Research Problemशोध समस्या |
परिचय (Introduction)
शोध समस्या (Research Problem) किसी भी शोध कार्य का प्रारम्भिक एवं सबसे महत्वपूर्ण चरण है। शोध तभी आरम्भ होता है जब शोधकर्ता के मन में किसी विषय के संबंध में प्रश्न उत्पन्न होता है। वास्तव में शोध समस्या वह प्रश्न है जिसका उत्तर वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित अनुसंधान के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। यदि शोध समस्या स्पष्ट नहीं होगी, तो शोध का उद्देश्य, परिकल्पना, शोध अभिकल्प (Research Design) तथा निष्कर्ष भी स्पष्ट नहीं हो पाएँगे। इसलिए शोध समस्या को शोध की आत्मा कहा जाता है।
शोध समस्या के स्रोत (Sources of Research Problems)
शोध समस्याएँ अनेक स्रोतों से उत्पन्न होती हैं। प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं-
1. दैनिक जीवन (Everyday Life):-
दैनिक जीवन में अनेक घटनाएँ, समस्याएँ तथा असमानताएँ शोध प्रश्न उत्पन्न करती हैं। जैसे— किसी क्षेत्र में जनसंख्या वृद्धि अधिक क्यों है? किसी राज्य में साक्षरता कम क्यों है? वर्षा का वितरण असमान क्यों है? ऐसे प्रश्न शोध समस्या का आधार बनते हैं।
2. व्यावहारिक समस्याएँ (Practical Issues):-
समाज, कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, पर्यावरण आदि क्षेत्रों की वास्तविक समस्याएँ भी शोध का विषय बनती हैं। उदाहरण के लिए, किसी रोग के उपचार की नई विधि, प्लास्टिक प्रदूषण, कृषि उत्पादन में गिरावट आदि।
3. पूर्व के शोध (Past Research):-
पहले किए गए शोधों के निष्कर्षों से नई समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। किसी शोध की सीमाएँ या अनुत्तरित प्रश्न आगे नए अनुसंधान का आधार बनते हैं।
4. सिद्धांत या परिकल्पना (Theory/Hypothesis):-
किसी स्थापित सिद्धांत की पुनः जाँच, परीक्षण अथवा नई परिस्थितियों में उसकी सत्यता का अध्ययन भी शोध समस्या का स्रोत होता है। उदाहरण के लिए माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत का आधुनिक परिस्थितियों में परीक्षण।
5. संबंधित साहित्य (Related Literature):-
पुस्तकों, शोध-पत्रों, शोध प्रबंधों तथा पत्रिकाओं के अध्ययन से शोधकर्ता को नए विचार एवं समस्याएँ प्राप्त होती हैं। साहित्य समीक्षा से यह भी पता चलता है कि किन विषयों पर अभी और अध्ययन की आवश्यकता है।
शोध समस्या के लक्षण/गुण (Characteristics of a Research Problem)
एक अच्छी शोध समस्या में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए-
✍️ स्पष्ट एवं निश्चित हो।
✍️ दो या दो से अधिक चरों (Variables) के बीच संबंध व्यक्त करती हो।
✍️ प्रश्नवाचक (Interrogative) रूप में हो।
✍️ जिसकी वैज्ञानिक जाँच संभव हो।
✍️ तार्किक एवं वस्तुनिष्ठ हो।
✍️ नैतिक मूल्यों से संबंधित विवादास्पद प्रश्नों पर आधारित न हो।
✍️ न तो अत्यधिक सामान्य और न ही अत्यधिक संकीर्ण हो।
✍️ समस्या का समाधान शोध विधियों द्वारा संभव हो।
उदाहरण-
⇒ फसल उत्पादन और सिंचाई का क्या संबंध है?
⇒ क्या साक्षरता का प्रभाव जनसंख्या वृद्धि पर पड़ता है?
⇒ क्या गरीबी और शिक्षा के बीच संबंध है?
