Data Collection and Classification (आँकड़ों का संकलन एवं वर्गीकरण) Complete Notes | Easy Explanation 2026

Data Collection and Classification (आँकड़ों का संकलन एवं वर्गीकरण) Complete Notes | Easy Explanation 2026

Data Collection and Classification

(आँकड़ों का संकलन एवं वर्गीकरण)

आँकड़ों का अर्थ (Meaning of Data):

     आँकड़े (Data) किसी विषय, घटना, क्षेत्र या जनसंख्या से संबंधित तथ्यों, सूचनाओं एवं मापों का व्यवस्थित अथवा अव्यवस्थित संकलन हैं, जिनका उपयोग किसी समस्या के अध्ययन, विश्लेषण एवं निष्कर्ष निकालने के लिए किया जाता है।

     भूगोल में जनसंख्या, वर्षा, तापमान, कृषि, उद्योग, परिवहन, भूमि उपयोग, आय, साक्षरता आदि से संबंधित सूचनाएँ आँकड़ों के रूप में प्राप्त की जाती हैं।

सरल शब्दों में:

   किसी भौगोलिक घटना से संबंधित संख्यात्मक या गुणात्मक तथ्यों के संग्रह को आँकड़े कहा जाता है। अर्थात् The collection of numerical or qualitative facts related to a geographical phenomenon is called data.

आँकड़ों का संकलन (Data Collection):

    किसी शोध या भौगोलिक अध्ययन के लिए आवश्यक सूचनाओं को विभिन्न स्रोतों से एकत्र करने की प्रक्रिया को आँकड़ों का संकलन (Data Collection) कहते हैं।

    आँकड़ों के संकलन को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है-

(1) प्राथमिक आँकड़े (Primary Data)

(2) द्वितीयक आँकड़े (Secondary Data)

(1) प्राथमिक आँकड़े (Primary Data):

    शोधकर्ता द्वारा स्वयं पहली बार किसी निर्धारित उद्देश्य के लिए प्रत्यक्ष रूप से एकत्र किए गए आँकड़े प्राथमिक आँकड़े कहलाते हैं।

जैसे- यदि कोई शोधकर्ता किसी गाँव में जाकर परिवारों से उनकी आय, शिक्षा, व्यवसाय एवं परिवार के आकार की जानकारी स्वयं प्राप्त करता है, तो ये प्राथमिक आँकड़े होंगे।

प्राथमिक आँकड़ों के प्रमुख स्रोत:

1. प्रत्यक्ष अवलोकन (Direct Observation):-

    प्रत्यक्ष अवलोकन में शोधकर्ता स्वयं अध्ययन क्षेत्र में जाकर विभिन्न घटनाओं, परिस्थितियों और प्रक्रियाओं का निरीक्षण करता है। इसके माध्यम से वास्तविक एवं प्रत्यक्ष सूचनाएँ प्राप्त होती हैं। यह विधि सामाजिक, आर्थिक तथा भौगोलिक परिस्थितियों के क्षेत्रीय अध्ययन में विशेष रूप से उपयोगी होती है।

2. साक्षात्कार (Interview):-

    साक्षात्कार प्राथमिक आँकड़े एकत्र करने की महत्वपूर्ण विधि है, जिसमें शोधकर्ता उत्तरदाताओं से प्रत्यक्ष बातचीत करके आवश्यक सूचनाएँ प्राप्त करता है। इसमें पूर्व निर्धारित या खुले प्रश्न पूछे जा सकते हैं। साक्षात्कार व्यक्तिगत, समूह आधारित, संरचित अथवा असंरचित प्रकृति का हो सकता है।

3. अनुसूची (Schedule):-

   अनुसूची प्रश्नों की एक पूर्व निर्धारित एवं व्यवस्थित सूची होती है, जिसके आधार पर enumerator (गणनाकर्ता/अन्वेषक) उत्तरदाताओं से प्रश्न पूछता है और उनके उत्तर स्वयं अनुसूची में दर्ज करता है। यह विधि उन परिस्थितियों में उपयोगी है जहाँ उत्तरदाता स्वयं प्रश्नावली भरने में सक्षम नहीं होते हैं।

4. प्रश्नावली (Questionnaire):-

    प्रश्नावली प्रश्नों की एक व्यवस्थित सूची होती है, जिसे उत्तरदाताओं को उपलब्ध कराया जाता है। उत्तरदाता प्रश्नों को समझकर उनके उत्तर स्वयं दर्ज करता है। यह विधि बड़े क्षेत्र में कम समय में जानकारी एकत्र करने के लिए उपयोगी है तथा डाक, ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से भी संचालित की जा सकती है।

