract people to a new location

(b) Factors that compel people to leave their current location

(c) Factors that support the integration of migrants in a new society

(d) Factors related to climate change and environmental challenges

प्रवास में प्रेरति कारक कौन-से हैं?

(a) ऐसे कारक जो लोगों को नए स्थान की ओर आकर्षित करते हैं

(b) ऐसे कारक जो लोगों को अपना वर्तमान स्थान छोड़ने के लिए मजबूर करते हैं

(c) ऐसे कारक जो प्रवासियों को नए समाज में एकीकृत करने में सहायता करते हैं

(d) जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से संबंधित कारक

(x) Which type of migration occurs within a country’s borders?

(a) International migration

(b) Rural to urban migration

(c) Urban to rural migration

(d) Internal migration

किसी देश की सीमाओं के भीतर किस प्रकार का प्रवास होता है?

(a) अंतर्राष्ट्रीय प्रवास

(b) ग्रामीण से शहरी प्रवास

(c) शहरी से ग्रामीण प्रवास

(d) आंतरिक प्रवास

Section-B / खण्ड-ब

(Short Answer Type Questions)

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any four questions of the following. [4×5=20]

निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

2. Define the concept of Neo-determinism.

नव-नियतिवाद की अवधारणा को परिभाषित कीजिए।

3. What is Malthus population theory?

माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत क्या है?

4. What are the major factors of controlling population distribution?

जनसंख्या वितरण को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कारक क्या हैं?

5. Differentiate between the race and tribes.

जाति और जनजातियों के बीच अंतर बताइए।

6. What are the characteristics of urban settlement?

नगरीय बस्ती की विशेषताएँ क्या हैं?

7. What do you understand by the migration?

प्रवास से आप क्या समझते हैं?

Section-C / खण्ड-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any three questions of the following. [3×10=30]

निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

8. Define Human Geography. Also give a detailed account on nature and scope of human geography.

मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए। मानव भूगोल की प्रकृति और दायरे पर भी विस्तार से जानकारी दीजिए।

9. Discuss in detail on Demographic Transition Theory.

जनसांख्यिकी संक्रमण सिद्धांत पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

10. What do you understand by the races and tribes? Describe in detail about major-tribal groups of India and Bihar.

जातियों और जनजातियों से आप क्या समझते हैं? भारत और बिहार के प्रमुख जनजातीय समूहों के बारे में विस्तार से वर्णन कीजिए।

11. Discuss in detail about the Christaller Central Place Theory.

क्रिस्टालर केन्द्रीय स्थान सिद्धांत के बारे में विस्तार से चर्चा कीजिए।

12. Define Migration. Discuss the factors affecting migration in India.

प्रवासन को परिभाषित कीजिए। भारत में प्रवासन को प्रभावित करने वाले कारकों पर चर्चा कीजिए।

UG (Regular) (Semester-IV) Examination, 2026

(Session: 2024-28)

(MJC-6: MAJOR CORE COURSE)

GEOGRAPHY

Paper Code: 410809

(Geography of India and Bihar)

Time: Three Hours]         [Maximum Marks: 70

Note: Candidates are required to give their answers in their own words as far as practicable. The figures in the margin indicate full marks. Answer from all the sections as directed.

अभ्यर्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें। उपांत के अंक पूर्णांक के द्योतक हैं। निर्देशानुसार सभी खण्डों से प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

Section-A/खण्ड-अ

(Objective Type Questions)

(वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

Note: Select the correct options of the following questions. Each question carries 2 marks.[10×2=20]

1. निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्पों का चयन कीजिए। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है।

(i) Which of the following is the oldest mountain range in India?

(a) Himalayas

(b) Aravalis

(c) Western Ghats

(d) Vindhyas

निम्नलिखित में से भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला कौन-सी है?

(a) हिमालय

(b) अरावली

(c) पश्चिमी घाट

(d) विंध्याचल

(ii) The Western Ghats are also known as:

(a) Sahyadri

(b) Satpura

(c) Nilgiris

(d) Vindhyas

पश्चिमी घाट को किस नाम से भी जाना जाता है?

(a) सह्याद्रि

(b) सतपुड़ा

(c) नीलगिरि

(d) विंध्याचल

(iii) Which river flows through a rift valley?

(a) Mahanadi

(b) Godavari

(c) Krishna

(d) Narmada

कौन-सी नदी एक भ्रंश घाटी (रिफ्ट वैली) से होकर बहती है?

(a) महानदी

(b) गोदावरी

(c)कृष्णा

(d) नर्मदा

(iv) In which direction do the summer monsoon winds blow in India?

(a) Northeast to Southwest

(b) Southeast to Northeast

(c) East to West

(d) North to South

भारत में ग्रीष्मकालीन मानूसनी हवाएँ किस दिशा में चलती हैं?

(a) उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम

(b) दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पूर्व

(c) पूर्व से पश्चिम

(d) उत्तर से दक्षिण

(v) Which Indian state is the largest producer of iron ore?

(a) Odisha

(b) Jharkhand

(c) Chhattisgarh

(d) Karnataka

कौन-सा भारतीय राज्य लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक है?

(a) ओडिशा

(b) झारखण्ड

(c) छत्तीसगढ़

(d) कर्नाटक

(vi) India is the largest producer and exporter of which mineral?

(a) Manganese

(b) Mica

(c) Iron ore

(d) Copper

भारत किस खनिज का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है?

(a) मैंगनीज

(b) मीका

(c) लौह अयस्क

(d) तांबा

(vii) Which state is the leading producer of manganese in India?

(a) Odisha

(b) Madhya Pradesh

(c) Maharashtra

(d) Karnataka

भारत में मैंगनीज का प्रमुख उत्पादक राज्य कौन-सा है?

(a) ओडिशा

(b) मध्य प्रदेश

(c) महाराष्ट्र

(d) कर्नाटक

(viii) The largest physiographic region of Bihar is:

(a) Chota Nagpur Plateau

(b) Gangetic Plain

(c) Terai Region

(d) Shivalik Hills

बिहार का सबसे बड़ा भौतिक संरचनात्मक क्षेत्र कौन-सा है?

(a) छोटानागपुर पठार

(b) गंगा का मैदान

(c) तराई क्षेत्र

(d) शिवालिक पहाड़ियाँ

(ix) The Kosi River meets the Ganga at which location?

(a) Patna

(b) Kanpur

(C) Kursela

(d) Chapra

कोसी नदी गंगा से किस स्थान पर मिलती है?

(a) पटना

(b) कानपुर

(c) कुर्सेला

(d) छपरा

(x) What is the urbanization rate of Bihar according to the 2011 Census?

(a) 15.52%

(b) 11.29%

(c) 25.63%

(d) 10.34%

बिहार की नगरीकरण दर 2011 की जनगणना के अनुसार कितनी है?

(a) 15.52%

(b) 11.29%

(c) 25.63%

(d) 10.34%

Section-B/खण्ड-ब

(Short Answer Type Questions)

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any four questions. Each question carries 5 marks. [4×5=20]

किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 5 अंकों का है।

2. Write about the characteristics of Middle Himalaya.

मध्य हिमालय की विशेषताओं के बारे में लिखिए।

3. Describe the course and tributaries of the Ganga River.

गंगा नदी के मार्ग एवं सहायक नदियों का वर्णन कीजिए।

4. Write about the characteristics of Alluvial soil in India.

भारत में जलोढ़ मिट्टी की विशेषताओं के बारे में लिखिए।

5. Write about the distribution of coal in India.

भारत में कोयले के वितरण के बारे में लिखिए।

6. Write a short note on tropical evergreen forest in India.

भारत में उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन पर टिप्पणी लिखिए। पर एक संक्षिप्त

7. What are the problems of Urbanisation in Bihar?

बिहार में नगरीकरण की समस्याएँ क्या हैं?

Section-C/खण्ड-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any three questions. Each question carries 10 marks. [3×10-30]

किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 10 अंकों का है।

8. Describe about the characteristics of Himalayan rivers in India.

भारत में हिमालयी नदियों की विशेषताओं के बारे में वर्णन कीजिए।

9. Explain about the distribution and types of soil in India.

भारत में मिट्टी के वितरण और प्रकारों के बारे में बताइए।

10. Explain in detail about the iron and steel industry in India.

भारत में लौह एवं इस्पात उद्योग के बारे में विस्तार से बताइए।

11. Explain the significance, course, and challenges of the Kosi River in Bihar.

बिहार में कोसी नदी के महत्व, मार्ग और चुनौतियों की व्याख्या कीजिए।

12. Explain the trends of Urbanisation in Bihar.

बिहार में नगरीकरण की प्रवृत्तियों की व्याख्या कीजिए।

UG (Regular) (Semester-IV) Examination, 2026

(Session: 2024-28)

(MJC-7: MAJOR CORE COURSE)

GEOGRAPHY

Paper Code: 410810

(Statistical Methods in Geography)

Time: Three Hours]  [Maximum Marks: 70

Note: Candidates are required to give their answers in their own words as far as practicable. The figures in the margin indicate full marks. Answer from all the sections as directed.

अभ्यर्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें। उपांत के अंक पूर्णांक के द्योतक हैं। निर्देशानुसार सभी खण्डों से प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

Section-A/खण्ड-अ

(Objective Type Questions)

(वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

Note: Select the correct options of the following questions. Each question carries 2 marks. [10×2=20]

निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्पों का चयन कीजिए। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है।

1. (i) Why are statistical methods important in Geography?

(a) To draw maps only

(b) To create 3D models of the terrain

(c) To analyse spatial patterns and relationships

(d) To study human emotions

भूगोल में सांख्यिकीय विधियाँ क्यों महत्वपूर्ण हैं?

(a) केवल मानचित्र बनाना

(b) भूभाग के 3D मॉडल बनाना

(c) स्थानिक पैटर्न और सम्बन्धों का विश्लेषण करना

(d) मानवीय भावनाओं का अध्ययन करना

(ii) Data collected by someone else and reused in your research is called:

(a) Personal data

(b) Primary data

(c) Survey data

(d) Secondary data

किसी अन्य व्यक्ति द्वारा एकत्रित और आपके शोध में पुनः उपयोग किये गए डेटा को कहा जाता है :

(a) व्यक्तिगत डेटा

(b) प्राथमिक डेटा

(c) सर्वेक्षण डेटा

(d) द्वितीयक डेटा

(iii) The use of standard deviation in geographical studies helps to:

(a) Determine historical timelines

(b) Measure the spread or dispersion of data

(c) To examine the relationship between two variables

(d) Identify climate types

भौगोलिक अध्ययनों में मानक विचलन का उपयोग निम्न में मदद करता है:

(a) ऐतिहासिक समय सीमा निर्धारित करना

(b) डेटा के प्रसार या फैलावा को मापना

(c) दो चरों के बीच सम्बन्धों की जाँच करना

(d) जलवायु प्रकारों की पहचान करना

(iv) What is the purpose of using measures of central tendency (mean, median, mode) in geography?

(a) To identify the central or typical value in a data set

(b) To calculate distances only

(c) To study historical events

(d) To create 3D models of terrain

भूगोल में केन्द्रीय प्रवृत्ति (माध्य, माध्यिका, बहुलक) के उपायों का उपयोग करने का उद्देश्य क्या है?

(a) डेटा सेट में केन्द्रीय या विशिष्ट मान की पहचान करना

(b) केवल दूरियों की गणना करना

(c) ऐतिहासिक घटनाओं का अध्ययन करना

(d) भूभाग के 3D मॉडल बनाना

(v) In which sampling method does every member of the population have an equal chance of being selected?

(a) Cluster sampling

(b) Systematic sampling

(c) Simple random sampling

(d) Purposive sampling

किस नमूनाकरण विधि में जनसंख्या के प्रत्येक सदस्य के चुने जाने की समान सम्भावना होती है?

(a) क्लस्टर नमूनाकरण

(b) व्यवस्थित नमूनाकरण

(c) सरल यादृच्छिक नमूनाकरण

(d) उद्देश्यपूर्ण नमूनाकरण

(vi) Stratified sampling is most useful when :

(a) The population is uniform

(b) You want random data

(c) The population consists of distinct sub-groups

(d) None of the above

स्तरीकृत नमूनाकरण सबसे उपयोगी होता है जबः

(a) जनसंख्या समान होती है

(b) आप यादृच्छिक डेटा चाहते हैं

(c) जनसंख्या में अलग-अलग उप-समूह होते हैं

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

(vii) What does correlation measure?

(a) The average of data values

(b) The spread of data

(c) The strength and direction of the relationship between two variables

(d) The number of categories

सहसम्बन्ध क्या मापता है?

(a) डेटा मानों का औसत

(b) डेटा का प्रसार

(c) दो चरों के बीच सम्बन्ध की ताकत और दिशा

(d) श्रेणियों की संख्या

(viii) What is the range of the correlation coefficient?

(a) 0 to 1

(b) -1 to +1

(c) 0 to 100

(d) -100 to +100

सहसम्बन्ध गुणांक की सीमा क्या है?

(a) 0 to 1

(b) -1 to +1

(c) 0 to 100

(d) -100 to +100

(ix) Which statistical method is used to predict the value of one variable based on another?

(a) Mean

(b) Mode

(c) Correlation

(d) Regression

एक चर के मूल्य का अनुमान दूसरे के आधार पर लगाने के लिए किस सांख्यिकीय पद्धति का उपयोग किया जाता है?

(a) माध्य

(b) बहुलक

(c) सहसम्बन्ध

(d) प्रतिगमन

(x) Which scale of measurement deals only with names, labels, or categories?

(a) Ordinal

(b) Nominal

(c) Interval

(d) Ratio

माप का कौन-सा पैमाना केवल नामों, लेबल या श्रेणियों से सम्बन्धित है?

(a) क्रमिक

(b) नॉमिनल

(c) अंतराल

(d) अनुपात

Section-B/खण्ड-ब

(Short Answer Type Questions)

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any four questions. Each question carries 5 marks. [4×5=20]

किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 5 अंकों का है।

2. Explain the difference between primary and secondary data with examples from geographical studies.

भौगौलिक अध्ययनों में उदाहरणों के साथ प्राथमिक और द्वितीयक डेटा के बीच अन्तर की व्याख्या कीजिए।

3. Define measures of dispersion and state its importance in geographical data analysis.

विचलनशीलता के माप को परिभाषित कीजिए और भौगोलिक डेटा विश्लेषण में इसके महत्व को बताइए।

4. What is sampling? Why is it necessary in geographical studies?

नमूनाकरण क्या है? भौगोलिक अध्ययनों में यह क्यों आवश्यक है?

5. What is simple random sampling? Discuss its advantages and limitations.

सरल यादृच्छिक नमूनाकरण क्या है? इसके लाभ और सीमाओं पर चर्चा कीजिए।

6. Define central tendency. Why is it important in the analysis of geographical data?

केन्द्रीय प्रवृत्ति को परिभाषित कीजिए। भौगोलिक डेटा के विश्लेषण में यह क्यों महत्वपूर्ण है?

