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जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (ख) इकाई-4.

बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions

खण्ड (ख)

इकाई-4. जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन 

जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबं


जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन 

वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर

1. बाढ़ के समय निम्नलिखित में से किस स्थान पर जाना चाहिए?
(a) ऊँची भूमि वाले स्थान पर
(b) गाँव के बाहर
(c) जहाँ हैं उसी स्थान पर
(d) खेतों में
उत्तर- (a) ऊँची भूमि वाले स्थान पर
 
2. मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को पता लगाने के लिए किस यन्त्र की मदद ली जाती है?
(a) दूरबीन
(b) इंफ्रारेड कैमरा
(c) हेलीकॉप्टर
(d) टेलिस्कोप
उत्तर- (b) इंफ्रारेड कैमरा
 
3. आग से जलने की स्थिति में जले हुए स्थान पर क्या प्राथमिक उपचार करना चाहिए?
(a) ठंडा पानी डालना
(b) गर्म पानी डालना
(c) अस्पताल पहुँचाना
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) ठंडा पानी डालना
 
4. बस्ती/मकान में आग लगने की स्थिति में क्या करना चाहिए?
(a) अग्निशामक यंत्र को बुलाना
(b) दरवाजे-खिड़कियाँ लगाना
(c) आग बुझने तक इंतजार करना
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) अग्निशामक यंत्र को बुलाना
 
5. सुनामी किस स्थान पर आता है?
(a) स्थल
(b) समुद्र
(c) आसमान
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (b) समुद्र
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन से आप क्या समझते है?
उत्तर- जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबन्धन ही किसी भी प्रशासन की सफलता की कसौटी होती है। इसके अंतर्गत आपदा के आते ही प्रभावित लोगों को आपदा से निजात दिलाना ही प्रमुख उद्देश्य होता है। अलग-अलग प्रकार के प्राकृतिक आपदाओं के आकस्मिक प्रबन्धन में अलग-अलग प्रकार की प्राथमिकताएं होती है।
 
प्रश्न 2. बाढ़ की स्थिति में अपनाए जाने वाले आकस्मिक प्रबंधन का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर – बाढ़ के आते ही जान-माल और मवेशी पर भारी संकट आ जाता है। अतः पहली प्राथमिकता बाढ़ को रोकना नहीं बल्कि बाढ़ से लोगों को बचाना है। सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के बाद भोजन और पेयजल की व्यवस्था आवश्यक है। बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था, महामारी से बचने के लिए गर्म जल, गर्म भोजन, तथा छोटे से जगह में मिलजुलकर रहने के लिये वातावरण बनाना आकस्मिक प्रबंधन का ही हिस्सा है।
 
प्रश्न 3. भूकम्प एवं सुनामी की स्थिति में आकस्मिक प्रबंधन की चर्चा संक्षेप में कीजिए।
उत्तर – भूकम्प एवं सुनामी की स्थिति में आकस्मिक प्रबंधन का तीन प्रमुख कार्य होता है –
(i) बच्चे हुए विस्थापित लोगों को राहत कैम्प में ले जाना या उसे सभी प्रकार की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना।
(ii) वैसे लोगों को मलबे से निकालना जो अभी भी दबे हुए है।
(iii) अकाल मृत्यु प्राप्त आम लोगों को और जानवरों को सही स्थानों पर दफनाकर या धार्मिक रीतियों के अनुरूप अंतिम संस्कार करना। ऐसा न करने से महामारी फैलने की संभावना रहती है।
 
प्रश्न 4. आकस्मिक प्रबन्धन में स्थानीय प्रशासन की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर – आकस्मिक प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए आवश्यक है कि वे राहत शिविर का निर्माण करें। वहाँ सभी उपकरण और प्राथमिक उपचार की सामग्रीयाँ उपलब्ध कराएं तथा एम्बुलेंस, डॉक्टर, अग्निशामक इत्यादि की व्यवस्था में तत्परता दिखायें । कागजी दाव पेंच में न पड़कर राहत राशि और राहत सामग्री को पहुँचाकर आपदा प्रबंधन को सरल तथा सहज बना सकते हैं।
 
प्रश्न 5. आग लगने की स्थिति में क्या प्रबंधन करना चाहिए?  उल्लेख करें।
उत्तर –  आग लगने की स्थिति में  निम्नलिखित प्रबंधन करना चाहिए-
(i) आग में फंसे हुए लोगों को बाहर निकलना।
(ii) घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाना।
(iii) आग के फैलाव को रोकना इत्यादि।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
 
प्रश्न 1. जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन से आप क्या समझते है?
उत्तर – जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबन्धन ही किसी भी प्रशासन की सफलता की कसौटी होती है। इसके अंतर्गत आपदा के आते ही प्रभावित लोगों को आपदा से निजात दिलाना ही प्रमुख उद्देश्य होता है। अलग-अलग प्रकार के प्राकृतिक आपदाओं के आकस्मिक प्रबन्धन में अलग-अलग प्रकार की प्राथमिकताएं होती है।
 
प्रश्न 2. आकस्मिक प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन एवं स्वंयसेवी संस्थाओं की भूमिका का विस्तार से उल्लेख कीजिए।
उत्तर – आकस्मिक प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए आवश्यक है कि वे राहत शिविर का निर्माण करें। वहाँ सभी उपकरण और प्राथमिक उपचार की सामग्रीयाँ उपलब्ध कराएँ तथा एम्बुलेंस, डॉक्टर, अग्निशामक इत्यादि की व्यवस्था में तत्परता दिखायें। कागजी दाव पेंच में न पड़कर राहत राशि और राहत सामग्री को पहुँचाकर आपदा प्रबंधन को सरल तथा सहज बना सकते हैं।

                 प्रबंधन की अग्रिम पंक्ति में गाँव और मुहल्ले के लोग हो सकते है। इसके लिए युवकों को मानसिक रूप से सुदृढ़ और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित करने की जरूरत है। यह कार्य स्वयंसेवी संस्थाएं कर सकती है। वस्तुतः स्वंयसेवी संस्थाओं के लिए आवश्यक है कि वे न सिर्फ युवकों को प्रेरित और प्रशिक्षित करें वरन लोगों को फिल्म या विडियो को दिखाकर बहादुरी के कारनामों को दिखायें जिससे कि आपदाओं से लड़ने की मानसिक दृढ़ता उत्पन्न होगी। अतः स्वयंसेवी संगठन तो सेवाभाव से स्वतः ओतप्रोत होते है। फिर भी, उन्हें निरंतर प्रशिक्षित करते रहना चाहिए कि आपदा के समय वे जाती, धर्म, स्त्री- पुरुष इत्यादि की भावना से ऊपर उठकर काम करें।


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प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : भूकम्प एवं सुनामी / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (ख) इकाई-3.

बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions

खण्ड (ख)

इकाई-3. प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : भूकम्प एवं सुनामी

प्राकृतिक आपदा एवं प्रबं


प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : भूकम्प एवं सुनामी

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. महासागर की तली पर होने वाले कम्पन्न को किस नाम से जाना जाता है?
(a) भूकंप
(b) चक्रवात
(c) सुनामी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (c) सुनामी
 
2. 26 दिसंबर,2004 को विश्व के किस हिस्से में भयंकर सुनामी आया था?
(a) पश्चिम एशिया
(b) प्रशांत महासागर
(c) अटलांटिक महासागर
(d) बंगाल की खाड़ी
उत्तर- (d) बंगाल की खाड़ी
3.भूकंप से पृथ्वी की सतह पर पहुंचने वाली सबसे पहली तरंग को किस नाम से जाना जाता है?
(a) पी-तरंग
(b) एस-तरंग
(c) एल-तरंग
(d) टी-तरंग
उत्तर- (a) पी-तरंग
4. भूकंप केंद्र के ऊर्ध्वाधर पृथ्वी पर स्थित केंद्र को क्या कहा जाता है?
(a) भूकंप केंद्र
(b) अधि केंद्र
(c) अनु केंद्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (b) अधि केंद्र
5. भूकम्प अथवा सुनामी से बचाव का इनमें से कौन सा तरीका सही नहीं है?
(a) भूकंप के पूर्वानुमान को गंभीरता से लेना,
(b) भूकंप निरोधी भवनों का निर्माण मरना,
(c) गैर-सरकारी संगठनों द्वारा राहत कार्य हेतु तैयार रहना,
(d) भगवान भरोसे बैठे रहना।
उत्तर- (d) भगवान भरोसे बैठे रहना।
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. भूकम्प के केंद एवं अधिकेंद्र के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – अधिकेंद्र- भूपटल पर वे केंद्र जहाँ भूकम्प के तरंग का सर्वप्रथम अनुभव होता है, उसे अधिकेंद्र कहा जाता है।
भूकम्प केंद्र भूपटल के नीचे का वह स्थल जहाँ भूकम्पीय कम्पन्न प्रारम्भ होता है, उसे भूकम्प केंद्र कहा जाता है।
 
प्रश्न 2. भूकम्पीय तरंगों से आप क्या समझते है ? प्रमुख भूकम्पीय तरंगों के नाम लिखिए।
उत्तर – भूकम्प के समय उठनेवाले कम्पन को तरंग कहा जाता है। यह मुख्यतः प्राथमिक (P), द्वितीयक(S), तथा (L) तरंगों में बाँटा जाता है।
◆ P तरंग सबसे पहले पृथ्वी की सतह पर पहुंचता है।
◆S तरंग अनुप्रस्त तरंग है और इसकी गति प्राथमिक तरंग से कम होती है।
◆ L तरंग भूपटलीय सतह पर उत्पन्न होती है, इसकी गहनता सबसे कम होती है। धीमी गति के साथ क्षैतिज रूप से चलने के कारण यह किसी स्थान पर सबसे बाढ़ में पहुँचती है। लेकिन यह सर्वाधिक विनाशकारी तरंग होती है।
 
प्रश्न 3. भूकम्प और सुनामी के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – भूकम्प हमेशा स्थलखण्ड पर उत्पन्न होती है जबकि सुनामी हमेशा समुद्र में ही उत्पन्न होती है। अर्थात जब कम्पन्न स्थलखण्ड पर होती है तो उसे भूकम्प और जब कम्पन्न समुद्र तल में होती है तो उसे सुनामी कहा जाता है।
 
4. सुनामी से बचाव के कोई तीन उपाय बताइए?
उत्तर – सुनामी से बचाव के कोई तीन उपाय निम्नलिखित है –
(i) सुनामी के पूर्वानुमान हेतु समुद्र के बीच में स्टेशन/प्लेटफार्म बनाने की जरूरत है।
(ii) इसके प्रभाव को कम करने के लिए कांक्रीट तटबंध बनाना चाहिए।
(iii) राज्य सरकार या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा तटीय प्रदेश में रहनेवाले लोगों को सुनामी से बचाव का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
 प्रश्न 1. भूकम्प क्या है? भारत को प्रमुख भूकम्प क्षेत्रों में विभाजित करते हुए सभी क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर –  भूकम्प दो शब्दों के मिलने से बना है -भू +कम्प
भू=भूपटल 
कम्प =कम्पन
                इस प्रकार भूपटल में उत्पन्न होने वाला किसी भी प्रकार के कम्पन को भूकम्प कहते है। 
                       भारत के अधिकांश भूकम्प भ्रंशघाटी के सहारे आते है। ये भ्रंशघाटी हिमालय पर्वतीय क्षेत्र एवं प्रायद्वीपीय भारत दोनों में स्थित है। भारत में भूकम्पीय पेटी को प्रायः तीन पेटी में बांटकर अध्ययन करते है-

1) हिमालय भूकम्पीय पेटी- यहाँ प्रायः भीषण भूकम्प आते है क्योंकि यहाँ यूरोपियन एवं इंडियन प्लेट अभिसरण के स्थिति में है। प्लेटों के अभिसरण के कारण हिमालय क्षेत्र में कई भ्रंशरेखा का निर्माण हुआ है। जैसे– भारत के अधिकांश भूकम्प भ्रंशघाटी के सहारे आते है । ये भ्रंशघाटी हिमालय पर्वतीय क्षेत्र एवं प्रायद्वीपीय भारत दोनों में स्थित है । भारत में भूकम्पीय पेटी को प्रायः तीन पेटी में बांटकर अध्ययन करते है              हिमालय प्रदेश में सर्वाधिक भूकम्प कुमायूं हिमालय में आती है। 1991 ई० में आया उत्तर काशी का भूकम्प सबसे प्रसिद्ध है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 2006 ई० में मुज़फ़्फ़राबाद का भूकम्प प्रसिद्ध है।

2) उत्तरी मैदानी क्षेत्र- यह हिमालय से सटा हुआ है। यहाँ पर भयंकर भूकम्प की संभावना बनी रहती है। 1934 में आया भयंकर भूकम्प का केंद्र बिन्दु दरभंगा में अवस्थित था। उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में भूकम्प आने का प्रमुख कारण शिवालिक हिमालय के दक्षिण भाग में Front Fault/अग्र भ्रंश का पाया जाना है।

3) प्रायद्वीपीय भारत– प्रायद्वीपीय भारत प्रायः भूकम्प रहित क्षेत्र है क्योंकि यह प्राचीनतम चट्टानों से निर्मित दृढ़ भूखण्ड है । फिर भी यहाँ पर अपवाद स्वरूप कई भूकम्प रिकॉर्ड किये गए है। जैसे -1956 में कच्छ का भूकम्प, 1967 में कोयना का भूकम्प, 1993 में लातूर(महाराष्ट्र) का भूकम्प, 1997 में जबलपुर का भूकम्प, 26 जनवरी 2001 को आया भूज का भूकम्प प्रसिद्ध है।

             प्रायद्वीपीय भारत में छोटे-छोटे कई घाटी मिलते है। जैसे- सोन के सहारे सोन भ्रंश, नर्मदा के नर्मदा  भ्रंश, दामोदर के दामोदर भ्रंश, गोदावरी के सहारे गोदावरी भ्रंश, कृष्णा के सहारे कृष्णा भ्रंश, कावेरी के सहारे ग्रेट म्योर भ्रंश, महाराष्ट्र में कोयना & कुदिवाड़ी भ्रंश, और असम में मेघालय पर्वत के सहारे कोपील भ्रंश पाये जाते है। 

                इन्हीं भ्रंशों के सहारे अकसर भूकम्प आते रहते है।

प्रश्न 2. सुनामी से आप क्या समझते है? सुनामी से बचाव के उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर – समुद्र के अंदर उत्पन्न होने वाले भूकंप को सूनामी(Tsunami) कहते है। सूनामी जापानी शब्द है जिसका अर्थ समुद्री तरंग होता है।
        सुनामी से बचाव के उपाय निम्नलिखित है-
(i) सुनामी के पूर्वानुमान हेतु समुद्र के बीच में स्टेशन/प्लेटफार्म बनाने की जरूरत है।
(ii) इसके प्रभाव को कम करने के लिए कांक्रीट तटबंध बनाना चाहिए।
(iii) राज्य सरकार या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा तटीय प्रदेश में रहनेवाले लोगों को सुनामी से बचाव का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए।
 
प्रश्न 3. भूकम्प एवं सुनामी के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – भूकम्प और सुनामी  के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपाय निम्नलिखित है-
           भूकम्प के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपाय-
(i)  भूकम्प का पूर्वानुमान की व्यवस्था करना।
(ii) भूकम्प रोधी तकनीकी के आधार पर भवनों का निर्माण।
(iii) जान माल की सुरक्षा हेतु विशेष सुरक्षा बल की व्यवस्था।
(iv) भूकम्प की बर्बादी को रोकने में प्रशानिक सतर्कता भी अति आवश्यक है।
(v)  भूकम्प जैसी आपदा होने पर जात-पात और धर्म को भूलकर मदद के लिए सभी को आगे आना चाहिए।
         सुनामी के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपाय- 
(i) सुनामी के पूर्वानुमान हेतु समुद्र के बीच में स्टेशन/प्लेटफार्म बनाने की जरूरत है।
(ii) इसके प्रभाव को कम करने के लिए कांक्रीट तटबंध बनाना चाहिए।

(iii) राज्य सरकार या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा तटीय प्रदेश में रहनेवाले लोगों को सुनामी से बचाव का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए।


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खण्ड (ख) इकाई 2. प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : बाढ़ और सुखाड़ / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions

बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions

खण्ड (ख)

इकाई-2. प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : बाढ़ और सुखाड़

प्राकृतिक आपदा


प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : बाढ़ और सुखाड़

वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. नदियों में बाढ़ आने का प्रमुख कारण क्या है?
(a) जल की अधिकता
(b) नदी की तली में अवसाद का जमाव
(c) वर्षा का अधिकता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर- (d) उपर्युक्त सभी

2. बिहार का कौन सा क्षेत्र बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र है?
(a) पूर्वी बिहार
(b) दक्षिणी बिहार
(c) पश्चिमी बिहार
(d) उत्तरी बिहार
उत्तर- (d) उत्तरी बिहार

