Primary Economic Activities of Humans
(मनुष्य की प्राथमिक आर्थिक गतिविधियाँ)
Q. मानव के प्राथमिक व्यवसायों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

उत्तर- मानव अपनी मूलभूत और उच्चतर आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु विभिन्न प्रकार की आर्थिक क्रियाएं करता है। इन क्रियाओं द्वारा मानव की आर्थिक प्रगति होती है। मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं पर भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है। चूंकि पृथ्वी सतह पर भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण में क्षेत्रीय विभिन्नता विद्यमान है, अतः मानव की आर्थिक क्रियाओं में भी क्षेत्रीय विभिन्नता पाई जाती है।
उदाहरण के लिए वनों में मानव एकत्रीकरण या संग्रहण, आखेट एवं लकड़ी काटने जैसी आर्थिक क्रियाएं सम्पन्न करता है तो घास के मैदानों में पशुचारण, उपजाऊ समतल मैदानी भागों में कृषि, खनिजों की उपलब्धि वाले क्षेत्रों में खनन, जल की उपलब्धि वाले क्षेत्रों में मत्स्याखेट जैसी आर्थिक क्रियाएं करता है। साथ ही अनुकूल अवस्थिति वाले क्षेत्रों में विनिर्माण उद्योगों, परिवहन, व्यापार एवं सेवाओं से सम्बन्धित आर्थिक गतिविधियों में भी संलग्न रहता है।
मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं या गतिविधियों को निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है, यद्यपि ये चारों वर्ग एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित हैं:-
1. प्राथमिक व्यवसाय (Primary Occupation)
2. द्वितीयक व्यवसाय (Secondary Occupation)
3. तृतीयक (Tertiary Occupation)
4. चतुर्थक व्यवसाय (Quaternary Occupation)
1. प्राथमिक व्यवसाय (Primary Occupation):
प्राथमिक व्यवसाय पूर्णतः प्रकृति पर आश्रित होते हैं। प्राथमिक व्यवसायों के संचालन हेतु अपेक्षाकृत विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता होती है। वनों से संग्रहण, आखेट, लकड़ी काटना, घास के मैदानों में पशु चराना, पशुओं से दूध, मांस, खालें, आदि प्राप्त करना, समुद्रों, नदियों एवं झीलों से मछली पकड़ना, कृषि तथा खानों से खनिज निकालना, आदि प्रमुख व्यवसाय हैं।
विश्व के विकासशील देशों में कार्यशील जनसंख्या का अधिकांश भाग प्राथमिक व्यवसायों में लगा हुआ है और विकसित देशों में कार्यशील जनसंख्या का अधिकांश भाग तृतीयक एवं चतुर्थक व्यवसायों में कार्यरत हैं। भारत में 60 प्रतिशत, चीन में 50 प्रतिशत, इथोपिया में 80 प्रतिशत, नाइजीरिया में 70 प्रतिशत जनसंख्या प्राथमिक व्यवसायों में लगी हुई है जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में 8 प्रतिशत, ग्रेट ब्रिटेन में 1 प्रतिशत, जापान में 5 प्रतिशत जनसंख्या ही प्राथमिक व्यवसायों में संलग्न है। मानव के प्रमुख प्राथमिक व्यवसायों का विवरण निम्नानुसार है:-
(i) आखेट, एकत्रीकरण या संग्रहण:-
विश्व के कुछ प्रदेशों में आज भी लोग आखेट, संग्रहण या एकत्रीकरण जैसी आर्थिक क्रियाओं द्वारा अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। उष्ण कटिबन्धीय वनों में रहने वाले अफ्रीका के पिग्मी, मलेशिया के सेमांग, कालाहारी मरुस्थल के बुशमैन, आस्ट्रेलिया के मरुस्थल में रहने वाले आदिम लोग, उत्तरी ध्रुवीय प्रदेशों में रहने वाले एस्किमो एवं लैप्स लोग इस प्रकार की आर्थिक क्रियाओं में संलग्न हैं।
ये लोग अपने आस-पास के पर्यावरण पर पूर्णतया आश्रित होते हैं। ये लोग अपने भोजन के लिए पौधों से विभिन्न प्रकार के फल, जड़ें और पत्तियाँ एकत्रित करते हैं। ये इन पदार्थों की खोज में इधर-उधर घूमते रहते हैं। पशु-पक्षियों के आखेट तथा झीलों और नदियों में मछली पकड़कर ये लोग अपनी भोजन सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। आखेट के लिए ये भाले और धनुष-बाण जैसे साधारण हथियारों का प्रयोग करते हैं।
अपनी वस्त्र और मकान सम्बन्धी आवश्यकता पूर्ति के लिए ये लोग अपने आस-पास के पर्यावरण में उपलब्ध सामग्री उपयोग में लाते हैं। इन लोगों को अपने प्राकृतिक आवास की पूरी जानकारी होती है, क्योंकि इनकी सभी आवश्यकताएं स्थानीय पर्यावरण से ही पूरी होती हैं।
उष्ण कटिबन्धीय वनों में रहने वाले लोग साधारण पैमाने पर जीविकोपार्जन हेतु और निर्यात के लिए वाणिज्यिक संग्रहण का कार्य करते हैं। इसके लिए ये चिकिल रस (इसका उपयोग चिविंग गम बनाने में किया जाता है), बलाता (इसका उपयोग समुद्री केविल, गोल्फ की गेंद का खोल बनाने में किया जाता है), नट (गिरी फल), रेशों, जड़ी-बूटियों, लाख, गोंद, आदि संग्रहण करते हैं।