5. क्षेत्र सर्वेक्षण (Field Survey):-

    क्षेत्र सर्वेक्षण में शोधकर्ता अध्ययन क्षेत्र में जाकर सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा भौगोलिक परिस्थितियों से संबंधित प्राथमिक सूचनाएँ प्रत्यक्ष रूप से एकत्र करता है। इसमें अवलोकन, साक्षात्कार, मापन तथा प्रश्नावली जैसी विभिन्न विधियों का उपयोग किया जा सकता है। भूगोल में इसका विशेष महत्व है।

6. मापन (Measurement):-

    मापन के अंतर्गत अध्ययन से संबंधित भौगोलिक विशेषताओं और घटनाओं का उपकरणों अथवा निर्धारित तकनीकों की सहायता से प्रत्यक्ष मापन किया जाता है। इसके द्वारा तापमान, वर्षा, दूरी, ऊँचाई, ढाल आदि का मात्रात्मक आँकड़ा प्राप्त किया जाता है। यह वैज्ञानिक एवं वस्तुनिष्ठ अध्ययन में अत्यंत उपयोगी है।

2. द्वितीयक आँकड़े (Secondary Data):

    ऐसे आँकड़े जो पहले से किसी अन्य व्यक्ति, संस्था या संगठन द्वारा किसी उद्देश्य से एकत्र किए जा चुके हों और बाद में शोधकर्ता द्वारा अपने अध्ययन में उपयोग किए जाएँ, द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं।

उदाहरण- Census Reports, Statistical Abstracts, Government Reports, Economic Survey, Research Papers, Books, Journals, ewspapers, Websites, Institutional Reports।

द्वितीयक आँकड़ों के प्रमुख स्रोत:

(A) प्रकाशित स्रोत (Published Sources):-

      प्रकाशित स्रोत (Published Sources) वे स्रोत हैं जिनमें आँकड़े या सूचनाएँ किसी सरकार, संस्था, संगठन, शोधकर्ता या प्रकाशक द्वारा औपचारिक रूप से प्रकाशित की जाती हैं और जिन्हें शोधकर्ता अपने अध्ययन में उपयोग कर सकता है। ये द्वितीयक आँकड़ों (Secondary Data) के प्रमुख स्रोत हैं।

जैसे-  जनगणना रिपोर्ट, सरकारी प्रकाशन, शोध पत्र एवं शोध प्रबंध, पुस्तकें एवं पत्रिकाएँ, आर्थिक सर्वेक्षण, Statistical Reports, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट आदि।

(B) अप्रकाशित स्रोत (Unpublished Sources):-

      अप्रकाशित स्रोत (Unpublished Sources) का मतलब है ऐसे आँकड़े या रिकॉर्ड जो सार्वजनिक रूप से प्रकाशित नहीं किए गए हैं, लेकिन किसी व्यक्ति, संस्था, कार्यालय या संगठन के पास उपलब्ध हैं और शोध में उपयोग किए जा सकते हैं। ये सामान्यतः द्वितीयक आँकड़ों (Secondary Data) के स्रोत माने जाते हैं।

जैसे- कार्यालयीय अभिलेख, संस्थागत रिकॉर्ड, निजी दस्तावेज, शोधकर्ता के अप्रकाशित सर्वेक्षण रिकॉर्ड, आंतरिक रिपोर्ट एवं Memorandum आदि।

प्राथमिक एवं द्वितीयक आँकड़ों में अंतर

आधार प्राथमिक आँकड़े द्वितीयक आँकड़े
संकलन स्वयं शोधकर्ता द्वारा पहले से किसी अन्य द्वारा संकलित
उद्देश्य वर्तमान शोध के उद्देश्य के अनुसार किसी पूर्व उद्देश्य के लिए
प्रकृति Original Already available
लागत अपेक्षाकृत अधिक अपेक्षाकृत कम
समय अधिक लगता है कम समय लगता है
नियंत्रण शोधकर्ता का अधिक नियंत्रण सीमित नियंत्रण
उदाहरण Field Survey Census Report

आँकड़ों का वर्गीकरण (Classification of Data):

    एकत्रित आँकड़ों को उनकी समानता, प्रकृति, विशेषताओं अथवा उद्देश्य के आधार पर विभिन्न समूहों में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को आँकड़ों का वर्गीकरण कहते हैं।

    वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य विशाल मात्रा में उपलब्ध आँकड़ों को सरल, व्यवस्थित एवं विश्लेषण योग्य बनाना है।

आँकड़ों का प्रमुख वर्गीकरण

1. गुणात्मक आँकड़े (Qualitative Data)