3. निम्लिखित में से किस नदी को बिहार का शोक कहा जाता है?
 (a) गंगा
(b) गंडक
(c) कोसी
(d) पुनपुन
उत्तर- (c) कोसी
4. बाढ़ क्या है? 
(a) प्राकृतिक आपदा
(b) मानव जनित आपदा
(c) सामान्य आपदा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) प्राकृतिक आपदा
5. सूखा किस प्रकार की आपदा है?
(a) प्राकृतिक आपदा
(b) मानवीय आपदा
(c) सामान्य आपदा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) प्राकृतिक आपदा
6. सूखे की स्थिति किस प्रकार आती है? 
(a) अचानक
(b) पूर्व सूचना के अनुसार
(c) धीरे-धीरे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (c) धीरे-धीरे
7. सूखे के लिए जिम्मेवार कारक है:
(a) वर्षा की कमी
(b) भूकंप
(c) बाढ़
(d) ज्वालामुखी
उत्तर- (a) वर्षा की कमी
8. सूखे से बचाव का एक मुख्य तरीका है- 
(a) नदियों को आपस में जोड़ देना
(b) वर्षा जल संग्रह करना
(c) बाढ़ की स्थिति उत्पन्न करना
(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर- (b) वर्षा जल संग्रह करना
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. बाढ़ कैसे आती है? स्पष्ट करें।
उत्तर – जब मानसूनी वर्षा अत्यधिक होती है तो नदियों का जलस्तर में अचानक काफी वृद्धि हो जाती है जिससे बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
 
प्रश्न 2. बाढ़ से होनेवाली हानियों की चर्चा करें।
उत्तर – बाढ़ से होनेवाली हानियाँ निम्नलिखित है –
●महामारी फैलना
●मकानों का गिरना
●फसलों की बर्बादी
●सडकों का टूटना
●जन धन की अपार क्षति इत्यादि।
 
प्रश्न 3. बाढ़ से सुरक्षा हेतु अपनाई जानेवाली सावधानियों को लिखें।
उत्तर – बाढ़ से सुरक्षा हेतु अपनाई जाने वाली सावधानियाँ निम्नलिखित है-
(i) मकानों की नींव तथा दीवार सीमेंट और कंक्रीट की होनी चाहिए।
(ii) स्तम्भ(Pillar) आधारित मकान होनी चाहिए और स्तम्भ की गहराई काफी होनी चाहिए।
(iii) बाढ़ के बाद जल निकालने की तत्कालिक व्यवस्था होनी चाहिए।
(iv) नदी के किनारे तथा नदी के सकरी ढालों पर मकानों के निर्माण नहीं करना चाहिए। ऐसे जगहों पर मकान की दूरी कम से कम 250 मीटर की दूरी पर होना चाहिए।
 
प्रश्न 4. बाढ़ नियंत्रण के लिए उपाय बतायें।
उत्तर – बाढ़ नियंत्रण के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते है-
(i) बाढ़ नियंत्रण के लिए बाँध और तटबंध की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
(ii) नदियों के गाद का समय-समय पर सफाई होना चाहिए।
 
प्रश्न 5. सूखे की स्थिति को परिभाषित करें।
उत्तर –  जब किसी क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक की कमी आ जाती है तो उसे सूखाड़ की स्थिति माना जाता है। सामान्तया  50 से०मी० से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में प्रायः प्रतिवर्ष सूखाड़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
 
प्रश्न 6.  सुखाड़ के लिए जिम्मेवार कारकों का वर्णन करें।
उत्तर – मुख्यतया वर्षा की भारी कमी के कारण ही सूखाड़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
 
प्रश्न 7. सुखाड़ से बचाव के तरीकों उल्लेख करें।
उत्तर –  सूखाड़ से बचाव हेतु दो प्रकार की योजनाएँ आवश्यक है- दीर्घकालिन और लघुकालीन योजनाएँ दीर्घकालिन योजना के अंतर्गत- नहर, तालाब, कुआँ, पाइन, आहर के विकास की जरूरत है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
प्रश्न 1.  बिहार में बाढ़ की स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर – बिहार भारत का सबसे अधिक बाढ़ ग्रसित राज्य है, यहां उत्तरी बिहार में 76 प्रतिशत से अधिक आबादी बाढ़ की तबाही के लगातार खतरे में निवास करते है। बिहार में भारत के बाढ़ प्रभावित का 16.50 प्रतिशत और बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का 22.10 प्रतिशत आबादी है। बिहार का भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 73.06 प्रतिशत अर्थात 68800 वर्ग किमी० बाढ़ प्रभावित है। यहाँ प्रत्येक वर्ष के कारण करोड़ों की सम्पति के साथ-साथ मानव एवं पशुओं का जीवन भी नष्ट हो जाता है। उत्तरी बिहार के जिले मानसून के दौरान कम से कम पाँच प्रमुख बाढ़ पैदा करने वाली नदियों-महानंदा, कोसी, बागमती, बूढ़ी गण्डक और गण्डक नदी जो कि नेपाल में उत्पन्न होती है, के लिए सुरक्षित नहीं है। कुछ दक्षिणी जिले भी सोन, पुनपुन और फल्गु नदियों से बाढ़ की चपेट में आ जाते है। हाल ही में 2017 की बाढ़ ने उत्तरी बिहार के 19 जिलों को प्रभावित किया जिसमें 514 लोगों की जाने चली गई और लगभग 2 करोड़ लोग प्रभावित हुए।
 
प्रश्न 2. बाढ़ के कारणों एवं इसकी सुरक्षा संबंधी उपायों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर – बाढ़ आने के निम्नलिखित कारण है-
(i) नदी में उफान- कभी-कभी निरंतर वर्षा से विस्तृत क्षेत्र का पानी छोटी नालियों और नालों से बहकर अंततः नदी में ही मिल जाती है जिससे विस्तृत क्षेत्र जलमग्न हो जाता है।
(ii) हिमगलन- कुछ नदियों का स्रोत हिमाच्छादित होता है। बर्फ के बहुत अधिक मात्रा में पिघलने से नदियों में अचानक बहुत अधिक पानी बहने लगता है । जिससे बाढ़ की स्थिति होती है।
(iii) लगातार भारी वर्षा का होना- लम्बे समय तक लगातार वर्षा होने से प्रभावित क्षेत्र जलमग्न हो जाता है।
(iv) मानवीय क्रियाकलाप- अंधाधुंध वनों की कटाई से पर्वतीय नदियों के पानी के प्रवाह अवरुद्ध नहीं हो पाता है। जिससे बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाता है।
बाढ़ से सुरक्षा संबंधी अपनाई जाने वाली उपायों निम्नलिखित है-
(i) मकानों की नींव तथा दीवार सीमेंट और कंक्रीट की होनी चाहिए।
(ii) स्तम्भ (Pillar) आधारित मकान होनी चाहिए और स्तम्भ की गहराई काफी होनी चाहिए।
(iii) बाढ़ के बाद जल निकालने की तत्कालिक व्यवस्था होनी चाहिए।
(iv) नदी के किनारे तथा नदी के सकरी ढालों पर मकानों के निर्माण नहीं करना चाहिए। ऐसे जगहों पर मकान की दूरी कम से कम 250 मीटर की दूरी पर होना चाहिए
 
प्रश्न 3. सुखाड़ के कारणों एवं इनके बचाव के तरीकों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर – मुख्यतया वर्षा की भारी कमी के कारण ही सूखाड़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
सूखाड़ से बचाव हेतु दो प्रकार की योजनाएँ आवश्यक है-
(i) दीर्घकालिक और
(ii)लघुकालीन योजनाएँ
(i) दीर्घकालिक योजनाएँ- राष्ट्रीय स्तर पर कुछ योजनाएँ दीर्घकालिक समस्या को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए। जैसे-
◆ भूमिगत जल के भंडार को नलकूपों द्वारा खींचकर सिंचाई या पीने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
◆ नहर या पाइपलाइन का प्रबंध करना चाहिए।
◆ वन रोपण को प्रोत्साहन करना चाहिए।
◆ नदियों का परस्पर जोड़कर सूखा क्षेत्र में जल भेजा जा सकता है।
(ii) लघुकालिन या तत्कालीन योजनाएँ- राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर सुख से निपटने के लिए लघुकालिन या तत्कालीन योजनाएँ बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए। जैसे-
◆ अनाज का विशेष कोष की व्यवस्था करना।
◆ पशुओं के चारे के भंडारण की व्यवस्था करना।
◆ पेयजल का सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था होना।

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खण्ड (ख) इकाई 1 प्राकृतिक आपदा : एक परिचय / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions

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खण्ड (ख)

इकाई-1. प्राकृतिक आपदा : एक परिचय

एक परिचय


प्राकृतिक आपदा : एक परिचय

वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. इनमें से कौन प्राकृतिक आपदा नहीं है?
(a) सुनामी
(b) बाढ़
(c) आतंकवाद
(d) भूकंप
उत्तर- (c) आतंकवाद
 
2. इनमें से कौन मानव जनित आपदा है?
(a) साम्प्रदायिक दंगे
(b) आतंकवाद
(c) महामारी
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर- (d) उपर्युक्त सभी
 
3. सुनामी का मुख्य कारण क्या है?
(a) समुद्र में भूकंप का आना
(b) स्थलीय क्षेत्र पर भूकंप का आना
(c) द्वीप पर भूकंप का आना
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) समुद्र में भूकंप का आना
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. आपदा से आप क्या समझते है?
उत्तर – प्राकृतिक या मानव निर्मित व्यवस्था में जब कई कारणों से अचानक व्यवधान उतपन्न होते हैं, तो वह व्यवधान ही आपदा कहलाता है।
               प्राकृतिक आपदाओं में बाढ़, सूखाड़, भूकम्प, सुनामी, चक्रवात, ओलावृष्टि, हिमस्खलन, भूस्खलन इत्यादि घटनाएँ शामिल होती है। औद्योगिक दुर्घटना, सड़क दुर्घटना, आतंकवादी हमला इत्यादि घटनाएँ जो मानवीय लापरवाही के कारण होता है उसे मानव निर्मित आपदाओं में शामिल करते है।
प्रश्न 2. आपदा कितने प्रकार का होता है?
उत्तर – आपदा मुखयतः दो प्रकार के होते है-
(i) प्राकृतिक आपदा- जब प्राकृतिक व्यवस्था में कई कारणों से अचानक व्यवधान उतपन्न होते हैं, तो वह व्यवधान ही प्राकृतिक आपदा कहलाता है। प्राकृतिक आपदाओं में बाढ़, सूखाड़, भूकम्प, सुनामी, चक्रवात, ओलावृष्टि, हिमस्खलन, भूस्खलन इत्यादि घटनाएँ शामिल होती है। 
 
(ii) मानव निर्मित आपदा- जब मानव निर्मित व्यवस्था में कई कारणों से अचानक व्यवधान उतपन्न होते हैं, तो वह व्यवधान मानव निर्मित आपदा कहलाता है।
           औद्योगिक दुर्घटना, सड़क दुर्घटना, आतंकवादी हमला इत्यादि घटनाएँ जो मानवीय लापरवाही के कारण होता है उसे मानव निर्मित आपदाओं में शामिल करते है।
 
प्रश्न 3. आपदा प्रबंधन की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर – आपदा कोई भी हो उसका प्रबन्धन होना अनिवार्य होता है ताकि इससे होने वाले भारी नुकसान को कम किया जा सके। आपदा से न सिर्फ विकास कार्य अवरुद्ध होते है बल्कि विकास कार्यों में कई व्यवधान भी उतपन्न होते है। हलॉंकि हमारे देश में राष्ट्रीय एवं राज्य मुख्यालय स्तर पर आपदा प्रबंधन की व्यवस्था की गई है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
प्रश्न 1. प्राकृतिक आपदा एवं मानव जनित आपदा  में अंतर सही उदाहरणों के साथ प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर – प्राकृतिक आपदा- जब प्राकृतिक व्यवस्था में  कई कारणों से अचानक व्यवधान उतपन्न होते हैं, तो वह व्यवधान ही प्राकृतिक आपदा कहलाता है। 
               प्राकृतिक आपदाओं में बाढ़, सूखाड़, भूकम्प, सुनामी, चक्रवात, ओलावृष्टि, हिमस्खलन, भूस्खलन इत्यादि घटनाएँ शामिल होती है। 
 
 मानव जनित आपदा- जब मानव निर्मित व्यवस्था में कई कारणों से अचानक व्यवधान उतपन्न होते हैं, तो वह व्यवधान मानव जनित आपदा कहलाता है।
           औद्योगिक दुर्घटना, सड़क दुर्घटना, आतंकवादी हमला इत्यादि घटनाएँ जो मानवीय लापरवाही के कारण होता है उसे मानव जनित आपदाओं में शामिल करते है।
 
प्रश्न 2. आपदा प्रबंधन की संकल्पना को स्पष्ट करते हुए आपदा प्रबंधन की आवश्यकता, अनिवार्यता का वर्णन कीजिए ।
उत्तर – कोई भी आपदा हो उसका प्रबन्धन होना अनिवार्य होता है ताकि इससे होने वाले भारी नुकसान को कम किया जा सके। आपदा से न सिर्फ विकास कार्य अवरुद्ध होते है बल्कि विकास कार्यों में कई व्यवधान भी उतपन्न होते है। हलॉंकि हमारे देश में राष्ट्रीय एवं राज्य मुख्यालय स्तर पर आपदा प्रबंधन की व्यवस्था की गई है।
        आपदा प्रबंधन की आवश्यकता एवं अनिवार्यता इस प्रकार है-
(i) उत्तर बिहार के लोग विशेषकर कोसी प्रदेश के लोग परम्परागत रूप से बाढ़ नियंत्रण में दक्ष होते है, उन्होंने अनादि काल से बाढ़ के अनुरूप जीवनशैली बना ली है।
(ii) सूखाड़ के प्रबंधन हेतु आम जनों के सहयोग से कार्य करना आवश्यक होता है।
(iii) भूकम्प के प्रबंधन हेतु नये तकनीक आधारित भवन निर्माण का कार्य किया गया है। भूकम्प रोधी भवन निर्माण में वृताकार या बहुभुजीय आकृति के बदले आयताकार अथवा वर्गाकार भवन आकृति को प्राथमिकता दी गयी।
(iv) 2002 में भारत के पूर्वी तट तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सुनामी से भारी बर्बादी हुई थी। इसी तथ्य को ध्यान में रखकर चक्रवात तथा सुनामी को कम करने की नीति आवश्यक है।

(v) आम लोगों की सहभागिता तथा पंचायत की मदद से ठोस प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकते है और ये निर्णय ही दीर्घकाल में प्रबंधन हेतु आवश्यक होते है।


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खण्ड (क) इकाई 6 मानचित्र अध्ययन / BSEB CLASS -10 Geography Solutions

BSEB CLASS वर्ग-10वाँ Geography Solutions

खण्ड (क)

इकाई-6. मानचित्र अध्ययन


मानचित्र अध्ययन

वस्तुनिष्ठ प्रश्रोत्तर
1. उच्चावच प्रदर्शन के लिए हैश्यूर विधि का विकास किसने किया था? 
 (a) गुटेनबर्ग
(b) लेहमान
(c) गिरार
(d) रिटर
उत्तर- (b) लेहमान
2. पर्वतीय छायाकरण विधि में भू-आकृतियों पर किस दिशा से प्रकाश पड़ने की कल्पना की जाती है?
(a) उत्तर-पूर्व
(b) पूर्व-दक्षिण
(c) उत्तर-पश्चिम
(d) दक्षिण-पश्चिम
उत्तर- (c) उत्तर-पश्चिम
3. छोटी,महीन एवं खंडित रेखाओं को ढाल की दिशा में खींचकर उच्चावच प्रदर्शन की विधि को क्या कहा जाता है?
(a) स्तर रंजन
(b) पर्वतीय छायाकरण
(c) हैश्यूर
(d) तल चिन्ह
उत्तर- (c) हैश्यूर
4. तल चिन्ह की सहायता से किसी स्थान विशेष की मापी गयी ऊँचाई को क्या कहा जाता है?
(a) स्थानिक ऊँचाई
(b) विशेष ऊँचाई
(c) समोच्च रेखा
(d) त्रिकोणमितीय स्टेशन
उत्तर- (a) स्थानिक ऊँचाई
5. स्तर रंजन विधि के अंतर्गत मानचित्रों में नीले रंग से किस भाग को दिखाया जाता है ?
(a) पर्वत
(b) पठार
(c) मैदान
(d) जल
उत्तर- (d) जल
 
लघु उत्तरीय प्रश्रोत्तर
प्रश्न 1. हैश्यूर विधि तथा पर्वतीय छायाकरण विधि में अंतर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर- हैश्यूर विधि– इस विधि का विकास ऑस्ट्रिया के एक सैन्य अधिकारी लेहमान ने किया था। उच्चावच- निरूपण के लिए इस विधि के अंतर्गत मानचित्र में छोटी, महीन एवं खंडित रेखाएं खींची जाती है। फलतः अधिक या तीव्र ढाल वाले भागों के पास-पास इन रेखाओं को मोटी एवं गहरी कर दिया जाता है। जबकि, मंद ढालों के लिए ये रेखाएं पतली एवं दूर-दूर बनाई जाती है । इसमें समतल क्षेत्र को खाली छोड़ दिया जाता है। इस विधि से से उच्चावच प्रदर्शित करने में काफी समय एवं मेहनत लगता है।
छायाकरण विधि– इस विधि के अंतर्गत उच्चावच-प्रदर्शन के लिए भू-अकृतियों पर उत्तर पश्चिम कोने पर ऊपर से प्रकाश पड़ने की कल्पना की जाती है। इसके कारण अंधेरे में पड़ने वाले हिस्से को या ढाल को गहरी आभा से भर देते है  जबकि प्रकाश वाले हिस्से या कम ढाल को हल्की आभा से भर देते है या फिर खाली छोड़ सकते है। 
           इस विधि से पर्वतीय देशों के उच्चावच को प्रभावशाली ढंग से दिखाना संभव होता है परंतु इन मानचित्रों से भी  ढाल की मात्रा का सही ज्ञान नहीं हो पाता है।
 