7. Find the correlation coefficient of the following hypothetical data using Spearman Rank correlation method.

स्पीयरमैन रैंक सहसम्बन्ध विधि का उपयोग करके निम्नलिखित काल्पनिक डेटा का सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिए :

City Population Density AQI
A 5200 180
B 4700 160
C 6100 200
D 4300 150
E 5800 190
F 4000 140
G 4900 165
H 4250 163
I 5650 158
J 4800 151

Section-C/खण्ड-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any three questions. Each question carries 10 marks. [3×10=30]

किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 10 अंकों का है।

8. Discuss the role of statistics in enhancing the scientific nature of geography.

भूगोल की वैज्ञानिक प्रकृति को बढ़ाने में सांख्यिकी की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

9. The following data shows the monthly rainfall (in millimetres) for city X. Calculate the standard deviation of the rainfall and interpret the results.

निम्नलिखित डेटा शहर X के लिए मासिक वर्षा (मिलीमीटर में) दर्शाता है। वर्षा के मानक विचलन की गणना कीजिए और परिणामों की व्याख्या कीजिए:

Months Rainfall (mm)
January 75
February 65
March 82
April 120
May 140
June 180
July 210
August 195
September 160
October 130
November 95
December 85

10. Differentiate between probability and non-probability sampling methods.

संभाव्यता और गैर-संभाव्यता नमूनाकरण विधियों के बीच अन्तर स्पष्ट कीजिए।

11. Compare and contrast mean, median, and mode as the measures of central tendency.

केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप के रूप में माध्य, माध्यिका और बहुलक की तुलना कीजिए और उनमें अन्तर स्पष्ट कीजिए।

12. What is correlation analysis? Explain the different types of correlation with geographical examples.

सहसम्बन्ध गुणांक विश्लेषण क्या है? भौगोलिक उदाहरणों के साथ सहसम्बन्ध के विभिन्न प्रकारों की व्याख्या कीजिए।

Important Rivers of Bihar (बिहार की प्रमुख नदियाँ) | Ganga, Kosi, Gandak, Son & Mahananda | Geography Notes 2026

Important Rivers of Bihar

बिहार की प्रमुख नदियाँ

     बिहार की भौगोलिक संरचना में नदियों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। राज्य की अधिकांश नदियाँ गंगा नदी तंत्र का हिस्सा हैं। नदियाँ बिहार की कृषि, सिंचाई, जल संसाधन, बाढ़, परिवहन, मृदा निर्माण तथा मानव बस्तियों को प्रभावित करती हैं।

   बिहार की नदियों को मुख्यतः हिमालय से निकलने वाली उत्तरी नदियों तथा प्रायद्वीपीय पठार से निकलने वाली दक्षिणी नदियों के रूप में समझा जा सकता है।

1. गंगा नदी (Ganga River):-

   गंगा बिहार की सबसे महत्वपूर्ण नदी है और राज्य को लगभग दो भौगोलिक भागों- उत्तर बिहार एवं दक्षिण बिहार में विभाजित करती है। यह बिहार में मुख्यतः पश्चिम से पूर्व दिशा में बहती है।

   गंगा बिहार में बक्सर के निकट प्रवेश करती है तथा भागलपुर के बाद आगे पश्चिम बंगाल की ओर चली जाती है। इसकी अनेक सहायक नदियाँ बिहार के विभिन्न भागों में जल निकासी, कृषि एवं बाढ़ की स्थिति को प्रभावित करती हैं।

प्रमुख सहायक नदियाँ- घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, सोन, पुनपुन, फल्गु।

महत्व-

(i) सिंचाई बिहार के विशाल कृषि क्षेत्र को सिंचाई जल उपलब्ध कराती है।

(ii) कृषि गंगा का जलोढ़ मैदान अत्यंत उपजाऊ होने से कृषि को बढ़ावा देता है।

(iii) जल संसाधन बिहार के लिए प्रमुख सतही जल संसाधन का कार्य करती है।

(iv) नदी परिवहन जल परिवहन एवं अंतर्देशीय नौवहन के लिए महत्वपूर्ण है।

(v) मत्स्य पालन नदी एवं उससे जुड़े जल क्षेत्रों में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देती है।

(vi) बाढ़ एवं जल निकासी इसकी सहायक नदियों के साथ बाढ़ एवं जल निकासी की स्थिति को प्रभावित करती है।

(vii) धार्मिक महत्व बिहार में गंगा का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है।

(viii) मानव बस्तियाँ गंगा घाटी में घनी आबादी एवं अनेक प्रमुख बस्तियों के विकास में सहायक है।

2. घाघरा नदी (Ghaghara River):-

     घाघरा हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदी है। यह उत्तर बिहार की महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है और अंततः गंगा में मिलती है।

    इसका जलग्रहण क्षेत्र उत्तर बिहार के कुछ हिस्सों में बाढ़ की स्थिति को प्रभावित करता है। घाघरा का महत्व मुख्यतः जल निकासी, कृषि और बाढ़ के संदर्भ में है।

3. गंडक नदी (Gandak River):-

    गंडक नदी का उद्गम नेपाल हिमालय क्षेत्र में माना जाता है। इसे नेपाल में विभिन्न नामों से जाना जाता है और बिहार में यह महत्वपूर्ण हिमालयी नदी के रूप में प्रवाहित होती है।

    गंडक नदी बिहार के पश्चिमोत्तर भाग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह अंततः बिहार के पटना जिले के सोनपुर (हरिहर क्षेत्र) के निकट गंगा नदी में मिलती है।

प्रमुख विशेषताएँ-

(i) गंडक नदी का उद्गम नेपाल हिमालय से होता है।

(ii) यह हिमालय से निकलने वाली प्रमुख बारहमासी नदी है।

(iii) यह बिहार के पश्चिमोत्तर भाग से होकर बहती है।

(iv) गंडक नदी अंततः गंगा नदी में मिल जाती है।

(v) यह सिंचाई, कृषि एवं बाढ़ की दृष्टि से बिहार की महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है।

4. बूढ़ी गंडक नदी (Burhi Gandak):-

    बूढ़ी गंडक उत्तर बिहार की एक महत्वपूर्ण बारहमासी नदी है। इसका उद्गम पश्चिमी चंपारण के सोमेश्वर पर्वत श्रेणी के क्षेत्र से माना जाता है। यह नदी पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर तथा बेगूसराय आदि क्षेत्रों से होकर बहती है। बूढ़ी गंडक का प्रवाह मुख्यतः उत्तर बिहार के समतल जलोढ़ मैदान से होकर होता है।

   मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने के कारण इसके आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या उत्पन्न होती है। यह नदी कृषि, सिंचाई तथा जल निकासी के लिए महत्वपूर्ण है। अंततः बूढ़ी गंडक बेगूसराय जिले के खगड़िया के निकट गंगा नदी में मिलती है।

5. कोसी नदी (Kosi River):-

    कोसी अपने बार-बार धारा परिवर्तन, अत्यधिक गाद निक्षेपण और बाढ़ के कारण बिहार की महत्वपूर्ण बाढ़-प्रवण नदियों में शामिल है। इसे अक्सर “बिहार का शोक (Sorrow of Bihar)” कहा जाता है।

    कोसी नदी का उद्गम तिब्बत एवं नेपाल के हिमालयी क्षेत्र से संबंधित है। इसकी विभिन्न धाराएँ नेपाल के तराई क्षेत्र से होकर बिहार में प्रवेश करती हैं।

    यह नदी बिहार के उत्तर-पूर्वी भाग में विस्तृत जलोढ़ मैदान का निर्माण करती हुई आगे बढ़ती है और अंततः कटिहार जिले के कुरसेला (Kursela) के निकट गंगा नदी में मिलती है। 

कोसी की प्रमुख विशेषता-

कोसी अपने धारा परिवर्तन (Channel Shifting) और व्यापक बाढ़ के लिए प्रसिद्ध है।

बाढ़ के प्रमुख कारण-

✍️ अधिक मानसूनी वर्षा

✍️ हिमालयी क्षेत्र से भारी जल आगमन

✍️ अत्यधिक गाद (Silt)

✍️ नदी की कम ढाल

✍️ channel shifting

महत्व-

    कोसी द्वारा लाई गई जलोढ़ सामग्री मिट्टी की उर्वरता में योगदान देती है, लेकिन बार-बार आने वाली बाढ़ कृषि एवं मानव जीवन के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न करती है।

6. सोन नदी (Son River):-

   सोन बिहार की प्रमुख दक्षिणी नदियों में से एक है। इसका उद्गम अमरकंटक पठार क्षेत्र में होता है।

   यह बिहार में पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हुई पटना के निकट गंगा में मिलती है।

प्रमुख विशेषताएँ-

✍️ प्रायद्वीपीय नदी

✍️ गंगा की महत्वपूर्ण दक्षिणी सहायक नदी

✍️ चौड़ा नदी तल

✍️ सिंचाई की दृष्टि से महत्वपूर्ण

महत्व-

    सोन नदी से संबंधित नहर प्रणाली दक्षिण बिहार की कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

7. पुनपुन नदी (Punpun River):-

     पुनपुन नदी का उद्गम झारखंड के पलामू क्षेत्र के पठारी भाग से माना जाता है। यह नदी बिहार में प्रवेश करने के बाद मुख्यतः औरंगाबाद, गया, जहानाबाद तथा पटना क्षेत्रों से होकर बहती है। पुनपुन नदी दक्षिण बिहार की महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है।

   इसका जल कृषि एवं सिंचाई के लिए उपयोगी है। मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अंततः पुनपुन नदी पटना के निकट फतुहा में गंगा नदी में मिलती है।

8. फल्गु नदी (Phalgu River):-

   फल्गु नदी बिहार की महत्वपूर्ण धार्मिक एवं भौगोलिक नदियों में से एक है। यह मुख्यतः गया क्षेत्र से संबंधित है।

    फल्गु नदी का निर्माण लिलाजन (निरंजना) और मोहाना नदियों के संगम से माना जाता है।

धार्मिक महत्व-

   गया में फल्गु नदी का विशेष धार्मिक महत्व है। पिंडदान और श्राद्ध की धार्मिक परंपराओं के कारण इसका महत्व बहुत अधिक है।

भौगोलिक महत्व-

    फल्गु नदी गया क्षेत्र की प्रमुख नदी है, जो जल निकासी, कृषि एवं सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है तथा स्थानीय भौगोलिक स्वरूप को प्रभावित करती है।

9. महानंदा नदी (Mahananda River):-

     महानंदा बिहार की पूर्वी सीमा क्षेत्र की महत्वपूर्ण नदी है। इसका उद्गम दार्जिलिंग हिमालय क्षेत्र से संबंधित है।

     यह बिहार के किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार आदि क्षेत्रों को प्रभावित करती है और आगे गंगा नदी तंत्र का हिस्सा बनती है।

महत्व-

   महानंदा पूर्वी बिहार की प्रमुख नदी है, जो कृषि, सिंचाई, जल निकासी तथा बाढ़ नियंत्रण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

10. कर्मनाशा नदी (Karmanasa River):-

   कर्मनाशा नदी बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच सीमावर्ती नदी के रूप में महत्वपूर्ण है। इसका उद्गम कैमूर क्षेत्र से संबंधित है और यह आगे गंगा में मिलती है।

    इसका महत्व विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिमी बिहार के संदर्भ में है।

बिहार की नदियों का वर्गीकरण

A. उत्तर बिहार की प्रमुख नदियाँ- 

घाघरा → गंडक → बूढ़ी गंडक → कोसी → महानंदा

    इनमें अधिकांश नदियाँ हिमालय से निकलती हैं और इनमें मानसून के दौरान बाढ़ की संभावना अधिक रहती है।

B. दक्षिण बिहार की प्रमुख नदियाँ-

     कर्मनाशा → सोन → पुनपुन → फल्गु

   इनका संबंध मुख्यतः प्रायद्वीपीय पठारी क्षेत्र से है।

C. मुख्य नदी

     गंगा उत्तर एवं दक्षिण बिहार की नदियों को जोड़ने वाली प्रमुख नदी है।

बिहार की प्रमुख नदियाँ: एक नजर

नदी प्रमुख विशेषता
गंगा बिहार की मुख्य नदी
गंडक हिमालयी नदी, बाढ़ एवं सिंचाई
कोसी बिहार का शोक, channel shifting
बूढ़ी गंडक उत्तर बिहार की प्रमुख नदी
घाघरा हिमालयी नदी
सोन दक्षिण बिहार की प्रमुख नदी
पुनपुन दक्षिण-मध्य बिहार की नदी
फल्गु गया की प्रमुख धार्मिक नदी
महानंदा पूर्वी बिहार की प्रमुख नदी
कर्मनाशा बिहार-उत्तर प्रदेश सीमा क्षेत्र की नदी

Exam के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

✍️ बिहार की प्रमुख नदी → गंगा

✍️ बिहार का शोक → कोसी

✍️ दक्षिण बिहार की प्रमुख नदी → सोन

✍️ गया की प्रमुख नदी → फल्गु

✍️ पूर्वी बिहार की प्रमुख नदी → महानंदा

✍️ हिमालयी नदियाँ → गंडक, कोसी, घाघरा आदि

✍️ प्रायद्वीपीय क्षेत्र से संबंधित प्रमुख नदी → सोन

✍️ बिहार का उत्तर-दक्षिण विभाजन → गंगा द्वारा

✍️ कोसी की प्रमुख विशेषता → धारा परिवर्तन एवं बाढ़

✍️ फल्गु → गया के धार्मिक महत्व से जुड़ी नदी

3. Centro- Graphic Techniques- Histogram and Frequency Polygon / केन्द्र-ग्राफिक तकनीक- हिस्टोग्राम एवं आवृत्ति बहुभुज

Centro- Graphic Techniques- Histogram and Frequency Polygon

केन्द्र-ग्राफिक तकनीक- हिस्टोग्राम एवं आवृत्ति बहुभुज

परिचय (Introduction):

    भूगोल और सांख्यिकी में डेटा को समझने और प्रस्तुत करने के लिए विभिन्न ग्राफिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण तकनीक है Centro-Graphic Techniques, जिसका उद्देश्य आंकड़ों के वितरण (Distribution) को ग्राफ के माध्यम से स्पष्ट करना है।

इस तकनीक के अंतर्गत मुख्य रूप से हिस्टोग्राम (Histogram) और आवृत्ति बहुभुज (Frequency Polygon) का उपयोग किया जाता है। ये दोनों विधियाँ आंकड़ों के वितरण, प्रवृत्ति और फैलाव को समझने में अत्यंत उपयोगी हैं।

हिस्टोग्राम

(Histogram)

परिचय: 

     हिस्टोग्राम एक महत्वपूर्ण ग्राफिक विधि है जिसका उपयोग सांख्यिकी और भूगोल में डेटा के वितरण को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। इसमें वर्ग-अंतराल (Class Interval) को क्षैतिज अक्ष (X-axis) पर तथा आवृत्ति (Frequency) को ऊर्ध्वाधर अक्ष (Y-axis) पर दर्शाया जाता है।

    प्रत्येक वर्ग के लिए आयत (Rectangles) बनाए जाते हैं, जिनकी ऊँचाई उस वर्ग की आवृत्ति के अनुसार होती है। हिस्टोग्राम विशेष रूप से सतत श्रेणी (Continuous Series) के लिए उपयोगी होता है। इसके माध्यम से आंकड़ों के फैलाव, प्रवृत्ति तथा बहुलक का पता लगाना आसान हो जाता है, जिससे विश्लेषण सरल और प्रभावी बनता है।

परिभाषा (Definition):

   हिस्टोग्राम एक ऐसा ग्राफ है जिसमें वर्ग-अंतराल (Class Interval) को X-अक्ष पर और आवृत्ति (Frequency) को Y-अक्ष पर दर्शाया जाता है। इसमें आयताकार (Rectangles) बनाए जाते हैं, जिनकी ऊँचाई आवृत्ति के अनुसार होती है।