शोध समस्या चुनने की शर्तें (Conditions for Selecting a Research Problem)
किसी भी शोध कार्य की सफलता मुख्यतः इस बात पर निर्भर करती है कि शोध समस्या का चयन कितनी सावधानी और वैज्ञानिक ढंग से किया गया है। शोधकर्ता को समस्या का चयन करते समय उसके गुणों (Characteristics) के साथ-साथ कुछ आवश्यक शर्तों (Criteria/Conditions) का भी ध्यान रखना चाहिए। यदि शोध समस्या इन शर्तों को पूरा करती है, तभी उस पर प्रभावी एवं सफल शोध किया जा सकता है।
1. क्या समस्या शोध योग्य है? (Is the Problem Researchable?):-
शोध समस्या ऐसी होनी चाहिए जिसका उत्तर वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research) द्वारा प्राप्त किया जा सके। अर्थात् उस समस्या से संबंधित तथ्य (Facts) एकत्र किए जा सकें, उनका विश्लेषण (Analysis) किया जा सके तथा उसके आधार पर निष्कर्ष निकाला जा सके। यदि किसी प्रश्न का उत्तर केवल व्यक्तिगत विश्वास, आस्था, भावना या नैतिक विचारों पर आधारित हो और उसे प्रमाणित न किया जा सके, तो वह शोध योग्य समस्या नहीं मानी जाती।
उदाहरण के लिए, “क्या शिक्षा का स्तर बढ़ने से जनसंख्या वृद्धि दर कम होती है?” यह एक शोध योग्य समस्या है क्योंकि इसके लिए जनसंख्या एवं शिक्षा से संबंधित आँकड़े एकत्र कर उनका विश्लेषण किया जा सकता है। जबकि “क्या सभी लोगों को हमेशा सत्य बोलना चाहिए?” यह एक नैतिक प्रश्न है, इसलिए इसे वैज्ञानिक शोध द्वारा सिद्ध नहीं किया जा सकता।
मुख्य बिंदु:
✍️ समस्या का उत्तर तथ्यों और आँकड़ों से मिल सके।
✍️ समस्या की वैज्ञानिक जाँच संभव हो।
✍️ निष्कर्ष प्रमाणों पर आधारित हो।
2. क्या समस्या नई है? (Is the Problem New / Novelty?):-
एक अच्छी शोध समस्या में नवीनता (Novelty) होनी चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं कि उस विषय पर पहले कभी शोध नहीं हुआ हो, बल्कि यदि शोध हुआ भी है तो उसमें नया दृष्टिकोण (New Perspective), नया क्षेत्र (New Area), नई तकनीक (New Method) या नया समय (New Time Period) शामिल होना चाहिए।
आज के समय में अधिकांश विषयों पर पहले से शोध उपलब्ध है, इसलिए शोधकर्ता को साहित्य समीक्षा (Review of Literature) करके यह पता लगाना चाहिए कि पहले क्या कार्य हुआ है और उसमें कौन-सी कमियाँ (Research Gap) शेष हैं। उसी कमी को आधार बनाकर नया शोध किया जाता है।
उदाहरण के लिए, यदि बिहार में साक्षरता पर पहले शोध हो चुका है, तो शोधकर्ता डिजिटल शिक्षा का ग्रामीण साक्षरता पर प्रभाव जैसे नए विषय का चयन कर सकता है।
मुख्य बिंदु:
✍️ विषय में नवीनता हो।
✍️ पुराने शोध की पुनरावृत्ति न हो।
✍️ नया क्षेत्र, नई पद्धति या नया दृष्टिकोण अपनाया जाए।
3. क्या समस्या सार्थक है? (Is the Problem Significant?):-
शोध समस्या ऐसी होनी चाहिए जिससे समाज, विज्ञान, शिक्षा, अर्थव्यवस्था या किसी विशेष विषय को लाभ मिले। केवल शोध उपाधि (Degree) प्राप्त करने के लिए किया गया शोध उतना उपयोगी नहीं माना जाता, जितना कि समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने वाला शोध।