(ii) पशुपालन:-
आखेट और संग्रहण युग के बाद पशुपालन युग का प्रारम्भ हुआ। इस युग में विभिन्न पर्यावरण में रहने वाले लोगों ने विभिन्न प्रकार के पशुओं को पालतु बनाया। उदाहरण के लिए सवाना घास भूमियों में गाय-बैल, मरुस्थलों में ऊंट, स्टेपी घास भूमियों में भेड़, टुण्डा प्रदेशों में रेण्डियर, एण्डीज के पर्वतीय प्रदेशों में तामा और अल्पाका तथा तिब्बत एवं हिमालय के पर्वतीय प्रदेशों में याक, आदि पशुओं को पालतू बनाया गया। इन पालतू पशुओं से मानव को दूध, मांस, ऊन और खालों की प्राप्ति होती है। इनसे मानव की भोजन, वस्त्र और अन्य अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।
चलवासी पशुपालक अपने पालतू पशुओं के लिए चारे और पानी की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते हैं। प्रत्येक चलवासी जाति एक निश्चित क्षेत्र में रहती है तथा उन्हें अपने उस क्षेत्र में चारागाहों और जल की आपूर्ति के स्रोत क्षेत्रों तथा ऋतुओं के अनुसार होने वाले परिवर्तनों की पूरी जानकारी होती है।
सहारा मरुस्थल, पूर्वी अफ्रीका के तटीय भाग, सऊदी अरब, इराक, ईरान, अफगानिस्तान, चीन, मंगोलिया के शुष्क भाग, दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका, मालागासी के पश्चिमी भाग तथा यूरेशिया के दुण्ड्रा के दक्षिणी सीमान्त पर स्थित क्षेत्रों में चलवासी पशुपालन होता है।
पूर्वी अफ्रीका के मसाई, नाइजीरिया के फुलानी, सहारा मरुस्थल में बद्दू, मध्य एशिया में खिरगीज लोग चतवासी पशुपालन में संलग्न हैं। इन क्षेत्रों में जलवायु उष्ण एवं शुष्क है। यहाँ घास छोटी एवं विरल होती है जो ग्रीष्म ऋतु में सूख भी जाती है। इन क्षेत्रों में प्रति इकाई भूमि की वहन क्षमता कम होती है। ये पशुपालक अपने पशुओं के साथ चारागाहों की खोज में घूमते रहते हैं। ये लोग तम्बुओं में रहते हैं और कठोर जीवन व्यतीत करते हैं।
पर्वतीय प्रदेशों में चरवाहे ग्रीष्म ऋतु में अपने पशुओं को चराने के लिए अधिक ऊंचे स्थानों पर ले जाते हैं और शीत ऋतु में घाटियों में उतर आते हैं। इस प्रकार अपने पशुओं के साथ पशुपालकों के ऋतुओं के अनुसार प्रवास को ऋतु प्रवास (Transhumance) कहते हैं। उदाहरण के लिए हिमालय के पर्वतीय प्रदेश के गुज्जर, गद्दी, बकरवाल और भोटिया ऋतु प्रवास करते हैं।
इसी प्रकार दुण्डा प्रदेश के लैप्स चरवाहे ग्रीष्म ऋतु में उत्तर की ओर तथा शीत ऋतु में दक्षिण में कोणधारी वनों की ओर प्रवास करते हैं।
वर्तमान में चलवासी पशुचारण क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना हो जाने से लोग अब उद्योगों के पास पक्के मकानों में रहने लगे हैं। इसी प्रकार दक्षिणी अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका और आस्ट्रेलिया में चलवासी पशुचारण का स्थान व्यापारिक पशुपालन ने ले लिया है। किरगीजस्तान, कजाखस्तान और उजबेकिस्तान में चलवासी पशुचारण क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराके कपास की कृषि की जाने लगी है।
आधुनिक युग में पशुपालन वैज्ञानिक तरीकों से व्यापारिक आधार पर हो रहा है। उत्तरी अमेरिका का प्रेयरी क्षेत्र, ब्राजील का पठारी भाग और अर्जेण्टीना में विस्तृत पम्पास घास स्थल, वेनेजुएला का लानोस घास स्थल, दक्षिणी अफ्रीका का वेल्ड क्षेत्र, आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड की शीतोष्ण घास भूमि, कैम्पियन सागर के पूर्व तथा अरल सागर के उत्तर के विस्तृत भाग व्यापारिक पशुपालन के उल्लेखनीय क्षेत्र हैं।
व्यापारिक पशुपालन उद्योग पूर्णतया प्राकृतिक चारागाहों पर आश्रित नहीं है। विस्तृत क्षेत्रों में चारे की फसलों और पौष्टिक घासों की खेती की जाती है। पशुओं को सुख-सुविधा सम्पन्न बाड़ों में रखकर खिलाया-पिलाया जाता है। विशेष नस्ल के पशु पाले जाते हैं, जिनकी दूध या मांस उत्पादन क्षमता अत्यधिक होती है। पशुओं के प्रजनन, नस्ल सुधार, रोगों की रोकथाम तथा बीमार पशुओं के इलाज, आदि की ओर विशेष ध्यान दिया जाता है।
पशुओं को बड़े-बड़े बाड़ों में रखा जाता है। इनमें मांस के लिए पशु पाले जाते हैं। डेनमार्क तथा न्यूजीलैण्ड में बड़े पैमाने पर दुग्ध व्यवसाय होता है। आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड में भेड़ ऊन तथा मांस के लिए व्यापारिक स्तर पर पाली जाती हैं।
व्यापारिक पशुचारण में लोगों को प्रवास नहीं करना पड़ता है। वे एक ही स्थान पर रहते हैं। चारे की फसलों की खेती तथा दूध और मांस से संसाधित पदार्थ बनाने के लिए मशीनों का अत्यधिक प्रयोग होता है। इन संसाधित पदार्थों का बाजार अन्तर्राष्ट्रीय है।