विशेषताएँ (Characteristics):

(i) आयताकार आकृति (Rectangular Form):-

     हिस्टोग्राम आयतों (Rectangles) से बना होता है, जहाँ प्रत्येक आयत एक वर्ग-अंतराल (Class Interval) का प्रतिनिधित्व करता है। इससे डेटा का वितरण स्पष्ट दिखाई देता है।

(ii) आयतों के बीच कोई अंतर नहीं (No Gap):-

    हिस्टोग्राम में सभी आयत आपस में जुड़े होते हैं, क्योंकि यह सतत (Continuous) श्रेणी को दर्शाता है। यह इसकी प्रमुख पहचान है।

(iii) क्षैतिज अक्ष पर वर्ग-अंतराल (X-axis):-

     X-axis पर वर्ग-अंतराल (जैसे 0–10, 10–20 आदि) दर्शाए जाते हैं, जो डेटा के समूहों को दिखाते हैं।

(iv) ऊर्ध्वाधर अक्ष पर आवृत्ति (Y-axis):-

     Y-axis पर आवृत्ति (Frequency) दर्शाई जाती है, जिससे प्रत्येक वर्ग में आने वाले मानों की संख्या पता चलती है।

(v) आयत की ऊँचाई आवृत्ति के अनुसार:-

     प्रत्येक आयत की ऊँचाई उस वर्ग की आवृत्ति के समानुपाती होती है, यानी अधिक आवृत्ति → अधिक ऊँचाई।

(vi) आयत की चौड़ाई वर्ग-अंतराल के बराबर:-

     हर आयत की चौड़ाई समान होती है, जो वर्ग-अंतराल की लंबाई को दर्शाती है।

(vii) सतत श्रेणी के लिए उपयुक्त:-

    हिस्टोग्राम मुख्यतः Continuous Series के लिए उपयोग किया जाता है, जहाँ वर्ग-अंतराल जुड़े होते हैं।

(viii) डेटा के वितरण को स्पष्ट करता है:-

    यह दिखाता है कि डेटा किस प्रकार फैला हुआ है—जैसे सममित (Symmetrical), विकृत (Skewed) आदि।

(ix) बहुलक ज्ञात करने में सहायक:-

    हिस्टोग्राम के माध्यम से बहुलक (Mode) का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।

(x) सरल एवं दृश्यात्मक प्रस्तुति:-

   यह जटिल आंकड़ों को सरल और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करता है, जिससे समझना आसान हो जाता है।

हिस्टोग्राम बनाने की विधि (Steps):

     हिस्टोग्राम बनाने के लिए निम्नलिखित चरण क्रमबद्ध तरीके से अपनाए जाते हैं:

✍️ आंकड़ों को व्यवस्थित करें

      सबसे पहले दिए गए आंकड़ों को सतत श्रेणी (Continuous Series) में व्यवस्थित करें। यदि डेटा असतत (Discrete) हो, तो उसे वर्ग-अंतराल में बदलें।

✍️ वर्ग-अंतराल (Class Interval) निर्धारित करें

    आंकड़ों को समान अंतराल वाले वर्गों (जैसे 0–10, 10–20, 20–30) में विभाजित करें। सभी वर्गों की चौड़ाई (Class Width) समान होनी चाहिए।

✍️ आवृत्ति (Frequency) ज्ञात करें

     प्रत्येक वर्ग-अंतराल में आने वाले मानों की संख्या गिनकर उनकी आवृत्ति निर्धारित करें।

✍️ अक्ष (Axes) बनाएं

  • X-अक्ष (Horizontal Axis) पर वर्ग-अंतराल अंकित करें।
  • Y-अक्ष (Vertical Axis) पर आवृत्ति (Frequency) अंकित करें।

    स्केल (Scale) का चयन इस प्रकार करें कि पूरा ग्राफ स्पष्ट और संतुलित दिखे।

✍️ आयत (Rectangles) बनाएं

    प्रत्येक वर्ग-अंतराल के लिए आयत बनाएं:

  • आयत की चौड़ाई = वर्ग-अंतराल
  • आयत की ऊँचाई = आवृत्ति

    ध्यान रखें कि सभी आयत आपस में जुड़े हों, बीच में कोई गैप न हो।

✍️ असमान वर्ग-अंतराल का समायोजन (यदि आवश्यक हो)

    यदि वर्ग-अंतराल समान नहीं हैं, तो आवृत्ति घनत्व (Frequency Density) का उपयोग करें:

Frequency Density = Frequency/Class Width

   और उसी के अनुसार आयत की ऊँचाई निर्धारित करें।

उदाहरण:

(Marks of Students)

अंक (Marks) आवृत्ति (Frequency)
0–10 5
10–20 8
20–30 12
30–40 7
40–50 3

चरण 1: अक्ष बनाना

⇒ X-अक्ष पर वर्ग-अंतराल (0–10, 10–20, …)

⇒ Y-अक्ष पर आवृत्ति (5, 8, 12, 7, 3)

चरण 2: आयत बनाना

प्रत्येक वर्ग के लिए आयत बनाएं:

0–10 → ऊँचाई = 5

10–20 → ऊँचाई = 8

20–30 → ऊँचाई = 12

30–40 → ऊँचाई = 7

40–50 → ऊँचाई = 3

नोट: सभी आयत आपस में जुड़े होंगे (कोई गैप नहीं होगा)।

चरण 3: ग्राफ की व्याख्या

⇒ सबसे अधिक आवृत्ति 20–30 वर्ग में है → यह बहुलक वर्ग (Modal Class) है।

⇒ इससे पता चलता है कि अधिकतर छात्रों के अंक 20–30 के बीच हैं।

Centro- Graphic Techniquesउपयोग (Uses):

✍️  डेटा के वितरण को समझने में

✍️  बहुलक (Mode) ज्ञात करने में

✍️  आर्थिक एवं जनसंख्या विश्लेषण में

आवृत्ति बहुभुज

(Frequency Polygon)

परिचय: 

  आवृत्ति बहुभुज एक महत्वपूर्ण ग्राफिक विधि है जिसका उपयोग सांख्यिकी और भूगोल में डेटा के वितरण को रेखीय रूप में प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। इसमें वर्ग-अंतराल के मध्य बिंदुओं (Mid-points) को X-अक्ष पर तथा उनकी आवृत्तियों को Y-अक्ष पर अंकित किया जाता है। इन बिंदुओं को सीधी रेखाओं से जोड़कर एक बहुभुज आकृति बनाई जाती है, जिसे आवृत्ति बहुभुज कहते हैं। यह विधि विशेष रूप से विभिन्न वितरणों की तुलना करने में उपयोगी होती है। इसके माध्यम से डेटा की प्रवृत्ति, फैलाव और पैटर्न को आसानी से समझा जा सकता है।

परिभाषा (Definition):

    आवृत्ति बहुभुज एक ऐसा ग्राफ है जिसमें वर्ग-अंतराल के मध्य बिंदु (Mid-point) को X-अक्ष पर तथा आवृत्ति को Y-अक्ष पर लेकर बिंदुओं को मिलाकर रेखा बनाई जाती है।

विशेषताएँ (Characteristics):

यह रेखीय ग्राफ (Line Graph) होता है।

✍️  बिंदुओं को सीधी रेखा से जोड़कर बहुभुज बनाया जाता है।

✍️  यह हिस्टोग्राम से भी बनाया जा सकता है।

✍️  दो या अधिक वितरणों की तुलना में उपयोगी होता है।

बनाने की विधि (Steps):

✍️  प्रत्येक वर्ग का मध्य बिंदु (Mid-point) निकालें।

✍️  X-अक्ष पर मध्य बिंदु और Y-अक्ष पर आवृत्ति अंकित करें।

✍️  बिंदुओं को मिलाकर रेखा बनाएं।

✍️  प्रारंभ और अंत में शून्य आवृत्ति के बिंदु जोड़ें।

उदाहरण-

(Marks of Students)

अंक (Marks) आवृत्ति (Frequency)
0–10 5
10–20 8
20–30 12
30–40 7
40–50 3

चरण 1: मध्य बिंदु (Mid-point) निकालें

वर्ग-अंतराल आवृत्ति मध्य बिंदु
0–10 5 5
10–20 8 15
20–30 12 25
30–40 7 35
40–50 3 45

चरण 2: ग्राफ बनाना

⇒ X-अक्ष पर मध्य बिंदु (5, 15, 25, 35, 45) लें

⇒ Y-अक्ष पर आवृत्ति (5, 8, 12, 7, 3) लें

⇒ सभी बिंदुओं को सीधी रेखा से जोड़ें

✍️  शुरुआत और अंत में (0,0) जैसे बिंदु जोड़कर ग्राफ को पूरा किया जाता है।

व्याख्या (Interpretation):

⇒ सबसे अधिक आवृत्ति 25 (20–30 वर्ग) पर है।

⇒ इससे पता चलता है कि अधिकतर छात्रों के अंक 20–30 के बीच हैं।

✍️  विभिन्न डेटा सेट की तुलना करने में

✍️  वितरण की प्रवृत्ति समझने में

✍️  शोध और विश्लेषण में

हिस्टोग्राम और आवृत्ति बहुभुज में अंतर (Difference):

आधार हिस्टोग्राम आवृत्ति बहुभुज
रूप आयताकार (Bars) रेखीय (Line)
डेटा सतत श्रेणी सतत व खंडित दोनों
उपयोग वितरण दिखाने में तुलना करने में
निर्माण आयत बनाकर बिंदु जोड़कर

महत्व (Importance):

✍️  ये तकनीकें डेटा को सरल और दृश्य रूप में प्रस्तुत करती हैं।

✍️  जटिल आंकड़ों को समझना आसान हो जाता है।

✍️  शोध, शिक्षा और नीति निर्माण में सहायक होती हैं।

3. Mode / बहुलक

Mode 

बहुलक

परिचय (Introduction):

     सांख्यिकी (Statistics) में केन्द्रीय प्रवृत्ति (Measures of Central Tendency) के तीन प्रमुख माप होते हैं- माध्य (Mean), माध्यिका (Median) और बहुलक (Mode)। इनमें से बहुलक वह मान होता है जो किसी आंकड़ों के समूह में सबसे अधिक बार प्रकट होता है।

    दूसरे शब्दों में, जिस मान की आवृत्ति (Frequency) सबसे अधिक होती है, वही बहुलक कहलाता है।

   बहुलक को सामान्य भाषा में सबसे सामान्य या प्रचलित मान भी कहा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कक्षा में छात्रों के जूतों के आकार (Shoe Size) में 7 सबसे अधिक बार आता है, तो 7 उस समूह का बहुलक होगा।

परिभाषा (Definition):

     बहुलक वह मान है जिसकी आवृत्ति किसी श्रेणी में सबसे अधिक होती है।

सांख्यिकीविदों के अनुसार:

“The mode is the value which occurs most frequently in a series.”

     अर्थात जिस मान की पुनरावृत्ति सबसे अधिक होती है, वही बहुलक कहलाता है।

बहुलक की विशेषताएँ (Characteristics of Mode):-

✍️ बहुलक वह मान है जो सबसे अधिक बार आता है।

✍️ यह सबसे सामान्य या प्रचलित मान को दर्शाता है।

✍️ बहुलक को ग्राफ द्वारा भी निकाला जा सकता है।

✍️ यह चरम मानों (Extreme Values) से प्रभावित नहीं होता।

✍️ कभी-कभी किसी श्रेणी में एक से अधिक बहुलक भी हो सकते हैं।

1. व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series) में बहुलक:-

   व्यक्तिगत श्रेणी में प्रत्येक मान अलग-अलग दिया होता है। इसमें बहुलक वह मान होता है जो सबसे अधिक बार दोहराया गया हो।

उदाहरण:

आंकड़े: 2, 4, 6, 6, 7, 8, 6, 9

   यहाँ 6 तीन बार आया है, जो सबसे अधिक है।

इसलिए बहुलक = 6

2. खंडित श्रेणी (Discrete Series) में बहुलक:-

   खंडित श्रेणी में मान (X) और उनकी आवृत्ति (f) दी होती है। जिस मान की आवृत्ति सबसे अधिक होती है वही बहुलक होता है।

उदाहरण:

X f
10 2
20 5
30 7
40 4

यहाँ 30 की आवृत्ति सबसे अधिक (7) है।

इसलिए बहुलक = 30

3. सतत श्रेणी (Continuous Series) में बहुलक:-

     सतत श्रेणी में बहुलक निकालने के लिए एक विशेष सूत्र का प्रयोग किया जाता है।

सूत्र (Formula)-

जहाँ

L = बहुलक वर्ग की निचली सीमा / Lower Limit of Modal Class

f₁ = बहुलक वर्ग की आवृत्ति / Frequency of Modal Class

f₀ = बहुलक वर्ग से पहले की आवृत्ति / Frequency of Class preceding the Modal Class

f₂ = बहुलक वर्ग के बाद की आवृत्ति / Frequency of Class succeeding the Modal Class

h = वर्ग अंतराल (Class Interval) / Class Interval / Class Width

नोट: बहुलक वर्ग (Modal Class)- जिस वर्ग की आवृत्ति सबसे अधिक होती है, उसे बहुलक वर्ग (Modal Class) कहा जाता है।

उदाहरण-

वर्ग आवृत्ति
0–10 5
10–20 8
20–30 12
30–40 7
यहाँ 20–30 की आवृत्ति सबसे अधिक (12) है। इसलिए 20–30 बहुलक वर्ग होगा।

L = 20 (बहुलक वर्ग की निचली सीमा)

f₁ = 12 (बहुलक वर्ग की आवृत्ति)

f₀ = 8 (पहले वाले वर्ग की आवृत्ति)

f₂ = 7 (अगले वर्ग की आवृत्ति)

h = 10 (वर्ग अंतराल)

Now,

Mode

Mode = 20+(12-8)/(2 X 12-8-7) X 10

           = 20+4/(24-15) X 10

           = 20+4/9 X10

           = 20+4.44

           = 24.44

नोट: माध्य, माध्यिका और बहुलक का संबंध:

    सांख्यिकी में एक महत्वपूर्ण संबंध होता है:

Mode = 3Median−2Mean

यह सूत्र तब उपयोगी होता है जब किसी श्रेणी में माध्य और माध्यिका ज्ञात हों।

बहुलक के गुण (Merits of Mode):-

(i) सरल और आसानी से समझने योग्य:-

      बहुलक निकालना बहुत आसान है।

(ii) चरम मानों से प्रभावित नहीं होता:-

     बहुत बड़े या छोटे मान इसका प्रभाव कम करते हैं।

(iii) व्यावहारिक महत्व:-

     व्यापार और उद्योग में इसका व्यापक उपयोग होता है।

(iv) ग्राफ द्वारा ज्ञात:-

     हिस्टोग्राम की सहायता से बहुलक निकाला जा सकता है।

(v) गुणात्मक आंकड़ों के लिए उपयोगी:-

    जहाँ संख्यात्मक औसत संभव नहीं होता, वहाँ बहुलक उपयोगी होता है।

बहुलक की सीमाएँ (Limitations of Mode):-

(i) सभी मानों पर आधारित नहीं होता:-

     यह केवल सबसे अधिक आवृत्ति वाले मान पर आधारित होता है।

(ii) कभी-कभी बहुलक स्पष्ट नहीं होता:-

    कई बार दो या अधिक बहुलक हो सकते हैं।

(iii) गणितीय विश्लेषण में कम उपयोगी:-

    आगे की गणनाओं में इसका प्रयोग सीमित होता है।

(iv) छोटे डेटा में विश्वसनीय नहीं:-

    बहुत छोटे आंकड़ों में बहुलक सही परिणाम नहीं देता।

निष्कर्ष (Conclusion):

