Unique Geography Notes हिंदी में

Unique Geography Notes in Hindi (भूगोल नोट्स) वेबसाइट के माध्यम से दुनिया भर के उन छात्रों और अध्ययन प्रेमियों को काफी मदद मिलेगी, जिन्हें भूगोल के बारे में जानकारी और ज्ञान इकट्ठा करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस वेबसाइट पर नियमित रूप से सभी प्रकार के नोट्स लगातार विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रकाशित करने का काम जारी है।

GENERAL COMPETITIONS

Median 

माध्यिका

माध्यिका (Median):

      सांख्यिकी में केन्द्रीय प्रवृत्ति का एक महत्वपूर्ण माप है। यह वह मान होता है जो किसी व्यवस्थित (आरोही या अवरोही क्रम में रखे गए) आंकड़ों के समूह को दो बराबर भागों में विभाजित करता है। अर्थात् आधे मान माध्यिका से छोटे होते हैं और आधे मान उससे बड़े होते हैं।

      माध्यिका का उपयोग विशेष रूप से तब किया जाता है जब आंकड़ों में अत्यधिक बड़े या छोटे मान (extreme values) मौजूद हों, क्योंकि ऐसे मान औसत (Mean) को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन माध्यिका पर उनका प्रभाव कम पड़ता है। इसलिए इसे अधिक स्थिर और विश्वसनीय माप माना जाता है।

      यदि आंकड़ों की संख्या विषम (odd) हो, तो माध्यिका वह मध्य का मान होता है जो सभी मानों को क्रम में रखने पर बीच में आता है। उदाहरण के लिए: 3, 5, 7, 9, 11 में माध्यिका 7 है।

     यदि आंकड़ों की संख्या सम (even) हो, तो बीच के दो मानों का औसत माध्यिका कहलाता है। जैसे: 2, 4, 6, 8 में माध्यिका (4 + 6) / 2 = 5 होगी।

     भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र तथा जनसंख्या अध्ययन में माध्यिका का व्यापक उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए आय वितरण, जनसंख्या घनत्व या भूमि स्वामित्व के अध्ययन में माध्यिका वास्तविक स्थिति को बेहतर ढंग से दर्शाती है। इस प्रकार, माध्यिका आंकड़ों के विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण और उपयोगी सांख्यिकीय माप है।

1. व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series) में माध्यिका की गणना:

     व्यक्तिगत श्रेणी में प्रत्येक आंकड़ा अलग-अलग दिया होता है और उनकी कोई आवृत्ति (frequency) नहीं होती। ऐसे आंकड़ों में माध्यिका निकालने के लिए सबसे पहले सभी मानों को आरोही (छोटे से बड़े) या अवरोही (बड़े से छोटे) क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। इसके बाद कुल पदों की संख्या के आधार पर माध्यिका ज्ञात की जाती है।

✍️ जब पदों की संख्या विषम (Odd) हो-

     यदि कुल पदों की संख्या n विषम है, तो माध्यिका का स्थान (n+1)/2 होता है। अर्थात जो मान इस स्थान पर होगा वही माध्यिका कहलाएगा।

उदाहरण:

आंकड़े: 5, 9, 3, 7, 11

क्रम में रखने पर: 3, 5, 7, 9, 11

यहाँ n = 5

माध्यिका का स्थान = (5+1)/2 = 3

तीसरे स्थान का मान 7 है, इसलिए माध्यिका = 7।

✍️ जब पदों की संख्या सम (Even) हो-

    यदि कुल पदों की संख्या n सम है, तो माध्यिका बीच के दो पदों के औसत से निकाली जाती है।

सूत्र:

उदाहरण:

आंकड़े: 4, 8, 6, 10

क्रम में: 4, 6, 8, 10

यहाँ n=4

माध्यिका = (6 + 8) / 2 = 7।

     इस प्रकार व्यक्तिगत श्रेणी में माध्यिका निकालने की प्रक्रिया सरल होती है और यह आंकड़ों को दो बराबर भागों में विभाजित करने वाला मध्य मान दर्शाती है।

2. खंडित श्रेणी (Discrete Series) में माध्यिका की गणना:

    खंडित श्रेणी में प्रत्येक मान (Value) के साथ उसकी आवृत्ति (Frequency) दी होती है। माध्यिका ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं।

✍️ सबसे पहले कुल आवृत्ति (N) ज्ञात करें

      सभी आवृत्तियों को जोड़कर कुल आवृत्ति अर्थात् N निकालते हैं।

✍️ उसके बाद संचयी आवृत्ति (Cumulative Frequency) बनाएं

       आवृत्तियों को क्रमशः जोड़कर संचयी आवृत्ति तैयार की जाती है।

✍️ उसके बाद N/2 वाँ पद का मान निकालें

      कुल आवृत्ति को 2 से भाग देकर N/2 का मान प्राप्त करते हैं।

✍️ फिर माध्यिका का मान निर्धारित करें

      संचयी आवृत्ति में वह पहला मान खोजते हैं जो N/2 के बराबर या उससे बड़ा हो। उसी के सामने जो मान (Value) होगा वही माध्यिका कहलाता है।