(iii) लकड़ी काटना:-
लकड़ी काटने के व्यवसाय का व्यापारिक स्तर पर विकास मुलायम लकड़ी के वृक्षों वाले शंकुधारी वन प्रदेशों में हुआ है। इमारती लकड़ी, लुग्दी, कागज तथा कृत्रिम रेशे बनाने के लिए वनों से लाखों पेड़ काटे जाते हैं। स्वीडन, फिनलैण्ड्स, रूस, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के विस्तृत क्षेत्रों में शंकुधारी वन हैं। इन देशों के इन वनों में लकड़ी काटने का काम व्यापारिक स्तर पर होता है।
पेड़ काटने तथा लट्ठे ढोने के लिए मशीनों का उपयोग होता है। चिराई के कारखाने लकड़ी के लट्ठों को संसाधित करके लुग्दी और कागज बनाते हैं। इन प्रदेशों में काटे गए पेड़ों के स्थान पर नए पेड़ लगाने का कार्य साथ-साथ चलता रहता है। इन प्रदेशों में परिवहन की पर्याप्त सुविधाएं हैं। बड़ी मात्रा में लुग्दी, कागज और अखबारी कागज संसार के अनेक देशों को निर्यात किया जाता है।
उष्ण और उपोष्ण कटिबन्धीय वनों में लकड़ी काटने का व्यवसाय कुछ सुगम्य क्षेत्रों तक ही सीमित है। सागौन, महोगनी, चंदन और रोजवुड के वृक्ष उष्ण कटिबन्धीय वनों में तथा बीच, वर्थ, मैपिल और ओक के वृक्ष मध्य अक्षांशीय वनों में मिलते है। इनका उपयोग इमारते तथा कर्नीचर बनाने में किया जाता है।
भारत, चीन तथा अफ्रीका के घने बसे कुछ देशों में जलाऊ लकड़ी तथा काठ-कोयले की मांग को पूरा करने के लिए पेड़ों, झाड़ियों तथा दूसरे पौधों का सफाया हो चुका है। इन प्रदेशों में काटे गए पेड़-पौधों के स्थान पर नए पेड़ न लगाने के कारण मिट्टी का अपरदन और बाढ़ों की आवृत्ति बढ़ी है।
(iv) मत्स्य ग्रहण:-
मध्य अक्षांशों के तटीय प्रदेशों में मछली पकड़ने का काम व्यापारिक स्तर पर विकसित हो चुका है। शक्ति चालित नावों तथा जलपोतों के द्वारा मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। बड़े-बड़े जहाज तैरते हुए कारखानों का काम करते है जिनमें पकड़ी हुई मछलियों को संसाधित करके डिब्बों में पैक कर दिया जाता है। जहाजों में बने प्रशीतकों की सुविधा के कारण मछलियों को संसार के अनेक देशों में निर्यात किया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ग्रेट ब्रिटेन, जापान तथा नार्वे में व्यापारिक मत्स्य ग्रहण बड़े पैमाने पर विकसित हो गया है।
(v) खनन:-
भू-गर्भ में से खनिजों को निकालने की क्रिया को खनन कहते हैं। खनिजों की उपलब्धता वाले क्षेत्रों को खान क्षेत्र कहते हैं। खनिज प्रकृति में पाए जाने वाले वे जड़ पदार्थ हैं जो रासायनिक तत्व भी हो सकते हैं और यौगिक भी। पृथ्वी पर खनिजों का वितरण असमान है। अधिकांश खनिज नवीकरण के योग्य नहीं हैं।
कोई भी देश खनिजों की उपलब्धता की दृष्टि से आत्मनिर्भर नहीं है। खनिजों के व्यापारिक दोहन को अयस्क की मांग, अयस्क की गुणवत्ता, भू-वैज्ञानिक दशाएं, खान की गहराई तथा पहुंच की दृष्टि से खानों की सुगम्यता, उपलब्ध प्रौद्योगिकी, आवश्यक पूंजी की उपलब्धता, श्रमिकों की आपूर्ति, आदि कारक प्रभावित करते हैं। खनन का कार्य शुरू होने से परिवहन की सुविधाओं का विकास होने लगता है तथा उस क्षेत्र में लोग बसने के लिए आने लगते हैं।
अयस्कों के बेनीफिसीएशन संयन्त्र या तो खानों के समीप स्थापित होते हैं या फिर उपभोक्ता केन्द्रों के निकट स्थापित होते हैं। पेट्रोलियम से प्राप्त अनेक प्रकार के उत्पादों के परिवहन की तुलना में अशुद्ध पेट्रोलियम का परिवहन सस्ता पड़ता है। अतः तेल शोधनशालाएं बन्दरगाहों के समीप या उपभोक्ता केन्द्रों के समीप स्थापित की जाती हैं।
खनन तथा उससे जुड़े व्यवसायों में लगे लोगों की संख्या में प्रतिवर्ष परिवर्तन होता रहता है। इस परिवर्तन के अनेक कारण है, जैसे एक खान के बन्द होने के बाद दूसरी खान का प्रारम्भ होना, अयस्क का लागत मूल्य, अयस्क की मांग, अन्य देशों में नए निक्षेपों की खोज, आदि। अनेक देशों की अर्थव्यवस्था में खनिजों का उत्पादन उल्लेखनीय स्थान रखता है। बोत्सवाना, अजरबेजान, गेबन, कजाखस्तान, चिली, पश्चिमी सहारा, जाम्बिया, आदि कुछ ऐसे देश हैं जिनके कुछ निर्यात मूल्य में 90 प्रतिशत तक भाग खनिजों का होता है।
(vi) कृषि:-
कृषि एक बहुप्रचलित व्यवसाय है। कृषि के लिए सबसे पहले भूमि से वनस्पति को साफ करना पड़ता है। इसके बाद जुताई करके, चुने हुए पौंधों की खेती की जाती है। जिनसे मानव की भोजन, रेशों या अन्य उत्पादों की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।