    इस प्रकार बहुलक सांख्यिकी में केन्द्रीय प्रवृत्ति का एक महत्वपूर्ण माप है जो किसी आंकड़ों के समूह में सबसे अधिक बार आने वाले मान को दर्शाता है। यह विशेष रूप से तब उपयोगी होता है जब हमें किसी समूह का सबसे सामान्य या प्रचलित मान जानना हो। हालांकि इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं, फिर भी व्यापार, अर्थशास्त्र, शिक्षा और सामाजिक विज्ञानों में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।

     इस प्रकार बहुलक न केवल सरल और व्यावहारिक है, बल्कि यह किसी भी डेटा के सामान्य व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

2. Median / माध्यिका

Median 

माध्यिका

माध्यिका (Median):

      सांख्यिकी में केन्द्रीय प्रवृत्ति का एक महत्वपूर्ण माप है। यह वह मान होता है जो किसी व्यवस्थित (आरोही या अवरोही क्रम में रखे गए) आंकड़ों के समूह को दो बराबर भागों में विभाजित करता है। अर्थात् आधे मान माध्यिका से छोटे होते हैं और आधे मान उससे बड़े होते हैं।

      माध्यिका का उपयोग विशेष रूप से तब किया जाता है जब आंकड़ों में अत्यधिक बड़े या छोटे मान (extreme values) मौजूद हों, क्योंकि ऐसे मान औसत (Mean) को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन माध्यिका पर उनका प्रभाव कम पड़ता है। इसलिए इसे अधिक स्थिर और विश्वसनीय माप माना जाता है।

      यदि आंकड़ों की संख्या विषम (odd) हो, तो माध्यिका वह मध्य का मान होता है जो सभी मानों को क्रम में रखने पर बीच में आता है। उदाहरण के लिए: 3, 5, 7, 9, 11 में माध्यिका 7 है।

     यदि आंकड़ों की संख्या सम (even) हो, तो बीच के दो मानों का औसत माध्यिका कहलाता है। जैसे: 2, 4, 6, 8 में माध्यिका (4 + 6) / 2 = 5 होगी।

     भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र तथा जनसंख्या अध्ययन में माध्यिका का व्यापक उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए आय वितरण, जनसंख्या घनत्व या भूमि स्वामित्व के अध्ययन में माध्यिका वास्तविक स्थिति को बेहतर ढंग से दर्शाती है। इस प्रकार, माध्यिका आंकड़ों के विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण और उपयोगी सांख्यिकीय माप है।

1. व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series) में माध्यिका की गणना:

     व्यक्तिगत श्रेणी में प्रत्येक आंकड़ा अलग-अलग दिया होता है और उनकी कोई आवृत्ति (frequency) नहीं होती। ऐसे आंकड़ों में माध्यिका निकालने के लिए सबसे पहले सभी मानों को आरोही (छोटे से बड़े) या अवरोही (बड़े से छोटे) क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। इसके बाद कुल पदों की संख्या के आधार पर माध्यिका ज्ञात की जाती है।

✍️ जब पदों की संख्या विषम (Odd) हो-

     यदि कुल पदों की संख्या n विषम है, तो माध्यिका का स्थान (n+1)/2 होता है। अर्थात जो मान इस स्थान पर होगा वही माध्यिका कहलाएगा।

उदाहरण:

आंकड़े: 5, 9, 3, 7, 11

क्रम में रखने पर: 3, 5, 7, 9, 11

यहाँ n = 5

माध्यिका का स्थान = (5+1)/2 = 3

तीसरे स्थान का मान 7 है, इसलिए माध्यिका = 7।

✍️ जब पदों की संख्या सम (Even) हो-

    यदि कुल पदों की संख्या n सम है, तो माध्यिका बीच के दो पदों के औसत से निकाली जाती है।

सूत्र:

उदाहरण:

आंकड़े: 4, 8, 6, 10

क्रम में: 4, 6, 8, 10

यहाँ n=4

माध्यिका = (6 + 8) / 2 = 7।

     इस प्रकार व्यक्तिगत श्रेणी में माध्यिका निकालने की प्रक्रिया सरल होती है और यह आंकड़ों को दो बराबर भागों में विभाजित करने वाला मध्य मान दर्शाती है।

2. खंडित श्रेणी (Discrete Series) में माध्यिका की गणना:

    खंडित श्रेणी में प्रत्येक मान (Value) के साथ उसकी आवृत्ति (Frequency) दी होती है। माध्यिका ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं।

✍️ सबसे पहले कुल आवृत्ति (N) ज्ञात करें

      सभी आवृत्तियों को जोड़कर कुल आवृत्ति अर्थात् N निकालते हैं।

✍️ उसके बाद संचयी आवृत्ति (Cumulative Frequency) बनाएं

       आवृत्तियों को क्रमशः जोड़कर संचयी आवृत्ति तैयार की जाती है।

✍️ उसके बाद N/2 वाँ पद का मान निकालें

      कुल आवृत्ति को 2 से भाग देकर N/2 का मान प्राप्त करते हैं।

✍️ फिर माध्यिका का मान निर्धारित करें

      संचयी आवृत्ति में वह पहला मान खोजते हैं जो N/2 के बराबर या उससे बड़ा हो। उसी के सामने जो मान (Value) होगा वही माध्यिका कहलाता है।

उदाहरण-

मान (X) आवृत्ति (f) संचयी आवृत्ति (cf)
10 3 3
20 5 8
30 7 15
40 4 19
50 1 20

यहाँ,

N = 20

N/2 = 10

    संचयी आवृत्ति में 10 से बड़ा या बराबर पहला मान 15 है, जो 30 के सामने है।

अतः माध्यिका = 30

सूत्र-

Median = वह मान जिसकी संचयी आवृत्ति N/2 के बराबर या उससे अधिक हो।

    इस प्रकार खंडित श्रेणी में माध्यिका निकालने के लिए संचयी आवृत्ति का प्रयोग किया जाता है और यह आँकड़ों को दो बराबर भागों में विभाजित करती है।

3. सतत श्रेणी (Continuous Series) में माध्यिका की गणना:

    सतत श्रेणी में आंकड़े वर्ग-अंतराल (Class Interval) के रूप में दिए होते हैं, जैसे 0–10, 10–20, 20–30 आदि। ऐसी स्थिति में माध्यिका निकालने के लिए एक विशेष सूत्र का उपयोग किया जाता है।

चरण (Steps):-

✍️ संचयी आवृत्ति (Cumulative Frequency) तैयार करें।

     दिए गए वर्गों की आवृत्तियों को क्रम से जोड़कर संचयी आवृत्ति बनाते हैं।

✍️ कुल आवृत्ति (N) ज्ञात करें।

    सभी आवृत्तियों को जोड़कर N निकालते हैं।

✍️ N/2 का मान निकालें।

    कुल आवृत्ति को 2 से भाग देते हैं।

✍️ माध्यिका वर्ग (Median Class) पहचानें।

     संचयी आवृत्ति में वह वर्ग खोजते हैं जिसकी संचयी आवृत्ति N/2 के बराबर या उससे अधिक हो। वही माध्यिका वर्ग कहलाता है।

सूत्र-

हाँ-

M = माध्यिका मूल्य

l = माध्यिका वर्गान्तर की निचली सीमा

i = माध्यिका वर्गान्तर का विस्तार

f = माध्यिका वर्ग की आवृत्ति

c = माध्यिका वर्गान्तर से पहले वर्गान्तर की संचयी आवृति

अथवा

जहाँ-

L = माध्यिका वर्ग की निचली सीमा

N = कुल आवृत्ति

Cf = माध्यिका वर्ग से पहले की संचयी आवृत्ति

f = माध्यिका वर्ग की आवृत्ति

h = वर्ग अंतराल (class width)

उदाहरण-

1. निम्नांकित सारणी में 100 परीक्षार्थियों के प्राप्तांक दिए गये है। माध्यिका की गणना कीजिये:

प्राप्तांक परीक्षार्थियों की संख्या
0-10 06
10-20 30
20-30 40
30-40 14
40-50 10

हल:

प्राप्तांक

(वर्गान्तर)

परीक्षार्थियों की संख्या

(आवृति)

 संचयी आवृति
0-10 06 06
10-20 30 36
20-30 40 76
30-40 14 90
40-50 10 100

m = N/2 वाँ वार्गांतर

      = 100/2

      = 50 वाँ वार्गांतर

माध्यिका वार्गांतर = 20-30

Now,

      = 20+10/40 (50-36)

      = 20+(10×40)/40

      = 20+140/40

      = (800+400)/40

      = 940/40

  माध्यिका प्राप्तांक = 23.5

माध्यिका के गुण (Merits of Median)

(i) सरल और समझने में आसान:

       माध्यिका निकालने की विधि बहुत सरल होती है और इसे आसानी से समझा जा सकता है।

(ii) चरम मानों से प्रभावित नहीं होती:

     बहुत अधिक या बहुत कम मान (Extreme Values) माध्यिका को अधिक प्रभावित नहीं करते।

(iii) क्रमबद्ध आंकड़ों के लिए उपयुक्त:

    जब आंकड़े क्रम (order) में हों तो माध्यिका आसानी से निकाली जा सकती है।

(iv) खुले वर्ग अंतराल (Open-end classes) में भी उपयोगी:

    सतत श्रेणी में जहाँ वर्ग अंतराल खुले होते हैं, वहाँ भी माध्यिका निकाली जा सकती है।

(v) ग्राफ द्वारा भी ज्ञात: ओजाइव (Ogive Curve) की सहायता से भी माध्यिका का मान निकाला जा सकता है।

माध्यिका की सीमाएँ (Limitations of Median)

(i) सभी मानों पर आधारित नहीं होती:

     माध्यिका केवल मध्य मान पर आधारित होती है, इसलिए सभी आंकड़ों का पूरा उपयोग नहीं होता।

(ii) गणितीय विश्लेषण में कम उपयोगी:

    माध्यिका पर आगे के गणितीय विश्लेषण करना कठिन होता है।

(iii) अधिक सटीक नहीं मानी जाती:

    कई बार यह औसत (Mean) जितनी सटीक जानकारी नहीं देती।

(iv) क्रमबद्ध करना आवश्यक:

    माध्यिका निकालने से पहले आंकड़ों को क्रम में रखना जरूरी होता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

    माध्यिका सांख्यिकी में केन्द्रीय प्रवृत्ति का एक महत्वपूर्ण माप है। यह विशेष रूप से तब उपयोगी होती है जब आंकड़ों में बहुत अधिक या बहुत कम मान मौजूद हों। हालांकि इसके कुछ सीमित पक्ष भी हैं, फिर भी आय वितरण, जनसंख्या अध्ययन और सामाजिक विज्ञानों में वास्तविक स्थिति को समझने के लिए माध्यिका का व्यापक उपयोग किया जाता है।

1. Measurement of Central Tendency (केन्द्रीय प्रवृत्ति  की माप) : Mean (माध्य)

Measurement of Central Tendency

(केन्द्रीय प्रवृत्ति  की माप) : Mean (माध्य)



परिचय:

   केन्द्रीय प्रवृत्ति (Central Tendency) सांख्यिकी का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसके माध्यम से किसी भी आँकड़ा-समूह (data set) का प्रतिनिधि या केंद्रीय मान ज्ञात किया जाता है। सरल शब्दों में, यह बताता है कि दिए गए आंकड़ों का “मध्य” या “औसत” मान क्या है, जिसके आसपास अधिकांश मान केंद्रित होते हैं।

जब किसी क्षेत्र, जनसंख्या, तापमान, वर्षा या उत्पादन आदि से संबंधित बहुत सारे आँकड़े एकत्र किए जाते हैं, तो उन्हें समझना कठिन हो सकता है। ऐसे में केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप उन सभी मानों को एक संक्षिप्त और अर्थपूर्ण रूप में प्रस्तुत करता है।

केन्द्रीय प्रवृत्ति के तीन मुख्य माप हैं-

1. माध्य (Mean) सभी मानों का औसत।

2. माध्यिका (Median) मध्य का मान।

3. बहुलक (Mode) सर्वाधिक बार आने वाला मान।

     भूगोल में केन्द्रीय प्रवृत्ति का उपयोग औसत तापमान, औसत वर्षा, जनसंख्या घनत्व, साक्षरता दर आदि के अध्ययन में किया जाता है। यह क्षेत्रीय तुलना, विकास स्तर के विश्लेषण तथा प्रवृत्तियों को समझने में अत्यंत सहायक है।

     इस प्रकार, केन्द्रीय प्रवृत्ति जटिल आँकड़ों को सरल और सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करने का एक प्रभावी साधन है।

माध्य (Mean) :

      माध्य वह मान है जो किसी चर राशि के सभी मानों के कुल योग को उनकी संख्या से विभाजित करने पर प्राप्त होता है। इसे सामान्य भाषा में औसत (Average) भी कहा जाता है। इसे अंकगणितीय माध्य या समान्तर माध्य भी कहते हैं।

Croxton & Cowden के अनुसार–  “औसत समंकों के विस्तार के अंतर्गत स्थित एक ऐसा मान है जिसका प्रयोग श्रेणी के सभी मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाता है।”

       किसी समंक श्रेणी के विस्तार के मध्य में स्थित होने के कारण औसत को केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप भी कहा जाता है। औसत या माध्य का सांख्यिकी में विशेष महत्व है। डा. एल. एल. बाउले ने सांख्यिकी को ‘माध्यों’ का विज्ञान’ कहकर संबोधित किया है।

समान्तर माध्य या औसत की गणना :

       समान्तर माध्य की गणना करने हेतु निम्नलिखित दो विधियाँ होती हैं-

(1) प्रत्यक्ष विधि: जब किसी समंक श्रेणी में पद-मूल्यों की संख्या कम हो तथा उनके मान दशमलव में न हो तो इस विधि का प्रयोग श्रेयस्कर होता है। इस विधि द्वारा माध्य ज्ञात करने के निम्नलिखित सूत्र हैं:

(i) व्यक्तिगत श्रेणी x̄ = ΣΧ/ N

(ii) खण्डित श्रेणी x̄ = ΣfΧ /N

(iii) अखण्डित श्रेणी x̄ = ΣfΧ /N

जहाँ, x̄ = समान्तर माध्य या औसत,

ΣΧ = पद-मूल्यों का योग

ΣfX = वर्गान्तरों के मध्य मूल्यों तथा आवृत्तियों के गुणनफलों का योग

N = पदों की कुल संख्या

(2) लघु विधि : इस विधि का प्रयोग उस समय करने में सरलता होती है जब समंक-श्रेणी में पद मूल्य अधिक हों तथा उनके मानों में अधिक अंतर न हो। इस विधि में सर्वप्रथम कल्पित माध्य चुन लेते हैं तत्पश्चात् इस कल्पित माध्य से पद-मूल्यों का विचलन ज्ञात कर निम्न सूत्रों का प्रयोग करते हैं-