प्रश्न 2. तल चिन्ह और स्थानिक ऊंचाई क्या है ?
उत्तर- तल चिन्ह– वास्तविक सर्वेक्षण के द्वारा भवनों, पुलों, खंभों, पत्थरों जैसे स्थाई वस्तुओं पर समुद्र तल से मापी गई ऊँचाई को प्रदर्शित करने वाले चिन्ह को तल चिन्ह (Bench Mark) कहा जाता है । मानचित्र पर ऐसे ऊँचाई को प्रदर्शित करने के लिए ऊँचाई फीट अथवा मीटर किसी भी एक इकाई में लिखा जाता है ।
 
स्थानिक ऊँचाई– तल चिन्ह की सहायता से किसी स्थान विशेष की मापी गई ऊँचाई को स्थानिक ऊँचाई (Spot Height) कहा जाता है । इस विधि में बिंदुओं के द्वारा मानचित्र में विभिन्न स्थानों की ऊँचाई संख्या में लिख दिया जाता है ।
 
प्रश्न 3. समोच्च रेखा से आप क्या समझते है?
उत्तर-  भूतल पर समुद्र जल तल से एक समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को मिलाकर मानचित्र पर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ को समोच्च रेखा कहा जाता है ।
               यह एक मानक विधि है। समोच्च रेखाओं की सहायता से उच्चावच प्रदर्शन की विधि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है । मानचित्र में प्रत्येक समोच्च रेखा के साथ उसकी ऊँचाई का मान लिख दिया जाता है । मानचित्र पर इन समोच्च रेखाओं को बादामी रंग से दिखाया जाता है।
 
प्रश्न 4. स्तर रंजन क्या है?
उत्तर – रंगीन मानचित्रों में रंगों की विभिन्न अभाओं के द्वारा उच्चावच प्रदर्शन का एक मानक निश्चित किया गया है जिसे स्तर रंजन कहा जाता है।
            ऊंचाई में वृद्धि के अनुसार रंगों की आभाएँ हल्की होती जाती है । इनमें समुद्र या जलीय भाग को नीले रंग से मैदान को हरे रंग से पर्वतों को बादामी हल्का कत्थई रंग से और बर्फीले क्षेत्र को सफेद रंग से दिखाया जाता है।
 
प्रश्न 5. समोच्च रेखाओं द्वारा शंक्वाकार पहाड़ी का प्रदर्शन किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर – शंक्वाकार पहाड़ी के लिए बनाए जाने वाले समोच्च रेखाओं के मान बाहर से अंदर की ओर बढ़ता हुआ होता है, यानि अधिक ऊँचाई वाली समोच्च रेखा अंदर की ओर होती है।
मानचित्र अध्ययन
दीर्घ उत्तरीय प्रश्रोत्तर
प्रश्न 1. उच्चावच प्रदर्शन की प्रमुख विधियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर – धरातल पर पायी जानेवाली उच्चावच को प्रदर्शित करने के लिए विकसित की गई कुछ प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित है-
(i) हैश्यूर विधि-  इस विधि का विकास ऑस्ट्रिया के एक सैन्य अधिकारी लेहमान ने किया था। उच्चावच- निरूपण के लिए इस विधि के अंतर्गत मानचित्र में छोटी, महीन एवं खंडित रेखाएं खींची जाती है। फलतः अधिक या तीव्र ढाल वाले भागों के पास-पास इन रेखाओं को मोटी एवं गहरी कर दिया जाता है। जबकि, मंद ढालों के लिए ये रेखाएं पतली एवं दूर-दूर बनाई जाती है। इसमें समतल क्षेत्र को खाली छोड़ दिया जाता है । इस विधि से से उच्चावच प्रदर्शित करने में काफी समय एवं मेहनत लगता है।
(ii) पर्वतीय छायाकरण- इस विधि के अंतर्गत उच्चावच-प्रदर्शन के लिए भू-अकृतियों पर उत्तर पश्चिम कोने पर ऊपर से प्रकाश पड़ने की कल्पना की जाती है। इसके कारण अंधेरे में पड़ने वाले हिस्से को या ढाल को गहरी आभा से भर देते है  जबकि प्रकाश वाले हिस्से या कम ढाल को हल्की आभा से भर देते है या फिर खाली छोड़ सकते है। 
(iii) तल चिन्ह- वास्तविक सर्वेक्षण के द्वारा भवनों, पुलों, खंभों, पत्थरों जैसे स्थाई वस्तुओं पर समुद्र तल से मापी गई ऊँचाई को प्रदर्शित करने वाले चिन्ह को तल चिन्ह (Bench Mark) कहा जाता है। मानचित्र पर ऐसे ऊँचाई को प्रदर्शित करने के लिए ऊँचाई फीट अथवा मीटर किसी भी एक इकाई में लिखा जाता है।
(iv) स्थानिक ऊँचाई- तल चिन्ह की सहायता से किसी स्थान विशेष की मापी गई ऊँचाई को स्थानिक ऊँचाई (Spot Height) कहा जाता है। इस विधि में बिंदुओं के द्वारा मानचित्र में विभिन्न स्थानों की ऊँचाई संख्या में लिख दिया जाता है।
(v) त्रिकोणमितीय स्टेशन- त्रिकोणमितीय स्टेशन का संबंध उन बिंदुओं से है जिनका उपयोग त्रिभुजन विधि द्वारा सर्वेक्षण करते समय स्टेशन के रूप में हुआ था। मानचित्र पर त्रिभुज बनाकर उसके बगल में धरातल की समुद्र तल से ऊँचाई लिख दी जाती है।
(vi) स्तर रंजन- रंगीन मानचित्रों में रंगों की विभिन्न अभाओं के द्वारा उच्चावच प्रदर्शन का एक मानक निश्चित किया गया है जिसे स्तर रंजन कहा जाता है।
(vii) समोच्च रेखाएँ- भूतल पर समुद्र जल तल से एक समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को मिलाकर मानचित्र पर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ को समोच्च रेखा कहा जाता है। 
  
प्रश्न 2. समोच्च रेखा क्या है ? इसके द्वारा विभिन्न प्रकार के ढालों का प्रदर्शन किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर-  भूतल पर समुद्र जल तल से एक समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को मिलाकर मानचित्र पर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ को समोच्च रेखा कहा जाता है। यह एक मानक विधि है। समोच्च रेखाओं की सहायता से उच्चावच प्रदर्शन की विधि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मानचित्र में प्रत्येक समोच्च रेखा के साथ उसकी ऊँचाई का मान लिख दिया जाता है। मानचित्र पर इन समोच्च रेखाओं को बादामी रंग से दिखाया जाता है।
              विभिन्न प्रकार के उच्चावच को प्रदर्शित करने के लिए समोच्च रेखाओं के खींचने या बनाने का प्रारूप अलग-अलग होता है। एक समान ढाल को दिखाने के लिए समोच्च रेखाओं को समान दूरी पर खींचा जाता है। खड़ी ढाल को दिखाने के लिए समोच्च रेखाएँ पास-पास बनाई जाती है। जबकि मंद ढाल के लिए इन रेखाओं को दूर-दूर बनाया जाता है। जब किसी मानचित्र में अधिक ऊँचाई की समोच्च रेखाएँ पास-पास तथा कम ऊँचाई की समोच्च रेखाएँ दूर-दूर बनी होती है तब यह समझना चाहिए कि इन समोच्च रेखाओं के समूह अवतल ढाल का प्रदर्शन कर रहा है।
              इसके विपरीत स्थिति उत्तल ढाल का प्रतिनिधित्व करती है। सीढ़ीनुमा ढाल के लिए दो-दो रेखाएँ अंतराल खींची जाती है। इसी तरह अन्य अनेक भूआकृतियों को मानचित्र पर समोच्च रेखाओं द्वारा दिखाया जाता है।
जैसे-

पर्वत-

मानचित्र अध्ययन
 

पठार-

 

जलप्रपात-

 

‘V’आकर की घाटी –


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बिहार : (ग) जनसंख्या एवं नगरीकरण / BSEB CLASS-10 Geography Solutions खण्ड (क) इकाई-5.

         BSEB CLASS वर्ग-10वाँ Geography Solutions
खण्ड (क)

इकाई-5. बिहार : (ग) जनसंख्या एवं नगरीकरण

जनसंख्या एवं नगरीकरण


जनसंख्या एवं नगरीकरण

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
 
1. 2001 में बिहार की कुल जनसंख्या थी- 
(a) 8 करोड़ से कम
(b) 9 करोड़ से अधिक
(c) 8 करोड़ से अधिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (c) 8 करोड़ से अधिक
 
2. 1991-2001 के दौरान बिहार की जनसंख्या वृद्धि दर है।
(a) 30 प्रतिशत
(b) 28 प्रतिशत
(c) 28.63 प्रतिशत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (c) 28.63 प्रतिशत
 
3. बिहार में ग्रामीण आबादी है-
(a) 89.5 प्रतिशत
(b) 79.5 प्रतिशत
(c) 99.5 प्रतिशत
(d) शून्य प्रतिशत
उत्तर- (a) 89.5 प्रतिशत (2001)
 
4. 2001 की जनगणना के अनुसार बिहार में प्रतिवर्ग किलोमीटर कितने व्यक्ति रहते है?
(a) 772 व्यक्ति
(b) 881व्यक्ति
(c) 981 व्यक्ति
(d) 782व्यक्ति
उत्तर- (b) 881 व्यक्ति
 
5. सबसे अधिक आबादी वाला कौन जिला है?
(a) भागलपुर
(b) पटना
(c) नालंदा
(d) मुंगेर
उत्तर- (b) पटना
 
6. सासाराम नगर का विकास हुआ था-
(a) मध्ययुग में
(b) प्राचीन युग में
(c) वर्तमान युग में
(d) आधुनिक समय में
उत्तर- (a) मध्ययुग
 
7. अविभाजित बिहार में एक मात्र नियोजित नगर था-
(a) पटना
(b) मुंगेर
(c) टाटानगर
(d) गया
उत्तर- (c) टाटानगर
 
8. 2001 की जनगणना के अनुसार बिहार की नगरीय आबादी है-
(a) 20.5 प्रतिशत
(b) 15.5 प्रतिशत
(c) 10.5 प्रतिशत
(d) 25.5 प्रतिशत
उत्तर- (c) 10.5 प्रतिशत
 
9. बिहार का सबसे बड़ा नगर है?
(a) पटना
(b) गया
(c) भागलपुर
(d) दरभंगा
उत्तर- (a) पटना
 
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर:

प्रश्न 1. बिहार के अत्यधिक घनत्व वाले जिले का नाम लिखिए।

उत्तर – बिहार के अत्यधिक घनत्व वाले जिले का नाम- पटना, दरभंगा, वैशाली, बेगूसराय, सीतामढ़ी, सारण एवं सीवान।

प्रश्न 2. बिहार में अत्यन्त कम घनत्व वाले जिले कौन-कौन हैं।

उत्तर- बिहार में अत्यन्त कम घनत्व वाले जिले- पश्चिमी चम्पारण, बाँका, जमुई और कैमूर।

प्रश्न 3. बिहार की जनसंख्या आकार को बताइए।

उत्तर – 2001 की जनगणना के अनुसार यहाँ की कुल जनसंख्या 829,98,509 है। इनमें 432,43,795 पुरुष और 3,97,54,714 महिलाएं हैं। यह भारत की कुल जनसंख्या का 8.07% है। बिहार की दशकीय वृद्धि दर 1991-2001 के दौरान 28.62 प्रतिशत था जबकि राष्ट्रीय वृद्धि दर 21.11 प्रतिशत है । बिहार में लिंग अनुपात 919 महिलाएँ प्रति हजार पुरुष हैं। यह राष्ट्रीय अनुपात 933 से कम है।
 
प्रश्न 4. बिहार की जनसंख्या सभी जगह एक समान नहीं है। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – बिहार की जनसंख्या वितरण सभी जगह समान रूप से नहीं है। कहीं पर जनसंख्या बहुत अधिक है तो कहीं पर बहुत ही कम । इसका मुख्य कारण यहाँ की आर्थिक, सामाजिक परिवेश और भौतिक विविधता है । जहाँ भी धरातल समतल जलोढ़ एवं मैदानी है वहाँ घनी आबादी है। जहाँ कृषि कार्य, प्रति व्यक्ति आय ज्यादा है वहाँ जनसंख्या अधिक है। पटना, नालंदा, मुजफ्फरपुर और भोजपुर जिलों में इन्हीं कारणों से जनसंख्या अधिक है।

प्रश्न 5. मध्ययुग में बिहार में नगरों का विकास किस प्रकार हुआ?

उत्तर- मध्यकाल में नगरों का विकास एवं सड़कों के विकास प्रशासनिक कारणों से हुआ था। ऐसे नगरों में सासाराम, दरभंगा, पूर्णिया, छपरा, सिवान आदि हैं।

प्रश्न 6. दो प्राचीन एवं दो आधुनिक नगरों का नाम लिखिए।

उत्तर- प्राचीन नगर- पाटलीपुत्र, नालन्दा ,
आधुनिक नगर- दानापुर, मुंगेर।
 
 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर:
 
प्रश्न 1. बिहार की जनसंख्या घनत्व पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
उत्तर- 2001 की जनगणना के अनुसार बिहार में प्रतिवर्ग किमी. घनत्व 881 व्यक्ति है। सबसे अधिक घनत्व पटना जिला में है जहाँ प्रतिवर्ग किमी. 1,471 व्यक्ति निवास करते हैं। इसके बाद दरभंगा और वैशाली का स्थान आता है। जहाँ क्रमशः 1,342 और 1,332 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी. रहते हैं। चौथे स्थान पर बेगुसराय जिला है, यहाँ घनत्व 1,222 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. है।

                               यहाँ के विभिन्न जिलों की जनसंख्या घनत्व बहुत ही असमान है। इस आसमान घनत्व के आधार पर बिहार को निम्नलिखिति पाँच वर्गों में बाँट सकते है –

(i)अत्यधिक घनत्व वाले जिले- जिन जिलों का घनत्व 1200 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी० है। इसे इस वर्ग में रखा गया है। पटना, दरभंगा, वैशाली, बेगुसराय, सीतामढ़ी, सारण, सीवान इसके अन्तर्गत हैं। इन जिलों में राज्य की 17.50% भूमिपर 28.17% आबादी रहती है।

(ii) उच्च घनत्व के जिले- इसके अन्तर्गत वे जिले हैं, जहाँ औसत घनत्व 1000-1200 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी. के बीच है। मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, गोपालगंज, मधुबनी तथा नालन्दा इस वर्ग में आते हैं। इस समूह में नालन्दा जिला को छोड़कर सभी जिले उत्तरी बिहार में स्थित है।

(iii) मध्यम घनत्व के जिले- इसके अन्तर्गत 1000-800 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. में रहते हैं। पूर्वी चम्पारण, भागलपुर, जहानाबाद, अरवल, भोजपुर, सहरसा, खगड़िया, मधेपुरा, बक्सर और मुंगेर जिले इस वर्ग में सम्मिलित हैं । इन जिलों में राज्य की 24% से अधिक भूमि और राज्य की कुल जनसंख्या की 18% अबादी निवास करती है।

(iv) कम घनत्व जिले- इस वर्ग के अन्तर्गत पूर्णिया, कटिहार, अररिया, नवादा, शेखपुरा, सुपौल, गया, किशनगंज, लक्खीसराय, रोहतास और औरंगाबाद जिले आते हैं । इसमें औसत 600-800 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी० निवास करते हैं । इन जिलों की लगभग 30% भूमि पर 26% अबादी निवास करती है।

(v) अत्यंत कम घनत्व वाले जिले- इस वर्ग में वे जिले आते हैं जिनकी अबादी 600 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी. से कम है। इस वर्ग के अन्तर्गत पश्चिमी चम्पारण, बाँका, जमुई और कैमूर जिला आते हैं। जिनका घनत्व 382 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी. है। इन जिलों में राज्य की भूमि का 14.58 % एवं कुल जनसंख्या का 9% आबादी निवास करती है।

प्रश्न 2.बिहार में नगर विकास पर एक विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर – बिहार में नगरों के विकास का इतिहास बहुत पुराना है। यहाँ के अधिकतर प्रमुख नगर किसी न किसी नदी के तट पर विकसित है। यहाँ के प्राचीन नगरों का विकास राजधानी, शिक्षा, धार्मिक एवं व्यापारिक केंद्र के रूप में हुआ है। इनमें पाटलिपुत्र, नालन्दा, राजगीर, गया, वैशाली, बोधगया उदवेतपुरी, सीतामढ़ी आदि प्राचीन नगरों के उदाहरण हैं।