कृषि के सबसे प्राचीन रूप को स्थानान्तरी कृषि कहते हैं। स्थानान्तरी कृषि अधिकतर उष्ण कटिबन्धीय वनों में रहने वाले लोगों द्वारा की जाती है। वे वनों में पेड़-पौधों को काटकर जला देते हैं। इस प्रकार वन भूमि साफ हो जाती है। वे कुदाल की मदद से रतालू, मैनिआक, टैपिओका, आदि जड़ वाली फसलें उगाते हैं।
वन भूमि के साफ किए गए भागों को दो या तीन साल तक खेती करने के बाद परती भूमि के रूप में छोड़ दिया जाता है और अन्यत्र वन भूमि का दूसरा टुकड़ा साफ कर कृषि की जाती है। स्थानान्तरी कृषि की इस प्रक्रिया में मूल वनों का स्थान कम घने वन ले लेते हैं। इस प्रकार की कृषि में एक छोटे से समुदाय के निर्वाह के लिए विशाल क्षेत्र की आवश्यकता होती है। उत्तर-पूर्वी भारत की जनजातियाँ, मलेशिया के सेमांग तथा अमेजन बेसिन की जनजातियाँ स्थानान्तरी कृषि करती हैं।
मानव सभ्यता के विकास में स्थायी कृषि एक महत्वपूर्ण चरण था। इससे स्थाई बस्ती बसाने को प्रोत्साहन मिला, क्योंकि आसपास ही खेतों में वर्ष भर काम रहता था। प्रत्येक ऋतु में चुनी हुई फसलों की खेती करने के लिए ऋतुओं की दशाओं का सावधानीपूर्वक अध्ययन जरूरी था। भूमि को साफ करने, मिट्टी की जुताई, उपलब्ध जल का सावधानीपूर्वक सिंचाई द्वारा उपयोग तथा फसल काटने के लिए गांव में रहने वाले लोगों का सहयोग आवश्यक हो गया था।
अतिरिक्त भोजन सामग्री उपलब्ध होने के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान में जाने की कोई आवश्यकता नहीं रह गई। फसलों से प्राप्त भूसे तथा पुआल, आदि से पालतू पशुओं को चारा मिल जाता था। पशुओं का खेतों की जुताई तथा कृषि के अन्य कार्यों में उपयोग किया जाता था। इस प्रकार एक प्रभावशाली संगठन बन गया।
अतिरिक्त खाद्यान्न उन लोगों के हिस्से में आता था जो समुदाय की किसी न किसी रूप में सेवा करते थे। पहिए की खोज के बाद पशुओं को गाड़ी खींचने के काम में लाया जाने लगा। अतिरिक्त खाद्यान्न को अन्य उत्पादों से बदलने के लिए गाड़ियों में लाद कर बाहर ले जाया जाने लगा। सड़कों के निर्माण से विभिन्न समुदाय सम्पर्क में आने लगे, विचारों का आदान-प्रदान शुरू हुआ।
कृषि का प्रारम्भ निर्वाह कृषि के रूप में हुआ, क्योंकि इससे स्थानीय समुदाय की आवश्यकताएं तुरन्त पूरी हो जाती थी। पिछले 125 वर्षों में परिवहन तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के विकास के साथ-साथ कृषि में विशिष्टीकरण हो गया है। अधिकतर कृषि कार्यों में मशीनों का प्रयोग करके, विशाल क्षेत्रों में एक फसल की खेती विशेष रूप से होने लगी है।
दूसरे देशों को निर्यात करने के लिए फसल विशेष की कृषि जैसे- कपास, मक्का, गेहूँ, आदि बड़े पैमाने पर होने लगी है। इस प्रकार की कृषि को व्यापारिक कृषि कहते हैं।
रोपण कृषि, कृषि का एक विशिष्टीकृत रूप है। रोपण कृषि के अन्तर्गत सैकड़ों हेक्टेअर भूमि में कहवा, चाय, मसाले, रबड़, आदि की फसलें पैदा की जाती हैं। इन फसलों को मुख्य रूप से निर्यात के लिए ही पैदा किया जाता है। निर्यात से पूर्व इन फसलों को बड़े-बड़े कारखानों में संसाधित किया जाता है। रोपण कृषि में भारी मात्रा में पूंजी का निवेश होता है तथा इसमें बड़ी संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता होती है। रोपण कृषि भारत, श्रीलंका, मलेशिया, आदि देशों के कुछ भागों में की जाती है।
मिश्रित कृषि में फसलें उगाने तथा पशुओं को पालने का कार्य एक साथ किया जाता है। मिश्रित कृषि यूरोप, उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भाग, अर्जेण्टीना के पम्पास, दक्षिण-पूर्वी आस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ्रीका तथा न्यूजीलैण्ड में की जाती है।
ट्रक फार्मिंग एक विशेष प्रकार की कृषि है जिसमें साग-सब्जियों की कृषि नगरीय क्षेत्रों के समीप की जाती है।
उद्यान कृषि के अन्तर्गत नगरीय उपभोग केन्द्रों के समीपवर्ती क्षेत्रों में फल और फूलों की कृषि की जाती है।
आधुनिक कृषि के अन्तर्गत कृषि के विभिन्न कार्यों के लिए भिन्न-भिन्न मशीनों का प्रयोग किया जाता है। अधिक उपज लेने के लिए उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक दवाइयाँ तथा सिंचाई की उत्तम सुविधा का प्रयोग किया जाता है।
विस्तृत कृषि, व्यापारिक कृषि, मिश्रित कृषि, डेयरी फार्मिंग कृषि, उद्यान कृषि आदि आधुनिक ढंग से की जाती है।
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1. मानव की आर्थिक क्रियाओं में क्षेत्रीय विभिन्नता का सबसे उपयुक्त कारण कौन-सा है?