Measurement of Central Tendencyजहाँ, 

x̄  = माध्य

A = कल्पित माध्य

N = पदों की संख्या

ΣdX = कल्पित माध्य से विचलनों का योग

ΣfdX = आवृत्तियों तथा विचलनों के गुणनफलों का योग

(1) व्यक्तिगत श्रेणी में समान्तर माध्य की गणना :

उदाहरण (1) : किसी कारखाने के 10 श्रमिकों के मासिक वेतनों के आधार पर समान्तर माध्य की गणना कीजिए-

   हल: (a) प्रत्यक्ष विधि:

श्रमिक  मासिक वेतन (रु०)
A 840
B 860
C 855
D 880
E 890
F 905
G 945
H 960
I 925
J 980
N = 10 ΣX = 9040

x̄ = ΣΧ/ N

    = 9040/10

    = 904 रु०

(b) लघु विधि:

    माना कि कल्पित माध्य = 890

श्रमिक

 मासिक वेतन (रु०)

X

 कल्पित माध्य (A  = 890)  से विचलन

अर्थात् X-A 

dX

A 840  840-890=-50
B 860 860-890 = -30
C 855 855-890 = -35
D 880 880-890 = -10
E 890 890-890 = 0
F 905 905-890 = +15
G 945 945-890 = +55
H 960 960-890 = +70
I 925 925-890 = +35
J 980 980-890 = +90
N = 10 ΣdX = +140

x̄  = A+ΣdX/N

     = 890+140/10

      = 9040/10

       = 904

∴ वेतनों का समांतर माध्य = 904 रु०। 

(2) खंडित (Discrete) श्रेणी में समान्तर माध्य की गणना :

उदाहरण (1) : निम्नलिखित आंकड़ों  से माध्य की गणना कीजिए-

   हल: (a) प्रत्यक्ष विधि:

प्राप्तांक

(X)

आवृति

(f)

fx
70 13 910
73 15 1095
75 19 1425
78 23 1794
81 31 2511
85 34 2890
87 18 1566
90 17 1530
92 16 1472
94 14 1316
N = Σf = 200 Σfx = 16509

x̄ = Σfx/ N

    = 16509/200

     = 82.545

 हल: (b) लघु विधि:

  माना कि कल्पित माध्य = A = 81

प्राप्तांक

(X)

आवृति

(f)

X-A = dx fdx
70 13 70-81 = -11 -143 
73 15 73-81 = -8  -120
75 19 75-81 = -6  -114
78 23 78-81 = -3  -69
81 31 81-81 = 0  0
85 34 85-81 = +4  +136
87 18 87-81 = +6  +108
90 17 90-81 = +9  +153
92 16 92-81 = +11  +176
94 14 94-81 = +13  +182
N = Σf = 200 Σfdx = 309 

x̄ = A+ Σfdx/ N

    = 81+309/200

    = 81+1.545

     = 82.545

(3) अविच्छिन्न या अखंडित (Continuous) श्रेणी में समान्तर माध्य की गणना :

उदाहरण (1) : निम्नलिखित आंकड़ों  से समान्तर माध्य की गणना कीजिए-

वर्गान्तर बारंबारता
0-10 10
10-20 12
20-30 15
30-40 17
40-50 20
50-60 16
60-70 12
70-80 8
80-90 7
90-100 3

   हल: (a) प्रत्यक्ष विधि:

वर्गान्तर मध्यमान (Mid Value) बारंबारता या आवृति आवृति X मध्यमान
  (x) (f) (fx)
0-10 5 10 50
10-20 15 12 180
20-30 25 15 375
30-40 35 17 595
40-50 45 20 900
50-60 55 16 880
60-70 65 12 780
70-80 75 8 600
80-90 85 7 595
90-100 95 3 285
Σf या N = 120 Σfx = 5240

x̄ = Σfx/ N 

    = 5240/120

    = 43.666

    = 43.67

 हल: (b) लघु विधि:

  माना कि कल्पित माध्य = A = 45

वर्गान्तर मध्यमान (Mid Value) बारंबारता या आवृति x-A = विचलन fdx
  (x) (f) dx
0-10 5 10 5-45 = -40 -400
10-20 15 12 15-45 = -30 -360
20-30 25 15 25-45 = -20 -300
30-40 35 17 30-45 = -10 -170
40-50 45 20 45-45 = 0 0
50-60 55 16 55-45= +10 +160
60-70 65 12 65-45 = +20 +240
70-80 75 8 75-45 =+30 +240
80-90 85 7 85-45 =+40 +280
90-100 95 3 95-45 =+50 +150
Σf या N = 120 Σfdx = -160

x̄ = A+ Σfdx/ N

    = 45+(-160)/120

     = 5240/120

     = 43.666  

Mean के गुण (Merits):

     माध्य (Mean) सांख्यिकी में केन्द्रीय प्रवृत्ति का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला माप है। इसे सामान्यतः अंकगणितीय माध्य (Arithmetic Mean) कहा जाता है। यह किसी भी आँकड़ों के समूह का औसत मान बताता है और पूरे डेटा का प्रतिनिधित्व करता है। माध्य के कई महत्वपूर्ण गुण होते हैं, जिनके कारण इसका उपयोग शिक्षा, अर्थशास्त्र, भूगोल तथा अन्य सामाजिक विज्ञानों में व्यापक रूप से किया जाता है।

(i) सरलता (Simplicity):-

     माध्य की गणना करना बहुत सरल होता है। सभी प्रेक्षणों (observations) का योग करके उन्हें कुल प्रेक्षणों की संख्या से विभाजित कर दिया जाता है। इसलिए इसे समझना और उपयोग करना आसान होता है।

(ii) सभी मानों का उपयोग (Based on All Observations):-

      माध्य की गणना में डेटा के प्रत्येक मान का उपयोग होता है। इसलिए यह पूरे डेटा का सही प्रतिनिधित्व करता है और अधिक विश्वसनीय परिणाम देता है।

(iii) निश्चित एवं स्पष्ट (Definite and Rigidly Defined):-

    माध्य का मान निश्चित होता है और इसे एक ही तरीके से निकाला जाता है। अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा गणना करने पर भी परिणाम समान ही आता है।

(iv) बीजगणितीय उपयोगिता (Algebraic Treatment):-

    माध्य का उपयोग विभिन्न गणितीय और सांख्यिकीय विश्लेषणों में आसानी से किया जा सकता है। जैसे– विचलन (Deviation), मानक विचलन (Standard Deviation) और सहसंबंध (Correlation) आदि की गणना में माध्य का प्रयोग किया जाता है।

(v) तुलनात्मक अध्ययन में उपयोगी (Useful for Comparison):-

    माध्य के माध्यम से विभिन्न समूहों या क्षेत्रों के आँकड़ों की तुलना करना आसान हो जाता है। उदाहरण के लिए, किसी कक्षा के छात्रों के औसत अंक निकालकर उनकी उपलब्धि का आकलन किया जा सकता है।

(vi) स्थिरता (Stability):-

    माध्य अपेक्षाकृत स्थिर माप है और छोटे-मोटे परिवर्तन से बहुत अधिक प्रभावित नहीं होता। इसलिए इसे दीर्घकालिक विश्लेषण में भी उपयोगी माना जाता है।    

Mean की सीमाएँ (Demerits):

(i) चरम मानों (Extreme Values) का प्रभाव:-

   माध्य पर बहुत बड़े या बहुत छोटे मानों का अधिक प्रभाव पड़ता है। यदि किसी डेटा में अत्यधिक बड़ा या छोटा मान हो, तो माध्य वास्तविक स्थिति को सही तरीके से प्रदर्शित नहीं करता।

(ii) प्रतिनिधित्व की कमी:-

     कई बार माध्य पूरे डेटा का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता। विशेषकर तब, जब आंकड़ों में बहुत अधिक असमानता या फैलाव (dispersion) हो।

(iii) गुणात्मक तथ्यों के लिए अनुपयुक्त:-

    माध्य का उपयोग केवल संख्यात्मक (quantitative) डेटा के लिए किया जा सकता है। गुणात्मक (qualitative) डेटा जैसे रंग, लिंग, धर्म आदि के लिए माध्य का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

(iv) अधूरे आंकड़ों में उपयोग कठिन:-

     यदि डेटा अधूरा हो या कुछ मान उपलब्ध न हों, तो माध्य निकालना कठिन हो जाता है।

(v) व्यावहारिक रूप से हमेशा संभव नहीं:-

    कुछ परिस्थितियों में माध्य का मान भौतिक रूप से संभव नहीं होता। जैसे यदि किसी परिवार में औसत बच्चों की संख्या 2.4 निकले, तो वास्तविकता में ऐसा संभव नहीं है।

(vi) सभी मानों का ज्ञान आवश्यक:-

    माध्य निकालने के लिए सभी मानों का ज्ञात होना आवश्यक है। यदि कोई मान छूट जाए, तो परिणाम गलत हो सकता है।

(vii) ग्राफिकल विधि से नहीं निकाला जा सकता:-

     माध्य को सीधे ग्राफ से नहीं निकाला जा सकता, जबकि कुछ अन्य माप जैसे माध्यिका (Median) ग्राफ से भी प्राप्त की जा सकती है।

(viii) खुले वर्ग अंतराल (Open-ended classes) में कठिनाई:-

   जब वर्ग अंतराल खुले हों (जैसे 50 से कम या 100 से अधिक), तब माध्य निकालना कठिन हो जाता है।

भूगोल में व्यावहारिक उपयोग:

     भूगोल का व्यावहारिक उपयोग मानव जीवन के अनेक क्षेत्रों में होता है। यह प्राकृतिक संसाधनों के सही उपयोग, पर्यावरण संरक्षण तथा क्षेत्रीय योजना बनाने में सहायक होता है। भूगोल की सहायता से मौसम पूर्वानुमान, कृषि योजना, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसे कार्य किए जाते हैं। परिवहन, संचार और शहरी विकास की योजनाओं में भी भूगोल का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके अलावा उद्योगों की स्थापना, जनसंख्या वितरण तथा भूमि उपयोग के अध्ययन में भी भूगोल उपयोगी सिद्ध होता है। इस प्रकार भूगोल मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने तथा सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

निष्कर्ष:

     भूगोल में माध्य (Mean) सांख्यिकीय विश्लेषण का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह किसी क्षेत्र की जलवायु, जनसंख्या, कृषि उत्पादन आदि के औसत स्तर को समझने में सहायता करता है। हालाँकि, असामान्य मानों की स्थिति में केवल Mean पर निर्भर रहना उचित नहीं है; Median एवं Mode का भी उपयोग आवश्यक है।

2. माध्यिका (Median) 

3. बहुलक (Mode)

Measure of Central Tendency (केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप) से संबंधित 30+ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, MCQs एवं परीक्षा उपयोगी नोट्स – NET/JRF, Pre-PhD, Assistant Professor, BPSC एवं PG विद्यार्थियों के लिए।


1. केंद्रीय प्रवृत्ति (Central Tendency) का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(A) डेटा के मध्य मान को दर्शाना (To represent the central value of data)

(B) डेटा को बढ़ाना (To increase data)

(C) डेटा को हटाना (To remove data)

(D) डेटा को विभाजित करना (To divide data)

[read more] (A) डेटा के मध्य मान को दर्शाना (To represent the central value of data) [/read]

2. निम्नलिखित में कौन केंद्रीय प्रवृत्ति का माप नहीं है?

(A) Mean

(B) Median

(C) Mode

(D) Standard Deviation

[read more] (D) Standard Deviation [/read]

3. यदि डेटा में अत्यधिक चरम मान (Extreme Values) हों, तो कौन-सा माप सबसे उपयुक्त है?

(A) Mean

(B) Median

(C) Mode

(D) Harmonic Mean

[read more] (B) Median [/read]

4. Arithmetic Mean को और किस नाम से जाना जाता है?

(A) Average

(B) Quartile

(C) Variance

(D) Range

[read more] (A) Average [/read]

5. कौन-सा केंद्रीय प्रवृत्ति का माप गुणात्मक (Qualitative) डेटा के लिए सबसे उपयुक्त है?

(A) Mean

(B) Median

(C) Mode

(D) Geometric Mean

[read more] (C) Mode [/read]

6. यदि सभी प्रेक्षण (Observations) समान हों, तो Mean, Median और Mode होंगे-

(A) समान (Equal)

(B) अलग-अलग (Different)

(C) केवल Mean और Median समान

(D) कोई नहीं

[read more] (A) समान (Equal) [/read]

7. खुली वर्ग सीमाओं (Open-ended Class Interval) में कौन-सा माप अधिक उपयुक्त है?

(A) Mean

(B) Median

(C) Mode

(D) Harmonic Mean

[read more] (B) Median [/read]

8. सबसे अधिक बार आने वाला मान कहलाता है-

(A) Mean

(B) Median

(C) Mode

(D) Range

[read more] (C) Mode [/read]

9. Geometric Mean का प्रमुख उपयोग किसमें होता है?

(A) Growth Rate

(B) Age

(C) Height

(D) Weight

[read more] (A) Growth Rate [/read]

10. Harmonic Mean का प्रयोग मुख्यतः किसके लिए किया जाता है?

(A) Average Speed

(B) Rainfall

(C) Population

(D) Temperature

[read more] (A) Average Speed [/read]

11. यदि Mean = Median = Mode हो, तो वितरण (Distribution) होगा-

(A) Positively Skewed

(B) Negatively Skewed

(C) Symmetrical

(D) Bimodal

[read more] (C) Symmetrical [/read]

12. किस माप पर Extreme Values का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है?

(A) Median

(B) Mode

(C) Mean

(D) Quartile

[read more] (C) Mean [/read]

13. यदि सभी मानों में 10 जोड़ दिया जाए, तो Mean होगा-

(A) 10 बढ़ जाएगा

(B) 10 घट जाएगा

(C) अपरिवर्तित रहेगा

(D) शून्य हो जाएगा

[read more] (A) 10 बढ़ जाएगा [/read]

14. यदि सभी मानों को 5 से गुणा किया जाए, तो Mean होगा-

(A) 5 गुना

(B) आधा

(C) समान

(D) शून्य

[read more] (A) 5 गुना [/read]

15. निम्न में कौन-सा संबंध सही है?

(A) Mean ≥ Median ≥ Mode

(B) Mode ≥ Mean ≥ Median

(C) Mean = Range

(D) Median = Variance

[read more] (A) Mean ≥ Median ≥ Mode [/read]

Answer: (A) (Positively Skewed Distribution)

16. किस केंद्रीय प्रवृत्ति माप की गणना सबसे सरल है?

(A) Arithmetic Mean

(B) Harmonic Mean

(C) Geometric Mean

(D) Weighted Mean

[read more] (A) Arithmetic Mean [/read]

17. यदि किसी डेटा में दो Mode हों, तो वह कहलाता है-

(A) Unimodal

(B) Bimodal

(C) Trimodal

(D) Uniform

[read more] (B) Bimodal [/read]

18. सबसे स्थिर (Stable) केंद्रीय प्रवृत्ति का माप कौन-सा है?

(A) Arithmetic Mean

(B) Mode

(C) Median

(D) Range

[read more] (A) Arithmetic Mean [/read]

19. कौन-सा Mean हमेशा Arithmetic Mean से कम या उसके बराबर होता है?