              मध्यकाल में भी यहाँ नगरों का विकास सड़कों के विकास एवं प्रशासनिक कारणो से हुआ था। ऐसे नगरों में, सासाराम, दरभंगा, पूर्णिया, छपरा, सिवान आदि आते हैं। अंग्रेजों के समय में बिहार में कुछ बदलाव आया रेल और सड़क मार्गों का विकास हुआ जिसके किनारे नगर विकसित होने लगे।

               आजादी के बाद यहाँ नगरों के विकास में तेजी आयी, राज्यों में औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं जीवन की मौलिक सुविधाओं के कारण कई नए नगर भी विकसित हुए। इनमें बरौनी, हाजीपुर, दानापुर, डालमिया नगर, मुंगेर, जमालपुर कटिहार आदि हैं।

              किन्तु आज के बिहार में नगरों का विकास भारत के बड़े राज्यों की तुलना में बहुत ही कम हुआ है । यह सबसे कम शहरीकृत राज्य है ।  वर्तमान में बिहार में 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों की संख्या मात्र 19 है। 10 लाख से ऊपर आबादी वाले महानगर में केवल पटना नगर है। 2001 की जनगणना के अनुसार कुल नगरीय बस्तियों की संख्या 131 है।

             बिहार के नगरों का कार्यात्मक स्वरूप इनकी उत्पत्ति से सम्बंधित है। यहाँ के पुराने नगर प्रशासन तथा व्यापार से जुड़े हो परन्तु आधुनिक नगर उद्योग, यातायात, व्यापार एवं शिक्षा से सम्बन्धित है। यहाँ के लगभग सभी जिला मुख्यालय शुरू से ही प्रशासनिक कार्य के साथ-साथ थोक व्यवसाय, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसे नगरियो कार्यों से विकसित है । बिहार में कुछ चुने हुए नगरों में ही औद्यौगिक इकाइयाँ स्थापित हैं। इनमें मुंगेर, बरौनी, जमालपुर, कटिहार प्रमुख हैं।

           बिहार विभाजन से पूर्व टाटानगर इस राज्य का मात्र नियोजित नगर था, जमशेदजी टाटा ने केवल बिहार को बल्कि भारत को आधुनिक नगर नियोजन से सर्वप्रथम परिचय कराया। किन्तु विभाजन के उपरांत बिहार में एक भी नियोजित नगर विकसित नहीं है । बिहार की राजधानी पटना भी आंशिक रूप से विकसित है। बिहार के अधिकतर नगर अनियोजित एवं अव्यवस्थित हैं।


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बिहार : (ख) उद्योग एवं परिवहन /  बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (क) इकाई 5.

        बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions

खण्ड (क)

इकाई 5. बिहार : (ख) उद्योग एवं परिवहन

उद्योग एवं परिवहन


उद्योग एवं परिवहन

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
 
1. बिहार के किस शहर में कांच उद्योग स्थापित है?
(a) हाजीपुर
(b) शाहपुर
(c) मुरकुंडा
(d) भवानी नगर
उत्तर- (a) हाजीपुर
 
2. सिगरेट का कारखाना कहाँ है?
(a) मुंगेर में
(b) पटना में
(c) शाहपुर में
(d) गया में
उत्तर- (a) मुंगेर में
 
3. रेल वर्कशॉप कहाँ स्थित है?
(a) जमालपुर
(b) भागलपुर
(c) मुंगेर
(d) पटना
उत्तर- (a) जमालपुर
 
4. खाद कारखाना कहाँ स्थित है?
(a) बरौनी
(b) बाढ़
(c) मोकामा
(d) लक्खीसराय
उत्तर- (a) बरौनी
 
5. किस नगर में कालीन तैयार होता है?
(a) ओबरा
(b) दाउदनगर
(c) बिहारसरीफ
(d) गया
उत्तर- (a) ओबरा
 
6. अशोक पेपर मिल किस जिला में स्थित है?
(a) समस्तीपुर
(b) पटना
(c) पूर्णिया
(d) अररिया
उत्तर- डालमियानगर
 
7. बिहार की पहली रेल लाईन थी?
(a) मार्टीन लाइट रेलवे
(b) ईस्ट इंडिया रेल मार्ग
(c) भारत रेल
(d) बिहार रेल सेवा
उत्तर- (b) ईस्ट इंडिया रेल मार्ग
 
8. पटना हवाई अड्डा का क्या नाम है?
(a) जय प्रकाश अंतरराष्ट्रीय हवाई पत्तन
(b) पटना हवाई अड्डा
(c) राजेन्द्र प्रसाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
(d) बिहार हवाई अड्डा
उत्तर- (a) जय प्रकाश अंतरराष्ट्रीय हवाई पत्तन
 
9. ग्रांड ट्रंक रोड का राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या क्या है?
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4
उत्तर- (b) 2
 
10. बिहार में रेल परिवहन का शुभारंभ कब से माना जाता है?
(a) 1842 से
(b) 1860 से
(c) 1858 से
(d) 1862 से
उत्तर- (b) 1860
 
11. मध्य पूर्व रेलवे का मुख्यालय कहाँ है?
(a) पटना में
(b) हाजीपुर में
(c) मुज़फ़्फ़रपुर में
(d) समस्तीपुर में
उत्तर- (b) हाजीपुर में
 
12. बिहार की सीमा में रेलमार्ग की कुल लम्बाई कितनी है?
(a) 6283 कि०मी०
(b) 5283 कि०मी०
(c) 7283 कि०मी०
(d) 8500 कि०मी०
उत्तर- (a) 6283 कि०मी०(वर्ष 2001)
 
13.बिहार में रज्जुमार्ग कहाँ है?
(a) बिहारसरीफ
(b) राजगीर
(c) गया
(d) बांका
उत्तर- (b) राजगीर
 
14. मंदार झील किस जिला में स्थित है?
(a) मुंगेर
(b) भागलपुर
(c) बांका
(d) बक्सर
उत्तर- (c) बांका
 
15. राष्ट्रीय पोत संस्थान पटना के किस घाट पर स्थित है?
(a) महेन्द्रू घाट
(b) गाँधी घाट
(c) दीघा घाट
(d) बांस घाट
उत्तर- (a) महेन्द्रू घाट
 
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर:
 
प्रश्न 1.बिहार में जूट उद्योग पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- जूट बिहार का ही नहीं बल्कि पूर्व भारत का एक महत्वपूर्ण उद्योग है। आजादी से पूर्व भारत में जूट के 110 कारखाने थे जो अधिकांशतः प.बंगाल और बिहार में ही केन्द्रित थे। लेकिन आजादी के बाद अधिकतर क्षेत्र बंगलादेश में चले गये। बिहार में जूट के तीन बड़े कारखाने कटिहार, पूर्णिया एवं दरभंगा में स्थित है हालांकि वर्तमान में सिर्फ कटिहार का कारखाना ही कार्यरत है।
 

प्रश्न 2. गंगा किनारे स्थित महत्वपूर्ण औद्योगिक केन्द्रों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- गंगा नदी के दोनों ओर तटीय जिलों में दलहन का अधिक उत्पादन होता है, इसलिए यहाँ दलहन की छोटी-छोटी मिलें विकसित है । इनमें बाढ़, मोकामा, बरबीघा, शेखपुरा, पटना, बिहार शरीफ प्रमुख हैं।
            पटना के दीघा एवं मोकामा में बाटा चर्मशोधन एवं निर्माण उद्योग की दो बड़ी इकाइयाँ स्थित हैं। भागलपुर में रेशमी वस्त्र उद्योग विकसित है। पटना, हाजीपुर और भागलपुर में काँच उद्योग स्थित है।
 

प्रश्न 3.औद्योगिक विकास हेतु बिआडा के पहल को बताऐं।

उत्तर- बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (Bihar Industrial Area Development Authority,बीआडा) द्वारा औद्योगिक विकास हेतु कई साहसिक कदम उठाए गए हैं। उनमें मुख्य कदम यह है कि वर्ष 2006-07 में 172.45 करोड़ रुपये परियोजना लागत वाली 15 इकाइयों को जमीन दी गई। इसके विपरीत इस वर्ष 4218.62 करोड़ रु० निवेश वाली 627 नई इकाइयों को जमीन दी गई। पहले आवंटन में काफी समय लगता था। बिआडा ने नई इकाइयों को 24 घंटे में जमीन आवंटन की व्यवस्था की।
 

प्रश्न 4.नई औद्योगिक नीति के मुख्य बिन्दुओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर- नई औद्योगिक नीति 2006 की मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं-

●निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए उचित कदम उठाना।

●आधारभूत औद्योगिक संरचना को विकसित करने हेतु प्रोत्साहित करना।

●उपभोक्ता रुचि वाले औद्योगिक इकाइयों को विकसित करने हेतु प्रोत्साहन देना।

प्रश्न 5.जमालपुर में किस चीज का वर्कशाप है, और क्यों प्रसिद्ध है ?

उत्तर- जमालपुर में 1875 ई. में एक बड़ा रेलवे वर्कशाप स्थापित हुआ था जिसमें करीब 10 हजार मजदूरों को रोजगार मिला था और यह एशिया का सबसे पहला वर्कशाप था। जमालपुर मुंगेर जिला अन्तर्गत आता है जहाँ डीजल इंजन का कार्य होता है। यह एक बड़ा रेलवे वर्कशाप है।

प्रश्न 6. राजगीर के औद्योगिक विकास पर अपना विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर- राजगीर बिहार का एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है। यह स्थल मुख्य रूप से गर्मजल के झरने एवं विभिन्न प्रकार के पाये जाने वाले  कुंडों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावे यहाँ गृद्धकूट पर्वत पर शांति स्तूप स्थापित है, जो विश्व को भगवान बुद्ध का शांति संदेश देता है।
                            यह मनोरम दृश्यों से भरपूर पर्यटन स्थल है जहाँ कई दर्शनीय स्थान हैं जैसे—स्वर्ण भंडार, वेणुवन, नौलखा मंदिर, जरासंध का अखाड़ा, अजातशत्रु के किला का भग्नावशेष आदि। अतः पर्यटन उद्योग के विकास की यहाँ असीम संभावनाएं हैं । इसके अलावे यहाँ आयुद्ध निर्माणी कारखाना भी स्थापित किया गया है जो राजगीर के औद्योगिक विकास में चार चाँद लगाता है। यह क्षेत्र रेलवे लाइन, सड़क मार्ग से सीधे जुड़ा हुआ है।
प्रश्न 7. मुंगेर में कौन-कौन से उद्योग विकसित हैं, वर्णन कीजिए।
उत्तर- मुंगेर में सबसे प्रमुख सिगरेट बनाने का कारखाना है। यहां 250 से अधिक बीड़ी के कारखाने है । मुंगेर के ही दिलावरपुर में इम्पेरियल टोबैको स्थापित है । इसके अलावे यहाँ स्थानीय भेड़ों से प्राप्त ऊन से कम्बल बनाया जाता है। 
                 जमालपुर मुंगेर जिला अन्तर्गत  ही आता है जहाँ कि डीजल इंजन का कार्य होता है। यह एक बड़ा रेलवे वर्कशाप है।
 
प्रश्न 8. उत्तरी बिहार की अपेक्षा दक्षिणी बिहार में सड़कों का विकास अधिक हुआ है, क्यों?
उत्तर- उत्तरी बिहार का अधिकांश हिस्सा कोसी बेसीन और टाल, चाउर एवं दियारा क्षेत्र के अन्तर्गत आता है जो बाढ़ प्रभावित है । यहाँ लगभग प्रतिवर्ष भयंकर बाढ़ की तबाही देखनी पड़ती है। इस कारण जो सड़कें बनती भी हैं वे बाढ़ की भेंट चढ़ जाती हैं ।अतः यही कारण है कि उत्तरी बिहार की अपेक्षा दक्षिणी बिहार में सड़कों का विकास अधिक हुआ है।
 
प्रश्न 9. बिहार में नदियों का परिवहन क्षेत्र में क्या योगदान है?
उत्तर- बिहार एक भू-आवेशित राज्य है। इस कारण इसका समुद्री मार्ग से कोई सम्पर्क नहीं है । यहाँ जलमार्ग के लिए नदियों का उपयोग किया जाता है। बिहार की कई बड़ी नदियाँ हैं जिनमें सालोभर जल प्रवाहित होता रहता है । शायद यही कारण है कि इस राज्य में प्राचीन काल से ही जल परिवहन का कार्य होता रहा है। मध्यकाल में परिवहन का मुख्य साधन भी यही था, इसी कारण से नगरों का विकास नदियों के तट पर हुआ । गंगा, घाघरा, कोसी, गण्डक और सोन नदियाँ मुख्य रूप से जल परिवहन के लिए उपयोग की जाती हैं । घाघरा नदी से खाद्यान, गंडक से लकड़ी, फल, सब्जी, सोन नदी से बालू और पुनपुन से बाँस ढोए जाते हैं । गंगा में  कई बड़े-बड़े स्टीमर चलाए जाते हैं । वर्तमान में गंगा नदी में हल्दिया-इलाहाबाद राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित किया गया है। हाल ही में पटना के महेन्द्रु घाट के पास एक राष्ट्रीय पोत संस्थान की स्थापना की गई है।
 
प्रश्न 10. बिहार के प्रमुख हवाई अड्डों के नाम लिखिए और वे कहाँ स्थित हैं ?
उत्तर- बिहार के प्रमुख हवाई अड्डों के नाम-
(i) जय प्रकाश अन्तर्राष्ट्रीय हवाई पत्तन- पटना
(ii) बोधगया अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे – गया                            
                 इसके अलावा मुजफ्फरपुर, जोगबनी, रक्सौल, भागलपुर, बिहटा आदि 7 हवाई अड्डे हैं।
 
 प्रश्न 11. उत्तरी बिहार के रेलमार्ग की विवेचना कीजिए।
उत्तर- उत्तरी बिहार के रेलमार्ग का काफी विकास हुआ है। मध्य-पूर्व रेलवे का कार्यालय उत्तरी बिहार के हाजीपुर में ही स्थित है । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1959 ई. में ही मोकामा के पास राजेन्द्र सेतु का निर्माण किया गया था जो उत्तरी और दक्षिणी बिहार को जोड़ता है। हाजीपुर जक्शन से होते हुए कई लम्बी दूरी की रेलगाड़ियाँ भी चल रही हैं। दीघा-सोनपुर के बीच गंगा पर रेलपुल निर्माण का कार्य चल रहा है।
 
प्रश्न 12. बिहार के जलमार्ग पर अपना विचार प्रस्तुत करें।
उत्तर- बिहार एक भू-आवेशित राज्य है। इस कारण इसका समुद्री मार्ग से कोई सम्पर्क नहीं है। यहाँ जलमार्ग के लिए नदियों का उपयोग किया जाता है। बिहार की कई बड़ी नदियाँ हैं जिनमें सालोभर जल प्रवाहित होता रहता है। शायद यही कारण है कि इस राज्य में प्राचीन काल से ही जल परिवहन का कार्य होता रहा है। मध्यकाल में परिवहन का मुख्य साधन भी यही था, इसी कारण से नगरों का विकास नदियों के तट पर हुआ। गंगा, घाघरा, कोसी, गण्डक और सोन नदियाँ मुख्य रूप से जल परिवहन के लिए उपयोग की जाती हैं । घाघरा नदी से खाद्यान, गंडक से लकड़ी, फल, सब्जी, सोन नदी से बालू और पुनपुन से बाँस ढोए जाते हैं । गंगा में  कई बड़े-बड़े स्टीमर चलाए जाते हैं। वर्तमान में गंगा नदी में हल्दिया-इलाहाबाद राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित किया गया है। हाल ही में पटना के महेन्द्रु घाट के पास एक राष्ट्रीय पोत संस्थान की स्थापना की गई है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर:
 