यदि शोध के परिणाम नीति निर्माण (Policy Making), विकास योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण या अन्य क्षेत्रों में उपयोगी सिद्ध होते हैं, तो वह शोध सार्थक माना जाता है।
उदाहरण के लिए, बिहार में बाढ़ का कृषि उत्पादन पर प्रभाव का अध्ययन किसानों एवं सरकार दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है।
मुख्य बिंदु:
✍️ समाज के लिए उपयोगी हो।
✍️ विषय के ज्ञान में वृद्धि करे।
✍️ व्यावहारिक समस्याओं के समाधान में सहायक हो।
4. क्या शोधकर्ता के लिए संभव है? (Is the Problem Feasible?):-
शोध समस्या का चयन करते समय यह देखना आवश्यक है कि शोधकर्ता उपलब्ध संसाधनों के आधार पर उसे पूरा कर सकता है या नहीं। यदि समस्या बहुत बड़ी, कठिन या महँगी है और शोधकर्ता के पास पर्याप्त साधन नहीं हैं, तो शोध अधूरा रह सकता है।
शोधकर्ता को यह देखना चाहिए कि उसके पास आवश्यक समय, धन, ज्ञान, तकनीकी कौशल, उपकरण तथा आँकड़ों की उपलब्धता है या नहीं।
उदाहरण के लिए, यदि किसी छात्र के पास पूरे भारत का सर्वेक्षण करने के लिए पर्याप्त समय और धन नहीं है, तो उसे किसी एक राज्य या जिले तक सीमित शोध करना चाहिए।
मुख्य बिंदु:
✍️ आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों।
✍️ समय और धन पर्याप्त हो।
✍️ विषय शोधकर्ता की क्षमता के अनुरूप हो।
5. शोधकर्ता की रुचि (Interest of the Researcher):-
जिस विषय में शोधकर्ता की रुचि होती है, उसी विषय पर वह अधिक मन लगाकर कार्य करता है। शोध एक लंबी और धैर्यपूर्ण प्रक्रिया है, इसलिए यदि शोधकर्ता की विषय में रुचि नहीं होगी, तो वह बीच में ही निराश हो सकता है।
रुचि होने पर शोधकर्ता अधिक पुस्तकों का अध्ययन करता है, नई जानकारी खोजता है और कठिनाइयों का समाधान भी आसानी से कर लेता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी विद्यार्थी की रुचि जनसंख्या भूगोल में है, तो उसे उसी क्षेत्र में शोध करना चाहिए।
मुख्य बिंदु:
✍️ विषय में रुचि और उत्साह होना चाहिए।
✍️ कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
✍️ शोध की गुणवत्ता बेहतर होती है।
6. आर्थिक संसाधन (Financial Resources):-
शोध कार्य में कई प्रकार के खर्च होते हैं, जैसे— क्षेत्रीय सर्वेक्षण (Field Survey), यात्रा, प्रश्नावली की छपाई, आँकड़ों का संग्रह, कंप्यूटर, इंटरनेट तथा रिपोर्ट तैयार करना। इसलिए शोधकर्ता को पहले से यह विचार कर लेना चाहिए कि उसके पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं।
यदि धन की कमी हो, तो शोध का क्षेत्र छोटा रखा जा सकता है या किसी संस्था से आर्थिक सहायता (Research Grant) प्राप्त की जा सकती है।
मुख्य बिंदु:
✍️ शोध के लिए पर्याप्त धन होना चाहिए।
✍️ खर्च का पहले से अनुमान लगाना चाहिए।
✍️ आवश्यकता पड़ने पर वित्तीय सहायता प्राप्त की जा सकती है।
7. समय (Time Availability):-
शोध समस्या ऐसी होनी चाहिए जिसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके। यदि शोध का विषय बहुत बड़ा होगा, तो समय पर शोध पूरा नहीं हो पाएगा।