(A) Geometric Mean

(B) Harmonic Mean

(C) दोनों (A) एवं (B)

(D) Median

[read more] (C) दोनों (A) एवं (B) [/read]

20. यदि डेटा अत्यधिक विकृत (Highly Skewed) हो, तो सबसे उपयुक्त माप होगा-

(A) Mean

(B) Median

(C) Mode

(D) Geometric Mean

[read more] (B) Median [/read]

21. यदि Mean = 40 तथा 10 प्रेक्षण हैं, तो कुल योग होगा-

(A) 400

(B) 40

(C) 50

(D) 500

[read more] (A) 400 [/read]

22. किसी डेटा का Mean 25 है। यदि प्रत्येक मान में 5 घटा दिया जाए, तो नया Mean होगा-

(A) 30

(B) 25

(C) 20

(D) 15

[read more] (C) 20 [/read]

23. यदि Mean > Median > Mode, तो वितरण होगा-

(A) Positively Skewed/धनात्मक विकृत

(B) Negatively Skewed

(C) Symmetrical

(D) Uniform

[read more] (A) Positively Skewed [/read]

24. Median निकालने के लिए डेटा का होना आवश्यक है-

(A) Ordered

(B) Random

(C) Grouped only

(D) None

[read more] (A) Ordered [/read]

25. किस स्थिति में Mode अस्तित्व में नहीं भी हो सकता है?

(A) सभी मान अलग-अलग हों

(B) सभी मान समान हों

(C) केवल दो मान हों

(D) सभी धनात्मक हों

[read more] (A) सभी मान अलग-अलग हों [/read]

26. यदि किसी डेटा का Mean = 20 है तथा प्रत्येक मान को दोगुना कर दिया जाए, तो नया Mean होगा-

(A) 20

(B) 30

(C) 40

(D) 10

[read more] (C) 40 [/read]

27. निम्न में कौन-सा कथन सही है?

(A) Mean हमेशा डेटा का वास्तविक मान होता है।

(B) Median पर Extreme Values का प्रभाव कम पड़ता है।

(C) Mode केवल Continuous Data में प्रयुक्त होता है।

(D) Mean कभी दशमलव में नहीं आता।

[read more] (B) Median पर Extreme Values का प्रभाव कम पड़ता है। [/read]

28. यदि किसी वितरण में Mean = Median = Mode = 50, तो वितरण होगा-

(A) Symmetrical

(B) Positively Skewed

(C) Negatively Skewed

(D) Irregular

[read more] (A) Symmetrical [/read]

29. Weighted Mean का उपयोग कब किया जाता है?

(A) जब सभी मानों का समान महत्व हो

(B) जब विभिन्न मानों का भार (Weight) अलग-अलग हो

(C) केवल Nominal Data में

(D) केवल Median निकालने में

[read more] (B) जब विभिन्न मानों का भार (Weight) अलग-अलग हो [/read]

30. निम्न में कौन-सा कथन गलत (Incorrect) है?

(A) Mean सभी प्रेक्षणों पर आधारित होता है।

(B) Median डेटा के मध्य मान को दर्शाता है।

(C) Mode सबसे कम बार आने वाला मान है।

(D) Arithmetic Mean केंद्रीय प्रवृत्ति का सबसे अधिक प्रयुक्त माप है।

[read more] (C) Mode सबसे कम बार आने वाला मान है। [/read]

41. Significance of Statistical Methods in Geography/भूगोल में सांख्यिकीय विधियों का महत्व

Significance of Statistical Methods in Geography

(भूगोल में सांख्यिकीय विधियों का महत्व)

Significance of Statistical Methodsपरिचय:

       भूगोल एक समन्वयात्मक विज्ञान है, जो प्राकृतिक तथा मानव निर्मित दोनों प्रकार की घटनाओं का अध्ययन करता है। आधुनिक भूगोल केवल वर्णनात्मक (descriptive) विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक विश्लेषणात्मक, मात्रात्मक और वैज्ञानिक अनुशासन बन चुका है। इसी परिवर्तन के साथ सांख्यिकीय विधियों (Statistical Methods) का महत्व भूगोल में अत्यधिक बढ़ गया है।

        सांख्यिकी भूगोल को मात्रात्मक आधार प्रदान करती है, जिससे भौगोलिक तथ्यों का मापन, वर्गीकरण, विश्लेषण और तुलनात्मक अध्ययन संभव होता है। जनसंख्या, जलवायु, कृषि, उद्योग, परिवहन, नगरीकरण, संसाधन वितरण आदि सभी क्षेत्रों में सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग अनिवार्य हो गया है।

सांख्यिकी और भूगोल का संबंध:

      सांख्यिकी और भूगोल के बीच घनिष्ठ एवं पूरक संबंध है। भूगोल प्राकृतिक तथा मानव निर्मित घटनाओं का स्थानिक और कालिक अध्ययन करता है, जबकि सांख्यिकी इन घटनाओं से संबंधित आंकड़ों के संग्रह, वर्गीकरण, विश्लेषण एवं व्याख्या की वैज्ञानिक विधि प्रदान करती है।

      जनसंख्या वितरण, वर्षा, तापमान, कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास एवं नगरीकरण जैसे भौगोलिक तथ्यों को समझने में सांख्यिकी अत्यंत सहायक है। सांख्यिकीय विधियों के माध्यम से भौगोलिक पैटर्न, क्षेत्रीय असमानता तथा कारण–परिणाम संबंधों का स्पष्ट विश्लेषण संभव होता है। इस प्रकार सांख्यिकी भूगोल को वैज्ञानिक, वस्तुनिष्ठ एवं विश्लेषणात्मक आधार प्रदान करती है।

भूगोल में सांख्यिकीय विधियों के प्रयोग के कारण:

     भूगोल में सांख्यिकी के प्रयोग के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

(i) भौगोलिक तथ्यों की विशाल मात्रा

(ii) क्षेत्रीय विविधता और जटिलता

(iii) तुलनात्मक अध्ययन की आवश्यकता

(iv) पूर्वानुमान (forecasting) की मांग

(v) नीति निर्माण और योजना में उपयोग

भूगोल में सांख्यिकीय विधियों का महत्व:

    यह स्पष्ट है कि सांख्यिकीय विधियाँ आधुनिक भूगोल की आधारशिला हैं। इनके बिना भूगोल न तो वैज्ञानिक बन सकता है और न ही व्यावहारिक। इसलिए भूगोल के अध्ययन में सांख्यिकी का महत्व अत्यंत व्यापक और अनिवार्य है। इसके महत्व निम्नलिखित है-

(i) भूगोल को वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करना:-

        सांख्यिकीय विधियाँ भूगोल को केवल वर्णनात्मक विषय न बनाकर वैज्ञानिक, वस्तुनिष्ठ और विश्लेषणात्मक अनुशासन बनाती हैं। इनके माध्यम से भौगोलिक तथ्यों का मात्रात्मक विश्लेषण संभव होता है।

(ii) भौगोलिक आंकड़ों के संग्रह और संगठन में सहायता:-

       भूगोल में विशाल मात्रा में आंकड़े प्राप्त होते हैं, जैसे- जनगणना, जलवायु, कृषि, उद्योग आदि। सांख्यिकीय विधियाँ इन आंकड़ों के संग्रह, वर्गीकरण और सारणीकरण को सरल और व्यवस्थित बनाती हैं।

(iii) क्षेत्रीय विविधता एवं असमानता की व्याख्या:-

      भूगोल का मूल उद्देश्य क्षेत्रीय अंतर को समझना है। सांख्यिकी की सहायता से क्षेत्रीय असमानता, विविधता और वितरण पैटर्न का स्पष्ट विश्लेषण किया जाता है।

(iv) तुलनात्मक अध्ययन में उपयोगिता:-

      सांख्यिकीय विधियाँ विभिन्न क्षेत्रों, देशों एवं समयावधियों के बीच तुलनात्मक अध्ययन को संभव बनाती हैं, जैसे—राज्यों की जनसंख्या घनत्व, विकास स्तर, साक्षरता दर आदि।

(v) कारण-परिणाम संबंध की व्याख्या:-

      भूगोल में केवल तथ्यों का वर्णन नहीं, बल्कि उनके कारण और परिणाम की व्याख्या भी आवश्यक है। सहसंबंध एवं प्रतिगमन जैसी सांख्यिकीय तकनीकें इन संबंधों को स्पष्ट करती हैं।

(vi) प्रवृत्ति विश्लेषण और पूर्वानुमान:-

       जनसंख्या वृद्धि, नगरीकरण, जलवायु परिवर्तन आदि के अध्ययन में सांख्यिकी द्वारा प्रवृत्तियों (Trends) का विश्लेषण तथा भविष्य के लिए पूर्वानुमान लगाया जाता है।

(vii) मानचित्रण (Cartography) में महत्व:-

       विषयगत मानचित्रों जैसे- कोरॉप्लेथ, डॉट, आइसोप्लिथ मानचित्रों के निर्माण में सांख्यिकीय आंकड़े अनिवार्य होते हैं। इससे भौगोलिक तथ्यों की दृश्यात्मक प्रस्तुति संभव होती है।

(viii) भौतिक भूगोल में योगदान:-

       तापमान, वर्षा, नदी प्रवाह, भूकंप, सूखा आदि के अध्ययन में सांख्यिकी द्वारा औसत, विचलन और परिवर्तनशीलता का विश्लेषण किया जाता है।

(ix) मानव भूगोल में उपयोग:-

       जनसंख्या, बस्ती, आर्थिक गतिविधियाँ, परिवहन आदि मानव भूगोल के सभी पक्ष सांख्यिकीय मापों पर आधारित होते हैं, जिससे मानव–पर्यावरण संबंधों की स्पष्ट समझ मिलती है।

(x) योजना निर्माण एवं नीति निर्धारण में सहायता:-

        क्षेत्रीय योजना, शहरी विकास, संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रबंधन में सांख्यिकीय विश्लेषण वैज्ञानिक निर्णय लेने में सहायक होता है।

(xi) अनुसंधान एवं मात्रात्मक क्रांति का आधार:-

       भूगोल में आई मात्रात्मक क्रांति का मूल आधार सांख्यिकी है। शोध, परिकल्पना परीक्षण और मॉडल निर्माण में इसका विशेष महत्व है।

भूगोल में प्रयुक्त प्रमुख सांख्यिकीय विधियाँ: 

      भूगोल में सांख्यिकीय विधियाँ भौगोलिक तथ्यों के मापन, विश्लेषण और व्याख्या के लिए प्रयोग की जाती हैं। प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं-

(i) केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप (Measures of Central Tendency):-

    इनमें औसत (Mean), माध्यिका (Median) तथा बहुलक (Mode) शामिल हैं। इनका उपयोग किसी क्षेत्र की सामान्य स्थिति को समझने के लिए किया जाता है, जैसे औसत वर्षा, औसत तापमान या औसत जनसंख्या घनत्व।

(ii) विचलन के माप (Measures of Dispersion):-

    इनमें परास (Range), मानक विचलन (Standard Deviation) तथा परिवर्तन गुणांक (Coefficient of Variation) प्रमुख हैं। ये किसी भौगोलिक घटना में असमानता और परिवर्तनशीलता को स्पष्ट करते हैं, जैसे वर्षा की अस्थिरता।

(iii) सहसंबंध विश्लेषण (Correlation Analysis):-

    इसका प्रयोग दो भौगोलिक चरों के बीच संबंध की दिशा और तीव्रता जानने के लिए किया जाता है, जैसे वर्षा और फसल उत्पादन के बीच संबंध।

(iv) प्रतिगमन विश्लेषण (Regression Analysis):-

     यह कारण-परिणाम संबंध की व्याख्या तथा पूर्वानुमान में सहायक है, जैसे जनसंख्या वृद्धि के आधार पर शहरी विस्तार का अनुमान।

(v) समय श्रेणी विश्लेषण (Time Series Analysis):-

    इसका उपयोग समय के साथ होने वाले परिवर्तनों और प्रवृत्तियों के अध्ययन में किया जाता है, जैसे दशकों में तापमान या जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्ति।

(vi) सूचकांक संख्या (Index Numbers):-

     ये तुलनात्मक अध्ययन के लिए प्रयुक्त होते हैं, जैसे जीवन स्तर, कृषि उत्पादन या औद्योगिक विकास सूचकांक।

(vii) संभाव्यता एवं नमूना विधियाँ (Probability and Sampling Techniques):-

    सीमित आंकड़ों के आधार पर निष्कर्ष निकालने और भौगोलिक अनुसंधान को वैज्ञानिक बनाने में इनका महत्वपूर्ण स्थान है।

सीमाएँ (Limitations):

      यद्यपि सांख्यिकीय विधियाँ भूगोल को वैज्ञानिक, विश्लेषणात्मक एवं मात्रात्मक आधार प्रदान करती हैं, फिर भी इनकी कुछ व्यावहारिक और सैद्धांतिक सीमाएँ हैं। इन सीमाओं को समझना आवश्यक है ताकि सांख्यिकी का प्रयोग संतुलित एवं विवेकपूर्ण ढंग से किया जा सके।

✍️ सांख्यिकीय निष्कर्ष पूर्णतः आंकड़ों की गुणवत्ता पर निर्भर करते हैं।

✍️ मानवीय व्यवहार, संस्कृति और भावनाओं को संख्याओं में व्यक्त करना कठिन है।

✍️ अति-मात्रात्मकता से भूगोल का मानवीय पक्ष उपेक्षित हो सकता है।

✍️ अपूर्ण या गलत आंकड़े भ्रामक निष्कर्ष दे सकते हैं।

✍️ सांख्यिकीय विधियाँ सामान्यीकरण पर आधारित होती हैं, जिससे स्थानीय विशेषताएँ छूट सकती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

       निष्कर्षतः भूगोल में सांख्यिकीय विधियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। ये भौगोलिक तथ्यों को वैज्ञानिक, वस्तुनिष्ठ एवं विश्लेषणात्मक रूप प्रदान करती हैं। सांख्यिकी के माध्यम से आंकड़ों का संग्रह, वर्गीकरण, तुलनात्मक अध्ययन तथा कारण-परिणाम संबंध की व्याख्या संभव हो पाती है।

    आधुनिक भूगोल में क्षेत्रीय योजना, पूर्वानुमान, शोध एवं नीति निर्माण के लिए सांख्यिकीय विधियाँ अनिवार्य हो चुकी हैं। इनके बिना भूगोल का आधुनिक, व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक स्वरूप अधूरा माना जाएगा।

2. Quartile Deviation (चतुर्थक विचलन)

Quartile Deviation

(चतुर्थक विचलन)



परिचय

     चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) अपसरण का एक महत्वपूर्ण माप है, जो किसी वितरण के मध्य 50% आँकड़ों के फैलाव को दर्शाता है।

     Quartile Deviation is an important measure of dispersion that shows the spread of the middle 50% of observations in a distribution.

✍️ इसे Semi-Interquartile Range भी कहा जाता है।

✍️ It is also known as the semi-interquartile range.

