Best Complete Levels of Teaching (शिक्षण के स्तर) Notes in HindiUGC NET/JRF Paper-I 2026 |
UGC NET/JRF Paper-I | Unit-1: Teaching Aptitude
Complete Hindi Notes (PYQ Oriented)
Levels of Teaching (शिक्षण के स्तर) का परिचय
शिक्षण के स्तर (Levels of Teaching) से आशय शिक्षण प्रक्रिया की उस गहराई (Depth), गुणवत्ता (Quality) तथा उद्देश्य (Objectives) से है, जिसके आधार पर विद्यार्थियों में सीखने (Learning) के विभिन्न स्तरों का विकास किया जाता है। शिक्षण केवल तथ्यों को याद कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समझ (Understanding), चिंतन (Thinking), विश्लेषण (Analysis) तथा समस्या समाधान (Problem Solving) जैसी उच्च स्तरीय क्षमताओं का विकास भी करता है।
Morris L. Bigge (1964) ने शिक्षण को तीन प्रमुख स्तरों में विभाजित किया है-
1. स्मृति स्तर (Memory Level of Teaching – MLT)
2. बोध स्तर (Understanding Level of Teaching – ULT)
3. चिंतन स्तर (Reflective Level of Teaching – RLT)
Note- UGC NET में इसी वर्गीकरण से सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं।
Levels of Teaching की परिभाषा (Definition):
शिक्षण का स्तर उस अवस्था को दर्शाता है, जहाँ शिक्षक विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता (Intellectual Ability) एवं अधिगम के स्तर के अनुसार शिक्षण प्रक्रिया का संचालन करता है।
Levels of Teaching का उद्देश्य (Objectives)
✍️ ज्ञान प्रदान करना।
✍️ समझ विकसित करना।
✍️ तार्किक एवं आलोचनात्मक चिंतन विकसित करना।
✍️ समस्या समाधान क्षमता बढ़ाना।
✍️ रचनात्मकता एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना।
शिक्षण के तीन प्रमुख स्तर (Three Levels of Teaching)
1. स्मृति स्तर का शिक्षण (Memory Level of Teaching – MLT)
प्रतिपादक (Propounded by)- Johann Friedrich Herbart (हरबर्ट)
स्मृति स्तर का शिक्षण सबसे प्रारंभिक एवं निम्न स्तर (Lowest Level) का शिक्षण है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को तथ्यों (Facts), परिभाषाओं (Definitions), सूत्रों (Formulae) एवं नियमों (Rules) को याद (Memorize) कराना होता है।
इस स्तर पर विद्यार्थी केवल जानकारी को याद करता है, उसके अर्थ या उपयोग पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता।
मुख्य विशेषताएँ (Characteristics)
✍️ Teacher-Centred (शिक्षक-केंद्रित)
✍️ Rote Learning (रटने पर बल)
✍️ तथ्य एवं सूचनाओं का स्मरण
✍️ प्रश्नोत्तर एवं व्याख्यान विधि
✍️ कम बौद्धिक सक्रियता
✍️ निम्न स्तर का शिक्षण
उद्देश्य
✍️ तथ्यों को याद कराना
✍️ परीक्षा की तैयारी
✍️ आधारभूत ज्ञान देना
लाभ
✍️ प्रारंभिक ज्ञान प्राप्त होता है।
✍️ तथ्यों एवं सूत्रों को शीघ्र याद कराया जा सकता है।
✍️ प्राथमिक कक्षाओं के लिए उपयोगी।
सीमाएँ
✍️ रचनात्मकता का विकास नहीं होता।
✍️ आलोचनात्मक चिंतन विकसित नहीं होता।
✍️ विद्यार्थी निष्क्रिय रहता है।
उदाहरण
भारत की राजधानी क्या है?
(A) पटना
(B) नई दिल्ली
(C) लखनऊ
(D) जयपुर
2. बोध स्तर का शिक्षण (Understanding Level of Teaching – ULT)
प्रतिपादक- Morris L. Bigge
इस स्तर पर विद्यार्थी केवल तथ्यों को याद नहीं करता, बल्कि उनके अर्थ (Meaning), कारण (Reason) एवं उपयोग (Application) को भी समझता है।
यह शिक्षण स्मृति स्तर से उच्च होता है।
मुख्य विशेषताएँ
✍️ Learner-Centred
✍️ Concept Learning
✍️ Explanation एवं Discussion
✍️ सक्रिय सहभागिता
✍️ समझ एवं अनुप्रयोग पर बल
उद्देश्य
✍️ अवधारणाओं की समझ विकसित करना।
✍️ तर्क शक्ति बढ़ाना।
✍️ ज्ञान का अनुप्रयोग करना।
लाभ
✍️ स्थायी अधिगम।
✍️ विश्लेषण क्षमता विकसित होती है।
✍️ सीखना अधिक प्रभावी होता है।
सीमाएँ
✍️ अधिक समय लगता है।
✍️ कुशल शिक्षक की आवश्यकता होती है।
उदाहरण-
मानसून भारत में वर्षा क्यों लाता है?