Which best explains regional variation in human economic activities?
(A) केवल जनसंख्या का आकार / Population size only
(B) भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण की क्षेत्रीय विभिन्नता / Regional variation in physical and social environment
(C) केवल राजनीतिक सीमाएँ / Political boundaries only
(D) केवल तकनीकी विकास / Technological development only
Answer: (B)
2. निम्न में से कौन-सा आर्थिक क्रियाओं के चार-स्तरीय वर्गीकरण का सही क्रम है?
Which is the correct four-fold classification of economic activities?
(A) Primary → Secondary → Tertiary → Quaternary
(B) Primary → Tertiary → Secondary → Quaternary
(C) Secondary → Primary → Quaternary → Tertiary
(D) Tertiary → Primary → Secondary → Quaternary
Answer: (A)
3. निम्नलिखित में से कौन-सी गतिविधि प्राथमिक व्यवसाय की मूल प्रकृति को सर्वाधिक स्पष्ट करती है?
Which activity best represents the basic nature of a primary occupation?
(A) Software development
(B) Banking
(C) Forest resource collection
(D) Retail trade
Answer: (C)
4. प्राथमिक व्यवसायों के संबंध में निम्न में से कौन-सा कथन सही है?
Which statement is correct regarding primary occupations?
(A) वे पूर्णतः प्रकृति से स्वतंत्र होते हैं।
(B) वे मुख्यतः प्रकृति पर आश्रित होते हैं।
(C) उनमें विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता कभी नहीं होती।
(D) वे केवल विकसित देशों में पाए जाते हैं।
Answer: (B)
5. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसायों का समूह है?
Which is a group of primary occupations?
(A) Banking, insurance, trade
(B) Mining, agriculture, fishing
(C) Teaching, research, consulting
(D) Manufacturing, construction, processing
Answer: (B)
6. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसाय नहीं है?
Which is NOT a primary occupation?
(A) Fishing
(B) Mining
(C) Agriculture
(D) Manufacturing
Answer: (D)
7. प्राथमिक व्यवसायों के लिए अपेक्षाकृत विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता होने का मुख्य कारण क्या है?
Why do primary occupations generally require relatively extensive areas?
(A) वे सीधे प्राकृतिक संसाधनों एवं भूमि पर निर्भर होते हैं।
(B) उनमें केवल urban population कार्य करती है।
(C) उनमें केवल मशीनों का प्रयोग होता है।
(D) उनका प्राकृतिक पर्यावरण से कोई संबंध नहीं है।
Answer: (A)
8. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसाय और उसके पर्यावरण के बीच सही संबंध दर्शाता है?
Which correctly relates a primary occupation to its environment?
(A) घासभूमि — पशुपालन
(B) खनिज क्षेत्र — मत्स्य ग्रहण
(C) नदी — खनन ही केवल
(D) वन — बैंकिंग
Answer: (A)
9. आखेट एवं संग्रहण आधारित अर्थव्यवस्था की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है?
What is the major characteristic of hunting and gathering economy?
(A) पूर्णतः स्थायी कृषि
(B) अत्यधिक औद्योगिकीकरण
(C) स्थानीय प्राकृतिक पर्यावरण पर अत्यधिक निर्भरता
(D) बड़े पैमाने का विनिर्माण
Answer: (C)
10. निम्न में से कौन-सा आखेट एवं संग्रहण से संबंधित नहीं है?
Which is NOT associated with hunting and gathering?
(A) फल एवं जड़ें एकत्र करना
(B) पशु-पक्षियों का आखेट
(C) मछली पकड़ना
(D) बड़े पैमाने पर मशीन आधारित उद्योग
Answer: (D)
11. निम्न में से कौन-सा समूह source के अनुसार आखेट-संग्रहण से संबंधित समुदायों का उदाहरण देता है?
Which group represents communities associated with hunting and gathering according to the source?
(A) पिग्मी, सेमांग, बुशमैन
(B) मसाई, फुलानी, बद्दू
(C) गुज्जर, गद्दी, बकरवाल
(D) डेनमार्क के डेयरी किसान
Answer: (A)
12. उष्ण कटिबंधीय वनों में वाणिज्यिक संग्रहण में निम्न में से किसका संग्रह किया जाता है?
Which may be collected commercially in tropical forests?