शोधकर्ता को शोध की शुरुआत से पहले समय का सही नियोजन (Time Management) करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डेटा संग्रह, विश्लेषण तथा लेखन का कार्य समय पर पूरा हो सके।
उदाहरण के लिए, यदि किसी छात्र को 6 महीने में शोध पूरा करना है, तो पूरे भारत के बजाय केवल एक जिले का अध्ययन अधिक उपयुक्त होगा।
मुख्य बिंदु:
✍️ उपलब्ध समय के अनुसार विषय चुनें।
✍️ समय का सही प्रबंधन करें।
✍️ समय सीमा के भीतर शोध पूरा हो सके।
8. प्रशासनिक सहयोग (Administrative Support):-
कई शोधों में सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों या अन्य संस्थाओं से आँकड़े प्राप्त करने पड़ते हैं। ऐसे में संबंधित विभागों से अनुमति (Permission) और सहयोग मिलना आवश्यक होता है।
यदि आवश्यक अनुमति नहीं मिलती, तो शोध कार्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए शोध समस्या चुनने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संबंधित संस्थाएँ आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगी।
उदाहरण के लिए, यदि किसी शोध में जिला शिक्षा कार्यालय से विद्यालयों के आँकड़े चाहिए, तो पहले से अनुमति लेना आवश्यक होगा।
मुख्य बिंदु:
✍️ आवश्यक अनुमति मिलने की संभावना हो।
✍️ सरकारी एवं निजी संस्थाओं का सहयोग उपलब्ध हो।
✍️ आँकड़ों तक पहुँच आसान हो।
शोध समस्या के प्रकार (Types of Research Problems)
शोध समस्या विषय एवं उद्देश्य के आधार पर विभिन्न प्रकार की हो सकती है-
1. ऐतिहासिक समस्या (Historical Problem) – अतीत की घटनाओं का अध्ययन।
2. सैद्धांतिक समस्या (Theoretical Problem) – सिद्धांतों के विकास एवं परीक्षण से संबंधित।
3. व्यावहारिक समस्या (Practical Problem) – वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान हेतु।
4. सर्वेक्षण समस्या (Survey Problem) – सर्वेक्षण द्वारा तथ्य संग्रह एवं विश्लेषण।
5. सामाजिक समस्या (Social Problem) – सामाजिक परिवर्तन एवं कल्याण से संबंधित।
6. दार्शनिक समस्या (Philosophical Problem) – विचारधारा एवं दर्शन से जुड़ी समस्याएँ।
7. सहसंबंधात्मक समस्या (Correlational Problem) – दो या दो से अधिक चरों के बीच संबंध का अध्ययन।
शोध समस्या का महत्व (Importance of Research Problem):-
✍️ शोध की दिशा निर्धारित करती है।
✍️ शोध के उद्देश्य स्पष्ट करती है।
✍️ परिकल्पना निर्माण में सहायता करती है।
✍️ उपयुक्त शोध अभिकल्प चुनने में मदद करती है।
✍️ समय एवं संसाधनों की बचत होती है।
✍️ वैज्ञानिक निष्कर्ष प्राप्त करने का आधार बनती है।
✍️ शोध को व्यवस्थित एवं उद्देश्यपूर्ण बनाती है।
निष्कर्ष (Conclusion):-
शोध समस्या किसी भी अनुसंधान की आधारशिला है। एक उपयुक्त शोध समस्या ही सफल शोध का मार्ग प्रशस्त करती है। शोधकर्ता को समस्या का चयन करते समय उसकी नवीनता, उपयोगिता, शोध-योग्यता, उपलब्ध संसाधन, समय, रुचि तथा सामाजिक महत्व का ध्यान रखना चाहिए।
स्पष्ट एवं वैज्ञानिक शोध समस्या से ही प्रभावी परिकल्पना, शोध अभिकल्प और विश्वसनीय निष्कर्ष प्राप्त होते हैं। अतः कहा जा सकता है कि “अच्छी शोध समस्या ही अच्छे शोध की पहली शर्त है।”
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