Definition

   Quartile Deviation is half of the difference between the third quartile (Q₃) and the first quartile (Q₁). अर्थात चतुर्थक विचलन, तृतीय चतुर्थक (Q₃) और प्रथम चतुर्थक (Q₁) के अंतर का आधा होता है।

नोट: 

✍️ जिस प्रकार माध्यिका समूह को दो भागों में विभाजित करती है। ठीक उसी प्रकार Quartile Deviation समूह को चार भागों में विभाजित करता है।

✍️ माध्यिका द्वारा बाँटे गये भागों को Quartile दो-दो बराबर भागों में विभाजित करता है।

✍️ प्रथम चतुर्थक माध्यिका से छोटा होता है, यह लघु चतुर्थक कहलाता है।

✍️ दूसरा चतुर्थक माध्यिका होता है।

✍️ तृतीय चतुर्थक माध्यिका से बड़ा होता है, यह दीर्घ चतुर्थक कहलाता है। 

✍️ लघु चतुर्थक को Q1 से तथा दीर्घ चतुर्थक को  Q3 से प्रदर्शित किया जाता है।

✍️ For individual and Discreate series-

Q = (n+1/4)th term

Q3 = 3(n+1/4)th term

Quartile Deviation

where, 

Q1 = First Quartile (Lower Quartile)

Q2 = Second Quartile (Median)

Q3 = Third Quartile (Upper Quartile)

Example: 2, 7, 9, 14, 1 का मध्यिका निकालें।

1, 2, 7, 9, 14

नोट:  Median किसी भी सीरीज को दो बराबर भागों में बांटता है जबकि QD. किसी भी सीरीज को चार बराबर भागों में बांटता है।

✍️ यहाँ ध्यान देना है कि दो भागों में सीरीज को बांटने के लिए मात्र एक Value अर्थात Median की जरुरत होती है, जबकि इसी सीरीज को चार भागों में बाँटने के लिए हमें तीन Value अर्थात Q1, Q2, Q3 की जरुरत होती है।

✍️ Q1 की बात की जाये तो 25% Observation Q1 के पहले जबकि 75% Observation Q1 के बाद आते है।

✍️ Q2 की बात की जाये तो 50% Observation Q2 के पहले जबकि 50% Observation Q2 के बाद अर्थात बराबर बराबर Observation आता है। इस प्रकार Q2 ही Median है।

✍️ Q3 की बात की जाये तो 75% Observation Q3 के पहले जबकि 25% Observation Q3 के बाद आता है।

Quartile Deviation

विशेषताएँ / Merits

✍️ अत्यधिक मानों से कम प्रभावित / Less affected by extreme values

✍️ सरल एवं व्यावहारिक / Simple and easy to understand

✍️ असमान वितरण के लिए उपयुक्त / Suitable for skewed distributions

सीमाएँ / Demerits

✍️ केवल मध्य 50% आँकड़ों पर आधारित /Based only on middle 50% observations

✍️ बीजीय विश्लेषण में अनुपयुक्त / Not suitable for algebraic treatment

महत्व / Importance

✍️ आय एवं वेतन अध्ययन / Income and wage analysis

✍️ सामाजिक-आर्थिक अनुसंधान / Socio-economic research

✍️ जनसंख्या एवं भूगोल अध्ययन / Population & Geography studies

निष्कर्ष:

      इस प्रकार चतुर्थक विचलन एक सरल, विश्वसनीय एवं व्यावहारिक अपसरण माप है, जो असमान वितरण में अत्यंत उपयोगी है। / Quartile Deviation is a simple, reliable, and practical measure of dispersion, especially useful in skewed distributions.

2. Mean Deviation (औसत विचलन)

Mean Deviation

(औसत विचलन)

Mean Deviation

Definition / परिभाषा

      Mean Deviation is a statistical measure of dispersion which is calculated as the average of absolute deviations of observations from a central value (Mean, Median or Mode).

    औसत विचलन वह प्रसार माप है, जिसमें सभी प्रेक्षणों के किसी केंद्रीय मान (माध्य, माध्यिका या बहुलक) से परम विचलनों का औसत निकाला जाता है।

✍️ माध्य विचलन की गणना में सभी विचलनों को धनात्मक माना जाता है। दूसरे शब्दों में, विचलनों के बीजगणितीय चिह्न ‘+’ तथा ‘-‘ (धन तथा ऋण) की उपेक्षा करके सभी विचलनों को धनात्मक माना जाता है अर्थात् ‘निरपेक्ष विचलन’ (absolute deviation) ज्ञात किये जाते हैं।

✍️ चिह्नों को छोड़ने का कारण यह है कि माध्य से निकाले गये विचलनों का योग शून्य तथा अन्य माध्यों से निकाले गये विचलनों का योग, यदि वितरण मामूली असंमितीय हो, लगभग शून्य होता है।

     माध्य विचलन ज्ञात करने में निम्न बातों का ध्यान रखा जाता है:-

(1) माध्य का चुनाव:-

    सैद्धान्तिक रूप से माध्य विचलन किसी भी माध्य (माध्य, माध्यिका अथवा बहुलक) से निकाला जा सकता है परन्तु व्यवहार में माध्य तथा माध्यिका से ही माध्य विचलन की माप ज्ञात को जाती है।

(ii) बीजगणितीय चिह्नों की उपेक्षा:-

      माध्य विचलन ज्ञात करने में विचलनों के बीजगणितीय चिह्नों (धन व ऋण) की उपेक्षा करके सभी विचलनों को धनात्मक माना जाता है। इस प्रकार के विचलनों को व्यक्त करने के लिए ‘d’ (deviation) के दोनों ओर सीधी खड़ी रेखाएँ बना दी जाती है तथा |d| लिखा जाता है। इस संकेताक्षर को ‘mod d’ पुकारा जाता है। इससे आशय ‘निरपेक्ष विचलन’ (absolute deviation) से है, अर्थात् विचलन में ‘+’अथवा ‘-‘ को ध्यान में नहीं रखा गया है।

(iii) विचलनों का माध्य ज्ञात करना:-

    सभी निरपेक्ष विचलनों को छोड़कर पदों की संख्या (N) से भाग देने पर माध्य विचलन ज्ञात हो जाता है।

(iv) संकेताक्षर:-

   माध्य विचलन के संकेताक्षर के रूप में ग्रीक वर्णमाला का अक्षर डेल्टा (Small Delta-‘δ’) का प्रयोग किया जाता है जिसे माध्य से माध्य विचलन ज्ञात किया जाता है उसे δ के साथ उपसंकेत (subscript) के रूप में इस प्रकार लिखा जाता है:

δ= माध्य से माध्य विचलन

(Mean Deviation from Mean)

δM = माध्यिका से माध्य विचलन

(Mean Deviation from Median)

δZ = बहुलक से माध्य विचलन

(Mean Deviation from Mode)

माध्य विचलन गुणांक

(Co-efficient of Mean Deviation)

    Coefficient of Mean Deviation is a relative measure of dispersion obtained by dividing Mean Deviation by the corresponding central value (Mean, Median or Mode). माध्य विचलन गुणांक अपकिरण का सापेक्ष माप है, जिसे माध्य विचलन को संबंधित केंद्रीय मान से भाग देकर प्राप्त किया जाता है।

Coefficient of Mean Deviation (CMD) = MD / A (or MD̄ / A)

Where / जहाँ,

MD = Mean Deviation

A = Central Value (Mean / Median / Mode)

(i) माध्य से माध्य विचलन का गुणांक

(Co-efficient of Mean Deviation from Mean)

Coefficient of Mean Deviation 

= Mean Deviation from Mean / Mean

(ii) माध्यिका से माध्य विचलन गुणांक

(Co-efficient of Mean Deviation from Median)

Coefficient of Mean Deviation 

= Mean Deviation from Median / Median

(iii) बहुलक से माध्य विचलन गुणांक

(Co-efficient of Mean Deviation from Mode)

Coefficient of Mean Deviation 

= Mean Deviation from Mode / Mode

Why Coefficient is Used?

(गुणांक का प्रयोग क्यों?)

✍️ It removes the effect of units

(माप की इकाई का प्रभाव समाप्त करता है)

✍️ Helps in comparison of two or more distributions

(दो या अधिक वितरणों की तुलना में सहायक)

Merits / गुण

✍️ Simple to calculate (गणना में सरल)

✍️ Useful for comparison (तुलना में उपयोगी)

✍️ Easy to understand (समझने में आसान)

Demerits / दोष

✍️ Limited use in advanced statistics

(उन्नत सांख्यिकी में सीमित उपयोग)

✍️ Ignores algebraic signs

(बीजीय चिह्नों की उपेक्षा करता है)

उपयोग (Uses)

✍️ आय, वेतन, वर्षा, तापमान आदि के प्रसार के अध्ययन में

✍️ दो या अधिक वितरणों की तुलना में

माध्य विचलन व उसके गुणांक की गणना

(Computation of Mean Deviation and its Co-efficient)

नोट:

    Coefficient of Mean Deviation from Median is considered most appropriate. माध्यिका से माध्य विचलन गुणांक सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि यह चरम मानों से कम प्रभावित होता है।

(i) व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series)

    माध्य विचलन की गणना प्रत्यक्ष रीति से अथवा लघु रीति से की जा सकती है:-

प्रत्यक्ष रीति (Direct Method)-

    एक व्यक्तिगत श्रेणी में प्रत्यक्ष रीति से माध्य विचलन की गणना करने में निम्नलिखित प्रक्रियाएँ करनी होती है:-

(i) पहले माध्य या माध्यिका या बहुलक, जिससे भी माध्य विचलन निकालना हो, ज्ञात किया जाता है।

(ii) सम्बन्धित माध्य से विभिन्न मूल्यों के निरपेक्ष विचलन |d| ज्ञात किये जाते हैं।

(iii) निरपेक्ष विचलनों का योग ∑|d| ज्ञात किया जाता है।

(iv) ∑|d| में पद संख्या से भाग देकर ‘माध्य विचलन’ ज्ञात किया जाता है। 

इस प्रकार

✍️ δ= ∑|x-x̄|/N or ∑|d|/N

माध्य से माध्य विचलन का गुणांक (CMD) = δ/x̄

Co-efficient of Mean Deviation

✍️ δM = ∑|x-M|/N or ∑|dM|/N

माध्यिका से माध्य विचलन (CMD) = δM/M

Co-efficient of Mean Deviation

✍️ δZ = ∑|x-z|/N or ∑|dz|/N

बहुलक से माध्य विचलन (CMD) =  δZ/Z

Co-efficient of Mean Deviation

NOTE: Mean deviation

✍️ With the help of Mean

✍️ With the help of Median यही दो प्रचलित है। 

✍️ माध्यिका से औसत विचलन सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि चरम मानों का प्रभाव न्यूनतम होता है।

Example (i) निम्नलिखित आंकड़ों के माध्य और माध्यिका की सहायता से माध्य विचलन की गणना करें:

Calculate mean deviation with the help of mean and median of the following data:

S.No. X
1 5
2 8
3 11
4 12
5 14

हल:

✍️ With the help of Mean

S.No. X x – x̄
1 5 5
2 8 2
3 11 1
4 12 2
5 14 4
  N = 50 14

M.D. (δx̄) = ∑|x-x̄|/N or ∑|d|/N

NOTE: Modulus का मतलब केवल positive होता है

x̄ = Σx/N

    = 50/5

    = 10

Now, δx̄ = ∑|x-x̄|/N

                = 14/5

                = 2.8 

माध्य से माध्य विचलन का गुणांक (CMD)

= δ/x̄

 = 2.8/10

                                                                 = 0.28

✍️ With the help of Median

नोट: यहाँ सबसे पहले X के मान को बढ़ते क्रम में Arrange करना है हलांकि यहाँ पहले से प्रश्न में ही Arrange है

S.No. X X-M
1 5 6
2 8 3
3 11 0
4 12 1
5 14 3
  Total sum = 13

δM = ∑|x-M|/N or ∑|dM|/N

 Median = (n+1/2)th Observation

                 = (5+1/2)th Observation

                  =( 6/2)th Observation

                  = 3th Observation

                  = 11

Now, MD (δM) = ∑|x-M|/N or ∑|dM|/N

                             = 13/5

                             = 2.6

माध्यिका से माध्य विचलन (CMD) = δM/M

                                                               = 2.6/11

                                                                = 0.23

नोट: यहाँ ध्यान देना है कि Mean और Median अलग-अलग होता है, इसीलिए MD भी अलग-अलग होगा

(ii) खण्डित श्रेणी (Discrete Series)

प्रत्यक्ष रीति (Direct Method)- खण्डित श्रेणी में प्रत्यक्ष रीति से माध्य विचलन ज्ञात करने में निम्नलिखित प्रक्रिया करनी पड़ती है:

(i) जिस माध्य से विचलन ज्ञात करना है, उसे ज्ञात किया जाता है।

(ii) उस माध्य से प्रत्येक आकार () के निरपेक्ष विचलन |d| ज्ञात किये जाते है।

(iii) निरपेक्ष विचलनों |d| को सम्बन्धित आवृत्तियों से गुणा करके, गुणनफलों का योग: Σf|d|, Σf|dM|, Σf|dz|, ज्ञात किया जाता है।

(iv) निम्नलिखित सूत्र के प्रयोग से माध्य विचलन ज्ञात किया जाता है: δx̄, = Σf|d|/N ,δM = Σf|dM|/N δZ= Σf|dz|/N

(v) माध्य विचलन गुणांक ज्ञात करने के लिए माध्य विचलन में सम्बन्धित माध्य का भाग दिया जाता है।

Example (ii) निम्नलिखित आंकड़ों के माध्य और माध्यिका की सहायता से माध्य विचलन की गणना करें:

Calculate mean deviation with the help of mean and median of the following data:

आकार (Size) आवृति (Frequency)
10 3
11 12
12 18
13 12

हल:

✍️ With the help of mean

x f fx x – x̄। fx – x̄
10 3 30 1.87 5.16
11 12 132 0.87 10.44
12 18 216 0.13 2.39
13 12 156 1.13 13.56
Total 45 534 31.95

x̄ = Σfx/Σf

= 534/45

= 11.87

MD (δx̄), = Σf|x – x̄|/Σf or Σf|d|/Σf

= 31.95/45

= 0.71

Co-efficient of MD = MD/x̄

= 0.71/11.87

= 0.095

✍️ With the help of Median

x f Cf |X-M| f|X-M|
10 3 3 (0-3) 2 6
11 12 15 (3-15) 1 12
12 18 33 (15-33) 0 0
13 12 45 (33-45) 1 12
Total 45 30

 here, M = (N+1/2)th term

                = (45+1/2)th term

                = (46/2)th term

                = 23th term

                = 12

now,

MD (δM) = Σf|X-M|/Σf or Σf|dM|/Σf

                  = 30/45

                  = 0.66

Co-efficient of MD = MD/δM

                                  = 0.66/12

                                  = 0.055

(iii) सतत् श्रेणी (Continuous Series)

अविच्छिन्न अथवा सतत् श्रेणी में माध्य विचलन की गणना

(Calculation of Mean Deviation in Continuous Series)-

       अविच्छिन्न अथवा सतत् श्रेणी में माध्य विचलन ज्ञात करने की वही रीति है जो खण्डित श्रेणी में अपनायी जाती है। केवल इतना अन्तर है कि सतत् श्रेणी में मध्य-बिन्दु (mid-point) ‘m’ निकालकर उन्हें मूल्य मान लिया जाता है। इस प्रकार सतत् श्रेणी एक खण्डित श्रेणी का स्वरूप ले लेती है। अन्य प्रक्रियाएँ वैसी ही रहती है।

Example (iii) निम्नलिखित आंकड़ों के माध्य और माध्यिका की सहायता से माध्य विचलन की गणना करें:

Calculate mean deviation with the help of mean and median of the following data:

Class आवृति (Frequency)
2-4 3
4-6 4
6-8 2
8-10 1

हल:

✍️ With the help of mean

x f mv fmv x – x̄। f।x – x̄।
2-4 3 3 9 2.2 6.6
4-6 4 5 20 0.2 0.8
6-8 2 7 14 1.8 3.6
8-10 1 9 9 3.8 3.8
Total 10 52 14.8

Note: x = mv 

MD (δx̄), = Σf|x – x̄|/Σf or Σf|d|/Σf

here,  x̄ = Σfmv/Σf

               = 52/10

                = 5.2

now, MD (δx̄), = Σf|x – x̄|/Σf 

                               = 14.8/10

                                = 1.48

Co-efficient of MD = MD/x̄

                                               = 1.48/5.2

                                               = 0.28

✍️ With the help of Median

x f cf mv ।X– M। f।X- M।
2-4 3 3 3 2 6
4-6 4 7 5 0 0
6-8 2 9 7 2 4
8-10 1 10 9 4 4
Total 10   14

MD (δM) = Σf|X-M|/Σf

here, M (Median) = (N+1/2)th term

= (10+1/2)th term

= 5.5th term

= (4-6) =4

L = 4

N = Σf = 10

cf = 3

f = 4

h = 2

now, M = 4+10/2-3/4 x 2

= 4 +2/2

= 5

MD (δM) = Σf|X-M|/Σf

= 14/10

= 1.4

Co-efficient of MD = MD/M

= 1.5/5

   = 0.28

15. Range (परास / परिसर / विस्तार)

Range

(परास)



Range

परिचय

       परास (Range) प्रसरण का सबसे सरल और प्रारम्भिक मापक है। यह किसी आँकड़ा-समूह में सबसे बड़े मान (L) और सबसे छोटे मान (S) के बीच का अंतर दर्शाता है। इससे यह पता चलता है कि आँकड़े कितनी सीमा तक फैले हुए हैं।

     दूसरे शब्दों में किसी श्रृंखला के सबसे बड़े मूल्य और सबसे छोटे मूल्य के अंतर को परिसर या विस्तार कहते है।

परिभाषा (Definition)

    परास वह अंतर है जो किसी श्रेणी के अधिकतम मान और न्यूनतम मान के बीच होता है।

सूत्र (Formula)

Range (R) = L−S

जहाँ,

= सबसे बड़ा मान (Largest Value / Observation)

= सबसे छोटा मान (Smallest Value / Observation)

परास का गुणांक (Coefficient of Range)

     परास के तुलनात्मक अध्ययन के लिए परास का गुणांक प्रयोग किया जाता है।

Coefficient of Range = (L − S) / (L + S)

✍️ विशेषता:- इसका मान 0 और 1 के बीच होता है।

उदाहरण (Example)

मान लीजिए आँकड़े हैं: 5, 8, 12, 20, 25

L = 25

S = 5

Range

R = 25−5 = 20

Coefficient of Range

(25−5) / (25+5) = 20/30 =0.67

परास के लाभ (Merits)

✍️ Dispersion के सभी methods में यह सबसे सरल व आसान है।

✍️ प्रारम्भिक विश्लेषण के लिए उपयोगी।

✍️ आँकड़ों के फैलाव का त्वरित अनुमान देता है।

परास की सीमाएँ (Demerits)

✍️ Range is not based on each and every observation of the series.

✍️ केवल दो चरम मानों (L और S) पर आधारित।

✍️ चरम मानों के परिवर्तन से बहुत प्रभावित।

✍️ संपूर्ण आँकड़ा-समूह का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता।

✍️ We can not calculate Range for open end classification.

उपयोग (Uses)

✍️ मौसम विज्ञान (तापमान का अंतर)

✍️ शेयर बाजार (उच्चतम–न्यूनतम भाव)

✍️ खेल, परीक्षा अंकों का प्रारम्भिक विश्लेषण

✍️ उद्योगों में quality नियंत्रण में उपयोगी

✍️Everyday life (सब्जी या कोई सामान का range)

निष्कर्ष (Conclusion)

    परास प्रसरण का सबसे सरल मापक है, परन्तु इसकी सीमाओं के कारण गहन सांख्यिकीय विश्लेषण में अन्य मापकों (चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन, मानक विचलन) का प्रयोग अधिक उपयुक्त माना जाता है।



NOTE: Type of series

(i) Indivisual Series

(ii) Discrete Series

(iii) Continuous Series 

                   ⇓

(a) Exclusive Series

(b) Inclusive Series

उदाहरण (Example)

(i) Indivisual Series

1. 13, 20, 7, 15, 29, 35 इस सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

हल:

L = 35

S = 7

Range = L – S = 35 – 7 = 28

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (35 – 7)/(35 + 7) = 28/42 = 0.67

2.  50, 69, 92, 85, 55, 20, 30 इस सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

हल:

L = 92

S = 20

Range = L – S =92-20 = 72

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (92-20)/(92+20) = 72/112 = 0.64

(ii) Discrete Series (खंडित श्रेणी)

3. दिए गये सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

x f
5 3
10 7
15 5
20 12
25 9

हल:

Note : ऐसे series में Frequency को ignore करना है

L = 25

S = 5

Range = L – S = 25 – 5 = 20

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (25-20)/(25+5) = 20/30 = 0.67

4. दिए गये सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

x f
133 9
180 2
80 4
95 5
40 3
132 10

हल:

L = 180

S = 40

Range = L – S = 180 – 40 = 140

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (180-40)/(180+40) = 140/220 = 0.63

(iii) Continuous Series : (a) Exclusive Series

5. दिए गये सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

x f
20-25 2
25-30 5
30-35 9
35-40 4
40-45 7

हल:

Note : ऐसे Series में भी Frequency को ignore करना है

L = 45

S = 20

Range = L – S = 45 – 20 = 25

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (45-20)/(45+20) = 25/65 = 0.38

(b) Inclusive Series

5. दिए गये सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

x f
20-24 2
25-29 5
30-34 9
35-39 4
40-44 7

हल:

       सबसे पहले यहाँ Inclusive Series को Exclusive Series में बदलते है और यहाँ भी Frequency को ignore करना है

इसके लिए (24+25)/2 = 49/2 = 24.5 इसी तरह सभी निकालें

x f
19.5-24.5 2
24.5-29.5 5
29.5-34.5 9
34.5-39.5 4
39.5-44.5 7

अब, L = 44.5

S = 19.5

Range = L – S = 44.5-19.5 = 25

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (44.5-19.5)/(44.5+19.5) =25/63 = 0.40

14. Measurement of Dispersion (प्रसरण / अपकिरण / विचलन / प्रकीर्णन / फैलाव का मापन)

Measurement of Dispersion

(प्रसरण का मापन)

Measurement of Dispersion

परिचय

     सांख्यिकी में केवल केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप (Mean, Median, Mode) से किसी आँकड़ा-समूह की पूर्ण जानकारी नहीं मिलती। दो अलग-अलग आँकड़ा-समूहों का औसत समान हो सकता है, परंतु उनके मानों का फैलाव (विचलन) अलग-अलग हो सकता है। आँकड़ों के इसी फैलाव या बिखराव को प्रसरण (Dispersion) कहा जाता है। अतः प्रसरण का मापन यह बताता है कि आँकड़े अपने केन्द्रीय मान (Mean, Median, Mode) से कितनी दूरी तक फैले हुए हैं।

सरल शब्दों में, प्रसरण का मापन आँकड़ों की अस्थिरता, विविधता तथा समानता/असमानता को मापने का साधन है।

✍️ Dispersion measures the extent to which the items vary from some central value.

✍️ Average deviation is known as dispersion.

✍️ Central value- Mean, Median, Mode

✍️ Dispersion is also known as scatter, spread or variation.

Example 

(i) 2, 4, 9

AM = Σx/n

     = 2+4+9/3

       = 15/3

       = 3

(ii)

Series A Series B Series C
100 98 1
100 99 2
100 100 3
100 101 4
100 102 490
= 500/5 = 100 500/5 = 100 500/5 = 100

       यह तालिका दर्शाती है कि तीनों श्रेणियों (Series A, B और C) का औसत (̄ = 100) समान है, लेकिन मानों का वितरण अलग-अलग है। Series A में कोई प्रसरण नहीं, Series B में कम प्रसरण, जबकि Series C में अत्यधिक प्रसरण है।

प्रसरण की परिभाषा

        कई विद्वानों ने अपकिरण को परिभाषित किया है जिनमें निम्न प्रमुख हैं :-

(1) बुक्स एवं डिक (B. C. Brooks and W. F. L. Dick) के अनुसार, “अपकिरण अथवा प्रसार, एक केन्द्रीय मूल्य के इर्द-गिर्द चर मूल्यों (variables) के विचरण अथवा बिखराव की सीमा है।”

(2) प्रो. किंग (W. I. King) के शब्दों में, “अपकिरण शब्द का प्रयोग यह स्पष्ट करने के लिए किया जाता है कि एक दिये गये समूह के पद-मूल्यों में भिन्नता है। दूसरे शब्दों में, उसके मूल्यों में एकरूपता का अभाव है। “

(3) प्रो. कॉनर (L. R. Connor) के अनुसार, “अपकिरण उस सीमा, जिस तक व्यक्तिगत पद विलित है, की एक माप है।”

क्रॉक्सटन और काउडेन के अनुसार-

      “प्रसरण वह माप है जो यह दर्शाता है कि किसी श्रृंखला के व्यक्तिगत मान औसत के चारों ओर किस सीमा तक बिखरे हुए हैं।

प्रसरण के मापन की आवश्यकता (महत्त्व)

    प्रसरण के मापन की आवश्यकता निम्न कारणों से होती है-

✍️ आँकड़ों की स्थिरता या अस्थिरता का ज्ञान

✍️ दो या अधिक श्रृंखलाओं की तुलना

✍️ औसत की विश्वसनीयता जाँचने हेतु

✍️ जोखिम (Risk) और अनिश्चितता के विश्लेषण में

✍️ नीति निर्माण, योजना तथा अनुसंधान में सहायता

✍️ आर्थिक, भौगोलिक एवं सामाजिक अध्ययनों में उपयोग

प्रसरण के मापन के प्रकार

   प्रसरण के मापन को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है-

1. निरपेक्ष माप (Absolute Measures)

2. सापेक्ष माप (Relative Measures)

(1) निरपेक्ष माप (Absolute Measure):-

     जब किसी श्रेणी के बिखराव की माप निरपेक्ष रूप में उस श्रेणी की इकाई में ही व्यक्त की जाती है तो वह अपकिरण की निरपेक्ष माप कहलाती है, जैसे कीमत रुपयो में, लम्बाई मीटर में, वजन किलोग्राम में व्यक्त किया जाता है। यदि यह कहा जाए कि श्रमिको के एक समूह की औसत मजदूरी ₹200 है तथा अपकिरण ₹ 15 है तो यह मद अपकिरण का निरपेक्ष माप कहलाएगा।

    अपकिरण के ऐसे मापों की तुलना तभी सम्भव होती है जब दो श्रेणियाँ एक जैसी हो तथा उन्हें एक जैसी इकाइयां, जैसे-किलोग्राम, रुपये आदि द्वारा प्रकट किया जाए। यदि वितरण दो अलग समंकों से सम्बन्धित है तथा इनकी इकाइयाँ भिन्न है है तो ये माप तुलना में सहायक नहीं होते।

(2) सापेक्ष माप (Relative Measure):-

      जैसा कि हमने अध्ययन किया कि अपकिरण के निरपेक्ष माप में यह दोष है कि इसमें विभिन्न श्रेणियों की इकाइयों अलग-अलग होने पर उनमें परस्पर तुलना सम्भव नहीं होती है। अतः इनके मापों को तुलना योग्य बनाने के लिए इनको सापेक्ष रूप में बदला जाता है। अपकिरण के निरपेक्ष माप को श्रेणी के माध्य भाग देने पर जो अनुपात आता है, उसे अकिरण की सापेक्ष माप कहते हैं।

      उदाहरण के लिए, यदि कहा जाए कि भारत में 27 प्रतिशत व्यक्ति निर्धनता रेखा से नीचे है तो यह सापेक्ष माप होगी। सापेक्ष माप को ज्ञात करने के लिए मध्य मूल्य को औसत से भाग कर दिया जाता है या उसका प्रतिशन ज्ञात किया जाता है। स्पष्ट है कि सापेक्ष माप समंक श्रेणी की इकाई में व्यक्त न होकर एक अनुपात या प्रतिशत के रूप में व्यक्त होती है। इसे अपकिरण गुणांक (Co-efficient of Dispersion) भी कहते है।

अपकिरण मापने की विधियाँ (Method of  Measuring Dispersion)

        अपकिरण मापने की विधियाँ इस प्रकार है-

Measures of Dispersion
Absolute Measure (Same unit) Relative Measure (Unit free)
1. Rane 1. Coefficient of Range
2. Quartile Deviation 2. Coefficient of Quartile Deviation
3. Mean Deviation 3. Coefficient of Mean Deviation
4. Standard Deviation 4. Coefficient of Standard Deviation
5. Variance 5. Coefficient of Variance

निष्कर्ष:

     प्रसरण का मापन सांख्यिकी का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण अंग है। केवल औसत आँकड़ों की पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं कर सकता, जब तक कि उसके साथ प्रसरण का अध्ययन न किया जाए।

    परास, चतुर्थक विचलन, औसत विचलन, परिवर्तन तथा मानक विचलन ये सभी प्रसरण के विभिन्न स्तरों को समझने में सहायक हैं। विशेष रूप से मानक विचलन और परिवर्तन गुणांक आधुनिक सांख्यिकीय विश्लेषण में सर्वाधिक उपयोगी माने जाते हैं।

    अतः किसी भी आँकड़ा-विश्लेषण को पूर्ण और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रसरण के मापन का अध्ययन अनिवार्य है।



नोट: सिर्फ सांख्यिकीय माध्य का ज्ञान रखने वाले एक व्यक्ति ने सपरिवार नदी पार करने से पहले नदी की औसत गहराई और अपने परिवार की औसत ऊँचाई ज्ञात की।

    नदी की औसत गहराई 4 फीट तथा उसके परिका की औसत ऊँचाई 5 फीट थी। इस विश्वास के साथ सभी लोग नदी पार करने लगे, परन्तु एक स्थान पर नहीं की गहराई 10 फीट थी जहाँ वह परिवार डूब गया।

   यदि उस व्यक्ति ने नदी की अधिकतम गहराई और आने परिवार के सदस्यों की न्यूनतम ऊँचाई को गणना कर ली होती तो शायद यह कहावत सुनने को नहीं मिलती कि-

लेखा जोखा ज्यों का त्यों,

सारा कुनबा डूबा क्यों।

    वह व्यक्ति सपरिवार डूब गया क्योंकि उसे अपकिरण की माप की जानकारी नहीं थी। अपकिरण की माप से हमे इस बात की जानकारी मिलती है कि आंकड़े औसत से कितनी दूरी पर अवस्थित है।

     उपर्युक्त लघु-कथा यह स्पष्ट करती है कि विभिन्न पद-मूल्यों का माध्य में विचलन महत्वपूर्ण होता है। किसी देश में औसत आय अथवा सम्पति काफी अधिक हो सकती है, साथ ही वहाँ उसके वितरण में पर्याप्त असमानता के कारण अधिकांश जनसंख्या निर्धनता की सीमा के नीचे हो सकती है। इस प्रकार के विचलनों को मापना तथा उन्हें एक संख्या में व्यक्त करना आवश्यक होता है।

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