Data Collection and Classification(आँकड़ों का संकलन एवं वर्गीकरण) |
आँकड़ों का अर्थ (Meaning of Data):
आँकड़े (Data) किसी विषय, घटना, क्षेत्र या जनसंख्या से संबंधित तथ्यों, सूचनाओं एवं मापों का व्यवस्थित अथवा अव्यवस्थित संकलन हैं, जिनका उपयोग किसी समस्या के अध्ययन, विश्लेषण एवं निष्कर्ष निकालने के लिए किया जाता है।
भूगोल में जनसंख्या, वर्षा, तापमान, कृषि, उद्योग, परिवहन, भूमि उपयोग, आय, साक्षरता आदि से संबंधित सूचनाएँ आँकड़ों के रूप में प्राप्त की जाती हैं।
सरल शब्दों में:
किसी भौगोलिक घटना से संबंधित संख्यात्मक या गुणात्मक तथ्यों के संग्रह को आँकड़े कहा जाता है। अर्थात् The collection of numerical or qualitative facts related to a geographical phenomenon is called data.
आँकड़ों का संकलन (Data Collection):
किसी शोध या भौगोलिक अध्ययन के लिए आवश्यक सूचनाओं को विभिन्न स्रोतों से एकत्र करने की प्रक्रिया को आँकड़ों का संकलन (Data Collection) कहते हैं।
आँकड़ों के संकलन को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है-
(1) प्राथमिक आँकड़े (Primary Data)
(2) द्वितीयक आँकड़े (Secondary Data)
(1) प्राथमिक आँकड़े (Primary Data):
शोधकर्ता द्वारा स्वयं पहली बार किसी निर्धारित उद्देश्य के लिए प्रत्यक्ष रूप से एकत्र किए गए आँकड़े प्राथमिक आँकड़े कहलाते हैं।
जैसे- यदि कोई शोधकर्ता किसी गाँव में जाकर परिवारों से उनकी आय, शिक्षा, व्यवसाय एवं परिवार के आकार की जानकारी स्वयं प्राप्त करता है, तो ये प्राथमिक आँकड़े होंगे।
प्राथमिक आँकड़ों के प्रमुख स्रोत:
2. द्वितीयक आँकड़े (Secondary Data):
ऐसे आँकड़े जो पहले से किसी अन्य व्यक्ति, संस्था या संगठन द्वारा किसी उद्देश्य से एकत्र किए जा चुके हों और बाद में शोधकर्ता द्वारा अपने अध्ययन में उपयोग किए जाएँ, द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं।
उदाहरण- Census Reports, Statistical Abstracts, Government Reports, Economic Survey, Research Papers, Books, Journals, ewspapers, Websites, Institutional Reports।
द्वितीयक आँकड़ों के प्रमुख स्रोत:
(A) प्रकाशित स्रोत (Published Sources):-
प्रकाशित स्रोत (Published Sources) वे स्रोत हैं जिनमें आँकड़े या सूचनाएँ किसी सरकार, संस्था, संगठन, शोधकर्ता या प्रकाशक द्वारा औपचारिक रूप से प्रकाशित की जाती हैं और जिन्हें शोधकर्ता अपने अध्ययन में उपयोग कर सकता है। ये द्वितीयक आँकड़ों (Secondary Data) के प्रमुख स्रोत हैं।
जैसे- जनगणना रिपोर्ट, सरकारी प्रकाशन, शोध पत्र एवं शोध प्रबंध, पुस्तकें एवं पत्रिकाएँ, आर्थिक सर्वेक्षण, Statistical Reports, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट आदि।
(B) अप्रकाशित स्रोत (Unpublished Sources):-
अप्रकाशित स्रोत (Unpublished Sources) का मतलब है ऐसे आँकड़े या रिकॉर्ड जो सार्वजनिक रूप से प्रकाशित नहीं किए गए हैं, लेकिन किसी व्यक्ति, संस्था, कार्यालय या संगठन के पास उपलब्ध हैं और शोध में उपयोग किए जा सकते हैं। ये सामान्यतः द्वितीयक आँकड़ों (Secondary Data) के स्रोत माने जाते हैं।
जैसे- कार्यालयीय अभिलेख, संस्थागत रिकॉर्ड, निजी दस्तावेज, शोधकर्ता के अप्रकाशित सर्वेक्षण रिकॉर्ड, आंतरिक रिपोर्ट एवं Memorandum आदि।
प्राथमिक एवं द्वितीयक आँकड़ों में अंतर
| आधार | प्राथमिक आँकड़े | द्वितीयक आँकड़े |
| संकलन | स्वयं शोधकर्ता द्वारा | पहले से किसी अन्य द्वारा संकलित |
| उद्देश्य | वर्तमान शोध के उद्देश्य के अनुसार | किसी पूर्व उद्देश्य के लिए |
| प्रकृति | Original | Already available |
| लागत | अपेक्षाकृत अधिक | अपेक्षाकृत कम |
| समय | अधिक लगता है | कम समय लगता है |
| नियंत्रण | शोधकर्ता का अधिक नियंत्रण | सीमित नियंत्रण |