प्रश्न 1.बिहार के कृषि आधारित किसी एक उद्योग के विकास एवं वितरण पर प्रकाश डालिए।
उत्तर- बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है यहाँ की 80% आबादी कृषि पर ही आधारित है और कृषि पर आधारित यहाँ कई उद्योग हैं, जैसे- चीनी उद्योग, जूट उद्योग, तम्बाकू उद्योग इत्यादि इनमें चीनी उद्योग प्रमुख है।
चीनी उद्योग- यह बिहार का एक मुख्य कृषि आधारित उद्योग है। 20वीं शताब्दी के मध्य तक भारत के चीनी उद्योग के क्षेत्र में बिहार का स्थान महत्वपूर्ण था। किन्तु 1960 के बाद इसमे ह्रास होने लगा, जबकि यहाँ इस उद्योग के लिए सभी अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियाँ विद्यमान हैं । अतः हाल के कुछ वर्षों में पुनः इसमें सुधार होने लगा है। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में इस पर विशेष ध्यान दिया गया है। बिहार राज्य चीनी निगम के बंद पड़े 15 चीनी मिलों एवं दो निर्माणधीन इकाइयों को पुनः जीवित करने की योजना है। राज्य सरकार द्वारा यह भी निर्णय लिया है कि ग्यारह चीनी मिलों के परिचालन की जिम्मेदारी रिलायस, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को दे दी जाएगी। 
                     बिहार में चीनी की अधिकतर मिलें उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र में विकसित हैं। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चम्पारण, सिवान, गोपालगंज और सारण जिला में चीनी मिलें केन्द्रित हैं, क्योंकि यह क्षेत्र गन्ना उत्पादन के लिए अत्यन्त ही अनुकूल है।
                       बिहार में कुछ चीनी मिलें दरभंगा जिला के सकरी, लोहार, हसनपुर एवं मुजफ्फरपुर जिला के मोतीपुर में हैं। राज्य के दक्षिणी भाग में भी चीनी के कुछ कारखाने स्थित हैं। इनमें विक्रमगंज, बिहटा और गुरारू की चीनी मिलें हैं। नवादा के वारिसलीगंज में भी एक चीनी मिल थी जो पिछले कई वर्षों से  बंद पड़ी है।   
                       चीनी मिलों से सह उत्पादन के रूप में विद्युत, कागज, छोवा एवं एथेनॉल निर्माण भी होता है।
प्रश्न 2.बिहार में वस्त्र उद्योग पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
उत्तर- वस्त्र उद्योग बिहार का एक प्राचीन उद्योग है। इस उद्योग में एक विशेष समुदाय की भागीदारी रही है। यह काम यहाँ ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र दोनों में होता है। भागलपुर के तसर कपड़े, लुंगी एवं चादर देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। औरंगाबाद जिले के ओबरा तथा दाउदनगर के बने कालीन की मांग सम्पूर्ण भारत में है। बिहार में सूती, रेशमी एवं ऊनी वस्त्र तैयार किये जाते हैं।
                      कच्चे माल के अभाव में यहाँ सूती मिल का अधिक विकास नहीं हुआ है, लेकिन सस्ते मजदूर तथा बाजार की उपलब्धता के कारण डुमरांव, गया, मोकामा, मुंगेर, फुलवारीशरीफ, ओरमांझी, भागलपुर में यह उद्योग विकसित हुआ है। यहाँ छोटी-छोटी मिलें स्थापित हैं जिसके लिए सूत कानपुर एवं अहमदाबाद से मंगाया जाता है।

                मुंगेर, मुजफ्फरपुर एवं पटना जिलों में स्थानीय भेड़ों से प्राप्त उन से कम्बल बनाया जाता है।

बिहार में हस्तकरघा प्रक्षेत्र राज्य का एक बड़ा औद्योगिक प्रक्षेत्र है। यहाँ 34,320 करघे हैं जिनमें 10817 सहकारी एवं 23503 गैर सहकारी क्षेत्र में हैं। इसके अलावे 11361 विद्युत चालित करघे हैं। यह उद्योग पटना, गया, भागलपुर, बांका, दरभंगा, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, भभुजा, नवादा, खगड़िया, नालन्दा एवं मधुबनी जिलों में केन्द्रित हैं। हस्तकरघा उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं।
 
प्रश्न 3.बिहार के प्रमुख सड़क मार्गों के विस्तार एवं विकास पर प्रकाश डालिए।
उत्तर- परिवहन के साधनों में सड़कमार्ग का विस्तार बिहार में सबसे पहले हुआ था। अशोक एवं शेरशाह दो सम्राटों ने सड़कमार्ग के विकास में यहाँ काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आजादी के बाद सड़क का विस्तार काफी हुआ है। यहाँ वर्तमान में सड़कों की कुल लम्बाई 81,680 किमी. है। वर्तमान सड़क मार्ग को प्रशासनिक एवं कार्मिक दृष्टि से पाँच वर्गों में बाँटा गया है-राष्ट्रीय उच्च पथ, राज्य उच्च पथ, मुख्य जिला सड़कें, अन्य जिला सड़कें एवं ग्रामीण सड़कें।

राज्य में सबसे अधिक विस्तार ग्रामीण सड़कों का हुआ है, इसकी कुल लंबाई 8.3261.36 किमी. हैं इनमें 27,400 किमी. पक्की एवं 35861.63 किमी. सड़कें कच्ची हैं। इनके निर्माण एवं रख-रखावे का कार्य ग्राम पंचायत या प्रखंड विकास कार्यालय द्वारा होता है।   

            वर्तमान में सड़कों के विकास पर अधिक बल दिया जा रहा है। इसमें सम्पूर्ण उच्च पथों की मरम्मती, नवीकरण और उन्नयन कार्य सम्मिलित है। वर्ष 2006-07 में 773 किमी. और जनवरी 2008 तक 552 किमी. राष्ट्रीय उच्चपथों का नवीकरण किया गया। राज्य एवं जिला पथों  का भी तेजी से उन्नयन हो रहा है। वर्ष 2006 में 1054 किमी. सड़कों को राज्यपथ घोषित किया गया और एशियन बैंक के सहयोग से इन्हें दो लेनेवाले उच्चपथों में उन्नयन का कार्य जारी है। वर्ष 2008 में 772 किमी. सड़कों को राज्य पथ घोषित किया गया है। बिहार की कई सड़कें अन्तर्राष्ट्रीय सीमा तक भी जाती हैं। जैसे नेपाल सीमा तक उत्तरी बिहार में बाढ़ जैसी प्राकृतिक बाधा के कारण सड़कों का विकास कम हुआ है।

प्रश्न 4.बिहार के रेल अथवा जलमार्ग का विस्तार से चर्चा कीजिए।
उत्तर- रेलमार्ग- बिहार में रेलमार्ग का विकास ब्रिटिश काल में सर्वप्रथम 1860 में हुआ था । इस अवधि में गंगा के किनारे ईस्ट इंडिया कम्पनी ने कोलकाता तक पहली रेल लाइन बिछाई । यह रेलमार्ग मुख्यतः सुरक्षा और प्रशासनिक कार्य के लिए बनाया था और इससे पटना का सम्पर्क पश्चिमी और पूर्वी भारत से स्थापित हो गया। इसके बाद उत्तरी-बिहार में पूरब-पश्चिम रेलमार्ग का निर्माण हुआ। 
                  उन्नीसवीं सदी के अन्तिम दशक तक कोलकाता से तत्कालीन बिहार के कई स्थानों को मिला दिया गया। बीसवीं सदी के मध्य तक अर्थात आजादी के समय तक उत्तरी बिहार में मीटरगेज के विकास के साथ कई शहरों को जोड़ दिया गया था। जबकि दक्षिण बिहार में अधिकतर बड़ी गेज का विकास हुआ था। स्वतंत्रता के बाद 1959 में राजेन्द्र सेतु निर्माण के उपरान्त उत्तरी और दक्षिणी बिहार का रेलमार्ग द्वारा सम्पर्क स्थापित हो गया।           
               2001 तक इस राज्य में रेल लाइन की कुल लम्बाई 6,283 किमी. हो गई है और हाजीपुर में 2002 में पूर्व-मध्य रेलवे का मुख्यालय स्थापित हो गया। 2003 में रेल लाइन को और विकसित किया गया और फतुहा-इस्लामपुर बड़ी लाइन बिछाई गई, इसके बाद राजगीर-नटेसर रेल-लाइन विस्तृत हुआ। बाँका को भागलपुर मन्दार हिल रेल लाइन से जोड़ दिया गया। दीघा-सोनपुर के बीच गंगा पर रेलपुल का निर्माण काम चल रहा है। किऊल-गया मार्ग में तिलैया स्टेशन के दक्षिण में कोडरमा तथा उत्तर में राजगीर से जोड़ने का काम चल रहा है। वर्तमान समय में बिहार के रेलमार्ग का नक्शा काफी बदल चुका है। सभी राज्यों की राजधानियों या मुख्य नगरों के लिए पटना से रेलगाड़ी रवाना होती है।   

            राज्य के भीतरी भागों में सवारी, एक्सप्रेस, शटल इ. एम. यू. तथा डी. एम. यू. गाड़ियाँ दौड़ती हैं। रेलवे के विकास एवं विस्तार के क्रम में कई बड़ी योजनाएं चल रही हैं। किऊल-मुगलसराय रेल लाइन पटना-गया रेललाइन का विद्युतीकरण हो चुका है। पटना जंक्शन का विस्तार कर राजेन्द्रनगर तक कर दिया गया है। पटना-गया लाइन का दोहरीकरण हो रहा है।


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खण्ड (क)

इकाई-5. बिहार : (क) खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

खनिज एवं ऊर्जा संसाधन


खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. बिहार में खनिज तेल मिलने की संभावनाएँ है:-
(a) हिमालय क्षेत्र में
(b) दक्षिण बिहार के मैदान में
(c) दक्षिण बिहार के पहाड़ी क्षेत्र में
(d) गंगा के द्रोणी में
उत्तर- (d) गंगा के द्रोणी में 
2. चुना पत्थर का उपयोग मुख्य रूप से किस उद्योग में होता है?
(a) सीमेंट उद्योग
(b) लोहा उद्योग
(c) शीशा उद्योग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) सीमेंट उद्योग 
3. पाइराइट खनिज है-
(a) धात्विक
(b) अधात्विक
(c) परमाणु
(d) ईंधन
उत्तर- (b) अधात्विक
4. बिहार के सोना अयस्क से प्रतिटन शुद्ध सोना प्रलत होता है-
(a) 05 से 06 ग्राम
(b) 0.1 से 0.6 ग्राम
(c) 00.00 से 0.1 ग्राम
(d) 0.001 से 0.003 ग्राम
उत्तर- (b) 0.1 से 0.6 ग्राम
5. कहलगाँव तापीय विद्युत परियोजना किस ज़िला में अवस्थित है?
(a) भागलपुर
(b) मुंगेर
(c) जमुई
(d) साहेबगंज
उत्तर- (a) भागलपुर
6. कांटी तापीय विद्युत परियोजना किस जिले में स्थापित है?
(a) पूर्णिया
(b) सिवान
(c) मुज़फ्फरपुर
(d) पूर्वी चंपारण
उत्तर- (c) मुजफ्फरपुर
7. बिहार में बी०एच०पी०सी० द्वारा वृहत्त परियोजनाओं की संख्या कितनी है?
(a) 3
(b) 10
(c) 5
(d) 7
उत्तर- (b) 10
8. बिहार में कार्यरत जल-विद्युत परियोजनाओं की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता कितनी है?
(a) 35.60 मेगावाट
(b) 44.20 मेगावाट
(c) 50.69 मेगावाट
(d) 30 मेगावाट
उत्तर- N/A (b) 44.20 मेगावाट
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर:
प्रश्न 1.अभ्रक कहाँ मिलता है? इसका क्या उपयोग है?
उत्तर- बिहार में अभ्रक का भंडार झारखण्ड के संलग्न क्षेत्रों नवादा, जमुई और बाँका जिलों में है। यहाँ मस्कोव्हाइट अभ्रक पाया जाता है।
                अभ्रक का उपयोग निम्नलिखित रूपों में किया जाता है-
(i) इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में 
(ii) आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में  
(iii)  विद्युत उपकरण बनाने में
(iv) सजावटी सामानों के निर्माण में
प्रश्न 2. बिहार में ग्रेफाइट एवं यूरेनियम के वितरण को लिखिए।
उत्तर- ग्रेफाइट का वितरण- बिहार में ग्रेफाइट मुंगेर एवं रोहतास जिले में मिलता है।
यूरेनियम का वितरण- बिहार में यूरेनियम गया जिले के सुईगार के निकट अखबारी पहाड़ी के अलावे जहानाबाद, अरवल, मुंगेर, जमुई, तथा भागलपुर जिलों में नगण्य मात्रा में मिलता है।
प्रश्न 3. बिहार में तापीय विद्युत केन्द्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- परम्परागत ऊर्जा स्रोतों में बिहार में कई तापीय विद्युत केन्द्र हैं। जैसे- कहलगांव, कांटी और बरौनी तापीय विद्युत केन्द्र प्रमुख है। इन परियोजनाओं के अतिरिक्त बाढ़ और नवीनगर तापीय विद्युत परियोजना  हैं।
प्रश्न 4.सोन नदी घाटी परियोजना से उत्पादित जल विद्युत का वर्णन करें।
उत्तर- सोन नदी घाटी परियोजना के पश्चिमी नहर एवं पूर्वी नहर से क्रमशः 6.6 तथा 3.3 मेगावाट पनबिजली का उत्पादन हो रहा है।
प्रश्न 5.बिहार में जल विद्युत के विकास पर प्रकाश डालें।
उत्तर- बिहार में जल विद्युत के विकास के लिए बिहार राज्य जल विद्युत निगम की स्थापना 1982 में की गयी। बिहार में इसकी विकास की संभावनाएं हैं जिन पर तेजी से काम हो रहा है। कैमूर एवं औरंगाबाद जिलों में BHPC के अधीन कई प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अतिरिक्त कई निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाएं भी हैं। जैसे कलेर (अरवल) अगनूर बगहा (प. चम्पारण, ओगरा(औरंगाबाद), तेजपुर डेहरी(रोहतास) का डेलबाग, नासरीगंज (रोहतास), नोखा (रोहतास) का जयनगर इत्यादि जल विद्युत परियोजनाएं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1.बिहार में पाए जाने वाले खनिजों को वर्गीकृत कर किसी एक वर्ग के खनिज का वितरण एवं उपयोगिता को लिखिए।
उत्तर- बिहार में पाए जाने वाले खनिजों को निम्नांकित वर्गों में रखा जा सकता है:-
  • धात्विक खनिज- इसके अन्तर्गत बॉक्साइट, मैग्नेटाइट और सोना अयस्क आते हैं।
  • अधात्विक खनिज- इसके अन्तर्गत चूनापत्थर, अभ्रक, डोलोमाइट, सिलिका सैंड, पाइराइट, क्वार्ट्स, फेल्सपार, चीनी मिट्टी, स्लेट एवं शोरा इत्यादि आते हैं।

धात्विक खनिज –

             बॉक्साइट का भंडार बिहार में 1.5 हजार मीट्रिक टन है। यह गया, जमुई और बांका जिले में मिलता है। मैग्नेटाइट पत्थर का कुल भण्डार 0.59 हजार मीट्रिक टन है। यह बिहार के  पहाड़ी क्षेत्र में मिलता है।

 सोना अयस्क यहाँ बहुत अल्प मात्रा में दक्षिणी बिहार की नदियों के बालू की रेत के साथ मिलता है जिसमें सोना धातु की मात्रा 0.1 से 0.6 ग्राम प्रतिटन प्राप्त होता है। सोना अयस्क का कुल भंडार 128.88 मीट्रिक टन है। बिहार में इसका वाणिज्यिक उत्पादन नहीं है।

प्रश्न 2. बिहार के प्रमुख ऊर्जा स्रोतों का वर्णन कीजिए और किसी एक स्रोत का विस्तार से चर्चा कीजिए।

उत्तर- ऐसे तो बिहार में ऊर्जा का कोई भी स्रोत विकसित नहीं है फिर भी इस क्षेत्र में कुछ इकाई विकसित है भी तो परम्परागत ऊर्जा स्रोतों में तापीय विद्युत केन्द्र है।

            बिहार में तापीय विद्युत के मुख्य केन्द्र कहलगाँव, कांटी और बरौनी में स्थित है। कहलगांव की उत्पादन क्षमता 840 मेगावाट है, कांटी की उत्पादन क्षमता 120 मेगावाट और बरौनी की 145 मेगावाट है।
 इन परियोजनाओं के अतिरिक्त कुछ प्रस्तावित तापीय परियोजनाएं भी है, इनमें बाढ़ और नवीनगर तापीय विद्युत केन्द्र निर्माणाधीन हैं। यहाँ सोन, गंडक और कोसी तीन प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएं भी हैं जिनसे 44.10 मेगावाट जल विद्युत उत्पन्न हो रहा है। कुछ योजनाएं प्रस्तावित भी हैं।
               बिहार में गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों में बायोगैस, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा की भारी संभावनाएं हैं परन्तु विकसित नहीं है।

 बायोगैस गांवों में भोजन बनाने सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये नवीकरणीय ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इस दिशा में लगातार प्रयासरत है  और अबतक 1.25 लाख संयंत्र ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए जा चुके हैं।


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बिहार : कृषि एवं वन संसाधन / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (क) इकाई-5.

बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions
खण्ड (क)

इकाई-5. बिहार : कृषि एवं वन संसाधनकृषि एवं वन संसाधन


बिहार : कृषि एवं वन संसाधन  

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. बिहार में कितने प्रतिशत क्षेत्र में खेती की जाती है?
(a) 50
(b) 60
(c) 80
(d) 36.5
उत्तर- (b) 60
2. राज्य की कितनी प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य में लगी हुई है?
(a) 80
(b) 75
(c) 65
(d) 86
उत्तर- (a) 80
3. इनमें से कौन गन्ना उतपादक जिला नहीं है?
(a) दरभंगा
(b) पश्चिम चंपारण
(c) मुजफ्फरपुर 
(d) रोहतास
उत्तर- (d) रोहतास
4. बिहार के जूट उत्पादन में-
(a) वृद्धि हो रही है
(b) गिरावट हो रही है
(c) स्थिर है
(d) इनमें कोई नहीं
उत्तर- (b) गिरावट हो रही है
5. तम्बाकू उत्पादन क्षेत्र है-
(a) गंगा का उत्तरी मैदान
(b) गंगा का दक्षिणी मैदान
(c) हिमालय की तराई
(d) गंगा का दियारा
उत्तर- (d) गंगा का दियारा
6. कोसी नदी घाटी परियोजना का आरंभ हुआ-
(a) 1950 में
(b) 1948 में
(c) 1952 में
(d) 1954 में
उत्तर- (d) 1954 में
7. गण्डक परियोजना का निर्माण किस स्थान पर हुआ-
(a) बेतिया
(b) बाल्मीकीनगर
(c) मोतिहारी
(d) छपरा
उत्तर- (b) बाल्मीकीनगर
8. बिहार में नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई किस जिले में होती है?
(a) रोहतास
(b) सिवान
(c) गया
(d) पश्चिमी चंपारण
उत्तर- (a) रोहतास
9. बिहार में कुल कितने अधिसूचित क्षेत्र में वन का विस्तार है?
(a) 6374 कि०मी०
(b) 6370 कि०मी०
(c) 6380 कि०मी०
(d) 6350 कि०मी०
उत्तर- (a) 6374 कि०मी०
10. कुशेश्वर स्थान किस ज़िला में स्थित है?
(a) वैशाली में
(b) दरभंगा में
(c) बेगूसराय में
(d) भागलपुर में
उत्तर- (b) दरभंगा में
11. काँवर झील स्थित है-
(a) दरभंगा जिला में
(b) भागलपुर जिला में
(c) बेगूसराय जिला में
(d) मुज़फ़्फ़रपुर जिला में
उत्तर- (c) बेगूसराय जिला में
12. संजय गांधी जैविक उद्यान किस नगर में स्थित है?
(a) राजगीर
(b) बोधगया
(c) बिहारसरीफ
(d) पटना
उत्तर- (d) पटना 
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. बिहार में धान की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें।
उत्तर- बिहार में धान की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाएं निम्नलिखित है:-
 (i)तापमान  – 20-27° से. ग्रे.  
  (ii) वर्षा – 75-200 सेमी. 
 (iii)  मिट्टी- उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी
 (iv) भूमि – समतल 
प्रश्न 2. बिहार में दलहन के उत्पादन एवं वितरण का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर- उत्पादन- बिहार में दलहन फसलों में चना, मसूर, खेसारी, मटर, मूंग, अरहर, उड़द तथा कुरथी प्रमुख हैं।
वितरण- चना, अरहर, मूंग, मसूर, आदि की खेती यों तो बिहार के सभी जिलों में होती है परंतु गंगा के दक्षिणी इलाका इसके लिए ज्यादा प्रसिद्ध है। दलहन उत्पादन में पटना जिला का स्थान सबसे आगे है, जबकि औरंगाबाद और कैमूर क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है।
प्रश्न 3. कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है- इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। इसकी तीन-चौथाई भूमि कृषि क्षेत्र के अंतर्गत आती है तथा यहाँ की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। झारखंड के अलग हो जाने के बाद बिहार के लोगों के लिए कृषि का महत्व अधिक बढ़ गया है। कृषि के अलावे यहाँ अन्य रोजगार के साधनों का अभाव है। अतः कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था का की रीढ़  है।
प्रश्न 4. नदी घाटी परियोजनाओं के मुख्य उद्देश्यों को लिखें।
उत्तर- नदी घाटी  परियोजना के विकास के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है-
● बाढ़ नियंत्रण
● मृदा अपरदन पर रोक
● पेयजल एवं सिंचाई हेतु जलापूर्ति
● विद्युत उत्पादन
● उद्योगों के जलापूर्ति
● परिवहन
● मनोरंजन
● वन्य जीव संरक्षण, मत्स्य पालन, जल कृषि, पर्यटन इत्यादि।
प्रश्न 5. बिहार के नहरों के विकास से सम्बंधित समस्याओं को लिखिए।
उत्तर- बिहार के नहरों के विकास से सम्बंधित समस्याएं निम्नालिखित है:-
(i) दक्षणी बिहार की अधिकांश नदियाँ बरसाती है जिससे जलापूर्ति की समस्या उत्पन्न होती है।
(ii) पूंजी का अभाव
(iii) धरातल का स्वरूप
(iv) सरकार की इच्छाशक्ति का अभाव
(v) जल का असमान वितरण
प्रश्न 6. बिहार के किस भाग में सिंचाई की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर- बिहार के दक्षिणी भाग में सिंचाई की आवश्यकता अधिक है क्योंकि दक्षिणी बिहार की अधिकांश नदियाँ बरसाती है साथ ही  यहाँ नहरों का विकास उतना अधिक नहीं हुआ है।
प्रश्न 7. बिहार में वनों के अभाव के चार कारणों को लिखिए।
उत्तर- बिहार में वनों के अभाव के चार कारण निम्नलिखित है:-
(i) बिहार विभाजन के बाद अधिकतर वनाच्छादित क्षेत्र झारखण्ड में चला गया है। वर्तमान में बिहार में 6.87% भौगोलिक क्षेत्र में ही वन है
(ii) कृषि एवं निर्मित क्षेत्रों के विस्तार के कारण वनों का विनाश काफी तेजी से हुआ है।
(iii) वनों के महत्व से संबंधित जागरुकता का अभाव है।
(iv) वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण भी यहाँ वनों का अभाव है।
प्रश्न 8. संक्षेप में शुष्क पतझड़ वन की चर्चा कीजिए।
उत्तर- बिहार के पूर्वी मध्यवर्ती भाग तथा दक्षिणी-पश्चिमी पहाड़ी भागों में इस प्रकार के वनों का विस्तार है। कैमूर और रोहतास जिले में इसका अधिक विस्तार है। यहाँ के प्रमुख वृक्ष खैर, बहेड़ा, प्लास, महुआ, अमलतास, शीशम, नीम, हर्रे आदि हैं।
प्रश्न 9. बिहार में ऐसे जिलों का नाम लिखिए जहाँ वन विस्तार एक प्रतिशत से भी कम है।
उत्तर- बिहार के सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, पटना, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर, मोतीहारी, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगुसराय, मधेपुरा, खगड़िया, नालन्दा जिलों में एक प्रतिशत से भी कम भूमि में वन मिलते हैं।
प्रश्न 10. बिहार में स्थित राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्यों की संख्या बतायें और दो अभ्यारण्यों की चर्चा करें।
उत्तर- यहाँ 14 अभयारण्य एवं एक राष्ट्रीय उद्यान है। बिहार का संजय गांधी जैविक उद्यान एकलौता राष्ट्रीय उद्यान है।
        दरभंगा जिला में कुश्वेश्वर स्थान वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। बेगुसराय जिला अन्तर्गत मंझौल अनुमंडल में 2500 एकड़ पर फैला कांवर झील एक पक्षी विहार है जहाँ 300 प्रजातियों के पक्षियों का अध्ययन एक साथ संभव है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. बिहार की कृषि की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करें।
उत्तर- बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और यहाँ की 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, साथ ही यहाँ की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। झारखण्ड के अलग हो जाने के बाद बिहार के लोगों के लिए कृषि का महत्व और अधिक बढ़ गया है। 
     यहाँ की कृषि निम्नलिखित समस्याओं से जूझ रही है :- 
  • कृषि का परंपरागत तरीका।
  • किसानों का शिक्षा एवं पूंजी का अभाव होना।
  • खेतों के छोटा आकार।
  • उन्नत किस्म के कृषि यंत्रों का अभाव।
  • परम्परागत बीजों का अभाव।
  • सिचाई की समुचित व्यवस्था का अभाव।
  • वर्षा की अनियमितता अर्थात मानसून पर निर्भरता।
  • बाढ़ एवं सुखाड़ की समस्य।
  • अंधाधुन रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग।
  • मिट्टी का कटाव और भूमि निम्नीकरण की समस्या।
  • रूढ़िवादिता एवं अंधविश्वास।
  • यातायात के साधनों का अभाव।
  • खेतों का दूर-दराज में स्थित होना इत्यादि।

प्रश्न 2. बिहार में कौन-कौन सी फसलें लगाई जाती हैं ? किसी एक फसल के मुख्य उत्पादनों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- बिहार की प्रमुख फसलों में धान, गेहूँ, मकई, जौ, गन्ना, तम्बाकू, मडुआ, ज्वार, दलहन और तेलहन हैं। इसके अतिरिक्त सब्जियों, फल, फूल की भी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।

धान- धान बिहार की खाद्यान फसलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भदई, अगहनी तथा गरमा, अर्थात धान की तीन फसलें लगाई जाती हैं और इसकी खेती राज्य के सभी भागों में की जाती हैं। 2006-07 में यहाँ 33-54 लाख हेक्टेयर भूमि पर लगभग 50 लाख टन धान का उत्पादन दर्ज किया गया।

         उत्तरी तथा पूर्वी भागों में भदई धान की खेती की जाती है, जबकि अगहनी धान की खेती पूरे राज्य में की जाती है।

       धान का सबसे अधिक उत्पादन पश्चिमी चंपारण, रोहतास तथा औरंगाबाद में होता है, इन तीन जिलों में बिहार का 18 प्रतिशत से अधिक धान का उत्पादन होता है। पहले स्थान पर पश्चिमी चम्पारण है जबकि रोहतास और औरंगाबाद का क्रमशः द्वितीय और तृतीय स्थान है। यदि क्षेत्रफल की दृष्टि से देखा जाय तो रोहतास (5.76%) अव्वल है।

प्रश्न 3. बिहार की मुख्य नदी घाटी परियोजनाओं का नाम बतायें एवं सोन अथवा कोसी परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालें।

उत्तर- बिहार की मुख्य नदी घाटी परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं:-

  • सोन नदी घाटी परियोजना
  • गण्डक नदी घाटी परियोजना
  • कोसी नदी घाटी परियोजना
  • दुर्गावती जलाशय परियोजना
  • चन्दन बहुआ परियोजना
  • बागमती परियोजना
  • बरनार जलाशय परियोजना।

सोन नदी घाटी परियोजना- यह बिहार की सबसे पुरानी और पहली नदी घाटी परियोजना है। इसका विकास अंग्रेज सरकार ने 1874 में सिंचाई के लिए किया था। इससे डेहरी के पास से पूरब एवं पश्चिम की ओर नहरें निकाली गई हैं। जिसकी कुल लंबाई 130 किमी0 थी। इस परियोजना से पटना, गया, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, रोहतास इत्यादि जिलों में सिंचाई की जाती है। इस परियोजना से सूखा प्रभावित क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा प्राप्त होने से बिहार का दक्षिणी पश्चिमी क्षेत्र का प्रति हेक्टेयर उत्पादन काफी बढ़ गया जिससे इस क्षेत्र में धान की खेती अधिक होती है। इस कारण से इस क्षेत्र को बिहार का ‘चावल का कटोरा’ कहा जाता है।

         इस परियोजना के अन्तर्गत जल-विद्युत उत्पादन के लिए शक्ति-गृहों की स्थापना की गई है। पश्चिमी नहर पर डेहरी के पास 6.6 मेगावाट उत्पादन क्षमता का शक्ति-गृह स्थापित है। इसी प्रकार पूर्वी नहर शाखा पर बारूण नामक स्थान पर 3.3 मेगावाट क्षमता का शक्ति गृह का निर्माण किया गया है। सोन नदी पर इन्द्रपुरी के पास एक बाँध का निर्माण प्रस्तावित है जिससे 450 मेगावाट पनबिजली उत्पादन का लक्ष्य है।

कोसी नदी घाटी परियोजना- यह परियोजना नेपाल सरकार, भारत सरकार और बिहार सरकार के सामूहिक प्रयास का फल है। इसका मुख्य उद्देश्य नदी के बदलते मार्ग को रोकना, उपजाऊ भूमि की बर्बादी पर नियंत्रण, भयानक बाढ़ से क्षति पर रोक, जल से सिंचाई का विकास, पन बिजली उत्पादन, मत्स्य पालन, नौकायान एवं पर्यावरण पर नियंत्रण आदि है।

           इस परियोजना को कई चरणों में पूरा किया गया है। पहले चरण में मार्ग परिवर्तन पर नियंत्रण, बिहार, नेपाल सीमा पर स्थित हनुमाननगर स्थान पर बैराज का निर्माण, बाढ़ नियंत्रण के लिए दोनों ओर तटबंध का निर्माण, पूर्वी एवं पश्चिमी कोसी नहर एवं उसकी शाखाओं का निर्माण सम्मिलित किया गया।

         पूर्वी नहर तथा इसकी प्रमुख सहायक नहरों द्वारा 14 लाख एकड़ भूमि में सिंचाई की जाती है। इससे पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जिलों में सिंचाई की जाती है। पश्चिमी नहर से नेपाल एवं बिहार के मधुबनी एवं दरभंगा जिलों में सिंचाई की जाती है।

प्रश्न 4. बिहार में वन्य जीवों के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा करें।
उत्तर- बिहार में वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए आदि काल से कई रीति-रिवाजों का प्रचलन है। कई धार्मिक अनुष्ठान तो वृक्षों के नीचे ही किए जाते हैं। कई ऐसे आंचलिक त्योहार भी हैं जो वृक्षों के नीचे ही किए जाते हैं। इस राज्य में परम्परागत रूप से वट, पीपल, आँवला और तुलंसी के पौधों की पूजा की जाती है। हमारे यहाँ चींटी से लेकर साँप जैसे विषैले जन्तु को भोजन दिया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। पक्षियों को भी दाने दिए जाने का प्रचलन है। साथ ही वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यहाँ संजय गाँधी जैविक उद्यान एवं अन्य 14 अभयारण्य हैं। जैसे- बेगुसराय जिला अन्तर्गत कांवर झील, दरभंगा जिला अन्तर्गत कुशेश्वर स्थान इत्यादि।

                 वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण में राज्य सरकार की  कई संस्थाएँ भी कार्यरत हैं। इनमें वन, पर्यावरण एवं जल संसाधन विकास विभाग प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त इस क्षेत्र में कई स्वयंसेवी संस्थाएँ भी काम कर रही हैं। इनमें प्रयास, तरुमित्र , प्रत्यूष और भागलपुर में मंदार नेचर क्लब इत्यादि प्रमुख है।


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खण्ड (क)

इकाई-4. परिवहन, संचार एवं व्यापारपरिवहन


परिवहन, संचार एवं व्यापार

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
 1. स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देशमें सड़कों की कुल लंबाई कितनी थी?
(a) 2.42 लाख कि०मी०
(b) 1.46 लाख कि०मी०
(c) 3.88 लाख कि०मी०
(d) 5.78 लाख कि०मी०
उत्तर- (c) 3.88 कि०मी०
2. पक्की सड़कों की लंबाई की दृष्टि से प्रथम स्थान पर कौन राज्य है?
(a) बिहार
(b) महाराष्ट्र
(c) तमिलनाडु
(d) केरल
उत्तर- (b) महाराष्ट्र 
3. निम्नलिखित में से कौन सड़कों का एक वर्ग नहीं है?
(a) पूरब-पश्चिम गलियारा
(b) एक्सप्रेस वे
(c) स्वर्णिम त्रिभुज राजमार्ग
(d) सीमांत सड़के
उत्तर- (c) स्वर्णिम त्रिभुज राजमार्ग 
4. भारत के किन शहरों में मेट्रो रेल सेवा उपलब्ध है?
(a) कोलकाता एवं दिल्ली
(b) दिल्ली एवं मुम्बई
(c) कोलकाता एवं चेन्नई
(d) दिल्ली एवं बेंगलुरु
उत्तर- वर्तमान समय में उपर्युक्त सभी शहरों में मेट्रो रेल सेवा उपलब्ध है। 
5. किस वर्ष इंडियन एयरलाइंस को इंडियन नाम दिया गया?
(a) 2006
(b) 2003
(c) 2008
(d) 2005
उत्तर- (d) 2005 
6. भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के गठन किस वर्ष किया गया था?
(a) 1986
(b) 1988
(c) 1985
(d) 1989
उत्तर- (a) 1986
7. इन्नौर पत्तन किस राज्य में स्थित है?
(a) गुजरात
(b) गोवा
(c) तमिलनाडु
(d) कर्नाटक
उत्तर- (c) तमिलनाडु
8. भारत को कुल कितने डाक क्षेत्रों में बाँटा गया है?
(a) 7
(b) 5
(c) 6
(d) 8
उत्तर- (d) 8 
9. देश में कितने विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित है?
(a) 10
(b) 7
(c) 15
(d) 5
उत्तर- (b) 7
10. फाल्ट विशेष आर्थिक क्षेत्र कहाँ स्थित है?
(a) बिहार
(b) प०बंगाल
(c) केरल
(d) उड़ीसा
उत्तर- (b) प०बंगाल
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर: 
प्रश्न 1.भारत में सड़कों के प्रादेशिक वितरण का वर्णन प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर- पक्की सड़कों की लंबाई की दृष्टि से महाराष्ट्र को देश में प्रथम स्थान प्राप्त है। यहाँ 2.70 लाख किमी. लंबी पक्की सड़कें हैं। दसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश एवं तीसरे स्थान पर उड़ीसा है। यहाँ क्रमशः 2.47 लाख एवं 2.36 लाख किमी. सड़कें हैं। पक्की सड़कों की सबसे कम लंबाई वाला राज्य लक्षद्वीप है। यहाँ मात्र 01 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क है। सड़कों के घनत्व की दृष्टि से केरल प्रथम, गोआ द्विताय और उड़ीसा तृतीय स्थान पर है।
                     उत्तर भारत में सड़कों का सर्वाधिक घनत्व पंजाब में 122 किलोमीटर प्रति 100 वर्ग किलोमीटर है। इसके बाद उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल का स्थान आता है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में त्रिपुरा प्रथम एवं नागालैंड दूसरे स्थान पर है। पूरे देश में सड़कों का सर्वाधिक घनत्व दिल्ली में है।
प्रश्न 2. भारतीय रेल परिवहन की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-भारतीय रेल परिवहन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है:-
  •  दो  बड़े शहरों एवं महानगरों के बीच तीव्र गति से चलने वाली राजधानी एवं शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है।
  • माल ढुलाई के लिए प्राइवेट कंटेनर एवं वैगन, माल-गाड़ियों में लगाई जा रही है।
  • ट्रेनों की दुर्घटना को रोकने के लिए इंजनों में ए. सी. डी. की व्यवस्था की गयी है।
  • 1 अगस्त, 1947 से रेल मंत्रालय ने रेल यात्री बीमा योजना शुरू की है।
  • कोलकाता एवं दिल्ली में मेट्रो रेल के तहत भूमिगत रेल सेवा दी जा रही है।
  • राजस्थान में शाही रेल गाड़ी ‘पैलेस ऑन व्हील्स’ तथा महाराष्ट्र में डेक्कन ऑडेसी’ रेलगाड़ियाँ चलाई जा रही हैं।
  • पर्वतीय भागों में स्थित पर्यटक स्थलों तक पहुँचने के लिए तथा मनोरंजनपूर्ण यात्रा के लिए नैरो गेज एवं स्पेशल गेज वाली रेलें चलाई जा रही हैं। इनमें शिमला उटी, माउंट आबू, दार्जिलिंग इत्यादि की रेल सेवाएं शामिल हैं।
  • एशिया की सबसे बड़ी और विश्व की तीसरी बड़ी रेल प्रणाली है।
  • विश्व की सबसे अधिक विद्युतीकृत रेलगाड़ियाँ रूस के बाद भारत में ही चलती हैं।
  • बड़ी मात्रा में रोजगार उपलब्ध कराना।
  • आरामदायक एवं सस्ता परिवहन।