उदाहरण-

मान (X) आवृत्ति (f) संचयी आवृत्ति (cf)
10 3 3
20 5 8
30 7 15
40 4 19
50 1 20

यहाँ,

N = 20

N/2 = 10

    संचयी आवृत्ति में 10 से बड़ा या बराबर पहला मान 15 है, जो 30 के सामने है।

अतः माध्यिका = 30

सूत्र-

Median = वह मान जिसकी संचयी आवृत्ति N/2 के बराबर या उससे अधिक हो।

    इस प्रकार खंडित श्रेणी में माध्यिका निकालने के लिए संचयी आवृत्ति का प्रयोग किया जाता है और यह आँकड़ों को दो बराबर भागों में विभाजित करती है।

3. सतत श्रेणी (Continuous Series) में माध्यिका की गणना:

    सतत श्रेणी में आंकड़े वर्ग-अंतराल (Class Interval) के रूप में दिए होते हैं, जैसे 0–10, 10–20, 20–30 आदि। ऐसी स्थिति में माध्यिका निकालने के लिए एक विशेष सूत्र का उपयोग किया जाता है।

चरण (Steps):-

✍️ संचयी आवृत्ति (Cumulative Frequency) तैयार करें।

     दिए गए वर्गों की आवृत्तियों को क्रम से जोड़कर संचयी आवृत्ति बनाते हैं।

✍️ कुल आवृत्ति (N) ज्ञात करें।

    सभी आवृत्तियों को जोड़कर N निकालते हैं।

✍️ N/2 का मान निकालें।

    कुल आवृत्ति को 2 से भाग देते हैं।

✍️ माध्यिका वर्ग (Median Class) पहचानें।

     संचयी आवृत्ति में वह वर्ग खोजते हैं जिसकी संचयी आवृत्ति N/2 के बराबर या उससे अधिक हो। वही माध्यिका वर्ग कहलाता है।

सूत्र-

हाँ-

M = माध्यिका मूल्य

l = माध्यिका वर्गान्तर की निचली सीमा

i = माध्यिका वर्गान्तर का विस्तार

f = माध्यिका वर्ग की आवृत्ति

c = माध्यिका वर्गान्तर से पहले वर्गान्तर की संचयी आवृति

अथवा

जहाँ-

L = माध्यिका वर्ग की निचली सीमा

N = कुल आवृत्ति

Cf = माध्यिका वर्ग से पहले की संचयी आवृत्ति

f = माध्यिका वर्ग की आवृत्ति

h = वर्ग अंतराल (class width)

उदाहरण-

1. निम्नांकित सारणी में 100 परीक्षार्थियों के प्राप्तांक दिए गये है। माध्यिका की गणना कीजिये:

प्राप्तांक परीक्षार्थियों की संख्या
0-10 06
10-20 30
20-30 40
30-40 14
40-50 10

हल:

प्राप्तांक

(वर्गान्तर)

परीक्षार्थियों की संख्या

(आवृति)

 संचयी आवृति
0-10 06 06
10-20 30 36
20-30 40 76
30-40 14 90
40-50 10 100

m = N/2 वाँ वार्गांतर

      = 100/2

      = 50 वाँ वार्गांतर

माध्यिका वार्गांतर = 20-30

Now,

      = 20+10/40 (50-36)

      = 20+(10×40)/40

      = 20+140/40

      = (800+400)/40

      = 940/40

  माध्यिका प्राप्तांक = 23.5

माध्यिका के गुण (Merits of Median)

(i) सरल और समझने में आसान:

       माध्यिका निकालने की विधि बहुत सरल होती है और इसे आसानी से समझा जा सकता है।

(ii) चरम मानों से प्रभावित नहीं होती:

     बहुत अधिक या बहुत कम मान (Extreme Values) माध्यिका को अधिक प्रभावित नहीं करते।

(iii) क्रमबद्ध आंकड़ों के लिए उपयुक्त:

    जब आंकड़े क्रम (order) में हों तो माध्यिका आसानी से निकाली जा सकती है।

(iv) खुले वर्ग अंतराल (Open-end classes) में भी उपयोगी:

    सतत श्रेणी में जहाँ वर्ग अंतराल खुले होते हैं, वहाँ भी माध्यिका निकाली जा सकती है।

(v) ग्राफ द्वारा भी ज्ञात: ओजाइव (Ogive Curve) की सहायता से भी माध्यिका का मान निकाला जा सकता है।

माध्यिका की सीमाएँ (Limitations of Median)

(i) सभी मानों पर आधारित नहीं होती:

     माध्यिका केवल मध्य मान पर आधारित होती है, इसलिए सभी आंकड़ों का पूरा उपयोग नहीं होता।

(ii) गणितीय विश्लेषण में कम उपयोगी:

    माध्यिका पर आगे के गणितीय विश्लेषण करना कठिन होता है।

(iii) अधिक सटीक नहीं मानी जाती:

    कई बार यह औसत (Mean) जितनी सटीक जानकारी नहीं देती।

(iv) क्रमबद्ध करना आवश्यक:

    माध्यिका निकालने से पहले आंकड़ों को क्रम में रखना जरूरी होता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

    माध्यिका सांख्यिकी में केन्द्रीय प्रवृत्ति का एक महत्वपूर्ण माप है। यह विशेष रूप से तब उपयोगी होती है जब आंकड़ों में बहुत अधिक या बहुत कम मान मौजूद हों। हालांकि इसके कुछ सीमित पक्ष भी हैं, फिर भी आय वितरण, जनसंख्या अध्ययन और सामाजिक विज्ञानों में वास्तविक स्थिति को समझने के लिए माध्यिका का व्यापक उपयोग किया जाता है।

I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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