विद्यार्थी कारण सहित उत्तर देता है।
3. चिंतन स्तर का शिक्षण (Reflective Level of Teaching – RLT)
प्रतिपादक- Morris L. Bigge
Reflective Level की अवधारणा का विकास John Dewey के चिंतनवादी दर्शन (Reflective Thinking) से भी प्रभावित माना जाता है।
यह शिक्षण का सर्वोच्च स्तर (Highest Level) है।
इसमें विद्यार्थी समस्या का विश्लेषण करता है, समाधान खोजता है तथा नए विचार विकसित करता है।
मुख्य विशेषताएँ
✍️ Student-Centred
✍️ Problem Solving
✍️ Critical Thinking
✍️ Creative Thinking
✍️ Independent Learning
✍️ Research Oriented
उद्देश्य
✍️ आलोचनात्मक चिंतन विकसित करना।
✍️ निर्णय क्षमता बढ़ाना।
✍️ अनुसंधान कौशल विकसित करना।
✍️ नवीन विचार उत्पन्न करना।
लाभ
✍️ रचनात्मकता बढ़ती है।
✍️ समस्या समाधान क्षमता विकसित होती है।
✍️ शोध एवं नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
सीमाएँ
✍️ समय अधिक लगता है।
✍️ सभी विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त नहीं।
✍️ अनुभवी शिक्षक की आवश्यकता होती है।
उदाहरण
“जलवायु परिवर्तन का भारत की कृषि पर क्या प्रभाव पड़ेगा? अपने सुझाव दीजिए।”
Comparison of Levels of Teaching
| आधार | Memory Level | Understanding Level | Reflective Level |
|---|---|---|---|
| प्रतिपादक | Herbart | Morris L. Bigge | Morris L. Bigge |
| स्तर | निम्न | मध्यम | उच्च |
| केंद्र | शिक्षक | शिक्षक + विद्यार्थी | विद्यार्थी |
| उद्देश्य | याद करना | समझना | चिंतन एवं समाधान |
| अधिगम | Rote Learning | Concept Learning | Problem Solving |
| सहभागिता | कम | मध्यम | अधिक |
| सोच | न्यूनतम | तार्किक | आलोचनात्मक एवं रचनात्मक |
| मूल्यांकन | Recall | Understanding | Analysis एवं Evaluation |
M → U → R
Memory → Understanding → Reflective
याद करना → समझना → चिंतन करना
Bloom’s Taxonomy एवं Teaching Levels
| Bloom’s Level | Teaching Level |
| Remember | Memory Level |
| Understand | Understanding Level |
| Apply | Understanding Level |
| Analyze | Reflective Level |
| Evaluate | Reflective Level |
| Create | Reflective Level |
UGC NET/JRF Important Facts
- Memory Level = Herbart
- Understanding Level = Morris L. Bigge
- Reflective Level = Highest Level
- Teacher-Centred = Memory Level
- Learner-Centred = Understanding एवं Reflective
- Problem Solving = Reflective Level
- Critical Thinking = Reflective Level
- Rote Learning = Memory Level
Teaching Levels का महत्व (Importance)
1. शिक्षण को व्यवस्थित बनाता है।
2. विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता का विकास करता है।
3. आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देता है।
4. रचनात्मकता विकसित करता है।
5. अधिगम को स्थायी एवं प्रभावी बनाता है।
6. शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
7. समस्या समाधान क्षमता बढ़ाता है।
8. आधुनिक शिक्षा प्रणाली का आधार है।
Quick Revision (1 Minute Notes)
- Herbart → Memory Level
- Morris L. Bigge → Understanding & Reflective Level
- Lowest Level → Memory
- Highest Level → Reflective
- Teacher-Centred → Memory
- Student-Centred → Reflective
- Rote Learning → Memory
- Critical Thinking → Reflective
- Problem Solving → Reflective
- Most Asked Topic in UGC NET Paper-I
Exam Tip: UGC NET/JRF में Levels of Teaching से लगभग हर वर्ष 1–2 प्रश्न पूछे जाते हैं, विशेषकर Memory, Understanding और Reflective Level, उनके प्रतिपादक (Herbart, Morris L. Bigge) तथा विशेषताओं पर।