(A) लाख, गोंद एवं जड़ी-बूटियाँ
(B) केवल गेहूँ
(C) केवल कोयला
(D) केवल लौह-अयस्क
Answer: (A)
13. आखेट-संग्रहण समुदायों की प्राकृतिक पर्यावरण के प्रति गहरी जानकारी का प्रमुख कारण क्या है?
Why do hunting-gathering communities possess detailed knowledge of their natural environment?
(A) उनकी आवश्यकताओं का बड़ा भाग स्थानीय पर्यावरण से पूरा होता है।
(B) वे केवल आधुनिक उद्योगों पर निर्भर होते हैं।
(C) वे स्थायी कृषि करते हैं।
(D) वे केवल आयातित वस्तुओं का उपयोग करते हैं।
Answer: (A)
14. पशुपालन के विकास के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा क्रम source की व्याख्या से सर्वाधिक संगत है?
Which sequence is most consistent with the source’s explanation of the development of pastoralism?
(A) व्यापार के बाद संग्रहण का विकास
(B) उद्योग के बाद आखेट का विकास
(C) आखेट-संग्रहण के बाद पशुपालन का विकास
(D) कृषि के बाद ही सभी प्रकार के पशुपालन का विकास
Answer: (C)
15. निम्न में से कौन-सा पशु-पर्यावरण का सही युग्म है?
Which is the correctly matched animal-environment pair?
(A) मरुस्थल — ऊँट
(B) टुण्ड्रा — गाय-बैल
(C) सवाना — याक
(D) तिब्बत — ऊँट
Answer: (A)
16. तिब्बत एवं हिमालय के पर्वतीय प्रदेशों में किस पशु का पालन source में बताया गया है?
Which animal is associated with pastoralism in Tibet and Himalayan mountainous regions?
(A) Camel
(B) Yak
(C) Reindeer
(D) Alpaca
Answer: (B)
17. निम्न में से कौन-सा चलवासी पशुपालन की मूल विशेषता है?
Which is a basic characteristic of nomadic pastoralism?
(A) चारे एवं पानी की खोज में स्थान परिवर्तन
(B) एक ही खेत में स्थायी फसल उत्पादन
(C) केवल urban market services
(D) पूर्णतः factory-based livestock production
Answer: (A)
18. चलवासी पशुपालक अपने स्थान परिवर्तन के दौरान मुख्यतः किन संसाधनों की खोज करते हैं?
Which resources primarily determine the movement of nomadic pastoralists?
(A) चारा और पानी
(B) कोयला और लौह-अयस्क
(C) बाजार और बैंक
(D) कारखाने और बंदरगाह
Answer: (A)
19. निम्न में से कौन-सा चलवासी पशुपालन का क्षेत्र source में उल्लिखित है?
Which is an area of nomadic pastoralism mentioned in the source?
(A) सहारा मरुस्थल
(B) अमेजन का शहरी क्षेत्र
(C) पश्चिमी यूरोप का औद्योगिक क्षेत्र
(D) जापान का महानगरीय क्षेत्र
Answer: (A)
20. निम्न में से कौन-सा समुदाय चलवासी पशुपालन से संबंधित है?
Which community is associated with nomadic pastoralism?
(A) मसाई
(B) डेनिश डेयरी किसान
(C) पम्पास के आधुनिक कृषक
(D) कनाडाई लकड़ी उद्योग कर्मी
Answer: (A)
21. पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु में ऊँचाई की ओर और शीत ऋतु में घाटियों की ओर पशुपालकों का जाना कहलाता है—
Seasonal movement of pastoralists to higher elevations in summer and valleys in winter is called:
(A) Transhumance / ऋतु प्रवास
(B) Plantation
(C) Shifting cultivation
(D) Truck farming
Answer: (A)
22. निम्न में से कौन-सा ऋतु प्रवास का सही उदाहरण है?
Which is an example of transhumance?
(A) कनाडा के औद्योगिक श्रमिक
(B) सहारा के स्थायी कृषक
(C) हिमालय के गुज्जर, गद्दी एवं बकरवाल
(D) डेनमार्क के डेयरी किसान
Answer: (C)
23. निम्न में से कौन-सा कथन Transhumance को Nomadic Pastoralism से अलग करता है?
Which distinguishes transhumance from nomadic pastoralism?
(A) Transhumance में seasonal movement एक अपेक्षाकृत निश्चित ऊर्ध्वाधर/क्षेत्रीय pattern का अनुसरण करता है।
(B) Transhumance में पशुपालन नहीं होता।
(C) Nomadic pastoralism में कभी movement नहीं होता।
(D) दोनों में कोई अंतर नहीं है।
Answer: (A)
24. आधुनिक काल में कुछ क्षेत्रों में चलवासी पशुपालन के स्थान पर व्यापारिक पशुपालन आने का एक प्रमुख कारण क्या बताया गया है?
What is one reason for the replacement of nomadic pastoralism by commercial livestock farming in some regions?
(A) कृषि का पूर्ण अंत
(B) प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण अभाव
(C) पशुओं का विलुप्त होना
(D) उद्योगों एवं आधुनिक सुविधाओं का विकास
Answer: (D)
25. व्यापारिक पशुपालन की कौन-सी विशेषता उसे चलवासी पशुपालन से अलग करती है?
Which feature distinguishes commercial livestock farming from nomadic pastoralism?
(A) पशुपालक एक स्थान पर रहकर वैज्ञानिक एवं व्यापारिक तरीके अपनाते हैं।
(B) वे लगातार नए चरागाह खोजते हैं।
(C) वे केवल प्राकृतिक घास पर निर्भर रहते हैं।
(D) वे बाजार से पूर्णतः कटे रहते हैं।
Answer: (A)
26. व्यापारिक पशुपालन में चारे की फसलों की खेती का क्या महत्व है?