| उदाहरण | Field Survey | Census Report |
आँकड़ों का वर्गीकरण (Classification of Data):
एकत्रित आँकड़ों को उनकी समानता, प्रकृति, विशेषताओं अथवा उद्देश्य के आधार पर विभिन्न समूहों में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को आँकड़ों का वर्गीकरण कहते हैं।
वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य विशाल मात्रा में उपलब्ध आँकड़ों को सरल, व्यवस्थित एवं विश्लेषण योग्य बनाना है।
आँकड़ों का प्रमुख वर्गीकरण
1. गुणात्मक आँकड़े (Qualitative Data)
2. मात्रात्मक आँकड़े (Quantitative Data)
3. कालानुक्रमिक आँकड़े (Chronological Data)
4. स्थानिक/भौगोलिक आँकड़े (Spatial Data)
1. गुणात्मक आँकड़े (Qualitative Data):-
गुणात्मक आँकड़े किसी व्यक्ति, वस्तु, घटना या क्षेत्र के गुण, विशेषताओं अथवा श्रेणीगत स्वरूप को प्रदर्शित करते हैं। इनमें संख्यात्मक मापन की अपेक्षा विशेषताओं का वर्णन किया जाता है। उदाहरण के लिए लिंग, धर्म, व्यवसाय, वैवाहिक स्थिति, मिट्टी का प्रकार तथा भूमि उपयोग आदि गुणात्मक आँकड़ों के प्रमुख उदाहरण हैं।
2. मात्रात्मक आँकड़े (Quantitative Data):-
मात्रात्मक आँकड़े वे आँकड़े हैं जिन्हें संख्या के रूप में व्यक्त, मापा और सांख्यिकीय रूप से विश्लेषित किया जा सकता है। ये किसी घटना की मात्रा, संख्या, आकार, दर या परिमाण को दर्शाते हैं। भूगोल में जनसंख्या, वर्षा, तापमान, क्षेत्रफल, दूरी, ऊँचाई, उत्पादन, आय तथा साक्षरता दर आदि मात्रात्मक आँकड़ों के प्रमुख उदाहरण हैं।
इन आँकड़ों का उपयोग तालिका, ग्राफ, चार्ट एवं सांख्यिकीय विधियों के माध्यम से तुलना और विश्लेषण करने में किया जाता है। मात्रात्मक आँकड़े मुख्यतः विच्छिन्न (Discrete) और सतत (Continuous) प्रकार के होते हैं।
उदाहरण-
जनसंख्या = 50,000
वर्षा = 1,200 mm
तापमान = 25°C
साक्षरता = 72%
क्षेत्रफल = 500 km²
मात्रात्मक आँकड़ों का उपयोग सांख्यिकीय विश्लेषण में व्यापक रूप से किया जाता है।
3. कालानुक्रमिक आँकड़े (Chronological Data):-
जब आँकड़ों को समय के क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो उन्हें कालानुक्रमिक आँकड़े कहते हैं।
उदाहरण-
| वर्ष | बिहार की जनसंख्या |
|---|---|
| 1991 | 6,45,30,554 |
| 2001 | 8,29,98,509 |
| 2011 | 10,40,99,452 |
| 2021 | जनगणना उपलब्ध नहीं |
इस प्रकार के आँकड़े समय के साथ होने वाले परिवर्तन और प्रवृत्ति (Trend) के अध्ययन में उपयोगी होते हैं।
4. स्थानिक आँकड़े (Spatial Data):-
किसी घटना या विशेषता के स्थानिक वितरण और अवस्थिति से संबंधित आँकड़ों को स्थानिक आँकड़े कहते हैं।
उदाहरण- जिलावार जनसंख्या, राज्यवार साक्षरता, पंचायतवार कृषि उत्पादन, नदी का स्थान, सड़क नेटवर्क, भूमि उपयोग
Geography में Spatial Data का विशेष महत्व है क्योंकि भूगोल का मुख्य संबंध स्थान और क्षेत्रीय वितरण से है।
आँकड़ों के संकलन में सावधानियाँ:
अच्छे आँकड़े प्राप्त करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए-
✍️ आँकड़े अध्ययन के उद्देश्य से संबंधित होने चाहिए।
✍️ स्रोत विश्वसनीय होना चाहिए।
✍️ आँकड़े पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए।
✍️ Data collection method उपयुक्त होना चाहिए।
✍️ Sampling में उचित पद्धति अपनानी चाहिए।
✍️ Data में errors को न्यूनतम रखना चाहिए।
✍️ Secondary data का उपयोग करते समय source, year और methodology की जाँच करनी चाहिए।
✍️ विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों की comparability जाँची जानी चाहिए।
याद रखने की Trick
“Q–Q–T–S”
Q → Qualitative
Q → Quantitative
T → Time (Chronological)
S → Space (Spatial)
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