2. मात्रात्मक आँकड़े (Quantitative Data)

3. कालानुक्रमिक आँकड़े (Chronological Data)

4. स्थानिक/भौगोलिक आँकड़े (Spatial Data)

1. गुणात्मक आँकड़े (Qualitative Data):-

      गुणात्मक आँकड़े किसी व्यक्ति, वस्तु, घटना या क्षेत्र के गुण, विशेषताओं अथवा श्रेणीगत स्वरूप को प्रदर्शित करते हैं। इनमें संख्यात्मक मापन की अपेक्षा विशेषताओं का वर्णन किया जाता है। उदाहरण के लिए लिंग, धर्म, व्यवसाय, वैवाहिक स्थिति, मिट्टी का प्रकार तथा भूमि उपयोग आदि गुणात्मक आँकड़ों के प्रमुख उदाहरण हैं।

2. मात्रात्मक आँकड़े (Quantitative Data):-

      मात्रात्मक आँकड़े वे आँकड़े हैं जिन्हें संख्या के रूप में व्यक्त, मापा और सांख्यिकीय रूप से विश्लेषित किया जा सकता है। ये किसी घटना की मात्रा, संख्या, आकार, दर या परिमाण को दर्शाते हैं। भूगोल में जनसंख्या, वर्षा, तापमान, क्षेत्रफल, दूरी, ऊँचाई, उत्पादन, आय तथा साक्षरता दर आदि मात्रात्मक आँकड़ों के प्रमुख उदाहरण हैं।

     इन आँकड़ों का उपयोग तालिका, ग्राफ, चार्ट एवं सांख्यिकीय विधियों के माध्यम से तुलना और विश्लेषण करने में किया जाता है। मात्रात्मक आँकड़े मुख्यतः विच्छिन्न (Discrete) और सतत (Continuous) प्रकार के होते हैं।

उदाहरण-

जनसंख्या = 50,000

वर्षा = 1,200 mm

तापमान = 25°C

साक्षरता = 72%

क्षेत्रफल = 500 km²

    मात्रात्मक आँकड़ों का उपयोग सांख्यिकीय विश्लेषण में व्यापक रूप से किया जाता है।

3. कालानुक्रमिक आँकड़े (Chronological Data):-

      जब आँकड़ों को समय के क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो उन्हें कालानुक्रमिक आँकड़े कहते हैं।

उदाहरण-

वर्ष बिहार की जनसंख्या
1991 6,45,30,554
2001 8,29,98,509
2011 10,40,99,452
2021 जनगणना उपलब्ध नहीं

     इस प्रकार के आँकड़े समय के साथ होने वाले परिवर्तन और प्रवृत्ति (Trend) के अध्ययन में उपयोगी होते हैं।

4. स्थानिक आँकड़े (Spatial Data):-

      किसी घटना या विशेषता के स्थानिक वितरण और अवस्थिति से संबंधित आँकड़ों को स्थानिक आँकड़े कहते हैं।

उदाहरण- जिलावार जनसंख्या, राज्यवार साक्षरता, पंचायतवार कृषि उत्पादन, नदी का स्थान, सड़क नेटवर्क, भूमि उपयोग

    Geography में Spatial Data का विशेष महत्व है क्योंकि भूगोल का मुख्य संबंध स्थान और क्षेत्रीय वितरण से है।

आँकड़ों के संकलन में सावधानियाँ:

    अच्छे आँकड़े प्राप्त करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए-

✍️ आँकड़े अध्ययन के उद्देश्य से संबंधित होने चाहिए।

✍️ स्रोत विश्वसनीय होना चाहिए।

✍️ आँकड़े पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए।

✍️ Data collection method उपयुक्त होना चाहिए।

✍️ Sampling में उचित पद्धति अपनानी चाहिए।

✍️ Data में errors को न्यूनतम रखना चाहिए।

✍️ Secondary data का उपयोग करते समय source, year और methodology की जाँच करनी चाहिए।

✍️ विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों की comparability जाँची जानी चाहिए।

याद रखने की Trick

“Q–Q–T–S”

Q → Qualitative
Q → Quantitative
T → Time (Chronological)
S → Space (Spatial)

Dr. Amar Kumar

Website: https://www.geographynotespdf.com

I ‘Dr. Amar Kumar’ am working as an Assistant Professor in The Department Of Geography in PPU, Patna (Bihar) India. I want to help the students and study lovers across the world who face difficulties to gather the information and knowledge about Geography. I think my latest UNIQUE GEOGRAPHY NOTES are more useful for them and I publish all types of notes regularly.

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