What is the significance of fodder cultivation in commercial livestock farming?
(A) पशुओं के लिए नियंत्रित एवं पौष्टिक चारा उपलब्ध कराना
(B) पशुपालकों को प्रवास के लिए बाध्य करना
(C) प्राकृतिक चरागाह समाप्त करना ही इसका उद्देश्य है।
(D) केवल निर्यात फसल पैदा करना
Answer: (A)
27. निम्न में से कौन-सा व्यापारिक पशुपालन का प्रमुख क्षेत्र source में उल्लिखित है?
Which is a major region of commercial livestock farming mentioned in the source?
(A) उत्तरी अमेरिका का प्रेयरी क्षेत्र
(B) सहारा का केंद्रीय मरुस्थल ही
(C) हिमालय का प्रत्येक भाग
(D) अमेजन का प्रत्येक भाग
Answer: (A)
28. व्यापारिक पशुपालन में नस्ल सुधार एवं रोग नियंत्रण का महत्व किस बात को दर्शाता है?
What does emphasis on breeding and disease control indicate in commercial livestock farming?
(A) इसका वैज्ञानिक एवं बाजारोन्मुख स्वरूप
(B) इसका पूर्णतः निर्वाह स्वरूप
(C) इसका पर्यावरण से पूर्ण विच्छेद
(D) इसका केवल खानाबदोश स्वरूप
Answer: (A)
29. लकड़ी काटने का व्यापारिक विकास विशेष रूप से किस प्रकार के वन प्रदेश में हुआ?
Commercial logging developed particularly in which forest region?
(A) मरुस्थलीय प्रदेश
(B) शंकुधारी वन प्रदेश
(C) टुण्ड्रा का बर्फीला क्षेत्र
(D) घासभूमि
Answer: (B)
30. निम्न में से कौन-सा लकड़ी काटने वाले प्रमुख देशों का समूह है?
Which group represents major commercial logging countries mentioned in the source?
(A) अर्जेंटीना, ब्राजील, वेनेजुएला, उरुग्वे
(B) मिस्र, सऊदी अरब, लीबिया, चाड
(C) भारत, श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया
(D) स्वीडन, फिनलैंड, रूस, कनाडा
Answer: (D)
31. लकड़ी से लुग्दी एवं कागज बनाने वाले उद्योगों का वनों से संबंध किस प्रकार का है?
What is the relationship between pulp and paper industries and forests?
(A) वन कच्चा माल प्रदान करते हैं।
(B) वन केवल बाजार प्रदान करते हैं।
(C) वन केवल श्रमिक प्रदान करते हैं।
(D) वन का कोई संबंध नहीं है।
Answer: (A)
32. मध्य अक्षांशीय तटीय प्रदेशों में व्यापारिक मत्स्य ग्रहण के विकास में कौन-सा कारक महत्वपूर्ण है?
Which factor is important for commercial fishing in middle-latitude coastal regions?
(A) शक्तिचालित नावों एवं जलपोतों का उपयोग
(B) केवल पारंपरिक भाले
(C) केवल ऊँट परिवहन
(D) केवल वर्षा जल
Answer: (A)
33. बड़े मत्स्य जहाजों में मछलियों को संसाधित एवं पैक करने की सुविधा किस प्रवृत्ति को दर्शाती है?
Processing and packing fish aboard large fishing vessels indicates:
(A) मत्स्य व्यवसाय का औद्योगिक एवं व्यापारिक स्वरूप
(B) केवल निर्वाह मत्स्य ग्रहण
(C) पशुपालन
(D) स्थानान्तरी कृषि
Answer: (A)
34. खनन को प्राथमिक व्यवसाय क्यों माना जाता है?
Why is mining classified as a primary occupation?
(A) इसमें पृथ्वी से प्राकृतिक खनिज संसाधनों का प्रत्यक्ष निष्कर्षण होता है।
(B) इसमें केवल manufactured goods बेचे जाते हैं।
(C) इसमें केवल financial services होती हैं।
(D) इसमें केवल research किया जाता है।
Answer: (A)
35. निम्न में से कौन-सा खनन के व्यापारिक दोहन को प्रभावित करने वाला कारक नहीं है?
Which is NOT a factor affecting commercial exploitation of minerals?
(A) अयस्क की मांग
(B) अयस्क की गुणवत्ता
(C) खान की गहराई एवं सुगम्यता
(D) केवल देश की भाषा
Answer: (D)
36. खनिजों के वितरण के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
Which statement is correct regarding mineral distribution?
(A) खनिजों का वितरण असमान है और अधिकांश खनिज non-renewable हैं।
(B) सभी देश खनिजों में आत्मनिर्भर हैं।
(C) सभी खनिज renewable हैं।
(D) खनिज पूरे विश्व में समान रूप से वितरित हैं।
Answer: (A)
37. खनन प्रारम्भ होने के बाद किसी क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं के विकास और बस्ती विस्तार का क्या संबंध हो सकता है?
What may be the relationship between mining and transport/settlement development?
(A) खनन के कारण परिवहन सुविधाएँ विकसित हो सकती हैं और लोगों का आगमन बढ़ सकता है।
(B) खनन हमेशा बस्तियों को समाप्त करता है।
(C) खनन का परिवहन से कोई संबंध नहीं है।
(D) खनन केवल समुद्र में होता है।
Answer: (A)
38. पेट्रोलियम शोधनशालाओं के संदर्भ में source में कौन-सा तर्क दिया गया है?