प्रश्न 3.भारत के विभिन्न डाक चैनल का संक्षेप में विवरण दीजिए।

उत्तर- (i) राजधानी चैनल- नई दिल्ली से 5 विशेष राज्यों की राजधानीयों के लिए यह डाक सेवा है जिसके लिए पीले रंग की पत्र-पेटियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं।

(ii) मेट्रो चैनल- बेंगलूरू, कोलकाता, चेन्नई, दिल्ली, मुम्बई एवं हैदराबाद के लिए यह डाक सेवा है। इसके लिए नीले रंग वाली पत्र-पेटियों का उपयोग करना चाहिए।

(iii) ग्रीन चैनल- स्थानीय पिनकोड अंकित डाक पत्रों को हरे रंग वाली पत्र-पेटी में डाला जाता है।

(iv) दस्तावेज चैनल- समाचार पत्रों एवं विभिन्न पत्रिकाओं को भेजने के लिए यह डाक सेवा है।

(v) भारी चैनल- यह डाक सेवा बड़े व्यावसायिक संगठनों के डाक पत्रों के लिए है।

(vi) व्यापार चैनल -यह डाक सेवा छोटे व्यापारिक संगठनों के डाक पत्रों के लिए उपलब्ध है।

प्रश्न 4.भारत की निर्यात एवं आयात वाली वस्तुओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- निर्यात की जाने वाली वस्तुएँ- इंजीनियरी सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न और आभूषण, रसायन एवं संबद्ध उत्पाद, वस्त्र, कृषि एवं संबंध उत्पाद, अयस्क एवं खनिज इत्यादि।
आयात की जाने वाली वस्तुएं- पेट्रोलियम एवं संबंधित उत्पाद, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोना और चाँदी, उर्वरक, रसायन, अलौह धातुएँ एवं अन्य सामान है।
 
प्रश्न 5. भारत के प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्गों के बारे में लिखिए।

उत्तर- भारत के पाँच आंतरिक जलमागों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है। ये जलमार्ग निम्नलिखित हैं-

 (i)राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 1- यह इलाहाबाद से हल्दिया के बीच 1620 किमी. की लंबाई में है।

(ii) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 2- यह सदिया से धुबरी तक 891 किमी. की लम्बाई में ब्रह्मपुत्र नदी में विकसित है। इसका उपयोग भारत और बंगलादेश साझेदारी में करते है।

(iii) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 3– कोलम से कोट्टापुरम 205 किमी. लंबा यह जलमार्ग चंपाकारा तथा उद्योगमंडल नहरों सहित पश्चिमी तट नहर में विकसित है। 

(iv) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 4- यह गोदावरी कृष्णा नदियों के सहारे 1095 किमी. में फैला है। पुडुचेरी–काकीनाडा नहर के सहारे यह जलमार्ग आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु एवं पुडुचेरी में फैला है।

(v) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 5- यह जलमार्ग उड़ीसा राज्य में ईस्ट-कोस्ट कनाल, मताई नदी, ब्राह्मणी नदी एवं महानदी डेल्टा के सहारे 623 किमी. की लंबाई में विकसित की जा रही है।

 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर: 
प्रश्न 1. भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर- भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की निम्नलिखित विशेषताएं है –
  • समुद्र द्वारा अधिक व्यापार होने के कारण इस देश में बन्दरगाहों का महत्व बढ़ता जा रहा है।
  • निर्यात की वस्तुओं की संख्या तथा मात्रा में दिनानुदिन वृद्धि होती जा रही है।
  • निर्यात के साथ-साथ आयात व्यापार भी बढ़ता जा रहा है।
  • कृषि के सामान तथा औद्योगिक उत्पादनों में वृद्धि होने से अनुकूल व्यापार संतुलन की प्रवृत्ति स्पष्ट हो रही है।
  • भारत सोने चांदी और रत्नों का आयातकर उनके आभूषण तैयार करके पुनः निर्यातकर आय प्राप्त करता है ।
  • देश में इंजीनियरिंग वस्तुओं, साइकिल, सिलाई की मशीनें, बिजली के पंखे इत्यादि का उत्पादन बढ़ा है और इन वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि हुई है।
  • भारत का विदेशी व्यापार से भारत में प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में बहुत कम होती है। भारत में विदेशी व्यापार से प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में बहुत कम होती है।
  • भारत का 95% विदेशी व्यापार समुद्री मार्ग द्वारा होता है, केवल नेपाल, बांगलादेश और पाकिस्तान के साथ-स्थल और नदियों के द्वारा व्यापार होता है।
  • भारत का विदेशी व्यापार, व्यापारिक समझौतों के अनुसार होता है।
  • वर्तमान समय में भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सॉफ्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। परिणामस्वरूप, सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापार से भी भारत अत्यधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है।
  • भारत का विदेशी व्यापार प्रधानतः कोलकाता, मुम्बई, चेन्नई, कोचीन, पाराद्वीप, कांडला तथा विशाखापट्नम बन्दरगाहों से होता है।
  • भारत का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार विभिन्न नए-नए देशों में बढ़ता जा रहा है और नए-नए बाजार बनते जा रहे हैं।

प्रश्न 2.भारत में पाई जानेवाली विभिन्न प्रकार की सड़कों का विस्तृत विवरण दीजिए।

उत्तर- नागपुर सड़क योजना (1943) के आनुसार भारत के समस्त सड़कों को चार वर्गों में रखा गया है:-
(i) राष्ट्रीय राजमार्ग/ महामार्ग
(ii) राज्य राजमार्ग/ प्रांतीय राजमार्ग
(iii) जिला सड़कें
(iv) ग्रामीण सड़कें
(i) राष्ट्रीय राजमार्ग/ महामार्ग- ये सड़कें देश के विभिन्न राज्यों की राजधानियां, औद्योगिक नगरों तथा पत्तनों को आपस में जोड़ने का काम करता है। इस दृष्टि से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-7 सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है। वाराणसी, जबलपुर, नागपुर, हैदराबाद, बेंगलुरू एवं मदुरई होते हुए कन्याकुमारी तक इस राजमार्ग की लंबाई 2369 किमी. है।
देश में कुल 228 राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, जिनकी कुल लंबाई 66590 किमी. है। सड़कों की कुल लंबाई का यह मात्र 2% है जो यातायात के 40% भाग को ढोता है।
(ii) राज्य राजमार्ग/ प्रांतीय राजमार्ग- ये राज्य की राजधानी को विभिन्न जिला मुख्यालयों और प्रमुख शहरों से जोड़ता है। यह राष्ट्रीय राजमार्गों से भी जुड़ी हुई है। देश में ऐसे सड़कों की लम्बाई कुल सड़कों का मात्र 4% है।
(iii) जिला सड़कें- ये जिला मुख्यालय का संपर्क जिले के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों, कस्बों और प्रखंड मुख्यालयों से कराती है। देश के कुल सड़कों में इनका हिस्सा 14% है।
(iv) ग्रामीण सड़कें- ग्रामीण क्षेत्रों को परस्पर जोड़ने के कारण ये सड़के काफी महत्वपूर्ण है। इसके अंतर्गत देश की कुल सड़कों का 80% भाग शामिल है। प्रधानमंत्री सड़क योजना के अन्तर्गत इनका विकास किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त शहरी सड़के एवं विभिन्न योजनाओं के तहत बनी सड़के भी है।
सीमांत सड़कें- राजनीतिक एवं सामरिक दृष्टि से सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण आवश्यक है। भारत में इन सड़कों का निर्माण एवं रख-रखाव सीमा सड़क संगठन करता है। जिसका गठन 1960 में किया गया था। इन्हीं सड़कों के माध्यम से सीमा पर सैनिकों के लिए आवश्यक सामानों को भेजा जाता है। युद्ध के समय इन सड़कों का महत्व काफी अधिक हो जाती है।
 
प्रश्न 3. भारतीय अर्थव्यवस्था में परिवहन एवं संचार साधनों की महता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- परिवहन एवं संचार के साधन किसी भी क्षेत्र या राष्ट्र के समुचित विकास में आधार का कार्य करते हैं। ये साधन उत्पादन एवं उपभोग अथवा माँग एवं आपूर्ति के बीच संबंध स्थापित करते हैं। इसीलिए इन्हें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा कहा जाता है।संचार के साधनों का महत्व निम्नलिखित है-
  • बड़ी मात्रा में खाद्यान्नों एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों को आवश्यक स्थानों पर पहुँचाता है।
  • व्यापारिक गतिविधियों की सूचनाओं का आदान प्रदान होता है जिससे व्यापार में सहायता मिलती है।
  • बाढ़, तूफान, आतंकी गतिविधियों से संबंधित जानकारियां लोगों तक पहुँचाने एवं उन्हें इसके प्रति जागरूक अथवा सचेत करने में संचार के साधनों का उल्लेखनीय योगदान है।
  • ये कच्चे माल को निर्माण स्थल पर एकत्र करते हैं।
  • परिष्कृत उत्पादों को देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाते हैं।
  • यह देश की रक्षा में लगी हुई सेनाओं के लिए आहार, गोलाबारूद और अन्य आवश्यक सामानों की आपूर्ति करता है।
प्रश्न 4.  भारत मे पाइपलाइन परिवहन का वर्णन कीजिए।
उत्तर-  पाइपलाइन का उपयोग मुखयतः नगरों में जल वितरण के लिए किया जाता है। परंतु आजकल यह परिवहन का एक प्रमुख साधन बन गया है । कच्चे पेट्रोलियम तेल तथा प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिये यह सुगम, सक्षम एवं सुविधाजनक साधन बन गया है। ठोस पदार्थों का घोल बनाकर भी इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है। 
         भारत मे कच्चा तेल परिवहन के लिये पूर्वी तथा उत्तर-पूर्वी भारत और पश्चिमी भारत मे पाइपलाइनें बिछाई गई। 1959 में ऑयल इंडिया लिमिटेड की स्थापना एक निगम के रूप में हुई थी और इसने असम के नहरकटिया तेल क्षेत्र से बरौनी के तेलशोधक कारखाने तक एशिया की पहली सबसे लंबी 1157 किमी० भूमिगत पाइपलाइन का निर्माण किया था। 1986 में इसे बढ़ाकर कानपुर तक ले जाया गया। 
         भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड (गेल) देश में लगभग 4500 किलोमीटर लम्बे गैस पाइपलाइन का संचालन करता है। गुजरात मे हजीरा से उत्तर प्रदेश के जगदीशपुर तक 1730 किलोमीटर लंबा हजीरा-बीजापुर-जगदीशपुर गैस पाइपलाइन है। इसे ही एच०बी०जे० गैस पाइपलाइन कहा जाता है। 

         ठोस पदार्थों के परिवहन की दृष्टि से कुद्रेमुख-मंगलौर पाइपलाइन लौह अयस्क के लिये उदयपुर जिला स्थित महन की खानों से देबारी प्रगलक कारखाना तक रॉक फास्फेट सांद्र के परिवहन के लिए पाइपलाइन प्रसिद्ध है।


