2. Spearman Rank Correlation (स्पीयरमैन रैंक सहसंबंध)

2. Spearman Rank Correlation (स्पीयरमैन रैंक सहसंबंध)

Spearman Rank Correlation

(स्पीयरमैन रैंक सहसंबंध)

परिचय:

       Spearman Rank Correlation एक Non-Parametric Statistical Method है, जिसका प्रयोग दो चरों (Variables) के बीच संबंध की दिशा (Direction) और मात्रा/तीव्रता (Strength) ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

      इसमें वास्तविक मानों के स्थान पर उनके Ranks (क्रम/श्रेणी) का प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग तब विशेष रूप से किया जाता है जब आँकड़े ordinal हों या data सामान्य वितरण (Normal Distribution) का पालन न करता हो।

     इसका मान −1 से +1 के बीच होता है। +1 पूर्ण धनात्मक, −1 पूर्ण ऋणात्मक तथा 0 कोई सहसंबंध न होने को दर्शाता है।

चार्ल्स स्पीयरमैन एवं रैंक सहसंबंध:

     चार्ल्स स्पीयरमैन ने 1904 में American Journal of Psychology में प्रकाशित अपने प्रसिद्ध शोधपत्र “The Proof and Measurement of Association between Two Things” के माध्यम से इस सहसंबंध पद्धति को प्रस्तुत किया।

      इसका उद्देश्य ऐसे आँकड़ों के बीच संबंध मापना था, जो क्रमसूचक (Ordinal) प्रकृति के थे, जैसे मानसिक क्षमता की रैंकिंग।

    चूँकि इन आँकड़ों के सामान्य वितरण (Normal Distribution) की धारणा उचित नहीं थी, इसलिए स्पीयरमैन ने Rank-based approach का उपयोग किया। इस प्रकार रैंक के आधार पर सहसंबंध ज्ञात करने की यह विधि क्रमसूचक आँकड़ों के विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण बन गई।

स्पीयरमैन रैंक सहसंबंध क्या है?

      स्पीयरमैन रैंक सहसंबंध (Spearman Rank Correlation) एक महत्वपूर्ण सांख्यिकीय माप है, जिसका उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि दो चरों (Variables) के बीच संबंध कितना मजबूत और किस दिशा में है।

     इसमें मूल या कच्चे आँकड़ों (Raw Data) के स्थान पर उनके क्रम या रैंक (Ranks) का प्रयोग किया जाता है। दोनों चरों के आँकड़ों को छोटे से बड़े क्रम में रैंक प्रदान करके उन रैंकों के बीच सहसंबंध ज्ञात किया जाता है।

    सरल शब्दों में, इसे “Ranks पर Pearson Correlation” के रूप में समझा जा सकता है। यह विशेष रूप से क्रमसूचक (Ordinal) आँकड़ों तथा उन स्थितियों में उपयोगी है जहाँ आँकड़ों के सामान्य वितरण की धारणा उपयुक्त नहीं होती।

Spearman Rank Correlation का अर्थ:

    Spearman Rank Correlation को सामान्यतः या ρ(rho) से प्रदर्शित किया जाता है।

     इसका मान: −1 ≤ rs ≤ +1 होता है।

+1 → पूर्ण धनात्मक सहसंबंध

0 → कोई सहसंबंध नहीं

−1 → पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध

Formula:

    जब सभी ranks अलग-अलग हों, तो इसका सामान्य सूत्र है:

      rs= 1 – (6d2/n(n21))

जहाँ-

rs = Spearman Rank Correlation Coefficient

d = दोनों variables के ranks का अंतर

d2 = Rank Difference का square

n = कुल observations

Spearman Rank Correlation निकालने की प्रक्रिया:

Step 1: दोनों Variables की सूची बनाएँ

जैसे- दो क्षेत्रों की Literacy Rate और Per Capita Income।

Step 2: दोनों variables को Rank दें

   सबसे अधिक value को सामान्यतः Rank 1 दिया जाता है।

Step 3: Rank Difference निकालें

       d = R1−R2

Step 4: d2 निकालें

      d2 = (R1 – R2)2

Step 5: सभी d2 को जोड़ें

       ∑d2

Step 6: Formula में मान रखें

rs= 1 – (6d2/n(n21))

उदाहरण: मान लीजिए पाँच जिलों की Literacy Rate और Income के ranks निम्न हैं:

जिला Literacy Rank R1 Income Rank R2 d d2
A 1 2 -1 1
B 2 1 1 1
C 3 3 0 0
D 4 5 -1 1
E 5 4 1 1

d2 = 4

और,

अब:

rs = 1 – (6(4)/5(52−1))

    = 1 – 24/120

     = 1 – 0.20

     = 1 – 0.20

Spearman Rank Correlation की विशेषताएँ:

✍️ यह Non-Parametric Test है।

✍️ इसमें ranks का प्रयोग किया जाता है।

✍️ यह ordinal data के लिए उपयोगी है।

✍️ छोटे sample में भी उपयोग किया जा सकता है।

✍️ यह linear correlation की बजाय variables के monotonic relationship को मापता है।

✍️ Extreme values के प्रति Pearson correlation की तुलना में अपेक्षाकृत कम संवेदनशील हो सकता है।

✍️ इसका coefficient −1 से +1 के बीच होता है।

Geography में Spearman Correlation के उपयोग:

      भूगोल में इसका प्रयोग विभिन्न भौगोलिक एवं सामाजिक-आर्थिक variables के बीच संबंध जानने के लिए किया जा सकता है, जैसे-

✍️ जनसंख्या घनत्व और नगरीकरण

✍️ साक्षरता और आय

✍️ वर्षा और कृषि उत्पादन

✍️ औद्योगीकरण और नगरीकरण

✍️ परिवहन सुविधा और आर्थिक विकास

✍️ स्वास्थ्य सुविधाएँ और जीवन स्तर

✍️ भूमि उपयोग और जनसंख्या वितरण

✍️ विभिन्न जिलों के विकास स्तरों की तुलना

Advantages:

✍️ गणना अपेक्षाकृत सरल है।

✍️ Ordinal data के लिए उपयोगी है।

✍️ Normal distribution की कठोर आवश्यकता नहीं होती।

✍️ Ranking-based geographical studies में प्रभावी है।

✍️ छोटे samples में भी उपयोगी हो सकता है।

Limitations:

✍️ इसमें data की वास्तविक magnitude की जानकारी खोकर ranks में बदल जाती है।

✍️ बहुत अधिक tied ranks होने पर सामान्य formula में tie correction की आवश्यकता पड़ सकती है।

✍️ यह causation (कारण-कार्य संबंध) सिद्ध नहीं करता।

✍️ केवल correlation होने से यह नहीं कहा जा सकता कि एक variable दूसरे का कारण है।

निष्कर्ष (Conclusion):

     Spearman Rank Correlation भूगोल एवं सामाजिक विज्ञानों में दो variables के बीच संबंध की दिशा और strength मापने की महत्वपूर्ण non-parametric विधि है। विशेषकर ranked या ordinal data तथा non-normal data के विश्लेषण में इसका उपयोग अत्यंत उपयोगी है।

Dr. Amar Kumar

Website: https://www.geographynotespdf.com

I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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