What reasoning is given in the source regarding petroleum refineries?
(A) अशुद्ध पेट्रोलियम का परिवहन कई petroleum products की तुलना में सस्ता हो सकता है।
(B) पेट्रोलियम का परिवहन असंभव है।
(C) सभी refineries केवल खानों के ऊपर स्थापित होती हैं।
(D) पेट्रोलियम का कोई परिवहन नहीं होता।
Answer: (A)
39. कृषि के विकास के संदर्भ में सबसे प्राचीन रूप किसे बताया गया है?
Which is described as the oldest form of agriculture?
(A) स्थानान्तरी कृषि
(B) रोपण कृषि
(C) मिश्रित कृषि
(D) ट्रक फार्मिंग
Answer: (A)
40. स्थानान्तरी कृषि की मूल प्रक्रिया में क्या शामिल है?
What is involved in the basic process of shifting cultivation?
(A) वनस्पति को काटना-जला कर भूमि साफ करना और कुछ वर्षों बाद दूसरी भूमि पर जाना
(B) स्थायी खेतों में लगातार एक ही भूमि पर खेती करना
(C) केवल greenhouse cultivation
(D) केवल commercial dairy farming
Answer: (A)
41. स्थानान्तरी कृषि में भूमि को कुछ वर्षों के बाद छोड़ने का प्रमुख कारण क्या है?
Why is land left fallow after a few years in shifting cultivation?
(A) समुद्री जल का बढ़ना
(B) भूमि की उर्वरता/उत्पादकता में कमी और नए क्षेत्र की आवश्यकता
(C) उद्योगों की अधिकता
(D) बाजार का पूर्ण अभाव
Answer: (B)
42. निम्न में से कौन-सा स्थानान्तरी कृषि का प्रमुख क्षेत्र source में बताया गया है?
Which is a major area of shifting cultivation mentioned in the source?
(A) उष्ण कटिबंधीय वन
(B) शीतोष्ण घासभूमि ही
(C) मरुस्थलीय क्षेत्र ही
(D) ध्रुवीय हिम क्षेत्र
Answer: (A)
43. स्थायी कृषि के विकास का एक प्रमुख सामाजिक-भौगोलिक परिणाम क्या था?
What was a major socio-geographical consequence of permanent agriculture?
(A) अतिरिक्त खाद्यान्न समाप्त हो गया।
(B) मानव पूरी तरह खानाबदोश बन गया।
(C) परिवहन समाप्त हो गया।
(D) स्थायी बस्तियों को प्रोत्साहन मिला।
Answer: (D)
44. व्यापारिक कृषि की प्रमुख विशेषता क्या है?
What is a major characteristic of commercial agriculture?
(A) बाजार/निर्यात के लिए विशेष फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन
(B) केवल स्थानीय निर्वाह के लिए उत्पादन
(C) केवल जंगली पौधों का संग्रहण
(D) केवल पशुपालन
Answer: (A)
45. रोपण कृषि को कृषि का विशिष्टीकृत रूप क्यों कहा जाता है?
Why is plantation agriculture considered a specialized form of agriculture?
(A) केवल वन्य उत्पादों का संग्रहण
(B) केवल छोटे घरेलू खेतों में खाद्यान्न उत्पादन
(C) केवल पशुपालन
(D) बड़े क्षेत्र में चाय, कॉफी, रबर आदि विशेष फसलों का मुख्यतः व्यापारिक/निर्यात उद्देश्य से उत्पादन
Answer: (D)
46. निम्न में से कौन-सा रोपण कृषि का सही समूह है?
Which is the correct group of plantation crops?
(A) चाय, कॉफी, रबर
(B) गेहूँ, जौ, बाजरा
(C) चना, मसूर, मटर
(D) केवल घास और चारा
Answer: (A)
47. मिश्रित कृषि की सबसे उपयुक्त पहचान क्या है?
What best identifies mixed farming?
(A) फसल उत्पादन और पशुपालन का एक साथ होना
(B) केवल फल उत्पादन
(C) केवल पशुपालन
(D) केवल वन संग्रहण
Answer: (A)
48. ट्रक फार्मिंग मुख्यतः किससे संबंधित है?
Truck farming is mainly associated with:
(A) मरुस्थल में ऊँट पालन
(B) नगरीय क्षेत्रों के समीप साग-सब्जियों की कृषि
(C) पर्वतीय क्षेत्रों में याक पालन
(D) समुद्र में मत्स्य ग्रहण
Answer: (B)
49. उद्यान कृषि का प्रमुख स्थानिक संबंध किससे है?
What is the major locational association of horticulture mentioned in the source?
(A) केवल ध्रुवीय क्षेत्रों में कृषि
(B) केवल खनिज क्षेत्रों में कृषि
(C) नगरीय उपभोग केन्द्रों के समीप फल एवं फूलों की कृषि
(D) केवल समुद्र के भीतर कृषि
Answer: (C)
50. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक आर्थिक गतिविधियों के बदलते स्वरूप को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?
Which best represents the changing nature of primary economic activities?
(A) प्रकृति से पूर्ण स्वतंत्रता
(B) निर्वाह से व्यापारिक एवं वैज्ञानिक उत्पादन की ओर बढ़ता विशिष्टीकरण
(C) प्राथमिक गतिविधियों का पूर्ण अंत
(D) केवल शिकार पर स्थायी निर्भरता
Answer: (B)
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