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निर्माण उद्योग

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
 1. इनमें से कौन औद्योगिक अवस्थिति का कारक नहीं है?
(a) बाजार
(b) जनसंख्या
(c) पूंजी
(d) ऊर्जा
उत्तर- (b) जनसंख्या
 2. भारत में सबसे पहले स्थापित लौह इस्पात कंपनी निम्नांकित में से कौन है?
(a) भारतीय लौह और इस्पात कंपनी (IISCO)
(b) टाटा लौह इस्पात कंपनी (TISCO)
(c) बोकारो स्टील सिटी
(d) विश्वेश्वरैया लौह और इस्पात उद्योग
उत्तर- (b) टाटा लौह इस्पात कंपनी (TISCO)
 3. पहली आधुनिक सूती निम्न मिल मुम्बई में स्थापित की गई थी, क्योंकि
(a) मुम्बई एक पत्तन है।
(b) यह कपास उतपादक क्षेत्र के निकट स्थित है।
(c) मुम्बई में पूंजी उपलब्ध थी।
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर- (d) उपर्युक्त सभी
 4. निम्नांकित में से कौन उद्योग कृषि पर आधारित नहीं है?
(a) सूतीवस्त्र
(b) सीमेंट
(c) चीनी
(d) जूट
उत्तर- (b) सीमेंट
 5. हुगली औद्योगिक प्रदेश का केन्द्र है?
(a) कोलकता-रिसड़ा
(b) कोलकाता-कोन्नागरि
(c) कोलकाता-मोदिनीपुर
(d) कोलकाता-हावड़ा
उत्तर- (d) कोलकाता-हावड़ा
 6. निम्नलिखित में से कौन उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है?
(a) जे०के ० सीमेंट उद्योग
(b) टाटा लौह एवं इस्पात
(c) बोकारो लौह इस्पात उद्योग
(d) रेमण्ड कृत्रिम वस्त्र उद्योग
उत्तर- (c) बोकारो लौह इस्पात उद्योग
 7. इनमें से कौन उपभोक्ता उद्योग है?
(a) पेट्रो – रसायन
(b) लौह-इस्पात
(c) चीनी उद्योग
(d) चितरंजन लोकोमोटिव
उत्तर- (c) चीनी उद्योग
 8. निम्नलिखित में से कौन छोटे पैमाने का उद्योग है?
(a) चीनी उद्योग
(b) कागज उद्योग
(c) खिलौना उद्योग
(d) विद्युत उपकरण उद्योग
उत्तर- (c) खिलौना उद्योग
9. भोपाल त्रासदी में किस गैस का रिसाव हुआ था?
(a) कार्बन डाइऑक्साइड
(b) कार्बन मोनोऑक्साइड
(c) मिथाई आइसोसाइनाइट
(d) सल्फर डाईऑक्साइड
उत्तर- (c) मिथाई आईसोसाइनाइट
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर:
प्रश्न 1. विनिर्माण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- कच्चे मालों द्वारा जीवनोपयोगी वस्तुएं तैयार करना विनिर्माण उद्योग कहलाता है। वर्तमान समय में यह किसी भी राष्ट्र के विकास एवं सम्पन्नता का सूचक है। जैसे – कपास से कपड़ा, गन्ने से चीनी, लौह-अयस्क से लोहा एवं इस्पात, बॉक्साइट से एल्युमिनियम आदि का निर्माण होता है।
प्रश्न 2. सार्वजनिक और निजी उद्योग में अंतर स्पष्ट करें?
उत्तर- सार्वजनिक उद्योग- वैसे उद्योग जिनका संचालन सरकार स्वयं करती है, सार्वजनिक उद्योग कहलाता है। इसमें भारी तथा आधारभूत उद्योग सम्मिलित है। जैसे- दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला लोहा इस्पात केन्द्र।
निजी उद्योग- वैसे उद्योग जिनका स्वामित्व किसी एक व्यक्ति या संस्था के पास होता है निजी उद्योग कहलाता है। जैसे-टाटा आयरन एण्ड स्टील कंपनी।
प्रश्न 3. उद्योगों के स्थानीयकरण के तीन कारकों को लिखिए।
उत्तर- उद्योगों के स्थानीयकरण के तीन कारक निम्नलिखित हैं:-
  (i) कच्चा माल
 (ii) अनुकूल जलवायु
 (iii) मानवीय संसाधन।
प्रश्न 4. कृषि आधारित उद्योग और खनिज आधारित उद्योग के अंतर को स्पष्ट करें।
उत्तर- कृषि आधारित उद्योग-  ऐसे उद्योग जिसके लिए कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है। उसे कृषि आधारित उद्योग कहते है। जैसे- सुतीवस्त्र उद्योग, रेशमी और ऊनी वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग, चाय उद्योग, कहवा उद्योग, जूट उद्योग।
खनिज आधारित उद्योग– ऐसे उद्योग जो अपने कच्चे माल के लिए खनिजों पर निर्भर है, उसे खनिज आधारित उद्योग कहते हैं। लोहा एवं इस्पात, सीमेंट तथा रसायन उद्योग।
प्रश्न 5. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को उदाहरण सहित वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर- (i) सार्वजनिक उद्योग- वैसे उद्योग जिनका संचालन सरकार स्वयं करती है, सार्वजनिक उद्योग कहलाता है। इसमें भारी तथा आधारभूत उद्योग सम्मिलित है । जैसे- दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला लोहा इस्पात केन्द्र।
(ii) संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग- जब उद्योगों में दो या दो से अधिक व्यक्तियों या सहकारी समितियों का योगदान हो तो उसे संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग कहा जाता है। जैसे आइल इंडिया लिमिटेड, महाराष्ट्र के चीनी उद्योग,अमूल्य(गुजरात) इसके उत्तम उदाहरण है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1.उदारीकरण, निजीकरण और वश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? वैश्वीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है? इसकी व्याख्या करें?
उत्तर- उदारीकरण- उद्योग तथा व्यापार को लालफीता शाही के अनावश्यक प्रतिबंधों से मुक्त करके अधिक प्रतियोगी बनाना उदारीकरण कहा जाता है।
निजीकरण- निजीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें उद्योगों का स्वामित्व किसी एक व्यक्ति या संस्था के पास होता है निजीकरण कहलाता है। इसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था पर सरकारी एकाधिकार कम या समाप्त हो जाता है।
वैश्वीकरण- वैश्वीकरण का अर्थ है देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना, अर्थात् प्रत्येक देश का अन्य देशों के साथ बिना किसी प्रतिबंध के पूँजी, तकनीकी एवं व्यापारिक आदान-प्रदान ही वैश्वीकरण है।
वैश्वीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव   
            भारत सरकार की नवीन आर्थिक नीतियाँ वैश्वीकरण को परिभाषित करने में लगी हुई हैं। हमारा उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ सामंजस्य स्थापित करना है।
             इसके अन्तर्गत सभी वस्तुओं के आयात में खुली छूट, सीमा शुल्क में कमी, विदेशी पूँजी की मुक्त प्रवाह की अनुमति, सेवा क्षेत्र विशेषकर बैंकिंग, बीमा और जहाज रानी क्षेत्रों में विदेशी पूंजी निवेश की छूट और रुपयों को पूर्ण परिवर्तनशील करना है। इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु भारतीय अर्थव्यवस्था का तेजी से वैश्वीकरण हो रहा है। परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में उत्साहवर्द्धक उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं। विदेशी मुद्रा का भण्डार काफी बढ़ गया है, किन्तु हाल ही में निर्यात और कृषि दरों में गतिरोध उत्पन्न हुआ है। विश्वव्यापी मंदी के बावजूद चीन की छोड़कर अन्य विकासशील देशों की तुलना में भारत में सकल घरेलू उत्पाद की दर अधिक है। किन्तु सामाजिक क्षेत्रों की प्रगति संतोषजनक नहीं है। रोजगार सृजन के अवसर कम हुए हैं। गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। अनाज का विपुल भंडार रहते हुए भी भारी संख्या में भारतवासी कुपोषण के शिकार हैं। इसका मुख्य कारण उनमें क्रयशक्ति की कमी है।
              वैश्वीकरण स स्वदेशी उद्योगों विशेषकर कुटीर एवं लघु उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह बात स्पष्ट रूप से कही जा सकती है कि वैश्वीकरण से हमारी अर्थव्यवस्था पर और औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
प्रश्न 2.भारत में सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग का विवरण दीजिए।
उत्तर- इस उद्योग को ज्ञान आधारित उद्योग भी कहते हैं क्योंकि इसमें उत्पादन के लिए विशिष्ट नए ज्ञान, उच्च प्रौद्योगिकी और निरंतर शोध और अनुसंधान की आवश्यकता रहती है।
                         यह वह उद्योग है जो मुख्यतः सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित है। इसने देश के आर्थिक ढाँचे तथा लोगों की जीवनशैली में बहुत क्रांति ला दी है। इस उद्योग के अन्तर्गत आनेवाले उत्पादों में ट्रांजिस्टर से लेकर टी. वी., टेलीफोन, पेपर, राडार, सेल्यूलर टेलीकॉम, लेजर, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष उपकरण, कम्प्यूटर की यंत्र सामग्री (हार्डवेयर) तथा प्रक्रिया सामग्री (सॉफ्टवेयर) इत्यादि हैं। इन्हें उच्च प्रौद्योगिकी भी कहते हैं।
                           इनके प्रमुख उत्पादक केन्द्र बंगलूर, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद, पूणे, चेन्नई, कोलकता, कानपुर तथा लखनऊ हैं। इसके अतिरिक्त 20 सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क हैं जो सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों को एकल विंडो सेवा तथा उच्च ऑकड़े संचार सुविधा प्रदान करते हैं। इसका प्रमुख महत्व रोजगार उपलब्ध कराना है। पिछले दो या तीन वर्षों से यह उद्योग विदेशी मुद्रा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। जिसका कारण तेजी से बढ़ता व्यवसाय प्रक्रिया बाह्यस्रोतीकरण है। इससे जुड़ी अर्थव्यवस्था को ज्ञान अर्थव्यवस्था भी कहा जाता है।
प्रश्न 3.भारत में सूतीवस्त्र उद्योग के वितरण का वर्णन करें।
उत्तर- सूतीवस्त्र बनाने में भारत का एकाधिकार बहुत प्राचीन काल से चला आ रहा है। परन्तु पहली आधुनिक सूती मिल की स्थापना सन् 1818 ई. में कोलकता के निकट फोर्ट ग्लास्टर नामक स्थान पर की गयी जो कुछ समय बाद बंद हो गई और पहली सफल मिल मुम्बई में सन् 1854 ई. में काबस जी नानाभाई डाबर ने लगाई के साथ ही भारत में आधुनिक वस्त्र उद्योग का विकास होने लगा । वर्तमान में यह भारत का सबसे विशाल उद्योग है जो कृषि के बाद दूसरा बड़ा रोजगार प्रदान करता है।
वितरण :-
                देश के अधिकांश सूती वस्त्र मिलें महारष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश, पंजाब में मिलता है।

महाराष्ट्र- यह भारत का सबसे बड़ा सूती वस्त्र तैयार करने वाला राज्य है। यहाँ के मुख्य केन्द्र मुम्बई, शोलापुर, पूणे, वर्धा, नागपुर, औरंगाबाद और जलगाँव हैं।

गुजरात- इसके प्रमुख केन्द्र अहमदाबाद, बड़ौदा, सूरत, भड़ोंच, पोरबंदर, भावनगर एवं नादियार हैं।

पश्चिम बंगाल- इसके मुख्य केन्द्र आवड़ा, मुर्शिदाबाद, हुगली और श्रीरामपुर हैं।

उत्तर प्रदेश- इसके मुख्य केन्द्र मानपुर, मुरादाबाद, आगरा और मोदीनगर हैं।

मध्य प्रदेश- ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर और देवास इसके प्रमुख केन्द्र हैं।

तमिलनाडु- सूती कपड़ों की सर्वाधिक मिलें है। प्रमुख केंद्र  कोयम्बटूर, चेन्नई, मुदैर, तिरुनबेली इत्यादि है।


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1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें:
 
प्रश्न (क) भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण अनाजों के नाम बताओ।

उत्तर- धान और गेहूँ।

प्रश्न (ख) भारत में कौन से तीन प्रमुख मोटे अनाज उगाए जाते हैं?
उत्तर- ज्वार, बाजरा तथा रागी।

प्रश्न  (ग) भारत की तीन नकदी फसलों के नाम बताओ।

उत्तर- भारत की तीन नकदी फसल- गन्ना, कपास एवं तम्बाकू  है।

 प्रश्न (घ)  हमारे देश की सबसे प्रमुख रोपण फसल कौन-सी है?

उत्तर- हमारे देश की सबसे प्रमुख रोपण फसल चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, एवं केला है।

2. अंतर बताओ:

प्रश्न  (क)  नकदी फसल और रोपण फसल।

उत्तर- नकदी फसल- वैसे फसल जिसके उत्पादन को सीधे बाजार में बेचकर नकद पैसा प्राप्त किया जा सकता है, नकदी फसल कहलाता है। जैसे-गन्ना,कपास, केला, तंबाकू इत्यादि। 
रोपण फसल– वैसे फसल जिसे एक बार लगाकर कई वर्षों तक उत्पादन प्राप्त किया जाता है, रोपण कृषि कहलाता है। जैसे–चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला इत्यादि।

प्रश्न (ख) व्यापारिक कृषि और निर्वाहक कृषि।

उत्तर– व्यापारिक कृषि- वैसी कृषि जिसे मुख्या रूप सेे व्यापारिक उद्देश्य के लिए किया जाता हो, व्यापारिक कृषि कहलाता है। जैसे-चाय, कॉफी, रबर इत्यादि।
 
 निर्वाहक कृषि- वैसे कृषि जिसका मुख्य उद्देश्य जीवन का निर्वहन करना होता है, निर्वाहक कृषि कहलाती है जैसे-धान, गेहूँ।
 
3. निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए एक शब्द लिखो :
 
प्रश्न (क) हमारे देश में मानसून के आरंभ में बोई जाने वाली और शरद ऋतु में काटी जाने वाली फसल।
उत्तर- खरीफ फसल
 
प्रश्न (ख) वर्षा के पश्चात जाड़े में बोई जाने वाली और वसंत में काटी जाने वाली फसलें।
उत्तर- रबी फसल
 
प्रश्न (ग) भूमि जिसे खेती करके छोड़ दिया गया है ताकि उर्वरता लौट सके और उस पर पुनः खेती हो सके।
उत्तर- चालू परती भूमि।

प्रश्न (घ) कारखाने के उत्पादन से मिलती-जुलती वैज्ञानिक तथा व्यापारिक ढंग से की जाने वाली एक फसली खेती।

उत्तर-चाय
 
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर : 
प्रश्न 1. भारत में उपजने वाली दो खाद्य; नकदी एवं रेशेवाली फसलों का नाम लिखो।
उत्तर- भारत मे उपजने वाली
 दो खाद्य फसल- धान, गेहूँ। 
 दो नकदी फसल- गन्ना, तम्बाकू। 
 दो रेशेवाली फसल- कपास, जूट।

प्रश्न 2. उपर्युक्त फसलों के उत्पादन करने वाले दो प्रमुख राज्यों का नाम लिखो।

उत्तर-  निम्नलिखित फसल उत्पादन करने वाले दो प्रमुख राज्य-
धान- पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश।
गेहूँ – पंजाब, उत्तर प्रदेश। 
गन्ना- उ. प्र., महाराष्ट्र।
तम्बाकू- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
कपास—महाराष्ट्र, गुजरात
जूट- पश्चिम बंगाल, असम।
प्रश्न 3. भारत में उपजाई जाने वाली वर्षाधीन फसलों के नाम लिखो।
उत्तर- भारत में उपजाई जाने वाली वर्षाधीन फसल- धान, गेहूँ, जूट, ज्वार इत्यादि। 
प्रश्न 4. शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में कृषि के योगदान की चर्चा कीजिए।
उत्तर –भारत मे कृषि को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। आज भी देश के लगभग 63 प्रतिशत लोग रोजगार और आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। अनेकों भारतीय कृषि उत्पाद विदेशों को नियत किया जाता है जिससे देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होता है । गरम मसाले, चाय, रुई आदि ऐसे ही कृषि उत्पाद है।
          अनेकों कृषि उत्पाद से भारतीय उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति की जाती है । जैसे- कच्ची रुई(सूती वस्त्र उद्योग का), गन्ना(चीनी उद्योग का), चाय की पत्तियाँ(चाय उद्योग का), जड़ी-बूटियाँ(औषधि-निर्माण उद्योग का) कच्चा जूट(जूट उद्योग का)। इन सभी उद्योगों के विकास से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
              परन्तु दुर्भाग्य की बात यह है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से आज तक सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान लगातार घट रहा है । जो एक गंभीर चिन्ता का विषय है। कृषि में गिरावट समाज के अन्य क्षेत्रों में गिरावट लाएगा तथा यह क्षेत्रीय विषमता को बढ़ावा देगा। 
प्रश्न 5. भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के कारणों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर–
कृषि

प्रश्न 6. हरित क्रांति से आप क्या समझते है?

उत्तर- भारत में 1967-68 में पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादन में हुए क्रांतिकारी परिवर्तन को हरित क्रांति कहा जाता है। भारत में इसके जन्मदाता महान कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन थे। इसमें मुख्यतः नए बीजों, खादों, और उर्वरकों का प्रयोग तथा सुनिश्चित जलापूर्ति की व्यवस्था के फलस्वरूप कुछ अनाजों की उपज में अधिक वृद्धि हुई।

प्रश्न 7. भारतीय कृषि के (5)पाँच प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।

उत्तर– भारतीय कृषि के (5) पाँच प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखिति है-
 (i) यह देश के आर्थिक जीवन का प्राण है।
(ii) यहाँ की विशाल जनसंख्या के लिए भोजन कृषि से ही प्राप्त होता है।
(iii) जलवायु मिट्टी एवं धरातल की विविधता के कारण भारत में फसलों की विविधता भी पायी जाती है।
(iv) राष्ट्रीय आय में भारतीय कृषि का मुख्य योगदान है।
(v) इससे अनेकों कृषि जन्य उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति होते है।
प्रश्न 8. भारत में उपजाए जानेवाले प्रमुख खाद्य एवं व्यावसायिक फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर– भारत में उपजाए जानेवाले प्रमुख खाद्य फसल- धान, गेहूँ एवं व्यावसायिक फसल- गन्ना, कपास, तम्बाकू है।
 कारण बताओ:
 प्रश्न 1. कपास की खेती दक्कन प्रदेश की काली मिट्टी में अधिकांशतः होती है।
उत्तर- कपास की खेती दक्कन प्रदेश की काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में अधिक की जाती है क्योंकि काली मिट्टी में अधिक समय तक नमी को धारण करने की क्षमता होती है जो  कपास की फसल के लिए बहुत जरूरी है। यही कारण है कि कपास की खेती दक्कन प्रदेश की काली मिट्टी में अधिकांशतः होती है। 
प्रश्न 2. गन्ने की उपज उत्तरी भारत की अपेक्षा दक्षिण भारत में अधिक है।
उत्तर- दक्षिण भारत में गन्ने के उत्पादन के लिए उत्तर भारत से अधिक अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं। साथ ही दक्षिण भारत में उत्पन्न गन्ने का रस अधिक मीठा होता है जबकि उत्तर  भारत में इसकी मिठास कम होती है। यही कारण है कि गन्ने की उपज उत्तरी भारत की अपेक्षा दक्षिण भारत में अधिक है। 
प्रश्न 3. भारत कपास का आयात एवं निर्यात दोनों करता है।
उत्तर- भारत में उत्पादित कपास छोटे रेशेवाली होती है जिसकी गुणवत्ता भी कम होती है अतः ऐसे कपास को कम कीमत पर निर्यात कर उच्च गुणवत्ता एवं लम्बे रेशेवाली कपास का भारत आयात करता है। इसी कारण से भारत कपास का आयात एवं निर्यात दोनों करता है। 
प्रश्न 4. भारत विश्व का एक अग्रणी चाय निर्यातक देश है।
उत्तर- भारत चाय उत्पादन में विश्व का दूसरा बड़ा देश है। यह अपने कुल उत्पादन का 75% भाग निर्यात कर देता है। भारत से लगभग 20 देशों में चाय का निर्यात होता है। भारतीय चाय की गुणवत्ता अच्छी होती है जिसकी माँग विदेशों में अधिक है। यही कारण है कि भारत विश्व का एक अग्रणी चाय निर्यातक देश बन गया है। इसका मुख्य आयातक देश ग्रेट ब्रिटेन है।

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